NGT की ओर से नदियों में गाद निकालने पर रोक से नाराज मंत्री गोयल; बोले राज्य को सुने बिना फैसला ठीक नहीं

पंजाब के जल स्रोत माइनिंग विभाग के मंत्री ने आज पंजाब 1की नदियों में चल रही डिसिल्टिंग को लेकर सरकार को सुने बिना रोक लगाने पर नाराजगी जताई है। साथ ही उन्होंने ब्यास नदी के रामसर साइट पर वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1872 के तहत रोक लगाने पर भी नाराजगी जताई।

मंत्री बरिंद्र कुमार गोयल ने विधायक दलबीर सिंह के सवाल पर जवाब देते हुए जय नाराजगी दिखाई है। उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से 2025 की बाढ़ के बाद 16 अक्टूबर को ही अधिसूचना जारी कर दी थी जिसमें 85 सीटों को डिसिल्टिंग नोटिफाई किया गया था इनमें से ब्यास दरिया की 29 साइट भी शामिल थीं।

विभाग ने शुरू की इसमें डीपीआर तैयार करना और भारत सरकार के निर्देशों के अनुसार बनाई गई तकनीकी सड़क कमेटी से इसे मंजूर करवाना भी शामिल है लेकिन ब्यास दरिया में रामसर साइट पर भारत सरकार के पर्यावरण और वन मंत्रालय ने रोक लगा रखी है जिस कारण हम उसमें से एक चम्मच भर रेत भी नहीं निकाल सकते।

दूसरी साइट पर शुरू हुई डिसिल्टिंग प्रक्रिया

उन्होंने कहा दूसरी साइट पर हमने डिसिल्टिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी है और भारत सरकार के अनुसार कंसलटेंट भी नियुक्त कर दिए हैं। वहां से मंजूरी मिलने के बाद ही कोई काम किया जा सकेगा लेकिन मुझे इस बात पर दुख है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने रावी और सतलुज पर डिसिल्टिंग को लेकर रोक लगा दी है।

उन्होंने कहा कि यह ठीक है कि भारी रेत आने के कारण नदी का बेड काफी ऊंचा हो गया है जिस कारण पानी अपना वहन बदल गया है। इससे खेतों को नुकसान भी हो सकता है । उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को सुने बिना इस तरह का फैसला लेना कतई सही नहीं है। बरिंद्र गोयल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने पंजाब को डूबने के लिए छोड़ दिया है।

केंद्र सरकार को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। पहले कह रहे थे कि राज्य सरकार की ओर से डिसिल्टिंग ना करवाए जाने के कारण भी बाढ़ आई है। अब जब हमने डिसिल्टिंग का काम शुरू किया है तो उसे पर रोक लगाई जा रही है। मंत्री ने कहा कि हम हर हफ्ते और रोक हटाने के लिए बैठक कर रहे हैं और केंद्र सरकार से लगातार संपर्क में है।

चीमा बोले- ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था की जाएगी

प्रश्न काल के दौरान एक अन्य सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री हरपाल चीमा ने शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस को आश्वासन दिया कि वह स्कूलों को अपग्रेड करने की बजाय आसपास के गांव से बच्चों को स्कूल तक ले जाने के लिए ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था करने वाली योजना पर कम करें। पंजाब सरकार इसके लिए फंड की कोई कमी नहीं आने देगी।

चीमा ने कहा कि जब इस योजना संबंधी हरजोत बैंस उनके सामने पिछले समय में प्रोजेक्ट लेकर आए थे तब उन्हें लग रहा था कि पता नहीं कितना पैसा खर्च होगा और इसके परिणाम भी कैसे रहेंगे लेकिन मुझे इस बात की खुशी है कि हमारा खर्चा भी कम हुआ है और इसके रिजल्ट भी बहुत अच्छे आ रहे हैं।

उन्होंने बताया कि उनके हलके छाजली के स्कूल में ऐसा किया जा रहा है और हमने वहां पर एस्ट्रोटर्फ भी लगा दी है जिससे 14- 14 साल की बच्चियां पंजाब की स्टेट टीम में सेलेक्ट हो गई है । उन्होंने कहा कि स्कूलों को अपग्रेड करने की मांग लगभग सभी विधायक कर रहे हैं पर ऐसा करने से अतिरिक्त पोस्ट देनी, इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने आदि पर बहुत खर्च होता है।

हरपाल सिंह चीमा विधायक सुखविंदर सिंह सरकारिया की ओर से सीमावर्ती इलाके के स्कूल को अपग्रेड करने की मांग का जवाब दे रहे थे।
सबसे पहले शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि स्कूलों को अपग्रेड करना समस्या का समाधान नहीं है क्योंकि इसमें काफी ज्यादा खर्च होता है। इससे पहले हमने यह योजना शुरू की थी कि सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में बच्चों को ले जाने के लिए ट्रांसपोर्ट सिस्टम शुरू की थी जो काफी कामयाब रही है।

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