आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने पिछली कांग्रेस और अकाली-भाजपा सरकारों पर ग्राउंडवाटर के गंभीर मुद्दे को नज़रअंदाज़ करने का आरोप लगाया और कहा कि एक्सपर्ट्स लंबे समय से चेतावनी दे रहे थे कि पंजाब का ग्राउंडवाटर बहुत तेज़ी से कम हो रहा है, लेकिन इन सरकारों ने कभी इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया।
उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने एक साज़िश के तहत हमारी नहरों, नदियों और डैम को गायब होने दिया ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी न बचे। जिन लोगों ने पंजाब में ‘पानी के रक्षकों’ के बड़े-बड़े बोर्ड लगाए थे, वे असल में ‘पानी के लुटेरे’ निकले।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पन्नू ने कहा कि जब पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने एसवाईएल का प्रस्ताव रखा था, तो कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उन्हें सोने का सिक्का और चांदी की थैली दी थी। इससे पहले भी बादल सरकार के दौरान एसवाईएल को मंज़ूरी मिली थी, जिसके लिए हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी देवी लाल ने हरियाणा विधानसभा में बादल साहब का शुक्रिया अदा किया था। इतना ही नहीं, नहरों की ऊंचाई भी बढ़ाई गई ताकि पानी बादलों के निजी फार्महाउस तक पहुंच सके।
उन्होंने आगे कहा कि 2022 में जैसे ही मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की सरकार सत्ता में आई, नहरी पानी को प्राथमिकता के आधार पर फिर से शुरू करने के आदेश दिए गए। जब मान सरकार आई, तो पंजाब में सिर्फ़ 21-22 प्रतिशत नहरी पानी इस्तेमाल होता था, जो आज बढ़कर 88 प्रतिशत के करीब हो गया है। ज़मीन के नीचे दबी दरारों को ढूंढकर और 14,000 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाकर, आज किसानों को उनकी फसलों के लिए मिनरल से भरपूर नहरी पानी दिया जा रहा है। इससे ज़मीन से पानी निकालना कम हुआ है और गांवों में बोरवेल में ज़्यादा ‘टोटा’ डालने की समस्या खत्म हो गई है और पानी का लेवल सुधरना शुरू हुआ है।
विधानसभा के हाल के सेशन का ज़िक्र करते हुए बलतेज पन्नू ने कहा कि सेशन के आखिरी दिन पानी से जुड़े ऐतिहासिक प्रस्ताव लाए गए, लेकिन कांग्रेस ने जानबूझकर ड्रामा किया और विधानसभा से भाग गई। वे सिर्फ़ वोट चोरी के मुद्दे पर साइड ले रहे थे, लेकिन पानी के मुद्दे पर भी वे गायब थे। सेशन खत्म हुए कई दिन बीत गए हैं, लेकिन कांग्रेस, अकाली दल बादल या दूसरी पार्टियों की तरफ से इस पर कोई रिएक्शन नहीं आया है, जबकि भाजपा पहले से ही पंजाब का हर हक छीनना चाहती है, इसीलिए वह पूरी तरह चुप है।
बलतेज पन्नू ने स्पष्ट किया कि विधानसभा में पास हुए प्रस्तावों में मांग की गई है कि केंद्र सरकार 1994 के समझौते का रिव्यू करे और पंजाब को यमुना के पानी में उसका जायज और ऐतिहासिक हिस्सा दे और अगर जरूरी हो तो वॉटर ट्रिब्यूनल या सुप्रीम कोर्ट के जरिए इस मसले को सुलझाए। इसके अलावा, नदी किनारे का राज्य होने के नाते, पंजाब की सीमा में आने वाले रोपड़, हरिके और फिरोजपुर हेडवर्क्स का मैनेजमेंट और मेंटेनेंस पूरी तरह से पंजाब सरकार के अधीन रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश और विदेश में रहने वाला पंजाबी समुदाय इन प्रस्तावों की अहमियत समझता है और इसलिए पंजाब के पानी को लूटने वालों को कभी माफ नहीं करेगा।
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