दिल्ली हाईकोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के मामले में कहा है कि सरकार की कार्रवाई मनमानी नहीं है। न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्ना ने सुनवाई के दौरान कहा कि वांगचुक चिकित्सा प्रक्रिया में सहयोग करेंगे और उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर अंतिम फैसला मेडिकल टीम ही चिकित्सा प्रोटोकॉल के अनुसार करेगी। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि उनकी मेडिकल रिपोर्ट परिवार के सदस्यों के साथ साझा की जाएगी।
यह सुनवाई सोनम वांगचुक की पार्टनर गीतांजलि जे. आंगमो की उस याचिका पर हुई, जिसमें उन्हें सफदरजंग अस्पताल से किसी निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की मांग की गई थी।
इस बीच, सोनम वांगचुक ने अपने समर्थकों से 20 जुलाई को संसद तक मार्च में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने अपनी पत्नी के माध्यम से जारी संदेश में इस आंदोलन को “भारत का दूसरा स्वतंत्रता आंदोलन” बताया और प्रदर्शन को सफल बनाने का आह्वान किया।
वहीं, प्रदर्शन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि कुछ लोग प्रदर्शन स्थल में घुसकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने समर्थकों से ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें अलग रखने की अपील की।
उधर, दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर चल रही गतिविधियों पर कड़ी निगरानी बढ़ा दी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को न तो जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी रखने की अनुमति मिली है और न ही संसद मार्च के लिए कोई औपचारिक अनुमति ली गई है।
गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी पिछले 29 दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रही है। पार्टी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाने की मांग कर रही है। वहीं, अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे अभिजीत दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की भी मांग करते हुए कहा कि 20 जुलाई को संसद मार्च हर हाल में निकाला जाएगा।