अकबर की फौज के छक्के छुड़ाने वाली वीरांगना "रानी दुर्गावती" की जयंती
1524 में उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में चंदेल परिवार में जन्मी दुर्गावती का जन्म दुर्गा अष्टमी के दिन हुआ था इसी कारण उनका नाम दुर्गावती पड़ा
राजा कीर्तिसिंह चंदेल की एकलौती संतान थी रानी दुर्गावती बचपन से ही इन्हें घुड़सवारी, तलवारबाजी, तीरंदाजी जैसी युद्ध कलाओं की शिक्षा मिली
18 साल की उम्र में रानी दुर्गावती का ब्याह गोंड राजवंश के राजा संग्राम शाह के बड़े बेटे दलपत शाह से हो हुआ
1550 में उनके पति का निधन हो गया, 1562 में जब गोंड राज्य पर हमला हुआ तो रानी ने अपने बेटे के साथ 3 बार मुगल सेना का सामना किया
मुगलों के हजारों सैनिकों के सामने केवल 500 सैनिक लेकर भिड गई थी रानी दुर्गावती पहले युद्ध में रानी की विजय हुई थी
कम सैनिक होने के बाद भी रानी ने वीरता से युद्ध लड़ा और मुग़ल सैनिकों के दांत खट्टे कर दिए थे
अपनी प्रजा और संस्कृति के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाली वीरांगना रानी को सत सत नमन
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