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	<title>WorldPolitics &#8211; Trends Topic</title>
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	<title>WorldPolitics &#8211; Trends Topic</title>
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	<item>
		<title>America के Tariff Decision पर भड़के S. Jaishankar, बोले – “बहुत हैरान करने वाली बात है”</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 22 Aug 2025 03:49:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ (tariffs) पर कड़ा सवाल उठाया है। जयशंकर ने कहा कि वॉशिंगटन का यह रवैया <em>“बहुत perplexing यानी हैरान करने वाला”</em> है, क्योंकि चीन और यूरोपियन यूनियन (EU) कहीं ज़्यादा मात्रा में रूस से तेल और गैस खरीदते हैं, लेकिन आलोचना और सज़ा सिर्फ भारत को मिल रही है।

<strong>भारत की दलील </strong><strong>– “हम सबसे बड़े खरीदार नहीं”</strong>

जयशंकर ने साफ कहा कि भारत रूस से तेल खरीदने वाला सबसे बड़ा खरीदार नहीं है। उन्होंने उदाहरण दिया कि –
<ul>
 	<li><strong>चीन</strong> रूस से सबसे ज़्यादा तेल खरीदता है।</li>
 	<li><strong>यूरोपियन यूनियन (</strong><strong>EU)</strong> रूसी गैस का सबसे बड़ा इम्पोर्टर है।</li>
 	<li>भारत का रूस के साथ जो ट्रेड (trade) बढ़ा है, वह भी दुनिया में सबसे ज़्यादा नहीं है।</li>
</ul>
इसके बावजूद केवल भारत पर अमेरिका ने 25% <em>penalty tariff</em> लगाकर कुल टैरिफ 50% तक कर दिया है।

<strong>“हम अमेरिका से भी तेल खरीदते हैं”</strong>

जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत सिर्फ रूस पर निर्भर नहीं है। भारत अमेरिका से भी लगातार तेल खरीद रहा है। ऐसे में यह और भी अजीब है कि वॉशिंगटन सिर्फ भारत को टारगेट कर रहा है। उन्होंने कहा – <em>“जब हमें खुद अमेरिका ने कहा था कि ग्लोबल एनर्जी मार्केट को स्टेबल रखने के लिए हमें रूसी तेल खरीदना चाहिए, तो अब अचानक सज़ा क्यों दी जा रही है?”</em>

<strong>अमेरिका का फैसला और असर</strong>

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने 1 अगस्त 2025 से भारतीय सामानों पर पहले ही 25% <em>reciprocal tariff</em> लगाया था। इसके बाद रूस से तेल खरीदने की वजह से 25% का <em>penalty tariff</em> और जोड़ दिया गया। यानी अब अमेरिका में भारत से जाने वाले कई प्रोडक्ट्स पर <strong>50% तक टैक्स</strong> देना होगा।

इसका सीधा असर भारत के उन सेक्टर्स पर पड़ सकता है जो अमेरिका को ज्यादा एक्सपोर्ट करते हैं – जैसे <strong>फार्मा (</strong><strong>pharma), टेक्सटाइल (textiles), एग्रीकल्चर (agriculture)</strong> और आईटी सर्विसेज़।

<strong>भारत</strong><strong>–रूस रिश्तों पर जोर</strong>

मॉस्को यात्रा के दौरान जयशंकर ने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात की। दोनों देशों ने कहा कि भारत-रूस रिश्ते <strong>द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से सबसे स्थिर</strong> रहे हैं।
<ul>
 	<li>रूस ने भारत को आर्कटिक और फार ईस्ट में energy प्रोजेक्ट्स में पार्टनर बनने का न्योता दिया।</li>
 	<li>भारत ने रूस से कहा कि अब ट्रेड सिर्फ तेल और डिफेंस तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि <strong>फार्मा</strong><strong>, कपड़े, कृषि और टेक्नोलॉजी</strong> सेक्टर में भी बढ़ाया जाएगा।</li>
</ul>
<strong>भू-राजनीतिक असर (</strong><strong>Geopolitical Impact)</strong>

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का यह कदम भारत को रूस और चीन के और करीब धकेल सकता है। इससे अमेरिका–भारत रिश्तों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है, खासकर <strong>डिफेंस कोऑपरेशन</strong> और <strong>क्वाड (</strong><strong>Quad) जैसी साझेदारियों</strong> में।

भारत का कहना है कि उसकी energy policy <strong>diverse और practical</strong> है। यानी भारत हर उस देश से तेल और गैस खरीदता है जो सस्ती और भरोसेमंद सप्लाई दे सके। वहीं, अमेरिका का नया टैरिफ फैसला न सिर्फ भारत–अमेरिका ट्रेड को झटका देगा, बल्कि दोनों देशों के रिश्तों में भी तनाव पैदा करेगा।

यह मामला आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति और भारत की foreign policy का बड़ा मुद्दा बनने वाला है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ (tariffs) पर कड़ा सवाल उठाया है। जयशंकर ने कहा कि वॉशिंगटन का यह रवैया <em>“बहुत perplexing यानी हैरान करने वाला”</em> है, क्योंकि चीन और यूरोपियन यूनियन (EU) कहीं ज़्यादा मात्रा में रूस से तेल और गैस खरीदते हैं, लेकिन आलोचना और सज़ा सिर्फ भारत को मिल रही है।

<strong>भारत की दलील </strong><strong>– “हम सबसे बड़े खरीदार नहीं”</strong>

जयशंकर ने साफ कहा कि भारत रूस से तेल खरीदने वाला सबसे बड़ा खरीदार नहीं है। उन्होंने उदाहरण दिया कि –
<ul>
 	<li><strong>चीन</strong> रूस से सबसे ज़्यादा तेल खरीदता है।</li>
 	<li><strong>यूरोपियन यूनियन (</strong><strong>EU)</strong> रूसी गैस का सबसे बड़ा इम्पोर्टर है।</li>
 	<li>भारत का रूस के साथ जो ट्रेड (trade) बढ़ा है, वह भी दुनिया में सबसे ज़्यादा नहीं है।</li>
</ul>
इसके बावजूद केवल भारत पर अमेरिका ने 25% <em>penalty tariff</em> लगाकर कुल टैरिफ 50% तक कर दिया है।

<strong>“हम अमेरिका से भी तेल खरीदते हैं”</strong>

जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत सिर्फ रूस पर निर्भर नहीं है। भारत अमेरिका से भी लगातार तेल खरीद रहा है। ऐसे में यह और भी अजीब है कि वॉशिंगटन सिर्फ भारत को टारगेट कर रहा है। उन्होंने कहा – <em>“जब हमें खुद अमेरिका ने कहा था कि ग्लोबल एनर्जी मार्केट को स्टेबल रखने के लिए हमें रूसी तेल खरीदना चाहिए, तो अब अचानक सज़ा क्यों दी जा रही है?”</em>

<strong>अमेरिका का फैसला और असर</strong>

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने 1 अगस्त 2025 से भारतीय सामानों पर पहले ही 25% <em>reciprocal tariff</em> लगाया था। इसके बाद रूस से तेल खरीदने की वजह से 25% का <em>penalty tariff</em> और जोड़ दिया गया। यानी अब अमेरिका में भारत से जाने वाले कई प्रोडक्ट्स पर <strong>50% तक टैक्स</strong> देना होगा।

इसका सीधा असर भारत के उन सेक्टर्स पर पड़ सकता है जो अमेरिका को ज्यादा एक्सपोर्ट करते हैं – जैसे <strong>फार्मा (</strong><strong>pharma), टेक्सटाइल (textiles), एग्रीकल्चर (agriculture)</strong> और आईटी सर्विसेज़।

<strong>भारत</strong><strong>–रूस रिश्तों पर जोर</strong>

मॉस्को यात्रा के दौरान जयशंकर ने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात की। दोनों देशों ने कहा कि भारत-रूस रिश्ते <strong>द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से सबसे स्थिर</strong> रहे हैं।
<ul>
 	<li>रूस ने भारत को आर्कटिक और फार ईस्ट में energy प्रोजेक्ट्स में पार्टनर बनने का न्योता दिया।</li>
 	<li>भारत ने रूस से कहा कि अब ट्रेड सिर्फ तेल और डिफेंस तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि <strong>फार्मा</strong><strong>, कपड़े, कृषि और टेक्नोलॉजी</strong> सेक्टर में भी बढ़ाया जाएगा।</li>
</ul>
<strong>भू-राजनीतिक असर (</strong><strong>Geopolitical Impact)</strong>

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का यह कदम भारत को रूस और चीन के और करीब धकेल सकता है। इससे अमेरिका–भारत रिश्तों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है, खासकर <strong>डिफेंस कोऑपरेशन</strong> और <strong>क्वाड (</strong><strong>Quad) जैसी साझेदारियों</strong> में।

भारत का कहना है कि उसकी energy policy <strong>diverse और practical</strong> है। यानी भारत हर उस देश से तेल और गैस खरीदता है जो सस्ती और भरोसेमंद सप्लाई दे सके। वहीं, अमेरिका का नया टैरिफ फैसला न सिर्फ भारत–अमेरिका ट्रेड को झटका देगा, बल्कि दोनों देशों के रिश्तों में भी तनाव पैदा करेगा।

यह मामला आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति और भारत की foreign policy का बड़ा मुद्दा बनने वाला है।]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>Trump– Putin Summit: 3 घंटे Meeting, 12 Minute Press Conference और बिना किसी Deal के खत्म हुई मुलाकात</title>
		<link>https://trendstopic.in/trump-putin-summit-3-%e0%a4%98%e0%a4%82%e0%a4%9f%e0%a5%87-meeting-12-minute-press-conference-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%80-dea/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 16 Aug 2025 04:45:05 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[WorldPolitics]]></category>
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					<description><![CDATA[अलास्का में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई हाई-प्रोफाइल मुलाकात दुनिया भर की सुर्खियों में है। यह मुलाकात करीब <strong>3 </strong><strong>घंटे</strong> चली और इसके बाद दोनों नेताओं ने केवल <strong>12 </strong><strong>मिनट</strong> की प्रेस कॉन्फ्रेंस की। खास बात यह रही कि इस दौरान किसी पत्रकार के सवाल का जवाब नहीं दिया गया और दोनों नेता मंच से सीधे निकल गए।

<strong>10 </strong><strong>साल बाद अमेरिका पहुंचे पुतिन</strong>

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन लगभग <strong>10 </strong><strong>साल बाद अमेरिका पहुंचे</strong>। अलास्का के एल्मेंडॉर्फ एयर बेस पर उनका रेड कार्पेट स्वागत किया गया। एयरपोर्ट पर खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उन्हें रिसीव किया। दोनों नेता ट्रम्प की कार में बैठकर सीधे मीटिंग स्थल रवाना हो गए।
यहां का नज़ारा बेहद खास था—रेड कार्पेट के पास <strong>चार </strong><strong>F-22 </strong><strong>रैप्टर फाइटर जेट्स</strong> तैनात थे। सुरक्षा के लिए अमेरिकी सीक्रेट सर्विस और रूसी टीम ने मिलकर पुख्ता इंतजाम किए।

<strong>थ्री-ऑन-थ्री फॉर्मेट में बातचीत</strong>

मीटिंग “<strong>थ्री-ऑन-थ्री फॉर्मेट</strong>” में हुई।
रूस की तरफ से पुतिन के साथ विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव, रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलौसोव और वित्त मंत्री एंटोन सिलुआनोव मौजूद थे।
अमेरिका की ओर से ट्रम्प के साथ विदेश मंत्री मार्को रुबियो, वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक और शांति वार्ता दूत स्टीव विटकॉफ मौजूद रहे।

<strong>प्रेस कॉन्फ्रेंस </strong><strong>– </strong><strong>सिर्फ </strong><strong>12 </strong><strong>मिनट</strong>

बैठक के बाद दोनों नेताओं ने जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस की। यह तय समय से आधा घंटा पहले शुरू हुई और केवल <strong>12 </strong><strong>मिनट</strong> तक चली। शुरुआत पुतिन ने की, जबकि परंपरा के अनुसार पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बोलते हैं।
पुतिन ने कहा कि –
<ul>
 	<li>यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए उसकी असली वजह खत्म करनी होगी।</li>
 	<li>अगर 2022 में ट्रम्प राष्ट्रपति होते तो यह जंग शुरू ही नहीं होती।</li>
 	<li>यूक्रेन की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।</li>
 	<li>यूरोपीय नेताओं को शांति वार्ता में बाधा नहीं डालनी चाहिए।</li>
 	<li>अमेरिका और रूस पड़ोसी हैं, टकराव छोड़कर बातचीत आगे बढ़ानी चाहिए।</li>
</ul>
ट्रम्प ने कहा कि –
<ul>
 	<li>मीटिंग पॉजिटिव रही लेकिन अभी कोई फाइनल डील नहीं हुई।</li>
 	<li>सभी की सहमति के बिना समझौता संभव नहीं।</li>
 	<li>वे जेलेंस्की और नाटो सहयोगियों से बात करेंगे।</li>
 	<li>यूक्रेन में शांति जरूरी है, लेकिन यह अब जेलेंस्की पर निर्भर है।</li>
 	<li>पुतिन के साथ उनका रिश्ता हमेशा अच्छा रहा है।</li>
</ul>
&nbsp;

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&nbsp;

<strong>पुतिन का सुझाव </strong><strong>– </strong><strong>अगली मीटिंग मॉस्को में</strong>

पुतिन ने अगली मुलाकात मॉस्को में करने का सुझाव दिया। ट्रम्प ने कहा कि यह फैसला विवादित हो सकता है लेकिन उन्होंने इसे पूरी तरह नकारा भी नहीं।

<strong>पुतिन ने सैनिकों को दी श्रद्धांजलि</strong>

अलास्का से रवाना होने से पहले पुतिन ने फोर्ट रिचर्डसन मेमोरियल कब्रिस्तान जाकर <strong>द्वितीय विश्व युद्ध</strong> में मारे गए सोवियत सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।

<strong>मीटिंग के बाद दोनों का रवाना होना</strong>

मीटिंग और प्रेस कॉन्फ्रेंस के एक घंटे बाद पुतिन का विमान मॉस्को के लिए उड़ गया। थोड़ी देर बाद ट्रम्प भी एयरफोर्स वन से वॉशिंगटन डीसी लौट गए।

<strong>इंटरव्यू और रिएक्शन</strong>

अलास्का से लौटते समय ट्रम्प ने <strong>Fox News</strong> को इंटरव्यू दिया और कहा –
<ul>
 	<li>वे लोगों को मरते नहीं देखना चाहते।</li>
 	<li>यूक्रेन जंग खत्म कराना सोचा था आसान होगा, लेकिन यह सबसे मुश्किल है।</li>
 	<li>पुतिन और जेलेंस्की दोनों चाहते हैं कि वे शांति वार्ता का हिस्सा बनें।</li>
 	<li>मीटिंग को उन्होंने 10 में से 10 अंक दिए।</li>
</ul>
रूस की तरफ से क्रेमलिन ने कहा कि बातचीत बहुत अच्छी रही और सीजफायर की दिशा में प्रगति हुई।

<strong>मेलानिया का लेटर</strong>

इस मुलाकात के दौरान एक और खास पल तब आया जब ट्रम्प ने पुतिन को <strong>अमेरिका की प्रथम महिला मेलानिया ट्रम्प</strong> का लिखा हुआ लेटर सौंपा। इसमें उन्होंने यूक्रेन और रूस में बच्चों की खराब हालत का जिक्र किया था।

<strong>मीडिया और एक्सपर्ट्स की राय</strong>
<ul>
 	<li><strong>वॉशिंगटन पोस्ट:</strong> ट्रम्प–पुतिन अलास्का समिट, युद्धविराम तक नहीं पहुंचे।</li>
 	<li><strong>न्यूयॉर्क टाइम्स:</strong> कोई ठोस समझौता नहीं।</li>
 	<li><strong>CNN:</strong> मीटिंग बिना रिजल्ट के खत्म।</li>
 	<li>अमेरिका के पूर्व NSA जॉन बोल्टन और पूर्व राजदूत डगलस ल्यूट ने कहा कि इस मीटिंग में पुतिन ने ज्यादा फायदा उठाया और ट्रम्प को कुछ खास हासिल नहीं हुआ।</li>
</ul>
लगभग <strong>3 </strong><strong>घंटे की बातचीत और </strong><strong>12 </strong><strong>मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस</strong> के बाद भी ट्रम्प–पुतिन समिट से कोई ठोस डील सामने नहीं आई। हांलाकि दोनों नेताओं ने इसे “पॉजिटिव शुरुआत” बताया और कहा कि आगे की मीटिंग्स में शांति समझौते की दिशा में कदम बढ़ेंगे।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[अलास्का में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई हाई-प्रोफाइल मुलाकात दुनिया भर की सुर्खियों में है। यह मुलाकात करीब <strong>3 </strong><strong>घंटे</strong> चली और इसके बाद दोनों नेताओं ने केवल <strong>12 </strong><strong>मिनट</strong> की प्रेस कॉन्फ्रेंस की। खास बात यह रही कि इस दौरान किसी पत्रकार के सवाल का जवाब नहीं दिया गया और दोनों नेता मंच से सीधे निकल गए।

<strong>10 </strong><strong>साल बाद अमेरिका पहुंचे पुतिन</strong>

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन लगभग <strong>10 </strong><strong>साल बाद अमेरिका पहुंचे</strong>। अलास्का के एल्मेंडॉर्फ एयर बेस पर उनका रेड कार्पेट स्वागत किया गया। एयरपोर्ट पर खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उन्हें रिसीव किया। दोनों नेता ट्रम्प की कार में बैठकर सीधे मीटिंग स्थल रवाना हो गए।
यहां का नज़ारा बेहद खास था—रेड कार्पेट के पास <strong>चार </strong><strong>F-22 </strong><strong>रैप्टर फाइटर जेट्स</strong> तैनात थे। सुरक्षा के लिए अमेरिकी सीक्रेट सर्विस और रूसी टीम ने मिलकर पुख्ता इंतजाम किए।

<strong>थ्री-ऑन-थ्री फॉर्मेट में बातचीत</strong>

मीटिंग “<strong>थ्री-ऑन-थ्री फॉर्मेट</strong>” में हुई।
रूस की तरफ से पुतिन के साथ विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव, रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलौसोव और वित्त मंत्री एंटोन सिलुआनोव मौजूद थे।
अमेरिका की ओर से ट्रम्प के साथ विदेश मंत्री मार्को रुबियो, वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक और शांति वार्ता दूत स्टीव विटकॉफ मौजूद रहे।

<strong>प्रेस कॉन्फ्रेंस </strong><strong>– </strong><strong>सिर्फ </strong><strong>12 </strong><strong>मिनट</strong>

बैठक के बाद दोनों नेताओं ने जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस की। यह तय समय से आधा घंटा पहले शुरू हुई और केवल <strong>12 </strong><strong>मिनट</strong> तक चली। शुरुआत पुतिन ने की, जबकि परंपरा के अनुसार पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बोलते हैं।
पुतिन ने कहा कि –
<ul>
 	<li>यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए उसकी असली वजह खत्म करनी होगी।</li>
 	<li>अगर 2022 में ट्रम्प राष्ट्रपति होते तो यह जंग शुरू ही नहीं होती।</li>
 	<li>यूक्रेन की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।</li>
 	<li>यूरोपीय नेताओं को शांति वार्ता में बाधा नहीं डालनी चाहिए।</li>
 	<li>अमेरिका और रूस पड़ोसी हैं, टकराव छोड़कर बातचीत आगे बढ़ानी चाहिए।</li>
</ul>
ट्रम्प ने कहा कि –
<ul>
 	<li>मीटिंग पॉजिटिव रही लेकिन अभी कोई फाइनल डील नहीं हुई।</li>
 	<li>सभी की सहमति के बिना समझौता संभव नहीं।</li>
 	<li>वे जेलेंस्की और नाटो सहयोगियों से बात करेंगे।</li>
 	<li>यूक्रेन में शांति जरूरी है, लेकिन यह अब जेलेंस्की पर निर्भर है।</li>
 	<li>पुतिन के साथ उनका रिश्ता हमेशा अच्छा रहा है।</li>
</ul>
&nbsp;

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&nbsp;

<strong>पुतिन का सुझाव </strong><strong>– </strong><strong>अगली मीटिंग मॉस्को में</strong>

पुतिन ने अगली मुलाकात मॉस्को में करने का सुझाव दिया। ट्रम्प ने कहा कि यह फैसला विवादित हो सकता है लेकिन उन्होंने इसे पूरी तरह नकारा भी नहीं।

<strong>पुतिन ने सैनिकों को दी श्रद्धांजलि</strong>

अलास्का से रवाना होने से पहले पुतिन ने फोर्ट रिचर्डसन मेमोरियल कब्रिस्तान जाकर <strong>द्वितीय विश्व युद्ध</strong> में मारे गए सोवियत सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।

<strong>मीटिंग के बाद दोनों का रवाना होना</strong>

मीटिंग और प्रेस कॉन्फ्रेंस के एक घंटे बाद पुतिन का विमान मॉस्को के लिए उड़ गया। थोड़ी देर बाद ट्रम्प भी एयरफोर्स वन से वॉशिंगटन डीसी लौट गए।

<strong>इंटरव्यू और रिएक्शन</strong>

अलास्का से लौटते समय ट्रम्प ने <strong>Fox News</strong> को इंटरव्यू दिया और कहा –
<ul>
 	<li>वे लोगों को मरते नहीं देखना चाहते।</li>
 	<li>यूक्रेन जंग खत्म कराना सोचा था आसान होगा, लेकिन यह सबसे मुश्किल है।</li>
 	<li>पुतिन और जेलेंस्की दोनों चाहते हैं कि वे शांति वार्ता का हिस्सा बनें।</li>
 	<li>मीटिंग को उन्होंने 10 में से 10 अंक दिए।</li>
</ul>
रूस की तरफ से क्रेमलिन ने कहा कि बातचीत बहुत अच्छी रही और सीजफायर की दिशा में प्रगति हुई।

<strong>मेलानिया का लेटर</strong>

इस मुलाकात के दौरान एक और खास पल तब आया जब ट्रम्प ने पुतिन को <strong>अमेरिका की प्रथम महिला मेलानिया ट्रम्प</strong> का लिखा हुआ लेटर सौंपा। इसमें उन्होंने यूक्रेन और रूस में बच्चों की खराब हालत का जिक्र किया था।

<strong>मीडिया और एक्सपर्ट्स की राय</strong>
<ul>
 	<li><strong>वॉशिंगटन पोस्ट:</strong> ट्रम्प–पुतिन अलास्का समिट, युद्धविराम तक नहीं पहुंचे।</li>
 	<li><strong>न्यूयॉर्क टाइम्स:</strong> कोई ठोस समझौता नहीं।</li>
 	<li><strong>CNN:</strong> मीटिंग बिना रिजल्ट के खत्म।</li>
 	<li>अमेरिका के पूर्व NSA जॉन बोल्टन और पूर्व राजदूत डगलस ल्यूट ने कहा कि इस मीटिंग में पुतिन ने ज्यादा फायदा उठाया और ट्रम्प को कुछ खास हासिल नहीं हुआ।</li>
</ul>
लगभग <strong>3 </strong><strong>घंटे की बातचीत और </strong><strong>12 </strong><strong>मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस</strong> के बाद भी ट्रम्प–पुतिन समिट से कोई ठोस डील सामने नहीं आई। हांलाकि दोनों नेताओं ने इसे “पॉजिटिव शुरुआत” बताया और कहा कि आगे की मीटिंग्स में शांति समझौते की दिशा में कदम बढ़ेंगे।]]></content:encoded>
					
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		<title>PM Modi अगले महीने जा सकते हैं America, UNGA सत्र में Trump भी देंगे भाषण Trade Tensions के बीच अहम दौरा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 13 Aug 2025 05:20:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[BilateralTradeAgreement]]></category>
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		<category><![CDATA[DonaldTrump]]></category>
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		<category><![CDATA[UNGA2025]]></category>
		<category><![CDATA[WorldPolitics]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने अमेरिका के न्यूयॉर्क जा सकते हैं, जहां वे <strong>संयुक्त राष्ट्र महासभा (</strong><strong>UNGA)</strong> के 80वें उच्चस्तरीय सत्र को संबोधित करेंगे। समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी एक प्रोविजनल (अस्थायी) लिस्ट में भारत के “हेड ऑफ गवर्नमेंट” का भाषण <strong>26 सितंबर की सुबह</strong> तय किया गया है।

इस सत्र की खास बात यह है कि <strong>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप</strong> भी भाषण देंगे। यह उनका <strong>दूसरे कार्यकाल</strong> में UNGA का पहला संबोधन होगा। 80वें सत्र की हाई-लेवल जनरल डिबेट 23 से 29 सितंबर के बीच होगी, जिसमें परंपरा के अनुसार सबसे पहले ब्राजील और फिर अमेरिका बोलता है। भारत के अलावा 26 सितंबर को इस्राइल, चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश के नेता भी मंच से अपने विचार रखेंगे।
<h3>व्यापार तनाव की पृष्ठभूमि</h3>
यह संभावित दौरा ऐसे समय हो सकता है, जब भारत और अमेरिका के बीच <strong>ट्रेड रिलेशंस</strong> में खिंचाव देखने को मिल रहा है।
<ul>
 	<li><strong>फरवरी </strong><strong>2025</strong> में पीएम मोदी ने व्हाइट हाउस जाकर राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात की थी।</li>
 	<li>दोनों नेताओं ने <strong>Bilateral Trade Agreement (BTA)</strong> के पहले हिस्से को तैयार करने पर सहमति जताई थी, जो दोनों देशों के लिए फायदेमंद हो सकता है। इसे <strong>फॉल </strong><strong>2025</strong> तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया।</li>
 	<li>लेकिन इसी बीच, ट्रंप ने भारत द्वारा <strong>रूसी तेल खरीदने</strong> पर <strong>25% अतिरिक्त टैरिफ</strong> लगा दिया, जिससे कुल टैरिफ 50% हो गया।</li>
 	<li>भारत के विदेश मंत्रालय ने इस कदम को "अनुचित और अव्यावहारिक" बताते हुए कहा, “भारत अपने राष्ट्रीय हित और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।”</li>
</ul>
<h3>बातचीत जारी है</h3>
ट्रंप का यह टैरिफ लगाने का फैसला ऐसे समय आया, जब अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल 25 अगस्त को भारत आने वाला है, ताकि <strong>BTA की छठी दौर की बातचीत</strong> हो सके। दोनों देशों की कोशिश है कि इस साल <strong>अक्टूबर-नवंबर</strong> तक पहले चरण पर हस्ताक्षर हो जाएं।
<h3>सत्र की अहमियत</h3>
हर साल सितंबर में होने वाला यह सत्र संयुक्त राष्ट्र का <strong>सबसे व्यस्त डिप्लोमैटिक सीजन</strong> कहलाता है। इस बार इसका महत्व और बढ़ गया है क्योंकि पृष्ठभूमि में <strong>इज़राइल-हमास संघर्ष</strong> और <strong>यूक्रेन-रूस युद्ध</strong> जैसे गंभीर मुद्दे हैं। ऐसे में, दुनियाभर की नज़रें इस मंच पर होने वाले भाषणों और बयानों पर होंगी।

हालांकि, यह लिस्ट अभी प्रोविजनल है और अगले कुछ हफ्तों में तारीख या कार्यक्रम में बदलाव संभव है। लेकिन अगर यह शेड्यूल कायम रहता है, तो यह पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच एक ही मंच पर आने का मौका होगा—वो भी ऐसे समय में, जब दोनों देशों के रिश्ते <strong>सहयोग और तनाव</strong> के बीच संतुलन साध रहे हैं।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने अमेरिका के न्यूयॉर्क जा सकते हैं, जहां वे <strong>संयुक्त राष्ट्र महासभा (</strong><strong>UNGA)</strong> के 80वें उच्चस्तरीय सत्र को संबोधित करेंगे। समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी एक प्रोविजनल (अस्थायी) लिस्ट में भारत के “हेड ऑफ गवर्नमेंट” का भाषण <strong>26 सितंबर की सुबह</strong> तय किया गया है।

इस सत्र की खास बात यह है कि <strong>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप</strong> भी भाषण देंगे। यह उनका <strong>दूसरे कार्यकाल</strong> में UNGA का पहला संबोधन होगा। 80वें सत्र की हाई-लेवल जनरल डिबेट 23 से 29 सितंबर के बीच होगी, जिसमें परंपरा के अनुसार सबसे पहले ब्राजील और फिर अमेरिका बोलता है। भारत के अलावा 26 सितंबर को इस्राइल, चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश के नेता भी मंच से अपने विचार रखेंगे।
<h3>व्यापार तनाव की पृष्ठभूमि</h3>
यह संभावित दौरा ऐसे समय हो सकता है, जब भारत और अमेरिका के बीच <strong>ट्रेड रिलेशंस</strong> में खिंचाव देखने को मिल रहा है।
<ul>
 	<li><strong>फरवरी </strong><strong>2025</strong> में पीएम मोदी ने व्हाइट हाउस जाकर राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात की थी।</li>
 	<li>दोनों नेताओं ने <strong>Bilateral Trade Agreement (BTA)</strong> के पहले हिस्से को तैयार करने पर सहमति जताई थी, जो दोनों देशों के लिए फायदेमंद हो सकता है। इसे <strong>फॉल </strong><strong>2025</strong> तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया।</li>
 	<li>लेकिन इसी बीच, ट्रंप ने भारत द्वारा <strong>रूसी तेल खरीदने</strong> पर <strong>25% अतिरिक्त टैरिफ</strong> लगा दिया, जिससे कुल टैरिफ 50% हो गया।</li>
 	<li>भारत के विदेश मंत्रालय ने इस कदम को "अनुचित और अव्यावहारिक" बताते हुए कहा, “भारत अपने राष्ट्रीय हित और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।”</li>
</ul>
<h3>बातचीत जारी है</h3>
ट्रंप का यह टैरिफ लगाने का फैसला ऐसे समय आया, जब अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल 25 अगस्त को भारत आने वाला है, ताकि <strong>BTA की छठी दौर की बातचीत</strong> हो सके। दोनों देशों की कोशिश है कि इस साल <strong>अक्टूबर-नवंबर</strong> तक पहले चरण पर हस्ताक्षर हो जाएं।
<h3>सत्र की अहमियत</h3>
हर साल सितंबर में होने वाला यह सत्र संयुक्त राष्ट्र का <strong>सबसे व्यस्त डिप्लोमैटिक सीजन</strong> कहलाता है। इस बार इसका महत्व और बढ़ गया है क्योंकि पृष्ठभूमि में <strong>इज़राइल-हमास संघर्ष</strong> और <strong>यूक्रेन-रूस युद्ध</strong> जैसे गंभीर मुद्दे हैं। ऐसे में, दुनियाभर की नज़रें इस मंच पर होने वाले भाषणों और बयानों पर होंगी।

हालांकि, यह लिस्ट अभी प्रोविजनल है और अगले कुछ हफ्तों में तारीख या कार्यक्रम में बदलाव संभव है। लेकिन अगर यह शेड्यूल कायम रहता है, तो यह पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच एक ही मंच पर आने का मौका होगा—वो भी ऐसे समय में, जब दोनों देशों के रिश्ते <strong>सहयोग और तनाव</strong> के बीच संतुलन साध रहे हैं।]]></content:encoded>
					
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