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	<title>UTTARPARDESH &#8211; Trends Topic</title>
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	<title>UTTARPARDESH &#8211; Trends Topic</title>
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	<item>
		<title>Mahakumbh मेले में वाटर एटीएम दे रहा है फ्री आरओ पानी, बटन दबाते ही निकलने लगता है शुद्ध जल</title>
		<link>https://trendstopic.in/water-atm-is-giving-free-ro-water-in-mahakumbh-fair-pure-water-starts-coming-out-as-soon-as-you-press-the-button/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor 1]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 01 Feb 2025 12:05:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[news]]></category>
		<category><![CDATA[TRENDING]]></category>
		<category><![CDATA[UTTARPARDESH]]></category>
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					<description><![CDATA[<!-- wp:paragraph -->
<p>यूपी जल निगम ने मेला क्षेत्र में 200 वाटर एटीएम लगाए हैं। इनके माध्यम से श्रद्धालुओं को फ्री आरओ पानी मिल रहा है। वहीं, Mahakumbh में इस बार 116 देशों के राजनायिक आ रहे हैं। वे शनिवार को सुबह अरैल पहुंचेंगे। अरैल स्थित टेंट सिटी में उनका परंपरागत तरीके से स्वागत किया जाएगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>116 देशों के राजनायिक भी शनिवार को Mahakumbh नगर का हिस्सा होंगे। दिन भर के कार्यक्रम के दौरान वे संगम स्नान के साथ मेला क्षेत्र का भ्रमण भी करेंगे। अरैल में सभी देशों के झंडे भी लगाए जाएंगे। कुंभ 2019 में भी 72 देशों के राजनायिक आए थे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस बार 116 देशों के राजनायिक आ रहे हैं। वे शनिवार को सुबह अरैल पहुंचेंगे। अरैल स्थित टेंट सिटी में उनका परंपरागत तरीके से स्वागत किया जाएगा। इसी क्रम में राजनायिक झंडे को सलामी देंगे। इसके बाद उन्हें क्रूज से वीआईपी घाट लाया जाएगा। संगम पर उनके स्नान की भी व्यवस्था रहेगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इसके लिए जेटी तैयार की जा रही है। वे अक्षयवट, हनुमान मंदिर में दर्शन करेंगे और संतों से भी मिलेंंगे। विदेशी डेलीगेट्स कला Mahakumbh , डिजिटल अनुभूति केंद्र समेत अन्य प्रदर्शनियों का अवलोकन करेंगे। शाम को सांस्कृतिक आयोजन में भी शामिल होंगे। इसके बाद वे वाराणसी के लिए रवाना होंगे।<br>मेले में वाटर एटीएम दे रहा है फ्री आरओ पानी<br>यूपी जल निगम ने मेला क्षेत्र में 200 वाटर एटीएम लगाए हैं। इनके माध्यम से श्रद्धालुओं को फ्री आरओ पानी मिल रहा है। प्रतिदिन 12 से 15 हजार लीटर पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। अधिशासी अभियंता ने बताया कि मेला प्रशासन ने पहले इसके लिए एक रुपये का शुल्क लगाया था, पर अब यह पूरी तरह मुफ्त है। वाटर एटीएम पर ऑपरेटर बैठते हैं, जो श्रद्धालुओं के कहने पर बटन दबाकर शुद्ध जल उपलब्ध करा रहे हैं। इनकी सेंसर के माध्यम से निगरानी भी होती है।<br>श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति को डेढ़ करोड़ ने किए हस्ताक्षर<br>श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति और मंदिर के भव्य निर्माण को लेकर श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास की ओर से मेले में चल रहे अभियान में डेढ़ करोड़ लोग हस्ताक्षर कर चुके हैं। एक फरवरी को सेक्टर-16 स्थित जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी राजेश्वर माऊली के पंडाल में महासंवाद होगा। इसमें आगे के आंदोलन की आधारशिला रखी जाएगी।<br>अध्यक्ष एडवोकेट महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण की मूल जन्मस्थली (वर्तमान में शाही ईदगाह मस्जिद) को मुक्त कराने के लिए अभियान की शुरुआत जन्मभूमि के मुख्य द्वार से की गई थी। इसमें अब तक डेढ़ करोड़ लोगों ने हस्ताक्षर कर आंदोलन को समर्थन दिया है। साधु-महात्मा, महामंडलेश्वर, जगद्गुरु और शंकराचार्य महासंवाद में शामिल होंगे।</p>
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<p>यूपी जल निगम ने मेला क्षेत्र में 200 वाटर एटीएम लगाए हैं। इनके माध्यम से श्रद्धालुओं को फ्री आरओ पानी मिल रहा है। वहीं, Mahakumbh में इस बार 116 देशों के राजनायिक आ रहे हैं। वे शनिवार को सुबह अरैल पहुंचेंगे। अरैल स्थित टेंट सिटी में उनका परंपरागत तरीके से स्वागत किया जाएगा।</p>
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<p>116 देशों के राजनायिक भी शनिवार को Mahakumbh नगर का हिस्सा होंगे। दिन भर के कार्यक्रम के दौरान वे संगम स्नान के साथ मेला क्षेत्र का भ्रमण भी करेंगे। अरैल में सभी देशों के झंडे भी लगाए जाएंगे। कुंभ 2019 में भी 72 देशों के राजनायिक आए थे।</p>
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<p>इस बार 116 देशों के राजनायिक आ रहे हैं। वे शनिवार को सुबह अरैल पहुंचेंगे। अरैल स्थित टेंट सिटी में उनका परंपरागत तरीके से स्वागत किया जाएगा। इसी क्रम में राजनायिक झंडे को सलामी देंगे। इसके बाद उन्हें क्रूज से वीआईपी घाट लाया जाएगा। संगम पर उनके स्नान की भी व्यवस्था रहेगी।</p>
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<p>इसके लिए जेटी तैयार की जा रही है। वे अक्षयवट, हनुमान मंदिर में दर्शन करेंगे और संतों से भी मिलेंंगे। विदेशी डेलीगेट्स कला Mahakumbh , डिजिटल अनुभूति केंद्र समेत अन्य प्रदर्शनियों का अवलोकन करेंगे। शाम को सांस्कृतिक आयोजन में भी शामिल होंगे। इसके बाद वे वाराणसी के लिए रवाना होंगे।<br>मेले में वाटर एटीएम दे रहा है फ्री आरओ पानी<br>यूपी जल निगम ने मेला क्षेत्र में 200 वाटर एटीएम लगाए हैं। इनके माध्यम से श्रद्धालुओं को फ्री आरओ पानी मिल रहा है। प्रतिदिन 12 से 15 हजार लीटर पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। अधिशासी अभियंता ने बताया कि मेला प्रशासन ने पहले इसके लिए एक रुपये का शुल्क लगाया था, पर अब यह पूरी तरह मुफ्त है। वाटर एटीएम पर ऑपरेटर बैठते हैं, जो श्रद्धालुओं के कहने पर बटन दबाकर शुद्ध जल उपलब्ध करा रहे हैं। इनकी सेंसर के माध्यम से निगरानी भी होती है।<br>श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति को डेढ़ करोड़ ने किए हस्ताक्षर<br>श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति और मंदिर के भव्य निर्माण को लेकर श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास की ओर से मेले में चल रहे अभियान में डेढ़ करोड़ लोग हस्ताक्षर कर चुके हैं। एक फरवरी को सेक्टर-16 स्थित जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी राजेश्वर माऊली के पंडाल में महासंवाद होगा। इसमें आगे के आंदोलन की आधारशिला रखी जाएगी।<br>अध्यक्ष एडवोकेट महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण की मूल जन्मस्थली (वर्तमान में शाही ईदगाह मस्जिद) को मुक्त कराने के लिए अभियान की शुरुआत जन्मभूमि के मुख्य द्वार से की गई थी। इसमें अब तक डेढ़ करोड़ लोगों ने हस्ताक्षर कर आंदोलन को समर्थन दिया है। साधु-महात्मा, महामंडलेश्वर, जगद्गुरु और शंकराचार्य महासंवाद में शामिल होंगे।</p>
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		<title>Vasant Panchami से आरंभ होगी धूना तापना , वैष्णव परंपरा के 350 साधक करेंगे सबसे कठिन खप्पर तपस्पा</title>
		<link>https://trendstopic.in/dhuna-tapana-will-start-from-vasant-panchami-350-devotees-of-vaishnav-tradition-will-perform-the-toughest-khapar-penance/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor 1]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 01 Feb 2025 11:05:28 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<!-- wp:paragraph -->
<p>खाक चौक में इसको लेकर तैयारियां आरंभ हो चुकी हैं। इस दफा करीब साढ़े तीन सौ तपस्वी धूनी साधना की खप्पर तपस्या करेंगे। यह तपस्या सबसे आखिरी श्रेणी की होती है। इसके आधार पर ही अखाड़े में साधुओं की वरिष्ठता तय होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>वैष्णव परंपरा के तपस्वी वसंत पचंमी से कुंभनगरी में परंपरागत कठिन साधना आरंभ करेंगे। खाक चौक में इसको लेकर तैयारियां आरंभ हो चुकी हैं। इस दफा करीब साढ़े तीन सौ तपस्वी धूनी साधना की खप्पर तपस्या करेंगे। यह तपस्या सबसे आखिरी श्रेणी की होती है। इसके आधार पर ही अखाड़े में साधुओं की वरिष्ठता तय होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>वैष्णव परंपरा में श्रीसंप्रदाय (रामानंदी संप्रदाय) में धूना तापना सबसे बड़ी तपस्या मानी जाती है। पंचांग के मुताबिक यह तपस्या आरंभ होती है। तेरह भाई त्यागी आश्रम के परमात्मा दास ने बताया कि सूर्य उत्तरायण के शुक्ल पक्ष से यह तपस्या आरंभ की जाती है। तपस्या से पहले साधक निराजली व्रत रखता है। इसके बाद धूनी में बैठते हैं। छह चरण में तपस्या पूरी होती है। इन छह चरणों में पंच, सप्त, द्वादश, चौरासी, कोटि एवं खप्पर श्रेणी होती है। हर श्रेणी तीन साल में पूरी होती है। इस तरह तपस्या पूरी करने में 18 साल का समय लगता है।<br>दिगंबर अखाड़े के सीताराम दास का कहना है सभी छह श्रेणी में तपस्या की अलग-अलग रीति होती है। सबसे प्रारंभिक पंच श्रेणी होती है। साधुओं के दीक्षा लेने के बाद उनकी यह शुरुआती तपस्या होती है। इसमें साधक पांच स्थान पर आग जलाकर उसकी आंच के बीच बैठकर तपस्या करते हैं। दूसरी श्रेणी में सात जगह पर आग जलाकर उसके बीच बैठकर तपस्या करनी होती है। इसी तरह द्वादश श्रेणी में 12 स्थान, 84 श्रेणी में 84 स्थान एवं कोटि श्रेणी में सैकड़ों स्थान पर जल रही अग्नि की आंच के बीच बैठकर तपस्या करनी होती है।<br>खप्पर श्रेणी की तपस्या सबसे कठिन होती है। परमात्मा दास के मुताबिक सिर के ऊपर मटके में रखकर अग्नि प्रज्वलित की जाती है। इसकी आंच के मध्य में साधक को रोजाना 6 से 16 घंटे तक तपस्या करनी होती है। बसंत से गंगा दशहरा तक यह चलती है। तीन साल तक यह क्रम चलता है। इसके पूरा होने के बाद साधक की 18 साल लंबी तपस्या पूरी मानी जाती है। उनका कहना है अखाड़ों, आश्रम समेत खालसा में इसकी तैयारियां आंरभ हो गई हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दिगंबर, निर्मोही एवं निर्वाणी समेत खाक चौक में करीब साढ़े तीन सौ तपस्वी यह कठिन साधना करेंगे जबकि अन्य साधक अपने अन्य चरण की तपस्या करेंगे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>चरण पूरे होने के साथ तय होती है वरिष्ठता<br>खाक चौक के तपस्वियों में इस साधना के साथ ही उनकी वरिष्ठता भी संत समाज के बीच तय होती है। तमाम साधक महाकुंभ से अपनी साधना आरंभ करते हैं। उनकी शुरूआत पंच धूना से होती है। इसी तरह क्रम आगे बढ़ने पर खप्पर श्रेणी 'आती है। खप्पर श्रेणी के साधक को ही सबसे वरिष्ठ मानते हैं। कई साधक खप्पर तपस्या पूरी होने के बाद दोबारा से भी तपस्या आरंभ करते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<!-- wp:paragraph -->
<p>खाक चौक में इसको लेकर तैयारियां आरंभ हो चुकी हैं। इस दफा करीब साढ़े तीन सौ तपस्वी धूनी साधना की खप्पर तपस्या करेंगे। यह तपस्या सबसे आखिरी श्रेणी की होती है। इसके आधार पर ही अखाड़े में साधुओं की वरिष्ठता तय होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>वैष्णव परंपरा के तपस्वी वसंत पचंमी से कुंभनगरी में परंपरागत कठिन साधना आरंभ करेंगे। खाक चौक में इसको लेकर तैयारियां आरंभ हो चुकी हैं। इस दफा करीब साढ़े तीन सौ तपस्वी धूनी साधना की खप्पर तपस्या करेंगे। यह तपस्या सबसे आखिरी श्रेणी की होती है। इसके आधार पर ही अखाड़े में साधुओं की वरिष्ठता तय होती है।</p>
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<!-- wp:paragraph -->
<p>वैष्णव परंपरा में श्रीसंप्रदाय (रामानंदी संप्रदाय) में धूना तापना सबसे बड़ी तपस्या मानी जाती है। पंचांग के मुताबिक यह तपस्या आरंभ होती है। तेरह भाई त्यागी आश्रम के परमात्मा दास ने बताया कि सूर्य उत्तरायण के शुक्ल पक्ष से यह तपस्या आरंभ की जाती है। तपस्या से पहले साधक निराजली व्रत रखता है। इसके बाद धूनी में बैठते हैं। छह चरण में तपस्या पूरी होती है। इन छह चरणों में पंच, सप्त, द्वादश, चौरासी, कोटि एवं खप्पर श्रेणी होती है। हर श्रेणी तीन साल में पूरी होती है। इस तरह तपस्या पूरी करने में 18 साल का समय लगता है।<br>दिगंबर अखाड़े के सीताराम दास का कहना है सभी छह श्रेणी में तपस्या की अलग-अलग रीति होती है। सबसे प्रारंभिक पंच श्रेणी होती है। साधुओं के दीक्षा लेने के बाद उनकी यह शुरुआती तपस्या होती है। इसमें साधक पांच स्थान पर आग जलाकर उसकी आंच के बीच बैठकर तपस्या करते हैं। दूसरी श्रेणी में सात जगह पर आग जलाकर उसके बीच बैठकर तपस्या करनी होती है। इसी तरह द्वादश श्रेणी में 12 स्थान, 84 श्रेणी में 84 स्थान एवं कोटि श्रेणी में सैकड़ों स्थान पर जल रही अग्नि की आंच के बीच बैठकर तपस्या करनी होती है।<br>खप्पर श्रेणी की तपस्या सबसे कठिन होती है। परमात्मा दास के मुताबिक सिर के ऊपर मटके में रखकर अग्नि प्रज्वलित की जाती है। इसकी आंच के मध्य में साधक को रोजाना 6 से 16 घंटे तक तपस्या करनी होती है। बसंत से गंगा दशहरा तक यह चलती है। तीन साल तक यह क्रम चलता है। इसके पूरा होने के बाद साधक की 18 साल लंबी तपस्या पूरी मानी जाती है। उनका कहना है अखाड़ों, आश्रम समेत खालसा में इसकी तैयारियां आंरभ हो गई हैं।</p>
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<p>दिगंबर, निर्मोही एवं निर्वाणी समेत खाक चौक में करीब साढ़े तीन सौ तपस्वी यह कठिन साधना करेंगे जबकि अन्य साधक अपने अन्य चरण की तपस्या करेंगे।</p>
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<p>चरण पूरे होने के साथ तय होती है वरिष्ठता<br>खाक चौक के तपस्वियों में इस साधना के साथ ही उनकी वरिष्ठता भी संत समाज के बीच तय होती है। तमाम साधक महाकुंभ से अपनी साधना आरंभ करते हैं। उनकी शुरूआत पंच धूना से होती है। इसी तरह क्रम आगे बढ़ने पर खप्पर श्रेणी 'आती है। खप्पर श्रेणी के साधक को ही सबसे वरिष्ठ मानते हैं। कई साधक खप्पर तपस्या पूरी होने के बाद दोबारा से भी तपस्या आरंभ करते हैं।</p>
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