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	<title>TextileIndustry &#8211; Trends Topic</title>
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	<title>TextileIndustry &#8211; Trends Topic</title>
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	<item>
		<title>Ganga Acrowools करेगी 637 Crore का Investment: Mann सरकार की ‘Invest Punjab’ पहल से बड़ा फायदा</title>
		<link>https://trendstopic.in/ganga-acrowools-to-invest-%e2%82%b9637-crore-a-major-boost-under-cm-manns-invest-punjab-initiative/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 14 Oct 2025 05:39:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चंडीगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[BhagwantMann]]></category>
		<category><![CDATA[BusinessNews]]></category>
		<category><![CDATA[Economy]]></category>
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		<category><![CDATA[TextileIndustry]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब की औद्योगिक तस्वीर में एक नया और सुनहरा अध्याय जुड़ने जा रहा है। देश की जानी-मानी टेक्सटाइल कंपनी <strong>गंगा एक्रोवूल्स लिमिटेड</strong> ने पंजाब में <strong>637 </strong><strong>करोड़ रुपये का बड़ा निवेश</strong> करने का ऐलान किया है। यह निवेश राज्य सरकार की <strong>‘</strong><strong>इन्वेस्ट पंजाब</strong><strong>’ </strong><strong>पहल</strong> के तहत किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री <strong>भगवंत मान</strong> के नेतृत्व में पंजाब सरकार लगातार इस कोशिश में है कि राज्य को फिर से <strong>देश का औद्योगिक हब (</strong><strong>Industrial Hub)</strong> बनाया जाए। यह प्रोजेक्ट उसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

<strong>टेक्सटाइल इंडस्ट्री को मिलेगा नया जीवन</strong>

गंगा एक्रोवूल्स की यह नई टेक्सटाइल परियोजना पंजाब के लिए <strong>हजारों रोजगार के अवसर</strong> लेकर आएगी। इस प्रोजेक्ट से पंजाब के युवाओं को <strong>रोजगार के नए दरवाजे</strong> खुलेंगे और राज्य की <strong>टेक्सटाइल इंडस्ट्री</strong> को नई जान मिलेगी।

अधिकारियों का कहना है कि यह निवेश पंजाब को <strong>टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग</strong> के नक्शे पर एक बड़ा स्थान दिलाएगा। इससे राज्य की <strong>लोकल इकॉनमी (</strong><strong>local economy)</strong> को मजबूती मिलेगी और <strong>निर्यात (</strong><strong>exports)</strong> भी बढ़ेगा।

<strong>‘</strong><strong>इन्वेस्ट पंजाब</strong><strong>’ </strong><strong>से आसान हुआ निवेश</strong>

पंजाब सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में निवेशकों के लिए माहौल आसान बना दिया है।
अब उद्योगपतियों को किसी <strong>लाल फीताशाही (</strong><strong>bureaucratic delay)</strong> का सामना नहीं करना पड़ता।

सरकार ने बनाया है –
<ul>
 	<li><strong>सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम</strong>, जिससे मंजूरी जल्दी मिलती है</li>
 	<li><strong>बिजली</strong><strong>, </strong><strong>पानी और जमीन</strong> जैसी सुविधाओं में सुधार</li>
 	<li>और सबसे बड़ी बात, सरकार हर निवेशक के साथ <strong>सहयोगी रवैया</strong> रखती है</li>
</ul>
गंगा एक्रोवूल्स का पंजाब में निवेश करने का फैसला इस बात का सबूत है कि राज्य की नीतियाँ अब <strong>बिजनेस-फ्रेंडली (</strong><strong>business-friendly)</strong> हो चुकी हैं।

<strong>सीएम भगवंत मान का बयान</strong>

मुख्यमंत्री <strong>भगवंत मान</strong> ने कहा कि,

“हमारा लक्ष्य है कि पंजाब को फिर से उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाया जाए। गंगा एक्रोवूल्स जैसे बड़े निवेश इसी दिशा में हमारी सफलता का संकेत हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में पंजाब में और बड़े निवेश लाए जाएंगे ताकि <strong>युवाओं को रोजगार और राज्य को तरक्की</strong> मिल सके।

<strong>तेजी से मंजूरी और सरकारी सहयोग</strong>

इस प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द मंजूरी देने के लिए <strong>पंजाब उद्योग विभाग</strong> ने सभी संबंधित विभागों के साथ मिलकर काम किया।
<strong>Punjab Bureau of Investment Promotion</strong> की टीम ने गंगा एक्रोवूल्स को हर कदम पर सहयोग दिया। यही तेज़ और पारदर्शी व्यवस्था पंजाब को बाकी राज्यों से अलग बनाती है।

<strong>स्थानीय उद्योगों को भी होगा फायदा</strong>

गंगा एक्रोवूल्स की नई फैक्ट्री के आसपास <strong>सप्लाई चेन</strong><strong>, </strong><strong>लॉजिस्टिक्स</strong><strong>, </strong><strong>पैकेजिंग और छोटे उद्योग (</strong><strong>MSME sector)</strong> को भी बड़ा फायदा होगा।
इससे पूरे इलाके में <strong>औद्योगिक गतिविधियाँ बढ़ेंगी</strong>, नए <strong>छोटे बिजनेस</strong> शुरू होंगे और <strong>स्थानीय व्यापारियों की आमदनी</strong> बढ़ेगी।

<strong>गंगा एक्रोवूल्स लिमिटेड कौन है</strong><strong>?</strong>

गंगा एक्रोवूल्स लिमिटेड भारत की एक <strong>प्रतिष्ठित टेक्सटाइल कंपनी</strong> है जो ऊन और फैब्रिक प्रोडक्शन के लिए जानी जाती है। कंपनी की गुणवत्ता और तकनीक देशभर में मशहूर है।
पंजाब में यह निवेश दिखाता है कि राज्य की औद्योगिक नीतियाँ अब <strong>विश्वसनीय (</strong><strong>reliable)</strong> और <strong>सहायक (</strong><strong>supportive)</strong> हो चुकी हैं।

<strong>आर्थिक प्रभाव</strong>
<ul>
 	<li>पंजाब की <strong>GDP </strong><strong>में सीधा योगदान</strong></li>
 	<li><strong>स्थानीय लोगों की आय</strong> में बढ़ोतरी</li>
 	<li><strong>नए निर्यात अवसर</strong></li>
 	<li>और राज्य में <strong>टेक्सटाइल सेक्टर का पुनर्जीवन</strong></li>
</ul>
गंगा एक्रोवूल्स का 637 करोड़ रुपये का यह निवेश न सिर्फ पंजाब की औद्योगिक ताकत को बढ़ाएगा, बल्कि <strong>हजारों परिवारों के जीवन में बदलाव</strong> भी लाएगा।
यह प्रोजेक्ट साफ संदेश देता है कि —

“पंजाब में निवेश के दरवाजे खुले हैं, और सरकार हर कदम पर उद्योगपतियों के साथ खड़ी है।”

पंजाब अब एक बार फिर <strong>औद्योगिक क्रांति (</strong><strong>industrial revolution)</strong> की राह पर बढ़ रहा है — और गंगा एक्रोवूल्स की यह परियोजना उसकी <strong>नई शुरुआत का प्रतीक</strong> है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब की औद्योगिक तस्वीर में एक नया और सुनहरा अध्याय जुड़ने जा रहा है। देश की जानी-मानी टेक्सटाइल कंपनी <strong>गंगा एक्रोवूल्स लिमिटेड</strong> ने पंजाब में <strong>637 </strong><strong>करोड़ रुपये का बड़ा निवेश</strong> करने का ऐलान किया है। यह निवेश राज्य सरकार की <strong>‘</strong><strong>इन्वेस्ट पंजाब</strong><strong>’ </strong><strong>पहल</strong> के तहत किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री <strong>भगवंत मान</strong> के नेतृत्व में पंजाब सरकार लगातार इस कोशिश में है कि राज्य को फिर से <strong>देश का औद्योगिक हब (</strong><strong>Industrial Hub)</strong> बनाया जाए। यह प्रोजेक्ट उसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

<strong>टेक्सटाइल इंडस्ट्री को मिलेगा नया जीवन</strong>

गंगा एक्रोवूल्स की यह नई टेक्सटाइल परियोजना पंजाब के लिए <strong>हजारों रोजगार के अवसर</strong> लेकर आएगी। इस प्रोजेक्ट से पंजाब के युवाओं को <strong>रोजगार के नए दरवाजे</strong> खुलेंगे और राज्य की <strong>टेक्सटाइल इंडस्ट्री</strong> को नई जान मिलेगी।

अधिकारियों का कहना है कि यह निवेश पंजाब को <strong>टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग</strong> के नक्शे पर एक बड़ा स्थान दिलाएगा। इससे राज्य की <strong>लोकल इकॉनमी (</strong><strong>local economy)</strong> को मजबूती मिलेगी और <strong>निर्यात (</strong><strong>exports)</strong> भी बढ़ेगा।

<strong>‘</strong><strong>इन्वेस्ट पंजाब</strong><strong>’ </strong><strong>से आसान हुआ निवेश</strong>

पंजाब सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में निवेशकों के लिए माहौल आसान बना दिया है।
अब उद्योगपतियों को किसी <strong>लाल फीताशाही (</strong><strong>bureaucratic delay)</strong> का सामना नहीं करना पड़ता।

सरकार ने बनाया है –
<ul>
 	<li><strong>सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम</strong>, जिससे मंजूरी जल्दी मिलती है</li>
 	<li><strong>बिजली</strong><strong>, </strong><strong>पानी और जमीन</strong> जैसी सुविधाओं में सुधार</li>
 	<li>और सबसे बड़ी बात, सरकार हर निवेशक के साथ <strong>सहयोगी रवैया</strong> रखती है</li>
</ul>
गंगा एक्रोवूल्स का पंजाब में निवेश करने का फैसला इस बात का सबूत है कि राज्य की नीतियाँ अब <strong>बिजनेस-फ्रेंडली (</strong><strong>business-friendly)</strong> हो चुकी हैं।

<strong>सीएम भगवंत मान का बयान</strong>

मुख्यमंत्री <strong>भगवंत मान</strong> ने कहा कि,

“हमारा लक्ष्य है कि पंजाब को फिर से उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाया जाए। गंगा एक्रोवूल्स जैसे बड़े निवेश इसी दिशा में हमारी सफलता का संकेत हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में पंजाब में और बड़े निवेश लाए जाएंगे ताकि <strong>युवाओं को रोजगार और राज्य को तरक्की</strong> मिल सके।

<strong>तेजी से मंजूरी और सरकारी सहयोग</strong>

इस प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द मंजूरी देने के लिए <strong>पंजाब उद्योग विभाग</strong> ने सभी संबंधित विभागों के साथ मिलकर काम किया।
<strong>Punjab Bureau of Investment Promotion</strong> की टीम ने गंगा एक्रोवूल्स को हर कदम पर सहयोग दिया। यही तेज़ और पारदर्शी व्यवस्था पंजाब को बाकी राज्यों से अलग बनाती है।

<strong>स्थानीय उद्योगों को भी होगा फायदा</strong>

गंगा एक्रोवूल्स की नई फैक्ट्री के आसपास <strong>सप्लाई चेन</strong><strong>, </strong><strong>लॉजिस्टिक्स</strong><strong>, </strong><strong>पैकेजिंग और छोटे उद्योग (</strong><strong>MSME sector)</strong> को भी बड़ा फायदा होगा।
इससे पूरे इलाके में <strong>औद्योगिक गतिविधियाँ बढ़ेंगी</strong>, नए <strong>छोटे बिजनेस</strong> शुरू होंगे और <strong>स्थानीय व्यापारियों की आमदनी</strong> बढ़ेगी।

<strong>गंगा एक्रोवूल्स लिमिटेड कौन है</strong><strong>?</strong>

गंगा एक्रोवूल्स लिमिटेड भारत की एक <strong>प्रतिष्ठित टेक्सटाइल कंपनी</strong> है जो ऊन और फैब्रिक प्रोडक्शन के लिए जानी जाती है। कंपनी की गुणवत्ता और तकनीक देशभर में मशहूर है।
पंजाब में यह निवेश दिखाता है कि राज्य की औद्योगिक नीतियाँ अब <strong>विश्वसनीय (</strong><strong>reliable)</strong> और <strong>सहायक (</strong><strong>supportive)</strong> हो चुकी हैं।

<strong>आर्थिक प्रभाव</strong>
<ul>
 	<li>पंजाब की <strong>GDP </strong><strong>में सीधा योगदान</strong></li>
 	<li><strong>स्थानीय लोगों की आय</strong> में बढ़ोतरी</li>
 	<li><strong>नए निर्यात अवसर</strong></li>
 	<li>और राज्य में <strong>टेक्सटाइल सेक्टर का पुनर्जीवन</strong></li>
</ul>
गंगा एक्रोवूल्स का 637 करोड़ रुपये का यह निवेश न सिर्फ पंजाब की औद्योगिक ताकत को बढ़ाएगा, बल्कि <strong>हजारों परिवारों के जीवन में बदलाव</strong> भी लाएगा।
यह प्रोजेक्ट साफ संदेश देता है कि —

“पंजाब में निवेश के दरवाजे खुले हैं, और सरकार हर कदम पर उद्योगपतियों के साथ खड़ी है।”

पंजाब अब एक बार फिर <strong>औद्योगिक क्रांति (</strong><strong>industrial revolution)</strong> की राह पर बढ़ रहा है — और गंगा एक्रोवूल्स की यह परियोजना उसकी <strong>नई शुरुआत का प्रतीक</strong> है।]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>Punjab में उद्योगों की नई उड़ान — Shiva Texfabs’ के बड़े कदम से बढ़ेगी तरक्की की रफ़्तार</title>
		<link>https://trendstopic.in/a-new-industrial-takeoff-in-punjab-shiva-texfabs-big-move-to-boost-the-states-growth-momentum/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 08 Oct 2025 11:09:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब में इन दिनों उद्योगों का दौर फिर से लौटता दिख रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की सरकार लगातार ऐसी नीतियाँ बना रही है जिनसे निवेशकों का भरोसा बढ़े और राज्य में नई इंडस्ट्री लगे। अब इसी कड़ी में एक बड़ा नाम जुड़ गया है — <strong>शिवा टेक्सफैब्स (</strong><strong>Shiva Texfabs)</strong>, जो लुधियाना की मशहूर टेक्सटाइल कंपनी है।

हाल ही में चर्चा है कि कंपनी ने <strong>₹815 </strong><strong>करोड़</strong> के निवेश की योजना बनाई है, जिससे पंजाब के उद्योग क्षेत्र को नई मजबूती मिलेगी। यह निवेश लुधियाना में अत्याधुनिक टेक्सटाइल और अपैरल (Apparel) मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने के लिए किया जा रहा है। हालांकि अभी तक सरकार या कंपनी की ओर से इस निवेश को लेकर कोई <strong>आधिकारिक घोषणा (</strong><strong>official confirmation)</strong> नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक यह प्रोजेक्ट राज्य के लिए एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

<strong>क्या करती है शिवा टेक्सफैब्स</strong><strong>?</strong>

शिवा टेक्सफैब्स लुधियाना की एक जानी-मानी टेक्सटाइल कंपनी है। यह <strong>स्पन पॉलिएस्टर यार्न (</strong><strong>Spun Polyester Yarn)</strong>, <strong>फिलामेंट यार्न (</strong><strong>Filament Yarn)</strong>, और <strong>हाई परफॉर्मेंस फैब्रिक (</strong><strong>High-performance Fabric)</strong> बनाती है। कंपनी की शुरुआत साल <strong>2012</strong> में हुई थी और यह “शिवा ग्रुप” का हिस्सा है, जिसकी कई यूनिट्स लुधियाना जिले में काम कर रही हैं।

कंपनी का मकसद क्वालिटी के साथ इनोवेशन लाना है — यानी आधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके ऐसे कपड़े और धागे तैयार करना जो देश और विदेश दोनों बाजारों में पसंद किए जाएँ।

<strong>रीसाइक्लिंग और सस्टेनेबल प्रोडक्शन</strong>

शिवा टेक्सफैब्स सिर्फ कपड़ा बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी जिम्मेदार भूमिका निभा रही है। कंपनी <strong>रीसाइकिल्ड प्लास्टिक बोतलों (</strong><strong>PET bottles)</strong> से धागा और फैब्रिक बनाती है। इसके लिए उनके पास एक <strong>rPET </strong><strong>प्लांट (</strong><strong>Recycled Polyester Plant)</strong> भी है, जहाँ पुराने प्लास्टिक से नया धागा तैयार किया जाता है।

कंपनी का कहना है कि “वेस्ट को वैल्यू (Waste to Value)” में बदलना उनका मिशन है — यानी कचरे से उपयोगी चीज़ें बनाना।

<strong>Rudra Ecovation </strong><strong>के साथ जुड़ाव</strong>

हाल में एक और बड़ी खबर आई है — <strong>Rudra Ecovation Limited</strong> ने शिवा टेक्सफैब्स में <strong>21.46% </strong><strong>हिस्सेदारी (</strong><strong>equity stake)</strong> लेने का फैसला किया है। इस कदम से कंपनी को अपने विस्तार (expansion) और नए प्रोजेक्ट्स के लिए फंडिंग मिलेगी।
Rudra Ecovation ने अपने बोर्ड मीटिंग में बताया कि यह साझेदारी (partnership) शिवा टेक्सफैब्स के विकास को और तेज करेगी और दोनों कंपनियाँ मिलकर टेक्सटाइल सेक्टर में सस्टेनेबल प्रोडक्शन की दिशा में काम करेंगी।

<strong>मान सरकार की भूमिका और नीति</strong>

मुख्यमंत्री <strong>भगवंत मान</strong> की सरकार ने हाल के वर्षों में "Ease of Doing Business" पर खास ध्यान दिया है। सरकार की नई <strong>औद्योगिक नीति (</strong><strong>Industrial Policy)</strong> ने लालफीताशाही (bureaucratic hurdles) को काफी हद तक कम किया है।
अब कंपनियों को फैक्ट्री लगाने, फाइल पास कराने और परमिशन लेने में पहले जैसी मुश्किलें नहीं होतीं। सिंगल-विंडो सिस्टम (Single Window System) के तहत सब कुछ तेज़ी और पारदर्शिता से होता है।

यही वजह है कि अब निवेशक पंजाब को एक <strong>“Most Preferred Destination”</strong> के रूप में देख रहे हैं।

<strong>रोजगार और स्थानीय विकास</strong>

अगर शिवा टेक्सफैब्स का यह ₹815 करोड़ वाला निवेश प्रोजेक्ट हकीकत में शुरू होता है, तो इससे पंजाब के हज़ारों युवाओं को नौकरी मिलेगी।
नई यूनिट में न केवल डायरेक्ट जॉब्स (Direct Jobs) मिलेंगी बल्कि छोटे व्यवसायों, ट्रांसपोर्ट, सप्लाई चेन और सर्विस सेक्टर को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था में नई जान आएगी।

<strong>खेती के साथ उद्योग भी </strong><strong>— </strong><strong>नया पंजाब</strong>

कभी सिर्फ कृषि प्रधान राज्य कहे जाने वाला पंजाब अब धीरे-धीरे उद्योगों का केंद्र भी बन रहा है।
“जहाँ खेत में गेहूँ का दाना उगता है, वहीं अब फैक्ट्री में खुशहाली का ताना-बाना बुना जाएगा।”
यह निवेश पंजाब के उस सपने की शुरुआत है जहाँ हर हाथ को काम और हर परिवार को मुस्कान मिलेगी।

हालांकि ₹815 करोड़ के निवेश की पुष्टि अभी बाकी है, लेकिन <strong>Rudra Ecovation </strong><strong>और शिवा टेक्सफैब्स</strong> के बीच बढ़ता सहयोग, कंपनी की रीसाइक्लिंग तकनीक, और पंजाब सरकार की उद्योग-हितैषी नीतियाँ इस बात का संकेत हैं कि राज्य अब तेज़ी से “Industrial Punjab” की दिशा में बढ़ रहा है।

यह सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि पंजाब की <strong>नई औद्योगिक पहचान</strong> की ओर उठाया गया मजबूत कदम है —“अब पंजाब में सिर्फ़ इतिहास नहीं लिखा जाएगा, बल्कि भविष्य के कारखाने भी यहीं खड़े होंगे।”]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब में इन दिनों उद्योगों का दौर फिर से लौटता दिख रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की सरकार लगातार ऐसी नीतियाँ बना रही है जिनसे निवेशकों का भरोसा बढ़े और राज्य में नई इंडस्ट्री लगे। अब इसी कड़ी में एक बड़ा नाम जुड़ गया है — <strong>शिवा टेक्सफैब्स (</strong><strong>Shiva Texfabs)</strong>, जो लुधियाना की मशहूर टेक्सटाइल कंपनी है।

हाल ही में चर्चा है कि कंपनी ने <strong>₹815 </strong><strong>करोड़</strong> के निवेश की योजना बनाई है, जिससे पंजाब के उद्योग क्षेत्र को नई मजबूती मिलेगी। यह निवेश लुधियाना में अत्याधुनिक टेक्सटाइल और अपैरल (Apparel) मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने के लिए किया जा रहा है। हालांकि अभी तक सरकार या कंपनी की ओर से इस निवेश को लेकर कोई <strong>आधिकारिक घोषणा (</strong><strong>official confirmation)</strong> नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक यह प्रोजेक्ट राज्य के लिए एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

<strong>क्या करती है शिवा टेक्सफैब्स</strong><strong>?</strong>

शिवा टेक्सफैब्स लुधियाना की एक जानी-मानी टेक्सटाइल कंपनी है। यह <strong>स्पन पॉलिएस्टर यार्न (</strong><strong>Spun Polyester Yarn)</strong>, <strong>फिलामेंट यार्न (</strong><strong>Filament Yarn)</strong>, और <strong>हाई परफॉर्मेंस फैब्रिक (</strong><strong>High-performance Fabric)</strong> बनाती है। कंपनी की शुरुआत साल <strong>2012</strong> में हुई थी और यह “शिवा ग्रुप” का हिस्सा है, जिसकी कई यूनिट्स लुधियाना जिले में काम कर रही हैं।

कंपनी का मकसद क्वालिटी के साथ इनोवेशन लाना है — यानी आधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके ऐसे कपड़े और धागे तैयार करना जो देश और विदेश दोनों बाजारों में पसंद किए जाएँ।

<strong>रीसाइक्लिंग और सस्टेनेबल प्रोडक्शन</strong>

शिवा टेक्सफैब्स सिर्फ कपड़ा बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी जिम्मेदार भूमिका निभा रही है। कंपनी <strong>रीसाइकिल्ड प्लास्टिक बोतलों (</strong><strong>PET bottles)</strong> से धागा और फैब्रिक बनाती है। इसके लिए उनके पास एक <strong>rPET </strong><strong>प्लांट (</strong><strong>Recycled Polyester Plant)</strong> भी है, जहाँ पुराने प्लास्टिक से नया धागा तैयार किया जाता है।

कंपनी का कहना है कि “वेस्ट को वैल्यू (Waste to Value)” में बदलना उनका मिशन है — यानी कचरे से उपयोगी चीज़ें बनाना।

<strong>Rudra Ecovation </strong><strong>के साथ जुड़ाव</strong>

हाल में एक और बड़ी खबर आई है — <strong>Rudra Ecovation Limited</strong> ने शिवा टेक्सफैब्स में <strong>21.46% </strong><strong>हिस्सेदारी (</strong><strong>equity stake)</strong> लेने का फैसला किया है। इस कदम से कंपनी को अपने विस्तार (expansion) और नए प्रोजेक्ट्स के लिए फंडिंग मिलेगी।
Rudra Ecovation ने अपने बोर्ड मीटिंग में बताया कि यह साझेदारी (partnership) शिवा टेक्सफैब्स के विकास को और तेज करेगी और दोनों कंपनियाँ मिलकर टेक्सटाइल सेक्टर में सस्टेनेबल प्रोडक्शन की दिशा में काम करेंगी।

<strong>मान सरकार की भूमिका और नीति</strong>

मुख्यमंत्री <strong>भगवंत मान</strong> की सरकार ने हाल के वर्षों में "Ease of Doing Business" पर खास ध्यान दिया है। सरकार की नई <strong>औद्योगिक नीति (</strong><strong>Industrial Policy)</strong> ने लालफीताशाही (bureaucratic hurdles) को काफी हद तक कम किया है।
अब कंपनियों को फैक्ट्री लगाने, फाइल पास कराने और परमिशन लेने में पहले जैसी मुश्किलें नहीं होतीं। सिंगल-विंडो सिस्टम (Single Window System) के तहत सब कुछ तेज़ी और पारदर्शिता से होता है।

यही वजह है कि अब निवेशक पंजाब को एक <strong>“Most Preferred Destination”</strong> के रूप में देख रहे हैं।

<strong>रोजगार और स्थानीय विकास</strong>

अगर शिवा टेक्सफैब्स का यह ₹815 करोड़ वाला निवेश प्रोजेक्ट हकीकत में शुरू होता है, तो इससे पंजाब के हज़ारों युवाओं को नौकरी मिलेगी।
नई यूनिट में न केवल डायरेक्ट जॉब्स (Direct Jobs) मिलेंगी बल्कि छोटे व्यवसायों, ट्रांसपोर्ट, सप्लाई चेन और सर्विस सेक्टर को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था में नई जान आएगी।

<strong>खेती के साथ उद्योग भी </strong><strong>— </strong><strong>नया पंजाब</strong>

कभी सिर्फ कृषि प्रधान राज्य कहे जाने वाला पंजाब अब धीरे-धीरे उद्योगों का केंद्र भी बन रहा है।
“जहाँ खेत में गेहूँ का दाना उगता है, वहीं अब फैक्ट्री में खुशहाली का ताना-बाना बुना जाएगा।”
यह निवेश पंजाब के उस सपने की शुरुआत है जहाँ हर हाथ को काम और हर परिवार को मुस्कान मिलेगी।

हालांकि ₹815 करोड़ के निवेश की पुष्टि अभी बाकी है, लेकिन <strong>Rudra Ecovation </strong><strong>और शिवा टेक्सफैब्स</strong> के बीच बढ़ता सहयोग, कंपनी की रीसाइक्लिंग तकनीक, और पंजाब सरकार की उद्योग-हितैषी नीतियाँ इस बात का संकेत हैं कि राज्य अब तेज़ी से “Industrial Punjab” की दिशा में बढ़ रहा है।

यह सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि पंजाब की <strong>नई औद्योगिक पहचान</strong> की ओर उठाया गया मजबूत कदम है —“अब पंजाब में सिर्फ़ इतिहास नहीं लिखा जाएगा, बल्कि भविष्य के कारखाने भी यहीं खड़े होंगे।”]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>Modi Government का बड़ा Decision: कपास पर Import Duty हटाने से किसानों में गुस्सा, Kejriwal बोले- &#8220;किसानों के साथ बड़ा धोखा&#8221;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 13 Sep 2025 05:22:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[News]]></category>
		<category><![CDATA[AAP]]></category>
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		<category><![CDATA[Vidarbha]]></category>
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					<description><![CDATA[देश के किसानों के लिए आने वाले दिन मुश्किल भरे हो सकते हैं। केंद्र सरकार ने हाल ही में एक ऐसा बड़ा फैसला लिया है, जिसे लेकर राजनीति गरमा गई है। सरकार ने अमेरिका से आने वाली <strong>कपास (Cotton)</strong> पर लगने वाली <strong>11% </strong><strong>आयात शुल्क (Import Duty)</strong> को हटा दिया है। पहले अमेरिका से भारत आने वाली कपास पर यह टैक्स लागू था, लेकिन अब यह छूट <strong>19 </strong><strong>अगस्त से 30 </strong><strong>सितंबर 2025 </strong><strong>तक</strong> यानी <strong>40 </strong><strong>दिनों</strong> के लिए दी गई है। बाद में वित्त मंत्रालय ने इस छूट को <strong>31 </strong><strong>दिसंबर 2025 </strong><strong>तक बढ़ाने</strong> का ऐलान किया।

इस फैसले को लेकर किसानों में गुस्सा है और विपक्षी दलों ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री <strong>अरविंद केजरीवाल</strong> ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र पर सीधा हमला बोला है।

<strong>केजरीवाल का आरोप: किसानों की पीठ में छुरा घोंपा गया</strong>

गुरुवार (28 अगस्त) को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मोदी सरकार ने यह फैसला किसानों से बिना सलाह-मशविरा किए, <strong>चोरी-छिपे</strong>, अमेरिका के दबाव में लिया है।

उन्होंने कहा:

<em>"</em><em>अभी 90-95% </em><em>किसानों को इस फैसले की जानकारी ही नहीं है। जब उन्हें असलियत पता चलेगी, </em><em>तो कई किसान आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो जाएंगे।"</em>

केजरीवाल के मुताबिक, इस फैसले का सबसे बड़ा नुकसान यह होगा कि जब अक्टूबर में भारतीय किसानों की कपास मंडियों में आएगी, तब तक भारत की <strong>टेक्सटाइल इंडस्ट्री</strong> अमेरिका से सस्ती कपास खरीद चुकी होगी।

उन्होंने बताया कि अमेरिकी कपास <strong>भारतीय कपास से ₹15-20 </strong><strong>प्रति किलो सस्ती</strong> है। ऐसे में भारतीय किसानों की कपास <strong>कोई नहीं खरीदेगा</strong>, और उन्हें औने-पौने दामों पर अपनी फसल बेचनी पड़ेगी।

<strong>किसानों पर सबसे ज्यादा असर किन राज्यों में होगा</strong>

इस फैसले से खासकर इन राज्यों के किसान प्रभावित होंगे:
<ul>
 	<li><strong>गुजरात</strong></li>
 	<li><strong>पंजाब</strong></li>
 	<li><strong>महाराष्ट्र का विदर्भ क्षेत्र</strong></li>
 	<li><strong>तेलंगाना</strong></li>
</ul>
ये वो राज्य हैं जहां कपास की खेती बड़े पैमाने पर होती है। खास बात यह है कि विदर्भ और गुजरात जैसे इलाकों में पहले से ही किसान आत्महत्या के मामले काफी ज्यादा हैं।

केजरीवाल ने बताया कि <strong>जनवरी से मार्च 2025 </strong><strong>के बीच सिर्फ महाराष्ट्र में 767 </strong><strong>किसानों ने आत्महत्या की।</strong>

<em>"</em><em>मदद करने की बजाय मोदी सरकार ने उनकी पीठ में छुरा घोंपा है,"</em> उन्होंने कहा।

<strong>भारत-अमेरिका के बीच </strong><strong>Trade War</strong>

यह मामला सिर्फ कपास का ही नहीं है, बल्कि <strong>भारत और अमेरिका के बीच चल रही टैरिफ जंग (Tariff War)</strong> का भी हिस्सा है।
<ul>
 	<li>अमेरिका के राष्ट्रपति <strong>डोनाल्ड ट्रंप</strong> ने भारतीय सामान पर <strong>50% </strong><strong>टैरिफ</strong> लगा दिया, जो <strong>27 </strong><strong>अगस्त 2025 </strong><strong>से लागू</strong> हो गया।</li>
 	<li>केजरीवाल का कहना है कि जब अमेरिका ने यह किया, तब भारत को भी उसी तरह जवाब देना चाहिए था।</li>
 	<li>लेकिन मोदी सरकार ने उल्टा अमेरिकी सामान पर टैरिफ <strong>खत्म कर दिया</strong>, जिससे अमेरिका को फायदा और भारत को नुकसान हुआ।</li>
</ul>
<h3><strong>दूसरे देशों ने कैसे जवाब दिया:</strong></h3>
<ul>
 	<li><strong>यूरोपियन यूनियन (EU)</strong>: अमेरिका ने उनकी कारों पर 25% टैरिफ लगाया, तो EU ने मोटरसाइकिलों पर 50% टैरिफ लगाया।</li>
 	<li><strong>चीन</strong>: अमेरिका ने 145% टैरिफ लगाया, तो चीन ने 125% लगाया।</li>
 	<li><strong>कनाडा और मेक्सिको</strong>: दोनों ने भी अमेरिका को कड़ा जवाब दिया।</li>
</ul>
केजरीवाल ने कहा:

<em>"</em><em>ट्रंप एक कायर आदमी है। जो देश उसके खिलाफ खड़ा हुआ, </em><em>ट्रंप को उसके सामने झुकना पड़ा। लेकिन मोदी जी ट्रंप के सामने भीगी बिल्ली बने हुए हैं।"</em>

<strong>किसानों की बड़ी चिंता</strong>

केजरीवाल ने कहा कि जुलाई में किसानों ने कर्ज लेकर कपास की बुवाई की है।
<ul>
 	<li>अक्टूबर से उनकी कपास मंडियों में आने लगेगी।</li>
 	<li>लेकिन 30 सितंबर तक इंडस्ट्री अमेरिका से सस्ती कपास खरीद लेगी।</li>
 	<li>नतीजतन, भारतीय किसानों की फसल <strong>या तो बहुत कम दाम पर बिकेगी, </strong><strong>या बिकेगी ही नहीं।</strong></li>
</ul>
उन्होंने पिछले साल का उदाहरण देते हुए कहा कि:
<ul>
 	<li><strong>MSP (Minimum Support Price)</strong> ₹7,000 प्रति क्विंटल था,</li>
 	<li>लेकिन किसान को मंडियों में केवल <strong>₹6,000 </strong><strong>या उससे भी कम</strong> दाम मिला।</li>
 	<li>इस साल यह हालत और भी खराब होगी।</li>
</ul>
<strong>मोदी सरकार क्यों झुकी</strong><strong>? </strong><strong>केजरीवाल का सवाल</strong>

केजरीवाल ने सवाल उठाया कि आखिर मोदी सरकार अमेरिकी दबाव में क्यों झुकी?

<em>"</em><em>देश की आबादी 140 </em><em>करोड़ है। इतनी बड़ी मार्केट है कि कोई भी देश हमारी नाराजगी बर्दाश्त नहीं कर सकता। फिर मोदी जी क्यों झुके?"</em>

उन्होंने आरोप लगाया कि चर्चा है कि:
<ul>
 	<li>अमेरिका में <strong>अडानी ग्रुप</strong> से जुड़े मामलों की जांच चल रही है।</li>
 	<li>अडानी की गिरफ्तारी हो सकती है।</li>
 	<li>मोदी सरकार अडानी को बचाने के लिए देश के किसानों और उद्योगपतियों को दांव पर लगा रही है।</li>
</ul>
केजरीवाल ने कहा कि उन्हें इसकी पुष्टि नहीं है, लेकिन अगर यह सच हुआ तो यह <strong>देश के साथ बहुत बड़ा धोखा</strong> होगा।

<strong>AAP </strong><strong>की बड़ी रैली की घोषणा</strong>
<ul>
 	<li><strong>7 </strong><strong>सितंबर 2025</strong> को <strong>गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले के चोटीला</strong> में आम आदमी पार्टी एक <strong>बड़ी जनसभा</strong> करेगी।</li>
 	<li>यह इलाका गुजरात का सबसे बड़ा <strong>कपास उत्पादक क्षेत्र</strong> है।</li>
 	<li>इस रैली में किसानों को एकजुट कर सरकार के खिलाफ आवाज उठाई जाएगी।</li>
 	<li>केजरीवाल ने अन्य राजनीतिक दलों और किसान संगठनों से भी एकजुट होने की अपील की।</li>
</ul>
<strong>केजरीवाल की मुख्य मांगें</strong>
<ol>
 	<li><strong>कपास पर तुरंत 11% Import Duty </strong><strong>वापस लगाई जाए।</strong></li>
 	<li>अमेरिकी सामान पर भी <strong>रिटैलिएटरी टैरिफ</strong> (50% या उससे ज्यादा) लगाया जाए।</li>
 	<li>किसानों को उनकी फसल के <strong>उचित दाम</strong> दिए जाएं।</li>
</ol>
&nbsp;

<a href="https://youtu.be/ZR86qcGow-I?si=AyFb-u-gNDDwksEy">https://youtu.be/ZR86qcGow-I?si=AyFb-u-gNDDwksEy</a>

&nbsp;

<strong>वित्त मंत्रालय का बयान</strong>

वित्त मंत्रालय ने कहा है कि यह फैसला <strong>निर्यातकों को राहत</strong> देने के लिए लिया गया है।

<em>"</em><em>कपास (HS 5201) </em><em>पर आयात शुल्क छूट को 30 </em><em>सितंबर से बढ़ाकर 31 </em><em>दिसंबर 2025 </em><em>तक कर दिया गया है।"</em>

लेकिन सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि किसानों को इस फैसले से होने वाले नुकसान की भरपाई कैसे होगी।

मोदी सरकार के इस कदम ने किसानों के बीच चिंता बढ़ा दी है।
<ul>
 	<li>जहां एक तरफ अमेरिका को इससे बड़ा फायदा मिलेगा,</li>
 	<li>वहीं भारतीय किसान और उद्योगपति <strong>भारी नुकसान</strong> झेलेंगे।</li>
 	<li>अक्टूबर में मंडियों में आने वाली कपास की फसल की खरीद को लेकर <strong>भारी संकट</strong> खड़ा हो सकता है।</li>
</ul>
अरविंद केजरीवाल ने इसे <strong>किसानों के साथ धोखा</strong> करार देते हुए कहा कि अगर सरकार ने यह फैसला वापस नहीं लिया, तो यह <strong>कृषि क्षेत्र के लिए विनाशकारी साबित होगा।</strong>

&nbsp;
<div id="mvp-content-main" class="left relative">

<strong>NOTE: NEWS SOURCE AVP News Punjab</strong>

</div>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[देश के किसानों के लिए आने वाले दिन मुश्किल भरे हो सकते हैं। केंद्र सरकार ने हाल ही में एक ऐसा बड़ा फैसला लिया है, जिसे लेकर राजनीति गरमा गई है। सरकार ने अमेरिका से आने वाली <strong>कपास (Cotton)</strong> पर लगने वाली <strong>11% </strong><strong>आयात शुल्क (Import Duty)</strong> को हटा दिया है। पहले अमेरिका से भारत आने वाली कपास पर यह टैक्स लागू था, लेकिन अब यह छूट <strong>19 </strong><strong>अगस्त से 30 </strong><strong>सितंबर 2025 </strong><strong>तक</strong> यानी <strong>40 </strong><strong>दिनों</strong> के लिए दी गई है। बाद में वित्त मंत्रालय ने इस छूट को <strong>31 </strong><strong>दिसंबर 2025 </strong><strong>तक बढ़ाने</strong> का ऐलान किया।

इस फैसले को लेकर किसानों में गुस्सा है और विपक्षी दलों ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री <strong>अरविंद केजरीवाल</strong> ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र पर सीधा हमला बोला है।

<strong>केजरीवाल का आरोप: किसानों की पीठ में छुरा घोंपा गया</strong>

गुरुवार (28 अगस्त) को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मोदी सरकार ने यह फैसला किसानों से बिना सलाह-मशविरा किए, <strong>चोरी-छिपे</strong>, अमेरिका के दबाव में लिया है।

उन्होंने कहा:

<em>"</em><em>अभी 90-95% </em><em>किसानों को इस फैसले की जानकारी ही नहीं है। जब उन्हें असलियत पता चलेगी, </em><em>तो कई किसान आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो जाएंगे।"</em>

केजरीवाल के मुताबिक, इस फैसले का सबसे बड़ा नुकसान यह होगा कि जब अक्टूबर में भारतीय किसानों की कपास मंडियों में आएगी, तब तक भारत की <strong>टेक्सटाइल इंडस्ट्री</strong> अमेरिका से सस्ती कपास खरीद चुकी होगी।

उन्होंने बताया कि अमेरिकी कपास <strong>भारतीय कपास से ₹15-20 </strong><strong>प्रति किलो सस्ती</strong> है। ऐसे में भारतीय किसानों की कपास <strong>कोई नहीं खरीदेगा</strong>, और उन्हें औने-पौने दामों पर अपनी फसल बेचनी पड़ेगी।

<strong>किसानों पर सबसे ज्यादा असर किन राज्यों में होगा</strong>

इस फैसले से खासकर इन राज्यों के किसान प्रभावित होंगे:
<ul>
 	<li><strong>गुजरात</strong></li>
 	<li><strong>पंजाब</strong></li>
 	<li><strong>महाराष्ट्र का विदर्भ क्षेत्र</strong></li>
 	<li><strong>तेलंगाना</strong></li>
</ul>
ये वो राज्य हैं जहां कपास की खेती बड़े पैमाने पर होती है। खास बात यह है कि विदर्भ और गुजरात जैसे इलाकों में पहले से ही किसान आत्महत्या के मामले काफी ज्यादा हैं।

केजरीवाल ने बताया कि <strong>जनवरी से मार्च 2025 </strong><strong>के बीच सिर्फ महाराष्ट्र में 767 </strong><strong>किसानों ने आत्महत्या की।</strong>

<em>"</em><em>मदद करने की बजाय मोदी सरकार ने उनकी पीठ में छुरा घोंपा है,"</em> उन्होंने कहा।

<strong>भारत-अमेरिका के बीच </strong><strong>Trade War</strong>

यह मामला सिर्फ कपास का ही नहीं है, बल्कि <strong>भारत और अमेरिका के बीच चल रही टैरिफ जंग (Tariff War)</strong> का भी हिस्सा है।
<ul>
 	<li>अमेरिका के राष्ट्रपति <strong>डोनाल्ड ट्रंप</strong> ने भारतीय सामान पर <strong>50% </strong><strong>टैरिफ</strong> लगा दिया, जो <strong>27 </strong><strong>अगस्त 2025 </strong><strong>से लागू</strong> हो गया।</li>
 	<li>केजरीवाल का कहना है कि जब अमेरिका ने यह किया, तब भारत को भी उसी तरह जवाब देना चाहिए था।</li>
 	<li>लेकिन मोदी सरकार ने उल्टा अमेरिकी सामान पर टैरिफ <strong>खत्म कर दिया</strong>, जिससे अमेरिका को फायदा और भारत को नुकसान हुआ।</li>
</ul>
<h3><strong>दूसरे देशों ने कैसे जवाब दिया:</strong></h3>
<ul>
 	<li><strong>यूरोपियन यूनियन (EU)</strong>: अमेरिका ने उनकी कारों पर 25% टैरिफ लगाया, तो EU ने मोटरसाइकिलों पर 50% टैरिफ लगाया।</li>
 	<li><strong>चीन</strong>: अमेरिका ने 145% टैरिफ लगाया, तो चीन ने 125% लगाया।</li>
 	<li><strong>कनाडा और मेक्सिको</strong>: दोनों ने भी अमेरिका को कड़ा जवाब दिया।</li>
</ul>
केजरीवाल ने कहा:

<em>"</em><em>ट्रंप एक कायर आदमी है। जो देश उसके खिलाफ खड़ा हुआ, </em><em>ट्रंप को उसके सामने झुकना पड़ा। लेकिन मोदी जी ट्रंप के सामने भीगी बिल्ली बने हुए हैं।"</em>

<strong>किसानों की बड़ी चिंता</strong>

केजरीवाल ने कहा कि जुलाई में किसानों ने कर्ज लेकर कपास की बुवाई की है।
<ul>
 	<li>अक्टूबर से उनकी कपास मंडियों में आने लगेगी।</li>
 	<li>लेकिन 30 सितंबर तक इंडस्ट्री अमेरिका से सस्ती कपास खरीद लेगी।</li>
 	<li>नतीजतन, भारतीय किसानों की फसल <strong>या तो बहुत कम दाम पर बिकेगी, </strong><strong>या बिकेगी ही नहीं।</strong></li>
</ul>
उन्होंने पिछले साल का उदाहरण देते हुए कहा कि:
<ul>
 	<li><strong>MSP (Minimum Support Price)</strong> ₹7,000 प्रति क्विंटल था,</li>
 	<li>लेकिन किसान को मंडियों में केवल <strong>₹6,000 </strong><strong>या उससे भी कम</strong> दाम मिला।</li>
 	<li>इस साल यह हालत और भी खराब होगी।</li>
</ul>
<strong>मोदी सरकार क्यों झुकी</strong><strong>? </strong><strong>केजरीवाल का सवाल</strong>

केजरीवाल ने सवाल उठाया कि आखिर मोदी सरकार अमेरिकी दबाव में क्यों झुकी?

<em>"</em><em>देश की आबादी 140 </em><em>करोड़ है। इतनी बड़ी मार्केट है कि कोई भी देश हमारी नाराजगी बर्दाश्त नहीं कर सकता। फिर मोदी जी क्यों झुके?"</em>

उन्होंने आरोप लगाया कि चर्चा है कि:
<ul>
 	<li>अमेरिका में <strong>अडानी ग्रुप</strong> से जुड़े मामलों की जांच चल रही है।</li>
 	<li>अडानी की गिरफ्तारी हो सकती है।</li>
 	<li>मोदी सरकार अडानी को बचाने के लिए देश के किसानों और उद्योगपतियों को दांव पर लगा रही है।</li>
</ul>
केजरीवाल ने कहा कि उन्हें इसकी पुष्टि नहीं है, लेकिन अगर यह सच हुआ तो यह <strong>देश के साथ बहुत बड़ा धोखा</strong> होगा।

<strong>AAP </strong><strong>की बड़ी रैली की घोषणा</strong>
<ul>
 	<li><strong>7 </strong><strong>सितंबर 2025</strong> को <strong>गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले के चोटीला</strong> में आम आदमी पार्टी एक <strong>बड़ी जनसभा</strong> करेगी।</li>
 	<li>यह इलाका गुजरात का सबसे बड़ा <strong>कपास उत्पादक क्षेत्र</strong> है।</li>
 	<li>इस रैली में किसानों को एकजुट कर सरकार के खिलाफ आवाज उठाई जाएगी।</li>
 	<li>केजरीवाल ने अन्य राजनीतिक दलों और किसान संगठनों से भी एकजुट होने की अपील की।</li>
</ul>
<strong>केजरीवाल की मुख्य मांगें</strong>
<ol>
 	<li><strong>कपास पर तुरंत 11% Import Duty </strong><strong>वापस लगाई जाए।</strong></li>
 	<li>अमेरिकी सामान पर भी <strong>रिटैलिएटरी टैरिफ</strong> (50% या उससे ज्यादा) लगाया जाए।</li>
 	<li>किसानों को उनकी फसल के <strong>उचित दाम</strong> दिए जाएं।</li>
</ol>
&nbsp;

<a href="https://youtu.be/ZR86qcGow-I?si=AyFb-u-gNDDwksEy">https://youtu.be/ZR86qcGow-I?si=AyFb-u-gNDDwksEy</a>

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<strong>वित्त मंत्रालय का बयान</strong>

वित्त मंत्रालय ने कहा है कि यह फैसला <strong>निर्यातकों को राहत</strong> देने के लिए लिया गया है।

<em>"</em><em>कपास (HS 5201) </em><em>पर आयात शुल्क छूट को 30 </em><em>सितंबर से बढ़ाकर 31 </em><em>दिसंबर 2025 </em><em>तक कर दिया गया है।"</em>

लेकिन सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि किसानों को इस फैसले से होने वाले नुकसान की भरपाई कैसे होगी।

मोदी सरकार के इस कदम ने किसानों के बीच चिंता बढ़ा दी है।
<ul>
 	<li>जहां एक तरफ अमेरिका को इससे बड़ा फायदा मिलेगा,</li>
 	<li>वहीं भारतीय किसान और उद्योगपति <strong>भारी नुकसान</strong> झेलेंगे।</li>
 	<li>अक्टूबर में मंडियों में आने वाली कपास की फसल की खरीद को लेकर <strong>भारी संकट</strong> खड़ा हो सकता है।</li>
</ul>
अरविंद केजरीवाल ने इसे <strong>किसानों के साथ धोखा</strong> करार देते हुए कहा कि अगर सरकार ने यह फैसला वापस नहीं लिया, तो यह <strong>कृषि क्षेत्र के लिए विनाशकारी साबित होगा।</strong>

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<div id="mvp-content-main" class="left relative">

<strong>NOTE: NEWS SOURCE AVP News Punjab</strong>

</div>]]></content:encoded>
					
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			</item>
		<item>
		<title>Punjab में बनेगी नई Industrial Policy, Government बनाएगी Sector-Wise Industry Committees: Sanjeev Arora</title>
		<link>https://trendstopic.in/punjab-to-form-new-industrial-policy-government-to-set-up-sector-wise-industry-committees-sanjeev-arora/</link>
					<comments>https://trendstopic.in/punjab-to-form-new-industrial-policy-government-to-set-up-sector-wise-industry-committees-sanjeev-arora/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 18 Jul 2025 04:33:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[BusinessGrowth]]></category>
		<category><![CDATA[EaseOfDoingBusiness]]></category>
		<category><![CDATA[EconomicDevelopment]]></category>
		<category><![CDATA[ElectricVehicles]]></category>
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		<category><![CDATA[IndustryCommittees]]></category>
		<category><![CDATA[Investment]]></category>
		<category><![CDATA[MakeInPunjab]]></category>
		<category><![CDATA[Manufacturing]]></category>
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		<category><![CDATA[RenewableEnergy]]></category>
		<category><![CDATA[SanjeevArora]]></category>
		<category><![CDATA[TextileIndustry]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://trendstopic.in/?p=24427</guid>

					<description><![CDATA[<em>उद्देश्य: बिज़नेस करना आसान बनाना, निवेश को बढ़ावा देना और समावेशी विकास को बढ़ाना</em>

पंजाब सरकार जल्द ही एक नई <strong>इंडस्ट्रियल पॉलिसी (औद्योगिक नीति)</strong> लेकर आ रही है। इस पॉलिसी को तैयार करने में <strong>इंडस्ट्री सेक्टर की राय</strong> को सबसे ऊपर रखा जाएगा। इसके लिए सरकार 22 अलग-अलग सेक्टरों के लिए <strong>इंडस्ट्री कमेटियां</strong> बनाएगी। ये जानकारी पंजाब के <strong>उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा</strong> ने मीडिया से बातचीत के दौरान दी।

<strong>कौन-कौन सी होंगी ये इंडस्ट्री कमेटियां</strong><strong>?</strong>

संजीव अरोड़ा ने बताया कि हर कमेटी में <strong>8 </strong><strong>से 10 </strong><strong>सदस्य होंगे</strong>, जिसमें एक चेयरमैन (अध्यक्ष) भी शामिल होगा। ये सभी सदस्य <strong>उद्योग जगत से जुड़े लोग</strong> होंगे। इन कमेटियों का कार्यकाल <strong>दो साल का</strong> होगा।

कमेटियां इन सेक्टरों के लिए बनाई जाएंगी:
<strong>टेक्सटाइल, IT (</strong><strong>सूचना प्रौद्योगिकी), </strong><strong>स्पोर्ट्स गुड्स, </strong><strong>साइकिल इंडस्ट्री, </strong><strong>ऑटो और ऑटो पार्ट्स, </strong><strong>हेवी मशीनरी, </strong><strong>इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, </strong><strong>रिन्युएबल एनर्जी, </strong><strong>फूड प्रोसेसिंग, </strong><strong>स्टील, </strong><strong>केमिकल, </strong><strong>टूरिज़्म और हॉस्पिटैलिटी, </strong><strong>फिल्म और मीडिया, </strong><strong>फार्मास्युटिकल, </strong><strong>रिटेल और मैन्युफैक्चरिंग</strong> आदि।

<strong>क्या काम करेंगी ये कमेटियां</strong><strong>?</strong>

संजीव अरोड़ा ने कहा कि ये कमेटियां सरकार को सुझाव देंगी कि <strong>हर सेक्टर में क्या ज़रूरतें हैं</strong>, और <strong>नई नीति में क्या बदलाव किए जाने चाहिए।</strong>
सरकार ने इन कमेटियों से <strong>पहली रिपोर्ट 45 </strong><strong>दिनों में</strong> देने को कहा है ताकि जितनी जल्दी हो सके नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी को लागू किया जा सके।

<strong>"</strong><strong>कोई उद्योग पंजाब छोड़कर नहीं जा रहा"</strong>

जब उनसे पूछा गया कि कुछ टेक्सटाइल इंडस्ट्रियलिस्ट्स ने <strong>मध्य प्रदेश</strong> में निवेश क्यों किया है, तो मंत्री ने साफ कहा, "<strong>कोई पंजाब छोड़कर नहीं जा रहा है</strong>। वो अपने व्यापार का विस्तार कर रहे हैं, जहां रॉ मटीरियल और पोर्ट की सुविधा हो, वहां जाना लॉजिकल है। लेकिन पंजाब में भी उनका काम जारी है।”

गौरतलब है कि <strong>7 </strong><strong>जुलाई को एमपी के सीएम मोहन यादव</strong> ने लुधियाना में इंडस्ट्रियलिस्ट्स से मुलाकात की थी और कहा था कि पंजाब के उद्योगपतियों से उन्हें <strong>₹15,606 </strong><strong>करोड़ के निवेश प्रस्ताव</strong> मिले हैं।

<strong>बिजली कट को लेकर भी बोले मंत्री</strong>

जब उनसे पूछा गया कि कई इंडस्ट्रियलिस्ट्स <strong>बिना शेड्यूल के बिजली कट्स</strong> की शिकायत कर रहे हैं, तो उन्होंने कहा, “पंजाब में बिजली की कोई कमी नहीं है। बल्कि PSPCL (Punjab State Power Corporation Limited) तो कस्टमर तलाश रही है।
कुछ जगह <strong>ट्रांसमिशन या ग्रिड की समस्या</strong> होती है, लेकिन सरकार लगातार <strong>नए ग्रिड बना रही है और पुरानों को अपग्रेड</strong> किया जा रहा है। हम भरोसा देते हैं कि ये दिक्कत जल्द ही दूर हो जाएगी।”

पंजाब सरकार की यह पहल दिखाती है कि वह उद्योगों की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए काम कर रही है। इंडस्ट्री से डायरेक्ट इनपुट लेकर पॉलिसी बनाना एक <strong>सकारात्मक कदम</strong> है जिससे राज्य में <strong>निवेश बढ़ेगा</strong>, और <strong>बिज़नेस करना आसान</strong> होगा।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<em>उद्देश्य: बिज़नेस करना आसान बनाना, निवेश को बढ़ावा देना और समावेशी विकास को बढ़ाना</em>

पंजाब सरकार जल्द ही एक नई <strong>इंडस्ट्रियल पॉलिसी (औद्योगिक नीति)</strong> लेकर आ रही है। इस पॉलिसी को तैयार करने में <strong>इंडस्ट्री सेक्टर की राय</strong> को सबसे ऊपर रखा जाएगा। इसके लिए सरकार 22 अलग-अलग सेक्टरों के लिए <strong>इंडस्ट्री कमेटियां</strong> बनाएगी। ये जानकारी पंजाब के <strong>उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा</strong> ने मीडिया से बातचीत के दौरान दी।

<strong>कौन-कौन सी होंगी ये इंडस्ट्री कमेटियां</strong><strong>?</strong>

संजीव अरोड़ा ने बताया कि हर कमेटी में <strong>8 </strong><strong>से 10 </strong><strong>सदस्य होंगे</strong>, जिसमें एक चेयरमैन (अध्यक्ष) भी शामिल होगा। ये सभी सदस्य <strong>उद्योग जगत से जुड़े लोग</strong> होंगे। इन कमेटियों का कार्यकाल <strong>दो साल का</strong> होगा।

कमेटियां इन सेक्टरों के लिए बनाई जाएंगी:
<strong>टेक्सटाइल, IT (</strong><strong>सूचना प्रौद्योगिकी), </strong><strong>स्पोर्ट्स गुड्स, </strong><strong>साइकिल इंडस्ट्री, </strong><strong>ऑटो और ऑटो पार्ट्स, </strong><strong>हेवी मशीनरी, </strong><strong>इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, </strong><strong>रिन्युएबल एनर्जी, </strong><strong>फूड प्रोसेसिंग, </strong><strong>स्टील, </strong><strong>केमिकल, </strong><strong>टूरिज़्म और हॉस्पिटैलिटी, </strong><strong>फिल्म और मीडिया, </strong><strong>फार्मास्युटिकल, </strong><strong>रिटेल और मैन्युफैक्चरिंग</strong> आदि।

<strong>क्या काम करेंगी ये कमेटियां</strong><strong>?</strong>

संजीव अरोड़ा ने कहा कि ये कमेटियां सरकार को सुझाव देंगी कि <strong>हर सेक्टर में क्या ज़रूरतें हैं</strong>, और <strong>नई नीति में क्या बदलाव किए जाने चाहिए।</strong>
सरकार ने इन कमेटियों से <strong>पहली रिपोर्ट 45 </strong><strong>दिनों में</strong> देने को कहा है ताकि जितनी जल्दी हो सके नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी को लागू किया जा सके।

<strong>"</strong><strong>कोई उद्योग पंजाब छोड़कर नहीं जा रहा"</strong>

जब उनसे पूछा गया कि कुछ टेक्सटाइल इंडस्ट्रियलिस्ट्स ने <strong>मध्य प्रदेश</strong> में निवेश क्यों किया है, तो मंत्री ने साफ कहा, "<strong>कोई पंजाब छोड़कर नहीं जा रहा है</strong>। वो अपने व्यापार का विस्तार कर रहे हैं, जहां रॉ मटीरियल और पोर्ट की सुविधा हो, वहां जाना लॉजिकल है। लेकिन पंजाब में भी उनका काम जारी है।”

गौरतलब है कि <strong>7 </strong><strong>जुलाई को एमपी के सीएम मोहन यादव</strong> ने लुधियाना में इंडस्ट्रियलिस्ट्स से मुलाकात की थी और कहा था कि पंजाब के उद्योगपतियों से उन्हें <strong>₹15,606 </strong><strong>करोड़ के निवेश प्रस्ताव</strong> मिले हैं।

<strong>बिजली कट को लेकर भी बोले मंत्री</strong>

जब उनसे पूछा गया कि कई इंडस्ट्रियलिस्ट्स <strong>बिना शेड्यूल के बिजली कट्स</strong> की शिकायत कर रहे हैं, तो उन्होंने कहा, “पंजाब में बिजली की कोई कमी नहीं है। बल्कि PSPCL (Punjab State Power Corporation Limited) तो कस्टमर तलाश रही है।
कुछ जगह <strong>ट्रांसमिशन या ग्रिड की समस्या</strong> होती है, लेकिन सरकार लगातार <strong>नए ग्रिड बना रही है और पुरानों को अपग्रेड</strong> किया जा रहा है। हम भरोसा देते हैं कि ये दिक्कत जल्द ही दूर हो जाएगी।”

पंजाब सरकार की यह पहल दिखाती है कि वह उद्योगों की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए काम कर रही है। इंडस्ट्री से डायरेक्ट इनपुट लेकर पॉलिसी बनाना एक <strong>सकारात्मक कदम</strong> है जिससे राज्य में <strong>निवेश बढ़ेगा</strong>, और <strong>बिज़नेस करना आसान</strong> होगा।]]></content:encoded>
					
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