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	<title>SustainableFarming &#8211; Trends Topic</title>
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	<title>SustainableFarming &#8211; Trends Topic</title>
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	<item>
		<title>Mann सरकार की Science-Based schemes से Stubble-Burning Pollution में 94% गिरावट — ‘Punjab Model’ को Centre ने किया Approved, अब पूरे देश में होगा लागू</title>
		<link>https://trendstopic.in/mann-governments-science-based-initiatives-stubble-burning-pollution-drops-by-94-punjab-model-approved-by-the-centre-now-to-be-implemented-nationwide/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 03 Dec 2025 04:59:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चंडीगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[Agriculture]]></category>
		<category><![CDATA[CropResidueManagement]]></category>
		<category><![CDATA[Environment]]></category>
		<category><![CDATA[Farmers]]></category>
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		<category><![CDATA[StubbleSolution]]></category>
		<category><![CDATA[SustainableFarming]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब सरकार ने पराली जलाने की समस्या को लगभग खत्म कर देने जैसा बड़ा काम कर दिखाया है। इस बार पंजाब में पराली जलाने के मामले <strong>94% </strong><strong>तक कम</strong> हो गए हैं। 2016 में जहाँ <strong>80,879 </strong><strong>मामले</strong> दर्ज हुए थे, वहीं इस साल यानी 2025 में यह संख्या घटकर सिर्फ <strong>5,114 </strong><strong>रह गई</strong>। यह पिछले साल 2024 की तुलना में भी <strong>53% </strong><strong>कम</strong> है।

यह उपलब्धि केवल पंजाब के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक मजबूत मैसेज है कि अगर सरकार और किसान मिलकर काम करें, तो बड़ी से बड़ी पर्यावरण समस्या का हल निकाला जा सकता है। यही वजह है कि केंद्रीय कृषि मंत्री <strong>शिवराज सिंह चौहान</strong> ने इस मॉडल को पूरे देश में लागू करने की घोषणा की है। इसे अब <strong>‘</strong><strong>पंजाब मॉडल</strong><strong>’</strong> कहा जा रहा है।

<strong>सफलता का फॉर्मूला: सहयोग + विज्ञान + किसान-प्रथम सोच</strong>

मुख्यमंत्री <strong>भगवंत मान</strong> के नेतृत्व में सरकार ने ऐसा मॉडल अपनाया जिसमें किसानों को सज़ा देने के बजाय उन्हें समाधान, मशीनरी और पूरी मदद दी गई। किसानों की जरूरतों को समझकर, जमीन पर काम करने वाले अधिकारियों और वैज्ञानिकों को साथ लेकर एक सिस्टम तैयार किया गया।
<ol>
 	<li><strong>आधुनिक मशीनरी ने खेल बदला </strong><strong>— </strong><strong>भारी सब्सिडी से किसानों का फायदा</strong></li>
</ol>
2018-19 में शुरू हुए <strong>CRM (Crop Residue Management) </strong><strong>कार्यक्रम</strong> के तहत:
<ul>
 	<li>शुरुआत में सिर्फ <strong>25,000 </strong><strong>मशीनें</strong> थीं</li>
 	<li>आज (2025 तक) बढ़कर <strong>1.48 </strong><strong>लाख से ज़्यादा </strong><strong>CRM </strong><strong>मशीनें</strong> हो चुकी हैं</li>
 	<li>इनमें <strong>66,000 Super Seeders</strong> भी शामिल हैं</li>
</ul>
सरकार ने छोटे किसानों को मशीनों पर <strong>80% </strong><strong>तक सब्सिडी</strong> दी (पहले 50% थी)। हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, मल्चर, एम.बी. हल, बेलर जैसी मशीनों ने खेत में ही पराली को मिट्टी में मिलाना आसान बना दिया। इससे किसान बिना आग लगाए गेहूँ की बुवाई कर पा रहे हैं।

कृषि विभाग के निदेशक <strong>जसवंत सिंह</strong> के मुताबिक, मशीनें बढ़ने के बाद ही ग्राउंड लेवल पर बड़ा बदलाव दिखना शुरू हुआ।
<ol start="2">
 	<li><strong>एक्स-सीटू सॉल्यूशन </strong><strong>— </strong><strong>पराली से अब कमाई</strong></li>
</ol>
पहले पराली किसानों के लिए बेकार थी, इसलिए आग लगा देते थे। लेकिन अब सरकार ने पराली को बेचने और उसे उद्योगों तक पहुंचाने का सिस्टम बना दिया है।
<ul>
 	<li>बायोमास पावर प्लांट्स</li>
 	<li>पेपर मिल्स</li>
 	<li>बायो-CNG प्लांट्स</li>
 	<li>पैडी स्ट्रॉ पैलेट यूनिट्स</li>
</ul>
ये सभी सीधे किसानों से पराली खरीद रहे हैं।

पिछले साल उद्योगों ने <strong>27.6 </strong><strong>लाख टन पराली</strong> खरीदी थी।
इस साल यह संख्या बढ़कर <strong>75 </strong><strong>लाख टन (</strong><strong>7.50 </strong><strong>मिलियन टन)</strong> हो गई है।

यह सिस्टम एक तरह की <strong>Circular Economy</strong> बन गया है, जिससे किसानों को <strong>extra income</strong> भी मिल रही है।
<ol start="3">
 	<li><strong>गाँव-गाँव जागरूकता </strong><strong>— Door-to-Door Campaign </strong><strong>ने बदल दिया माइंडसेट</strong></li>
</ol>
सरकार ने सिर्फ मशीनें ही नहीं दीं—बल्कि किसानों की सोच बदलने के लिए बड़े स्तर पर campaigns चलाए।
<ul>
 	<li>गाँव स्तर पर CRM कमेटियाँ</li>
 	<li>Door-to-door outreach</li>
 	<li>मिट्टी की सेहत पर awareness</li>
 	<li>स्कूल–कॉलेज की भागीदारी</li>
 	<li>जिला प्रशासन + पुलिस + कृषि अधिकारियों की संयुक्त कार्रवाई</li>
</ul>
इन सब प्रयासों ने किसानों को समझाया कि पराली जलाने से मिट्टी की quality खराब होती है और long-term productivity गिरती है।

आज किसान खुद कह रहे हैं कि पराली जलाना उनके लिए नुकसानदायक है।
<ol start="4">
 	<li><strong> Satellite Monitoring </strong><strong>से कड़ी नज़र</strong><strong>, </strong><strong>लेकिन दंड नहीं </strong><strong>— Support </strong><strong>पर फोकस</strong></li>
</ol>
पंजाब Pollution Control Board और कृषि विभाग ने NASA और PRSC की satellite इमेजरी से लगातार निगरानी की।

लेकिन सरकार ने एक बात साफ रखी—
<em>किसानों को डराकर नहीं</em><em>, </em><em>समझाकर समाधान देना है।</em>

इसलिए FIR सिर्फ उन्हीं पर दर्ज हुई जो बार-बार, जानबूझकर नियम तोड़ते रहे। ऐसे मामलों की संख्या <strong>1963</strong> रही।

बाकियों को हर तरह की सहायता दी गई।
<ol start="5">
 	<li><strong>सरकार की आगे की योजना </strong><strong>— </strong><strong>मिट्टी की सेहत और मशीनरी की आसान उपलब्धता</strong></li>
</ol>
जसवंत सिंह ने कहा कि अब सरकार का फोकस है:
<ul>
 	<li>मिट्टी की quality बढ़ाना</li>
 	<li>CRM मशीनें हर दूर-दराज गांव तक पहुँचाना</li>
 	<li>पराली को पूरी तरह resource में बदलना</li>
</ul>
यह मॉडल अब पूरे भारत के लिए inspiration बन गया है।

<strong>नतीजा: भारत का सबसे सफल </strong><strong>Anti-Pollution </strong><strong>मॉडल</strong>

पंजाब सरकार ने साबित कर दिया है कि किसान जब सरकार के partner बनते हैं, तो प्रदूषण जैसी बड़ी समस्या का समाधान भी आसान हो जाता है।

केंद्र सरकार द्वारा इसे देश में लागू किए जाने का मतलब है कि पंजाब का यह प्रयास पूरे भारत के लिए एक बड़ा उदाहरण बन चुका है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब सरकार ने पराली जलाने की समस्या को लगभग खत्म कर देने जैसा बड़ा काम कर दिखाया है। इस बार पंजाब में पराली जलाने के मामले <strong>94% </strong><strong>तक कम</strong> हो गए हैं। 2016 में जहाँ <strong>80,879 </strong><strong>मामले</strong> दर्ज हुए थे, वहीं इस साल यानी 2025 में यह संख्या घटकर सिर्फ <strong>5,114 </strong><strong>रह गई</strong>। यह पिछले साल 2024 की तुलना में भी <strong>53% </strong><strong>कम</strong> है।

यह उपलब्धि केवल पंजाब के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक मजबूत मैसेज है कि अगर सरकार और किसान मिलकर काम करें, तो बड़ी से बड़ी पर्यावरण समस्या का हल निकाला जा सकता है। यही वजह है कि केंद्रीय कृषि मंत्री <strong>शिवराज सिंह चौहान</strong> ने इस मॉडल को पूरे देश में लागू करने की घोषणा की है। इसे अब <strong>‘</strong><strong>पंजाब मॉडल</strong><strong>’</strong> कहा जा रहा है।

<strong>सफलता का फॉर्मूला: सहयोग + विज्ञान + किसान-प्रथम सोच</strong>

मुख्यमंत्री <strong>भगवंत मान</strong> के नेतृत्व में सरकार ने ऐसा मॉडल अपनाया जिसमें किसानों को सज़ा देने के बजाय उन्हें समाधान, मशीनरी और पूरी मदद दी गई। किसानों की जरूरतों को समझकर, जमीन पर काम करने वाले अधिकारियों और वैज्ञानिकों को साथ लेकर एक सिस्टम तैयार किया गया।
<ol>
 	<li><strong>आधुनिक मशीनरी ने खेल बदला </strong><strong>— </strong><strong>भारी सब्सिडी से किसानों का फायदा</strong></li>
</ol>
2018-19 में शुरू हुए <strong>CRM (Crop Residue Management) </strong><strong>कार्यक्रम</strong> के तहत:
<ul>
 	<li>शुरुआत में सिर्फ <strong>25,000 </strong><strong>मशीनें</strong> थीं</li>
 	<li>आज (2025 तक) बढ़कर <strong>1.48 </strong><strong>लाख से ज़्यादा </strong><strong>CRM </strong><strong>मशीनें</strong> हो चुकी हैं</li>
 	<li>इनमें <strong>66,000 Super Seeders</strong> भी शामिल हैं</li>
</ul>
सरकार ने छोटे किसानों को मशीनों पर <strong>80% </strong><strong>तक सब्सिडी</strong> दी (पहले 50% थी)। हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, मल्चर, एम.बी. हल, बेलर जैसी मशीनों ने खेत में ही पराली को मिट्टी में मिलाना आसान बना दिया। इससे किसान बिना आग लगाए गेहूँ की बुवाई कर पा रहे हैं।

कृषि विभाग के निदेशक <strong>जसवंत सिंह</strong> के मुताबिक, मशीनें बढ़ने के बाद ही ग्राउंड लेवल पर बड़ा बदलाव दिखना शुरू हुआ।
<ol start="2">
 	<li><strong>एक्स-सीटू सॉल्यूशन </strong><strong>— </strong><strong>पराली से अब कमाई</strong></li>
</ol>
पहले पराली किसानों के लिए बेकार थी, इसलिए आग लगा देते थे। लेकिन अब सरकार ने पराली को बेचने और उसे उद्योगों तक पहुंचाने का सिस्टम बना दिया है।
<ul>
 	<li>बायोमास पावर प्लांट्स</li>
 	<li>पेपर मिल्स</li>
 	<li>बायो-CNG प्लांट्स</li>
 	<li>पैडी स्ट्रॉ पैलेट यूनिट्स</li>
</ul>
ये सभी सीधे किसानों से पराली खरीद रहे हैं।

पिछले साल उद्योगों ने <strong>27.6 </strong><strong>लाख टन पराली</strong> खरीदी थी।
इस साल यह संख्या बढ़कर <strong>75 </strong><strong>लाख टन (</strong><strong>7.50 </strong><strong>मिलियन टन)</strong> हो गई है।

यह सिस्टम एक तरह की <strong>Circular Economy</strong> बन गया है, जिससे किसानों को <strong>extra income</strong> भी मिल रही है।
<ol start="3">
 	<li><strong>गाँव-गाँव जागरूकता </strong><strong>— Door-to-Door Campaign </strong><strong>ने बदल दिया माइंडसेट</strong></li>
</ol>
सरकार ने सिर्फ मशीनें ही नहीं दीं—बल्कि किसानों की सोच बदलने के लिए बड़े स्तर पर campaigns चलाए।
<ul>
 	<li>गाँव स्तर पर CRM कमेटियाँ</li>
 	<li>Door-to-door outreach</li>
 	<li>मिट्टी की सेहत पर awareness</li>
 	<li>स्कूल–कॉलेज की भागीदारी</li>
 	<li>जिला प्रशासन + पुलिस + कृषि अधिकारियों की संयुक्त कार्रवाई</li>
</ul>
इन सब प्रयासों ने किसानों को समझाया कि पराली जलाने से मिट्टी की quality खराब होती है और long-term productivity गिरती है।

आज किसान खुद कह रहे हैं कि पराली जलाना उनके लिए नुकसानदायक है।
<ol start="4">
 	<li><strong> Satellite Monitoring </strong><strong>से कड़ी नज़र</strong><strong>, </strong><strong>लेकिन दंड नहीं </strong><strong>— Support </strong><strong>पर फोकस</strong></li>
</ol>
पंजाब Pollution Control Board और कृषि विभाग ने NASA और PRSC की satellite इमेजरी से लगातार निगरानी की।

लेकिन सरकार ने एक बात साफ रखी—
<em>किसानों को डराकर नहीं</em><em>, </em><em>समझाकर समाधान देना है।</em>

इसलिए FIR सिर्फ उन्हीं पर दर्ज हुई जो बार-बार, जानबूझकर नियम तोड़ते रहे। ऐसे मामलों की संख्या <strong>1963</strong> रही।

बाकियों को हर तरह की सहायता दी गई।
<ol start="5">
 	<li><strong>सरकार की आगे की योजना </strong><strong>— </strong><strong>मिट्टी की सेहत और मशीनरी की आसान उपलब्धता</strong></li>
</ol>
जसवंत सिंह ने कहा कि अब सरकार का फोकस है:
<ul>
 	<li>मिट्टी की quality बढ़ाना</li>
 	<li>CRM मशीनें हर दूर-दराज गांव तक पहुँचाना</li>
 	<li>पराली को पूरी तरह resource में बदलना</li>
</ul>
यह मॉडल अब पूरे भारत के लिए inspiration बन गया है।

<strong>नतीजा: भारत का सबसे सफल </strong><strong>Anti-Pollution </strong><strong>मॉडल</strong>

पंजाब सरकार ने साबित कर दिया है कि किसान जब सरकार के partner बनते हैं, तो प्रदूषण जैसी बड़ी समस्या का समाधान भी आसान हो जाता है।

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	</item>
		<item>
		<title>Union Agriculture Minister ने सराहा Punjab का मॉडल: Moga का रंसिह कलां गांव बना देश का Ideal Stubble Management Example</title>
		<link>https://trendstopic.in/union-agriculture-minister-praises-punjab-model-mogas-ransih-kalan-village-becomes-indias-ideal-stubble-management-example/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 30 Nov 2025 04:44:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चंडीगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[AgricultureNews]]></category>
		<category><![CDATA[BhagwantMann]]></category>
		<category><![CDATA[CropResidueManagement]]></category>
		<category><![CDATA[FarmerSupport]]></category>
		<category><![CDATA[MogaNews]]></category>
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		<category><![CDATA[RansihKalan]]></category>
		<category><![CDATA[StubbleManagement]]></category>
		<category><![CDATA[SustainableFarming]]></category>
		<category><![CDATA[UnionAgricultureMinister]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब के मोगा जिले का छोटा-सा गांव <em>रंसिह कलां</em> आज पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। वजह है इस गांव का <strong>पराली न जलाने का शानदार मॉडल</strong>, जिसे देखने खुद <strong>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान</strong> यहां पहुंचे। मंत्री ने गांव के प्रयासों को “<strong>National Example</strong>” बताते हुए कहा कि देश के बाकी राज्यों को भी पंजाब के इस मॉडल से सीख लेनी चाहिए।
<h2><strong>6 </strong><strong>साल से एक भी पराली नहीं जलाई गई </strong><strong>— </strong><strong>गांव ने बनाया रिकॉर्ड</strong></h2>
चौहान ने दौरे के दौरान सबसे बड़ी बात ये कही कि रंसिह कलां गांव में पिछले <strong>छह सालों से एक भी पराली जलाने का मामला नहीं</strong> मिला है।
यह सुनकर उन्होंने खुलकर कहा—
<strong>“</strong><strong>पंजाब ने जिस तरह से स्टबल मैनेजमेंट किया है, </strong><strong>वो पूरे देश के लिए मिसाल है।”</strong>
<h2><strong>पंजाब मॉडल क्यों बना खास</strong><strong>?</strong></h2>
गांव की इस सफलता के पीछे मुख्य तौर पर पंजाब सरकार की नीतियाँ बताई जा रही हैं।
<strong>मुख्यमंत्री भगवंत मान</strong> की सरकार ने किसानों को—
<ul>
 	<li>scientific तरीके,</li>
 	<li>modern मशीनरी,</li>
 	<li>training,</li>
 	<li>और financial support</li>
</ul>
देकर पराली को जलाने की बजाय खेत में मिलाने के लिए प्रोत्साहित किया।

इस Model का सबसे बड़ा असर यह हुआ कि—
<ul>
 	<li>मिट्टी की उर्वरता (fertility) बढ़ी</li>
 	<li>रासायनिक खाद की जरूरत लगभग <strong>30% </strong><strong>कम</strong> हुई</li>
 	<li>गेहूं, आलू और अन्य फसलों की पैदावार में सुधार आया</li>
 	<li>खेती की cost कम हुई</li>
 	<li>खेतों में(environment) ecological balance बेहतर हुआ</li>
</ul>
कई किसानों ने बताया कि पराली को खेत में मिलाने से <strong>पोटाश</strong> जैसी natural value खुद मिट्टी में लौट आती है, जिससे फसल की quality बढ़ती है।
<h2><strong>पंजाब में पराली जलाने की घटनाएँ </strong><strong>83% </strong><strong>कम</strong></h2>
इस साल पंजाब में पराली जलाने की घटनाएँ <strong>इतिहास में पहली बार 83% </strong><strong>तक घटी हैं</strong>।
जो राज्य सालों तक पराली के लिए आलोचना झेलता था, आज वही देश में सबसे सफल मॉडल बनकर सामने आया है।
<h2><strong>गांव में विकास और सामाजिक बदलाव भी बड़ी वजह</strong></h2>
रंसिह कलां सिर्फ इसलिए खास नहीं है कि यहां पराली नहीं जलाई जाती—
गांव में कई ऐसी development activities भी चल रही हैं जो इसे “ideal village” बनाती हैं:
<ul>
 	<li>किसानों को पराली न जलाने पर cash incentives</li>
 	<li>फलदार पौधे लगाने की पुरस्कार योजना</li>
 	<li>गांव की लाइब्रेरी में नई पढ़ने की culture को बढ़ावा</li>
 	<li>plastic-free village मिशन</li>
 	<li>rainwater harvesting सिस्टम</li>
 	<li>नशा-मुक्ति (drug-free) अभियान</li>
 	<li>बच्चों और युवाओं के लिए regular activities</li>
</ul>
केंद्रीय मंत्री ने कहा,
<strong>“</strong><strong>गांव में जिस तरह से environmental </strong><strong>और social development </strong><strong>साथ-साथ चल रहा है, </strong><strong>वह बहुत inspiring </strong><strong>है।”</strong>
<h2><strong>मंत्री ने चखा पंजाब का मशहूर </strong><strong>‘</strong><strong>मक्की दी रोटी </strong><strong>– </strong><strong>सरसों दा साग</strong><strong>’</strong></h2>
दौरे के दौरान शिवराज चौहान ने गांव के लोगों के साथ बैठकर <strong>मक्की दी रोटी और सरसों दा साग</strong> भी खाया।
उन्होंने कहा कि पंजाब की hospitality दिल जीते लेती है और यहां आकर उन्होंने महसूस किया कि <strong>successful stubble management model </strong><strong>असली रूप में यहीं देखने को मिलता है।</strong>
<h2><strong>देशभर के किसानों से अपील</strong></h2>
मंत्री ने साफ कहा कि:

<strong>“</strong><strong>हम इस मॉडल को देश के हर राज्य तक ले जाएंगे। पराली को जलाने की बजाय resource </strong><strong>की तरह इस्तेमाल करना ही भविष्य है।”</strong>

उन्होंने यह भी बताया कि—
<ul>
 	<li>पराली जलाने से सिर्फ pollution नहीं बढ़ता,</li>
 	<li>बल्कि मिट्टी के कीट, nutrients और जमीन की शक्ति भी खत्म होती है।</li>
</ul>
इसलिए Crop-Residue Management को priority देना जरूरी है।

रंसिह कलां गांव आज देश में एक उदाहरण है कि सही नीतियाँ, सरकारी support और किसानों की मेहनत मिलकर किसी बड़ी समस्या को कैसे खत्म कर सकती हैं।
पंजाब सरकार और गांव के किसानों की ये साझी मेहनत अब एक <strong>National Model</strong> बन चुकी है, जिसे केंद्र सरकार भी अपनाने की बात कह रही है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब के मोगा जिले का छोटा-सा गांव <em>रंसिह कलां</em> आज पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। वजह है इस गांव का <strong>पराली न जलाने का शानदार मॉडल</strong>, जिसे देखने खुद <strong>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान</strong> यहां पहुंचे। मंत्री ने गांव के प्रयासों को “<strong>National Example</strong>” बताते हुए कहा कि देश के बाकी राज्यों को भी पंजाब के इस मॉडल से सीख लेनी चाहिए।
<h2><strong>6 </strong><strong>साल से एक भी पराली नहीं जलाई गई </strong><strong>— </strong><strong>गांव ने बनाया रिकॉर्ड</strong></h2>
चौहान ने दौरे के दौरान सबसे बड़ी बात ये कही कि रंसिह कलां गांव में पिछले <strong>छह सालों से एक भी पराली जलाने का मामला नहीं</strong> मिला है।
यह सुनकर उन्होंने खुलकर कहा—
<strong>“</strong><strong>पंजाब ने जिस तरह से स्टबल मैनेजमेंट किया है, </strong><strong>वो पूरे देश के लिए मिसाल है।”</strong>
<h2><strong>पंजाब मॉडल क्यों बना खास</strong><strong>?</strong></h2>
गांव की इस सफलता के पीछे मुख्य तौर पर पंजाब सरकार की नीतियाँ बताई जा रही हैं।
<strong>मुख्यमंत्री भगवंत मान</strong> की सरकार ने किसानों को—
<ul>
 	<li>scientific तरीके,</li>
 	<li>modern मशीनरी,</li>
 	<li>training,</li>
 	<li>और financial support</li>
</ul>
देकर पराली को जलाने की बजाय खेत में मिलाने के लिए प्रोत्साहित किया।

इस Model का सबसे बड़ा असर यह हुआ कि—
<ul>
 	<li>मिट्टी की उर्वरता (fertility) बढ़ी</li>
 	<li>रासायनिक खाद की जरूरत लगभग <strong>30% </strong><strong>कम</strong> हुई</li>
 	<li>गेहूं, आलू और अन्य फसलों की पैदावार में सुधार आया</li>
 	<li>खेती की cost कम हुई</li>
 	<li>खेतों में(environment) ecological balance बेहतर हुआ</li>
</ul>
कई किसानों ने बताया कि पराली को खेत में मिलाने से <strong>पोटाश</strong> जैसी natural value खुद मिट्टी में लौट आती है, जिससे फसल की quality बढ़ती है।
<h2><strong>पंजाब में पराली जलाने की घटनाएँ </strong><strong>83% </strong><strong>कम</strong></h2>
इस साल पंजाब में पराली जलाने की घटनाएँ <strong>इतिहास में पहली बार 83% </strong><strong>तक घटी हैं</strong>।
जो राज्य सालों तक पराली के लिए आलोचना झेलता था, आज वही देश में सबसे सफल मॉडल बनकर सामने आया है।
<h2><strong>गांव में विकास और सामाजिक बदलाव भी बड़ी वजह</strong></h2>
रंसिह कलां सिर्फ इसलिए खास नहीं है कि यहां पराली नहीं जलाई जाती—
गांव में कई ऐसी development activities भी चल रही हैं जो इसे “ideal village” बनाती हैं:
<ul>
 	<li>किसानों को पराली न जलाने पर cash incentives</li>
 	<li>फलदार पौधे लगाने की पुरस्कार योजना</li>
 	<li>गांव की लाइब्रेरी में नई पढ़ने की culture को बढ़ावा</li>
 	<li>plastic-free village मिशन</li>
 	<li>rainwater harvesting सिस्टम</li>
 	<li>नशा-मुक्ति (drug-free) अभियान</li>
 	<li>बच्चों और युवाओं के लिए regular activities</li>
</ul>
केंद्रीय मंत्री ने कहा,
<strong>“</strong><strong>गांव में जिस तरह से environmental </strong><strong>और social development </strong><strong>साथ-साथ चल रहा है, </strong><strong>वह बहुत inspiring </strong><strong>है।”</strong>
<h2><strong>मंत्री ने चखा पंजाब का मशहूर </strong><strong>‘</strong><strong>मक्की दी रोटी </strong><strong>– </strong><strong>सरसों दा साग</strong><strong>’</strong></h2>
दौरे के दौरान शिवराज चौहान ने गांव के लोगों के साथ बैठकर <strong>मक्की दी रोटी और सरसों दा साग</strong> भी खाया।
उन्होंने कहा कि पंजाब की hospitality दिल जीते लेती है और यहां आकर उन्होंने महसूस किया कि <strong>successful stubble management model </strong><strong>असली रूप में यहीं देखने को मिलता है।</strong>
<h2><strong>देशभर के किसानों से अपील</strong></h2>
मंत्री ने साफ कहा कि:

<strong>“</strong><strong>हम इस मॉडल को देश के हर राज्य तक ले जाएंगे। पराली को जलाने की बजाय resource </strong><strong>की तरह इस्तेमाल करना ही भविष्य है।”</strong>

उन्होंने यह भी बताया कि—
<ul>
 	<li>पराली जलाने से सिर्फ pollution नहीं बढ़ता,</li>
 	<li>बल्कि मिट्टी के कीट, nutrients और जमीन की शक्ति भी खत्म होती है।</li>
</ul>
इसलिए Crop-Residue Management को priority देना जरूरी है।

रंसिह कलां गांव आज देश में एक उदाहरण है कि सही नीतियाँ, सरकारी support और किसानों की मेहनत मिलकर किसी बड़ी समस्या को कैसे खत्म कर सकती हैं।
पंजाब सरकार और गांव के किसानों की ये साझी मेहनत अब एक <strong>National Model</strong> बन चुकी है, जिसे केंद्र सरकार भी अपनाने की बात कह रही है।]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>Agriculture Minister Khuddian की अपील: तरक्की और साफ हवा के लिए APP को चुनें, Crop Residue Management में किसानों और सरकार की तारीफ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 11 Nov 2025 06:14:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[Agriculture]]></category>
		<category><![CDATA[app]]></category>
		<category><![CDATA[BhagwantMann]]></category>
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		<category><![CDATA[PunjabNews]]></category>
		<category><![CDATA[SustainableFarming]]></category>
		<category><![CDATA[VoteForProgress]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब के कृषि मंत्री <strong>गुरमीत सिंह खुड्डियां</strong> ने किसानों की मेहनत और सरकार की पहल की तारीफ करते हुए कहा कि पराली जलाने की घटनाओं में <strong>85% </strong><strong>तक कमी</strong> आई है। उन्होंने बताया कि यह सफलता <strong>मुख्यमंत्री भगवंत मान</strong> के नेतृत्व और पंजाब के किसानों की मेहनत का नतीजा है।

खुड्डियां ने कहा, "आज पंजाब के किसान सिर्फ फसलें ही नहीं उगा रहे, बल्कि समस्याओं का समाधान भी ढूंढ रहे हैं। अब किसानों की मेहनत और सरकार की योजनाओं की वजह से हम प्रदूषण को कम करने में कामयाब हुए हैं।"

<strong>मान सरकार की उपलब्धियां:</strong>
<ul>
 	<li>अब <strong>धान की पराली</strong> थर्मल प्लांट्स में <strong>बायोमास ईंधन</strong> के रूप में इस्तेमाल हो रही है।</li>
 	<li>इससे न केवल <strong>हवा साफ हो रही है</strong>, बल्कि किसानों को <strong>अतिरिक्त आय</strong> भी मिल रही है।</li>
 	<li>सरकार ने किसानों को <strong>फसल अवशेष संभालने के लिए मशीनरी</strong>, <strong>जागरूकता अभियान</strong>, और <strong>बाजार उपलब्ध कराए</strong>।</li>
 	<li>इन कदमों से यह साबित हुआ कि <strong>कृषि विकास और पर्यावरण सुरक्षा</strong> एक साथ चल सकते हैं।</li>
</ul>
<strong>राजनीतिक अपील:</strong>
खुड्डियां ने तरनतारन के मतदाताओं से अपील की कि वे <strong>'</strong><strong>आप</strong><strong>' </strong><strong>पार्टी</strong> को वोट दें। उन्होंने कहा, "तरनतारन को प्रदूषण की राजनीति नहीं, बल्कि <strong>तरक्की की राजनीति</strong> चाहिए। जो वोट आप को दिया जाएगा, वह <strong>किसान</strong><strong>, </strong><strong>साफ हवा और खुशहाल पंजाब</strong> के लिए होगा।"

<strong>सारांश:</strong>
पंजाब सरकार और किसानों ने मिलकर पराली जलाने की समस्या को हल किया है। अब पराली का सही इस्तेमाल हो रहा है, प्रदूषण कम हुआ है, और किसानों को आर्थिक फायदा भी मिल रहा है। साथ ही, सरकार इसे एक <strong>सकारात्मक और विकास आधारित संदेश</strong> के रूप में जनता के सामने पेश कर रही है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब के कृषि मंत्री <strong>गुरमीत सिंह खुड्डियां</strong> ने किसानों की मेहनत और सरकार की पहल की तारीफ करते हुए कहा कि पराली जलाने की घटनाओं में <strong>85% </strong><strong>तक कमी</strong> आई है। उन्होंने बताया कि यह सफलता <strong>मुख्यमंत्री भगवंत मान</strong> के नेतृत्व और पंजाब के किसानों की मेहनत का नतीजा है।

खुड्डियां ने कहा, "आज पंजाब के किसान सिर्फ फसलें ही नहीं उगा रहे, बल्कि समस्याओं का समाधान भी ढूंढ रहे हैं। अब किसानों की मेहनत और सरकार की योजनाओं की वजह से हम प्रदूषण को कम करने में कामयाब हुए हैं।"

<strong>मान सरकार की उपलब्धियां:</strong>
<ul>
 	<li>अब <strong>धान की पराली</strong> थर्मल प्लांट्स में <strong>बायोमास ईंधन</strong> के रूप में इस्तेमाल हो रही है।</li>
 	<li>इससे न केवल <strong>हवा साफ हो रही है</strong>, बल्कि किसानों को <strong>अतिरिक्त आय</strong> भी मिल रही है।</li>
 	<li>सरकार ने किसानों को <strong>फसल अवशेष संभालने के लिए मशीनरी</strong>, <strong>जागरूकता अभियान</strong>, और <strong>बाजार उपलब्ध कराए</strong>।</li>
 	<li>इन कदमों से यह साबित हुआ कि <strong>कृषि विकास और पर्यावरण सुरक्षा</strong> एक साथ चल सकते हैं।</li>
</ul>
<strong>राजनीतिक अपील:</strong>
खुड्डियां ने तरनतारन के मतदाताओं से अपील की कि वे <strong>'</strong><strong>आप</strong><strong>' </strong><strong>पार्टी</strong> को वोट दें। उन्होंने कहा, "तरनतारन को प्रदूषण की राजनीति नहीं, बल्कि <strong>तरक्की की राजनीति</strong> चाहिए। जो वोट आप को दिया जाएगा, वह <strong>किसान</strong><strong>, </strong><strong>साफ हवा और खुशहाल पंजाब</strong> के लिए होगा।"

<strong>सारांश:</strong>
पंजाब सरकार और किसानों ने मिलकर पराली जलाने की समस्या को हल किया है। अब पराली का सही इस्तेमाल हो रहा है, प्रदूषण कम हुआ है, और किसानों को आर्थिक फायदा भी मिल रहा है। साथ ही, सरकार इसे एक <strong>सकारात्मक और विकास आधारित संदेश</strong> के रूप में जनता के सामने पेश कर रही है।]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>Central Government ने की Mann सरकार की सराहना, Punjab की सफ़लता, किसानों के सहयोग से Stubble Burning Incidents में 85% की ऐतिहासिक गिरावट</title>
		<link>https://trendstopic.in/central-government-praises-mann-government-punjab-achieves-historic-85-drop-in-stubble-burning-incidents-with-farmers-cooperation/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 11 Nov 2025 05:33:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[Agriculture]]></category>
		<category><![CDATA[AirQuality]]></category>
		<category><![CDATA[CAQM]]></category>
		<category><![CDATA[CleanAir]]></category>
		<category><![CDATA[Environment]]></category>
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		<category><![CDATA[StubbleBurning]]></category>
		<category><![CDATA[SustainableFarming]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब के किसान अब सिर्फ अन्न उगाने वाले नहीं रहे। अब वे <strong>पराली क्रांति (Stubble Burning Revolution)</strong> के जरिए पर्यावरण के रक्षक भी बन गए हैं। यह बदलाव इतना बड़ा है कि केंद्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के अध्यक्ष <strong>राजेश वर्मा</strong> खुद इसका अध्ययन करने और किसानों की सराहना करने <strong>राजपुरा थर्मल प्लांट</strong> पहुंचे।

राजेश वर्मा का कहना है कि उनका दौरा <strong>सिर्फ़ चेक करने या जुर्माना लगाने के लिए नहीं था</strong>, बल्कि यह देखने के लिए था कि कैसे पंजाब के किसान अपने खेतों की पराली जलाने की जगह <strong>सस्टेनेबल और स्मार्ट विकल्प</strong> चुन रहे हैं।
<h3><strong>पराली जलाने में ऐतिहासिक कमी</strong></h3>
आंकड़े बताते हैं कि पंजाब में इस मुद्दे पर बड़ा बदलाव आया है:
<ul>
 	<li><strong>2021:</strong> 71,300 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज</li>
 	<li><strong>2024:</strong> घटकर 10,900 घटनाएं (लगभग 85% कमी)</li>
 	<li><strong>2025 (</strong><strong>अब तक):</strong> केवल 3,284 घटनाएं</li>
</ul>
इस रुझान से साफ पता चलता है कि पंजाब के किसान अब अपने खेतों की पराली जलाने की बजाय इसे <strong>बायोमास ईंधन (Biomass Fuel)</strong> में बदल रहे हैं।

राजेश वर्मा ने कहा,

“धान का पुआल अब किसानों के लिए आय का स्रोत बन गया है। जो कभी कचरा माना जाता था, अब उसे थर्मल प्लांटों के लिए बायोमास में बदल दिया जा रहा है।”
<h3><strong>कैसे आया यह बदलाव?</strong></h3>
यह बदलाव अचानक नहीं हुआ। इसके पीछे कुछ मुख्य कदम हैं:
<ol>
 	<li><strong>सरकारी सहयोग और निवेश</strong> – बायोमास संग्रह की इंफ्रास्ट्रक्चर में पैसा लगाया गया।</li>
 	<li><strong>शिक्षा और जागरूकता</strong> – किसानों को बताया गया कि पराली का वैकल्पिक इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है और इससे उन्हें <strong>आर्थिक लाभ</strong> भी होगा।</li>
 	<li><strong>सस्टेनेबल मॉडल</strong> – आम आदमी पार्टी की सरकार ने किसानों के साथ मिलकर समाधान तैयार किया।</li>
</ol>
इस पहल का असर सिर्फ किसानों की आय तक ही सीमित नहीं है, बल्कि <strong>उत्तर भारत की वायु गुणवत्ता में सुधार</strong> भी हुआ है।
<h3><strong>किसानों की नई पहचान</strong></h3>
पंजाब के किसान अब केवल अन्न उगाने वाले नहीं, बल्कि <strong>समाधान पैदा करने वाले</strong> बन गए हैं। यह बदलाव उनके लिए गर्व की बात है। वे अब अपनी कृषि विरासत को बनाए रखते हुए पर्यावरण की रक्षा भी कर रहे हैं।

राजेश वर्मा ने जोर देकर कहा:

“इस साल पराली जलाने की घटनाओं में तेजी से कमी दिख रही है। यह साबित करता है कि किसान ‘पराली क्रांति’ का नेतृत्व कर रहे हैं।”
<h3><strong>पड़ोसी राज्यों के साथ तुलना</strong></h3>
पंजाब के उदाहरण से पड़ोसी राज्यों में अंतर साफ दिखता है। जबकि पंजाब में हवा साफ हुई है, दिल्ली में अब भी प्रदूषण की समस्या बनी हुई है। अंतर? पंजाब ने <strong>समस्या के स्रोत (Source) </strong><strong>पर कार्रवाई की</strong> और किसानों के साथ सहयोग किया, उनके खिलाफ नहीं।
<h3><strong>पराली क्रांति का संदेश</strong></h3>
<ul>
 	<li><strong>आर्थिक लाभ:</strong> किसानों के लिए नए आय स्रोत</li>
 	<li><strong>पर्यावरण सुरक्षा:</strong> कम प्रदूषण और साफ हवा</li>
 	<li><strong>सामाजिक संदेश:</strong> किसान अब अपने खेत और पर्यावरण के संरक्षक हैं</li>
 	<li><strong>सकारात्मक बदलाव:</strong> कृषि समृद्धि और पर्यावरणीय जिम्मेदारी अब साथ-साथ चल सकते हैं</li>
</ul>
जैसे ही दिवाली का त्योहार आया, पंजाब के किसानों ने साफ आसमान के साथ पूरे उत्तर भारत को <strong>एक उपहार</strong> दिया—यह दिखाने के लिए कि जब समुदायों को विकल्प और सपोर्ट दिया जाता है, तो वे <strong>सही रास्ता चुनते हैं</strong>।

पंजाब की यह कहानी <strong>परिवर्तन, </strong><strong>जिम्मेदारी और नेतृत्व</strong> की है। और इसे वे किसान लिख रहे हैं जो देश को खिलाते हैं।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब के किसान अब सिर्फ अन्न उगाने वाले नहीं रहे। अब वे <strong>पराली क्रांति (Stubble Burning Revolution)</strong> के जरिए पर्यावरण के रक्षक भी बन गए हैं। यह बदलाव इतना बड़ा है कि केंद्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के अध्यक्ष <strong>राजेश वर्मा</strong> खुद इसका अध्ययन करने और किसानों की सराहना करने <strong>राजपुरा थर्मल प्लांट</strong> पहुंचे।

राजेश वर्मा का कहना है कि उनका दौरा <strong>सिर्फ़ चेक करने या जुर्माना लगाने के लिए नहीं था</strong>, बल्कि यह देखने के लिए था कि कैसे पंजाब के किसान अपने खेतों की पराली जलाने की जगह <strong>सस्टेनेबल और स्मार्ट विकल्प</strong> चुन रहे हैं।
<h3><strong>पराली जलाने में ऐतिहासिक कमी</strong></h3>
आंकड़े बताते हैं कि पंजाब में इस मुद्दे पर बड़ा बदलाव आया है:
<ul>
 	<li><strong>2021:</strong> 71,300 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज</li>
 	<li><strong>2024:</strong> घटकर 10,900 घटनाएं (लगभग 85% कमी)</li>
 	<li><strong>2025 (</strong><strong>अब तक):</strong> केवल 3,284 घटनाएं</li>
</ul>
इस रुझान से साफ पता चलता है कि पंजाब के किसान अब अपने खेतों की पराली जलाने की बजाय इसे <strong>बायोमास ईंधन (Biomass Fuel)</strong> में बदल रहे हैं।

राजेश वर्मा ने कहा,

“धान का पुआल अब किसानों के लिए आय का स्रोत बन गया है। जो कभी कचरा माना जाता था, अब उसे थर्मल प्लांटों के लिए बायोमास में बदल दिया जा रहा है।”
<h3><strong>कैसे आया यह बदलाव?</strong></h3>
यह बदलाव अचानक नहीं हुआ। इसके पीछे कुछ मुख्य कदम हैं:
<ol>
 	<li><strong>सरकारी सहयोग और निवेश</strong> – बायोमास संग्रह की इंफ्रास्ट्रक्चर में पैसा लगाया गया।</li>
 	<li><strong>शिक्षा और जागरूकता</strong> – किसानों को बताया गया कि पराली का वैकल्पिक इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है और इससे उन्हें <strong>आर्थिक लाभ</strong> भी होगा।</li>
 	<li><strong>सस्टेनेबल मॉडल</strong> – आम आदमी पार्टी की सरकार ने किसानों के साथ मिलकर समाधान तैयार किया।</li>
</ol>
इस पहल का असर सिर्फ किसानों की आय तक ही सीमित नहीं है, बल्कि <strong>उत्तर भारत की वायु गुणवत्ता में सुधार</strong> भी हुआ है।
<h3><strong>किसानों की नई पहचान</strong></h3>
पंजाब के किसान अब केवल अन्न उगाने वाले नहीं, बल्कि <strong>समाधान पैदा करने वाले</strong> बन गए हैं। यह बदलाव उनके लिए गर्व की बात है। वे अब अपनी कृषि विरासत को बनाए रखते हुए पर्यावरण की रक्षा भी कर रहे हैं।

राजेश वर्मा ने जोर देकर कहा:

“इस साल पराली जलाने की घटनाओं में तेजी से कमी दिख रही है। यह साबित करता है कि किसान ‘पराली क्रांति’ का नेतृत्व कर रहे हैं।”
<h3><strong>पड़ोसी राज्यों के साथ तुलना</strong></h3>
पंजाब के उदाहरण से पड़ोसी राज्यों में अंतर साफ दिखता है। जबकि पंजाब में हवा साफ हुई है, दिल्ली में अब भी प्रदूषण की समस्या बनी हुई है। अंतर? पंजाब ने <strong>समस्या के स्रोत (Source) </strong><strong>पर कार्रवाई की</strong> और किसानों के साथ सहयोग किया, उनके खिलाफ नहीं।
<h3><strong>पराली क्रांति का संदेश</strong></h3>
<ul>
 	<li><strong>आर्थिक लाभ:</strong> किसानों के लिए नए आय स्रोत</li>
 	<li><strong>पर्यावरण सुरक्षा:</strong> कम प्रदूषण और साफ हवा</li>
 	<li><strong>सामाजिक संदेश:</strong> किसान अब अपने खेत और पर्यावरण के संरक्षक हैं</li>
 	<li><strong>सकारात्मक बदलाव:</strong> कृषि समृद्धि और पर्यावरणीय जिम्मेदारी अब साथ-साथ चल सकते हैं</li>
</ul>
जैसे ही दिवाली का त्योहार आया, पंजाब के किसानों ने साफ आसमान के साथ पूरे उत्तर भारत को <strong>एक उपहार</strong> दिया—यह दिखाने के लिए कि जब समुदायों को विकल्प और सपोर्ट दिया जाता है, तो वे <strong>सही रास्ता चुनते हैं</strong>।

पंजाब की यह कहानी <strong>परिवर्तन, </strong><strong>जिम्मेदारी और नेतृत्व</strong> की है। और इसे वे किसान लिख रहे हैं जो देश को खिलाते हैं।]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>Punjab में पराली जलाने की Incidents में 75% गिरावट, फिर भी Delhi Pollution के लिए Punjab के किसान क्यों निशाने पर?</title>
		<link>https://trendstopic.in/stubble-burning-incidents-in-punjab-drop-by-75-yet-punjab-farmers-are-still-targeted-for-delhis-pollution/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 24 Oct 2025 11:16:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[Agriculture]]></category>
		<category><![CDATA[AirPollution]]></category>
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		<category><![CDATA[SustainableFarming]]></category>
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					<description><![CDATA[हर साल की तरह इस साल भी दिल्ली (Delhi) गंभीर वायु प्रदूषण (Air Pollution) की चपेट में है। पर जैसे ही प्रदूषण बढ़ता है, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप (Political Blame Game) भी शुरू हो जाते हैं। इस बार मामला थोड़ा अलग है। पंजाब (Punjab) से मिले नए आंकड़े बताते हैं कि पराली जलाने (Stubble Burning) की घटनाएँ इस साल बेहद कम हुई हैं। फिर भी दिल्ली में इस प्रदूषण के लिए पंजाब के किसानों और वहां की सरकार को निशाना बनाया जा रहा है।

<strong>पराली जलाने की घटनाओं में भारी कमी:</strong>
पंजाब सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 15 सितंबर से 21 अक्टूबर के बीच पराली जलाने की घटनाएँ इस प्रकार रही:
<ul>
 	<li>2022: 3114 घटनाएँ</li>
 	<li>2023: 1764 घटनाएँ</li>
 	<li>2024: 1510 घटनाएँ</li>
 	<li>2025: महज़ 415 घटनाएँ</li>
</ul>
इस साल की संख्या पिछले सालों के मुकाबले <strong>75% </strong><strong>से ज्यादा कम</strong> है। यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि पंजाब सरकार और किसानों ने मिलकर इस समस्या को काफी हद तक कंट्रोल कर लिया है।

<strong>फिर भी क्यों विवाद</strong><strong>?</strong>
दिल्ली के नेताओं, खासकर भाजपा (BJP) के मनजिंदर सिंह सिरसा जैसे नेताओं ने सीधे पंजाब के किसानों को दिल्ली के प्रदूषण का जिम्मेदार बताया। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि पराली जलाने की घटनाएं कम हुई हैं। यानी एक तरह से यह आरोप गलत लग रहा है।

<strong>दिल्ली का प्रदूषण कहाँ से</strong><strong>?</strong>
यहाँ पर सवाल उठता है कि अगर पंजाब में पराली जलाना कम हुआ है, तो दिल्ली की हवा इतनी खराब क्यों है? विशेषज्ञ कहते हैं कि दिल्ली में प्रदूषण के मुख्य स्रोत हैं:
<ul>
 	<li>वाहन (Vehicles)</li>
 	<li>औद्योगिक उत्सर्जन (Industrial Pollution)</li>
 	<li>निर्माण स्थलों से धूल (Dust from Construction)</li>
</ul>
<strong>आधिकारिक डेटा भी विरोधाभास दिखा रहा है:</strong>
<ul>
 	<li>पंजाब का AQI (Air Quality Index) इस समय दिल्ली की तुलना में लगभग 5 गुना बेहतर है।</li>
 	<li>अगर दिल्ली का स्मॉग सिर्फ पंजाब से आ रहा है, तो पंजाब की अपनी हवा इतनी साफ कैसे है?</li>
</ul>
<strong>राजनीतिक जटिलता:</strong>
यह मुद्दा सिर्फ दिल्ली और पंजाब सरकार का नहीं रह गया, बल्कि भाजपा (BJP) के भीतर भी विवाद खड़ा कर रहा है। पंजाब भाजपा नेताओं को यह तय करना होगा कि क्या वे दिल्ली में अपनी ही पार्टी के नेताओं द्वारा लगाए जा रहे आरोपों का समर्थन करेंगे या पंजाब के किसानों के साथ खड़े होंगे।

<strong>निष्कर्ष:</strong>
पंजाब के किसानों और सरकार ने इस साल पराली जलाने को काफी कम कर दिया है। ऐसे में जरूरी है कि दिल्ली और केंद्र सरकार (Central Government) अपने शहर के अंदरूनी प्रदूषण स्रोतों पर ध्यान दें। किसानों के प्रयासों को स्वीकार किया जाना चाहिए, न कि सिर्फ उन्हें ही दोषी ठहराया जाए।

<strong>सारांश:</strong>
<ul>
 	<li>पंजाब में पराली जलाने की घटनाएँ 75% से ज्यादा कम हुई हैं।</li>
 	<li>दिल्ली में प्रदूषण का मुख्य कारण केवल पंजाब नहीं है।</li>
 	<li>दिल्ली के वाहन, फैक्ट्रियां और निर्माण स्थल भी भारी भूमिका निभा रहे हैं।</li>
 	<li>राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय समाधान खोजने की जरूरत है।</li>
</ul>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[हर साल की तरह इस साल भी दिल्ली (Delhi) गंभीर वायु प्रदूषण (Air Pollution) की चपेट में है। पर जैसे ही प्रदूषण बढ़ता है, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप (Political Blame Game) भी शुरू हो जाते हैं। इस बार मामला थोड़ा अलग है। पंजाब (Punjab) से मिले नए आंकड़े बताते हैं कि पराली जलाने (Stubble Burning) की घटनाएँ इस साल बेहद कम हुई हैं। फिर भी दिल्ली में इस प्रदूषण के लिए पंजाब के किसानों और वहां की सरकार को निशाना बनाया जा रहा है।

<strong>पराली जलाने की घटनाओं में भारी कमी:</strong>
पंजाब सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 15 सितंबर से 21 अक्टूबर के बीच पराली जलाने की घटनाएँ इस प्रकार रही:
<ul>
 	<li>2022: 3114 घटनाएँ</li>
 	<li>2023: 1764 घटनाएँ</li>
 	<li>2024: 1510 घटनाएँ</li>
 	<li>2025: महज़ 415 घटनाएँ</li>
</ul>
इस साल की संख्या पिछले सालों के मुकाबले <strong>75% </strong><strong>से ज्यादा कम</strong> है। यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि पंजाब सरकार और किसानों ने मिलकर इस समस्या को काफी हद तक कंट्रोल कर लिया है।

<strong>फिर भी क्यों विवाद</strong><strong>?</strong>
दिल्ली के नेताओं, खासकर भाजपा (BJP) के मनजिंदर सिंह सिरसा जैसे नेताओं ने सीधे पंजाब के किसानों को दिल्ली के प्रदूषण का जिम्मेदार बताया। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि पराली जलाने की घटनाएं कम हुई हैं। यानी एक तरह से यह आरोप गलत लग रहा है।

<strong>दिल्ली का प्रदूषण कहाँ से</strong><strong>?</strong>
यहाँ पर सवाल उठता है कि अगर पंजाब में पराली जलाना कम हुआ है, तो दिल्ली की हवा इतनी खराब क्यों है? विशेषज्ञ कहते हैं कि दिल्ली में प्रदूषण के मुख्य स्रोत हैं:
<ul>
 	<li>वाहन (Vehicles)</li>
 	<li>औद्योगिक उत्सर्जन (Industrial Pollution)</li>
 	<li>निर्माण स्थलों से धूल (Dust from Construction)</li>
</ul>
<strong>आधिकारिक डेटा भी विरोधाभास दिखा रहा है:</strong>
<ul>
 	<li>पंजाब का AQI (Air Quality Index) इस समय दिल्ली की तुलना में लगभग 5 गुना बेहतर है।</li>
 	<li>अगर दिल्ली का स्मॉग सिर्फ पंजाब से आ रहा है, तो पंजाब की अपनी हवा इतनी साफ कैसे है?</li>
</ul>
<strong>राजनीतिक जटिलता:</strong>
यह मुद्दा सिर्फ दिल्ली और पंजाब सरकार का नहीं रह गया, बल्कि भाजपा (BJP) के भीतर भी विवाद खड़ा कर रहा है। पंजाब भाजपा नेताओं को यह तय करना होगा कि क्या वे दिल्ली में अपनी ही पार्टी के नेताओं द्वारा लगाए जा रहे आरोपों का समर्थन करेंगे या पंजाब के किसानों के साथ खड़े होंगे।

<strong>निष्कर्ष:</strong>
पंजाब के किसानों और सरकार ने इस साल पराली जलाने को काफी कम कर दिया है। ऐसे में जरूरी है कि दिल्ली और केंद्र सरकार (Central Government) अपने शहर के अंदरूनी प्रदूषण स्रोतों पर ध्यान दें। किसानों के प्रयासों को स्वीकार किया जाना चाहिए, न कि सिर्फ उन्हें ही दोषी ठहराया जाए।

<strong>सारांश:</strong>
<ul>
 	<li>पंजाब में पराली जलाने की घटनाएँ 75% से ज्यादा कम हुई हैं।</li>
 	<li>दिल्ली में प्रदूषण का मुख्य कारण केवल पंजाब नहीं है।</li>
 	<li>दिल्ली के वाहन, फैक्ट्रियां और निर्माण स्थल भी भारी भूमिका निभा रहे हैं।</li>
 	<li>राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय समाधान खोजने की जरूरत है।</li>
</ul>]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>Punjab में पराली जलाने के 415 मामले: पिछले साल थे 1510, 172 घटना में FIR दर्ज, 189 मामलों में लगा जुर्माना!</title>
		<link>https://trendstopic.in/415-cases-of-stubble-burning-in-punjab-last-year-there-were-1510-fir-registered-in-172-incidents-fine-imposed-in-189-cases/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 23 Oct 2025 09:46:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[News]]></category>
		<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[AirQuality]]></category>
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		<category><![CDATA[StubbleBurning]]></category>
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		<category><![CDATA[SustainableFarming]]></category>
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					<description><![CDATA[<p data-start="123" data-end="522">पंजाब से एक सकारात्मक खबर सामने आई है। राज्य में इस बार पराली जलाने के मामलों में पिछले दो वर्षों की तुलना में करीब <strong data-start="239" data-end="255">चार गुना कमी</strong> दर्ज की गई है। इस सीजन में अब तक <strong data-start="289" data-end="310">415 आपराधिक मामले</strong> पराली जलाने के दर्ज किए गए हैं, जबकि वर्ष 2023 में यह संख्या <strong data-start="372" data-end="380">1764</strong> और 2024 में <strong data-start="393" data-end="401">1510</strong> थी। यह गिरावट पंजाब पुलिस और सिविल प्रशासन द्वारा लगातार चलाए जा रहे सख्त अभियान और जन-जागरूकता प्रयासों का परिणाम है।</p>
<p data-start="524" data-end="912">राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) <strong data-start="558" data-end="571">गौरव यादव</strong> ने यह आंकड़े साझा करते हुए बताया कि पराली जलाने के मामलों में आई यह कमी पुलिस और प्रशासन की <strong data-start="664" data-end="697">साझा रणनीति और निरंतर निगरानी</strong> के कारण संभव हुई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशों और <strong data-start="763" data-end="816">सुप्रीम कोर्ट व वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM)</strong> के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए प्रशासन ने खेतों में आग लगाने वालों पर सख्त कार्रवाई की है।</p>

<h3 data-start="914" data-end="972">सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन और निरंतर निगरानी</h3>
<p data-start="973" data-end="1378">डीजीपी गौरव यादव और विशेष डीजीपी (कानून एवं व्यवस्था) <strong data-start="1027" data-end="1044">अर्पित शुक्ला</strong> स्वयं इस अभियान की निगरानी कर रहे हैं। दोनों अधिकारी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, रेंज अधिकारियों, पुलिस आयुक्तों (सीपी), वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (एसएसपी) और थानों के प्रभारी अधिकारियों (एसएचओ) के साथ नियमित बैठकें कर रहे हैं। इन बैठकों में पराली जलाने के मामलों की <strong data-start="1306" data-end="1323">दैनिक समीक्षा</strong> की जा रही है ताकि किसी भी क्षेत्र में लापरवाही न हो।</p>
<p data-start="973" data-end="1378"><img class="alignnone  wp-image-26042" src="https://trendstopic.in/wp-content/uploads/2025/10/Screenshot-2025-10-23-144151-300x169.jpg" alt="" width="1205" height="679" /></p>

<h3 data-start="1380" data-end="1426">पुलिस और सिविल प्रशासन का संयुक्त अभियान</h3>
<p data-start="1427" data-end="1830">विशेष डीजीपी अर्पित शुक्ला ने बताया कि पराली जलाने की समस्या को खत्म करने के लिए पुलिस और नागरिक प्रशासन की टीमें <strong data-start="1541" data-end="1579">जमीनी स्तर पर मिलकर काम कर रही हैं</strong>। डीसी/एसएसपी और एसडीएम/डीएसपी ने राज्यभर में उन गांवों का दौरा किया है जिन्हें पराली जलाने के <strong data-start="1674" data-end="1686">हॉटस्पॉट</strong> के रूप में पहचाना गया है। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में निगरानी के साथ-साथ किसानों को जागरूक करने के लिए भी व्यापक अभियान चलाया जा रहा है।</p>

<h3 data-start="1832" data-end="1876">जन-जागरूकता अभियान और किसानों से संवाद</h3>
<p data-start="1877" data-end="2272">राज्य के सभी जिलों में किसानों को पराली जलाने से होने वाले <strong data-start="1936" data-end="1973">पर्यावरणीय और कानूनी दुष्प्रभावों</strong> के बारे में जागरूक किया जा रहा है। जिला और उपमंडल स्तर पर किसान यूनियनों के साथ बैठकों का आयोजन किया गया है। अब तक <strong data-start="2089" data-end="2115">डीसी/एसएसपी द्वारा 251</strong>, <strong data-start="2117" data-end="2145">एसडीएम/डीएसपी द्वारा 790</strong> संयुक्त दौरे किए गए हैं। इन अभियानों के दौरान <strong data-start="2192" data-end="2219">2381 जन-जागरूकता बैठकें</strong> और <strong data-start="2223" data-end="2251">1769 किसान यूनियन बैठकों</strong> का आयोजन किया गया।</p>
<p data-start="2274" data-end="2478">इसके अलावा, थाना स्तर पर <strong data-start="2299" data-end="2346">पराली सुरक्षा बल (Stubble Protection Force)</strong> भी गठित किया गया है। यह विशेष बल खेतों की निगरानी करने के साथ-साथ किसानों को पराली पर आग लगाने से रोकने के लिए प्रेरित कर रहा है।</p>

<h3 data-start="2480" data-end="2517">कानूनी कार्रवाई और सख्त निगरानी</h3>
<p data-start="2518" data-end="2962">पंजाब रिमोट सेंसिंग सेंटर (PRSC) की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक राज्य में <strong data-start="2589" data-end="2625">415 खेतों में आग लगाने की घटनाओं</strong> की पहचान की गई है। इन घटनाओं के बाद मौके पर निरीक्षण के लिए संयुक्त टीमें भेजी गई हैं। पुलिस ने अब तक <strong data-start="2728" data-end="2753">172 मामलों में एफआईआर</strong> दर्ज की हैं, जबकि <strong data-start="2772" data-end="2799">189 मामलों में जुर्माना</strong> लगाया गया है। इसके अतिरिक्त, <strong data-start="2829" data-end="2879">165 किसानों के राजस्व रिकॉर्ड में “रेड एंट्री”</strong> दर्ज की गई है, ताकि भविष्य में दोबारा ऐसा करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जा सके।</p>
<p data-start="2964" data-end="3222">डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि पंजाब सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में पराली जलाने के मामलों को <strong data-start="3055" data-end="3064">शून्य</strong> तक लाना है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई वैकल्पिक तकनीकों और मशीनों का उपयोग करें और पर्यावरण की रक्षा में अपना सहयोग दें।</p>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p data-start="123" data-end="522">पंजाब से एक सकारात्मक खबर सामने आई है। राज्य में इस बार पराली जलाने के मामलों में पिछले दो वर्षों की तुलना में करीब <strong data-start="239" data-end="255">चार गुना कमी</strong> दर्ज की गई है। इस सीजन में अब तक <strong data-start="289" data-end="310">415 आपराधिक मामले</strong> पराली जलाने के दर्ज किए गए हैं, जबकि वर्ष 2023 में यह संख्या <strong data-start="372" data-end="380">1764</strong> और 2024 में <strong data-start="393" data-end="401">1510</strong> थी। यह गिरावट पंजाब पुलिस और सिविल प्रशासन द्वारा लगातार चलाए जा रहे सख्त अभियान और जन-जागरूकता प्रयासों का परिणाम है।</p>
<p data-start="524" data-end="912">राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) <strong data-start="558" data-end="571">गौरव यादव</strong> ने यह आंकड़े साझा करते हुए बताया कि पराली जलाने के मामलों में आई यह कमी पुलिस और प्रशासन की <strong data-start="664" data-end="697">साझा रणनीति और निरंतर निगरानी</strong> के कारण संभव हुई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशों और <strong data-start="763" data-end="816">सुप्रीम कोर्ट व वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM)</strong> के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए प्रशासन ने खेतों में आग लगाने वालों पर सख्त कार्रवाई की है।</p>

<h3 data-start="914" data-end="972">सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन और निरंतर निगरानी</h3>
<p data-start="973" data-end="1378">डीजीपी गौरव यादव और विशेष डीजीपी (कानून एवं व्यवस्था) <strong data-start="1027" data-end="1044">अर्पित शुक्ला</strong> स्वयं इस अभियान की निगरानी कर रहे हैं। दोनों अधिकारी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, रेंज अधिकारियों, पुलिस आयुक्तों (सीपी), वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (एसएसपी) और थानों के प्रभारी अधिकारियों (एसएचओ) के साथ नियमित बैठकें कर रहे हैं। इन बैठकों में पराली जलाने के मामलों की <strong data-start="1306" data-end="1323">दैनिक समीक्षा</strong> की जा रही है ताकि किसी भी क्षेत्र में लापरवाही न हो।</p>
<p data-start="973" data-end="1378"><img class="alignnone  wp-image-26042" src="https://trendstopic.in/wp-content/uploads/2025/10/Screenshot-2025-10-23-144151-300x169.jpg" alt="" width="1205" height="679" /></p>

<h3 data-start="1380" data-end="1426">पुलिस और सिविल प्रशासन का संयुक्त अभियान</h3>
<p data-start="1427" data-end="1830">विशेष डीजीपी अर्पित शुक्ला ने बताया कि पराली जलाने की समस्या को खत्म करने के लिए पुलिस और नागरिक प्रशासन की टीमें <strong data-start="1541" data-end="1579">जमीनी स्तर पर मिलकर काम कर रही हैं</strong>। डीसी/एसएसपी और एसडीएम/डीएसपी ने राज्यभर में उन गांवों का दौरा किया है जिन्हें पराली जलाने के <strong data-start="1674" data-end="1686">हॉटस्पॉट</strong> के रूप में पहचाना गया है। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में निगरानी के साथ-साथ किसानों को जागरूक करने के लिए भी व्यापक अभियान चलाया जा रहा है।</p>

<h3 data-start="1832" data-end="1876">जन-जागरूकता अभियान और किसानों से संवाद</h3>
<p data-start="1877" data-end="2272">राज्य के सभी जिलों में किसानों को पराली जलाने से होने वाले <strong data-start="1936" data-end="1973">पर्यावरणीय और कानूनी दुष्प्रभावों</strong> के बारे में जागरूक किया जा रहा है। जिला और उपमंडल स्तर पर किसान यूनियनों के साथ बैठकों का आयोजन किया गया है। अब तक <strong data-start="2089" data-end="2115">डीसी/एसएसपी द्वारा 251</strong>, <strong data-start="2117" data-end="2145">एसडीएम/डीएसपी द्वारा 790</strong> संयुक्त दौरे किए गए हैं। इन अभियानों के दौरान <strong data-start="2192" data-end="2219">2381 जन-जागरूकता बैठकें</strong> और <strong data-start="2223" data-end="2251">1769 किसान यूनियन बैठकों</strong> का आयोजन किया गया।</p>
<p data-start="2274" data-end="2478">इसके अलावा, थाना स्तर पर <strong data-start="2299" data-end="2346">पराली सुरक्षा बल (Stubble Protection Force)</strong> भी गठित किया गया है। यह विशेष बल खेतों की निगरानी करने के साथ-साथ किसानों को पराली पर आग लगाने से रोकने के लिए प्रेरित कर रहा है।</p>

<h3 data-start="2480" data-end="2517">कानूनी कार्रवाई और सख्त निगरानी</h3>
<p data-start="2518" data-end="2962">पंजाब रिमोट सेंसिंग सेंटर (PRSC) की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक राज्य में <strong data-start="2589" data-end="2625">415 खेतों में आग लगाने की घटनाओं</strong> की पहचान की गई है। इन घटनाओं के बाद मौके पर निरीक्षण के लिए संयुक्त टीमें भेजी गई हैं। पुलिस ने अब तक <strong data-start="2728" data-end="2753">172 मामलों में एफआईआर</strong> दर्ज की हैं, जबकि <strong data-start="2772" data-end="2799">189 मामलों में जुर्माना</strong> लगाया गया है। इसके अतिरिक्त, <strong data-start="2829" data-end="2879">165 किसानों के राजस्व रिकॉर्ड में “रेड एंट्री”</strong> दर्ज की गई है, ताकि भविष्य में दोबारा ऐसा करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जा सके।</p>
<p data-start="2964" data-end="3222">डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि पंजाब सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में पराली जलाने के मामलों को <strong data-start="3055" data-end="3064">शून्य</strong> तक लाना है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई वैकल्पिक तकनीकों और मशीनों का उपयोग करें और पर्यावरण की रक्षा में अपना सहयोग दें।</p>]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>मान सरकार लाएगी Punjab की खेती में नया सवेरा: Argentina के साथ ऐतिहासिक साझेदारी से खुलेंगे विकास के नए द्वार!</title>
		<link>https://trendstopic.in/mann-government-will-usher-in-a-new-dawn-for-punjabs-agriculture-historic-partnership-with-argentina-will-open-new-doors-to-development/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 16 Oct 2025 06:13:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[News]]></category>
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					<description><![CDATA[<p data-start="251" data-end="798">पंजाब की धरती, जो सदियों से भारत की खाद्य सुरक्षा का आधार रही है, अब एक नए कृषि युग में प्रवेश कर रही है। यह परिवर्तन राज्य सरकार की दूरदर्शिता और किसानों के प्रति उसके अटूट समर्पण का परिणाम है। हाल ही में पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना में अर्जेंटीना के प्रतिष्ठित कृषि संस्थान <em data-start="534" data-end="564">Centro Agrotechnico Regional</em> के विशेषज्ञों के साथ हुई ऐतिहासिक बैठक इस दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुई। यह केवल एक शिष्टाचार भेंट नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक शोध और वैश्विक ज्ञान के समागम से पंजाब के कृषि भविष्य को पुनर्परिभाषित करने की एक ठोस पहल थी।</p>
<p data-start="800" data-end="1303">बैठक के दौरान अर्जेंटीना के वैज्ञानिकों ने पंजाब की उपजाऊ मिट्टी, अनुकूल जलवायु, और मेहनती किसानों की कार्यशैली का गहराई से अध्ययन किया। उन्होंने विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं और स्थानीय किसानों के साथ फसल उत्पादन, जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य और टिकाऊ कृषि जैसे विषयों पर व्यापक संवाद किया। दोनों पक्षों ने संयुक्त अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी आदान-प्रदान की दिशा में ठोस संकल्प लिए। यह साझेदारी पंजाब की खेती को वैश्विक मानकों तक ले जाने के साथ-साथ किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगी।</p>
<p data-start="1305" data-end="1731">पिछले वर्षों में पंजाब सरकार ने कृषि क्षेत्र में अनेक नवाचार किए हैं। ड्रिप सिंचाई, स्प्रिंकलर सिस्टम और सोलर पंप जैसी तकनीकों पर उदार सब्सिडी देकर जल और ऊर्जा की बचत सुनिश्चित की गई है। स्मार्ट ऐप्स के माध्यम से किसानों को मौसम की जानकारी, बुवाई के उपयुक्त समय, कीट प्रबंधन और बाजार मूल्य जैसी जानकारियाँ सुलभ कराई जा रही हैं। इससे न केवल उत्पादन में वृद्धि हुई है, बल्कि किसानों का आत्मविश्वास और तकनीकी सशक्तिकरण भी बढ़ा है।</p>
<p data-start="1733" data-end="2182">खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में भी सरकार ने अभूतपूर्व निवेश किया है। राज्यभर में आधुनिक फूड प्रोसेसिंग पार्कों और कोल्ड स्टोरेज की स्थापना से किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिल रहा है और फसल की बर्बादी में कमी आई है। लुधियाना, अमृतसर, जालंधर व पटियाला जैसे शहरों में बने इन पार्कों से हज़ारों युवाओं को रोजगार मिला है और लघु उद्योगों को प्रोत्साहन मिला है। इससे गांवों से हो रहा पलायन थमा है और युवा अपनी माटी से जुड़कर नए अवसरों का लाभ उठा रहे हैं।</p>
<p data-start="1733" data-end="2182"><img class="alignnone  wp-image-25943" src="https://trendstopic.in/wp-content/uploads/2025/10/WhatsApp-Image-2025-10-16-at-11.11.29-AM-300x169.jpg" alt="" width="1200" height="676" /></p>
<p data-start="1733" data-end="2182"></p>
<p data-start="2184" data-end="2506">आपदाओं के समय भी पंजाब सरकार किसानों के साथ चट्टान की तरह खड़ी रही है। हाल की भारी बारिश और बाढ़ से प्रभावित लाखों एकड़ खेतों के लिए सरकार ने 30 दिन के भीतर ₹20,000 प्रति एकड़ मुआवज़ा प्रदान किया और मुफ्त बीज वितरित किए। इस त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई ने किसानों में नई उम्मीद जगाई और सरकार पर उनके विश्वास को और मजबूत किया।</p>
<p data-start="2508" data-end="3001">केंद्र सरकार के सहयोग से भी पंजाब ने कृषि अनुसंधान और नवाचार को नई दिशा दी है। जलवायु परिवर्तन के अनुरूप फसल चक्र में सुधार, नई किस्मों का विकास और जैविक खेती को प्रोत्साहन जैसे विषयों पर गंभीर काम हो रहा है। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय में अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं, जहां युवा वैज्ञानिक किसानों की जमीनी समस्याओं का समाधान खोज रहे हैं। अर्जेंटीना जैसे उन्नत कृषि राष्ट्र के साथ यह सहभागिता वैज्ञानिकों और किसानों दोनों के लिए वैश्विक अनुभवों को अपनाने का अनूठा अवसर प्रदान करेगी।</p>
<p data-start="3003" data-end="3401">मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस अवसर पर कहा, “पंजाब के किसान केवल हमारे राज्य ही नहीं, पूरे देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ हैं। हमारी सरकार का उद्देश्य है कि हर किसान को तकनीक, जानकारी, और बेहतर बाजार तक सीधी पहुँच मिले। अर्जेंटीना जैसे कृषि अग्रणी देश के साथ साझेदारी से पंजाब की खेती को विश्व मंच पर नई पहचान मिलेगी।” उनके यह शब्द राज्य सरकार की प्रतिबद्धता और किसान केंद्रित सोच को स्पष्ट दर्शाते हैं।</p>
<p data-start="3403" data-end="3859">आज पंजाब की कृषि केवल भारत में नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पटल पर भी अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रही है। विदेशी कृषि विशेषज्ञ यहाँ की कृषि व्यवस्था, किसानों की लगन और सरकारी नीतियों से प्रभावित हो रहे हैं। अर्जेंटीना की टीम ने भी पंजाब के किसानों के परिश्रम और नवाचार को सराहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब की मिट्टी में असीम संभावनाएं हैं और यहां के किसान नई तकनीकों को अपनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह सहयोग भारत की कृषि अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती देगा।</p>
<p data-start="3861" data-end="4379">यह साझेदारी पंजाब के किसानों के लिए केवल सहयोग नहीं, बल्कि कृषि क्रांति की एक नई शुरुआत है। अर्जेंटीना के विशेषज्ञों के साथ मिलकर वैज्ञानिक नई किस्में, जल संरक्षण की उन्नत तकनीकें और जैविक खेती को और सशक्त बनाएंगे। इससे न केवल उत्पादन और लाभ में वृद्धि होगी, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन भी बना रहेगा। पंजाब सरकार की दूरदृष्टि, किसानों का परिश्रम और वैश्विक सहयोग—इन तीनों के सम्मिलन से पंजाब की कृषि भविष्य में नई ऊंचाइयों को अवश्य प्राप्त करेगी। और वह दिन दूर नहीं जब पंजाब न केवल देश का, बल्कि दुनिया का कृषि मॉडल बनेगा।</p>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p data-start="251" data-end="798">पंजाब की धरती, जो सदियों से भारत की खाद्य सुरक्षा का आधार रही है, अब एक नए कृषि युग में प्रवेश कर रही है। यह परिवर्तन राज्य सरकार की दूरदर्शिता और किसानों के प्रति उसके अटूट समर्पण का परिणाम है। हाल ही में पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना में अर्जेंटीना के प्रतिष्ठित कृषि संस्थान <em data-start="534" data-end="564">Centro Agrotechnico Regional</em> के विशेषज्ञों के साथ हुई ऐतिहासिक बैठक इस दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुई। यह केवल एक शिष्टाचार भेंट नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक शोध और वैश्विक ज्ञान के समागम से पंजाब के कृषि भविष्य को पुनर्परिभाषित करने की एक ठोस पहल थी।</p>
<p data-start="800" data-end="1303">बैठक के दौरान अर्जेंटीना के वैज्ञानिकों ने पंजाब की उपजाऊ मिट्टी, अनुकूल जलवायु, और मेहनती किसानों की कार्यशैली का गहराई से अध्ययन किया। उन्होंने विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं और स्थानीय किसानों के साथ फसल उत्पादन, जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य और टिकाऊ कृषि जैसे विषयों पर व्यापक संवाद किया। दोनों पक्षों ने संयुक्त अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी आदान-प्रदान की दिशा में ठोस संकल्प लिए। यह साझेदारी पंजाब की खेती को वैश्विक मानकों तक ले जाने के साथ-साथ किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगी।</p>
<p data-start="1305" data-end="1731">पिछले वर्षों में पंजाब सरकार ने कृषि क्षेत्र में अनेक नवाचार किए हैं। ड्रिप सिंचाई, स्प्रिंकलर सिस्टम और सोलर पंप जैसी तकनीकों पर उदार सब्सिडी देकर जल और ऊर्जा की बचत सुनिश्चित की गई है। स्मार्ट ऐप्स के माध्यम से किसानों को मौसम की जानकारी, बुवाई के उपयुक्त समय, कीट प्रबंधन और बाजार मूल्य जैसी जानकारियाँ सुलभ कराई जा रही हैं। इससे न केवल उत्पादन में वृद्धि हुई है, बल्कि किसानों का आत्मविश्वास और तकनीकी सशक्तिकरण भी बढ़ा है।</p>
<p data-start="1733" data-end="2182">खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में भी सरकार ने अभूतपूर्व निवेश किया है। राज्यभर में आधुनिक फूड प्रोसेसिंग पार्कों और कोल्ड स्टोरेज की स्थापना से किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिल रहा है और फसल की बर्बादी में कमी आई है। लुधियाना, अमृतसर, जालंधर व पटियाला जैसे शहरों में बने इन पार्कों से हज़ारों युवाओं को रोजगार मिला है और लघु उद्योगों को प्रोत्साहन मिला है। इससे गांवों से हो रहा पलायन थमा है और युवा अपनी माटी से जुड़कर नए अवसरों का लाभ उठा रहे हैं।</p>
<p data-start="1733" data-end="2182"><img class="alignnone  wp-image-25943" src="https://trendstopic.in/wp-content/uploads/2025/10/WhatsApp-Image-2025-10-16-at-11.11.29-AM-300x169.jpg" alt="" width="1200" height="676" /></p>
<p data-start="1733" data-end="2182"></p>
<p data-start="2184" data-end="2506">आपदाओं के समय भी पंजाब सरकार किसानों के साथ चट्टान की तरह खड़ी रही है। हाल की भारी बारिश और बाढ़ से प्रभावित लाखों एकड़ खेतों के लिए सरकार ने 30 दिन के भीतर ₹20,000 प्रति एकड़ मुआवज़ा प्रदान किया और मुफ्त बीज वितरित किए। इस त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई ने किसानों में नई उम्मीद जगाई और सरकार पर उनके विश्वास को और मजबूत किया।</p>
<p data-start="2508" data-end="3001">केंद्र सरकार के सहयोग से भी पंजाब ने कृषि अनुसंधान और नवाचार को नई दिशा दी है। जलवायु परिवर्तन के अनुरूप फसल चक्र में सुधार, नई किस्मों का विकास और जैविक खेती को प्रोत्साहन जैसे विषयों पर गंभीर काम हो रहा है। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय में अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं, जहां युवा वैज्ञानिक किसानों की जमीनी समस्याओं का समाधान खोज रहे हैं। अर्जेंटीना जैसे उन्नत कृषि राष्ट्र के साथ यह सहभागिता वैज्ञानिकों और किसानों दोनों के लिए वैश्विक अनुभवों को अपनाने का अनूठा अवसर प्रदान करेगी।</p>
<p data-start="3003" data-end="3401">मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस अवसर पर कहा, “पंजाब के किसान केवल हमारे राज्य ही नहीं, पूरे देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ हैं। हमारी सरकार का उद्देश्य है कि हर किसान को तकनीक, जानकारी, और बेहतर बाजार तक सीधी पहुँच मिले। अर्जेंटीना जैसे कृषि अग्रणी देश के साथ साझेदारी से पंजाब की खेती को विश्व मंच पर नई पहचान मिलेगी।” उनके यह शब्द राज्य सरकार की प्रतिबद्धता और किसान केंद्रित सोच को स्पष्ट दर्शाते हैं।</p>
<p data-start="3403" data-end="3859">आज पंजाब की कृषि केवल भारत में नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पटल पर भी अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रही है। विदेशी कृषि विशेषज्ञ यहाँ की कृषि व्यवस्था, किसानों की लगन और सरकारी नीतियों से प्रभावित हो रहे हैं। अर्जेंटीना की टीम ने भी पंजाब के किसानों के परिश्रम और नवाचार को सराहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब की मिट्टी में असीम संभावनाएं हैं और यहां के किसान नई तकनीकों को अपनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह सहयोग भारत की कृषि अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती देगा।</p>
<p data-start="3861" data-end="4379">यह साझेदारी पंजाब के किसानों के लिए केवल सहयोग नहीं, बल्कि कृषि क्रांति की एक नई शुरुआत है। अर्जेंटीना के विशेषज्ञों के साथ मिलकर वैज्ञानिक नई किस्में, जल संरक्षण की उन्नत तकनीकें और जैविक खेती को और सशक्त बनाएंगे। इससे न केवल उत्पादन और लाभ में वृद्धि होगी, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन भी बना रहेगा। पंजाब सरकार की दूरदृष्टि, किसानों का परिश्रम और वैश्विक सहयोग—इन तीनों के सम्मिलन से पंजाब की कृषि भविष्य में नई ऊंचाइयों को अवश्य प्राप्त करेगी। और वह दिन दूर नहीं जब पंजाब न केवल देश का, बल्कि दुनिया का कृषि मॉडल बनेगा।</p>]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>Punjab में Maize Revolution: Crop Diversification से बढ़ी किसानों की उम्मीदें</title>
		<link>https://trendstopic.in/maize-revolution-in-punjab-crop-diversification-raises-farmers-hopes/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Oct 2025 05:28:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[Agriculture]]></category>
		<category><![CDATA[BhagwantSinghMann]]></category>
		<category><![CDATA[CropDiversification]]></category>
		<category><![CDATA[Farmers]]></category>
		<category><![CDATA[GurmeetSinghKhudian]]></category>
		<category><![CDATA[KharifSeason]]></category>
		<category><![CDATA[MaizeFarming]]></category>
		<category><![CDATA[MaizeRevolution]]></category>
		<category><![CDATA[punjab]]></category>
		<category><![CDATA[PunjabGovernment]]></category>
		<category><![CDATA[RanglaPunjab]]></category>
		<category><![CDATA[SustainableFarming]]></category>
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					<description><![CDATA[<strong>“</strong><strong>रंगला पंजाब</strong><strong>” </strong><strong>की ओर एक नया कदम </strong><strong>– </strong><strong>मक्का का रकबा </strong><strong>16.27% </strong><strong>बढ़ा</strong><strong>, </strong><strong>अब </strong><strong>1 </strong><strong>लाख हेक्टेयर तक पहुँचा</strong>

<strong> </strong>

पंजाब में अब खेतों की तस्वीर बदल रही है। बरसों से जहाँ तक नज़र जाती थी, वहाँ धान की हरियाली दिखती थी — पर अब धीरे-धीरे <strong>मक्का की सुनहरी लहरें</strong> उस जगह ले रही हैं। मुख्यमंत्री <strong>भगवंत सिंह मान</strong> की सरकार ने जिस “<strong>फसल विविधीकरण मिशन (</strong><strong>Crop Diversification Mission)</strong>” की शुरुआत की थी, वह अब एक सच्ची <strong>“</strong><strong>मक्का क्रांति (</strong><strong>Maize Revolution)”</strong> बनती जा रही है।

<strong>धान से मक्का की ओर बदलाव: किसानों की नई सोच</strong>

पंजाब का किसान लंबे समय से <strong>धान-गेहूँ के चक्रव्यूह</strong> में फंसा हुआ था। धान की खेती में ज़्यादा पानी लगता है और इससे <strong>भूजल स्तर लगातार नीचे</strong> जा रहा था। ऊपर से फसल की लागत बढ़ती जा रही थी और आमदनी घट रही थी। किसानों की यही मुश्किल अब बदल रही है — क्योंकि सरकार ने उन्हें <strong>कम पानी वाली और ज़्यादा मुनाफ़े वाली फसलों</strong> की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया है।

सरकार की मेहनत का असर अब दिख रहा है। 2024 में जहाँ <strong>मक्का की खेती </strong><strong>86,000 </strong><strong>हेक्टेयर</strong> में होती थी, वहीं 2025 में यह बढ़कर <strong>1,00,000 </strong><strong>हेक्टेयर</strong> तक पहुँच गई है — यानी <strong>16.27% </strong><strong>की बढ़ोतरी।</strong> यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि पंजाब के किसानों की <strong>सोच में आए बदलाव की कहानी</strong> है।

<strong>सरकार का विज़न: </strong><strong>“</strong><strong>रंगला पंजाब</strong><strong>” </strong><strong>का असली अर्थ</strong>

“रंगला पंजाब” की बात सिर्फ़ शहरों को सुंदर बनाने तक सीमित नहीं है। इसका असली मतलब है —
<strong>धरती को स्वस्थ बनाना और किसान को समृद्ध करना।</strong>
धान की जगह मक्का जैसी फसलों को बढ़ावा देकर राज्य सरकार ने यह साबित किया है कि अगर नीयत साफ़ हो तो बदलाव ज़रूर आता है।

<strong>6 </strong><strong>जिलों में शुरू हुआ पायलट प्रोजेक्ट</strong>

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में राज्य सरकार ने <strong>6 </strong><strong>जिलों</strong> — बठिंडा, संगरूर, कपूरथला, जालंधर, गुरदासपुर और पठानकोट — में <strong>12,000 </strong><strong>हेक्टेयर भूमि</strong> को धान से मक्का में बदलने के लिए एक <strong>पायलट प्रोजेक्ट</strong> शुरू किया है।

इस परियोजना के तहत:
<ul>
 	<li>किसानों को <strong>₹17,500 </strong><strong>प्रति हेक्टेयर</strong> की सहायता दी जा रही है।</li>
 	<li>इसके अलावा, किसानों को <strong>₹7,000 </strong><strong>प्रति एकड़ की सब्सिडी</strong> भी मिलेगी।</li>
 	<li>किसानों का मार्गदर्शन करने के लिए <strong>185 “</strong><strong>किसान मित्र</strong><strong>” (Farmer Friends)</strong> नियुक्त किए गए हैं।</li>
 	<li>इस योजना से लगभग <strong>30,000 </strong><strong>किसानों को सीधा लाभ</strong> मिलेगा।</li>
</ul>
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री <strong>श्री गुरमीत सिंह खुडियाँ</strong> ने हाल ही में एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक में इस प्रोजेक्ट की प्रगति की समीक्षा की और खरीफ मक्का की सुचारू खरीद के लिए ज़रूरी निर्देश जारी किए।

&nbsp;

<img class="alignnone  wp-image-25725" src="https://trendstopic.in/wp-content/uploads/2025/10/WhatsApp-Image-2025-10-06-at-4.19.19-PM-1-300x169.jpg" alt="" width="737" height="415" />

&nbsp;

<strong>जिलों में मक्का की बढ़ती खेती</strong>

कृषि विभाग के अनुसार, खरीफ मक्का अब <strong>लगभग </strong><strong>7,000 </strong><strong>हेक्टेयर (</strong><strong>19,500 </strong><strong>एकड़)</strong> भूमि में बोया गया है।
सबसे अधिक रकबा <strong>पठानकोट</strong> जिले में दर्ज किया गया — <strong>4,100 </strong><strong>एकड़</strong>,
इसके बाद <strong>संगरूर (</strong><strong>3,700)</strong>, <strong>बठिंडा (</strong><strong>3,200)</strong>, <strong>जालंधर (</strong><strong>3,100)</strong>, <strong>कपूरथला (</strong><strong>2,800)</strong> और <strong>गुरदासपुर (</strong><strong>2,600)</strong> का स्थान है।

यह आँकड़े दिखाते हैं कि धीरे-धीरे लेकिन निश्चित रूप से किसान मक्का की खेती को अपना रहे हैं।

<strong>खरीद और गुणवत्ता पर ज़ोर</strong>

सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए कि किसानों को अपनी उपज बेचने में कोई दिक्कत न हो,
<strong>कृषि विभाग</strong><strong>, </strong><strong>पंजाब मंडी बोर्ड और मार्कफेड</strong> की <strong>जिला स्तरीय समितियाँ</strong> बनाई हैं।

कृषि मंत्री ने किसानों से अपील की है कि वे <strong>सूखा मक्का</strong> लेकर मंडी आएँ, ताकि खरीद में आसानी रहे।
वहीं <strong>कृषि विभाग के सचिव डॉ. बसंत गर्ग</strong> ने निर्देश दिया कि मक्का में <strong>14% </strong><strong>से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए।</strong>
उन्होंने सभी ज़िला अधिकारियों को किसानों को जागरूक करने और <strong>बेहतर मूल्य दिलाने</strong> के लिए सक्रिय रूप से काम करने को कहा है।

बैठक में <strong>श्री रामवीर (सचिव</strong><strong>, </strong><strong>पंजाब मंडी बोर्ड)</strong>, <strong>श्री कुमार अमित (</strong><strong>MD, </strong><strong>मार्कफेड)</strong> और <strong>श्री जसवंत सिंह (निदेशक</strong><strong>, </strong><strong>कृषि)</strong> सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

<strong>पर्यावरण और किसानों के लिए लाभ</strong>

मक्का की खेती से:
<ul>
 	<li><strong>पानी की खपत कम होती है</strong>, जिससे भूजल स्तर बचता है।</li>
 	<li>किसानों को <strong>बेहतर दाम</strong> और <strong>अधिक आमदनी</strong> मिलती है।</li>
 	<li>खेत की <strong>मिट्टी की गुणवत्ता</strong> में सुधार होता है।</li>
</ul>
कुल मिलाकर, यह बदलाव न केवल आर्थिक रूप से, बल्कि पर्यावरण की दृष्टि से भी एक <strong>दोहरी जीत (</strong><strong>double victory)</strong> है।

<strong>“</strong><strong>मक्का क्रांति</strong><strong>” — </strong><strong>किसानों का नया आत्मविश्वास</strong>

जब सरकार किसानों को <strong>MSP </strong><strong>की गारंटी</strong> और <strong>आर्थिक सुरक्षा का भरोसा</strong> देती है,
तो किसान <strong>पुरानी परंपराओं से निकलकर नया कदम उठाने</strong> से नहीं डरते।
पंजाब के किसान अब यही कर रहे हैं —
धान की जगह मक्का बोकर वे न सिर्फ़ अपनी ज़िंदगी बदल रहे हैं, बल्कि <strong>धरती माँ का कर्ज भी चुका रहे हैं।</strong>

&nbsp;

<img class="alignnone  wp-image-25726" src="https://trendstopic.in/wp-content/uploads/2025/10/WhatsApp-Image-2025-10-06-at-4.19.19-PM-300x169.jpg" alt="" width="668" height="376" />

&nbsp;

यह “मक्का क्रांति” पंजाब की <strong>भावनात्मक और आर्थिक आज़ादी</strong> का प्रतीक बन चुकी है।
यह दिखाती है कि अगर <strong>सरकार और किसान एक साथ खड़े हों</strong>,
तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती — और <strong>सफलता तय होती है।</strong>

पंजाब में यह फसल विविधीकरण अभियान सिर्फ़ एक सरकारी योजना नहीं,
बल्कि एक <strong>जन-आंदोलन</strong> बन चुका है।
हर वह किसान जो धान की जगह मक्का बो रहा है,
वह असल में <strong>भविष्य की खुशहाली बो रहा है।</strong>

“<strong>रंगला पंजाब</strong>” अब खेतों से होकर निकल रहा है —
जहाँ सुनहरी मक्का की बालियाँ हवा में झूम रही हैं,
और हर किसान की मुस्कान कह रही है —
<strong>“</strong><strong>बदलाव संभव है।</strong><strong>”</strong>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<strong>“</strong><strong>रंगला पंजाब</strong><strong>” </strong><strong>की ओर एक नया कदम </strong><strong>– </strong><strong>मक्का का रकबा </strong><strong>16.27% </strong><strong>बढ़ा</strong><strong>, </strong><strong>अब </strong><strong>1 </strong><strong>लाख हेक्टेयर तक पहुँचा</strong>

<strong> </strong>

पंजाब में अब खेतों की तस्वीर बदल रही है। बरसों से जहाँ तक नज़र जाती थी, वहाँ धान की हरियाली दिखती थी — पर अब धीरे-धीरे <strong>मक्का की सुनहरी लहरें</strong> उस जगह ले रही हैं। मुख्यमंत्री <strong>भगवंत सिंह मान</strong> की सरकार ने जिस “<strong>फसल विविधीकरण मिशन (</strong><strong>Crop Diversification Mission)</strong>” की शुरुआत की थी, वह अब एक सच्ची <strong>“</strong><strong>मक्का क्रांति (</strong><strong>Maize Revolution)”</strong> बनती जा रही है।

<strong>धान से मक्का की ओर बदलाव: किसानों की नई सोच</strong>

पंजाब का किसान लंबे समय से <strong>धान-गेहूँ के चक्रव्यूह</strong> में फंसा हुआ था। धान की खेती में ज़्यादा पानी लगता है और इससे <strong>भूजल स्तर लगातार नीचे</strong> जा रहा था। ऊपर से फसल की लागत बढ़ती जा रही थी और आमदनी घट रही थी। किसानों की यही मुश्किल अब बदल रही है — क्योंकि सरकार ने उन्हें <strong>कम पानी वाली और ज़्यादा मुनाफ़े वाली फसलों</strong> की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया है।

सरकार की मेहनत का असर अब दिख रहा है। 2024 में जहाँ <strong>मक्का की खेती </strong><strong>86,000 </strong><strong>हेक्टेयर</strong> में होती थी, वहीं 2025 में यह बढ़कर <strong>1,00,000 </strong><strong>हेक्टेयर</strong> तक पहुँच गई है — यानी <strong>16.27% </strong><strong>की बढ़ोतरी।</strong> यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि पंजाब के किसानों की <strong>सोच में आए बदलाव की कहानी</strong> है।

<strong>सरकार का विज़न: </strong><strong>“</strong><strong>रंगला पंजाब</strong><strong>” </strong><strong>का असली अर्थ</strong>

“रंगला पंजाब” की बात सिर्फ़ शहरों को सुंदर बनाने तक सीमित नहीं है। इसका असली मतलब है —
<strong>धरती को स्वस्थ बनाना और किसान को समृद्ध करना।</strong>
धान की जगह मक्का जैसी फसलों को बढ़ावा देकर राज्य सरकार ने यह साबित किया है कि अगर नीयत साफ़ हो तो बदलाव ज़रूर आता है।

<strong>6 </strong><strong>जिलों में शुरू हुआ पायलट प्रोजेक्ट</strong>

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में राज्य सरकार ने <strong>6 </strong><strong>जिलों</strong> — बठिंडा, संगरूर, कपूरथला, जालंधर, गुरदासपुर और पठानकोट — में <strong>12,000 </strong><strong>हेक्टेयर भूमि</strong> को धान से मक्का में बदलने के लिए एक <strong>पायलट प्रोजेक्ट</strong> शुरू किया है।

इस परियोजना के तहत:
<ul>
 	<li>किसानों को <strong>₹17,500 </strong><strong>प्रति हेक्टेयर</strong> की सहायता दी जा रही है।</li>
 	<li>इसके अलावा, किसानों को <strong>₹7,000 </strong><strong>प्रति एकड़ की सब्सिडी</strong> भी मिलेगी।</li>
 	<li>किसानों का मार्गदर्शन करने के लिए <strong>185 “</strong><strong>किसान मित्र</strong><strong>” (Farmer Friends)</strong> नियुक्त किए गए हैं।</li>
 	<li>इस योजना से लगभग <strong>30,000 </strong><strong>किसानों को सीधा लाभ</strong> मिलेगा।</li>
</ul>
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री <strong>श्री गुरमीत सिंह खुडियाँ</strong> ने हाल ही में एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक में इस प्रोजेक्ट की प्रगति की समीक्षा की और खरीफ मक्का की सुचारू खरीद के लिए ज़रूरी निर्देश जारी किए।

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<strong>जिलों में मक्का की बढ़ती खेती</strong>

कृषि विभाग के अनुसार, खरीफ मक्का अब <strong>लगभग </strong><strong>7,000 </strong><strong>हेक्टेयर (</strong><strong>19,500 </strong><strong>एकड़)</strong> भूमि में बोया गया है।
सबसे अधिक रकबा <strong>पठानकोट</strong> जिले में दर्ज किया गया — <strong>4,100 </strong><strong>एकड़</strong>,
इसके बाद <strong>संगरूर (</strong><strong>3,700)</strong>, <strong>बठिंडा (</strong><strong>3,200)</strong>, <strong>जालंधर (</strong><strong>3,100)</strong>, <strong>कपूरथला (</strong><strong>2,800)</strong> और <strong>गुरदासपुर (</strong><strong>2,600)</strong> का स्थान है।

यह आँकड़े दिखाते हैं कि धीरे-धीरे लेकिन निश्चित रूप से किसान मक्का की खेती को अपना रहे हैं।

<strong>खरीद और गुणवत्ता पर ज़ोर</strong>

सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए कि किसानों को अपनी उपज बेचने में कोई दिक्कत न हो,
<strong>कृषि विभाग</strong><strong>, </strong><strong>पंजाब मंडी बोर्ड और मार्कफेड</strong> की <strong>जिला स्तरीय समितियाँ</strong> बनाई हैं।

कृषि मंत्री ने किसानों से अपील की है कि वे <strong>सूखा मक्का</strong> लेकर मंडी आएँ, ताकि खरीद में आसानी रहे।
वहीं <strong>कृषि विभाग के सचिव डॉ. बसंत गर्ग</strong> ने निर्देश दिया कि मक्का में <strong>14% </strong><strong>से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए।</strong>
उन्होंने सभी ज़िला अधिकारियों को किसानों को जागरूक करने और <strong>बेहतर मूल्य दिलाने</strong> के लिए सक्रिय रूप से काम करने को कहा है।

बैठक में <strong>श्री रामवीर (सचिव</strong><strong>, </strong><strong>पंजाब मंडी बोर्ड)</strong>, <strong>श्री कुमार अमित (</strong><strong>MD, </strong><strong>मार्कफेड)</strong> और <strong>श्री जसवंत सिंह (निदेशक</strong><strong>, </strong><strong>कृषि)</strong> सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

<strong>पर्यावरण और किसानों के लिए लाभ</strong>

मक्का की खेती से:
<ul>
 	<li><strong>पानी की खपत कम होती है</strong>, जिससे भूजल स्तर बचता है।</li>
 	<li>किसानों को <strong>बेहतर दाम</strong> और <strong>अधिक आमदनी</strong> मिलती है।</li>
 	<li>खेत की <strong>मिट्टी की गुणवत्ता</strong> में सुधार होता है।</li>
</ul>
कुल मिलाकर, यह बदलाव न केवल आर्थिक रूप से, बल्कि पर्यावरण की दृष्टि से भी एक <strong>दोहरी जीत (</strong><strong>double victory)</strong> है।

<strong>“</strong><strong>मक्का क्रांति</strong><strong>” — </strong><strong>किसानों का नया आत्मविश्वास</strong>

जब सरकार किसानों को <strong>MSP </strong><strong>की गारंटी</strong> और <strong>आर्थिक सुरक्षा का भरोसा</strong> देती है,
तो किसान <strong>पुरानी परंपराओं से निकलकर नया कदम उठाने</strong> से नहीं डरते।
पंजाब के किसान अब यही कर रहे हैं —
धान की जगह मक्का बोकर वे न सिर्फ़ अपनी ज़िंदगी बदल रहे हैं, बल्कि <strong>धरती माँ का कर्ज भी चुका रहे हैं।</strong>

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यह “मक्का क्रांति” पंजाब की <strong>भावनात्मक और आर्थिक आज़ादी</strong> का प्रतीक बन चुकी है।
यह दिखाती है कि अगर <strong>सरकार और किसान एक साथ खड़े हों</strong>,
तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती — और <strong>सफलता तय होती है।</strong>

पंजाब में यह फसल विविधीकरण अभियान सिर्फ़ एक सरकारी योजना नहीं,
बल्कि एक <strong>जन-आंदोलन</strong> बन चुका है।
हर वह किसान जो धान की जगह मक्का बो रहा है,
वह असल में <strong>भविष्य की खुशहाली बो रहा है।</strong>

“<strong>रंगला पंजाब</strong>” अब खेतों से होकर निकल रहा है —
जहाँ सुनहरी मक्का की बालियाँ हवा में झूम रही हैं,
और हर किसान की मुस्कान कह रही है —
<strong>“</strong><strong>बदलाव संभव है।</strong><strong>”</strong>]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>Zero Burning, Double Earning! Punjab सरकार का Action Plan-2025: पराली अब ‘Green Gold’</title>
		<link>https://trendstopic.in/zero-burning-double-earning-punjab-governments-action-plan-2025-crop-residue-now-green-gold/</link>
					<comments>https://trendstopic.in/zero-burning-double-earning-punjab-governments-action-plan-2025-crop-residue-now-green-gold/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Oct 2025 05:30:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चंडीगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[ActionPlan2025]]></category>
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		<category><![CDATA[ZeroBurning]]></category>
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					<description><![CDATA[उत्तर भारत में धान की कटाई के बाद हर साल जैसे ही धुंध फैलती है, किसान और आम लोग पराली जलाने की समस्या से परेशान हो जाते हैं। अब पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई में <strong>“</strong><strong>एक्शन प्लान-</strong><strong>2025”</strong> लॉन्च किया है, जो पराली जलाने की पुरानी प्रथा को खत्म करने और किसानों के लिए नई आय के अवसर लाने वाला है।

इस योजना में पराली को सिर्फ जला कर प्रदूषण फैलाने की बजाय <strong>“</strong><strong>हरा सोना</strong><strong>”</strong> बनाने का लक्ष्य रखा गया है। यानी इसे <strong>बायो-एनर्जी</strong><strong>, </strong><strong>जैविक खाद और बिजली उत्पादन</strong> जैसी उपयोगी चीजों में बदला जाएगा।

<strong>पायलट प्रोजेक्ट की सफलता</strong>

पिछले साल पटियाला के 17 गांवों में पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया था। इसके नतीजे बहुत उत्साहजनक रहे:
<ul>
 	<li>पराली जलाने की घटनाएं <strong>80% </strong><strong>तक घट गईं</strong>।</li>
 	<li>आग की संख्या 36,551 से घटकर केवल 10,479 रह गई।
इस सफलता ने दिखाया कि यह मॉडल पूरे पंजाब में काम कर सकता है।</li>
</ul>
<strong>सरकारी निवेश और मशीनें</strong>

इस योजना के तहत:
<ul>
 	<li>पंजाब सरकार का बजट: <strong>500 </strong><strong>करोड़ रुपये</strong></li>
 	<li>केंद्र सरकार का सहयोग: <strong>150 </strong><strong>करोड़ रुपये</strong></li>
 	<li><strong>15,000+ </strong><strong>मशीनें</strong> जैसे सुपर सीडर और बेलर सस्ते दामों पर किसानों को उपलब्ध कराई जाएंगी।</li>
 	<li>इस साल 4,367 नई सब्सिडी वाली मशीनें और 1,500 <strong>Custom Hiring Centres (CHC)</strong> बनाए जाएंगे।</li>
</ul>
7.06 मिलियन टन पराली को <strong>बायोगैस</strong><strong>, </strong><strong>बिजली और ईंधन</strong> में बदलने की योजना है। अनुमान है कि 19 मिलियन टन पराली का सही इस्तेमाल सालाना लाखों किसानों की अतिरिक्त आय में मदद कर सकता है।

<strong>डिजिटल और तकनीकी मदद</strong>

सरकार ने डिजिटल तकनीक का भी इस्तेमाल किया है:
<ul>
 	<li><strong>“</strong><strong>कृषि यंत्र साथी</strong><strong>” (KYS) </strong><strong>मोबाइल एप</strong>: किसानों के लिए उपकरण बुकिंग और शेड्यूलिंग आसान करेगा।</li>
 	<li><strong>डिजिटल जागरूकता अभियान</strong>: प्रेरक वीडियो और ‘उन्नत सिंह’ मास्कॉट गाँव-गाँव जाकर किसानों को जागरूक करेंगे।</li>
 	<li>टी-शर्ट, कैलेंडर, कप और टोट बैग जैसी चीजें भी किसानों में बांटी जाएंगी।</li>
</ul>
<strong>जागरूकता अभियान</strong>

सरकार 3,333 गांवों में कैंप लगाएगी और 296 ब्लॉक-स्तरीय कार्यक्रमों के जरिए जागरूकता फैलाएगी। IEC (सूचना, शिक्षा और संचार) गतिविधियों के तहत घर-घर जाकर लोगों को पराली के सही प्रबंधन के बारे में बताया जाएगा।

<strong>स्वास्थ्य और पर्यावरण लाभ</strong>

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि पराली जलाने से धुंआ वायु की गुणवत्ता पर असर डालता है और लोगों में <strong>श्वास और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं</strong> बढ़ती हैं। पटियाला में मिली सफलता दिखाती है कि यह मॉडल पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए लाभकारी है।

पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के मुताबिक, 15 से 27 सितंबर 2025 तक सिर्फ 82 आग की घटनाएं हुईं, जो पिछले साल से <strong>16% </strong><strong>कम</strong> हैं।

<strong>मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री की बातें</strong>

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा:

“पंजाब का किसान हमारी शान है। हम पराली को समस्या नहीं, अवसर मानते हैं। यह योजना न सिर्फ हवा साफ करेगी, बल्कि हर किसान की आर्थिक स्थिति मजबूत करेगी।”

कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बताया कि ग्रामीण बैठकों, घर-घर जागरूकता, डिजिटल वैन और तकनीकी एप की मदद से किसान आसानी से इस योजना का फायदा उठा पाएंगे।

<strong>लक्ष्य और भविष्य</strong>
<ul>
 	<li>कुल <strong>20.5 </strong><strong>मिलियन टन पराली</strong> का प्रबंधन किया जाएगा।</li>
 	<li><strong>5 </strong><strong>लाख एकड़ में </strong><strong>Direct Seeding of Rice (DSR)</strong> को बढ़ावा मिलेगा।</li>
 	<li>डेलॉइट की मदद से बायोमास पावर प्रोजेक्ट्स और बायोगैस प्लांट्स स्थापित होंगे, जहाँ किसान अपनी पराली बेचकर अच्छा पैसा कमा सकते हैं।</li>
</ul>
पंजाब की यह योजना किसानों के लिए <strong>“</strong><strong>जीरो बर्निंग</strong><strong>, </strong><strong>डबल अर्निंग</strong><strong>”</strong> का मौका है। अब पराली सिर्फ धुंआ नहीं, बल्कि किसानों की आय और पर्यावरण की सुरक्षा का स्रोत बनेगी।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[उत्तर भारत में धान की कटाई के बाद हर साल जैसे ही धुंध फैलती है, किसान और आम लोग पराली जलाने की समस्या से परेशान हो जाते हैं। अब पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई में <strong>“</strong><strong>एक्शन प्लान-</strong><strong>2025”</strong> लॉन्च किया है, जो पराली जलाने की पुरानी प्रथा को खत्म करने और किसानों के लिए नई आय के अवसर लाने वाला है।

इस योजना में पराली को सिर्फ जला कर प्रदूषण फैलाने की बजाय <strong>“</strong><strong>हरा सोना</strong><strong>”</strong> बनाने का लक्ष्य रखा गया है। यानी इसे <strong>बायो-एनर्जी</strong><strong>, </strong><strong>जैविक खाद और बिजली उत्पादन</strong> जैसी उपयोगी चीजों में बदला जाएगा।

<strong>पायलट प्रोजेक्ट की सफलता</strong>

पिछले साल पटियाला के 17 गांवों में पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया था। इसके नतीजे बहुत उत्साहजनक रहे:
<ul>
 	<li>पराली जलाने की घटनाएं <strong>80% </strong><strong>तक घट गईं</strong>।</li>
 	<li>आग की संख्या 36,551 से घटकर केवल 10,479 रह गई।
इस सफलता ने दिखाया कि यह मॉडल पूरे पंजाब में काम कर सकता है।</li>
</ul>
<strong>सरकारी निवेश और मशीनें</strong>

इस योजना के तहत:
<ul>
 	<li>पंजाब सरकार का बजट: <strong>500 </strong><strong>करोड़ रुपये</strong></li>
 	<li>केंद्र सरकार का सहयोग: <strong>150 </strong><strong>करोड़ रुपये</strong></li>
 	<li><strong>15,000+ </strong><strong>मशीनें</strong> जैसे सुपर सीडर और बेलर सस्ते दामों पर किसानों को उपलब्ध कराई जाएंगी।</li>
 	<li>इस साल 4,367 नई सब्सिडी वाली मशीनें और 1,500 <strong>Custom Hiring Centres (CHC)</strong> बनाए जाएंगे।</li>
</ul>
7.06 मिलियन टन पराली को <strong>बायोगैस</strong><strong>, </strong><strong>बिजली और ईंधन</strong> में बदलने की योजना है। अनुमान है कि 19 मिलियन टन पराली का सही इस्तेमाल सालाना लाखों किसानों की अतिरिक्त आय में मदद कर सकता है।

<strong>डिजिटल और तकनीकी मदद</strong>

सरकार ने डिजिटल तकनीक का भी इस्तेमाल किया है:
<ul>
 	<li><strong>“</strong><strong>कृषि यंत्र साथी</strong><strong>” (KYS) </strong><strong>मोबाइल एप</strong>: किसानों के लिए उपकरण बुकिंग और शेड्यूलिंग आसान करेगा।</li>
 	<li><strong>डिजिटल जागरूकता अभियान</strong>: प्रेरक वीडियो और ‘उन्नत सिंह’ मास्कॉट गाँव-गाँव जाकर किसानों को जागरूक करेंगे।</li>
 	<li>टी-शर्ट, कैलेंडर, कप और टोट बैग जैसी चीजें भी किसानों में बांटी जाएंगी।</li>
</ul>
<strong>जागरूकता अभियान</strong>

सरकार 3,333 गांवों में कैंप लगाएगी और 296 ब्लॉक-स्तरीय कार्यक्रमों के जरिए जागरूकता फैलाएगी। IEC (सूचना, शिक्षा और संचार) गतिविधियों के तहत घर-घर जाकर लोगों को पराली के सही प्रबंधन के बारे में बताया जाएगा।

<strong>स्वास्थ्य और पर्यावरण लाभ</strong>

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि पराली जलाने से धुंआ वायु की गुणवत्ता पर असर डालता है और लोगों में <strong>श्वास और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं</strong> बढ़ती हैं। पटियाला में मिली सफलता दिखाती है कि यह मॉडल पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए लाभकारी है।

पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के मुताबिक, 15 से 27 सितंबर 2025 तक सिर्फ 82 आग की घटनाएं हुईं, जो पिछले साल से <strong>16% </strong><strong>कम</strong> हैं।

<strong>मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री की बातें</strong>

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा:

“पंजाब का किसान हमारी शान है। हम पराली को समस्या नहीं, अवसर मानते हैं। यह योजना न सिर्फ हवा साफ करेगी, बल्कि हर किसान की आर्थिक स्थिति मजबूत करेगी।”

कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बताया कि ग्रामीण बैठकों, घर-घर जागरूकता, डिजिटल वैन और तकनीकी एप की मदद से किसान आसानी से इस योजना का फायदा उठा पाएंगे।

<strong>लक्ष्य और भविष्य</strong>
<ul>
 	<li>कुल <strong>20.5 </strong><strong>मिलियन टन पराली</strong> का प्रबंधन किया जाएगा।</li>
 	<li><strong>5 </strong><strong>लाख एकड़ में </strong><strong>Direct Seeding of Rice (DSR)</strong> को बढ़ावा मिलेगा।</li>
 	<li>डेलॉइट की मदद से बायोमास पावर प्रोजेक्ट्स और बायोगैस प्लांट्स स्थापित होंगे, जहाँ किसान अपनी पराली बेचकर अच्छा पैसा कमा सकते हैं।</li>
</ul>
पंजाब की यह योजना किसानों के लिए <strong>“</strong><strong>जीरो बर्निंग</strong><strong>, </strong><strong>डबल अर्निंग</strong><strong>”</strong> का मौका है। अब पराली सिर्फ धुंआ नहीं, बल्कि किसानों की आय और पर्यावरण की सुरक्षा का स्रोत बनेगी।]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>Stubble Burning की समस्या से निपटने के लिए Punjab Government की बड़ी पहल, Cooperative Banks के ज़रिए शुरू की Crop Residue Management Loan Scheme</title>
		<link>https://trendstopic.in/big-step-by-punjab-government-to-tackle-stubble-burning-crop-residue-management-loan-scheme-launched-through-cooperative-banks/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 12 Sep 2025 04:19:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चंडीगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[CleanEnergy]]></category>
		<category><![CDATA[CooperativeBanks]]></category>
		<category><![CDATA[CropResidueManagement]]></category>
		<category><![CDATA[Environment]]></category>
		<category><![CDATA[Farmers]]></category>
		<category><![CDATA[GreenEconomy]]></category>
		<category><![CDATA[PunjabGovernment]]></category>
		<category><![CDATA[PunjabNews]]></category>
		<category><![CDATA[StubbleBurning]]></category>
		<category><![CDATA[SustainableFarming]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब में हर साल पराली जलाने (Stubble Burning) से बढ़ते वायु प्रदूषण और उससे होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को रोकने के लिए पंजाब सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री <strong>भगवंत सिंह मान</strong> के नेतृत्व में सरकार ने आज <strong>संशोधित फसल अवशेष प्रबंधन ऋण योजना</strong> (Crop Residue Management Loan Scheme) शुरू की। यह योजना किसानों और सहकारी सभाओं को आधुनिक मशीनरी उपलब्ध कराकर पराली प्रबंधन को आसान बनाएगी।

इस योजना का उद्देश्य किसानों को ऐसी सुविधाएं देना है जिससे वे पराली जलाने के बजाय उसका सही ढंग से प्रबंधन कर सकें। यह कदम न केवल <strong>वायु प्रदूषण</strong> को कम करेगा बल्कि <strong>सतत खेती (Sustainable Farming)</strong> को बढ़ावा देगा और ग्रामीण इलाकों में <strong>नए रोजगार के अवसर</strong> भी पैदा करेगा।
<h3><strong>योजना की शुरुआत और मंजूरी</strong></h3>
इस योजना को राज्य की सहकारी सभाओं के माध्यम से लागू किया जाएगा।
<ul>
 	<li><strong>सुमेर सिंह गुर्जर</strong>, वित्त आयुक्त (सहकारिता) और</li>
 	<li><strong>गिरीश दियालन</strong>, रजिस्ट्रार (सहकारी सभाएं)</li>
</ul>
इनकी अगुवाई में इस योजना को मंजूरी दी गई है। सरकार का मानना है कि <strong>सहकारी सभाओं (Cooperative Societies)</strong> की भागीदारी से यह योजना ज़्यादा प्रभावी और तेज़ी से लागू हो पाएगी।
<h3><strong>योजना की मुख्य बातें:</strong></h3>
<ol>
 	<li><strong><em>सहकारी सभाओं के लिए बड़ी सब्सिडी</em></strong></li>
</ol>
<ul>
 	<li><strong>प्राथमिक कृषि सहकारी सभाएं (PACS)</strong> और <strong>बहु-उद्देश्यीय सहकारी सभाएं (Multipurpose Cooperative Societies)</strong>
<ul>
 	<li>मशीनरी खरीदने पर <strong>80% </strong><strong>तक सब्सिडी</strong> मिलेगी।</li>
 	<li>अधिकतम सब्सिडी <strong>₹24 </strong><strong>लाख</strong> तक होगी।</li>
 	<li>इससे सहकारी सभाएं आसानी से आधुनिक उपकरण खरीद पाएंगी और किसानों को उपलब्ध करवा सकेंगी।</li>
</ul>
</li>
</ul>
<ol start="2">
 	<li><strong><em>किसानों के लिए सब्सिडी</em></strong></li>
</ol>
<ul>
 	<li>व्यक्तिगत किसान फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी खरीदने पर <strong>50% </strong><strong>सब्सिडी</strong> के पात्र होंगे।</li>
 	<li>बाकी <strong>25% </strong><strong>राशि किसान को खुद वहन करनी होगी</strong>, जबकि शेष राशि लोन के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी।</li>
</ul>
<ol start="3">
 	<li><strong><em>अग्रिम राशि (</em></strong><strong><em>Advance Payment) </em></strong><strong><em>की सुविधा</em></strong></li>
</ol>
<ul>
 	<li>मशीनरी खरीदने के लिए दी जाने वाली <strong>कुल लोन राशि का 10% </strong><strong>हिस्सा अग्रिम</strong> के रूप में तय किया गया है।</li>
 	<li>यह किसानों और सभाओं को मशीनरी खरीदने में आसानी देगा।</li>
</ul>
<h3><strong>पराली प्रबंधन से प्रदूषण में कमी</strong></h3>
हर साल अक्टूबर-नवंबर में पंजाब और हरियाणा में बड़े पैमाने पर <strong>पराली जलाने</strong> की वजह से
<ul>
 	<li>दिल्ली-NCR और उत्तर भारत के कई राज्यों में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है।</li>
 	<li>सांस की बीमारियां और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ जाती हैं।</li>
</ul>
पंजाब सरकार की इस योजना के तहत अब पराली को जलाने की बजाय <strong>बायो-एनर्जी प्लांट्स (Bio-Energy Plants)</strong> में भेजा जाएगा।
<ul>
 	<li>इससे पराली का उपयोग <strong>स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy)</strong> बनाने में होगा।</li>
 	<li>यह राज्य की <strong>हरित अर्थव्यवस्था (Green Economy)</strong> को भी मजबूत करेगा।</li>
 	<li>साथ ही, ग्रामीण युवाओं के लिए <strong>नए रोजगार</strong> पैदा होंगे।</li>
</ul>
<h3><strong>मुख्यमंत्री भगवंत मान का बयान</strong></h3>
मुख्यमंत्री <strong>भगवंत सिंह मान</strong> ने इस मौके पर कहा कि उनकी सरकार किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए हर संभव मदद कर रही है।

"हमारा लक्ष्य किसानों को आधुनिक मशीनरी और आर्थिक सहायता देकर पराली जलाने की मजबूरी खत्म करना है। यह योजना न केवल <strong>पर्यावरण को बचाएगी</strong>, बल्कि किसानों को <strong>आर्थिक रूप से मज़बूत</strong> करेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगी।"

उन्होंने कहा कि यह पहल <strong>पराली जलाने की समस्या</strong>, वायु प्रदूषण और <strong>जलवायु परिवर्तन (Climate Change)</strong> से जुड़ी चुनौतियों को हल करने में मदद करेगी।
<h3><strong>केंद्र सरकार से फंड को लेकर विवाद भी जारी</strong></h3>
पंजाब सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब राज्य और केंद्र सरकार के बीच <strong>एसडीआरएफ (State Disaster Response Fund)</strong> को लेकर विवाद चल रहा है।
<ul>
 	<li>हाल ही में भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया था कि पंजाब सरकार <strong>एसडीआरएफ फंड</strong> का सही इस्तेमाल नहीं कर रही और इसका हिसाब नहीं दे रही।</li>
 	<li>जवाब में पंजाब के कैबिनेट मंत्री <strong>हरपाल सिंह चीमा</strong> ने आधिकारिक आंकड़े जारी किए और भाजपा के आरोपों को झूठा बताया।</li>
</ul>
<strong><em>एसडीआरएफ के आंकड़े (</em></strong><strong><em>1 </em></strong><strong><em>अप्रैल </em></strong><strong><em>2022 </em></strong><strong><em>से </em></strong><strong><em>10 </em></strong><strong><em>सितंबर </em></strong><strong><em>2025 </em></strong><strong><em>तक):</em></strong>
<table>
<thead>
<tr>
<td><strong>वित्तीय वर्ष</strong></td>
<td><strong>केंद्र से प्राप्त राशि</strong></td>
<td><strong>खर्च की गई राशि</strong></td>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td><strong>2022-23</strong></td>
<td>₹208 करोड़</td>
<td>₹61 करोड़</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>2023-24</strong></td>
<td>₹645 करोड़</td>
<td>₹420 करोड़</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>2024-25</strong></td>
<td>₹488 करोड़</td>
<td>₹27 करोड़</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>2025-26</strong></td>
<td>₹241 करोड़</td>
<td>₹140 करोड़</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<strong>कुल:</strong>
<ul>
 	<li><strong>केंद्र से प्राप्त राशि:</strong> ₹1582 करोड़</li>
 	<li><strong>खर्च की गई राशि:</strong> ₹649 करोड़</li>
 	<li><strong>बाकी राशि:</strong> ₹933 करोड़ <em>(</em><em>चल रहे और आने वाले राहत कार्यों में इस्तेमाल हो रही है)</em></li>
</ul>
चीमा ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा सिर्फ राजनीति कर रही है और संकट की घड़ी में भी लोगों को गुमराह कर रही है। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि उसने पंजाब के हजारों करोड़ रुपये के वैध बकाये को रोके रखा है।
<h3><strong>इस योजना का महत्व</strong></h3>
<ul>
 	<li><strong>प्रदूषण में कमी:</strong> पराली जलाने की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी।</li>
 	<li><strong>किसानों की मदद:</strong> उन्हें आधुनिक मशीनरी और सब्सिडी मिलेगी जिससे खेती आसान और लागत कम होगी।</li>
 	<li><strong>रोजगार के अवसर:</strong> मशीनरी संचालन, मरम्मत और बायो-एनर्जी प्लांट्स में नए रोजगार पैदा होंगे।</li>
 	<li><strong>स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन:</strong> पराली का उपयोग कोयला जैसे प्रदूषक ऊर्जा स्रोतों की जगह स्वच्छ ऊर्जा के लिए किया जाएगा।</li>
</ul>
पंजाब सरकार की यह योजना किसानों और पर्यावरण दोनों के लिए <strong>डबल बेनिफिट</strong> वाली है।
<ul>
 	<li>इससे न केवल <strong>पराली जलाने की समस्या का समाधान</strong> होगा बल्कि</li>
 	<li><strong>वायु प्रदूषण कम होगा</strong>,</li>
 	<li>किसानों को आर्थिक मजबूती मिलेगी और</li>
 	<li>ग्रामीण इलाकों में नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।</li>
</ul>
अगर इस योजना को सही तरीके से लागू किया गया, तो यह <strong>पंजाब ही नहीं, </strong><strong>पूरे उत्तर भारत के लिए एक मिसाल</strong> बन सकती है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब में हर साल पराली जलाने (Stubble Burning) से बढ़ते वायु प्रदूषण और उससे होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को रोकने के लिए पंजाब सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री <strong>भगवंत सिंह मान</strong> के नेतृत्व में सरकार ने आज <strong>संशोधित फसल अवशेष प्रबंधन ऋण योजना</strong> (Crop Residue Management Loan Scheme) शुरू की। यह योजना किसानों और सहकारी सभाओं को आधुनिक मशीनरी उपलब्ध कराकर पराली प्रबंधन को आसान बनाएगी।

इस योजना का उद्देश्य किसानों को ऐसी सुविधाएं देना है जिससे वे पराली जलाने के बजाय उसका सही ढंग से प्रबंधन कर सकें। यह कदम न केवल <strong>वायु प्रदूषण</strong> को कम करेगा बल्कि <strong>सतत खेती (Sustainable Farming)</strong> को बढ़ावा देगा और ग्रामीण इलाकों में <strong>नए रोजगार के अवसर</strong> भी पैदा करेगा।
<h3><strong>योजना की शुरुआत और मंजूरी</strong></h3>
इस योजना को राज्य की सहकारी सभाओं के माध्यम से लागू किया जाएगा।
<ul>
 	<li><strong>सुमेर सिंह गुर्जर</strong>, वित्त आयुक्त (सहकारिता) और</li>
 	<li><strong>गिरीश दियालन</strong>, रजिस्ट्रार (सहकारी सभाएं)</li>
</ul>
इनकी अगुवाई में इस योजना को मंजूरी दी गई है। सरकार का मानना है कि <strong>सहकारी सभाओं (Cooperative Societies)</strong> की भागीदारी से यह योजना ज़्यादा प्रभावी और तेज़ी से लागू हो पाएगी।
<h3><strong>योजना की मुख्य बातें:</strong></h3>
<ol>
 	<li><strong><em>सहकारी सभाओं के लिए बड़ी सब्सिडी</em></strong></li>
</ol>
<ul>
 	<li><strong>प्राथमिक कृषि सहकारी सभाएं (PACS)</strong> और <strong>बहु-उद्देश्यीय सहकारी सभाएं (Multipurpose Cooperative Societies)</strong>
<ul>
 	<li>मशीनरी खरीदने पर <strong>80% </strong><strong>तक सब्सिडी</strong> मिलेगी।</li>
 	<li>अधिकतम सब्सिडी <strong>₹24 </strong><strong>लाख</strong> तक होगी।</li>
 	<li>इससे सहकारी सभाएं आसानी से आधुनिक उपकरण खरीद पाएंगी और किसानों को उपलब्ध करवा सकेंगी।</li>
</ul>
</li>
</ul>
<ol start="2">
 	<li><strong><em>किसानों के लिए सब्सिडी</em></strong></li>
</ol>
<ul>
 	<li>व्यक्तिगत किसान फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी खरीदने पर <strong>50% </strong><strong>सब्सिडी</strong> के पात्र होंगे।</li>
 	<li>बाकी <strong>25% </strong><strong>राशि किसान को खुद वहन करनी होगी</strong>, जबकि शेष राशि लोन के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी।</li>
</ul>
<ol start="3">
 	<li><strong><em>अग्रिम राशि (</em></strong><strong><em>Advance Payment) </em></strong><strong><em>की सुविधा</em></strong></li>
</ol>
<ul>
 	<li>मशीनरी खरीदने के लिए दी जाने वाली <strong>कुल लोन राशि का 10% </strong><strong>हिस्सा अग्रिम</strong> के रूप में तय किया गया है।</li>
 	<li>यह किसानों और सभाओं को मशीनरी खरीदने में आसानी देगा।</li>
</ul>
<h3><strong>पराली प्रबंधन से प्रदूषण में कमी</strong></h3>
हर साल अक्टूबर-नवंबर में पंजाब और हरियाणा में बड़े पैमाने पर <strong>पराली जलाने</strong> की वजह से
<ul>
 	<li>दिल्ली-NCR और उत्तर भारत के कई राज्यों में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है।</li>
 	<li>सांस की बीमारियां और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ जाती हैं।</li>
</ul>
पंजाब सरकार की इस योजना के तहत अब पराली को जलाने की बजाय <strong>बायो-एनर्जी प्लांट्स (Bio-Energy Plants)</strong> में भेजा जाएगा।
<ul>
 	<li>इससे पराली का उपयोग <strong>स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy)</strong> बनाने में होगा।</li>
 	<li>यह राज्य की <strong>हरित अर्थव्यवस्था (Green Economy)</strong> को भी मजबूत करेगा।</li>
 	<li>साथ ही, ग्रामीण युवाओं के लिए <strong>नए रोजगार</strong> पैदा होंगे।</li>
</ul>
<h3><strong>मुख्यमंत्री भगवंत मान का बयान</strong></h3>
मुख्यमंत्री <strong>भगवंत सिंह मान</strong> ने इस मौके पर कहा कि उनकी सरकार किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए हर संभव मदद कर रही है।

"हमारा लक्ष्य किसानों को आधुनिक मशीनरी और आर्थिक सहायता देकर पराली जलाने की मजबूरी खत्म करना है। यह योजना न केवल <strong>पर्यावरण को बचाएगी</strong>, बल्कि किसानों को <strong>आर्थिक रूप से मज़बूत</strong> करेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगी।"

उन्होंने कहा कि यह पहल <strong>पराली जलाने की समस्या</strong>, वायु प्रदूषण और <strong>जलवायु परिवर्तन (Climate Change)</strong> से जुड़ी चुनौतियों को हल करने में मदद करेगी।
<h3><strong>केंद्र सरकार से फंड को लेकर विवाद भी जारी</strong></h3>
पंजाब सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब राज्य और केंद्र सरकार के बीच <strong>एसडीआरएफ (State Disaster Response Fund)</strong> को लेकर विवाद चल रहा है।
<ul>
 	<li>हाल ही में भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया था कि पंजाब सरकार <strong>एसडीआरएफ फंड</strong> का सही इस्तेमाल नहीं कर रही और इसका हिसाब नहीं दे रही।</li>
 	<li>जवाब में पंजाब के कैबिनेट मंत्री <strong>हरपाल सिंह चीमा</strong> ने आधिकारिक आंकड़े जारी किए और भाजपा के आरोपों को झूठा बताया।</li>
</ul>
<strong><em>एसडीआरएफ के आंकड़े (</em></strong><strong><em>1 </em></strong><strong><em>अप्रैल </em></strong><strong><em>2022 </em></strong><strong><em>से </em></strong><strong><em>10 </em></strong><strong><em>सितंबर </em></strong><strong><em>2025 </em></strong><strong><em>तक):</em></strong>
<table>
<thead>
<tr>
<td><strong>वित्तीय वर्ष</strong></td>
<td><strong>केंद्र से प्राप्त राशि</strong></td>
<td><strong>खर्च की गई राशि</strong></td>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td><strong>2022-23</strong></td>
<td>₹208 करोड़</td>
<td>₹61 करोड़</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>2023-24</strong></td>
<td>₹645 करोड़</td>
<td>₹420 करोड़</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>2024-25</strong></td>
<td>₹488 करोड़</td>
<td>₹27 करोड़</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>2025-26</strong></td>
<td>₹241 करोड़</td>
<td>₹140 करोड़</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<strong>कुल:</strong>
<ul>
 	<li><strong>केंद्र से प्राप्त राशि:</strong> ₹1582 करोड़</li>
 	<li><strong>खर्च की गई राशि:</strong> ₹649 करोड़</li>
 	<li><strong>बाकी राशि:</strong> ₹933 करोड़ <em>(</em><em>चल रहे और आने वाले राहत कार्यों में इस्तेमाल हो रही है)</em></li>
</ul>
चीमा ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा सिर्फ राजनीति कर रही है और संकट की घड़ी में भी लोगों को गुमराह कर रही है। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि उसने पंजाब के हजारों करोड़ रुपये के वैध बकाये को रोके रखा है।
<h3><strong>इस योजना का महत्व</strong></h3>
<ul>
 	<li><strong>प्रदूषण में कमी:</strong> पराली जलाने की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी।</li>
 	<li><strong>किसानों की मदद:</strong> उन्हें आधुनिक मशीनरी और सब्सिडी मिलेगी जिससे खेती आसान और लागत कम होगी।</li>
 	<li><strong>रोजगार के अवसर:</strong> मशीनरी संचालन, मरम्मत और बायो-एनर्जी प्लांट्स में नए रोजगार पैदा होंगे।</li>
 	<li><strong>स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन:</strong> पराली का उपयोग कोयला जैसे प्रदूषक ऊर्जा स्रोतों की जगह स्वच्छ ऊर्जा के लिए किया जाएगा।</li>
</ul>
पंजाब सरकार की यह योजना किसानों और पर्यावरण दोनों के लिए <strong>डबल बेनिफिट</strong> वाली है।
<ul>
 	<li>इससे न केवल <strong>पराली जलाने की समस्या का समाधान</strong> होगा बल्कि</li>
 	<li><strong>वायु प्रदूषण कम होगा</strong>,</li>
 	<li>किसानों को आर्थिक मजबूती मिलेगी और</li>
 	<li>ग्रामीण इलाकों में नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।</li>
</ul>
अगर इस योजना को सही तरीके से लागू किया गया, तो यह <strong>पंजाब ही नहीं, </strong><strong>पूरे उत्तर भारत के लिए एक मिसाल</strong> बन सकती है।]]></content:encoded>
					
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