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	<title>SikhHistory &#8211; Trends Topic</title>
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	<title>SikhHistory &#8211; Trends Topic</title>
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		<title>Punjab Government ने ‘Hind Di Chadar’ Shri Guru Tegh Bahadur Ji के 350वें शहादत को Historic और Memorable: Vidhan Sabha का पहला Special Session Sri Anandpur Sahib में आयोजित</title>
		<link>https://trendstopic.in/punjab-government-marks-the-350th-martyrdom-of-hind-di-chadar-shri-guru-tegh-bahadur-ji-as-historic-and-memorable-first-special-assembly-session-held-in-sri-anandpur-sahib/</link>
					<comments>https://trendstopic.in/punjab-government-marks-the-350th-martyrdom-of-hind-di-chadar-shri-guru-tegh-bahadur-ji-as-historic-and-memorable-first-special-assembly-session-held-in-sri-anandpur-sahib/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 26 Nov 2025 04:02:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चंडीगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[350thMartyrdom]]></category>
		<category><![CDATA[AnandpurSahib]]></category>
		<category><![CDATA[GuruTeghBahadurJi]]></category>
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		<category><![CDATA[PunjabGovernment]]></category>
		<category><![CDATA[PunjabNews]]></category>
		<category><![CDATA[SikhHistory]]></category>
		<category><![CDATA[SpecialAssemblySession]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब में एक ऐसा दिन दर्ज हुआ, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। पहली बार पंजाब विधानसभा ने अपना <strong>विशेष सत्र चंडीगढ़ से बाहर</strong>, पवित्र नगरी <strong>श्री आनंदपुर साहिब</strong> में किया। यह सत्र <strong>हिन्द दी चादर श्री गुरु तेग बहादुर जी</strong> की <strong>350</strong><strong>वीं शहादत</strong> को समर्पित था और पूरे राज्य में इस मौके पर धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल देखने को मिला।

<strong>आनंदपुर साहिब में सत्र क्यों खास है</strong><strong>?</strong>

श्री आनंदपुर साहिब सिख इतिहास में बहुत बड़ा स्थान रखता है।
यहीं <strong>दसवें गुरु</strong><strong>, </strong><strong>गुरु गोबिंद सिंह जी</strong> ने <strong>खालसा पंथ</strong> की स्थापना की थी।
सिख धर्म से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले और घटनाएं इसी धरती पर हुईं।

विधानसभा सत्र को यहां आयोजित करना सिर्फ एक सरकारी फैसला नहीं था, बल्कि पंजाब की <strong>विरासत</strong>, <strong>आस्था</strong> और <strong>धार्मिक सम्मान</strong> को सलाम करने जैसा कदम था।

<strong>सरकार का बड़ा फैसला </strong><strong>– </strong><strong>तीन पवित्र स्थानों को </strong><strong>“</strong><strong>पवित्र नगर</strong><strong>” </strong><strong>का दर्जा</strong>

सत्र के दौरान मुख्यमंत्री <strong>भगवंत मान</strong> ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया।
इसमें तीन जगहों को <strong>“</strong><strong>पवित्र नगर (</strong><strong>Holy City)”</strong> घोषित करने की मांग की गई:
<ul>
 	<li><strong>श्री आनंदपुर साहिब</strong></li>
 	<li><strong>तलवंडी साबो (दामदमा साहिब)</strong></li>
 	<li><strong>स्वर्ण मंदिर परिसर (हरमंदिर साहिब)</strong></li>
</ul>
विधानसभा के सभी सदस्यों ने यह प्रस्ताव <strong>सर्वसम्मति से पास</strong> कर दिया।
इससे पंजाब की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर की सुरक्षा को और मजबूती मिलेगी।

<strong>राज्यभर में धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रम</strong>

गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस पर पंजाब में बड़े स्तर पर कार्यक्रम हुए।
कई जगहों पर <strong>भव्य नगर कीर्तन</strong> निकाले गए, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हुए।
इसके अलावा:
<ul>
 	<li><strong>सेमिनार</strong> आयोजित हुए, जिनमें गुरुजी की शहादत और शिक्षा पर चर्चा हुई।</li>
 	<li><strong>रक्तदान शिविर</strong> लगाए गए, ताकि मानवता की सेवा का संदेश दिया जा सके।</li>
 	<li><strong>वृक्षारोपण अभियान</strong> चलाए गए, जिससे पर्यावरण संरक्षण का मैसेज लोगों तक पहुँचा।</li>
</ul>
<strong>गुरु तेग बहादुर जी की शहादत </strong><strong>– </strong><strong>मानवता की मिसाल</strong>

गुरु तेग बहादुर जी ने <strong>धर्म और मानव अधिकारों</strong> की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
उन्होंने <strong>कश्मीरी पंडितों</strong> को जबरन धर्म-परिवर्तन से बचाने के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
उनकी शहादत आज भी <strong>धार्मिक स्वतंत्रता</strong>, <strong>सहनशीलता</strong>, और <strong>मानवता</strong> की अनोखी मिसाल है।

सरकार और समाज का यह संयुक्त प्रयास नई पीढ़ी को गुरुजी के बलिदान और जीवन दर्शन से जोड़ने की कोशिश है।

<strong>विधानसभा का ऐतिहासिक सत्र </strong><strong>– </strong><strong>लोकतंत्र और आध्यात्मिकता का संगम</strong>

इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि पंजाब की <strong>लोकतांत्रिक परंपराएं</strong> और <strong>आध्यात्मिक विरासत</strong> एक-दूसरे के पूरक हैं।
विधानसभा का यह सत्र सिर्फ एक राजनीतिक गतिविधि नहीं था, बल्कि समाज को <strong>एकता</strong>, <strong>सद्भाव</strong>, और <strong>भाईचारा</strong> का मजबूत संदेश देने वाला कदम था।

इस पहल से पंजाब की पहचान और अधिक मजबूत हुई है।
यह फैसला आने वाली पीढ़ियों के लिए एक <strong>प्रेरणा</strong> बनेगा और इसे इतिहास में <strong>स्वर्ण अक्षरों</strong> में याद किया जाएगा।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब में एक ऐसा दिन दर्ज हुआ, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। पहली बार पंजाब विधानसभा ने अपना <strong>विशेष सत्र चंडीगढ़ से बाहर</strong>, पवित्र नगरी <strong>श्री आनंदपुर साहिब</strong> में किया। यह सत्र <strong>हिन्द दी चादर श्री गुरु तेग बहादुर जी</strong> की <strong>350</strong><strong>वीं शहादत</strong> को समर्पित था और पूरे राज्य में इस मौके पर धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल देखने को मिला।

<strong>आनंदपुर साहिब में सत्र क्यों खास है</strong><strong>?</strong>

श्री आनंदपुर साहिब सिख इतिहास में बहुत बड़ा स्थान रखता है।
यहीं <strong>दसवें गुरु</strong><strong>, </strong><strong>गुरु गोबिंद सिंह जी</strong> ने <strong>खालसा पंथ</strong> की स्थापना की थी।
सिख धर्म से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले और घटनाएं इसी धरती पर हुईं।

विधानसभा सत्र को यहां आयोजित करना सिर्फ एक सरकारी फैसला नहीं था, बल्कि पंजाब की <strong>विरासत</strong>, <strong>आस्था</strong> और <strong>धार्मिक सम्मान</strong> को सलाम करने जैसा कदम था।

<strong>सरकार का बड़ा फैसला </strong><strong>– </strong><strong>तीन पवित्र स्थानों को </strong><strong>“</strong><strong>पवित्र नगर</strong><strong>” </strong><strong>का दर्जा</strong>

सत्र के दौरान मुख्यमंत्री <strong>भगवंत मान</strong> ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया।
इसमें तीन जगहों को <strong>“</strong><strong>पवित्र नगर (</strong><strong>Holy City)”</strong> घोषित करने की मांग की गई:
<ul>
 	<li><strong>श्री आनंदपुर साहिब</strong></li>
 	<li><strong>तलवंडी साबो (दामदमा साहिब)</strong></li>
 	<li><strong>स्वर्ण मंदिर परिसर (हरमंदिर साहिब)</strong></li>
</ul>
विधानसभा के सभी सदस्यों ने यह प्रस्ताव <strong>सर्वसम्मति से पास</strong> कर दिया।
इससे पंजाब की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर की सुरक्षा को और मजबूती मिलेगी।

<strong>राज्यभर में धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रम</strong>

गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस पर पंजाब में बड़े स्तर पर कार्यक्रम हुए।
कई जगहों पर <strong>भव्य नगर कीर्तन</strong> निकाले गए, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हुए।
इसके अलावा:
<ul>
 	<li><strong>सेमिनार</strong> आयोजित हुए, जिनमें गुरुजी की शहादत और शिक्षा पर चर्चा हुई।</li>
 	<li><strong>रक्तदान शिविर</strong> लगाए गए, ताकि मानवता की सेवा का संदेश दिया जा सके।</li>
 	<li><strong>वृक्षारोपण अभियान</strong> चलाए गए, जिससे पर्यावरण संरक्षण का मैसेज लोगों तक पहुँचा।</li>
</ul>
<strong>गुरु तेग बहादुर जी की शहादत </strong><strong>– </strong><strong>मानवता की मिसाल</strong>

गुरु तेग बहादुर जी ने <strong>धर्म और मानव अधिकारों</strong> की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
उन्होंने <strong>कश्मीरी पंडितों</strong> को जबरन धर्म-परिवर्तन से बचाने के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
उनकी शहादत आज भी <strong>धार्मिक स्वतंत्रता</strong>, <strong>सहनशीलता</strong>, और <strong>मानवता</strong> की अनोखी मिसाल है।

सरकार और समाज का यह संयुक्त प्रयास नई पीढ़ी को गुरुजी के बलिदान और जीवन दर्शन से जोड़ने की कोशिश है।

<strong>विधानसभा का ऐतिहासिक सत्र </strong><strong>– </strong><strong>लोकतंत्र और आध्यात्मिकता का संगम</strong>

इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि पंजाब की <strong>लोकतांत्रिक परंपराएं</strong> और <strong>आध्यात्मिक विरासत</strong> एक-दूसरे के पूरक हैं।
विधानसभा का यह सत्र सिर्फ एक राजनीतिक गतिविधि नहीं था, बल्कि समाज को <strong>एकता</strong>, <strong>सद्भाव</strong>, और <strong>भाईचारा</strong> का मजबूत संदेश देने वाला कदम था।

इस पहल से पंजाब की पहचान और अधिक मजबूत हुई है।
यह फैसला आने वाली पीढ़ियों के लिए एक <strong>प्रेरणा</strong> बनेगा और इसे इतिहास में <strong>स्वर्ण अक्षरों</strong> में याद किया जाएगा।]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>Guru Tegh Bahadur Ji की महान शहादत को सलाम! चारों दिशाओं से आए Nagar Kirtans Sri Anandpur Sahib में हुए सम्पूर्ण, श्रद्धा में डूबी पवित्र नगरी!</title>
		<link>https://trendstopic.in/salute-to-the-supreme-sacrifice-of-guru-tegh-bahadur-ji-the-nagar-kirtans-arriving-from-all-four-directions-have-reached-sri-anandpur-sahib-and-the-holy-city-is-immersed-in-devotion/</link>
					<comments>https://trendstopic.in/salute-to-the-supreme-sacrifice-of-guru-tegh-bahadur-ji-the-nagar-kirtans-arriving-from-all-four-directions-have-reached-sri-anandpur-sahib-and-the-holy-city-is-immersed-in-devotion/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 23 Nov 2025 08:26:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[AnandpurSahib]]></category>
		<category><![CDATA[Devotion]]></category>
		<category><![CDATA[GuruTeghBahadur]]></category>
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		<category><![CDATA[ShahidiDiwas]]></category>
		<category><![CDATA[SikhHistory]]></category>
		<category><![CDATA[SriAnandpurSahib]]></category>
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					<description><![CDATA[शिक्षा और सूचना एवं लोक संपर्क मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि चारों दिशाओं से सजाये गये नगर कीर्तन शुक्रवार दिनांक 22 नवंबर को श्री आनंदपुर साहिब पहुंचेंगे। नगर कीर्तनों का संगतों द्वारा भव्य स्वागत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि श्रीनगर, गुरदासपुर, फरीदकोट और तलवंडी साबो से आ रहे नगर कीर्तनों की कुल लंबाई 1563 किलोमीटर बनती है।

&nbsp;

इधर, पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामलों के मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद ने कहा कि नौवें पातशाह श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस को समर्पित 23 से 25 नवंबर तक होने वाले समागमों में शामिल होने तथा तख्त श्री केसगढ़ साहिब में नतमस्तक होने के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रही संगत की सुविधा एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार द्वारा पवित्र नगरी श्री आनंदपुर साहिब में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

&nbsp;

उल्लेखनीय है कि श्री गुरु तेग़ बहादुर साहिब जी के 350वें शहीदी दिवस को समर्पित प्रदेश के सभी 23 जिलों में गुरु साहिब के महान जीवन एवं दर्शन को दर्शाते लाइट एंड साउंड शो करवाए गए तथा बाबा बकाला, अमृतसर और पटियाला में कीर्तन दरबार सजाए गए।

&nbsp;

23 से 25 नवंबर तक होने वाले समागमों का ब्यौरा साझा करते हुए बैंस ने बताया कि 23 नवंबर को श्री आनंदपुर साहिब में बाबा बुड्ढा दल छावनी के पास गुरुद्वारा साहिब में श्री अखंड पाठ साहिब का आरंभ होगा, जिसमें मुख्यमंत्री सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल होंगे। इसी तरह मुख्यमंत्री द्वारा विरासत-ए-खालसा स्मारक में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के जीवन एवं दर्शन को दर्शाती प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया जाएगा। इसी दिन मुख्य पंडाल बाबा बुड्ढा दल छावनी में प्रदेश सरकार द्वारा सर्वधर्म सम्मेलन करवाया जाएगा जिसमें प्रमुख धार्मिक नेता सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल होंगे।

&nbsp;

24 नवंबर को कीरतपुर साहिब से भाई जैता जी की यादगार तक सीस भेंट नगर कीर्तन सजाया जाएगा। साथ ही श्री आनंदपुर साहिब (गुरुद्वारा भोरा साहिब-गुरुद्वारा सीस गंज साहिब-गुरु तेग बहादुर अजायब घर-तख्त श्री केसगढ़ साहिब-किला आनंदगढ़ साहिब और विरासत-ए-खालसा तक समाप्त) में हेरिटेज वॉक करवाई जाएगी तथा भाई जैता जी की यादगार पर विधान सभा का विशेष सत्र करवाया जाएगा। इसी तरह चरण गंगा स्टेडियम में गतका तथा अन्य समागम जैसे टेंट पेगिंग, ढाल-तलवार मुकाबला, शस्त्र दर्शन, सिमरन व तलवार का संगम आदि समागम करवाए जाएंगे। इसी तरह विरासत-ए-खालसा यादगार में 23 से 29 नवंबर तक रोजाना ड्रोन शो करवाए जाएंगे।

&nbsp;

इसी तरह 25 नवंबर को श्री अखंड पाठ साहिब जी के भोग कर समाप्ति के उपरांत बाबा बुड्ढा दल छावनी के मुख्य पंडाल में सरबत दा भला एकत्रता समागम करवाया जाएगा। प्रदेश सरकार द्वारा इन समागमों में शामिल होने के लिए पवित्र नगरी में आने वाली लाखों संगतों की सुविधा के लिए व्यापक प्रबंध किए गए हैं। पार्किंग जोनों से मुख्य स्थानों तक संगतों के आने-जाने के लिए शटल सेवा सुनिश्चित की गई है। सभी पार्किंग स्थल सी.सी.टी.वी. निगरानी, रोशनी, बैरिकेडिंग, ट्रैफिक मार्शल, साइन बोर्ड और मोबाइल शौचालयों से सुसज्जित हैं। मुख्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थानों के आसपास मौजूदा पार्किंग स्थलों को भी इस योजना में शामिल किया गया है।

&nbsp;

संगतों की सेवा के लिए तैनात साधनों में 500 ई-रिक्शा, 150 मिनी बसें, 25 फोर्स अर्बनिया वैनें, 15 कारें, 20 टाटा ऐस वाहन तथा बुजुर्गों व दिव्यांग संगत की सहायता के लिए 10 गोल्फ कार्ट शामिल हैं। शटल सेवाएं पार्किंग स्थलों और गुरुद्वारा श्री केसगढ़ साहिब, विरासत-ए-खालसा, मुख्य पंडाल, टेंट सिटीज़ तथा हेल्प डेस्क पॉइंट्स के बीच संगतों को आने-जाने की सुविधा देंगी। इस सिस्टम की पूर्ण निगरानी मुख्य कंट्रोल सेंटर के माध्यम से की जाएगी जिसमें समर्पित पिक-अप पॉइंट, साइनेज और वॉलंटियर्स द्वारा मार्गदर्शन शामिल है।

&nbsp;

इसी तरह श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस को समर्पित समागमों के दौरान संगत की भारी आमद को सुविधाजनक बनाने के लिए जिला प्रशासन रूपनगर द्वारा दो प्रमुख टेंट सिटीज़ ‘चक्क नानकी निवास’ टेंट सिटी और ‘भाई मती दास निवास’ टेंट सिटी स्थापित की गई हैं जिसमें लगभग 10,000 संगत के ठहरने की व्यवस्था की गई है।

&nbsp;

अन्य सुविधाओं सहित एम्बुलेंस की तैनाती तथा 24 घंटे मुख्य कंट्रोल रूम के साथ तुरंत चिकित्सा सेवाएं सुनिश्चित करना शामिल है। समागमों के लिए सुचारु एवं सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध सुनिश्चित करने के लिए पंजाब पुलिस ने सुरक्षा, सुविधा और ट्रैफिक प्रबंधन के लिए भी व्यापक प्रबंध किए हैं। इन समागमों के दौरान पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में 8,000 से अधिक पुलिस कर्मी तैनात किए गए हैं ताकि संगत की सुरक्षा, आवागमन और सुविधा सुनिश्चित की जा सके।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[शिक्षा और सूचना एवं लोक संपर्क मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि चारों दिशाओं से सजाये गये नगर कीर्तन शुक्रवार दिनांक 22 नवंबर को श्री आनंदपुर साहिब पहुंचेंगे। नगर कीर्तनों का संगतों द्वारा भव्य स्वागत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि श्रीनगर, गुरदासपुर, फरीदकोट और तलवंडी साबो से आ रहे नगर कीर्तनों की कुल लंबाई 1563 किलोमीटर बनती है।

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इधर, पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामलों के मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद ने कहा कि नौवें पातशाह श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस को समर्पित 23 से 25 नवंबर तक होने वाले समागमों में शामिल होने तथा तख्त श्री केसगढ़ साहिब में नतमस्तक होने के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रही संगत की सुविधा एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार द्वारा पवित्र नगरी श्री आनंदपुर साहिब में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

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उल्लेखनीय है कि श्री गुरु तेग़ बहादुर साहिब जी के 350वें शहीदी दिवस को समर्पित प्रदेश के सभी 23 जिलों में गुरु साहिब के महान जीवन एवं दर्शन को दर्शाते लाइट एंड साउंड शो करवाए गए तथा बाबा बकाला, अमृतसर और पटियाला में कीर्तन दरबार सजाए गए।

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23 से 25 नवंबर तक होने वाले समागमों का ब्यौरा साझा करते हुए बैंस ने बताया कि 23 नवंबर को श्री आनंदपुर साहिब में बाबा बुड्ढा दल छावनी के पास गुरुद्वारा साहिब में श्री अखंड पाठ साहिब का आरंभ होगा, जिसमें मुख्यमंत्री सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल होंगे। इसी तरह मुख्यमंत्री द्वारा विरासत-ए-खालसा स्मारक में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के जीवन एवं दर्शन को दर्शाती प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया जाएगा। इसी दिन मुख्य पंडाल बाबा बुड्ढा दल छावनी में प्रदेश सरकार द्वारा सर्वधर्म सम्मेलन करवाया जाएगा जिसमें प्रमुख धार्मिक नेता सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल होंगे।

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24 नवंबर को कीरतपुर साहिब से भाई जैता जी की यादगार तक सीस भेंट नगर कीर्तन सजाया जाएगा। साथ ही श्री आनंदपुर साहिब (गुरुद्वारा भोरा साहिब-गुरुद्वारा सीस गंज साहिब-गुरु तेग बहादुर अजायब घर-तख्त श्री केसगढ़ साहिब-किला आनंदगढ़ साहिब और विरासत-ए-खालसा तक समाप्त) में हेरिटेज वॉक करवाई जाएगी तथा भाई जैता जी की यादगार पर विधान सभा का विशेष सत्र करवाया जाएगा। इसी तरह चरण गंगा स्टेडियम में गतका तथा अन्य समागम जैसे टेंट पेगिंग, ढाल-तलवार मुकाबला, शस्त्र दर्शन, सिमरन व तलवार का संगम आदि समागम करवाए जाएंगे। इसी तरह विरासत-ए-खालसा यादगार में 23 से 29 नवंबर तक रोजाना ड्रोन शो करवाए जाएंगे।

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इसी तरह 25 नवंबर को श्री अखंड पाठ साहिब जी के भोग कर समाप्ति के उपरांत बाबा बुड्ढा दल छावनी के मुख्य पंडाल में सरबत दा भला एकत्रता समागम करवाया जाएगा। प्रदेश सरकार द्वारा इन समागमों में शामिल होने के लिए पवित्र नगरी में आने वाली लाखों संगतों की सुविधा के लिए व्यापक प्रबंध किए गए हैं। पार्किंग जोनों से मुख्य स्थानों तक संगतों के आने-जाने के लिए शटल सेवा सुनिश्चित की गई है। सभी पार्किंग स्थल सी.सी.टी.वी. निगरानी, रोशनी, बैरिकेडिंग, ट्रैफिक मार्शल, साइन बोर्ड और मोबाइल शौचालयों से सुसज्जित हैं। मुख्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थानों के आसपास मौजूदा पार्किंग स्थलों को भी इस योजना में शामिल किया गया है।

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संगतों की सेवा के लिए तैनात साधनों में 500 ई-रिक्शा, 150 मिनी बसें, 25 फोर्स अर्बनिया वैनें, 15 कारें, 20 टाटा ऐस वाहन तथा बुजुर्गों व दिव्यांग संगत की सहायता के लिए 10 गोल्फ कार्ट शामिल हैं। शटल सेवाएं पार्किंग स्थलों और गुरुद्वारा श्री केसगढ़ साहिब, विरासत-ए-खालसा, मुख्य पंडाल, टेंट सिटीज़ तथा हेल्प डेस्क पॉइंट्स के बीच संगतों को आने-जाने की सुविधा देंगी। इस सिस्टम की पूर्ण निगरानी मुख्य कंट्रोल सेंटर के माध्यम से की जाएगी जिसमें समर्पित पिक-अप पॉइंट, साइनेज और वॉलंटियर्स द्वारा मार्गदर्शन शामिल है।

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इसी तरह श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस को समर्पित समागमों के दौरान संगत की भारी आमद को सुविधाजनक बनाने के लिए जिला प्रशासन रूपनगर द्वारा दो प्रमुख टेंट सिटीज़ ‘चक्क नानकी निवास’ टेंट सिटी और ‘भाई मती दास निवास’ टेंट सिटी स्थापित की गई हैं जिसमें लगभग 10,000 संगत के ठहरने की व्यवस्था की गई है।

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अन्य सुविधाओं सहित एम्बुलेंस की तैनाती तथा 24 घंटे मुख्य कंट्रोल रूम के साथ तुरंत चिकित्सा सेवाएं सुनिश्चित करना शामिल है। समागमों के लिए सुचारु एवं सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध सुनिश्चित करने के लिए पंजाब पुलिस ने सुरक्षा, सुविधा और ट्रैफिक प्रबंधन के लिए भी व्यापक प्रबंध किए हैं। इन समागमों के दौरान पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में 8,000 से अधिक पुलिस कर्मी तैनात किए गए हैं ताकि संगत की सुरक्षा, आवागमन और सुविधा सुनिश्चित की जा सके।]]></content:encoded>
					
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		<title>Arvind Kejriwal और Bhagwant Mann ने श्री गुरु तेग़ बहादर जी के 350 th  शहादत दिवस पर हुए Kirtan Darbar में किया नमन</title>
		<link>https://trendstopic.in/arvind-kejriwal-and-bhagwant-mann-pay-tribute-at-kirtan-darbar-held-on-the-350th-martyrdom-anniversary-of-shri-guru-tegh-bahadur-ji/</link>
					<comments>https://trendstopic.in/arvind-kejriwal-and-bhagwant-mann-pay-tribute-at-kirtan-darbar-held-on-the-350th-martyrdom-anniversary-of-shri-guru-tegh-bahadur-ji/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 Oct 2025 06:09:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चंडीगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[350thMartyrdomDay]]></category>
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					<description><![CDATA[आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक <strong>अरविंद केजरीवाल</strong> और <strong>पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान</strong> ने आज श्री गुरु तेग़ बहादर जी के <strong>350</strong><strong>वें शहादत दिवस</strong> के अवसर पर आयोजित <strong>कीर्तन दरबार</strong> में शामिल होकर गुरु साहिब को नमन किया। यह कार्यक्रम <strong>गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब</strong> (नई दिल्ली) में पंजाब सरकार की ओर से आयोजित किया गया था।

कार्यक्रम में शामिल होकर दोनों नेताओं ने कहा कि <strong>गुरु तेग़ बहादर जी का जीवन</strong><strong>, </strong><strong>उनके विचार और उनकी शहादत पूरी मानवता के लिए एक प्रकाशस्तंभ हैं</strong>, जो हमें सिखाते हैं कि सच्चाई और धर्म के लिए खड़ा होना ही सबसे बड़ा साहस है।

<strong>अरविंद केजरीवाल बोले </strong><strong>— </strong><strong>गुरु तेग़ बहादर जी का बलिदान मानवता के लिए मिसाल</strong>

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पंजाब सरकार के लिए यह गर्व की बात है कि उसे गुरु तेग़ बहादर जी जैसे महान संत और शहीद को समर्पित यह स्मृति समारोह आयोजित करने का अवसर मिला।

उन्होंने बताया कि जब मुगल शासकों ने हिंदुओं को जबरन धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया, तब <strong>कश्मीरी पंडित</strong> अपने धर्म की रक्षा के लिए गुरु तेग़ बहादर जी के पास पहुंचे। गुरु जी ने अत्याचार के आगे झुकने से इनकार किया और <strong>धर्म और मानवता की रक्षा के लिए अपनी जान न्योछावर कर दी</strong>।

केजरीवाल ने कहा कि <strong>1675 </strong><strong>में दिल्ली में गुरु जी को शहीद किया गया</strong>, और उन्हें आज पूरी दुनिया में ऐसे पहले शहीद के रूप में जाना जाता है जिन्होंने मानवाधिकारों की रक्षा के लिए बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि गुरु जी की शहादत ने सिखों में <strong>निडरता</strong><strong>, </strong><strong>आत्म-सम्मान और न्याय के लिए खड़े होने की भावना</strong> को और मजबूत किया।

उन्होंने गुरु जी के साथ शहीद हुए <strong>भाई मति दास</strong><strong>, </strong><strong>भाई सती दास और भाई दियाला जी</strong> के बलिदान का भी उल्लेख किया —

भाई मति दास जी को जिंदा आरे से काटा गया,
भाई सती दास जी को कपड़े में लपेटकर जला दिया गया,
और भाई दियाला जी को पानी में उबालकर शहीद किया गया।

केजरीवाल ने <strong>भाई जैता जी</strong> और <strong>भाई लखी शाह वणजारा जी</strong> को भी श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने गुरु साहिब के पार्थिव शरीर और सिर को सुरक्षित स्थान तक पहुँचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली।

उन्होंने कहा, “सिख इतिहास शहादतों से भरा हुआ है। सिख कभी अन्याय या अत्याचार के सामने नहीं झुके। उन्होंने अपने प्राण तो दे दिए लेकिन अपने सिद्धांत नहीं छोड़े।”

<strong>मुख्यमंत्री भगवंत मान बोले </strong><strong>— </strong><strong>शहादत की भावना हमारे खून में है</strong>

मुख्यमंत्री <strong>भगवंत सिंह मान</strong> ने कहा कि गुरु तेग़ बहादर जी और उनके परिवार का बलिदान सिर्फ एक धर्म के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता और सच्चाई के लिए था। उन्होंने कहा कि <strong>गुरु जी की शहादत के </strong><strong>24 </strong><strong>साल बाद </strong><strong>1699 </strong><strong>में श्री आनंदपुर साहिब की धरती पर खालसा पंथ की स्थापना हुई</strong>, जिसने दुनिया को एकता, साहस और मानवता का संदेश दिया।

मान ने कहा, “पंजाबी लोगों को अत्याचार के खिलाफ खड़े होने की भावना हमारे गुरुओं से मिली है। बलिदान हमारी रगों में है और हम अपनी इस महान विरासत पर गर्व महसूस करते हैं।”

उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार गुरु जी के दर्शन और शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए देशभर में कार्यक्रम करवा रही है।

<strong>पंजाब सरकार की ओर से शहादत दिवस के विशेष कार्यक्रम</strong>

मुख्यमंत्री मान ने बताया कि गुरु तेग़ बहादर जी के जीवन और शिक्षाओं को लोगों तक पहुंचाने के लिए नवंबर महीने में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे —
<ul>
 	<li><strong>1 </strong><strong>से </strong><strong>18 </strong><strong>नवम्बर:</strong> पंजाब के सभी जिलों में <em>लाइट एंड साउंड शो</em> होंगे, जिनमें गुरु जी के जीवन और दर्शन को दिखाया जाएगा।</li>
 	<li><strong>18 </strong><strong>नवम्बर:</strong> श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर) में भव्य <em>कीर्तन दरबार</em>।</li>
 	<li><strong>19 </strong><strong>नवम्बर:</strong> <em>नगर कीर्तन</em>, जिसमें सैकड़ों कश्मीरी पंडित शामिल होंगे।</li>
 	<li><strong>20 </strong><strong>नवम्बर:</strong> <em>तख्त श्री दमदमा साहिब (तलवंडी साबो)</em>, <em>फरीदकोट</em>, और <em>गुरदासपुर</em> से तीन नगर कीर्तन शुरू होंगे।</li>
 	<li><strong>22 </strong><strong>नवम्बर:</strong> सभी नगर कीर्तन श्री आनंदपुर साहिब में संपन्न होंगे।</li>
 	<li><strong>23 </strong><strong>से </strong><strong>25 </strong><strong>नवम्बर:</strong> श्री आनंदपुर साहिब में बड़े स्तर पर कार्यक्रम, प्रदर्शनियाँ, <em>ड्रोन शो</em>, और <em>सर्वधर्म सम्मेलन</em> आयोजित किए जाएंगे।</li>
 	<li><strong>24 </strong><strong>नवम्बर:</strong> <em>पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र</em> श्री आनंदपुर साहिब में होगा, जहाँ गुरु जी के जीवन और शिक्षाओं पर चर्चा की जाएगी।</li>
</ul>
मुख्यमंत्री ने बताया कि श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए <strong>“</strong><strong>चक्क नानकी</strong><strong>” </strong><strong>नाम की टेंट सिटी</strong> बनाई जाएगी, ताकि संगत को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

<strong>कार्यक्रम में शामिल रहे कई प्रमुख नेता</strong>

इस अवसर पर पंजाब सरकार के कई मंत्री और नेता मौजूद रहे, जिनमें —
<strong>अमन अरोड़ा</strong><strong>, </strong><strong>हरजोत सिंह बैंस</strong><strong>, </strong><strong>गुरमीत सिंह खुड्डियां</strong><strong>, </strong><strong>हरभजन सिंह (</strong><strong>E.T.O.), </strong><strong>तरुनप्रीत सिंह सौंद</strong><strong>, </strong><strong>लाल चंद कटारुचक्क</strong><strong>, </strong><strong>मोहिंदर भगत</strong><strong>, </strong><strong>बरिंदर गोयल</strong>,
<strong>लोकसभा सदस्य डॉ. राज कुमार चब्बेवाल</strong><strong>, </strong><strong>गुरमीत सिंह मीत हेयर और मालविंदर सिंह कंग</strong>,
<strong>राज्यसभा सदस्य विक्रमजीत सिंह साहनी</strong>,
<strong>पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामलों के सलाहकार दीपक बाली</strong>,
और <strong>मुख्य सचिव के. ए. पी. सिन्हा</strong> शामिल रहे।

यह आयोजन सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि <strong>धर्म</strong><strong>, </strong><strong>मानवता और एकता का संदेश देने वाला ऐतिहासिक अवसर</strong> है।
गुरु तेग़ बहादर जी की शहादत ने हमें सिखाया कि <strong>सत्य और न्याय के लिए खड़ा होना ही सबसे बड़ा धर्म है।</strong>
उनका जीवन आज भी करोड़ों लोगों को प्रेरणा देता है कि अत्याचार के आगे झुकने की बजाय, <strong>सच और इंसानियत की राह पर चलना ही सच्ची जीत है।</strong>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक <strong>अरविंद केजरीवाल</strong> और <strong>पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान</strong> ने आज श्री गुरु तेग़ बहादर जी के <strong>350</strong><strong>वें शहादत दिवस</strong> के अवसर पर आयोजित <strong>कीर्तन दरबार</strong> में शामिल होकर गुरु साहिब को नमन किया। यह कार्यक्रम <strong>गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब</strong> (नई दिल्ली) में पंजाब सरकार की ओर से आयोजित किया गया था।

कार्यक्रम में शामिल होकर दोनों नेताओं ने कहा कि <strong>गुरु तेग़ बहादर जी का जीवन</strong><strong>, </strong><strong>उनके विचार और उनकी शहादत पूरी मानवता के लिए एक प्रकाशस्तंभ हैं</strong>, जो हमें सिखाते हैं कि सच्चाई और धर्म के लिए खड़ा होना ही सबसे बड़ा साहस है।

<strong>अरविंद केजरीवाल बोले </strong><strong>— </strong><strong>गुरु तेग़ बहादर जी का बलिदान मानवता के लिए मिसाल</strong>

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पंजाब सरकार के लिए यह गर्व की बात है कि उसे गुरु तेग़ बहादर जी जैसे महान संत और शहीद को समर्पित यह स्मृति समारोह आयोजित करने का अवसर मिला।

उन्होंने बताया कि जब मुगल शासकों ने हिंदुओं को जबरन धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया, तब <strong>कश्मीरी पंडित</strong> अपने धर्म की रक्षा के लिए गुरु तेग़ बहादर जी के पास पहुंचे। गुरु जी ने अत्याचार के आगे झुकने से इनकार किया और <strong>धर्म और मानवता की रक्षा के लिए अपनी जान न्योछावर कर दी</strong>।

केजरीवाल ने कहा कि <strong>1675 </strong><strong>में दिल्ली में गुरु जी को शहीद किया गया</strong>, और उन्हें आज पूरी दुनिया में ऐसे पहले शहीद के रूप में जाना जाता है जिन्होंने मानवाधिकारों की रक्षा के लिए बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि गुरु जी की शहादत ने सिखों में <strong>निडरता</strong><strong>, </strong><strong>आत्म-सम्मान और न्याय के लिए खड़े होने की भावना</strong> को और मजबूत किया।

उन्होंने गुरु जी के साथ शहीद हुए <strong>भाई मति दास</strong><strong>, </strong><strong>भाई सती दास और भाई दियाला जी</strong> के बलिदान का भी उल्लेख किया —

भाई मति दास जी को जिंदा आरे से काटा गया,
भाई सती दास जी को कपड़े में लपेटकर जला दिया गया,
और भाई दियाला जी को पानी में उबालकर शहीद किया गया।

केजरीवाल ने <strong>भाई जैता जी</strong> और <strong>भाई लखी शाह वणजारा जी</strong> को भी श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने गुरु साहिब के पार्थिव शरीर और सिर को सुरक्षित स्थान तक पहुँचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली।

उन्होंने कहा, “सिख इतिहास शहादतों से भरा हुआ है। सिख कभी अन्याय या अत्याचार के सामने नहीं झुके। उन्होंने अपने प्राण तो दे दिए लेकिन अपने सिद्धांत नहीं छोड़े।”

<strong>मुख्यमंत्री भगवंत मान बोले </strong><strong>— </strong><strong>शहादत की भावना हमारे खून में है</strong>

मुख्यमंत्री <strong>भगवंत सिंह मान</strong> ने कहा कि गुरु तेग़ बहादर जी और उनके परिवार का बलिदान सिर्फ एक धर्म के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता और सच्चाई के लिए था। उन्होंने कहा कि <strong>गुरु जी की शहादत के </strong><strong>24 </strong><strong>साल बाद </strong><strong>1699 </strong><strong>में श्री आनंदपुर साहिब की धरती पर खालसा पंथ की स्थापना हुई</strong>, जिसने दुनिया को एकता, साहस और मानवता का संदेश दिया।

मान ने कहा, “पंजाबी लोगों को अत्याचार के खिलाफ खड़े होने की भावना हमारे गुरुओं से मिली है। बलिदान हमारी रगों में है और हम अपनी इस महान विरासत पर गर्व महसूस करते हैं।”

उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार गुरु जी के दर्शन और शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए देशभर में कार्यक्रम करवा रही है।

<strong>पंजाब सरकार की ओर से शहादत दिवस के विशेष कार्यक्रम</strong>

मुख्यमंत्री मान ने बताया कि गुरु तेग़ बहादर जी के जीवन और शिक्षाओं को लोगों तक पहुंचाने के लिए नवंबर महीने में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे —
<ul>
 	<li><strong>1 </strong><strong>से </strong><strong>18 </strong><strong>नवम्बर:</strong> पंजाब के सभी जिलों में <em>लाइट एंड साउंड शो</em> होंगे, जिनमें गुरु जी के जीवन और दर्शन को दिखाया जाएगा।</li>
 	<li><strong>18 </strong><strong>नवम्बर:</strong> श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर) में भव्य <em>कीर्तन दरबार</em>।</li>
 	<li><strong>19 </strong><strong>नवम्बर:</strong> <em>नगर कीर्तन</em>, जिसमें सैकड़ों कश्मीरी पंडित शामिल होंगे।</li>
 	<li><strong>20 </strong><strong>नवम्बर:</strong> <em>तख्त श्री दमदमा साहिब (तलवंडी साबो)</em>, <em>फरीदकोट</em>, और <em>गुरदासपुर</em> से तीन नगर कीर्तन शुरू होंगे।</li>
 	<li><strong>22 </strong><strong>नवम्बर:</strong> सभी नगर कीर्तन श्री आनंदपुर साहिब में संपन्न होंगे।</li>
 	<li><strong>23 </strong><strong>से </strong><strong>25 </strong><strong>नवम्बर:</strong> श्री आनंदपुर साहिब में बड़े स्तर पर कार्यक्रम, प्रदर्शनियाँ, <em>ड्रोन शो</em>, और <em>सर्वधर्म सम्मेलन</em> आयोजित किए जाएंगे।</li>
 	<li><strong>24 </strong><strong>नवम्बर:</strong> <em>पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र</em> श्री आनंदपुर साहिब में होगा, जहाँ गुरु जी के जीवन और शिक्षाओं पर चर्चा की जाएगी।</li>
</ul>
मुख्यमंत्री ने बताया कि श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए <strong>“</strong><strong>चक्क नानकी</strong><strong>” </strong><strong>नाम की टेंट सिटी</strong> बनाई जाएगी, ताकि संगत को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

<strong>कार्यक्रम में शामिल रहे कई प्रमुख नेता</strong>

इस अवसर पर पंजाब सरकार के कई मंत्री और नेता मौजूद रहे, जिनमें —
<strong>अमन अरोड़ा</strong><strong>, </strong><strong>हरजोत सिंह बैंस</strong><strong>, </strong><strong>गुरमीत सिंह खुड्डियां</strong><strong>, </strong><strong>हरभजन सिंह (</strong><strong>E.T.O.), </strong><strong>तरुनप्रीत सिंह सौंद</strong><strong>, </strong><strong>लाल चंद कटारुचक्क</strong><strong>, </strong><strong>मोहिंदर भगत</strong><strong>, </strong><strong>बरिंदर गोयल</strong>,
<strong>लोकसभा सदस्य डॉ. राज कुमार चब्बेवाल</strong><strong>, </strong><strong>गुरमीत सिंह मीत हेयर और मालविंदर सिंह कंग</strong>,
<strong>राज्यसभा सदस्य विक्रमजीत सिंह साहनी</strong>,
<strong>पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामलों के सलाहकार दीपक बाली</strong>,
और <strong>मुख्य सचिव के. ए. पी. सिन्हा</strong> शामिल रहे।

यह आयोजन सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि <strong>धर्म</strong><strong>, </strong><strong>मानवता और एकता का संदेश देने वाला ऐतिहासिक अवसर</strong> है।
गुरु तेग़ बहादर जी की शहादत ने हमें सिखाया कि <strong>सत्य और न्याय के लिए खड़ा होना ही सबसे बड़ा धर्म है।</strong>
उनका जीवन आज भी करोड़ों लोगों को प्रेरणा देता है कि अत्याचार के आगे झुकने की बजाय, <strong>सच और इंसानियत की राह पर चलना ही सच्ची जीत है।</strong>]]></content:encoded>
					
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		<title>Guru Tegh Bahadur ji की शहादत की 350th बरसी पर निकलेगी &#8220;गुरु सीस मार्ग यात्रा&#8221;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 21 Aug 2025 03:56:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चंडीगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[AnandpurSahib]]></category>
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					<description><![CDATA[सिख संगठनों ने मिलकर गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहादत की बरसी को बेहद खास तरीके से मनाने का ऐलान किया है। इस मौके पर <strong>“</strong><strong>गुरु सीस मार्ग यात्रा”</strong> नामक एक भव्य धार्मिक शोभा यात्रा निकाली जाएगी, जो दिल्ली के चांदनी चौक से शुरू होकर आनंदपुर साहिब तक पहुंचेगी।

<strong>यात्रा कब और कहां से शुरू होगी</strong><strong>?</strong>

यह ऐतिहासिक यात्रा <strong>3 </strong><strong>अक्टूबर </strong><strong>2025</strong> को <strong>गुरुद्वारा सीस गंज साहिब</strong><strong>, </strong><strong>दिल्ली (चांदनी चौक)</strong> से शुरू होगी और <strong>5 </strong><strong>अक्टूबर </strong><strong>2025</strong> को <strong>गुरुद्वारा सीस गंज</strong><strong>, </strong><strong>श्री आनंदपुर साहिब (पंजाब)</strong> में संपन्न होगी।

<strong>कौन-कौन से संगठन जुड़ रहे हैं</strong><strong>?</strong>

इस यात्रा की घोषणा पूर्व जत्थेदार <strong>गुरुद्वारा दमदमा साहिब</strong><strong>, </strong><strong>ज्ञानी केवल सिंह</strong> ने की। वे इस कार्यक्रम के संयोजक और <strong>पंथिक तालमेल दल</strong> के प्रमुख हैं।
इसके साथ ही कई और संस्थाएं भी इस आयोजन में सहयोग करेंगी, जिनमें शामिल हैं –
<ul>
 	<li><strong>अकाल पुरख की फौज</strong> (इसके प्रमुख और पूर्व SGPC मेंबर एडवोकेट जसविंदर सिंह हैं)</li>
 	<li><strong>सेंट्रल श्री गुरु सिंह सभा</strong><strong>, </strong><strong>चंडीगढ़</strong></li>
 	<li><strong>ग्यान प्रगास ट्रस्ट</strong><strong>, </strong><strong>लुधियाना</strong></li>
</ul>
<strong>इतिहास से जुड़ा महत्व</strong>

एडवोकेट जसविंदर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह यात्रा उस ऐतिहासिक मार्ग को दोहराएगी, जिस पर <strong>भाई जठ्ठा (भाई जेटा जी</strong><strong>, </strong><strong>जिन्हें बाद में भाई जीवान सिंह कहा गया)</strong> ने गुरु तेग बहादुर जी का <strong>विछड़ा हुआ शीश</strong> अदम्य साहस और निडरता के साथ दिल्ली से आनंदपुर साहिब तक पहुंचाया था।

यह घटना सिख इतिहास का वह सुनहरा पन्ना है, जो बलिदान और बहादुरी की मिसाल पेश करता है।
गौरतलब है कि गुरु तेग बहादुर जी को 1675 में दिल्ली के चांदनी चौक में मुगल शासक औरंगज़ेब के आदेश पर शहीद किया गया था। उन्होंने कश्मीरी पंडितों और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर किए थे।

<strong>यात्रा का संदेश</strong>

यह यात्रा सिर्फ एक धार्मिक जुलूस नहीं होगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को यह याद दिलाएगी कि सिख धर्म की नींव <strong>निडरता</strong><strong>, </strong><strong>बलिदान और इंसानियत की रक्षा</strong> पर टिकी है।
इस कार्यक्रम का मकसद समाज को एकजुट करना और गुरु तेग बहादुर जी के त्याग का संदेश लोगों तक पहुंचाना है।

इस तरह “गुरु सीस मार्ग यात्रा” बलिदान, साहस और आस्था की जीवंत मिसाल बनकर लोगों को प्रेरित करेगी।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[सिख संगठनों ने मिलकर गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहादत की बरसी को बेहद खास तरीके से मनाने का ऐलान किया है। इस मौके पर <strong>“</strong><strong>गुरु सीस मार्ग यात्रा”</strong> नामक एक भव्य धार्मिक शोभा यात्रा निकाली जाएगी, जो दिल्ली के चांदनी चौक से शुरू होकर आनंदपुर साहिब तक पहुंचेगी।

<strong>यात्रा कब और कहां से शुरू होगी</strong><strong>?</strong>

यह ऐतिहासिक यात्रा <strong>3 </strong><strong>अक्टूबर </strong><strong>2025</strong> को <strong>गुरुद्वारा सीस गंज साहिब</strong><strong>, </strong><strong>दिल्ली (चांदनी चौक)</strong> से शुरू होगी और <strong>5 </strong><strong>अक्टूबर </strong><strong>2025</strong> को <strong>गुरुद्वारा सीस गंज</strong><strong>, </strong><strong>श्री आनंदपुर साहिब (पंजाब)</strong> में संपन्न होगी।

<strong>कौन-कौन से संगठन जुड़ रहे हैं</strong><strong>?</strong>

इस यात्रा की घोषणा पूर्व जत्थेदार <strong>गुरुद्वारा दमदमा साहिब</strong><strong>, </strong><strong>ज्ञानी केवल सिंह</strong> ने की। वे इस कार्यक्रम के संयोजक और <strong>पंथिक तालमेल दल</strong> के प्रमुख हैं।
इसके साथ ही कई और संस्थाएं भी इस आयोजन में सहयोग करेंगी, जिनमें शामिल हैं –
<ul>
 	<li><strong>अकाल पुरख की फौज</strong> (इसके प्रमुख और पूर्व SGPC मेंबर एडवोकेट जसविंदर सिंह हैं)</li>
 	<li><strong>सेंट्रल श्री गुरु सिंह सभा</strong><strong>, </strong><strong>चंडीगढ़</strong></li>
 	<li><strong>ग्यान प्रगास ट्रस्ट</strong><strong>, </strong><strong>लुधियाना</strong></li>
</ul>
<strong>इतिहास से जुड़ा महत्व</strong>

एडवोकेट जसविंदर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह यात्रा उस ऐतिहासिक मार्ग को दोहराएगी, जिस पर <strong>भाई जठ्ठा (भाई जेटा जी</strong><strong>, </strong><strong>जिन्हें बाद में भाई जीवान सिंह कहा गया)</strong> ने गुरु तेग बहादुर जी का <strong>विछड़ा हुआ शीश</strong> अदम्य साहस और निडरता के साथ दिल्ली से आनंदपुर साहिब तक पहुंचाया था।

यह घटना सिख इतिहास का वह सुनहरा पन्ना है, जो बलिदान और बहादुरी की मिसाल पेश करता है।
गौरतलब है कि गुरु तेग बहादुर जी को 1675 में दिल्ली के चांदनी चौक में मुगल शासक औरंगज़ेब के आदेश पर शहीद किया गया था। उन्होंने कश्मीरी पंडितों और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर किए थे।

<strong>यात्रा का संदेश</strong>

यह यात्रा सिर्फ एक धार्मिक जुलूस नहीं होगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को यह याद दिलाएगी कि सिख धर्म की नींव <strong>निडरता</strong><strong>, </strong><strong>बलिदान और इंसानियत की रक्षा</strong> पर टिकी है।
इस कार्यक्रम का मकसद समाज को एकजुट करना और गुरु तेग बहादुर जी के त्याग का संदेश लोगों तक पहुंचाना है।

इस तरह “गुरु सीस मार्ग यात्रा” बलिदान, साहस और आस्था की जीवंत मिसाल बनकर लोगों को प्रेरित करेगी।]]></content:encoded>
					
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		<item>
		<title>Delhi और Punjab की Sikh Bodies 9th Guru की शहादत पर एकजुट – DSGMC ने SGPC को लिखी चिट्ठी, मिलकर Commemoration की अपील</title>
		<link>https://trendstopic.in/sikh-bodies-from-delhi-and-punjab-unite-for-9th-gurus-martyrdom-dsgmc-writes-to-sgpc-urges-joint-commemoration/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 Aug 2025 06:01:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[350thMartyrdom]]></category>
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					<description><![CDATA[गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहादत वर्षगांठ को लेकर दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) ने एक बड़ी पहल की है। DSGMC ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) से आग्रह किया है कि इस ऐतिहासिक मौके को <strong>मिलकर</strong><strong>, </strong><strong>एकजुट होकर</strong> मनाया जाए ताकि सिख समुदाय में एकता का संदेश जाए और गुरु साहिब के बलिदान को पूरे सम्मान के साथ याद किया जा सके।

DSGMC के अध्यक्ष <strong>हरमीत सिंह कालका</strong> ने SGPC के अध्यक्ष <strong>हरजिंदर सिंह धामी</strong> को पत्र लिखते हुए कहा कि अलग-अलग कार्यक्रम करने से पंथ में बंटवारे जैसा संदेश जाता है, जो <strong>गुरु साहिब की शिक्षाओं और बलिदान की भावना के खिलाफ है।</strong>

<strong>"</strong><strong>गुरु साहिब ने इंसानियत के लिए दी थी कुर्बानी" – हरमीत सिंह कालका</strong>

अपने पत्र में कालका ने लिखा,

“गुरु तेग बहादुर जी ने दिल्ली में हिंदू धर्म की रक्षा और धार्मिक आज़ादी के लिए शहादत दी थी। आज अगर हम उनकी याद में अलग-अलग आयोजन करें, तो यह उनके बलिदान की भावना का अपमान होगा।”

उन्होंने SGPC से अपील की कि दोनों संस्थाएं मिलकर एक <strong>مشترك</strong><strong> आयोजन</strong> करें जो पूरी दुनिया के सामने सिख समुदाय की एकता को दिखाए।

<strong>इतिहास में कई बार हुआ है पंथ का एकजुट आयोजन</strong>

हरमीत सिंह कालका ने कुछ ऐसे ऐतिहासिक आयोजनों का भी ज़िक्र किया जो SGPC और DSGMC ने साथ मिलकर किए थे, जैसे:
<ul>
 	<li><strong>1999</strong> – खालसा पंथ की स्थापना की 300वीं वर्षगांठ (तख्त केसगढ़ साहिब, आनंदपुर साहिब)</li>
 	<li><strong>2004</strong> – गुरु अंगद देव जी की 400वीं जयंती</li>
 	<li><strong>2008</strong> – गुरु ग्रंथ साहिब जी की स्थापना की 300वीं वर्षगांठ (तख्त हजूर साहिब, नांदेड़)</li>
 	<li><strong>2019</strong> – गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती (सुल्तानपुर लोधी)</li>
</ul>
इन आयोजनों में सिख संगत ने पूरे जोश और श्रद्धा के साथ भाग लिया था, और वह एकता फिर से दिखाई जानी चाहिए – ऐसा DSGMC का मानना है।

<strong>अन्य शहीदों को भी दी जाए श्रद्धांजलि</strong>

DSGMC अध्यक्ष ने अपने पत्र में यह भी सुझाव दिया कि इस अवसर पर <strong>भाई मती दास</strong>, <strong>भाई सती दास</strong>, और <strong>भाई दयाला जी</strong> को भी श्रद्धांजलि दी जाए, जिन्होंने गुरु तेग बहादुर जी के साथ मिलकर मुगलों के ज़ुल्म के खिलाफ आवाज़ उठाई और शहीद हुए।

<strong>गुरु तेग बहादुर जी की शहादत – धर्म और इंसानियत के लिए बलिदान</strong>

गुरु तेग बहादुर जी की शहादत भारतीय इतिहास में एक <strong>ऐसा अध्याय है जो धार्मिक स्वतंत्रता</strong><strong>, </strong><strong>साहस और इंसानियत की रक्षा</strong> का प्रतीक है।
उन्होंने 1675 में दिल्ली के चांदनी चौक में <strong>औरंगज़ेब के हुक्म पर अपनी जान दी</strong>, लेकिन जबरन धर्म परिवर्तन को स्वीकार नहीं किया। कश्मीरी पंडितों के धार्मिक अधिकारों की रक्षा के लिए उन्होंने शहादत दी, जिसे आज भी पूरे देश में श्रद्धा से याद किया जाता है।

<strong>SGPC </strong><strong>की प्रतिक्रिया का इंतज़ार</strong>

अब सबकी निगाहें SGPC पर हैं कि वह DSGMC के इस आग्रह पर क्या रुख अपनाती है।
अगर दोनों संस्थाएं मिलकर आयोजन करती हैं तो यह न सिर्फ सिख समुदाय के लिए गर्व की बात होगी, बल्कि यह भारत के लिए भी एक <strong>धर्मनिरपेक्ष और एकजुटता का संदेश</strong> होगा।

<strong>यह शहादत वर्षगांठ सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं</strong><strong>, </strong><strong>बल्कि उस बलिदान की याद है</strong><strong>, </strong><strong>जिसने पूरे समाज को एकता</strong><strong>, </strong><strong>समानता और स्वतंत्रता का पाठ पढ़ाया।</strong>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहादत वर्षगांठ को लेकर दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) ने एक बड़ी पहल की है। DSGMC ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) से आग्रह किया है कि इस ऐतिहासिक मौके को <strong>मिलकर</strong><strong>, </strong><strong>एकजुट होकर</strong> मनाया जाए ताकि सिख समुदाय में एकता का संदेश जाए और गुरु साहिब के बलिदान को पूरे सम्मान के साथ याद किया जा सके।

DSGMC के अध्यक्ष <strong>हरमीत सिंह कालका</strong> ने SGPC के अध्यक्ष <strong>हरजिंदर सिंह धामी</strong> को पत्र लिखते हुए कहा कि अलग-अलग कार्यक्रम करने से पंथ में बंटवारे जैसा संदेश जाता है, जो <strong>गुरु साहिब की शिक्षाओं और बलिदान की भावना के खिलाफ है।</strong>

<strong>"</strong><strong>गुरु साहिब ने इंसानियत के लिए दी थी कुर्बानी" – हरमीत सिंह कालका</strong>

अपने पत्र में कालका ने लिखा,

“गुरु तेग बहादुर जी ने दिल्ली में हिंदू धर्म की रक्षा और धार्मिक आज़ादी के लिए शहादत दी थी। आज अगर हम उनकी याद में अलग-अलग आयोजन करें, तो यह उनके बलिदान की भावना का अपमान होगा।”

उन्होंने SGPC से अपील की कि दोनों संस्थाएं मिलकर एक <strong>مشترك</strong><strong> आयोजन</strong> करें जो पूरी दुनिया के सामने सिख समुदाय की एकता को दिखाए।

<strong>इतिहास में कई बार हुआ है पंथ का एकजुट आयोजन</strong>

हरमीत सिंह कालका ने कुछ ऐसे ऐतिहासिक आयोजनों का भी ज़िक्र किया जो SGPC और DSGMC ने साथ मिलकर किए थे, जैसे:
<ul>
 	<li><strong>1999</strong> – खालसा पंथ की स्थापना की 300वीं वर्षगांठ (तख्त केसगढ़ साहिब, आनंदपुर साहिब)</li>
 	<li><strong>2004</strong> – गुरु अंगद देव जी की 400वीं जयंती</li>
 	<li><strong>2008</strong> – गुरु ग्रंथ साहिब जी की स्थापना की 300वीं वर्षगांठ (तख्त हजूर साहिब, नांदेड़)</li>
 	<li><strong>2019</strong> – गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती (सुल्तानपुर लोधी)</li>
</ul>
इन आयोजनों में सिख संगत ने पूरे जोश और श्रद्धा के साथ भाग लिया था, और वह एकता फिर से दिखाई जानी चाहिए – ऐसा DSGMC का मानना है।

<strong>अन्य शहीदों को भी दी जाए श्रद्धांजलि</strong>

DSGMC अध्यक्ष ने अपने पत्र में यह भी सुझाव दिया कि इस अवसर पर <strong>भाई मती दास</strong>, <strong>भाई सती दास</strong>, और <strong>भाई दयाला जी</strong> को भी श्रद्धांजलि दी जाए, जिन्होंने गुरु तेग बहादुर जी के साथ मिलकर मुगलों के ज़ुल्म के खिलाफ आवाज़ उठाई और शहीद हुए।

<strong>गुरु तेग बहादुर जी की शहादत – धर्म और इंसानियत के लिए बलिदान</strong>

गुरु तेग बहादुर जी की शहादत भारतीय इतिहास में एक <strong>ऐसा अध्याय है जो धार्मिक स्वतंत्रता</strong><strong>, </strong><strong>साहस और इंसानियत की रक्षा</strong> का प्रतीक है।
उन्होंने 1675 में दिल्ली के चांदनी चौक में <strong>औरंगज़ेब के हुक्म पर अपनी जान दी</strong>, लेकिन जबरन धर्म परिवर्तन को स्वीकार नहीं किया। कश्मीरी पंडितों के धार्मिक अधिकारों की रक्षा के लिए उन्होंने शहादत दी, जिसे आज भी पूरे देश में श्रद्धा से याद किया जाता है।

<strong>SGPC </strong><strong>की प्रतिक्रिया का इंतज़ार</strong>

अब सबकी निगाहें SGPC पर हैं कि वह DSGMC के इस आग्रह पर क्या रुख अपनाती है।
अगर दोनों संस्थाएं मिलकर आयोजन करती हैं तो यह न सिर्फ सिख समुदाय के लिए गर्व की बात होगी, बल्कि यह भारत के लिए भी एक <strong>धर्मनिरपेक्ष और एकजुटता का संदेश</strong> होगा।

<strong>यह शहादत वर्षगांठ सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं</strong><strong>, </strong><strong>बल्कि उस बलिदान की याद है</strong><strong>, </strong><strong>जिसने पूरे समाज को एकता</strong><strong>, </strong><strong>समानता और स्वतंत्रता का पाठ पढ़ाया।</strong>]]></content:encoded>
					
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		<item>
		<title>Sikh History से जुड़े Centenary Celebrations Politics से ऊपर – Speaker Kultar Sandhwan Guru Tegh Bahadur Ji की 350वीं Martyrdom Anniversary और Amritsar के 450वें स्थापना दिवस को लेकर दि बड़ी Statement</title>
		<link>https://trendstopic.in/centenary-celebrations-linked-to-sikh-history-are-above-politics-speaker-kultar-sandhwan-major-statement-on-the-350th-martyrdom-anniversary-of-guru-tegh-bahadur-ji-and-the-450th-foundation-d/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 14 Jun 2025 06:54:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चंडीगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[Amritsar450]]></category>
		<category><![CDATA[CentenaryCelebrations]]></category>
		<category><![CDATA[GuruTeghBahadur350]]></category>
		<category><![CDATA[KultarSandhwan]]></category>
		<category><![CDATA[PunjabNews]]></category>
		<category><![CDATA[SikhHistory]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब विधानसभा के स्पीकर <strong>कुलतार सिंह संधवां</strong> ने शताब्दी समारोहों को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि <strong>गुरु तेग बहादुर जी के </strong><strong>350</strong><strong>वें शहीदी दिवस</strong> और <strong>अमृतसर के </strong><strong>450</strong><strong>वें स्थापना दिवस</strong> को लेकर जो आयोजन हो रहे हैं, वे <strong>किसी पार्टी या सरकार के नहीं</strong>, बल्कि <strong>पूरे सिख पंथ और मानवता के लिए हैं</strong>। उन्होंने <strong>SGPC (</strong><strong>शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी)</strong> के अध्यक्ष <strong>हरजिंदर सिंह धामी</strong> से अपील की है कि इन समारोहों को राजनीतिक नजरिए से न देखें।

<strong>"</strong><strong>यह कार्यक्रम किसी पार्टी का नहीं</strong><strong>, </strong><strong>गुरु साहिब की विरासत का सम्मान है"</strong>

लुधियाना में प्रेस से बात करते हुए संधवां ने कहा,

<em>“</em><em>यह कोई पार्टी कार्यक्रम नहीं है</em><em>, </em><em>बल्कि गुरु साहिब की शहादत और सिख धर्म के इतिहास को पूरी दुनिया तक पहुंचाने का प्रयास है।</em><em>”</em>

उन्होंने SGPC प्रमुख धामी को याद दिलाया कि वे किसी <strong>राजनीतिक पार्टी के नेता नहीं</strong>, बल्कि <strong>सिख धर्म की प्रतिनिधि संस्था के अध्यक्ष हैं</strong>, इसलिए उनका आचरण उस गरिमा के अनुरूप होना चाहिए।

<strong>“</strong><strong>पूरी दुनिया को बताएं सिख धर्म का संदेश</strong><strong>”</strong>

संधवां ने कहा कि सिख धर्म <strong>बलिदान</strong><strong>, </strong><strong>सेवा और मानवता की भलाई</strong> का प्रतीक है। इसलिए पंजाब सरकार चाहती है कि गुरु तेग बहादुर जी की शहादत और अमृतसर की ऐतिहासिकता को लेकर <strong>वैश्विक स्तर पर ऐसे कार्यक्रम किए जाएं</strong>, जिससे सिख धर्म के मूल्यों और शिक्षाओं का प्रचार हो।

उन्होंने कहा कि <strong>हरमंदिर साहिब और अमृतसर शहर सिर्फ सिखों के नहीं</strong><strong>, </strong><strong>बल्कि पूरी दुनिया के लिए शांति और भाईचारे का प्रतीक हैं</strong>, जहां हर धर्म के लोगों का स्वागत होता है।

<strong>पिछली सरकारों ने भी उठाए थे ऐसे कदम</strong>

धामी की आलोचना पर जवाब देते हुए संधवां ने कहा कि <strong>गुरु नानक देव जी के </strong><strong>550</strong><strong>वें प्रकाश पर्व और गुरु गोबिंद सिंह जी के </strong><strong>350</strong><strong>वें जन्मदिवस पर भी</strong> पहले की सरकारों ने ऐसे आयोजन किए थे, तब किसी ने राजनीति नहीं की थी।

<strong>“</strong><strong>धामी सुझाव दें</strong><strong>, </strong><strong>आपत्तियां नहीं</strong><strong>”</strong>

संधवां ने SGPC अध्यक्ष को कहा कि अगर उन्हें कोई आपत्ति है तो वे <strong>सकारात्मक सुझाव दें</strong>, ताकि समारोह और भी बेहतर और प्रभावशाली बनाए जा सकें। उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार ने पहले ही SGPC समेत तमाम संगतों से <strong>राय और सुझाव मांगे हैं</strong>, ताकि आयोजन में <strong>हर किसी की भागीदारी हो</strong>।

<strong>"</strong><strong>यह सिख पंथ का सम्मान करने का समय है"</strong>

आखिर में सिख संगत को संबोधित करते हुए संधवां ने कहा कि यह समय <strong>एकजुटता और सिख परंपरा को आगे बढ़ाने का है</strong>, न कि आपसी मतभेद फैलाने का। उन्होंने कहा,

<em>“</em><em>आइए मिलकर ऐसे प्रयास करें जिससे शताब्दी समारोह यादगार बनें और सिख धर्म का सार्वभौमिक संदेश पूरी दुनिया में फैले।</em><em>”</em>

स्पीकर संधवां का यह बयान साफ संकेत देता है कि पंजाब सरकार <strong>गुरु तेग बहादुर जी और अमृतसर शहर की ऐतिहासिक विरासत को वैश्विक स्तर पर उजागर करना चाहती है</strong>, और इसके लिए <strong>हर पक्ष का सहयोग ज़रूरी</strong> है। धार्मिक आयोजनों को राजनीति से दूर रखकर उन्हें <strong>एकजुटता और सम्मान</strong> के साथ मनाना समय की ज़रूरत है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब विधानसभा के स्पीकर <strong>कुलतार सिंह संधवां</strong> ने शताब्दी समारोहों को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि <strong>गुरु तेग बहादुर जी के </strong><strong>350</strong><strong>वें शहीदी दिवस</strong> और <strong>अमृतसर के </strong><strong>450</strong><strong>वें स्थापना दिवस</strong> को लेकर जो आयोजन हो रहे हैं, वे <strong>किसी पार्टी या सरकार के नहीं</strong>, बल्कि <strong>पूरे सिख पंथ और मानवता के लिए हैं</strong>। उन्होंने <strong>SGPC (</strong><strong>शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी)</strong> के अध्यक्ष <strong>हरजिंदर सिंह धामी</strong> से अपील की है कि इन समारोहों को राजनीतिक नजरिए से न देखें।

<strong>"</strong><strong>यह कार्यक्रम किसी पार्टी का नहीं</strong><strong>, </strong><strong>गुरु साहिब की विरासत का सम्मान है"</strong>

लुधियाना में प्रेस से बात करते हुए संधवां ने कहा,

<em>“</em><em>यह कोई पार्टी कार्यक्रम नहीं है</em><em>, </em><em>बल्कि गुरु साहिब की शहादत और सिख धर्म के इतिहास को पूरी दुनिया तक पहुंचाने का प्रयास है।</em><em>”</em>

उन्होंने SGPC प्रमुख धामी को याद दिलाया कि वे किसी <strong>राजनीतिक पार्टी के नेता नहीं</strong>, बल्कि <strong>सिख धर्म की प्रतिनिधि संस्था के अध्यक्ष हैं</strong>, इसलिए उनका आचरण उस गरिमा के अनुरूप होना चाहिए।

<strong>“</strong><strong>पूरी दुनिया को बताएं सिख धर्म का संदेश</strong><strong>”</strong>

संधवां ने कहा कि सिख धर्म <strong>बलिदान</strong><strong>, </strong><strong>सेवा और मानवता की भलाई</strong> का प्रतीक है। इसलिए पंजाब सरकार चाहती है कि गुरु तेग बहादुर जी की शहादत और अमृतसर की ऐतिहासिकता को लेकर <strong>वैश्विक स्तर पर ऐसे कार्यक्रम किए जाएं</strong>, जिससे सिख धर्म के मूल्यों और शिक्षाओं का प्रचार हो।

उन्होंने कहा कि <strong>हरमंदिर साहिब और अमृतसर शहर सिर्फ सिखों के नहीं</strong><strong>, </strong><strong>बल्कि पूरी दुनिया के लिए शांति और भाईचारे का प्रतीक हैं</strong>, जहां हर धर्म के लोगों का स्वागत होता है।

<strong>पिछली सरकारों ने भी उठाए थे ऐसे कदम</strong>

धामी की आलोचना पर जवाब देते हुए संधवां ने कहा कि <strong>गुरु नानक देव जी के </strong><strong>550</strong><strong>वें प्रकाश पर्व और गुरु गोबिंद सिंह जी के </strong><strong>350</strong><strong>वें जन्मदिवस पर भी</strong> पहले की सरकारों ने ऐसे आयोजन किए थे, तब किसी ने राजनीति नहीं की थी।

<strong>“</strong><strong>धामी सुझाव दें</strong><strong>, </strong><strong>आपत्तियां नहीं</strong><strong>”</strong>

संधवां ने SGPC अध्यक्ष को कहा कि अगर उन्हें कोई आपत्ति है तो वे <strong>सकारात्मक सुझाव दें</strong>, ताकि समारोह और भी बेहतर और प्रभावशाली बनाए जा सकें। उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार ने पहले ही SGPC समेत तमाम संगतों से <strong>राय और सुझाव मांगे हैं</strong>, ताकि आयोजन में <strong>हर किसी की भागीदारी हो</strong>।

<strong>"</strong><strong>यह सिख पंथ का सम्मान करने का समय है"</strong>

आखिर में सिख संगत को संबोधित करते हुए संधवां ने कहा कि यह समय <strong>एकजुटता और सिख परंपरा को आगे बढ़ाने का है</strong>, न कि आपसी मतभेद फैलाने का। उन्होंने कहा,

<em>“</em><em>आइए मिलकर ऐसे प्रयास करें जिससे शताब्दी समारोह यादगार बनें और सिख धर्म का सार्वभौमिक संदेश पूरी दुनिया में फैले।</em><em>”</em>

स्पीकर संधवां का यह बयान साफ संकेत देता है कि पंजाब सरकार <strong>गुरु तेग बहादुर जी और अमृतसर शहर की ऐतिहासिक विरासत को वैश्विक स्तर पर उजागर करना चाहती है</strong>, और इसके लिए <strong>हर पक्ष का सहयोग ज़रूरी</strong> है। धार्मिक आयोजनों को राजनीति से दूर रखकर उन्हें <strong>एकजुटता और सम्मान</strong> के साथ मनाना समय की ज़रूरत है।]]></content:encoded>
					
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