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	<title>SAD &#8211; Trends Topic</title>
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	<title>SAD &#8211; Trends Topic</title>
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	<item>
		<title>Tarn Taran Bypoll: 40 साल में सबसे कम मतदान, अब परिणाम तय करेंगे 2027 की Preparation कितनी</title>
		<link>https://trendstopic.in/tarn-taran-bypoll-lowest-voter-turnout-in-40-years-results-to-decide-how-prepared-parties-are-for-2027/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 12 Nov 2025 05:54:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
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		<category><![CDATA[VoterTurnout]]></category>
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					<description><![CDATA[तरनतारन विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजों का अब सबको बेसब्री से इंतज़ार है। यह सिर्फ एक उपचुनाव नहीं, बल्कि पंजाब की सियासत के लिए आने वाले <strong>2027 </strong><strong>विधानसभा चुनाव</strong> की तैयारी का टेस्ट माना जा रहा है। सभी बड़ी पार्टियां — <strong>आप</strong><strong>, </strong><strong>अकाली दल</strong><strong>, </strong><strong>कांग्रेस और भाजपा</strong> — इस नतीजे को अपने भविष्य की दिशा तय करने वाला इम्तिहान मान रही हैं।

<strong>40 </strong><strong>साल बाद सबसे कम मतदान</strong>

इस बार तरनतारन में 40 साल बाद सबसे कम मतदान हुआ है।
<strong>शाम </strong><strong>6 </strong><strong>बजे तक कुल </strong><strong>60.95% </strong><strong>वोटिंग</strong> हुई।
अगर पिछले आंकड़ों पर नज़र डालें, तो 1985 में सिर्फ 57.5% मतदान हुआ था। उसके बाद हर चुनाव में वोटिंग इससे ज़्यादा रही। यानी इस बार मतदाताओं का उत्साह औसत ही रहा।
<table>
<thead>
<tr>
<td><strong>साल</strong></td>
<td><strong>मतदान प्रतिशत</strong></td>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>1977</td>
<td>66.2%</td>
</tr>
<tr>
<td>1980</td>
<td>67.4%</td>
</tr>
<tr>
<td>1985</td>
<td>57.5%</td>
</tr>
<tr>
<td>1992</td>
<td>निर्विरोध विधायक घोषित</td>
</tr>
<tr>
<td>1997</td>
<td>63.8%</td>
</tr>
<tr>
<td>2002</td>
<td>62.9%</td>
</tr>
<tr>
<td>2007</td>
<td>65.7%</td>
</tr>
<tr>
<td>2012</td>
<td>77.1%</td>
</tr>
<tr>
<td>2017</td>
<td>72.2%</td>
</tr>
<tr>
<td>2022</td>
<td>66.0%</td>
</tr>
<tr>
<td>2025</td>
<td>60.95%</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<strong>क्यों अहम है यह चुनाव</strong>

इस उपचुनाव की जीत सभी दलों के लिए बहुत मायने रखती है।
राजनीतिक पार्टियां इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले <strong>अपने परफॉर्मेंस टेस्ट</strong> के रूप में देख रही हैं।
इस नतीजे से साफ होगा कि पिछले साढ़े तीन साल में किस दल ने अपनी ज़मीनी पकड़ मजबूत की है।

<strong>AAP </strong><strong>की सबसे बड़ी परीक्षा</strong>

सत्तारूढ़ <strong>आम आदमी पार्टी (</strong><strong>AAP)</strong> के लिए यह चुनाव <strong>प्रतिष्ठा का सवाल</strong> है।
पार्टी इस जीत से यह संदेश देना चाहती है कि पंजाब में अभी भी “आप” के खिलाफ कोई बड़ी लहर नहीं है।

आप ने इस बार भी अपना पुराना <strong>“</strong><strong>विकास + पंथक</strong><strong>” </strong><strong>फार्मूला</strong> अपनाया।
इस रणनीति को मजबूती उस वक्त मिली जब <strong>पूर्व अकाली विधायक हरमीत सिंह संधू</strong> आप में शामिल हो गए।
संधू पंथक राजनीति में जाना-पहचाना चेहरा हैं — वे 2002, 2007 और 2012 में लगातार विधायक रहे।
2017 और 2022 में वे दूसरे नंबर पर रहे थे। पिछली बार उन्हें आप के दिवंगत विधायक <strong>कश्मीर सिंह सोहल</strong> ने हराया था।
इस बार संधू आप के प्रत्याशी हैं और पार्टी ने उन्हें “विकास का चेहरा” बताकर मैदान में उतारा है।

<strong>शिअद का जवाब </strong><strong>— </strong><strong>सुखविंदर कौर रंधावा</strong>

हरमीत संधू की आप में एंट्री से <strong>शिरोमणि अकाली दल (</strong><strong>SAD)</strong> को झटका लगा, लेकिन पार्टी ने तुरंत पलटवार करते हुए <strong>सुखविंदर कौर रंधावा</strong> को टिकट दिया।
वह एक <strong>धर्मी फौजी की पत्नी</strong> हैं और इलाके में उनका अच्छा जनसंपर्क है।
गांवों के कई <strong>सरपंचों और पार्षदों ने खुलकर उनका समर्थन</strong> किया है।
अकाली दल इस सीट पर पंथक वोटों को अपने पक्ष में बनाए रखने की पूरी कोशिश में है।

<strong>BJP </strong><strong>की भूमिका</strong>

भाजपा के लिए तरनतारन में <strong>खोने को कुछ नहीं</strong>, लेकिन अगर वह अच्छा प्रदर्शन करती है तो <strong>उसका सीधा असर आप के पक्ष में</strong> जा सकता है।
क्योंकि इस सीट पर पंथक वोट कई हिस्सों में बंट रहे हैं — <strong>अकाली दल</strong>, <strong>आप</strong>, <strong>वारिस पंजाब दे समर्थित उम्मीदवार मनदीप सिंह खालसा</strong> और अन्य छोटे अकाली दलों के बीच।
इस वोट बंटवारे से मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।

<strong>कांग्रेस की वापसी की कोशिश</strong>

कांग्रेस भी इस उपचुनाव में <strong>अपनी खोई हुई ज़मीन दोबारा पाने</strong> की कोशिश कर रही है।
2017 में <strong>कांग्रेस के धर्मबीर अग्निहोत्री</strong> ने यह सीट जीती थी, लेकिन 2022 में पार्टी तीसरे स्थान पर आ गई थी।
अब कांग्रेस चाहती है कि इस नतीजे से वह फिर से मजबूती दिखा सके और 2027 की तैयारी को नई दिशा दे सके।

<strong>विकास बनाम पंथक एजेंडा</strong>

पहले इस इलाके में पंथक राजनीति हावी रहती थी, लेकिन अब लोग <strong>विकास को भी प्राथमिकता</strong> देने लगे हैं।
आप नेताओं ने अपने <strong>साढ़े तीन साल के विकास रिपोर्ट कार्ड</strong> को घर-घर पहुंचाने की कोशिश की।
वहीं, अकाली दल और कांग्रेस ने <strong>धार्मिक और सामाजिक मुद्दों</strong> पर जोर दिया।
यानी इस बार तरनतारन में मुकाबला सिर्फ पंथक नहीं, बल्कि <strong>विकास बनाम पंथक एजेंडे</strong> का भी है।

<strong>अब नतीजों का इंतज़ार</strong>

तरनतारन उपचुनाव की <strong>मतगणना </strong><strong>14 </strong><strong>नवंबर</strong> को होगी।
सभी उम्मीदवारों और समर्थकों की निगाहें अब इसी दिन पर टिकी हैं।
इसका नतीजा न सिर्फ एक सीट का फैसला करेगा, बल्कि यह भी बताएगा कि <strong>पंजाब की जनता </strong><strong>2027 </strong><strong>में किस दिशा में सोच रही है</strong>।

तरनतारन उपचुनाव भले ही एक सीट का चुनाव हो,
लेकिन इसके नतीजे पूरे पंजाब की राजनीति को प्रभावित करेंगे।
यह तय करेगा कि साढ़े तीन साल बाद <strong>कौन सी पार्टी मैदान में कितनी तैयार है</strong>,
किसके पास जनता का भरोसा है,
और किसके लिए अब रणनीति बदलने का वक्त आ गया है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[तरनतारन विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजों का अब सबको बेसब्री से इंतज़ार है। यह सिर्फ एक उपचुनाव नहीं, बल्कि पंजाब की सियासत के लिए आने वाले <strong>2027 </strong><strong>विधानसभा चुनाव</strong> की तैयारी का टेस्ट माना जा रहा है। सभी बड़ी पार्टियां — <strong>आप</strong><strong>, </strong><strong>अकाली दल</strong><strong>, </strong><strong>कांग्रेस और भाजपा</strong> — इस नतीजे को अपने भविष्य की दिशा तय करने वाला इम्तिहान मान रही हैं।

<strong>40 </strong><strong>साल बाद सबसे कम मतदान</strong>

इस बार तरनतारन में 40 साल बाद सबसे कम मतदान हुआ है।
<strong>शाम </strong><strong>6 </strong><strong>बजे तक कुल </strong><strong>60.95% </strong><strong>वोटिंग</strong> हुई।
अगर पिछले आंकड़ों पर नज़र डालें, तो 1985 में सिर्फ 57.5% मतदान हुआ था। उसके बाद हर चुनाव में वोटिंग इससे ज़्यादा रही। यानी इस बार मतदाताओं का उत्साह औसत ही रहा।
<table>
<thead>
<tr>
<td><strong>साल</strong></td>
<td><strong>मतदान प्रतिशत</strong></td>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>1977</td>
<td>66.2%</td>
</tr>
<tr>
<td>1980</td>
<td>67.4%</td>
</tr>
<tr>
<td>1985</td>
<td>57.5%</td>
</tr>
<tr>
<td>1992</td>
<td>निर्विरोध विधायक घोषित</td>
</tr>
<tr>
<td>1997</td>
<td>63.8%</td>
</tr>
<tr>
<td>2002</td>
<td>62.9%</td>
</tr>
<tr>
<td>2007</td>
<td>65.7%</td>
</tr>
<tr>
<td>2012</td>
<td>77.1%</td>
</tr>
<tr>
<td>2017</td>
<td>72.2%</td>
</tr>
<tr>
<td>2022</td>
<td>66.0%</td>
</tr>
<tr>
<td>2025</td>
<td>60.95%</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<strong>क्यों अहम है यह चुनाव</strong>

इस उपचुनाव की जीत सभी दलों के लिए बहुत मायने रखती है।
राजनीतिक पार्टियां इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले <strong>अपने परफॉर्मेंस टेस्ट</strong> के रूप में देख रही हैं।
इस नतीजे से साफ होगा कि पिछले साढ़े तीन साल में किस दल ने अपनी ज़मीनी पकड़ मजबूत की है।

<strong>AAP </strong><strong>की सबसे बड़ी परीक्षा</strong>

सत्तारूढ़ <strong>आम आदमी पार्टी (</strong><strong>AAP)</strong> के लिए यह चुनाव <strong>प्रतिष्ठा का सवाल</strong> है।
पार्टी इस जीत से यह संदेश देना चाहती है कि पंजाब में अभी भी “आप” के खिलाफ कोई बड़ी लहर नहीं है।

आप ने इस बार भी अपना पुराना <strong>“</strong><strong>विकास + पंथक</strong><strong>” </strong><strong>फार्मूला</strong> अपनाया।
इस रणनीति को मजबूती उस वक्त मिली जब <strong>पूर्व अकाली विधायक हरमीत सिंह संधू</strong> आप में शामिल हो गए।
संधू पंथक राजनीति में जाना-पहचाना चेहरा हैं — वे 2002, 2007 और 2012 में लगातार विधायक रहे।
2017 और 2022 में वे दूसरे नंबर पर रहे थे। पिछली बार उन्हें आप के दिवंगत विधायक <strong>कश्मीर सिंह सोहल</strong> ने हराया था।
इस बार संधू आप के प्रत्याशी हैं और पार्टी ने उन्हें “विकास का चेहरा” बताकर मैदान में उतारा है।

<strong>शिअद का जवाब </strong><strong>— </strong><strong>सुखविंदर कौर रंधावा</strong>

हरमीत संधू की आप में एंट्री से <strong>शिरोमणि अकाली दल (</strong><strong>SAD)</strong> को झटका लगा, लेकिन पार्टी ने तुरंत पलटवार करते हुए <strong>सुखविंदर कौर रंधावा</strong> को टिकट दिया।
वह एक <strong>धर्मी फौजी की पत्नी</strong> हैं और इलाके में उनका अच्छा जनसंपर्क है।
गांवों के कई <strong>सरपंचों और पार्षदों ने खुलकर उनका समर्थन</strong> किया है।
अकाली दल इस सीट पर पंथक वोटों को अपने पक्ष में बनाए रखने की पूरी कोशिश में है।

<strong>BJP </strong><strong>की भूमिका</strong>

भाजपा के लिए तरनतारन में <strong>खोने को कुछ नहीं</strong>, लेकिन अगर वह अच्छा प्रदर्शन करती है तो <strong>उसका सीधा असर आप के पक्ष में</strong> जा सकता है।
क्योंकि इस सीट पर पंथक वोट कई हिस्सों में बंट रहे हैं — <strong>अकाली दल</strong>, <strong>आप</strong>, <strong>वारिस पंजाब दे समर्थित उम्मीदवार मनदीप सिंह खालसा</strong> और अन्य छोटे अकाली दलों के बीच।
इस वोट बंटवारे से मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।

<strong>कांग्रेस की वापसी की कोशिश</strong>

कांग्रेस भी इस उपचुनाव में <strong>अपनी खोई हुई ज़मीन दोबारा पाने</strong> की कोशिश कर रही है।
2017 में <strong>कांग्रेस के धर्मबीर अग्निहोत्री</strong> ने यह सीट जीती थी, लेकिन 2022 में पार्टी तीसरे स्थान पर आ गई थी।
अब कांग्रेस चाहती है कि इस नतीजे से वह फिर से मजबूती दिखा सके और 2027 की तैयारी को नई दिशा दे सके।

<strong>विकास बनाम पंथक एजेंडा</strong>

पहले इस इलाके में पंथक राजनीति हावी रहती थी, लेकिन अब लोग <strong>विकास को भी प्राथमिकता</strong> देने लगे हैं।
आप नेताओं ने अपने <strong>साढ़े तीन साल के विकास रिपोर्ट कार्ड</strong> को घर-घर पहुंचाने की कोशिश की।
वहीं, अकाली दल और कांग्रेस ने <strong>धार्मिक और सामाजिक मुद्दों</strong> पर जोर दिया।
यानी इस बार तरनतारन में मुकाबला सिर्फ पंथक नहीं, बल्कि <strong>विकास बनाम पंथक एजेंडे</strong> का भी है।

<strong>अब नतीजों का इंतज़ार</strong>

तरनतारन उपचुनाव की <strong>मतगणना </strong><strong>14 </strong><strong>नवंबर</strong> को होगी।
सभी उम्मीदवारों और समर्थकों की निगाहें अब इसी दिन पर टिकी हैं।
इसका नतीजा न सिर्फ एक सीट का फैसला करेगा, बल्कि यह भी बताएगा कि <strong>पंजाब की जनता </strong><strong>2027 </strong><strong>में किस दिशा में सोच रही है</strong>।

तरनतारन उपचुनाव भले ही एक सीट का चुनाव हो,
लेकिन इसके नतीजे पूरे पंजाब की राजनीति को प्रभावित करेंगे।
यह तय करेगा कि साढ़े तीन साल बाद <strong>कौन सी पार्टी मैदान में कितनी तैयार है</strong>,
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और किसके लिए अब रणनीति बदलने का वक्त आ गया है।]]></content:encoded>
					
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		<item>
		<title>Former Dirba MLA Baldev Singh Mann दोबारा SAD में शामिल, 1 September को AAP Government के खिलाफ मोर्चा</title>
		<link>https://trendstopic.in/former-dirba-mla-baldev-singh-mann-rejoins-sad-protest-against-aap-government-on-september-1/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 10 Aug 2025 04:49:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
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		<category><![CDATA[BaldevSinghMann]]></category>
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		<category><![CDATA[SukhbirSinghBadal]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब की राजनीति में एक बार फिर हलचल देखने को मिली जब पूर्व दिरबा विधायक <strong>बलदेव सिंह मान</strong> ने लंबे समय बाद फिर से <strong>शिरोमणि अकाली दल (</strong><strong>SAD)</strong> का दामन थाम लिया। मान 1977 से 1992 तक तीन बार दिरबा से विधायक रह चुके हैं। पिछले साल उन्होंने SAD के बगावती धड़े <strong>‘</strong><strong>सुधार लहर’</strong> (जो अब भंग हो चुका है) में शामिल होकर पार्टी छोड़ दी थी।

शुक्रवार को SAD अध्यक्ष <strong>सुखबीर सिंह बादल</strong> ने संगरूर के <strong>सुल्लर घराट गांव</strong> में मान के निवास पर एक कार्यक्रम के दौरान उनकी वापसी का ऐलान किया। बादल ने मान को <strong>“</strong><strong>पिता समान”</strong> बताते हुए कहा कि वह हमेशा से पार्टी के मजबूत स्तंभ रहे हैं और उनका दोबारा SAD में आना पार्टी के लिए बड़ी ताकत है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने सभी पुराने अकाली नेताओं से पार्टी में लौटने की अपील की थी और मान का ये फैसला उसी अपील का सकारात्मक जवाब है।

<strong>1 </strong><strong>सितंबर को होगा बड़ा मोर्चा</strong>

सुखबीर सिंह बादल ने इस मौके पर घोषणा की कि SAD 1 सितंबर को मोहाली के <strong>अंब साहिब गुरुद्वारा</strong> से AAP सरकार की <strong>लैंड पूलिंग पॉलिसी</strong> के खिलाफ मोर्चा निकालेगा। उन्होंने इस पॉलिसी को <strong>“65,000 </strong><strong>एकड़ जमीन किसानों से छीनने की साजिश”</strong> करार दिया।

बादल ने कहा कि भले ही <strong>पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट</strong> ने इस पॉलिसी पर एक महीने की रोक लगा दी है, लेकिन SAD का विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक इसे पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता। उनका आरोप है कि AAP सरकार किसानों की मेहनत और जमीन पर डाका डालने की कोशिश कर रही है।

<strong>कांग्रेस और </strong><strong>AAP </strong><strong>दोनों पर निशाना</strong>

SAD प्रमुख ने अपने भाषण में <strong>पूर्व कांग्रेस सरकार</strong> और मौजूदा AAP सरकार — दोनों को आड़े हाथों लिया। उनका कहना था कि दोनों ही पार्टियों ने पंजाब के हितों के साथ विश्वासघात किया है। उन्होंने वादा किया कि अगर 2027 में SAD सत्ता में आता है, तो पार्टी:
<ul>
 	<li>किसानों की समस्याओं का समाधान करेगी और कृषि को पुनर्जीवित करेगी</li>
 	<li>नए उद्योग लगाएगी</li>
 	<li>युवाओं के लिए रोजगार के बड़े अवसर पैदा करेगी</li>
</ul>
<strong>पृष्ठभूमि: लैंड पूलिंग पॉलिसी पर विवाद</strong>

पंजाब सरकार की लैंड पूलिंग पॉलिसी को लेकर पिछले कुछ महीनों से किसानों और विपक्षी दलों में नाराज़गी है। आरोप है कि इस पॉलिसी के तहत सरकार किसानों की जमीन जबरन लेकर प्रोजेक्ट्स में इस्तेमाल करना चाहती है। हाईकोर्ट ने फिलहाल इस पॉलिसी पर एक महीने की रोक लगाई है, लेकिन विवाद और राजनीतिक बयानबाज़ी लगातार जारी है। SAD ने पहले भी इस मुद्दे पर कई विरोध प्रदर्शन किए हैं और अब 1 सितंबर का मोर्चा इसे और बड़ा रूप देने की कोशिश है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब की राजनीति में एक बार फिर हलचल देखने को मिली जब पूर्व दिरबा विधायक <strong>बलदेव सिंह मान</strong> ने लंबे समय बाद फिर से <strong>शिरोमणि अकाली दल (</strong><strong>SAD)</strong> का दामन थाम लिया। मान 1977 से 1992 तक तीन बार दिरबा से विधायक रह चुके हैं। पिछले साल उन्होंने SAD के बगावती धड़े <strong>‘</strong><strong>सुधार लहर’</strong> (जो अब भंग हो चुका है) में शामिल होकर पार्टी छोड़ दी थी।

शुक्रवार को SAD अध्यक्ष <strong>सुखबीर सिंह बादल</strong> ने संगरूर के <strong>सुल्लर घराट गांव</strong> में मान के निवास पर एक कार्यक्रम के दौरान उनकी वापसी का ऐलान किया। बादल ने मान को <strong>“</strong><strong>पिता समान”</strong> बताते हुए कहा कि वह हमेशा से पार्टी के मजबूत स्तंभ रहे हैं और उनका दोबारा SAD में आना पार्टी के लिए बड़ी ताकत है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने सभी पुराने अकाली नेताओं से पार्टी में लौटने की अपील की थी और मान का ये फैसला उसी अपील का सकारात्मक जवाब है।

<strong>1 </strong><strong>सितंबर को होगा बड़ा मोर्चा</strong>

सुखबीर सिंह बादल ने इस मौके पर घोषणा की कि SAD 1 सितंबर को मोहाली के <strong>अंब साहिब गुरुद्वारा</strong> से AAP सरकार की <strong>लैंड पूलिंग पॉलिसी</strong> के खिलाफ मोर्चा निकालेगा। उन्होंने इस पॉलिसी को <strong>“65,000 </strong><strong>एकड़ जमीन किसानों से छीनने की साजिश”</strong> करार दिया।

बादल ने कहा कि भले ही <strong>पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट</strong> ने इस पॉलिसी पर एक महीने की रोक लगा दी है, लेकिन SAD का विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक इसे पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता। उनका आरोप है कि AAP सरकार किसानों की मेहनत और जमीन पर डाका डालने की कोशिश कर रही है।

<strong>कांग्रेस और </strong><strong>AAP </strong><strong>दोनों पर निशाना</strong>

SAD प्रमुख ने अपने भाषण में <strong>पूर्व कांग्रेस सरकार</strong> और मौजूदा AAP सरकार — दोनों को आड़े हाथों लिया। उनका कहना था कि दोनों ही पार्टियों ने पंजाब के हितों के साथ विश्वासघात किया है। उन्होंने वादा किया कि अगर 2027 में SAD सत्ता में आता है, तो पार्टी:
<ul>
 	<li>किसानों की समस्याओं का समाधान करेगी और कृषि को पुनर्जीवित करेगी</li>
 	<li>नए उद्योग लगाएगी</li>
 	<li>युवाओं के लिए रोजगार के बड़े अवसर पैदा करेगी</li>
</ul>
<strong>पृष्ठभूमि: लैंड पूलिंग पॉलिसी पर विवाद</strong>

पंजाब सरकार की लैंड पूलिंग पॉलिसी को लेकर पिछले कुछ महीनों से किसानों और विपक्षी दलों में नाराज़गी है। आरोप है कि इस पॉलिसी के तहत सरकार किसानों की जमीन जबरन लेकर प्रोजेक्ट्स में इस्तेमाल करना चाहती है। हाईकोर्ट ने फिलहाल इस पॉलिसी पर एक महीने की रोक लगाई है, लेकिन विवाद और राजनीतिक बयानबाज़ी लगातार जारी है। SAD ने पहले भी इस मुद्दे पर कई विरोध प्रदर्शन किए हैं और अब 1 सितंबर का मोर्चा इसे और बड़ा रूप देने की कोशिश है।]]></content:encoded>
					
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		<item>
		<title>Tarn Taran Bypoll: Harmeet Sandhu Appointed AAP के Constituency Incharge, SAD ने Sukhwinder Kaur को दिया Ticket – BJP और Congress भी active</title>
		<link>https://trendstopic.in/tarn-taran-bypoll-harmeet-sandhu-appointed-aap-halqa-incharge-sad-fields-sukhwinder-kaur-bjp-and-congress-also-in-action/</link>
					<comments>https://trendstopic.in/tarn-taran-bypoll-harmeet-sandhu-appointed-aap-halqa-incharge-sad-fields-sukhwinder-kaur-bjp-and-congress-also-in-action/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 28 Jul 2025 05:13:10 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[तरनतारन विधानसभा सीट पर होने वाले <strong>उपचुनाव</strong> को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इस सीट को खाली हुए अभी ज़्यादा वक्त नहीं हुआ और अब हर बड़ी पार्टी यहां अपनी पकड़ मजबूत करने में जुट गई है।

<strong>सीट खाली कैसे हुई</strong><strong>?</strong>

2022 के विधानसभा चुनाव में <strong>आम आदमी पार्टी (AAP)</strong> के <strong>कश्मीर सिंह सोहल</strong> ने तरनतारन सीट जीती थी। लेकिन बीमारी के चलते <strong>27 </strong><strong>जून 2025</strong> को उनका निधन हो गया। इसके बाद से यह सीट खाली पड़ी है।
तरनतारन सीट को <strong>‘</strong><strong>पंथक सीट’</strong> माना जाता है, यानी यहां सिख राजनीति का असर ज़्यादा है। यही वजह है कि इस सीट पर हर पार्टी की नज़र टिकी हुई है।

<strong>AAP </strong><strong>ने बनाई नई रणनीति</strong>

AAP ने तरनतारन उपचुनाव को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।
<ul>
 	<li><strong>हरमीत सिंह संधू को बनाया हलका इंचार्ज</strong> – शिरोमणि अकाली दल (SAD) छोड़कर <strong>10 </strong><strong>दिन पहले AAP </strong><strong>में शामिल हुए पूर्व विधायक हरमीत सिंह संधू</strong> को पार्टी ने तरनतारन का <strong>हलका इंचार्ज</strong> बना दिया है।</li>
 	<li><strong>क्या संधू को मिलेगा टिकट?</strong> – माना जा रहा है कि AAP उन्हें उपचुनाव में उम्मीदवार भी बना सकती है। हालांकि पार्टी में शामिल होते वक्त संधू ने कहा था – <em>“</em><em>मैं उम्मीदवार बनने के लिए नहीं, </em><em>बल्कि कार्यकर्ता के तौर पर पार्टी में आया हूं।”</em>
इसके बावजूद उनके टिकट को लेकर चर्चाएं ज़ोरों पर हैं।</li>
 	<li>संधू की <strong>जॉइनिंग चंडीगढ़ के पंजाब भवन में CM </strong><strong>भगवंत मान और पार्टी प्रभारी मनीष सिसोदिया ने करवाई थी।'</strong></li>
</ul>
&nbsp;

<img class="alignnone  wp-image-24617" src="https://trendstopic.in/wp-content/uploads/2025/07/WhatsApp-Image-2025-07-28-at-10.24.57-AM-300x230.webp" alt="" width="769" height="589" />

&nbsp;

<strong>SAD </strong><strong>ने पहले ही कर दी चाल</strong>

शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने इस सीट पर सबसे पहले कदम बढ़ाते हुए <strong>सुखविंदर कौर</strong> को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। SAD की रणनीति साफ है – वह इस सीट पर जल्दी तैयारी शुरू करके बढ़त बनाना चाहती है।

<strong>BJP </strong><strong>भी पीछे नहीं</strong>

भाजपा ने भी इस सीट को लेकर अपने पत्ते खोल दिए हैं। पार्टी ने यहां के लिए <strong>प्रभारी और सह प्रभारी</strong> नियुक्त कर दिए हैं –
<strong>सुरजीत ज्याणी</strong> – प्रभारी
<strong>केडी भंडारी (पूर्व CPA)</strong> और <strong>रवि करण सिंह काहलों (पूर्व विधायक)</strong> – सह प्रभारी

<strong>कांग्रेस की रणनीति क्या है</strong><strong>?</strong>

कांग्रेस ने अभी तक अपने उम्मीदवार का ऐलान नहीं किया है। लेकिन पार्टी हालात पर नज़र रख रही है और जल्द ही अपनी रणनीति सामने ला सकती है।

<strong>एक और चुनौती </strong><strong>– </strong><strong>अमृतपाल सिंह की पार्टी भी मैदान में</strong>

इस उपचुनाव को और दिलचस्प बनाता है <strong>अमृतपाल सिंह</strong> का फैक्टर। असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद <strong>खालिस्तान समर्थक और सांसद अमृतपाल सिंह</strong> की पार्टी ने भी यहां से चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। इसका मतलब है कि मुकाबला और भी ज़्यादा टफ और मल्टी-कोर्नर होने वाला है।

<strong>राजनीतिक तस्वीर कैसी है</strong><strong>?</strong>

तरनतारन उपचुनाव अब <strong>चार बड़े दलों और एक नए फैक्टर (अमृतपाल सिंह की पार्टी)</strong> के बीच दिलचस्प जंग बन चुका है।
<ul>
 	<li><strong>AAP</strong> – हरमीत सिंह संधू पर दांव खेल सकती है।</li>
 	<li><strong>SAD</strong> – सुखविंदर कौर के नाम का एलान कर बढ़त लेने की कोशिश में है।</li>
 	<li><strong>BJP</strong> – संगठनात्मक ढांचा तैयार कर रही है।</li>
 	<li><strong>कांग्रेस</strong> – चुपचाप सही समय का इंतज़ार कर रही है।</li>
 	<li><strong>अमृतपाल सिंह की पार्टी</strong> – नए समीकरण बना सकती है।</li>
</ul>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[तरनतारन विधानसभा सीट पर होने वाले <strong>उपचुनाव</strong> को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इस सीट को खाली हुए अभी ज़्यादा वक्त नहीं हुआ और अब हर बड़ी पार्टी यहां अपनी पकड़ मजबूत करने में जुट गई है।

<strong>सीट खाली कैसे हुई</strong><strong>?</strong>

2022 के विधानसभा चुनाव में <strong>आम आदमी पार्टी (AAP)</strong> के <strong>कश्मीर सिंह सोहल</strong> ने तरनतारन सीट जीती थी। लेकिन बीमारी के चलते <strong>27 </strong><strong>जून 2025</strong> को उनका निधन हो गया। इसके बाद से यह सीट खाली पड़ी है।
तरनतारन सीट को <strong>‘</strong><strong>पंथक सीट’</strong> माना जाता है, यानी यहां सिख राजनीति का असर ज़्यादा है। यही वजह है कि इस सीट पर हर पार्टी की नज़र टिकी हुई है।

<strong>AAP </strong><strong>ने बनाई नई रणनीति</strong>

AAP ने तरनतारन उपचुनाव को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।
<ul>
 	<li><strong>हरमीत सिंह संधू को बनाया हलका इंचार्ज</strong> – शिरोमणि अकाली दल (SAD) छोड़कर <strong>10 </strong><strong>दिन पहले AAP </strong><strong>में शामिल हुए पूर्व विधायक हरमीत सिंह संधू</strong> को पार्टी ने तरनतारन का <strong>हलका इंचार्ज</strong> बना दिया है।</li>
 	<li><strong>क्या संधू को मिलेगा टिकट?</strong> – माना जा रहा है कि AAP उन्हें उपचुनाव में उम्मीदवार भी बना सकती है। हालांकि पार्टी में शामिल होते वक्त संधू ने कहा था – <em>“</em><em>मैं उम्मीदवार बनने के लिए नहीं, </em><em>बल्कि कार्यकर्ता के तौर पर पार्टी में आया हूं।”</em>
इसके बावजूद उनके टिकट को लेकर चर्चाएं ज़ोरों पर हैं।</li>
 	<li>संधू की <strong>जॉइनिंग चंडीगढ़ के पंजाब भवन में CM </strong><strong>भगवंत मान और पार्टी प्रभारी मनीष सिसोदिया ने करवाई थी।'</strong></li>
</ul>
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<strong>SAD </strong><strong>ने पहले ही कर दी चाल</strong>

शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने इस सीट पर सबसे पहले कदम बढ़ाते हुए <strong>सुखविंदर कौर</strong> को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। SAD की रणनीति साफ है – वह इस सीट पर जल्दी तैयारी शुरू करके बढ़त बनाना चाहती है।

<strong>BJP </strong><strong>भी पीछे नहीं</strong>

भाजपा ने भी इस सीट को लेकर अपने पत्ते खोल दिए हैं। पार्टी ने यहां के लिए <strong>प्रभारी और सह प्रभारी</strong> नियुक्त कर दिए हैं –
<strong>सुरजीत ज्याणी</strong> – प्रभारी
<strong>केडी भंडारी (पूर्व CPA)</strong> और <strong>रवि करण सिंह काहलों (पूर्व विधायक)</strong> – सह प्रभारी

<strong>कांग्रेस की रणनीति क्या है</strong><strong>?</strong>

कांग्रेस ने अभी तक अपने उम्मीदवार का ऐलान नहीं किया है। लेकिन पार्टी हालात पर नज़र रख रही है और जल्द ही अपनी रणनीति सामने ला सकती है।

<strong>एक और चुनौती </strong><strong>– </strong><strong>अमृतपाल सिंह की पार्टी भी मैदान में</strong>

इस उपचुनाव को और दिलचस्प बनाता है <strong>अमृतपाल सिंह</strong> का फैक्टर। असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद <strong>खालिस्तान समर्थक और सांसद अमृतपाल सिंह</strong> की पार्टी ने भी यहां से चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। इसका मतलब है कि मुकाबला और भी ज़्यादा टफ और मल्टी-कोर्नर होने वाला है।

<strong>राजनीतिक तस्वीर कैसी है</strong><strong>?</strong>

तरनतारन उपचुनाव अब <strong>चार बड़े दलों और एक नए फैक्टर (अमृतपाल सिंह की पार्टी)</strong> के बीच दिलचस्प जंग बन चुका है।
<ul>
 	<li><strong>AAP</strong> – हरमीत सिंह संधू पर दांव खेल सकती है।</li>
 	<li><strong>SAD</strong> – सुखविंदर कौर के नाम का एलान कर बढ़त लेने की कोशिश में है।</li>
 	<li><strong>BJP</strong> – संगठनात्मक ढांचा तैयार कर रही है।</li>
 	<li><strong>कांग्रेस</strong> – चुपचाप सही समय का इंतज़ार कर रही है।</li>
 	<li><strong>अमृतपाल सिंह की पार्टी</strong> – नए समीकरण बना सकती है।</li>
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		<item>
		<title>Punjab: Drug के मुद्दे पर Majithia की गिरफ्तारी को लेकर Mann ने Captain को घेरा</title>
		<link>https://trendstopic.in/punjab-mann-slams-captain-over-majithias-arrest-on-drug-issue/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 27 Jul 2025 05:25:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[AAP]]></category>
		<category><![CDATA[BhagwantMann]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच शब्दों की जंग तेज हो गई है। शिरोमणि अकाली दल (SAD) के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की गिरफ्तारी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बदल गया है।

दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर आरोप लगाया था कि मजीठिया के खिलाफ कार्रवाई ‘targeted harassment’ (टारगेट करके परेशान करने) की मिसाल है। उन्होंने कहा था कि “AAP सरकार को लगता है कि सस्ती सनसनी, राजनीतिक बदले की भावना और दमन ही शासन करने के तरीके हैं।”

कैप्टन यहीं नहीं रुके। उन्होंने फेसबुक पर लिखा, “पंजाब में लोकतंत्र पर ऐसा हमला पहले कभी नहीं देखा गया। आलोचकों को घरों में नजरबंद किया जा रहा है, झूठे केस लगाए जा रहे हैं और आवाज़ दबाई जा रही है। मजीठिया के खिलाफ की गई कार्रवाई राजनीतिक प्रताड़ना का एक चौंकाने वाला उदाहरण है। बड़े पैमाने पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों को कुचला जा रहा है, असहमति को दबाया जा रहा है और पंजाब को दिल्ली से माफिया स्टाइल में कंट्रोल किया जा रहा है।”

<strong>मान का करारा पलटवार</strong>

कैप्टन के इन आरोपों पर सीएम भगवंत मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पहले ट्विटर) पर जवाब देते हुए कहा –
“कैप्टन साहिब, आज आपको नशा तस्करों के human rights की चिंता हो रही है। आपने 2017 के चुनाव में चार हफ्तों में नशा खत्म करने का वादा किया था, लेकिन नतीजा क्या निकला? आज पंजाब को समझ आ गया कि आप सब ‘double-faced’ (दोगले) हो, लेकिन ये कड़वी सच्चाई देर से सामने आई।”

मान ने बीजेपी नेता कैप्टन अमरिंदर पर तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी भी आपके इस बयान को ‘personal’ (निजी राय) बताकर पल्ला झाड़ लेगी। उन्होंने कांग्रेस और बीजेपी को चुनौती दी कि वे साफ करें कि उनका नशे के मुद्दे पर असली स्टैंड क्या है।

<strong>अन्य नेताओं पर भी निशाना</strong>

सीएम मान ने सिर्फ कैप्टन पर ही नहीं, बल्कि कई अन्य नेताओं पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, “पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी, रवनीत बिट्टू, प्रताप सिंह बाजवा और सुखपाल सिंह खैहरा जैसे नेता भी एक नशा तस्कर के खिलाफ कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं। इससे साफ है कि ये सभी नेता नशा तस्करों के साथ मिले हुए हैं।”

<strong>मजीठिया की गिरफ्तारी और केस की स्थिति</strong>

25 जून को पंजाब विजिलेंस ब्यूरो (Punjab Vigilance Bureau) ने बिक्रम सिंह मजीठिया को disproportionate assets (जायदाद से जुड़े अनियमित मामलों) में गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने उन्हें 2 अगस्त तक judicial custody (न्यायिक हिरासत) में भेज दिया है।

<strong>क्या है पूरा मामला</strong><strong>?</strong>
<ul>
 	<li><strong>कैप्टन अमरिंदर सिंह का आरोप:</strong> AAP सरकार बदले की राजनीति कर रही है, विरोध को दबाया जा रहा है और लोकतंत्र पर हमला हो रहा है।</li>
 	<li><strong>भगवंत मान का जवाब:</strong> कैप्टन को अचानक नशा तस्करों के human rights की चिंता क्यों हो गई? जो वादा 2017 में किया था वो क्यों नहीं निभाया?</li>
 	<li><strong>कांग्रेस-बीजेपी पर सवाल:</strong> मान ने दोनों पार्टियों को चुनौती दी कि नशे के मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करें।</li>
 	<li><strong>अन्य नेताओं को घेरा:</strong> मान ने चन्नी, बाजवा, बिट्टू और खैहरा पर नशा तस्करों के साथ ‘हाथ मिलाने’ का आरोप लगाया।</li>
</ul>
इस पूरे विवाद ने पंजाब की सियासत में नया तूफान खड़ा कर दिया है। अब सबकी निगाहें 2 अगस्त पर हैं, जब मजीठिया की न्यायिक हिरासत खत्म होगी और कोर्ट में अगली सुनवाई होगी।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच शब्दों की जंग तेज हो गई है। शिरोमणि अकाली दल (SAD) के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की गिरफ्तारी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बदल गया है।

दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर आरोप लगाया था कि मजीठिया के खिलाफ कार्रवाई ‘targeted harassment’ (टारगेट करके परेशान करने) की मिसाल है। उन्होंने कहा था कि “AAP सरकार को लगता है कि सस्ती सनसनी, राजनीतिक बदले की भावना और दमन ही शासन करने के तरीके हैं।”

कैप्टन यहीं नहीं रुके। उन्होंने फेसबुक पर लिखा, “पंजाब में लोकतंत्र पर ऐसा हमला पहले कभी नहीं देखा गया। आलोचकों को घरों में नजरबंद किया जा रहा है, झूठे केस लगाए जा रहे हैं और आवाज़ दबाई जा रही है। मजीठिया के खिलाफ की गई कार्रवाई राजनीतिक प्रताड़ना का एक चौंकाने वाला उदाहरण है। बड़े पैमाने पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों को कुचला जा रहा है, असहमति को दबाया जा रहा है और पंजाब को दिल्ली से माफिया स्टाइल में कंट्रोल किया जा रहा है।”

<strong>मान का करारा पलटवार</strong>

कैप्टन के इन आरोपों पर सीएम भगवंत मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पहले ट्विटर) पर जवाब देते हुए कहा –
“कैप्टन साहिब, आज आपको नशा तस्करों के human rights की चिंता हो रही है। आपने 2017 के चुनाव में चार हफ्तों में नशा खत्म करने का वादा किया था, लेकिन नतीजा क्या निकला? आज पंजाब को समझ आ गया कि आप सब ‘double-faced’ (दोगले) हो, लेकिन ये कड़वी सच्चाई देर से सामने आई।”

मान ने बीजेपी नेता कैप्टन अमरिंदर पर तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी भी आपके इस बयान को ‘personal’ (निजी राय) बताकर पल्ला झाड़ लेगी। उन्होंने कांग्रेस और बीजेपी को चुनौती दी कि वे साफ करें कि उनका नशे के मुद्दे पर असली स्टैंड क्या है।

<strong>अन्य नेताओं पर भी निशाना</strong>

सीएम मान ने सिर्फ कैप्टन पर ही नहीं, बल्कि कई अन्य नेताओं पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, “पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी, रवनीत बिट्टू, प्रताप सिंह बाजवा और सुखपाल सिंह खैहरा जैसे नेता भी एक नशा तस्कर के खिलाफ कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं। इससे साफ है कि ये सभी नेता नशा तस्करों के साथ मिले हुए हैं।”

<strong>मजीठिया की गिरफ्तारी और केस की स्थिति</strong>

25 जून को पंजाब विजिलेंस ब्यूरो (Punjab Vigilance Bureau) ने बिक्रम सिंह मजीठिया को disproportionate assets (जायदाद से जुड़े अनियमित मामलों) में गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने उन्हें 2 अगस्त तक judicial custody (न्यायिक हिरासत) में भेज दिया है।

<strong>क्या है पूरा मामला</strong><strong>?</strong>
<ul>
 	<li><strong>कैप्टन अमरिंदर सिंह का आरोप:</strong> AAP सरकार बदले की राजनीति कर रही है, विरोध को दबाया जा रहा है और लोकतंत्र पर हमला हो रहा है।</li>
 	<li><strong>भगवंत मान का जवाब:</strong> कैप्टन को अचानक नशा तस्करों के human rights की चिंता क्यों हो गई? जो वादा 2017 में किया था वो क्यों नहीं निभाया?</li>
 	<li><strong>कांग्रेस-बीजेपी पर सवाल:</strong> मान ने दोनों पार्टियों को चुनौती दी कि नशे के मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करें।</li>
 	<li><strong>अन्य नेताओं को घेरा:</strong> मान ने चन्नी, बाजवा, बिट्टू और खैहरा पर नशा तस्करों के साथ ‘हाथ मिलाने’ का आरोप लगाया।</li>
</ul>
इस पूरे विवाद ने पंजाब की सियासत में नया तूफान खड़ा कर दिया है। अब सबकी निगाहें 2 अगस्त पर हैं, जब मजीठिया की न्यायिक हिरासत खत्म होगी और कोर्ट में अगली सुनवाई होगी।]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>&#8220;Punjab की सत्ता में वापसी के लिए SAD और BJP बना रहे &#8216;Unholy Alliance&#8217;, जनता अब इनके झांसे में नहीं आएगी&#8221; – Finance Minister Harpal Singh Cheema का बड़ा हमला</title>
		<link>https://trendstopic.in/to-return-to-power-in-punjab-sad-and-bjp-are-forming-an-unholy-alliance-people-wont-be-misled-again-finance-minister-harpal-singh-cheemas-sharp-attack/</link>
					<comments>https://trendstopic.in/to-return-to-power-in-punjab-sad-and-bjp-are-forming-an-unholy-alliance-people-wont-be-misled-again-finance-minister-harpal-singh-cheemas-sharp-attack/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 23 Jul 2025 05:30:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[AAPGovernment]]></category>
		<category><![CDATA[BhagwantMann]]></category>
		<category><![CDATA[BJP]]></category>
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		<category><![CDATA[PunjabPolitics]]></category>
		<category><![CDATA[SAD]]></category>
		<category><![CDATA[ShiromaniAkaliDal]]></category>
		<category><![CDATA[SunilJakhar]]></category>
		<category><![CDATA[UnholyAlliance]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब के वित्त मंत्री <strong>हरपाल सिंह चीमा</strong> ने मंगलवार को शिरोमणि अकाली दल (SAD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने दोनों दलों पर <strong>“</strong><strong>गैर-पवित्र गठबंधन” (</strong><strong>Unholy Alliance)</strong> बनाने की कोशिश का आरोप लगाते हुए कहा कि SAD और BJP किसी भी कीमत पर दोबारा पंजाब की सत्ता में लौटना चाहते हैं।

चीमा का यह बयान पंजाब भाजपा अध्यक्ष <strong>सुनील जाखड़</strong> की उस टिप्पणी के दो दिन बाद आया है जिसमें उन्होंने कथित तौर पर SAD के साथ फिर से गठबंधन को "वक़्त की ज़रूरत" बताया था।

<strong>"SAD </strong><strong>और </strong><strong>BJP </strong><strong>सत्ता की भूखी पार्टियां हैं" – चीमा</strong>

वित्त मंत्री ने कहा:

“काफी समय से BJP और अकाली दल के नेता बेचैन हैं। वे किसी भी तरह से पंजाब में सत्ता में वापसी करना चाहते हैं। उनके नेता रोज़ ऐसे बयान दे रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि वे गठबंधन को फिर से जीवित करना चाहते हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि एक तरफ SAD अध्यक्ष गठबंधन से इनकार करते हैं, वहीं दूसरी तरफ BJP के राष्ट्रीय नेता कहते हैं कि वे अकेले चुनाव लड़ेंगे।

<strong>"</strong><strong>पंजाब के काले अतीत को याद कीजिए"</strong>

चीमा ने SAD-BJP की पूर्व सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा,

“पंजाब का जो काला अतीत है, वह इन्हीं पार्टियों की देन है। नशे की समस्या, गैंगस्टर कल्चर और युवाओं का बर्बाद भविष्य – ये सब SAD और BJP की मिलीभगत का नतीजा हैं।”

उन्होंने आरोप लगाया कि जब पंजाब में SAD-BJP गठबंधन की सरकार थी, तब <strong>जानबूझकर नशा पंजाब में फैलाया गया</strong> ताकि एक पूरी पीढ़ी बर्बाद हो जाए।

<strong>"</strong><strong>तीन काले कृषि कानूनों का जन्मदाता </strong><strong>BJP </strong><strong>है"</strong>

वित्त मंत्री ने कहा कि <strong>तीन कृषि कानून</strong>, जिनका देशभर में विरोध हुआ और जिन्हें बाद में वापस लेना पड़ा, BJP द्वारा लाए गए थे। उन्होंने कहा:

“पंजाब एक ऐसा राज्य है जो पूरे देश को अन्न देता है। लेकिन बीजेपी और अकाली दल ने मिलकर पंजाब के किसानों और युवाओं का भविष्य बर्बाद कर दिया।”

उन्होंने किसानों के आंदोलन को याद करते हुए कहा कि <strong>जनता के दबाव में </strong><strong>SAD </strong><strong>को </strong><strong>2020 </strong><strong>में </strong><strong>BJP </strong><strong>से गठबंधन तोड़ना पड़ा</strong>, लेकिन अब फिर से साथ आने की बातें हो रही हैं।

<strong>"2015 </strong><strong>की बेअदबी की घटनाएं भी </strong><strong>SAD-BJP </strong><strong>शासन में हुईं"</strong>

चीमा ने कहा कि 2015 में पंजाब में जो <strong>गुरुग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाएं</strong> हुईं, वे भी इसी गठबंधन के शासनकाल में हुई थीं।

<strong>"</strong><strong>अब जनता इनका असली चेहरा पहचान चुकी है"</strong>

चीमा ने अपने बयान में कहा:

“आज SAD और BJP जिस बेशर्मी से नए गठबंधन की बात कर रहे हैं, वो पंजाब की जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी। हर बार जब ये सत्ता में आए, पंजाब को नुकसान ही पहुंचा। अब पंजाब के पास ईमानदार आम आदमी पार्टी की सरकार है और जनता इन्हीं पर भरोसा करती है।”

<strong>पृष्ठभूमि:</strong>
<ul>
 	<li><strong>2020:</strong> किसान आंदोलन के चलते SAD ने BJP से गठबंधन तोड़ा।</li>
 	<li><strong>2015:</strong> गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी और गोलीकांड की घटनाएं SAD-BJP शासन में हुईं।</li>
 	<li><strong>अब:</strong> BJP और SAD के बीच गठबंधन की संभावनाओं पर चर्चा फिर से शुरू।</li>
</ul>
हरपाल चीमा का बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि आम आदमी पार्टी SAD-BJP की किसी भी संभावित साझेदारी को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है। वहीं, पंजाब की राजनीति में फिर से पुराने गठबंधन की वापसी की अटकलें तेज़ हो गई हैं। अब देखना यह है कि क्या SAD और BJP फिर से साथ आते हैं या नहीं – लेकिन AAP सरकार ने साफ कर दिया है कि वह इसे <strong>"</strong><strong>पंजाब के हित के खिलाफ़"</strong> मानती है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब के वित्त मंत्री <strong>हरपाल सिंह चीमा</strong> ने मंगलवार को शिरोमणि अकाली दल (SAD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने दोनों दलों पर <strong>“</strong><strong>गैर-पवित्र गठबंधन” (</strong><strong>Unholy Alliance)</strong> बनाने की कोशिश का आरोप लगाते हुए कहा कि SAD और BJP किसी भी कीमत पर दोबारा पंजाब की सत्ता में लौटना चाहते हैं।

चीमा का यह बयान पंजाब भाजपा अध्यक्ष <strong>सुनील जाखड़</strong> की उस टिप्पणी के दो दिन बाद आया है जिसमें उन्होंने कथित तौर पर SAD के साथ फिर से गठबंधन को "वक़्त की ज़रूरत" बताया था।

<strong>"SAD </strong><strong>और </strong><strong>BJP </strong><strong>सत्ता की भूखी पार्टियां हैं" – चीमा</strong>

वित्त मंत्री ने कहा:

“काफी समय से BJP और अकाली दल के नेता बेचैन हैं। वे किसी भी तरह से पंजाब में सत्ता में वापसी करना चाहते हैं। उनके नेता रोज़ ऐसे बयान दे रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि वे गठबंधन को फिर से जीवित करना चाहते हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि एक तरफ SAD अध्यक्ष गठबंधन से इनकार करते हैं, वहीं दूसरी तरफ BJP के राष्ट्रीय नेता कहते हैं कि वे अकेले चुनाव लड़ेंगे।

<strong>"</strong><strong>पंजाब के काले अतीत को याद कीजिए"</strong>

चीमा ने SAD-BJP की पूर्व सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा,

“पंजाब का जो काला अतीत है, वह इन्हीं पार्टियों की देन है। नशे की समस्या, गैंगस्टर कल्चर और युवाओं का बर्बाद भविष्य – ये सब SAD और BJP की मिलीभगत का नतीजा हैं।”

उन्होंने आरोप लगाया कि जब पंजाब में SAD-BJP गठबंधन की सरकार थी, तब <strong>जानबूझकर नशा पंजाब में फैलाया गया</strong> ताकि एक पूरी पीढ़ी बर्बाद हो जाए।

<strong>"</strong><strong>तीन काले कृषि कानूनों का जन्मदाता </strong><strong>BJP </strong><strong>है"</strong>

वित्त मंत्री ने कहा कि <strong>तीन कृषि कानून</strong>, जिनका देशभर में विरोध हुआ और जिन्हें बाद में वापस लेना पड़ा, BJP द्वारा लाए गए थे। उन्होंने कहा:

“पंजाब एक ऐसा राज्य है जो पूरे देश को अन्न देता है। लेकिन बीजेपी और अकाली दल ने मिलकर पंजाब के किसानों और युवाओं का भविष्य बर्बाद कर दिया।”

उन्होंने किसानों के आंदोलन को याद करते हुए कहा कि <strong>जनता के दबाव में </strong><strong>SAD </strong><strong>को </strong><strong>2020 </strong><strong>में </strong><strong>BJP </strong><strong>से गठबंधन तोड़ना पड़ा</strong>, लेकिन अब फिर से साथ आने की बातें हो रही हैं।

<strong>"2015 </strong><strong>की बेअदबी की घटनाएं भी </strong><strong>SAD-BJP </strong><strong>शासन में हुईं"</strong>

चीमा ने कहा कि 2015 में पंजाब में जो <strong>गुरुग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाएं</strong> हुईं, वे भी इसी गठबंधन के शासनकाल में हुई थीं।

<strong>"</strong><strong>अब जनता इनका असली चेहरा पहचान चुकी है"</strong>

चीमा ने अपने बयान में कहा:

“आज SAD और BJP जिस बेशर्मी से नए गठबंधन की बात कर रहे हैं, वो पंजाब की जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी। हर बार जब ये सत्ता में आए, पंजाब को नुकसान ही पहुंचा। अब पंजाब के पास ईमानदार आम आदमी पार्टी की सरकार है और जनता इन्हीं पर भरोसा करती है।”

<strong>पृष्ठभूमि:</strong>
<ul>
 	<li><strong>2020:</strong> किसान आंदोलन के चलते SAD ने BJP से गठबंधन तोड़ा।</li>
 	<li><strong>2015:</strong> गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी और गोलीकांड की घटनाएं SAD-BJP शासन में हुईं।</li>
 	<li><strong>अब:</strong> BJP और SAD के बीच गठबंधन की संभावनाओं पर चर्चा फिर से शुरू।</li>
</ul>
हरपाल चीमा का बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि आम आदमी पार्टी SAD-BJP की किसी भी संभावित साझेदारी को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है। वहीं, पंजाब की राजनीति में फिर से पुराने गठबंधन की वापसी की अटकलें तेज़ हो गई हैं। अब देखना यह है कि क्या SAD और BJP फिर से साथ आते हैं या नहीं – लेकिन AAP सरकार ने साफ कर दिया है कि वह इसे <strong>"</strong><strong>पंजाब के हित के खिलाफ़"</strong> मानती है।]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://trendstopic.in/to-return-to-power-in-punjab-sad-and-bjp-are-forming-an-unholy-alliance-people-wont-be-misled-again-finance-minister-harpal-singh-cheemas-sharp-attack/feed/</wfw:commentRss>
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