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	<title>PunjabUniversity &#8211; Trends Topic</title>
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	<title>PunjabUniversity &#8211; Trends Topic</title>
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		<title>Punjab University में छुट्टी, Exams Postponed: Senate Election की Date का इंतज़ार, ITBP तैनात — आज Students की बड़ी Meeting</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 26 Nov 2025 04:51:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चंडीगढ़]]></category>
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		<category><![CDATA[VCDecision]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में पिछले कई दिनों से माहौल गर्म है। <strong>सीनेट चुनाव की तारीख का ऐलान न होने</strong> की वजह से छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी मुद्दे पर मंगलवार देर शाम से हालात और तनावपूर्ण हो गए, जिसके बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने आज <strong>PU </strong><strong>में छुट्टी</strong> घोषित कर दी और आज होने वाली <strong>सारी परीक्षाएं भी टाल दीं</strong>।

<strong>क्यों हुआ इतना विरोध</strong><strong>?</strong>

पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में सीनेट चुनाव होने हैं लेकिन अभी तक इसकी <strong>डेट फाइनल नहीं हुई</strong>।
कुछ समय पहले केंद्र सरकार ने PU की <strong>सीनेट और सिंडिकेट को भंग करने का फैसला</strong> लिया था।
इस फैसले के खिलाफ छात्र पिछले <strong>24 </strong><strong>दिनों से लगातार प्रदर्शन</strong> कर रहे हैं।
बाद में सरकार ने यह फैसला वापस ले लिया, लेकिन अब छात्र चाहते हैं कि
<strong>"</strong><strong>चुनाव की नई तारीख तुरंत घोषित की जाए"</strong>।

यही वजह है कि छात्र संगठनों ने आज <strong>‘Punjab University Bachao Morcha’</strong> की कॉल पर PU बंद रखने का ऐलान किया था।

<strong>यूनिवर्सिटी ने खुद ही छुट्टी का ऐलान कर दिया</strong>

छात्रों द्वारा दी गई बंद की कॉल से पहले ही यूनिवर्सिटी प्रशासन ने
<strong>आज की छुट्टी घोषित कर दी</strong>, जिससे क्लासेज़ और परीक्षाएं पूरी तरह रुक गईं।

आज कुछ विभागों की परीक्षाएं होनी थीं, जिन्हें पहले <strong>DAV </strong><strong>कॉलेज</strong> में शिफ्ट कर दिया गया था।
यही बात छात्रों को और ज्यादा नाखुश कर गई।

<strong>गुस्सा बढ़ा </strong><strong>— </strong><strong>छात्रों ने बंद कर दिया गेट नंबर </strong><strong>2</strong>

रात को छात्रों ने विरोध जताते हुए <strong>PU </strong><strong>का गेट नंबर </strong><strong>2 </strong><strong>बंद</strong> कर दिया।
इसके बाद देर रात यूनिवर्सिटी प्रशासन ने आज होने वाली <strong>DAV </strong><strong>में शिफ्ट की गई परीक्षाएं भी रद्द कर दीं</strong>।

जब परीक्षाएं रद्द की गईं, तो छात्र शांत हुए और फिर VC ऑफिस के बाहर चल रहे
धरने में शामिल हो गए।

<strong>कैंपस में </strong><strong>ITBP </strong><strong>की तैनाती</strong>

मंगलवार रात हुए विरोध के बाद यूनिवर्सिटी में <strong>ITBP </strong><strong>जवान तैनात</strong> कर दिए गए हैं,
ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे और कोई तनाव न बढ़े।

कैंपस में सुरक्षा बढ़ाने से यह साफ है कि प्रशासन मामले को लेकर सतर्क है।

<strong>आज छात्रों की बड़ी मीटिंग </strong><strong>— </strong><strong>तय होगा </strong><strong>BJP </strong><strong>ऑफिस घेराव का दिन</strong>

आज PU में छात्रों का एक बड़ा <strong>धरना प्रदर्शन</strong> होने वाला है।
इसी धरने के बाद एक मीटिंग होगी जिसमें छात्र संगठन
<strong>BJP </strong><strong>ऑफिस घेराव की तारीख तय करेंगे</strong>।

कुछ दिन पहले भी छात्र संगठनों और प्रशासन के बीच मीटिंग हुई थी,
जिसमें आगे की रणनीति पर बात की गई थी।

<strong>VC </strong><strong>ने भेजा प्रस्ताव</strong><strong>, </strong><strong>मंज़ूरी का इंतज़ार</strong>

PU की वाइस चांसलर <strong>रेनू विज</strong> ने सीनेट चुनाव की तारीख तय करने के लिए
<strong>प्रपोज़ल चांसलर और उपराष्ट्रपति को भेज दिया है</strong>, लेकिन
अभी तक इस पर कोई <strong>फाइनल निर्णय नहीं आया</strong>।

जब तक मंजूरी नहीं मिलती, यूनिवर्सिटी में विरोध जारी रहने के आसार हैं।

<strong>निष्कर्ष (</strong><strong>Conclusion)</strong>
<ul>
 	<li>PU में आज छुट्टी और परीक्षाएं टाल दी गईं।</li>
 	<li>छात्र सीनेट चुनाव की डेट घोषित करने की मांग कर रहे हैं।</li>
 	<li>रात को गेट बंद करने के बाद परीक्षाएं रद्द कर दी गईं।</li>
 	<li>ITBP की तैनाती से कैंपस में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।</li>
 	<li>आज की छात्र मीटिंग में BJP ऑफिस घेराव की तारीख तय हो सकती है।</li>
 	<li>VC ने चुनाव डेट के लिए प्रस्ताव भेज दिया है, फैसले का इंतज़ार जारी है।</li>
</ul>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में पिछले कई दिनों से माहौल गर्म है। <strong>सीनेट चुनाव की तारीख का ऐलान न होने</strong> की वजह से छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी मुद्दे पर मंगलवार देर शाम से हालात और तनावपूर्ण हो गए, जिसके बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने आज <strong>PU </strong><strong>में छुट्टी</strong> घोषित कर दी और आज होने वाली <strong>सारी परीक्षाएं भी टाल दीं</strong>।

<strong>क्यों हुआ इतना विरोध</strong><strong>?</strong>

पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में सीनेट चुनाव होने हैं लेकिन अभी तक इसकी <strong>डेट फाइनल नहीं हुई</strong>।
कुछ समय पहले केंद्र सरकार ने PU की <strong>सीनेट और सिंडिकेट को भंग करने का फैसला</strong> लिया था।
इस फैसले के खिलाफ छात्र पिछले <strong>24 </strong><strong>दिनों से लगातार प्रदर्शन</strong> कर रहे हैं।
बाद में सरकार ने यह फैसला वापस ले लिया, लेकिन अब छात्र चाहते हैं कि
<strong>"</strong><strong>चुनाव की नई तारीख तुरंत घोषित की जाए"</strong>।

यही वजह है कि छात्र संगठनों ने आज <strong>‘Punjab University Bachao Morcha’</strong> की कॉल पर PU बंद रखने का ऐलान किया था।

<strong>यूनिवर्सिटी ने खुद ही छुट्टी का ऐलान कर दिया</strong>

छात्रों द्वारा दी गई बंद की कॉल से पहले ही यूनिवर्सिटी प्रशासन ने
<strong>आज की छुट्टी घोषित कर दी</strong>, जिससे क्लासेज़ और परीक्षाएं पूरी तरह रुक गईं।

आज कुछ विभागों की परीक्षाएं होनी थीं, जिन्हें पहले <strong>DAV </strong><strong>कॉलेज</strong> में शिफ्ट कर दिया गया था।
यही बात छात्रों को और ज्यादा नाखुश कर गई।

<strong>गुस्सा बढ़ा </strong><strong>— </strong><strong>छात्रों ने बंद कर दिया गेट नंबर </strong><strong>2</strong>

रात को छात्रों ने विरोध जताते हुए <strong>PU </strong><strong>का गेट नंबर </strong><strong>2 </strong><strong>बंद</strong> कर दिया।
इसके बाद देर रात यूनिवर्सिटी प्रशासन ने आज होने वाली <strong>DAV </strong><strong>में शिफ्ट की गई परीक्षाएं भी रद्द कर दीं</strong>।

जब परीक्षाएं रद्द की गईं, तो छात्र शांत हुए और फिर VC ऑफिस के बाहर चल रहे
धरने में शामिल हो गए।

<strong>कैंपस में </strong><strong>ITBP </strong><strong>की तैनाती</strong>

मंगलवार रात हुए विरोध के बाद यूनिवर्सिटी में <strong>ITBP </strong><strong>जवान तैनात</strong> कर दिए गए हैं,
ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे और कोई तनाव न बढ़े।

कैंपस में सुरक्षा बढ़ाने से यह साफ है कि प्रशासन मामले को लेकर सतर्क है।

<strong>आज छात्रों की बड़ी मीटिंग </strong><strong>— </strong><strong>तय होगा </strong><strong>BJP </strong><strong>ऑफिस घेराव का दिन</strong>

आज PU में छात्रों का एक बड़ा <strong>धरना प्रदर्शन</strong> होने वाला है।
इसी धरने के बाद एक मीटिंग होगी जिसमें छात्र संगठन
<strong>BJP </strong><strong>ऑफिस घेराव की तारीख तय करेंगे</strong>।

कुछ दिन पहले भी छात्र संगठनों और प्रशासन के बीच मीटिंग हुई थी,
जिसमें आगे की रणनीति पर बात की गई थी।

<strong>VC </strong><strong>ने भेजा प्रस्ताव</strong><strong>, </strong><strong>मंज़ूरी का इंतज़ार</strong>

PU की वाइस चांसलर <strong>रेनू विज</strong> ने सीनेट चुनाव की तारीख तय करने के लिए
<strong>प्रपोज़ल चांसलर और उपराष्ट्रपति को भेज दिया है</strong>, लेकिन
अभी तक इस पर कोई <strong>फाइनल निर्णय नहीं आया</strong>।

जब तक मंजूरी नहीं मिलती, यूनिवर्सिटी में विरोध जारी रहने के आसार हैं।

<strong>निष्कर्ष (</strong><strong>Conclusion)</strong>
<ul>
 	<li>PU में आज छुट्टी और परीक्षाएं टाल दी गईं।</li>
 	<li>छात्र सीनेट चुनाव की डेट घोषित करने की मांग कर रहे हैं।</li>
 	<li>रात को गेट बंद करने के बाद परीक्षाएं रद्द कर दी गईं।</li>
 	<li>ITBP की तैनाती से कैंपस में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।</li>
 	<li>आज की छात्र मीटिंग में BJP ऑफिस घेराव की तारीख तय हो सकती है।</li>
 	<li>VC ने चुनाव डेट के लिए प्रस्ताव भेज दिया है, फैसले का इंतज़ार जारी है।</li>
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		<title>Finance मंत्री Harpal Singh Cheema ने PU students पर अत्याचार की कि कड़ी निंदा, BJP को Punjab की शांति भंग न करने की दी चेतावनी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 11 Nov 2025 09:59:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब के वित्त मंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता हरपाल सिंह चीमा ने पंजाब विश्वविद्यालय (PU) के छात्रों पर कथित अत्याचार की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार और राज्य की भाजपा पार्टी पंजाब और पंजाबियों के खिलाफ नफरत फैला रही हैं और राज्य की शांति को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं।

हरपाल सिंह चीमा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भाजपा बार-बार पंजाबियों के हितों और भावनाओं पर हमला कर रही है। उन्होंने तीन काले कृषि कानूनों का उदाहरण देते हुए कहा कि आखिरकार पंजाबियों के शांतिपूर्ण विरोध के कारण मोदी सरकार को उन्हें वापस लेना पड़ा। इसके बाद भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के मुद्दे पर भी पंजाब की इज्जत को ठेस पहुंचाई गई, और अब पंजाब विश्वविद्यालय के छात्रों को निशाना बनाया जा रहा है।

<strong>पुलिस कार्रवाई और छात्रों के साथ बर्ताव:</strong>
वित्त मंत्री ने बताया कि पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज किया, छात्रों की पगड़ी (दस्तार) और छात्राओं की चादरें फाड़ दी गईं। उन्होंने इसे शर्मनाक और अमानवीय करार दिया।

<strong>विश्वविद्यालय के लोकतंत्र पर हमला:</strong>
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि भाजपा विश्वविद्यालय के लोकतांत्रिक ढांचे को भी कमजोर कर रही है। उन्होंने बताया कि पहले सीनेट को खत्म करने की अधिसूचना जारी की गई थी, लेकिन विरोध के बाद इसे वापस लेना पड़ा। अब भाजपा छात्रों के वोट को प्रभावित करने के लिए अपने “वोट चोरी फार्मूला” को लागू करने की कोशिश कर रही है।

<strong>AAP </strong><strong>का समर्थन:</strong>
AAP के वरिष्ठ नेता हरपाल सिंह चीमा ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी पंजाब विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ खड़ी है। पार्टी के सांसद पहले ही छात्रों से मिल चुके हैं और उनका समर्थन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि AAP किसी भी कीमत पर भाजपा को पंजाब विश्वविद्यालय या राज्य की मुश्किल से बनी शांति को नुकसान पहुँचाने की अनुमति नहीं देगी।

<strong>ऐतिहासिक उदाहरण और चेतावनी:</strong>
हरपाल सिंह चीमा ने पंजाबियों के बहादुरी और बलिदान का उदाहरण देते हुए कहा कि पंजाबियों ने हमेशा देश और दूसरों की मदद के लिए आगे बढ़कर बलिदान दिया है। उन्होंने 1962, 1965, 1971 के युद्ध और हाल की घटनाओं का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि क्या भाजपा पंजाबियों के योगदान का बदला नफरत से चुकाना चाहती है।

अंत में हरपाल सिंह चीमा ने पंजाब भाजपा नेताओं को चुनौती दी कि क्या वे पंजाब विश्वविद्यालय के छात्रों का समर्थन करेंगे या अपने पदों की खातिर चुप रहेंगे।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब के वित्त मंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता हरपाल सिंह चीमा ने पंजाब विश्वविद्यालय (PU) के छात्रों पर कथित अत्याचार की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार और राज्य की भाजपा पार्टी पंजाब और पंजाबियों के खिलाफ नफरत फैला रही हैं और राज्य की शांति को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं।

हरपाल सिंह चीमा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भाजपा बार-बार पंजाबियों के हितों और भावनाओं पर हमला कर रही है। उन्होंने तीन काले कृषि कानूनों का उदाहरण देते हुए कहा कि आखिरकार पंजाबियों के शांतिपूर्ण विरोध के कारण मोदी सरकार को उन्हें वापस लेना पड़ा। इसके बाद भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के मुद्दे पर भी पंजाब की इज्जत को ठेस पहुंचाई गई, और अब पंजाब विश्वविद्यालय के छात्रों को निशाना बनाया जा रहा है।

<strong>पुलिस कार्रवाई और छात्रों के साथ बर्ताव:</strong>
वित्त मंत्री ने बताया कि पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज किया, छात्रों की पगड़ी (दस्तार) और छात्राओं की चादरें फाड़ दी गईं। उन्होंने इसे शर्मनाक और अमानवीय करार दिया।

<strong>विश्वविद्यालय के लोकतंत्र पर हमला:</strong>
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि भाजपा विश्वविद्यालय के लोकतांत्रिक ढांचे को भी कमजोर कर रही है। उन्होंने बताया कि पहले सीनेट को खत्म करने की अधिसूचना जारी की गई थी, लेकिन विरोध के बाद इसे वापस लेना पड़ा। अब भाजपा छात्रों के वोट को प्रभावित करने के लिए अपने “वोट चोरी फार्मूला” को लागू करने की कोशिश कर रही है।

<strong>AAP </strong><strong>का समर्थन:</strong>
AAP के वरिष्ठ नेता हरपाल सिंह चीमा ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी पंजाब विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ खड़ी है। पार्टी के सांसद पहले ही छात्रों से मिल चुके हैं और उनका समर्थन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि AAP किसी भी कीमत पर भाजपा को पंजाब विश्वविद्यालय या राज्य की मुश्किल से बनी शांति को नुकसान पहुँचाने की अनुमति नहीं देगी।

<strong>ऐतिहासिक उदाहरण और चेतावनी:</strong>
हरपाल सिंह चीमा ने पंजाबियों के बहादुरी और बलिदान का उदाहरण देते हुए कहा कि पंजाबियों ने हमेशा देश और दूसरों की मदद के लिए आगे बढ़कर बलिदान दिया है। उन्होंने 1962, 1965, 1971 के युद्ध और हाल की घटनाओं का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि क्या भाजपा पंजाबियों के योगदान का बदला नफरत से चुकाना चाहती है।

अंत में हरपाल सिंह चीमा ने पंजाब भाजपा नेताओं को चुनौती दी कि क्या वे पंजाब विश्वविद्यालय के छात्रों का समर्थन करेंगे या अपने पदों की खातिर चुप रहेंगे।]]></content:encoded>
					
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		<item>
		<title>BJP university को जंग का अखाड़ा बना रही है, APP सांसद Malvinder Kang ने जताई चिंता</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 11 Nov 2025 08:06:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पंजाब यूनिवर्सिटी (PU) के छात्रों पर भाजपा की केंद्र सरकार द्वारा कथित हमले ने राजनीति और शिक्षा जगत में हलचल मचा दी है। आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद <strong>मलविंदर सिंह कंग</strong> ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे <strong>पंजाब के लोकतंत्र और छात्रों के भविष्य पर हमला</strong> बताया।

सांसद कंग का कहना है कि <strong>पंजाब यूनिवर्सिटी सिर्फ एक कॉलेज नहीं है</strong>, बल्कि यह पंजाब की <strong>बौद्धिक और सांस्कृतिक पहचान</strong> है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा लगातार इस संस्थान के लोकतांत्रिक ढांचे में दखल दे रही है, जो उनकी पंजाब विरोधी मानसिकता को उजागर करता है।

कंग ने कहा, “हमारे किसानों, पानी के अधिकारों और संघीय ढांचे पर हमले के बाद, अब भाजपा हमारे छात्रों और पंजाब के भविष्य को निशाना बना रही है। यह सीधे तौर पर पंजाब के गौरव और लोकतंत्र पर हमला है।”

<strong>भाजपा पर आरोप</strong>

सांसद मलविंदर कंग ने भाजपा पर कई गंभीर आरोप लगाए:
<ul>
 	<li>भाजपा ने <strong>चुनाव में देरी</strong> करके और <strong>सीनेट को भंग</strong> करके पंजाब यूनिवर्सिटी पर कब्जा करने की कोशिश की।</li>
 	<li><strong>शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे छात्रों</strong>, जिनमें लड़कियां भी शामिल थीं, पर लाठीचार्ज करना भाजपा की हताशा और पंजाब के जागरूक युवाओं के प्रति डर को दर्शाता है।</li>
</ul>
<strong>चेतावनी और समर्थन</strong>

कंग ने चेतावनी दी कि पंजाब इस तरह के जुल्म को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने याद दिलाया कि <strong>पंजाबियों ने हमेशा न्याय और आजादी की रक्षा की है</strong>।
सांसद ने छात्रों के साथ पूरी एकजुटता दिखाते हुए कहा, “आप लोकतंत्र और सम्मान की इस लड़ाई में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। हम भाजपा को शिक्षा के मंदिरों को दमन का केंद्र नहीं बनने देंगे।”

इस घटना ने यह सवाल भी उठाया है कि क्या शिक्षा संस्थान अब राजनीतिक दखल और विवादों के लिए सुरक्षित हैं। पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्रों और शिक्षकों का कहना है कि वे <strong>शांतिपूर्वक विरोध जारी रखेंगे</strong> और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करेंगे।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब यूनिवर्सिटी (PU) के छात्रों पर भाजपा की केंद्र सरकार द्वारा कथित हमले ने राजनीति और शिक्षा जगत में हलचल मचा दी है। आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद <strong>मलविंदर सिंह कंग</strong> ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे <strong>पंजाब के लोकतंत्र और छात्रों के भविष्य पर हमला</strong> बताया।

सांसद कंग का कहना है कि <strong>पंजाब यूनिवर्सिटी सिर्फ एक कॉलेज नहीं है</strong>, बल्कि यह पंजाब की <strong>बौद्धिक और सांस्कृतिक पहचान</strong> है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा लगातार इस संस्थान के लोकतांत्रिक ढांचे में दखल दे रही है, जो उनकी पंजाब विरोधी मानसिकता को उजागर करता है।

कंग ने कहा, “हमारे किसानों, पानी के अधिकारों और संघीय ढांचे पर हमले के बाद, अब भाजपा हमारे छात्रों और पंजाब के भविष्य को निशाना बना रही है। यह सीधे तौर पर पंजाब के गौरव और लोकतंत्र पर हमला है।”

<strong>भाजपा पर आरोप</strong>

सांसद मलविंदर कंग ने भाजपा पर कई गंभीर आरोप लगाए:
<ul>
 	<li>भाजपा ने <strong>चुनाव में देरी</strong> करके और <strong>सीनेट को भंग</strong> करके पंजाब यूनिवर्सिटी पर कब्जा करने की कोशिश की।</li>
 	<li><strong>शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे छात्रों</strong>, जिनमें लड़कियां भी शामिल थीं, पर लाठीचार्ज करना भाजपा की हताशा और पंजाब के जागरूक युवाओं के प्रति डर को दर्शाता है।</li>
</ul>
<strong>चेतावनी और समर्थन</strong>

कंग ने चेतावनी दी कि पंजाब इस तरह के जुल्म को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने याद दिलाया कि <strong>पंजाबियों ने हमेशा न्याय और आजादी की रक्षा की है</strong>।
सांसद ने छात्रों के साथ पूरी एकजुटता दिखाते हुए कहा, “आप लोकतंत्र और सम्मान की इस लड़ाई में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। हम भाजपा को शिक्षा के मंदिरों को दमन का केंद्र नहीं बनने देंगे।”

इस घटना ने यह सवाल भी उठाया है कि क्या शिक्षा संस्थान अब राजनीतिक दखल और विवादों के लिए सुरक्षित हैं। पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्रों और शिक्षकों का कहना है कि वे <strong>शांतिपूर्वक विरोध जारी रखेंगे</strong> और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करेंगे।]]></content:encoded>
					
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		<title>Cabinet Minister Harbhajan Singh ETO द्वारा PU Senate Election की तारीख न घोषित करने पर Central Government की आलोचना</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 11 Nov 2025 06:50:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[CentralGovernment]]></category>
		<category><![CDATA[chandigarh]]></category>
		<category><![CDATA[Democracy]]></category>
		<category><![CDATA[ElectionDelay]]></category>
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		<category><![CDATA[PunjabPolitics]]></category>
		<category><![CDATA[PunjabUniversity]]></category>
		<category><![CDATA[PUSenateElections]]></category>
		<category><![CDATA[PUStudents]]></category>
		<category><![CDATA[StudentRights]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब के कैबिनेट मंत्री <strong>हरभजन सिंह ईटीओ</strong> ने भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की है क्योंकि उसने <strong>पंजाब विश्वविद्यालय (</strong><strong>PU), </strong><strong>चंडीगढ़ के सीनेट चुनावों की तारीख अब तक घोषित नहीं की है।</strong>

मंत्री ने कहा कि हालांकि केंद्र सरकार ने पहले जारी विवादित अधिसूचना को रद्द कर <strong>एक कदम पीछे जरूर लिया</strong>, लेकिन अब तक नए चुनावों की <strong>तारीख घोषित नहीं की गई।</strong> उन्होंने कहा कि यह छात्रों और विश्वविद्यालय की लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सीधा हमला है।

<strong>सीनेट चुनाव की स्थिति:</strong>
पंजाब विश्वविद्यालय के <strong>सीनेट के </strong><strong>91 </strong><strong>सदस्यों का कार्यकाल </strong><strong>31 </strong><strong>अक्टूबर </strong><strong>2024 </strong><strong>को समाप्त हो गया</strong> था। लेकिन भाजपा सरकार ने अभी तक इसके लिए कोई समय-सारणी जारी नहीं की, जिससे विश्वविद्यालय की <strong>संघीय संरचना और लोकतांत्रिक व्यवस्था</strong> खतरे में पड़ गई है।

हरभजन सिंह ईटीओ ने कहा, "<strong>छात्रों के हितों की रक्षा के लिए हम उनके साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं।</strong>" उन्होंने जोर देकर कहा कि <strong>मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की सरकार</strong> छात्रों और पंजाबियों के हितों की पूरी रक्षा करेगी और विश्वविद्यालय की संघीय/autonomous संरचना को बहाल कराने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

मंत्री ने आगे कहा कि भाजपा सरकार को <strong>देश की लोकतांत्रिक परंपराओं और प्रथाओं का सम्मान करना चाहिए</strong>, अन्यथा समाज के हर वर्ग की ओर से उसे विरोध का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि <strong>सीनेट चुनावों की तारीख घोषित होने तक केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध जारी रहेगा।</strong>

हरभजन सिंह ईटीओ ने कहा, "<strong>हम हर मंच पर भाजपा के इस सीधे हमले की निंदा करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि विश्वविद्यालय की लोकतांत्रिक और संघीय संरचना सुरक्षित रहे।</strong>"

<strong>संक्षेप में:</strong>
<ul>
 	<li>सीनेट चुनावों की तारीख न होने से PU की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर असर पड़ा है।</li>
 	<li>केंद्र सरकार की अधिसूचना को रद्द किया गया, लेकिन चुनाव की तारीख अभी तय नहीं।</li>
 	<li>पंजाब सरकार और मंत्री छात्रों और विश्वविद्यालय की सुरक्षा के लिए सख्त रुख पर हैं।</li>
</ul>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब के कैबिनेट मंत्री <strong>हरभजन सिंह ईटीओ</strong> ने भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की है क्योंकि उसने <strong>पंजाब विश्वविद्यालय (</strong><strong>PU), </strong><strong>चंडीगढ़ के सीनेट चुनावों की तारीख अब तक घोषित नहीं की है।</strong>

मंत्री ने कहा कि हालांकि केंद्र सरकार ने पहले जारी विवादित अधिसूचना को रद्द कर <strong>एक कदम पीछे जरूर लिया</strong>, लेकिन अब तक नए चुनावों की <strong>तारीख घोषित नहीं की गई।</strong> उन्होंने कहा कि यह छात्रों और विश्वविद्यालय की लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सीधा हमला है।

<strong>सीनेट चुनाव की स्थिति:</strong>
पंजाब विश्वविद्यालय के <strong>सीनेट के </strong><strong>91 </strong><strong>सदस्यों का कार्यकाल </strong><strong>31 </strong><strong>अक्टूबर </strong><strong>2024 </strong><strong>को समाप्त हो गया</strong> था। लेकिन भाजपा सरकार ने अभी तक इसके लिए कोई समय-सारणी जारी नहीं की, जिससे विश्वविद्यालय की <strong>संघीय संरचना और लोकतांत्रिक व्यवस्था</strong> खतरे में पड़ गई है।

हरभजन सिंह ईटीओ ने कहा, "<strong>छात्रों के हितों की रक्षा के लिए हम उनके साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं।</strong>" उन्होंने जोर देकर कहा कि <strong>मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की सरकार</strong> छात्रों और पंजाबियों के हितों की पूरी रक्षा करेगी और विश्वविद्यालय की संघीय/autonomous संरचना को बहाल कराने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

मंत्री ने आगे कहा कि भाजपा सरकार को <strong>देश की लोकतांत्रिक परंपराओं और प्रथाओं का सम्मान करना चाहिए</strong>, अन्यथा समाज के हर वर्ग की ओर से उसे विरोध का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि <strong>सीनेट चुनावों की तारीख घोषित होने तक केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध जारी रहेगा।</strong>

हरभजन सिंह ईटीओ ने कहा, "<strong>हम हर मंच पर भाजपा के इस सीधे हमले की निंदा करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि विश्वविद्यालय की लोकतांत्रिक और संघीय संरचना सुरक्षित रहे।</strong>"

<strong>संक्षेप में:</strong>
<ul>
 	<li>सीनेट चुनावों की तारीख न होने से PU की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर असर पड़ा है।</li>
 	<li>केंद्र सरकार की अधिसूचना को रद्द किया गया, लेकिन चुनाव की तारीख अभी तय नहीं।</li>
 	<li>पंजाब सरकार और मंत्री छात्रों और विश्वविद्यालय की सुरक्षा के लिए सख्त रुख पर हैं।</li>
</ul>]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>Punjab की विरासत पर BJP का हमला! AAP MP बोले – यह Notification University की Senate को भंग नहीं कर सकता, “Punjab नहीं दबेगा”</title>
		<link>https://trendstopic.in/bjp-attacks-punjabs-heritage-aap-mp-says-this-notification-cannot-dissolve-the-university-senate-punjab-will-not-be-suppressed/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 08 Nov 2025 05:58:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चंडीगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[AAP]]></category>
		<category><![CDATA[BJP]]></category>
		<category><![CDATA[chandigarh]]></category>
		<category><![CDATA[PoliticalNews]]></category>
		<category><![CDATA[PunjabNews]]></category>
		<category><![CDATA[PunjabUniversity]]></category>
		<category><![CDATA[PunjabWillNotBeSuppressed]]></category>
		<category><![CDATA[SavePunjabUniversity]]></category>
		<category><![CDATA[StudentProtest]]></category>
		<category><![CDATA[UniversitySenate]]></category>
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					<description><![CDATA[केंद्र की BJP सरकार ने पंजाब यूनिवर्सिटी की Senate को अचानक भंग करने का नोटिफिकेशन जारी किया, जिसे पंजाब सरकार और आम आदमी पार्टी ने पंजाब की स्वायत्तता और विरासत पर सीधा हमला बताया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान और AAP ने इस कदम के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है। चंडीगढ़ और पंजाब के विभिन्न शहरों में AAP के छात्र संगठन <strong>ASAP</strong> के हज़ारों छात्रों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और साफ कहा कि <em>“Punjab </em><em>दबेगा नहीं!</em><em>”</em>

<strong>मंगलवार को चंडीगढ़ की सड़कों पर दिखाई दिया पंजाब का संकल्प</strong>

प्रदर्शनकारियों के नारे थे:
<em>“Punjab University </em><em>हमारी विरासत है</em><em>”</em>
<em>“</em><em>धक्केशाही नहीं चलेगी</em><em>”</em>
<em>“Punjab </em><em>के हक की लूट नहीं होने देंगे</em><em>”</em>

&nbsp;

<img class="alignnone  wp-image-26488" src="https://trendstopic.in/wp-content/uploads/2025/11/WhatsApp-Image-2025-11-07-at-4.19.46-PM-300x169.webp" alt="" width="657" height="370" />

&nbsp;

छात्रों का कहना था कि केंद्र सरकार का यह कदम सिर्फ प्रशासनिक फैसला नहीं बल्कि पंजाब यूनिवर्सिटी पर नियंत्रण जमाने का प्रयास है। प्रदर्शन में कई छात्र नेताओं ने कहा कि यह सिर्फ शिक्षा संस्थान का मामला नहीं, बल्कि पंजाब की पहचान और अधिकारों की लड़ाई है।

<strong>पंजाब सरकार का रुख साफ</strong>

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा:
<em>“Punjab University </em><em>सिर्फ एक इमारत नहीं</em><em>, </em><em>यह पंजाब की आत्मा है। यहां से भगत सिंह जैसे महापुरुष निकले हैं। इस संस्था की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है।</em><em>”</em>
मान ने दोहराया कि पंजाब सरकार इस मामले में किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी।

<strong>AAP </strong><strong>का आरोप: केंद्र </strong><strong>‘</strong><strong>नियंत्रण</strong><strong>’ </strong><strong>की राजनीति खेल रहा है</strong>

AAP नेताओं का कहना है कि BJP उन राज्यों में संस्थाओं को कमजोर करने और नियंत्रण करने की कोशिश करती है जहां उसकी सरकार नहीं है। पार्टी ने कहा कि पंजाब में यह कोशिश सफल नहीं होने दी जाएगी।

<strong>ASAP </strong><strong>का अल्टीमेटम</strong>

ASAP संगठन ने ऐलान किया:
<em>“</em><em>यदि तीन दिन के भीतर सैनेट भंग करने का फैसला वापस नहीं लिया गया</em><em>, </em><em>तो पूरे पंजाब में चक्का जाम किया जाएगा।</em><em>”</em>

प्रदर्शन शांति और अनुशासन के साथ हुए, लेकिन उन्होंने यह संदेश स्पष्ट कर दिया कि पंजाब का युवा अब चुप नहीं बैठेगा।

<strong>पंजाब यूनिवर्सिटी की विरासत और पहचान</strong>

1882 में स्थापित पंजाब यूनिवर्सिटी सिर्फ एक शैक्षणिक संस्था नहीं, बल्कि पंजाब के इतिहास, बुद्धिजीवी आंदोलन और सांस्कृतिक पहचान की धुरी रही है। इसीलिए इस मुद्दे को लेकर छात्रों, शिक्षकों, नागरिकों और सामाजिक संगठनों में गहरी संवेदनशीलता है।

<strong>आगे की स्थिति</strong>

AAP ने कहा है कि यदि केंद्र सरकार अपना निर्णय वापस नहीं लेती, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। सोशल मीडिया पर भी #SavePunjabUniversity तेजी से ट्रेंड कर रहा है। पंजाब और पंजाबी डायस्पोरा दोनों इस मुद्दे पर आवाज उठा रहे हैं।

<strong>संदेश साफ है:</strong>
<strong>“Punjab </strong><strong>दबाया नहीं जा सकता</strong><strong>, </strong><strong>ना कभी दबा है।</strong><strong>”</strong>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[केंद्र की BJP सरकार ने पंजाब यूनिवर्सिटी की Senate को अचानक भंग करने का नोटिफिकेशन जारी किया, जिसे पंजाब सरकार और आम आदमी पार्टी ने पंजाब की स्वायत्तता और विरासत पर सीधा हमला बताया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान और AAP ने इस कदम के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है। चंडीगढ़ और पंजाब के विभिन्न शहरों में AAP के छात्र संगठन <strong>ASAP</strong> के हज़ारों छात्रों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और साफ कहा कि <em>“Punjab </em><em>दबेगा नहीं!</em><em>”</em>

<strong>मंगलवार को चंडीगढ़ की सड़कों पर दिखाई दिया पंजाब का संकल्प</strong>

प्रदर्शनकारियों के नारे थे:
<em>“Punjab University </em><em>हमारी विरासत है</em><em>”</em>
<em>“</em><em>धक्केशाही नहीं चलेगी</em><em>”</em>
<em>“Punjab </em><em>के हक की लूट नहीं होने देंगे</em><em>”</em>

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छात्रों का कहना था कि केंद्र सरकार का यह कदम सिर्फ प्रशासनिक फैसला नहीं बल्कि पंजाब यूनिवर्सिटी पर नियंत्रण जमाने का प्रयास है। प्रदर्शन में कई छात्र नेताओं ने कहा कि यह सिर्फ शिक्षा संस्थान का मामला नहीं, बल्कि पंजाब की पहचान और अधिकारों की लड़ाई है।

<strong>पंजाब सरकार का रुख साफ</strong>

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा:
<em>“Punjab University </em><em>सिर्फ एक इमारत नहीं</em><em>, </em><em>यह पंजाब की आत्मा है। यहां से भगत सिंह जैसे महापुरुष निकले हैं। इस संस्था की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है।</em><em>”</em>
मान ने दोहराया कि पंजाब सरकार इस मामले में किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी।

<strong>AAP </strong><strong>का आरोप: केंद्र </strong><strong>‘</strong><strong>नियंत्रण</strong><strong>’ </strong><strong>की राजनीति खेल रहा है</strong>

AAP नेताओं का कहना है कि BJP उन राज्यों में संस्थाओं को कमजोर करने और नियंत्रण करने की कोशिश करती है जहां उसकी सरकार नहीं है। पार्टी ने कहा कि पंजाब में यह कोशिश सफल नहीं होने दी जाएगी।

<strong>ASAP </strong><strong>का अल्टीमेटम</strong>

ASAP संगठन ने ऐलान किया:
<em>“</em><em>यदि तीन दिन के भीतर सैनेट भंग करने का फैसला वापस नहीं लिया गया</em><em>, </em><em>तो पूरे पंजाब में चक्का जाम किया जाएगा।</em><em>”</em>

प्रदर्शन शांति और अनुशासन के साथ हुए, लेकिन उन्होंने यह संदेश स्पष्ट कर दिया कि पंजाब का युवा अब चुप नहीं बैठेगा।

<strong>पंजाब यूनिवर्सिटी की विरासत और पहचान</strong>

1882 में स्थापित पंजाब यूनिवर्सिटी सिर्फ एक शैक्षणिक संस्था नहीं, बल्कि पंजाब के इतिहास, बुद्धिजीवी आंदोलन और सांस्कृतिक पहचान की धुरी रही है। इसीलिए इस मुद्दे को लेकर छात्रों, शिक्षकों, नागरिकों और सामाजिक संगठनों में गहरी संवेदनशीलता है।

<strong>आगे की स्थिति</strong>

AAP ने कहा है कि यदि केंद्र सरकार अपना निर्णय वापस नहीं लेती, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। सोशल मीडिया पर भी #SavePunjabUniversity तेजी से ट्रेंड कर रहा है। पंजाब और पंजाबी डायस्पोरा दोनों इस मुद्दे पर आवाज उठा रहे हैं।

<strong>संदेश साफ है:</strong>
<strong>“Punjab </strong><strong>दबाया नहीं जा सकता</strong><strong>, </strong><strong>ना कभी दबा है।</strong><strong>”</strong>]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>Center का Punjab University पर कब्जा? AAP ने Governor से की मुलाकात, जताया विरोध</title>
		<link>https://trendstopic.in/is-the-center-trying-to-take-over-punjab-university-aap-meets-governor-voices-protest/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 07 Nov 2025 11:36:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चंडीगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[AAP]]></category>
		<category><![CDATA[Center]]></category>
		<category><![CDATA[Democracy]]></category>
		<category><![CDATA[EducationNews]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब यूनिवर्सिटी के लोकतांत्रिक ढांचे पर केंद्र सरकार के कदम को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने कड़ा विरोध जताया है। आज AAP पंजाब के एक प्रतिनिधिमंडल ने वित्तमंत्री <strong>हरपाल सिंह चीमा</strong> के नेतृत्व में राज्यपाल <strong>गुलाब चंद कटारिया</strong> से मुलाकात की और पंजाब यूनिवर्सिटी की स्वायत्तता और लोकतांत्रिक संरचना की रक्षा करने की अपील की।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे सांसद <strong>गुरमीत सिंह मीत हेयर</strong>, <strong>मलविंदर सिंह कंग</strong>, विधायक <strong>दिनेश चड्ढा</strong>, वरिष्ठ नेता <strong>गोल्डी कंबोज</strong>, <strong>दविंदर सिंह लाडी ढोंस</strong>, छात्र नेता <strong>वतनवीर गिल</strong>, और पीयू सीनेट सदस्य <strong>आई.पी. सिद्धू</strong> और <strong>रविंदर धालीवाल</strong>।

<strong>केंद्र का नोटिफिकेशन:</strong>
28 अक्टूबर 2025 को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन जारी किया, जिसमें पंजाब यूनिवर्सिटी की सीनेट की कानूनी सदस्य संख्या 90 से घटाकर सिर्फ 31 कर दी गई। इनमें से 13 सदस्य सीधे केंद्र द्वारा मनोनीत होंगे। AAP ने इसे पंजाब और यूनिवर्सिटी के लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया।

<strong>AAP </strong><strong>नेताओं के बयान:</strong>
<ul>
 	<li><strong>हरपाल सिंह चीमा</strong> ने कहा कि भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पंजाब यूनिवर्सिटी के लोकतांत्रिक ढांचे को खत्म करके शैक्षणिक संस्थानों पर कब्जा करना चाहती है। उनका कहना है कि बीबीएमबी पर कब्जा करने के बाद अब केंद्र यूनिवर्सिटी को निशाना बना रहा है।</li>
 	<li><strong>मलविंदर सिंह कंग</strong> ने बताया कि यह नोटिफिकेशन गैर-संवैधानिक है और पंजाब यूनिवर्सिटी एक्ट, 1947 का उल्लंघन करता है। शिक्षा मंत्रालय का अधिकार नहीं कि वह राज्य के कानून के माध्यम से स्थापित संस्थाओं में बदलाव करे।</li>
 	<li><strong>गुरमीत सिंह मीत हेयर</strong> ने कहा कि यूनिवर्सिटी सिर्फ एक शिक्षा संस्थान नहीं, बल्कि पंजाबियों की भावनाओं और पहचान का हिस्सा है। बंटवारे के बाद यह पंजाबियों के लिए पुनर्जन्म का प्रतीक बनी।</li>
</ul>
<strong>AAP </strong><strong>की मांगें:</strong>
<ol>
 	<li>28 अक्टूबर के नोटिफिकेशन और 4 नवंबर के स्थगन आदेश को स्थायी रूप से वापस लिया जाए।</li>
 	<li>सीनेट और सिंडिकेट को पंजाब यूनिवर्सिटी एक्ट, 1947 और पंजाब पुनर्गठन एक्ट, 1966 के अनुसार बहाल किया जाए।</li>
 	<li>पंजाब यूनिवर्सिटी की स्वायत्तता और लोकतांत्रिक ढांचे की रक्षा की जाए।</li>
</ol>
<strong>पंजाब यूनिवर्सिटी का महत्व:</strong>
<ul>
 	<li>यह यूनिवर्सिटी पंजाब की ऐतिहासिक और भावनात्मक विरासत है।</li>
 	<li>पंजाब के 200 से अधिक कॉलेजों और लाखों छात्रों पर इस फैसले का असर पड़ेगा।</li>
 	<li>AAP का कहना है कि यह सिर्फ यूनिवर्सिटी का मामला नहीं, बल्कि पंजाब की पहचान और स्वाभिमान का मुद्दा है।</li>
</ul>
AAP ने यह भी कहा कि भगवंत मान सरकार पंजाब के छात्रों, शिक्षकों और अकादमिक संस्थानों के साथ मिलकर केंद्र के हस्तक्षेप से पंजाब की संस्थाओं और पहचान को बचाने के लिए संघर्ष जारी रखेगी।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब यूनिवर्सिटी के लोकतांत्रिक ढांचे पर केंद्र सरकार के कदम को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने कड़ा विरोध जताया है। आज AAP पंजाब के एक प्रतिनिधिमंडल ने वित्तमंत्री <strong>हरपाल सिंह चीमा</strong> के नेतृत्व में राज्यपाल <strong>गुलाब चंद कटारिया</strong> से मुलाकात की और पंजाब यूनिवर्सिटी की स्वायत्तता और लोकतांत्रिक संरचना की रक्षा करने की अपील की।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे सांसद <strong>गुरमीत सिंह मीत हेयर</strong>, <strong>मलविंदर सिंह कंग</strong>, विधायक <strong>दिनेश चड्ढा</strong>, वरिष्ठ नेता <strong>गोल्डी कंबोज</strong>, <strong>दविंदर सिंह लाडी ढोंस</strong>, छात्र नेता <strong>वतनवीर गिल</strong>, और पीयू सीनेट सदस्य <strong>आई.पी. सिद्धू</strong> और <strong>रविंदर धालीवाल</strong>।

<strong>केंद्र का नोटिफिकेशन:</strong>
28 अक्टूबर 2025 को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन जारी किया, जिसमें पंजाब यूनिवर्सिटी की सीनेट की कानूनी सदस्य संख्या 90 से घटाकर सिर्फ 31 कर दी गई। इनमें से 13 सदस्य सीधे केंद्र द्वारा मनोनीत होंगे। AAP ने इसे पंजाब और यूनिवर्सिटी के लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया।

<strong>AAP </strong><strong>नेताओं के बयान:</strong>
<ul>
 	<li><strong>हरपाल सिंह चीमा</strong> ने कहा कि भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पंजाब यूनिवर्सिटी के लोकतांत्रिक ढांचे को खत्म करके शैक्षणिक संस्थानों पर कब्जा करना चाहती है। उनका कहना है कि बीबीएमबी पर कब्जा करने के बाद अब केंद्र यूनिवर्सिटी को निशाना बना रहा है।</li>
 	<li><strong>मलविंदर सिंह कंग</strong> ने बताया कि यह नोटिफिकेशन गैर-संवैधानिक है और पंजाब यूनिवर्सिटी एक्ट, 1947 का उल्लंघन करता है। शिक्षा मंत्रालय का अधिकार नहीं कि वह राज्य के कानून के माध्यम से स्थापित संस्थाओं में बदलाव करे।</li>
 	<li><strong>गुरमीत सिंह मीत हेयर</strong> ने कहा कि यूनिवर्सिटी सिर्फ एक शिक्षा संस्थान नहीं, बल्कि पंजाबियों की भावनाओं और पहचान का हिस्सा है। बंटवारे के बाद यह पंजाबियों के लिए पुनर्जन्म का प्रतीक बनी।</li>
</ul>
<strong>AAP </strong><strong>की मांगें:</strong>
<ol>
 	<li>28 अक्टूबर के नोटिफिकेशन और 4 नवंबर के स्थगन आदेश को स्थायी रूप से वापस लिया जाए।</li>
 	<li>सीनेट और सिंडिकेट को पंजाब यूनिवर्सिटी एक्ट, 1947 और पंजाब पुनर्गठन एक्ट, 1966 के अनुसार बहाल किया जाए।</li>
 	<li>पंजाब यूनिवर्सिटी की स्वायत्तता और लोकतांत्रिक ढांचे की रक्षा की जाए।</li>
</ol>
<strong>पंजाब यूनिवर्सिटी का महत्व:</strong>
<ul>
 	<li>यह यूनिवर्सिटी पंजाब की ऐतिहासिक और भावनात्मक विरासत है।</li>
 	<li>पंजाब के 200 से अधिक कॉलेजों और लाखों छात्रों पर इस फैसले का असर पड़ेगा।</li>
 	<li>AAP का कहना है कि यह सिर्फ यूनिवर्सिटी का मामला नहीं, बल्कि पंजाब की पहचान और स्वाभिमान का मुद्दा है।</li>
</ul>
AAP ने यह भी कहा कि भगवंत मान सरकार पंजाब के छात्रों, शिक्षकों और अकादमिक संस्थानों के साथ मिलकर केंद्र के हस्तक्षेप से पंजाब की संस्थाओं और पहचान को बचाने के लिए संघर्ष जारी रखेगी।]]></content:encoded>
					
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		<item>
		<title>Punjab University: Centre का U-Turn, Punjab के सम्मान और एकता की जीत: Minister Laljit Singh Bhullar</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 06 Nov 2025 12:05:54 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[BhagwantMann]]></category>
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					<description><![CDATA[कैबिनेट मंत्री <strong>लालजीत सिंह भुल्लर</strong> ने तरनतारन उपचुनाव के दौरान प्रचार करते हुए कहा कि पंजाब यूनिवर्सिटी को लेकर केंद्र सरकार का यू-टर्न पंजाब और पंजाबियों की <strong>इतिहासिक जीत</strong> है। उन्होंने बताया कि यह फैसला मुख्यमंत्री <strong>भगवंत सिंह मान</strong> की अटूट प्रतिबद्धता और पंजाब के अधिकारों की रक्षा के लगातार प्रयासों का नतीजा है।

मंत्री भुल्लर ने कहा कि मान सरकार ने शुरू से ही भाजपा केंद्र सरकार के उस कदम का विरोध किया था, जिसमें पंजाब यूनिवर्सिटी का दर्जा बदलने की योजना थी। उन्होंने इसे न केवल तर्कहीन बताया, बल्कि पंजाब की <strong>सांस्कृतिक और शैक्षणिक विरासत पर हमला</strong> भी कहा।

भुल्लर ने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री मान ने पहले दिन ही स्पष्ट किया था कि <strong>पंजाब यूनिवर्सिटी भावनात्मक</strong><strong>, </strong><strong>सांस्कृतिक और संवैधानिक तौर पर पंजाब की है</strong>। अब, केंद्र के यू-टर्न ने मान सरकार के स्टैंड को सही साबित कर दिया है।

मंत्री ने याद दिलाया कि यह केवल यूनिवर्सिटी का मामला नहीं है, बल्कि <strong>पंजाब के सम्मान और अधिकारों</strong> का भी मामला है। उन्होंने कहा कि पंजाबियों की <strong>एकता और सामूहिक इच्छाशक्ति</strong> ने फिर एक बार भाजपा सरकार को सच्चाई और न्याय के आगे झुकने पर मजबूर कर दिया। भुल्लर ने यह भी कहा कि मान सरकार पहले ही इस फैसले को अदालत में चुनौती देने के लिए तैयार थी।

तरनतारन के लोगों से अपील करते हुए भुल्लर ने कहा कि जिस तरह मुख्यमंत्री मान पंजाब के सम्मान के लिए मजबूती से खड़े हैं, उसी तरह लोगों को <strong>‘</strong><strong>आप</strong><strong>’ </strong><strong>उम्मीदवार हरमीत सिंह संधू</strong> को जीत दिलाकर उनके हाथ मजबूत करने चाहिए। उन्होंने कहा कि यह एक <strong>मजबूत संदेश</strong> होगा कि पंजाब की आवाज़ को कभी भी दबाया नहीं जा सकता।

भुल्लर ने कहा, "यह जीत हमें याद दिलाती है कि पंजाब ने पहले <strong>किसान आंदोलन</strong> के दौरान भी केंद्र के अहंकार को हराया था। आज भी पंजाबियों की एकता ने केंद्र को झुकने पर मजबूर कर दिया।"

इस पूरे मामले में, पंजाब सरकार ने हमेशा यह कहा है कि <strong>राज्य के अधिकार और संवैधानिक हक</strong> किसी भी हाल में खतरे में नहीं आने चाहिए। यही वजह है कि पंजाब यूनिवर्सिटी का दर्जा और पंजाब की सांस्कृतिक पहचान दोनों राज्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[कैबिनेट मंत्री <strong>लालजीत सिंह भुल्लर</strong> ने तरनतारन उपचुनाव के दौरान प्रचार करते हुए कहा कि पंजाब यूनिवर्सिटी को लेकर केंद्र सरकार का यू-टर्न पंजाब और पंजाबियों की <strong>इतिहासिक जीत</strong> है। उन्होंने बताया कि यह फैसला मुख्यमंत्री <strong>भगवंत सिंह मान</strong> की अटूट प्रतिबद्धता और पंजाब के अधिकारों की रक्षा के लगातार प्रयासों का नतीजा है।

मंत्री भुल्लर ने कहा कि मान सरकार ने शुरू से ही भाजपा केंद्र सरकार के उस कदम का विरोध किया था, जिसमें पंजाब यूनिवर्सिटी का दर्जा बदलने की योजना थी। उन्होंने इसे न केवल तर्कहीन बताया, बल्कि पंजाब की <strong>सांस्कृतिक और शैक्षणिक विरासत पर हमला</strong> भी कहा।

भुल्लर ने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री मान ने पहले दिन ही स्पष्ट किया था कि <strong>पंजाब यूनिवर्सिटी भावनात्मक</strong><strong>, </strong><strong>सांस्कृतिक और संवैधानिक तौर पर पंजाब की है</strong>। अब, केंद्र के यू-टर्न ने मान सरकार के स्टैंड को सही साबित कर दिया है।

मंत्री ने याद दिलाया कि यह केवल यूनिवर्सिटी का मामला नहीं है, बल्कि <strong>पंजाब के सम्मान और अधिकारों</strong> का भी मामला है। उन्होंने कहा कि पंजाबियों की <strong>एकता और सामूहिक इच्छाशक्ति</strong> ने फिर एक बार भाजपा सरकार को सच्चाई और न्याय के आगे झुकने पर मजबूर कर दिया। भुल्लर ने यह भी कहा कि मान सरकार पहले ही इस फैसले को अदालत में चुनौती देने के लिए तैयार थी।

तरनतारन के लोगों से अपील करते हुए भुल्लर ने कहा कि जिस तरह मुख्यमंत्री मान पंजाब के सम्मान के लिए मजबूती से खड़े हैं, उसी तरह लोगों को <strong>‘</strong><strong>आप</strong><strong>’ </strong><strong>उम्मीदवार हरमीत सिंह संधू</strong> को जीत दिलाकर उनके हाथ मजबूत करने चाहिए। उन्होंने कहा कि यह एक <strong>मजबूत संदेश</strong> होगा कि पंजाब की आवाज़ को कभी भी दबाया नहीं जा सकता।

भुल्लर ने कहा, "यह जीत हमें याद दिलाती है कि पंजाब ने पहले <strong>किसान आंदोलन</strong> के दौरान भी केंद्र के अहंकार को हराया था। आज भी पंजाबियों की एकता ने केंद्र को झुकने पर मजबूर कर दिया।"

इस पूरे मामले में, पंजाब सरकार ने हमेशा यह कहा है कि <strong>राज्य के अधिकार और संवैधानिक हक</strong> किसी भी हाल में खतरे में नहीं आने चाहिए। यही वजह है कि पंजाब यूनिवर्सिटी का दर्जा और पंजाब की सांस्कृतिक पहचान दोनों राज्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।]]></content:encoded>
					
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		<title>Punjab University Senate भंग पर सियासत: Mann सरकार जाएगी court, CM बोले – Centre को अधिकार नहीं, Haryana के ज़रिए एंट्री की कोशिश हुई</title>
		<link>https://trendstopic.in/politics-over-punjab-university-senate-dissolution-mann-government-to-move-court-cm-says-centre-has-no-authority-haryana-trying-to-enter-through-the-backdoor/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 02 Nov 2025 09:23:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[News]]></category>
		<category><![CDATA[चंडीगढ़]]></category>
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		<category><![CDATA[UniversitySenate]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब यूनिवर्सिटी की <strong>सीनेट (Senate)</strong> और <strong>सिंडिकेट (Syndicate)</strong> को केंद्र सरकार ने भंग कर दिया है। इसके बाद पंजाब सरकार और केंद्र सरकार के बीच बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।
<strong>मुख्यमंत्री भगवंत मान</strong> ने इस फैसले को “<strong>गैर-संवैधानिक और पंजाब विरोधी</strong>” बताया है और कहा है कि राज्य सरकार अब इस मामले में <strong>कानूनी लड़ाई</strong> लड़ेगी।
<h3><strong>केंद्र का फैसला और उसका समय</strong></h3>
31 अक्टूबर 2024 को पंजाब यूनिवर्सिटी की पुरानी सीनेट का कार्यकाल खत्म हो गया था।
नई सीनेट का चुनाव नहीं हुआ, और फिर <strong>1 </strong><strong>नवंबर 2025 (</strong><strong>पंजाब दिवस)</strong> के दिन केंद्र सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर सीनेट और सिंडिकेट दोनों को <strong>भंग (dissolve)</strong> कर दिया।
केंद्र ने कहा कि यूनिवर्सिटी का कामकाज सही तरह चलाने के लिए यह कदम उठाना ज़रूरी था।
<h3><strong>पंजाब सरकार का विरोध</strong></h3>
मुख्यमंत्री <strong>भगवंत मान</strong> ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि यह फैसला <strong>गैर-कानूनी</strong> है और <strong>केंद्र को ऐसा करने का अधिकार नहीं</strong> है।
उन्होंने कहा कि पंजाब यूनिवर्सिटी का मामला <strong>पंजाब पुनर्गठन एक्ट 1966</strong> और <strong>पंजाब यूनिवर्सिटी एक्ट 1947</strong> के तहत आता है, यानी इसका अधिकार <strong>पंजाब सरकार के पास</strong> है, न कि केंद्र के पास।
<h3><strong>सीएम भगवंत मान के 6 </strong><strong>मुख्य बयान</strong></h3>
<ol>
 	<li><strong>केंद्र को अधिकार नहीं:</strong> पंजाब यूनिवर्सिटी को भंग करने का अधिकार केंद्र को नहीं, बल्कि पंजाब सरकार को है।</li>
 	<li><strong>नोटिफिकेशन गैरकानूनी है:</strong> विधानसभा या संसद में संशोधन किए बिना सिर्फ नोटिफिकेशन जारी करना पूरी तरह असंवैधानिक है।</li>
 	<li><strong>हरियाणा की एंट्री की कोशिश:</strong> मान ने कहा कि पहले भी हरियाणा ने अपने कॉलेजों को पंजाब यूनिवर्सिटी से जोड़ने की कोशिश की थी, अब उसी बहाने से दोबारा एंट्री की जा रही है।</li>
 	<li><strong>सीनेट में हरियाणा के लोगों की एंट्री:</strong> उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार सीनेट में अपने लोगों को भेजने की योजना बना रही थी, जिसका हमें पहले से पता चल गया था।</li>
 	<li><strong>कानूनी लड़ाई का ऐलान:</strong> पंजाब सरकार अब इस फैसले के खिलाफ <strong>हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट</strong> जाएगी।</li>
 	<li><strong>धक्केशाही नहीं चलेगी:</strong> मान ने कहा कि “पहले बीबीएमबी और अब यूनिवर्सिटी – भाजपा लगातार पंजाब की प्रॉपर्टी और हकों पर कब्जा करने की कोशिश कर रही है, जो बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”</li>
</ol>
<h3><strong>पंजाब यूनिवर्सिटी का इतिहास और महत्व</strong></h3>
पंजाब यूनिवर्सिटी की शुरुआत <strong>लाहौर (अब पाकिस्तान)</strong> में हुई थी।
आजादी के बाद इसे पहले <strong>होशियारपुर</strong> और फिर <strong>चंडीगढ़</strong> स्थानांतरित किया गया।
पंजाब सरकार हर साल इस यूनिवर्सिटी को <strong>बजट से ग्रांट (financial grant)</strong> देती है।
इस वजह से पंजाब का दावा है कि यह <strong>राज्य की विरासत (heritage)</strong> और <strong>अधिकार (right)</strong> है।
<h3><strong>सीनेट क्या होती है?</strong></h3>
सीनेट यूनिवर्सिटी की सबसे ऊंची संस्था होती है, जो सभी बड़े फैसले लेती है।
इसका काम होता है –
<ul>
 	<li>यूनिवर्सिटी की <strong>policies </strong><strong>बनाना</strong>,</li>
 	<li><strong>administrative decisions </strong><strong>लेना</strong>,</li>
 	<li>और यूनिवर्सिटी का <strong>लोकतांत्रिक संचालन</strong> करना।</li>
</ul>
इसी सीनेट के चुनाव हर कुछ साल में होते हैं, लेकिन इस बार चुनाव न होने के कारण अब विवाद और गहरा हो गया है।
<h3><strong>हरियाणा से जुड़ा विवाद</strong></h3>
यह विवाद नया नहीं है।
हरियाणा लंबे समय से अपने कॉलेजों को पंजाब यूनिवर्सिटी के अधीन करने की मांग करता रहा है।
पंजाब का कहना है कि ऐसा करने से यूनिवर्सिटी की “<strong>पंजाबी पहचान और स्वायत्तता (autonomy)</strong>” खत्म हो जाएगी।
सीएम मान का आरोप है कि हरियाणा सरकार सीनेट में अपने प्रतिनिधियों को लाने की कोशिश कर रही थी, जिससे यूनिवर्सिटी के फैसलों पर उसका असर बढ़ जाए।
<h3><strong>केंद्र का पक्ष (संभावित तर्क)</strong></h3>
केंद्र का कहना है कि सीनेट का कार्यकाल खत्म हो चुका था और चुनाव न होने की वजह से यूनिवर्सिटी का प्रशासनिक काम रुक सकता था।
इसलिए अस्थायी तौर पर यह कदम उठाना पड़ा ताकि यूनिवर्सिटी का सिस्टम चलता रहे।
<h3><strong>अब आगे क्या होगा</strong></h3>
पंजाब सरकार ने साफ कर दिया है कि वह इस फैसले को <strong>कोर्ट में चुनौती</strong> देगी।
राज्य सरकार इसे पंजाब की “<strong>शैक्षणिक और सांस्कृतिक विरासत</strong>” से जुड़ा मामला बता रही है।
अब देखना होगा कि यह मामला <strong>राज्य बनाम केंद्र</strong> के अधिकार क्षेत्र की कानूनी लड़ाई में कैसे आगे बढ़ता है।

&nbsp;
<ul>
 	<li>केंद्र ने पंजाब यूनिवर्सिटी की सीनेट और सिंडिकेट भंग की।</li>
 	<li>पंजाब सरकार ने इसे “पंजाब विरोधी और गैर-कानूनी” बताया।</li>
 	<li>भगवंत मान बोले — “पंजाब यूनिवर्सिटी हमारी विरासत है, इसे किसी भी कीमत पर छीने नहीं देंगे।”</li>
 	<li>अब यह विवाद कोर्ट तक जाने वाला है।</li>
</ul>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब यूनिवर्सिटी की <strong>सीनेट (Senate)</strong> और <strong>सिंडिकेट (Syndicate)</strong> को केंद्र सरकार ने भंग कर दिया है। इसके बाद पंजाब सरकार और केंद्र सरकार के बीच बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।
<strong>मुख्यमंत्री भगवंत मान</strong> ने इस फैसले को “<strong>गैर-संवैधानिक और पंजाब विरोधी</strong>” बताया है और कहा है कि राज्य सरकार अब इस मामले में <strong>कानूनी लड़ाई</strong> लड़ेगी।
<h3><strong>केंद्र का फैसला और उसका समय</strong></h3>
31 अक्टूबर 2024 को पंजाब यूनिवर्सिटी की पुरानी सीनेट का कार्यकाल खत्म हो गया था।
नई सीनेट का चुनाव नहीं हुआ, और फिर <strong>1 </strong><strong>नवंबर 2025 (</strong><strong>पंजाब दिवस)</strong> के दिन केंद्र सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर सीनेट और सिंडिकेट दोनों को <strong>भंग (dissolve)</strong> कर दिया।
केंद्र ने कहा कि यूनिवर्सिटी का कामकाज सही तरह चलाने के लिए यह कदम उठाना ज़रूरी था।
<h3><strong>पंजाब सरकार का विरोध</strong></h3>
मुख्यमंत्री <strong>भगवंत मान</strong> ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि यह फैसला <strong>गैर-कानूनी</strong> है और <strong>केंद्र को ऐसा करने का अधिकार नहीं</strong> है।
उन्होंने कहा कि पंजाब यूनिवर्सिटी का मामला <strong>पंजाब पुनर्गठन एक्ट 1966</strong> और <strong>पंजाब यूनिवर्सिटी एक्ट 1947</strong> के तहत आता है, यानी इसका अधिकार <strong>पंजाब सरकार के पास</strong> है, न कि केंद्र के पास।
<h3><strong>सीएम भगवंत मान के 6 </strong><strong>मुख्य बयान</strong></h3>
<ol>
 	<li><strong>केंद्र को अधिकार नहीं:</strong> पंजाब यूनिवर्सिटी को भंग करने का अधिकार केंद्र को नहीं, बल्कि पंजाब सरकार को है।</li>
 	<li><strong>नोटिफिकेशन गैरकानूनी है:</strong> विधानसभा या संसद में संशोधन किए बिना सिर्फ नोटिफिकेशन जारी करना पूरी तरह असंवैधानिक है।</li>
 	<li><strong>हरियाणा की एंट्री की कोशिश:</strong> मान ने कहा कि पहले भी हरियाणा ने अपने कॉलेजों को पंजाब यूनिवर्सिटी से जोड़ने की कोशिश की थी, अब उसी बहाने से दोबारा एंट्री की जा रही है।</li>
 	<li><strong>सीनेट में हरियाणा के लोगों की एंट्री:</strong> उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार सीनेट में अपने लोगों को भेजने की योजना बना रही थी, जिसका हमें पहले से पता चल गया था।</li>
 	<li><strong>कानूनी लड़ाई का ऐलान:</strong> पंजाब सरकार अब इस फैसले के खिलाफ <strong>हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट</strong> जाएगी।</li>
 	<li><strong>धक्केशाही नहीं चलेगी:</strong> मान ने कहा कि “पहले बीबीएमबी और अब यूनिवर्सिटी – भाजपा लगातार पंजाब की प्रॉपर्टी और हकों पर कब्जा करने की कोशिश कर रही है, जो बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”</li>
</ol>
<h3><strong>पंजाब यूनिवर्सिटी का इतिहास और महत्व</strong></h3>
पंजाब यूनिवर्सिटी की शुरुआत <strong>लाहौर (अब पाकिस्तान)</strong> में हुई थी।
आजादी के बाद इसे पहले <strong>होशियारपुर</strong> और फिर <strong>चंडीगढ़</strong> स्थानांतरित किया गया।
पंजाब सरकार हर साल इस यूनिवर्सिटी को <strong>बजट से ग्रांट (financial grant)</strong> देती है।
इस वजह से पंजाब का दावा है कि यह <strong>राज्य की विरासत (heritage)</strong> और <strong>अधिकार (right)</strong> है।
<h3><strong>सीनेट क्या होती है?</strong></h3>
सीनेट यूनिवर्सिटी की सबसे ऊंची संस्था होती है, जो सभी बड़े फैसले लेती है।
इसका काम होता है –
<ul>
 	<li>यूनिवर्सिटी की <strong>policies </strong><strong>बनाना</strong>,</li>
 	<li><strong>administrative decisions </strong><strong>लेना</strong>,</li>
 	<li>और यूनिवर्सिटी का <strong>लोकतांत्रिक संचालन</strong> करना।</li>
</ul>
इसी सीनेट के चुनाव हर कुछ साल में होते हैं, लेकिन इस बार चुनाव न होने के कारण अब विवाद और गहरा हो गया है।
<h3><strong>हरियाणा से जुड़ा विवाद</strong></h3>
यह विवाद नया नहीं है।
हरियाणा लंबे समय से अपने कॉलेजों को पंजाब यूनिवर्सिटी के अधीन करने की मांग करता रहा है।
पंजाब का कहना है कि ऐसा करने से यूनिवर्सिटी की “<strong>पंजाबी पहचान और स्वायत्तता (autonomy)</strong>” खत्म हो जाएगी।
सीएम मान का आरोप है कि हरियाणा सरकार सीनेट में अपने प्रतिनिधियों को लाने की कोशिश कर रही थी, जिससे यूनिवर्सिटी के फैसलों पर उसका असर बढ़ जाए।
<h3><strong>केंद्र का पक्ष (संभावित तर्क)</strong></h3>
केंद्र का कहना है कि सीनेट का कार्यकाल खत्म हो चुका था और चुनाव न होने की वजह से यूनिवर्सिटी का प्रशासनिक काम रुक सकता था।
इसलिए अस्थायी तौर पर यह कदम उठाना पड़ा ताकि यूनिवर्सिटी का सिस्टम चलता रहे।
<h3><strong>अब आगे क्या होगा</strong></h3>
पंजाब सरकार ने साफ कर दिया है कि वह इस फैसले को <strong>कोर्ट में चुनौती</strong> देगी।
राज्य सरकार इसे पंजाब की “<strong>शैक्षणिक और सांस्कृतिक विरासत</strong>” से जुड़ा मामला बता रही है।
अब देखना होगा कि यह मामला <strong>राज्य बनाम केंद्र</strong> के अधिकार क्षेत्र की कानूनी लड़ाई में कैसे आगे बढ़ता है।

&nbsp;
<ul>
 	<li>केंद्र ने पंजाब यूनिवर्सिटी की सीनेट और सिंडिकेट भंग की।</li>
 	<li>पंजाब सरकार ने इसे “पंजाब विरोधी और गैर-कानूनी” बताया।</li>
 	<li>भगवंत मान बोले — “पंजाब यूनिवर्सिटी हमारी विरासत है, इसे किसी भी कीमत पर छीने नहीं देंगे।”</li>
 	<li>अब यह विवाद कोर्ट तक जाने वाला है।</li>
</ul>]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>केंद्र की तानाशाही! Guru Sahib की शहादत पर चर्चा से डर क्यों? AAP MP’s का BJP पर सीधा वार</title>
		<link>https://trendstopic.in/dictatorship-of-the-centre-why-fear-a-discussion-on-guru-sahibs-martyrdom-aap-mps-direct-attack-on-bjp/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 29 Oct 2025 04:10:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चंडीगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[AAP]]></category>
		<category><![CDATA[AAPvsBJP]]></category>
		<category><![CDATA[AcademicFreedom]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब यूनिवर्सिटी में होने वाला <strong>श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के </strong><strong>350</strong><strong>वें शहीदी दिवस</strong> को समर्पित सेमिनार अचानक रद्द कर दिया गया। इस फैसले से आम आदमी पार्टी (AAP) ने नाराज़गी जताई है और <strong>केंद्र की बीजेपी सरकार पर राजनीतिक दबाव डालने</strong> का आरोप लगाया है।

श्री आनंदपुर साहिब से AAP सांसद और पार्टी के पंजाब महासचिव <strong>मलविंदर सिंह कंग</strong> ने इस फैसले को “<strong>बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद</strong>” बताया। उन्होंने कहा कि <strong>बीजेपी पंजाब के गौरवशाली इतिहास और विरासत को दबाने की कोशिश कर रही है।</strong>

<strong>कंग बोले </strong><strong>— "</strong><strong>गुरु साहिब की शहादत पर चर्चा से डर क्यों</strong><strong>?"</strong>

मलविंदर सिंह कंग ने कहा कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सेमिनार रद्द करने का फैसला <strong>दिल्ली में बैठे अपने </strong><strong>‘</strong><strong>आकाओं</strong><strong>’ </strong><strong>यानी केंद्र सरकार</strong> के दबाव में लिया है।
उन्होंने सवाल उठाया — “जब श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की शहादत पूरी मानवता के लिए प्रेरणा है, तो उस पर चर्चा करने से डर क्यों लगता है?”

<strong>क्यों रद्द हुआ सेमिनार</strong><strong>?</strong>

छात्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने <strong>27 </strong><strong>अक्टूबर को होने वाले इस सेमिनार की अनुमति इसलिए रद्द की</strong>, क्योंकि इसमें <strong>प्रख्यात सिख विचारक और लेखक सरदार अजमेर सिंह</strong> को बुलाया गया था।
प्रशासन का कहना है कि सरदार अजमेर सिंह “विवादित व्यक्ति” हैं।

लेकिन सांसद कंग ने इस तर्क को <strong>पूरी तरह खारिज</strong> कर दिया। उन्होंने कहा कि “<strong>अजमेर सिंह जी पिछले </strong><strong>30 </strong><strong>सालों से सार्वजनिक जीवन में हैं</strong><strong>, </strong><strong>उन पर कोई केस नहीं है और वो देश-विदेश की यूनिवर्सिटियों में बोलते रहे हैं।</strong> उन्हें रोकना अकादमिक फ्रीडम यानी शैक्षणिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।”

<strong>सांसद ने </strong><strong>VC </strong><strong>को लिखा पत्र</strong>

कंग ने इस पूरे मामले पर <strong>पंजाब यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रो. रेनू विग</strong> को एक पत्र लिखकर तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है।
उन्होंने कहा कि कुलपति को किसी भी <strong>राजनीतिक दबाव</strong> में नहीं झुकना चाहिए और सेमिनार की <strong>अनुमति फिर से बहाल</strong> करनी चाहिए।

उन्होंने कहा, “<strong>गुरु तेग बहादुर साहिब जी की शहादत हमारे सिलेबस का हिस्सा होनी चाहिए</strong><strong>, </strong><strong>ताकि नौजवान इससे प्रेरणा लेकर बेहतर भविष्य बना सकें।</strong>”

<strong>“</strong><strong>यह सिर्फ एक सेमिनार नहीं</strong><strong>, </strong><strong>सोच पर हमला है</strong><strong>”</strong>

AAP सांसद ने कहा कि यह कोई साधारण घटना नहीं, बल्कि <strong>सोच पर हमला है</strong>।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार नहीं चाहती कि पंजाब के युवाओं को अपनी <strong>इतिहास और विरासत के असली नायकों</strong> के बारे में सच्ची जानकारी मिले।

उन्होंने इस घटना को <strong>शहीद भाई जसवंत सिंह खालड़ा की तस्वीर हटाए जाने</strong> जैसी घटनाओं की एक कड़ी बताया।
कंग के मुताबिक, “यह सब पंजाब के नौजवानों और सिख विरासत की आवाज़ को दबाने की कोशिश है।”

<strong>AAP </strong><strong>का साफ संदेश</strong>

AAP नेता ने कहा कि “<strong>पंजाब सरकार अपनी विरासत</strong><strong>, </strong><strong>इतिहास और युवाओं की आवाज़ को दबाने की किसी भी कोशिश का विरोध करेगी।</strong>
गुरु साहिब की कुर्बानी पूरी दुनिया मानती है, इसलिए इस विषय पर चर्चा रोकना बेहद शर्मनाक है।”

इस पूरे मामले ने पंजाब की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है —
क्या <strong>शैक्षणिक संस्थान अब राजनीतिक दबाव में काम कर रहे हैं</strong><strong>?</strong>
क्या <strong>इतिहास और विचारों पर रोक लगाने की कोशिश</strong> की जा रही है?
आम आदमी पार्टी ने साफ कहा है कि वह गुरु साहिब की शहादत पर चर्चा रोकने की किसी भी कोशिश को <strong>“</strong><strong>तानाशाही</strong><strong>”</strong> मानेगी और उसका विरोध करती रहेगी।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब यूनिवर्सिटी में होने वाला <strong>श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के </strong><strong>350</strong><strong>वें शहीदी दिवस</strong> को समर्पित सेमिनार अचानक रद्द कर दिया गया। इस फैसले से आम आदमी पार्टी (AAP) ने नाराज़गी जताई है और <strong>केंद्र की बीजेपी सरकार पर राजनीतिक दबाव डालने</strong> का आरोप लगाया है।

श्री आनंदपुर साहिब से AAP सांसद और पार्टी के पंजाब महासचिव <strong>मलविंदर सिंह कंग</strong> ने इस फैसले को “<strong>बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद</strong>” बताया। उन्होंने कहा कि <strong>बीजेपी पंजाब के गौरवशाली इतिहास और विरासत को दबाने की कोशिश कर रही है।</strong>

<strong>कंग बोले </strong><strong>— "</strong><strong>गुरु साहिब की शहादत पर चर्चा से डर क्यों</strong><strong>?"</strong>

मलविंदर सिंह कंग ने कहा कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सेमिनार रद्द करने का फैसला <strong>दिल्ली में बैठे अपने </strong><strong>‘</strong><strong>आकाओं</strong><strong>’ </strong><strong>यानी केंद्र सरकार</strong> के दबाव में लिया है।
उन्होंने सवाल उठाया — “जब श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की शहादत पूरी मानवता के लिए प्रेरणा है, तो उस पर चर्चा करने से डर क्यों लगता है?”

<strong>क्यों रद्द हुआ सेमिनार</strong><strong>?</strong>

छात्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने <strong>27 </strong><strong>अक्टूबर को होने वाले इस सेमिनार की अनुमति इसलिए रद्द की</strong>, क्योंकि इसमें <strong>प्रख्यात सिख विचारक और लेखक सरदार अजमेर सिंह</strong> को बुलाया गया था।
प्रशासन का कहना है कि सरदार अजमेर सिंह “विवादित व्यक्ति” हैं।

लेकिन सांसद कंग ने इस तर्क को <strong>पूरी तरह खारिज</strong> कर दिया। उन्होंने कहा कि “<strong>अजमेर सिंह जी पिछले </strong><strong>30 </strong><strong>सालों से सार्वजनिक जीवन में हैं</strong><strong>, </strong><strong>उन पर कोई केस नहीं है और वो देश-विदेश की यूनिवर्सिटियों में बोलते रहे हैं।</strong> उन्हें रोकना अकादमिक फ्रीडम यानी शैक्षणिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।”

<strong>सांसद ने </strong><strong>VC </strong><strong>को लिखा पत्र</strong>

कंग ने इस पूरे मामले पर <strong>पंजाब यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रो. रेनू विग</strong> को एक पत्र लिखकर तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है।
उन्होंने कहा कि कुलपति को किसी भी <strong>राजनीतिक दबाव</strong> में नहीं झुकना चाहिए और सेमिनार की <strong>अनुमति फिर से बहाल</strong> करनी चाहिए।

उन्होंने कहा, “<strong>गुरु तेग बहादुर साहिब जी की शहादत हमारे सिलेबस का हिस्सा होनी चाहिए</strong><strong>, </strong><strong>ताकि नौजवान इससे प्रेरणा लेकर बेहतर भविष्य बना सकें।</strong>”

<strong>“</strong><strong>यह सिर्फ एक सेमिनार नहीं</strong><strong>, </strong><strong>सोच पर हमला है</strong><strong>”</strong>

AAP सांसद ने कहा कि यह कोई साधारण घटना नहीं, बल्कि <strong>सोच पर हमला है</strong>।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार नहीं चाहती कि पंजाब के युवाओं को अपनी <strong>इतिहास और विरासत के असली नायकों</strong> के बारे में सच्ची जानकारी मिले।

उन्होंने इस घटना को <strong>शहीद भाई जसवंत सिंह खालड़ा की तस्वीर हटाए जाने</strong> जैसी घटनाओं की एक कड़ी बताया।
कंग के मुताबिक, “यह सब पंजाब के नौजवानों और सिख विरासत की आवाज़ को दबाने की कोशिश है।”

<strong>AAP </strong><strong>का साफ संदेश</strong>

AAP नेता ने कहा कि “<strong>पंजाब सरकार अपनी विरासत</strong><strong>, </strong><strong>इतिहास और युवाओं की आवाज़ को दबाने की किसी भी कोशिश का विरोध करेगी।</strong>
गुरु साहिब की कुर्बानी पूरी दुनिया मानती है, इसलिए इस विषय पर चर्चा रोकना बेहद शर्मनाक है।”

इस पूरे मामले ने पंजाब की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है —
क्या <strong>शैक्षणिक संस्थान अब राजनीतिक दबाव में काम कर रहे हैं</strong><strong>?</strong>
क्या <strong>इतिहास और विचारों पर रोक लगाने की कोशिश</strong> की जा रही है?
आम आदमी पार्टी ने साफ कहा है कि वह गुरु साहिब की शहादत पर चर्चा रोकने की किसी भी कोशिश को <strong>“</strong><strong>तानाशाही</strong><strong>”</strong> मानेगी और उसका विरोध करती रहेगी।]]></content:encoded>
					
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		<title>MP Malvinder Kang का आरोप – Delhi के दबाव में Punjab University ने Guru Tegh Bahadur Sahib पर Seminar रद्द किया</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 28 Oct 2025 04:41:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चंडीगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[AAP]]></category>
		<category><![CDATA[AcademicFreedom]]></category>
		<category><![CDATA[BreakingNews]]></category>
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					<description><![CDATA[श्री आनंदपुर साहिब से आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद <strong>मालविंदर सिंह कंग</strong> ने पंजाब यूनिवर्सिटी (PU) प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी ने <strong>श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की </strong><strong>350</strong><strong>वीं शहादत</strong> को समर्पित सेमिनार को दिल्ली के दबाव में रद्द किया है।

कंग ने इसे “<strong>बेहद दुर्भाग्यपूर्ण</strong>” और “<strong>दुखद फैसला</strong>” बताया। उन्होंने कहा कि यह फैसला उन लोगों की सोच को दर्शाता है जो <strong>गुरु साहिब की विरासत और इतिहास को युवाओं तक पहुंचने से रोकना चाहते हैं।</strong>

<strong>सेमिनार का विषय और विवाद</strong>

27 अक्टूबर को पंजाब यूनिवर्सिटी में <strong>गुरु तेग बहादुर साहिब जी की शहादत</strong> पर एक सेमिनार आयोजित होना था। लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन ने आखिरी समय में इसकी इजाजत रद्द कर दी।
सूत्रों के मुताबिक, प्रशासन ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि कार्यक्रम में <strong>प्रसिद्ध सिख लेखक और चिंतक सरदार अजमेर सिंह</strong> को बतौर स्पीकर बुलाया गया था। कुछ लोगों ने उन्हें “विवादास्पद” कहकर आपत्ति जताई।

इस पर सांसद कंग ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि <strong>सरदार अजमेर सिंह</strong> पिछले <strong>तीन दशकों से अधिक समय से सार्वजनिक जीवन</strong> में सक्रिय हैं, <strong>उन पर कोई केस नहीं है</strong>, और वे <strong>देश-विदेश की कई यूनिवर्सिटीज़ में लेक्चर दे चुके हैं।</strong>
कंग ने कहा – “अगर किसी स्कॉलर को बोलने से रोका जा रहा है, तो यह <strong>अकादमिक स्वतंत्रता (</strong><strong>Academic Freedom)</strong> पर सीधा हमला है।”

<strong>‘</strong><strong>दिल्ली से दबाव है</strong><strong>’ – </strong><strong>मालविंदर कंग</strong>

मालविंदर कंग ने आरोप लगाया कि यह फैसला <strong>दिल्ली में बैठे राजनीतिक आकाओं</strong> के दबाव में लिया गया है।
उन्होंने कहा,

“मुझे पता है कि वाइस चांसलर साहिब पर दिल्ली से दबाव डाला गया। केंद्र की बीजेपी सरकार नहीं चाहती कि गुरु तेग बहादुर साहिब की शहादत और उनकी प्रेरणादायक कहानी युवाओं तक पहुंचे।”

कंग ने कहा कि एक तरफ देश <strong>‘</strong><strong>हिंद की चादर</strong><strong>’</strong> की कुर्बानी को याद कर रहा है, दूसरी तरफ पंजाब की अपनी यूनिवर्सिटी में उनके इतिहास पर चर्चा करने से रोका जा रहा है।
उन्होंने इसे <strong>शहीद भाई जसवंत सिंह खालड़ा</strong> की तस्वीर हटाने जैसी घटनाओं की कड़ी बताया, जो पंजाब के युवाओं और सिख विरासत की आवाज को दबाने की कोशिश है।

<strong>कंग ने वाइस चांसलर को लिखा पत्र</strong>

मालविंदर कंग ने पंजाब यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर <strong>प्रो. रेनू विज्ज</strong> को एक <strong>औपचारिक चिट्ठी</strong> भी लिखी है।
उन्होंने मांग की कि सेमिनार की <strong>इजाजत तुरंत बहाल</strong> की जाए और यूनिवर्सिटी को <strong>किसी राजनीतिक दबाव में नहीं आना चाहिए।</strong>

उन्होंने कहा –

“गुरु तेग बहादुर साहिब की शहादत सिर्फ सिखों के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रेरणा है। उन्होंने धर्म, संस्कृति और मानवता की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व बलिदान दिया। यूनिवर्सिटी को यह छोटी सोच छोड़कर इस कार्यक्रम को अनुमति देनी चाहिए।”

<strong>कंग का यूनिवर्सिटी से जुड़ाव</strong>

मालविंदर कंग खुद <strong>पंजाब यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र</strong>, <strong>दो बार के स्टूडेंट काउंसिल अध्यक्ष</strong>, और <strong>पूर्व सीनेट सदस्य</strong> रह चुके हैं।
उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर साहिब का इतिहास और योगदान <strong>PU </strong><strong>के सिलेबस में शामिल</strong> होना चाहिए, ताकि युवा पीढ़ी उनसे प्रेरणा ले सके और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सके।

इस पूरे मामले ने यूनिवर्सिटी में <strong>अकादमिक स्वतंत्रता</strong><strong>, </strong><strong>धार्मिक विरासत और राजनीतिक दखलअंदाजी</strong> पर बहस छेड़ दी है।
एक तरफ सांसद कंग इसे “गुरु साहिब की विरासत पर हमला” बता रहे हैं, वहीं यूनिवर्सिटी प्रशासन अब तक अपने फैसले पर चुप है।

लोगों का कहना है कि गुरु तेग बहादुर साहिब की शहादत पर चर्चा को रोकना <strong>इतिहास और शिक्षा दोनों के साथ नाइंसाफी</strong> है।
अब देखना होगा कि पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन इस मामले में आगे क्या फैसला लेता है — क्या वह <strong>सेमिनार की इजाजत बहाल करेगा</strong>, या अपने रुख पर कायम रहेगा।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[श्री आनंदपुर साहिब से आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद <strong>मालविंदर सिंह कंग</strong> ने पंजाब यूनिवर्सिटी (PU) प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी ने <strong>श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की </strong><strong>350</strong><strong>वीं शहादत</strong> को समर्पित सेमिनार को दिल्ली के दबाव में रद्द किया है।

कंग ने इसे “<strong>बेहद दुर्भाग्यपूर्ण</strong>” और “<strong>दुखद फैसला</strong>” बताया। उन्होंने कहा कि यह फैसला उन लोगों की सोच को दर्शाता है जो <strong>गुरु साहिब की विरासत और इतिहास को युवाओं तक पहुंचने से रोकना चाहते हैं।</strong>

<strong>सेमिनार का विषय और विवाद</strong>

27 अक्टूबर को पंजाब यूनिवर्सिटी में <strong>गुरु तेग बहादुर साहिब जी की शहादत</strong> पर एक सेमिनार आयोजित होना था। लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन ने आखिरी समय में इसकी इजाजत रद्द कर दी।
सूत्रों के मुताबिक, प्रशासन ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि कार्यक्रम में <strong>प्रसिद्ध सिख लेखक और चिंतक सरदार अजमेर सिंह</strong> को बतौर स्पीकर बुलाया गया था। कुछ लोगों ने उन्हें “विवादास्पद” कहकर आपत्ति जताई।

इस पर सांसद कंग ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि <strong>सरदार अजमेर सिंह</strong> पिछले <strong>तीन दशकों से अधिक समय से सार्वजनिक जीवन</strong> में सक्रिय हैं, <strong>उन पर कोई केस नहीं है</strong>, और वे <strong>देश-विदेश की कई यूनिवर्सिटीज़ में लेक्चर दे चुके हैं।</strong>
कंग ने कहा – “अगर किसी स्कॉलर को बोलने से रोका जा रहा है, तो यह <strong>अकादमिक स्वतंत्रता (</strong><strong>Academic Freedom)</strong> पर सीधा हमला है।”

<strong>‘</strong><strong>दिल्ली से दबाव है</strong><strong>’ – </strong><strong>मालविंदर कंग</strong>

मालविंदर कंग ने आरोप लगाया कि यह फैसला <strong>दिल्ली में बैठे राजनीतिक आकाओं</strong> के दबाव में लिया गया है।
उन्होंने कहा,

“मुझे पता है कि वाइस चांसलर साहिब पर दिल्ली से दबाव डाला गया। केंद्र की बीजेपी सरकार नहीं चाहती कि गुरु तेग बहादुर साहिब की शहादत और उनकी प्रेरणादायक कहानी युवाओं तक पहुंचे।”

कंग ने कहा कि एक तरफ देश <strong>‘</strong><strong>हिंद की चादर</strong><strong>’</strong> की कुर्बानी को याद कर रहा है, दूसरी तरफ पंजाब की अपनी यूनिवर्सिटी में उनके इतिहास पर चर्चा करने से रोका जा रहा है।
उन्होंने इसे <strong>शहीद भाई जसवंत सिंह खालड़ा</strong> की तस्वीर हटाने जैसी घटनाओं की कड़ी बताया, जो पंजाब के युवाओं और सिख विरासत की आवाज को दबाने की कोशिश है।

<strong>कंग ने वाइस चांसलर को लिखा पत्र</strong>

मालविंदर कंग ने पंजाब यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर <strong>प्रो. रेनू विज्ज</strong> को एक <strong>औपचारिक चिट्ठी</strong> भी लिखी है।
उन्होंने मांग की कि सेमिनार की <strong>इजाजत तुरंत बहाल</strong> की जाए और यूनिवर्सिटी को <strong>किसी राजनीतिक दबाव में नहीं आना चाहिए।</strong>

उन्होंने कहा –

“गुरु तेग बहादुर साहिब की शहादत सिर्फ सिखों के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रेरणा है। उन्होंने धर्म, संस्कृति और मानवता की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व बलिदान दिया। यूनिवर्सिटी को यह छोटी सोच छोड़कर इस कार्यक्रम को अनुमति देनी चाहिए।”

<strong>कंग का यूनिवर्सिटी से जुड़ाव</strong>

मालविंदर कंग खुद <strong>पंजाब यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र</strong>, <strong>दो बार के स्टूडेंट काउंसिल अध्यक्ष</strong>, और <strong>पूर्व सीनेट सदस्य</strong> रह चुके हैं।
उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर साहिब का इतिहास और योगदान <strong>PU </strong><strong>के सिलेबस में शामिल</strong> होना चाहिए, ताकि युवा पीढ़ी उनसे प्रेरणा ले सके और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सके।

इस पूरे मामले ने यूनिवर्सिटी में <strong>अकादमिक स्वतंत्रता</strong><strong>, </strong><strong>धार्मिक विरासत और राजनीतिक दखलअंदाजी</strong> पर बहस छेड़ दी है।
एक तरफ सांसद कंग इसे “गुरु साहिब की विरासत पर हमला” बता रहे हैं, वहीं यूनिवर्सिटी प्रशासन अब तक अपने फैसले पर चुप है।

लोगों का कहना है कि गुरु तेग बहादुर साहिब की शहादत पर चर्चा को रोकना <strong>इतिहास और शिक्षा दोनों के साथ नाइंसाफी</strong> है।
अब देखना होगा कि पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन इस मामले में आगे क्या फैसला लेता है — क्या वह <strong>सेमिनार की इजाजत बहाल करेगा</strong>, या अपने रुख पर कायम रहेगा।]]></content:encoded>
					
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