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	<title>PoliticalHistory &#8211; Trends Topic</title>
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	<title>PoliticalHistory &#8211; Trends Topic</title>
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		<title>&#8216;Constitution Murder Day&#8217; पर बोले PM Modi– &#8220;हम Democracy के Protecter हर Warrior को Salute करते हैं&#8221;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Jun 2025 05:48:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[BharatKiAwaaz]]></category>
		<category><![CDATA[BlackDayInHistory]]></category>
		<category><![CDATA[ConstitutionMurderDay]]></category>
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		<category><![CDATA[PressFreedom]]></category>
		<category><![CDATA[TruthOfEmergency]]></category>
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					<description><![CDATA[25 जून 2025 को प्रधानमंत्री <strong>नरेन्द्र मोदी</strong> ने देश में 1975 में लगे <strong>आपातकाल (</strong><strong>Emergency)</strong> की 50वीं बरसी पर इसे <strong>‘संविधान हत्या दिवस’</strong> के रूप में याद किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म <strong>X (पूर्व ट्विटर)</strong> पर कई पोस्ट शेयर करते हुए उस दौर की घटनाओं को याद किया और लोकतंत्र की रक्षा में जुटे लोगों को <strong>श्रद्धांजलि और सम्मान</strong> दिया।

<strong>क्या था </strong><strong>Emergency?</strong>

25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री <strong>इंदिरा गांधी</strong> ने देश में आपातकाल लागू किया था, जो कि <strong>21 महीने</strong> (मार्च 1977 तक) चला। इस दौरान:
<ul>
 	<li><strong>संविधान में निहित मौलिक अधिकारों</strong> को सस्पेंड कर दिया गया,</li>
 	<li><strong>प्रेस की आज़ादी</strong> छीन ली गई,</li>
 	<li>हजारों <strong>राजनीतिक विरोधियों</strong><strong>, सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और आम नागरिकों</strong> को बिना किसी मुकदमे के जेल में डाल दिया गया।</li>
</ul>
देशभर में डर का माहौल था और लोकतंत्र पर गहरा संकट था।

<strong>पीएम मोदी का भावुक संदेश</strong>

पीएम मोदी ने लिखा:

<strong>"आज भारत के लोकतांत्रिक इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक, आपातकाल लागू होने के 50 साल पूरे हो गए हैं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि कैसे संविधान की मूल आत्मा को कुचल दिया गया था।"</strong>

उन्होंने कहा कि जो लोग आज लोकतंत्र की बात करते हैं, वही कभी लोकतंत्र को खत्म करने वालों में शामिल थे।

<strong>लोकतंत्र बचाने वाले योद्धाओं को नमन</strong>

एक अन्य पोस्ट में पीएम मोदी ने लिखा: <strong>"हम आपातकाल के खिलाफ डटकर खड़े रहे हर व्यक्ति को सलाम करते हैं। वे भारत के हर कोने से थे, अलग-अलग विचारधाराओं से थे, लेकिन एकजुट होकर लोकतंत्र को बचाने के लिए लड़े।"</strong>

उन्होंने बताया कि <strong>जनता के दबाव</strong> के चलते उस समय की कांग्रेस सरकार को लोकतंत्र बहाल करना पड़ा और 1977 के चुनाव में <strong>जनता पार्टी</strong> की ऐतिहासिक जीत हुई।

<strong>पीएम मोदी ने साझा किया अपना अनुभव</strong>

पीएम मोदी ने बताया कि जब आपातकाल लगा था, तब वे <strong>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (</strong><strong>RSS)</strong> के एक युवा प्रचारक थे। उन्होंने इस दौर को अपने लिए <strong>सीखने का अनुभव</strong> बताया।

<strong>"आपातकाल विरोधी आंदोलन से मुझे लोकतंत्र की अहमियत को गहराई से समझने का मौका मिला। मैंने अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े लोगों से बहुत कुछ सीखा।"</strong>

<strong>‘The Emergency Diaries’ नामक किताब का विमोचन</strong>

प्रधानमंत्री मोदी ने <strong>ब्लू क्राफ्ट डिजिटल फाउंडेशन</strong> द्वारा प्रकाशित नई किताब <strong>‘The Emergency Diaries – Years That Forged a Leader’</strong> का ज़िक्र किया। उन्होंने बताया कि इस किताब में आपातकाल के दौरान के अनुभवों और संघर्षों को दस्तावेज़ की तरह प्रस्तुत किया गया है।
<ul>
 	<li>इस किताब की प्रस्तावना <strong>पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा</strong> ने लिखी है।</li>
 	<li>इसका <strong>विमोचन आज केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह</strong> द्वारा किया गया।</li>
</ul>
<strong>लेटेस्ट अपडेट</strong>
<ul>
 	<li><strong>अमित शाह</strong> ने किताब विमोचन कार्यक्रम में कहा कि – <strong>“आपातकाल की सच्चाई को जानना हर युवा भारतीय के लिए जरूरी है, ताकि फिर कभी लोकतंत्र पर आंच न आए।”</strong></li>
 	<li>भाजपा ने इस अवसर पर देशभर में कई जगह <strong>'लोकतंत्र बचाओ मार्च' और सेमिनार्स</strong> का आयोजन किया है।</li>
</ul>
प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश सिर्फ अतीत की याद नहीं, बल्कि <strong>लोकतंत्र की रक्षा के लिए सतर्क रहने का आह्वान</strong> भी है। यह दिन उन लोगों की याद दिलाता है जिन्होंने <strong>बोलने की आज़ादी</strong><strong>, अभिव्यक्ति के हक और संविधान की रक्षा</strong> के लिए संघर्ष किया।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[25 जून 2025 को प्रधानमंत्री <strong>नरेन्द्र मोदी</strong> ने देश में 1975 में लगे <strong>आपातकाल (</strong><strong>Emergency)</strong> की 50वीं बरसी पर इसे <strong>‘संविधान हत्या दिवस’</strong> के रूप में याद किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म <strong>X (पूर्व ट्विटर)</strong> पर कई पोस्ट शेयर करते हुए उस दौर की घटनाओं को याद किया और लोकतंत्र की रक्षा में जुटे लोगों को <strong>श्रद्धांजलि और सम्मान</strong> दिया।

<strong>क्या था </strong><strong>Emergency?</strong>

25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री <strong>इंदिरा गांधी</strong> ने देश में आपातकाल लागू किया था, जो कि <strong>21 महीने</strong> (मार्च 1977 तक) चला। इस दौरान:
<ul>
 	<li><strong>संविधान में निहित मौलिक अधिकारों</strong> को सस्पेंड कर दिया गया,</li>
 	<li><strong>प्रेस की आज़ादी</strong> छीन ली गई,</li>
 	<li>हजारों <strong>राजनीतिक विरोधियों</strong><strong>, सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और आम नागरिकों</strong> को बिना किसी मुकदमे के जेल में डाल दिया गया।</li>
</ul>
देशभर में डर का माहौल था और लोकतंत्र पर गहरा संकट था।

<strong>पीएम मोदी का भावुक संदेश</strong>

पीएम मोदी ने लिखा:

<strong>"आज भारत के लोकतांत्रिक इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक, आपातकाल लागू होने के 50 साल पूरे हो गए हैं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि कैसे संविधान की मूल आत्मा को कुचल दिया गया था।"</strong>

उन्होंने कहा कि जो लोग आज लोकतंत्र की बात करते हैं, वही कभी लोकतंत्र को खत्म करने वालों में शामिल थे।

<strong>लोकतंत्र बचाने वाले योद्धाओं को नमन</strong>

एक अन्य पोस्ट में पीएम मोदी ने लिखा: <strong>"हम आपातकाल के खिलाफ डटकर खड़े रहे हर व्यक्ति को सलाम करते हैं। वे भारत के हर कोने से थे, अलग-अलग विचारधाराओं से थे, लेकिन एकजुट होकर लोकतंत्र को बचाने के लिए लड़े।"</strong>

उन्होंने बताया कि <strong>जनता के दबाव</strong> के चलते उस समय की कांग्रेस सरकार को लोकतंत्र बहाल करना पड़ा और 1977 के चुनाव में <strong>जनता पार्टी</strong> की ऐतिहासिक जीत हुई।

<strong>पीएम मोदी ने साझा किया अपना अनुभव</strong>

पीएम मोदी ने बताया कि जब आपातकाल लगा था, तब वे <strong>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (</strong><strong>RSS)</strong> के एक युवा प्रचारक थे। उन्होंने इस दौर को अपने लिए <strong>सीखने का अनुभव</strong> बताया।

<strong>"आपातकाल विरोधी आंदोलन से मुझे लोकतंत्र की अहमियत को गहराई से समझने का मौका मिला। मैंने अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े लोगों से बहुत कुछ सीखा।"</strong>

<strong>‘The Emergency Diaries’ नामक किताब का विमोचन</strong>

प्रधानमंत्री मोदी ने <strong>ब्लू क्राफ्ट डिजिटल फाउंडेशन</strong> द्वारा प्रकाशित नई किताब <strong>‘The Emergency Diaries – Years That Forged a Leader’</strong> का ज़िक्र किया। उन्होंने बताया कि इस किताब में आपातकाल के दौरान के अनुभवों और संघर्षों को दस्तावेज़ की तरह प्रस्तुत किया गया है।
<ul>
 	<li>इस किताब की प्रस्तावना <strong>पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा</strong> ने लिखी है।</li>
 	<li>इसका <strong>विमोचन आज केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह</strong> द्वारा किया गया।</li>
</ul>
<strong>लेटेस्ट अपडेट</strong>
<ul>
 	<li><strong>अमित शाह</strong> ने किताब विमोचन कार्यक्रम में कहा कि – <strong>“आपातकाल की सच्चाई को जानना हर युवा भारतीय के लिए जरूरी है, ताकि फिर कभी लोकतंत्र पर आंच न आए।”</strong></li>
 	<li>भाजपा ने इस अवसर पर देशभर में कई जगह <strong>'लोकतंत्र बचाओ मार्च' और सेमिनार्स</strong> का आयोजन किया है।</li>
</ul>
प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश सिर्फ अतीत की याद नहीं, बल्कि <strong>लोकतंत्र की रक्षा के लिए सतर्क रहने का आह्वान</strong> भी है। यह दिन उन लोगों की याद दिलाता है जिन्होंने <strong>बोलने की आज़ादी</strong><strong>, अभिव्यक्ति के हक और संविधान की रक्षा</strong> के लिए संघर्ष किया।]]></content:encoded>
					
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		<title>‘Emergency के 50 साल’ event में बोले Amit Shah – “जो आज democracy की बात करते हैं, वही कभी democracy को निगल गए थे”</title>
		<link>https://trendstopic.in/at-the-50-years-of-emergency-event-amit-shah-said-those-who-talk-about-democracy-today-are-the-ones-who-once-swallowed-it/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Jun 2025 05:33:52 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[‘आपातकाल के 50 साल’ पूरे होने के मौके पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री <strong>अमित शाह</strong> ने कांग्रेस पार्टी और पूर्व प्रधानमंत्री <strong>इंदिरा गांधी</strong> पर जमकर हमला बोला। उन्होंने आपातकाल को भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का सबसे <strong>काला अध्याय</strong> बताया और कहा कि उस दौर में देश की <strong>जनता की आवाज को कुचल दिया गया था।</strong>

कार्यक्रम में बोलते हुए शाह ने कहा –

“25 जून 1975 की सुबह 8 बजे, इंदिरा गांधी ने <strong>ऑल इंडिया रेडियो</strong> पर देश को बताया कि राष्ट्रपति ने आपातकाल लगा दिया है।
लेकिन क्या संसद से मंजूरी ली गई? क्या कैबिनेट की मीटिंग बुलाई गई? क्या विपक्ष को भरोसे में लिया गया? कुछ भी नहीं किया गया।
सिर्फ सत्ता बचाने के लिए लोकतंत्र का गला घोंटा गया।”

<strong>“</strong><strong>लोकतंत्र को निगल गई थी कांग्रेस</strong><strong>”</strong>

अमित शाह ने तीखे शब्दों में कहा –

“आज जो लोग हर मंच से लोकतंत्र की बात करते हैं, उन्हें पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए।
वे उस पार्टी से जुड़े हैं जिसने लोकतंत्र को ही <strong>खत्म करने का काम किया।</strong>
उस वक्त वजह बताई गई – ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’, लेकिन <strong>असल वजह थी सत्ता की रक्षा</strong>। इंदिरा गांधी ने नैतिकता को त्याग कर प्रधानमंत्री पद पर बने रहने का निर्णय लिया।”

<strong>“</strong><strong>इंदिरा गांधी को नहीं था संसद में वोट देने का अधिकार</strong><strong>”</strong>

शाह ने आगे कहा कि आपातकाल के समय इंदिरा गांधी खुद एक ऐसी स्थिति में थीं जहां वो न तो संसद में वोट डाल सकती थीं और न ही उनके पास कोई नैतिक अधिकार था प्रधानमंत्री बने रहने का।

“फिर भी उन्होंने सत्ता नहीं छोड़ी। ये लोकतंत्र नहीं, <strong>तानाशाही</strong> थी।”

<strong>क्या था </strong><strong>Emergency?</strong>

भारत में <strong>25 </strong><strong>जून </strong><strong>1975 </strong><strong>से </strong><strong>21 </strong><strong>मार्च </strong><strong>1977</strong> तक आपातकाल लागू रहा।
यह कदम तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सिफारिश पर राष्ट्रपति <strong>फखरुद्दीन अली अहमद</strong> ने उठाया था।
इस दौरान:
<ul>
 	<li>मीडिया पर <strong>सेंसरशिप</strong> लगाई गई,</li>
 	<li>हजारों <strong>विपक्षी नेताओं को जेल</strong> में डाला गया,</li>
 	<li>नागरिकों के <strong>मौलिक अधिकारों को निलंबित</strong> कर दिया गया।</li>
</ul>
इस समय को आज भी लोग भारत के <strong>लोकतंत्र पर हमले</strong> के रूप में याद करते हैं।

<strong>अमित शाह की अपील</strong>

कार्यक्रम के अंत में गृह मंत्री ने युवाओं से खासतौर पर अपील की कि वे देश के इतिहास को जानें और लोकतंत्र की रक्षा के लिए हमेशा <strong>सजग और सतर्क</strong> रहें।

“आपातकाल सिर्फ एक तारीख नहीं, एक चेतावनी है – कि अगर लोकतंत्र को कमजोर किया गया, तो देश को उसकी बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है।”

अमित शाह का यह भाषण न सिर्फ कांग्रेस की आलोचना थी, बल्कि यह लोकतंत्र की <strong>मूल्यवत्ता और रक्षा</strong> की अहमियत को दोहराने का एक प्रयास भी था।
‘आपातकाल के 50 साल’ की यह चर्चा आने वाले समय में भारतीय राजनीति और इतिहास की बहसों को एक बार फिर तेज कर सकती है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[‘आपातकाल के 50 साल’ पूरे होने के मौके पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री <strong>अमित शाह</strong> ने कांग्रेस पार्टी और पूर्व प्रधानमंत्री <strong>इंदिरा गांधी</strong> पर जमकर हमला बोला। उन्होंने आपातकाल को भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का सबसे <strong>काला अध्याय</strong> बताया और कहा कि उस दौर में देश की <strong>जनता की आवाज को कुचल दिया गया था।</strong>

कार्यक्रम में बोलते हुए शाह ने कहा –

“25 जून 1975 की सुबह 8 बजे, इंदिरा गांधी ने <strong>ऑल इंडिया रेडियो</strong> पर देश को बताया कि राष्ट्रपति ने आपातकाल लगा दिया है।
लेकिन क्या संसद से मंजूरी ली गई? क्या कैबिनेट की मीटिंग बुलाई गई? क्या विपक्ष को भरोसे में लिया गया? कुछ भी नहीं किया गया।
सिर्फ सत्ता बचाने के लिए लोकतंत्र का गला घोंटा गया।”

<strong>“</strong><strong>लोकतंत्र को निगल गई थी कांग्रेस</strong><strong>”</strong>

अमित शाह ने तीखे शब्दों में कहा –

“आज जो लोग हर मंच से लोकतंत्र की बात करते हैं, उन्हें पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए।
वे उस पार्टी से जुड़े हैं जिसने लोकतंत्र को ही <strong>खत्म करने का काम किया।</strong>
उस वक्त वजह बताई गई – ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’, लेकिन <strong>असल वजह थी सत्ता की रक्षा</strong>। इंदिरा गांधी ने नैतिकता को त्याग कर प्रधानमंत्री पद पर बने रहने का निर्णय लिया।”

<strong>“</strong><strong>इंदिरा गांधी को नहीं था संसद में वोट देने का अधिकार</strong><strong>”</strong>

शाह ने आगे कहा कि आपातकाल के समय इंदिरा गांधी खुद एक ऐसी स्थिति में थीं जहां वो न तो संसद में वोट डाल सकती थीं और न ही उनके पास कोई नैतिक अधिकार था प्रधानमंत्री बने रहने का।

“फिर भी उन्होंने सत्ता नहीं छोड़ी। ये लोकतंत्र नहीं, <strong>तानाशाही</strong> थी।”

<strong>क्या था </strong><strong>Emergency?</strong>

भारत में <strong>25 </strong><strong>जून </strong><strong>1975 </strong><strong>से </strong><strong>21 </strong><strong>मार्च </strong><strong>1977</strong> तक आपातकाल लागू रहा।
यह कदम तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सिफारिश पर राष्ट्रपति <strong>फखरुद्दीन अली अहमद</strong> ने उठाया था।
इस दौरान:
<ul>
 	<li>मीडिया पर <strong>सेंसरशिप</strong> लगाई गई,</li>
 	<li>हजारों <strong>विपक्षी नेताओं को जेल</strong> में डाला गया,</li>
 	<li>नागरिकों के <strong>मौलिक अधिकारों को निलंबित</strong> कर दिया गया।</li>
</ul>
इस समय को आज भी लोग भारत के <strong>लोकतंत्र पर हमले</strong> के रूप में याद करते हैं।

<strong>अमित शाह की अपील</strong>

कार्यक्रम के अंत में गृह मंत्री ने युवाओं से खासतौर पर अपील की कि वे देश के इतिहास को जानें और लोकतंत्र की रक्षा के लिए हमेशा <strong>सजग और सतर्क</strong> रहें।

“आपातकाल सिर्फ एक तारीख नहीं, एक चेतावनी है – कि अगर लोकतंत्र को कमजोर किया गया, तो देश को उसकी बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है।”

अमित शाह का यह भाषण न सिर्फ कांग्रेस की आलोचना थी, बल्कि यह लोकतंत्र की <strong>मूल्यवत्ता और रक्षा</strong> की अहमियत को दोहराने का एक प्रयास भी था।
‘आपातकाल के 50 साल’ की यह चर्चा आने वाले समय में भारतीय राजनीति और इतिहास की बहसों को एक बार फिर तेज कर सकती है।]]></content:encoded>
					
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