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	<title>Pashupalan &#8211; Trends Topic</title>
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	<title>Pashupalan &#8211; Trends Topic</title>
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	<item>
		<title>इंसानों के साथ-साथ पशुओं की भी सच्ची रक्षक! Punjab Government ने सिर्फ 7 दिन में 1.75 Lakh से ज्यादा पशुओं को ‘Gal-Ghotu’ से बचाया</title>
		<link>https://trendstopic.in/a-true-protector-of-both-humans-and-animals-punjab-government-saves-over-1-75-lakh-animals-from-gal-ghotu-disease-in-just-7-days/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 24 Sep 2025 03:53:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब ने हमेशा अपने <strong>किसानों और पशुधन (</strong><strong>livestock)</strong> को सुरक्षित रखने में मिसाल कायम की है। हाल ही में आई भारी <strong>बाढ़</strong> ने राज्य को गहरी चोट दी। कई गांव पानी में डूब गए, लोग और पशु दोनों फंस गए। ऐसे में पंजाब सरकार ने तेजी से कदम उठाते हुए न सिर्फ इंसानों को बचाया बल्कि बेजुबान पशुओं की सुरक्षा को भी अपनी पहली जिम्मेदारी माना।

इस दौरान सबसे बड़ी चुनौती <strong>‘</strong><strong>गल-घोटू</strong><strong>’ </strong><strong>बीमारी</strong> को फैलने से रोकना थी। गल-घोटू एक खतरनाक बीमारी है जो खासतौर पर <strong>गाय</strong><strong>, </strong><strong>भैंस और अन्य पालतू पशुओं</strong> में फैलती है। इसमें पशु की सांस की नली सूज जाती है, जिससे उसका दम घुटने लगता है। अगर समय पर इलाज न मिले तो यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती है।

<strong>बाढ़ में फंसे </strong><strong>5 </strong><strong>लाख से ज्यादा पशुओं की जान बचाई</strong>

बाढ़ के दिनों में सरकार ने बड़े पैमाने पर <strong>रेस्क्यू ऑपरेशन</strong> चलाया।
<ul>
 	<li><strong>ड्रोन और नावों</strong> की मदद से खेतों और घरों की छतों पर फंसे हुए पशुओं को ढूंढकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।</li>
 	<li>सिर्फ इंसानों को ही नहीं, बल्कि <strong>5 </strong><strong>लाख से ज्यादा पशुओं</strong> को भी बचाया गया।</li>
 	<li>बचाए गए पशुओं के लिए <strong>खाने-पीने और मेडिकल सुविधा</strong> का भी पूरा इंतजाम किया गया।</li>
</ul>
मुख्यमंत्री <strong>भगवंत मान</strong> ने कहा कि "हमारी सरकार हर जीव की सुरक्षा के लिए काम करती है। पंजाब के पशु, किसानों की कमाई और खेती-बाड़ी का अहम हिस्सा हैं। जब हम पशुओं को बचाते हैं, तो दरअसल हम पंजाब के भविष्य को बचाते हैं।"

<strong>गल-घोटू से बचाने के लिए टीकाकरण अभियान</strong>

बाढ़ का पानी उतरने के बाद गल-घोटू बीमारी फैलने का खतरा सबसे बड़ा था। इसे रोकने के लिए पंजाब सरकार ने 14 सितंबर से <strong>टीकाकरण (</strong><strong>vaccination) </strong><strong>अभियान</strong> शुरू किया।
<ul>
 	<li>सिर्फ <strong>7 </strong><strong>दिन में</strong>,
<ul>
 	<li><strong>713 </strong><strong>गांवों</strong> में,</li>
 	<li><strong>1.75 </strong><strong>लाख से ज्यादा पशुओं</strong> को गल-घोटू का टीका लगाया गया।</li>
</ul>
</li>
</ul>
पशुपालन मंत्री <strong>गुरमीत सिंह खुड्डियां</strong> ने बताया कि यह टीकाकरण अभियान न सिर्फ पशुओं की जान बचाने के लिए है, बल्कि हजारों किसान परिवारों की <strong>रोज़ी-रोटी</strong> और <strong>भविष्य की कमाई</strong> को भी सुरक्षित करने के लिए है।

<strong>कौन-कौन से जिले प्रभावित हुए</strong>

यह अभियान खासतौर पर उन जिलों में चलाया गया जो बाढ़ और गल-घोटू से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए थे:
अमृतसर, फाजिल्का, फिरोजपुर, गुरदासपुर, होशियारपुर, जालंधर, कपूरथला, मोगा, पठानकोट, रूपनगर और तरनतारन।

<strong>सरकार की और पहलें</strong>

पंजाब सरकार ने सिर्फ टीकाकरण तक ही सीमित न रहकर कई और कदम उठाए हैं:
<ul>
 	<li><strong>मोबाइल पशु चिकित्सा गाड़ियां (</strong><strong>Mobile Vet Vans)</strong> शुरू की गईं।</li>
 	<li>जरूरतमंद किसानों को <strong>मुफ्त दवाएं</strong> दी जा रही हैं।</li>
 	<li><strong>जागरूकता कार्यक्रम</strong> और <strong>वर्कशॉप्स</strong> आयोजित किए जा रहे हैं।
<ul>
 	<li>जिनमें किसानों को गल-घोटू बीमारी की पहचान, बचाव और देखभाल की जानकारी दी जा रही है।</li>
</ul>
</li>
</ul>
इसके अलावा, <strong>पशुओं के लिए अस्थायी शेल्टर</strong> और <strong>खुराक की सप्लाई</strong> की भी व्यवस्था की गई है, ताकि कोई भी पशु भूखा या बीमार न रहे।

<strong>भविष्य के लिए मजबूत सिस्टम की तैयारी</strong>

पंजाब सरकार का यह अभियान सिर्फ मौजूदा संकट को हल करने के लिए नहीं है, बल्कि भविष्य के लिए एक <strong>मजबूत सिस्टम</strong> तैयार करने का प्रयास भी है।
<ul>
 	<li>ताकि किसी भी प्राकृतिक आपदा या बीमारी के समय <strong>तेजी से कार्रवाई</strong> की जा सके।</li>
 	<li>किसानों को <strong>कम से कम नुकसान</strong> हो और उनकी <strong>खेती-बाड़ी की सुरक्षा</strong> बनी रहे।</li>
</ul>
पशुपालन मंत्री ने यह भी कहा कि आने वाले समय में हर जिले में <strong>तेजी से रेस्पॉन्स टीम</strong> तैयार की जाएगी जो किसी भी आपात स्थिति में तुरंत काम कर सके।

पंजाब सरकार का यह कदम दिखाता है कि यह सिर्फ "लोगों की सरकार" नहीं, बल्कि एक <strong>"</strong><strong>सेवक सरकार"</strong> है। जो इंसानों के साथ-साथ <strong>बेजुबान पशुओं</strong> की सुरक्षा को भी उतनी ही अहमियत देती है।

इस अभियान ने न सिर्फ लाखों पशुओं की जान बचाई है, बल्कि हजारों किसानों को <strong>भारी नुकसान</strong> से भी बचाया है।
आज पंजाब के किसान और पशु दोनों ही सुरक्षित हैं क्योंकि सरकार ने समय पर <strong>तेजी और जिम्मेदारी से कदम उठाए।</strong>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब ने हमेशा अपने <strong>किसानों और पशुधन (</strong><strong>livestock)</strong> को सुरक्षित रखने में मिसाल कायम की है। हाल ही में आई भारी <strong>बाढ़</strong> ने राज्य को गहरी चोट दी। कई गांव पानी में डूब गए, लोग और पशु दोनों फंस गए। ऐसे में पंजाब सरकार ने तेजी से कदम उठाते हुए न सिर्फ इंसानों को बचाया बल्कि बेजुबान पशुओं की सुरक्षा को भी अपनी पहली जिम्मेदारी माना।

इस दौरान सबसे बड़ी चुनौती <strong>‘</strong><strong>गल-घोटू</strong><strong>’ </strong><strong>बीमारी</strong> को फैलने से रोकना थी। गल-घोटू एक खतरनाक बीमारी है जो खासतौर पर <strong>गाय</strong><strong>, </strong><strong>भैंस और अन्य पालतू पशुओं</strong> में फैलती है। इसमें पशु की सांस की नली सूज जाती है, जिससे उसका दम घुटने लगता है। अगर समय पर इलाज न मिले तो यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती है।

<strong>बाढ़ में फंसे </strong><strong>5 </strong><strong>लाख से ज्यादा पशुओं की जान बचाई</strong>

बाढ़ के दिनों में सरकार ने बड़े पैमाने पर <strong>रेस्क्यू ऑपरेशन</strong> चलाया।
<ul>
 	<li><strong>ड्रोन और नावों</strong> की मदद से खेतों और घरों की छतों पर फंसे हुए पशुओं को ढूंढकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।</li>
 	<li>सिर्फ इंसानों को ही नहीं, बल्कि <strong>5 </strong><strong>लाख से ज्यादा पशुओं</strong> को भी बचाया गया।</li>
 	<li>बचाए गए पशुओं के लिए <strong>खाने-पीने और मेडिकल सुविधा</strong> का भी पूरा इंतजाम किया गया।</li>
</ul>
मुख्यमंत्री <strong>भगवंत मान</strong> ने कहा कि "हमारी सरकार हर जीव की सुरक्षा के लिए काम करती है। पंजाब के पशु, किसानों की कमाई और खेती-बाड़ी का अहम हिस्सा हैं। जब हम पशुओं को बचाते हैं, तो दरअसल हम पंजाब के भविष्य को बचाते हैं।"

<strong>गल-घोटू से बचाने के लिए टीकाकरण अभियान</strong>

बाढ़ का पानी उतरने के बाद गल-घोटू बीमारी फैलने का खतरा सबसे बड़ा था। इसे रोकने के लिए पंजाब सरकार ने 14 सितंबर से <strong>टीकाकरण (</strong><strong>vaccination) </strong><strong>अभियान</strong> शुरू किया।
<ul>
 	<li>सिर्फ <strong>7 </strong><strong>दिन में</strong>,
<ul>
 	<li><strong>713 </strong><strong>गांवों</strong> में,</li>
 	<li><strong>1.75 </strong><strong>लाख से ज्यादा पशुओं</strong> को गल-घोटू का टीका लगाया गया।</li>
</ul>
</li>
</ul>
पशुपालन मंत्री <strong>गुरमीत सिंह खुड्डियां</strong> ने बताया कि यह टीकाकरण अभियान न सिर्फ पशुओं की जान बचाने के लिए है, बल्कि हजारों किसान परिवारों की <strong>रोज़ी-रोटी</strong> और <strong>भविष्य की कमाई</strong> को भी सुरक्षित करने के लिए है।

<strong>कौन-कौन से जिले प्रभावित हुए</strong>

यह अभियान खासतौर पर उन जिलों में चलाया गया जो बाढ़ और गल-घोटू से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए थे:
अमृतसर, फाजिल्का, फिरोजपुर, गुरदासपुर, होशियारपुर, जालंधर, कपूरथला, मोगा, पठानकोट, रूपनगर और तरनतारन।

<strong>सरकार की और पहलें</strong>

पंजाब सरकार ने सिर्फ टीकाकरण तक ही सीमित न रहकर कई और कदम उठाए हैं:
<ul>
 	<li><strong>मोबाइल पशु चिकित्सा गाड़ियां (</strong><strong>Mobile Vet Vans)</strong> शुरू की गईं।</li>
 	<li>जरूरतमंद किसानों को <strong>मुफ्त दवाएं</strong> दी जा रही हैं।</li>
 	<li><strong>जागरूकता कार्यक्रम</strong> और <strong>वर्कशॉप्स</strong> आयोजित किए जा रहे हैं।
<ul>
 	<li>जिनमें किसानों को गल-घोटू बीमारी की पहचान, बचाव और देखभाल की जानकारी दी जा रही है।</li>
</ul>
</li>
</ul>
इसके अलावा, <strong>पशुओं के लिए अस्थायी शेल्टर</strong> और <strong>खुराक की सप्लाई</strong> की भी व्यवस्था की गई है, ताकि कोई भी पशु भूखा या बीमार न रहे।

<strong>भविष्य के लिए मजबूत सिस्टम की तैयारी</strong>

पंजाब सरकार का यह अभियान सिर्फ मौजूदा संकट को हल करने के लिए नहीं है, बल्कि भविष्य के लिए एक <strong>मजबूत सिस्टम</strong> तैयार करने का प्रयास भी है।
<ul>
 	<li>ताकि किसी भी प्राकृतिक आपदा या बीमारी के समय <strong>तेजी से कार्रवाई</strong> की जा सके।</li>
 	<li>किसानों को <strong>कम से कम नुकसान</strong> हो और उनकी <strong>खेती-बाड़ी की सुरक्षा</strong> बनी रहे।</li>
</ul>
पशुपालन मंत्री ने यह भी कहा कि आने वाले समय में हर जिले में <strong>तेजी से रेस्पॉन्स टीम</strong> तैयार की जाएगी जो किसी भी आपात स्थिति में तुरंत काम कर सके।

पंजाब सरकार का यह कदम दिखाता है कि यह सिर्फ "लोगों की सरकार" नहीं, बल्कि एक <strong>"</strong><strong>सेवक सरकार"</strong> है। जो इंसानों के साथ-साथ <strong>बेजुबान पशुओं</strong> की सुरक्षा को भी उतनी ही अहमियत देती है।

इस अभियान ने न सिर्फ लाखों पशुओं की जान बचाई है, बल्कि हजारों किसानों को <strong>भारी नुकसान</strong> से भी बचाया है।
आज पंजाब के किसान और पशु दोनों ही सुरक्षित हैं क्योंकि सरकार ने समय पर <strong>तेजी और जिम्मेदारी से कदम उठाए।</strong>]]></content:encoded>
					
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