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	<title>Parliament &#8211; Trends Topic</title>
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	<title>Parliament &#8211; Trends Topic</title>
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	<item>
		<title>Vande Mataram: PM Modi के संबोधन की बड़ी बातें— “लाखों लोगों ने Vande Mataram का नारा लगाया, तभी हम आज यहां हैं”</title>
		<link>https://trendstopic.in/vande-mataram-key-highlights-of-pm-modis-address-lakhs-of-people-raised-the-slogan-vande-mataram-thats-why-we-are-here-today/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 08 Dec 2025 10:23:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[150Years]]></category>
		<category><![CDATA[BreakingNews]]></category>
		<category><![CDATA[FreedomMovement]]></category>
		<category><![CDATA[IndiaNews]]></category>
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		<category><![CDATA[PMModi]]></category>
		<category><![CDATA[VandeMataram]]></category>
		<category><![CDATA[VandeMataram150]]></category>
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					<description><![CDATA[संसद में <em>वंदे मातरम् के 150 </em><em>साल</em> पूरे होने पर मंगलवार को एक खास चर्चा हुई। इस चर्चा की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन से की। उन्होंने वंदे मातरम् के इतिहास, आज़ादी के आंदोलन में उसकी भूमिका, महिलाओं और युवाओं के योगदान, अंग्रेजों की नीतियों, और कांग्रेस के रुख पर विस्तार से बात की।

पीएम मोदी ने कहा कि <em>वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं, </em><em>बल्कि ऐसा मंत्र है जिसने देश को आज़ादी दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई</em>। उन्होंने कहा कि आज सांसदों और देश के लिए यह मौका है कि हम उस गीत का ऋण स्वीकार करें जिसने आज़ादी की राह तैयार की।
<h2><strong>वंदे मातरम् की </strong><strong>150 </strong><strong>साल की यात्रा: पीएम मोदी ने क्या कहा</strong></h2>
<h3><strong>1. 150 </strong><strong>साल की यात्रा</strong><strong>—</strong><strong>गुलामी</strong><strong>, </strong><strong>आपातकाल और आज़ादी का संघर्ष</strong></h3>
प्रधानमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम् की यात्रा आसान नहीं रही।
<ul>
 	<li>जब इसके 50 साल हुए, देश पर गुलामी की जंजीरें थीं।</li>
 	<li>जब 100 साल हुए, देश में Emergency लगी थी और लोकतंत्र दबा हुआ था।</li>
 	<li>और जब 150 साल का ये खास मौका आया, तब हम आज़ाद भारत में इसे गर्व से मना रहे हैं।</li>
</ul>
पीएम के अनुसार, यह सिर्फ इतिहास को याद करने नहीं, बल्कि उस प्रेरणा को फिर से महसूस करने का समय है जिसने आज़ादी की लड़ाई को ऊर्जा दी।
<h2><strong>2. </strong><strong>वंदे मातरम्</strong><strong>—</strong><strong>आज़ादी की असली ताकत</strong></h2>
पीएम मोदी बोले—
<em>“</em><em>लाखों लोगों ने वंदे मातरम् का नारा लगाकर आज़ादी की लड़ाई लड़ी। उसी का परिणाम है कि हम आज संसद में बैठे हैं.”</em>

उन्होंने कहा कि यह मुद्दा किसी पार्टी का नहीं, पूरे देश का है। वंदे मातरम् ने लोगों को एकजुट किया और अंग्रेजों के खिलाफ खड़ा होने की शक्ति दी।
<h2><strong>3. </strong><strong>बंगाल विभाजन और वंदे मातरम् का दमदार विरोध</strong></h2>
1905 में अंग्रेजों ने Bengal Partition किया। इसे तोड़ने की कोशिश में अंग्रेजों को लगा कि भारत कमजोर पड़ जाएगा।
लेकिन उल्टा हुआ—
<ul>
 	<li>वंदे मातरम् हर गली–गली में गूंजने लगा।</li>
 	<li>यह विभाजन के खिलाफ आंदोलन का सबसे बड़ा हथियार बन गया।</li>
 	<li>अंग्रेजों के लिए ये नारा सबसे बड़ी चुनौती बन गया।</li>
</ul>
पीएम ने कहा कि अंग्रेज समझ चुके थे कि भारत में “Divide and Rule” (बांटो और राज करो) के बिना राज करना मुश्किल है, और उसकी शुरुआत बंगाल से की गई थी।
<h2><strong>4. </strong><strong>महिलाओं और बच्चों का संघर्ष</strong><strong>—</strong><strong>बारिसाल का बड़ा आंदोलन</strong></h2>
पीएम मोदी ने बारिसाल (अब बांग्लादेश) का जिक्र किया।
उन्होंने बताया कि वंदे मातरम् पर पाबंदी के खिलाफ सबसे ज्यादा जुर्माने वहीं लगे।

कुछ मुख्य बातें—
<ul>
 	<li>महिलाओं ने बड़ी संख्या में वंदे मातरम् के समर्थन में आंदोलन किया।</li>
 	<li>सरोजिनी बोस ने प्रतिज्ञा ली कि <em>जब तक प्रतिबंध नहीं हटेगा, </em><em>वह चूड़ियाँ नहीं पहनेंगी</em>।</li>
 	<li>बच्चों तक को ‘प्रभात फेरियां’ निकालने पर कोड़े मारे जाते थे।</li>
</ul>
यह बताता है कि वंदे मातरम् हर उम्र और वर्ग की आवाज था।
<h2><strong>5. </strong><strong>विदेश में भी गूंजा वंदे मातरम्</strong></h2>
अंग्रेजों ने अखबारों पर रोक लगाई तो मैडम भीकाजी कामा ने पेरिस से एक अखबार निकाला।
उसका नाम था—<strong>Vande Mataram</strong>।
<ul>
 	<li>1907 में O. चिदंबरम पिल्लै ने स्वदेशी जहाज बनाया और उस पर भी “Vande Mataram” लिखा था।</li>
 	<li>राष्ट्रकवि सुब्रमण्यम भारती ने इसका तमिल अनुवाद किया।</li>
</ul>
यह दिखाता है कि वंदे मातरम् सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी आज़ादी की आवाज बन चुका था।
<h2><strong>6. </strong><strong>वंदे मातरम्</strong><strong>—</strong><strong>आज भी </strong><strong>Inspiration for Atmanirbhar Bharat</strong></h2>
प्रधानमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम् आज भी हमें प्रेरित करता है—
<ul>
 	<li>स्वदेशी को बढ़ावा देने में</li>
 	<li>आत्मनिर्भर भारत बनाने में</li>
 	<li>और चुनौतियों का मुकाबला करने में</li>
</ul>
पीएम ने कहा कि समय बदल गया, लेकिन गांधी जी की स्वदेशी की भावना और वंदे मातरम् की शक्ति आज भी उतनी ही मजबूत है।
<h2><strong>7. </strong><strong>कांग्रेस पर पीएम मोदी का हमला</strong></h2>
पीएम मोदी ने कांग्रेस पर वंदे मातरम् की उपेक्षा का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा—
<ul>
 	<li>1937 में मोहम्मद अली जिन्ना ने वंदे मातरम् के खिलाफ नारा लगाया।</li>
 	<li>इसके 5 दिन बाद जवाहरलाल नेहरू ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को चिट्ठी लिखकर जिन्ना की बात से सहमति जताई।</li>
 	<li>कांग्रेस ने 26 अक्टूबर 1937 की बैठक में वंदे मातरम् के उपयोग पर समझौता कर लिया।</li>
</ul>
पीएम ने कहा कि यह <em>मुस्लिम लीग के आगे झुकने जैसा फैसला</em> था।
उन्होंने दावा किया कि इस निर्णय से पूरे देश में विरोध हुआ और लोग वंदे मातरम् के समर्थन में प्रभात फेरियाँ निकालने लगे।
<h2><strong>8. </strong><strong>आज का संदेश</strong><strong>—</strong><strong>वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं</strong></h2>
पीएम मोदी ने अंत में कहा कि—
<ul>
 	<li>वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं, Inspiration है।</li>
 	<li>देश की एकता, स्वाभिमान और बलिदान का प्रतीक है।</li>
 	<li>लाखों लोगों ने इस नारे के साथ आज़ादी की लड़ाई में योगदान दिया।</li>
</ul>
उन्होंने कहा कि 150वें वर्ष पर हम सबका मंत्र होना चाहिए—
<strong>“</strong><strong>वंदे मातरम् हमें जोड़ता है</strong><strong>, </strong><strong>हमें मजबूत बनाता है।</strong><strong>”</strong>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[संसद में <em>वंदे मातरम् के 150 </em><em>साल</em> पूरे होने पर मंगलवार को एक खास चर्चा हुई। इस चर्चा की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन से की। उन्होंने वंदे मातरम् के इतिहास, आज़ादी के आंदोलन में उसकी भूमिका, महिलाओं और युवाओं के योगदान, अंग्रेजों की नीतियों, और कांग्रेस के रुख पर विस्तार से बात की।

पीएम मोदी ने कहा कि <em>वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं, </em><em>बल्कि ऐसा मंत्र है जिसने देश को आज़ादी दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई</em>। उन्होंने कहा कि आज सांसदों और देश के लिए यह मौका है कि हम उस गीत का ऋण स्वीकार करें जिसने आज़ादी की राह तैयार की।
<h2><strong>वंदे मातरम् की </strong><strong>150 </strong><strong>साल की यात्रा: पीएम मोदी ने क्या कहा</strong></h2>
<h3><strong>1. 150 </strong><strong>साल की यात्रा</strong><strong>—</strong><strong>गुलामी</strong><strong>, </strong><strong>आपातकाल और आज़ादी का संघर्ष</strong></h3>
प्रधानमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम् की यात्रा आसान नहीं रही।
<ul>
 	<li>जब इसके 50 साल हुए, देश पर गुलामी की जंजीरें थीं।</li>
 	<li>जब 100 साल हुए, देश में Emergency लगी थी और लोकतंत्र दबा हुआ था।</li>
 	<li>और जब 150 साल का ये खास मौका आया, तब हम आज़ाद भारत में इसे गर्व से मना रहे हैं।</li>
</ul>
पीएम के अनुसार, यह सिर्फ इतिहास को याद करने नहीं, बल्कि उस प्रेरणा को फिर से महसूस करने का समय है जिसने आज़ादी की लड़ाई को ऊर्जा दी।
<h2><strong>2. </strong><strong>वंदे मातरम्</strong><strong>—</strong><strong>आज़ादी की असली ताकत</strong></h2>
पीएम मोदी बोले—
<em>“</em><em>लाखों लोगों ने वंदे मातरम् का नारा लगाकर आज़ादी की लड़ाई लड़ी। उसी का परिणाम है कि हम आज संसद में बैठे हैं.”</em>

उन्होंने कहा कि यह मुद्दा किसी पार्टी का नहीं, पूरे देश का है। वंदे मातरम् ने लोगों को एकजुट किया और अंग्रेजों के खिलाफ खड़ा होने की शक्ति दी।
<h2><strong>3. </strong><strong>बंगाल विभाजन और वंदे मातरम् का दमदार विरोध</strong></h2>
1905 में अंग्रेजों ने Bengal Partition किया। इसे तोड़ने की कोशिश में अंग्रेजों को लगा कि भारत कमजोर पड़ जाएगा।
लेकिन उल्टा हुआ—
<ul>
 	<li>वंदे मातरम् हर गली–गली में गूंजने लगा।</li>
 	<li>यह विभाजन के खिलाफ आंदोलन का सबसे बड़ा हथियार बन गया।</li>
 	<li>अंग्रेजों के लिए ये नारा सबसे बड़ी चुनौती बन गया।</li>
</ul>
पीएम ने कहा कि अंग्रेज समझ चुके थे कि भारत में “Divide and Rule” (बांटो और राज करो) के बिना राज करना मुश्किल है, और उसकी शुरुआत बंगाल से की गई थी।
<h2><strong>4. </strong><strong>महिलाओं और बच्चों का संघर्ष</strong><strong>—</strong><strong>बारिसाल का बड़ा आंदोलन</strong></h2>
पीएम मोदी ने बारिसाल (अब बांग्लादेश) का जिक्र किया।
उन्होंने बताया कि वंदे मातरम् पर पाबंदी के खिलाफ सबसे ज्यादा जुर्माने वहीं लगे।

कुछ मुख्य बातें—
<ul>
 	<li>महिलाओं ने बड़ी संख्या में वंदे मातरम् के समर्थन में आंदोलन किया।</li>
 	<li>सरोजिनी बोस ने प्रतिज्ञा ली कि <em>जब तक प्रतिबंध नहीं हटेगा, </em><em>वह चूड़ियाँ नहीं पहनेंगी</em>।</li>
 	<li>बच्चों तक को ‘प्रभात फेरियां’ निकालने पर कोड़े मारे जाते थे।</li>
</ul>
यह बताता है कि वंदे मातरम् हर उम्र और वर्ग की आवाज था।
<h2><strong>5. </strong><strong>विदेश में भी गूंजा वंदे मातरम्</strong></h2>
अंग्रेजों ने अखबारों पर रोक लगाई तो मैडम भीकाजी कामा ने पेरिस से एक अखबार निकाला।
उसका नाम था—<strong>Vande Mataram</strong>।
<ul>
 	<li>1907 में O. चिदंबरम पिल्लै ने स्वदेशी जहाज बनाया और उस पर भी “Vande Mataram” लिखा था।</li>
 	<li>राष्ट्रकवि सुब्रमण्यम भारती ने इसका तमिल अनुवाद किया।</li>
</ul>
यह दिखाता है कि वंदे मातरम् सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी आज़ादी की आवाज बन चुका था।
<h2><strong>6. </strong><strong>वंदे मातरम्</strong><strong>—</strong><strong>आज भी </strong><strong>Inspiration for Atmanirbhar Bharat</strong></h2>
प्रधानमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम् आज भी हमें प्रेरित करता है—
<ul>
 	<li>स्वदेशी को बढ़ावा देने में</li>
 	<li>आत्मनिर्भर भारत बनाने में</li>
 	<li>और चुनौतियों का मुकाबला करने में</li>
</ul>
पीएम ने कहा कि समय बदल गया, लेकिन गांधी जी की स्वदेशी की भावना और वंदे मातरम् की शक्ति आज भी उतनी ही मजबूत है।
<h2><strong>7. </strong><strong>कांग्रेस पर पीएम मोदी का हमला</strong></h2>
पीएम मोदी ने कांग्रेस पर वंदे मातरम् की उपेक्षा का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा—
<ul>
 	<li>1937 में मोहम्मद अली जिन्ना ने वंदे मातरम् के खिलाफ नारा लगाया।</li>
 	<li>इसके 5 दिन बाद जवाहरलाल नेहरू ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को चिट्ठी लिखकर जिन्ना की बात से सहमति जताई।</li>
 	<li>कांग्रेस ने 26 अक्टूबर 1937 की बैठक में वंदे मातरम् के उपयोग पर समझौता कर लिया।</li>
</ul>
पीएम ने कहा कि यह <em>मुस्लिम लीग के आगे झुकने जैसा फैसला</em> था।
उन्होंने दावा किया कि इस निर्णय से पूरे देश में विरोध हुआ और लोग वंदे मातरम् के समर्थन में प्रभात फेरियाँ निकालने लगे।
<h2><strong>8. </strong><strong>आज का संदेश</strong><strong>—</strong><strong>वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं</strong></h2>
पीएम मोदी ने अंत में कहा कि—
<ul>
 	<li>वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं, Inspiration है।</li>
 	<li>देश की एकता, स्वाभिमान और बलिदान का प्रतीक है।</li>
 	<li>लाखों लोगों ने इस नारे के साथ आज़ादी की लड़ाई में योगदान दिया।</li>
</ul>
उन्होंने कहा कि 150वें वर्ष पर हम सबका मंत्र होना चाहिए—
<strong>“</strong><strong>वंदे मातरम् हमें जोड़ता है</strong><strong>, </strong><strong>हमें मजबूत बनाता है।</strong><strong>”</strong>]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>Winter Session में SIR Act पर तुरंत Discussion की Demand: AAP MP Malvinder Singh Kang का बयान</title>
		<link>https://trendstopic.in/demand-for-immediate-discussion-on-sir-act-in-winter-session-aap-mp-malvinder-singh-kang/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 03 Dec 2025 04:15:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चंडीगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[AAP]]></category>
		<category><![CDATA[ElectionCommission]]></category>
		<category><![CDATA[MalvinderSinghKang]]></category>
		<category><![CDATA[Parliament]]></category>
		<category><![CDATA[PoliticalUpdates]]></category>
		<category><![CDATA[SIRAct]]></category>
		<category><![CDATA[WinterSession]]></category>
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					<description><![CDATA[आम आदमी पार्टी (AAP) के श्री आनंदपुर साहिब से सांसद <strong>मलविंदर सिंह कंग</strong> ने संसद के चल रहे <strong>शीतकालीन सत्र (</strong><strong>Winter Session)</strong> को बेहद अहम बताते हुए कहा कि इसमें देश के सामने खड़े बड़े मुद्दों पर तुरंत और गंभीर चर्चा होनी चाहिए।

सत्र शुरू होने से पहले मीडिया से बात करते हुए उन्होंने <strong>Special Intensive Revision (SIR) Act</strong> को एक राष्ट्रीय चिंता बताया। उनके अनुसार इस एक्ट की वजह से देश की कुछ <strong>संवैधानिक संस्थाओं (</strong><strong>Constitutional Institutions)</strong> खासकर <strong>चुनाव आयोग (</strong><strong>Election Commission)</strong> पर लोगों का भरोसा कम होता जा रहा है।

<strong>SIR </strong><strong>एक्ट पर कंग की कड़ी चिंता</strong>

सांसद कंग ने कहा कि SIR एक्ट के चलते
<ul>
 	<li>चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं</li>
 	<li>जनता को लगता है कि पारदर्शिता (transparency) कम हो रही है</li>
 	<li>और चुनाव आयोग की credibility कम होती दिख रही है</li>
</ul>
उन्होंने सरकार से मांग की कि पूरी चुनाव प्रक्रिया को साफ-सुथरा, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाए रखने के लिए तुरंत कदम उठाए जाएं।

<strong>संसद चलाने की जिम्मेदारी किसकी</strong><strong>?</strong>

केंद्रीय मंत्री <strong>किरन रिजिजू</strong> के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कंग ने साफ कहा कि:
<ul>
 	<li><strong>संसद चलाने की असली जिम्मेदारी सत्ता पक्ष यानी सरकार की होती है</strong>,</li>
 	<li>विपक्ष तब ही चर्चा कर सकता है जब सरकार माहौल बनाए।</li>
</ul>
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि <strong>मानसून सत्र</strong> के दौरान सरकार ने कोई गंभीर प्रयास नहीं किया, जिसकी वजह से कई ज़रूरी बिल और मुद्दे लंबित रह गए थे।

<strong>सार्वजनिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद</strong>

मलविंदर कंग ने उम्मीद जताई कि इस बार:
<ul>
 	<li>जनता से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बहस होगी</li>
 	<li>संवैधानिक संस्थाओं की सुरक्षा और मजबूती पर ठोस कदम उठाए जाएंगे</li>
 	<li>और ऐसे मामलों पर राजनीति नहीं, बल्कि देशहित में चर्चा की जाएगी</li>
</ul>
<strong>क्यों है यह सत्र इतना महत्वपूर्ण</strong><strong>?</strong>

यह सत्र कई वजहों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है:
<ul>
 	<li>SIR Act को लेकर देशभर में चर्चा और चिंता</li>
 	<li>चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल</li>
 	<li>विपक्ष की तरफ से लगातार demand कि चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए</li>
 	<li>पिछले सत्र में अधूरे रह गए काम पूरे करने का दबाव</li>
</ul>
कंग ने कहा कि जनता यह उम्मीद कर रही है कि संसद में सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि <strong>real issues</strong> पर बात होगी और लोकतंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[आम आदमी पार्टी (AAP) के श्री आनंदपुर साहिब से सांसद <strong>मलविंदर सिंह कंग</strong> ने संसद के चल रहे <strong>शीतकालीन सत्र (</strong><strong>Winter Session)</strong> को बेहद अहम बताते हुए कहा कि इसमें देश के सामने खड़े बड़े मुद्दों पर तुरंत और गंभीर चर्चा होनी चाहिए।

सत्र शुरू होने से पहले मीडिया से बात करते हुए उन्होंने <strong>Special Intensive Revision (SIR) Act</strong> को एक राष्ट्रीय चिंता बताया। उनके अनुसार इस एक्ट की वजह से देश की कुछ <strong>संवैधानिक संस्थाओं (</strong><strong>Constitutional Institutions)</strong> खासकर <strong>चुनाव आयोग (</strong><strong>Election Commission)</strong> पर लोगों का भरोसा कम होता जा रहा है।

<strong>SIR </strong><strong>एक्ट पर कंग की कड़ी चिंता</strong>

सांसद कंग ने कहा कि SIR एक्ट के चलते
<ul>
 	<li>चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं</li>
 	<li>जनता को लगता है कि पारदर्शिता (transparency) कम हो रही है</li>
 	<li>और चुनाव आयोग की credibility कम होती दिख रही है</li>
</ul>
उन्होंने सरकार से मांग की कि पूरी चुनाव प्रक्रिया को साफ-सुथरा, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाए रखने के लिए तुरंत कदम उठाए जाएं।

<strong>संसद चलाने की जिम्मेदारी किसकी</strong><strong>?</strong>

केंद्रीय मंत्री <strong>किरन रिजिजू</strong> के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कंग ने साफ कहा कि:
<ul>
 	<li><strong>संसद चलाने की असली जिम्मेदारी सत्ता पक्ष यानी सरकार की होती है</strong>,</li>
 	<li>विपक्ष तब ही चर्चा कर सकता है जब सरकार माहौल बनाए।</li>
</ul>
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि <strong>मानसून सत्र</strong> के दौरान सरकार ने कोई गंभीर प्रयास नहीं किया, जिसकी वजह से कई ज़रूरी बिल और मुद्दे लंबित रह गए थे।

<strong>सार्वजनिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद</strong>

मलविंदर कंग ने उम्मीद जताई कि इस बार:
<ul>
 	<li>जनता से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बहस होगी</li>
 	<li>संवैधानिक संस्थाओं की सुरक्षा और मजबूती पर ठोस कदम उठाए जाएंगे</li>
 	<li>और ऐसे मामलों पर राजनीति नहीं, बल्कि देशहित में चर्चा की जाएगी</li>
</ul>
<strong>क्यों है यह सत्र इतना महत्वपूर्ण</strong><strong>?</strong>

यह सत्र कई वजहों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है:
<ul>
 	<li>SIR Act को लेकर देशभर में चर्चा और चिंता</li>
 	<li>चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल</li>
 	<li>विपक्ष की तरफ से लगातार demand कि चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए</li>
 	<li>पिछले सत्र में अधूरे रह गए काम पूरे करने का दबाव</li>
</ul>
कंग ने कहा कि जनता यह उम्मीद कर रही है कि संसद में सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि <strong>real issues</strong> पर बात होगी और लोकतंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।]]></content:encoded>
					
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		<title>Parliament में Rahul Gandhi को लेकर Rijiju का बड़ा हमला, बोले- Congress MPs खुद हो जाते हैं Uncomfortable</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 Aug 2025 04:36:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
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		<category><![CDATA[congress]]></category>
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		<category><![CDATA[RajyaSabha]]></category>
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					<description><![CDATA[संसदीय कार्य मंत्री <strong>किरन रिजिजू</strong> ने शनिवार को कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता <strong>राहुल गांधी</strong> पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि जब राहुल गांधी संसद में बोलते हैं, तो खुद कांग्रेस के सांसद <em>"uncomfortable"</em> हो जाते हैं, क्योंकि उन्हें डर रहता है कि कहीं वह <em>“</em><em>अनाप-शनाप”</em> बातें न कह दें और पार्टी को उसका खामियाज़ा न भुगतना पड़े।
<h3>राहुल गांधी अपनी पार्टी की भी नहीं सुनते: रिजिजू</h3>
एजेंसी <strong>ANI</strong> को दिए इंटरव्यू में रिजिजू ने कहा,
<em>"</em><em>राहुल गांधी कुछ बोलते हैं तो उनके MPs </em><em>घबरा जाते हैं। उन्हें डर होता है कि वो कुछ ऐसा न बोल दें जिससे पार्टी को नुकसान उठाना पड़े। वह अपने लोगों की भी नहीं सुनते।"</em>

रिजिजू ने याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी राहुल गांधी को <em>“</em><em>चौकीदार चोर है”</em> वाले बयान पर फटकार लगाई थी। इसके अलावा राफेल डील और <em>चीन ने जमीन कब्जा ली</em> जैसे बयानों पर भी राहुल गांधी को आलोचना का सामना करना पड़ा।
<h3>"अगर राहुल नहीं बोल पाते, तो दूसरों को क्यों रोका जाता है?"</h3>
रिजिजू ने कहा कि कई कांग्रेस नेता योग्य और जानकार हैं, लेकिन उन्हें बोलने का मौका ही नहीं मिलता।
<em>"</em><em>अगर राहुल गांधी को बोलना नहीं आता, </em><em>तो इसका मतलब ये नहीं कि दूसरे कांग्रेस MPs </em><em>को भी रोक दिया जाए।"</em>
उन्होंने कांग्रेस से अपील की कि वह संसद की चर्चाओं में हिस्सा लें, ताकि जनता के मुद्दे उठाए जा सकें।
<h3>संसद सत्र में हंगामे से कामकाज ठप</h3>
इस बार का <strong>मानसून सत्र</strong> भारी हंगामे और स्थगन की वजह से लगभग ठप रहा।
<ul>
 	<li><strong>लोकसभा</strong> की उत्पादकता सिर्फ <strong>31%</strong> रही।</li>
 	<li><strong>राज्यसभा</strong> की उत्पादकता <strong>39%</strong> रही।</li>
 	<li>लोकसभा में 120 घंटे उपलब्ध थे, लेकिन चर्चा केवल 37 घंटे चली।</li>
 	<li>राज्यसभा में 41 घंटे 15 मिनट ही चर्चा हो सकी।</li>
</ul>
हालांकि हंगामे के बीच संसद ने <strong>15 </strong><strong>अहम बिल पारित किए</strong>।
<h3>संविधान संशोधन बिल पर बड़ी घोषणा</h3>
सत्र के दौरान सरकार ने एक <strong>संविधान संशोधन बिल</strong> पेश किया। इसके अनुसार –
<ul>
 	<li>अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई भी मंत्री किसी <strong>गंभीर आपराधिक मामले</strong> में गिरफ्तार होकर जेल जाता है, तो उसे तुरंत पद छोड़ना होगा।</li>
 	<li>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद कहा कि उन्हें इस कानून से <strong>कोई छूट नहीं चाहिए</strong>।
<em>"PM </em><em>भी देश का नागरिक है, </em><em>अगर गुनाह करेगा तो जेल जाएगा और पद छोड़ना पड़ेगा।"</em></li>
</ul>
रिजिजू ने कहा कि यह बिल विपक्ष को भी समर्थन करना चाहिए था, लेकिन उन्होंने सिर्फ हंगामा किया।
<h3>सत्र सरकार के लिए सफल, विपक्ष के लिए असफल</h3>
रिजिजू के मुताबिक,
<em>"</em><em>संसद का मानसून सत्र राष्ट्र के नजरिये से सफल रहा, </em><em>लेकिन विपक्ष के नजरिये से पूरी तरह नाकाम रहा। विपक्ष अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल रहा है।"</em>

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर राहुल गांधी की संसद में भूमिका और कांग्रेस की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[संसदीय कार्य मंत्री <strong>किरन रिजिजू</strong> ने शनिवार को कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता <strong>राहुल गांधी</strong> पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि जब राहुल गांधी संसद में बोलते हैं, तो खुद कांग्रेस के सांसद <em>"uncomfortable"</em> हो जाते हैं, क्योंकि उन्हें डर रहता है कि कहीं वह <em>“</em><em>अनाप-शनाप”</em> बातें न कह दें और पार्टी को उसका खामियाज़ा न भुगतना पड़े।
<h3>राहुल गांधी अपनी पार्टी की भी नहीं सुनते: रिजिजू</h3>
एजेंसी <strong>ANI</strong> को दिए इंटरव्यू में रिजिजू ने कहा,
<em>"</em><em>राहुल गांधी कुछ बोलते हैं तो उनके MPs </em><em>घबरा जाते हैं। उन्हें डर होता है कि वो कुछ ऐसा न बोल दें जिससे पार्टी को नुकसान उठाना पड़े। वह अपने लोगों की भी नहीं सुनते।"</em>

रिजिजू ने याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी राहुल गांधी को <em>“</em><em>चौकीदार चोर है”</em> वाले बयान पर फटकार लगाई थी। इसके अलावा राफेल डील और <em>चीन ने जमीन कब्जा ली</em> जैसे बयानों पर भी राहुल गांधी को आलोचना का सामना करना पड़ा।
<h3>"अगर राहुल नहीं बोल पाते, तो दूसरों को क्यों रोका जाता है?"</h3>
रिजिजू ने कहा कि कई कांग्रेस नेता योग्य और जानकार हैं, लेकिन उन्हें बोलने का मौका ही नहीं मिलता।
<em>"</em><em>अगर राहुल गांधी को बोलना नहीं आता, </em><em>तो इसका मतलब ये नहीं कि दूसरे कांग्रेस MPs </em><em>को भी रोक दिया जाए।"</em>
उन्होंने कांग्रेस से अपील की कि वह संसद की चर्चाओं में हिस्सा लें, ताकि जनता के मुद्दे उठाए जा सकें।
<h3>संसद सत्र में हंगामे से कामकाज ठप</h3>
इस बार का <strong>मानसून सत्र</strong> भारी हंगामे और स्थगन की वजह से लगभग ठप रहा।
<ul>
 	<li><strong>लोकसभा</strong> की उत्पादकता सिर्फ <strong>31%</strong> रही।</li>
 	<li><strong>राज्यसभा</strong> की उत्पादकता <strong>39%</strong> रही।</li>
 	<li>लोकसभा में 120 घंटे उपलब्ध थे, लेकिन चर्चा केवल 37 घंटे चली।</li>
 	<li>राज्यसभा में 41 घंटे 15 मिनट ही चर्चा हो सकी।</li>
</ul>
हालांकि हंगामे के बीच संसद ने <strong>15 </strong><strong>अहम बिल पारित किए</strong>।
<h3>संविधान संशोधन बिल पर बड़ी घोषणा</h3>
सत्र के दौरान सरकार ने एक <strong>संविधान संशोधन बिल</strong> पेश किया। इसके अनुसार –
<ul>
 	<li>अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई भी मंत्री किसी <strong>गंभीर आपराधिक मामले</strong> में गिरफ्तार होकर जेल जाता है, तो उसे तुरंत पद छोड़ना होगा।</li>
 	<li>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद कहा कि उन्हें इस कानून से <strong>कोई छूट नहीं चाहिए</strong>।
<em>"PM </em><em>भी देश का नागरिक है, </em><em>अगर गुनाह करेगा तो जेल जाएगा और पद छोड़ना पड़ेगा।"</em></li>
</ul>
रिजिजू ने कहा कि यह बिल विपक्ष को भी समर्थन करना चाहिए था, लेकिन उन्होंने सिर्फ हंगामा किया।
<h3>सत्र सरकार के लिए सफल, विपक्ष के लिए असफल</h3>
रिजिजू के मुताबिक,
<em>"</em><em>संसद का मानसून सत्र राष्ट्र के नजरिये से सफल रहा, </em><em>लेकिन विपक्ष के नजरिये से पूरी तरह नाकाम रहा। विपक्ष अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल रहा है।"</em>

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर राहुल गांधी की संसद में भूमिका और कांग्रेस की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>PMs-CMs को हटाने वाला Bill: Congress में बंटवारा, Tharoor ने बताया &#8220;Reasonable&#8221;, बाकी नेताओं ने कहा “Draconian Law”</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 21 Aug 2025 03:44:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[AbhishekSinghvi]]></category>
		<category><![CDATA[Bill]]></category>
		<category><![CDATA[CM]]></category>
		<category><![CDATA[congress]]></category>
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		<category><![CDATA[DraconianLaw]]></category>
		<category><![CDATA[Government]]></category>
		<category><![CDATA[IndianPolitics]]></category>
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		<category><![CDATA[MonsoonSession]]></category>
		<category><![CDATA[NarendraModi]]></category>
		<category><![CDATA[news]]></category>
		<category><![CDATA[Opposition]]></category>
		<category><![CDATA[Parliament]]></category>
		<category><![CDATA[PM]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[PriyankaGandhi]]></category>
		<category><![CDATA[Reasonable]]></category>
		<category><![CDATA[ShashiTharoor]]></category>
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					<description><![CDATA[मोदी सरकार ने संसद में एक अहम बिल पेश किया है, जिसने राजनीति में हलचल मचा दी है। इस बिल में प्रावधान है कि अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई भी मंत्री <strong>30 </strong><strong>दिन लगातार जेल में रहता है या हिरासत में रहता है</strong> और उस केस में <strong>कम से कम </strong><strong>5 </strong><strong>साल की सज़ा का प्रावधान</strong> है, तो उन्हें तुरंत अपने पद से हटना होगा।

सरकार इसे <strong>anti-corruption move</strong> बता रही है, लेकिन विपक्ष इसे <strong>राजनीतिक हथियार</strong> मानकर विरोध कर रहा है।

<strong>शशि थरूर ने तोड़ी पार्टी लाइन</strong>

कांग्रेस सांसद <strong>शशि थरूर</strong> ने इस बिल का समर्थन कर सबको चौंका दिया।
थरूर ने कहा:

“On the face of it, ये बिल reasonable लगता है। जो गलत करेगा, उसे सज़ा मिलनी चाहिए और वो constitutional या political office पर नहीं रह सकता। ये बात मुझे logical लगती है।”

उन्होंने कहा कि बिल को <strong>संसदीय समिति</strong> के पास भेजकर उस पर विस्तार से चर्चा करना अच्छा कदम होगा।

<strong>कांग्रेस नेताओं का विरोध</strong>

लेकिन कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने इस बिल को खतरनाक बताया है।
<ul>
 	<li><strong>प्रियंका गांधी (कांग्रेस सांसद</strong><strong>, </strong><strong>वायनाड):</strong>
उन्होंने इसे पूरी तरह <strong>तानाशाही (</strong><strong>draconian law)</strong> कहा।
प्रियंका का तर्क है कि –</li>
</ul>
“कल को किसी भी मुख्यमंत्री को fabricated charges (झूठे केस) में फंसा कर 30 दिन जेल में रख दिया जाए और वो CM की कुर्सी से हट जाएगा, बिना किसी conviction (दोष साबित हुए)। ये बिल्कुल unconstitutional और undemocratic है।”
<ul>
 	<li><strong>के.सी. वेणुगोपाल (सीनियर कांग्रेस नेता):</strong>
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ़ एक <strong>diversionary tactic</strong> है।</li>
</ul>
“ये बिल पास नहीं होगा। इसका मकसद सिर्फ़ electoral fraud और विपक्ष की गतिविधियों से लोगों का ध्यान हटाना है। सरकार vendetta politics को constitutional रूप देना चाहती है।”
<ul>
 	<li><strong>अभिषेक मनु सिंघवी (कांग्रेस प्रवक्ता):</strong>
उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी चुनावी मैदान में विपक्षी मुख्यमंत्रियों को नहीं हरा पा रही, इसलिए इस तरह का क़ानून लाकर उन्हें हटाना चाहती है।</li>
</ul>
<strong>बिल में क्या है खास</strong><strong>?</strong>
<ul>
 	<li>अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री <strong>30 </strong><strong>दिन तक जेल में रहते हैं</strong>, और जिस अपराध में उन पर केस है उसमें <strong>कम से कम </strong><strong>5 </strong><strong>साल की सज़ा</strong> हो सकती है, तो उन्हें पद से हटना होगा।</li>
 	<li>हालांकि, जेल से छूटने के बाद वही नेता <strong>दोबारा उसी पद पर नियुक्त हो सकते हैं</strong>।</li>
 	<li>अभी के कानून (Representation of the People’s Act, 1951) में नियम है कि अगर किसी सांसद या विधायक को <strong>2 </strong><strong>साल या उससे ज्यादा की सज़ा</strong> हो जाती है, तभी वो अयोग्य ठहराए जाते हैं।</li>
 	<li>यानी यह नया प्रस्ताव उससे कहीं ज्यादा सख़्त है।</li>
</ul>
<strong>राजनीतिक हलचल</strong>

यह बिल <strong>मानसून सत्र के आख़िरी दो दिन पहले</strong> पेश किया गया, जिससे संसद और राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई।
विपक्ष का आरोप है कि सरकार इसका इस्तेमाल <strong>opposition leaders </strong><strong>को टारगेट करने</strong> के लिए करेगी।
वहीं, समर्थक नेताओं का कहना है कि यह कानून राजनीति को <strong>clean </strong><strong>और </strong><strong>corruption-free</strong> बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

कुल मिलाकर, यह बिल अगर पास होता है तो भारतीय राजनीति का चेहरा बदल सकता है। लेकिन इसके लागू होने से पहले ही यह <strong>पक्ष-विपक्ष की जंग का नया मुद्दा</strong> बन गया है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[मोदी सरकार ने संसद में एक अहम बिल पेश किया है, जिसने राजनीति में हलचल मचा दी है। इस बिल में प्रावधान है कि अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई भी मंत्री <strong>30 </strong><strong>दिन लगातार जेल में रहता है या हिरासत में रहता है</strong> और उस केस में <strong>कम से कम </strong><strong>5 </strong><strong>साल की सज़ा का प्रावधान</strong> है, तो उन्हें तुरंत अपने पद से हटना होगा।

सरकार इसे <strong>anti-corruption move</strong> बता रही है, लेकिन विपक्ष इसे <strong>राजनीतिक हथियार</strong> मानकर विरोध कर रहा है।

<strong>शशि थरूर ने तोड़ी पार्टी लाइन</strong>

कांग्रेस सांसद <strong>शशि थरूर</strong> ने इस बिल का समर्थन कर सबको चौंका दिया।
थरूर ने कहा:

“On the face of it, ये बिल reasonable लगता है। जो गलत करेगा, उसे सज़ा मिलनी चाहिए और वो constitutional या political office पर नहीं रह सकता। ये बात मुझे logical लगती है।”

उन्होंने कहा कि बिल को <strong>संसदीय समिति</strong> के पास भेजकर उस पर विस्तार से चर्चा करना अच्छा कदम होगा।

<strong>कांग्रेस नेताओं का विरोध</strong>

लेकिन कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने इस बिल को खतरनाक बताया है।
<ul>
 	<li><strong>प्रियंका गांधी (कांग्रेस सांसद</strong><strong>, </strong><strong>वायनाड):</strong>
उन्होंने इसे पूरी तरह <strong>तानाशाही (</strong><strong>draconian law)</strong> कहा।
प्रियंका का तर्क है कि –</li>
</ul>
“कल को किसी भी मुख्यमंत्री को fabricated charges (झूठे केस) में फंसा कर 30 दिन जेल में रख दिया जाए और वो CM की कुर्सी से हट जाएगा, बिना किसी conviction (दोष साबित हुए)। ये बिल्कुल unconstitutional और undemocratic है।”
<ul>
 	<li><strong>के.सी. वेणुगोपाल (सीनियर कांग्रेस नेता):</strong>
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ़ एक <strong>diversionary tactic</strong> है।</li>
</ul>
“ये बिल पास नहीं होगा। इसका मकसद सिर्फ़ electoral fraud और विपक्ष की गतिविधियों से लोगों का ध्यान हटाना है। सरकार vendetta politics को constitutional रूप देना चाहती है।”
<ul>
 	<li><strong>अभिषेक मनु सिंघवी (कांग्रेस प्रवक्ता):</strong>
उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी चुनावी मैदान में विपक्षी मुख्यमंत्रियों को नहीं हरा पा रही, इसलिए इस तरह का क़ानून लाकर उन्हें हटाना चाहती है।</li>
</ul>
<strong>बिल में क्या है खास</strong><strong>?</strong>
<ul>
 	<li>अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री <strong>30 </strong><strong>दिन तक जेल में रहते हैं</strong>, और जिस अपराध में उन पर केस है उसमें <strong>कम से कम </strong><strong>5 </strong><strong>साल की सज़ा</strong> हो सकती है, तो उन्हें पद से हटना होगा।</li>
 	<li>हालांकि, जेल से छूटने के बाद वही नेता <strong>दोबारा उसी पद पर नियुक्त हो सकते हैं</strong>।</li>
 	<li>अभी के कानून (Representation of the People’s Act, 1951) में नियम है कि अगर किसी सांसद या विधायक को <strong>2 </strong><strong>साल या उससे ज्यादा की सज़ा</strong> हो जाती है, तभी वो अयोग्य ठहराए जाते हैं।</li>
 	<li>यानी यह नया प्रस्ताव उससे कहीं ज्यादा सख़्त है।</li>
</ul>
<strong>राजनीतिक हलचल</strong>

यह बिल <strong>मानसून सत्र के आख़िरी दो दिन पहले</strong> पेश किया गया, जिससे संसद और राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई।
विपक्ष का आरोप है कि सरकार इसका इस्तेमाल <strong>opposition leaders </strong><strong>को टारगेट करने</strong> के लिए करेगी।
वहीं, समर्थक नेताओं का कहना है कि यह कानून राजनीति को <strong>clean </strong><strong>और </strong><strong>corruption-free</strong> बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

कुल मिलाकर, यह बिल अगर पास होता है तो भारतीय राजनीति का चेहरा बदल सकता है। लेकिन इसके लागू होने से पहले ही यह <strong>पक्ष-विपक्ष की जंग का नया मुद्दा</strong> बन गया है।]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>Chandigarh से शुरू हुआ ‘One Nation–One Election’ campaign अब Rashtrapati Bhavan तक पहुँचा</title>
		<link>https://trendstopic.in/one-nation-one-election-campaign-that-started-from-chandigarh-now-reaches-rashtrapati-bhavan/</link>
					<comments>https://trendstopic.in/one-nation-one-election-campaign-that-started-from-chandigarh-now-reaches-rashtrapati-bhavan/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 16 Aug 2025 06:17:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चंडीगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[Campaign]]></category>
		<category><![CDATA[ChandigarhYouth]]></category>
		<category><![CDATA[DroupadiMurmu]]></category>
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		<category><![CDATA[YouthPower]]></category>
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					<description><![CDATA[चंडीगढ़ के युवा सामाजिक कार्यकर्ता और <strong>राष्ट्रीय युवा पुरस्कार</strong> तथा <strong>राष्ट्रपति पुरस्कार</strong> से सम्मानित रोहित कुमार इन दिनों देशभर में <em>“</em><em>एक देश – </em><em>एक चुनाव”</em> (One Nation – One Election) के समर्थन में बड़ा अभियान चला रहे हैं। उनके नेतृत्व में बना <strong>“</strong><strong>संविधान सपोर्ट ग्रुप”</strong> इस मुहिम को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ा रहा है।
<h3>राष्ट्रपति से मुलाकात</h3>
अभियान के <strong>तीसरे चरण</strong> में रोहित कुमार ने अपनी टीम के साथ राष्ट्रपति <strong>द्रौपदी मुर्मू</strong> से मुलाकात की। इस दौरान रोहित ने उन्हें भगवान गणेश की मूर्ति भेंट की और अभियान की पूरी जानकारी दी। रोहित ने राष्ट्रपति को बताया कि देशभर के <strong>112 </strong><strong>राष्ट्रीय युवा पुरस्कार और राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता युवाओं</strong> ने <em>एक देश – </em><em>एक चुनाव</em> लागू करने के समर्थन में हस्ताक्षर किए हुए पत्र तैयार किए हैं।

राष्ट्रपति ने रोहित के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा –
<em>“</em><em>आप युवा हमारे देश की रीढ़ हैं। आपके ऐसे प्रयास दूसरे युवाओं के लिए प्रेरणा हैं।”</em>
<h3>लोकसभा अध्यक्ष से भी मिले</h3>
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद रोहित कुमार और उनकी टीम ने <strong>लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला</strong> से भी संसद भवन में मुलाकात की और समर्थन पत्र सौंपे। इस दौरान रोहित ने अभियान के फायदे गिनाते हुए कहा कि अगर देशभर में एक साथ चुनाव होंगे तो समय और धन दोनों की बचत होगी।

इस पर ओम बिड़ला ने भी सहमति जताते हुए कहा –
<em>“</em><em>एक साथ चुनाव होने से विकास कार्य तेज होंगे और सरकार युवाओं, </em><em>शिक्षा, </em><em>रोजगार, </em><em>स्वास्थ्य, </em><em>पर्यावरण और बुनियादी ढांचे पर ज्यादा ध्यान दे सकेगी।”</em>

&nbsp;

<img class="alignnone  wp-image-24919" src="https://trendstopic.in/wp-content/uploads/2025/08/WhatsApp-Image-2025-08-16-at-11.35.39-AM-300x169.webp" alt="" width="804" height="453" />

&nbsp;
<h3>अभियान का अब तक का सफर</h3>
इस अभियान की शुरुआत चंडीगढ़ से हुई थी और अब यह राष्ट्रपति भवन तक पहुँच चुकी है।
<ul>
 	<li><strong>पहला चरण:</strong> रोहित और उनकी टीम ने देशभर में जाकर <strong>170 </strong><strong>से ज्यादा सांसदों</strong> से मुलाकात कर उनका समर्थन हासिल किया।</li>
 	<li><strong>दूसरा चरण (26 </strong><strong>मार्च 2025):</strong> दिल्ली के <strong>जंतर-मंतर</strong> पर एक हजार से ज्यादा युवाओं के साथ शांतिपूर्ण धरना और प्रतीकात्मक भूख हड़ताल की गई।</li>
 	<li><strong>27 </strong><strong>मार्च 2025:</strong> संसद तक मार्च निकाला गया, जिसमें <strong>800 </strong><strong>से ज्यादा युवा</strong> शामिल हुए।</li>
 	<li><strong>तीसरा चरण:</strong> राष्ट्रपति और लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर समर्थन पत्र सौंपना।</li>
</ul>
<h3>रोहित कुमार की उपलब्धियां</h3>
रोहित कुमार पिछले कई वर्षों से <strong>युवा सशक्तिकरण, </strong><strong>पर्यावरण संरक्षण, </strong><strong>पशु कल्याण और सामाजिक विकास</strong> जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। उन्हें अब तक कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड मिल चुके हैं –
<ul>
 	<li><strong>राष्ट्रीय युवा पुरस्कार 2024</strong></li>
 	<li><strong>राष्ट्रपति पुरस्कार</strong></li>
 	<li><strong>BRICS </strong><strong>और SCO </strong><strong>यंग लीडर अवॉर्ड 2023</strong></li>
 	<li><strong>We Are Together International Award 2022</strong></li>
</ul>
रोहित का मानना है कि युवाओं को सिर्फ सरकार पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि खुद आगे आकर बदलाव की शुरुआत करनी चाहिए।
<h3>अभियान का मकसद</h3>
इस पूरे अभियान का लक्ष्य है लोगों को <em>One Nation – One Election</em> के फायदे समझाना और इसे लागू करने के लिए जनता से समर्थन जुटाना। रोहित और उनकी टीम का कहना है कि इससे देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया और भी मजबूत होगी और बार-बार होने वाले चुनावों में लगने वाले करोड़ों रुपये और समय की बचत होगी।

कुल मिलाकर, चंडीगढ़ से शुरू हुई यह पहल अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुकी है। राष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष और कई सांसदों का समर्थन मिलने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि <em>“</em><em>एक देश </em><em>– </em><em>एक चुनाव</em><em>”</em> का सपना अब धीरे-धीरे हकीकत के करीब पहुँच सकता है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[चंडीगढ़ के युवा सामाजिक कार्यकर्ता और <strong>राष्ट्रीय युवा पुरस्कार</strong> तथा <strong>राष्ट्रपति पुरस्कार</strong> से सम्मानित रोहित कुमार इन दिनों देशभर में <em>“</em><em>एक देश – </em><em>एक चुनाव”</em> (One Nation – One Election) के समर्थन में बड़ा अभियान चला रहे हैं। उनके नेतृत्व में बना <strong>“</strong><strong>संविधान सपोर्ट ग्रुप”</strong> इस मुहिम को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ा रहा है।
<h3>राष्ट्रपति से मुलाकात</h3>
अभियान के <strong>तीसरे चरण</strong> में रोहित कुमार ने अपनी टीम के साथ राष्ट्रपति <strong>द्रौपदी मुर्मू</strong> से मुलाकात की। इस दौरान रोहित ने उन्हें भगवान गणेश की मूर्ति भेंट की और अभियान की पूरी जानकारी दी। रोहित ने राष्ट्रपति को बताया कि देशभर के <strong>112 </strong><strong>राष्ट्रीय युवा पुरस्कार और राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता युवाओं</strong> ने <em>एक देश – </em><em>एक चुनाव</em> लागू करने के समर्थन में हस्ताक्षर किए हुए पत्र तैयार किए हैं।

राष्ट्रपति ने रोहित के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा –
<em>“</em><em>आप युवा हमारे देश की रीढ़ हैं। आपके ऐसे प्रयास दूसरे युवाओं के लिए प्रेरणा हैं।”</em>
<h3>लोकसभा अध्यक्ष से भी मिले</h3>
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद रोहित कुमार और उनकी टीम ने <strong>लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला</strong> से भी संसद भवन में मुलाकात की और समर्थन पत्र सौंपे। इस दौरान रोहित ने अभियान के फायदे गिनाते हुए कहा कि अगर देशभर में एक साथ चुनाव होंगे तो समय और धन दोनों की बचत होगी।

इस पर ओम बिड़ला ने भी सहमति जताते हुए कहा –
<em>“</em><em>एक साथ चुनाव होने से विकास कार्य तेज होंगे और सरकार युवाओं, </em><em>शिक्षा, </em><em>रोजगार, </em><em>स्वास्थ्य, </em><em>पर्यावरण और बुनियादी ढांचे पर ज्यादा ध्यान दे सकेगी।”</em>

&nbsp;

<img class="alignnone  wp-image-24919" src="https://trendstopic.in/wp-content/uploads/2025/08/WhatsApp-Image-2025-08-16-at-11.35.39-AM-300x169.webp" alt="" width="804" height="453" />

&nbsp;
<h3>अभियान का अब तक का सफर</h3>
इस अभियान की शुरुआत चंडीगढ़ से हुई थी और अब यह राष्ट्रपति भवन तक पहुँच चुकी है।
<ul>
 	<li><strong>पहला चरण:</strong> रोहित और उनकी टीम ने देशभर में जाकर <strong>170 </strong><strong>से ज्यादा सांसदों</strong> से मुलाकात कर उनका समर्थन हासिल किया।</li>
 	<li><strong>दूसरा चरण (26 </strong><strong>मार्च 2025):</strong> दिल्ली के <strong>जंतर-मंतर</strong> पर एक हजार से ज्यादा युवाओं के साथ शांतिपूर्ण धरना और प्रतीकात्मक भूख हड़ताल की गई।</li>
 	<li><strong>27 </strong><strong>मार्च 2025:</strong> संसद तक मार्च निकाला गया, जिसमें <strong>800 </strong><strong>से ज्यादा युवा</strong> शामिल हुए।</li>
 	<li><strong>तीसरा चरण:</strong> राष्ट्रपति और लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर समर्थन पत्र सौंपना।</li>
</ul>
<h3>रोहित कुमार की उपलब्धियां</h3>
रोहित कुमार पिछले कई वर्षों से <strong>युवा सशक्तिकरण, </strong><strong>पर्यावरण संरक्षण, </strong><strong>पशु कल्याण और सामाजिक विकास</strong> जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। उन्हें अब तक कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड मिल चुके हैं –
<ul>
 	<li><strong>राष्ट्रीय युवा पुरस्कार 2024</strong></li>
 	<li><strong>राष्ट्रपति पुरस्कार</strong></li>
 	<li><strong>BRICS </strong><strong>और SCO </strong><strong>यंग लीडर अवॉर्ड 2023</strong></li>
 	<li><strong>We Are Together International Award 2022</strong></li>
</ul>
रोहित का मानना है कि युवाओं को सिर्फ सरकार पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि खुद आगे आकर बदलाव की शुरुआत करनी चाहिए।
<h3>अभियान का मकसद</h3>
इस पूरे अभियान का लक्ष्य है लोगों को <em>One Nation – One Election</em> के फायदे समझाना और इसे लागू करने के लिए जनता से समर्थन जुटाना। रोहित और उनकी टीम का कहना है कि इससे देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया और भी मजबूत होगी और बार-बार होने वाले चुनावों में लगने वाले करोड़ों रुपये और समय की बचत होगी।

कुल मिलाकर, चंडीगढ़ से शुरू हुई यह पहल अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुकी है। राष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष और कई सांसदों का समर्थन मिलने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि <em>“</em><em>एक देश </em><em>– </em><em>एक चुनाव</em><em>”</em> का सपना अब धीरे-धीरे हकीकत के करीब पहुँच सकता है।]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>PM Modi 11 August को करेंगे MPs के लिए बने नए High-Rise Residential Complex का Inaugurate</title>
		<link>https://trendstopic.in/pm-modi-to-inaugurate-new-high-rise-residential-complex-for-mps-on-august-11/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 09 Aug 2025 05:55:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[BabaKharakSinghMarg]]></category>
		<category><![CDATA[DelhiNews]]></category>
		<category><![CDATA[GovernmentProject]]></category>
		<category><![CDATA[HighRiseComplex]]></category>
		<category><![CDATA[Inauguration]]></category>
		<category><![CDATA[Infrastructure]]></category>
		<category><![CDATA[LutyensDelhi]]></category>
		<category><![CDATA[ModernHousing]]></category>
		<category><![CDATA[MPHousing]]></category>
		<category><![CDATA[NewDelhi]]></category>
		<category><![CDATA[Parliament]]></category>
		<category><![CDATA[PMModi]]></category>
		<category><![CDATA[ResidentialComplex]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली के बाबा खरक सिंह मार्ग पर सांसदों के लिए बनाए गए नए और आधुनिक हाई-राइज रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 अगस्त को करेंगे। इस मौके पर पीएम मोदी उन सांसदों को नए फ्लैट्स की चाबियां भी सौंपेंगे, जिन्हें यहां आवास आवंटित किया गया है।

करीब ₹680 करोड़ की लागत से तैयार यह प्रोजेक्ट लुटियंस दिल्ली में सरकारी आवासों को मॉडर्न बनाने की दिशा में सरकार की एक और बड़ी पहल है। इससे पहले सांसदों के लिए कई पुराने मकान 1935 से 1955 के बीच बनाए गए थे, जो अब अपनी उम्र पूरी कर चुके थे। इसी वजह से इन्हें हटाकर यह नया कॉम्प्लेक्स बनाया गया।

<strong>कॉम्प्लेक्स का लोकेशन और महत्व</strong>

यह कॉम्प्लेक्स राजधानी के बेहद अहम इलाके बाबा खरक सिंह मार्ग पर स्थित है, जो संसद मार्ग को कनॉट प्लेस से जोड़ता है। यहां से संसद भवन, राष्ट्रपति भवन और बड़े सरकारी दफ्तर कुछ ही मिनटों की दूरी पर हैं। सभी तीन एंट्री गेट सीधे बाबा खरक सिंह मार्ग पर खुलते हैं, जिससे सांसदों को ट्रांसपोर्ट और प्रशासनिक सुविधाओं तक आसानी से पहुंच मिल सकेगी।

<strong>बिल्डिंग और फ्लैट्स का स्ट्रक्चर</strong>

इस कॉम्प्लेक्स में कुल <strong>5 </strong><strong>टावर</strong> हैं।
<ul>
 	<li><strong>4 </strong><strong>रेजिडेंशियल टावर</strong> — हर टावर में 46 फ्लैट, दो यूनिट प्रति फ्लोर</li>
 	<li>टावरों के नाम नदियों पर रखे गए हैं जैसे <strong>सबरमती</strong> और <strong>कोसी</strong></li>
 	<li>हर फ्लैट का आकार करीब <strong>5,000 </strong><strong>वर्ग फुट</strong> है</li>
 	<li>फ्लैट में 5 कमरे — 3 मुख्य रूम और 2 गेस्ट रूम, जिनके लिए अलग एंट्रेंस दिया गया है</li>
 	<li>सांसदों के लिए <strong>प्राइवेट ऑफिस</strong>, पर्सनल असिस्टेंट के लिए अलग ऑफिस, प्रेयर रूम, लिविंग रूम, छोटी मीटिंग स्पेस, मॉड्यूलर किचन, बालकनी से अलग स्टाफ एंट्री, MPs और स्टाफ के लिए अलग लिफ्ट</li>
 	<li>हर फ्लैट में सेंट्रल एयर-कंडीशनिंग, ऑडियो-विजुअल सिक्योरिटी सिस्टम और अलग <strong>स्टाफ क्वार्टर</strong> (दो कमरे, पैंट्री और साझा वॉशरूम)</li>
</ul>
<strong>अमेंटीज़ ब्लॉक (पांचवां टावर)</strong>

पांचवां टावर सुविधाओं के लिए बनाया गया है जिसमें —
<ul>
 	<li>प्रेस ब्रिफिंग और सांसदों की मीटिंग के लिए दो बड़े हॉल</li>
 	<li>कैंटीन, टक शॉप, एटीएम</li>
 	<li>डबल बेसमेंट पार्किंग, जिसमें 500 वाहनों की क्षमता</li>
 	<li>ऊर्जा बचत के लिए टेरेस पर <strong>सोलर पैनल</strong></li>
</ul>
<strong>बाहरी डिज़ाइन और लैंडस्केपिंग</strong>

कॉम्प्लेक्स के बीच में खूबसूरत लैंडस्केप्ड लॉन है, जिसमें वॉकिंग पाथ, गज़ीबो, स्ट्रीट लाइटिंग और सजावटी मूर्तियां जैसे <strong>शंख</strong><strong>, </strong><strong>हंस और सत्यमेव जयते</strong> के प्रतीक लगे हैं। टावरों की दीवारों पर बड़े पैमाने पर आर्टवर्क बनाया गया है, जिसे दिल्ली अर्बन आर्ट कमीशन की मदद से डिजाइन किया गया। इन आर्टवर्क में भारत का कृषि जीवन, स्वतंत्रता संग्राम, सेना के प्रतीक और राष्ट्रीय नायक जैसे बिरसा मुंडा और सरदार वल्लभभाई पटेल शामिल हैं।

<strong>निर्माण और पर्यावरण मंजूरी</strong>
<ul>
 	<li>प्रोजेक्ट सिर्फ <strong>9 </strong><strong>महीनों</strong> में Mivan construction तकनीक से पूरा हुआ</li>
 	<li>कुल 372 पेड़ों में से 222 को ट्रांसप्लांट करने की अनुमति मिली</li>
 	<li>2022 में दिल्ली स्टेट एनवायरनमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (SEIAA) ने पर्यावरण मंजूरी दी</li>
 	<li>पेड़ों के ट्रांसप्लांटेशन की जांच के लिए स्टेट एक्सपर्ट अप्रीजल कमेटी (SEAC) को जिम्मेदारी दी गई</li>
</ul>
<strong>क्षमता और बदलाव</strong>

यह कॉम्प्लेक्स करीब <strong>2,468 </strong><strong>लोगों</strong> को आवास देगा, जिसमें सांसद, उनके परिवार और स्टाफ शामिल हैं। पुराने समय में यहां 243 फ्लैट के 16 टावर थे, जिन्हें तोड़कर यह नया स्ट्रक्चर खड़ा किया गया है।

<strong>पुराने प्रोजेक्ट्स और पृष्ठभूमि</strong>
<ul>
 	<li>2020 में डॉ. बी.डी. मार्ग पर 76 नए फ्लैट</li>
 	<li>2019 में नॉर्थ एवेन्यू पर 36 डुप्लेक्स फ्लैट सांसदों को मिले
पहले सांसद वरिष्ठता के आधार पर लुटियंस बंगलों, नॉर्थ-साउथ एवेन्यू और पंडारा रोड जैसे बड़े आवासों या सरकारी कॉलोनियों के पुराने फ्लैट्स में रहते थे। अब ज्यादातर नए सांसदों को हाई-राइज, सेल्फ-कंटेंड अपार्टमेंट्स में शिफ्ट किया जा रहा है।</li>
</ul>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[नई दिल्ली के बाबा खरक सिंह मार्ग पर सांसदों के लिए बनाए गए नए और आधुनिक हाई-राइज रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 अगस्त को करेंगे। इस मौके पर पीएम मोदी उन सांसदों को नए फ्लैट्स की चाबियां भी सौंपेंगे, जिन्हें यहां आवास आवंटित किया गया है।

करीब ₹680 करोड़ की लागत से तैयार यह प्रोजेक्ट लुटियंस दिल्ली में सरकारी आवासों को मॉडर्न बनाने की दिशा में सरकार की एक और बड़ी पहल है। इससे पहले सांसदों के लिए कई पुराने मकान 1935 से 1955 के बीच बनाए गए थे, जो अब अपनी उम्र पूरी कर चुके थे। इसी वजह से इन्हें हटाकर यह नया कॉम्प्लेक्स बनाया गया।

<strong>कॉम्प्लेक्स का लोकेशन और महत्व</strong>

यह कॉम्प्लेक्स राजधानी के बेहद अहम इलाके बाबा खरक सिंह मार्ग पर स्थित है, जो संसद मार्ग को कनॉट प्लेस से जोड़ता है। यहां से संसद भवन, राष्ट्रपति भवन और बड़े सरकारी दफ्तर कुछ ही मिनटों की दूरी पर हैं। सभी तीन एंट्री गेट सीधे बाबा खरक सिंह मार्ग पर खुलते हैं, जिससे सांसदों को ट्रांसपोर्ट और प्रशासनिक सुविधाओं तक आसानी से पहुंच मिल सकेगी।

<strong>बिल्डिंग और फ्लैट्स का स्ट्रक्चर</strong>

इस कॉम्प्लेक्स में कुल <strong>5 </strong><strong>टावर</strong> हैं।
<ul>
 	<li><strong>4 </strong><strong>रेजिडेंशियल टावर</strong> — हर टावर में 46 फ्लैट, दो यूनिट प्रति फ्लोर</li>
 	<li>टावरों के नाम नदियों पर रखे गए हैं जैसे <strong>सबरमती</strong> और <strong>कोसी</strong></li>
 	<li>हर फ्लैट का आकार करीब <strong>5,000 </strong><strong>वर्ग फुट</strong> है</li>
 	<li>फ्लैट में 5 कमरे — 3 मुख्य रूम और 2 गेस्ट रूम, जिनके लिए अलग एंट्रेंस दिया गया है</li>
 	<li>सांसदों के लिए <strong>प्राइवेट ऑफिस</strong>, पर्सनल असिस्टेंट के लिए अलग ऑफिस, प्रेयर रूम, लिविंग रूम, छोटी मीटिंग स्पेस, मॉड्यूलर किचन, बालकनी से अलग स्टाफ एंट्री, MPs और स्टाफ के लिए अलग लिफ्ट</li>
 	<li>हर फ्लैट में सेंट्रल एयर-कंडीशनिंग, ऑडियो-विजुअल सिक्योरिटी सिस्टम और अलग <strong>स्टाफ क्वार्टर</strong> (दो कमरे, पैंट्री और साझा वॉशरूम)</li>
</ul>
<strong>अमेंटीज़ ब्लॉक (पांचवां टावर)</strong>

पांचवां टावर सुविधाओं के लिए बनाया गया है जिसमें —
<ul>
 	<li>प्रेस ब्रिफिंग और सांसदों की मीटिंग के लिए दो बड़े हॉल</li>
 	<li>कैंटीन, टक शॉप, एटीएम</li>
 	<li>डबल बेसमेंट पार्किंग, जिसमें 500 वाहनों की क्षमता</li>
 	<li>ऊर्जा बचत के लिए टेरेस पर <strong>सोलर पैनल</strong></li>
</ul>
<strong>बाहरी डिज़ाइन और लैंडस्केपिंग</strong>

कॉम्प्लेक्स के बीच में खूबसूरत लैंडस्केप्ड लॉन है, जिसमें वॉकिंग पाथ, गज़ीबो, स्ट्रीट लाइटिंग और सजावटी मूर्तियां जैसे <strong>शंख</strong><strong>, </strong><strong>हंस और सत्यमेव जयते</strong> के प्रतीक लगे हैं। टावरों की दीवारों पर बड़े पैमाने पर आर्टवर्क बनाया गया है, जिसे दिल्ली अर्बन आर्ट कमीशन की मदद से डिजाइन किया गया। इन आर्टवर्क में भारत का कृषि जीवन, स्वतंत्रता संग्राम, सेना के प्रतीक और राष्ट्रीय नायक जैसे बिरसा मुंडा और सरदार वल्लभभाई पटेल शामिल हैं।

<strong>निर्माण और पर्यावरण मंजूरी</strong>
<ul>
 	<li>प्रोजेक्ट सिर्फ <strong>9 </strong><strong>महीनों</strong> में Mivan construction तकनीक से पूरा हुआ</li>
 	<li>कुल 372 पेड़ों में से 222 को ट्रांसप्लांट करने की अनुमति मिली</li>
 	<li>2022 में दिल्ली स्टेट एनवायरनमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (SEIAA) ने पर्यावरण मंजूरी दी</li>
 	<li>पेड़ों के ट्रांसप्लांटेशन की जांच के लिए स्टेट एक्सपर्ट अप्रीजल कमेटी (SEAC) को जिम्मेदारी दी गई</li>
</ul>
<strong>क्षमता और बदलाव</strong>

यह कॉम्प्लेक्स करीब <strong>2,468 </strong><strong>लोगों</strong> को आवास देगा, जिसमें सांसद, उनके परिवार और स्टाफ शामिल हैं। पुराने समय में यहां 243 फ्लैट के 16 टावर थे, जिन्हें तोड़कर यह नया स्ट्रक्चर खड़ा किया गया है।

<strong>पुराने प्रोजेक्ट्स और पृष्ठभूमि</strong>
<ul>
 	<li>2020 में डॉ. बी.डी. मार्ग पर 76 नए फ्लैट</li>
 	<li>2019 में नॉर्थ एवेन्यू पर 36 डुप्लेक्स फ्लैट सांसदों को मिले
पहले सांसद वरिष्ठता के आधार पर लुटियंस बंगलों, नॉर्थ-साउथ एवेन्यू और पंडारा रोड जैसे बड़े आवासों या सरकारी कॉलोनियों के पुराने फ्लैट्स में रहते थे। अब ज्यादातर नए सांसदों को हाई-राइज, सेल्फ-कंटेंड अपार्टमेंट्स में शिफ्ट किया जा रहा है।</li>
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