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	<title>Opposition &#8211; Trends Topic</title>
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	<title>Opposition &#8211; Trends Topic</title>
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		<title>Rae Bareli दौरे पर Rahul Gandhi ने BJP-RSS और Election Commission पर साधा निशाना, बोले- OBC और Dalits को आगे बढ़ने नहीं दे रहे</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 10 Sep 2025 11:54:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता <strong>राहुल गांधी</strong> ने रायबरेली में अपने दौरे के दौरान कई मुद्दों पर बड़ा बयान दिया। प्रजापति समाज के सम्मेलन में उन्होंने <strong>भाजपा और आरएसएस</strong> पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में 90 फीसदी आबादी ओबीसी, दलित और आदिवासी है, लेकिन इन लोगों को आगे बढ़ने नहीं दिया जा रहा। राहुल ने कहा, “ये चाहते हैं कि दलित वहीं रहें, अम्बानी जहां हैं वहीं रहें। हमारा मकसद है कि प्रजापति और ओबीसी समाज के बच्चे भी अम्बानी जैसे बिजनेसमैन बने।”

राहुल ने पीएम मोदी पर भी निशाना साधा और कहा कि “प्रधानमंत्री खुद ओबीसी हैं, लेकिन जाति जनगणना पर कुछ नहीं बोलते। मैंने संसद में सवाल किया तो डेढ़ घंटे तक भाषण दिया, लेकिन जाति जनगणना का नाम तक नहीं लिया।”

<strong>दौरे का पूरा क्रम</strong>
<ul>
 	<li><strong>सुबह </strong><strong>8:30 </strong><strong>बजे:</strong> राहुल गांधी दिल्ली स्थित अपने आवास से रवाना हुए।</li>
 	<li><strong>लखनऊ एयरपोर्ट:</strong> फ्लाइट से लखनऊ पहुंचे। एयरपोर्ट पर हजारों कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया।</li>
 	<li><strong>सड़क मार्ग से रायबरेली:</strong> लखनऊ से रायबरेली के लिए निकलें।</li>
</ul>
रास्ते में राहुल गांधी के काफिले को <strong>योगी सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह</strong> और उनके समर्थकों ने रोकने की कोशिश की। धरने के चलते काफिला करीब <strong>1 </strong><strong>किलोमीटर पहले रुका</strong>, पांच मिनट के लिए रोकावट हुई। पुलिस ने मंत्री को हटाया और राहुल का काफिला सुरक्षित आगे बढ़ा।

<strong>बटोही रिसॉर्ट में कार्यक्रम</strong>

राहुल गांधी <strong>बटोही रिसॉर्ट</strong> पहुंचे और वहां <strong>500 </strong><strong>से ज्यादा बूथ स्तर के कांग्रेस कार्यकर्ताओं</strong> को संबोधित किया।

मुख्य बातें:
<ul>
 	<li><strong>वोट चोरी और चुनाव आयोग पर हमला:</strong> राहुल ने कहा कि बीजेपी वोट चोरी करके चुनाव जीत रही है। चुनाव आयोग ने जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा, “विरोध के बाद भी चुनाव आयोग तानाशाही कर रहा है।”</li>
 	<li><strong>प्रजापति सम्मेलन में भाषण:</strong> राहुल ने कहा कि पिछड़ा, ओबीसी, अति पिछड़ा, दलित और आदिवासी समाज को रोका जा रहा है। कॉर्पोरेट इंडिया, बड़े अस्पतालों और कंपनियों में OBC को जगह नहीं मिलती। उन्होंने बताया कि मनरेगा में OBC दिखते हैं, लेकिन बड़े कॉर्पोरेट का कर्ज माफ़ हो जाता है।</li>
 	<li>राहुल ने कहा, “आरएसएस 90 फीसदी OBC आबादी को रोक रही है। मैं यही सवाल सरकार से करता हूं। हम चाहते हैं कि प्रजापति समाज, OBC समाज का बच्चा अम्बानी जैसा बिजनेसमैन बने।”</li>
</ul>
<strong>सामाजिक और व्यक्तिगत मुलाकातें</strong>
<ul>
 	<li>रास्ते में राहुल गांधी ने <strong>8 </strong><strong>साल की बच्ची लक्ष्मी</strong> को टॉफी दी और बात की।</li>
 	<li>मुलिहा मऊ गांव में <strong>पीपल का पौधा रोपण</strong> किया और कार्यकर्ताओं को पौधे की देखभाल करने के लिए कहा।</li>
 	<li>इस दौरान उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दिया।</li>
</ul>
<strong>सपा का पोस्टर विवाद</strong>
<ul>
 	<li>रायबरेली में सपा लोहिया वाहिनी प्रदेश सचिव <strong>राहुल निर्मल बागी</strong> ने पोस्टर जारी किया, जिसमें राहुल गांधी, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव को <strong>ब्रह्मा</strong><strong>, </strong><strong>विष्णु और महेश</strong> के रूप में दिखाया गया।</li>
 	<li>भाजपा प्रवक्ता <strong>आनंद दुबे</strong> ने कहा कि ये नेता राजनीति के इच्छाधारी हिंदू हैं और चुनाव आते ही अपना रूप बदल लेते हैं।</li>
</ul>
<strong>अन्य प्रमुख घटनाक्रम</strong>
<ul>
 	<li>गोरा बाजार चौराहे पर नव-निर्मित <strong>अशोक स्तंभ का लोकार्पण</strong> किया।</li>
 	<li>बटोही रिसॉर्ट से प्रजापति समाज की बैठक में शामिल हुए।</li>
 	<li>बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से संगठन मजबूत करने और चुनाव रणनीति पर चर्चा की।</li>
 	<li>11 सितंबर को जिले में विकास योजनाओं की समीक्षा के लिए होने वाली <strong>‘</strong><strong>दिशा</strong><strong>’ </strong><strong>बैठक की अध्यक्षता करेंगे।</strong></li>
</ul>
<strong>राहुल गांधी के मुख्य संदेश</strong>
<ol>
 	<li>OBC और दलित समाज के बच्चों को आगे बढ़ने का मौका मिले।</li>
 	<li>वोट चोरी और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।</li>
 	<li>कॉर्पोरेट इंडिया और बड़े उद्योगपतियों के फायदे पर ध्यान आकर्षित किया।</li>
 	<li>समाज और पर्यावरण के लिए सकारात्मक संदेश दिए।</li>
</ol>
राहुल गांधी का रायबरेली दौरा 10 और 11 सितंबर तक जारी रहेगा।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता <strong>राहुल गांधी</strong> ने रायबरेली में अपने दौरे के दौरान कई मुद्दों पर बड़ा बयान दिया। प्रजापति समाज के सम्मेलन में उन्होंने <strong>भाजपा और आरएसएस</strong> पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में 90 फीसदी आबादी ओबीसी, दलित और आदिवासी है, लेकिन इन लोगों को आगे बढ़ने नहीं दिया जा रहा। राहुल ने कहा, “ये चाहते हैं कि दलित वहीं रहें, अम्बानी जहां हैं वहीं रहें। हमारा मकसद है कि प्रजापति और ओबीसी समाज के बच्चे भी अम्बानी जैसे बिजनेसमैन बने।”

राहुल ने पीएम मोदी पर भी निशाना साधा और कहा कि “प्रधानमंत्री खुद ओबीसी हैं, लेकिन जाति जनगणना पर कुछ नहीं बोलते। मैंने संसद में सवाल किया तो डेढ़ घंटे तक भाषण दिया, लेकिन जाति जनगणना का नाम तक नहीं लिया।”

<strong>दौरे का पूरा क्रम</strong>
<ul>
 	<li><strong>सुबह </strong><strong>8:30 </strong><strong>बजे:</strong> राहुल गांधी दिल्ली स्थित अपने आवास से रवाना हुए।</li>
 	<li><strong>लखनऊ एयरपोर्ट:</strong> फ्लाइट से लखनऊ पहुंचे। एयरपोर्ट पर हजारों कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया।</li>
 	<li><strong>सड़क मार्ग से रायबरेली:</strong> लखनऊ से रायबरेली के लिए निकलें।</li>
</ul>
रास्ते में राहुल गांधी के काफिले को <strong>योगी सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह</strong> और उनके समर्थकों ने रोकने की कोशिश की। धरने के चलते काफिला करीब <strong>1 </strong><strong>किलोमीटर पहले रुका</strong>, पांच मिनट के लिए रोकावट हुई। पुलिस ने मंत्री को हटाया और राहुल का काफिला सुरक्षित आगे बढ़ा।

<strong>बटोही रिसॉर्ट में कार्यक्रम</strong>

राहुल गांधी <strong>बटोही रिसॉर्ट</strong> पहुंचे और वहां <strong>500 </strong><strong>से ज्यादा बूथ स्तर के कांग्रेस कार्यकर्ताओं</strong> को संबोधित किया।

मुख्य बातें:
<ul>
 	<li><strong>वोट चोरी और चुनाव आयोग पर हमला:</strong> राहुल ने कहा कि बीजेपी वोट चोरी करके चुनाव जीत रही है। चुनाव आयोग ने जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा, “विरोध के बाद भी चुनाव आयोग तानाशाही कर रहा है।”</li>
 	<li><strong>प्रजापति सम्मेलन में भाषण:</strong> राहुल ने कहा कि पिछड़ा, ओबीसी, अति पिछड़ा, दलित और आदिवासी समाज को रोका जा रहा है। कॉर्पोरेट इंडिया, बड़े अस्पतालों और कंपनियों में OBC को जगह नहीं मिलती। उन्होंने बताया कि मनरेगा में OBC दिखते हैं, लेकिन बड़े कॉर्पोरेट का कर्ज माफ़ हो जाता है।</li>
 	<li>राहुल ने कहा, “आरएसएस 90 फीसदी OBC आबादी को रोक रही है। मैं यही सवाल सरकार से करता हूं। हम चाहते हैं कि प्रजापति समाज, OBC समाज का बच्चा अम्बानी जैसा बिजनेसमैन बने।”</li>
</ul>
<strong>सामाजिक और व्यक्तिगत मुलाकातें</strong>
<ul>
 	<li>रास्ते में राहुल गांधी ने <strong>8 </strong><strong>साल की बच्ची लक्ष्मी</strong> को टॉफी दी और बात की।</li>
 	<li>मुलिहा मऊ गांव में <strong>पीपल का पौधा रोपण</strong> किया और कार्यकर्ताओं को पौधे की देखभाल करने के लिए कहा।</li>
 	<li>इस दौरान उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दिया।</li>
</ul>
<strong>सपा का पोस्टर विवाद</strong>
<ul>
 	<li>रायबरेली में सपा लोहिया वाहिनी प्रदेश सचिव <strong>राहुल निर्मल बागी</strong> ने पोस्टर जारी किया, जिसमें राहुल गांधी, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव को <strong>ब्रह्मा</strong><strong>, </strong><strong>विष्णु और महेश</strong> के रूप में दिखाया गया।</li>
 	<li>भाजपा प्रवक्ता <strong>आनंद दुबे</strong> ने कहा कि ये नेता राजनीति के इच्छाधारी हिंदू हैं और चुनाव आते ही अपना रूप बदल लेते हैं।</li>
</ul>
<strong>अन्य प्रमुख घटनाक्रम</strong>
<ul>
 	<li>गोरा बाजार चौराहे पर नव-निर्मित <strong>अशोक स्तंभ का लोकार्पण</strong> किया।</li>
 	<li>बटोही रिसॉर्ट से प्रजापति समाज की बैठक में शामिल हुए।</li>
 	<li>बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से संगठन मजबूत करने और चुनाव रणनीति पर चर्चा की।</li>
 	<li>11 सितंबर को जिले में विकास योजनाओं की समीक्षा के लिए होने वाली <strong>‘</strong><strong>दिशा</strong><strong>’ </strong><strong>बैठक की अध्यक्षता करेंगे।</strong></li>
</ul>
<strong>राहुल गांधी के मुख्य संदेश</strong>
<ol>
 	<li>OBC और दलित समाज के बच्चों को आगे बढ़ने का मौका मिले।</li>
 	<li>वोट चोरी और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।</li>
 	<li>कॉर्पोरेट इंडिया और बड़े उद्योगपतियों के फायदे पर ध्यान आकर्षित किया।</li>
 	<li>समाज और पर्यावरण के लिए सकारात्मक संदेश दिए।</li>
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राहुल गांधी का रायबरेली दौरा 10 और 11 सितंबर तक जारी रहेगा।]]></content:encoded>
					
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		<item>
		<title>Parliament में Rahul Gandhi को लेकर Rijiju का बड़ा हमला, बोले- Congress MPs खुद हो जाते हैं Uncomfortable</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 Aug 2025 04:36:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
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		<category><![CDATA[congress]]></category>
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					<description><![CDATA[संसदीय कार्य मंत्री <strong>किरन रिजिजू</strong> ने शनिवार को कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता <strong>राहुल गांधी</strong> पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि जब राहुल गांधी संसद में बोलते हैं, तो खुद कांग्रेस के सांसद <em>"uncomfortable"</em> हो जाते हैं, क्योंकि उन्हें डर रहता है कि कहीं वह <em>“</em><em>अनाप-शनाप”</em> बातें न कह दें और पार्टी को उसका खामियाज़ा न भुगतना पड़े।
<h3>राहुल गांधी अपनी पार्टी की भी नहीं सुनते: रिजिजू</h3>
एजेंसी <strong>ANI</strong> को दिए इंटरव्यू में रिजिजू ने कहा,
<em>"</em><em>राहुल गांधी कुछ बोलते हैं तो उनके MPs </em><em>घबरा जाते हैं। उन्हें डर होता है कि वो कुछ ऐसा न बोल दें जिससे पार्टी को नुकसान उठाना पड़े। वह अपने लोगों की भी नहीं सुनते।"</em>

रिजिजू ने याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी राहुल गांधी को <em>“</em><em>चौकीदार चोर है”</em> वाले बयान पर फटकार लगाई थी। इसके अलावा राफेल डील और <em>चीन ने जमीन कब्जा ली</em> जैसे बयानों पर भी राहुल गांधी को आलोचना का सामना करना पड़ा।
<h3>"अगर राहुल नहीं बोल पाते, तो दूसरों को क्यों रोका जाता है?"</h3>
रिजिजू ने कहा कि कई कांग्रेस नेता योग्य और जानकार हैं, लेकिन उन्हें बोलने का मौका ही नहीं मिलता।
<em>"</em><em>अगर राहुल गांधी को बोलना नहीं आता, </em><em>तो इसका मतलब ये नहीं कि दूसरे कांग्रेस MPs </em><em>को भी रोक दिया जाए।"</em>
उन्होंने कांग्रेस से अपील की कि वह संसद की चर्चाओं में हिस्सा लें, ताकि जनता के मुद्दे उठाए जा सकें।
<h3>संसद सत्र में हंगामे से कामकाज ठप</h3>
इस बार का <strong>मानसून सत्र</strong> भारी हंगामे और स्थगन की वजह से लगभग ठप रहा।
<ul>
 	<li><strong>लोकसभा</strong> की उत्पादकता सिर्फ <strong>31%</strong> रही।</li>
 	<li><strong>राज्यसभा</strong> की उत्पादकता <strong>39%</strong> रही।</li>
 	<li>लोकसभा में 120 घंटे उपलब्ध थे, लेकिन चर्चा केवल 37 घंटे चली।</li>
 	<li>राज्यसभा में 41 घंटे 15 मिनट ही चर्चा हो सकी।</li>
</ul>
हालांकि हंगामे के बीच संसद ने <strong>15 </strong><strong>अहम बिल पारित किए</strong>।
<h3>संविधान संशोधन बिल पर बड़ी घोषणा</h3>
सत्र के दौरान सरकार ने एक <strong>संविधान संशोधन बिल</strong> पेश किया। इसके अनुसार –
<ul>
 	<li>अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई भी मंत्री किसी <strong>गंभीर आपराधिक मामले</strong> में गिरफ्तार होकर जेल जाता है, तो उसे तुरंत पद छोड़ना होगा।</li>
 	<li>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद कहा कि उन्हें इस कानून से <strong>कोई छूट नहीं चाहिए</strong>।
<em>"PM </em><em>भी देश का नागरिक है, </em><em>अगर गुनाह करेगा तो जेल जाएगा और पद छोड़ना पड़ेगा।"</em></li>
</ul>
रिजिजू ने कहा कि यह बिल विपक्ष को भी समर्थन करना चाहिए था, लेकिन उन्होंने सिर्फ हंगामा किया।
<h3>सत्र सरकार के लिए सफल, विपक्ष के लिए असफल</h3>
रिजिजू के मुताबिक,
<em>"</em><em>संसद का मानसून सत्र राष्ट्र के नजरिये से सफल रहा, </em><em>लेकिन विपक्ष के नजरिये से पूरी तरह नाकाम रहा। विपक्ष अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल रहा है।"</em>

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर राहुल गांधी की संसद में भूमिका और कांग्रेस की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[संसदीय कार्य मंत्री <strong>किरन रिजिजू</strong> ने शनिवार को कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता <strong>राहुल गांधी</strong> पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि जब राहुल गांधी संसद में बोलते हैं, तो खुद कांग्रेस के सांसद <em>"uncomfortable"</em> हो जाते हैं, क्योंकि उन्हें डर रहता है कि कहीं वह <em>“</em><em>अनाप-शनाप”</em> बातें न कह दें और पार्टी को उसका खामियाज़ा न भुगतना पड़े।
<h3>राहुल गांधी अपनी पार्टी की भी नहीं सुनते: रिजिजू</h3>
एजेंसी <strong>ANI</strong> को दिए इंटरव्यू में रिजिजू ने कहा,
<em>"</em><em>राहुल गांधी कुछ बोलते हैं तो उनके MPs </em><em>घबरा जाते हैं। उन्हें डर होता है कि वो कुछ ऐसा न बोल दें जिससे पार्टी को नुकसान उठाना पड़े। वह अपने लोगों की भी नहीं सुनते।"</em>

रिजिजू ने याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी राहुल गांधी को <em>“</em><em>चौकीदार चोर है”</em> वाले बयान पर फटकार लगाई थी। इसके अलावा राफेल डील और <em>चीन ने जमीन कब्जा ली</em> जैसे बयानों पर भी राहुल गांधी को आलोचना का सामना करना पड़ा।
<h3>"अगर राहुल नहीं बोल पाते, तो दूसरों को क्यों रोका जाता है?"</h3>
रिजिजू ने कहा कि कई कांग्रेस नेता योग्य और जानकार हैं, लेकिन उन्हें बोलने का मौका ही नहीं मिलता।
<em>"</em><em>अगर राहुल गांधी को बोलना नहीं आता, </em><em>तो इसका मतलब ये नहीं कि दूसरे कांग्रेस MPs </em><em>को भी रोक दिया जाए।"</em>
उन्होंने कांग्रेस से अपील की कि वह संसद की चर्चाओं में हिस्सा लें, ताकि जनता के मुद्दे उठाए जा सकें।
<h3>संसद सत्र में हंगामे से कामकाज ठप</h3>
इस बार का <strong>मानसून सत्र</strong> भारी हंगामे और स्थगन की वजह से लगभग ठप रहा।
<ul>
 	<li><strong>लोकसभा</strong> की उत्पादकता सिर्फ <strong>31%</strong> रही।</li>
 	<li><strong>राज्यसभा</strong> की उत्पादकता <strong>39%</strong> रही।</li>
 	<li>लोकसभा में 120 घंटे उपलब्ध थे, लेकिन चर्चा केवल 37 घंटे चली।</li>
 	<li>राज्यसभा में 41 घंटे 15 मिनट ही चर्चा हो सकी।</li>
</ul>
हालांकि हंगामे के बीच संसद ने <strong>15 </strong><strong>अहम बिल पारित किए</strong>।
<h3>संविधान संशोधन बिल पर बड़ी घोषणा</h3>
सत्र के दौरान सरकार ने एक <strong>संविधान संशोधन बिल</strong> पेश किया। इसके अनुसार –
<ul>
 	<li>अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई भी मंत्री किसी <strong>गंभीर आपराधिक मामले</strong> में गिरफ्तार होकर जेल जाता है, तो उसे तुरंत पद छोड़ना होगा।</li>
 	<li>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद कहा कि उन्हें इस कानून से <strong>कोई छूट नहीं चाहिए</strong>।
<em>"PM </em><em>भी देश का नागरिक है, </em><em>अगर गुनाह करेगा तो जेल जाएगा और पद छोड़ना पड़ेगा।"</em></li>
</ul>
रिजिजू ने कहा कि यह बिल विपक्ष को भी समर्थन करना चाहिए था, लेकिन उन्होंने सिर्फ हंगामा किया।
<h3>सत्र सरकार के लिए सफल, विपक्ष के लिए असफल</h3>
रिजिजू के मुताबिक,
<em>"</em><em>संसद का मानसून सत्र राष्ट्र के नजरिये से सफल रहा, </em><em>लेकिन विपक्ष के नजरिये से पूरी तरह नाकाम रहा। विपक्ष अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल रहा है।"</em>

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर राहुल गांधी की संसद में भूमिका और कांग्रेस की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>PMs-CMs को हटाने वाला Bill: Congress में बंटवारा, Tharoor ने बताया &#8220;Reasonable&#8221;, बाकी नेताओं ने कहा “Draconian Law”</title>
		<link>https://trendstopic.in/bill-to-remove-pms-and-cms-congress-divided-tharoor-calls-it-reasonable-others-slam-it-as-draconian-law/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 21 Aug 2025 03:44:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मोदी सरकार ने संसद में एक अहम बिल पेश किया है, जिसने राजनीति में हलचल मचा दी है। इस बिल में प्रावधान है कि अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई भी मंत्री <strong>30 </strong><strong>दिन लगातार जेल में रहता है या हिरासत में रहता है</strong> और उस केस में <strong>कम से कम </strong><strong>5 </strong><strong>साल की सज़ा का प्रावधान</strong> है, तो उन्हें तुरंत अपने पद से हटना होगा।

सरकार इसे <strong>anti-corruption move</strong> बता रही है, लेकिन विपक्ष इसे <strong>राजनीतिक हथियार</strong> मानकर विरोध कर रहा है।

<strong>शशि थरूर ने तोड़ी पार्टी लाइन</strong>

कांग्रेस सांसद <strong>शशि थरूर</strong> ने इस बिल का समर्थन कर सबको चौंका दिया।
थरूर ने कहा:

“On the face of it, ये बिल reasonable लगता है। जो गलत करेगा, उसे सज़ा मिलनी चाहिए और वो constitutional या political office पर नहीं रह सकता। ये बात मुझे logical लगती है।”

उन्होंने कहा कि बिल को <strong>संसदीय समिति</strong> के पास भेजकर उस पर विस्तार से चर्चा करना अच्छा कदम होगा।

<strong>कांग्रेस नेताओं का विरोध</strong>

लेकिन कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने इस बिल को खतरनाक बताया है।
<ul>
 	<li><strong>प्रियंका गांधी (कांग्रेस सांसद</strong><strong>, </strong><strong>वायनाड):</strong>
उन्होंने इसे पूरी तरह <strong>तानाशाही (</strong><strong>draconian law)</strong> कहा।
प्रियंका का तर्क है कि –</li>
</ul>
“कल को किसी भी मुख्यमंत्री को fabricated charges (झूठे केस) में फंसा कर 30 दिन जेल में रख दिया जाए और वो CM की कुर्सी से हट जाएगा, बिना किसी conviction (दोष साबित हुए)। ये बिल्कुल unconstitutional और undemocratic है।”
<ul>
 	<li><strong>के.सी. वेणुगोपाल (सीनियर कांग्रेस नेता):</strong>
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ़ एक <strong>diversionary tactic</strong> है।</li>
</ul>
“ये बिल पास नहीं होगा। इसका मकसद सिर्फ़ electoral fraud और विपक्ष की गतिविधियों से लोगों का ध्यान हटाना है। सरकार vendetta politics को constitutional रूप देना चाहती है।”
<ul>
 	<li><strong>अभिषेक मनु सिंघवी (कांग्रेस प्रवक्ता):</strong>
उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी चुनावी मैदान में विपक्षी मुख्यमंत्रियों को नहीं हरा पा रही, इसलिए इस तरह का क़ानून लाकर उन्हें हटाना चाहती है।</li>
</ul>
<strong>बिल में क्या है खास</strong><strong>?</strong>
<ul>
 	<li>अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री <strong>30 </strong><strong>दिन तक जेल में रहते हैं</strong>, और जिस अपराध में उन पर केस है उसमें <strong>कम से कम </strong><strong>5 </strong><strong>साल की सज़ा</strong> हो सकती है, तो उन्हें पद से हटना होगा।</li>
 	<li>हालांकि, जेल से छूटने के बाद वही नेता <strong>दोबारा उसी पद पर नियुक्त हो सकते हैं</strong>।</li>
 	<li>अभी के कानून (Representation of the People’s Act, 1951) में नियम है कि अगर किसी सांसद या विधायक को <strong>2 </strong><strong>साल या उससे ज्यादा की सज़ा</strong> हो जाती है, तभी वो अयोग्य ठहराए जाते हैं।</li>
 	<li>यानी यह नया प्रस्ताव उससे कहीं ज्यादा सख़्त है।</li>
</ul>
<strong>राजनीतिक हलचल</strong>

यह बिल <strong>मानसून सत्र के आख़िरी दो दिन पहले</strong> पेश किया गया, जिससे संसद और राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई।
विपक्ष का आरोप है कि सरकार इसका इस्तेमाल <strong>opposition leaders </strong><strong>को टारगेट करने</strong> के लिए करेगी।
वहीं, समर्थक नेताओं का कहना है कि यह कानून राजनीति को <strong>clean </strong><strong>और </strong><strong>corruption-free</strong> बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

कुल मिलाकर, यह बिल अगर पास होता है तो भारतीय राजनीति का चेहरा बदल सकता है। लेकिन इसके लागू होने से पहले ही यह <strong>पक्ष-विपक्ष की जंग का नया मुद्दा</strong> बन गया है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[मोदी सरकार ने संसद में एक अहम बिल पेश किया है, जिसने राजनीति में हलचल मचा दी है। इस बिल में प्रावधान है कि अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई भी मंत्री <strong>30 </strong><strong>दिन लगातार जेल में रहता है या हिरासत में रहता है</strong> और उस केस में <strong>कम से कम </strong><strong>5 </strong><strong>साल की सज़ा का प्रावधान</strong> है, तो उन्हें तुरंत अपने पद से हटना होगा।

सरकार इसे <strong>anti-corruption move</strong> बता रही है, लेकिन विपक्ष इसे <strong>राजनीतिक हथियार</strong> मानकर विरोध कर रहा है।

<strong>शशि थरूर ने तोड़ी पार्टी लाइन</strong>

कांग्रेस सांसद <strong>शशि थरूर</strong> ने इस बिल का समर्थन कर सबको चौंका दिया।
थरूर ने कहा:

“On the face of it, ये बिल reasonable लगता है। जो गलत करेगा, उसे सज़ा मिलनी चाहिए और वो constitutional या political office पर नहीं रह सकता। ये बात मुझे logical लगती है।”

उन्होंने कहा कि बिल को <strong>संसदीय समिति</strong> के पास भेजकर उस पर विस्तार से चर्चा करना अच्छा कदम होगा।

<strong>कांग्रेस नेताओं का विरोध</strong>

लेकिन कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने इस बिल को खतरनाक बताया है।
<ul>
 	<li><strong>प्रियंका गांधी (कांग्रेस सांसद</strong><strong>, </strong><strong>वायनाड):</strong>
उन्होंने इसे पूरी तरह <strong>तानाशाही (</strong><strong>draconian law)</strong> कहा।
प्रियंका का तर्क है कि –</li>
</ul>
“कल को किसी भी मुख्यमंत्री को fabricated charges (झूठे केस) में फंसा कर 30 दिन जेल में रख दिया जाए और वो CM की कुर्सी से हट जाएगा, बिना किसी conviction (दोष साबित हुए)। ये बिल्कुल unconstitutional और undemocratic है।”
<ul>
 	<li><strong>के.सी. वेणुगोपाल (सीनियर कांग्रेस नेता):</strong>
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ़ एक <strong>diversionary tactic</strong> है।</li>
</ul>
“ये बिल पास नहीं होगा। इसका मकसद सिर्फ़ electoral fraud और विपक्ष की गतिविधियों से लोगों का ध्यान हटाना है। सरकार vendetta politics को constitutional रूप देना चाहती है।”
<ul>
 	<li><strong>अभिषेक मनु सिंघवी (कांग्रेस प्रवक्ता):</strong>
उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी चुनावी मैदान में विपक्षी मुख्यमंत्रियों को नहीं हरा पा रही, इसलिए इस तरह का क़ानून लाकर उन्हें हटाना चाहती है।</li>
</ul>
<strong>बिल में क्या है खास</strong><strong>?</strong>
<ul>
 	<li>अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री <strong>30 </strong><strong>दिन तक जेल में रहते हैं</strong>, और जिस अपराध में उन पर केस है उसमें <strong>कम से कम </strong><strong>5 </strong><strong>साल की सज़ा</strong> हो सकती है, तो उन्हें पद से हटना होगा।</li>
 	<li>हालांकि, जेल से छूटने के बाद वही नेता <strong>दोबारा उसी पद पर नियुक्त हो सकते हैं</strong>।</li>
 	<li>अभी के कानून (Representation of the People’s Act, 1951) में नियम है कि अगर किसी सांसद या विधायक को <strong>2 </strong><strong>साल या उससे ज्यादा की सज़ा</strong> हो जाती है, तभी वो अयोग्य ठहराए जाते हैं।</li>
 	<li>यानी यह नया प्रस्ताव उससे कहीं ज्यादा सख़्त है।</li>
</ul>
<strong>राजनीतिक हलचल</strong>

यह बिल <strong>मानसून सत्र के आख़िरी दो दिन पहले</strong> पेश किया गया, जिससे संसद और राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई।
विपक्ष का आरोप है कि सरकार इसका इस्तेमाल <strong>opposition leaders </strong><strong>को टारगेट करने</strong> के लिए करेगी।
वहीं, समर्थक नेताओं का कहना है कि यह कानून राजनीति को <strong>clean </strong><strong>और </strong><strong>corruption-free</strong> बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

कुल मिलाकर, यह बिल अगर पास होता है तो भारतीय राजनीति का चेहरा बदल सकता है। लेकिन इसके लागू होने से पहले ही यह <strong>पक्ष-विपक्ष की जंग का नया मुद्दा</strong> बन गया है।]]></content:encoded>
					
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