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	<title>NDPSAct &#8211; Trends Topic</title>
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	<title>NDPSAct &#8211; Trends Topic</title>
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	<item>
		<title>Amritsar Police की बड़ी कार्रवाई: सीमा पार तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़, हेरोइन और हथियारों सहित 10 गिरफ्तार</title>
		<link>https://trendstopic.in/big-action-by-amritsar-police-cross-border-smuggling-network-busted-10-arrested-with-heroin-and-weapons/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 28 Feb 2026 07:47:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[News]]></category>
		<category><![CDATA[AmritsarPolice]]></category>
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		<category><![CDATA[PunjabPolice]]></category>
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					<description><![CDATA[<p data-start="110" data-end="539">अमृतसर पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए सीमा पार से संचालित नशीले पदार्थों और अवैध हथियारों की तस्करी करने वाले दो अंतरराष्ट्रीय मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। पुलिस कमिश्नर <strong data-start="284" data-end="308">गुरप्रीत सिंह भुल्लर</strong> के नेतृत्व में कमिश्नरेट पुलिस ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया, जिसमें कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उनके कब्जे से 5.438 किलोग्राम हेरोइन, तीन आधुनिक पिस्तौल, 34 जिंदा कारतूस और 4,500 रुपये की ड्रग मनी बरामद की है।</p>
<p data-start="541" data-end="908">बरामद हथियारों में एक ग्लॉक 9mm पिस्तौल, एक जिगाना 9mm पिस्तौल और एक .32 बोर पिस्तौल शामिल हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ये हथियार और नशीले पदार्थ अंतरराष्ट्रीय सीमा पार से भारत में तस्करी कर लाए जा रहे थे। गिरफ्तार आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से पाकिस्तान स्थित तस्करों के सीधे संपर्क में थे और संगठित तरीके से इस नेटवर्क को संचालित कर रहे थे।</p>
<p data-start="910" data-end="1317">जांच एजेंसियों के अनुसार, हेरोइन और अवैध हथियारों को भारतीय क्षेत्र में पहुंचाने के बाद एक संगठित नेटवर्क के जरिए विभिन्न इलाकों में सप्लाई किया जाता था। इस नेटवर्क में कई स्तरों पर काम करने वाले लोग शामिल थे, जिनकी भूमिकाएं अलग-अलग तय थीं। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की आगे और पीछे की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है, ताकि तस्करी की जड़ों तक पहुंचा जा सके और इससे जुड़े अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया जा सके।</p>
<p data-start="910" data-end="1317"><img class="alignnone  wp-image-29416" src="https://trendstopic.in/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Image-2026-02-28-at-1.05.48-PM-300x169.jpg" alt="" width="1180" height="665" /></p>
<p data-start="1319" data-end="1638">इस मामले में एनडीपीएस एक्ट और आर्म्स एक्ट के तहत कई एफआईआर दर्ज की गई हैं। पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां होने की संभावना है। पंजाब पुलिस ने स्पष्ट किया है कि राज्य में नशे और अवैध हथियारों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई गई है और ऐसे अपराधों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।</p>
<p data-start="1640" data-end="1873" data-is-last-node="" data-is-only-node="">पुलिस कमिश्नर ने कहा कि अमृतसर और पूरे पंजाब को नशा मुक्त और सुरक्षित बनाने के लिए सख्त कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ऐसे सभी आपराधिक नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने के लिए पुलिस पूरी मजबूती के साथ काम कर रही है।</p>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p data-start="110" data-end="539">अमृतसर पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए सीमा पार से संचालित नशीले पदार्थों और अवैध हथियारों की तस्करी करने वाले दो अंतरराष्ट्रीय मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। पुलिस कमिश्नर <strong data-start="284" data-end="308">गुरप्रीत सिंह भुल्लर</strong> के नेतृत्व में कमिश्नरेट पुलिस ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया, जिसमें कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उनके कब्जे से 5.438 किलोग्राम हेरोइन, तीन आधुनिक पिस्तौल, 34 जिंदा कारतूस और 4,500 रुपये की ड्रग मनी बरामद की है।</p>
<p data-start="541" data-end="908">बरामद हथियारों में एक ग्लॉक 9mm पिस्तौल, एक जिगाना 9mm पिस्तौल और एक .32 बोर पिस्तौल शामिल हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ये हथियार और नशीले पदार्थ अंतरराष्ट्रीय सीमा पार से भारत में तस्करी कर लाए जा रहे थे। गिरफ्तार आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से पाकिस्तान स्थित तस्करों के सीधे संपर्क में थे और संगठित तरीके से इस नेटवर्क को संचालित कर रहे थे।</p>
<p data-start="910" data-end="1317">जांच एजेंसियों के अनुसार, हेरोइन और अवैध हथियारों को भारतीय क्षेत्र में पहुंचाने के बाद एक संगठित नेटवर्क के जरिए विभिन्न इलाकों में सप्लाई किया जाता था। इस नेटवर्क में कई स्तरों पर काम करने वाले लोग शामिल थे, जिनकी भूमिकाएं अलग-अलग तय थीं। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की आगे और पीछे की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है, ताकि तस्करी की जड़ों तक पहुंचा जा सके और इससे जुड़े अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया जा सके।</p>
<p data-start="910" data-end="1317"><img class="alignnone  wp-image-29416" src="https://trendstopic.in/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Image-2026-02-28-at-1.05.48-PM-300x169.jpg" alt="" width="1180" height="665" /></p>
<p data-start="1319" data-end="1638">इस मामले में एनडीपीएस एक्ट और आर्म्स एक्ट के तहत कई एफआईआर दर्ज की गई हैं। पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां होने की संभावना है। पंजाब पुलिस ने स्पष्ट किया है कि राज्य में नशे और अवैध हथियारों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई गई है और ऐसे अपराधों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।</p>
<p data-start="1640" data-end="1873" data-is-last-node="" data-is-only-node="">पुलिस कमिश्नर ने कहा कि अमृतसर और पूरे पंजाब को नशा मुक्त और सुरक्षित बनाने के लिए सख्त कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ऐसे सभी आपराधिक नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने के लिए पुलिस पूरी मजबूती के साथ काम कर रही है।</p>]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>Punjab में Drug Trade पर बड़ा Revelation: DSP ने High Court में दायर की याचिका, कहा – Government 300 से ज्यादा NDPS Cases की जांच को &#8216;जानबूझकर रोक रही&#8217; है</title>
		<link>https://trendstopic.in/major-revelation-in-punjab-drug-trade-dsp-moves-high-court-alleges-government-is-deliberately-stalling-probe-into-over-300-ndps-cases/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 Jul 2025 05:26:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[AlpraSafe]]></category>
		<category><![CDATA[CBIInvestigation]]></category>
		<category><![CDATA[DrugMafia]]></category>
		<category><![CDATA[DSPvsGovt]]></category>
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		<category><![CDATA[HighCourtPIL]]></category>
		<category><![CDATA[NDPSAct]]></category>
		<category><![CDATA[PILDebate]]></category>
		<category><![CDATA[PunjabDrugsCase]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब में नशे के खिलाफ लड़ाई एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। पंजाब पुलिस के एक मौजूदा डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) <strong>वविंदर कुमार</strong> ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि <strong>AlpraSafe </strong><strong>नामक सिंथेटिक ड्रग</strong>, जिसमें <strong>Alprazolam</strong> नाम का खतरनाक साइकोट्रॉपिक पदार्थ होता है, पंजाब में भारी मात्रा में बिक रहा है और <strong>NDPS </strong><strong>एक्ट के तहत दर्ज </strong><strong>300 </strong><strong>से ज्यादा केसों की जांच जानबूझकर "कैरीयर लेवल" तक ही सीमित रखी गई है।</strong>

<strong>कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब</strong><strong>, </strong><strong>फर्जी याचिका होने पर चेतावनी भी दी</strong>

हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें <strong>मुख्य न्यायाधीश शील नागु और न्यायमूर्ति संजीव बेरी</strong> शामिल हैं, ने पंजाब सरकार से इस गंभीर मुद्दे पर जवाब मांगा है। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि यह याचिका <strong>पब्लिक इंटरेस्ट के नाम पर पर्सनल इंटरेस्ट</strong> के लिए दायर की गई है, तो इसे <strong>लागत सहित खारिज</strong> कर दिया जाएगा।

<strong>DSP </strong><strong>वविंदर कुमार के आरोप:</strong>
<ol>
 	<li><strong>सिंथेटिक ड्रग ‘</strong><strong>AlpraSafe’ </strong><strong>का पूरे पंजाब में बड़ा नेटवर्क</strong>
DSP का कहना है कि Alprazolam से बनी यह ड्रग पूरे राज्य में “भारी मात्रा” में फैल चुकी है। ये ड्रग्स फार्मा कंपनियों की मिलीभगत से फैक्ट्री और गोदामों से निकल कर सड़कों तक पहुंच रही हैं।</li>
 	<li><strong>2023 </strong><strong>में ही </strong><strong>300 </strong><strong>से अधिक </strong><strong>FIR, </strong><strong>पर जांच सिर्फ कैरियर तक ही सिमटी</strong>
उन्होंने बताया कि <strong>2023 </strong><strong>में अकेले </strong><strong>300 </strong><strong>से ज्यादा </strong><strong>FIR </strong><strong>दर्ज की गईं</strong>, लेकिन किसी केस में भी <strong>निर्माताओं या बड़ी सप्लाई चेन तक जांच नहीं पहुंची</strong>। सभी केस केवल ड्रग्स ले जाने वालों (कैरीयर) की गिरफ्तारी पर खत्म हो गए।</li>
 	<li><strong>STF </strong><strong>में तैनाती के दौरान किया बड़ा खुलासा</strong>
STF (स्पेशल टास्क फोर्स) में अपनी पोस्टिंग के दौरान उन्होंने <strong>20 </strong><strong>फरवरी </strong><strong>2024 </strong><strong>को </strong><strong>FIR </strong><strong>नंबर </strong><strong>31 </strong><strong>दर्ज की थी</strong>, जिसमें <strong>Rs 275 </strong><strong>करोड़ की नशीली दवाइयां और </strong><strong>765 </strong><strong>किलो पाउडर</strong> जब्त किया गया। यह ड्रग्स कई बड़ी फार्मा कंपनियों की फैक्ट्रियों और गोदामों से मिले थे।</li>
 	<li><strong>भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए</strong>
DSP ने दावा किया कि FIR नंबर 23 (22 जनवरी 2023) के मामले में <strong>एक फार्मा कंपनी ने एक सीनियर अफसर को </strong><strong>3 </strong><strong>करोड़ रुपये की रिश्वत दी</strong>, ताकि जांच को रोका जा सके। वहीं FIR नंबर 31 में <strong>Rs 45 </strong><strong>लाख</strong> की घूस देकर कंपनियों के मालिकों को बचाया गया।</li>
 	<li><strong>दबाव में ट्रांसफर और फर्जी </strong><strong>FIR </strong><strong>का आरोप</strong>
DSP वविंदर ने कहा कि जब उन्होंने सीनियर अधिकारियों के कहने पर जांच रोकने से इनकार किया, तो <strong>STF </strong><strong>से उनका तबादला कर दिया गया</strong> और बाद में <strong>भ्रष्टाचार के झूठे केस में फंसा दिया गया</strong>। उन्होंने दावा किया कि उनके पास जो दस्तावेज और चिट्ठियां थीं, <strong>वो पुलिस के पास हैं और शायद छेड़छाड़ भी की गई है।</strong></li>
</ol>
<strong>DSP </strong><strong>खुद भी हैं भ्रष्टाचार केस में आरोपी</strong>

सितंबर 2024 में पंजाब पुलिस ने वविंदर कुमार के खिलाफ <strong>भ्रष्टाचार की </strong><strong>FIR </strong><strong>दर्ज की थी</strong>, जिसमें आरोप था कि उन्होंने एक फार्मा कंपनी से <strong>Rs 45 </strong><strong>लाख की रिश्वत ली</strong>, ताकि उसे कानूनी कार्रवाई से बचाया जा सके। हालांकि, अक्टूबर 2024 में हाईकोर्ट के <strong>न्यायमूर्ति विनोद एस. भारद्वाज</strong> ने <strong>CBI </strong><strong>को प्रारंभिक जांच का आदेश दिया</strong> और STF को भ्रष्टाचार वाली FIR में आगे की जांच करने से रोक दिया।

<strong>राज्य सरकार का जवाब: "यह </strong><strong>PIL </strong><strong>नहीं</strong><strong>, </strong><strong>पर्सनल इंटरेस्ट लिटिगेशन है"</strong>

पंजाब सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील <strong>सलिल सबलोक</strong> ने कोर्ट में कहा कि DSP की याचिका <strong>PIL </strong><strong>की आड़ में चल रही व्यक्तिगत लड़ाई</strong> है। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता ने जिन 300 FIR का जिक्र किया है, उनमें किसी एक का भी विस्तार से ब्यौरा नहीं दिया गया है। इसके अलावा DSP खुद एक केस में जांच अधिकारी रह चुके हैं, इसलिए वह <strong>कोर्ट मॉनिटरिंग की मांग नहीं कर सकते</strong>।

“यह पूरी तरह से व्यक्तिगत हित साधने की कोशिश है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही PIL के दुरुपयोग पर चेतावनी दे चुका है।” – सलिल सबलोक

सबलोक ने यह भी बताया कि FIR नंबर 31 की <strong>CBI </strong><strong>जांच फिलहाल हाईकोर्ट के एकल पीठ के समक्ष लंबित</strong> है, जिसकी अगली सुनवाई <strong>8 </strong><strong>अगस्त</strong> को होनी है।

<strong>ड्रग्स</strong><strong>, </strong><strong>भ्रष्टाचार और प्रशासनिक दबाव की पेचीदा लड़ाई</strong>

DSP वविंदर कुमार की याचिका ने पंजाब में <strong>ड्रग्स नेटवर्क और पुलिस तंत्र की निष्क्रियता</strong> पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। जहां एक ओर अधिकारी दावा कर रहे हैं कि उन्हें <strong>सच्चाई उजागर करने पर सजा दी जा रही है</strong>, वहीं सरकार और वकील इसे <strong>पर्सनल विवाद</strong> बता रहे हैं।

अब सभी की निगाहें 8 अगस्त को हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर हैं, जहां यह तय होगा कि मामले की <strong>CBI </strong><strong>जांच आगे कैसे बढ़ेगी</strong> और क्या वाकई पंजाब में <strong>NDPS </strong><strong>एक्ट के केसों में कोई बड़ी साजिश छुपाई जा रही है।</strong>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब में नशे के खिलाफ लड़ाई एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। पंजाब पुलिस के एक मौजूदा डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) <strong>वविंदर कुमार</strong> ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि <strong>AlpraSafe </strong><strong>नामक सिंथेटिक ड्रग</strong>, जिसमें <strong>Alprazolam</strong> नाम का खतरनाक साइकोट्रॉपिक पदार्थ होता है, पंजाब में भारी मात्रा में बिक रहा है और <strong>NDPS </strong><strong>एक्ट के तहत दर्ज </strong><strong>300 </strong><strong>से ज्यादा केसों की जांच जानबूझकर "कैरीयर लेवल" तक ही सीमित रखी गई है।</strong>

<strong>कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब</strong><strong>, </strong><strong>फर्जी याचिका होने पर चेतावनी भी दी</strong>

हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें <strong>मुख्य न्यायाधीश शील नागु और न्यायमूर्ति संजीव बेरी</strong> शामिल हैं, ने पंजाब सरकार से इस गंभीर मुद्दे पर जवाब मांगा है। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि यह याचिका <strong>पब्लिक इंटरेस्ट के नाम पर पर्सनल इंटरेस्ट</strong> के लिए दायर की गई है, तो इसे <strong>लागत सहित खारिज</strong> कर दिया जाएगा।

<strong>DSP </strong><strong>वविंदर कुमार के आरोप:</strong>
<ol>
 	<li><strong>सिंथेटिक ड्रग ‘</strong><strong>AlpraSafe’ </strong><strong>का पूरे पंजाब में बड़ा नेटवर्क</strong>
DSP का कहना है कि Alprazolam से बनी यह ड्रग पूरे राज्य में “भारी मात्रा” में फैल चुकी है। ये ड्रग्स फार्मा कंपनियों की मिलीभगत से फैक्ट्री और गोदामों से निकल कर सड़कों तक पहुंच रही हैं।</li>
 	<li><strong>2023 </strong><strong>में ही </strong><strong>300 </strong><strong>से अधिक </strong><strong>FIR, </strong><strong>पर जांच सिर्फ कैरियर तक ही सिमटी</strong>
उन्होंने बताया कि <strong>2023 </strong><strong>में अकेले </strong><strong>300 </strong><strong>से ज्यादा </strong><strong>FIR </strong><strong>दर्ज की गईं</strong>, लेकिन किसी केस में भी <strong>निर्माताओं या बड़ी सप्लाई चेन तक जांच नहीं पहुंची</strong>। सभी केस केवल ड्रग्स ले जाने वालों (कैरीयर) की गिरफ्तारी पर खत्म हो गए।</li>
 	<li><strong>STF </strong><strong>में तैनाती के दौरान किया बड़ा खुलासा</strong>
STF (स्पेशल टास्क फोर्स) में अपनी पोस्टिंग के दौरान उन्होंने <strong>20 </strong><strong>फरवरी </strong><strong>2024 </strong><strong>को </strong><strong>FIR </strong><strong>नंबर </strong><strong>31 </strong><strong>दर्ज की थी</strong>, जिसमें <strong>Rs 275 </strong><strong>करोड़ की नशीली दवाइयां और </strong><strong>765 </strong><strong>किलो पाउडर</strong> जब्त किया गया। यह ड्रग्स कई बड़ी फार्मा कंपनियों की फैक्ट्रियों और गोदामों से मिले थे।</li>
 	<li><strong>भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए</strong>
DSP ने दावा किया कि FIR नंबर 23 (22 जनवरी 2023) के मामले में <strong>एक फार्मा कंपनी ने एक सीनियर अफसर को </strong><strong>3 </strong><strong>करोड़ रुपये की रिश्वत दी</strong>, ताकि जांच को रोका जा सके। वहीं FIR नंबर 31 में <strong>Rs 45 </strong><strong>लाख</strong> की घूस देकर कंपनियों के मालिकों को बचाया गया।</li>
 	<li><strong>दबाव में ट्रांसफर और फर्जी </strong><strong>FIR </strong><strong>का आरोप</strong>
DSP वविंदर ने कहा कि जब उन्होंने सीनियर अधिकारियों के कहने पर जांच रोकने से इनकार किया, तो <strong>STF </strong><strong>से उनका तबादला कर दिया गया</strong> और बाद में <strong>भ्रष्टाचार के झूठे केस में फंसा दिया गया</strong>। उन्होंने दावा किया कि उनके पास जो दस्तावेज और चिट्ठियां थीं, <strong>वो पुलिस के पास हैं और शायद छेड़छाड़ भी की गई है।</strong></li>
</ol>
<strong>DSP </strong><strong>खुद भी हैं भ्रष्टाचार केस में आरोपी</strong>

सितंबर 2024 में पंजाब पुलिस ने वविंदर कुमार के खिलाफ <strong>भ्रष्टाचार की </strong><strong>FIR </strong><strong>दर्ज की थी</strong>, जिसमें आरोप था कि उन्होंने एक फार्मा कंपनी से <strong>Rs 45 </strong><strong>लाख की रिश्वत ली</strong>, ताकि उसे कानूनी कार्रवाई से बचाया जा सके। हालांकि, अक्टूबर 2024 में हाईकोर्ट के <strong>न्यायमूर्ति विनोद एस. भारद्वाज</strong> ने <strong>CBI </strong><strong>को प्रारंभिक जांच का आदेश दिया</strong> और STF को भ्रष्टाचार वाली FIR में आगे की जांच करने से रोक दिया।

<strong>राज्य सरकार का जवाब: "यह </strong><strong>PIL </strong><strong>नहीं</strong><strong>, </strong><strong>पर्सनल इंटरेस्ट लिटिगेशन है"</strong>

पंजाब सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील <strong>सलिल सबलोक</strong> ने कोर्ट में कहा कि DSP की याचिका <strong>PIL </strong><strong>की आड़ में चल रही व्यक्तिगत लड़ाई</strong> है। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता ने जिन 300 FIR का जिक्र किया है, उनमें किसी एक का भी विस्तार से ब्यौरा नहीं दिया गया है। इसके अलावा DSP खुद एक केस में जांच अधिकारी रह चुके हैं, इसलिए वह <strong>कोर्ट मॉनिटरिंग की मांग नहीं कर सकते</strong>।

“यह पूरी तरह से व्यक्तिगत हित साधने की कोशिश है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही PIL के दुरुपयोग पर चेतावनी दे चुका है।” – सलिल सबलोक

सबलोक ने यह भी बताया कि FIR नंबर 31 की <strong>CBI </strong><strong>जांच फिलहाल हाईकोर्ट के एकल पीठ के समक्ष लंबित</strong> है, जिसकी अगली सुनवाई <strong>8 </strong><strong>अगस्त</strong> को होनी है।

<strong>ड्रग्स</strong><strong>, </strong><strong>भ्रष्टाचार और प्रशासनिक दबाव की पेचीदा लड़ाई</strong>

DSP वविंदर कुमार की याचिका ने पंजाब में <strong>ड्रग्स नेटवर्क और पुलिस तंत्र की निष्क्रियता</strong> पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। जहां एक ओर अधिकारी दावा कर रहे हैं कि उन्हें <strong>सच्चाई उजागर करने पर सजा दी जा रही है</strong>, वहीं सरकार और वकील इसे <strong>पर्सनल विवाद</strong> बता रहे हैं।

अब सभी की निगाहें 8 अगस्त को हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर हैं, जहां यह तय होगा कि मामले की <strong>CBI </strong><strong>जांच आगे कैसे बढ़ेगी</strong> और क्या वाकई पंजाब में <strong>NDPS </strong><strong>एक्ट के केसों में कोई बड़ी साजिश छुपाई जा रही है।</strong>]]></content:encoded>
					
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