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	<title>NaviDisha &#8211; Trends Topic</title>
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	<title>NaviDisha &#8211; Trends Topic</title>
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	<item>
		<title>देश में पहली बार: Mann सरकार ने महिलाओं के लिए शुरू की सबसे Transparent और Reliable Sanitary Pad Scheme — ‘Navi Disha’</title>
		<link>https://trendstopic.in/for-the-first-time-in-the-country-mann-government-launches-the-most-transparent-and-reliable-pad-scheme-for-women-navi-disha/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Nov 2025 03:49:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चंडीगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[Anganwadi]]></category>
		<category><![CDATA[DigitalMonitoring]]></category>
		<category><![CDATA[FreePadScheme]]></category>
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		<category><![CDATA[PunjabNews]]></category>
		<category><![CDATA[SanitaryPads]]></category>
		<category><![CDATA[WomenEmpowerment]]></category>
		<category><![CDATA[WomenHealth]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब की महिलाओं के लिए यह एक बड़ा कदम है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की सरकार ने ‘नवी दिशा’ योजना के ज़रिए महिलाओं को मुफ्त और बेहतरीन क्वालिटी के सेनेटरी पैड देने की शुरुआत की है। यह सिर्फ एक सरकारी स्कीम नहीं, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य, सम्मान और सुविधा को सबसे ऊपर रखने का फैसला है।
<h1><strong>क्या है </strong><strong>‘</strong><strong>नवी दिशा</strong><strong>’ </strong><strong>योजना</strong><strong>?</strong></h1>
इस योजना के तहत पंजाब सरकार हर महीने <strong>13.65 </strong><strong>लाख महिलाओं</strong> को <strong>9 </strong><strong>फ्री सेनेटरी पैड</strong> दे रही है। ये पैड न सिर्फ मुलायम और सुरक्षित हैं, बल्कि <strong>100% </strong><strong>बायोडिग्रेडेबल</strong> भी हैं, यानी पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाते।

इसके लिए सरकार ने <strong>₹53–54 </strong><strong>करोड़</strong> का बजट जारी किया है, जो पहले की स्कीमों से ज्यादा है और पूरी तरह पारदर्शी तरीके से खर्च किया जा रहा है।
<h1><strong>कैसे हो रही है सप्लाई</strong><strong>? (</strong><strong>सबसे बड़ी बात)</strong></h1>
सरकार ने सप्लाई को पूरी तरह डिजिटल कर दिया है।
<ul>
 	<li><strong>मोबाइल ऐप</strong></li>
 	<li><strong>रीयल-टाइम डैशबोर्ड</strong></li>
</ul>
इनकी मदद से यह ट्रैक होता है कि किस आंगनवाड़ी केंद्र पर कितना स्टॉक गया और किस महिला को पैड मिले। इससे चोरी, गड़बड़ी या स्टॉक खत्म होने जैसी समस्याओं पर पूरा कंट्रोल है।

पंजाब के <strong>27,313 </strong><strong>आंगनवाड़ी केंद्र</strong> इस वितरण की रीढ़ हैं। हर केंद्र से महिलाओं को तय समय पर पैड पहुंचाए जा रहे हैं।
<h1><strong>पिछली कांग्रेस सरकार की </strong><strong>‘</strong><strong>उड़ान</strong><strong>’ </strong><strong>योजना से तुलना क्यों की जा रही है</strong><strong>?</strong></h1>
क्योंकि महिलाओं को याद है कि पहले मिले पैड की क्वालिटी बेहद खराब थी।
<ul>
 	<li>बदबूदार</li>
 	<li>सख्त</li>
 	<li>संक्रमण कराने वाले</li>
 	<li>और कई बार महिलाओं तक पहुँचते भी नहीं थे</li>
</ul>
उस समय सरकार का सालाना खर्च करीब <strong>₹40.55 </strong><strong>करोड़</strong> था, लेकिन ज़मीन पर इसका असर कम नजर आता था।

मान सरकार ने इस पूरी व्यवस्था को बदल दिया है। नया बजट ज्यादा है, पर खर्च सही जगह हो रहा है। महिलाओं को अब <strong>क्वालिटी</strong> और <strong>नियमित सप्लाई</strong>, दोनों मिल रही हैं।
<h1><strong>दूसरे राज्यों से पंजाब कैसे आगे</strong><strong>?</strong></h1>
भारत के कई राज्यों में आज भी महिलाओं को पीरियड्स के दिनों में बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
<ul>
 	<li><strong>उत्तर प्रदेश</strong> में कपड़े का इस्तेमाल आज भी आम है और सप्लाई ठीक नहीं है।</li>
 	<li><strong>बिहार और झारखंड</strong> में स्वच्छता दर बहुत कम पाई गई है।</li>
 	<li><strong>मध्य प्रदेश और राजस्थान</strong> में कई बार स्टॉक खत्म हो जाता है और दूरदराज इलाकों में पैड पहुँचते ही नहीं।</li>
 	<li><strong>ओडिशा और छत्तीसगढ़</strong> की योजनाएं मजबूत संरचना की कमी से जूझ रही हैं।</li>
</ul>
<strong>लेकिन पंजाब ने एक ‘</strong><strong>मॉडल सिस्टम’ </strong><strong>बना दिया है</strong>, जिसमें
- अच्छी क्वालिटी
- हर महीने पक्की डिलीवरी
- डिजिटल मॉनिटरिंग
- और मजबूत नेटवर्क
सब कुछ एक साथ हैं।
<h1><strong>जमीनी असर </strong><strong>– </strong><strong>महिलाओं की जिंदगी में सच में बदलाव</strong></h1>
गांव की <strong>गुरप्रीत कौर</strong> बताती हैं:
“पहले उन दिनों में काम पर जाना मुश्किल था। पैसे भी नहीं होते थे और शर्म भी आती थी। अब हर महीने आंगनवाड़ी दीदी घर पर ही पैड दे जाती हैं। मान साहब ने हमारी छोटी परेशानी को समझा और हमारा सम्मान वापस दिया है।”

उन जैसे लाखों महिलाओं को आज पीरियड्स के दौरान न तो शर्म आती है और न डर लगता है। वे पहले से ज्यादा कॉन्फिडेंस के साथ काम पर जाती हैं।
<h1><strong>योजना का असली मकसद क्या है</strong><strong>?</strong></h1>
‘नवी दिशा’ सिर्फ पैड देने की योजना नहीं है।
यह एक <strong>माइंडसेट चेंज</strong> है।
यह बताती है कि जब सरकार की नीयत साफ होती है, तो सरकारी पैसा सच में लोगों की जिंदगी बदल सकता है।

यह एक ऐसा सिस्टम है जहां
<ul>
 	<li>स्वास्थ्य</li>
 	<li>स्वच्छता</li>
 	<li>महिलाओं की गरिमा</li>
 	<li>और पारदर्शिता</li>
</ul>
सबको बराबर महत्व दिया गया है।
<h1><strong>नतीजा क्या निकला</strong><strong>?</strong></h1>
आज पंजाब की बेटियाँ और महिलाएँ साफ तौर पर कह रही हैं—
<strong>“</strong><strong>हमें सिर्फ सुविधा नहीं मिली, </strong><strong>हमें सम्मान और सुरक्षा मिली है। सच में, </strong><strong>हमारी जिंदगी को एक ‘</strong><strong>नवी दिशा’ </strong><strong>मिली है।”</strong>

पंजाब ने महिलाओं की हेल्थ और सशक्तिकरण में देश के बाकी राज्यों को पीछे छोड़कर एक नया स्टैंडर्ड सेट कर दिया है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब की महिलाओं के लिए यह एक बड़ा कदम है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की सरकार ने ‘नवी दिशा’ योजना के ज़रिए महिलाओं को मुफ्त और बेहतरीन क्वालिटी के सेनेटरी पैड देने की शुरुआत की है। यह सिर्फ एक सरकारी स्कीम नहीं, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य, सम्मान और सुविधा को सबसे ऊपर रखने का फैसला है।
<h1><strong>क्या है </strong><strong>‘</strong><strong>नवी दिशा</strong><strong>’ </strong><strong>योजना</strong><strong>?</strong></h1>
इस योजना के तहत पंजाब सरकार हर महीने <strong>13.65 </strong><strong>लाख महिलाओं</strong> को <strong>9 </strong><strong>फ्री सेनेटरी पैड</strong> दे रही है। ये पैड न सिर्फ मुलायम और सुरक्षित हैं, बल्कि <strong>100% </strong><strong>बायोडिग्रेडेबल</strong> भी हैं, यानी पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाते।

इसके लिए सरकार ने <strong>₹53–54 </strong><strong>करोड़</strong> का बजट जारी किया है, जो पहले की स्कीमों से ज्यादा है और पूरी तरह पारदर्शी तरीके से खर्च किया जा रहा है।
<h1><strong>कैसे हो रही है सप्लाई</strong><strong>? (</strong><strong>सबसे बड़ी बात)</strong></h1>
सरकार ने सप्लाई को पूरी तरह डिजिटल कर दिया है।
<ul>
 	<li><strong>मोबाइल ऐप</strong></li>
 	<li><strong>रीयल-टाइम डैशबोर्ड</strong></li>
</ul>
इनकी मदद से यह ट्रैक होता है कि किस आंगनवाड़ी केंद्र पर कितना स्टॉक गया और किस महिला को पैड मिले। इससे चोरी, गड़बड़ी या स्टॉक खत्म होने जैसी समस्याओं पर पूरा कंट्रोल है।

पंजाब के <strong>27,313 </strong><strong>आंगनवाड़ी केंद्र</strong> इस वितरण की रीढ़ हैं। हर केंद्र से महिलाओं को तय समय पर पैड पहुंचाए जा रहे हैं।
<h1><strong>पिछली कांग्रेस सरकार की </strong><strong>‘</strong><strong>उड़ान</strong><strong>’ </strong><strong>योजना से तुलना क्यों की जा रही है</strong><strong>?</strong></h1>
क्योंकि महिलाओं को याद है कि पहले मिले पैड की क्वालिटी बेहद खराब थी।
<ul>
 	<li>बदबूदार</li>
 	<li>सख्त</li>
 	<li>संक्रमण कराने वाले</li>
 	<li>और कई बार महिलाओं तक पहुँचते भी नहीं थे</li>
</ul>
उस समय सरकार का सालाना खर्च करीब <strong>₹40.55 </strong><strong>करोड़</strong> था, लेकिन ज़मीन पर इसका असर कम नजर आता था।

मान सरकार ने इस पूरी व्यवस्था को बदल दिया है। नया बजट ज्यादा है, पर खर्च सही जगह हो रहा है। महिलाओं को अब <strong>क्वालिटी</strong> और <strong>नियमित सप्लाई</strong>, दोनों मिल रही हैं।
<h1><strong>दूसरे राज्यों से पंजाब कैसे आगे</strong><strong>?</strong></h1>
भारत के कई राज्यों में आज भी महिलाओं को पीरियड्स के दिनों में बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
<ul>
 	<li><strong>उत्तर प्रदेश</strong> में कपड़े का इस्तेमाल आज भी आम है और सप्लाई ठीक नहीं है।</li>
 	<li><strong>बिहार और झारखंड</strong> में स्वच्छता दर बहुत कम पाई गई है।</li>
 	<li><strong>मध्य प्रदेश और राजस्थान</strong> में कई बार स्टॉक खत्म हो जाता है और दूरदराज इलाकों में पैड पहुँचते ही नहीं।</li>
 	<li><strong>ओडिशा और छत्तीसगढ़</strong> की योजनाएं मजबूत संरचना की कमी से जूझ रही हैं।</li>
</ul>
<strong>लेकिन पंजाब ने एक ‘</strong><strong>मॉडल सिस्टम’ </strong><strong>बना दिया है</strong>, जिसमें
- अच्छी क्वालिटी
- हर महीने पक्की डिलीवरी
- डिजिटल मॉनिटरिंग
- और मजबूत नेटवर्क
सब कुछ एक साथ हैं।
<h1><strong>जमीनी असर </strong><strong>– </strong><strong>महिलाओं की जिंदगी में सच में बदलाव</strong></h1>
गांव की <strong>गुरप्रीत कौर</strong> बताती हैं:
“पहले उन दिनों में काम पर जाना मुश्किल था। पैसे भी नहीं होते थे और शर्म भी आती थी। अब हर महीने आंगनवाड़ी दीदी घर पर ही पैड दे जाती हैं। मान साहब ने हमारी छोटी परेशानी को समझा और हमारा सम्मान वापस दिया है।”

उन जैसे लाखों महिलाओं को आज पीरियड्स के दौरान न तो शर्म आती है और न डर लगता है। वे पहले से ज्यादा कॉन्फिडेंस के साथ काम पर जाती हैं।
<h1><strong>योजना का असली मकसद क्या है</strong><strong>?</strong></h1>
‘नवी दिशा’ सिर्फ पैड देने की योजना नहीं है।
यह एक <strong>माइंडसेट चेंज</strong> है।
यह बताती है कि जब सरकार की नीयत साफ होती है, तो सरकारी पैसा सच में लोगों की जिंदगी बदल सकता है।

यह एक ऐसा सिस्टम है जहां
<ul>
 	<li>स्वास्थ्य</li>
 	<li>स्वच्छता</li>
 	<li>महिलाओं की गरिमा</li>
 	<li>और पारदर्शिता</li>
</ul>
सबको बराबर महत्व दिया गया है।
<h1><strong>नतीजा क्या निकला</strong><strong>?</strong></h1>
आज पंजाब की बेटियाँ और महिलाएँ साफ तौर पर कह रही हैं—
<strong>“</strong><strong>हमें सिर्फ सुविधा नहीं मिली, </strong><strong>हमें सम्मान और सुरक्षा मिली है। सच में, </strong><strong>हमारी जिंदगी को एक ‘</strong><strong>नवी दिशा’ </strong><strong>मिली है।”</strong>

पंजाब ने महिलाओं की हेल्थ और सशक्तिकरण में देश के बाकी राज्यों को पीछे छोड़कर एक नया स्टैंडर्ड सेट कर दिया है।]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>Women’s Health Mann सरकार की प्राथमिकता! ‘Navi Disha’ से Punjab की 13 Lakh से ज़्यादा महिलाएं पा रही हैं हर महीने Free Sanitary Pads</title>
		<link>https://trendstopic.in/womens-health-is-a-top-priority-for-the-mann-government-through-navi-disha-over-13-lakh-women-in-punjab-are-receiving-free-sanitary-pads-every-month/</link>
					<comments>https://trendstopic.in/womens-health-is-a-top-priority-for-the-mann-government-through-navi-disha-over-13-lakh-women-in-punjab-are-receiving-free-sanitary-pads-every-month/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 10 Nov 2025 17:55:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चंडीगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[Anganwadi]]></category>
		<category><![CDATA[BhagwantMann]]></category>
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		<category><![CDATA[WomenHealth]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब सरकार ने महिलाओं की सेहत, गरिमा और सशक्तिकरण को ध्यान में रखते हुए ‘<strong>नवी दिशा</strong>’ नाम की एक बड़ी और जनहितकारी योजना शुरू की है। मुख्यमंत्री <strong>भगवंत सिंह मान</strong> की अगुवाई में चल रही यह योजना आज पंजाब की लाखों महिलाओं और किशोरियों के लिए एक मजबूत सहारा बन चुकी है। इसका सीधा असर गाँव-गाँव और घर-घर तक साफ दिख रहा है।

<strong>क्या है ‘नवी दिशा’</strong><strong>?</strong>

‘नवी दिशा’ योजना के तहत राज्य की महिलाओं और किशोरियों को <strong>हर महीने </strong><strong>9 </strong><strong>मुफ्त सैनिटरी पैड</strong> दिए जा रहे हैं। इसका मकसद यह है कि कोई भी महिला या लड़की पैड न खरीद पाने के कारण असुरक्षित चीजें जैसे पुराने कपड़े, अख़बार या अन्य सामग्री इस्तेमाल न करे, जिससे इंफेक्शन और बीमारियाँ हो सकती हैं।

<strong>योजना कैसे पहुँच रही है महिलाओं तक</strong><strong>?</strong>
<ul>
 	<li>यह योजना <strong>23 </strong><strong>जिलों</strong> में चल रही है।</li>
 	<li><strong>27,313 </strong><strong>आंगनवाड़ी सेंटर</strong> इस योजना के वितरण केंद्र हैं।</li>
 	<li><strong>आंगनवाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर</strong> पैड पहुँचाती हैं।</li>
 	<li><strong>कुल लाभार्थी महिलाएँ और किशोरियाँ:</strong> लगभग <strong>13,65,650 (13.65 </strong><strong>लाख)</strong></li>
</ul>
इस तरह, हर जरूरतमंद महिला तक यह सुविधा बिना किसी शर्म और झिझक के पहुँच रही है।

<strong>अब तक कितने पैड बाँटे गए</strong><strong>?</strong>

अब तक <strong>3 </strong><strong>करोड़ </strong><strong>68 </strong><strong>लाख </strong><strong>72 </strong><strong>हजार </strong><strong>550 (3,68,72,550)</strong> से ज़्यादा मुफ्त सैनिटरी पैड पंजाब की महिलाओं को दिए जा चुके हैं।

<strong>सरकार का खर्च और नीयत</strong>

इस योजना पर सरकार <strong>₹14.04 </strong><strong>करोड़</strong> खर्च कर चुकी है। यह खर्च कोई बोझ नहीं, बल्कि महिलाओं की सेहत में किया गया <strong>निवेश</strong> है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान का साफ कहना है:

“स्वास्थ्य कोई विकल्प नहीं, बल्कि ज़रूरत है। हर बेटी, हर बहन, हर मां की सेहत सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।”

<strong>सैनिटरी पैड की खासियत</strong>

ये पैड <strong>100% </strong><strong>बायोडिग्रेडेबल</strong> हैं। यानी यह पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुँचाते और धीरे-धीरे खुद मिट्टी में घुल जाते हैं।
इनमें कोई <strong>हानिकारक केमिकल</strong> नहीं है, इसलिए महिलाओं को एलर्जी या इंफेक्शन का खतरा भी कम होता है।

<strong>महिलाओं की ज़िंदगी में आए बदलाव</strong>

इस योजना ने खासकर गाँवों में महिलाओं की सोच और सुविधा, दोनों में बड़ा बदलाव लाया है।

गाँव की <strong>गुरप्रीत कौर</strong> बताती हैं:

"पहले कई बार पैसे नहीं होते थे, तो पुराने कपड़े इस्तेमाल करने पड़ते थे। बीमारी भी हो जाती थी। अब मान सरकार की वजह से हर महीने पैड घर आ जाता है। न शर्म, न परेशानी। आंगनवाड़ी दीदी हमारा पूरा ध्यान रखती हैं।"

इस तरह की बातें आज पंजाब की लाखों महिलाओं के दिल की आवाज़ हैं।

<strong>समाज में बढ़ रही जागरूकता</strong>
<ul>
 	<li>माहवारी को लेकर <strong>झिझक कम</strong> हुई है।</li>
 	<li>लड़कियाँ और महिलाएँ <strong>अपनी सेहत को लेकर जागरूक</strong> हुई हैं।</li>
 	<li>परिवारों में भी अब इस विषय पर <strong>खुले में बात</strong> होने लगी है।</li>
 	<li>यह केवल योजना नहीं, बल्कि <strong>एक सामाजिक बदलाव</strong> है।</li>
</ul>
‘नवी दिशा’ योजना ने यह साबित कर दिया है कि सरकार जब <strong>जमीन स्तर पर काम करती है</strong>, तो बदलाव दिखता है।
यह योजना केवल पैड बाँटने की पहल नहीं, बल्कि <strong>महिलाओं की सेहत</strong><strong>, </strong><strong>सम्मान और बराबरी</strong> की एक नई पहचान है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब सरकार ने महिलाओं की सेहत, गरिमा और सशक्तिकरण को ध्यान में रखते हुए ‘<strong>नवी दिशा</strong>’ नाम की एक बड़ी और जनहितकारी योजना शुरू की है। मुख्यमंत्री <strong>भगवंत सिंह मान</strong> की अगुवाई में चल रही यह योजना आज पंजाब की लाखों महिलाओं और किशोरियों के लिए एक मजबूत सहारा बन चुकी है। इसका सीधा असर गाँव-गाँव और घर-घर तक साफ दिख रहा है।

<strong>क्या है ‘नवी दिशा’</strong><strong>?</strong>

‘नवी दिशा’ योजना के तहत राज्य की महिलाओं और किशोरियों को <strong>हर महीने </strong><strong>9 </strong><strong>मुफ्त सैनिटरी पैड</strong> दिए जा रहे हैं। इसका मकसद यह है कि कोई भी महिला या लड़की पैड न खरीद पाने के कारण असुरक्षित चीजें जैसे पुराने कपड़े, अख़बार या अन्य सामग्री इस्तेमाल न करे, जिससे इंफेक्शन और बीमारियाँ हो सकती हैं।

<strong>योजना कैसे पहुँच रही है महिलाओं तक</strong><strong>?</strong>
<ul>
 	<li>यह योजना <strong>23 </strong><strong>जिलों</strong> में चल रही है।</li>
 	<li><strong>27,313 </strong><strong>आंगनवाड़ी सेंटर</strong> इस योजना के वितरण केंद्र हैं।</li>
 	<li><strong>आंगनवाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर</strong> पैड पहुँचाती हैं।</li>
 	<li><strong>कुल लाभार्थी महिलाएँ और किशोरियाँ:</strong> लगभग <strong>13,65,650 (13.65 </strong><strong>लाख)</strong></li>
</ul>
इस तरह, हर जरूरतमंद महिला तक यह सुविधा बिना किसी शर्म और झिझक के पहुँच रही है।

<strong>अब तक कितने पैड बाँटे गए</strong><strong>?</strong>

अब तक <strong>3 </strong><strong>करोड़ </strong><strong>68 </strong><strong>लाख </strong><strong>72 </strong><strong>हजार </strong><strong>550 (3,68,72,550)</strong> से ज़्यादा मुफ्त सैनिटरी पैड पंजाब की महिलाओं को दिए जा चुके हैं।

<strong>सरकार का खर्च और नीयत</strong>

इस योजना पर सरकार <strong>₹14.04 </strong><strong>करोड़</strong> खर्च कर चुकी है। यह खर्च कोई बोझ नहीं, बल्कि महिलाओं की सेहत में किया गया <strong>निवेश</strong> है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान का साफ कहना है:

“स्वास्थ्य कोई विकल्प नहीं, बल्कि ज़रूरत है। हर बेटी, हर बहन, हर मां की सेहत सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।”

<strong>सैनिटरी पैड की खासियत</strong>

ये पैड <strong>100% </strong><strong>बायोडिग्रेडेबल</strong> हैं। यानी यह पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुँचाते और धीरे-धीरे खुद मिट्टी में घुल जाते हैं।
इनमें कोई <strong>हानिकारक केमिकल</strong> नहीं है, इसलिए महिलाओं को एलर्जी या इंफेक्शन का खतरा भी कम होता है।

<strong>महिलाओं की ज़िंदगी में आए बदलाव</strong>

इस योजना ने खासकर गाँवों में महिलाओं की सोच और सुविधा, दोनों में बड़ा बदलाव लाया है।

गाँव की <strong>गुरप्रीत कौर</strong> बताती हैं:

"पहले कई बार पैसे नहीं होते थे, तो पुराने कपड़े इस्तेमाल करने पड़ते थे। बीमारी भी हो जाती थी। अब मान सरकार की वजह से हर महीने पैड घर आ जाता है। न शर्म, न परेशानी। आंगनवाड़ी दीदी हमारा पूरा ध्यान रखती हैं।"

इस तरह की बातें आज पंजाब की लाखों महिलाओं के दिल की आवाज़ हैं।

<strong>समाज में बढ़ रही जागरूकता</strong>
<ul>
 	<li>माहवारी को लेकर <strong>झिझक कम</strong> हुई है।</li>
 	<li>लड़कियाँ और महिलाएँ <strong>अपनी सेहत को लेकर जागरूक</strong> हुई हैं।</li>
 	<li>परिवारों में भी अब इस विषय पर <strong>खुले में बात</strong> होने लगी है।</li>
 	<li>यह केवल योजना नहीं, बल्कि <strong>एक सामाजिक बदलाव</strong> है।</li>
</ul>
‘नवी दिशा’ योजना ने यह साबित कर दिया है कि सरकार जब <strong>जमीन स्तर पर काम करती है</strong>, तो बदलाव दिखता है।
यह योजना केवल पैड बाँटने की पहल नहीं, बल्कि <strong>महिलाओं की सेहत</strong><strong>, </strong><strong>सम्मान और बराबरी</strong> की एक नई पहचान है।]]></content:encoded>
					
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