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	<title>MarathaMilitaryLandscapes &#8211; Trends Topic</title>
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	<title>MarathaMilitaryLandscapes &#8211; Trends Topic</title>
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		<title>Bharat को मिला एक और Proud Moment: &#8216;Maratha Military Landscapes&#8217; Declared UNESCO World Heritage Site</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 12 Jul 2025 11:09:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स ऑफ इंडिया’ को यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स में शामिल किए जाने पर खुशी जताई है। ये भारत की <strong>44</strong><strong>वीं वर्ल्ड हेरिटेज साइट</strong> बनी है, जो देश की सांस्कृतिक और वास्तुकला की समृद्ध विरासत को दुनिया के सामने पेश करती है।

इस फैसले की घोषणा यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज कमेटी के <strong>47</strong><strong>वें सत्र</strong> में पेरिस (फ्रांस) में की गई। यह नॉमिनेशन भारत ने <strong>2024–25</strong> सत्र के लिए भेजा था।

<strong>क्या हैं </strong><strong>'</strong><strong>मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स</strong><strong>'?</strong>

यह नॉमिनेशन 12 ऐतिहासिक किलों के समूह को लेकर था, जो <strong>17</strong><strong>वीं से 19</strong><strong>वीं सदी</strong> के बीच मराठा साम्राज्य की सैन्य ताकत और इंजीनियरिंग प्रतिभा को दर्शाते हैं। ये किले ना सिर्फ मजबूत किलेबंदी का उदाहरण हैं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी बेहद अहम जगहों पर स्थित हैं।

इन 12 किलों में शामिल हैं:
<ul>
 	<li><strong>महाराष्ट्र के 11 </strong><strong>किले:</strong> साल्हेर, शिवनेरी, लोहगढ़, खांदेरी, रायगढ़, राजगढ़, प्रतापगढ़, सुवर्णदुर्ग, पन्हाला, विजयदुर्ग और सिंधुदुर्ग</li>
 	<li><strong>तमिलनाडु का 1 </strong><strong>किला:</strong> जिन्जी किला (Gingee Fort)</li>
</ul>
इनमें से कुछ किले पहाड़ी इलाकों में हैं (जैसे शिवनेरी, लोहगढ़, रायगढ़), कुछ जंगलों में (जैसे प्रतापगढ़), कुछ तटों पर (जैसे विजयदुर्ग), और कुछ समुंदर के बीच टापू पर बने हैं (जैसे खांदेरी, सुवर्णदुर्ग, सिंधुदुर्ग)।

<strong>प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया</strong>

प्रधानमंत्री मोदी ने इस ऐतिहासिक फैसले पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म <strong>X (</strong><strong>पूर्व में ट्विटर)</strong> पर लिखा:

"हर भारतीय इस गौरवशाली पल से गर्वित है। ये 12 भव्य किले मराठा साम्राज्य की शासन क्षमता, सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक गरिमा और सामाजिक कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। मैं सभी से अपील करता हूँ कि इन किलों की यात्रा करें और मराठा साम्राज्य के गौरवशाली इतिहास को जानें।"

उन्होंने रायगढ़ किले की अपनी 2014 की यात्रा की तस्वीरें भी साझा कीं, जहां उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज को श्रद्धांजलि दी थी।

<strong>कौन रखता है इन किलों की देखरेख</strong><strong>?</strong>
<ul>
 	<li><strong>8 </strong><strong>किले</strong> भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में हैं – जैसे कि शिवनेरी, लोहगढ़, रायगढ़, सुवर्णदुर्ग आदि।</li>
 	<li>बाकी <strong>4 </strong><strong>किले</strong> – साल्हेर, राजगढ़, खांदेरी और प्रतापगढ़ – महाराष्ट्र सरकार के पुरातत्व विभाग द्वारा देखे जाते हैं।</li>
</ul>
<strong>भारत की ग्लोबल हैरिटेज में बड़ी छलांग</strong>

इससे पहले, <strong>असम के चराइदेव के मोइडाम्स</strong> को भी 2023 में वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल किया गया था। अब भारत <strong>विश्व स्तर पर छठे स्थान</strong> पर है और <strong>एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में दूसरे नंबर</strong> पर है, जहां सबसे ज्यादा वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स हैं।

भारत फिलहाल यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज कमेटी का सदस्य (2021–2025) है और आगे भी अपनी सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाने में जुटा हुआ है।

<strong>भविष्य की योजनाएं</strong>

भारत की अभी <strong>62 </strong><strong>साइट्स टेंटेटिव लिस्ट</strong> में हैं, जिन्हें भविष्य में वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स के लिए नामांकित किया जा सकता है।

'मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स' को यूनेस्को से मिली ये मान्यता न सिर्फ इतिहास और विरासत के लिए गौरव की बात है, बल्कि यह पर्यटन, संस्कृति और देश की वैश्विक पहचान को भी मजबूत करती है।

अब वक्त है कि हम इन किलों को सिर्फ किताबों में न पढ़ें, बल्कि खुद वहां जाकर इस इतिहास को महसूस करें।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स ऑफ इंडिया’ को यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स में शामिल किए जाने पर खुशी जताई है। ये भारत की <strong>44</strong><strong>वीं वर्ल्ड हेरिटेज साइट</strong> बनी है, जो देश की सांस्कृतिक और वास्तुकला की समृद्ध विरासत को दुनिया के सामने पेश करती है।

इस फैसले की घोषणा यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज कमेटी के <strong>47</strong><strong>वें सत्र</strong> में पेरिस (फ्रांस) में की गई। यह नॉमिनेशन भारत ने <strong>2024–25</strong> सत्र के लिए भेजा था।

<strong>क्या हैं </strong><strong>'</strong><strong>मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स</strong><strong>'?</strong>

यह नॉमिनेशन 12 ऐतिहासिक किलों के समूह को लेकर था, जो <strong>17</strong><strong>वीं से 19</strong><strong>वीं सदी</strong> के बीच मराठा साम्राज्य की सैन्य ताकत और इंजीनियरिंग प्रतिभा को दर्शाते हैं। ये किले ना सिर्फ मजबूत किलेबंदी का उदाहरण हैं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी बेहद अहम जगहों पर स्थित हैं।

इन 12 किलों में शामिल हैं:
<ul>
 	<li><strong>महाराष्ट्र के 11 </strong><strong>किले:</strong> साल्हेर, शिवनेरी, लोहगढ़, खांदेरी, रायगढ़, राजगढ़, प्रतापगढ़, सुवर्णदुर्ग, पन्हाला, विजयदुर्ग और सिंधुदुर्ग</li>
 	<li><strong>तमिलनाडु का 1 </strong><strong>किला:</strong> जिन्जी किला (Gingee Fort)</li>
</ul>
इनमें से कुछ किले पहाड़ी इलाकों में हैं (जैसे शिवनेरी, लोहगढ़, रायगढ़), कुछ जंगलों में (जैसे प्रतापगढ़), कुछ तटों पर (जैसे विजयदुर्ग), और कुछ समुंदर के बीच टापू पर बने हैं (जैसे खांदेरी, सुवर्णदुर्ग, सिंधुदुर्ग)।

<strong>प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया</strong>

प्रधानमंत्री मोदी ने इस ऐतिहासिक फैसले पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म <strong>X (</strong><strong>पूर्व में ट्विटर)</strong> पर लिखा:

"हर भारतीय इस गौरवशाली पल से गर्वित है। ये 12 भव्य किले मराठा साम्राज्य की शासन क्षमता, सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक गरिमा और सामाजिक कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। मैं सभी से अपील करता हूँ कि इन किलों की यात्रा करें और मराठा साम्राज्य के गौरवशाली इतिहास को जानें।"

उन्होंने रायगढ़ किले की अपनी 2014 की यात्रा की तस्वीरें भी साझा कीं, जहां उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज को श्रद्धांजलि दी थी।

<strong>कौन रखता है इन किलों की देखरेख</strong><strong>?</strong>
<ul>
 	<li><strong>8 </strong><strong>किले</strong> भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में हैं – जैसे कि शिवनेरी, लोहगढ़, रायगढ़, सुवर्णदुर्ग आदि।</li>
 	<li>बाकी <strong>4 </strong><strong>किले</strong> – साल्हेर, राजगढ़, खांदेरी और प्रतापगढ़ – महाराष्ट्र सरकार के पुरातत्व विभाग द्वारा देखे जाते हैं।</li>
</ul>
<strong>भारत की ग्लोबल हैरिटेज में बड़ी छलांग</strong>

इससे पहले, <strong>असम के चराइदेव के मोइडाम्स</strong> को भी 2023 में वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल किया गया था। अब भारत <strong>विश्व स्तर पर छठे स्थान</strong> पर है और <strong>एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में दूसरे नंबर</strong> पर है, जहां सबसे ज्यादा वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स हैं।

भारत फिलहाल यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज कमेटी का सदस्य (2021–2025) है और आगे भी अपनी सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाने में जुटा हुआ है।

<strong>भविष्य की योजनाएं</strong>

भारत की अभी <strong>62 </strong><strong>साइट्स टेंटेटिव लिस्ट</strong> में हैं, जिन्हें भविष्य में वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स के लिए नामांकित किया जा सकता है।

'मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स' को यूनेस्को से मिली ये मान्यता न सिर्फ इतिहास और विरासत के लिए गौरव की बात है, बल्कि यह पर्यटन, संस्कृति और देश की वैश्विक पहचान को भी मजबूत करती है।

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