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	<title>LegalAction &#8211; Trends Topic</title>
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	<title>LegalAction &#8211; Trends Topic</title>
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	<item>
		<title>Punjab Flood: High Court ने Government को किसानों के लिए तुरंत कार्रवाई का आदेश दिया</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Oct 2025 05:53:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[AgricultureSupport]]></category>
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		<category><![CDATA[SITInvestigation]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब में हाल ही में आई बाढ़ से हुए नुकसान के बाद <strong>काउंसिल ऑफ लॉयर्स</strong> ने जनहित याचिका (PIL) दायर की थी। यह याचिका पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में <strong>1 </strong><strong>अक्टूबर 2025</strong> को सुनी गई।

हाईकोर्ट ने इस सुनवाई में <strong>पंजाब सरकार और अन्य संबंधित विभागों</strong> को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता द्वारा पेश किए गए सुझावों पर <strong>फौरन कार्रवाई</strong> की जाए। याचिका में सरकार से यह भी कहा गया कि हाईकोर्ट की देखरेख में एक <strong>तीन सदस्यीय SIT</strong> बनाई जाए, जिसमें <strong>कोई सेवानिवृत्त या कार्यरत हाईकोर्ट जस्टिस</strong> अध्यक्ष हों।

एडवोकेट <strong>वासु रंजन शांडिल्य, </strong><strong>अभिषेक मल्होत्रा और ईशान भारद्वाज</strong> ने बताया कि याचिका को <strong>डिस्पोज कर दिया गया है</strong>, लेकिन सरकार को निर्देश दिए गए हैं कि वे तुरंत कार्रवाई करें। अगर सरकार द्वारा कार्रवाई नहीं की गई तो फिर से कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
<h3><strong>याचिका में उठाए गए मुख्य बिंदु:</strong></h3>
<ol>
 	<li><strong>गिरदावरी रिकॉर्ड अपडेट:</strong> सरकार को भूमि रिकॉर्ड तुरंत अपडेट करना चाहिए, ताकि किसानों के नुकसान का सही आकलन किया जा सके।</li>
 	<li><strong>उचित मुआवजा:</strong> पंजाब राजस्व संहिता के अनुसार, किसानों को फसल के नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए।</li>
 	<li><strong>ड्रोन सर्वेक्षण:</strong> नुकसान का और सटीक आकलन करने के लिए ड्रोन सर्वेक्षण कराया जाए।</li>
 	<li><strong>कर्ज माफी:</strong> बाढ़ से प्रभावित किसानों के ट्रैक्टर और किसान क्रेडिट कार्ड ऋण माफ किए जाएँ।</li>
 	<li><strong>शिकायत निवारण पोर्टल:</strong> किसानों की शिकायतों के समाधान के लिए एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल बनाया जाए।</li>
 	<li><strong>राहत उपाय:</strong> गुरदासपुर, पठानकोट, तरनतारन, फाजिल्का, फिरोजपुर, होशियारपुर, जालंधर और लुधियाना जैसे प्रभावित जिलों में प्रभावी राहत उपाय लागू किए जाएँ।</li>
 	<li><strong>कार्रवाई रिपोर्ट:</strong> पंजाब सरकार को हाईकोर्ट में अपनी कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट पेश करनी चाहिए।</li>
</ol>
<h3><strong>क्यों है यह याचिका खास:</strong></h3>
काउंसिल ऑफ लॉयर्स के अध्यक्ष <strong>वासु रंजन शांडिल्य</strong> ने बताया कि यह याचिका <strong>किसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है</strong>, ताकि उन्हें आर्थिक नुकसान और निराशा के कारण आत्महत्या से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से <strong>गिरदावरी रिकॉर्ड अपडेट न करना</strong> और <strong>ठोस राहत उपाय न करना</strong> इस याचिका को दायर करने की वजह बनी।

शांडिल्य ने यह भी कहा कि काउंसिल ऑफ लॉयर्स <strong>निस्वार्थ भाव से</strong> किसानों की मदद के लिए यह लड़ाई जारी रखेगी और उन्हें न्याय दिलाने में हाईकोर्ट का पूरा समर्थन मिलेगा।

पंजाब हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि वह <strong>किसानों को समय पर राहत और मुआवजा</strong> सुनिश्चित करे। याचिकाकर्ता यह चाहते हैं कि <strong>SIT </strong><strong>के जरिए नुकसान का सही आकलन और दोषियों की पहचान</strong> की जाए। यह याचिका किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण लड़ाई बन चुकी है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब में हाल ही में आई बाढ़ से हुए नुकसान के बाद <strong>काउंसिल ऑफ लॉयर्स</strong> ने जनहित याचिका (PIL) दायर की थी। यह याचिका पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में <strong>1 </strong><strong>अक्टूबर 2025</strong> को सुनी गई।

हाईकोर्ट ने इस सुनवाई में <strong>पंजाब सरकार और अन्य संबंधित विभागों</strong> को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता द्वारा पेश किए गए सुझावों पर <strong>फौरन कार्रवाई</strong> की जाए। याचिका में सरकार से यह भी कहा गया कि हाईकोर्ट की देखरेख में एक <strong>तीन सदस्यीय SIT</strong> बनाई जाए, जिसमें <strong>कोई सेवानिवृत्त या कार्यरत हाईकोर्ट जस्टिस</strong> अध्यक्ष हों।

एडवोकेट <strong>वासु रंजन शांडिल्य, </strong><strong>अभिषेक मल्होत्रा और ईशान भारद्वाज</strong> ने बताया कि याचिका को <strong>डिस्पोज कर दिया गया है</strong>, लेकिन सरकार को निर्देश दिए गए हैं कि वे तुरंत कार्रवाई करें। अगर सरकार द्वारा कार्रवाई नहीं की गई तो फिर से कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
<h3><strong>याचिका में उठाए गए मुख्य बिंदु:</strong></h3>
<ol>
 	<li><strong>गिरदावरी रिकॉर्ड अपडेट:</strong> सरकार को भूमि रिकॉर्ड तुरंत अपडेट करना चाहिए, ताकि किसानों के नुकसान का सही आकलन किया जा सके।</li>
 	<li><strong>उचित मुआवजा:</strong> पंजाब राजस्व संहिता के अनुसार, किसानों को फसल के नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए।</li>
 	<li><strong>ड्रोन सर्वेक्षण:</strong> नुकसान का और सटीक आकलन करने के लिए ड्रोन सर्वेक्षण कराया जाए।</li>
 	<li><strong>कर्ज माफी:</strong> बाढ़ से प्रभावित किसानों के ट्रैक्टर और किसान क्रेडिट कार्ड ऋण माफ किए जाएँ।</li>
 	<li><strong>शिकायत निवारण पोर्टल:</strong> किसानों की शिकायतों के समाधान के लिए एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल बनाया जाए।</li>
 	<li><strong>राहत उपाय:</strong> गुरदासपुर, पठानकोट, तरनतारन, फाजिल्का, फिरोजपुर, होशियारपुर, जालंधर और लुधियाना जैसे प्रभावित जिलों में प्रभावी राहत उपाय लागू किए जाएँ।</li>
 	<li><strong>कार्रवाई रिपोर्ट:</strong> पंजाब सरकार को हाईकोर्ट में अपनी कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट पेश करनी चाहिए।</li>
</ol>
<h3><strong>क्यों है यह याचिका खास:</strong></h3>
काउंसिल ऑफ लॉयर्स के अध्यक्ष <strong>वासु रंजन शांडिल्य</strong> ने बताया कि यह याचिका <strong>किसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है</strong>, ताकि उन्हें आर्थिक नुकसान और निराशा के कारण आत्महत्या से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से <strong>गिरदावरी रिकॉर्ड अपडेट न करना</strong> और <strong>ठोस राहत उपाय न करना</strong> इस याचिका को दायर करने की वजह बनी।

शांडिल्य ने यह भी कहा कि काउंसिल ऑफ लॉयर्स <strong>निस्वार्थ भाव से</strong> किसानों की मदद के लिए यह लड़ाई जारी रखेगी और उन्हें न्याय दिलाने में हाईकोर्ट का पूरा समर्थन मिलेगा।

पंजाब हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि वह <strong>किसानों को समय पर राहत और मुआवजा</strong> सुनिश्चित करे। याचिकाकर्ता यह चाहते हैं कि <strong>SIT </strong><strong>के जरिए नुकसान का सही आकलन और दोषियों की पहचान</strong> की जाए। यह याचिका किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण लड़ाई बन चुकी है।]]></content:encoded>
					
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		<title>Bikram Majithia ने Jail Barrack बदलवाने के लिए Court में लगाई अर्जी, Security को लेकर जताया Concern</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 13 Jul 2025 07:41:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[BikramMajithia]]></category>
		<category><![CDATA[BreakingNews]]></category>
		<category><![CDATA[CourtUpdate]]></category>
		<category><![CDATA[IndianPolitics]]></category>
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		<category><![CDATA[VIPTreatment]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब के पूर्व अकाली मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया, जो इन दिनों आमदन से ज़्यादा संपत्ति मामले में जेल में हैं, ने अपनी बैरक बदलवाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। मजीठिया के वकीलों ने मोहाली की व अतिरिक्त जिला सत्र न्यायाधीश की अदालत में एक अर्जी दायर की है, जिसमें उन्होंने मांग की है कि मजीठिया को आम कैदियों के साथ न रखा जाए।

वकीलों ने दलील दी है कि एक तरफ सरकार खुद मजीठिया की सुरक्षा की बात कर रही है और दूसरी तरफ उन्हें आम कैदियों के साथ एक ही बैरक में रखा गया है, जो खतरे से खाली नहीं है। उनका कहना है कि जिस बैरक में मजीठिया को रखा गया है, वहां CCTV कैमरे भी लगे हुए हैं, जिससे उनकी प्राइवेसी और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

इसके अलावा, मजीठिया के वकीलों ने एक और अर्जी दाख़िल की है जिसमें उन्होंने विजिलेंस विभाग से "ग्राउंड ऑफ अरेस्ट" की कॉपी मांगी है। यानी उन्हें किन आधारों पर गिरफ़्तार किया गया, इसका पूरा ब्योरा लिखित रूप में मांगा गया है। इस अर्जी के साथ जेल मैनुअल की कॉपी भी संलग्न की गई है ताकि यह दिखाया जा सके कि जेल नियमों के मुताबिक मजीठिया को किस तरह की सुविधा मिलनी चाहिए।

इस मामले पर अदालत ने विजिलेंस विभाग को 14 जुलाई (सोमवार) के लिए नोटिस जारी कर दिया है। अब सबकी नज़र इस बात पर है कि विजिलेंस इस अर्जी का क्या जवाब देती है।

इस बीच विजिलेंस ने अदालत को यह जानकारी दी है कि दिल्ली स्थित सैनिक भवन की तलाशी पूरी हो चुकी है और इससे संबंधित एक पेन ड्राइव अदालत में पेश की गई है। हालांकि, दिल्ली में स्थित 'सराया कंपनी' के दफ्तर की तलाशी अब भी जारी है और वह पूरी नहीं हुई है।

दूसरी तरफ, मजीठिया का ज्यूडिशियल रिमांड 19 जुलाई को खत्म हो रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या उससे पहले विजिलेंस दोबारा उनका रिमांड मांगती है या नहीं। सरकार की ओर से नियुक्त स्पेशल प्रॉसिक्यूटर ने पहले ही यह बयान दिया था कि अगर एजेंसी के पास नए सबूत आते हैं, तो उनके पास 3 और दिन का रिमांड लेने का कानूनी हक है।

बिक्रम मजीठिया के मामले में अब हर छोटी-बड़ी कानूनी हलचल पर नज़र बनी हुई है। बैरक बदलवाने की मांग से लेकर रिमांड की संभावना तक, यह केस लगातार चर्चा में बना हुआ है। अब सभी की निगाहें 14 और 19 जुलाई की सुनवाई पर टिकी हैं।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब के पूर्व अकाली मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया, जो इन दिनों आमदन से ज़्यादा संपत्ति मामले में जेल में हैं, ने अपनी बैरक बदलवाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। मजीठिया के वकीलों ने मोहाली की व अतिरिक्त जिला सत्र न्यायाधीश की अदालत में एक अर्जी दायर की है, जिसमें उन्होंने मांग की है कि मजीठिया को आम कैदियों के साथ न रखा जाए।

वकीलों ने दलील दी है कि एक तरफ सरकार खुद मजीठिया की सुरक्षा की बात कर रही है और दूसरी तरफ उन्हें आम कैदियों के साथ एक ही बैरक में रखा गया है, जो खतरे से खाली नहीं है। उनका कहना है कि जिस बैरक में मजीठिया को रखा गया है, वहां CCTV कैमरे भी लगे हुए हैं, जिससे उनकी प्राइवेसी और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

इसके अलावा, मजीठिया के वकीलों ने एक और अर्जी दाख़िल की है जिसमें उन्होंने विजिलेंस विभाग से "ग्राउंड ऑफ अरेस्ट" की कॉपी मांगी है। यानी उन्हें किन आधारों पर गिरफ़्तार किया गया, इसका पूरा ब्योरा लिखित रूप में मांगा गया है। इस अर्जी के साथ जेल मैनुअल की कॉपी भी संलग्न की गई है ताकि यह दिखाया जा सके कि जेल नियमों के मुताबिक मजीठिया को किस तरह की सुविधा मिलनी चाहिए।

इस मामले पर अदालत ने विजिलेंस विभाग को 14 जुलाई (सोमवार) के लिए नोटिस जारी कर दिया है। अब सबकी नज़र इस बात पर है कि विजिलेंस इस अर्जी का क्या जवाब देती है।

इस बीच विजिलेंस ने अदालत को यह जानकारी दी है कि दिल्ली स्थित सैनिक भवन की तलाशी पूरी हो चुकी है और इससे संबंधित एक पेन ड्राइव अदालत में पेश की गई है। हालांकि, दिल्ली में स्थित 'सराया कंपनी' के दफ्तर की तलाशी अब भी जारी है और वह पूरी नहीं हुई है।

दूसरी तरफ, मजीठिया का ज्यूडिशियल रिमांड 19 जुलाई को खत्म हो रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या उससे पहले विजिलेंस दोबारा उनका रिमांड मांगती है या नहीं। सरकार की ओर से नियुक्त स्पेशल प्रॉसिक्यूटर ने पहले ही यह बयान दिया था कि अगर एजेंसी के पास नए सबूत आते हैं, तो उनके पास 3 और दिन का रिमांड लेने का कानूनी हक है।

बिक्रम मजीठिया के मामले में अब हर छोटी-बड़ी कानूनी हलचल पर नज़र बनी हुई है। बैरक बदलवाने की मांग से लेकर रिमांड की संभावना तक, यह केस लगातार चर्चा में बना हुआ है। अब सभी की निगाहें 14 और 19 जुलाई की सुनवाई पर टिकी हैं।]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>Dhaliwal का Sareen पर पलटवार – बोले, “मेरे परिवार ने झेला है नशे का दर्द, झूठ बोलने पर करूंगा कानूनी कार्रवाई”</title>
		<link>https://trendstopic.in/dhaliwal-hits-back-at-sareen-says-my-family-has-suffered-the-pain-of-drugs-will-take-legal-action-for-spreading-lies/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 10 Jun 2025 03:05:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चंडीगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[DrugAbuseInPunjab]]></category>
		<category><![CDATA[KuldeepDhaliwal]]></category>
		<category><![CDATA[LegalAction]]></category>
		<category><![CDATA[PunjabPolitics]]></category>
		<category><![CDATA[WarOnDrugs]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब में नशे के मुद्दे पर सियासत गरमाई हुई है। हाल ही में भाजपा नेता <strong>अनिल सरीन</strong> द्वारा लगाए गए आरोपों पर राज्य के <strong>कैबिनेट मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल</strong> ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। धालीवाल ने इन आरोपों को <strong>झूठा</strong><strong>, </strong><strong>बेबुनियाद और साज़िशन</strong> बताया और कहा कि वह जल्द ही सरीन के खिलाफ <strong>कानूनी कार्रवाई</strong> करने जा रहे हैं।

मंत्री धालीवाल ने प्रेस के सामने साफ कहा, <em>"</em><em>भाजपा नेता ने जानबूझकर झूठ फैलाया है। मेरे खिलाफ दिए गए बयान सार्वजनिक छवि खराब करने के इरादे से दिए गए हैं। अगर उन्होंने अपना बयान वापस नहीं लिया तो मैं उन्हें</em> <strong><em>लीगल नोटिस</em></strong> <em>भेजूंगा।”</em>

<strong>नशे से परिवार को खोने का दर्द</strong>

धालीवाल ने भावुक होते हुए कहा, <em>“</em><em>भाजपा नेताओं को नशे का दर्द क्या पता होगा। मेरा अपना</em> <strong><em>32 </em></strong><strong><em>साल का भतीजा </em></strong><strong><em>2013 </em></strong><strong><em>में नशे की ओवरडोज़ से मर गया था</em></strong><em>। उस वक्त मैं विदेश में था</em><em>, </em><em>लेकिन ये खबर सुनते ही भारत लौटा और तब से यहीं रह रहा हूँ। आज भी मेरी मां उसका नाम लेकर रोती है।"</em>

<strong>गांव की घटना पर दी सफाई</strong>

धालीवाल ने बताया कि <strong>28 </strong><strong>मई</strong> को उनके हलके के <strong>गांव लक्खोवाल</strong> में 6-7 लोगों को नशा करते पकड़ा गया। अगले दिन गांव वालों ने बताया कि उनमें से <strong>दो युवक सिर्फ नशा करते हैं</strong><strong>, </strong><strong>बेचते नहीं</strong>।
<em>“</em><em>मैं खुद पुलिस थाने गया और </em><em>SHO </em><em>से पूछा कि क्या ये लड़के बेचते हैं या सिर्फ नशा करते हैं</em><em>? SHO </em><em>ने अगले दिन जांच कर बताया कि वे बेचते नहीं</em><em>, </em><em>सिर्फ नशा करते हैं। मैंने कहा कि ऐसे युवाओं को जेल नहीं</em><em>, </em><strong><em>रिहैबिलिटेशन सेंटर</em></strong> <em>भेजना चाहिए। फिर दोनों को</em> <strong><em>अमृतसर नशा मुक्ति केंद्र</em></strong> <em>भेजा गया।”</em>

वहीं जिन युवकों पर नशा बेचने का आरोप था, <strong>उन पर </strong><strong>FIR </strong><strong>दर्ज कर जेल भेजा गया।</strong> मंत्री ने उस FIR की कॉपी मीडिया को भी दिखाई और बताया कि यह जानकारी उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर भी साझा की थी।

<strong>नशे के खिलाफ शुरू से लड़ाई</strong>

धालीवाल ने कहा कि जब <strong>अकाली-भाजपा सरकार</strong> के वक्त पंजाब में नशा चरम पर था, तब भी उन्होंने <strong>एडीजीपी शशिकांत</strong> के साथ मिलकर नशे के खिलाफ अपने गांव में रैली निकाली थी।

उन्होंने कहा, <em>“</em><em>हमारा स्टैंड हमेशा साफ रहा है – जो नशा बेचता है</em><em>, </em><em>उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी</em><em>, </em><em>और जो नशा करता है</em><em>, </em><em>उसे</em> <strong><em>अपराधी नहीं</em></strong><strong><em>, </em></strong><strong><em>मरीज</em></strong> <em>माना जाएगा। </em><em>CM </em><em>भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल ने भी </em><em>'</em><em>युद्ध नशे के विरुद्ध</em><em>' </em><em>अभियान इसी सोच के साथ शुरू किया था।”</em>

<strong>आगे की कार्रवाई</strong>

धालीवाल ने दोहराया कि <strong>सरीन द्वारा लगाए गए आरोप झूठे हैं</strong>, और अगर उन्होंने बयान वापस नहीं लिया तो वे उन्हें कोर्ट में ले जाएंगे।

धालीवाल की तरफ से यह बयान न केवल अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब था, बल्कि यह भी संदेश था कि नशे से जूझ रहे युवाओं के साथ इंसानियत से पेश आना चाहिए। नशे के खिलाफ सरकार की लड़ाई में भावनात्मक और सख्त दोनों पहलुओं को साथ लेकर चलने की बात धालीवाल ने साफ-साफ रखी है]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब में नशे के मुद्दे पर सियासत गरमाई हुई है। हाल ही में भाजपा नेता <strong>अनिल सरीन</strong> द्वारा लगाए गए आरोपों पर राज्य के <strong>कैबिनेट मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल</strong> ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। धालीवाल ने इन आरोपों को <strong>झूठा</strong><strong>, </strong><strong>बेबुनियाद और साज़िशन</strong> बताया और कहा कि वह जल्द ही सरीन के खिलाफ <strong>कानूनी कार्रवाई</strong> करने जा रहे हैं।

मंत्री धालीवाल ने प्रेस के सामने साफ कहा, <em>"</em><em>भाजपा नेता ने जानबूझकर झूठ फैलाया है। मेरे खिलाफ दिए गए बयान सार्वजनिक छवि खराब करने के इरादे से दिए गए हैं। अगर उन्होंने अपना बयान वापस नहीं लिया तो मैं उन्हें</em> <strong><em>लीगल नोटिस</em></strong> <em>भेजूंगा।”</em>

<strong>नशे से परिवार को खोने का दर्द</strong>

धालीवाल ने भावुक होते हुए कहा, <em>“</em><em>भाजपा नेताओं को नशे का दर्द क्या पता होगा। मेरा अपना</em> <strong><em>32 </em></strong><strong><em>साल का भतीजा </em></strong><strong><em>2013 </em></strong><strong><em>में नशे की ओवरडोज़ से मर गया था</em></strong><em>। उस वक्त मैं विदेश में था</em><em>, </em><em>लेकिन ये खबर सुनते ही भारत लौटा और तब से यहीं रह रहा हूँ। आज भी मेरी मां उसका नाम लेकर रोती है।"</em>

<strong>गांव की घटना पर दी सफाई</strong>

धालीवाल ने बताया कि <strong>28 </strong><strong>मई</strong> को उनके हलके के <strong>गांव लक्खोवाल</strong> में 6-7 लोगों को नशा करते पकड़ा गया। अगले दिन गांव वालों ने बताया कि उनमें से <strong>दो युवक सिर्फ नशा करते हैं</strong><strong>, </strong><strong>बेचते नहीं</strong>।
<em>“</em><em>मैं खुद पुलिस थाने गया और </em><em>SHO </em><em>से पूछा कि क्या ये लड़के बेचते हैं या सिर्फ नशा करते हैं</em><em>? SHO </em><em>ने अगले दिन जांच कर बताया कि वे बेचते नहीं</em><em>, </em><em>सिर्फ नशा करते हैं। मैंने कहा कि ऐसे युवाओं को जेल नहीं</em><em>, </em><strong><em>रिहैबिलिटेशन सेंटर</em></strong> <em>भेजना चाहिए। फिर दोनों को</em> <strong><em>अमृतसर नशा मुक्ति केंद्र</em></strong> <em>भेजा गया।”</em>

वहीं जिन युवकों पर नशा बेचने का आरोप था, <strong>उन पर </strong><strong>FIR </strong><strong>दर्ज कर जेल भेजा गया।</strong> मंत्री ने उस FIR की कॉपी मीडिया को भी दिखाई और बताया कि यह जानकारी उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर भी साझा की थी।

<strong>नशे के खिलाफ शुरू से लड़ाई</strong>

धालीवाल ने कहा कि जब <strong>अकाली-भाजपा सरकार</strong> के वक्त पंजाब में नशा चरम पर था, तब भी उन्होंने <strong>एडीजीपी शशिकांत</strong> के साथ मिलकर नशे के खिलाफ अपने गांव में रैली निकाली थी।

उन्होंने कहा, <em>“</em><em>हमारा स्टैंड हमेशा साफ रहा है – जो नशा बेचता है</em><em>, </em><em>उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी</em><em>, </em><em>और जो नशा करता है</em><em>, </em><em>उसे</em> <strong><em>अपराधी नहीं</em></strong><strong><em>, </em></strong><strong><em>मरीज</em></strong> <em>माना जाएगा। </em><em>CM </em><em>भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल ने भी </em><em>'</em><em>युद्ध नशे के विरुद्ध</em><em>' </em><em>अभियान इसी सोच के साथ शुरू किया था।”</em>

<strong>आगे की कार्रवाई</strong>

धालीवाल ने दोहराया कि <strong>सरीन द्वारा लगाए गए आरोप झूठे हैं</strong>, और अगर उन्होंने बयान वापस नहीं लिया तो वे उन्हें कोर्ट में ले जाएंगे।

धालीवाल की तरफ से यह बयान न केवल अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब था, बल्कि यह भी संदेश था कि नशे से जूझ रहे युवाओं के साथ इंसानियत से पेश आना चाहिए। नशे के खिलाफ सरकार की लड़ाई में भावनात्मक और सख्त दोनों पहलुओं को साथ लेकर चलने की बात धालीवाल ने साफ-साफ रखी है]]></content:encoded>
					
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