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	<title>KPSharmaOli &#8211; Trends Topic</title>
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	<title>KPSharmaOli &#8211; Trends Topic</title>
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		<title>Nepal में सियासी भूचाल: Sushila Karki बनीं पहली Female Prime Minister, GenZ Protests के बाद KP Oli का Resigns, March में होंगे Elections</title>
		<link>https://trendstopic.in/political-upheaval-in-nepal-sushila-karki-becomes-first-female-prime-minister-after-gen-z-protests-kp-oli-resigns-elections-scheduled-for-march/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 13 Sep 2025 07:16:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[FemalePrimeMinister]]></category>
		<category><![CDATA[GenZProtests]]></category>
		<category><![CDATA[InterimGovernment]]></category>
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		<category><![CDATA[SushilaKarki]]></category>
		<category><![CDATA[YouthMovement]]></category>
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					<description><![CDATA[नेपाल इन दिनों बड़े राजनीतिक बदलावों से गुजर रहा है। पिछले हफ्ते सोशल मीडिया बैन के खिलाफ शुरू हुए <strong>Gen Z </strong><strong>प्रोटेस्ट्स</strong> ने पूरे देश की राजनीति को हिला कर रख दिया। इन प्रदर्शनों में हिंसा के चलते <strong>51 </strong><strong>लोगों की मौत</strong> हो गई और <strong>1,300 </strong><strong>से ज्यादा लोग घायल</strong> हुए। हालात बेकाबू होने पर आखिरकार <strong>प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली</strong> को <strong>9 </strong><strong>सितंबर</strong> को इस्तीफा देना पड़ा।

शुक्रवार (<strong>12 </strong><strong>सितंबर</strong>) को नेपाल की सियासत में ऐतिहासिक कदम उठाया गया जब <strong>पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की (</strong><strong>73)</strong> ने <strong>नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री</strong> के रूप में शपथ ली। वे एक <strong>इंटरिम गवर्नमेंट (अंतरिम सरकार)</strong> की कमान संभालेंगी, जिसका मुख्य काम <strong>6 </strong><strong>महीने के भीतर चुनाव कराना</strong> होगा।

<strong>कैसे बनीं सुशीला कार्की अंतरिम प्रधानमंत्री</strong>

सुशीला कार्की का नाम युवाओं और जनता की तरफ से सुझाया गया, क्योंकि उन्हें <strong>ईमानदार और गैर-राजनीतिक चेहरा</strong> माना जाता है।
राष्ट्रपति <strong>राम चंद्र पौडेल</strong>, <strong>नेपाल आर्मी चीफ जनरल अशोक राज सिग्देल</strong> और <strong>Gen Z </strong><strong>आंदोलन के नेताओं</strong> के बीच कई दौर की बातचीत के बाद यह फैसला लिया गया।
<ul>
 	<li>राष्ट्रपति पौडेल ने संसद को भंग कर <strong>5 </strong><strong>मार्च </strong><strong>2026</strong> को <strong>नए चुनाव कराने</strong> का ऐलान किया।</li>
 	<li>शपथ ग्रहण कार्यक्रम <strong>राष्ट्रपति भवन</strong><strong>, </strong><strong>शीतल निवास</strong> में हुआ, जिसे लाइव टेलीविजन पर दिखाया गया।</li>
</ul>
<strong>सुशीला कार्की का सफर </strong><strong>– </strong><strong>गांव की बेटी से देश की प्रधानमंत्री तक</strong>
<ul>
 	<li><strong>जन्म और पढ़ाई:</strong>
<ul>
 	<li>1952 में नेपाल के पूर्वी हिस्से के एक किसान परिवार में जन्म।</li>
 	<li><strong>BA (1972)</strong> – महेंद्र मोरंग कैंपस, नेपाल</li>
 	<li><strong>MA (Political Science) (1975)</strong> – बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU), वाराणसी, भारत</li>
 	<li><strong>LLB (1978)</strong> – त्रिभुवन यूनिवर्सिटी, काठमांडू</li>
</ul>
</li>
 	<li><strong>करियर की शुरुआत:</strong>
<ul>
 	<li>1979 से बिराटनगर में वकालत शुरू की।</li>
 	<li>1985 में महेंद्र मल्टिपल कैंपस, धरान में असिस्टेंट टीचर रहीं।</li>
</ul>
</li>
 	<li><strong>न्यायपालिका में योगदान:</strong>
<ul>
 	<li>2009 में सुप्रीम कोर्ट में अस्थायी जज बनीं।</li>
 	<li>2010 में स्थायी जज बनीं।</li>
 	<li><strong>2016 </strong><strong>में पहली महिला चीफ जस्टिस</strong> बनीं।</li>
 	<li>भ्रष्टाचार के खिलाफ कई सख्त फैसले सुनाए।</li>
 	<li>2017 में उन पर <strong>इम्पीचमेंट मोशन (महाभियोग)</strong> लाया गया, लेकिन जनता के जबरदस्त समर्थन और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह हट गया।</li>
</ul>
</li>
 	<li><strong>महत्वपूर्ण केस:</strong>
<ul>
 	<li>इंफॉर्मेशन और कम्युनिकेशन मिनिस्टर <strong>जय प्रकाश प्रसाद गुप्ता</strong> को भ्रष्टाचार केस में दोषी करार दिया।</li>
</ul>
</li>
</ul>
<strong>भारत से जुड़ाव: </strong><strong>BHU </strong><strong>में पढ़ाई और हाइजैकिंग कनेक्शन</strong>

सुशीला कार्की का भारत से गहरा रिश्ता है।
<ul>
 	<li>BHU में पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात <strong>दुर्गा प्रसाद सुवेदी</strong> से हुई, जो बाद में उनके पति बने।</li>
 	<li>सुवेदी 1973 में <strong>नेपाल एयरलाइंस के हाइजैकिंग</strong> केस में शामिल थे।
<ul>
 	<li>इस विमान में करीब <strong>40 </strong><strong>लाख नेपाली रुपए</strong> (उस समय लगभग $400,000) थे, जो <strong>नेपाल स्टेट बैंक</strong> के थे।</li>
 	<li>यह प्लेन बिहार के <strong>फोर्ब्सगंज</strong> में उतारा गया।</li>
 	<li>यह पैसा नेपाल में <strong>राजशाही के खिलाफ लोकतांत्रिक संघर्ष</strong> के लिए हथियार खरीदने में इस्तेमाल हुआ।</li>
 	<li>सुवेदी और अन्य साथियों को भारत में गिरफ्तार कर 2 साल जेल में रखा गया, बाद में वे नेपाल लौट आए।</li>
</ul>
</li>
</ul>
<strong>Gen Z </strong><strong>आंदोलन </strong><strong>– </strong><strong>क्यों भड़की हिंसा</strong>
<ul>
 	<li>ओली सरकार ने <strong>सोशल मीडिया पर बैन</strong> लगा दिया था।</li>
 	<li>यह फैसला <strong>आवाज दबाने की कोशिश</strong> माना गया और इसका सीधा असर युवाओं पर पड़ा।</li>
 	<li>इसके बाद <strong>Gen Z</strong> यानी युवा पीढ़ी ने पूरे देश में आंदोलन शुरू कर दिया।</li>
 	<li>आंदोलन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच <strong>भयंकर हिंसा</strong> हुई।
<ul>
 	<li>51 लोगों की मौत हुई।</li>
 	<li>1,300 से ज्यादा घायल हुए।</li>
 	<li>मारे गए लोगों में <strong>21 </strong><strong>प्रदर्शनकारी</strong><strong>, 9 </strong><strong>कैदी</strong><strong>, 3 </strong><strong>पुलिसकर्मी और </strong><strong>18 </strong><strong>अन्य लोग</strong> शामिल थे।</li>
</ul>
</li>
</ul>
<strong>काठमांडू मेयर बालन शाह</strong> ने प्रदर्शनकारियों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि "Gen Z ने देश में बदलाव लाने के लिए जो कुर्बानी दी है, वह हमेशा याद रखी जाएगी।"

<strong>हालात अब धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं</strong>
<ul>
 	<li>शनिवार (<strong>13 </strong><strong>सितंबर</strong>) को सरकार ने <strong>कर्फ्यू और सभी प्रतिबंध हटाने</strong> का फैसला किया।</li>
 	<li>दुकानें, बाजार और मॉल फिर से खुल गए हैं।</li>
 	<li>सड़कों पर ट्रैफिक धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है।</li>
 	<li>अब पुलिस <strong>राइफल्स की जगह सिर्फ डंडे</strong> लेकर तैनात है, ताकि हिंसा न बढ़े।</li>
</ul>
<strong>भारत और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया</strong>
<ul>
 	<li><strong>PM </strong><strong>नरेंद्र मोदी</strong> ने सुशीला कार्की को बधाई देते हुए कहा कि <em>"</em><em>भारत नेपाल की शांति और तरक्की के लिए हमेशा साथ रहेगा।"</em></li>
 	<li><strong>भारत के विदेश मंत्रालय (</strong><strong>MEA)</strong> ने भी बयान जारी कर कहा कि भारत <strong>नेपाल के साथ मिलकर स्थिरता और विकास के लिए काम करता रहेगा।</strong></li>
</ul>
<strong>आगे क्या होगा</strong>
<ul>
 	<li>नेपाल में <strong>अगले </strong><strong>6 </strong><strong>महीने में चुनाव कराए जाएंगे</strong>।</li>
 	<li>अंतरिम सरकार का फोकस <strong>शांति</strong><strong>, </strong><strong>स्थिरता और पारदर्शी चुनाव</strong> पर होगा।</li>
 	<li>सुशीला कार्की की ईमानदार छवि और न्यायिक अनुभव से जनता को नई उम्मीद मिली है।</li>
</ul>
नेपाल में यह बदलाव <strong>युवा शक्ति और जनता की ताकत</strong> का नतीजा है।
सुशीला कार्की का प्रधानमंत्री बनना न सिर्फ <strong>महिला सशक्तिकरण</strong> की मिसाल है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि <strong>लोकतंत्र में जनता की आवाज सबसे ऊपर है</strong>।
आने वाले 6 महीने नेपाल के लिए बेहद अहम होंगे, जो तय करेंगे कि देश <strong>शांति और विकास की राह</strong> पर आगे बढ़ेगा या फिर सियासी अस्थिरता जारी रहेगी।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[नेपाल इन दिनों बड़े राजनीतिक बदलावों से गुजर रहा है। पिछले हफ्ते सोशल मीडिया बैन के खिलाफ शुरू हुए <strong>Gen Z </strong><strong>प्रोटेस्ट्स</strong> ने पूरे देश की राजनीति को हिला कर रख दिया। इन प्रदर्शनों में हिंसा के चलते <strong>51 </strong><strong>लोगों की मौत</strong> हो गई और <strong>1,300 </strong><strong>से ज्यादा लोग घायल</strong> हुए। हालात बेकाबू होने पर आखिरकार <strong>प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली</strong> को <strong>9 </strong><strong>सितंबर</strong> को इस्तीफा देना पड़ा।

शुक्रवार (<strong>12 </strong><strong>सितंबर</strong>) को नेपाल की सियासत में ऐतिहासिक कदम उठाया गया जब <strong>पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की (</strong><strong>73)</strong> ने <strong>नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री</strong> के रूप में शपथ ली। वे एक <strong>इंटरिम गवर्नमेंट (अंतरिम सरकार)</strong> की कमान संभालेंगी, जिसका मुख्य काम <strong>6 </strong><strong>महीने के भीतर चुनाव कराना</strong> होगा।

<strong>कैसे बनीं सुशीला कार्की अंतरिम प्रधानमंत्री</strong>

सुशीला कार्की का नाम युवाओं और जनता की तरफ से सुझाया गया, क्योंकि उन्हें <strong>ईमानदार और गैर-राजनीतिक चेहरा</strong> माना जाता है।
राष्ट्रपति <strong>राम चंद्र पौडेल</strong>, <strong>नेपाल आर्मी चीफ जनरल अशोक राज सिग्देल</strong> और <strong>Gen Z </strong><strong>आंदोलन के नेताओं</strong> के बीच कई दौर की बातचीत के बाद यह फैसला लिया गया।
<ul>
 	<li>राष्ट्रपति पौडेल ने संसद को भंग कर <strong>5 </strong><strong>मार्च </strong><strong>2026</strong> को <strong>नए चुनाव कराने</strong> का ऐलान किया।</li>
 	<li>शपथ ग्रहण कार्यक्रम <strong>राष्ट्रपति भवन</strong><strong>, </strong><strong>शीतल निवास</strong> में हुआ, जिसे लाइव टेलीविजन पर दिखाया गया।</li>
</ul>
<strong>सुशीला कार्की का सफर </strong><strong>– </strong><strong>गांव की बेटी से देश की प्रधानमंत्री तक</strong>
<ul>
 	<li><strong>जन्म और पढ़ाई:</strong>
<ul>
 	<li>1952 में नेपाल के पूर्वी हिस्से के एक किसान परिवार में जन्म।</li>
 	<li><strong>BA (1972)</strong> – महेंद्र मोरंग कैंपस, नेपाल</li>
 	<li><strong>MA (Political Science) (1975)</strong> – बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU), वाराणसी, भारत</li>
 	<li><strong>LLB (1978)</strong> – त्रिभुवन यूनिवर्सिटी, काठमांडू</li>
</ul>
</li>
 	<li><strong>करियर की शुरुआत:</strong>
<ul>
 	<li>1979 से बिराटनगर में वकालत शुरू की।</li>
 	<li>1985 में महेंद्र मल्टिपल कैंपस, धरान में असिस्टेंट टीचर रहीं।</li>
</ul>
</li>
 	<li><strong>न्यायपालिका में योगदान:</strong>
<ul>
 	<li>2009 में सुप्रीम कोर्ट में अस्थायी जज बनीं।</li>
 	<li>2010 में स्थायी जज बनीं।</li>
 	<li><strong>2016 </strong><strong>में पहली महिला चीफ जस्टिस</strong> बनीं।</li>
 	<li>भ्रष्टाचार के खिलाफ कई सख्त फैसले सुनाए।</li>
 	<li>2017 में उन पर <strong>इम्पीचमेंट मोशन (महाभियोग)</strong> लाया गया, लेकिन जनता के जबरदस्त समर्थन और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह हट गया।</li>
</ul>
</li>
 	<li><strong>महत्वपूर्ण केस:</strong>
<ul>
 	<li>इंफॉर्मेशन और कम्युनिकेशन मिनिस्टर <strong>जय प्रकाश प्रसाद गुप्ता</strong> को भ्रष्टाचार केस में दोषी करार दिया।</li>
</ul>
</li>
</ul>
<strong>भारत से जुड़ाव: </strong><strong>BHU </strong><strong>में पढ़ाई और हाइजैकिंग कनेक्शन</strong>

सुशीला कार्की का भारत से गहरा रिश्ता है।
<ul>
 	<li>BHU में पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात <strong>दुर्गा प्रसाद सुवेदी</strong> से हुई, जो बाद में उनके पति बने।</li>
 	<li>सुवेदी 1973 में <strong>नेपाल एयरलाइंस के हाइजैकिंग</strong> केस में शामिल थे।
<ul>
 	<li>इस विमान में करीब <strong>40 </strong><strong>लाख नेपाली रुपए</strong> (उस समय लगभग $400,000) थे, जो <strong>नेपाल स्टेट बैंक</strong> के थे।</li>
 	<li>यह प्लेन बिहार के <strong>फोर्ब्सगंज</strong> में उतारा गया।</li>
 	<li>यह पैसा नेपाल में <strong>राजशाही के खिलाफ लोकतांत्रिक संघर्ष</strong> के लिए हथियार खरीदने में इस्तेमाल हुआ।</li>
 	<li>सुवेदी और अन्य साथियों को भारत में गिरफ्तार कर 2 साल जेल में रखा गया, बाद में वे नेपाल लौट आए।</li>
</ul>
</li>
</ul>
<strong>Gen Z </strong><strong>आंदोलन </strong><strong>– </strong><strong>क्यों भड़की हिंसा</strong>
<ul>
 	<li>ओली सरकार ने <strong>सोशल मीडिया पर बैन</strong> लगा दिया था।</li>
 	<li>यह फैसला <strong>आवाज दबाने की कोशिश</strong> माना गया और इसका सीधा असर युवाओं पर पड़ा।</li>
 	<li>इसके बाद <strong>Gen Z</strong> यानी युवा पीढ़ी ने पूरे देश में आंदोलन शुरू कर दिया।</li>
 	<li>आंदोलन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच <strong>भयंकर हिंसा</strong> हुई।
<ul>
 	<li>51 लोगों की मौत हुई।</li>
 	<li>1,300 से ज्यादा घायल हुए।</li>
 	<li>मारे गए लोगों में <strong>21 </strong><strong>प्रदर्शनकारी</strong><strong>, 9 </strong><strong>कैदी</strong><strong>, 3 </strong><strong>पुलिसकर्मी और </strong><strong>18 </strong><strong>अन्य लोग</strong> शामिल थे।</li>
</ul>
</li>
</ul>
<strong>काठमांडू मेयर बालन शाह</strong> ने प्रदर्शनकारियों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि "Gen Z ने देश में बदलाव लाने के लिए जो कुर्बानी दी है, वह हमेशा याद रखी जाएगी।"

<strong>हालात अब धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं</strong>
<ul>
 	<li>शनिवार (<strong>13 </strong><strong>सितंबर</strong>) को सरकार ने <strong>कर्फ्यू और सभी प्रतिबंध हटाने</strong> का फैसला किया।</li>
 	<li>दुकानें, बाजार और मॉल फिर से खुल गए हैं।</li>
 	<li>सड़कों पर ट्रैफिक धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है।</li>
 	<li>अब पुलिस <strong>राइफल्स की जगह सिर्फ डंडे</strong> लेकर तैनात है, ताकि हिंसा न बढ़े।</li>
</ul>
<strong>भारत और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया</strong>
<ul>
 	<li><strong>PM </strong><strong>नरेंद्र मोदी</strong> ने सुशीला कार्की को बधाई देते हुए कहा कि <em>"</em><em>भारत नेपाल की शांति और तरक्की के लिए हमेशा साथ रहेगा।"</em></li>
 	<li><strong>भारत के विदेश मंत्रालय (</strong><strong>MEA)</strong> ने भी बयान जारी कर कहा कि भारत <strong>नेपाल के साथ मिलकर स्थिरता और विकास के लिए काम करता रहेगा।</strong></li>
</ul>
<strong>आगे क्या होगा</strong>
<ul>
 	<li>नेपाल में <strong>अगले </strong><strong>6 </strong><strong>महीने में चुनाव कराए जाएंगे</strong>।</li>
 	<li>अंतरिम सरकार का फोकस <strong>शांति</strong><strong>, </strong><strong>स्थिरता और पारदर्शी चुनाव</strong> पर होगा।</li>
 	<li>सुशीला कार्की की ईमानदार छवि और न्यायिक अनुभव से जनता को नई उम्मीद मिली है।</li>
</ul>
नेपाल में यह बदलाव <strong>युवा शक्ति और जनता की ताकत</strong> का नतीजा है।
सुशीला कार्की का प्रधानमंत्री बनना न सिर्फ <strong>महिला सशक्तिकरण</strong> की मिसाल है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि <strong>लोकतंत्र में जनता की आवाज सबसे ऊपर है</strong>।
आने वाले 6 महीने नेपाल के लिए बेहद अहम होंगे, जो तय करेंगे कि देश <strong>शांति और विकास की राह</strong> पर आगे बढ़ेगा या फिर सियासी अस्थिरता जारी रहेगी।]]></content:encoded>
					
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