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	<title>KisanEmpowerment &#8211; Trends Topic</title>
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	<title>KisanEmpowerment &#8211; Trends Topic</title>
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		<title>“अपना CM – अपने खेता विच”: किसानों के खेतों तक पहुंचकर CM Bhagwant Mann ने बदली Punjab की तस्वीर</title>
		<link>https://trendstopic.in/apna-cm-apne-kheta-vich-punjab-cm-bhagwant-mann-reaches-farmers-fields-bringing-real-change-to-the-state/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 01 Nov 2025 04:34:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चंडीगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[Agriculture]]></category>
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		<category><![CDATA[BhagwantMann]]></category>
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		<category><![CDATA[RuralDevelopment]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब के मुख्यमंत्री <strong>भगवंत मान</strong> इन दिनों पूरे राज्य में एक अलग तरह की पहल के लिए चर्चा में हैं। उन्होंने किसानों से जुड़ने का एक नया तरीका शुरू किया है – <strong>“</strong><strong>अपना </strong><strong>CM – </strong><strong>अपने खेता विच</strong><strong>”</strong> यानी मुख्यमंत्री खुद खेतों में जाकर किसानों से बात करते हैं, उनकी परेशानियां सुनते हैं और मौके पर ही अफसरों को समाधान के निर्देश देते हैं।

यह कोई सिर्फ दिखावा या राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि असल में ज़मीन पर दिखने वाली पहल है। मुख्यमंत्री पिछले <strong>10 </strong><strong>महीनों में पंजाब के सभी </strong><strong>23 </strong><strong>ज़िलों का दौरा</strong> कर चुके हैं और <strong>3,200 </strong><strong>से ज़्यादा किसानों से सीधे बातचीत</strong> कर चुके हैं। पहले जहां शिकायतों को सुलझने में 20 से 30 दिन लग जाते थे, अब <strong>औसतन </strong><strong>48 </strong><strong>घंटे</strong> में किसानों को राहत मिल रही है।

<strong>सरकारी गेहूं खरीद </strong><strong>– </strong><strong>तेज़ और पारदर्शी प्रक्रिया</strong>

रबी सीजन 2025 के लिए पंजाब सरकार ने <strong>142 </strong><strong>लाख मीट्रिक टन गेहूं</strong> की सरकारी खरीद का लक्ष्य रखा है। इसके लिए <strong>4,500 </strong><strong>खरीद केंद्र</strong> बनाए गए हैं।
किसानों को <strong>₹2,275 </strong><strong>प्रति क्विंटल का </strong><strong>MSP (</strong><strong>न्यूनतम समर्थन मूल्य)</strong> दिया जा रहा है।

पहले किसानों को भुगतान पाने में कई दिन लग जाते थे, लेकिन अब <strong>Direct Benefit Transfer (DBT)</strong> के ज़रिए फसल बेचने के <strong>24 </strong><strong>से </strong><strong>36 </strong><strong>घंटे के अंदर</strong> ही पैसे उनके बैंक खाते में पहुंच रहे हैं।
अब तक <strong>₹11,400 </strong><strong>करोड़ से ज़्यादा</strong> की राशि <strong>7.8 </strong><strong>लाख किसानों</strong> के खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है।

<strong>पानी की बचत और सिंचाई में सुधार</strong>

पंजाब में भूजल गिरावट और जल संकट को देखते हुए सरकार ने <strong>₹3,200 </strong><strong>करोड़ का </strong><strong>“</strong><strong>जल संरक्षण और सिंचाई आधुनिकीकरण पैकेज</strong><strong>”</strong> शुरू किया है।
पिछले 15 महीनों में <strong>1,150 </strong><strong>किलोमीटर नहरों की सफाई और मरम्मत</strong> की गई है।

“<strong>पानी बचाओ</strong><strong>, </strong><strong>पैसा कमाओ</strong>” योजना के तहत माइक्रो-इरिगेशन (ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम) लगाने पर किसानों को <strong>90% </strong><strong>तक सब्सिडी</strong> मिल रही है।
अब तक <strong>28,500 </strong><strong>किसानों</strong> ने इस सिस्टम को अपनाया है, जिससे लगभग <strong>35-45% </strong><strong>पानी की बचत</strong> हो रही है।

<strong>हर खेत को रोशनी </strong><strong>– </strong><strong>बिजली सप्लाई में सुधार</strong>

कृषि क्षेत्र में बिजली आपूर्ति को मज़बूत करने के लिए सरकार ने <strong>“</strong><strong>हर खेत को रोशनी</strong><strong>”</strong> अभियान शुरू किया है।
अभी किसानों को <strong>10-11 </strong><strong>घंटे बिजली</strong> दी जा रही है, और लक्ष्य है कि <strong>दिसंबर </strong><strong>2025 </strong><strong>तक इसे </strong><strong>14-15 </strong><strong>घंटे</strong> कर दिया जाए।

इस काम के लिए सरकार ने <strong>₹1,650 </strong><strong>करोड़</strong> खर्च किए हैं और <strong>4,200 </strong><strong>नए ट्रांसफॉर्मर</strong> लगाए गए हैं।
‘<strong>बिजली ऐप</strong>’ के ज़रिए शिकायत दर्ज करने पर औसतन <strong>6 </strong><strong>घंटे में समाधान</strong> किया जा रहा है।
किसानों को मुफ्त बिजली देने के लिए राज्य सरकार हर साल <strong>₹8,200 </strong><strong>करोड़</strong> की सब्सिडी दे रही है।

<strong>नवीन कृषि यंत्र योजना </strong><strong>– </strong><strong>खेती को आधुनिक बनाना</strong>

सरकार की “<strong>नवीन कृषि यंत्र योजना</strong>” के तहत किसानों को आधुनिक खेती के उपकरणों पर <strong>50 </strong><strong>से </strong><strong>75% </strong><strong>तक की सब्सिडी</strong> दी जा रही है।
अब तक <strong>46,000 </strong><strong>किसानों</strong> को <strong>₹820 </strong><strong>करोड़</strong> की सहायता दी जा चुकी है।

पराली (stubble) जलाने की समस्या कम करने के लिए सरकार ने <strong>8,500 </strong><strong>पराली प्रबंधन मशीनें</strong> किसानों को दी हैं, जिससे राज्य में पराली जलाने के मामलों में <strong>68% </strong><strong>की कमी</strong> आई है।

इसके अलावा, छोटे किसानों के लिए <strong>420 ‘</strong><strong>कस्टम हायरिंग सेंटर</strong><strong>’</strong> खोले गए हैं, जहां से किसान किराए पर मशीनें ले सकते हैं।

<strong>फसल बीमा</strong><strong>, </strong><strong>राहत और कर्ज माफी</strong>

फसल खराब होने की स्थिति में किसानों को अब <strong>तेज़ राहत</strong> मिल रही है।
इस साल <strong>58,000 </strong><strong>आपदा प्रभावित किसानों</strong> को <strong>₹285 </strong><strong>करोड़</strong> की राशि सिर्फ <strong>10 </strong><strong>दिनों में</strong> दी गई।

फसल क्षति का आकलन अब <strong>AI-</strong><strong>ड्रोन और सैटेलाइट तकनीक</strong> से किया जा रहा है ताकि नुकसान का सही अंदाज़ा लगाया जा सके।

“<strong>पंजाब किसान समृद्धि योजना</strong>” के तहत किसानों को <strong>0 </strong><strong>से </strong><strong>2% </strong><strong>ब्याज दर</strong> पर <strong>₹5 </strong><strong>लाख तक का लोन</strong> मिल रहा है।
अब तक <strong>3.1 </strong><strong>लाख नए किसान क्रेडिट कार्ड (</strong><strong>KCC)</strong> जारी किए गए हैं और छोटे किसानों का <strong>₹2,100 </strong><strong>करोड़ कर्ज माफ</strong> किया गया है।

<strong>डिजिटल इंडिया की ओर </strong><strong>– </strong><strong>किसान पोर्टल और ऐप</strong>

पंजाब सरकार ने किसानों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म भी तैयार किए हैं।
<strong>‘</strong><strong>पंजाब किसान पोर्टल</strong><strong>’</strong> और <strong>‘</strong><strong>किसान सुविधा ऐप</strong><strong>’</strong> पर अब तक <strong>4.2 </strong><strong>लाख किसान</strong> रजिस्टर्ड हैं।

इन प्लेटफॉर्म्स पर किसान मिट्टी की जांच, फसल सलाह, मंडी भाव, सब्सिडी और सरकारी योजनाओं की जानकारी पा सकते हैं।
टोल-फ्री हेल्पलाइन पर अब तक <strong>5.2 </strong><strong>लाख कॉल</strong> आई हैं, जिनमें से <strong>94% </strong><strong>मामलों का समाधान</strong> किया गया है।

इसके अलावा, ज़िला स्तर पर <strong>184 ‘</strong><strong>एकीकृत किसान सेवा केंद्र</strong><strong>’</strong> खोले गए हैं, जहां किसानों को एक ही जगह सभी सेवाएं मिलती हैं।

<strong>मुख्यमंत्री की जनता से जुड़ी पहल</strong>

भगवंत मान का यह कार्यक्रम केवल सरकारी औपचारिकता नहीं है।
वे हर हफ्ते <strong>4-5 </strong><strong>गांवों में खुद पहुंचते हैं</strong>, किसानों के साथ <strong>चाय पर बातचीत</strong> करते हैं, <strong>खेतों में चलते हैं</strong>, और मौके पर ही अफसरों को कार्रवाई करने के आदेश देते हैं।
हर शिकायत पर <strong>48 </strong><strong>घंटे में रिपोर्ट</strong> मांगी जाती है ताकि किसानों को तुरंत राहत मिले।

किसान अब गर्व से कहते हैं —

“साडा मुख्यमंत्री साडे नाल खड़ा ऐ!”

“अपना CM – अपने खेता विच” ने पंजाब में शासन की परिभाषा बदल दी है।
यह पहल साबित करती है कि जब सरकार किसानों की बात सुनती है, उनके पास जाती है और काम ज़मीन पर होता है, तो <strong>कृषि क्षेत्र में असली बदलाव</strong> लाना मुमकिन है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब के मुख्यमंत्री <strong>भगवंत मान</strong> इन दिनों पूरे राज्य में एक अलग तरह की पहल के लिए चर्चा में हैं। उन्होंने किसानों से जुड़ने का एक नया तरीका शुरू किया है – <strong>“</strong><strong>अपना </strong><strong>CM – </strong><strong>अपने खेता विच</strong><strong>”</strong> यानी मुख्यमंत्री खुद खेतों में जाकर किसानों से बात करते हैं, उनकी परेशानियां सुनते हैं और मौके पर ही अफसरों को समाधान के निर्देश देते हैं।

यह कोई सिर्फ दिखावा या राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि असल में ज़मीन पर दिखने वाली पहल है। मुख्यमंत्री पिछले <strong>10 </strong><strong>महीनों में पंजाब के सभी </strong><strong>23 </strong><strong>ज़िलों का दौरा</strong> कर चुके हैं और <strong>3,200 </strong><strong>से ज़्यादा किसानों से सीधे बातचीत</strong> कर चुके हैं। पहले जहां शिकायतों को सुलझने में 20 से 30 दिन लग जाते थे, अब <strong>औसतन </strong><strong>48 </strong><strong>घंटे</strong> में किसानों को राहत मिल रही है।

<strong>सरकारी गेहूं खरीद </strong><strong>– </strong><strong>तेज़ और पारदर्शी प्रक्रिया</strong>

रबी सीजन 2025 के लिए पंजाब सरकार ने <strong>142 </strong><strong>लाख मीट्रिक टन गेहूं</strong> की सरकारी खरीद का लक्ष्य रखा है। इसके लिए <strong>4,500 </strong><strong>खरीद केंद्र</strong> बनाए गए हैं।
किसानों को <strong>₹2,275 </strong><strong>प्रति क्विंटल का </strong><strong>MSP (</strong><strong>न्यूनतम समर्थन मूल्य)</strong> दिया जा रहा है।

पहले किसानों को भुगतान पाने में कई दिन लग जाते थे, लेकिन अब <strong>Direct Benefit Transfer (DBT)</strong> के ज़रिए फसल बेचने के <strong>24 </strong><strong>से </strong><strong>36 </strong><strong>घंटे के अंदर</strong> ही पैसे उनके बैंक खाते में पहुंच रहे हैं।
अब तक <strong>₹11,400 </strong><strong>करोड़ से ज़्यादा</strong> की राशि <strong>7.8 </strong><strong>लाख किसानों</strong> के खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है।

<strong>पानी की बचत और सिंचाई में सुधार</strong>

पंजाब में भूजल गिरावट और जल संकट को देखते हुए सरकार ने <strong>₹3,200 </strong><strong>करोड़ का </strong><strong>“</strong><strong>जल संरक्षण और सिंचाई आधुनिकीकरण पैकेज</strong><strong>”</strong> शुरू किया है।
पिछले 15 महीनों में <strong>1,150 </strong><strong>किलोमीटर नहरों की सफाई और मरम्मत</strong> की गई है।

“<strong>पानी बचाओ</strong><strong>, </strong><strong>पैसा कमाओ</strong>” योजना के तहत माइक्रो-इरिगेशन (ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम) लगाने पर किसानों को <strong>90% </strong><strong>तक सब्सिडी</strong> मिल रही है।
अब तक <strong>28,500 </strong><strong>किसानों</strong> ने इस सिस्टम को अपनाया है, जिससे लगभग <strong>35-45% </strong><strong>पानी की बचत</strong> हो रही है।

<strong>हर खेत को रोशनी </strong><strong>– </strong><strong>बिजली सप्लाई में सुधार</strong>

कृषि क्षेत्र में बिजली आपूर्ति को मज़बूत करने के लिए सरकार ने <strong>“</strong><strong>हर खेत को रोशनी</strong><strong>”</strong> अभियान शुरू किया है।
अभी किसानों को <strong>10-11 </strong><strong>घंटे बिजली</strong> दी जा रही है, और लक्ष्य है कि <strong>दिसंबर </strong><strong>2025 </strong><strong>तक इसे </strong><strong>14-15 </strong><strong>घंटे</strong> कर दिया जाए।

इस काम के लिए सरकार ने <strong>₹1,650 </strong><strong>करोड़</strong> खर्च किए हैं और <strong>4,200 </strong><strong>नए ट्रांसफॉर्मर</strong> लगाए गए हैं।
‘<strong>बिजली ऐप</strong>’ के ज़रिए शिकायत दर्ज करने पर औसतन <strong>6 </strong><strong>घंटे में समाधान</strong> किया जा रहा है।
किसानों को मुफ्त बिजली देने के लिए राज्य सरकार हर साल <strong>₹8,200 </strong><strong>करोड़</strong> की सब्सिडी दे रही है।

<strong>नवीन कृषि यंत्र योजना </strong><strong>– </strong><strong>खेती को आधुनिक बनाना</strong>

सरकार की “<strong>नवीन कृषि यंत्र योजना</strong>” के तहत किसानों को आधुनिक खेती के उपकरणों पर <strong>50 </strong><strong>से </strong><strong>75% </strong><strong>तक की सब्सिडी</strong> दी जा रही है।
अब तक <strong>46,000 </strong><strong>किसानों</strong> को <strong>₹820 </strong><strong>करोड़</strong> की सहायता दी जा चुकी है।

पराली (stubble) जलाने की समस्या कम करने के लिए सरकार ने <strong>8,500 </strong><strong>पराली प्रबंधन मशीनें</strong> किसानों को दी हैं, जिससे राज्य में पराली जलाने के मामलों में <strong>68% </strong><strong>की कमी</strong> आई है।

इसके अलावा, छोटे किसानों के लिए <strong>420 ‘</strong><strong>कस्टम हायरिंग सेंटर</strong><strong>’</strong> खोले गए हैं, जहां से किसान किराए पर मशीनें ले सकते हैं।

<strong>फसल बीमा</strong><strong>, </strong><strong>राहत और कर्ज माफी</strong>

फसल खराब होने की स्थिति में किसानों को अब <strong>तेज़ राहत</strong> मिल रही है।
इस साल <strong>58,000 </strong><strong>आपदा प्रभावित किसानों</strong> को <strong>₹285 </strong><strong>करोड़</strong> की राशि सिर्फ <strong>10 </strong><strong>दिनों में</strong> दी गई।

फसल क्षति का आकलन अब <strong>AI-</strong><strong>ड्रोन और सैटेलाइट तकनीक</strong> से किया जा रहा है ताकि नुकसान का सही अंदाज़ा लगाया जा सके।

“<strong>पंजाब किसान समृद्धि योजना</strong>” के तहत किसानों को <strong>0 </strong><strong>से </strong><strong>2% </strong><strong>ब्याज दर</strong> पर <strong>₹5 </strong><strong>लाख तक का लोन</strong> मिल रहा है।
अब तक <strong>3.1 </strong><strong>लाख नए किसान क्रेडिट कार्ड (</strong><strong>KCC)</strong> जारी किए गए हैं और छोटे किसानों का <strong>₹2,100 </strong><strong>करोड़ कर्ज माफ</strong> किया गया है।

<strong>डिजिटल इंडिया की ओर </strong><strong>– </strong><strong>किसान पोर्टल और ऐप</strong>

पंजाब सरकार ने किसानों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म भी तैयार किए हैं।
<strong>‘</strong><strong>पंजाब किसान पोर्टल</strong><strong>’</strong> और <strong>‘</strong><strong>किसान सुविधा ऐप</strong><strong>’</strong> पर अब तक <strong>4.2 </strong><strong>लाख किसान</strong> रजिस्टर्ड हैं।

इन प्लेटफॉर्म्स पर किसान मिट्टी की जांच, फसल सलाह, मंडी भाव, सब्सिडी और सरकारी योजनाओं की जानकारी पा सकते हैं।
टोल-फ्री हेल्पलाइन पर अब तक <strong>5.2 </strong><strong>लाख कॉल</strong> आई हैं, जिनमें से <strong>94% </strong><strong>मामलों का समाधान</strong> किया गया है।

इसके अलावा, ज़िला स्तर पर <strong>184 ‘</strong><strong>एकीकृत किसान सेवा केंद्र</strong><strong>’</strong> खोले गए हैं, जहां किसानों को एक ही जगह सभी सेवाएं मिलती हैं।

<strong>मुख्यमंत्री की जनता से जुड़ी पहल</strong>

भगवंत मान का यह कार्यक्रम केवल सरकारी औपचारिकता नहीं है।
वे हर हफ्ते <strong>4-5 </strong><strong>गांवों में खुद पहुंचते हैं</strong>, किसानों के साथ <strong>चाय पर बातचीत</strong> करते हैं, <strong>खेतों में चलते हैं</strong>, और मौके पर ही अफसरों को कार्रवाई करने के आदेश देते हैं।
हर शिकायत पर <strong>48 </strong><strong>घंटे में रिपोर्ट</strong> मांगी जाती है ताकि किसानों को तुरंत राहत मिले।

किसान अब गर्व से कहते हैं —

“साडा मुख्यमंत्री साडे नाल खड़ा ऐ!”

“अपना CM – अपने खेता विच” ने पंजाब में शासन की परिभाषा बदल दी है।
यह पहल साबित करती है कि जब सरकार किसानों की बात सुनती है, उनके पास जाती है और काम ज़मीन पर होता है, तो <strong>कृषि क्षेत्र में असली बदलाव</strong> लाना मुमकिन है।]]></content:encoded>
					
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