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	<title>IndianPolitics &#8211; Trends Topic</title>
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	<title>IndianPolitics &#8211; Trends Topic</title>
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		<title>माननीय अदालत द्वारा Arvind Kejriwal को आबकारी नीति मामले में बरी किया जाना सच्चाई और लोकतंत्र की जीत: Mohinder Bhagat</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 28 Feb 2026 06:38:57 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p data-start="231" data-end="613">पंजाब के कैबिनेट मंत्री <strong data-start="284" data-end="299">मोहिंदर भगत</strong> ने आबकारी नीति मामले में <strong data-start="325" data-end="344">अरविंद केजरीवाल</strong>, दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री <strong data-start="376" data-end="393">मनीष सिसोदिया</strong> और अन्य आरोपियों के बरी किए जाने को <strong data-start="430" data-end="457">सत्य और लोकतंत्र की जीत</strong> बताया। उन्होंने कहा कि अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि आरोप निराधार और बेबुनियाद थे, और राजनीतिक दबाव के बावजूद न्यायपालिका ने निष्पक्षता के साथ फैसला सुनाया।</p>
<p data-start="615" data-end="923">मंत्री भगत ने कहा कि अदालत ने पूरी जांच के बाद यह साबित कर दिया कि आरोपों के कोई ठोस प्रमाण नहीं थे। यह निर्णय दर्शाता है कि न्यायपालिका लोकतंत्र की आधारशिला है और सच्चाई के सामने झुकती नहीं। अदालत के इस फैसले ने आम जनता का भरोसा और मजबूत किया है और यह साबित किया कि अंततः सत्य और न्याय की ही विजय होती है।</p>
<p data-start="925" data-end="1329">श्री भगत ने कहा कि इस मामले के माध्यम से कुछ राजनीतिक दलों ने आम आदमी पार्टी और उसके नेताओं की छवि धूमिल करने के कई प्रयास किए। उन्होंने आरोप लगाया कि झूठे मामलों और केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का उद्देश्य केवल चुनावी लाभ हासिल करना और विपक्षी नेतृत्व को कमजोर करना था। लेकिन अदालत ने यह साबित कर दिया कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया और न्यायपालिका की शक्ति के सामने कोई भी राजनीतिक षड्यंत्र टिक नहीं सकता।</p>
<p data-start="1331" data-end="1749">मंत्री भगत ने अरविंद केजरीवाल को <strong data-start="1364" data-end="1394">प्रतिबद्ध और दूरदर्शी नेता</strong> बताया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक चुनौतियों और विरोध के बावजूद केजरीवाल हमेशा पारदर्शी शासन और जनकल्याण के लिए काम करते रहे। उनके नेतृत्व में दिल्ली और पंजाब में शिक्षा, स्वास्थ्य, मुफ्त बिजली और मोहल्ला क्लिनिक जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं का क्रियान्वयन हुआ। अदालत का यह फैसला केवल नेताओं के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश में लोकतंत्र और न्याय के लिए प्रेरणा है।</p>
<p data-start="1751" data-end="2071">श्री भगत ने कहा कि यह निर्णय यह संदेश देता है कि <strong data-start="1800" data-end="1839">सत्य और न्याय की विजय हमेशा होती है</strong>, और ईमानदार नेता जनता के विश्वास और सेवा के मार्ग पर हमेशा टिके रहते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस फैसले से न केवल आम आदमी पार्टी और उसके नेताओं की छवि मजबूत होगी, बल्कि पूरे देश में लोकतंत्र और न्याय की प्रतिष्ठा भी और बढ़ेगी।</p>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p data-start="231" data-end="613">पंजाब के कैबिनेट मंत्री <strong data-start="284" data-end="299">मोहिंदर भगत</strong> ने आबकारी नीति मामले में <strong data-start="325" data-end="344">अरविंद केजरीवाल</strong>, दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री <strong data-start="376" data-end="393">मनीष सिसोदिया</strong> और अन्य आरोपियों के बरी किए जाने को <strong data-start="430" data-end="457">सत्य और लोकतंत्र की जीत</strong> बताया। उन्होंने कहा कि अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि आरोप निराधार और बेबुनियाद थे, और राजनीतिक दबाव के बावजूद न्यायपालिका ने निष्पक्षता के साथ फैसला सुनाया।</p>
<p data-start="615" data-end="923">मंत्री भगत ने कहा कि अदालत ने पूरी जांच के बाद यह साबित कर दिया कि आरोपों के कोई ठोस प्रमाण नहीं थे। यह निर्णय दर्शाता है कि न्यायपालिका लोकतंत्र की आधारशिला है और सच्चाई के सामने झुकती नहीं। अदालत के इस फैसले ने आम जनता का भरोसा और मजबूत किया है और यह साबित किया कि अंततः सत्य और न्याय की ही विजय होती है।</p>
<p data-start="925" data-end="1329">श्री भगत ने कहा कि इस मामले के माध्यम से कुछ राजनीतिक दलों ने आम आदमी पार्टी और उसके नेताओं की छवि धूमिल करने के कई प्रयास किए। उन्होंने आरोप लगाया कि झूठे मामलों और केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का उद्देश्य केवल चुनावी लाभ हासिल करना और विपक्षी नेतृत्व को कमजोर करना था। लेकिन अदालत ने यह साबित कर दिया कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया और न्यायपालिका की शक्ति के सामने कोई भी राजनीतिक षड्यंत्र टिक नहीं सकता।</p>
<p data-start="1331" data-end="1749">मंत्री भगत ने अरविंद केजरीवाल को <strong data-start="1364" data-end="1394">प्रतिबद्ध और दूरदर्शी नेता</strong> बताया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक चुनौतियों और विरोध के बावजूद केजरीवाल हमेशा पारदर्शी शासन और जनकल्याण के लिए काम करते रहे। उनके नेतृत्व में दिल्ली और पंजाब में शिक्षा, स्वास्थ्य, मुफ्त बिजली और मोहल्ला क्लिनिक जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं का क्रियान्वयन हुआ। अदालत का यह फैसला केवल नेताओं के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश में लोकतंत्र और न्याय के लिए प्रेरणा है।</p>
<p data-start="1751" data-end="2071">श्री भगत ने कहा कि यह निर्णय यह संदेश देता है कि <strong data-start="1800" data-end="1839">सत्य और न्याय की विजय हमेशा होती है</strong>, और ईमानदार नेता जनता के विश्वास और सेवा के मार्ग पर हमेशा टिके रहते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस फैसले से न केवल आम आदमी पार्टी और उसके नेताओं की छवि मजबूत होगी, बल्कि पूरे देश में लोकतंत्र और न्याय की प्रतिष्ठा भी और बढ़ेगी।</p>]]></content:encoded>
					
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		<title>आबकारी नीति मामले में Arvind Kejriwal के बरी होने से ‘AAP’ को निशाना बनाने की साजिश बेनकाब: Bhagwant Singh Mann</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 28 Feb 2026 05:30:10 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p data-start="162" data-end="430">पंजाब के मुख्यमंत्री <strong data-start="204" data-end="222">भगवंत सिंह मान</strong> ने कहा कि आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया और अन्य नेताओं के खिलाफ आबकारी नीति मामले में अदालत द्वारा आरोपों को रद्द करना पार्टी की स्थिति पर दृढ़ मोहर है।</p>
<p data-start="432" data-end="828">मुख्यमंत्री ने वीडियो संदेश में कहा कि यह भारतीय राजनीति का ऐतिहासिक दिन है क्योंकि अदालत ने अरविंद केजरीवाल और 23 अन्य को बरी कर दिया, जिनके खिलाफ <strong data-start="580" data-end="590">सीबीआई</strong> ने गलत तरीके से केस दर्ज किया था। यह मामला केंद्र सरकार की आम आदमी पार्टी को रोकने की निराशाजनक कोशिश था। उन्होंने कहा कि अदालत के आदेश ने साबित किया कि अंधेरी रात चाहे कितनी भी लंबी क्यों न हो, अंततः सच्चाई और न्याय की ही जीत होती है।</p>


<hr data-start="830" data-end="833" />

<h3 data-start="835" data-end="869">न्याय और लोकतंत्र की जीत</h3>
<p data-start="871" data-end="1304">मुख्यमंत्री ने कहा कि अदालत का यह आदेश <strong data-start="910" data-end="920">सीबीआई</strong> और अन्य केंद्रीय एजेंसियों के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाता है, जो केंद्र में सत्ताधारी लोगों के दबाव में विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल की जा रही थीं। उन्होंने कहा कि केवल चुनाव जीतने के लिए आम आदमी पार्टी की पूरी नेतृत्व टीम को जेल में डाला गया। यह निर्णय साबित करता है कि अरविंद केजरीवाल और अन्य नेता ईमानदार हैं और केवल सत्य और जनता की सेवा के लिए राजनीति में हैं।</p>
<p data-start="1306" data-end="1568">पारंपरिक पार्टियों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस और भाजपा केवल सत्ता का रोटेशन खेलती रही और अपनी-अपनी बारी के अनुसार देश और जनता को लूटती रही। आम आदमी पार्टी ने देश की राजनीति में कदम रखते हुए भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ आवाज़ उठाई।</p>


<hr data-start="1570" data-end="1573" />

<h3 data-start="1575" data-end="1619">अरविंद केजरीवाल की अगुवाई में बदलाव</h3>
<p data-start="1621" data-end="1944">मुख्यमंत्री ने अरविंद केजरीवाल की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी मेहनत और लगन से दिल्ली की तस्वीर बदल गई। जब आप सरकार ने दिल्ली में सत्ता संभाली थी, सालाना बजट 30,000 करोड़ रुपए था, जो अब बढ़कर 66,000 करोड़ रुपए हो चुका है। जनता को मुफ्त बिजली, विश्वस्तरीय स्कूल, मोहल्ला क्लिनिक और अन्य सुविधाएं पूरी समझदारी से दी गई हैं।</p>
<p data-start="1946" data-end="2200">भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह फैसला केवल पार्टी की जीत नहीं, बल्कि न्याय और ईमानदार राजनीति की जीत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की प्रगति और लोकतंत्र की मजबूती के लिए हर नागरिक की आवाज़ को सुना जाना चाहिए, और यह निर्णय उस दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।</p>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p data-start="162" data-end="430">पंजाब के मुख्यमंत्री <strong data-start="204" data-end="222">भगवंत सिंह मान</strong> ने कहा कि आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया और अन्य नेताओं के खिलाफ आबकारी नीति मामले में अदालत द्वारा आरोपों को रद्द करना पार्टी की स्थिति पर दृढ़ मोहर है।</p>
<p data-start="432" data-end="828">मुख्यमंत्री ने वीडियो संदेश में कहा कि यह भारतीय राजनीति का ऐतिहासिक दिन है क्योंकि अदालत ने अरविंद केजरीवाल और 23 अन्य को बरी कर दिया, जिनके खिलाफ <strong data-start="580" data-end="590">सीबीआई</strong> ने गलत तरीके से केस दर्ज किया था। यह मामला केंद्र सरकार की आम आदमी पार्टी को रोकने की निराशाजनक कोशिश था। उन्होंने कहा कि अदालत के आदेश ने साबित किया कि अंधेरी रात चाहे कितनी भी लंबी क्यों न हो, अंततः सच्चाई और न्याय की ही जीत होती है।</p>


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<h3 data-start="835" data-end="869">न्याय और लोकतंत्र की जीत</h3>
<p data-start="871" data-end="1304">मुख्यमंत्री ने कहा कि अदालत का यह आदेश <strong data-start="910" data-end="920">सीबीआई</strong> और अन्य केंद्रीय एजेंसियों के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाता है, जो केंद्र में सत्ताधारी लोगों के दबाव में विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल की जा रही थीं। उन्होंने कहा कि केवल चुनाव जीतने के लिए आम आदमी पार्टी की पूरी नेतृत्व टीम को जेल में डाला गया। यह निर्णय साबित करता है कि अरविंद केजरीवाल और अन्य नेता ईमानदार हैं और केवल सत्य और जनता की सेवा के लिए राजनीति में हैं।</p>
<p data-start="1306" data-end="1568">पारंपरिक पार्टियों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस और भाजपा केवल सत्ता का रोटेशन खेलती रही और अपनी-अपनी बारी के अनुसार देश और जनता को लूटती रही। आम आदमी पार्टी ने देश की राजनीति में कदम रखते हुए भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ आवाज़ उठाई।</p>


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<h3 data-start="1575" data-end="1619">अरविंद केजरीवाल की अगुवाई में बदलाव</h3>
<p data-start="1621" data-end="1944">मुख्यमंत्री ने अरविंद केजरीवाल की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी मेहनत और लगन से दिल्ली की तस्वीर बदल गई। जब आप सरकार ने दिल्ली में सत्ता संभाली थी, सालाना बजट 30,000 करोड़ रुपए था, जो अब बढ़कर 66,000 करोड़ रुपए हो चुका है। जनता को मुफ्त बिजली, विश्वस्तरीय स्कूल, मोहल्ला क्लिनिक और अन्य सुविधाएं पूरी समझदारी से दी गई हैं।</p>
<p data-start="1946" data-end="2200">भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह फैसला केवल पार्टी की जीत नहीं, बल्कि न्याय और ईमानदार राजनीति की जीत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की प्रगति और लोकतंत्र की मजबूती के लिए हर नागरिक की आवाज़ को सुना जाना चाहिए, और यह निर्णय उस दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।</p>]]></content:encoded>
					
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		<title>क्या अब Pan-Tobacco बेचने वाले करेंगे देश की सुरक्षा? Malvinder Singh Kang का BJP पर तंज</title>
		<link>https://trendstopic.in/will-pan-tobacco-sellers-now-protect-the-nation-malvinder-singh-kangs-jibe-at-bjp/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Dec 2025 05:25:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
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					<description><![CDATA[आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और श्री आनंदपुर साहिब से सांसद <strong>मलविंदर सिंह कंग</strong> ने संसद में केंद्र की <strong>भाजपा सरकार</strong> पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने संसद में चर्चा के दौरान <strong>“</strong><strong>हेल्थ सिक्योरिटी और नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल 2025”</strong> पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार पान मसाला और तंबाकू जैसी हानिकारक चीजों को <strong>राष्ट्रीय सुरक्षा</strong> से जोड़कर एक मजाक कर रही है।

कंग ने तंज कसते हुए कहा, "अब तक हम सोचते थे कि देश की सुरक्षा हमारी बहादुर फौज करती है, लेकिन इस बिल के बाद पान और तंबाकू बेचने वाले कहेंगे कि हम ही देश की सुरक्षा कर रहे हैं।"
<h3>फौज के शौर्य का अपमान</h3>
सांसद कंग ने कहा कि यह बिल <strong>हास्यास्पद और विरोधाभासी</strong> है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा हमारी <strong>ग्रेट इंडियन आर्मी</strong> करती है, लेकिन सरकार इस बिल के ज़रिए यह संदेश दे रही है कि जो पान-मसाले पर टैक्स देता है, वह देश को सुरक्षित कर रहा है।

कंग ने कहा, "कल को पान की दुकान वाला कहेगा – मैं टैक्स दे रहा हूँ, इसलिए बॉर्डर सुरक्षित है। हेल्थ सुरक्षा अच्छे खेल, सही डाइट और हेल्दी लाइफस्टाइल से आती है, न कि तंबाकू से।" उन्होंने सिख धर्म का हवाला देते हुए कहा कि श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का घोड़ा भी तंबाकू के खेत के पास रुक गया था।
<h3>गुजरात और पंजाब के मुद्दे</h3>
कंग ने <strong>गुजरात के मुंद्रा पोर्ट</strong> और पंजाब के बॉर्डर पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुंद्रा पोर्ट से बड़ी मात्रा में नशे की खेप पकड़ी जाती है, लेकिन सरकार बड़े अपराधियों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही। पंजाब-बॉर्डर पर उन्होंने पूछा कि क्या इस सेस से इकट्ठा पैसा सीमा सुरक्षा में खर्च होगा।

कंग ने बिल के उस क्लॉज पर भी आपत्ति जताई जिसमें कहा गया है कि कीमतों पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। उनका कहना था कि क्या सरकार चाहती है कि लोग <strong>सस्ता नशा</strong> करें और पान मसाले का कारोबार बढ़े?
<h3>राज्यों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर</h3>
सांसद कंग ने यह भी कहा कि सरकार <strong>जीएसटी और अन्य माध्यमों से टैक्स का केंद्रीकरण</strong> कर रही है। उन्होंने मांग की कि इस सेस से इकट्ठा हुए पैसे में राज्यों का हिस्सा साफ-साफ बताया जाए।

कंग ने नसीहत दी कि अगर सरकार सच में <strong>हेल्थ और नेशनल सिक्योरिटी</strong> चाहती है तो उसे पान-मसाले और तंबाकू को बढ़ावा देने की बजाय <strong>स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर</strong>, <strong>सही खानपान</strong>, और <strong>स्वस्थ जीवनशैली</strong> पर ध्यान देना चाहिए।

मलविंदर सिंह कंग ने सरकार को चेतावनी दी कि यह बिल <strong>फौज की इज्जत और देश की सुरक्षा</strong> का मजाक है। उन्होंने कहा कि इस बिल पर <strong>पुनर्विचार</strong> करना जरूरी है और देश की सुरक्षा और स्वास्थ्य के असली उपायों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और श्री आनंदपुर साहिब से सांसद <strong>मलविंदर सिंह कंग</strong> ने संसद में केंद्र की <strong>भाजपा सरकार</strong> पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने संसद में चर्चा के दौरान <strong>“</strong><strong>हेल्थ सिक्योरिटी और नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल 2025”</strong> पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार पान मसाला और तंबाकू जैसी हानिकारक चीजों को <strong>राष्ट्रीय सुरक्षा</strong> से जोड़कर एक मजाक कर रही है।

कंग ने तंज कसते हुए कहा, "अब तक हम सोचते थे कि देश की सुरक्षा हमारी बहादुर फौज करती है, लेकिन इस बिल के बाद पान और तंबाकू बेचने वाले कहेंगे कि हम ही देश की सुरक्षा कर रहे हैं।"
<h3>फौज के शौर्य का अपमान</h3>
सांसद कंग ने कहा कि यह बिल <strong>हास्यास्पद और विरोधाभासी</strong> है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा हमारी <strong>ग्रेट इंडियन आर्मी</strong> करती है, लेकिन सरकार इस बिल के ज़रिए यह संदेश दे रही है कि जो पान-मसाले पर टैक्स देता है, वह देश को सुरक्षित कर रहा है।

कंग ने कहा, "कल को पान की दुकान वाला कहेगा – मैं टैक्स दे रहा हूँ, इसलिए बॉर्डर सुरक्षित है। हेल्थ सुरक्षा अच्छे खेल, सही डाइट और हेल्दी लाइफस्टाइल से आती है, न कि तंबाकू से।" उन्होंने सिख धर्म का हवाला देते हुए कहा कि श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का घोड़ा भी तंबाकू के खेत के पास रुक गया था।
<h3>गुजरात और पंजाब के मुद्दे</h3>
कंग ने <strong>गुजरात के मुंद्रा पोर्ट</strong> और पंजाब के बॉर्डर पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुंद्रा पोर्ट से बड़ी मात्रा में नशे की खेप पकड़ी जाती है, लेकिन सरकार बड़े अपराधियों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही। पंजाब-बॉर्डर पर उन्होंने पूछा कि क्या इस सेस से इकट्ठा पैसा सीमा सुरक्षा में खर्च होगा।

कंग ने बिल के उस क्लॉज पर भी आपत्ति जताई जिसमें कहा गया है कि कीमतों पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। उनका कहना था कि क्या सरकार चाहती है कि लोग <strong>सस्ता नशा</strong> करें और पान मसाले का कारोबार बढ़े?
<h3>राज्यों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर</h3>
सांसद कंग ने यह भी कहा कि सरकार <strong>जीएसटी और अन्य माध्यमों से टैक्स का केंद्रीकरण</strong> कर रही है। उन्होंने मांग की कि इस सेस से इकट्ठा हुए पैसे में राज्यों का हिस्सा साफ-साफ बताया जाए।

कंग ने नसीहत दी कि अगर सरकार सच में <strong>हेल्थ और नेशनल सिक्योरिटी</strong> चाहती है तो उसे पान-मसाले और तंबाकू को बढ़ावा देने की बजाय <strong>स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर</strong>, <strong>सही खानपान</strong>, और <strong>स्वस्थ जीवनशैली</strong> पर ध्यान देना चाहिए।

मलविंदर सिंह कंग ने सरकार को चेतावनी दी कि यह बिल <strong>फौज की इज्जत और देश की सुरक्षा</strong> का मजाक है। उन्होंने कहा कि इस बिल पर <strong>पुनर्विचार</strong> करना जरूरी है और देश की सुरक्षा और स्वास्थ्य के असली उपायों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।]]></content:encoded>
					
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		<item>
		<title>Malwinder Singh Kang ने Lok Sabha में उठाया Punjab की Floods और Crop Damage का मुद्दा, मांगा ₹50,000 Crore का Special Package</title>
		<link>https://trendstopic.in/malwinder-singh-kang-raises-issue-of-floods-and-crop-damage-in-punjab-in-lok-sabha-demands-%e2%82%b950000-crore-special-package/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 04 Dec 2025 05:03:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चंडीगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[AAP]]></category>
		<category><![CDATA[CropDamage]]></category>
		<category><![CDATA[DisasterRelief]]></category>
		<category><![CDATA[FarmersSupport]]></category>
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		<category><![CDATA[IndianPolitics]]></category>
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		<category><![CDATA[SupportFarmers]]></category>
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					<description><![CDATA[आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद <strong>मलविंदर सिंह कंग</strong> ने लोकसभा में पंजाब में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ के कारण हुए नुकसान का गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार से तुरंत <strong>₹50,000 </strong><strong>करोड़ का विशेष राहत पैकेज</strong> जारी करने की मांग की।

सांसद कंग ने कहा कि पंजाब के <strong>छह जिलों के लगभग </strong><strong>2500 </strong><strong>गाँव पूरी तरह तबाह</strong> हो गए हैं और लगभग <strong>5 </strong><strong>लाख एकड़ की फसल बर्बाद</strong> हो गई है। यह फसल पूरी तरह तैयार थी लेकिन बाढ़ में नष्ट हो गई। सबसे ज्यादा नुकसान <strong>सीमावर्ती जिलों</strong> में हुआ, जो देश की सुरक्षा में हमेशा आगे रहते हैं।

मलविंदर सिंह कंग ने आरोप लगाया कि <strong>प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्री बाढ़ के बाद पंजाब आए</strong>, लेकिन दो महीने बीत जाने के बावजूद बाढ़ पीड़ितों को <strong>केंद्र से कोई आर्थिक मदद नहीं मिली।</strong> उन्होंने कहा कि बिहार जैसे राज्यों में चुनाव के समय करोड़ों-खरबों के पैकेज दिए जाते हैं, लेकिन पंजाब को मुश्किल समय में छोड़ देना <strong>भेदभाव और अनदेखी</strong> है।

सांसद कंग ने यह भी कहा कि पंजाब ने हमेशा देश की आजादी और अन्न भंडार में बड़ा योगदान दिया है। फिर भी, जब बाढ़ जैसी आपदा आई, तो केंद्र और पड़ोसी राज्यों की सरकारों ने पंजाब की मदद नहीं की।

<strong>मलविंदर सिंह कंग की मांग:</strong>
<ul>
 	<li>बाढ़ प्रभावितों के लिए तुरंत ₹50,000 करोड़ का <strong>विशेष राहत पैकेज</strong> जारी किया जाए।</li>
 	<li>यह पैकेज <strong>घरों</strong><strong>, </strong><strong>अस्पतालों</strong><strong>, </strong><strong>सड़कों और फसलों की मरम्मत</strong> के साथ-साथ लोगों को फिर से अपने पैरों पर खड़ा करने में मदद करेगा।</li>
 	<li>बाढ़ पीड़ित परिवारों और बच्चों के <strong>भविष्य को सुरक्षित</strong> बनाने के लिए फंड का उपयोग होना चाहिए।</li>
</ul>
सांसद कंग ने कहा कि यह पैकेज पंजाब और सीमावर्ती क्षेत्रों के उन लोगों के लिए बहुत जरूरी है, जिन्होंने देश की सेवा और सुरक्षा में हमेशा योगदान दिया है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद <strong>मलविंदर सिंह कंग</strong> ने लोकसभा में पंजाब में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ के कारण हुए नुकसान का गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार से तुरंत <strong>₹50,000 </strong><strong>करोड़ का विशेष राहत पैकेज</strong> जारी करने की मांग की।

सांसद कंग ने कहा कि पंजाब के <strong>छह जिलों के लगभग </strong><strong>2500 </strong><strong>गाँव पूरी तरह तबाह</strong> हो गए हैं और लगभग <strong>5 </strong><strong>लाख एकड़ की फसल बर्बाद</strong> हो गई है। यह फसल पूरी तरह तैयार थी लेकिन बाढ़ में नष्ट हो गई। सबसे ज्यादा नुकसान <strong>सीमावर्ती जिलों</strong> में हुआ, जो देश की सुरक्षा में हमेशा आगे रहते हैं।

मलविंदर सिंह कंग ने आरोप लगाया कि <strong>प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्री बाढ़ के बाद पंजाब आए</strong>, लेकिन दो महीने बीत जाने के बावजूद बाढ़ पीड़ितों को <strong>केंद्र से कोई आर्थिक मदद नहीं मिली।</strong> उन्होंने कहा कि बिहार जैसे राज्यों में चुनाव के समय करोड़ों-खरबों के पैकेज दिए जाते हैं, लेकिन पंजाब को मुश्किल समय में छोड़ देना <strong>भेदभाव और अनदेखी</strong> है।

सांसद कंग ने यह भी कहा कि पंजाब ने हमेशा देश की आजादी और अन्न भंडार में बड़ा योगदान दिया है। फिर भी, जब बाढ़ जैसी आपदा आई, तो केंद्र और पड़ोसी राज्यों की सरकारों ने पंजाब की मदद नहीं की।

<strong>मलविंदर सिंह कंग की मांग:</strong>
<ul>
 	<li>बाढ़ प्रभावितों के लिए तुरंत ₹50,000 करोड़ का <strong>विशेष राहत पैकेज</strong> जारी किया जाए।</li>
 	<li>यह पैकेज <strong>घरों</strong><strong>, </strong><strong>अस्पतालों</strong><strong>, </strong><strong>सड़कों और फसलों की मरम्मत</strong> के साथ-साथ लोगों को फिर से अपने पैरों पर खड़ा करने में मदद करेगा।</li>
 	<li>बाढ़ पीड़ित परिवारों और बच्चों के <strong>भविष्य को सुरक्षित</strong> बनाने के लिए फंड का उपयोग होना चाहिए।</li>
</ul>
सांसद कंग ने कहा कि यह पैकेज पंजाब और सीमावर्ती क्षेत्रों के उन लोगों के लिए बहुत जरूरी है, जिन्होंने देश की सेवा और सुरक्षा में हमेशा योगदान दिया है।]]></content:encoded>
					
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		<item>
		<title>Bihar Election के दिलचस्प आंकड़े &#8211; Yogi Bihar में भी Akhilesh पर भारी पड़े: 31 Seats में से 27 जीती</title>
		<link>https://trendstopic.in/interesting-numbers-from-the-bihar-election-yogi-outshines-akhilesh-wins-27-out-of-31-seats/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 15 Nov 2025 07:32:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[AkhileshYadav]]></category>
		<category><![CDATA[BiharElection]]></category>
		<category><![CDATA[BiharResults]]></category>
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		<category><![CDATA[Election2025]]></category>
		<category><![CDATA[ElectionAnalysis]]></category>
		<category><![CDATA[IndianPolitics]]></category>
		<category><![CDATA[PoliticalNews]]></category>
		<category><![CDATA[UPLeaders]]></category>
		<category><![CDATA[YogiAdityanath]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://trendstopic.in/?p=26731</guid>

					<description><![CDATA[बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे साफ हो चुके हैं और इस बार तस्वीर बिल्कुल अलग दिखी। खास बात यह रही कि बिहार के चुनावी मैदान में उत्तर प्रदेश के बड़े नेताओं की एंट्री भी हुई और उनके प्रदर्शन ने काफी चर्चा बटोरी। आइए जानते हैं, किस नेता का कितना असर दिखा और किसकी स्ट्रैटेजी फेल रही।

<strong>योगी आदित्यनाथ का दबदबा </strong><strong>– 31 </strong><strong>में से </strong><strong>27 </strong><strong>सीटें जीतीं</strong>

बिहार चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रही। उन्होंने कुल <strong>31 </strong><strong>सीटों पर रैलियां और सभाएं</strong> कीं।

इनमें से <strong>27 </strong><strong>सीटों पर एनडीए जीत</strong> हासिल करने में सफल रहा।
इस तरह योगी का <strong>Strike Rate 87% </strong><strong>से ज्यादा</strong> रहा, जो बेहद शानदार माना जा रहा है।

योगी की सभाओं में बड़ी भीड़ देखने को मिली। उन्होंने एनडीए के लिए आक्रामक तरीके से प्रचार किया और विपक्ष पर सीधा हमला बोला।

<strong>अखिलेश यादव की मेहनत बेअसर </strong><strong>– 22 </strong><strong>में से सिर्फ </strong><strong>2 </strong><strong>सीटें जीतीं</strong>

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव बिना चुनाव लड़े बिहार पहुंचे थे। उन्होंने <strong>22 </strong><strong>सीटों पर</strong> महागठबंधन के लिए प्रचार किया।
लेकिन नतीजे निराश करने वाले रहे—
इन 22 में से <strong>सिर्फ 2 </strong><strong>सीटों</strong> पर ही महागठबंधन जीत सका।

इस तरह उनका <strong>Strike Rate </strong><strong>सिर्फ 9%</strong> रहा, जो काफी कमजोर माना जा रहा है।

खास बात यह कि जहाँ उन्होंने भोजपुरी एक्टर <strong>खेसारी लाल यादव</strong> के लिए प्रचार किया, वहाँ भी खेसारी चुनाव हार गए।
हाँ, सीवान के बाहुबली शहाबुद्दीन के बेटे <strong>ओसामा</strong> की रघुनाथपुर सीट पर उन्हें सफलता मिली।

<strong>मायावती की एक ही रैली</strong><strong>, </strong><strong>लेकिन स्ट्राइक रेट अखिलेश से बेहतर</strong>

बीएसपी प्रमुख मायावती बिहार में सिर्फ <strong>एक दिन</strong> गई थीं और उन्होंने <strong>5 </strong><strong>सीटों</strong> पर एक साथ प्रचार किया।
इन पाँच में से <strong>रामगढ़ सीट</strong> बीएसपी के खाते में गई।

मायावती का <strong>Strike Rate 20%</strong> रहा, जो अखिलेश यादव से ज्यादा है।

बीएसपी ने पूरे बिहार में <strong>243 </strong><strong>सीटों</strong> पर उम्मीदवार उतारे थे और उन्हें 1.52% वोट मिले।

<strong>तीन सीटें जहाँ योगी और अखिलेश दोनों ने रैली की</strong>

बिहार में तीन सीटें ऐसी थीं जहाँ दोनों नेताओं का सीधा मुकाबला दिखा—
<ol>
 	<li>रघुनाथपुर (सीवान) – जीती <strong>राजद</strong></li>
 	<li>बिस्फी (मधुबनी) – जीती <strong>राजद</strong></li>
 	<li>मोतिहारी – जीती <strong>भाजपा</strong></li>
</ol>
इन तीन में से <strong>दो सीटों पर अखिलेश भारी</strong>, जबकि एक पर योगी आगे रहे।

<strong>योगी का </strong><strong>“</strong><strong>तीन बंदर</strong><strong>” </strong><strong>वाला बयान रहा हाइलाइट</strong>

चुनाव प्रचार में सबसे ज्यादा चर्चा योगी आदित्यनाथ के बयान की रही।
उन्होंने बिना नाम लिए राहुल गांधी, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव को
<strong>“</strong><strong>पप्पू, </strong><strong>टप्पू और अप्पू – </strong><strong>तीन बंदर”</strong> कहा।

यह बयान पूरे बिहार चुनाव में बड़ा मुद्दा बन गया।
कांग्रेस और सपा ने इसे <strong>भगवान हनुमान जी का अपमान</strong> बताया और लगातार इस पर प्रतिक्रिया देती रहीं।
वहीं अखिलेश यादव ने भी इस पर पलटवार करते हुए भाजपा पर कई तंज कसे।

इस विवाद का असर ये हुआ कि महागठबंधन अपने असली मुद्दों—
<strong>रोजगार, </strong><strong>योजनाएं, </strong><strong>नीतीश सरकार की नाकामियां</strong>
—इन सब पर फोकस हटाकर <strong>बंदर विवाद</strong> में उलझ गया।

मीडिया हेडलाइंस भी इसी मुद्दे पर घूमती रहीं।
इस तरह योगी का बयान चुनाव की दिशा बदलने में कामयाब रहा।

<strong>अन्य यूपी दल </strong><strong>– </strong><strong>सभी की जमानत जब्त</strong>

बिहार के चुनावी मैदान में यूपी के तीन अन्य दल भी उतरे थे—
<h3><strong>1. </strong><strong>चंद्रशेखर आज़ाद की </strong><strong>ASP</strong></h3>
<ul>
 	<li>25 सीटों पर लड़े</li>
 	<li><strong>एक भी सीट नहीं जीती</strong></li>
 	<li>सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त</li>
</ul>
<h3><strong>2. </strong><strong>स्वामी प्रसाद मौर्य की पार्टी</strong></h3>
<ul>
 	<li>4 सीटों पर चुनाव</li>
 	<li>खुद प्रचार भी नहीं किया</li>
 	<li><strong>जमानत जब्त</strong></li>
</ul>
<h3><strong>3. </strong><strong>ओमप्रकाश राजभर की सुभासपा</strong></h3>
<ul>
 	<li>एनडीए से अलग होकर <strong>64 </strong><strong>सीटों</strong> पर लड़ा</li>
 	<li>सभी उम्मीदवार <strong>हार गए</strong></li>
 	<li>किसी की जमानत नहीं बची</li>
</ul>
<strong>अब नजर यूपी </strong><strong>2027 </strong><strong>चुनाव पर</strong>

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि योगी आदित्यनाथ ने इस चुनाव में जिस तरह नैरेटिव सेट किया,
उसी तरह की रणनीति वे <strong>2027 </strong><strong>यूपी विधानसभा चुनाव</strong> में भी अपना सकते हैं।

सपा–कांग्रेस गठबंधन और एम–वाई (Muslim–Yadav) समीकरण को देखते हुए भाजपा पहले से ही नई स्ट्रैटेजी प्लान कर रही है।
बिहार मॉडल यूपी में भी दोहराया जा सकता है।

<strong>निष्कर्ष</strong>
<ul>
 	<li>बिहार चुनाव में <strong>योगी आदित्यनाथ का प्रदर्शन सबसे दमदार</strong> रहा।</li>
 	<li>अखिलेश यादव का प्रचार असरदार नहीं रहा।</li>
 	<li>मायावती ने सीमित प्रचार के बावजूद बेहतर स्ट्राइक रेट हासिल किया।</li>
 	<li>छोटे दल (ASP, सुभासपा, मौर्य की पार्टी) बिल्कुल असफल रहे।</li>
</ul>
बिहार के नतीजों से साफ है कि यूपी के नेताओं में सबसे ज्यादा पकड़ और प्रभाव <strong>योगी आदित्यनाथ</strong> का दिखा।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे साफ हो चुके हैं और इस बार तस्वीर बिल्कुल अलग दिखी। खास बात यह रही कि बिहार के चुनावी मैदान में उत्तर प्रदेश के बड़े नेताओं की एंट्री भी हुई और उनके प्रदर्शन ने काफी चर्चा बटोरी। आइए जानते हैं, किस नेता का कितना असर दिखा और किसकी स्ट्रैटेजी फेल रही।

<strong>योगी आदित्यनाथ का दबदबा </strong><strong>– 31 </strong><strong>में से </strong><strong>27 </strong><strong>सीटें जीतीं</strong>

बिहार चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रही। उन्होंने कुल <strong>31 </strong><strong>सीटों पर रैलियां और सभाएं</strong> कीं।

इनमें से <strong>27 </strong><strong>सीटों पर एनडीए जीत</strong> हासिल करने में सफल रहा।
इस तरह योगी का <strong>Strike Rate 87% </strong><strong>से ज्यादा</strong> रहा, जो बेहद शानदार माना जा रहा है।

योगी की सभाओं में बड़ी भीड़ देखने को मिली। उन्होंने एनडीए के लिए आक्रामक तरीके से प्रचार किया और विपक्ष पर सीधा हमला बोला।

<strong>अखिलेश यादव की मेहनत बेअसर </strong><strong>– 22 </strong><strong>में से सिर्फ </strong><strong>2 </strong><strong>सीटें जीतीं</strong>

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव बिना चुनाव लड़े बिहार पहुंचे थे। उन्होंने <strong>22 </strong><strong>सीटों पर</strong> महागठबंधन के लिए प्रचार किया।
लेकिन नतीजे निराश करने वाले रहे—
इन 22 में से <strong>सिर्फ 2 </strong><strong>सीटों</strong> पर ही महागठबंधन जीत सका।

इस तरह उनका <strong>Strike Rate </strong><strong>सिर्फ 9%</strong> रहा, जो काफी कमजोर माना जा रहा है।

खास बात यह कि जहाँ उन्होंने भोजपुरी एक्टर <strong>खेसारी लाल यादव</strong> के लिए प्रचार किया, वहाँ भी खेसारी चुनाव हार गए।
हाँ, सीवान के बाहुबली शहाबुद्दीन के बेटे <strong>ओसामा</strong> की रघुनाथपुर सीट पर उन्हें सफलता मिली।

<strong>मायावती की एक ही रैली</strong><strong>, </strong><strong>लेकिन स्ट्राइक रेट अखिलेश से बेहतर</strong>

बीएसपी प्रमुख मायावती बिहार में सिर्फ <strong>एक दिन</strong> गई थीं और उन्होंने <strong>5 </strong><strong>सीटों</strong> पर एक साथ प्रचार किया।
इन पाँच में से <strong>रामगढ़ सीट</strong> बीएसपी के खाते में गई।

मायावती का <strong>Strike Rate 20%</strong> रहा, जो अखिलेश यादव से ज्यादा है।

बीएसपी ने पूरे बिहार में <strong>243 </strong><strong>सीटों</strong> पर उम्मीदवार उतारे थे और उन्हें 1.52% वोट मिले।

<strong>तीन सीटें जहाँ योगी और अखिलेश दोनों ने रैली की</strong>

बिहार में तीन सीटें ऐसी थीं जहाँ दोनों नेताओं का सीधा मुकाबला दिखा—
<ol>
 	<li>रघुनाथपुर (सीवान) – जीती <strong>राजद</strong></li>
 	<li>बिस्फी (मधुबनी) – जीती <strong>राजद</strong></li>
 	<li>मोतिहारी – जीती <strong>भाजपा</strong></li>
</ol>
इन तीन में से <strong>दो सीटों पर अखिलेश भारी</strong>, जबकि एक पर योगी आगे रहे।

<strong>योगी का </strong><strong>“</strong><strong>तीन बंदर</strong><strong>” </strong><strong>वाला बयान रहा हाइलाइट</strong>

चुनाव प्रचार में सबसे ज्यादा चर्चा योगी आदित्यनाथ के बयान की रही।
उन्होंने बिना नाम लिए राहुल गांधी, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव को
<strong>“</strong><strong>पप्पू, </strong><strong>टप्पू और अप्पू – </strong><strong>तीन बंदर”</strong> कहा।

यह बयान पूरे बिहार चुनाव में बड़ा मुद्दा बन गया।
कांग्रेस और सपा ने इसे <strong>भगवान हनुमान जी का अपमान</strong> बताया और लगातार इस पर प्रतिक्रिया देती रहीं।
वहीं अखिलेश यादव ने भी इस पर पलटवार करते हुए भाजपा पर कई तंज कसे।

इस विवाद का असर ये हुआ कि महागठबंधन अपने असली मुद्दों—
<strong>रोजगार, </strong><strong>योजनाएं, </strong><strong>नीतीश सरकार की नाकामियां</strong>
—इन सब पर फोकस हटाकर <strong>बंदर विवाद</strong> में उलझ गया।

मीडिया हेडलाइंस भी इसी मुद्दे पर घूमती रहीं।
इस तरह योगी का बयान चुनाव की दिशा बदलने में कामयाब रहा।

<strong>अन्य यूपी दल </strong><strong>– </strong><strong>सभी की जमानत जब्त</strong>

बिहार के चुनावी मैदान में यूपी के तीन अन्य दल भी उतरे थे—
<h3><strong>1. </strong><strong>चंद्रशेखर आज़ाद की </strong><strong>ASP</strong></h3>
<ul>
 	<li>25 सीटों पर लड़े</li>
 	<li><strong>एक भी सीट नहीं जीती</strong></li>
 	<li>सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त</li>
</ul>
<h3><strong>2. </strong><strong>स्वामी प्रसाद मौर्य की पार्टी</strong></h3>
<ul>
 	<li>4 सीटों पर चुनाव</li>
 	<li>खुद प्रचार भी नहीं किया</li>
 	<li><strong>जमानत जब्त</strong></li>
</ul>
<h3><strong>3. </strong><strong>ओमप्रकाश राजभर की सुभासपा</strong></h3>
<ul>
 	<li>एनडीए से अलग होकर <strong>64 </strong><strong>सीटों</strong> पर लड़ा</li>
 	<li>सभी उम्मीदवार <strong>हार गए</strong></li>
 	<li>किसी की जमानत नहीं बची</li>
</ul>
<strong>अब नजर यूपी </strong><strong>2027 </strong><strong>चुनाव पर</strong>

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि योगी आदित्यनाथ ने इस चुनाव में जिस तरह नैरेटिव सेट किया,
उसी तरह की रणनीति वे <strong>2027 </strong><strong>यूपी विधानसभा चुनाव</strong> में भी अपना सकते हैं।

सपा–कांग्रेस गठबंधन और एम–वाई (Muslim–Yadav) समीकरण को देखते हुए भाजपा पहले से ही नई स्ट्रैटेजी प्लान कर रही है।
बिहार मॉडल यूपी में भी दोहराया जा सकता है।

<strong>निष्कर्ष</strong>
<ul>
 	<li>बिहार चुनाव में <strong>योगी आदित्यनाथ का प्रदर्शन सबसे दमदार</strong> रहा।</li>
 	<li>अखिलेश यादव का प्रचार असरदार नहीं रहा।</li>
 	<li>मायावती ने सीमित प्रचार के बावजूद बेहतर स्ट्राइक रेट हासिल किया।</li>
 	<li>छोटे दल (ASP, सुभासपा, मौर्य की पार्टी) बिल्कुल असफल रहे।</li>
</ul>
बिहार के नतीजों से साफ है कि यूपी के नेताओं में सबसे ज्यादा पकड़ और प्रभाव <strong>योगी आदित्यनाथ</strong> का दिखा।]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>अभिनेत्री Kangana Ranaut पर sedition case होगा या नहीं&#8230;फैसला आज — “किसान आंदोलन में… bill वापसी न होती तो planning लंबी थी”</title>
		<link>https://trendstopic.in/will-actress-kangana-ranaut-face-a-sedition-case-or-not-decision-today-in-the-farmers-protest-if-the-bill-had-not-been-withdrawn-the-planning-was-long/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 12 Nov 2025 06:46:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[News]]></category>
		<category><![CDATA[AgraCourt]]></category>
		<category><![CDATA[BreakingNews]]></category>
		<category><![CDATA[CourtDecision]]></category>
		<category><![CDATA[FarmersMovement]]></category>
		<category><![CDATA[FarmersProtest]]></category>
		<category><![CDATA[IndianPolitics]]></category>
		<category><![CDATA[KanganaControversy]]></category>
		<category><![CDATA[KanganaRanaut]]></category>
		<category><![CDATA[KanganaVerdict]]></category>
		<category><![CDATA[SeditionCase]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://trendstopic.in/?p=26665</guid>

					<description><![CDATA[<strong> </strong><strong>क्या है मामला</strong><strong>:</strong>

‘मंडी’ (हिमाचल प्रदेश) से सांसद और फिल्म-अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ आगरा में एक वाद (lawsuit) दायर किया गया है जिसमें उन पर किसानों और देश की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का आरोप है।

वाद में दावा किया गया है कि कंगना ने 26 अगस्त 2024 के एक इंटरव्यू में यह कहा था कि “किसान आंदोलन के दौरान रेप-मर्डर हुए थे, अगर बिल वापसी न होती तो प्लानिंग लंबी थी” — जिससे किसानों की भावनाएँ आहत हुईं। और इस बयान को किसानों के अपमान और “राष्ट्रद्रोह” के रूप में देखा गया।

<strong>वाद कब और कैसे दायर हुआ</strong>
<ul>
 	<li>11 सितंबर 2024 को एडवोकेट रमाशंकर शर्मा ने आगरा की स्पेशल MP-MLA कोर्ट में यह वाद दायर किया था।</li>
 	<li>वादी का कहना है कि कंगना ने किसानों को “हत्यारा, बलात्कार करने वाला, उग्रवादी” जैसे शब्दों से जोड़ा है।</li>
 	<li>साथ ही यह भी आरोप है कि उन्होंने देश के राष्ट्रपिता जैसे महत्‍मा गांधी के अहिंसात्मक सिद्धांत का मज़ाक उड़ाया था।</li>
</ul>
<strong>अदालत में क्या हुआ</strong>
<ul>
 	<li>मामले की सुनवाई में दोनों पक्षों ने दलीलें रखीं।</li>
 	<li>अदालत ने पुलिस से रिपोर्ट माँगी थी (थाना न्यू आगरा) लेकिन विपक्षी पक्ष से वह रिपोर्ट नहीं पड़ी थी, इसलिए अदालत ने निर्णय सुरक्षित रखा।</li>
 	<li>सुनवाई के बाद कोर्ट ने <strong>12 </strong><strong>नवंबर </strong><strong>2025</strong> को फैसला सुनाने का दिन तय किया है।</li>
 	<li>इस दौरान कंगना अभी तक कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं हुईं हैं, उन्हें कई समन जारी हो चुके हैं।</li>
</ul>
<strong>क्यों यह मामला विवादित है</strong>
<ul>
 	<li>इस तरह के बयानों से किसानों की भावनाएँ जुड़ी होती हैं — कृषि-समाज, धरना-प्रदर्शन, आंदोलन जैसी स्थितियों में जुड़े लोग इसे बड़ी संवेदनशील विषय मानते हैं।</li>
 	<li>“राष्ट्रद्रोह” का आरोप इसलिए लगाया गया क्योंकि आरोप-वाद में यह दावा है कि उन्होंने देश, किसानों और राष्ट्रपिता-सैनिकों की गरिमा को ठेस पहुँचाई।</li>
 	<li>नोट: अभी तक फैसला नहीं आया है, इसलिए आरोप सिर्फ वादी की ओर से हैं — अदालत ने इसे सही ठहराया या खारिज किया यह <strong>आज के फैसले</strong> के बाद ही स्पष्ट होगा।</li>
</ul>
<strong>भविष्य में क्या हो सकता है</strong>
<ul>
 	<li>अगर अदालत ने वादी की बात सही पाई, तो कंगना के खिलाफ राष्ट्रद्रोह या अपमानजनक टिप्पणी का मुकदमा आगे चल सकता है।</li>
 	<li>दूसरी ओर, अगर अदालत ने पाया कि बयानों में “राष्ट्रद्रोह” का घटक नहीं है या पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं — तो मामला खारिज हो सकता है।</li>
 	<li>सभी पक्षों के लिए यह पढ़ने-समझने का मौका है कि आंदोलन-प्रदर्शन, अभिव्यक्ति-स्वतंत्रता (freedom of speech) और व्यक्ति-समूह-भावनाएँ (collective sentiments) कैसे संतुलित रहनी चाहिए।</li>
</ul>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<strong> </strong><strong>क्या है मामला</strong><strong>:</strong>

‘मंडी’ (हिमाचल प्रदेश) से सांसद और फिल्म-अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ आगरा में एक वाद (lawsuit) दायर किया गया है जिसमें उन पर किसानों और देश की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का आरोप है।

वाद में दावा किया गया है कि कंगना ने 26 अगस्त 2024 के एक इंटरव्यू में यह कहा था कि “किसान आंदोलन के दौरान रेप-मर्डर हुए थे, अगर बिल वापसी न होती तो प्लानिंग लंबी थी” — जिससे किसानों की भावनाएँ आहत हुईं। और इस बयान को किसानों के अपमान और “राष्ट्रद्रोह” के रूप में देखा गया।

<strong>वाद कब और कैसे दायर हुआ</strong>
<ul>
 	<li>11 सितंबर 2024 को एडवोकेट रमाशंकर शर्मा ने आगरा की स्पेशल MP-MLA कोर्ट में यह वाद दायर किया था।</li>
 	<li>वादी का कहना है कि कंगना ने किसानों को “हत्यारा, बलात्कार करने वाला, उग्रवादी” जैसे शब्दों से जोड़ा है।</li>
 	<li>साथ ही यह भी आरोप है कि उन्होंने देश के राष्ट्रपिता जैसे महत्‍मा गांधी के अहिंसात्मक सिद्धांत का मज़ाक उड़ाया था।</li>
</ul>
<strong>अदालत में क्या हुआ</strong>
<ul>
 	<li>मामले की सुनवाई में दोनों पक्षों ने दलीलें रखीं।</li>
 	<li>अदालत ने पुलिस से रिपोर्ट माँगी थी (थाना न्यू आगरा) लेकिन विपक्षी पक्ष से वह रिपोर्ट नहीं पड़ी थी, इसलिए अदालत ने निर्णय सुरक्षित रखा।</li>
 	<li>सुनवाई के बाद कोर्ट ने <strong>12 </strong><strong>नवंबर </strong><strong>2025</strong> को फैसला सुनाने का दिन तय किया है।</li>
 	<li>इस दौरान कंगना अभी तक कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं हुईं हैं, उन्हें कई समन जारी हो चुके हैं।</li>
</ul>
<strong>क्यों यह मामला विवादित है</strong>
<ul>
 	<li>इस तरह के बयानों से किसानों की भावनाएँ जुड़ी होती हैं — कृषि-समाज, धरना-प्रदर्शन, आंदोलन जैसी स्थितियों में जुड़े लोग इसे बड़ी संवेदनशील विषय मानते हैं।</li>
 	<li>“राष्ट्रद्रोह” का आरोप इसलिए लगाया गया क्योंकि आरोप-वाद में यह दावा है कि उन्होंने देश, किसानों और राष्ट्रपिता-सैनिकों की गरिमा को ठेस पहुँचाई।</li>
 	<li>नोट: अभी तक फैसला नहीं आया है, इसलिए आरोप सिर्फ वादी की ओर से हैं — अदालत ने इसे सही ठहराया या खारिज किया यह <strong>आज के फैसले</strong> के बाद ही स्पष्ट होगा।</li>
</ul>
<strong>भविष्य में क्या हो सकता है</strong>
<ul>
 	<li>अगर अदालत ने वादी की बात सही पाई, तो कंगना के खिलाफ राष्ट्रद्रोह या अपमानजनक टिप्पणी का मुकदमा आगे चल सकता है।</li>
 	<li>दूसरी ओर, अगर अदालत ने पाया कि बयानों में “राष्ट्रद्रोह” का घटक नहीं है या पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं — तो मामला खारिज हो सकता है।</li>
 	<li>सभी पक्षों के लिए यह पढ़ने-समझने का मौका है कि आंदोलन-प्रदर्शन, अभिव्यक्ति-स्वतंत्रता (freedom of speech) और व्यक्ति-समूह-भावनाएँ (collective sentiments) कैसे संतुलित रहनी चाहिए।</li>
</ul>]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>Dr. Gurpreet Kaur और माता जी ने किया Harmeet Sandhu के लिए जोरदार चुनाव प्रचार, कई परिवारों ने AAP जॉइन किया</title>
		<link>https://trendstopic.in/dr-gurpreet-kaur-and-her-mother-gave-strong-election-support-to-harmeet-sandhu-several-families-joined-aap/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 09 Nov 2025 12:03:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[AAP]]></category>
		<category><![CDATA[AAPTarnTaran]]></category>
		<category><![CDATA[CommunitySupport]]></category>
		<category><![CDATA[DrGurpreetKaur]]></category>
		<category><![CDATA[Election2025]]></category>
		<category><![CDATA[ElectionCampaign]]></category>
		<category><![CDATA[HarmeetSandhu]]></category>
		<category><![CDATA[IndianPolitics]]></category>
		<category><![CDATA[LocalNews]]></category>
		<category><![CDATA[PoliticalSupport]]></category>
		<category><![CDATA[PunjabPolitics]]></category>
		<category><![CDATA[TarnTaranByElection]]></category>
		<category><![CDATA[VoteForDevelopment]]></category>
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					<description><![CDATA[तरनतारन विधानसभा उपचुनाव के बीच आज आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ा political boost मिला। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की पत्नी <strong>डॉ. गुरप्रीत कौर</strong> और उनकी माता जी ने खुद चुनाव मैदान में उतरकर पार्टी उम्मीदवार <strong>हरमीत सिंह संधू</strong> के पक्ष में प्रचार किया।

डॉ. गुरप्रीत कौर ने <strong>गांव मूसे कलां</strong> में लोगों से सीधे बातचीत की और कहा कि उन्हें गांववासियों का प्यार और support देखकर बहुत खुशी हुई। उन्होंने कहा कि लोग भगवंत मान सरकार की जनहितैषी नीतियों से बहुत खुश हैं और यही जोश हरमीत संधू की जीत को पक्का करेगा।

इस मौके पर कई प्रमुख परिवारों ने traditional पार्टियों को छोड़कर AAP में शामिल होने का ऐलान किया। डॉ. गुरप्रीत कौर ने नए सदस्यों का warmly स्वागत किया और उन्हें भरोसा दिलाया कि पार्टी में उनका पूरा सम्मान रखा जाएगा।

उन्होंने कहा, <em>“</em><em>हलके के लोग अब विकास के नाम पर वोट देने के लिए तैयार हैं। हरमीत सिंह संधू की जीत से हमारे इलाके के विकास काम और तेजी से होंगे। मैं सभी लोगों का दिल से धन्यवाद करती हूँ</em><em>, </em><em>जिन्होंने हमें इतना प्यार और सम्मान दिया।</em><em>”</em>

AAP कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों में डॉ. गुरप्रीत कौर और उनकी माता जी की मौजूदगी से उत्साह की लहर देखी गई। यह कदम हरमीत संधू की जीत को और मजबूत करने वाला माना जा रहा है।

इस तरह के personal campaign और लोगों का समर्थन AAP की तरनतारन में लोकप्रियता को बढ़ा रहा है और आने वाले चुनाव में पार्टी की chances को मजबूत कर रहा है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[तरनतारन विधानसभा उपचुनाव के बीच आज आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ा political boost मिला। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की पत्नी <strong>डॉ. गुरप्रीत कौर</strong> और उनकी माता जी ने खुद चुनाव मैदान में उतरकर पार्टी उम्मीदवार <strong>हरमीत सिंह संधू</strong> के पक्ष में प्रचार किया।

डॉ. गुरप्रीत कौर ने <strong>गांव मूसे कलां</strong> में लोगों से सीधे बातचीत की और कहा कि उन्हें गांववासियों का प्यार और support देखकर बहुत खुशी हुई। उन्होंने कहा कि लोग भगवंत मान सरकार की जनहितैषी नीतियों से बहुत खुश हैं और यही जोश हरमीत संधू की जीत को पक्का करेगा।

इस मौके पर कई प्रमुख परिवारों ने traditional पार्टियों को छोड़कर AAP में शामिल होने का ऐलान किया। डॉ. गुरप्रीत कौर ने नए सदस्यों का warmly स्वागत किया और उन्हें भरोसा दिलाया कि पार्टी में उनका पूरा सम्मान रखा जाएगा।

उन्होंने कहा, <em>“</em><em>हलके के लोग अब विकास के नाम पर वोट देने के लिए तैयार हैं। हरमीत सिंह संधू की जीत से हमारे इलाके के विकास काम और तेजी से होंगे। मैं सभी लोगों का दिल से धन्यवाद करती हूँ</em><em>, </em><em>जिन्होंने हमें इतना प्यार और सम्मान दिया।</em><em>”</em>

AAP कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों में डॉ. गुरप्रीत कौर और उनकी माता जी की मौजूदगी से उत्साह की लहर देखी गई। यह कदम हरमीत संधू की जीत को और मजबूत करने वाला माना जा रहा है।

इस तरह के personal campaign और लोगों का समर्थन AAP की तरनतारन में लोकप्रियता को बढ़ा रहा है और आने वाले चुनाव में पार्टी की chances को मजबूत कर रहा है।]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>Center का Punjab University पर कब्जा? AAP ने Governor से की मुलाकात, जताया विरोध</title>
		<link>https://trendstopic.in/is-the-center-trying-to-take-over-punjab-university-aap-meets-governor-voices-protest/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 07 Nov 2025 11:36:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चंडीगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[AAP]]></category>
		<category><![CDATA[Center]]></category>
		<category><![CDATA[Democracy]]></category>
		<category><![CDATA[EducationNews]]></category>
		<category><![CDATA[GovernorMeeting]]></category>
		<category><![CDATA[IndianPolitics]]></category>
		<category><![CDATA[Protest]]></category>
		<category><![CDATA[PunjabAutonomy]]></category>
		<category><![CDATA[PunjabUniversity]]></category>
		<category><![CDATA[UniversityRights]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब यूनिवर्सिटी के लोकतांत्रिक ढांचे पर केंद्र सरकार के कदम को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने कड़ा विरोध जताया है। आज AAP पंजाब के एक प्रतिनिधिमंडल ने वित्तमंत्री <strong>हरपाल सिंह चीमा</strong> के नेतृत्व में राज्यपाल <strong>गुलाब चंद कटारिया</strong> से मुलाकात की और पंजाब यूनिवर्सिटी की स्वायत्तता और लोकतांत्रिक संरचना की रक्षा करने की अपील की।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे सांसद <strong>गुरमीत सिंह मीत हेयर</strong>, <strong>मलविंदर सिंह कंग</strong>, विधायक <strong>दिनेश चड्ढा</strong>, वरिष्ठ नेता <strong>गोल्डी कंबोज</strong>, <strong>दविंदर सिंह लाडी ढोंस</strong>, छात्र नेता <strong>वतनवीर गिल</strong>, और पीयू सीनेट सदस्य <strong>आई.पी. सिद्धू</strong> और <strong>रविंदर धालीवाल</strong>।

<strong>केंद्र का नोटिफिकेशन:</strong>
28 अक्टूबर 2025 को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन जारी किया, जिसमें पंजाब यूनिवर्सिटी की सीनेट की कानूनी सदस्य संख्या 90 से घटाकर सिर्फ 31 कर दी गई। इनमें से 13 सदस्य सीधे केंद्र द्वारा मनोनीत होंगे। AAP ने इसे पंजाब और यूनिवर्सिटी के लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया।

<strong>AAP </strong><strong>नेताओं के बयान:</strong>
<ul>
 	<li><strong>हरपाल सिंह चीमा</strong> ने कहा कि भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पंजाब यूनिवर्सिटी के लोकतांत्रिक ढांचे को खत्म करके शैक्षणिक संस्थानों पर कब्जा करना चाहती है। उनका कहना है कि बीबीएमबी पर कब्जा करने के बाद अब केंद्र यूनिवर्सिटी को निशाना बना रहा है।</li>
 	<li><strong>मलविंदर सिंह कंग</strong> ने बताया कि यह नोटिफिकेशन गैर-संवैधानिक है और पंजाब यूनिवर्सिटी एक्ट, 1947 का उल्लंघन करता है। शिक्षा मंत्रालय का अधिकार नहीं कि वह राज्य के कानून के माध्यम से स्थापित संस्थाओं में बदलाव करे।</li>
 	<li><strong>गुरमीत सिंह मीत हेयर</strong> ने कहा कि यूनिवर्सिटी सिर्फ एक शिक्षा संस्थान नहीं, बल्कि पंजाबियों की भावनाओं और पहचान का हिस्सा है। बंटवारे के बाद यह पंजाबियों के लिए पुनर्जन्म का प्रतीक बनी।</li>
</ul>
<strong>AAP </strong><strong>की मांगें:</strong>
<ol>
 	<li>28 अक्टूबर के नोटिफिकेशन और 4 नवंबर के स्थगन आदेश को स्थायी रूप से वापस लिया जाए।</li>
 	<li>सीनेट और सिंडिकेट को पंजाब यूनिवर्सिटी एक्ट, 1947 और पंजाब पुनर्गठन एक्ट, 1966 के अनुसार बहाल किया जाए।</li>
 	<li>पंजाब यूनिवर्सिटी की स्वायत्तता और लोकतांत्रिक ढांचे की रक्षा की जाए।</li>
</ol>
<strong>पंजाब यूनिवर्सिटी का महत्व:</strong>
<ul>
 	<li>यह यूनिवर्सिटी पंजाब की ऐतिहासिक और भावनात्मक विरासत है।</li>
 	<li>पंजाब के 200 से अधिक कॉलेजों और लाखों छात्रों पर इस फैसले का असर पड़ेगा।</li>
 	<li>AAP का कहना है कि यह सिर्फ यूनिवर्सिटी का मामला नहीं, बल्कि पंजाब की पहचान और स्वाभिमान का मुद्दा है।</li>
</ul>
AAP ने यह भी कहा कि भगवंत मान सरकार पंजाब के छात्रों, शिक्षकों और अकादमिक संस्थानों के साथ मिलकर केंद्र के हस्तक्षेप से पंजाब की संस्थाओं और पहचान को बचाने के लिए संघर्ष जारी रखेगी।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब यूनिवर्सिटी के लोकतांत्रिक ढांचे पर केंद्र सरकार के कदम को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने कड़ा विरोध जताया है। आज AAP पंजाब के एक प्रतिनिधिमंडल ने वित्तमंत्री <strong>हरपाल सिंह चीमा</strong> के नेतृत्व में राज्यपाल <strong>गुलाब चंद कटारिया</strong> से मुलाकात की और पंजाब यूनिवर्सिटी की स्वायत्तता और लोकतांत्रिक संरचना की रक्षा करने की अपील की।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे सांसद <strong>गुरमीत सिंह मीत हेयर</strong>, <strong>मलविंदर सिंह कंग</strong>, विधायक <strong>दिनेश चड्ढा</strong>, वरिष्ठ नेता <strong>गोल्डी कंबोज</strong>, <strong>दविंदर सिंह लाडी ढोंस</strong>, छात्र नेता <strong>वतनवीर गिल</strong>, और पीयू सीनेट सदस्य <strong>आई.पी. सिद्धू</strong> और <strong>रविंदर धालीवाल</strong>।

<strong>केंद्र का नोटिफिकेशन:</strong>
28 अक्टूबर 2025 को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन जारी किया, जिसमें पंजाब यूनिवर्सिटी की सीनेट की कानूनी सदस्य संख्या 90 से घटाकर सिर्फ 31 कर दी गई। इनमें से 13 सदस्य सीधे केंद्र द्वारा मनोनीत होंगे। AAP ने इसे पंजाब और यूनिवर्सिटी के लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया।

<strong>AAP </strong><strong>नेताओं के बयान:</strong>
<ul>
 	<li><strong>हरपाल सिंह चीमा</strong> ने कहा कि भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पंजाब यूनिवर्सिटी के लोकतांत्रिक ढांचे को खत्म करके शैक्षणिक संस्थानों पर कब्जा करना चाहती है। उनका कहना है कि बीबीएमबी पर कब्जा करने के बाद अब केंद्र यूनिवर्सिटी को निशाना बना रहा है।</li>
 	<li><strong>मलविंदर सिंह कंग</strong> ने बताया कि यह नोटिफिकेशन गैर-संवैधानिक है और पंजाब यूनिवर्सिटी एक्ट, 1947 का उल्लंघन करता है। शिक्षा मंत्रालय का अधिकार नहीं कि वह राज्य के कानून के माध्यम से स्थापित संस्थाओं में बदलाव करे।</li>
 	<li><strong>गुरमीत सिंह मीत हेयर</strong> ने कहा कि यूनिवर्सिटी सिर्फ एक शिक्षा संस्थान नहीं, बल्कि पंजाबियों की भावनाओं और पहचान का हिस्सा है। बंटवारे के बाद यह पंजाबियों के लिए पुनर्जन्म का प्रतीक बनी।</li>
</ul>
<strong>AAP </strong><strong>की मांगें:</strong>
<ol>
 	<li>28 अक्टूबर के नोटिफिकेशन और 4 नवंबर के स्थगन आदेश को स्थायी रूप से वापस लिया जाए।</li>
 	<li>सीनेट और सिंडिकेट को पंजाब यूनिवर्सिटी एक्ट, 1947 और पंजाब पुनर्गठन एक्ट, 1966 के अनुसार बहाल किया जाए।</li>
 	<li>पंजाब यूनिवर्सिटी की स्वायत्तता और लोकतांत्रिक ढांचे की रक्षा की जाए।</li>
</ol>
<strong>पंजाब यूनिवर्सिटी का महत्व:</strong>
<ul>
 	<li>यह यूनिवर्सिटी पंजाब की ऐतिहासिक और भावनात्मक विरासत है।</li>
 	<li>पंजाब के 200 से अधिक कॉलेजों और लाखों छात्रों पर इस फैसले का असर पड़ेगा।</li>
 	<li>AAP का कहना है कि यह सिर्फ यूनिवर्सिटी का मामला नहीं, बल्कि पंजाब की पहचान और स्वाभिमान का मुद्दा है।</li>
</ul>
AAP ने यह भी कहा कि भगवंत मान सरकार पंजाब के छात्रों, शिक्षकों और अकादमिक संस्थानों के साथ मिलकर केंद्र के हस्तक्षेप से पंजाब की संस्थाओं और पहचान को बचाने के लिए संघर्ष जारी रखेगी।]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>NSA बढ़ाए जाने के खिलाफ MP Amritpal Singh Supreme Court पहुँचे, 7 November को होगी सुनवाई</title>
		<link>https://trendstopic.in/mp-amritpal-singh-moves-supreme-court-against-the-extension-of-nsa-hearing-to-be-held-on-november-7/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 06 Nov 2025 07:59:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[AmritpalSingh]]></category>
		<category><![CDATA[BreakingNews]]></category>
		<category><![CDATA[Hearing]]></category>
		<category><![CDATA[IndianPolitics]]></category>
		<category><![CDATA[KhadoorSahib]]></category>
		<category><![CDATA[LatestUpdate]]></category>
		<category><![CDATA[news]]></category>
		<category><![CDATA[NSA]]></category>
		<category><![CDATA[PunjabNews]]></category>
		<category><![CDATA[SupremeCourt]]></category>
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					<description><![CDATA[लोकसभा क्षेत्र खडूर साहिब से सांसद <strong>अमृतपाल सिंह</strong> ने अपने ऊपर लगाए गए <strong>NSA (National Security Act)</strong> को बढ़ाए जाने के फैसले के ख़िलाफ <strong>सुप्रीम कोर्ट</strong> का दरवाज़ा खटखटाया है। उनकी ओर से <strong>वकील हरजोत सिंह मान</strong> ने यह याचिका दायर की है। इस मामले की <strong>पहली सुनवाई 7 </strong><strong>नवंबर को</strong> सुप्रीम कोर्ट में होनी तय है।
<h3><strong>NSA </strong><strong>क्यों लगा?</strong></h3>
अमृतपाल सिंह को <strong>23 </strong><strong>अप्रैल 2023</strong> को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के तुरंत बाद उन पर <strong>राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA)</strong> लगा दिया गया था। सरकार का कहना है कि अमृतपाल की गतिविधियाँ <strong>राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा</strong> थीं।
NSA के तहत किसी भी व्यक्ति को <strong>बिना ट्रायल</strong> लंबे समय तक हिरासत में रखा जा सकता है, और यह अवधि <strong>समय-समय पर बढ़ाकर अधिकतम 2 </strong><strong>साल</strong> तक की जा सकती है।

गिरफ्तारी के बाद अमृतपाल सिंह को <strong>असम की डिब्रुगढ़ जेल</strong> में शिफ्ट किया गया, जहाँ वे अब भी बंद हैं।
<h3><strong>सरकार ने किस आधार पर NSA </strong><strong>को बढ़ाया?</strong></h3>
सरकार की ओर से बताया गया है कि <strong>हरीनाओ गाँव में हुए एक कत्ल मामले</strong> को NSA बढ़ाने का <strong>मुख्य आधार</strong> बनाया गया है।
यानी इस मामले की वजह बताते हुए NSA की अवधि <strong>फिर से बढ़ाई</strong> गई है।
<h3><strong>हाई कोर्ट में भी मामला लंबित</strong></h3>
इससे पहले <strong>पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट</strong> में भी NSA बढ़ाए जाने को चुनौती दी गई थी, लेकिन <strong>आज तक उस याचिका पर सुनवाई नहीं हो पाई</strong>।
इसी वजह से अब मामला सीधे <strong>सुप्रीम कोर्ट</strong> में पहुँच गया है।
<h3><strong>अमृतपाल पक्ष क्या कह रहा है?</strong></h3>
अमृतपाल के वकीलों का कहना है:
<ul>
 	<li>NSA बढ़ाना <strong>गैर-ज़रूरी और अवैध</strong> है</li>
 	<li>सरकार <strong>गलत आधार</strong> देकर हिरासत बढ़ा रही है</li>
 	<li>यह <strong>राजनीतिक दबाव का मामला</strong> भी हो सकता है</li>
</ul>
<h3><strong>सरकार का पक्ष</strong></h3>
सरकार का रुख साफ़ है:
<ul>
 	<li>अमृतपाल की पुरानी गतिविधियाँ <strong>कानून-व्यवस्था और राज्य की सुरक्षा</strong> के लिए <strong>चिंता का कारण</strong> थीं</li>
 	<li>इसलिए <strong>NSA </strong><strong>जारी रखना ज़रूरी</strong> है</li>
</ul>
<h3><strong>अगला कदम</strong></h3>
अब सबकी निगाहें <strong>7 </strong><strong>नवंबर</strong> को होने वाली <strong>सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई</strong> पर होंगी।
इसी सुनवाई में यह तय होगा कि:
<ul>
 	<li>NSA जारी रहेगा
<strong>या</strong></li>
 	<li>इसे हटाने पर आगे कोई आदेश आएगा।</li>
</ul>
<h3><strong>संक्षेप में</strong></h3>
<table>
<thead>
<tr>
<td><strong>बिंदु</strong></td>
<td><strong>जानकारी</strong></td>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>गिरफ्तारी</td>
<td>23 अप्रैल 2023</td>
</tr>
<tr>
<td>कानून</td>
<td>NSA (National Security Act)</td>
</tr>
<tr>
<td>जेल</td>
<td>डिब्रुगढ़ जेल, असम</td>
</tr>
<tr>
<td>NSA बढ़ाने का आधार</td>
<td>हरीनाओ कत्ल मामला</td>
</tr>
<tr>
<td>नई याचिका</td>
<td>सुप्रीम कोर्ट में</td>
</tr>
<tr>
<td>पहली सुनवाई</td>
<td>7 नवंबर</td>
</tr>
</tbody>
</table>
&nbsp;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[लोकसभा क्षेत्र खडूर साहिब से सांसद <strong>अमृतपाल सिंह</strong> ने अपने ऊपर लगाए गए <strong>NSA (National Security Act)</strong> को बढ़ाए जाने के फैसले के ख़िलाफ <strong>सुप्रीम कोर्ट</strong> का दरवाज़ा खटखटाया है। उनकी ओर से <strong>वकील हरजोत सिंह मान</strong> ने यह याचिका दायर की है। इस मामले की <strong>पहली सुनवाई 7 </strong><strong>नवंबर को</strong> सुप्रीम कोर्ट में होनी तय है।
<h3><strong>NSA </strong><strong>क्यों लगा?</strong></h3>
अमृतपाल सिंह को <strong>23 </strong><strong>अप्रैल 2023</strong> को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के तुरंत बाद उन पर <strong>राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA)</strong> लगा दिया गया था। सरकार का कहना है कि अमृतपाल की गतिविधियाँ <strong>राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा</strong> थीं।
NSA के तहत किसी भी व्यक्ति को <strong>बिना ट्रायल</strong> लंबे समय तक हिरासत में रखा जा सकता है, और यह अवधि <strong>समय-समय पर बढ़ाकर अधिकतम 2 </strong><strong>साल</strong> तक की जा सकती है।

गिरफ्तारी के बाद अमृतपाल सिंह को <strong>असम की डिब्रुगढ़ जेल</strong> में शिफ्ट किया गया, जहाँ वे अब भी बंद हैं।
<h3><strong>सरकार ने किस आधार पर NSA </strong><strong>को बढ़ाया?</strong></h3>
सरकार की ओर से बताया गया है कि <strong>हरीनाओ गाँव में हुए एक कत्ल मामले</strong> को NSA बढ़ाने का <strong>मुख्य आधार</strong> बनाया गया है।
यानी इस मामले की वजह बताते हुए NSA की अवधि <strong>फिर से बढ़ाई</strong> गई है।
<h3><strong>हाई कोर्ट में भी मामला लंबित</strong></h3>
इससे पहले <strong>पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट</strong> में भी NSA बढ़ाए जाने को चुनौती दी गई थी, लेकिन <strong>आज तक उस याचिका पर सुनवाई नहीं हो पाई</strong>।
इसी वजह से अब मामला सीधे <strong>सुप्रीम कोर्ट</strong> में पहुँच गया है।
<h3><strong>अमृतपाल पक्ष क्या कह रहा है?</strong></h3>
अमृतपाल के वकीलों का कहना है:
<ul>
 	<li>NSA बढ़ाना <strong>गैर-ज़रूरी और अवैध</strong> है</li>
 	<li>सरकार <strong>गलत आधार</strong> देकर हिरासत बढ़ा रही है</li>
 	<li>यह <strong>राजनीतिक दबाव का मामला</strong> भी हो सकता है</li>
</ul>
<h3><strong>सरकार का पक्ष</strong></h3>
सरकार का रुख साफ़ है:
<ul>
 	<li>अमृतपाल की पुरानी गतिविधियाँ <strong>कानून-व्यवस्था और राज्य की सुरक्षा</strong> के लिए <strong>चिंता का कारण</strong> थीं</li>
 	<li>इसलिए <strong>NSA </strong><strong>जारी रखना ज़रूरी</strong> है</li>
</ul>
<h3><strong>अगला कदम</strong></h3>
अब सबकी निगाहें <strong>7 </strong><strong>नवंबर</strong> को होने वाली <strong>सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई</strong> पर होंगी।
इसी सुनवाई में यह तय होगा कि:
<ul>
 	<li>NSA जारी रहेगा
<strong>या</strong></li>
 	<li>इसे हटाने पर आगे कोई आदेश आएगा।</li>
</ul>
<h3><strong>संक्षेप में</strong></h3>
<table>
<thead>
<tr>
<td><strong>बिंदु</strong></td>
<td><strong>जानकारी</strong></td>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>गिरफ्तारी</td>
<td>23 अप्रैल 2023</td>
</tr>
<tr>
<td>कानून</td>
<td>NSA (National Security Act)</td>
</tr>
<tr>
<td>जेल</td>
<td>डिब्रुगढ़ जेल, असम</td>
</tr>
<tr>
<td>NSA बढ़ाने का आधार</td>
<td>हरीनाओ कत्ल मामला</td>
</tr>
<tr>
<td>नई याचिका</td>
<td>सुप्रीम कोर्ट में</td>
</tr>
<tr>
<td>पहली सुनवाई</td>
<td>7 नवंबर</td>
</tr>
</tbody>
</table>
&nbsp;]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>PM बोले &#8211; Sardar Patel चाहते थे पूरा Kashmir भारत का हिस्सा बने, लेकिन नेहरू ने रोका; जो अंग्रेज नहीं कर पाए वो Congress ने कर दिया</title>
		<link>https://trendstopic.in/pm-said-sardar-patel-wanted-the-whole-of-kashmir-to-be-part-of-india-but-nehru-stopped-it-what-the-british-couldnt-do-congress-did/</link>
					<comments>https://trendstopic.in/pm-said-sardar-patel-wanted-the-whole-of-kashmir-to-be-part-of-india-but-nehru-stopped-it-what-the-british-couldnt-do-congress-did/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 31 Oct 2025 07:14:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[News]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[BharatParv2025]]></category>
		<category><![CDATA[congress]]></category>
		<category><![CDATA[Gujarat]]></category>
		<category><![CDATA[IndiaNews]]></category>
		<category><![CDATA[IndianPolitics]]></category>
		<category><![CDATA[Kashmir]]></category>
		<category><![CDATA[ModiSpeech]]></category>
		<category><![CDATA[NationalUnityDay]]></category>
		<category><![CDATA[Nehru]]></category>
		<category><![CDATA[PatelJayanti]]></category>
		<category><![CDATA[PMModi]]></category>
		<category><![CDATA[RunForUnity]]></category>
		<category><![CDATA[SardarPatel]]></category>
		<category><![CDATA[StatueOfUnity]]></category>
		<category><![CDATA[UnityInDiversity]]></category>
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					<description><![CDATA[सरदार वल्लभभाई पटेल की <strong>150</strong><strong>वीं जयंती</strong> और <strong>राष्ट्रीय एकता दिवस</strong> के मौके पर प्रधानमंत्री <strong>नरेंद्र मोदी</strong> शुक्रवार को गुजरात के <strong>नर्मदा जिले के एकता नगर</strong> पहुंचे। उन्होंने <strong>स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (182 </strong><strong>मीटर ऊंची प्रतिमा)</strong> पर पुष्पांजलि अर्पित की और इसके बाद <strong>राष्ट्रीय एकता दिवस परेड</strong> में शामिल हुए।

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि <strong>सरदार पटेल पूरे कश्मीर को भारत का हिस्सा बनाना चाहते थे</strong>, लेकिन <strong>तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू</strong> ने ऐसा नहीं होने दिया। मोदी ने कहा – <em>“</em><em>कश्मीर को अलग संविधान और झंडे के साथ बांट दिया गया। कांग्रेस की गलती की आग में देश दशकों तक जलता रहा।”</em>
<h3><strong>परेड में महिला अफसरों ने संभाली कमान</strong></h3>
राष्ट्रीय एकता दिवस परेड में इस बार <strong>सभी टुकड़ियों का नेतृत्व महिला अफसरों ने किया</strong>।
परेड में <strong>BSF, CISF, ITBP, CRPF, NSG</strong> समेत कुल <strong>16 </strong><strong>टुकड़ियाँ</strong> शामिल हुईं।
इसके अलावा <strong>BSF </strong><strong>के 16 </strong><strong>पदक विजेता</strong>, <strong>CRPF </strong><strong>के 5 </strong><strong>शौर्य चक्र विजेता</strong> और <strong>100 </strong><strong>सदस्यीय हेराल्डिंग टीम</strong> ने भी हिस्सा लिया।
परेड में <strong>9 </strong><strong>बैंड टुकड़ियाँ</strong> और <strong>4 </strong><strong>स्कूल बैंड</strong> ने प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम के दौरान <strong>वायुसेना की सूर्यकिरण टीम</strong> ने शानदार <strong>फ्लाईपास्ट</strong> किया।
साथ ही <strong>BSF </strong><strong>का डॉग शो</strong>, <strong>NSG </strong><strong>का हेल मार्च</strong>, <strong>CRPF </strong><strong>और गुजरात पुलिस की महिला विंग की राइफल ड्रिल</strong>, और <strong>असम पुलिस के मोटरसाइकिल स्टंट</strong> ने दर्शकों का मन मोह लिया।
<h3><strong>गणतंत्र दिवस जैसी परेड और झांकियाँ</strong></h3>
इस मौके पर गणतंत्र दिवस की तर्ज पर <strong>10 </strong><strong>झांकियाँ</strong> निकाली गईं।
इनमें <strong>जम्मू-कश्मीर, </strong><strong>अंडमान-निकोबार, </strong><strong>पुडुचेरी, </strong><strong>महाराष्ट्र, </strong><strong>गुजरात, </strong><strong>मणिपुर, </strong><strong>छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड</strong> जैसे राज्यों की झांकियाँ शामिल थीं।
हर झांकी ने अपने राज्य की संस्कृति, परंपरा और एकता का संदेश दिया।
<h3><strong>PM </strong><strong>मोदी ने कांग्रेस पर साधा निशाना</strong></h3>
अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने कहा कि <strong>कांग्रेस को अंग्रेजों से “</strong><strong>गुलाम मानसिकता” </strong><strong>विरासत में मिली</strong> है।
उन्होंने कहा –

“जब अंग्रेजों ने 1905 में बंगाल का विभाजन किया, तो <em>वंदे मातरम्</em> देश की एकता की आवाज बन गया था। अंग्रेजों ने इसे रोकने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहे।
जो काम अंग्रेज नहीं कर पाए, वो कांग्रेस ने कर दिया। कांग्रेस ने धार्मिक आधार पर वंदे मातरम् का एक हिस्सा हटा दिया और समाज को बाँट दिया।”
<h3><strong>कश्मीर और कांग्रेस की नीतियों पर हमला</strong></h3>
मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने कभी सरदार पटेल की नीतियों को नहीं अपनाया।
इसका नतीजा देश को हिंसा और आतंकवाद के रूप में भुगतना पड़ा।
उन्होंने कहा –

“कांग्रेस की गलतियों से कश्मीर का एक हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में चला गया।
कांग्रेस हमेशा आतंकवाद के आगे झुकी रही, लेकिन हमने ऐसा नहीं किया।”
<h3><strong>राष्ट्रीय सुरक्षा और घुसपैठ पर चिंता</strong></h3>
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश की <strong>एकता और सुरक्षा घुसपैठियों से खतरे में है</strong>।
उन्होंने कहा कि पहले की सरकारें इस गंभीर मुद्दे पर <strong>आँखें मूँदकर बैठी रहीं</strong>, क्योंकि उन्हें वोट बैंक की राजनीति करनी थी।
मोदी बोले –

“हमने पहली बार इस चुनौती का सीधा सामना करने का साहस दिखाया है।
अब हम देश की अखंडता और सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे।”
<h3><strong>नक्सलवाद और आतंकवाद पर भी बोले पीएम</strong></h3>
मोदी ने कहा कि 2014 से पहले <strong>125 </strong><strong>जिले नक्सलवाद से प्रभावित थे</strong>,
लेकिन अब यह संख्या घटकर सिर्फ <strong>11 </strong><strong>जिले</strong> रह गई है, जिनमें भी 3 गंभीर रूप से प्रभावित हैं।
उन्होंने कहा –

“यह लौह पुरुष सरदार का भारत है। जब तक देश नक्सलवाद, माओवाद और आतंकवाद से पूरी तरह मुक्त नहीं हो जाता, हम चैन से नहीं बैठेंगे।”
<h3><strong>‘</strong><strong>इतिहास रचने वाले’ </strong><strong>थे सरदार पटेल</strong></h3>
पीएम मोदी ने कहा –

“सरदार पटेल इतिहास लिखने में नहीं, इतिहास रचने में विश्वास रखते थे।
उन्होंने आज़ादी के बाद 550 से ज्यादा रियासतों को एकजुट किया।
एक भारत, श्रेष्ठ भारत का सपना उन्हीं की देन है।”
मोदी ने देशवासियों को <strong>राष्ट्रीय एकता की शपथ</strong> भी दिलाई।
<h3><strong>भारत पर्व 2025 </strong><strong>का ऐलान</strong></h3>
इस मौके पर पीएम ने घोषणा की कि <strong>1 </strong><strong>से 15 </strong><strong>नवंबर तक ‘</strong><strong>भारत पर्व 2025’</strong> का आयोजन <strong>एकता नगर</strong> में होगा।
इस दौरान देश की <strong>संस्कृति, </strong><strong>कला, </strong><strong>और विविधता में एकता</strong> की भावना को प्रदर्शित किया जाएगा।
हर शाम <strong>दो राज्यों की सांस्कृतिक झलकियाँ</strong> पेश की जाएंगी।
<h3><strong>देशभर में एकता दिवस के कार्यक्रम</strong></h3>
<ul>
 	<li><strong>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू</strong> ने दिल्ली में सरदार पटेल को श्रद्धांजलि दी।</li>
 	<li><strong>गृहमंत्री अमित शाह</strong> ने <strong>“</strong><strong>रन फॉर यूनिटी”</strong> को हरी झंडी दिखाई।</li>
 	<li><strong>तेलंगाना में एक्टर चिरंजीवी</strong> ने इस रन में हिस्सा लिया।</li>
 	<li><strong>उत्तर प्रदेश में सीएम योगी आदित्यनाथ</strong> ने बताया कि देशभर में <strong>600 </strong><strong>स्थानों पर रन फॉर यूनिटी</strong> आयोजित किया गया।</li>
 	<li><strong>हरियाणा के फतेहाबाद में सीएम सैनी</strong> ने धावकों पर फूल बरसाए।</li>
</ul>
<h3><strong>समापन</strong></h3>
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि <strong>“</strong><strong>सरदार पटेल की सोच ही भारत की एकता की नींव है।”</strong>
उन्होंने जनता से अपील की कि हर नागरिक ऐसा कोई भी काम या विचार त्यागे, जो देश की एकता को कमजोर करे।
कार्यक्रम के अंत में लोगों ने एक सुर में कहा –

<strong>“</strong><strong>वंदे मातरम्, </strong><strong>भारत माता की जय!”</strong>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[सरदार वल्लभभाई पटेल की <strong>150</strong><strong>वीं जयंती</strong> और <strong>राष्ट्रीय एकता दिवस</strong> के मौके पर प्रधानमंत्री <strong>नरेंद्र मोदी</strong> शुक्रवार को गुजरात के <strong>नर्मदा जिले के एकता नगर</strong> पहुंचे। उन्होंने <strong>स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (182 </strong><strong>मीटर ऊंची प्रतिमा)</strong> पर पुष्पांजलि अर्पित की और इसके बाद <strong>राष्ट्रीय एकता दिवस परेड</strong> में शामिल हुए।

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि <strong>सरदार पटेल पूरे कश्मीर को भारत का हिस्सा बनाना चाहते थे</strong>, लेकिन <strong>तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू</strong> ने ऐसा नहीं होने दिया। मोदी ने कहा – <em>“</em><em>कश्मीर को अलग संविधान और झंडे के साथ बांट दिया गया। कांग्रेस की गलती की आग में देश दशकों तक जलता रहा।”</em>
<h3><strong>परेड में महिला अफसरों ने संभाली कमान</strong></h3>
राष्ट्रीय एकता दिवस परेड में इस बार <strong>सभी टुकड़ियों का नेतृत्व महिला अफसरों ने किया</strong>।
परेड में <strong>BSF, CISF, ITBP, CRPF, NSG</strong> समेत कुल <strong>16 </strong><strong>टुकड़ियाँ</strong> शामिल हुईं।
इसके अलावा <strong>BSF </strong><strong>के 16 </strong><strong>पदक विजेता</strong>, <strong>CRPF </strong><strong>के 5 </strong><strong>शौर्य चक्र विजेता</strong> और <strong>100 </strong><strong>सदस्यीय हेराल्डिंग टीम</strong> ने भी हिस्सा लिया।
परेड में <strong>9 </strong><strong>बैंड टुकड़ियाँ</strong> और <strong>4 </strong><strong>स्कूल बैंड</strong> ने प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम के दौरान <strong>वायुसेना की सूर्यकिरण टीम</strong> ने शानदार <strong>फ्लाईपास्ट</strong> किया।
साथ ही <strong>BSF </strong><strong>का डॉग शो</strong>, <strong>NSG </strong><strong>का हेल मार्च</strong>, <strong>CRPF </strong><strong>और गुजरात पुलिस की महिला विंग की राइफल ड्रिल</strong>, और <strong>असम पुलिस के मोटरसाइकिल स्टंट</strong> ने दर्शकों का मन मोह लिया।
<h3><strong>गणतंत्र दिवस जैसी परेड और झांकियाँ</strong></h3>
इस मौके पर गणतंत्र दिवस की तर्ज पर <strong>10 </strong><strong>झांकियाँ</strong> निकाली गईं।
इनमें <strong>जम्मू-कश्मीर, </strong><strong>अंडमान-निकोबार, </strong><strong>पुडुचेरी, </strong><strong>महाराष्ट्र, </strong><strong>गुजरात, </strong><strong>मणिपुर, </strong><strong>छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड</strong> जैसे राज्यों की झांकियाँ शामिल थीं।
हर झांकी ने अपने राज्य की संस्कृति, परंपरा और एकता का संदेश दिया।
<h3><strong>PM </strong><strong>मोदी ने कांग्रेस पर साधा निशाना</strong></h3>
अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने कहा कि <strong>कांग्रेस को अंग्रेजों से “</strong><strong>गुलाम मानसिकता” </strong><strong>विरासत में मिली</strong> है।
उन्होंने कहा –

“जब अंग्रेजों ने 1905 में बंगाल का विभाजन किया, तो <em>वंदे मातरम्</em> देश की एकता की आवाज बन गया था। अंग्रेजों ने इसे रोकने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहे।
जो काम अंग्रेज नहीं कर पाए, वो कांग्रेस ने कर दिया। कांग्रेस ने धार्मिक आधार पर वंदे मातरम् का एक हिस्सा हटा दिया और समाज को बाँट दिया।”
<h3><strong>कश्मीर और कांग्रेस की नीतियों पर हमला</strong></h3>
मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने कभी सरदार पटेल की नीतियों को नहीं अपनाया।
इसका नतीजा देश को हिंसा और आतंकवाद के रूप में भुगतना पड़ा।
उन्होंने कहा –

“कांग्रेस की गलतियों से कश्मीर का एक हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में चला गया।
कांग्रेस हमेशा आतंकवाद के आगे झुकी रही, लेकिन हमने ऐसा नहीं किया।”
<h3><strong>राष्ट्रीय सुरक्षा और घुसपैठ पर चिंता</strong></h3>
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश की <strong>एकता और सुरक्षा घुसपैठियों से खतरे में है</strong>।
उन्होंने कहा कि पहले की सरकारें इस गंभीर मुद्दे पर <strong>आँखें मूँदकर बैठी रहीं</strong>, क्योंकि उन्हें वोट बैंक की राजनीति करनी थी।
मोदी बोले –

“हमने पहली बार इस चुनौती का सीधा सामना करने का साहस दिखाया है।
अब हम देश की अखंडता और सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे।”
<h3><strong>नक्सलवाद और आतंकवाद पर भी बोले पीएम</strong></h3>
मोदी ने कहा कि 2014 से पहले <strong>125 </strong><strong>जिले नक्सलवाद से प्रभावित थे</strong>,
लेकिन अब यह संख्या घटकर सिर्फ <strong>11 </strong><strong>जिले</strong> रह गई है, जिनमें भी 3 गंभीर रूप से प्रभावित हैं।
उन्होंने कहा –

“यह लौह पुरुष सरदार का भारत है। जब तक देश नक्सलवाद, माओवाद और आतंकवाद से पूरी तरह मुक्त नहीं हो जाता, हम चैन से नहीं बैठेंगे।”
<h3><strong>‘</strong><strong>इतिहास रचने वाले’ </strong><strong>थे सरदार पटेल</strong></h3>
पीएम मोदी ने कहा –

“सरदार पटेल इतिहास लिखने में नहीं, इतिहास रचने में विश्वास रखते थे।
उन्होंने आज़ादी के बाद 550 से ज्यादा रियासतों को एकजुट किया।
एक भारत, श्रेष्ठ भारत का सपना उन्हीं की देन है।”
मोदी ने देशवासियों को <strong>राष्ट्रीय एकता की शपथ</strong> भी दिलाई।
<h3><strong>भारत पर्व 2025 </strong><strong>का ऐलान</strong></h3>
इस मौके पर पीएम ने घोषणा की कि <strong>1 </strong><strong>से 15 </strong><strong>नवंबर तक ‘</strong><strong>भारत पर्व 2025’</strong> का आयोजन <strong>एकता नगर</strong> में होगा।
इस दौरान देश की <strong>संस्कृति, </strong><strong>कला, </strong><strong>और विविधता में एकता</strong> की भावना को प्रदर्शित किया जाएगा।
हर शाम <strong>दो राज्यों की सांस्कृतिक झलकियाँ</strong> पेश की जाएंगी।
<h3><strong>देशभर में एकता दिवस के कार्यक्रम</strong></h3>
<ul>
 	<li><strong>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू</strong> ने दिल्ली में सरदार पटेल को श्रद्धांजलि दी।</li>
 	<li><strong>गृहमंत्री अमित शाह</strong> ने <strong>“</strong><strong>रन फॉर यूनिटी”</strong> को हरी झंडी दिखाई।</li>
 	<li><strong>तेलंगाना में एक्टर चिरंजीवी</strong> ने इस रन में हिस्सा लिया।</li>
 	<li><strong>उत्तर प्रदेश में सीएम योगी आदित्यनाथ</strong> ने बताया कि देशभर में <strong>600 </strong><strong>स्थानों पर रन फॉर यूनिटी</strong> आयोजित किया गया।</li>
 	<li><strong>हरियाणा के फतेहाबाद में सीएम सैनी</strong> ने धावकों पर फूल बरसाए।</li>
</ul>
<h3><strong>समापन</strong></h3>
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि <strong>“</strong><strong>सरदार पटेल की सोच ही भारत की एकता की नींव है।”</strong>
उन्होंने जनता से अपील की कि हर नागरिक ऐसा कोई भी काम या विचार त्यागे, जो देश की एकता को कमजोर करे।
कार्यक्रम के अंत में लोगों ने एक सुर में कहा –

<strong>“</strong><strong>वंदे मातरम्, </strong><strong>भारत माता की जय!”</strong>]]></content:encoded>
					
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