<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>health &#8211; Trends Topic</title>
	<atom:link href="https://trendstopic.in/tag/health/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://trendstopic.in</link>
	<description>to always keep you aware</description>
	<lastBuildDate>Fri, 17 May 2024 12:30:39 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.4.10</generator>

<image>
	<url>https://trendstopic.in/wp-content/uploads/2024/03/cropped-TREND-TOPIC-1-32x32.png</url>
	<title>health &#8211; Trends Topic</title>
	<link>https://trendstopic.in</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>Kerala: करना था ऊँगली का ऑपरेशन, कर दिया जीभ का ऑपरेशन</title>
		<link>https://trendstopic.in/finger-operation-was-to-be-done-in-kerala-tongue-operation-was-done/</link>
					<comments>https://trendstopic.in/finger-operation-was-to-be-done-in-kerala-tongue-operation-was-done/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor 1]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 17 May 2024 12:30:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[health]]></category>
		<category><![CDATA[news]]></category>
		<category><![CDATA[police]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://trendstopic.in/?p=8611</guid>

					<description><![CDATA[<!-- wp:paragraph -->
<p>चिकित्सीय लापरवाही के एक चौंकाने वाले और विचित्र मामले में, Kerala के कोझिकोड मेडिकल कॉलेज के एक डॉक्टर ने चार साल के बच्चे की उंगली के बजाय जीभ का ऑपरेशन कर दिया। उन्हें एक लड़की की जीभ का ऑपरेशन करने के बाद निलंबित कर दिया गया था, जिसकी छठी उंगली को हटाने के लिए सर्जरी करनी पड़ी थी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने चिकित्सा शिक्षा निदेशक से एक रिपोर्ट प्राप्त करने के बाद एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. बिजोन जॉनसन को निलंबित कर दिया है। लड़की के परिवार ने आईपीसी की धारा 336 (दूसरों के जीवन या सुरक्षा को खतरे में डालना) और 337 (किसी भी कार्य से दूसरों के जीवन या सुरक्षा को खतरे में डालना) के तहत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>परिवार ने कहा कि उनकी चार साल की बेटी अपनी छठी उंगली निकलवाने के लिए ऑपरेशन थिएटर में गई थी। जब वह उंगली की जगह ऑपरेशन की गई जीभ के साथ बाहर आया तो वे हैरान रह गए। जब सवाल किया गया तो अस्पताल के अधिकारियों ने कहा कि डॉक्टर ने लड़की की जीभ पर एक गांठ देखी जिसके बाद उन्होंने ऑपरेशन किया।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>कोझिकोड मेडिकल कॉलेज के मातृ एवं शिशु विभाग के अधीक्षक ने कहा कि जब लड़की रो रही थी, तो लड़की की जीभ में एक समस्या देखी गई और इसलिए उसे सर्जरी करके हटा दिया गया।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>लड़की के परिवार वालों का कहना है कि लड़की की जीभ में ऐसी कोई दिक्कत नहीं है और उन्होंने डॉक्टर की हरकत को भी शर्मनाक बताया है| परिवार के एक सदस्य ने कहा कि अस्पताल के अधिकारियों ने उन्हें सूचित किया था कि एक ही दिन में दो सर्जरी करना एक गलती थी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<!-- wp:paragraph -->
<p>चिकित्सीय लापरवाही के एक चौंकाने वाले और विचित्र मामले में, Kerala के कोझिकोड मेडिकल कॉलेज के एक डॉक्टर ने चार साल के बच्चे की उंगली के बजाय जीभ का ऑपरेशन कर दिया। उन्हें एक लड़की की जीभ का ऑपरेशन करने के बाद निलंबित कर दिया गया था, जिसकी छठी उंगली को हटाने के लिए सर्जरी करनी पड़ी थी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने चिकित्सा शिक्षा निदेशक से एक रिपोर्ट प्राप्त करने के बाद एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. बिजोन जॉनसन को निलंबित कर दिया है। लड़की के परिवार ने आईपीसी की धारा 336 (दूसरों के जीवन या सुरक्षा को खतरे में डालना) और 337 (किसी भी कार्य से दूसरों के जीवन या सुरक्षा को खतरे में डालना) के तहत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>परिवार ने कहा कि उनकी चार साल की बेटी अपनी छठी उंगली निकलवाने के लिए ऑपरेशन थिएटर में गई थी। जब वह उंगली की जगह ऑपरेशन की गई जीभ के साथ बाहर आया तो वे हैरान रह गए। जब सवाल किया गया तो अस्पताल के अधिकारियों ने कहा कि डॉक्टर ने लड़की की जीभ पर एक गांठ देखी जिसके बाद उन्होंने ऑपरेशन किया।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>कोझिकोड मेडिकल कॉलेज के मातृ एवं शिशु विभाग के अधीक्षक ने कहा कि जब लड़की रो रही थी, तो लड़की की जीभ में एक समस्या देखी गई और इसलिए उसे सर्जरी करके हटा दिया गया।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>लड़की के परिवार वालों का कहना है कि लड़की की जीभ में ऐसी कोई दिक्कत नहीं है और उन्होंने डॉक्टर की हरकत को भी शर्मनाक बताया है| परिवार के एक सदस्य ने कहा कि अस्पताल के अधिकारियों ने उन्हें सूचित किया था कि एक ही दिन में दो सर्जरी करना एक गलती थी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://trendstopic.in/finger-operation-was-to-be-done-in-kerala-tongue-operation-was-done/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
		<enclosure url="https://trendstopic.in/wp-content/uploads/2024/05/Kerala.jpg" length="132882" type="image/jpeg" />
	</item>
		<item>
		<title>Punjab और Haryana में बुधवार सीज़न का सबसे गर्म दिन, गर्मी के कारन हुई मौत</title>
		<link>https://trendstopic.in/wednesday-is-the-hottest-day-of-the-season-in-punjab-and-haryana/</link>
					<comments>https://trendstopic.in/wednesday-is-the-hottest-day-of-the-season-in-punjab-and-haryana/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor 1]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 16 May 2024 12:16:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[health]]></category>
		<category><![CDATA[punjab]]></category>
		<category><![CDATA[weather]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://trendstopic.in/?p=8596</guid>

					<description><![CDATA[<!-- wp:paragraph -->
<p>Punjab, हरियाणा और हिमाचल में में बुधवार को सीजन का सबसे गरम दिन रहा। Punjab में पहली बार देखने को मिला कि सभी जिलों में दिन के समय तापमान 40 डिग्री से लेकर 44 डिग्री पार तक रिकॉर्ड हुआ और सीजन का सबसे गरम दिन रहा, जबकि इससे पहले 10 से 12 जिलों में ही 40 डिग्री या इससे अधिक तापमान रिकॉर्ड हो रहा था। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भीषण गर्मी का अलर्ट जारी किया है। 4-5 दिन तक मौसम शुष्क रहेगा और दिन का तापमान 44 डिग्री तक दर्ज होगा, जबकि मौसम विभाग ने 16 से 20 मई तक अति भीषण गर्मी पड़ने और हीटवेव चलने का अलर्ट दिया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p> वहीं, हरियाणा के अधिकांश जिलों में पारा 40 डिग्री पार कर चुका है। 24 घंटे में अधिकतम तापमान में 0.9 डिग्री की बढ़ोत्तरी हुई है। मेवात में सबसे अधिक 43.8 डिग्री तापमान आंका गया। सिरसा में 43.7 डिग्री, फरीदाबाद में 42.8 डिग्री, भिवानी में 42.6, हिसार में 42 डिग्री, रेवाड़ी में 42.5, रोहतक में 42.9 डिग्री तापमान रहा। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 20 मई तक लू चल सकती है शिमला का तापमान 27 डिग्री रहा, जो इस सीजन में सबसे ज्यादा है। नेरी का तापमान 42 डिग्री तक पहुंच गया है। 17 मई से हिमाचल में डब्ल्यूडी एक्टिव होगा जो 21 तक सक्रिय रहेगा। इस दौरान बारिश, तूफान और ओलावृष्टि होने की संभावना है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>वहीं, जिले के ही अधीन आते समराला के एरिया में तापमान काफी ज्यादा अधिक रिकार्ड किया गया है। आइएमडी की तरफ से जारी सूचना मुताबिक सूबे में सबसे गर्मी एरिया समराला रहा, जहां पर अधिकतम तापमान 44.5 डिग्री रिकार्ड किया गया है। जबकि औसत पूरे जिले में पारा 42 डिग्री के करीब रिकार्ड हुआ है। वहीं, न्यूनतम तापमान की बात करें तो जिले ये भी 22.8 डिग्री रिकार्ड किया गया।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p> </p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>गर्मी के कारण चक्कर आने से गिरा, मौत</strong><br>लुधियाना बुधवार को एक युवक की गर्मी से मौत हो गई। थाना डिवीजन 8 पुलिस को बुधवार करीब 12 बजे सूचना मिली कि गुरु नानक देव स्टेडियम दुर्गा माता मंदिर के पास एक युवक का शव मिला है। जिसकी पहचान 30 वर्षीय संदीप कुमार पुत्र परमिंदर सिंह वासी शहीद भगत सिंह नगर, गांव गिल के रूप में हुई।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p> पुलिस ने जांच शुरू की तो परिजनों ने बताया कि मृतक घर से 4 दिनों से लापता था। बीते दिन रात को वह घर पर किसी को बिना कुछ कहे चला गया। परिजन उसकी तलाश कर रहे थे। इस बारे में डिवीजन 8 से जांच अधिकारी जनकराज ने बताया कि उन्हें कंट्रोल रूम से सूचना मिली थी, मौके पर जाकर देखा तो वहां पर युवक का शव मिला। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि युवक को गर्मी की वजह से चक्कर आया, वह जमीन पर गिर गया। जब वह नहीं उठा तो लोगों ने उसे चेक किया तो उसकी मौत हो चुकी थी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<!-- wp:paragraph -->
<p>Punjab, हरियाणा और हिमाचल में में बुधवार को सीजन का सबसे गरम दिन रहा। Punjab में पहली बार देखने को मिला कि सभी जिलों में दिन के समय तापमान 40 डिग्री से लेकर 44 डिग्री पार तक रिकॉर्ड हुआ और सीजन का सबसे गरम दिन रहा, जबकि इससे पहले 10 से 12 जिलों में ही 40 डिग्री या इससे अधिक तापमान रिकॉर्ड हो रहा था। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भीषण गर्मी का अलर्ट जारी किया है। 4-5 दिन तक मौसम शुष्क रहेगा और दिन का तापमान 44 डिग्री तक दर्ज होगा, जबकि मौसम विभाग ने 16 से 20 मई तक अति भीषण गर्मी पड़ने और हीटवेव चलने का अलर्ट दिया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p> वहीं, हरियाणा के अधिकांश जिलों में पारा 40 डिग्री पार कर चुका है। 24 घंटे में अधिकतम तापमान में 0.9 डिग्री की बढ़ोत्तरी हुई है। मेवात में सबसे अधिक 43.8 डिग्री तापमान आंका गया। सिरसा में 43.7 डिग्री, फरीदाबाद में 42.8 डिग्री, भिवानी में 42.6, हिसार में 42 डिग्री, रेवाड़ी में 42.5, रोहतक में 42.9 डिग्री तापमान रहा। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 20 मई तक लू चल सकती है शिमला का तापमान 27 डिग्री रहा, जो इस सीजन में सबसे ज्यादा है। नेरी का तापमान 42 डिग्री तक पहुंच गया है। 17 मई से हिमाचल में डब्ल्यूडी एक्टिव होगा जो 21 तक सक्रिय रहेगा। इस दौरान बारिश, तूफान और ओलावृष्टि होने की संभावना है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>वहीं, जिले के ही अधीन आते समराला के एरिया में तापमान काफी ज्यादा अधिक रिकार्ड किया गया है। आइएमडी की तरफ से जारी सूचना मुताबिक सूबे में सबसे गर्मी एरिया समराला रहा, जहां पर अधिकतम तापमान 44.5 डिग्री रिकार्ड किया गया है। जबकि औसत पूरे जिले में पारा 42 डिग्री के करीब रिकार्ड हुआ है। वहीं, न्यूनतम तापमान की बात करें तो जिले ये भी 22.8 डिग्री रिकार्ड किया गया।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p> </p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>गर्मी के कारण चक्कर आने से गिरा, मौत</strong><br>लुधियाना बुधवार को एक युवक की गर्मी से मौत हो गई। थाना डिवीजन 8 पुलिस को बुधवार करीब 12 बजे सूचना मिली कि गुरु नानक देव स्टेडियम दुर्गा माता मंदिर के पास एक युवक का शव मिला है। जिसकी पहचान 30 वर्षीय संदीप कुमार पुत्र परमिंदर सिंह वासी शहीद भगत सिंह नगर, गांव गिल के रूप में हुई।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p> पुलिस ने जांच शुरू की तो परिजनों ने बताया कि मृतक घर से 4 दिनों से लापता था। बीते दिन रात को वह घर पर किसी को बिना कुछ कहे चला गया। परिजन उसकी तलाश कर रहे थे। इस बारे में डिवीजन 8 से जांच अधिकारी जनकराज ने बताया कि उन्हें कंट्रोल रूम से सूचना मिली थी, मौके पर जाकर देखा तो वहां पर युवक का शव मिला। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि युवक को गर्मी की वजह से चक्कर आया, वह जमीन पर गिर गया। जब वह नहीं उठा तो लोगों ने उसे चेक किया तो उसकी मौत हो चुकी थी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://trendstopic.in/wednesday-is-the-hottest-day-of-the-season-in-punjab-and-haryana/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
		<enclosure url="https://trendstopic.in/wp-content/uploads/2024/05/Punjab-1.jpg" length="246596" type="image/jpeg" />
	</item>
		<item>
		<title>नए खुलासे के बाद AstraZeneca ने उठाया बड़ा कदम, दुनिया भर से Vaccine लिए वापिस</title>
		<link>https://trendstopic.in/astrazeneca-took-a-big-step-after-new-revelations/</link>
					<comments>https://trendstopic.in/astrazeneca-took-a-big-step-after-new-revelations/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor 1]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 08 May 2024 07:27:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[health]]></category>
		<category><![CDATA[news]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://trendstopic.in/?p=8379</guid>

					<description><![CDATA[<!-- wp:paragraph -->
<p>AstraZeneca द्वारा विकसित कोरोना वायरस Vaccine पर मचे बवाल के बीच एक नया अपडेट सामने आया है । एक बड़ी दवा निर्माता कंपनी अब दुनिया भर से अपनी वैक्सीन वापस ले रही है। आपको बता दें कि कुछ दिन पहले ही दवा कंपनी AstraZeneca ने कोर्ट में वैक्सीन के खतरनाक साइड इफेक्ट की बात स्वीकारी थी| इसके बाद कंपनी ने यह कदम उठाया है. हालांकि, कंपनी का कहना है कि साइड इफेक्ट विवाद और वैक्सीन वापस लेने की प्रक्रिया एक संयोग है| मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक AstraZeneca ने भी वैक्सीन वापस लेने की जानकारी दी है|</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>कुछ दिन पहले प्रमुख दवा निर्माता कंपनी AstraZeneca ने ब्रिटिश कोर्ट में कोरोना वैक्सीन के साइड इफेक्ट की बात स्वीकारी थी। AstraZeneca द्वारा विकसित कोरोना वैक्सीन के साइड इफेक्ट को लेकर 50 से ज्यादा लोगों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. AstraZeneca  की वैक्सीन वैक्सजेवरिया को लेकर सवाल उठे थे| हालाँकि, कंपनी का कहना है कि वैक्सवेरिया वैक्सीन के दुष्प्रभाव दुर्लभ हैं। द टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साइड इफेक्ट को लेकर काफी हंगामे के बाद AstraZeneca ने वैक्सीन को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>AstraZeneca का बड़ा बयान दुनिया भर में Waxjaveria वैक्सीन की वापसी के बीच आया है। कंपनी ने कहा कि कोर्ट में साइड इफेक्ट और वैक्सीन वापस लेने के समय की बात महज एक संयोग है| ये दोनों संबंधित नहीं हैं. दवा निर्माता कंपनी का कहना है कि व्यावसायिक कारणों से कोविड-19 वैक्सीन Waxjaveria को बाजार से वापस लिया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने कहा कि वह अब वैक्सीन का निर्माण या आपूर्ति नहीं कर रही है। फार्मा कंपनी ने वैक्सीन वापस लेने के फैसले को 'पूरी तरह से संयोग' करार देते हुए जोर देकर कहा है कि वैक्सीन वापसी का टीटीएस से कोई लेना-देना नहीं है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>AstraZeneca ने 5 मार्च को वैक्सवेरिया वैक्सीन को वापस लेने के लिए एक आवेदन दाखिल किया था| यह 7 मई से लागू हो गया है| Waxjaveria एक दुर्लभ दुष्प्रभाव के कारण वैश्विक जांच के दायरे में है जिसके परिणामस्वरूप रक्त के थक्के और कम रक्त प्लेटलेट्स होते हैं। फरवरी में उच्च न्यायालय में दायर अदालती दस्तावेजों में, एस्ट्राजेनेका ने स्वीकार किया कि टीका दुर्लभ मामलों में टीटीएस का कारण बन सकता है। टीटीएस के कारण ब्रिटेन में कम से कम 81 मौतें हुई हैं, साथ ही इसके कई गंभीर दुष्प्रभाव भी हुए हैं। AstraZeneca  वैक्सीन को लेकर 50 लोगों की ओर से कोर्ट में याचिका दायर की गई है|</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<!-- wp:paragraph -->
<p>AstraZeneca द्वारा विकसित कोरोना वायरस Vaccine पर मचे बवाल के बीच एक नया अपडेट सामने आया है । एक बड़ी दवा निर्माता कंपनी अब दुनिया भर से अपनी वैक्सीन वापस ले रही है। आपको बता दें कि कुछ दिन पहले ही दवा कंपनी AstraZeneca ने कोर्ट में वैक्सीन के खतरनाक साइड इफेक्ट की बात स्वीकारी थी| इसके बाद कंपनी ने यह कदम उठाया है. हालांकि, कंपनी का कहना है कि साइड इफेक्ट विवाद और वैक्सीन वापस लेने की प्रक्रिया एक संयोग है| मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक AstraZeneca ने भी वैक्सीन वापस लेने की जानकारी दी है|</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>कुछ दिन पहले प्रमुख दवा निर्माता कंपनी AstraZeneca ने ब्रिटिश कोर्ट में कोरोना वैक्सीन के साइड इफेक्ट की बात स्वीकारी थी। AstraZeneca द्वारा विकसित कोरोना वैक्सीन के साइड इफेक्ट को लेकर 50 से ज्यादा लोगों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. AstraZeneca  की वैक्सीन वैक्सजेवरिया को लेकर सवाल उठे थे| हालाँकि, कंपनी का कहना है कि वैक्सवेरिया वैक्सीन के दुष्प्रभाव दुर्लभ हैं। द टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साइड इफेक्ट को लेकर काफी हंगामे के बाद AstraZeneca ने वैक्सीन को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>AstraZeneca का बड़ा बयान दुनिया भर में Waxjaveria वैक्सीन की वापसी के बीच आया है। कंपनी ने कहा कि कोर्ट में साइड इफेक्ट और वैक्सीन वापस लेने के समय की बात महज एक संयोग है| ये दोनों संबंधित नहीं हैं. दवा निर्माता कंपनी का कहना है कि व्यावसायिक कारणों से कोविड-19 वैक्सीन Waxjaveria को बाजार से वापस लिया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने कहा कि वह अब वैक्सीन का निर्माण या आपूर्ति नहीं कर रही है। फार्मा कंपनी ने वैक्सीन वापस लेने के फैसले को 'पूरी तरह से संयोग' करार देते हुए जोर देकर कहा है कि वैक्सीन वापसी का टीटीएस से कोई लेना-देना नहीं है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>AstraZeneca ने 5 मार्च को वैक्सवेरिया वैक्सीन को वापस लेने के लिए एक आवेदन दाखिल किया था| यह 7 मई से लागू हो गया है| Waxjaveria एक दुर्लभ दुष्प्रभाव के कारण वैश्विक जांच के दायरे में है जिसके परिणामस्वरूप रक्त के थक्के और कम रक्त प्लेटलेट्स होते हैं। फरवरी में उच्च न्यायालय में दायर अदालती दस्तावेजों में, एस्ट्राजेनेका ने स्वीकार किया कि टीका दुर्लभ मामलों में टीटीएस का कारण बन सकता है। टीटीएस के कारण ब्रिटेन में कम से कम 81 मौतें हुई हैं, साथ ही इसके कई गंभीर दुष्प्रभाव भी हुए हैं। AstraZeneca  वैक्सीन को लेकर 50 लोगों की ओर से कोर्ट में याचिका दायर की गई है|</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://trendstopic.in/astrazeneca-took-a-big-step-after-new-revelations/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
		<enclosure url="https://trendstopic.in/wp-content/uploads/2024/05/AstraZeneca.webp" length="87870" type="image/webp" />
	</item>
		<item>
		<title>Turmeric इस तरीके से करे हल्दी का सेवन, हर होगी जड़ से दूर</title>
		<link>https://trendstopic.in/consume-turmeric-in-this-manner-the-roots-will-go-away/</link>
					<comments>https://trendstopic.in/consume-turmeric-in-this-manner-the-roots-will-go-away/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor 1]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 May 2024 11:27:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<category><![CDATA[health]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://trendstopic.in/?p=8359</guid>

					<description><![CDATA[<!-- wp:paragraph -->
<p>Turmeric के औषधीय गुणों के बारे में तो सभी जानते हैं। कई बीमारियों में संजीवनी की तरह काम करने वाला यह मसाला अपने आप में स्वस्थ लोगों के लिए अमृत और बीमारों के लिए वरदान है। हर घर में आसानी से मिलने वाला यह मसाला किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है। इसका प्रयोग कई बीमारियों में कई तरह से किया जाता है। यह बहुत उपयोगी और असरदार है|</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इसका उपयोग प्राचीन काल से ही कुछ प्रसिद्ध बीमारियों की दवा के रूप में किया जाता रहा है।<br>बतादें कि यह एक खास औषधि है| इसका उपयोग सर्दी-खांसी, बुखार, सिरदर्द, आंखों का दर्द, कान का दर्द, पायरिया, गले की खराश, पेट दर्द, बवासीर, पीलिया, मधुमेह, छाती संबंधी रोग, प्रदर, विभिन्न त्वचा रोग, सूजन, पुरानी बीमारियों के लिए किया जाता है लाभदायक और लाभकारी|</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>त्वचा संबंधी रोगों में नीम की पत्ती का पेस्ट और इसके पाउडर का सेवन किया जाता है। शाम को गर्म दूध में एक चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर पी सकते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>अंदरूनी चोट लगने पर इसे गर्म करके चार राई के दाने के बराबर चूना मिलाकर लगाया जाता है। यूं तो प्राचीन काल से ही इसका इस्तेमाल कई तरह से किया जाता रहा है जो बहुत फायदेमंद है। हालाँकि, प्रत्येक दवा के अपने अनूठे उपयोग, महत्व और दुष्प्रभाव होते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>Turmeric एक बहुत ही गुणकारी औषधि है लेकिन इसका अधिक उपयोग शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है। उदाहरण के लिए, अत्यधिक सेवन से रक्त शर्करा का स्तर बहुत कम हो सकता है, पेट की समस्याएं, रक्तस्राव, एसिडिटी, पीलिया और दस्त हो सकते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>किडनी के मरीजों और पथरी के मरीजों को भी इसके सेवन से बचना चाहिए| आप देख सकते हैं कि ऊपर बताए गए कई रोगों में इसके बहुत महत्वपूर्ण फायदे हैं, लेकिन सही और बेहतरीन लाभ पाने के लिए इसका सेवन किसी आयुर्वेद चिकित्सक से सलाह लेने के बाद ही करें, क्योंकि कुछ स्थितियों में इसका सेवन हानिकारक नहीं हो सकता है | Turmeric का सेवन करना हमारी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है |</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<!-- wp:paragraph -->
<p>Turmeric के औषधीय गुणों के बारे में तो सभी जानते हैं। कई बीमारियों में संजीवनी की तरह काम करने वाला यह मसाला अपने आप में स्वस्थ लोगों के लिए अमृत और बीमारों के लिए वरदान है। हर घर में आसानी से मिलने वाला यह मसाला किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है। इसका प्रयोग कई बीमारियों में कई तरह से किया जाता है। यह बहुत उपयोगी और असरदार है|</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इसका उपयोग प्राचीन काल से ही कुछ प्रसिद्ध बीमारियों की दवा के रूप में किया जाता रहा है।<br>बतादें कि यह एक खास औषधि है| इसका उपयोग सर्दी-खांसी, बुखार, सिरदर्द, आंखों का दर्द, कान का दर्द, पायरिया, गले की खराश, पेट दर्द, बवासीर, पीलिया, मधुमेह, छाती संबंधी रोग, प्रदर, विभिन्न त्वचा रोग, सूजन, पुरानी बीमारियों के लिए किया जाता है लाभदायक और लाभकारी|</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>त्वचा संबंधी रोगों में नीम की पत्ती का पेस्ट और इसके पाउडर का सेवन किया जाता है। शाम को गर्म दूध में एक चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर पी सकते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>अंदरूनी चोट लगने पर इसे गर्म करके चार राई के दाने के बराबर चूना मिलाकर लगाया जाता है। यूं तो प्राचीन काल से ही इसका इस्तेमाल कई तरह से किया जाता रहा है जो बहुत फायदेमंद है। हालाँकि, प्रत्येक दवा के अपने अनूठे उपयोग, महत्व और दुष्प्रभाव होते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>Turmeric एक बहुत ही गुणकारी औषधि है लेकिन इसका अधिक उपयोग शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है। उदाहरण के लिए, अत्यधिक सेवन से रक्त शर्करा का स्तर बहुत कम हो सकता है, पेट की समस्याएं, रक्तस्राव, एसिडिटी, पीलिया और दस्त हो सकते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>किडनी के मरीजों और पथरी के मरीजों को भी इसके सेवन से बचना चाहिए| आप देख सकते हैं कि ऊपर बताए गए कई रोगों में इसके बहुत महत्वपूर्ण फायदे हैं, लेकिन सही और बेहतरीन लाभ पाने के लिए इसका सेवन किसी आयुर्वेद चिकित्सक से सलाह लेने के बाद ही करें, क्योंकि कुछ स्थितियों में इसका सेवन हानिकारक नहीं हो सकता है | Turmeric का सेवन करना हमारी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है |</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://trendstopic.in/consume-turmeric-in-this-manner-the-roots-will-go-away/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
		<enclosure url="https://trendstopic.in/wp-content/uploads/2024/05/Turmeric-1.jpg" length="169233" type="image/jpeg" />
	</item>
		<item>
		<title>आखिर क्यों बच्चों को ज्यादा खतरा है Dengue से, जानिए कारण और लक्षण</title>
		<link>https://trendstopic.in/why-are-children-at-greater-risk-from-dengue/</link>
					<comments>https://trendstopic.in/why-are-children-at-greater-risk-from-dengue/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor 1]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 04 May 2024 11:02:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<category><![CDATA[health]]></category>
		<category><![CDATA[news]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://trendstopic.in/?p=8308</guid>

					<description><![CDATA[<!-- wp:paragraph -->
<p>मच्छरों से होने वाली ये बीमारियाँ बहुत गंभीर होती हैं। स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने के अलावा, वे जीवन के लिए खतरा भी हो सकते हैं। Dengue वयस्कों की तुलना में बच्चों के लिए अधिक हानिकारक है। Dengue के बाद बच्चों में मौत का खतरा भी अधिक होता है। इसलिए बच्चों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। साइंसडायरेक्ट में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, Dengue से पीड़ित 80 प्रतिशत से अधिक बच्चे 9 वर्ष से कम उम्र के हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दरअसल, 5 से 10 साल की उम्र के बच्चों में Dengue होने की संभावना अधिक होती है और यह जानलेवा हो सकता है। विश्व स्तर पर, Dengue से होने वाली अधिकांश मौतें 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में होती हैं। अध्ययनों से पता चला है कि बच्चों में Dengue से होने वाली मौतों की संख्या वयस्कों की तुलना में 4 गुना अधिक है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, बच्चों में Dengue से होने वाली मौतें डेंगू से होने वाली कुल मौतों में से लगभग 5 प्रतिशत हैं। हालाँकि, अगर समय पर इलाज मिले तो इसे 1 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>बच्चों में Dengue</strong> <strong>के लक्षण</strong></p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बच्चों में तेज बुखार, उल्टी, दस्त, शरीर में दर्द, शरीर पर दाने आदि Dengue के लक्षण हो सकते हैं। इनमें से किसी भी लक्षण को तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। थोड़ी सी लापरवाही आपके बच्चे के लिए हानिकारक हो सकती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>बच्चों को क्यों है ज्यादा खतरा</strong><br>एमसीडी दिल्ली के सेवानिवृत्त नोडल अधिकारी डॉ. सतपाल के मुताबिक, बच्चों को Dengue का खतरा ज्यादा है। उन्होंने कहा कि बच्चों की ज्यादातर मौतें Dengue शॉक सिंड्रोम के कारण होती हैं। आघात से बच्चों में अंग विफलता का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा Dengue  हेमोरेजिक सिंड्रोम भी बुजुर्गों के लिए घातक है। ऐसे कई कारण हैं जिनकी वजह से Dengue बच्चों में अधिक नुकसान पहुंचाता है, जो नीचे सूचीबद्ध हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>एक बच्चे की प्रतिरक्षा प्रणाली एक वयस्क की तुलना में कमजोर होती है। इस कारण Dengue उन पर अधिक प्रभाव डालता है। शरीर के कमजोर होने के कारण वे Dengue जैसी गंभीर बीमारी का सामना नहीं कर पाते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>Dengue का मुख्य लक्षण बुखार है। कई बार बच्चों में Dengue का समय पर पता नहीं चल पाता है। जिसके कारण Dengue उन पर अधिक गंभीर प्रभाव डालता है। विलंबित निदान उन्हें और अधिक बीमार बना देता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>छोटे बच्चे मच्छरों के प्रति संवेदनशील नहीं होते हैं। जिसके कारण मच्छर उन्हें अधिक काटते हैं। अधिक मच्छरों के काटने से बच्चों में Dengue होने की संभावना भी बढ़ जाती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जांच में देरी</strong></p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>कई बार घर पर बच्चों में Dengue के लक्षण पहचान में नहीं आते। वे बच्चे के बुखार को सामान्य बुखार मानकर इलाज करते रहे। Dengue की जांच में देरी से बच्चे की मौत भी हो सकती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<!-- wp:paragraph -->
<p>मच्छरों से होने वाली ये बीमारियाँ बहुत गंभीर होती हैं। स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने के अलावा, वे जीवन के लिए खतरा भी हो सकते हैं। Dengue वयस्कों की तुलना में बच्चों के लिए अधिक हानिकारक है। Dengue के बाद बच्चों में मौत का खतरा भी अधिक होता है। इसलिए बच्चों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। साइंसडायरेक्ट में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, Dengue से पीड़ित 80 प्रतिशत से अधिक बच्चे 9 वर्ष से कम उम्र के हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दरअसल, 5 से 10 साल की उम्र के बच्चों में Dengue होने की संभावना अधिक होती है और यह जानलेवा हो सकता है। विश्व स्तर पर, Dengue से होने वाली अधिकांश मौतें 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में होती हैं। अध्ययनों से पता चला है कि बच्चों में Dengue से होने वाली मौतों की संख्या वयस्कों की तुलना में 4 गुना अधिक है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, बच्चों में Dengue से होने वाली मौतें डेंगू से होने वाली कुल मौतों में से लगभग 5 प्रतिशत हैं। हालाँकि, अगर समय पर इलाज मिले तो इसे 1 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>बच्चों में Dengue</strong> <strong>के लक्षण</strong></p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बच्चों में तेज बुखार, उल्टी, दस्त, शरीर में दर्द, शरीर पर दाने आदि Dengue के लक्षण हो सकते हैं। इनमें से किसी भी लक्षण को तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। थोड़ी सी लापरवाही आपके बच्चे के लिए हानिकारक हो सकती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>बच्चों को क्यों है ज्यादा खतरा</strong><br>एमसीडी दिल्ली के सेवानिवृत्त नोडल अधिकारी डॉ. सतपाल के मुताबिक, बच्चों को Dengue का खतरा ज्यादा है। उन्होंने कहा कि बच्चों की ज्यादातर मौतें Dengue शॉक सिंड्रोम के कारण होती हैं। आघात से बच्चों में अंग विफलता का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा Dengue  हेमोरेजिक सिंड्रोम भी बुजुर्गों के लिए घातक है। ऐसे कई कारण हैं जिनकी वजह से Dengue बच्चों में अधिक नुकसान पहुंचाता है, जो नीचे सूचीबद्ध हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>एक बच्चे की प्रतिरक्षा प्रणाली एक वयस्क की तुलना में कमजोर होती है। इस कारण Dengue उन पर अधिक प्रभाव डालता है। शरीर के कमजोर होने के कारण वे Dengue जैसी गंभीर बीमारी का सामना नहीं कर पाते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>Dengue का मुख्य लक्षण बुखार है। कई बार बच्चों में Dengue का समय पर पता नहीं चल पाता है। जिसके कारण Dengue उन पर अधिक गंभीर प्रभाव डालता है। विलंबित निदान उन्हें और अधिक बीमार बना देता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>छोटे बच्चे मच्छरों के प्रति संवेदनशील नहीं होते हैं। जिसके कारण मच्छर उन्हें अधिक काटते हैं। अधिक मच्छरों के काटने से बच्चों में Dengue होने की संभावना भी बढ़ जाती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जांच में देरी</strong></p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>कई बार घर पर बच्चों में Dengue के लक्षण पहचान में नहीं आते। वे बच्चे के बुखार को सामान्य बुखार मानकर इलाज करते रहे। Dengue की जांच में देरी से बच्चे की मौत भी हो सकती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://trendstopic.in/why-are-children-at-greater-risk-from-dengue/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
		<enclosure url="https://trendstopic.in/wp-content/uploads/2024/05/Dengue.jpg" length="116909" type="image/jpeg" />
	</item>
		<item>
		<title>Weight Loss करना चाहते है तो इसे अपने आहार में जरूर शामिल करे, फिर देखिये कमाल</title>
		<link>https://trendstopic.in/if-you-want-to-lose-weight-then-definitely-include-it-in-your-diet/</link>
					<comments>https://trendstopic.in/if-you-want-to-lose-weight-then-definitely-include-it-in-your-diet/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor 1]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 May 2024 12:14:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<category><![CDATA[health]]></category>
		<category><![CDATA[news]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://trendstopic.in/?p=8285</guid>

					<description><![CDATA[<!-- wp:paragraph -->
<p>ऑफिस में किसी ने सुषमा को रोका, 'सुषमा , तुम्हारा Weight बढ़ने लगा है, ध्यान दो।' यह सुनकर सुषमा  घर गई और अपनी मां से कहा, 'अब मेरे टिफिन में घी मत डालना, सुषमा ही नहीं, जब भी किसी को अपना Weight कम करना होता है या अपना Weight नियंत्रित  करना होता है तो सबसे पहले हम घी निकालते हैं।' हमारे खाने से सिर्फ तेल ही गायब होता है|  लेकिन क्या आप जानते हैं कि घी आपके Weight को नियंत्रित करने और आपको पतला बनने में मदद कर सकता है? प्रसिद्ध पोषण विशेषज्ञ साक्षी लालवानी के अनुसार, हम जो सबसे बड़ी गलती करते हैं वह है अपने आहार से घी को खत्म करना।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>आपको याद होगा पुराने जमाने में हमारी दादी-नानी अक्सर अपने खाने में घी का इस्तेमाल करती थीं, चाहे रोटी हो या दाल। इतना ही नहीं, कई खाद्य पदार्थ ऐसे भी थे, जिन्हें सिर्फ घी के साथ खाया जाता था। दाल ढोकली हो या राजस्थान का मशहूर दाल-बाटी चूरमा, घी का इस्तेमाल अक्सर हमारे खाने में किया जाता है। लेकिन वजन कम करने के लिए हम अक्सर अपनी डाइट से तैलीय चीजें और वसा को हटा देते हैं और इसी वजह से घी खाना भी बंद कर देते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><br>पोषण विशेषज्ञ अपने इंस्टाग्राम वीडियो में बताती हैं कि घी में वास्तव में मध्यम-श्रृंखला फैटी एसिड होते हैं, जो घी को ऊर्जा बूस्टर में बदल देते हैं। इससे घी फैट बर्न करने में मदद करता है। इतना ही नहीं, घी में संयुग्मित लिनोलिक एसिड (सीएलए) भी होता है, जो शरीर की चर्बी को कम करके Weight घटाने में सहायता करता है। इसके साथ ही यह कमजोर मांसपेशियों को भी उत्तेजित करता है। घी में विटामिन ए, डी, ई और के के साथ-साथ एंटीऑक्सीडेंट भी होते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>यानी जिस घी को आप अपने Weight का दुश्मन समझते हैं, वह असल में Weight कम करने की प्रक्रिया में आपका दोस्त साबित होता है। इतना ही नहीं, घी का सेवन आपको कब्ज या एसिडिटी जैसी समस्याओं से भी बचा सकता है। डाइटिशियन श्वेता शाह अपने वीडियो में बताती हैं कि अगर आपको कब्ज जैसी कोई समस्या है तो आपको अपने दिन की शुरुआत एक चम्मच घी से करनी चाहिए। अगर आप अपने दिन की शुरुआत खाली पेट एक चम्मच घी के साथ करते हैं तो आपको कब्ज की समस्या नहीं होगी. यह पूरे दिन आपके शुगर लेवल को नियंत्रित करने का भी काम करता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<!-- wp:paragraph -->
<p>ऑफिस में किसी ने सुषमा को रोका, 'सुषमा , तुम्हारा Weight बढ़ने लगा है, ध्यान दो।' यह सुनकर सुषमा  घर गई और अपनी मां से कहा, 'अब मेरे टिफिन में घी मत डालना, सुषमा ही नहीं, जब भी किसी को अपना Weight कम करना होता है या अपना Weight नियंत्रित  करना होता है तो सबसे पहले हम घी निकालते हैं।' हमारे खाने से सिर्फ तेल ही गायब होता है|  लेकिन क्या आप जानते हैं कि घी आपके Weight को नियंत्रित करने और आपको पतला बनने में मदद कर सकता है? प्रसिद्ध पोषण विशेषज्ञ साक्षी लालवानी के अनुसार, हम जो सबसे बड़ी गलती करते हैं वह है अपने आहार से घी को खत्म करना।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>आपको याद होगा पुराने जमाने में हमारी दादी-नानी अक्सर अपने खाने में घी का इस्तेमाल करती थीं, चाहे रोटी हो या दाल। इतना ही नहीं, कई खाद्य पदार्थ ऐसे भी थे, जिन्हें सिर्फ घी के साथ खाया जाता था। दाल ढोकली हो या राजस्थान का मशहूर दाल-बाटी चूरमा, घी का इस्तेमाल अक्सर हमारे खाने में किया जाता है। लेकिन वजन कम करने के लिए हम अक्सर अपनी डाइट से तैलीय चीजें और वसा को हटा देते हैं और इसी वजह से घी खाना भी बंद कर देते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><br>पोषण विशेषज्ञ अपने इंस्टाग्राम वीडियो में बताती हैं कि घी में वास्तव में मध्यम-श्रृंखला फैटी एसिड होते हैं, जो घी को ऊर्जा बूस्टर में बदल देते हैं। इससे घी फैट बर्न करने में मदद करता है। इतना ही नहीं, घी में संयुग्मित लिनोलिक एसिड (सीएलए) भी होता है, जो शरीर की चर्बी को कम करके Weight घटाने में सहायता करता है। इसके साथ ही यह कमजोर मांसपेशियों को भी उत्तेजित करता है। घी में विटामिन ए, डी, ई और के के साथ-साथ एंटीऑक्सीडेंट भी होते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>यानी जिस घी को आप अपने Weight का दुश्मन समझते हैं, वह असल में Weight कम करने की प्रक्रिया में आपका दोस्त साबित होता है। इतना ही नहीं, घी का सेवन आपको कब्ज या एसिडिटी जैसी समस्याओं से भी बचा सकता है। डाइटिशियन श्वेता शाह अपने वीडियो में बताती हैं कि अगर आपको कब्ज जैसी कोई समस्या है तो आपको अपने दिन की शुरुआत एक चम्मच घी से करनी चाहिए। अगर आप अपने दिन की शुरुआत खाली पेट एक चम्मच घी के साथ करते हैं तो आपको कब्ज की समस्या नहीं होगी. यह पूरे दिन आपके शुगर लेवल को नियंत्रित करने का भी काम करता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://trendstopic.in/if-you-want-to-lose-weight-then-definitely-include-it-in-your-diet/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
		<enclosure url="https://trendstopic.in/wp-content/uploads/2024/05/Weight.jpg" length="186038" type="image/jpeg" />
	</item>
		<item>
		<title>CoviShield वैक्सीन से लोगो की जान को खतरा, AstraZeneca कंपनी ने खुद कबूला</title>
		<link>https://trendstopic.in/covishield-vaccine-poses-a-threat-to-peoples-lives-astrazeneca-company-itself-admitted/</link>
					<comments>https://trendstopic.in/covishield-vaccine-poses-a-threat-to-peoples-lives-astrazeneca-company-itself-admitted/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor 1]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 30 Apr 2024 06:30:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[News]]></category>
		<category><![CDATA[health]]></category>
		<category><![CDATA[news]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://trendstopic.in/?p=8178</guid>

					<description><![CDATA[<!-- wp:paragraph -->
<p>corona virus से बचाव के लिए इस्तेमाल की जा रही वैक्सीन से साइड इफेक्ट के तमाम दावों के बीच CoviShield वैक्सीन बनाने वाली कंपनी AstraZeneca ने बड़ा खुलासा किया है। कंपनी ने अदालती दस्तावेजों में पहली बार माना है कि कोविड-19 वैक्सीन से खून का थक्का जमने जैसे दुष्प्रभाव हो सकते हैं। हालांकि, कंपनी का दावा है कि ऐसे साइड इफेक्ट के मामलों की संख्या बहुत कम है| </p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ब्रिटिश अखबार डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, कई परिवारों ने कोरोना वैक्सीन से होने वाले नुकसान का आरोप लगाते हुए मुकदमा दायर किया, जिसके बाद प्रमुख दवा कंपनी ने अदालत में स्वीकार किया कि वैक्सीन गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दरअसल, जेमी स्कॉट ने AstraZenecaके खिलाफ मुकदमा दायर किया था। उन्होंने अप्रैल 2021 में कोरोना वैक्सीन की खुराक ली थी, जिसके बाद उन्हें स्थायी मस्तिष्क क्षति हुई। जेमी स्कॉट सहित कई अन्य रोगियों में TTS के साथ थ्रोम्बोसिस नामक एक दुर्लभ लक्षण था। इन सभी ने कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज कर मुआवजे की मांग की.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस साल फरवरी में यूके की एक अदालत में प्रस्तुत एक कानूनी दस्तावेज़ में, कैम्ब्रिज स्थित कंपनी ने स्वीकार किया कि उसका टीका 'दुर्लभ मामलों में, थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम (TTS) का जिक्र करते हुए TTS का कारण बन सकता है।' ऐसे में प्लेटलेट काउंट कम होना और खून का थक्का जमना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>आपको बता दें कि कोरोना महामारी के दौरान दवा कंपनी एस्ट्राजेनेका ने इस वायरस से बचाव के लिए ऑक्सफोर्ड के साथ मिलकर कोविड वैक्सीन बनाई थी. वहीं भारत में वैक्सीन निर्माता कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ने एस्ट्राजेनेका के साथ समझौते के तहत CoviShield वैक्सीन विकसित की है। इसके बाद देश के आधे से ज्यादा लोगों को CoviShield वैक्सीन दी गई.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<!-- wp:paragraph -->
<p>corona virus से बचाव के लिए इस्तेमाल की जा रही वैक्सीन से साइड इफेक्ट के तमाम दावों के बीच CoviShield वैक्सीन बनाने वाली कंपनी AstraZeneca ने बड़ा खुलासा किया है। कंपनी ने अदालती दस्तावेजों में पहली बार माना है कि कोविड-19 वैक्सीन से खून का थक्का जमने जैसे दुष्प्रभाव हो सकते हैं। हालांकि, कंपनी का दावा है कि ऐसे साइड इफेक्ट के मामलों की संख्या बहुत कम है| </p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ब्रिटिश अखबार डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, कई परिवारों ने कोरोना वैक्सीन से होने वाले नुकसान का आरोप लगाते हुए मुकदमा दायर किया, जिसके बाद प्रमुख दवा कंपनी ने अदालत में स्वीकार किया कि वैक्सीन गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दरअसल, जेमी स्कॉट ने AstraZenecaके खिलाफ मुकदमा दायर किया था। उन्होंने अप्रैल 2021 में कोरोना वैक्सीन की खुराक ली थी, जिसके बाद उन्हें स्थायी मस्तिष्क क्षति हुई। जेमी स्कॉट सहित कई अन्य रोगियों में TTS के साथ थ्रोम्बोसिस नामक एक दुर्लभ लक्षण था। इन सभी ने कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज कर मुआवजे की मांग की.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस साल फरवरी में यूके की एक अदालत में प्रस्तुत एक कानूनी दस्तावेज़ में, कैम्ब्रिज स्थित कंपनी ने स्वीकार किया कि उसका टीका 'दुर्लभ मामलों में, थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम (TTS) का जिक्र करते हुए TTS का कारण बन सकता है।' ऐसे में प्लेटलेट काउंट कम होना और खून का थक्का जमना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>आपको बता दें कि कोरोना महामारी के दौरान दवा कंपनी एस्ट्राजेनेका ने इस वायरस से बचाव के लिए ऑक्सफोर्ड के साथ मिलकर कोविड वैक्सीन बनाई थी. वहीं भारत में वैक्सीन निर्माता कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ने एस्ट्राजेनेका के साथ समझौते के तहत CoviShield वैक्सीन विकसित की है। इसके बाद देश के आधे से ज्यादा लोगों को CoviShield वैक्सीन दी गई.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://trendstopic.in/covishield-vaccine-poses-a-threat-to-peoples-lives-astrazeneca-company-itself-admitted/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
		<enclosure url="https://trendstopic.in/wp-content/uploads/2024/04/CoviShield.jpg" length="177284" type="image/jpeg" />
	</item>
		<item>
		<title>Diabetes वाले लोगो को तरबूज़ खाना चाहिए या नहीं ? जानिए फायदे और नुकसान</title>
		<link>https://trendstopic.in/should-people-with-diabetes-eat-watermelon-or-not/</link>
					<comments>https://trendstopic.in/should-people-with-diabetes-eat-watermelon-or-not/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor 1]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 29 Apr 2024 11:16:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<category><![CDATA[health]]></category>
		<category><![CDATA[news]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://trendstopic.in/?p=8165</guid>

					<description><![CDATA[<!-- wp:paragraph -->
<p>Diabetes वाले लोगों को Blood Sugar बनाए रखने की सलाह दी जाती है। इसलिए उन्हें अपने खान-पान का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। मधुमेह वाले लोगों को फल और सब्जियां खाने की सलाह दी जाती है क्योंकि यह Blood Sugar को बनाए रखने में मदद करते हैं। हालाँकि, फलों में प्राकृतिक शर्करा और कार्बोहाइड्रेट भी होते हैं। इसलिए आहार संतुलित होना चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>गर्मी के मौसम में तरबूज खूब बिकता है. हालांकि, कई लोग यह सोचकर तरबूज खाने से बचते हैं कि इसमें प्राकृतिक शुगर काफी मात्रा में होती है। डायबिटीज वाले लोगों को तरबूज खाना चाहिए या नहीं? आइए जानें - हर भोजन में एक ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है जो बताता है कि वह भोजन Blood Sugar पर कितनी जल्दी प्रभाव डालेगा। सरल शब्दों में, ग्लाइसेमिक इंडेक्स जितना कम होगा, रक्त शर्करा उतना ही कम होगा। जीआई स्केल 0 से 100 तक होता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>संख्या जितनी अधिक होगी, चीनी उतनी ही तेजी से रक्त में प्रवेश करेगी। तरबूज का जीआई लगभग 72 होता है और आमतौर पर 70 या इससे अधिक जीआई वाला कोई भी भोजन उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स श्रेणी में रखा जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>लेकिन अगर तरबूज की बात करें तो Diabetes फाउंडेशन का कहना है कि तरबूज में पानी काफी मात्रा में पाया जाता है। 120 ग्राम तरबूज का ग्लाइसेमिक इंडेक्स लगभग 5 होता है, इसलिए ताजा तरबूज खाया जा सकता है, लेकिन Diabetes वाले लोगों के लिए तरबूज का जूस पीना अच्छा नहीं माना जाता है क्योंकि जूस का ग्लाइसेमिक इंडेक्स अधिक हो सकता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>कई शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि किसी भी चीज का ग्लाइसेमिक लोड भी देखना चाहिए। ग्लाइसेमिक इंडेक्स और कार्बोहाइड्रेट सेवन की जांच करके ग्लाइसेमिक लोड देखा जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ खाने से ब्लड शुगर कितना भी बढ़ेगा, ग्लाइसेमिक लोड सटीक रहेगा। ऐसे खाद्य पदार्थ खाएं जिनमें ग्लाइसेमिक लोड 10 से कम हो। 10-19 को मध्यम तथा 19 से अधिक को उच्च माना जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>Diabetes से पीड़ित लोग ऐसे खाद्य पदार्थ खा सकते हैं जो स्वस्थ वसा, फाइबर और प्रोटीन से भरपूर हों, जैसे नट्स या बीज। ऐसा खाना खाने से पेट लंबे समय तक भरा रहेगा और खून में शुगर पहुंचने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<!-- wp:paragraph -->
<p>Diabetes वाले लोगों को Blood Sugar बनाए रखने की सलाह दी जाती है। इसलिए उन्हें अपने खान-पान का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। मधुमेह वाले लोगों को फल और सब्जियां खाने की सलाह दी जाती है क्योंकि यह Blood Sugar को बनाए रखने में मदद करते हैं। हालाँकि, फलों में प्राकृतिक शर्करा और कार्बोहाइड्रेट भी होते हैं। इसलिए आहार संतुलित होना चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>गर्मी के मौसम में तरबूज खूब बिकता है. हालांकि, कई लोग यह सोचकर तरबूज खाने से बचते हैं कि इसमें प्राकृतिक शुगर काफी मात्रा में होती है। डायबिटीज वाले लोगों को तरबूज खाना चाहिए या नहीं? आइए जानें - हर भोजन में एक ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है जो बताता है कि वह भोजन Blood Sugar पर कितनी जल्दी प्रभाव डालेगा। सरल शब्दों में, ग्लाइसेमिक इंडेक्स जितना कम होगा, रक्त शर्करा उतना ही कम होगा। जीआई स्केल 0 से 100 तक होता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>संख्या जितनी अधिक होगी, चीनी उतनी ही तेजी से रक्त में प्रवेश करेगी। तरबूज का जीआई लगभग 72 होता है और आमतौर पर 70 या इससे अधिक जीआई वाला कोई भी भोजन उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स श्रेणी में रखा जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>लेकिन अगर तरबूज की बात करें तो Diabetes फाउंडेशन का कहना है कि तरबूज में पानी काफी मात्रा में पाया जाता है। 120 ग्राम तरबूज का ग्लाइसेमिक इंडेक्स लगभग 5 होता है, इसलिए ताजा तरबूज खाया जा सकता है, लेकिन Diabetes वाले लोगों के लिए तरबूज का जूस पीना अच्छा नहीं माना जाता है क्योंकि जूस का ग्लाइसेमिक इंडेक्स अधिक हो सकता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>कई शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि किसी भी चीज का ग्लाइसेमिक लोड भी देखना चाहिए। ग्लाइसेमिक इंडेक्स और कार्बोहाइड्रेट सेवन की जांच करके ग्लाइसेमिक लोड देखा जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ खाने से ब्लड शुगर कितना भी बढ़ेगा, ग्लाइसेमिक लोड सटीक रहेगा। ऐसे खाद्य पदार्थ खाएं जिनमें ग्लाइसेमिक लोड 10 से कम हो। 10-19 को मध्यम तथा 19 से अधिक को उच्च माना जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>Diabetes से पीड़ित लोग ऐसे खाद्य पदार्थ खा सकते हैं जो स्वस्थ वसा, फाइबर और प्रोटीन से भरपूर हों, जैसे नट्स या बीज। ऐसा खाना खाने से पेट लंबे समय तक भरा रहेगा और खून में शुगर पहुंचने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://trendstopic.in/should-people-with-diabetes-eat-watermelon-or-not/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
		<enclosure url="https://trendstopic.in/wp-content/uploads/2024/04/Diabetes.jpg" length="123771" type="image/jpeg" />
	</item>
		<item>
		<title>अब अमेरिका ने MDH और Everest पर लिया बड़ा एक्शन, 31% मसाले किये वापिस</title>
		<link>https://trendstopic.in/america-took-big-action-on-mdh-and-everest/</link>
					<comments>https://trendstopic.in/america-took-big-action-on-mdh-and-everest/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor 1]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 29 Apr 2024 07:09:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[health]]></category>
		<category><![CDATA[news]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://trendstopic.in/?p=8152</guid>

					<description><![CDATA[<!-- wp:paragraph -->
<p>भारतीय मसाला निर्माता MDH और Everest के कुछ उत्पादों को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं। अब अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने MDH और Everest के उत्पादों की जांच शुरू कर दी है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मसालों में कैंसर पैदा करने वाले कीटनाशकों के उच्च स्तर पाए जाने का दावा करने के बाद हांगकांग ने कुछ कंपनियों के उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके चलते एफडीए ने जांच शुरू कर दी है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सिंगापुर ने Everest स्पाइस मिक्स को वापस भेजने का भी आदेश दिया। दूसरी ओर, Everest ने कहा है कि उसके मसाले उपभोग के लिए सुरक्षित हैं। भारत सरकार ने भी इन कंपनियों के मामलों की जांच शुरू कर दी है| </p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सीमा शुल्क अधिकारियों ने पिछले छह महीनों में MDH के 31% मसाला शिपमेंट को खारिज कर दिया है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) MDH और एवरेस्ट उत्पादों पर जानकारी एकत्र कर रहा है। उन्होंने कहा, "एफडीए रिपोर्टों से अवगत है और स्थिति पर अतिरिक्त जानकारी इकट्ठा कर रहा है।"</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>भारत में उद्योग नियामक, मसाला बोर्ड ने मसाला निर्माताओं MDH  और Everest के कुछ उत्पादों में कैंसर पैदा करने वाले कीटनाशकों की रिपोर्ट के बाद गुणवत्ता मानकों के अनुपालन के लिए उनकी सुविधाओं का निरीक्षण करना शुरू कर दिया है। बोर्ड ने बुधवार को कहा कि उसने हांगकांग और सिंगापुर के संबंधित अधिकारियों से MDH  और Everest के निर्यात पर डेटा मांगा है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<!-- wp:paragraph -->
<p>भारतीय मसाला निर्माता MDH और Everest के कुछ उत्पादों को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं। अब अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने MDH और Everest के उत्पादों की जांच शुरू कर दी है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मसालों में कैंसर पैदा करने वाले कीटनाशकों के उच्च स्तर पाए जाने का दावा करने के बाद हांगकांग ने कुछ कंपनियों के उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके चलते एफडीए ने जांच शुरू कर दी है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सिंगापुर ने Everest स्पाइस मिक्स को वापस भेजने का भी आदेश दिया। दूसरी ओर, Everest ने कहा है कि उसके मसाले उपभोग के लिए सुरक्षित हैं। भारत सरकार ने भी इन कंपनियों के मामलों की जांच शुरू कर दी है| </p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सीमा शुल्क अधिकारियों ने पिछले छह महीनों में MDH के 31% मसाला शिपमेंट को खारिज कर दिया है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) MDH और एवरेस्ट उत्पादों पर जानकारी एकत्र कर रहा है। उन्होंने कहा, "एफडीए रिपोर्टों से अवगत है और स्थिति पर अतिरिक्त जानकारी इकट्ठा कर रहा है।"</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>भारत में उद्योग नियामक, मसाला बोर्ड ने मसाला निर्माताओं MDH  और Everest के कुछ उत्पादों में कैंसर पैदा करने वाले कीटनाशकों की रिपोर्ट के बाद गुणवत्ता मानकों के अनुपालन के लिए उनकी सुविधाओं का निरीक्षण करना शुरू कर दिया है। बोर्ड ने बुधवार को कहा कि उसने हांगकांग और सिंगापुर के संबंधित अधिकारियों से MDH  और Everest के निर्यात पर डेटा मांगा है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://trendstopic.in/america-took-big-action-on-mdh-and-everest/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
		<enclosure url="https://trendstopic.in/wp-content/uploads/2024/04/Everest.jpg" length="174426" type="image/jpeg" />
	</item>
		<item>
		<title>गर्मियों में Mint का सेवन करने से दूर होती है कई बीमारी, जानिए फायदे</title>
		<link>https://trendstopic.in/consuming-mint-in-summer-cures-many-diseases-know-the-benefits/</link>
					<comments>https://trendstopic.in/consuming-mint-in-summer-cures-many-diseases-know-the-benefits/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor 1]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 28 Apr 2024 12:12:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<category><![CDATA[health]]></category>
		<category><![CDATA[news]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://trendstopic.in/?p=8137</guid>

					<description><![CDATA[<!-- wp:paragraph -->
<p>गर्मी के मौसम में Mint सेहत का साथी हो सकता है. अगर इसे अलग-अलग तरीकों से आहार में लिया जाए तो कई समस्याओं से आसानी से बचा जा सकता है। प्राकृतिक जड़ी-बूटियाँ बढ़ते तापमान के साथ शरीर को ठंडा करने में मदद करती हैं। यदि आप  Mint की पत्तियों को अपने दैनिक आहार में शामिल कर रहे हैं, तो जानें कि उन्हें घर पर कैसे उगाया जाए। तो आप इन फायदों के लिए ताजी पत्तियों का उपयोग आसानी से कर सकते हैं। जानिए Mint की पत्तियां कैसे उगाएं और इसके फायदे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:image {"align":"center","id":8144,"width":"629px","height":"auto","sizeSlug":"full","linkDestination":"none"} -->
<figure class="wp-block-image aligncenter size-full is-resized"><img src="https://trendstopic.in/wp-content/uploads/2024/04/image-11.png" alt="" class="wp-image-8144" style="width:629px;height:auto"/></figure>
<!-- /wp:image -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong> Mint शरीर को करता है</strong> <strong>ठंडा </strong><br> Mint का ठंडा गुण शरीर को ठंडा करता है और शरीर की गर्मी से राहत दिलाता है।  Mint की पत्तियों में मेन्थॉल होता है जो शरीर के तापमान को कम करता है और शारीरिक संवेदनाओं से राहत दिलाता है। Mint की पत्तियों को अपने आहार में लेने के साथ-साथ घर पर भी रखें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पाचन में सहायक</strong><br>Mint की पत्तियों का उपयोग शीतल प्रभाव के साथ पाचन के लिए किया जाता है। भोजन में Mint की पत्तियां शामिल करने से पाचन आसान हो जाता है। इससे सूजन, उल्टी और अपच जैसी समस्याएं भी नहीं होती हैं। Mint की पत्तियों की मदद से पाचन तंत्र तेज होता है और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं भी कम होती हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>बढ़ाता है Hydration</strong> <br>लोग अक्सर पानी पीना पसंद नहीं करते, इसलिए Mint की पत्तियों को पानी में मिलाकर पीने से स्वाद बढ़ जाता है और तरल पदार्थ के सेवन की मात्रा भी बढ़ जाती है। गर्म मौसम में निर्जलीकरण से बचने के लिए Mint  मिश्रित ताज़ा पेय पीने से प्यास बुझती है और जलयोजन प्रदान होता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>Tension से राहत मिलती है और मूड बेहतर <strong>है</strong></strong> <strong>होता </strong><br>Mint की पत्तियों की ताज़ा महक मूड को बेहतर बनाने में भी मदद करती है। अगर Mint की पत्तियों की चाय बनाकर पिया जाए तो यह तनाव से राहत दिलाती है और शरीर और दिमाग को आराम देती है। गर्मी के मौसम में ठंडक और शांति बनाए रखने में मदद करता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>Mint का अधिकतम लाभ पाने के लिए इसे अपने आहार में शामिल करें , इसे विभिन्न व्यंजनों में शामिल करने के अलावा, इसका स्वाद बढ़ाने के लिए इसे नींबू के साथ पेय या किसी फल पेय में भी मिलाया जा सकता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:image {"align":"center","id":8143,"width":"663px","height":"auto","sizeSlug":"full","linkDestination":"none"} -->
<figure class="wp-block-image aligncenter size-full is-resized"><img src="https://trendstopic.in/wp-content/uploads/2024/04/image-10.png" alt="" class="wp-image-8143" style="width:663px;height:auto"/></figure>
<!-- /wp:image -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>घर पर Mint कैसे उगाएं</strong><br>आप चाहें तो इस उपयोगी जड़ी-बूटी को अपने घर की बालकनी में आसानी से उगा सकते हैं। इसे पानी और मिट्टी दोनों में उगाया जा सकता है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>मिट्टी में Mint कैसे उगायें</strong></p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:list {"ordered":true} -->
<ol><!-- wp:list-item -->
<li>एक छोटे गमले में मिट्टी लें और उसमें प्राकृतिक खाद डालें। ध्यान रखें कि इसमें फूलों वाली खाद का प्रयोग न करें। इसकी जगह जैविक खाद डालें।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>अब बाजार से Mint खरीद लें और जिन तनों में जड़ें हों उन्हें रात भर पानी में भिगो दें।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>जड़ वाले डंठल के निचले हिस्से से पत्तियां हटा दें और ऊपर की तरफ पत्तियां छोड़ दें|</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>बर्तन में पानी डालें और फिर जब मिट्टी पानी सोख ले तो लकड़ी की सहायता से छोटे-छोटे छेद कर दें।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>अब इन छेदों में जड़ वाले कलमों को रखें. लगभग 5-6 डंठलों को एक गमले में लगाकर छोड़ दें।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>अब इन्हें बालकनी के ऐसे कोने में रखें जहां सीधी धूप तो न हो लेकिन अंधेरा भी न हो. प्राकृतिक रोशनी प्राप्त करें|</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>रोजाना पानी का छिड़काव करें, कुछ ही दिनों में डंठलों से पत्तियां निकलने लगेंगी और पौधा तैयार हो जाएगा|<br></li>
<!-- /wp:list-item --></ol>
<!-- /wp:list -->]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<!-- wp:paragraph -->
<p>गर्मी के मौसम में Mint सेहत का साथी हो सकता है. अगर इसे अलग-अलग तरीकों से आहार में लिया जाए तो कई समस्याओं से आसानी से बचा जा सकता है। प्राकृतिक जड़ी-बूटियाँ बढ़ते तापमान के साथ शरीर को ठंडा करने में मदद करती हैं। यदि आप  Mint की पत्तियों को अपने दैनिक आहार में शामिल कर रहे हैं, तो जानें कि उन्हें घर पर कैसे उगाया जाए। तो आप इन फायदों के लिए ताजी पत्तियों का उपयोग आसानी से कर सकते हैं। जानिए Mint की पत्तियां कैसे उगाएं और इसके फायदे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:image {"align":"center","id":8144,"width":"629px","height":"auto","sizeSlug":"full","linkDestination":"none"} -->
<figure class="wp-block-image aligncenter size-full is-resized"><img src="https://trendstopic.in/wp-content/uploads/2024/04/image-11.png" alt="" class="wp-image-8144" style="width:629px;height:auto"/></figure>
<!-- /wp:image -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong> Mint शरीर को करता है</strong> <strong>ठंडा </strong><br> Mint का ठंडा गुण शरीर को ठंडा करता है और शरीर की गर्मी से राहत दिलाता है।  Mint की पत्तियों में मेन्थॉल होता है जो शरीर के तापमान को कम करता है और शारीरिक संवेदनाओं से राहत दिलाता है। Mint की पत्तियों को अपने आहार में लेने के साथ-साथ घर पर भी रखें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>पाचन में सहायक</strong><br>Mint की पत्तियों का उपयोग शीतल प्रभाव के साथ पाचन के लिए किया जाता है। भोजन में Mint की पत्तियां शामिल करने से पाचन आसान हो जाता है। इससे सूजन, उल्टी और अपच जैसी समस्याएं भी नहीं होती हैं। Mint की पत्तियों की मदद से पाचन तंत्र तेज होता है और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं भी कम होती हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>बढ़ाता है Hydration</strong> <br>लोग अक्सर पानी पीना पसंद नहीं करते, इसलिए Mint की पत्तियों को पानी में मिलाकर पीने से स्वाद बढ़ जाता है और तरल पदार्थ के सेवन की मात्रा भी बढ़ जाती है। गर्म मौसम में निर्जलीकरण से बचने के लिए Mint  मिश्रित ताज़ा पेय पीने से प्यास बुझती है और जलयोजन प्रदान होता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>Tension से राहत मिलती है और मूड बेहतर <strong>है</strong></strong> <strong>होता </strong><br>Mint की पत्तियों की ताज़ा महक मूड को बेहतर बनाने में भी मदद करती है। अगर Mint की पत्तियों की चाय बनाकर पिया जाए तो यह तनाव से राहत दिलाती है और शरीर और दिमाग को आराम देती है। गर्मी के मौसम में ठंडक और शांति बनाए रखने में मदद करता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>Mint का अधिकतम लाभ पाने के लिए इसे अपने आहार में शामिल करें , इसे विभिन्न व्यंजनों में शामिल करने के अलावा, इसका स्वाद बढ़ाने के लिए इसे नींबू के साथ पेय या किसी फल पेय में भी मिलाया जा सकता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:image {"align":"center","id":8143,"width":"663px","height":"auto","sizeSlug":"full","linkDestination":"none"} -->
<figure class="wp-block-image aligncenter size-full is-resized"><img src="https://trendstopic.in/wp-content/uploads/2024/04/image-10.png" alt="" class="wp-image-8143" style="width:663px;height:auto"/></figure>
<!-- /wp:image -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>घर पर Mint कैसे उगाएं</strong><br>आप चाहें तो इस उपयोगी जड़ी-बूटी को अपने घर की बालकनी में आसानी से उगा सकते हैं। इसे पानी और मिट्टी दोनों में उगाया जा सकता है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>मिट्टी में Mint कैसे उगायें</strong></p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:list {"ordered":true} -->
<ol><!-- wp:list-item -->
<li>एक छोटे गमले में मिट्टी लें और उसमें प्राकृतिक खाद डालें। ध्यान रखें कि इसमें फूलों वाली खाद का प्रयोग न करें। इसकी जगह जैविक खाद डालें।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>अब बाजार से Mint खरीद लें और जिन तनों में जड़ें हों उन्हें रात भर पानी में भिगो दें।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>जड़ वाले डंठल के निचले हिस्से से पत्तियां हटा दें और ऊपर की तरफ पत्तियां छोड़ दें|</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>बर्तन में पानी डालें और फिर जब मिट्टी पानी सोख ले तो लकड़ी की सहायता से छोटे-छोटे छेद कर दें।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>अब इन छेदों में जड़ वाले कलमों को रखें. लगभग 5-6 डंठलों को एक गमले में लगाकर छोड़ दें।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>अब इन्हें बालकनी के ऐसे कोने में रखें जहां सीधी धूप तो न हो लेकिन अंधेरा भी न हो. प्राकृतिक रोशनी प्राप्त करें|</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>रोजाना पानी का छिड़काव करें, कुछ ही दिनों में डंठलों से पत्तियां निकलने लगेंगी और पौधा तैयार हो जाएगा|<br></li>
<!-- /wp:list-item --></ol>
<!-- /wp:list -->]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://trendstopic.in/consuming-mint-in-summer-cures-many-diseases-know-the-benefits/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
		<enclosure url="https://trendstopic.in/wp-content/uploads/2024/04/Mint.jpg" length="133657" type="image/jpeg" />
	</item>
	</channel>
</rss>
