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	<title>GlobalSouth &#8211; Trends Topic</title>
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	<title>GlobalSouth &#8211; Trends Topic</title>
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	<item>
		<title>Dragon और Elephant को साथ आना होगा: PM Modi और Xi Jinping की अहम Meeting</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 31 Aug 2025 11:44:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[News]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Asia]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7 साल बाद चीन पहुंचे। इस दौरान उन्होंने शंघाई सहयोग संगठन (<strong>SCO Summit</strong>) में हिस्सा लिया और चीनी राष्ट्रपति <strong>शी जिनपिंग</strong> से द्विपक्षीय वार्ता की। यह मुलाकात दोनों देशों के रिश्तों के लिए बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि लंबे समय से सीमा विवाद और तनाव के कारण रिश्तों में ठंडापन आ गया था।

<strong>शी जिनपिंग का बयान: "ड्रैगन और हाथी को साथ नाचना होगा"</strong>

पीएम मोदी से मुलाकात के बाद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि अब वक्त आ गया है कि <strong>ड्रैगन और हाथी को एकजुट होना होगा।</strong>
<ul>
 	<li>उन्होंने कहा कि भारत और चीन, दोनों प्राचीन सभ्यताएं हैं और दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश हैं।</li>
 	<li>ये दोनों देश <strong>ग्लोबल साउथ (</strong><strong>Global South)</strong> के अहम सदस्य हैं और मिलकर पूरे एशिया की शांति और स्थिरता में बड़ा योगदान दे सकते हैं।</li>
 	<li>शी जिनपिंग ने कहा, <em>"</em><em>अच्छे पड़ोसी बनकर हम एक-दूसरे की ताकत बन सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि ड्रैगन और हाथी साथ में नाचें।"</em></li>
</ul>
<strong>पिछली मुलाकात का जिक्र</strong>

शी जिनपिंग ने याद दिलाया कि पिछले साल कजान (कजाख़िस्तान) में उनकी और पीएम मोदी की सफल मुलाकात हुई थी, जिसके बाद भारत-चीन रिश्तों की एक <strong>नई शुरुआत</strong> हुई थी।
उन्होंने कहा कि आज अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां काफी बदल रही हैं और चुनौतीपूर्ण हो रही हैं। ऐसे में भारत और चीन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वे शांति और स्थिरता का रास्ता चुनें।

<strong>पीएम मोदी का जवाब: "</strong><strong>75 </strong><strong>साल का रिश्ता</strong><strong>, </strong><strong>अब नई दिशा"</strong>

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुलाकात में कहा कि भारत-चीन के रिश्तों को <strong>75 </strong><strong>साल पूरे हो चुके हैं।</strong>
<ul>
 	<li>सीमा पर विवाद के बाद दोनों देशों ने शांति का रास्ता चुना और समझौते तक पहुंचे।</li>
 	<li>कैलाश मानसरोवर यात्रा को दोबारा शुरू कर दिया गया है।</li>
 	<li>भारत और चीन के बीच <strong>सीधी फ्लाइट्स</strong> फिर से शुरू हो गई हैं।</li>
 	<li>पीएम मोदी ने कहा कि इस साझेदारी का सीधा फायदा <strong>करीब </strong><strong>2.8 </strong><strong>अरब लोगों</strong> को होगा।</li>
</ul>
<strong>क्यों है यह मुलाकात अहम</strong><strong>?</strong>
<ul>
 	<li>भारत और चीन एशिया की दो सबसे बड़ी ताकतें हैं।</li>
 	<li>दोनों के बीच सीमा विवाद, डोकलाम और गलवान जैसी घटनाओं के बाद रिश्ते कड़वे हो गए थे।</li>
 	<li>अब यह मुलाकात दोनों देशों के बीच <strong>नए भरोसे और सहयोग की दिशा</strong> में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।</li>
 	<li>SCO जैसे मंच पर भारत-चीन की दोस्ती न सिर्फ एशिया बल्कि पूरी दुनिया के लिए अहम है।</li>
</ul>
साफ़ तौर पर, इस मुलाकात का संदेश यही है कि भारत और चीन अब टकराव की बजाय सहयोग और साझेदारी की ओर बढ़ रहे हैं। आने वाले वक्त में "ड्रैगन और हाथी" की यह नई दोस्ती एशिया की राजनीति और दुनिया की शांति पर बड़ा असर डाल सकती है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7 साल बाद चीन पहुंचे। इस दौरान उन्होंने शंघाई सहयोग संगठन (<strong>SCO Summit</strong>) में हिस्सा लिया और चीनी राष्ट्रपति <strong>शी जिनपिंग</strong> से द्विपक्षीय वार्ता की। यह मुलाकात दोनों देशों के रिश्तों के लिए बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि लंबे समय से सीमा विवाद और तनाव के कारण रिश्तों में ठंडापन आ गया था।

<strong>शी जिनपिंग का बयान: "ड्रैगन और हाथी को साथ नाचना होगा"</strong>

पीएम मोदी से मुलाकात के बाद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि अब वक्त आ गया है कि <strong>ड्रैगन और हाथी को एकजुट होना होगा।</strong>
<ul>
 	<li>उन्होंने कहा कि भारत और चीन, दोनों प्राचीन सभ्यताएं हैं और दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश हैं।</li>
 	<li>ये दोनों देश <strong>ग्लोबल साउथ (</strong><strong>Global South)</strong> के अहम सदस्य हैं और मिलकर पूरे एशिया की शांति और स्थिरता में बड़ा योगदान दे सकते हैं।</li>
 	<li>शी जिनपिंग ने कहा, <em>"</em><em>अच्छे पड़ोसी बनकर हम एक-दूसरे की ताकत बन सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि ड्रैगन और हाथी साथ में नाचें।"</em></li>
</ul>
<strong>पिछली मुलाकात का जिक्र</strong>

शी जिनपिंग ने याद दिलाया कि पिछले साल कजान (कजाख़िस्तान) में उनकी और पीएम मोदी की सफल मुलाकात हुई थी, जिसके बाद भारत-चीन रिश्तों की एक <strong>नई शुरुआत</strong> हुई थी।
उन्होंने कहा कि आज अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां काफी बदल रही हैं और चुनौतीपूर्ण हो रही हैं। ऐसे में भारत और चीन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वे शांति और स्थिरता का रास्ता चुनें।

<strong>पीएम मोदी का जवाब: "</strong><strong>75 </strong><strong>साल का रिश्ता</strong><strong>, </strong><strong>अब नई दिशा"</strong>

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुलाकात में कहा कि भारत-चीन के रिश्तों को <strong>75 </strong><strong>साल पूरे हो चुके हैं।</strong>
<ul>
 	<li>सीमा पर विवाद के बाद दोनों देशों ने शांति का रास्ता चुना और समझौते तक पहुंचे।</li>
 	<li>कैलाश मानसरोवर यात्रा को दोबारा शुरू कर दिया गया है।</li>
 	<li>भारत और चीन के बीच <strong>सीधी फ्लाइट्स</strong> फिर से शुरू हो गई हैं।</li>
 	<li>पीएम मोदी ने कहा कि इस साझेदारी का सीधा फायदा <strong>करीब </strong><strong>2.8 </strong><strong>अरब लोगों</strong> को होगा।</li>
</ul>
<strong>क्यों है यह मुलाकात अहम</strong><strong>?</strong>
<ul>
 	<li>भारत और चीन एशिया की दो सबसे बड़ी ताकतें हैं।</li>
 	<li>दोनों के बीच सीमा विवाद, डोकलाम और गलवान जैसी घटनाओं के बाद रिश्ते कड़वे हो गए थे।</li>
 	<li>अब यह मुलाकात दोनों देशों के बीच <strong>नए भरोसे और सहयोग की दिशा</strong> में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।</li>
 	<li>SCO जैसे मंच पर भारत-चीन की दोस्ती न सिर्फ एशिया बल्कि पूरी दुनिया के लिए अहम है।</li>
</ul>
साफ़ तौर पर, इस मुलाकात का संदेश यही है कि भारत और चीन अब टकराव की बजाय सहयोग और साझेदारी की ओर बढ़ रहे हैं। आने वाले वक्त में "ड्रैगन और हाथी" की यह नई दोस्ती एशिया की राजनीति और दुनिया की शांति पर बड़ा असर डाल सकती है।]]></content:encoded>
					
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		<title>Prime Minister Modi की Trinidad और Tobago Visit: Bilateral Ties को नई Strength, 6 Key Agreements और Indians  को Major Gift</title>
		<link>https://trendstopic.in/prime-minister-modis-visit-to-trinidad-tobago-strengthening-bilateral-ties-6-key-agreements-and-a-major-gift-for-people-of-indian-origin/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 05 Jul 2025 04:34:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[News]]></category>
		<category><![CDATA[विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को त्रिनिदाद और टोबैगो की राजधानी पोर्ट ऑफ स्पेन में वहां की प्रधानमंत्री <strong>कमला प्रसाद-बिसेसर</strong> से मुलाकात की। यह अहम बैठक ऐतिहासिक <strong>रेड हाउस</strong> में हुई, जहां दोनों नेताओं ने कई अहम मुद्दों पर विस्तार से बातचीत की और दोनों देशों के बीच रिश्ते और मजबूत करने पर सहमति जताई।

पीएम मोदी ने बिसेसर को <strong>दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने पर बधाई</strong> दी और वहां की सरकार द्वारा उन्हें और भारतीय प्रतिनिधिमंडल को दिए गए <strong>गर्मजोशी भरे स्वागत</strong> के लिए धन्यवाद भी किया। प्रधानमंत्री बिसेसर ने कहा कि मोदी की यह यात्रा भारत और त्रिनिदाद के रिश्तों में नई जान डालेगी।

दोनों नेताओं ने आपसी सहयोग को बढ़ाने के लिए जिन विषयों पर चर्चा की, वे आम जनता के जीवन से जुड़े हैं, जैसे:
<ul>
 	<li><strong>कृषि और स्वास्थ्य सेवा</strong></li>
 	<li><strong>फार्मास्युटिकल्स (दवाओं से जुड़ा क्षेत्र)</strong></li>
 	<li><strong>डिजिटल पेमेंट्स और UPI </strong><strong>सिस्टम</strong></li>
 	<li><strong>संस्कृति और खेल</strong></li>
 	<li><strong>लोगों के बीच आपसी संपर्क (People to People ties)</strong></li>
 	<li><strong>कैपेसिटी बिल्डिंग (यानी स्किल्स और ट्रेनिंग बढ़ाना)</strong></li>
</ul>
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि <strong>डिजिटल इंडिया</strong> और भारत के सफल UPI मॉडल को साझा करने से दोनों देशों को फायदा होगा।

बातचीत सिर्फ द्विपक्षीय मामलों तक सीमित नहीं रही। नेताओं ने मिलकर <strong>जलवायु परिवर्तन</strong>, <strong>आपदा प्रबंधन</strong>, और <strong>साइबर सुरक्षा</strong> जैसे वैश्विक मुद्दों पर भी साथ मिलकर काम करने का संकल्प लिया।

पीएम मोदी ने <strong>पहलगाम में हुए आतंकी हमले</strong> के बाद भारत को मिले समर्थन के लिए बिसेसर और उनकी सरकार का आभार जताया। दोनों नेताओं ने कहा कि <strong>आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ना जरूरी है।</strong>

इसके अलावा, <strong>Global South</strong> यानी विकासशील देशों के बीच एकजुटता और सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी।

बैठक के बाद भारत और त्रिनिदाद के बीच 6 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जिनमें शामिल हैं:
<ol>
 	<li><strong>फार्माकोपिया सहयोग</strong> (दवाओं के मानकों पर सहयोग)</li>
 	<li><strong>Quick Impact Projects</strong> (तेजी से असर दिखाने वाली विकास परियोजनाएं)</li>
 	<li><strong>संस्कृतिक आदान-प्रदान</strong></li>
 	<li><strong>खेल के क्षेत्र में सहयोग</strong></li>
 	<li><strong>डिप्लोमैटिक ट्रेनिंग (कूटनीतिक प्रशिक्षण)</strong></li>
 	<li><strong>ICCR </strong><strong>की ओर से हिंदी और भारतीय अध्ययन के लिए चेयर की स्थापना</strong></li>
</ol>
इस यात्रा के दौरान भारत ने त्रिनिदाद एवं टोबैगो में रहने वाले <strong>भारतीय मूल के लोगों की 6</strong><strong>वीं पीढ़ी तक</strong> को <strong>OCI (Overseas Citizen of India) </strong><strong>कार्ड</strong> की पात्रता देने का ऐलान किया।
यह फैसला भारत और वहां की प्रवासी भारतीय कम्युनिटी के बीच <strong>भावनात्मक और पारिवारिक संबंधों को और गहरा करने</strong> की दिशा में उठाया गया अहम कदम है।

बैठक के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने कमला प्रसाद बिसेसर को <strong>भारत आने का आमंत्रण</strong> दिया, जिसे उन्होंने <strong>स्वीकार कर लिया</strong>। यह यात्रा दोनों देशों के रिश्तों को और आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी।

प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा सिर्फ राजनीतिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि <strong>आम जनता के जीवन से जुड़े मुद्दों</strong> पर सहयोग बढ़ाने की एक बड़ी पहल थी। चाहे वो डिजिटल पेमेंट हो, स्वास्थ्य सेवाएं, संस्कृति, या प्रवासी भारतीय—हर स्तर पर रिश्तों को मजबूती देने वाले कदम उठाए गए हैं।

यह दौरा इस बात का संकेत है कि भारत और त्रिनिदाद एवं टोबैगो मिलकर न सिर्फ अपने नागरिकों के लिए बेहतर भविष्य बनाएंगे, बल्कि ग्लोबल चुनौतियों का भी डटकर सामना करेंगे।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को त्रिनिदाद और टोबैगो की राजधानी पोर्ट ऑफ स्पेन में वहां की प्रधानमंत्री <strong>कमला प्रसाद-बिसेसर</strong> से मुलाकात की। यह अहम बैठक ऐतिहासिक <strong>रेड हाउस</strong> में हुई, जहां दोनों नेताओं ने कई अहम मुद्दों पर विस्तार से बातचीत की और दोनों देशों के बीच रिश्ते और मजबूत करने पर सहमति जताई।

पीएम मोदी ने बिसेसर को <strong>दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने पर बधाई</strong> दी और वहां की सरकार द्वारा उन्हें और भारतीय प्रतिनिधिमंडल को दिए गए <strong>गर्मजोशी भरे स्वागत</strong> के लिए धन्यवाद भी किया। प्रधानमंत्री बिसेसर ने कहा कि मोदी की यह यात्रा भारत और त्रिनिदाद के रिश्तों में नई जान डालेगी।

दोनों नेताओं ने आपसी सहयोग को बढ़ाने के लिए जिन विषयों पर चर्चा की, वे आम जनता के जीवन से जुड़े हैं, जैसे:
<ul>
 	<li><strong>कृषि और स्वास्थ्य सेवा</strong></li>
 	<li><strong>फार्मास्युटिकल्स (दवाओं से जुड़ा क्षेत्र)</strong></li>
 	<li><strong>डिजिटल पेमेंट्स और UPI </strong><strong>सिस्टम</strong></li>
 	<li><strong>संस्कृति और खेल</strong></li>
 	<li><strong>लोगों के बीच आपसी संपर्क (People to People ties)</strong></li>
 	<li><strong>कैपेसिटी बिल्डिंग (यानी स्किल्स और ट्रेनिंग बढ़ाना)</strong></li>
</ul>
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि <strong>डिजिटल इंडिया</strong> और भारत के सफल UPI मॉडल को साझा करने से दोनों देशों को फायदा होगा।

बातचीत सिर्फ द्विपक्षीय मामलों तक सीमित नहीं रही। नेताओं ने मिलकर <strong>जलवायु परिवर्तन</strong>, <strong>आपदा प्रबंधन</strong>, और <strong>साइबर सुरक्षा</strong> जैसे वैश्विक मुद्दों पर भी साथ मिलकर काम करने का संकल्प लिया।

पीएम मोदी ने <strong>पहलगाम में हुए आतंकी हमले</strong> के बाद भारत को मिले समर्थन के लिए बिसेसर और उनकी सरकार का आभार जताया। दोनों नेताओं ने कहा कि <strong>आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ना जरूरी है।</strong>

इसके अलावा, <strong>Global South</strong> यानी विकासशील देशों के बीच एकजुटता और सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी।

बैठक के बाद भारत और त्रिनिदाद के बीच 6 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जिनमें शामिल हैं:
<ol>
 	<li><strong>फार्माकोपिया सहयोग</strong> (दवाओं के मानकों पर सहयोग)</li>
 	<li><strong>Quick Impact Projects</strong> (तेजी से असर दिखाने वाली विकास परियोजनाएं)</li>
 	<li><strong>संस्कृतिक आदान-प्रदान</strong></li>
 	<li><strong>खेल के क्षेत्र में सहयोग</strong></li>
 	<li><strong>डिप्लोमैटिक ट्रेनिंग (कूटनीतिक प्रशिक्षण)</strong></li>
 	<li><strong>ICCR </strong><strong>की ओर से हिंदी और भारतीय अध्ययन के लिए चेयर की स्थापना</strong></li>
</ol>
इस यात्रा के दौरान भारत ने त्रिनिदाद एवं टोबैगो में रहने वाले <strong>भारतीय मूल के लोगों की 6</strong><strong>वीं पीढ़ी तक</strong> को <strong>OCI (Overseas Citizen of India) </strong><strong>कार्ड</strong> की पात्रता देने का ऐलान किया।
यह फैसला भारत और वहां की प्रवासी भारतीय कम्युनिटी के बीच <strong>भावनात्मक और पारिवारिक संबंधों को और गहरा करने</strong> की दिशा में उठाया गया अहम कदम है।

बैठक के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने कमला प्रसाद बिसेसर को <strong>भारत आने का आमंत्रण</strong> दिया, जिसे उन्होंने <strong>स्वीकार कर लिया</strong>। यह यात्रा दोनों देशों के रिश्तों को और आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी।

प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा सिर्फ राजनीतिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि <strong>आम जनता के जीवन से जुड़े मुद्दों</strong> पर सहयोग बढ़ाने की एक बड़ी पहल थी। चाहे वो डिजिटल पेमेंट हो, स्वास्थ्य सेवाएं, संस्कृति, या प्रवासी भारतीय—हर स्तर पर रिश्तों को मजबूती देने वाले कदम उठाए गए हैं।

यह दौरा इस बात का संकेत है कि भारत और त्रिनिदाद एवं टोबैगो मिलकर न सिर्फ अपने नागरिकों के लिए बेहतर भविष्य बनाएंगे, बल्कि ग्लोबल चुनौतियों का भी डटकर सामना करेंगे।]]></content:encoded>
					
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		<item>
		<title>G7 Summit से पहले बोले S. Jaishankar – &#8220;Global South की आवाज़ उठाने का समय, भारत बनेगा सेतु&#8221;</title>
		<link>https://trendstopic.in/ahead-of-g7-summit-s-jaishankar-says-time-to-raise-the-voice-of-the-global-south-india-will-act-as-a-bridge/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 16 Jun 2025 06:08:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[BRICSvsG7]]></category>
		<category><![CDATA[G7Summit]]></category>
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		<category><![CDATA[WorldAffairs]]></category>
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					<description><![CDATA[G7 शिखर सम्मेलन से ठीक पहले भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि <strong>भारत Global South </strong><strong>की आवाज़ बनकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराए</strong>। उन्होंने साफ किया कि भारत, दुनिया के अलग-अलग देशों के साथ इस तरह से रिश्ते निभाता है जिससे किसी भी देश के साथ उसका रिश्ता "exclusively" जुड़ा हुआ ना लगे। यही भारत की सबसे बड़ी ताकत है।

<strong>BRICS </strong><strong>का मजबूत सदस्य है भारत</strong>

जयशंकर ने कहा कि भारत BRICS (ब्राज़ील, रूस, इंडिया, चीन, साउथ अफ्रीका) जैसे मजबूत ग्रुप का लीडिंग मेंबर है। यह ग्रुप अब एक आर्थिक शक्ति बनता जा रहा है और G7 का एक बड़ा विकल्प भी माना जा रहा है।

<strong>G7 </strong><strong>में सदस्य नहीं</strong><strong>, </strong><strong>फिर भी बुलाया गया भारत</strong>

G7 में भारत सदस्य नहीं है, लेकिन 2019 से लगातार भारत को इन बैठकों में बुलाया जा रहा है। इस बार भी <strong>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कनाडा में होने वाले G7 </strong><strong>सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित किया गया है।</strong> साथ ही यूक्रेन, मैक्सिको, दक्षिण अफ्रीका और साउथ कोरिया के नेताओं को भी बुलाया गया है।

जयशंकर ने कहा, “Global South के देश आज भी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की असमानताओं को लेकर नाराज़ हैं। बदलाव की मांग है और भारत इसका हिस्सा है। ऐसे समय में हमें अपनी बात मज़बूती से रखनी चाहिए।”

<strong>अमेरिका-रूस के तनाव के बीच भारत की भूमिका</strong>

इस सम्मेलन में <strong>रूस और चीन के साथ रिश्तों पर भी चर्चा</strong> होगी। भारत का हमेशा से मानना रहा है कि रूस और यूक्रेन के बीच सीधी बातचीत होनी चाहिए, न कि पाबंदियों का रास्ता अपनाया जाए।

जयशंकर ने कहा कि रूस पर लगाए गए sanctions (पाबंदियों) से कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। "पाबंदियों से नीति नहीं बदली जाती", उन्होंने कहा।

यूरोपियन देश अब "secondary sanctions" की तैयारी कर रहे हैं, जिसमें रूस से तेल, गैस और कच्चा माल खरीदने वाले देशों पर 500% टैक्स लगाने की बात हो रही है। इस पर जयशंकर ने कहा – "<strong>दुनिया को अभी और टेंशन, </strong><strong>और तनाव की ज़रूरत नहीं है</strong>।"

<strong>ट्रम्प और मोदी की संभावित मुलाकात</strong>

इस सम्मेलन में <strong>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी हिस्सा लेंगे</strong>। उम्मीद है कि मोदी और ट्रम्प के बीच एक ट्रेड डील को लेकर अहम बातचीत हो सकती है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है और दोनों देशों के बीच टैक्स और ड्यूटी को लेकर 9 जुलाई तक का वक्त है।

जयशंकर ने कहा कि ट्रम्प एक "बहुत nationalist" (राष्ट्रवादी) नेता हैं जो अपने देश के हित को सबसे ऊपर रखते हैं।

<strong>चीन से संतुलन</strong><strong>, </strong><strong>पाकिस्तान पर सख्ती</strong>

जहां तक चीन की बात है, जयशंकर ने कहा कि <strong>भारत-चीन दोनों ही उभरती हुई शक्तियां हैं</strong>, और दोनों देशों को अपनी ताकत समझते हुए संतुलित संबंध बनाने चाहिए।

हालांकि उन्होंने साफ किया – "जहां ज़रूरत हो हम मज़बूती से खड़े रहेंगे, और जहां स्थिरता की ज़रूरत हो, वहां बातचीत के लिए भी तैयार हैं।"

जयशंकर ने यह भी बताया कि पाकिस्तान और चीन की नज़दीकी को भारत नजरअंदाज नहीं कर सकता। हाल ही में कश्मीर में हुए हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच जो तनाव हुआ था, उसमें चीन के फाइटर जेट्स भी इस्तेमाल हुए थे।

पर जब पूछा गया कि क्या इससे nuclear war (परमाणु युद्ध) का खतरा था, तो जयशंकर ने साफ कहा – "<strong>ऐसा डर सिर्फ उन्हें था जो असल हालात से अनजान थे</strong>।"

भारत अब सिर्फ एक दर्शक नहीं, बल्कि ग्लोबल लेवल पर <strong>एक एक्टिव प्लेयर</strong> बन चुका है। चाहे रूस-यूक्रेन युद्ध हो, अमेरिका से ट्रेड डील की बात हो, या चीन-पाकिस्तान के साथ जटिल रिश्ते – भारत हर मुद्दे पर अपनी समझदारी से न केवल संतुलन बना रहा है बल्कि Global South की आवाज़ भी बनता जा रहा है। G7 सम्मेलन में भारत की भूमिका अब और भी अहम हो चुकी है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[G7 शिखर सम्मेलन से ठीक पहले भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि <strong>भारत Global South </strong><strong>की आवाज़ बनकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराए</strong>। उन्होंने साफ किया कि भारत, दुनिया के अलग-अलग देशों के साथ इस तरह से रिश्ते निभाता है जिससे किसी भी देश के साथ उसका रिश्ता "exclusively" जुड़ा हुआ ना लगे। यही भारत की सबसे बड़ी ताकत है।

<strong>BRICS </strong><strong>का मजबूत सदस्य है भारत</strong>

जयशंकर ने कहा कि भारत BRICS (ब्राज़ील, रूस, इंडिया, चीन, साउथ अफ्रीका) जैसे मजबूत ग्रुप का लीडिंग मेंबर है। यह ग्रुप अब एक आर्थिक शक्ति बनता जा रहा है और G7 का एक बड़ा विकल्प भी माना जा रहा है।

<strong>G7 </strong><strong>में सदस्य नहीं</strong><strong>, </strong><strong>फिर भी बुलाया गया भारत</strong>

G7 में भारत सदस्य नहीं है, लेकिन 2019 से लगातार भारत को इन बैठकों में बुलाया जा रहा है। इस बार भी <strong>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कनाडा में होने वाले G7 </strong><strong>सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित किया गया है।</strong> साथ ही यूक्रेन, मैक्सिको, दक्षिण अफ्रीका और साउथ कोरिया के नेताओं को भी बुलाया गया है।

जयशंकर ने कहा, “Global South के देश आज भी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की असमानताओं को लेकर नाराज़ हैं। बदलाव की मांग है और भारत इसका हिस्सा है। ऐसे समय में हमें अपनी बात मज़बूती से रखनी चाहिए।”

<strong>अमेरिका-रूस के तनाव के बीच भारत की भूमिका</strong>

इस सम्मेलन में <strong>रूस और चीन के साथ रिश्तों पर भी चर्चा</strong> होगी। भारत का हमेशा से मानना रहा है कि रूस और यूक्रेन के बीच सीधी बातचीत होनी चाहिए, न कि पाबंदियों का रास्ता अपनाया जाए।

जयशंकर ने कहा कि रूस पर लगाए गए sanctions (पाबंदियों) से कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। "पाबंदियों से नीति नहीं बदली जाती", उन्होंने कहा।

यूरोपियन देश अब "secondary sanctions" की तैयारी कर रहे हैं, जिसमें रूस से तेल, गैस और कच्चा माल खरीदने वाले देशों पर 500% टैक्स लगाने की बात हो रही है। इस पर जयशंकर ने कहा – "<strong>दुनिया को अभी और टेंशन, </strong><strong>और तनाव की ज़रूरत नहीं है</strong>।"

<strong>ट्रम्प और मोदी की संभावित मुलाकात</strong>

इस सम्मेलन में <strong>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी हिस्सा लेंगे</strong>। उम्मीद है कि मोदी और ट्रम्प के बीच एक ट्रेड डील को लेकर अहम बातचीत हो सकती है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है और दोनों देशों के बीच टैक्स और ड्यूटी को लेकर 9 जुलाई तक का वक्त है।

जयशंकर ने कहा कि ट्रम्प एक "बहुत nationalist" (राष्ट्रवादी) नेता हैं जो अपने देश के हित को सबसे ऊपर रखते हैं।

<strong>चीन से संतुलन</strong><strong>, </strong><strong>पाकिस्तान पर सख्ती</strong>

जहां तक चीन की बात है, जयशंकर ने कहा कि <strong>भारत-चीन दोनों ही उभरती हुई शक्तियां हैं</strong>, और दोनों देशों को अपनी ताकत समझते हुए संतुलित संबंध बनाने चाहिए।

हालांकि उन्होंने साफ किया – "जहां ज़रूरत हो हम मज़बूती से खड़े रहेंगे, और जहां स्थिरता की ज़रूरत हो, वहां बातचीत के लिए भी तैयार हैं।"

जयशंकर ने यह भी बताया कि पाकिस्तान और चीन की नज़दीकी को भारत नजरअंदाज नहीं कर सकता। हाल ही में कश्मीर में हुए हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच जो तनाव हुआ था, उसमें चीन के फाइटर जेट्स भी इस्तेमाल हुए थे।

पर जब पूछा गया कि क्या इससे nuclear war (परमाणु युद्ध) का खतरा था, तो जयशंकर ने साफ कहा – "<strong>ऐसा डर सिर्फ उन्हें था जो असल हालात से अनजान थे</strong>।"

भारत अब सिर्फ एक दर्शक नहीं, बल्कि ग्लोबल लेवल पर <strong>एक एक्टिव प्लेयर</strong> बन चुका है। चाहे रूस-यूक्रेन युद्ध हो, अमेरिका से ट्रेड डील की बात हो, या चीन-पाकिस्तान के साथ जटिल रिश्ते – भारत हर मुद्दे पर अपनी समझदारी से न केवल संतुलन बना रहा है बल्कि Global South की आवाज़ भी बनता जा रहा है। G7 सम्मेलन में भारत की भूमिका अब और भी अहम हो चुकी है।]]></content:encoded>
					
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