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	<title>GlobalEnergy &#8211; Trends Topic</title>
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	<title>GlobalEnergy &#8211; Trends Topic</title>
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		<title>America के Tariff Decision पर भड़के S. Jaishankar, बोले – “बहुत हैरान करने वाली बात है”</title>
		<link>https://trendstopic.in/jaishankar-questions-u-s-tariff-decision-says-very-perplexing-move/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 22 Aug 2025 03:49:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ (tariffs) पर कड़ा सवाल उठाया है। जयशंकर ने कहा कि वॉशिंगटन का यह रवैया <em>“बहुत perplexing यानी हैरान करने वाला”</em> है, क्योंकि चीन और यूरोपियन यूनियन (EU) कहीं ज़्यादा मात्रा में रूस से तेल और गैस खरीदते हैं, लेकिन आलोचना और सज़ा सिर्फ भारत को मिल रही है।

<strong>भारत की दलील </strong><strong>– “हम सबसे बड़े खरीदार नहीं”</strong>

जयशंकर ने साफ कहा कि भारत रूस से तेल खरीदने वाला सबसे बड़ा खरीदार नहीं है। उन्होंने उदाहरण दिया कि –
<ul>
 	<li><strong>चीन</strong> रूस से सबसे ज़्यादा तेल खरीदता है।</li>
 	<li><strong>यूरोपियन यूनियन (</strong><strong>EU)</strong> रूसी गैस का सबसे बड़ा इम्पोर्टर है।</li>
 	<li>भारत का रूस के साथ जो ट्रेड (trade) बढ़ा है, वह भी दुनिया में सबसे ज़्यादा नहीं है।</li>
</ul>
इसके बावजूद केवल भारत पर अमेरिका ने 25% <em>penalty tariff</em> लगाकर कुल टैरिफ 50% तक कर दिया है।

<strong>“हम अमेरिका से भी तेल खरीदते हैं”</strong>

जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत सिर्फ रूस पर निर्भर नहीं है। भारत अमेरिका से भी लगातार तेल खरीद रहा है। ऐसे में यह और भी अजीब है कि वॉशिंगटन सिर्फ भारत को टारगेट कर रहा है। उन्होंने कहा – <em>“जब हमें खुद अमेरिका ने कहा था कि ग्लोबल एनर्जी मार्केट को स्टेबल रखने के लिए हमें रूसी तेल खरीदना चाहिए, तो अब अचानक सज़ा क्यों दी जा रही है?”</em>

<strong>अमेरिका का फैसला और असर</strong>

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने 1 अगस्त 2025 से भारतीय सामानों पर पहले ही 25% <em>reciprocal tariff</em> लगाया था। इसके बाद रूस से तेल खरीदने की वजह से 25% का <em>penalty tariff</em> और जोड़ दिया गया। यानी अब अमेरिका में भारत से जाने वाले कई प्रोडक्ट्स पर <strong>50% तक टैक्स</strong> देना होगा।

इसका सीधा असर भारत के उन सेक्टर्स पर पड़ सकता है जो अमेरिका को ज्यादा एक्सपोर्ट करते हैं – जैसे <strong>फार्मा (</strong><strong>pharma), टेक्सटाइल (textiles), एग्रीकल्चर (agriculture)</strong> और आईटी सर्विसेज़।

<strong>भारत</strong><strong>–रूस रिश्तों पर जोर</strong>

मॉस्को यात्रा के दौरान जयशंकर ने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात की। दोनों देशों ने कहा कि भारत-रूस रिश्ते <strong>द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से सबसे स्थिर</strong> रहे हैं।
<ul>
 	<li>रूस ने भारत को आर्कटिक और फार ईस्ट में energy प्रोजेक्ट्स में पार्टनर बनने का न्योता दिया।</li>
 	<li>भारत ने रूस से कहा कि अब ट्रेड सिर्फ तेल और डिफेंस तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि <strong>फार्मा</strong><strong>, कपड़े, कृषि और टेक्नोलॉजी</strong> सेक्टर में भी बढ़ाया जाएगा।</li>
</ul>
<strong>भू-राजनीतिक असर (</strong><strong>Geopolitical Impact)</strong>

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का यह कदम भारत को रूस और चीन के और करीब धकेल सकता है। इससे अमेरिका–भारत रिश्तों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है, खासकर <strong>डिफेंस कोऑपरेशन</strong> और <strong>क्वाड (</strong><strong>Quad) जैसी साझेदारियों</strong> में।

भारत का कहना है कि उसकी energy policy <strong>diverse और practical</strong> है। यानी भारत हर उस देश से तेल और गैस खरीदता है जो सस्ती और भरोसेमंद सप्लाई दे सके। वहीं, अमेरिका का नया टैरिफ फैसला न सिर्फ भारत–अमेरिका ट्रेड को झटका देगा, बल्कि दोनों देशों के रिश्तों में भी तनाव पैदा करेगा।

यह मामला आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति और भारत की foreign policy का बड़ा मुद्दा बनने वाला है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ (tariffs) पर कड़ा सवाल उठाया है। जयशंकर ने कहा कि वॉशिंगटन का यह रवैया <em>“बहुत perplexing यानी हैरान करने वाला”</em> है, क्योंकि चीन और यूरोपियन यूनियन (EU) कहीं ज़्यादा मात्रा में रूस से तेल और गैस खरीदते हैं, लेकिन आलोचना और सज़ा सिर्फ भारत को मिल रही है।

<strong>भारत की दलील </strong><strong>– “हम सबसे बड़े खरीदार नहीं”</strong>

जयशंकर ने साफ कहा कि भारत रूस से तेल खरीदने वाला सबसे बड़ा खरीदार नहीं है। उन्होंने उदाहरण दिया कि –
<ul>
 	<li><strong>चीन</strong> रूस से सबसे ज़्यादा तेल खरीदता है।</li>
 	<li><strong>यूरोपियन यूनियन (</strong><strong>EU)</strong> रूसी गैस का सबसे बड़ा इम्पोर्टर है।</li>
 	<li>भारत का रूस के साथ जो ट्रेड (trade) बढ़ा है, वह भी दुनिया में सबसे ज़्यादा नहीं है।</li>
</ul>
इसके बावजूद केवल भारत पर अमेरिका ने 25% <em>penalty tariff</em> लगाकर कुल टैरिफ 50% तक कर दिया है।

<strong>“हम अमेरिका से भी तेल खरीदते हैं”</strong>

जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत सिर्फ रूस पर निर्भर नहीं है। भारत अमेरिका से भी लगातार तेल खरीद रहा है। ऐसे में यह और भी अजीब है कि वॉशिंगटन सिर्फ भारत को टारगेट कर रहा है। उन्होंने कहा – <em>“जब हमें खुद अमेरिका ने कहा था कि ग्लोबल एनर्जी मार्केट को स्टेबल रखने के लिए हमें रूसी तेल खरीदना चाहिए, तो अब अचानक सज़ा क्यों दी जा रही है?”</em>

<strong>अमेरिका का फैसला और असर</strong>

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने 1 अगस्त 2025 से भारतीय सामानों पर पहले ही 25% <em>reciprocal tariff</em> लगाया था। इसके बाद रूस से तेल खरीदने की वजह से 25% का <em>penalty tariff</em> और जोड़ दिया गया। यानी अब अमेरिका में भारत से जाने वाले कई प्रोडक्ट्स पर <strong>50% तक टैक्स</strong> देना होगा।

इसका सीधा असर भारत के उन सेक्टर्स पर पड़ सकता है जो अमेरिका को ज्यादा एक्सपोर्ट करते हैं – जैसे <strong>फार्मा (</strong><strong>pharma), टेक्सटाइल (textiles), एग्रीकल्चर (agriculture)</strong> और आईटी सर्विसेज़।

<strong>भारत</strong><strong>–रूस रिश्तों पर जोर</strong>

मॉस्को यात्रा के दौरान जयशंकर ने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात की। दोनों देशों ने कहा कि भारत-रूस रिश्ते <strong>द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से सबसे स्थिर</strong> रहे हैं।
<ul>
 	<li>रूस ने भारत को आर्कटिक और फार ईस्ट में energy प्रोजेक्ट्स में पार्टनर बनने का न्योता दिया।</li>
 	<li>भारत ने रूस से कहा कि अब ट्रेड सिर्फ तेल और डिफेंस तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि <strong>फार्मा</strong><strong>, कपड़े, कृषि और टेक्नोलॉजी</strong> सेक्टर में भी बढ़ाया जाएगा।</li>
</ul>
<strong>भू-राजनीतिक असर (</strong><strong>Geopolitical Impact)</strong>

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का यह कदम भारत को रूस और चीन के और करीब धकेल सकता है। इससे अमेरिका–भारत रिश्तों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है, खासकर <strong>डिफेंस कोऑपरेशन</strong> और <strong>क्वाड (</strong><strong>Quad) जैसी साझेदारियों</strong> में।

भारत का कहना है कि उसकी energy policy <strong>diverse और practical</strong> है। यानी भारत हर उस देश से तेल और गैस खरीदता है जो सस्ती और भरोसेमंद सप्लाई दे सके। वहीं, अमेरिका का नया टैरिफ फैसला न सिर्फ भारत–अमेरिका ट्रेड को झटका देगा, बल्कि दोनों देशों के रिश्तों में भी तनाव पैदा करेगा।

यह मामला आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति और भारत की foreign policy का बड़ा मुद्दा बनने वाला है।]]></content:encoded>
					
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