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	<title>ElectionCommission &#8211; Trends Topic</title>
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	<title>ElectionCommission &#8211; Trends Topic</title>
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		<title>Winter Session में SIR Act पर तुरंत Discussion की Demand: AAP MP Malvinder Singh Kang का बयान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 03 Dec 2025 04:15:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चंडीगढ़]]></category>
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					<description><![CDATA[आम आदमी पार्टी (AAP) के श्री आनंदपुर साहिब से सांसद <strong>मलविंदर सिंह कंग</strong> ने संसद के चल रहे <strong>शीतकालीन सत्र (</strong><strong>Winter Session)</strong> को बेहद अहम बताते हुए कहा कि इसमें देश के सामने खड़े बड़े मुद्दों पर तुरंत और गंभीर चर्चा होनी चाहिए।

सत्र शुरू होने से पहले मीडिया से बात करते हुए उन्होंने <strong>Special Intensive Revision (SIR) Act</strong> को एक राष्ट्रीय चिंता बताया। उनके अनुसार इस एक्ट की वजह से देश की कुछ <strong>संवैधानिक संस्थाओं (</strong><strong>Constitutional Institutions)</strong> खासकर <strong>चुनाव आयोग (</strong><strong>Election Commission)</strong> पर लोगों का भरोसा कम होता जा रहा है।

<strong>SIR </strong><strong>एक्ट पर कंग की कड़ी चिंता</strong>

सांसद कंग ने कहा कि SIR एक्ट के चलते
<ul>
 	<li>चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं</li>
 	<li>जनता को लगता है कि पारदर्शिता (transparency) कम हो रही है</li>
 	<li>और चुनाव आयोग की credibility कम होती दिख रही है</li>
</ul>
उन्होंने सरकार से मांग की कि पूरी चुनाव प्रक्रिया को साफ-सुथरा, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाए रखने के लिए तुरंत कदम उठाए जाएं।

<strong>संसद चलाने की जिम्मेदारी किसकी</strong><strong>?</strong>

केंद्रीय मंत्री <strong>किरन रिजिजू</strong> के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कंग ने साफ कहा कि:
<ul>
 	<li><strong>संसद चलाने की असली जिम्मेदारी सत्ता पक्ष यानी सरकार की होती है</strong>,</li>
 	<li>विपक्ष तब ही चर्चा कर सकता है जब सरकार माहौल बनाए।</li>
</ul>
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि <strong>मानसून सत्र</strong> के दौरान सरकार ने कोई गंभीर प्रयास नहीं किया, जिसकी वजह से कई ज़रूरी बिल और मुद्दे लंबित रह गए थे।

<strong>सार्वजनिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद</strong>

मलविंदर कंग ने उम्मीद जताई कि इस बार:
<ul>
 	<li>जनता से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बहस होगी</li>
 	<li>संवैधानिक संस्थाओं की सुरक्षा और मजबूती पर ठोस कदम उठाए जाएंगे</li>
 	<li>और ऐसे मामलों पर राजनीति नहीं, बल्कि देशहित में चर्चा की जाएगी</li>
</ul>
<strong>क्यों है यह सत्र इतना महत्वपूर्ण</strong><strong>?</strong>

यह सत्र कई वजहों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है:
<ul>
 	<li>SIR Act को लेकर देशभर में चर्चा और चिंता</li>
 	<li>चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल</li>
 	<li>विपक्ष की तरफ से लगातार demand कि चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए</li>
 	<li>पिछले सत्र में अधूरे रह गए काम पूरे करने का दबाव</li>
</ul>
कंग ने कहा कि जनता यह उम्मीद कर रही है कि संसद में सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि <strong>real issues</strong> पर बात होगी और लोकतंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[आम आदमी पार्टी (AAP) के श्री आनंदपुर साहिब से सांसद <strong>मलविंदर सिंह कंग</strong> ने संसद के चल रहे <strong>शीतकालीन सत्र (</strong><strong>Winter Session)</strong> को बेहद अहम बताते हुए कहा कि इसमें देश के सामने खड़े बड़े मुद्दों पर तुरंत और गंभीर चर्चा होनी चाहिए।

सत्र शुरू होने से पहले मीडिया से बात करते हुए उन्होंने <strong>Special Intensive Revision (SIR) Act</strong> को एक राष्ट्रीय चिंता बताया। उनके अनुसार इस एक्ट की वजह से देश की कुछ <strong>संवैधानिक संस्थाओं (</strong><strong>Constitutional Institutions)</strong> खासकर <strong>चुनाव आयोग (</strong><strong>Election Commission)</strong> पर लोगों का भरोसा कम होता जा रहा है।

<strong>SIR </strong><strong>एक्ट पर कंग की कड़ी चिंता</strong>

सांसद कंग ने कहा कि SIR एक्ट के चलते
<ul>
 	<li>चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं</li>
 	<li>जनता को लगता है कि पारदर्शिता (transparency) कम हो रही है</li>
 	<li>और चुनाव आयोग की credibility कम होती दिख रही है</li>
</ul>
उन्होंने सरकार से मांग की कि पूरी चुनाव प्रक्रिया को साफ-सुथरा, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाए रखने के लिए तुरंत कदम उठाए जाएं।

<strong>संसद चलाने की जिम्मेदारी किसकी</strong><strong>?</strong>

केंद्रीय मंत्री <strong>किरन रिजिजू</strong> के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कंग ने साफ कहा कि:
<ul>
 	<li><strong>संसद चलाने की असली जिम्मेदारी सत्ता पक्ष यानी सरकार की होती है</strong>,</li>
 	<li>विपक्ष तब ही चर्चा कर सकता है जब सरकार माहौल बनाए।</li>
</ul>
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि <strong>मानसून सत्र</strong> के दौरान सरकार ने कोई गंभीर प्रयास नहीं किया, जिसकी वजह से कई ज़रूरी बिल और मुद्दे लंबित रह गए थे।

<strong>सार्वजनिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद</strong>

मलविंदर कंग ने उम्मीद जताई कि इस बार:
<ul>
 	<li>जनता से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बहस होगी</li>
 	<li>संवैधानिक संस्थाओं की सुरक्षा और मजबूती पर ठोस कदम उठाए जाएंगे</li>
 	<li>और ऐसे मामलों पर राजनीति नहीं, बल्कि देशहित में चर्चा की जाएगी</li>
</ul>
<strong>क्यों है यह सत्र इतना महत्वपूर्ण</strong><strong>?</strong>

यह सत्र कई वजहों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है:
<ul>
 	<li>SIR Act को लेकर देशभर में चर्चा और चिंता</li>
 	<li>चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल</li>
 	<li>विपक्ष की तरफ से लगातार demand कि चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए</li>
 	<li>पिछले सत्र में अधूरे रह गए काम पूरे करने का दबाव</li>
</ul>
कंग ने कहा कि जनता यह उम्मीद कर रही है कि संसद में सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि <strong>real issues</strong> पर बात होगी और लोकतंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>SIR Controversy पर CM Bhagwant Mann की कड़ी प्रतिक्रिया: “सवाल उठाना public Right, जवाब देना ECI की Duty”</title>
		<link>https://trendstopic.in/cm-bhagwant-manns-strong-stand-on-the-sir-controversy-questioning-is-the-peoples-right-and-answering-is-the-ecis-duty/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Dec 2025 04:17:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चंडीगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[BhagwantMann]]></category>
		<category><![CDATA[CMStatement]]></category>
		<category><![CDATA[Democracy]]></category>
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		<category><![CDATA[SIRControversy]]></category>
		<category><![CDATA[VoterRights]]></category>
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					<description><![CDATA[देश में इन दिनों चुनावों को लेकर माहौल गर्म है। लोग अपने वोटर लिस्ट, वोटिंग सिस्टम और Election Commission की चल रही Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। कई राज्यों में शिकायतें आ रही हैं कि मतदाता सूची में गड़बड़ियां हो रही हैं, नाम काटे जा रहे हैं या सही तरीके से जवाब नहीं मिल रहा।
ऐसे माहौल में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का बयान पूरे देश में चर्चा का कारण बन गया है।
<h2><strong>क्या है </strong><strong>SIR </strong><strong>और क्यों बढ़ा विवाद</strong><strong>?</strong></h2>
SIR यानी <em>Special Intensive Revision</em>, Election Commission द्वारा चलाया जाने वाला एक बड़ा अभियान है जिसमें वोटर लिस्ट अपडेट की जाती है —
जैसे नए नाम जोड़ना, गलतियां ठीक करना, पुराने और डुप्लीकेट नाम हटाना।

लेकिन इस बार SIR को लेकर देशभर में कई तरह की शिकायतें सामने आईं:
<ul>
 	<li>कई राजनीतिक दलों ने आरोप लगाया कि <strong>ग</strong><strong>enuine </strong><strong>मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं।</strong></li>
 	<li>लोगों का कहना है कि <strong>प्रक्रिया पारदर्शी (</strong><strong>transparent) </strong><strong>नहीं है।</strong></li>
 	<li>कहीं-कहीं कहा गया कि SIR “vote theft” का तरीका बन सकता है।</li>
 	<li>सोशल मीडिया से लेकर संसद तक, इस मुद्दे पर बहस गर्म है।</li>
</ul>
कुछ राज्यों जैसे पंजाब और बंगाल में तो प्रदर्शन तक हुए। Booth Level Officers (BLOs) ने भी असंतोष जताया कि प्रक्रिया बहुत confusing और दबाव वाली है।

ECI ने अपनी तरफ से कहा है कि ये आरोप “highly exaggerated” यानी बढ़ा-चढ़ाकर बताए जा रहे हैं, और SIR नियमों के हिसाब से चल रहा है। लेकिन लोगों की चिंताएँ खत्म नहीं हो रही।
<h2><strong>CM </strong><strong>भगवंत मान की सीधी और कड़ी बात </strong><strong>— “</strong><strong>सबूत जनता क्यों दे</strong><strong>?”</strong></h2>
पंजाब के CM भगवंत मान ने साफ कहा कि जनता का चिंता करना गलत नहीं है, बल्कि <strong>जवाब न देना गलत है।</strong>

उन्होंने कहा: <strong>“SIR </strong><strong>पर सवाल उठाना जनता का हक है। सबूत जनता क्यों दे</strong><strong>? </strong><strong>जवाब तो </strong><strong>Election Commission </strong><strong>को देना चाहिए।</strong><strong>”</strong>

मान का कहना है कि जब देश का आम वोटर — जो असली मालिक है — मतदान प्रक्रिया पर शक करने लगे, तो यह बड़ी समस्या है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र जनता के भरोसे पर चलता है, और यह भरोसा टूटने नहीं देना चाहिए।
<h2>CM मान ने ECI से 3 बड़ी बातें कहीं</h2>
<h3><strong>1</strong> <strong>जनता को शक है तो जिम्मेदारी आपकी है</strong></h3>
उन्होंने कहा कि अगर वोटर परेशान हैं या डर महसूस कर रहे हैं, तो यह ECI की जिम्मेदारी है कि उन्हें भरोसा दिलाए।
“चुनाव जनता का festival है, किसी पार्टी का event नहीं।”
<h3><strong>2</strong> <strong>सवाल पूछना अपराध नहीं </strong><strong>— </strong><strong>अधिकार है</strong></h3>
मान ने कहा कि जनता सवाल पूछेगी तो लोकतंत्र मजबूत होगा। सवाल पूछना लोगों की right है।
<h3><strong>3</strong> <strong>मतदाता सूची पारदर्शी (</strong><strong>transparent) </strong><strong>होनी चाहिए</strong></h3>
उन्होंने कहा कि नाम हटाने-जोड़ने की प्रक्रिया साफ-सुथरी और खुली होनी चाहिए।
लोगों को डर नहीं, भरोसा मिलना चाहिए।
<h2><strong>पूरा देश इस पर चर्चा कर रहा है</strong></h2>
यह मुद्दा अब सिर्फ पंजाब तक नहीं रहा।
कई राष्ट्रीय नेताओं — जैसे प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव, और कुछ क्षेत्रीय पार्टियों — ने भी SIR पर सवाल उठाए हैं।
संसद के सत्र में भी इस पर बहस हुई और जवाब मांगे गए।

ECI की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट दाखिल कर कहा गया कि सभी आरोप राजनीतिक हैं और SIR नियमों के अनुसार हो रहा है। लेकिन विपक्ष और जनता इस जवाब से संतुष्ट नहीं दिख रही।
<h2>पंजाब में क्यों ज्यादा चिंता है?</h2>
पंजाब में विपक्ष और सरकार दोनों ही कह चुके हैं कि SIR को लेकर confusion और fear फैला है।
CM मान ने आरोप लगाया कि कहीं-कहीं genuine वोटरों के नाम हटाए जा रहे हैं, जिससे लोगों में बेचैनी है।

उन्होंने कहा:

<strong>“</strong><strong>चुप्पी समाधान नहीं है </strong><strong>— </strong><strong>पारदर्शिता ही समाधान है।</strong><strong>”</strong>
<h2><strong>लोगों को क्या चाहिए</strong><strong>?</strong></h2>
<ul>
 	<li>वोटर लिस्ट में transparency</li>
 	<li>किसी भी नाम हटाने का valid कारण</li>
 	<li>आसान और साफ communication</li>
 	<li>शिकायतों का तुरंत समाधान</li>
 	<li>ECI की ओर से भरोसा और clarity</li>
</ul>
यानी जनता सिर्फ यही चाहती है कि उनकी आवाज़ को सुना जाए और मतदान का अधिकार सुरक्षित रहे।
<h2><strong>निष्कर्ष </strong><strong>— </strong><strong>लोकतंत्र तभी मजबूत जब जनता को भरोसा हो</strong></h2>
CM भगवंत मान का बयान इस समय इसलिए चर्चा में है क्योंकि उन्होंने वही बात कही, जो लाखों भारतीय सोच रहे थे।
उन्होंने जनता की तरफ से आवाज उठाई और कहा कि:
<ul>
 	<li>जनता सवाल पूछे तो गलत नहीं</li>
 	<li>ECI जवाबदेह हो</li>
 	<li>लोकतंत्र का मूल “trust” कभी टूटना नहीं चाहिए</li>
</ul>
उनका संदेश इसलिए भी बड़ा है क्योंकि आज के समय में ऐसे नेता कम ही हैं जो खुलकर चुनाव प्रक्रिया की कमजोरियों पर बात करते हैं और जनता के अधिकारों को प्राथमिकता देते हैं।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[देश में इन दिनों चुनावों को लेकर माहौल गर्म है। लोग अपने वोटर लिस्ट, वोटिंग सिस्टम और Election Commission की चल रही Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। कई राज्यों में शिकायतें आ रही हैं कि मतदाता सूची में गड़बड़ियां हो रही हैं, नाम काटे जा रहे हैं या सही तरीके से जवाब नहीं मिल रहा।
ऐसे माहौल में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का बयान पूरे देश में चर्चा का कारण बन गया है।
<h2><strong>क्या है </strong><strong>SIR </strong><strong>और क्यों बढ़ा विवाद</strong><strong>?</strong></h2>
SIR यानी <em>Special Intensive Revision</em>, Election Commission द्वारा चलाया जाने वाला एक बड़ा अभियान है जिसमें वोटर लिस्ट अपडेट की जाती है —
जैसे नए नाम जोड़ना, गलतियां ठीक करना, पुराने और डुप्लीकेट नाम हटाना।

लेकिन इस बार SIR को लेकर देशभर में कई तरह की शिकायतें सामने आईं:
<ul>
 	<li>कई राजनीतिक दलों ने आरोप लगाया कि <strong>ग</strong><strong>enuine </strong><strong>मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं।</strong></li>
 	<li>लोगों का कहना है कि <strong>प्रक्रिया पारदर्शी (</strong><strong>transparent) </strong><strong>नहीं है।</strong></li>
 	<li>कहीं-कहीं कहा गया कि SIR “vote theft” का तरीका बन सकता है।</li>
 	<li>सोशल मीडिया से लेकर संसद तक, इस मुद्दे पर बहस गर्म है।</li>
</ul>
कुछ राज्यों जैसे पंजाब और बंगाल में तो प्रदर्शन तक हुए। Booth Level Officers (BLOs) ने भी असंतोष जताया कि प्रक्रिया बहुत confusing और दबाव वाली है।

ECI ने अपनी तरफ से कहा है कि ये आरोप “highly exaggerated” यानी बढ़ा-चढ़ाकर बताए जा रहे हैं, और SIR नियमों के हिसाब से चल रहा है। लेकिन लोगों की चिंताएँ खत्म नहीं हो रही।
<h2><strong>CM </strong><strong>भगवंत मान की सीधी और कड़ी बात </strong><strong>— “</strong><strong>सबूत जनता क्यों दे</strong><strong>?”</strong></h2>
पंजाब के CM भगवंत मान ने साफ कहा कि जनता का चिंता करना गलत नहीं है, बल्कि <strong>जवाब न देना गलत है।</strong>

उन्होंने कहा: <strong>“SIR </strong><strong>पर सवाल उठाना जनता का हक है। सबूत जनता क्यों दे</strong><strong>? </strong><strong>जवाब तो </strong><strong>Election Commission </strong><strong>को देना चाहिए।</strong><strong>”</strong>

मान का कहना है कि जब देश का आम वोटर — जो असली मालिक है — मतदान प्रक्रिया पर शक करने लगे, तो यह बड़ी समस्या है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र जनता के भरोसे पर चलता है, और यह भरोसा टूटने नहीं देना चाहिए।
<h2>CM मान ने ECI से 3 बड़ी बातें कहीं</h2>
<h3><strong>1</strong> <strong>जनता को शक है तो जिम्मेदारी आपकी है</strong></h3>
उन्होंने कहा कि अगर वोटर परेशान हैं या डर महसूस कर रहे हैं, तो यह ECI की जिम्मेदारी है कि उन्हें भरोसा दिलाए।
“चुनाव जनता का festival है, किसी पार्टी का event नहीं।”
<h3><strong>2</strong> <strong>सवाल पूछना अपराध नहीं </strong><strong>— </strong><strong>अधिकार है</strong></h3>
मान ने कहा कि जनता सवाल पूछेगी तो लोकतंत्र मजबूत होगा। सवाल पूछना लोगों की right है।
<h3><strong>3</strong> <strong>मतदाता सूची पारदर्शी (</strong><strong>transparent) </strong><strong>होनी चाहिए</strong></h3>
उन्होंने कहा कि नाम हटाने-जोड़ने की प्रक्रिया साफ-सुथरी और खुली होनी चाहिए।
लोगों को डर नहीं, भरोसा मिलना चाहिए।
<h2><strong>पूरा देश इस पर चर्चा कर रहा है</strong></h2>
यह मुद्दा अब सिर्फ पंजाब तक नहीं रहा।
कई राष्ट्रीय नेताओं — जैसे प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव, और कुछ क्षेत्रीय पार्टियों — ने भी SIR पर सवाल उठाए हैं।
संसद के सत्र में भी इस पर बहस हुई और जवाब मांगे गए।

ECI की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट दाखिल कर कहा गया कि सभी आरोप राजनीतिक हैं और SIR नियमों के अनुसार हो रहा है। लेकिन विपक्ष और जनता इस जवाब से संतुष्ट नहीं दिख रही।
<h2>पंजाब में क्यों ज्यादा चिंता है?</h2>
पंजाब में विपक्ष और सरकार दोनों ही कह चुके हैं कि SIR को लेकर confusion और fear फैला है।
CM मान ने आरोप लगाया कि कहीं-कहीं genuine वोटरों के नाम हटाए जा रहे हैं, जिससे लोगों में बेचैनी है।

उन्होंने कहा:

<strong>“</strong><strong>चुप्पी समाधान नहीं है </strong><strong>— </strong><strong>पारदर्शिता ही समाधान है।</strong><strong>”</strong>
<h2><strong>लोगों को क्या चाहिए</strong><strong>?</strong></h2>
<ul>
 	<li>वोटर लिस्ट में transparency</li>
 	<li>किसी भी नाम हटाने का valid कारण</li>
 	<li>आसान और साफ communication</li>
 	<li>शिकायतों का तुरंत समाधान</li>
 	<li>ECI की ओर से भरोसा और clarity</li>
</ul>
यानी जनता सिर्फ यही चाहती है कि उनकी आवाज़ को सुना जाए और मतदान का अधिकार सुरक्षित रहे।
<h2><strong>निष्कर्ष </strong><strong>— </strong><strong>लोकतंत्र तभी मजबूत जब जनता को भरोसा हो</strong></h2>
CM भगवंत मान का बयान इस समय इसलिए चर्चा में है क्योंकि उन्होंने वही बात कही, जो लाखों भारतीय सोच रहे थे।
उन्होंने जनता की तरफ से आवाज उठाई और कहा कि:
<ul>
 	<li>जनता सवाल पूछे तो गलत नहीं</li>
 	<li>ECI जवाबदेह हो</li>
 	<li>लोकतंत्र का मूल “trust” कभी टूटना नहीं चाहिए</li>
</ul>
उनका संदेश इसलिए भी बड़ा है क्योंकि आज के समय में ऐसे नेता कम ही हैं जो खुलकर चुनाव प्रक्रिया की कमजोरियों पर बात करते हैं और जनता के अधिकारों को प्राथमिकता देते हैं।]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>12 states में आज से शुरू हुआ Voter List का Special Intensive Revision (SIR), 7 February 2026 तक चलेगी process</title>
		<link>https://trendstopic.in/special-intensive-revision-sir-of-voter-list-begins-today-in-12-states-process-to-continue-till-february-7-2026/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 28 Oct 2025 07:00:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[#UP]]></category>
		<category><![CDATA[AndamanNicobar]]></category>
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		<category><![CDATA[WestBengal]]></category>
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					<description><![CDATA[उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आज यानी <strong>28 </strong><strong>अक्टूबर </strong><strong>2025 </strong><strong>से </strong><strong>“Special Intensive Revision” (SIR)</strong> की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह बड़ा कदम <strong>मतदाता सूची (</strong><strong>Voter List)</strong> को सही, साफ़ और पारदर्शी बनाने के लिए उठाया गया है। यह प्रक्रिया <strong>7 </strong><strong>फरवरी </strong><strong>2026 </strong><strong>तक चलेगी।</strong>

<strong>क्या है </strong><strong>SIR?</strong>

SIR यानी <strong>मतदाता सूची का विशेष सघन पुनरीक्षण</strong>।
इसका मतलब है — हर राज्य में घर-घर जाकर यह जांच की जाएगी कि मतदाता सूची में दर्ज नाम सही हैं या नहीं।
अगर किसी का नाम गलत जुड़ गया है, कोई व्यक्ति अब उस पते पर नहीं रहता, या कोई मतदाता अब नहीं रहा, तो उस जानकारी को अपडेट किया जाएगा।
साथ ही, <strong>नए और पात्र मतदाताओं के नाम</strong> जोड़े जाएंगे।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य है —
मतदाता सूची को पूरी तरह <strong>शुद्ध (</strong><strong>clean)</strong> बनाना
<strong>डुप्लीकेट या गलत नामों</strong> को हटाना
और <strong>हर नागरिक को सही वोटिंग अधिकार</strong> देना।

<strong>किन राज्यों में शुरू हुआ है </strong><strong>SIR?</strong>

इस बार कुल <strong>12 </strong><strong>राज्य और केंद्र शासित प्रदेश</strong> इस प्रक्रिया में शामिल हैं:
<ol>
 	<li>उत्तर प्रदेश</li>
 	<li>पश्चिम बंगाल</li>
 	<li>मध्य प्रदेश</li>
 	<li>छत्तीसगढ़</li>
 	<li>तमिलनाडु</li>
 	<li>राजस्थान</li>
 	<li>केरल</li>
 	<li>गुजरात</li>
 	<li>गोवा</li>
 	<li>पुडुचेरी</li>
 	<li>लक्षद्वीप</li>
 	<li>अंडमान और निकोबार</li>
</ol>
असम को फिलहाल इस सूची में शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि वहां सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में नागरिकता की जांच (NRC process) चल रही है।

<strong>इन </strong><strong>12 </strong><strong>राज्यों में करीब </strong><strong>51 </strong><strong>करोड़ मतदाता</strong>

चुनाव आयोग के मुताबिक, इन 12 राज्यों में कुल करीब <strong>51 </strong><strong>करोड़ वोटर्स</strong> हैं।
<ul>
 	<li><strong>उत्तर प्रदेश</strong> – 15.44 करोड़</li>
 	<li><strong>पश्चिम बंगाल</strong> – 7.66 करोड़</li>
 	<li><strong>तमिलनाडु</strong> – 6.41 करोड़</li>
 	<li><strong>मध्य प्रदेश</strong> – 5.74 करोड़</li>
 	<li><strong>राजस्थान</strong> – 5.48 करोड़</li>
 	<li><strong>छत्तीसगढ़</strong> – 2.12 करोड़</li>
</ul>
<strong>मुख्य चुनाव आयुक्त का ऐलान</strong>

<strong>मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार</strong> ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर SIR की शुरुआत की घोषणा की।
उनके साथ <strong>चुनाव आयुक्त डॉ. एस.एस. संधू</strong> और <strong>डॉ. विवेक जोशी</strong> भी मौजूद रहे।

उन्होंने बताया कि <strong>बिहार में सफलतापूर्वक कराए गए </strong><strong>SIR</strong> से मिले अनुभवों के आधार पर इस बार की प्रक्रिया को और आसान बनाया गया है।
कुछ <strong>फॉर्म और दस्तावेजों की जांच के तरीके</strong> में बदलाव किया गया है ताकि मतदाताओं को कम परेशानी हो।

अब हर मतदाता को एक <strong>यूनिक फॉर्म</strong> मिलेगा जिसमें उसका पुराना पता और फोटो पहले से छपा होगा।
अगर व्यक्ति अब वहां नहीं रह रहा है, तो वह फॉर्म में बदलाव कर सकता है।
आयोग ने मतदाताओं से आग्रह किया है कि वे <strong>रंगीन फोटो</strong> लगाएं ताकि पहचान पत्र (Voter ID) और साफ़ दिखे।

<strong>अभी वोटर लिस्ट में कोई बदलाव नहीं होगा</strong>

जिन 12 राज्यों में SIR चल रहा है, वहां फिलहाल मतदाता सूची में
❌ कोई नया नाम नहीं जोड़ा जाएगा और
❌ कोई नाम नहीं हटाया जाएगा।

सारी एंट्री और बदलाव अब SIR की प्रक्रिया के दौरान ही किए जाएंगे।

<strong>SIR </strong><strong>की पूरी टाइमलाइन</strong>
<table>
<thead>
<tr>
<td><strong>चरण</strong></td>
<td><strong>समयावधि</strong></td>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>गणना पत्रों की छपाई और BLO (Booth Level Officer) को प्रशिक्षण</td>
<td>28 अक्टूबर – 3 नवंबर 2025</td>
</tr>
<tr>
<td>घर-घर जाकर सत्यापन (Door to door verification)</td>
<td>4 नवंबर – 4 दिसंबर 2025</td>
</tr>
<tr>
<td>मतदाता सूची का मसौदा जारी</td>
<td>9 दिसंबर 2025</td>
</tr>
<tr>
<td>दावे और आपत्तियां दर्ज करने की तारीख</td>
<td>9 दिसंबर 2025 – 8 जनवरी 2026</td>
</tr>
<tr>
<td>दस्तावेज़ जांच, सुनवाई और सत्यापन</td>
<td>9 दिसंबर 2025 – 31 जनवरी 2026</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>अंतिम मतदाता सूची जारी</strong></td>
<td><strong>7 </strong><strong>फरवरी </strong><strong>2026</strong></td>
</tr>
</tbody>
</table>
<strong>क्यों जरूरी है </strong><strong>SIR?</strong>

चुनाव आयोग के अनुसार SIR शुरू करने की कई बड़ी वजहें हैं:
<ol>
 	<li><strong>तेजी से शहरीकरण (</strong><strong>Urbanization)</strong> — लोग शहरों में जाकर बस रहे हैं, जिससे पुराने पते पर नाम रह जाते हैं।</li>
 	<li><strong>डुप्लीकेट नाम</strong> — कई लोगों के नाम दो जगह दर्ज हो जाते हैं।</li>
 	<li><strong>मृत मतदाताओं के नाम</strong> – कई बार मर चुके लोगों के नाम अभी भी सूची में रहते हैं।</li>
 	<li><strong>गलत तरीके से घुसपैठ कर नाम जुड़वाना</strong> – कुछ लोग गैरकानूनी तरीके से अपने नाम वोटर लिस्ट में जोड़ लेते हैं।</li>
</ol>
इन सभी गड़बड़ियों को ठीक करने के लिए SIR बहुत जरूरी माना गया है।

<strong>राजनीतिक प्रतिक्रिया और आयोग का रुख</strong>

पश्चिम बंगाल में कुछ राजनीतिक दलों ने SIR पर सवाल उठाए हैं,
जिस पर मुख्य चुनाव आयुक्त ने साफ कहा कि —

“SIR एक <strong>संवैधानिक प्रक्रिया (</strong><strong>Constitutional Process)</strong> है, और राज्य सरकारें इसमें सहयोग करने के लिए बाध्य हैं।”

उन्होंने बताया कि अब तक किसी भी राज्य से <strong>असहयोग की कोई रिपोर्ट नहीं</strong> आई है।
बिहार में जब SIR हुआ था, तब भी सभी राजनीतिक दलों और उनके <strong>बूथ लेवल एजेंट्स</strong> ने पूरा सहयोग दिया था।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका <strong>किसी राजनीतिक दल से कोई मनमुटाव नहीं</strong> है, और न ही वह किसी के खिलाफ कोई टिप्पणी करता है।

<strong>इतिहास (</strong><strong>Past Record)</strong>

भारत में यह प्रक्रिया कोई नई नहीं है।
1951 से 2004 तक <strong>8 </strong><strong>बार </strong><strong>SIR</strong> कराया जा चुका है।
<strong>आखिरी बार </strong><strong>2002-2004</strong> के बीच यह देशभर में हुआ था।
लगभग <strong>21 </strong><strong>साल बाद</strong>, अब यह <strong>नौवां </strong><strong>SIR</strong> शुरू हुआ है।

देश के 12 राज्यों में शुरू हुई यह SIR प्रक्रिया आने वाले चुनावों के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।
इसके जरिए चुनाव आयोग का लक्ष्य है कि देश की मतदाता सूची पूरी तरह <strong>सटीक</strong><strong>, </strong><strong>साफ़ और अपडेटेड</strong> हो — ताकि हर नागरिक को उसका <strong>सही मतदान अधिकार (</strong><strong>Right to Vote)</strong> मिल सके और चुनावों की प्रक्रिया और भी <strong>पारदर्शी (</strong><strong>Transparent)</strong> बन सके।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आज यानी <strong>28 </strong><strong>अक्टूबर </strong><strong>2025 </strong><strong>से </strong><strong>“Special Intensive Revision” (SIR)</strong> की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह बड़ा कदम <strong>मतदाता सूची (</strong><strong>Voter List)</strong> को सही, साफ़ और पारदर्शी बनाने के लिए उठाया गया है। यह प्रक्रिया <strong>7 </strong><strong>फरवरी </strong><strong>2026 </strong><strong>तक चलेगी।</strong>

<strong>क्या है </strong><strong>SIR?</strong>

SIR यानी <strong>मतदाता सूची का विशेष सघन पुनरीक्षण</strong>।
इसका मतलब है — हर राज्य में घर-घर जाकर यह जांच की जाएगी कि मतदाता सूची में दर्ज नाम सही हैं या नहीं।
अगर किसी का नाम गलत जुड़ गया है, कोई व्यक्ति अब उस पते पर नहीं रहता, या कोई मतदाता अब नहीं रहा, तो उस जानकारी को अपडेट किया जाएगा।
साथ ही, <strong>नए और पात्र मतदाताओं के नाम</strong> जोड़े जाएंगे।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य है —
मतदाता सूची को पूरी तरह <strong>शुद्ध (</strong><strong>clean)</strong> बनाना
<strong>डुप्लीकेट या गलत नामों</strong> को हटाना
और <strong>हर नागरिक को सही वोटिंग अधिकार</strong> देना।

<strong>किन राज्यों में शुरू हुआ है </strong><strong>SIR?</strong>

इस बार कुल <strong>12 </strong><strong>राज्य और केंद्र शासित प्रदेश</strong> इस प्रक्रिया में शामिल हैं:
<ol>
 	<li>उत्तर प्रदेश</li>
 	<li>पश्चिम बंगाल</li>
 	<li>मध्य प्रदेश</li>
 	<li>छत्तीसगढ़</li>
 	<li>तमिलनाडु</li>
 	<li>राजस्थान</li>
 	<li>केरल</li>
 	<li>गुजरात</li>
 	<li>गोवा</li>
 	<li>पुडुचेरी</li>
 	<li>लक्षद्वीप</li>
 	<li>अंडमान और निकोबार</li>
</ol>
असम को फिलहाल इस सूची में शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि वहां सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में नागरिकता की जांच (NRC process) चल रही है।

<strong>इन </strong><strong>12 </strong><strong>राज्यों में करीब </strong><strong>51 </strong><strong>करोड़ मतदाता</strong>

चुनाव आयोग के मुताबिक, इन 12 राज्यों में कुल करीब <strong>51 </strong><strong>करोड़ वोटर्स</strong> हैं।
<ul>
 	<li><strong>उत्तर प्रदेश</strong> – 15.44 करोड़</li>
 	<li><strong>पश्चिम बंगाल</strong> – 7.66 करोड़</li>
 	<li><strong>तमिलनाडु</strong> – 6.41 करोड़</li>
 	<li><strong>मध्य प्रदेश</strong> – 5.74 करोड़</li>
 	<li><strong>राजस्थान</strong> – 5.48 करोड़</li>
 	<li><strong>छत्तीसगढ़</strong> – 2.12 करोड़</li>
</ul>
<strong>मुख्य चुनाव आयुक्त का ऐलान</strong>

<strong>मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार</strong> ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर SIR की शुरुआत की घोषणा की।
उनके साथ <strong>चुनाव आयुक्त डॉ. एस.एस. संधू</strong> और <strong>डॉ. विवेक जोशी</strong> भी मौजूद रहे।

उन्होंने बताया कि <strong>बिहार में सफलतापूर्वक कराए गए </strong><strong>SIR</strong> से मिले अनुभवों के आधार पर इस बार की प्रक्रिया को और आसान बनाया गया है।
कुछ <strong>फॉर्म और दस्तावेजों की जांच के तरीके</strong> में बदलाव किया गया है ताकि मतदाताओं को कम परेशानी हो।

अब हर मतदाता को एक <strong>यूनिक फॉर्म</strong> मिलेगा जिसमें उसका पुराना पता और फोटो पहले से छपा होगा।
अगर व्यक्ति अब वहां नहीं रह रहा है, तो वह फॉर्म में बदलाव कर सकता है।
आयोग ने मतदाताओं से आग्रह किया है कि वे <strong>रंगीन फोटो</strong> लगाएं ताकि पहचान पत्र (Voter ID) और साफ़ दिखे।

<strong>अभी वोटर लिस्ट में कोई बदलाव नहीं होगा</strong>

जिन 12 राज्यों में SIR चल रहा है, वहां फिलहाल मतदाता सूची में
❌ कोई नया नाम नहीं जोड़ा जाएगा और
❌ कोई नाम नहीं हटाया जाएगा।

सारी एंट्री और बदलाव अब SIR की प्रक्रिया के दौरान ही किए जाएंगे।

<strong>SIR </strong><strong>की पूरी टाइमलाइन</strong>
<table>
<thead>
<tr>
<td><strong>चरण</strong></td>
<td><strong>समयावधि</strong></td>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>गणना पत्रों की छपाई और BLO (Booth Level Officer) को प्रशिक्षण</td>
<td>28 अक्टूबर – 3 नवंबर 2025</td>
</tr>
<tr>
<td>घर-घर जाकर सत्यापन (Door to door verification)</td>
<td>4 नवंबर – 4 दिसंबर 2025</td>
</tr>
<tr>
<td>मतदाता सूची का मसौदा जारी</td>
<td>9 दिसंबर 2025</td>
</tr>
<tr>
<td>दावे और आपत्तियां दर्ज करने की तारीख</td>
<td>9 दिसंबर 2025 – 8 जनवरी 2026</td>
</tr>
<tr>
<td>दस्तावेज़ जांच, सुनवाई और सत्यापन</td>
<td>9 दिसंबर 2025 – 31 जनवरी 2026</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>अंतिम मतदाता सूची जारी</strong></td>
<td><strong>7 </strong><strong>फरवरी </strong><strong>2026</strong></td>
</tr>
</tbody>
</table>
<strong>क्यों जरूरी है </strong><strong>SIR?</strong>

चुनाव आयोग के अनुसार SIR शुरू करने की कई बड़ी वजहें हैं:
<ol>
 	<li><strong>तेजी से शहरीकरण (</strong><strong>Urbanization)</strong> — लोग शहरों में जाकर बस रहे हैं, जिससे पुराने पते पर नाम रह जाते हैं।</li>
 	<li><strong>डुप्लीकेट नाम</strong> — कई लोगों के नाम दो जगह दर्ज हो जाते हैं।</li>
 	<li><strong>मृत मतदाताओं के नाम</strong> – कई बार मर चुके लोगों के नाम अभी भी सूची में रहते हैं।</li>
 	<li><strong>गलत तरीके से घुसपैठ कर नाम जुड़वाना</strong> – कुछ लोग गैरकानूनी तरीके से अपने नाम वोटर लिस्ट में जोड़ लेते हैं।</li>
</ol>
इन सभी गड़बड़ियों को ठीक करने के लिए SIR बहुत जरूरी माना गया है।

<strong>राजनीतिक प्रतिक्रिया और आयोग का रुख</strong>

पश्चिम बंगाल में कुछ राजनीतिक दलों ने SIR पर सवाल उठाए हैं,
जिस पर मुख्य चुनाव आयुक्त ने साफ कहा कि —

“SIR एक <strong>संवैधानिक प्रक्रिया (</strong><strong>Constitutional Process)</strong> है, और राज्य सरकारें इसमें सहयोग करने के लिए बाध्य हैं।”

उन्होंने बताया कि अब तक किसी भी राज्य से <strong>असहयोग की कोई रिपोर्ट नहीं</strong> आई है।
बिहार में जब SIR हुआ था, तब भी सभी राजनीतिक दलों और उनके <strong>बूथ लेवल एजेंट्स</strong> ने पूरा सहयोग दिया था।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका <strong>किसी राजनीतिक दल से कोई मनमुटाव नहीं</strong> है, और न ही वह किसी के खिलाफ कोई टिप्पणी करता है।

<strong>इतिहास (</strong><strong>Past Record)</strong>

भारत में यह प्रक्रिया कोई नई नहीं है।
1951 से 2004 तक <strong>8 </strong><strong>बार </strong><strong>SIR</strong> कराया जा चुका है।
<strong>आखिरी बार </strong><strong>2002-2004</strong> के बीच यह देशभर में हुआ था।
लगभग <strong>21 </strong><strong>साल बाद</strong>, अब यह <strong>नौवां </strong><strong>SIR</strong> शुरू हुआ है।

देश के 12 राज्यों में शुरू हुई यह SIR प्रक्रिया आने वाले चुनावों के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।
इसके जरिए चुनाव आयोग का लक्ष्य है कि देश की मतदाता सूची पूरी तरह <strong>सटीक</strong><strong>, </strong><strong>साफ़ और अपडेटेड</strong> हो — ताकि हर नागरिक को उसका <strong>सही मतदान अधिकार (</strong><strong>Right to Vote)</strong> मिल सके और चुनावों की प्रक्रिया और भी <strong>पारदर्शी (</strong><strong>Transparent)</strong> बन सके।]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>Rae Bareli दौरे पर Rahul Gandhi ने BJP-RSS और Election Commission पर साधा निशाना, बोले- OBC और Dalits को आगे बढ़ने नहीं दे रहे</title>
		<link>https://trendstopic.in/rahul-gandhi-targets-bjp-rss-and-election-commission-during-rae-bareli-visit-says-obcs-and-dalits-not-being-allowed-to-progress/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 10 Sep 2025 11:54:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता <strong>राहुल गांधी</strong> ने रायबरेली में अपने दौरे के दौरान कई मुद्दों पर बड़ा बयान दिया। प्रजापति समाज के सम्मेलन में उन्होंने <strong>भाजपा और आरएसएस</strong> पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में 90 फीसदी आबादी ओबीसी, दलित और आदिवासी है, लेकिन इन लोगों को आगे बढ़ने नहीं दिया जा रहा। राहुल ने कहा, “ये चाहते हैं कि दलित वहीं रहें, अम्बानी जहां हैं वहीं रहें। हमारा मकसद है कि प्रजापति और ओबीसी समाज के बच्चे भी अम्बानी जैसे बिजनेसमैन बने।”

राहुल ने पीएम मोदी पर भी निशाना साधा और कहा कि “प्रधानमंत्री खुद ओबीसी हैं, लेकिन जाति जनगणना पर कुछ नहीं बोलते। मैंने संसद में सवाल किया तो डेढ़ घंटे तक भाषण दिया, लेकिन जाति जनगणना का नाम तक नहीं लिया।”

<strong>दौरे का पूरा क्रम</strong>
<ul>
 	<li><strong>सुबह </strong><strong>8:30 </strong><strong>बजे:</strong> राहुल गांधी दिल्ली स्थित अपने आवास से रवाना हुए।</li>
 	<li><strong>लखनऊ एयरपोर्ट:</strong> फ्लाइट से लखनऊ पहुंचे। एयरपोर्ट पर हजारों कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया।</li>
 	<li><strong>सड़क मार्ग से रायबरेली:</strong> लखनऊ से रायबरेली के लिए निकलें।</li>
</ul>
रास्ते में राहुल गांधी के काफिले को <strong>योगी सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह</strong> और उनके समर्थकों ने रोकने की कोशिश की। धरने के चलते काफिला करीब <strong>1 </strong><strong>किलोमीटर पहले रुका</strong>, पांच मिनट के लिए रोकावट हुई। पुलिस ने मंत्री को हटाया और राहुल का काफिला सुरक्षित आगे बढ़ा।

<strong>बटोही रिसॉर्ट में कार्यक्रम</strong>

राहुल गांधी <strong>बटोही रिसॉर्ट</strong> पहुंचे और वहां <strong>500 </strong><strong>से ज्यादा बूथ स्तर के कांग्रेस कार्यकर्ताओं</strong> को संबोधित किया।

मुख्य बातें:
<ul>
 	<li><strong>वोट चोरी और चुनाव आयोग पर हमला:</strong> राहुल ने कहा कि बीजेपी वोट चोरी करके चुनाव जीत रही है। चुनाव आयोग ने जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा, “विरोध के बाद भी चुनाव आयोग तानाशाही कर रहा है।”</li>
 	<li><strong>प्रजापति सम्मेलन में भाषण:</strong> राहुल ने कहा कि पिछड़ा, ओबीसी, अति पिछड़ा, दलित और आदिवासी समाज को रोका जा रहा है। कॉर्पोरेट इंडिया, बड़े अस्पतालों और कंपनियों में OBC को जगह नहीं मिलती। उन्होंने बताया कि मनरेगा में OBC दिखते हैं, लेकिन बड़े कॉर्पोरेट का कर्ज माफ़ हो जाता है।</li>
 	<li>राहुल ने कहा, “आरएसएस 90 फीसदी OBC आबादी को रोक रही है। मैं यही सवाल सरकार से करता हूं। हम चाहते हैं कि प्रजापति समाज, OBC समाज का बच्चा अम्बानी जैसा बिजनेसमैन बने।”</li>
</ul>
<strong>सामाजिक और व्यक्तिगत मुलाकातें</strong>
<ul>
 	<li>रास्ते में राहुल गांधी ने <strong>8 </strong><strong>साल की बच्ची लक्ष्मी</strong> को टॉफी दी और बात की।</li>
 	<li>मुलिहा मऊ गांव में <strong>पीपल का पौधा रोपण</strong> किया और कार्यकर्ताओं को पौधे की देखभाल करने के लिए कहा।</li>
 	<li>इस दौरान उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दिया।</li>
</ul>
<strong>सपा का पोस्टर विवाद</strong>
<ul>
 	<li>रायबरेली में सपा लोहिया वाहिनी प्रदेश सचिव <strong>राहुल निर्मल बागी</strong> ने पोस्टर जारी किया, जिसमें राहुल गांधी, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव को <strong>ब्रह्मा</strong><strong>, </strong><strong>विष्णु और महेश</strong> के रूप में दिखाया गया।</li>
 	<li>भाजपा प्रवक्ता <strong>आनंद दुबे</strong> ने कहा कि ये नेता राजनीति के इच्छाधारी हिंदू हैं और चुनाव आते ही अपना रूप बदल लेते हैं।</li>
</ul>
<strong>अन्य प्रमुख घटनाक्रम</strong>
<ul>
 	<li>गोरा बाजार चौराहे पर नव-निर्मित <strong>अशोक स्तंभ का लोकार्पण</strong> किया।</li>
 	<li>बटोही रिसॉर्ट से प्रजापति समाज की बैठक में शामिल हुए।</li>
 	<li>बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से संगठन मजबूत करने और चुनाव रणनीति पर चर्चा की।</li>
 	<li>11 सितंबर को जिले में विकास योजनाओं की समीक्षा के लिए होने वाली <strong>‘</strong><strong>दिशा</strong><strong>’ </strong><strong>बैठक की अध्यक्षता करेंगे।</strong></li>
</ul>
<strong>राहुल गांधी के मुख्य संदेश</strong>
<ol>
 	<li>OBC और दलित समाज के बच्चों को आगे बढ़ने का मौका मिले।</li>
 	<li>वोट चोरी और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।</li>
 	<li>कॉर्पोरेट इंडिया और बड़े उद्योगपतियों के फायदे पर ध्यान आकर्षित किया।</li>
 	<li>समाज और पर्यावरण के लिए सकारात्मक संदेश दिए।</li>
</ol>
राहुल गांधी का रायबरेली दौरा 10 और 11 सितंबर तक जारी रहेगा।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता <strong>राहुल गांधी</strong> ने रायबरेली में अपने दौरे के दौरान कई मुद्दों पर बड़ा बयान दिया। प्रजापति समाज के सम्मेलन में उन्होंने <strong>भाजपा और आरएसएस</strong> पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में 90 फीसदी आबादी ओबीसी, दलित और आदिवासी है, लेकिन इन लोगों को आगे बढ़ने नहीं दिया जा रहा। राहुल ने कहा, “ये चाहते हैं कि दलित वहीं रहें, अम्बानी जहां हैं वहीं रहें। हमारा मकसद है कि प्रजापति और ओबीसी समाज के बच्चे भी अम्बानी जैसे बिजनेसमैन बने।”

राहुल ने पीएम मोदी पर भी निशाना साधा और कहा कि “प्रधानमंत्री खुद ओबीसी हैं, लेकिन जाति जनगणना पर कुछ नहीं बोलते। मैंने संसद में सवाल किया तो डेढ़ घंटे तक भाषण दिया, लेकिन जाति जनगणना का नाम तक नहीं लिया।”

<strong>दौरे का पूरा क्रम</strong>
<ul>
 	<li><strong>सुबह </strong><strong>8:30 </strong><strong>बजे:</strong> राहुल गांधी दिल्ली स्थित अपने आवास से रवाना हुए।</li>
 	<li><strong>लखनऊ एयरपोर्ट:</strong> फ्लाइट से लखनऊ पहुंचे। एयरपोर्ट पर हजारों कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया।</li>
 	<li><strong>सड़क मार्ग से रायबरेली:</strong> लखनऊ से रायबरेली के लिए निकलें।</li>
</ul>
रास्ते में राहुल गांधी के काफिले को <strong>योगी सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह</strong> और उनके समर्थकों ने रोकने की कोशिश की। धरने के चलते काफिला करीब <strong>1 </strong><strong>किलोमीटर पहले रुका</strong>, पांच मिनट के लिए रोकावट हुई। पुलिस ने मंत्री को हटाया और राहुल का काफिला सुरक्षित आगे बढ़ा।

<strong>बटोही रिसॉर्ट में कार्यक्रम</strong>

राहुल गांधी <strong>बटोही रिसॉर्ट</strong> पहुंचे और वहां <strong>500 </strong><strong>से ज्यादा बूथ स्तर के कांग्रेस कार्यकर्ताओं</strong> को संबोधित किया।

मुख्य बातें:
<ul>
 	<li><strong>वोट चोरी और चुनाव आयोग पर हमला:</strong> राहुल ने कहा कि बीजेपी वोट चोरी करके चुनाव जीत रही है। चुनाव आयोग ने जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा, “विरोध के बाद भी चुनाव आयोग तानाशाही कर रहा है।”</li>
 	<li><strong>प्रजापति सम्मेलन में भाषण:</strong> राहुल ने कहा कि पिछड़ा, ओबीसी, अति पिछड़ा, दलित और आदिवासी समाज को रोका जा रहा है। कॉर्पोरेट इंडिया, बड़े अस्पतालों और कंपनियों में OBC को जगह नहीं मिलती। उन्होंने बताया कि मनरेगा में OBC दिखते हैं, लेकिन बड़े कॉर्पोरेट का कर्ज माफ़ हो जाता है।</li>
 	<li>राहुल ने कहा, “आरएसएस 90 फीसदी OBC आबादी को रोक रही है। मैं यही सवाल सरकार से करता हूं। हम चाहते हैं कि प्रजापति समाज, OBC समाज का बच्चा अम्बानी जैसा बिजनेसमैन बने।”</li>
</ul>
<strong>सामाजिक और व्यक्तिगत मुलाकातें</strong>
<ul>
 	<li>रास्ते में राहुल गांधी ने <strong>8 </strong><strong>साल की बच्ची लक्ष्मी</strong> को टॉफी दी और बात की।</li>
 	<li>मुलिहा मऊ गांव में <strong>पीपल का पौधा रोपण</strong> किया और कार्यकर्ताओं को पौधे की देखभाल करने के लिए कहा।</li>
 	<li>इस दौरान उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दिया।</li>
</ul>
<strong>सपा का पोस्टर विवाद</strong>
<ul>
 	<li>रायबरेली में सपा लोहिया वाहिनी प्रदेश सचिव <strong>राहुल निर्मल बागी</strong> ने पोस्टर जारी किया, जिसमें राहुल गांधी, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव को <strong>ब्रह्मा</strong><strong>, </strong><strong>विष्णु और महेश</strong> के रूप में दिखाया गया।</li>
 	<li>भाजपा प्रवक्ता <strong>आनंद दुबे</strong> ने कहा कि ये नेता राजनीति के इच्छाधारी हिंदू हैं और चुनाव आते ही अपना रूप बदल लेते हैं।</li>
</ul>
<strong>अन्य प्रमुख घटनाक्रम</strong>
<ul>
 	<li>गोरा बाजार चौराहे पर नव-निर्मित <strong>अशोक स्तंभ का लोकार्पण</strong> किया।</li>
 	<li>बटोही रिसॉर्ट से प्रजापति समाज की बैठक में शामिल हुए।</li>
 	<li>बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से संगठन मजबूत करने और चुनाव रणनीति पर चर्चा की।</li>
 	<li>11 सितंबर को जिले में विकास योजनाओं की समीक्षा के लिए होने वाली <strong>‘</strong><strong>दिशा</strong><strong>’ </strong><strong>बैठक की अध्यक्षता करेंगे।</strong></li>
</ul>
<strong>राहुल गांधी के मुख्य संदेश</strong>
<ol>
 	<li>OBC और दलित समाज के बच्चों को आगे बढ़ने का मौका मिले।</li>
 	<li>वोट चोरी और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।</li>
 	<li>कॉर्पोरेट इंडिया और बड़े उद्योगपतियों के फायदे पर ध्यान आकर्षित किया।</li>
 	<li>समाज और पर्यावरण के लिए सकारात्मक संदेश दिए।</li>
</ol>
राहुल गांधी का रायबरेली दौरा 10 और 11 सितंबर तक जारी रहेगा।]]></content:encoded>
					
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		<item>
		<title>Election Commission पूरे Country में Implement करेगा ‘SIR’, 10 September को होगी Preparatory Meeting</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 07 Sep 2025 08:15:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Citizenship]]></category>
		<category><![CDATA[CleanVoterList]]></category>
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					<description><![CDATA[चुनाव आयोग अब बिहार में सफलतापूर्वक चलाए गए <strong>‘</strong><strong>स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (</strong><strong>SIR)’</strong> को पूरे देश में लागू करने जा रहा है। इसका मकसद देशभर की <strong>मतदाता सूची को अपडेट</strong><strong>, </strong><strong>सटीक और विश्वसनीय</strong> बनाना है। इसके लिए आयोग ने <strong>10 </strong><strong>सितंबर को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (</strong><strong>CEOs) </strong><strong>की बैठक</strong> बुलाई है।

<strong>SIR </strong><strong>क्या है और क्यों जरूरी है</strong><strong>?</strong>

SIR यानी <strong>स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन</strong>, एक विशेष अभियान है जिसमें मतदाता सूची में से <strong>मृत</strong><strong>, </strong><strong>स्थायी रूप से स्थानांतरित</strong><strong>, </strong><strong>डुप्लिकेट या गैर-नागरिक मतदाताओं</strong> के नाम हटाए जाते हैं। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि <strong>कोई भी योग्य नागरिक वोटिंग से न छूटे और कोई अयोग्य मतदाता सूची में शामिल न हो।</strong>

बीते समय में बिहार में इस प्रक्रिया को लेकर कुछ विपक्षी दलों ने सवाल उठाए थे। उनका आरोप था कि यह कवायद <strong>राजनीतिक लाभ</strong> के लिए की जा रही है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि यह उसकी <strong>संवैधानिक जिम्मेदारी</strong> है और अब इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा।

<strong>देशव्यापी </strong><strong>SIR </strong><strong>प्रक्रिया कैसे होगी</strong><strong>?</strong>
<ol>
 	<li><strong>जनगणना (</strong><strong>Enumeration):</strong>
<ul>
 	<li>बूथ-लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं से जानकारी लेंगे।</li>
 	<li>सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मतदाताओं को <strong>हस्ताक्षरित फॉर्म (</strong><strong>enumeration form)</strong> भरना होगा।</li>
 	<li>आयोग बताएगा कि किन लोगों को <strong>सहायक दस्तावेज</strong> जमा करने की जरूरत होगी।</li>
</ul>
</li>
 	<li><strong>प्रारूप सूची का प्रकाशन:</strong>
<ul>
 	<li>जनगणना के बाद एक <strong>मसौदा मतदाता सूची</strong> प्रकाशित की जाएगी।</li>
</ul>
</li>
 	<li><strong>दावे और आपत्तियां:</strong>
<ul>
 	<li>मतदाताओं को इस मसौदे में सुधार या बदलाव के लिए <strong>एक महीने का समय</strong> मिलेगा।</li>
</ul>
</li>
 	<li><strong>अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन:</strong>
<ul>
 	<li>सभी दावों और आपत्तियों को निपटाने के बाद <strong>जनवरी </strong><strong>2026 </strong><strong>की शुरुआत में</strong> अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी।</li>
</ul>
</li>
</ol>
<strong>चुनाव आयोग की तैयारी</strong>

10 सितंबर को होने वाली बैठक में आयोग और सभी CEO मिलकर इस अभियान की <strong>रूपरेखा तय करेंगे।</strong>
इसमें चर्चा होगी:
<ul>
 	<li>मतदान केंद्रों की <strong>तार्किक व्यवस्था</strong></li>
 	<li>चुनाव अधिकारियों को <strong>प्रशिक्षण</strong></li>
 	<li>देशभर में SIR प्रक्रिया की <strong>पारदर्शिता और विश्वसनीयता</strong> सुनिश्चित करना</li>
</ul>
चुनाव आयोग का मानना है कि इस कदम से मतदाता सूची में <strong>विश्वास और साफ-सुथरी जानकारी</strong> सुनिश्चित होगी, जो <strong>एक स्वस्थ लोकतंत्र</strong> के लिए बेहद जरूरी है।

<strong>मुख्य उद्देश्य:</strong>
<ul>
 	<li>देशभर की मतदाता सूची को <strong>सटीक और अपडेट</strong> करना</li>
 	<li>सभी योग्य नागरिकों को वोटिंग का अधिकार देना</li>
 	<li>लोकतंत्र में <strong>पारदर्शिता और भरोसा</strong> बढ़ाना</li>
</ul>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[चुनाव आयोग अब बिहार में सफलतापूर्वक चलाए गए <strong>‘</strong><strong>स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (</strong><strong>SIR)’</strong> को पूरे देश में लागू करने जा रहा है। इसका मकसद देशभर की <strong>मतदाता सूची को अपडेट</strong><strong>, </strong><strong>सटीक और विश्वसनीय</strong> बनाना है। इसके लिए आयोग ने <strong>10 </strong><strong>सितंबर को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (</strong><strong>CEOs) </strong><strong>की बैठक</strong> बुलाई है।

<strong>SIR </strong><strong>क्या है और क्यों जरूरी है</strong><strong>?</strong>

SIR यानी <strong>स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन</strong>, एक विशेष अभियान है जिसमें मतदाता सूची में से <strong>मृत</strong><strong>, </strong><strong>स्थायी रूप से स्थानांतरित</strong><strong>, </strong><strong>डुप्लिकेट या गैर-नागरिक मतदाताओं</strong> के नाम हटाए जाते हैं। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि <strong>कोई भी योग्य नागरिक वोटिंग से न छूटे और कोई अयोग्य मतदाता सूची में शामिल न हो।</strong>

बीते समय में बिहार में इस प्रक्रिया को लेकर कुछ विपक्षी दलों ने सवाल उठाए थे। उनका आरोप था कि यह कवायद <strong>राजनीतिक लाभ</strong> के लिए की जा रही है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि यह उसकी <strong>संवैधानिक जिम्मेदारी</strong> है और अब इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा।

<strong>देशव्यापी </strong><strong>SIR </strong><strong>प्रक्रिया कैसे होगी</strong><strong>?</strong>
<ol>
 	<li><strong>जनगणना (</strong><strong>Enumeration):</strong>
<ul>
 	<li>बूथ-लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं से जानकारी लेंगे।</li>
 	<li>सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मतदाताओं को <strong>हस्ताक्षरित फॉर्म (</strong><strong>enumeration form)</strong> भरना होगा।</li>
 	<li>आयोग बताएगा कि किन लोगों को <strong>सहायक दस्तावेज</strong> जमा करने की जरूरत होगी।</li>
</ul>
</li>
 	<li><strong>प्रारूप सूची का प्रकाशन:</strong>
<ul>
 	<li>जनगणना के बाद एक <strong>मसौदा मतदाता सूची</strong> प्रकाशित की जाएगी।</li>
</ul>
</li>
 	<li><strong>दावे और आपत्तियां:</strong>
<ul>
 	<li>मतदाताओं को इस मसौदे में सुधार या बदलाव के लिए <strong>एक महीने का समय</strong> मिलेगा।</li>
</ul>
</li>
 	<li><strong>अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन:</strong>
<ul>
 	<li>सभी दावों और आपत्तियों को निपटाने के बाद <strong>जनवरी </strong><strong>2026 </strong><strong>की शुरुआत में</strong> अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी।</li>
</ul>
</li>
</ol>
<strong>चुनाव आयोग की तैयारी</strong>

10 सितंबर को होने वाली बैठक में आयोग और सभी CEO मिलकर इस अभियान की <strong>रूपरेखा तय करेंगे।</strong>
इसमें चर्चा होगी:
<ul>
 	<li>मतदान केंद्रों की <strong>तार्किक व्यवस्था</strong></li>
 	<li>चुनाव अधिकारियों को <strong>प्रशिक्षण</strong></li>
 	<li>देशभर में SIR प्रक्रिया की <strong>पारदर्शिता और विश्वसनीयता</strong> सुनिश्चित करना</li>
</ul>
चुनाव आयोग का मानना है कि इस कदम से मतदाता सूची में <strong>विश्वास और साफ-सुथरी जानकारी</strong> सुनिश्चित होगी, जो <strong>एक स्वस्थ लोकतंत्र</strong> के लिए बेहद जरूरी है।

<strong>मुख्य उद्देश्य:</strong>
<ul>
 	<li>देशभर की मतदाता सूची को <strong>सटीक और अपडेट</strong> करना</li>
 	<li>सभी योग्य नागरिकों को वोटिंग का अधिकार देना</li>
 	<li>लोकतंत्र में <strong>पारदर्शिता और भरोसा</strong> बढ़ाना</li>
</ul>]]></content:encoded>
					
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		<item>
		<title>Rahul Gandhi के ‘Vote Theft’ Allegations पर Election Commission का करारा जवाब – कहा, बिना Proof हटाया नहीं जा सकता किसी का नाम</title>
		<link>https://trendstopic.in/election-commission-hits-back-at-rahul-gandhis-vote-theft-allegations-says-no-name-can-be-removed-without-proof/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 14 Aug 2025 06:47:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[BreakingNews]]></category>
		<category><![CDATA[CongressParty]]></category>
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		<category><![CDATA[VoteTheftAllegations]]></category>
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					<description><![CDATA[कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर चुनाव आयोग ने सख्त प्रतिक्रिया दी है। आयोग ने साफ कहा है कि मतदाता सूची (Voter List) को लेकर किए जा रहे दावे <strong>गलत और भ्रामक</strong> हैं। किसी भी मतदाता का नाम बिना कानूनी प्रक्रिया और ठोस सबूत के सूची से नहीं हटाया जा सकता।

<strong>राहुल गांधी का आरोप</strong>

राहुल गांधी ने हाल ही में एक अभियान शुरू किया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि देश के कई निर्वाचन क्षेत्रों में <strong>फर्जी और डुप्लिकेट वोटरों के नाम जोड़े गए</strong> हैं, ताकि चुनाव नतीजों को प्रभावित किया जा सके।
उन्होंने इसे <strong>“One Person, One Vote”</strong> जैसे लोकतांत्रिक सिद्धांत पर सीधा हमला बताया।

कांग्रेस का दावा है कि उनके विश्लेषण के मुताबिक, जो सार्वजनिक डेटा पर आधारित है, <strong>कर्नाटक के महादेवपुरा</strong> जैसे इलाकों में मतदाता सूची में गंभीर गड़बड़ियां पाई गई हैं। पार्टी ने यह भी मांग की है कि चुनाव आयोग <strong>डिजिटल फॉर्मेट में वोटर लिस्ट</strong> जारी करे, ताकि आम नागरिक और राजनीतिक दल उसका <strong>स्वतंत्र ऑडिट</strong> कर सकें।

<strong>चुनाव आयोग का जवाब</strong>

चुनाव आयोग ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि वोटर लिस्ट <strong>पूरी तरह कानून के अनुसार</strong> बनाई जाती है।
<ul>
 	<li>किसी नाम को हटाने, जोड़ने या सुधारने की प्रक्रिया <strong>Voter Registration Rules, 1960</strong> के तहत होती है।</li>
 	<li>सिर्फ मीडिया रिपोर्ट या इंटरनेट पोस्ट देखकर बड़े पैमाने पर नाम नहीं हटाए जा सकते।</li>
 	<li>यदि कोई मानता है कि किसी का नाम गलत तरीके से शामिल हुआ है, तो उसे <strong>शपथपत्र और पुख्ता सबूत</strong> देना जरूरी है (नियम 20(3)(B) के तहत)।</li>
</ul>
आयोग ने चेतावनी दी कि बिना सबूत के आरोप लगाने से हजारों सही मतदाताओं का नाम खतरे में पड़ सकता है और यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए हानिकारक है।

<strong>राहुल गांधी को </strong><strong>EC की चुनौती</strong>

चुनाव आयोग ने कहा कि जो भी लोग या पार्टियां सार्वजनिक मंचों पर आरोप लगा रहे हैं, वे अपने <strong>दस्तावेज़ी सबूत और हस्ताक्षरित घोषणा पत्र</strong> के साथ शिकायत दर्ज कराएं।
आयोग ने जोर देकर कहा – <em>“हम हर योग्य मतदाता के साथ थे, हैं और हमेशा रहेंगे।”</em>

<strong>EC ने रखे आंकड़े</strong>

आयोग ने ताजा आंकड़े भी जारी किए:
<ul>
 	<li><strong>बिहार में स्पेशल रिविजन</strong> के दौरान ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर कुल <strong>17,665 दावे और आपत्तियां</strong> मिलीं।</li>
 	<li>इनमें से <strong>454 मामलों का निपटारा</strong> हो चुका है।</li>
 	<li><strong>13 दिन</strong> बीत जाने के बाद भी किसी राजनीतिक दल ने आधिकारिक दावा या आपत्ति नहीं दी।</li>
 	<li><strong>नए मतदाता</strong>: 18 साल या उससे ऊपर के लोगों से <strong>74,525 फॉर्म</strong> मिले, जिनमें 6 फॉर्म <strong>BLA (Booth Level Agents)</strong> से आए।</li>
</ul>
आयोग ने बताया कि सभी दावों और आपत्तियों का निपटारा <strong>7 दिन</strong> में होगा, दस्तावेज़ों के सत्यापन के बाद। साथ ही, <strong>1 अगस्त 2025</strong> को जारी ड्राफ्ट लिस्ट से किसी का नाम हटाने से पहले <strong>जांच और उचित मौका</strong> दिया जाएगा।

यह मामला अब सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि कानूनी प्रक्रिया और पारदर्शिता की कसौटी पर भी खड़ा है। राहुल गांधी के आरोपों ने बहस जरूर छेड़ दी है, लेकिन चुनाव आयोग का रुख साफ है – <strong>बिना सबूत कोई कार्रवाई नहीं</strong>।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर चुनाव आयोग ने सख्त प्रतिक्रिया दी है। आयोग ने साफ कहा है कि मतदाता सूची (Voter List) को लेकर किए जा रहे दावे <strong>गलत और भ्रामक</strong> हैं। किसी भी मतदाता का नाम बिना कानूनी प्रक्रिया और ठोस सबूत के सूची से नहीं हटाया जा सकता।

<strong>राहुल गांधी का आरोप</strong>

राहुल गांधी ने हाल ही में एक अभियान शुरू किया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि देश के कई निर्वाचन क्षेत्रों में <strong>फर्जी और डुप्लिकेट वोटरों के नाम जोड़े गए</strong> हैं, ताकि चुनाव नतीजों को प्रभावित किया जा सके।
उन्होंने इसे <strong>“One Person, One Vote”</strong> जैसे लोकतांत्रिक सिद्धांत पर सीधा हमला बताया।

कांग्रेस का दावा है कि उनके विश्लेषण के मुताबिक, जो सार्वजनिक डेटा पर आधारित है, <strong>कर्नाटक के महादेवपुरा</strong> जैसे इलाकों में मतदाता सूची में गंभीर गड़बड़ियां पाई गई हैं। पार्टी ने यह भी मांग की है कि चुनाव आयोग <strong>डिजिटल फॉर्मेट में वोटर लिस्ट</strong> जारी करे, ताकि आम नागरिक और राजनीतिक दल उसका <strong>स्वतंत्र ऑडिट</strong> कर सकें।

<strong>चुनाव आयोग का जवाब</strong>

चुनाव आयोग ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि वोटर लिस्ट <strong>पूरी तरह कानून के अनुसार</strong> बनाई जाती है।
<ul>
 	<li>किसी नाम को हटाने, जोड़ने या सुधारने की प्रक्रिया <strong>Voter Registration Rules, 1960</strong> के तहत होती है।</li>
 	<li>सिर्फ मीडिया रिपोर्ट या इंटरनेट पोस्ट देखकर बड़े पैमाने पर नाम नहीं हटाए जा सकते।</li>
 	<li>यदि कोई मानता है कि किसी का नाम गलत तरीके से शामिल हुआ है, तो उसे <strong>शपथपत्र और पुख्ता सबूत</strong> देना जरूरी है (नियम 20(3)(B) के तहत)।</li>
</ul>
आयोग ने चेतावनी दी कि बिना सबूत के आरोप लगाने से हजारों सही मतदाताओं का नाम खतरे में पड़ सकता है और यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए हानिकारक है।

<strong>राहुल गांधी को </strong><strong>EC की चुनौती</strong>

चुनाव आयोग ने कहा कि जो भी लोग या पार्टियां सार्वजनिक मंचों पर आरोप लगा रहे हैं, वे अपने <strong>दस्तावेज़ी सबूत और हस्ताक्षरित घोषणा पत्र</strong> के साथ शिकायत दर्ज कराएं।
आयोग ने जोर देकर कहा – <em>“हम हर योग्य मतदाता के साथ थे, हैं और हमेशा रहेंगे।”</em>

<strong>EC ने रखे आंकड़े</strong>

आयोग ने ताजा आंकड़े भी जारी किए:
<ul>
 	<li><strong>बिहार में स्पेशल रिविजन</strong> के दौरान ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर कुल <strong>17,665 दावे और आपत्तियां</strong> मिलीं।</li>
 	<li>इनमें से <strong>454 मामलों का निपटारा</strong> हो चुका है।</li>
 	<li><strong>13 दिन</strong> बीत जाने के बाद भी किसी राजनीतिक दल ने आधिकारिक दावा या आपत्ति नहीं दी।</li>
 	<li><strong>नए मतदाता</strong>: 18 साल या उससे ऊपर के लोगों से <strong>74,525 फॉर्म</strong> मिले, जिनमें 6 फॉर्म <strong>BLA (Booth Level Agents)</strong> से आए।</li>
</ul>
आयोग ने बताया कि सभी दावों और आपत्तियों का निपटारा <strong>7 दिन</strong> में होगा, दस्तावेज़ों के सत्यापन के बाद। साथ ही, <strong>1 अगस्त 2025</strong> को जारी ड्राफ्ट लिस्ट से किसी का नाम हटाने से पहले <strong>जांच और उचित मौका</strong> दिया जाएगा।

यह मामला अब सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि कानूनी प्रक्रिया और पारदर्शिता की कसौटी पर भी खड़ा है। राहुल गांधी के आरोपों ने बहस जरूर छेड़ दी है, लेकिन चुनाव आयोग का रुख साफ है – <strong>बिना सबूत कोई कार्रवाई नहीं</strong>।]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>Rahul Gandhi के ‘Vote Theft’ Allegations पर BJP और EC का पलटवार – Fact-Check में क्या निकला सच?</title>
		<link>https://trendstopic.in/bjp-and-ec-counter-rahul-gandhis-vote-theft-allegations-what-the-fact-check-reveals/</link>
					<comments>https://trendstopic.in/bjp-and-ec-counter-rahul-gandhis-vote-theft-allegations-what-the-fact-check-reveals/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 10 Aug 2025 04:22:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[BJP]]></category>
		<category><![CDATA[BreakingNews]]></category>
		<category><![CDATA[congress]]></category>
		<category><![CDATA[ElectionCommission]]></category>
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		<category><![CDATA[VoteTheft]]></category>
		<category><![CDATA[VotingIrregularities]]></category>
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					<description><![CDATA[राहुल गांधी ने हाल ही में चुनाव आयोग (Election Commission) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि देश में “वोट चोरी” हो रही है और इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिल रहा है। उन्होंने इसके सबूत दिखाने का दावा किया, खासकर कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा चुनाव को लेकर। लेकिन बीजेपी और चुनाव आयोग की तरफ से आए <strong>Fact-Check</strong> ने इन आरोपों को काफी हद तक चुनौती दी है। आइए पूरे मामले को समझते हैं।

<strong>राहुल गांधी के आरोप</strong>
<ul>
 	<li>राहुल गांधी का कहना है कि <strong>महादेवपुरा में चुनाव साफ तौर पर </strong><strong>BJP </strong><strong>के पक्ष में “रिग” (</strong><strong>Rigged) </strong><strong>किए गए</strong>।</li>
 	<li>उन्होंने एक तस्वीर दिखाई जिसमें <strong>इलेक्टोरल रोल पर </strong><strong>BLA (Booth Level Agent) </strong><strong>के सिग्नेचर</strong> थे।</li>
 	<li>उनका आरोप है कि एक ही पते पर <strong>दर्जनों वोटर रजिस्टर्ड</strong> हैं, जो चुनावी धांधली का सबूत है।</li>
 	<li>उन्होंने दावा किया कि एक पते पर <strong>80 </strong><strong>वोटर</strong> और एक अन्य घर (हाउस नं. 80) में <strong>18 </strong><strong>नाम</strong> दर्ज थे।</li>
 	<li>कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर <strong>बेंगलुरु में बड़ा रैली</strong> भी की।</li>
</ul>
<strong>BJP </strong><strong>और </strong><strong>EC </strong><strong>का जवाब</strong>
<ol>
 	<li><strong>तस्वीर से धांधली साबित नहीं होती</strong>
<ul>
 	<li>बीजेपी का कहना है कि जिस तस्वीर को राहुल गांधी सबूत बता रहे हैं, वह <strong>डुप्लीकेट वोटिंग का प्रमाण नहीं</strong> है।</li>
 	<li>चुनाव आयोग के मुताबिक, <strong>बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा सीट</strong> में बीजेपी ने 4 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त ली, और कांग्रेस ने भी 4 में बढ़त ली — यानी मामला सिर्फ महादेवपुरा तक सीमित नहीं।</li>
</ul>
</li>
 	<li><strong>कांग्रेस के गढ़ में भी डुप्लीकेट वोटर</strong>
<ul>
 	<li>Fact-Check में सामने आया कि डुप्लीकेट वोटर सिर्फ BJP वाले इलाकों में नहीं, बल्कि <strong>कांग्रेस के मजबूत गढ़</strong> जैसे <strong>शिवाजीनगर</strong> और <strong>चामराजपेट</strong> में भी मिले।</li>
 	<li>बीजेपी पूछ रही है कि कांग्रेस इन इलाकों की बात क्यों नहीं कर रही।</li>
</ul>
</li>
 	<li><strong>महाराष्ट्र का धुले लोकसभा सीट मामला</strong>
<ul>
 	<li>राहुल गांधी अक्सर महाराष्ट्र का उदाहरण देकर चुनाव आयोग की आलोचना करते हैं, लेकिन बीजेपी ने धुले सीट का मामला उठाया।</li>
 	<li>यहां बीजेपी को कुल 75 लाख वोट और कांग्रेस को 3.84 लाख वोट मिले।</li>
 	<li><strong>मालेगांव सेंट्रल</strong> (अल्पसंख्यक बहुल इलाका) में कांग्रेस को 52% वोट मिले, बीजेपी को सिर्फ 2.21% — बीजेपी पूछ रही है कि इतने बड़े अंतर और डुप्लीकेट वोटरों के बावजूद कांग्रेस यहां कैसे जीती।</li>
</ul>
</li>
 	<li><strong>80 </strong><strong>वोटर एक पते पर – असली वजह</strong>
<ul>
 	<li>चुनाव आयोग ने जांच में पाया कि जिस पते पर 80 वोटर दर्ज थे, वहां पहले <strong>मजदूर वर्ग के लोग</strong> रहते थे, जो अब वहां से जा चुके हैं।</li>
 	<li>कोई सबूत नहीं कि उन्होंने BJP को वोट दिया।</li>
 	<li>हाउस नं. 80 पर 18 वोटर रजिस्टर्ड होने की बात भी सामने आई, जिस पर BJP का कहना है कि यही वजह है कि <strong>Special Intensive Revision (SIR)</strong> जरूरी है।</li>
</ul>
</li>
 	<li><strong>EC </strong><strong>का तर्क</strong>
<ul>
 	<li>EC के मुताबिक, वोटर लिस्ट में डुप्लीकेट नाम अक्सर <strong>मल्टी-सिटी या मल्टी-टाउन रजिस्ट्रेशन</strong> की वजह से होते हैं, न कि जानबूझकर की गई धांधली से।</li>
 	<li>आयोग का कहना है कि वह लगातार सभी पार्टियों से वोटर लिस्ट साफ करने में सहयोग की अपील कर रहा है।</li>
</ul>
</li>
</ol>
<strong>मौजूदा हालात</strong>
<ul>
 	<li>राहुल गांधी अपने आरोपों पर अड़े हुए हैं और बीजेपी-EC की सफाई से सहमत नहीं हैं।</li>
 	<li>बीजेपी इस मुद्दे को पलटकर कांग्रेस के गढ़ में भी गड़बड़ी के सवाल उठा रही है।</li>
 	<li>मामला अब राजनीतिक बहस और आरोप-प्रत्यारोप में फंस चुका है, और फिलहाल किसी समाधान के आसार नहीं दिख रहे।</li>
</ul>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[राहुल गांधी ने हाल ही में चुनाव आयोग (Election Commission) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि देश में “वोट चोरी” हो रही है और इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिल रहा है। उन्होंने इसके सबूत दिखाने का दावा किया, खासकर कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा चुनाव को लेकर। लेकिन बीजेपी और चुनाव आयोग की तरफ से आए <strong>Fact-Check</strong> ने इन आरोपों को काफी हद तक चुनौती दी है। आइए पूरे मामले को समझते हैं।

<strong>राहुल गांधी के आरोप</strong>
<ul>
 	<li>राहुल गांधी का कहना है कि <strong>महादेवपुरा में चुनाव साफ तौर पर </strong><strong>BJP </strong><strong>के पक्ष में “रिग” (</strong><strong>Rigged) </strong><strong>किए गए</strong>।</li>
 	<li>उन्होंने एक तस्वीर दिखाई जिसमें <strong>इलेक्टोरल रोल पर </strong><strong>BLA (Booth Level Agent) </strong><strong>के सिग्नेचर</strong> थे।</li>
 	<li>उनका आरोप है कि एक ही पते पर <strong>दर्जनों वोटर रजिस्टर्ड</strong> हैं, जो चुनावी धांधली का सबूत है।</li>
 	<li>उन्होंने दावा किया कि एक पते पर <strong>80 </strong><strong>वोटर</strong> और एक अन्य घर (हाउस नं. 80) में <strong>18 </strong><strong>नाम</strong> दर्ज थे।</li>
 	<li>कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर <strong>बेंगलुरु में बड़ा रैली</strong> भी की।</li>
</ul>
<strong>BJP </strong><strong>और </strong><strong>EC </strong><strong>का जवाब</strong>
<ol>
 	<li><strong>तस्वीर से धांधली साबित नहीं होती</strong>
<ul>
 	<li>बीजेपी का कहना है कि जिस तस्वीर को राहुल गांधी सबूत बता रहे हैं, वह <strong>डुप्लीकेट वोटिंग का प्रमाण नहीं</strong> है।</li>
 	<li>चुनाव आयोग के मुताबिक, <strong>बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा सीट</strong> में बीजेपी ने 4 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त ली, और कांग्रेस ने भी 4 में बढ़त ली — यानी मामला सिर्फ महादेवपुरा तक सीमित नहीं।</li>
</ul>
</li>
 	<li><strong>कांग्रेस के गढ़ में भी डुप्लीकेट वोटर</strong>
<ul>
 	<li>Fact-Check में सामने आया कि डुप्लीकेट वोटर सिर्फ BJP वाले इलाकों में नहीं, बल्कि <strong>कांग्रेस के मजबूत गढ़</strong> जैसे <strong>शिवाजीनगर</strong> और <strong>चामराजपेट</strong> में भी मिले।</li>
 	<li>बीजेपी पूछ रही है कि कांग्रेस इन इलाकों की बात क्यों नहीं कर रही।</li>
</ul>
</li>
 	<li><strong>महाराष्ट्र का धुले लोकसभा सीट मामला</strong>
<ul>
 	<li>राहुल गांधी अक्सर महाराष्ट्र का उदाहरण देकर चुनाव आयोग की आलोचना करते हैं, लेकिन बीजेपी ने धुले सीट का मामला उठाया।</li>
 	<li>यहां बीजेपी को कुल 75 लाख वोट और कांग्रेस को 3.84 लाख वोट मिले।</li>
 	<li><strong>मालेगांव सेंट्रल</strong> (अल्पसंख्यक बहुल इलाका) में कांग्रेस को 52% वोट मिले, बीजेपी को सिर्फ 2.21% — बीजेपी पूछ रही है कि इतने बड़े अंतर और डुप्लीकेट वोटरों के बावजूद कांग्रेस यहां कैसे जीती।</li>
</ul>
</li>
 	<li><strong>80 </strong><strong>वोटर एक पते पर – असली वजह</strong>
<ul>
 	<li>चुनाव आयोग ने जांच में पाया कि जिस पते पर 80 वोटर दर्ज थे, वहां पहले <strong>मजदूर वर्ग के लोग</strong> रहते थे, जो अब वहां से जा चुके हैं।</li>
 	<li>कोई सबूत नहीं कि उन्होंने BJP को वोट दिया।</li>
 	<li>हाउस नं. 80 पर 18 वोटर रजिस्टर्ड होने की बात भी सामने आई, जिस पर BJP का कहना है कि यही वजह है कि <strong>Special Intensive Revision (SIR)</strong> जरूरी है।</li>
</ul>
</li>
 	<li><strong>EC </strong><strong>का तर्क</strong>
<ul>
 	<li>EC के मुताबिक, वोटर लिस्ट में डुप्लीकेट नाम अक्सर <strong>मल्टी-सिटी या मल्टी-टाउन रजिस्ट्रेशन</strong> की वजह से होते हैं, न कि जानबूझकर की गई धांधली से।</li>
 	<li>आयोग का कहना है कि वह लगातार सभी पार्टियों से वोटर लिस्ट साफ करने में सहयोग की अपील कर रहा है।</li>
</ul>
</li>
</ol>
<strong>मौजूदा हालात</strong>
<ul>
 	<li>राहुल गांधी अपने आरोपों पर अड़े हुए हैं और बीजेपी-EC की सफाई से सहमत नहीं हैं।</li>
 	<li>बीजेपी इस मुद्दे को पलटकर कांग्रेस के गढ़ में भी गड़बड़ी के सवाल उठा रही है।</li>
 	<li>मामला अब राजनीतिक बहस और आरोप-प्रत्यारोप में फंस चुका है, और फिलहाल किसी समाधान के आसार नहीं दिख रहे।</li>
</ul>]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>Karnataka में Voter Fraud का मामला गरमाया – Deputy CM D.K. Shivakumar ने Election Commission में दी औपचारिक शिकायत</title>
		<link>https://trendstopic.in/voter-fraud-row-heats-up-in-karnataka-deputy-cm-d-k-shivakumar-files-formal-complaint-with-election-commission/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 09 Aug 2025 03:42:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[News]]></category>
		<category><![CDATA[Bengaluru]]></category>
		<category><![CDATA[BreakingNews]]></category>
		<category><![CDATA[congress]]></category>
		<category><![CDATA[DKShivakumar]]></category>
		<category><![CDATA[ElectionCommission]]></category>
		<category><![CDATA[ElectionFraud]]></category>
		<category><![CDATA[Gandhinagar]]></category>
		<category><![CDATA[IndianPolitics]]></category>
		<category><![CDATA[Karnataka]]></category>
		<category><![CDATA[LokSabhaElections2024]]></category>
		<category><![CDATA[Mahadevapura]]></category>
		<category><![CDATA[MallikarjunKharge]]></category>
		<category><![CDATA[PoliticalNews]]></category>
		<category><![CDATA[RahulGandhi]]></category>
		<category><![CDATA[VoterFraud]]></category>
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					<description><![CDATA[कर्नाटक में कथित वोटर फ्रॉड को लेकर सियासत तेज हो गई है। शुक्रवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के नेतृत्व में बेंगलुरु में हुए विरोध प्रदर्शन के कुछ घंटे बाद ही राज्य के डिप्टी सीएम और कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष <strong>डी.के. शिवकुमार</strong> ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को औपचारिक शिकायत सौंप दी। इस शिकायत में उन्होंने 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान हुई कथित चुनावी गड़बड़ियों में शामिल अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

<strong>चुनाव आयोग ने मांगे सबूत</strong>

शिवकुमार की शिकायत मिलने के बाद CEO ने उनसे कहा कि <strong>Registration of Electors Rules, 1960</strong> के तहत जरूरी <strong>दस्तावेज़ी सबूत और डिक्लेरेशन</strong> जमा करें, तभी आगे कार्रवाई संभव है। आयोग ने साफ किया कि शिवकुमार ने 5 अगस्त 2024 को दी गई अपनी रिप्रेज़ेंटेशन का हवाला दिया है, लेकिन उसके साथ कोई डॉक्यूमेंटरी प्रूफ नहीं जोड़ा गया।

<strong>शिवकुमार के आरोप – “वोट चोरी पूरे कर्नाटक में”</strong>

शिवकुमार ने कहा कि वोट चोरी सिर्फ <strong>महादेवपुरा</strong> में नहीं बल्कि पूरे राज्य में हुई है। उन्होंने महादेवपुरा और गांधीनगर लोकसभा सीटों का उदाहरण देते हुए बताया कि—
<ul>
 	<li>एक ही व्यक्ति का नाम <strong>5 </strong><strong>से ज्यादा जगह</strong> दर्ज किया गया।</li>
 	<li><strong>बिना घर नंबर</strong> के वोट रजिस्ट्रेशन हुए।</li>
 	<li><strong>खाली प्लॉट</strong> को पते के रूप में इस्तेमाल किया गया।</li>
 	<li>वोट को <strong>एक बूथ से दूसरे बूथ</strong> में शिफ्ट किया गया।</li>
</ul>
उन्होंने कहा कि कांग्रेस इन मामलों के सबूत जल्द पेश करेगी और चुनाव आयोग से दोषी अधिकारियों को सख्त सज़ा देने की मांग की है, चाहे वो ब्लॉक लेवल ऑफिसर हो या रिटर्निंग ऑफिसर।

<strong>राहुल गांधी और खड़गे के शपथपत्र पर विवाद</strong>

EC ने राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से उनके “वोट चोरी” वाले बयानों पर शपथपत्र मांगा है। इस पर शिवकुमार का कहना है—

"चुनाव लड़ते समय हम पहले ही शपथपत्र दे चुके हैं। दोबारा की ज़रूरत नहीं। अगर हम झूठ बोल रहे हैं तो मुझे फांसी दे दें। EC ने हमारे आरोप खारिज नहीं किए और न ही यह कहा कि हम झूठ बोल रहे हैं।"

<strong>6 </strong><strong>महीने की जांच</strong><strong>, AI </strong><strong>टूल्स का इस्तेमाल</strong>

शिवकुमार ने बताया कि <strong>20 </strong><strong>लोगों की टीम ने </strong><strong>6 </strong><strong>महीने</strong> तक महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में जांच की।
इस दौरान EC की मतदाता सूची में मौजूद फोटो को <strong>AI </strong><strong>टूल्स</strong> की मदद से मिलाया गया, जिससे डुप्लीकेट, फर्जी और “घोस्ट” वोटर पकड़े गए।

<strong>शिकायत में रखी गई प्रमुख मांगें</strong>
<ol>
 	<li>पूरे कर्नाटक की सभी लोकसभा सीटों की मतदाता सूचियों की जांच।</li>
 	<li><strong>डिजिटल और मशीन-रीडेबल फोटो इलेक्टोरल रोल</strong> पब्लिक के लिए उपलब्ध कराना।</li>
 	<li>जांच रिपोर्ट को पब्लिश करना, खासकर उन मतदाताओं की लिस्ट जो जोड़े गए, हटाए गए या बदले गए।</li>
 	<li>यह देखना कि संदिग्ध वोटरों ने चुनाव नतीजों पर कितना असर डाला।</li>
 	<li>फर्जी <strong>Form-6, Form-7, Form-8</strong> पर साइन करने वाले अधिकारियों की पहचान, निलंबन और सज़ा।</li>
</ol>
शिवकुमार का कहना है कि कांग्रेस इस लड़ाई को अंजाम तक ले जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि चुनाव आयोग आगे क्या कदम उठाता है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[कर्नाटक में कथित वोटर फ्रॉड को लेकर सियासत तेज हो गई है। शुक्रवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के नेतृत्व में बेंगलुरु में हुए विरोध प्रदर्शन के कुछ घंटे बाद ही राज्य के डिप्टी सीएम और कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष <strong>डी.के. शिवकुमार</strong> ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को औपचारिक शिकायत सौंप दी। इस शिकायत में उन्होंने 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान हुई कथित चुनावी गड़बड़ियों में शामिल अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

<strong>चुनाव आयोग ने मांगे सबूत</strong>

शिवकुमार की शिकायत मिलने के बाद CEO ने उनसे कहा कि <strong>Registration of Electors Rules, 1960</strong> के तहत जरूरी <strong>दस्तावेज़ी सबूत और डिक्लेरेशन</strong> जमा करें, तभी आगे कार्रवाई संभव है। आयोग ने साफ किया कि शिवकुमार ने 5 अगस्त 2024 को दी गई अपनी रिप्रेज़ेंटेशन का हवाला दिया है, लेकिन उसके साथ कोई डॉक्यूमेंटरी प्रूफ नहीं जोड़ा गया।

<strong>शिवकुमार के आरोप – “वोट चोरी पूरे कर्नाटक में”</strong>

शिवकुमार ने कहा कि वोट चोरी सिर्फ <strong>महादेवपुरा</strong> में नहीं बल्कि पूरे राज्य में हुई है। उन्होंने महादेवपुरा और गांधीनगर लोकसभा सीटों का उदाहरण देते हुए बताया कि—
<ul>
 	<li>एक ही व्यक्ति का नाम <strong>5 </strong><strong>से ज्यादा जगह</strong> दर्ज किया गया।</li>
 	<li><strong>बिना घर नंबर</strong> के वोट रजिस्ट्रेशन हुए।</li>
 	<li><strong>खाली प्लॉट</strong> को पते के रूप में इस्तेमाल किया गया।</li>
 	<li>वोट को <strong>एक बूथ से दूसरे बूथ</strong> में शिफ्ट किया गया।</li>
</ul>
उन्होंने कहा कि कांग्रेस इन मामलों के सबूत जल्द पेश करेगी और चुनाव आयोग से दोषी अधिकारियों को सख्त सज़ा देने की मांग की है, चाहे वो ब्लॉक लेवल ऑफिसर हो या रिटर्निंग ऑफिसर।

<strong>राहुल गांधी और खड़गे के शपथपत्र पर विवाद</strong>

EC ने राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से उनके “वोट चोरी” वाले बयानों पर शपथपत्र मांगा है। इस पर शिवकुमार का कहना है—

"चुनाव लड़ते समय हम पहले ही शपथपत्र दे चुके हैं। दोबारा की ज़रूरत नहीं। अगर हम झूठ बोल रहे हैं तो मुझे फांसी दे दें। EC ने हमारे आरोप खारिज नहीं किए और न ही यह कहा कि हम झूठ बोल रहे हैं।"

<strong>6 </strong><strong>महीने की जांच</strong><strong>, AI </strong><strong>टूल्स का इस्तेमाल</strong>

शिवकुमार ने बताया कि <strong>20 </strong><strong>लोगों की टीम ने </strong><strong>6 </strong><strong>महीने</strong> तक महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में जांच की।
इस दौरान EC की मतदाता सूची में मौजूद फोटो को <strong>AI </strong><strong>टूल्स</strong> की मदद से मिलाया गया, जिससे डुप्लीकेट, फर्जी और “घोस्ट” वोटर पकड़े गए।

<strong>शिकायत में रखी गई प्रमुख मांगें</strong>
<ol>
 	<li>पूरे कर्नाटक की सभी लोकसभा सीटों की मतदाता सूचियों की जांच।</li>
 	<li><strong>डिजिटल और मशीन-रीडेबल फोटो इलेक्टोरल रोल</strong> पब्लिक के लिए उपलब्ध कराना।</li>
 	<li>जांच रिपोर्ट को पब्लिश करना, खासकर उन मतदाताओं की लिस्ट जो जोड़े गए, हटाए गए या बदले गए।</li>
 	<li>यह देखना कि संदिग्ध वोटरों ने चुनाव नतीजों पर कितना असर डाला।</li>
 	<li>फर्जी <strong>Form-6, Form-7, Form-8</strong> पर साइन करने वाले अधिकारियों की पहचान, निलंबन और सज़ा।</li>
</ol>
शिवकुमार का कहना है कि कांग्रेस इस लड़ाई को अंजाम तक ले जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि चुनाव आयोग आगे क्या कदम उठाता है।]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>INDIA Alliance में फूट की आहट: Parliament Function की appeal को बड़ी Parties ने किया Reject – Parliament में Bihar Voter List पर Opposition का हंगामा जारी, Rahul Gandhi की अगुवाई में Election Commission तक March की तैयारी</title>
		<link>https://trendstopic.in/signs-of-rift-in-india-alliance-bigger-parties-reject-plea-to-let-parliament-function-oppositions-uproar-over-bihar-voter-list-continues-in-parliament-march-to-election-commission/</link>
					<comments>https://trendstopic.in/signs-of-rift-in-india-alliance-bigger-parties-reject-plea-to-let-parliament-function-oppositions-uproar-over-bihar-voter-list-continues-in-parliament-march-to-election-commission/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 06 Aug 2025 04:46:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[BiharVoterList]]></category>
		<category><![CDATA[ElectionCommission]]></category>
		<category><![CDATA[ElectoralRolls]]></category>
		<category><![CDATA[INDIABloc]]></category>
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		<category><![CDATA[LatestHindiNews]]></category>
		<category><![CDATA[ParliamentProtest]]></category>
		<category><![CDATA[PoliticalNews]]></category>
		<category><![CDATA[PowerfulOpposition]]></category>
		<category><![CDATA[RahulGandhi]]></category>
		<category><![CDATA[SmartLeadership]]></category>
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					<description><![CDATA[संसद के मानसून सत्र में एक बार फिर गतिरोध देखने को मिल रहा है। विपक्षी गठबंधन INDIA के कुछ छोटे दलों ने संसद को सुचारू रूप से चलाने की अपील की, लेकिन उन्हें बड़ी पार्टियों से समर्थन नहीं मिला। पूरा मामला बिहार में वोटर लिस्ट के “स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन” (SIR) को लेकर खड़ा हुआ है, जिस पर चर्चा की मांग को लेकर विपक्ष लगातार हंगामा कर रहा है।

<strong>छोटे दल बोले – संसद चलनी चाहिए</strong><strong>, </strong><strong>बड़े दल बोले – मुद्दा जरूरी है</strong>

मंगलवार सुबह INDIA गठबंधन की बैठक में सीपीएम के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास, आरएसपी के लोकसभा सांसद एनके प्रेमचंद्रन और IUML के ईटी मोहम्मद बशीर ने सुझाव दिया कि संसद को ठप नहीं होने देना चाहिए। उनका मानना था कि बहस के साथ-साथ संसद का कामकाज भी चले।

लेकिन कांग्रेस, डीएमके, तृणमूल कांग्रेस (TMC), समाजवादी पार्टी (SP), शिवसेना (UBT), राष्ट्रीय जनता दल (RJD) जैसी बड़ी पार्टियों ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि बिहार की वोटर लिस्ट में धांधली जैसे गंभीर मुद्दे पर सरकार को चर्चा के लिए मजबूर किया जाना चाहिए।

<strong>राहुल गांधी का दावा – वोटर लिस्ट में भारी गड़बड़ी</strong>

बैठक के दौरान राहुल गांधी ने INDIA ब्लॉक के नेताओं को बताया कि कांग्रेस ने बेंगलुरु की एक सीट पर सैंपल सर्वे किया है जिसमें वोटर लिस्ट में गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। राहुल का कहना है कि बीजेपी वोटर लिस्ट से छेड़छाड़ करके चुनाव जीत रही है, इसलिए इस मुद्दे को संसद में जोरदार तरीके से उठाना जरूरी है।

<strong>आने वाले दिनों में विरोध तेज़ करेगा विपक्ष</strong>

अब जब सरकार की तरफ से चर्चा से इनकार किया जा रहा है, विपक्ष ने आने वाले दिनों में कई विरोध कार्यक्रम तय किए हैं:
<ul>
 	<li><strong>8 </strong><strong>अगस्त (गुरुवार):</strong> राहुल गांधी के आवास पर विपक्षी दलों की डिनर मीटिंग</li>
 	<li><strong>9 </strong><strong>अगस्त (शुक्रवार):</strong> बेंगलुरु में राहुल गांधी की अगुवाई में बड़ा प्रदर्शन</li>
 	<li><strong>11 </strong><strong>अगस्त:</strong> संसद से चुनाव आयोग तक विपक्ष का <em>संयुक्त मार्च</em></li>
</ul>
यह सभी कार्यक्रम चुनाव आयोग को निशाना बनाकर रखे गए हैं, जिससे सरकार पर दबाव बनाया जा सके कि वह वोटर लिस्ट के विशेष पुनरीक्षण (SIR) पर संसद में चर्चा के लिए राजी हो।

<strong>क्या है </strong><strong>SIR </strong><strong>विवाद</strong><strong>?</strong>

बिहार में हाल ही में चल रहा "स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन" (SIR) एक प्रक्रिया है जिसमें वोटर लिस्ट को अपडेट किया जाता है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हो रही है, और यह लोकतंत्र के लिए खतरा है। उनका कहना है कि इसे बिना किसी पारदर्शिता के लागू किया जा रहा है।

संसद का मानसून सत्र एक बार फिर हंगामे की भेंट चढ़ता दिख रहा है। विपक्ष जहां सरकार को घेरने के लिए आक्रामक रणनीति अपनाए हुए है, वहीं छोटे दलों की चिंता है कि संसद का पूरा सत्र न खराब हो जाए। लेकिन मौजूदा हालात देखकर साफ है कि जब तक वोटर लिस्ट पर बहस नहीं होती, विपक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[संसद के मानसून सत्र में एक बार फिर गतिरोध देखने को मिल रहा है। विपक्षी गठबंधन INDIA के कुछ छोटे दलों ने संसद को सुचारू रूप से चलाने की अपील की, लेकिन उन्हें बड़ी पार्टियों से समर्थन नहीं मिला। पूरा मामला बिहार में वोटर लिस्ट के “स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन” (SIR) को लेकर खड़ा हुआ है, जिस पर चर्चा की मांग को लेकर विपक्ष लगातार हंगामा कर रहा है।

<strong>छोटे दल बोले – संसद चलनी चाहिए</strong><strong>, </strong><strong>बड़े दल बोले – मुद्दा जरूरी है</strong>

मंगलवार सुबह INDIA गठबंधन की बैठक में सीपीएम के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास, आरएसपी के लोकसभा सांसद एनके प्रेमचंद्रन और IUML के ईटी मोहम्मद बशीर ने सुझाव दिया कि संसद को ठप नहीं होने देना चाहिए। उनका मानना था कि बहस के साथ-साथ संसद का कामकाज भी चले।

लेकिन कांग्रेस, डीएमके, तृणमूल कांग्रेस (TMC), समाजवादी पार्टी (SP), शिवसेना (UBT), राष्ट्रीय जनता दल (RJD) जैसी बड़ी पार्टियों ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि बिहार की वोटर लिस्ट में धांधली जैसे गंभीर मुद्दे पर सरकार को चर्चा के लिए मजबूर किया जाना चाहिए।

<strong>राहुल गांधी का दावा – वोटर लिस्ट में भारी गड़बड़ी</strong>

बैठक के दौरान राहुल गांधी ने INDIA ब्लॉक के नेताओं को बताया कि कांग्रेस ने बेंगलुरु की एक सीट पर सैंपल सर्वे किया है जिसमें वोटर लिस्ट में गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। राहुल का कहना है कि बीजेपी वोटर लिस्ट से छेड़छाड़ करके चुनाव जीत रही है, इसलिए इस मुद्दे को संसद में जोरदार तरीके से उठाना जरूरी है।

<strong>आने वाले दिनों में विरोध तेज़ करेगा विपक्ष</strong>

अब जब सरकार की तरफ से चर्चा से इनकार किया जा रहा है, विपक्ष ने आने वाले दिनों में कई विरोध कार्यक्रम तय किए हैं:
<ul>
 	<li><strong>8 </strong><strong>अगस्त (गुरुवार):</strong> राहुल गांधी के आवास पर विपक्षी दलों की डिनर मीटिंग</li>
 	<li><strong>9 </strong><strong>अगस्त (शुक्रवार):</strong> बेंगलुरु में राहुल गांधी की अगुवाई में बड़ा प्रदर्शन</li>
 	<li><strong>11 </strong><strong>अगस्त:</strong> संसद से चुनाव आयोग तक विपक्ष का <em>संयुक्त मार्च</em></li>
</ul>
यह सभी कार्यक्रम चुनाव आयोग को निशाना बनाकर रखे गए हैं, जिससे सरकार पर दबाव बनाया जा सके कि वह वोटर लिस्ट के विशेष पुनरीक्षण (SIR) पर संसद में चर्चा के लिए राजी हो।

<strong>क्या है </strong><strong>SIR </strong><strong>विवाद</strong><strong>?</strong>

बिहार में हाल ही में चल रहा "स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन" (SIR) एक प्रक्रिया है जिसमें वोटर लिस्ट को अपडेट किया जाता है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हो रही है, और यह लोकतंत्र के लिए खतरा है। उनका कहना है कि इसे बिना किसी पारदर्शिता के लागू किया जा रहा है।

संसद का मानसून सत्र एक बार फिर हंगामे की भेंट चढ़ता दिख रहा है। विपक्ष जहां सरकार को घेरने के लिए आक्रामक रणनीति अपनाए हुए है, वहीं छोटे दलों की चिंता है कि संसद का पूरा सत्र न खराब हो जाए। लेकिन मौजूदा हालात देखकर साफ है कि जब तक वोटर लिस्ट पर बहस नहीं होती, विपक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं है।]]></content:encoded>
					
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