<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>DiwaliPujaMuhurat &#8211; Trends Topic</title>
	<atom:link href="https://trendstopic.in/tag/diwalipujamuhurat/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://trendstopic.in</link>
	<description>to always keep you aware</description>
	<lastBuildDate>Mon, 20 Oct 2025 04:01:22 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.4.8</generator>

<image>
	<url>https://trendstopic.in/wp-content/uploads/2024/03/cropped-TREND-TOPIC-1-32x32.png</url>
	<title>DiwaliPujaMuhurat &#8211; Trends Topic</title>
	<link>https://trendstopic.in</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>Diwali आज: दोपहर 3:30 से शुरू होगा पहला पूजा मुहूर्त, जानिए लक्ष्मी पूजा की विधि और Diwali से जुड़ी 5 खास कहानियां</title>
		<link>https://trendstopic.in/diwali-today-the-first-puja-muhurat-begins-at-330-pm-know-the-lakshmi-puja-method-and-5-special-stories-behind-diwali/</link>
					<comments>https://trendstopic.in/diwali-today-the-first-puja-muhurat-begins-at-330-pm-know-the-lakshmi-puja-method-and-5-special-stories-behind-diwali/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 20 Oct 2025 04:00:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक ज्ञान]]></category>
		<category><![CDATA[Deepavali]]></category>
		<category><![CDATA[Diwali2025]]></category>
		<category><![CDATA[Diwali2025Date]]></category>
		<category><![CDATA[DiwaliCelebration]]></category>
		<category><![CDATA[DiwaliFestival]]></category>
		<category><![CDATA[DiwaliInIndia]]></category>
		<category><![CDATA[DiwaliPujaMuhurat]]></category>
		<category><![CDATA[DiwaliSpecial]]></category>
		<category><![CDATA[DiwaliStories]]></category>
		<category><![CDATA[DiwaliTradition]]></category>
		<category><![CDATA[DiwaliVibes]]></category>
		<category><![CDATA[Festival]]></category>
		<category><![CDATA[FestivalOfLights]]></category>
		<category><![CDATA[LakshmiGaneshPuja]]></category>
		<category><![CDATA[LakshmiPuja]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://trendstopic.in/?p=25992</guid>

					<description><![CDATA[आज पूरा देश <strong>दीपावली</strong> के रोशनी भरे त्योहार को मनाने की तैयारी में है।
<strong>अमावस्या तिथि</strong> आज दोपहर <strong>3:30 </strong><strong>बजे से शुरू</strong> होगी और <strong>अगले दिन सुबह </strong><strong>5:25 </strong><strong>बजे तक</strong> रहेगी।
यानी आज से लेकर कल सुबह तक आप <strong>लक्ष्मी पूजन</strong> कर सकते हैं।
इस बार दीपावली पर <strong>कुल </strong><strong>8 </strong><strong>शुभ मुहूर्त</strong> रहेंगे।

यह दिन <strong>धन</strong><strong>, </strong><strong>समृद्धि और खुशहाली की देवी लक्ष्मी</strong>, <strong>विघ्नहर्ता गणेश</strong> और <strong>धन के देवता कुबेर</strong> की पूजा को समर्पित है।
लोग अपने घरों और दफ्तरों को दीयों, लाइट्स और रंगोली से सजाकर माँ लक्ष्मी का स्वागत करते हैं।
<h2>दीपावली क्यों मनाई जाती है? जानिए इस पर्व की 5 प्रमुख कथाएं</h2>
<h3>1 <strong>समुद्र मंथन से देवी लक्ष्मी का प्रकट होना</strong></h3>
कहानी के अनुसार, देवता और दैत्य जब <strong>अमृत पाने के लिए समुद्र मंथन</strong> कर रहे थे, तो उसमें से <strong>14 </strong><strong>रत्न</strong> निकले।
इन्हीं में से एक थीं <strong>देवी लक्ष्मी</strong>।
कहा जाता है कि वे पहले से मौजूद थीं, लेकिन किसी बात से नाराज होकर <strong>समुद्र में छिप गईं</strong>।
हजारों साल बाद वे समुद्र मंथन से फिर प्रकट हुईं।
वह दिन <strong>कार्तिक अमावस्या</strong> का था, इसलिए उसी दिन को <strong>दीपावली और लक्ष्मी पूजा</strong> के रूप में मनाया जाता है।
<h3>2 <strong>मां काली की पूजा: पश्चिम बंगाल की परंपरा</strong></h3>
जब देशभर में लोग लक्ष्मी पूजा करते हैं, वहीं <strong>पश्चिम बंगाल</strong> में इस दिन <strong>काली मां की पूजा</strong> होती है।
माना जाता है कि <strong>मां काली</strong> ने इस रात <strong>रक्तबीज</strong> जैसे शक्तिशाली असुरों का संहार किया था।
उसी रात यानी <strong>कार्तिक अमावस्या</strong> को देवी की शक्ति और विजय के प्रतीक के रूप में <strong>दीप जलाकर पूजा</strong> की जाती है।
<h3>3 <strong>राजा बलि और भगवान वामन की कहानी (दक्षिण भारत)</strong></h3>
यह कथा खासकर <strong>केरल और दक्षिण भारत</strong> में प्रसिद्ध है।
<strong>दैत्यराज बलि</strong> एक पराक्रमी और दयालु राजा थे।
उन्होंने एक बड़ा यज्ञ किया, जिससे देवताओं को लगा कि वे स्वर्गलोक पर भी अधिकार कर लेंगे।
तब <strong>भगवान विष्णु</strong> ने <strong>वामन अवतार</strong> लिया और बलि से <strong>तीन पग भूमि</strong> मांगी।
दो पगों में उन्होंने <strong>आसमान और धरती</strong> नाप ली और तीसरा पग बलि के सिर पर रखकर उन्हें <strong>पाताल लोक भेज दिया</strong>।
लेकिन उनकी भक्ति से खुश होकर विष्णु ने उन्हें <strong>साल में एक दिन धरती पर आने की अनुमति दी</strong>।
दक्षिण भारत में उसी दिन <strong>दीप जलाकर बलि राजा के स्वागत</strong> में दीपोत्सव मनाया जाता है।
<h3>4 <strong>भगवान श्रीराम का अयोध्या लौटना</strong></h3>
14 साल का <strong>वनवास पूरा कर जब श्रीराम</strong><strong>, </strong><strong>सीता और लक्ष्मण</strong> अयोध्या लौटे, तो पूरे नगर में खुशियों की लहर दौड़ गई।
अयोध्यावासियों ने अपने घरों में <strong>दीए जलाए</strong> और पूरे नगर को <strong>रोशनी से सजाया</strong>।
वह रात <strong>कार्तिक अमावस्या</strong> की थी, और तभी से <strong>दीयों से अंधकार मिटाने वाला यह पर्व दीपावली</strong> कहलाया।
<h3>5 <strong>युधिष्ठिर का राजसूय यज्ञ (महाभारत काल की कथा)</strong></h3>
कौरवों से विभाजन के बाद पांडवों को जो जंगल मिला, उसे उन्होंने <strong>इंद्रप्रस्थ</strong> नामक सुंदर राज्य में बदल दिया।
राजा <strong>युधिष्ठिर</strong> ने वहां <strong>राजसूय यज्ञ</strong> का आयोजन किया, जिसमें सैकड़ों राजा और प्रमुख लोग आए।
राज्य की स्थापना के इस अवसर पर <strong>भव्य उत्सव मनाया गया</strong>, और उसी दिन से <strong>दीपावली का त्योहार</strong> मनाने की परंपरा बनी।
<h2>लक्ष्मी पूजन की सही विधि और मान्यताएं</h2>
<h3><strong>कौन-सी तस्वीर की पूजा करनी चाहिए</strong><strong>?</strong></h3>
<ul>
 	<li><strong>खड़ी हुई लक्ष्मी जी की तस्वीर</strong> की पूजा नहीं करनी चाहिए।</li>
 	<li><strong>उल्लू पर बैठी लक्ष्मी जी</strong> की भी पूजा नहीं करनी चाहिए।</li>
 	<li>सबसे शुभ मानी जाती है <strong>कमल के फूल पर बैठी लक्ष्मी जी</strong> की तस्वीर या मूर्ति।</li>
 	<li>लक्ष्मी जी के साथ <strong>भगवान गणेश</strong> और <strong>कुबेर जी</strong> की भी पूजा करना चाहिए।</li>
</ul>
<h3></h3>
<img class="alignnone  wp-image-25995" src="https://trendstopic.in/wp-content/uploads/2025/10/ipjt8n1760721454_1760804679-300x169.jpg" alt="" width="707" height="398" />
<h3></h3>
<h3><strong>पूजन विधि (</strong><strong>Lakshmi Puja Vidhi): </strong><strong>आसान तरीका</strong></h3>
<ol>
 	<li>सबसे पहले घर और पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करें।</li>
 	<li>चौकी या लकड़ी के पट्टे पर <strong>लाल कपड़ा बिछाकर</strong> मूर्तियाँ स्थापित करें।</li>
 	<li>पहले <strong>गणेश जी</strong> का पूजन करें, फिर <strong>लक्ष्मी जी</strong> का।</li>
 	<li>देवी को <strong>फूल</strong><strong>, </strong><strong>चावल</strong><strong>, </strong><strong>मिठाई</strong><strong>, </strong><strong>सिक्के और कपूर</strong> अर्पित करें।</li>
 	<li>मंत्र “<strong>ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः</strong>” का जाप करें।</li>
 	<li>पूजा के बाद घर के <strong>हर कोने में दीप जलाएं</strong> ताकि घर में सकारात्मक ऊर्जा फैले।</li>
</ol>
<h2>दीपावली का संदेश</h2>
दीपावली सिर्फ <strong>धन और पूजा का त्योहार</strong> नहीं है, बल्कि <strong>अंधकार पर प्रकाश की जीत</strong> और <strong>बुराई पर अच्छाई की विजय</strong> का प्रतीक है।
इस दिन हर कोई अपने घर, मन और जीवन में <strong>खुशियों की रोशनी जलाने</strong> का संकल्प लेता है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[आज पूरा देश <strong>दीपावली</strong> के रोशनी भरे त्योहार को मनाने की तैयारी में है।
<strong>अमावस्या तिथि</strong> आज दोपहर <strong>3:30 </strong><strong>बजे से शुरू</strong> होगी और <strong>अगले दिन सुबह </strong><strong>5:25 </strong><strong>बजे तक</strong> रहेगी।
यानी आज से लेकर कल सुबह तक आप <strong>लक्ष्मी पूजन</strong> कर सकते हैं।
इस बार दीपावली पर <strong>कुल </strong><strong>8 </strong><strong>शुभ मुहूर्त</strong> रहेंगे।

यह दिन <strong>धन</strong><strong>, </strong><strong>समृद्धि और खुशहाली की देवी लक्ष्मी</strong>, <strong>विघ्नहर्ता गणेश</strong> और <strong>धन के देवता कुबेर</strong> की पूजा को समर्पित है।
लोग अपने घरों और दफ्तरों को दीयों, लाइट्स और रंगोली से सजाकर माँ लक्ष्मी का स्वागत करते हैं।
<h2>दीपावली क्यों मनाई जाती है? जानिए इस पर्व की 5 प्रमुख कथाएं</h2>
<h3>1 <strong>समुद्र मंथन से देवी लक्ष्मी का प्रकट होना</strong></h3>
कहानी के अनुसार, देवता और दैत्य जब <strong>अमृत पाने के लिए समुद्र मंथन</strong> कर रहे थे, तो उसमें से <strong>14 </strong><strong>रत्न</strong> निकले।
इन्हीं में से एक थीं <strong>देवी लक्ष्मी</strong>।
कहा जाता है कि वे पहले से मौजूद थीं, लेकिन किसी बात से नाराज होकर <strong>समुद्र में छिप गईं</strong>।
हजारों साल बाद वे समुद्र मंथन से फिर प्रकट हुईं।
वह दिन <strong>कार्तिक अमावस्या</strong> का था, इसलिए उसी दिन को <strong>दीपावली और लक्ष्मी पूजा</strong> के रूप में मनाया जाता है।
<h3>2 <strong>मां काली की पूजा: पश्चिम बंगाल की परंपरा</strong></h3>
जब देशभर में लोग लक्ष्मी पूजा करते हैं, वहीं <strong>पश्चिम बंगाल</strong> में इस दिन <strong>काली मां की पूजा</strong> होती है।
माना जाता है कि <strong>मां काली</strong> ने इस रात <strong>रक्तबीज</strong> जैसे शक्तिशाली असुरों का संहार किया था।
उसी रात यानी <strong>कार्तिक अमावस्या</strong> को देवी की शक्ति और विजय के प्रतीक के रूप में <strong>दीप जलाकर पूजा</strong> की जाती है।
<h3>3 <strong>राजा बलि और भगवान वामन की कहानी (दक्षिण भारत)</strong></h3>
यह कथा खासकर <strong>केरल और दक्षिण भारत</strong> में प्रसिद्ध है।
<strong>दैत्यराज बलि</strong> एक पराक्रमी और दयालु राजा थे।
उन्होंने एक बड़ा यज्ञ किया, जिससे देवताओं को लगा कि वे स्वर्गलोक पर भी अधिकार कर लेंगे।
तब <strong>भगवान विष्णु</strong> ने <strong>वामन अवतार</strong> लिया और बलि से <strong>तीन पग भूमि</strong> मांगी।
दो पगों में उन्होंने <strong>आसमान और धरती</strong> नाप ली और तीसरा पग बलि के सिर पर रखकर उन्हें <strong>पाताल लोक भेज दिया</strong>।
लेकिन उनकी भक्ति से खुश होकर विष्णु ने उन्हें <strong>साल में एक दिन धरती पर आने की अनुमति दी</strong>।
दक्षिण भारत में उसी दिन <strong>दीप जलाकर बलि राजा के स्वागत</strong> में दीपोत्सव मनाया जाता है।
<h3>4 <strong>भगवान श्रीराम का अयोध्या लौटना</strong></h3>
14 साल का <strong>वनवास पूरा कर जब श्रीराम</strong><strong>, </strong><strong>सीता और लक्ष्मण</strong> अयोध्या लौटे, तो पूरे नगर में खुशियों की लहर दौड़ गई।
अयोध्यावासियों ने अपने घरों में <strong>दीए जलाए</strong> और पूरे नगर को <strong>रोशनी से सजाया</strong>।
वह रात <strong>कार्तिक अमावस्या</strong> की थी, और तभी से <strong>दीयों से अंधकार मिटाने वाला यह पर्व दीपावली</strong> कहलाया।
<h3>5 <strong>युधिष्ठिर का राजसूय यज्ञ (महाभारत काल की कथा)</strong></h3>
कौरवों से विभाजन के बाद पांडवों को जो जंगल मिला, उसे उन्होंने <strong>इंद्रप्रस्थ</strong> नामक सुंदर राज्य में बदल दिया।
राजा <strong>युधिष्ठिर</strong> ने वहां <strong>राजसूय यज्ञ</strong> का आयोजन किया, जिसमें सैकड़ों राजा और प्रमुख लोग आए।
राज्य की स्थापना के इस अवसर पर <strong>भव्य उत्सव मनाया गया</strong>, और उसी दिन से <strong>दीपावली का त्योहार</strong> मनाने की परंपरा बनी।
<h2>लक्ष्मी पूजन की सही विधि और मान्यताएं</h2>
<h3><strong>कौन-सी तस्वीर की पूजा करनी चाहिए</strong><strong>?</strong></h3>
<ul>
 	<li><strong>खड़ी हुई लक्ष्मी जी की तस्वीर</strong> की पूजा नहीं करनी चाहिए।</li>
 	<li><strong>उल्लू पर बैठी लक्ष्मी जी</strong> की भी पूजा नहीं करनी चाहिए।</li>
 	<li>सबसे शुभ मानी जाती है <strong>कमल के फूल पर बैठी लक्ष्मी जी</strong> की तस्वीर या मूर्ति।</li>
 	<li>लक्ष्मी जी के साथ <strong>भगवान गणेश</strong> और <strong>कुबेर जी</strong> की भी पूजा करना चाहिए।</li>
</ul>
<h3></h3>
<img class="alignnone  wp-image-25995" src="https://trendstopic.in/wp-content/uploads/2025/10/ipjt8n1760721454_1760804679-300x169.jpg" alt="" width="707" height="398" />
<h3></h3>
<h3><strong>पूजन विधि (</strong><strong>Lakshmi Puja Vidhi): </strong><strong>आसान तरीका</strong></h3>
<ol>
 	<li>सबसे पहले घर और पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करें।</li>
 	<li>चौकी या लकड़ी के पट्टे पर <strong>लाल कपड़ा बिछाकर</strong> मूर्तियाँ स्थापित करें।</li>
 	<li>पहले <strong>गणेश जी</strong> का पूजन करें, फिर <strong>लक्ष्मी जी</strong> का।</li>
 	<li>देवी को <strong>फूल</strong><strong>, </strong><strong>चावल</strong><strong>, </strong><strong>मिठाई</strong><strong>, </strong><strong>सिक्के और कपूर</strong> अर्पित करें।</li>
 	<li>मंत्र “<strong>ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः</strong>” का जाप करें।</li>
 	<li>पूजा के बाद घर के <strong>हर कोने में दीप जलाएं</strong> ताकि घर में सकारात्मक ऊर्जा फैले।</li>
</ol>
<h2>दीपावली का संदेश</h2>
दीपावली सिर्फ <strong>धन और पूजा का त्योहार</strong> नहीं है, बल्कि <strong>अंधकार पर प्रकाश की जीत</strong> और <strong>बुराई पर अच्छाई की विजय</strong> का प्रतीक है।
इस दिन हर कोई अपने घर, मन और जीवन में <strong>खुशियों की रोशनी जलाने</strong> का संकल्प लेता है।]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://trendstopic.in/diwali-today-the-first-puja-muhurat-begins-at-330-pm-know-the-lakshmi-puja-method-and-5-special-stories-behind-diwali/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
		<enclosure url="https://trendstopic.in/wp-content/uploads/2025/10/Diwali-2024-Dates-768x432-1.jpg" length="122381" type="image/jpeg" />
	</item>
	</channel>
</rss>
