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	<title>Devotion &#8211; Trends Topic</title>
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	<title>Devotion &#8211; Trends Topic</title>
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		<title>Guru Tegh Bahadur Ji की महान शहादत को सलाम! चारों दिशाओं से आए Nagar Kirtans Sri Anandpur Sahib में हुए सम्पूर्ण, श्रद्धा में डूबी पवित्र नगरी!</title>
		<link>https://trendstopic.in/salute-to-the-supreme-sacrifice-of-guru-tegh-bahadur-ji-the-nagar-kirtans-arriving-from-all-four-directions-have-reached-sri-anandpur-sahib-and-the-holy-city-is-immersed-in-devotion/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 23 Nov 2025 08:26:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
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		<category><![CDATA[SriAnandpurSahib]]></category>
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					<description><![CDATA[शिक्षा और सूचना एवं लोक संपर्क मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि चारों दिशाओं से सजाये गये नगर कीर्तन शुक्रवार दिनांक 22 नवंबर को श्री आनंदपुर साहिब पहुंचेंगे। नगर कीर्तनों का संगतों द्वारा भव्य स्वागत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि श्रीनगर, गुरदासपुर, फरीदकोट और तलवंडी साबो से आ रहे नगर कीर्तनों की कुल लंबाई 1563 किलोमीटर बनती है।

&nbsp;

इधर, पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामलों के मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद ने कहा कि नौवें पातशाह श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस को समर्पित 23 से 25 नवंबर तक होने वाले समागमों में शामिल होने तथा तख्त श्री केसगढ़ साहिब में नतमस्तक होने के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रही संगत की सुविधा एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार द्वारा पवित्र नगरी श्री आनंदपुर साहिब में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

&nbsp;

उल्लेखनीय है कि श्री गुरु तेग़ बहादुर साहिब जी के 350वें शहीदी दिवस को समर्पित प्रदेश के सभी 23 जिलों में गुरु साहिब के महान जीवन एवं दर्शन को दर्शाते लाइट एंड साउंड शो करवाए गए तथा बाबा बकाला, अमृतसर और पटियाला में कीर्तन दरबार सजाए गए।

&nbsp;

23 से 25 नवंबर तक होने वाले समागमों का ब्यौरा साझा करते हुए बैंस ने बताया कि 23 नवंबर को श्री आनंदपुर साहिब में बाबा बुड्ढा दल छावनी के पास गुरुद्वारा साहिब में श्री अखंड पाठ साहिब का आरंभ होगा, जिसमें मुख्यमंत्री सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल होंगे। इसी तरह मुख्यमंत्री द्वारा विरासत-ए-खालसा स्मारक में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के जीवन एवं दर्शन को दर्शाती प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया जाएगा। इसी दिन मुख्य पंडाल बाबा बुड्ढा दल छावनी में प्रदेश सरकार द्वारा सर्वधर्म सम्मेलन करवाया जाएगा जिसमें प्रमुख धार्मिक नेता सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल होंगे।

&nbsp;

24 नवंबर को कीरतपुर साहिब से भाई जैता जी की यादगार तक सीस भेंट नगर कीर्तन सजाया जाएगा। साथ ही श्री आनंदपुर साहिब (गुरुद्वारा भोरा साहिब-गुरुद्वारा सीस गंज साहिब-गुरु तेग बहादुर अजायब घर-तख्त श्री केसगढ़ साहिब-किला आनंदगढ़ साहिब और विरासत-ए-खालसा तक समाप्त) में हेरिटेज वॉक करवाई जाएगी तथा भाई जैता जी की यादगार पर विधान सभा का विशेष सत्र करवाया जाएगा। इसी तरह चरण गंगा स्टेडियम में गतका तथा अन्य समागम जैसे टेंट पेगिंग, ढाल-तलवार मुकाबला, शस्त्र दर्शन, सिमरन व तलवार का संगम आदि समागम करवाए जाएंगे। इसी तरह विरासत-ए-खालसा यादगार में 23 से 29 नवंबर तक रोजाना ड्रोन शो करवाए जाएंगे।

&nbsp;

इसी तरह 25 नवंबर को श्री अखंड पाठ साहिब जी के भोग कर समाप्ति के उपरांत बाबा बुड्ढा दल छावनी के मुख्य पंडाल में सरबत दा भला एकत्रता समागम करवाया जाएगा। प्रदेश सरकार द्वारा इन समागमों में शामिल होने के लिए पवित्र नगरी में आने वाली लाखों संगतों की सुविधा के लिए व्यापक प्रबंध किए गए हैं। पार्किंग जोनों से मुख्य स्थानों तक संगतों के आने-जाने के लिए शटल सेवा सुनिश्चित की गई है। सभी पार्किंग स्थल सी.सी.टी.वी. निगरानी, रोशनी, बैरिकेडिंग, ट्रैफिक मार्शल, साइन बोर्ड और मोबाइल शौचालयों से सुसज्जित हैं। मुख्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थानों के आसपास मौजूदा पार्किंग स्थलों को भी इस योजना में शामिल किया गया है।

&nbsp;

संगतों की सेवा के लिए तैनात साधनों में 500 ई-रिक्शा, 150 मिनी बसें, 25 फोर्स अर्बनिया वैनें, 15 कारें, 20 टाटा ऐस वाहन तथा बुजुर्गों व दिव्यांग संगत की सहायता के लिए 10 गोल्फ कार्ट शामिल हैं। शटल सेवाएं पार्किंग स्थलों और गुरुद्वारा श्री केसगढ़ साहिब, विरासत-ए-खालसा, मुख्य पंडाल, टेंट सिटीज़ तथा हेल्प डेस्क पॉइंट्स के बीच संगतों को आने-जाने की सुविधा देंगी। इस सिस्टम की पूर्ण निगरानी मुख्य कंट्रोल सेंटर के माध्यम से की जाएगी जिसमें समर्पित पिक-अप पॉइंट, साइनेज और वॉलंटियर्स द्वारा मार्गदर्शन शामिल है।

&nbsp;

इसी तरह श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस को समर्पित समागमों के दौरान संगत की भारी आमद को सुविधाजनक बनाने के लिए जिला प्रशासन रूपनगर द्वारा दो प्रमुख टेंट सिटीज़ ‘चक्क नानकी निवास’ टेंट सिटी और ‘भाई मती दास निवास’ टेंट सिटी स्थापित की गई हैं जिसमें लगभग 10,000 संगत के ठहरने की व्यवस्था की गई है।

&nbsp;

अन्य सुविधाओं सहित एम्बुलेंस की तैनाती तथा 24 घंटे मुख्य कंट्रोल रूम के साथ तुरंत चिकित्सा सेवाएं सुनिश्चित करना शामिल है। समागमों के लिए सुचारु एवं सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध सुनिश्चित करने के लिए पंजाब पुलिस ने सुरक्षा, सुविधा और ट्रैफिक प्रबंधन के लिए भी व्यापक प्रबंध किए हैं। इन समागमों के दौरान पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में 8,000 से अधिक पुलिस कर्मी तैनात किए गए हैं ताकि संगत की सुरक्षा, आवागमन और सुविधा सुनिश्चित की जा सके।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[शिक्षा और सूचना एवं लोक संपर्क मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि चारों दिशाओं से सजाये गये नगर कीर्तन शुक्रवार दिनांक 22 नवंबर को श्री आनंदपुर साहिब पहुंचेंगे। नगर कीर्तनों का संगतों द्वारा भव्य स्वागत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि श्रीनगर, गुरदासपुर, फरीदकोट और तलवंडी साबो से आ रहे नगर कीर्तनों की कुल लंबाई 1563 किलोमीटर बनती है।

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इधर, पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामलों के मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद ने कहा कि नौवें पातशाह श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस को समर्पित 23 से 25 नवंबर तक होने वाले समागमों में शामिल होने तथा तख्त श्री केसगढ़ साहिब में नतमस्तक होने के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रही संगत की सुविधा एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार द्वारा पवित्र नगरी श्री आनंदपुर साहिब में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

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उल्लेखनीय है कि श्री गुरु तेग़ बहादुर साहिब जी के 350वें शहीदी दिवस को समर्पित प्रदेश के सभी 23 जिलों में गुरु साहिब के महान जीवन एवं दर्शन को दर्शाते लाइट एंड साउंड शो करवाए गए तथा बाबा बकाला, अमृतसर और पटियाला में कीर्तन दरबार सजाए गए।

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23 से 25 नवंबर तक होने वाले समागमों का ब्यौरा साझा करते हुए बैंस ने बताया कि 23 नवंबर को श्री आनंदपुर साहिब में बाबा बुड्ढा दल छावनी के पास गुरुद्वारा साहिब में श्री अखंड पाठ साहिब का आरंभ होगा, जिसमें मुख्यमंत्री सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल होंगे। इसी तरह मुख्यमंत्री द्वारा विरासत-ए-खालसा स्मारक में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के जीवन एवं दर्शन को दर्शाती प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया जाएगा। इसी दिन मुख्य पंडाल बाबा बुड्ढा दल छावनी में प्रदेश सरकार द्वारा सर्वधर्म सम्मेलन करवाया जाएगा जिसमें प्रमुख धार्मिक नेता सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल होंगे।

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24 नवंबर को कीरतपुर साहिब से भाई जैता जी की यादगार तक सीस भेंट नगर कीर्तन सजाया जाएगा। साथ ही श्री आनंदपुर साहिब (गुरुद्वारा भोरा साहिब-गुरुद्वारा सीस गंज साहिब-गुरु तेग बहादुर अजायब घर-तख्त श्री केसगढ़ साहिब-किला आनंदगढ़ साहिब और विरासत-ए-खालसा तक समाप्त) में हेरिटेज वॉक करवाई जाएगी तथा भाई जैता जी की यादगार पर विधान सभा का विशेष सत्र करवाया जाएगा। इसी तरह चरण गंगा स्टेडियम में गतका तथा अन्य समागम जैसे टेंट पेगिंग, ढाल-तलवार मुकाबला, शस्त्र दर्शन, सिमरन व तलवार का संगम आदि समागम करवाए जाएंगे। इसी तरह विरासत-ए-खालसा यादगार में 23 से 29 नवंबर तक रोजाना ड्रोन शो करवाए जाएंगे।

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इसी तरह 25 नवंबर को श्री अखंड पाठ साहिब जी के भोग कर समाप्ति के उपरांत बाबा बुड्ढा दल छावनी के मुख्य पंडाल में सरबत दा भला एकत्रता समागम करवाया जाएगा। प्रदेश सरकार द्वारा इन समागमों में शामिल होने के लिए पवित्र नगरी में आने वाली लाखों संगतों की सुविधा के लिए व्यापक प्रबंध किए गए हैं। पार्किंग जोनों से मुख्य स्थानों तक संगतों के आने-जाने के लिए शटल सेवा सुनिश्चित की गई है। सभी पार्किंग स्थल सी.सी.टी.वी. निगरानी, रोशनी, बैरिकेडिंग, ट्रैफिक मार्शल, साइन बोर्ड और मोबाइल शौचालयों से सुसज्जित हैं। मुख्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थानों के आसपास मौजूदा पार्किंग स्थलों को भी इस योजना में शामिल किया गया है।

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संगतों की सेवा के लिए तैनात साधनों में 500 ई-रिक्शा, 150 मिनी बसें, 25 फोर्स अर्बनिया वैनें, 15 कारें, 20 टाटा ऐस वाहन तथा बुजुर्गों व दिव्यांग संगत की सहायता के लिए 10 गोल्फ कार्ट शामिल हैं। शटल सेवाएं पार्किंग स्थलों और गुरुद्वारा श्री केसगढ़ साहिब, विरासत-ए-खालसा, मुख्य पंडाल, टेंट सिटीज़ तथा हेल्प डेस्क पॉइंट्स के बीच संगतों को आने-जाने की सुविधा देंगी। इस सिस्टम की पूर्ण निगरानी मुख्य कंट्रोल सेंटर के माध्यम से की जाएगी जिसमें समर्पित पिक-अप पॉइंट, साइनेज और वॉलंटियर्स द्वारा मार्गदर्शन शामिल है।

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इसी तरह श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस को समर्पित समागमों के दौरान संगत की भारी आमद को सुविधाजनक बनाने के लिए जिला प्रशासन रूपनगर द्वारा दो प्रमुख टेंट सिटीज़ ‘चक्क नानकी निवास’ टेंट सिटी और ‘भाई मती दास निवास’ टेंट सिटी स्थापित की गई हैं जिसमें लगभग 10,000 संगत के ठहरने की व्यवस्था की गई है।

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अन्य सुविधाओं सहित एम्बुलेंस की तैनाती तथा 24 घंटे मुख्य कंट्रोल रूम के साथ तुरंत चिकित्सा सेवाएं सुनिश्चित करना शामिल है। समागमों के लिए सुचारु एवं सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध सुनिश्चित करने के लिए पंजाब पुलिस ने सुरक्षा, सुविधा और ट्रैफिक प्रबंधन के लिए भी व्यापक प्रबंध किए हैं। इन समागमों के दौरान पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में 8,000 से अधिक पुलिस कर्मी तैनात किए गए हैं ताकि संगत की सुरक्षा, आवागमन और सुविधा सुनिश्चित की जा सके।]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>श्री आनंदपुर साहिब ‘हिंद दी चादर श्री गुरु तेग बहादुर जी’ के 350वें शहीदी दिवस पर पंजाब सरकार का बड़ा आयोजन, लोगों में उत्साह और श्रद्धा</title>
		<link>https://trendstopic.in/sri-anandpur-sahib-gears-up-for-punjab-governments-grand-event-on-the-350th-martyrdom-day-of-hind-di-chadar-sri-guru-tegh-bahadur-ji-witnessing-great-enthusiasm-and-devotio/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 21 Nov 2025 05:16:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चंडीगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[350thMartyrdomDay]]></category>
		<category><![CDATA[AnandpurSahib]]></category>
		<category><![CDATA[Devotion]]></category>
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		<category><![CDATA[SriAnandpurSahib]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब इस बार श्री आनंदपुर साहिब में होने वाले एक बहुत ही खास धार्मिक समागम के लिए पूरी तरह तैयार है। यह कार्यक्रम <strong>श्री गुरु तेग बहादुर जी</strong>, <strong>भाई मती दास जी</strong>, <strong>भाई सती दास जी</strong> और <strong>भाई दयाला जी</strong> के <strong>350</strong><strong>वें शहीदी दिवस</strong> को समर्पित है। पंजाब सरकार की ओर से किया जा रहा यह तीन दिवसीय आयोजन <strong>23 </strong><strong>से 25 </strong><strong>नवंबर 2025</strong> तक चलेगा।

इस पूरे समागम को लेकर लोगों में बहुत श्रद्धा, जोश और गर्व देखने को मिल रहा है। हर कोई इसे एक ऐसे मौके की तरह देख रहा है जहां न सिर्फ धार्मिक भावना जागती है, बल्कि इंसानियत, भाईचारा और मानवाधिकारों का संदेश भी दोबारा याद किया जाता है।

<strong>पहला दिन (</strong><strong>23 </strong><strong>नवंबर): आध्यात्मिक शुरुआत</strong>

कार्यक्रम की शुरुआत 23 नवंबर की सुबह <strong>अखंड पाठ</strong> के साथ होगी। इस दौरान <strong>पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार भगवंत सिंह मान</strong> और <strong>आप पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल</strong> भी मौजूद रहेंगे।
यह शुरुआत इस बात का प्रतीक होगी कि सिख परंपरा में <strong>श्रद्धा, </strong><strong>सेवा और मानवता</strong> सबसे पहले आती है।

<strong>गुरु तेग बहादुर जी पर विशेष प्रदर्शनी</strong>

अखंड पाठ के बाद, गुरु तेग बहादुर जी के जीवन, उनके बलिदान और मानवाधिकारों की रक्षा के संदेश पर आधारित एक <strong>स्पेशल Exhibition</strong> का उद्घाटन किया जाएगा।
यह प्रदर्शनी खास तौर पर युवाओं के लिए बनाई गई है ताकि वे समझ सकें कि गुरु साहिब ने क्यों और कैसे अपनी जान देकर इंसानियत की रक्षा की।

<strong>सर्व धर्म सम्मेलन</strong>

<strong>सुबह 11 </strong><strong>बजे</strong> सर्व धर्म सम्मेलन होगा। इसमें अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लोग शामिल होकर <strong>एकता, </strong><strong>भाईचारे, Peace </strong><strong>और Human Rights</strong> पर अपने विचार साझा करेंगे।
इससे यह साफ़ होता है कि गुरु साहिब की शहादत सिर्फ एक समुदाय का संदेश नहीं, बल्कि <strong>पूरी मानवता के लिए</strong> प्रेरणा है।

<strong>विरासत-ए-खालसा और गाइडेड टूर</strong>

शाम को संगत के लिए <strong>विरासत-ए-खालसा</strong> और आसपास के ऐतिहासिक स्मारकों का <strong>guided tour</strong> रखा गया है।
इससे लोगों को अपनी विरासत, अपनी roots और उन महापुरुषों की यादों से जुड़ने का मौका मिलेगा जिन्होंने सिख पंथ की नींव को मजबूत बनाया।

&nbsp;

<img class="alignnone  wp-image-26856" src="https://trendstopic.in/wp-content/uploads/2025/11/WhatsApp-Image-2025-11-20-at-2.24.23-PM-300x169.jpg" alt="" width="602" height="339" />

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<strong>शानदार ड्रोन शो</strong>

रात को एक <strong>grand drone show</strong> होगा जिसमें रोशनी के ज़रिए गुरु साहिबान की शहादत, खालसा पंथ की विरासत और पंजाब की शान को आधुनिक अंदाज़ में दिखाया जाएगा।
यह शो इस समागम को और भी आकर्षक बना देगा।

<strong>तीन दिनों में भक्ति और सेवा का माहौल</strong>

तीनों दिनों में:
<ul>
 	<li>कथा</li>
 	<li>कीर्तन</li>
 	<li>संगत</li>
 	<li>और सेवा</li>
</ul>
का ऐसा माहौल रहेगा कि हर आने वाला व्यक्ति अपने दिल में गुरु साहिबानों के प्रति और गहरा सम्मान लेकर वापस जाएगा।

<strong>लोगों की प्रतिक्रिया</strong>

पूरे पंजाब में इस आयोजन को लेकर बहुत positive माहौल है। लोग मान रहे हैं कि पंजाब सरकार ने शहीदी दिवस को इतनी भव्य और सम्मानजनक तरीके से मनाकर पूरी राज्य की भावनाओं का सम्मान किया है।
हर किसी का कहना है कि यह आयोजन केवल पुरानी बातों को याद करने का मौका नहीं, बल्कि उन मूल्यों को अपनाने का अवसर है जो सिख धर्म को दुनिया भर में <strong>courage, sacrifice </strong><strong>और humanity</strong> का प्रतीक बनाते हैं।

<strong>कार्यक्रम का महत्व</strong>

यह समागम पंजाब की शान, पंजाब की आत्मा और पंजाब की विरासत का जीवंत रूप है।
हर पंजाबी के लिए यह गर्व की बात है कि इतने बड़े स्तर पर एक ऐसा आयोजन हो रहा है जो लोगों को <strong>एकता, </strong><strong>मानवता और साहस</strong> का संदेश देता है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब इस बार श्री आनंदपुर साहिब में होने वाले एक बहुत ही खास धार्मिक समागम के लिए पूरी तरह तैयार है। यह कार्यक्रम <strong>श्री गुरु तेग बहादुर जी</strong>, <strong>भाई मती दास जी</strong>, <strong>भाई सती दास जी</strong> और <strong>भाई दयाला जी</strong> के <strong>350</strong><strong>वें शहीदी दिवस</strong> को समर्पित है। पंजाब सरकार की ओर से किया जा रहा यह तीन दिवसीय आयोजन <strong>23 </strong><strong>से 25 </strong><strong>नवंबर 2025</strong> तक चलेगा।

इस पूरे समागम को लेकर लोगों में बहुत श्रद्धा, जोश और गर्व देखने को मिल रहा है। हर कोई इसे एक ऐसे मौके की तरह देख रहा है जहां न सिर्फ धार्मिक भावना जागती है, बल्कि इंसानियत, भाईचारा और मानवाधिकारों का संदेश भी दोबारा याद किया जाता है।

<strong>पहला दिन (</strong><strong>23 </strong><strong>नवंबर): आध्यात्मिक शुरुआत</strong>

कार्यक्रम की शुरुआत 23 नवंबर की सुबह <strong>अखंड पाठ</strong> के साथ होगी। इस दौरान <strong>पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार भगवंत सिंह मान</strong> और <strong>आप पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल</strong> भी मौजूद रहेंगे।
यह शुरुआत इस बात का प्रतीक होगी कि सिख परंपरा में <strong>श्रद्धा, </strong><strong>सेवा और मानवता</strong> सबसे पहले आती है।

<strong>गुरु तेग बहादुर जी पर विशेष प्रदर्शनी</strong>

अखंड पाठ के बाद, गुरु तेग बहादुर जी के जीवन, उनके बलिदान और मानवाधिकारों की रक्षा के संदेश पर आधारित एक <strong>स्पेशल Exhibition</strong> का उद्घाटन किया जाएगा।
यह प्रदर्शनी खास तौर पर युवाओं के लिए बनाई गई है ताकि वे समझ सकें कि गुरु साहिब ने क्यों और कैसे अपनी जान देकर इंसानियत की रक्षा की।

<strong>सर्व धर्म सम्मेलन</strong>

<strong>सुबह 11 </strong><strong>बजे</strong> सर्व धर्म सम्मेलन होगा। इसमें अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लोग शामिल होकर <strong>एकता, </strong><strong>भाईचारे, Peace </strong><strong>और Human Rights</strong> पर अपने विचार साझा करेंगे।
इससे यह साफ़ होता है कि गुरु साहिब की शहादत सिर्फ एक समुदाय का संदेश नहीं, बल्कि <strong>पूरी मानवता के लिए</strong> प्रेरणा है।

<strong>विरासत-ए-खालसा और गाइडेड टूर</strong>

शाम को संगत के लिए <strong>विरासत-ए-खालसा</strong> और आसपास के ऐतिहासिक स्मारकों का <strong>guided tour</strong> रखा गया है।
इससे लोगों को अपनी विरासत, अपनी roots और उन महापुरुषों की यादों से जुड़ने का मौका मिलेगा जिन्होंने सिख पंथ की नींव को मजबूत बनाया।

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<strong>शानदार ड्रोन शो</strong>

रात को एक <strong>grand drone show</strong> होगा जिसमें रोशनी के ज़रिए गुरु साहिबान की शहादत, खालसा पंथ की विरासत और पंजाब की शान को आधुनिक अंदाज़ में दिखाया जाएगा।
यह शो इस समागम को और भी आकर्षक बना देगा।

<strong>तीन दिनों में भक्ति और सेवा का माहौल</strong>

तीनों दिनों में:
<ul>
 	<li>कथा</li>
 	<li>कीर्तन</li>
 	<li>संगत</li>
 	<li>और सेवा</li>
</ul>
का ऐसा माहौल रहेगा कि हर आने वाला व्यक्ति अपने दिल में गुरु साहिबानों के प्रति और गहरा सम्मान लेकर वापस जाएगा।

<strong>लोगों की प्रतिक्रिया</strong>

पूरे पंजाब में इस आयोजन को लेकर बहुत positive माहौल है। लोग मान रहे हैं कि पंजाब सरकार ने शहीदी दिवस को इतनी भव्य और सम्मानजनक तरीके से मनाकर पूरी राज्य की भावनाओं का सम्मान किया है।
हर किसी का कहना है कि यह आयोजन केवल पुरानी बातों को याद करने का मौका नहीं, बल्कि उन मूल्यों को अपनाने का अवसर है जो सिख धर्म को दुनिया भर में <strong>courage, sacrifice </strong><strong>और humanity</strong> का प्रतीक बनाते हैं।

<strong>कार्यक्रम का महत्व</strong>

यह समागम पंजाब की शान, पंजाब की आत्मा और पंजाब की विरासत का जीवंत रूप है।
हर पंजाबी के लिए यह गर्व की बात है कि इतने बड़े स्तर पर एक ऐसा आयोजन हो रहा है जो लोगों को <strong>एकता, </strong><strong>मानवता और साहस</strong> का संदेश देता है।]]></content:encoded>
					
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		<title>Gorakhpur में Chhath Ghat पर बेदी बनाने को लेकर बवाल, MP Ravi Kishan ने यात्रियों से पूछा- “कइसन बा व्यवस्था?”</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 Oct 2025 07:27:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[Chhath2025]]></category>
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		<category><![CDATA[ChhathGhat]]></category>
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		<category><![CDATA[UNESCO]]></category>
		<category><![CDATA[UPNews]]></category>
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					<description><![CDATA[गोरखपुर में लोक आस्था के महापर्व <strong>छठ पूजा</strong> के मौके पर एक तरफ श्रद्धा और भक्ति का माहौल दिखा, तो वहीं दूसरी तरफ <strong>छठ घाट पर विवाद</strong> ने माहौल बिगाड़ दिया।

रविवार को <strong>रोहिन नदी</strong> के किनारे स्थित <strong>मछलीगांव बड़हरा लाल घाट</strong> पर छठ बेदी बनाने को लेकर <strong>दो पक्षों में झड़प</strong> हो गई। मामला <strong>कैंपियरगंज थाना क्षेत्र</strong> का है। बताया जा रहा है कि मंगरहिया और नरायनपुर गांव के लोग घाट पर बेदी (पूजा के लिए मिट्टी की वेदी) बना रहे थे। किसी बात को लेकर कहासुनी इतनी बढ़ गई कि दोनों पक्षों के बीच <strong>लात-घूंसे चलने लगे</strong>। झड़प का <strong>वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया</strong> है। हालांकि, मौके पर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया।

<strong>रवि किशन ने यात्रियों से मुलाकात की</strong>

छठ पर्व पर घर लौट रहे यात्रियों की सुविधाओं का जायजा लेने <strong>गोरखपुर सांसद रवि किशन शुक्ला</strong> रविवार को <strong>गोरखपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन</strong> पहुंचे।
उन्होंने स्टेशन परिसर और पैसेंजर होल्डिंग एरिया का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने यात्रियों से बातचीत भी की।

&nbsp;

<img class="alignnone  wp-image-26129" src="https://trendstopic.in/wp-content/uploads/2025/10/gifmagicsite-2025-10-27t011906690_1761508190-300x169.jpg" alt="" width="664" height="374" />

&nbsp;

जब रवि किशन ने मुस्कराते हुए पूछा, “<strong>कइसन बा व्यवस्था</strong><strong>?</strong>” तो एक यात्री ने जवाब दिया, “<strong>एक नंबर!</strong>”
यह सुनकर स्टेशन पर मौजूद लोग भी मुस्कराने लगे। सांसद ने कहा कि छठ पर्व पर यात्रियों को किसी तरह की दिक्कत नहीं होनी चाहिए और सभी विभाग पूरी तरह से अलर्ट हैं।

<strong>आज संध्या अर्घ्य का दिन</strong>

चार दिन चलने वाले <strong>छठ पर्व</strong> का तीसरा दिन सबसे अहम होता है। इसे <strong>संध्या घाट पूजा</strong> या <strong>संध्या अर्घ्य</strong> कहा जाता है।
इस दिन व्रती महिलाएं शाम के समय <strong>अस्ताचलगामी सूर्य</strong> यानी ढलते सूरज को अर्घ्य देती हैं।

गोरखपुर में <strong>सूर्यास्त का समय लगभग शाम </strong><strong>5 </strong><strong>बजकर </strong><strong>40 </strong><strong>मिनट</strong> रहेगा। हालांकि, हर शहर में सूर्यास्त का समय थोड़ा अलग होता है, इसलिए श्रद्धालु अपने-अपने इलाके के मुताबिक तैयारी कर रहे हैं।
पूजा के लिए घाटों को साफ-सुथरा किया जा रहा है और लोग प्रसाद के साथ सूप सजाकर तैयार हैं।

<strong>छठ पर्व क्यों है खास</strong>

छठ पर्व की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें <strong>ना कोई पंडित होता है</strong><strong>, </strong><strong>ना कोई मंत्रोच्चार।</strong>
यह पर्व <strong>समानता और शुद्धता</strong> का प्रतीक है। गरीब हो या अमीर, अगड़ा हो या पिछड़ा — सभी एक ही घाट पर एक साथ सूर्यदेव को अर्घ्य देते हैं।

हर कोई अपने स्तर पर सहयोग करता है —
कोई <strong>घाट की सफाई</strong> करता है, कोई <strong>सजावट</strong>, कोई <strong>रंगाई-पुताई</strong>।
प्रसाद में <strong>ठेकुआ</strong><strong>, </strong><strong>चावल के लड्डू</strong><strong>, </strong><strong>केला</strong><strong>, </strong><strong>सिंघाड़ा</strong><strong>, </strong><strong>नाशपाती</strong><strong>, </strong><strong>शकरकंद</strong><strong>, </strong><strong>अदरक</strong><strong>, </strong><strong>मूली</strong><strong>, </strong><strong>नींबू</strong><strong>, </strong><strong>शरीफा</strong> जैसे मौसमी फल शामिल होते हैं।
इन चीज़ों को बिना भेदभाव के <strong>साझा किया जाता है</strong> — यही इसकी खूबसूरती है।

<strong>छठ पूजा की कहानी और धार्मिक महत्व</strong>

<strong>स्कंद पुराण</strong> के मुताबिक, <strong>राजा प्रियव्रत (मनु के पुत्र)</strong> को संतान नहीं थी। उन्होंने <strong>महर्षि कश्यप</strong> से संतान प्राप्ति का वरदान मांगा।
ऋषि के यज्ञ से उन्हें पुत्र तो हुआ, लेकिन वह मृत पैदा हुआ। दुखी राजा-रानी आत्महत्या करने की सोचने लगे, तभी एक देवी प्रकट हुईं।

देवी ने कहा – “मैं <strong>षष्ठी देवी</strong>, उषा की ज्येष्ठा बहन हूं। बच्चों की रक्षा मेरी जिम्मेदारी है। अगर तुम मेरी विधि से पूजा करोगे तो तुम्हें संतान सुख मिलेगा।”
राजा-रानी ने देवी की पूजा की और उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। तभी से <strong>षष्ठी देवी की पूजा</strong>, यानी <strong>छठ पूजा</strong> की परंपरा शुरू हुई।

<strong>ऋग्वेद</strong> में भी सूर्य और उसकी किरणों की उपासना से <strong>शरीर और मन की शुद्धि</strong> का वर्णन मिलता है।
आज भी व्रती महिलाएं बिना बोले, बिना दिखावे के, पूरे नियम और संयम से इस व्रत को निभाती हैं।

&nbsp;

<img class="alignnone  wp-image-26128" src="https://trendstopic.in/wp-content/uploads/2025/10/gifmagicsite-2025-10-26t153006078_1761472829-300x169.jpg" alt="" width="769" height="433" />

&nbsp;

<strong>छठ पर्व के चार दिन</strong>
<ol>
 	<li><strong>पहला दिन </strong><strong>– </strong><strong>नहाय-खाय:</strong> घर की सफाई, स्नान और शुद्ध शाकाहारी भोजन से व्रत की शुरुआत।</li>
 	<li><strong>दूसरा दिन </strong><strong>– </strong><strong>खरना:</strong> दिनभर उपवास, शाम को गुड़-चावल की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण।</li>
 	<li><strong>तीसरा दिन </strong><strong>– </strong><strong>संध्या अर्घ्य:</strong> डूबते सूरज को अर्घ्य देकर सूर्यदेव की आराधना।</li>
 	<li><strong>चौथा दिन </strong><strong>– </strong><strong>उषा अर्घ्य:</strong> अगली सुबह उगते सूरज को अर्घ्य देकर व्रत का समापन।</li>
</ol>
<strong>यूनेस्को में छठ को शामिल कराने की पहल</strong>

मोदी सरकार ने <strong>छठ पूजा को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची (</strong><strong>UNESCO Intangible Cultural Heritage List)</strong> में शामिल कराने की प्रक्रिया शुरू की है, ताकि दुनिया भर में इस लोक आस्था के पर्व की पहचान बन सके।

गोरखपुर समेत पूरे पूर्वांचल में आज आस्था और भक्ति का माहौल है।
एक ओर श्रद्धालु <strong>ढलते सूर्य को अर्घ्य देने की तैयारी</strong> में जुटे हैं, तो दूसरी ओर प्रशासन ने <strong>घाटों पर सुरक्षा और व्यवस्था</strong> के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं।
हल्की झड़प की खबर जरूर आई, लेकिन लोगों की आस्था और भाईचारे के आगे वो मामूली साबित हुई।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[गोरखपुर में लोक आस्था के महापर्व <strong>छठ पूजा</strong> के मौके पर एक तरफ श्रद्धा और भक्ति का माहौल दिखा, तो वहीं दूसरी तरफ <strong>छठ घाट पर विवाद</strong> ने माहौल बिगाड़ दिया।

रविवार को <strong>रोहिन नदी</strong> के किनारे स्थित <strong>मछलीगांव बड़हरा लाल घाट</strong> पर छठ बेदी बनाने को लेकर <strong>दो पक्षों में झड़प</strong> हो गई। मामला <strong>कैंपियरगंज थाना क्षेत्र</strong> का है। बताया जा रहा है कि मंगरहिया और नरायनपुर गांव के लोग घाट पर बेदी (पूजा के लिए मिट्टी की वेदी) बना रहे थे। किसी बात को लेकर कहासुनी इतनी बढ़ गई कि दोनों पक्षों के बीच <strong>लात-घूंसे चलने लगे</strong>। झड़प का <strong>वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया</strong> है। हालांकि, मौके पर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया।

<strong>रवि किशन ने यात्रियों से मुलाकात की</strong>

छठ पर्व पर घर लौट रहे यात्रियों की सुविधाओं का जायजा लेने <strong>गोरखपुर सांसद रवि किशन शुक्ला</strong> रविवार को <strong>गोरखपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन</strong> पहुंचे।
उन्होंने स्टेशन परिसर और पैसेंजर होल्डिंग एरिया का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने यात्रियों से बातचीत भी की।

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जब रवि किशन ने मुस्कराते हुए पूछा, “<strong>कइसन बा व्यवस्था</strong><strong>?</strong>” तो एक यात्री ने जवाब दिया, “<strong>एक नंबर!</strong>”
यह सुनकर स्टेशन पर मौजूद लोग भी मुस्कराने लगे। सांसद ने कहा कि छठ पर्व पर यात्रियों को किसी तरह की दिक्कत नहीं होनी चाहिए और सभी विभाग पूरी तरह से अलर्ट हैं।

<strong>आज संध्या अर्घ्य का दिन</strong>

चार दिन चलने वाले <strong>छठ पर्व</strong> का तीसरा दिन सबसे अहम होता है। इसे <strong>संध्या घाट पूजा</strong> या <strong>संध्या अर्घ्य</strong> कहा जाता है।
इस दिन व्रती महिलाएं शाम के समय <strong>अस्ताचलगामी सूर्य</strong> यानी ढलते सूरज को अर्घ्य देती हैं।

गोरखपुर में <strong>सूर्यास्त का समय लगभग शाम </strong><strong>5 </strong><strong>बजकर </strong><strong>40 </strong><strong>मिनट</strong> रहेगा। हालांकि, हर शहर में सूर्यास्त का समय थोड़ा अलग होता है, इसलिए श्रद्धालु अपने-अपने इलाके के मुताबिक तैयारी कर रहे हैं।
पूजा के लिए घाटों को साफ-सुथरा किया जा रहा है और लोग प्रसाद के साथ सूप सजाकर तैयार हैं।

<strong>छठ पर्व क्यों है खास</strong>

छठ पर्व की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें <strong>ना कोई पंडित होता है</strong><strong>, </strong><strong>ना कोई मंत्रोच्चार।</strong>
यह पर्व <strong>समानता और शुद्धता</strong> का प्रतीक है। गरीब हो या अमीर, अगड़ा हो या पिछड़ा — सभी एक ही घाट पर एक साथ सूर्यदेव को अर्घ्य देते हैं।

हर कोई अपने स्तर पर सहयोग करता है —
कोई <strong>घाट की सफाई</strong> करता है, कोई <strong>सजावट</strong>, कोई <strong>रंगाई-पुताई</strong>।
प्रसाद में <strong>ठेकुआ</strong><strong>, </strong><strong>चावल के लड्डू</strong><strong>, </strong><strong>केला</strong><strong>, </strong><strong>सिंघाड़ा</strong><strong>, </strong><strong>नाशपाती</strong><strong>, </strong><strong>शकरकंद</strong><strong>, </strong><strong>अदरक</strong><strong>, </strong><strong>मूली</strong><strong>, </strong><strong>नींबू</strong><strong>, </strong><strong>शरीफा</strong> जैसे मौसमी फल शामिल होते हैं।
इन चीज़ों को बिना भेदभाव के <strong>साझा किया जाता है</strong> — यही इसकी खूबसूरती है।

<strong>छठ पूजा की कहानी और धार्मिक महत्व</strong>

<strong>स्कंद पुराण</strong> के मुताबिक, <strong>राजा प्रियव्रत (मनु के पुत्र)</strong> को संतान नहीं थी। उन्होंने <strong>महर्षि कश्यप</strong> से संतान प्राप्ति का वरदान मांगा।
ऋषि के यज्ञ से उन्हें पुत्र तो हुआ, लेकिन वह मृत पैदा हुआ। दुखी राजा-रानी आत्महत्या करने की सोचने लगे, तभी एक देवी प्रकट हुईं।

देवी ने कहा – “मैं <strong>षष्ठी देवी</strong>, उषा की ज्येष्ठा बहन हूं। बच्चों की रक्षा मेरी जिम्मेदारी है। अगर तुम मेरी विधि से पूजा करोगे तो तुम्हें संतान सुख मिलेगा।”
राजा-रानी ने देवी की पूजा की और उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। तभी से <strong>षष्ठी देवी की पूजा</strong>, यानी <strong>छठ पूजा</strong> की परंपरा शुरू हुई।

<strong>ऋग्वेद</strong> में भी सूर्य और उसकी किरणों की उपासना से <strong>शरीर और मन की शुद्धि</strong> का वर्णन मिलता है।
आज भी व्रती महिलाएं बिना बोले, बिना दिखावे के, पूरे नियम और संयम से इस व्रत को निभाती हैं।

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<strong>छठ पर्व के चार दिन</strong>
<ol>
 	<li><strong>पहला दिन </strong><strong>– </strong><strong>नहाय-खाय:</strong> घर की सफाई, स्नान और शुद्ध शाकाहारी भोजन से व्रत की शुरुआत।</li>
 	<li><strong>दूसरा दिन </strong><strong>– </strong><strong>खरना:</strong> दिनभर उपवास, शाम को गुड़-चावल की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण।</li>
 	<li><strong>तीसरा दिन </strong><strong>– </strong><strong>संध्या अर्घ्य:</strong> डूबते सूरज को अर्घ्य देकर सूर्यदेव की आराधना।</li>
 	<li><strong>चौथा दिन </strong><strong>– </strong><strong>उषा अर्घ्य:</strong> अगली सुबह उगते सूरज को अर्घ्य देकर व्रत का समापन।</li>
</ol>
<strong>यूनेस्को में छठ को शामिल कराने की पहल</strong>

मोदी सरकार ने <strong>छठ पूजा को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची (</strong><strong>UNESCO Intangible Cultural Heritage List)</strong> में शामिल कराने की प्रक्रिया शुरू की है, ताकि दुनिया भर में इस लोक आस्था के पर्व की पहचान बन सके।

गोरखपुर समेत पूरे पूर्वांचल में आज आस्था और भक्ति का माहौल है।
एक ओर श्रद्धालु <strong>ढलते सूर्य को अर्घ्य देने की तैयारी</strong> में जुटे हैं, तो दूसरी ओर प्रशासन ने <strong>घाटों पर सुरक्षा और व्यवस्था</strong> के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं।
हल्की झड़प की खबर जरूर आई, लेकिन लोगों की आस्था और भाईचारे के आगे वो मामूली साबित हुई।]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>CM Nayab Singh Saini ने Gurdwara Shri Nada Sahib में माथा टेका, प्रदेशवासियों की खुशहाली के लिए की अरदास</title>
		<link>https://trendstopic.in/cm-nayab-singh-saini-pays-obeisance-at-gurdwara-shri-nada-sahib-prays-for-prosperity-and-well-being-of-the-people/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 07 Sep 2025 05:06:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हरियाणा]]></category>
		<category><![CDATA[Blessings]]></category>
		<category><![CDATA[ChiefMinister]]></category>
		<category><![CDATA[Devotion]]></category>
		<category><![CDATA[Faith]]></category>
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		<category><![CDATA[WaheguruJi]]></category>
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					<description><![CDATA[हरियाणा के मुख्यमंत्री <strong>नायब सिंह सैनी</strong> ने पंचकूला स्थित <strong>गुरुद्वारा श्री नाड़ा साहिब</strong> में पहुंचकर श्रद्धा और आदर भाव से माथा टेका। इस दौरान उन्होंने संगत के साथ मिलकर पवित्र <strong>अरदास</strong> की और प्रदेश तथा देशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरुद्वारा श्री नाड़ा साहिब के दर्शन हमेशा ही अलौकिक अनुभव कराते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा –

<em>“</em><em>श्रद्धा एवं आदर भाव के साथ गुरुद्वारा श्री नाड़ा साहिब जी के दर्शन सदैव अलौकिक होते हैं। आज पंचकूला स्थित इस ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब में संगत के साथ माथा टेका एवं पवित्र दिव्यता का अनुभव किया। सच्चे पातशाह वाहेगुरु जी की कृपा समस्त देश-प्रदेशवासियों पर बनी रहे एवं सभी का भला हो ऐसी अरदास की।</em><em>”</em>

इस अवसर पर गुरुद्वारा प्रबंधन की ओर से मुख्यमंत्री को <strong>सरोपा</strong> भेंट किया गया। इसे स्वीकार करते हुए सैनी ने कहा कि यह उनके लिए अत्यंत <strong>पावन और ऊर्जादायी</strong> है।

<strong>धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व</strong>

गुरुद्वारा श्री नाड़ा साहिब, पंचकूला का एक प्रमुख <strong>धार्मिक स्थल</strong> है, जहां बड़ी संख्या में संगत माथा टेकने पहुंचती है। माना जाता है कि यह स्थान <strong>गुरु गोबिंद सिंह जी</strong> की तपस्या और आशीर्वाद से जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि यह गुरुद्वारा सिख श्रद्धालुओं के साथ-साथ पूरे प्रदेश के लोगों के लिए आस्था का केंद्र है।

मुख्यमंत्री के इस दौरे का उद्देश्य न केवल धार्मिक श्रद्धा प्रकट करना था, बल्कि प्रदेश में <strong>भाईचारे और सद्भावना</strong> का संदेश देना भी रहा।

<strong>पहले भी कर चुके हैं माथा टेक</strong>

इससे पहले <strong>6 </strong><strong>जनवरी </strong><strong>2025</strong> को गुरु गोबिंद सिंह जी की <strong>358</strong><strong>वीं जयंती (प्रकाशोत्सव)</strong> पर भी मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी गुरुद्वारा श्री नाड़ा साहिब पहुंचे थे। उस समय भी उन्होंने माथा टेका था और उन्हें संगत की ओर से सरोपा भेंट किया गया था। उन्होंने उस मौके पर कहा था कि सिख गुरुओं के उपदेश समाज को <strong>समानता</strong><strong>, </strong><strong>भाईचारे और न्याय</strong> की राह दिखाते हैं।

<strong>मुख्यमंत्री का संदेश</strong>

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि उनकी सरकार, जिसे उन्होंने <strong>डबल-इंजन सरकार</strong> बताया (केंद्र और राज्य सरकार का संयुक्त प्रयास), सिख गुरुओं की शिक्षाओं और आदर्शों से प्रेरणा लेती है। उनका मानना है कि यही प्रेरणा हरियाणा को विकास की दिशा में आगे बढ़ाने में मदद करेगी।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में सभी धर्मों के लोगों का सम्मान करना और उनके धार्मिक स्थलों की मर्यादा बनाए रखना सरकार की <strong>पहली प्राथमिकता</strong> है।

मुख्यमंत्री का यह दौरा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि इसने प्रदेश में <strong>धार्मिक सौहार्द</strong><strong>, </strong><strong>शांति और एकजुटता</strong> का संदेश भी दिया। गुरुद्वारा श्री नाड़ा साहिब में संगत के साथ की गई अरदास और वाहेगुरु जी से प्रदेशवासियों की खुशहाली की प्रार्थना ने इस मौके को और भी खास बना दिया।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[हरियाणा के मुख्यमंत्री <strong>नायब सिंह सैनी</strong> ने पंचकूला स्थित <strong>गुरुद्वारा श्री नाड़ा साहिब</strong> में पहुंचकर श्रद्धा और आदर भाव से माथा टेका। इस दौरान उन्होंने संगत के साथ मिलकर पवित्र <strong>अरदास</strong> की और प्रदेश तथा देशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरुद्वारा श्री नाड़ा साहिब के दर्शन हमेशा ही अलौकिक अनुभव कराते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा –

<em>“</em><em>श्रद्धा एवं आदर भाव के साथ गुरुद्वारा श्री नाड़ा साहिब जी के दर्शन सदैव अलौकिक होते हैं। आज पंचकूला स्थित इस ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब में संगत के साथ माथा टेका एवं पवित्र दिव्यता का अनुभव किया। सच्चे पातशाह वाहेगुरु जी की कृपा समस्त देश-प्रदेशवासियों पर बनी रहे एवं सभी का भला हो ऐसी अरदास की।</em><em>”</em>

इस अवसर पर गुरुद्वारा प्रबंधन की ओर से मुख्यमंत्री को <strong>सरोपा</strong> भेंट किया गया। इसे स्वीकार करते हुए सैनी ने कहा कि यह उनके लिए अत्यंत <strong>पावन और ऊर्जादायी</strong> है।

<strong>धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व</strong>

गुरुद्वारा श्री नाड़ा साहिब, पंचकूला का एक प्रमुख <strong>धार्मिक स्थल</strong> है, जहां बड़ी संख्या में संगत माथा टेकने पहुंचती है। माना जाता है कि यह स्थान <strong>गुरु गोबिंद सिंह जी</strong> की तपस्या और आशीर्वाद से जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि यह गुरुद्वारा सिख श्रद्धालुओं के साथ-साथ पूरे प्रदेश के लोगों के लिए आस्था का केंद्र है।

मुख्यमंत्री के इस दौरे का उद्देश्य न केवल धार्मिक श्रद्धा प्रकट करना था, बल्कि प्रदेश में <strong>भाईचारे और सद्भावना</strong> का संदेश देना भी रहा।

<strong>पहले भी कर चुके हैं माथा टेक</strong>

इससे पहले <strong>6 </strong><strong>जनवरी </strong><strong>2025</strong> को गुरु गोबिंद सिंह जी की <strong>358</strong><strong>वीं जयंती (प्रकाशोत्सव)</strong> पर भी मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी गुरुद्वारा श्री नाड़ा साहिब पहुंचे थे। उस समय भी उन्होंने माथा टेका था और उन्हें संगत की ओर से सरोपा भेंट किया गया था। उन्होंने उस मौके पर कहा था कि सिख गुरुओं के उपदेश समाज को <strong>समानता</strong><strong>, </strong><strong>भाईचारे और न्याय</strong> की राह दिखाते हैं।

<strong>मुख्यमंत्री का संदेश</strong>

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि उनकी सरकार, जिसे उन्होंने <strong>डबल-इंजन सरकार</strong> बताया (केंद्र और राज्य सरकार का संयुक्त प्रयास), सिख गुरुओं की शिक्षाओं और आदर्शों से प्रेरणा लेती है। उनका मानना है कि यही प्रेरणा हरियाणा को विकास की दिशा में आगे बढ़ाने में मदद करेगी।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में सभी धर्मों के लोगों का सम्मान करना और उनके धार्मिक स्थलों की मर्यादा बनाए रखना सरकार की <strong>पहली प्राथमिकता</strong> है।

मुख्यमंत्री का यह दौरा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि इसने प्रदेश में <strong>धार्मिक सौहार्द</strong><strong>, </strong><strong>शांति और एकजुटता</strong> का संदेश भी दिया। गुरुद्वारा श्री नाड़ा साहिब में संगत के साथ की गई अरदास और वाहेगुरु जी से प्रदेशवासियों की खुशहाली की प्रार्थना ने इस मौके को और भी खास बना दिया।]]></content:encoded>
					
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