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	<title>DelhiPolitics &#8211; Trends Topic</title>
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	<title>DelhiPolitics &#8211; Trends Topic</title>
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		<title>BJP के बिल पर Kejriwal का पलटवार – “झूठे केस करने वाले Ministers भी जाएं jail”</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 26 Aug 2025 06:30:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[देश की राजनीति इस समय उस बिल को लेकर गरमाई हुई है, जिसमें कहा गया है कि अगर कोई मुख्यमंत्री (CM) या मंत्री जेल चला जाता है तो उसे अपने पद से इस्तीफा देना होगा। इस पर आम आदमी पार्टी (AAP) ने भाजपा और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर सीधा हमला बोला है।
<h3>केजरीवाल का हमला</h3>
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अमित शाह को एक्स (Twitter) पर टैग करते हुए सवाल उठाया –
<ul>
 	<li>“अगर कोई मंत्री या मुख्यमंत्री झूठे केस में जेल जाता है और बाद में कोर्ट से निर्दोष निकलता है, तो उस पर झूठा केस करने वाले मंत्री को भी जेल क्यों न हो?”</li>
 	<li>“जो प्रधानमंत्री और मंत्री गंभीर मामलों के अपराधियों को अपनी पार्टी में शामिल कर उन्हें सीएम, डिप्टी सीएम और मंत्री बना देते हैं, क्या उन्हें भी अपने पद से इस्तीफा नहीं देना चाहिए? और उन्हें कितने साल जेल होनी चाहिए?”</li>
</ul>
केजरीवाल ने कहा कि उन्हें खुद राजनीतिक साज़िश के तहत जेल भेजा गया था, लेकिन फिर भी उन्होंने <strong>जेल से 160 </strong><strong>दिन तक दिल्ली की सरकार चलाई।</strong> उन्होंने दावा किया कि उस दौरान दिल्ली की जनता को किसी तरह की परेशानी नहीं हुई।

“कम से कम उस वक्त बिजली नहीं जाती थी, पानी सही मिलता था, मोहल्ला क्लिनिक और अस्पतालों में फ्री दवाई और टेस्ट मिलते थे, स्कूलों की फीस पर कंट्रोल था। लेकिन भाजपा ने 7 महीने में ही सबकुछ बर्बाद कर दिया।” – केजरीवाल
<h3>प्रियंका कक्कड़ का बयान</h3>
AAP की मुख्य प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भाजपा और अमित शाह पर जमकर हमला बोला।
<ul>
 	<li>उन्होंने कहा कि अमित शाह का यह बिल असल में विपक्षी नेताओं को तोड़ने और सरकारें गिराने का हथियार है।</li>
 	<li>“अगर कोई नेता भाजपा में शामिल हो जाए तो उसे मंत्री बना दिया जाएगा, और अगर शामिल न हो तो उसका पद छीन लिया जाएगा। यह लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है।” – प्रियंका</li>
</ul>
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि <strong>हिमंता बिस्वा शर्मा, </strong><strong>शुभेंदु अधिकारी, </strong><strong>प्रफुल पटेल, </strong><strong>छगन भुजबल, </strong><strong>हसन मुशर्रिफ</strong> जैसे नेताओं पर पहले भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप थे, लेकिन भाजपा में शामिल होते ही उनके केस रफ़ा-दफ़ा कर दिए गए और उन्हें सत्ता में बड़ा पद मिल गया।
<h3>“जेल वाली सरकार” बनाम “भाजपा सरकार”</h3>
प्रियंका कक्कड़ ने सीधा-सीधा तुलना करते हुए कहा –
<ul>
 	<li>“भाजपा राज में लोग घंटों बिजली कट से परेशान हैं, पानी की किल्लत है, नालों का पानी घरों में आ रहा है, स्कूलों की फीस बढ़ा दी गई है और अस्पतालों में इलाज नहीं मिल रहा। इससे तो जेल से चल रही केजरीवाल की सरकार कहीं बेहतर थी, क्योंकि तब जनता के काम सही से हो रहे थे।”</li>
</ul>
<h3>एजेंसियों पर निशाना</h3>
प्रियंका ने केंद्र की जांच एजेंसियों पर भी बड़ा आरोप लगाया।
<ul>
 	<li>उन्होंने कहा कि भाजपा AAP नेताओं पर झूठे केस लगाती है लेकिन कोर्ट में सबूत नहीं दे पाती।</li>
 	<li>सुप्रीम कोर्ट तक ने कहा कि <strong>ED “</strong><strong>क्रुक” </strong><strong>है और CBI “</strong><strong>बंद पिंजरे का तोता”</strong> है।</li>
 	<li>सत्येंद्र जैन केस में तो अब CBI ने क्लोज़र रिपोर्ट दाखिल करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।</li>
</ul>
<h3>नया सुझाव</h3>
प्रियंका कक्कड़ ने मांग की कि इस बिल में एक प्रावधान और होना चाहिए –

“अगर कोई नेता निर्दोष साबित हो जाए तो जिसने झूठा केस दर्ज किया था, उसे भी उतनी ही सज़ा होनी चाहिए, जितना निर्दोष नेता जेल में रहा।”

AAP का साफ आरोप है कि भाजपा यह बिल <strong>सरकारें गिराने का वैध तरीका</strong> बनाना चाहती है। वहीं भाजपा इसे भ्रष्टाचार रोकने का कदम बता रही है। अब असली सवाल यही है कि –
<strong>क्या यह बिल भ्रष्टाचार रोकने के लिए है या फिर विपक्ष को कमजोर करने के लिए?</strong>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[देश की राजनीति इस समय उस बिल को लेकर गरमाई हुई है, जिसमें कहा गया है कि अगर कोई मुख्यमंत्री (CM) या मंत्री जेल चला जाता है तो उसे अपने पद से इस्तीफा देना होगा। इस पर आम आदमी पार्टी (AAP) ने भाजपा और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर सीधा हमला बोला है।
<h3>केजरीवाल का हमला</h3>
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अमित शाह को एक्स (Twitter) पर टैग करते हुए सवाल उठाया –
<ul>
 	<li>“अगर कोई मंत्री या मुख्यमंत्री झूठे केस में जेल जाता है और बाद में कोर्ट से निर्दोष निकलता है, तो उस पर झूठा केस करने वाले मंत्री को भी जेल क्यों न हो?”</li>
 	<li>“जो प्रधानमंत्री और मंत्री गंभीर मामलों के अपराधियों को अपनी पार्टी में शामिल कर उन्हें सीएम, डिप्टी सीएम और मंत्री बना देते हैं, क्या उन्हें भी अपने पद से इस्तीफा नहीं देना चाहिए? और उन्हें कितने साल जेल होनी चाहिए?”</li>
</ul>
केजरीवाल ने कहा कि उन्हें खुद राजनीतिक साज़िश के तहत जेल भेजा गया था, लेकिन फिर भी उन्होंने <strong>जेल से 160 </strong><strong>दिन तक दिल्ली की सरकार चलाई।</strong> उन्होंने दावा किया कि उस दौरान दिल्ली की जनता को किसी तरह की परेशानी नहीं हुई।

“कम से कम उस वक्त बिजली नहीं जाती थी, पानी सही मिलता था, मोहल्ला क्लिनिक और अस्पतालों में फ्री दवाई और टेस्ट मिलते थे, स्कूलों की फीस पर कंट्रोल था। लेकिन भाजपा ने 7 महीने में ही सबकुछ बर्बाद कर दिया।” – केजरीवाल
<h3>प्रियंका कक्कड़ का बयान</h3>
AAP की मुख्य प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भाजपा और अमित शाह पर जमकर हमला बोला।
<ul>
 	<li>उन्होंने कहा कि अमित शाह का यह बिल असल में विपक्षी नेताओं को तोड़ने और सरकारें गिराने का हथियार है।</li>
 	<li>“अगर कोई नेता भाजपा में शामिल हो जाए तो उसे मंत्री बना दिया जाएगा, और अगर शामिल न हो तो उसका पद छीन लिया जाएगा। यह लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है।” – प्रियंका</li>
</ul>
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि <strong>हिमंता बिस्वा शर्मा, </strong><strong>शुभेंदु अधिकारी, </strong><strong>प्रफुल पटेल, </strong><strong>छगन भुजबल, </strong><strong>हसन मुशर्रिफ</strong> जैसे नेताओं पर पहले भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप थे, लेकिन भाजपा में शामिल होते ही उनके केस रफ़ा-दफ़ा कर दिए गए और उन्हें सत्ता में बड़ा पद मिल गया।
<h3>“जेल वाली सरकार” बनाम “भाजपा सरकार”</h3>
प्रियंका कक्कड़ ने सीधा-सीधा तुलना करते हुए कहा –
<ul>
 	<li>“भाजपा राज में लोग घंटों बिजली कट से परेशान हैं, पानी की किल्लत है, नालों का पानी घरों में आ रहा है, स्कूलों की फीस बढ़ा दी गई है और अस्पतालों में इलाज नहीं मिल रहा। इससे तो जेल से चल रही केजरीवाल की सरकार कहीं बेहतर थी, क्योंकि तब जनता के काम सही से हो रहे थे।”</li>
</ul>
<h3>एजेंसियों पर निशाना</h3>
प्रियंका ने केंद्र की जांच एजेंसियों पर भी बड़ा आरोप लगाया।
<ul>
 	<li>उन्होंने कहा कि भाजपा AAP नेताओं पर झूठे केस लगाती है लेकिन कोर्ट में सबूत नहीं दे पाती।</li>
 	<li>सुप्रीम कोर्ट तक ने कहा कि <strong>ED “</strong><strong>क्रुक” </strong><strong>है और CBI “</strong><strong>बंद पिंजरे का तोता”</strong> है।</li>
 	<li>सत्येंद्र जैन केस में तो अब CBI ने क्लोज़र रिपोर्ट दाखिल करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।</li>
</ul>
<h3>नया सुझाव</h3>
प्रियंका कक्कड़ ने मांग की कि इस बिल में एक प्रावधान और होना चाहिए –

“अगर कोई नेता निर्दोष साबित हो जाए तो जिसने झूठा केस दर्ज किया था, उसे भी उतनी ही सज़ा होनी चाहिए, जितना निर्दोष नेता जेल में रहा।”

AAP का साफ आरोप है कि भाजपा यह बिल <strong>सरकारें गिराने का वैध तरीका</strong> बनाना चाहती है। वहीं भाजपा इसे भ्रष्टाचार रोकने का कदम बता रही है। अब असली सवाल यही है कि –
<strong>क्या यह बिल भ्रष्टाचार रोकने के लिए है या फिर विपक्ष को कमजोर करने के लिए?</strong>]]></content:encoded>
					
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		<title>Delhi में Dengue-Malaria का कहर, AAP-BJP में ठनी – लोग बोले, “Blame Game बंद करो, Bring Solutions”</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 02 Aug 2025 05:23:08 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिल्ली में डेंगू और मलेरिया के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, और इसके साथ ही सियासी संग्राम भी छिड़ गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) और बीजेपी-शासित नगर निगम (MCD) एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। वहीं, हेल्थ एक्सपर्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि अगर तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और बिगड़ सकते हैं।

<strong>दिल्ली में अब तक आंकड़े क्या कहते हैं?</strong>
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस मानसून सीज़न में दिल्ली में अब तक <strong>277 </strong><strong>डेंगू के केस</strong>, <strong>124 </strong><strong>मलेरिया के केस</strong> और <strong>18 </strong><strong>चिकनगुनिया के केस</strong> सामने आ चुके हैं। मलेरिया के मामलों ने पिछले 10 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जिससे चिंता और बढ़ गई है।

<strong>AAP </strong><strong>का वार </strong><strong>– “10 </strong><strong>साल का रिकॉर्ड टूटा</strong><strong>, BJP </strong><strong>जिम्मेदार</strong><strong>”</strong>

AAP नेता <strong>सौरभ भारद्वाज</strong> ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बीजेपी और MCD पर सीधा हमला बोला।
उन्होंने कहा, <em>“</em><em>मलेरिया के केसों ने 10 </em><em>साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। ये सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, </em><em>बल्कि ये दिखाता है कि शहर का मैनेजमेंट कितना खराब है।”</em>

भारद्वाज ने <strong>कनॉट प्लेस, </strong><strong>सदर बाजार और जनपथ</strong> जैसी जगहों पर जलभराव की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा,
<em>“BJP </em><em>मंत्री बार-बार कहते हैं कि पानी भरने की समस्या नहीं है, </em><em>लेकिन बढ़ते मलेरिया के आंकड़े कुछ और ही कहानी बता रहे हैं।”</em>

AAP ने ये भी घोषणा की है कि <strong>4 </strong><strong>अगस्त को विधानसभा सत्र में</strong> ये मुद्दा जोर-शोर से उठाया जाएगा।

<strong>मेयर का पलटवार </strong><strong>– “AAP </strong><strong>ने भी कुछ नहीं किया</strong><strong>”</strong>

दिल्ली के मेयर <strong>सरदार राजा इकबाल सिंह</strong> ने MCD की ओर से सफाई देते हुए कहा कि निगम लगातार काम कर रहा है और AAP सिर्फ राजनीति कर रही है।

उन्होंने पलटवार करते हुए कहा,
<em>“AAP </em><em>ने भी ढाई साल MCD </em><em>चलाई थी। क्या तब मच्छरों का खात्मा कर दिया था? </em><em>उस वक्त तो उन्होंने डेंगू-मलेरिया के पूरे आंकड़े तक जारी नहीं किए थे।”</em>

मेयर ने बताया कि MCD ने अब तक <strong>49,718 </strong><strong>जगहों पर स्प्रे किया है</strong>, <strong>8.2 </strong><strong>लाख घरों का निरीक्षण किया है</strong> और <strong>5,600 </strong><strong>से ज्यादा नोटिस</strong> मच्छर पैदा करने वाली लापरवाहियों पर जारी किए गए हैं।
उनके मुताबिक, <em>“</em><em>हम वार फुटिंग पर काम कर रहे हैं। AAP </em><em>के आरोप सिर्फ एक राजनीतिक ड्रामा हैं, </em><em>असलियत ये है कि वो खुद स्वास्थ्य बैठकों में सक्रिय नहीं हैं।”</em>

<strong>पब्लिक की आवाज </strong><strong>– “</strong><strong>हमारे लिए सफाई और इलाज जरूरी</strong><strong>, </strong><strong>राजनीति नहीं</strong><strong>”</strong>

जहां एक तरफ दोनों पार्टियां blame game में लगी हैं, वहीं दिल्ली के लोग परेशान हैं।

<strong>पश्चिमी दिल्ली की एक निवासी</strong> ने कहा,
<em>“</em><em>हमें रोज़-रोज़ का झगड़ा नहीं सुनना, </em><em>हमें साफ सड़कें चाहिएं, </em><em>नियमित स्प्रे होना चाहिए और मोहल्लों में हेल्थ कैंप लगने चाहिएं।”</em>

<strong>अब आगे क्या</strong><strong>?</strong>

डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों के मामलों में बढ़ोतरी ने साफ कर दिया है कि <strong>ग्राउंड पर और ज्यादा काम करने की जरूरत है।</strong>
<ul>
 	<li><strong>नियमित सफाई</strong>,</li>
 	<li><strong>जलभराव रोकने की तैयारी</strong>,</li>
 	<li><strong>सोसायटी और कॉलोनियों में हेल्थ कैंप</strong>,</li>
 	<li>और <strong>समय पर दवा का छिड़काव</strong> – यही वो कदम हैं, जिनसे हालात सुधर सकते हैं।</li>
</ul>
फिलहाल दिल्ली में ये जंग सिर्फ <strong>बीमारियों से नहीं</strong>, बल्कि <strong>राजनीति और सिस्टम की सुस्ती से भी है।</strong>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[दिल्ली में डेंगू और मलेरिया के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, और इसके साथ ही सियासी संग्राम भी छिड़ गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) और बीजेपी-शासित नगर निगम (MCD) एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। वहीं, हेल्थ एक्सपर्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि अगर तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और बिगड़ सकते हैं।

<strong>दिल्ली में अब तक आंकड़े क्या कहते हैं?</strong>
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस मानसून सीज़न में दिल्ली में अब तक <strong>277 </strong><strong>डेंगू के केस</strong>, <strong>124 </strong><strong>मलेरिया के केस</strong> और <strong>18 </strong><strong>चिकनगुनिया के केस</strong> सामने आ चुके हैं। मलेरिया के मामलों ने पिछले 10 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जिससे चिंता और बढ़ गई है।

<strong>AAP </strong><strong>का वार </strong><strong>– “10 </strong><strong>साल का रिकॉर्ड टूटा</strong><strong>, BJP </strong><strong>जिम्मेदार</strong><strong>”</strong>

AAP नेता <strong>सौरभ भारद्वाज</strong> ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बीजेपी और MCD पर सीधा हमला बोला।
उन्होंने कहा, <em>“</em><em>मलेरिया के केसों ने 10 </em><em>साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। ये सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, </em><em>बल्कि ये दिखाता है कि शहर का मैनेजमेंट कितना खराब है।”</em>

भारद्वाज ने <strong>कनॉट प्लेस, </strong><strong>सदर बाजार और जनपथ</strong> जैसी जगहों पर जलभराव की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा,
<em>“BJP </em><em>मंत्री बार-बार कहते हैं कि पानी भरने की समस्या नहीं है, </em><em>लेकिन बढ़ते मलेरिया के आंकड़े कुछ और ही कहानी बता रहे हैं।”</em>

AAP ने ये भी घोषणा की है कि <strong>4 </strong><strong>अगस्त को विधानसभा सत्र में</strong> ये मुद्दा जोर-शोर से उठाया जाएगा।

<strong>मेयर का पलटवार </strong><strong>– “AAP </strong><strong>ने भी कुछ नहीं किया</strong><strong>”</strong>

दिल्ली के मेयर <strong>सरदार राजा इकबाल सिंह</strong> ने MCD की ओर से सफाई देते हुए कहा कि निगम लगातार काम कर रहा है और AAP सिर्फ राजनीति कर रही है।

उन्होंने पलटवार करते हुए कहा,
<em>“AAP </em><em>ने भी ढाई साल MCD </em><em>चलाई थी। क्या तब मच्छरों का खात्मा कर दिया था? </em><em>उस वक्त तो उन्होंने डेंगू-मलेरिया के पूरे आंकड़े तक जारी नहीं किए थे।”</em>

मेयर ने बताया कि MCD ने अब तक <strong>49,718 </strong><strong>जगहों पर स्प्रे किया है</strong>, <strong>8.2 </strong><strong>लाख घरों का निरीक्षण किया है</strong> और <strong>5,600 </strong><strong>से ज्यादा नोटिस</strong> मच्छर पैदा करने वाली लापरवाहियों पर जारी किए गए हैं।
उनके मुताबिक, <em>“</em><em>हम वार फुटिंग पर काम कर रहे हैं। AAP </em><em>के आरोप सिर्फ एक राजनीतिक ड्रामा हैं, </em><em>असलियत ये है कि वो खुद स्वास्थ्य बैठकों में सक्रिय नहीं हैं।”</em>

<strong>पब्लिक की आवाज </strong><strong>– “</strong><strong>हमारे लिए सफाई और इलाज जरूरी</strong><strong>, </strong><strong>राजनीति नहीं</strong><strong>”</strong>

जहां एक तरफ दोनों पार्टियां blame game में लगी हैं, वहीं दिल्ली के लोग परेशान हैं।

<strong>पश्चिमी दिल्ली की एक निवासी</strong> ने कहा,
<em>“</em><em>हमें रोज़-रोज़ का झगड़ा नहीं सुनना, </em><em>हमें साफ सड़कें चाहिएं, </em><em>नियमित स्प्रे होना चाहिए और मोहल्लों में हेल्थ कैंप लगने चाहिएं।”</em>

<strong>अब आगे क्या</strong><strong>?</strong>

डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों के मामलों में बढ़ोतरी ने साफ कर दिया है कि <strong>ग्राउंड पर और ज्यादा काम करने की जरूरत है।</strong>
<ul>
 	<li><strong>नियमित सफाई</strong>,</li>
 	<li><strong>जलभराव रोकने की तैयारी</strong>,</li>
 	<li><strong>सोसायटी और कॉलोनियों में हेल्थ कैंप</strong>,</li>
 	<li>और <strong>समय पर दवा का छिड़काव</strong> – यही वो कदम हैं, जिनसे हालात सुधर सकते हैं।</li>
</ul>
फिलहाल दिल्ली में ये जंग सिर्फ <strong>बीमारियों से नहीं</strong>, बल्कि <strong>राजनीति और सिस्टम की सुस्ती से भी है।</strong>]]></content:encoded>
					
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		<item>
		<title>INDIA Alliance से बाहर हुई AAP: Sanjay Singh बोले- Congress की वजह से लिया Decision</title>
		<link>https://trendstopic.in/aap-exits-india-alliance-sanjay-singh-says-congress-to-blame-for-the-decision/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 19 Jul 2025 07:06:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आम आदमी पार्टी (AAP) ने शुक्रवार को बड़ा ऐलान करते हुए खुद को <strong>INDIA </strong><strong>गठबंधन (</strong><strong>Indian National Developmental Inclusive Alliance)</strong> से अलग कर लिया है। पार्टी के राज्यसभा सांसद <strong>संजय सिंह</strong> ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी और कहा कि <strong>INDIA </strong><strong>गठबंधन न तो एकजुट रह पाया</strong><strong>, </strong><strong>न ही अपने मकसद को आगे बढ़ा पाया।</strong>

यह गठबंधन करीब दो साल पहले, <strong>जुलाई </strong><strong>2023</strong> में, भाजपा (BJP) के नेतृत्व वाले NDA को 2024 लोकसभा चुनाव में टक्कर देने के लिए बनाया गया था। लेकिन चुनाव के बाद अब स्थितियां बदल गई हैं।

<strong>कांग्रेस पर लगाया आरोप</strong>

संजय सिंह ने कहा कि <strong>कांग्रेस पार्टी की वजह से</strong> AAP को यह कदम उठाना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने विपक्षी दलों को एकजुट रखने की कोई कोशिश नहीं की।
उन्होंने कहा, <em>"INDIA </em><em>गठबंधन ने चुनाव के बाद एक भी बैठक नहीं की। सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते कांग्रेस को बाकी दलों को साथ लेकर चलना था</em><em>, </em><em>लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।"</em>

<strong>AAP </strong><strong>अब अकेले लड़ेगी चुनाव</strong>

संजय सिंह ने कहा कि <strong>AAP </strong><strong>अब आगामी बिहार चुनाव समेत सभी चुनाव अकेले लड़ेगी।</strong> उन्होंने यह भी साफ किया कि भले ही अब पार्टी INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं है, लेकिन <strong>संसद में जनता के मुद्दे मजबूती से उठाएगी</strong> और सरकार का विरोध तब करेगी जब वो गलत होगी।
उन्होंने कहा, <em>"</em><em>हम हमेशा एक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाते आए हैं और आगे भी निभाएंगे। </em><em>INDIA </em><em>गठबंधन चाहे तो अपनी मीटिंग करे और जैसे चाहे फैसले ले। </em><em>AAP </em><em>अब इसका हिस्सा नहीं है।"</em>

<strong>कांग्रेस की प्रतिक्रिया</strong>

कांग्रेस नेता और पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता <strong>प्रताप सिंह बाजवा</strong> ने कहा कि AAP का बाहर होना ही INDIA गठबंधन के लिए अच्छा है। उन्होंने कहा, <em>"</em><em>अब किसी तरह का कन्फ्यूजन नहीं रहेगा। राहुल गांधी ही इस लड़ाई का चेहरा हैं जो संविधान</em><em>, </em><em>लोकतंत्र और सेक्युलरिज़्म को बचाने के लिए लड़ रहे हैं। </em><em>AAP </em><em>ने कभी भाजपा से नहीं</em><em>, </em><em>बल्कि कांग्रेस से ही लड़ाई की और विपक्ष को कमजोर किया।"</em>

<strong>राजनीतिक विश्लेषक की राय</strong>

दिल्ली यूनिवर्सिटी के रामजस कॉलेज में राजनीतिक विज्ञान के प्रोफेसर <strong>तनवीर ऐजाज़</strong> का कहना है कि AAP का गठबंधन से बाहर होना इस बात को दर्शाता है कि विपक्षी पार्टियों के बीच <strong>भीतरी खींचतान और अलग-अलग महत्वाकांक्षाएं</strong> हैं।
उन्होंने कहा, <em>"AAP </em><em>की यह रणनीति है कि वह उन राज्यों में अपनी पहचान और पोजिशन मजबूत बनाए जहां वो खुद को मुख्य पार्टी मानती है। इसके लिए उसे किसी गठबंधन की जरूरत नहीं महसूस हो रही।"</em>

<strong>पहले साथ</strong><strong>, </strong><strong>फिर अलग</strong>

बता दें कि 2024 के लोकसभा चुनाव में <strong>AAP </strong><strong>और कांग्रेस ने मिलकर दिल्ली</strong><strong>, </strong><strong>गुजरात</strong><strong>, </strong><strong>हरियाणा</strong><strong>, </strong><strong>गोवा और चंडीगढ़ में चुनाव लड़ा था</strong>, लेकिन फरवरी 2025 में हुए <strong>दिल्ली विधानसभा चुनाव</strong> में दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ीं और एक-दूसरे पर जमकर हमला भी किया।

AAP के इस फैसले से विपक्षी गठबंधन की एकता पर सवाल खड़े हो गए हैं। जहां एक ओर AAP अपनी अलग पहचान बनाए रखने की कोशिश कर रही है, वहीं कांग्रेस का दावा है कि इससे गठबंधन और मजबूत होगा। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि AAP की यह रणनीति उसे कितना फायदा पहुंचाती है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[आम आदमी पार्टी (AAP) ने शुक्रवार को बड़ा ऐलान करते हुए खुद को <strong>INDIA </strong><strong>गठबंधन (</strong><strong>Indian National Developmental Inclusive Alliance)</strong> से अलग कर लिया है। पार्टी के राज्यसभा सांसद <strong>संजय सिंह</strong> ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी और कहा कि <strong>INDIA </strong><strong>गठबंधन न तो एकजुट रह पाया</strong><strong>, </strong><strong>न ही अपने मकसद को आगे बढ़ा पाया।</strong>

यह गठबंधन करीब दो साल पहले, <strong>जुलाई </strong><strong>2023</strong> में, भाजपा (BJP) के नेतृत्व वाले NDA को 2024 लोकसभा चुनाव में टक्कर देने के लिए बनाया गया था। लेकिन चुनाव के बाद अब स्थितियां बदल गई हैं।

<strong>कांग्रेस पर लगाया आरोप</strong>

संजय सिंह ने कहा कि <strong>कांग्रेस पार्टी की वजह से</strong> AAP को यह कदम उठाना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने विपक्षी दलों को एकजुट रखने की कोई कोशिश नहीं की।
उन्होंने कहा, <em>"INDIA </em><em>गठबंधन ने चुनाव के बाद एक भी बैठक नहीं की। सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते कांग्रेस को बाकी दलों को साथ लेकर चलना था</em><em>, </em><em>लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।"</em>

<strong>AAP </strong><strong>अब अकेले लड़ेगी चुनाव</strong>

संजय सिंह ने कहा कि <strong>AAP </strong><strong>अब आगामी बिहार चुनाव समेत सभी चुनाव अकेले लड़ेगी।</strong> उन्होंने यह भी साफ किया कि भले ही अब पार्टी INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं है, लेकिन <strong>संसद में जनता के मुद्दे मजबूती से उठाएगी</strong> और सरकार का विरोध तब करेगी जब वो गलत होगी।
उन्होंने कहा, <em>"</em><em>हम हमेशा एक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाते आए हैं और आगे भी निभाएंगे। </em><em>INDIA </em><em>गठबंधन चाहे तो अपनी मीटिंग करे और जैसे चाहे फैसले ले। </em><em>AAP </em><em>अब इसका हिस्सा नहीं है।"</em>

<strong>कांग्रेस की प्रतिक्रिया</strong>

कांग्रेस नेता और पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता <strong>प्रताप सिंह बाजवा</strong> ने कहा कि AAP का बाहर होना ही INDIA गठबंधन के लिए अच्छा है। उन्होंने कहा, <em>"</em><em>अब किसी तरह का कन्फ्यूजन नहीं रहेगा। राहुल गांधी ही इस लड़ाई का चेहरा हैं जो संविधान</em><em>, </em><em>लोकतंत्र और सेक्युलरिज़्म को बचाने के लिए लड़ रहे हैं। </em><em>AAP </em><em>ने कभी भाजपा से नहीं</em><em>, </em><em>बल्कि कांग्रेस से ही लड़ाई की और विपक्ष को कमजोर किया।"</em>

<strong>राजनीतिक विश्लेषक की राय</strong>

दिल्ली यूनिवर्सिटी के रामजस कॉलेज में राजनीतिक विज्ञान के प्रोफेसर <strong>तनवीर ऐजाज़</strong> का कहना है कि AAP का गठबंधन से बाहर होना इस बात को दर्शाता है कि विपक्षी पार्टियों के बीच <strong>भीतरी खींचतान और अलग-अलग महत्वाकांक्षाएं</strong> हैं।
उन्होंने कहा, <em>"AAP </em><em>की यह रणनीति है कि वह उन राज्यों में अपनी पहचान और पोजिशन मजबूत बनाए जहां वो खुद को मुख्य पार्टी मानती है। इसके लिए उसे किसी गठबंधन की जरूरत नहीं महसूस हो रही।"</em>

<strong>पहले साथ</strong><strong>, </strong><strong>फिर अलग</strong>

बता दें कि 2024 के लोकसभा चुनाव में <strong>AAP </strong><strong>और कांग्रेस ने मिलकर दिल्ली</strong><strong>, </strong><strong>गुजरात</strong><strong>, </strong><strong>हरियाणा</strong><strong>, </strong><strong>गोवा और चंडीगढ़ में चुनाव लड़ा था</strong>, लेकिन फरवरी 2025 में हुए <strong>दिल्ली विधानसभा चुनाव</strong> में दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ीं और एक-दूसरे पर जमकर हमला भी किया।

AAP के इस फैसले से विपक्षी गठबंधन की एकता पर सवाल खड़े हो गए हैं। जहां एक ओर AAP अपनी अलग पहचान बनाए रखने की कोशिश कर रही है, वहीं कांग्रेस का दावा है कि इससे गठबंधन और मजबूत होगा। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि AAP की यह रणनीति उसे कितना फायदा पहुंचाती है।]]></content:encoded>
					
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