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	<title>CropResidueManagement &#8211; Trends Topic</title>
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	<title>CropResidueManagement &#8211; Trends Topic</title>
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	<item>
		<title>Mann सरकार की Science-Based schemes से Stubble-Burning Pollution में 94% गिरावट — ‘Punjab Model’ को Centre ने किया Approved, अब पूरे देश में होगा लागू</title>
		<link>https://trendstopic.in/mann-governments-science-based-initiatives-stubble-burning-pollution-drops-by-94-punjab-model-approved-by-the-centre-now-to-be-implemented-nationwide/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 03 Dec 2025 04:59:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चंडीगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[Agriculture]]></category>
		<category><![CDATA[CropResidueManagement]]></category>
		<category><![CDATA[Environment]]></category>
		<category><![CDATA[Farmers]]></category>
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		<category><![CDATA[StubbleSolution]]></category>
		<category><![CDATA[SustainableFarming]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब सरकार ने पराली जलाने की समस्या को लगभग खत्म कर देने जैसा बड़ा काम कर दिखाया है। इस बार पंजाब में पराली जलाने के मामले <strong>94% </strong><strong>तक कम</strong> हो गए हैं। 2016 में जहाँ <strong>80,879 </strong><strong>मामले</strong> दर्ज हुए थे, वहीं इस साल यानी 2025 में यह संख्या घटकर सिर्फ <strong>5,114 </strong><strong>रह गई</strong>। यह पिछले साल 2024 की तुलना में भी <strong>53% </strong><strong>कम</strong> है।

यह उपलब्धि केवल पंजाब के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक मजबूत मैसेज है कि अगर सरकार और किसान मिलकर काम करें, तो बड़ी से बड़ी पर्यावरण समस्या का हल निकाला जा सकता है। यही वजह है कि केंद्रीय कृषि मंत्री <strong>शिवराज सिंह चौहान</strong> ने इस मॉडल को पूरे देश में लागू करने की घोषणा की है। इसे अब <strong>‘</strong><strong>पंजाब मॉडल</strong><strong>’</strong> कहा जा रहा है।

<strong>सफलता का फॉर्मूला: सहयोग + विज्ञान + किसान-प्रथम सोच</strong>

मुख्यमंत्री <strong>भगवंत मान</strong> के नेतृत्व में सरकार ने ऐसा मॉडल अपनाया जिसमें किसानों को सज़ा देने के बजाय उन्हें समाधान, मशीनरी और पूरी मदद दी गई। किसानों की जरूरतों को समझकर, जमीन पर काम करने वाले अधिकारियों और वैज्ञानिकों को साथ लेकर एक सिस्टम तैयार किया गया।
<ol>
 	<li><strong>आधुनिक मशीनरी ने खेल बदला </strong><strong>— </strong><strong>भारी सब्सिडी से किसानों का फायदा</strong></li>
</ol>
2018-19 में शुरू हुए <strong>CRM (Crop Residue Management) </strong><strong>कार्यक्रम</strong> के तहत:
<ul>
 	<li>शुरुआत में सिर्फ <strong>25,000 </strong><strong>मशीनें</strong> थीं</li>
 	<li>आज (2025 तक) बढ़कर <strong>1.48 </strong><strong>लाख से ज़्यादा </strong><strong>CRM </strong><strong>मशीनें</strong> हो चुकी हैं</li>
 	<li>इनमें <strong>66,000 Super Seeders</strong> भी शामिल हैं</li>
</ul>
सरकार ने छोटे किसानों को मशीनों पर <strong>80% </strong><strong>तक सब्सिडी</strong> दी (पहले 50% थी)। हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, मल्चर, एम.बी. हल, बेलर जैसी मशीनों ने खेत में ही पराली को मिट्टी में मिलाना आसान बना दिया। इससे किसान बिना आग लगाए गेहूँ की बुवाई कर पा रहे हैं।

कृषि विभाग के निदेशक <strong>जसवंत सिंह</strong> के मुताबिक, मशीनें बढ़ने के बाद ही ग्राउंड लेवल पर बड़ा बदलाव दिखना शुरू हुआ।
<ol start="2">
 	<li><strong>एक्स-सीटू सॉल्यूशन </strong><strong>— </strong><strong>पराली से अब कमाई</strong></li>
</ol>
पहले पराली किसानों के लिए बेकार थी, इसलिए आग लगा देते थे। लेकिन अब सरकार ने पराली को बेचने और उसे उद्योगों तक पहुंचाने का सिस्टम बना दिया है।
<ul>
 	<li>बायोमास पावर प्लांट्स</li>
 	<li>पेपर मिल्स</li>
 	<li>बायो-CNG प्लांट्स</li>
 	<li>पैडी स्ट्रॉ पैलेट यूनिट्स</li>
</ul>
ये सभी सीधे किसानों से पराली खरीद रहे हैं।

पिछले साल उद्योगों ने <strong>27.6 </strong><strong>लाख टन पराली</strong> खरीदी थी।
इस साल यह संख्या बढ़कर <strong>75 </strong><strong>लाख टन (</strong><strong>7.50 </strong><strong>मिलियन टन)</strong> हो गई है।

यह सिस्टम एक तरह की <strong>Circular Economy</strong> बन गया है, जिससे किसानों को <strong>extra income</strong> भी मिल रही है।
<ol start="3">
 	<li><strong>गाँव-गाँव जागरूकता </strong><strong>— Door-to-Door Campaign </strong><strong>ने बदल दिया माइंडसेट</strong></li>
</ol>
सरकार ने सिर्फ मशीनें ही नहीं दीं—बल्कि किसानों की सोच बदलने के लिए बड़े स्तर पर campaigns चलाए।
<ul>
 	<li>गाँव स्तर पर CRM कमेटियाँ</li>
 	<li>Door-to-door outreach</li>
 	<li>मिट्टी की सेहत पर awareness</li>
 	<li>स्कूल–कॉलेज की भागीदारी</li>
 	<li>जिला प्रशासन + पुलिस + कृषि अधिकारियों की संयुक्त कार्रवाई</li>
</ul>
इन सब प्रयासों ने किसानों को समझाया कि पराली जलाने से मिट्टी की quality खराब होती है और long-term productivity गिरती है।

आज किसान खुद कह रहे हैं कि पराली जलाना उनके लिए नुकसानदायक है।
<ol start="4">
 	<li><strong> Satellite Monitoring </strong><strong>से कड़ी नज़र</strong><strong>, </strong><strong>लेकिन दंड नहीं </strong><strong>— Support </strong><strong>पर फोकस</strong></li>
</ol>
पंजाब Pollution Control Board और कृषि विभाग ने NASA और PRSC की satellite इमेजरी से लगातार निगरानी की।

लेकिन सरकार ने एक बात साफ रखी—
<em>किसानों को डराकर नहीं</em><em>, </em><em>समझाकर समाधान देना है।</em>

इसलिए FIR सिर्फ उन्हीं पर दर्ज हुई जो बार-बार, जानबूझकर नियम तोड़ते रहे। ऐसे मामलों की संख्या <strong>1963</strong> रही।

बाकियों को हर तरह की सहायता दी गई।
<ol start="5">
 	<li><strong>सरकार की आगे की योजना </strong><strong>— </strong><strong>मिट्टी की सेहत और मशीनरी की आसान उपलब्धता</strong></li>
</ol>
जसवंत सिंह ने कहा कि अब सरकार का फोकस है:
<ul>
 	<li>मिट्टी की quality बढ़ाना</li>
 	<li>CRM मशीनें हर दूर-दराज गांव तक पहुँचाना</li>
 	<li>पराली को पूरी तरह resource में बदलना</li>
</ul>
यह मॉडल अब पूरे भारत के लिए inspiration बन गया है।

<strong>नतीजा: भारत का सबसे सफल </strong><strong>Anti-Pollution </strong><strong>मॉडल</strong>

पंजाब सरकार ने साबित कर दिया है कि किसान जब सरकार के partner बनते हैं, तो प्रदूषण जैसी बड़ी समस्या का समाधान भी आसान हो जाता है।

केंद्र सरकार द्वारा इसे देश में लागू किए जाने का मतलब है कि पंजाब का यह प्रयास पूरे भारत के लिए एक बड़ा उदाहरण बन चुका है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब सरकार ने पराली जलाने की समस्या को लगभग खत्म कर देने जैसा बड़ा काम कर दिखाया है। इस बार पंजाब में पराली जलाने के मामले <strong>94% </strong><strong>तक कम</strong> हो गए हैं। 2016 में जहाँ <strong>80,879 </strong><strong>मामले</strong> दर्ज हुए थे, वहीं इस साल यानी 2025 में यह संख्या घटकर सिर्फ <strong>5,114 </strong><strong>रह गई</strong>। यह पिछले साल 2024 की तुलना में भी <strong>53% </strong><strong>कम</strong> है।

यह उपलब्धि केवल पंजाब के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक मजबूत मैसेज है कि अगर सरकार और किसान मिलकर काम करें, तो बड़ी से बड़ी पर्यावरण समस्या का हल निकाला जा सकता है। यही वजह है कि केंद्रीय कृषि मंत्री <strong>शिवराज सिंह चौहान</strong> ने इस मॉडल को पूरे देश में लागू करने की घोषणा की है। इसे अब <strong>‘</strong><strong>पंजाब मॉडल</strong><strong>’</strong> कहा जा रहा है।

<strong>सफलता का फॉर्मूला: सहयोग + विज्ञान + किसान-प्रथम सोच</strong>

मुख्यमंत्री <strong>भगवंत मान</strong> के नेतृत्व में सरकार ने ऐसा मॉडल अपनाया जिसमें किसानों को सज़ा देने के बजाय उन्हें समाधान, मशीनरी और पूरी मदद दी गई। किसानों की जरूरतों को समझकर, जमीन पर काम करने वाले अधिकारियों और वैज्ञानिकों को साथ लेकर एक सिस्टम तैयार किया गया।
<ol>
 	<li><strong>आधुनिक मशीनरी ने खेल बदला </strong><strong>— </strong><strong>भारी सब्सिडी से किसानों का फायदा</strong></li>
</ol>
2018-19 में शुरू हुए <strong>CRM (Crop Residue Management) </strong><strong>कार्यक्रम</strong> के तहत:
<ul>
 	<li>शुरुआत में सिर्फ <strong>25,000 </strong><strong>मशीनें</strong> थीं</li>
 	<li>आज (2025 तक) बढ़कर <strong>1.48 </strong><strong>लाख से ज़्यादा </strong><strong>CRM </strong><strong>मशीनें</strong> हो चुकी हैं</li>
 	<li>इनमें <strong>66,000 Super Seeders</strong> भी शामिल हैं</li>
</ul>
सरकार ने छोटे किसानों को मशीनों पर <strong>80% </strong><strong>तक सब्सिडी</strong> दी (पहले 50% थी)। हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, मल्चर, एम.बी. हल, बेलर जैसी मशीनों ने खेत में ही पराली को मिट्टी में मिलाना आसान बना दिया। इससे किसान बिना आग लगाए गेहूँ की बुवाई कर पा रहे हैं।

कृषि विभाग के निदेशक <strong>जसवंत सिंह</strong> के मुताबिक, मशीनें बढ़ने के बाद ही ग्राउंड लेवल पर बड़ा बदलाव दिखना शुरू हुआ।
<ol start="2">
 	<li><strong>एक्स-सीटू सॉल्यूशन </strong><strong>— </strong><strong>पराली से अब कमाई</strong></li>
</ol>
पहले पराली किसानों के लिए बेकार थी, इसलिए आग लगा देते थे। लेकिन अब सरकार ने पराली को बेचने और उसे उद्योगों तक पहुंचाने का सिस्टम बना दिया है।
<ul>
 	<li>बायोमास पावर प्लांट्स</li>
 	<li>पेपर मिल्स</li>
 	<li>बायो-CNG प्लांट्स</li>
 	<li>पैडी स्ट्रॉ पैलेट यूनिट्स</li>
</ul>
ये सभी सीधे किसानों से पराली खरीद रहे हैं।

पिछले साल उद्योगों ने <strong>27.6 </strong><strong>लाख टन पराली</strong> खरीदी थी।
इस साल यह संख्या बढ़कर <strong>75 </strong><strong>लाख टन (</strong><strong>7.50 </strong><strong>मिलियन टन)</strong> हो गई है।

यह सिस्टम एक तरह की <strong>Circular Economy</strong> बन गया है, जिससे किसानों को <strong>extra income</strong> भी मिल रही है।
<ol start="3">
 	<li><strong>गाँव-गाँव जागरूकता </strong><strong>— Door-to-Door Campaign </strong><strong>ने बदल दिया माइंडसेट</strong></li>
</ol>
सरकार ने सिर्फ मशीनें ही नहीं दीं—बल्कि किसानों की सोच बदलने के लिए बड़े स्तर पर campaigns चलाए।
<ul>
 	<li>गाँव स्तर पर CRM कमेटियाँ</li>
 	<li>Door-to-door outreach</li>
 	<li>मिट्टी की सेहत पर awareness</li>
 	<li>स्कूल–कॉलेज की भागीदारी</li>
 	<li>जिला प्रशासन + पुलिस + कृषि अधिकारियों की संयुक्त कार्रवाई</li>
</ul>
इन सब प्रयासों ने किसानों को समझाया कि पराली जलाने से मिट्टी की quality खराब होती है और long-term productivity गिरती है।

आज किसान खुद कह रहे हैं कि पराली जलाना उनके लिए नुकसानदायक है।
<ol start="4">
 	<li><strong> Satellite Monitoring </strong><strong>से कड़ी नज़र</strong><strong>, </strong><strong>लेकिन दंड नहीं </strong><strong>— Support </strong><strong>पर फोकस</strong></li>
</ol>
पंजाब Pollution Control Board और कृषि विभाग ने NASA और PRSC की satellite इमेजरी से लगातार निगरानी की।

लेकिन सरकार ने एक बात साफ रखी—
<em>किसानों को डराकर नहीं</em><em>, </em><em>समझाकर समाधान देना है।</em>

इसलिए FIR सिर्फ उन्हीं पर दर्ज हुई जो बार-बार, जानबूझकर नियम तोड़ते रहे। ऐसे मामलों की संख्या <strong>1963</strong> रही।

बाकियों को हर तरह की सहायता दी गई।
<ol start="5">
 	<li><strong>सरकार की आगे की योजना </strong><strong>— </strong><strong>मिट्टी की सेहत और मशीनरी की आसान उपलब्धता</strong></li>
</ol>
जसवंत सिंह ने कहा कि अब सरकार का फोकस है:
<ul>
 	<li>मिट्टी की quality बढ़ाना</li>
 	<li>CRM मशीनें हर दूर-दराज गांव तक पहुँचाना</li>
 	<li>पराली को पूरी तरह resource में बदलना</li>
</ul>
यह मॉडल अब पूरे भारत के लिए inspiration बन गया है।

<strong>नतीजा: भारत का सबसे सफल </strong><strong>Anti-Pollution </strong><strong>मॉडल</strong>

पंजाब सरकार ने साबित कर दिया है कि किसान जब सरकार के partner बनते हैं, तो प्रदूषण जैसी बड़ी समस्या का समाधान भी आसान हो जाता है।

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	</item>
		<item>
		<title>Union Agriculture Minister ने सराहा Punjab का मॉडल: Moga का रंसिह कलां गांव बना देश का Ideal Stubble Management Example</title>
		<link>https://trendstopic.in/union-agriculture-minister-praises-punjab-model-mogas-ransih-kalan-village-becomes-indias-ideal-stubble-management-example/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 30 Nov 2025 04:44:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चंडीगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[AgricultureNews]]></category>
		<category><![CDATA[BhagwantMann]]></category>
		<category><![CDATA[CropResidueManagement]]></category>
		<category><![CDATA[FarmerSupport]]></category>
		<category><![CDATA[MogaNews]]></category>
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		<category><![CDATA[RansihKalan]]></category>
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		<category><![CDATA[SustainableFarming]]></category>
		<category><![CDATA[UnionAgricultureMinister]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब के मोगा जिले का छोटा-सा गांव <em>रंसिह कलां</em> आज पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। वजह है इस गांव का <strong>पराली न जलाने का शानदार मॉडल</strong>, जिसे देखने खुद <strong>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान</strong> यहां पहुंचे। मंत्री ने गांव के प्रयासों को “<strong>National Example</strong>” बताते हुए कहा कि देश के बाकी राज्यों को भी पंजाब के इस मॉडल से सीख लेनी चाहिए।
<h2><strong>6 </strong><strong>साल से एक भी पराली नहीं जलाई गई </strong><strong>— </strong><strong>गांव ने बनाया रिकॉर्ड</strong></h2>
चौहान ने दौरे के दौरान सबसे बड़ी बात ये कही कि रंसिह कलां गांव में पिछले <strong>छह सालों से एक भी पराली जलाने का मामला नहीं</strong> मिला है।
यह सुनकर उन्होंने खुलकर कहा—
<strong>“</strong><strong>पंजाब ने जिस तरह से स्टबल मैनेजमेंट किया है, </strong><strong>वो पूरे देश के लिए मिसाल है।”</strong>
<h2><strong>पंजाब मॉडल क्यों बना खास</strong><strong>?</strong></h2>
गांव की इस सफलता के पीछे मुख्य तौर पर पंजाब सरकार की नीतियाँ बताई जा रही हैं।
<strong>मुख्यमंत्री भगवंत मान</strong> की सरकार ने किसानों को—
<ul>
 	<li>scientific तरीके,</li>
 	<li>modern मशीनरी,</li>
 	<li>training,</li>
 	<li>और financial support</li>
</ul>
देकर पराली को जलाने की बजाय खेत में मिलाने के लिए प्रोत्साहित किया।

इस Model का सबसे बड़ा असर यह हुआ कि—
<ul>
 	<li>मिट्टी की उर्वरता (fertility) बढ़ी</li>
 	<li>रासायनिक खाद की जरूरत लगभग <strong>30% </strong><strong>कम</strong> हुई</li>
 	<li>गेहूं, आलू और अन्य फसलों की पैदावार में सुधार आया</li>
 	<li>खेती की cost कम हुई</li>
 	<li>खेतों में(environment) ecological balance बेहतर हुआ</li>
</ul>
कई किसानों ने बताया कि पराली को खेत में मिलाने से <strong>पोटाश</strong> जैसी natural value खुद मिट्टी में लौट आती है, जिससे फसल की quality बढ़ती है।
<h2><strong>पंजाब में पराली जलाने की घटनाएँ </strong><strong>83% </strong><strong>कम</strong></h2>
इस साल पंजाब में पराली जलाने की घटनाएँ <strong>इतिहास में पहली बार 83% </strong><strong>तक घटी हैं</strong>।
जो राज्य सालों तक पराली के लिए आलोचना झेलता था, आज वही देश में सबसे सफल मॉडल बनकर सामने आया है।
<h2><strong>गांव में विकास और सामाजिक बदलाव भी बड़ी वजह</strong></h2>
रंसिह कलां सिर्फ इसलिए खास नहीं है कि यहां पराली नहीं जलाई जाती—
गांव में कई ऐसी development activities भी चल रही हैं जो इसे “ideal village” बनाती हैं:
<ul>
 	<li>किसानों को पराली न जलाने पर cash incentives</li>
 	<li>फलदार पौधे लगाने की पुरस्कार योजना</li>
 	<li>गांव की लाइब्रेरी में नई पढ़ने की culture को बढ़ावा</li>
 	<li>plastic-free village मिशन</li>
 	<li>rainwater harvesting सिस्टम</li>
 	<li>नशा-मुक्ति (drug-free) अभियान</li>
 	<li>बच्चों और युवाओं के लिए regular activities</li>
</ul>
केंद्रीय मंत्री ने कहा,
<strong>“</strong><strong>गांव में जिस तरह से environmental </strong><strong>और social development </strong><strong>साथ-साथ चल रहा है, </strong><strong>वह बहुत inspiring </strong><strong>है।”</strong>
<h2><strong>मंत्री ने चखा पंजाब का मशहूर </strong><strong>‘</strong><strong>मक्की दी रोटी </strong><strong>– </strong><strong>सरसों दा साग</strong><strong>’</strong></h2>
दौरे के दौरान शिवराज चौहान ने गांव के लोगों के साथ बैठकर <strong>मक्की दी रोटी और सरसों दा साग</strong> भी खाया।
उन्होंने कहा कि पंजाब की hospitality दिल जीते लेती है और यहां आकर उन्होंने महसूस किया कि <strong>successful stubble management model </strong><strong>असली रूप में यहीं देखने को मिलता है।</strong>
<h2><strong>देशभर के किसानों से अपील</strong></h2>
मंत्री ने साफ कहा कि:

<strong>“</strong><strong>हम इस मॉडल को देश के हर राज्य तक ले जाएंगे। पराली को जलाने की बजाय resource </strong><strong>की तरह इस्तेमाल करना ही भविष्य है।”</strong>

उन्होंने यह भी बताया कि—
<ul>
 	<li>पराली जलाने से सिर्फ pollution नहीं बढ़ता,</li>
 	<li>बल्कि मिट्टी के कीट, nutrients और जमीन की शक्ति भी खत्म होती है।</li>
</ul>
इसलिए Crop-Residue Management को priority देना जरूरी है।

रंसिह कलां गांव आज देश में एक उदाहरण है कि सही नीतियाँ, सरकारी support और किसानों की मेहनत मिलकर किसी बड़ी समस्या को कैसे खत्म कर सकती हैं।
पंजाब सरकार और गांव के किसानों की ये साझी मेहनत अब एक <strong>National Model</strong> बन चुकी है, जिसे केंद्र सरकार भी अपनाने की बात कह रही है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब के मोगा जिले का छोटा-सा गांव <em>रंसिह कलां</em> आज पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। वजह है इस गांव का <strong>पराली न जलाने का शानदार मॉडल</strong>, जिसे देखने खुद <strong>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान</strong> यहां पहुंचे। मंत्री ने गांव के प्रयासों को “<strong>National Example</strong>” बताते हुए कहा कि देश के बाकी राज्यों को भी पंजाब के इस मॉडल से सीख लेनी चाहिए।
<h2><strong>6 </strong><strong>साल से एक भी पराली नहीं जलाई गई </strong><strong>— </strong><strong>गांव ने बनाया रिकॉर्ड</strong></h2>
चौहान ने दौरे के दौरान सबसे बड़ी बात ये कही कि रंसिह कलां गांव में पिछले <strong>छह सालों से एक भी पराली जलाने का मामला नहीं</strong> मिला है।
यह सुनकर उन्होंने खुलकर कहा—
<strong>“</strong><strong>पंजाब ने जिस तरह से स्टबल मैनेजमेंट किया है, </strong><strong>वो पूरे देश के लिए मिसाल है।”</strong>
<h2><strong>पंजाब मॉडल क्यों बना खास</strong><strong>?</strong></h2>
गांव की इस सफलता के पीछे मुख्य तौर पर पंजाब सरकार की नीतियाँ बताई जा रही हैं।
<strong>मुख्यमंत्री भगवंत मान</strong> की सरकार ने किसानों को—
<ul>
 	<li>scientific तरीके,</li>
 	<li>modern मशीनरी,</li>
 	<li>training,</li>
 	<li>और financial support</li>
</ul>
देकर पराली को जलाने की बजाय खेत में मिलाने के लिए प्रोत्साहित किया।

इस Model का सबसे बड़ा असर यह हुआ कि—
<ul>
 	<li>मिट्टी की उर्वरता (fertility) बढ़ी</li>
 	<li>रासायनिक खाद की जरूरत लगभग <strong>30% </strong><strong>कम</strong> हुई</li>
 	<li>गेहूं, आलू और अन्य फसलों की पैदावार में सुधार आया</li>
 	<li>खेती की cost कम हुई</li>
 	<li>खेतों में(environment) ecological balance बेहतर हुआ</li>
</ul>
कई किसानों ने बताया कि पराली को खेत में मिलाने से <strong>पोटाश</strong> जैसी natural value खुद मिट्टी में लौट आती है, जिससे फसल की quality बढ़ती है।
<h2><strong>पंजाब में पराली जलाने की घटनाएँ </strong><strong>83% </strong><strong>कम</strong></h2>
इस साल पंजाब में पराली जलाने की घटनाएँ <strong>इतिहास में पहली बार 83% </strong><strong>तक घटी हैं</strong>।
जो राज्य सालों तक पराली के लिए आलोचना झेलता था, आज वही देश में सबसे सफल मॉडल बनकर सामने आया है।
<h2><strong>गांव में विकास और सामाजिक बदलाव भी बड़ी वजह</strong></h2>
रंसिह कलां सिर्फ इसलिए खास नहीं है कि यहां पराली नहीं जलाई जाती—
गांव में कई ऐसी development activities भी चल रही हैं जो इसे “ideal village” बनाती हैं:
<ul>
 	<li>किसानों को पराली न जलाने पर cash incentives</li>
 	<li>फलदार पौधे लगाने की पुरस्कार योजना</li>
 	<li>गांव की लाइब्रेरी में नई पढ़ने की culture को बढ़ावा</li>
 	<li>plastic-free village मिशन</li>
 	<li>rainwater harvesting सिस्टम</li>
 	<li>नशा-मुक्ति (drug-free) अभियान</li>
 	<li>बच्चों और युवाओं के लिए regular activities</li>
</ul>
केंद्रीय मंत्री ने कहा,
<strong>“</strong><strong>गांव में जिस तरह से environmental </strong><strong>और social development </strong><strong>साथ-साथ चल रहा है, </strong><strong>वह बहुत inspiring </strong><strong>है।”</strong>
<h2><strong>मंत्री ने चखा पंजाब का मशहूर </strong><strong>‘</strong><strong>मक्की दी रोटी </strong><strong>– </strong><strong>सरसों दा साग</strong><strong>’</strong></h2>
दौरे के दौरान शिवराज चौहान ने गांव के लोगों के साथ बैठकर <strong>मक्की दी रोटी और सरसों दा साग</strong> भी खाया।
उन्होंने कहा कि पंजाब की hospitality दिल जीते लेती है और यहां आकर उन्होंने महसूस किया कि <strong>successful stubble management model </strong><strong>असली रूप में यहीं देखने को मिलता है।</strong>
<h2><strong>देशभर के किसानों से अपील</strong></h2>
मंत्री ने साफ कहा कि:

<strong>“</strong><strong>हम इस मॉडल को देश के हर राज्य तक ले जाएंगे। पराली को जलाने की बजाय resource </strong><strong>की तरह इस्तेमाल करना ही भविष्य है।”</strong>

उन्होंने यह भी बताया कि—
<ul>
 	<li>पराली जलाने से सिर्फ pollution नहीं बढ़ता,</li>
 	<li>बल्कि मिट्टी के कीट, nutrients और जमीन की शक्ति भी खत्म होती है।</li>
</ul>
इसलिए Crop-Residue Management को priority देना जरूरी है।

रंसिह कलां गांव आज देश में एक उदाहरण है कि सही नीतियाँ, सरकारी support और किसानों की मेहनत मिलकर किसी बड़ी समस्या को कैसे खत्म कर सकती हैं।
पंजाब सरकार और गांव के किसानों की ये साझी मेहनत अब एक <strong>National Model</strong> बन चुकी है, जिसे केंद्र सरकार भी अपनाने की बात कह रही है।]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>Punjab Government का Digital Revolutionary कदम: ‘Unnat Kisan’ App से अब CRM Machines एक क्लिक पर उपलब्ध</title>
		<link>https://trendstopic.in/punjab-governments-digital-revolutionary-step-unnat-kisan-app-now-provides-crm-machines-at-just-one-click/</link>
					<comments>https://trendstopic.in/punjab-governments-digital-revolutionary-step-unnat-kisan-app-now-provides-crm-machines-at-just-one-click/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 04 Oct 2025 06:29:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[AgricultureInnovation]]></category>
		<category><![CDATA[CRMmachines]]></category>
		<category><![CDATA[CropResidueManagement]]></category>
		<category><![CDATA[DigitalAgriculture]]></category>
		<category><![CDATA[FarmersSupport]]></category>
		<category><![CDATA[FasalAvsheshManagement]]></category>
		<category><![CDATA[PunjabGovernment]]></category>
		<category><![CDATA[SmartFarming]]></category>
		<category><![CDATA[SustainableAgriculture]]></category>
		<category><![CDATA[UnnatKisanApp]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://trendstopic.in/?p=25683</guid>

					<description><![CDATA[पंजाब सरकार ने किसानों के लिए तकनीक और सुविधा का ऐसा संगम पेश किया है, जो पराली प्रबंधन में <strong>क्रांति जैसा बदलाव</strong> लेकर आया है। अब किसान अपने मोबाइल फोन से ही <strong>सी.आर.एम. (Crop Residue Management) </strong><strong>मशीनें</strong> बुक कर सकते हैं और अपने खेतों की पराली को वैज्ञानिक तरीके से निपटा सकते हैं।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री <strong>श्री गुरमीत सिंह खुड्डियां</strong> ने बताया कि ‘<strong>उन्नत किसान</strong>’ मोबाइल ऐप पर अब तक <strong>85,000 </strong><strong>से ज्यादा मशीनों की मैपिंग</strong> हो चुकी है। हर मशीन को <strong>जियो-टैग</strong> किया गया है, जिससे उसकी उपलब्धता और रीयल-टाइम उपयोग की निगरानी करना आसान हो गया है।
<h3>किसानों के लिए सुविधा और पारदर्शिता</h3>
इस ऐप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसान अब घर बैठे ही मशीन बुक कर सकते हैं। इससे न सिर्फ उनका <strong>कीमती समय बचेगा</strong>, बल्कि <strong>खर्च भी कम होगा</strong>। ऐप में रीयल-टाइम डैशबोर्ड मौजूद है, जो मशीनों की ट्रैकिंग और फील्ड अधिकारियों की गतिविधियों पर नजर रखता है। इससे किसी भी समस्या का <strong>जल्दी समाधान</strong> संभव होता है और संसाधनों का सही इस्तेमाल होता है।
<h3>गांव स्तर पर सहयोग</h3>
पंजाब सरकार ने इस पहल को और मजबूत बनाने के लिए <strong>5,000 </strong><strong>से अधिक गांव स्तरीय फ़ैसिलिटेटर (VLF) </strong><strong>और क्लस्टर अधिकारी (COs)</strong> तैनात किए हैं। ये अधिकारी किसानों को जमीन पर मदद देंगे और मशीनों की बुकिंग, उपयोग और निगरानी सुनिश्चित करेंगे। इसका फायदा यह होगा कि <strong>हर किसान तक सुविधा पहुंचे</strong> और सामुदायिक सहयोग भी बढ़े।
<h3>निजी मशीन मालिक भी शामिल</h3>
ऐप में निजी मशीन मालिक अपने उपकरण पंजीकृत कर सकते हैं। इससे मशीनों की संख्या और उपलब्धता बढ़ जाएगी। ग्राम फ़ैसिलिटेटर किसानों की ओर से मशीन बुक करने में भी मदद करेंगे ताकि कोई किसान इस सुविधा से वंचित न रहे।
<h3>सरकार की दृष्टि</h3>
कृषि मंत्री <strong>श्री गुरमीत सिंह खुड्डियां</strong> ने कहा कि मुख्यमंत्री <strong>श्री भगवंत सिंह मान</strong> के नेतृत्व में पंजाब सरकार का उद्देश्य है <strong>कृषि को आधुनिक, </strong><strong>वैज्ञानिक और टिकाऊ बनाना</strong>। ‘उन्नत किसान’ ऐप इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न सिर्फ पराली प्रबंधन को आसान बनाता है, बल्कि <strong>स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण</strong> की दिशा में भी बड़ा योगदान देता है।

कृषि विभाग के प्रबंधकीय सचिव <strong>डॉ. बसंत गर्ग</strong> ने इस ऐप को पंजाब में <strong>डिजिटल एग्रीकल्चर की नींव</strong> बताते हुए कहा कि यह भविष्य की कृषि प्रगति का मार्गदर्शक होगा।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब सरकार ने किसानों के लिए तकनीक और सुविधा का ऐसा संगम पेश किया है, जो पराली प्रबंधन में <strong>क्रांति जैसा बदलाव</strong> लेकर आया है। अब किसान अपने मोबाइल फोन से ही <strong>सी.आर.एम. (Crop Residue Management) </strong><strong>मशीनें</strong> बुक कर सकते हैं और अपने खेतों की पराली को वैज्ञानिक तरीके से निपटा सकते हैं।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री <strong>श्री गुरमीत सिंह खुड्डियां</strong> ने बताया कि ‘<strong>उन्नत किसान</strong>’ मोबाइल ऐप पर अब तक <strong>85,000 </strong><strong>से ज्यादा मशीनों की मैपिंग</strong> हो चुकी है। हर मशीन को <strong>जियो-टैग</strong> किया गया है, जिससे उसकी उपलब्धता और रीयल-टाइम उपयोग की निगरानी करना आसान हो गया है।
<h3>किसानों के लिए सुविधा और पारदर्शिता</h3>
इस ऐप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसान अब घर बैठे ही मशीन बुक कर सकते हैं। इससे न सिर्फ उनका <strong>कीमती समय बचेगा</strong>, बल्कि <strong>खर्च भी कम होगा</strong>। ऐप में रीयल-टाइम डैशबोर्ड मौजूद है, जो मशीनों की ट्रैकिंग और फील्ड अधिकारियों की गतिविधियों पर नजर रखता है। इससे किसी भी समस्या का <strong>जल्दी समाधान</strong> संभव होता है और संसाधनों का सही इस्तेमाल होता है।
<h3>गांव स्तर पर सहयोग</h3>
पंजाब सरकार ने इस पहल को और मजबूत बनाने के लिए <strong>5,000 </strong><strong>से अधिक गांव स्तरीय फ़ैसिलिटेटर (VLF) </strong><strong>और क्लस्टर अधिकारी (COs)</strong> तैनात किए हैं। ये अधिकारी किसानों को जमीन पर मदद देंगे और मशीनों की बुकिंग, उपयोग और निगरानी सुनिश्चित करेंगे। इसका फायदा यह होगा कि <strong>हर किसान तक सुविधा पहुंचे</strong> और सामुदायिक सहयोग भी बढ़े।
<h3>निजी मशीन मालिक भी शामिल</h3>
ऐप में निजी मशीन मालिक अपने उपकरण पंजीकृत कर सकते हैं। इससे मशीनों की संख्या और उपलब्धता बढ़ जाएगी। ग्राम फ़ैसिलिटेटर किसानों की ओर से मशीन बुक करने में भी मदद करेंगे ताकि कोई किसान इस सुविधा से वंचित न रहे।
<h3>सरकार की दृष्टि</h3>
कृषि मंत्री <strong>श्री गुरमीत सिंह खुड्डियां</strong> ने कहा कि मुख्यमंत्री <strong>श्री भगवंत सिंह मान</strong> के नेतृत्व में पंजाब सरकार का उद्देश्य है <strong>कृषि को आधुनिक, </strong><strong>वैज्ञानिक और टिकाऊ बनाना</strong>। ‘उन्नत किसान’ ऐप इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न सिर्फ पराली प्रबंधन को आसान बनाता है, बल्कि <strong>स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण</strong> की दिशा में भी बड़ा योगदान देता है।

कृषि विभाग के प्रबंधकीय सचिव <strong>डॉ. बसंत गर्ग</strong> ने इस ऐप को पंजाब में <strong>डिजिटल एग्रीकल्चर की नींव</strong> बताते हुए कहा कि यह भविष्य की कृषि प्रगति का मार्गदर्शक होगा।]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>Stubble Burning की समस्या से निपटने के लिए Punjab Government की बड़ी पहल, Cooperative Banks के ज़रिए शुरू की Crop Residue Management Loan Scheme</title>
		<link>https://trendstopic.in/big-step-by-punjab-government-to-tackle-stubble-burning-crop-residue-management-loan-scheme-launched-through-cooperative-banks/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 12 Sep 2025 04:19:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चंडीगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[CleanEnergy]]></category>
		<category><![CDATA[CooperativeBanks]]></category>
		<category><![CDATA[CropResidueManagement]]></category>
		<category><![CDATA[Environment]]></category>
		<category><![CDATA[Farmers]]></category>
		<category><![CDATA[GreenEconomy]]></category>
		<category><![CDATA[PunjabGovernment]]></category>
		<category><![CDATA[PunjabNews]]></category>
		<category><![CDATA[StubbleBurning]]></category>
		<category><![CDATA[SustainableFarming]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब में हर साल पराली जलाने (Stubble Burning) से बढ़ते वायु प्रदूषण और उससे होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को रोकने के लिए पंजाब सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री <strong>भगवंत सिंह मान</strong> के नेतृत्व में सरकार ने आज <strong>संशोधित फसल अवशेष प्रबंधन ऋण योजना</strong> (Crop Residue Management Loan Scheme) शुरू की। यह योजना किसानों और सहकारी सभाओं को आधुनिक मशीनरी उपलब्ध कराकर पराली प्रबंधन को आसान बनाएगी।

इस योजना का उद्देश्य किसानों को ऐसी सुविधाएं देना है जिससे वे पराली जलाने के बजाय उसका सही ढंग से प्रबंधन कर सकें। यह कदम न केवल <strong>वायु प्रदूषण</strong> को कम करेगा बल्कि <strong>सतत खेती (Sustainable Farming)</strong> को बढ़ावा देगा और ग्रामीण इलाकों में <strong>नए रोजगार के अवसर</strong> भी पैदा करेगा।
<h3><strong>योजना की शुरुआत और मंजूरी</strong></h3>
इस योजना को राज्य की सहकारी सभाओं के माध्यम से लागू किया जाएगा।
<ul>
 	<li><strong>सुमेर सिंह गुर्जर</strong>, वित्त आयुक्त (सहकारिता) और</li>
 	<li><strong>गिरीश दियालन</strong>, रजिस्ट्रार (सहकारी सभाएं)</li>
</ul>
इनकी अगुवाई में इस योजना को मंजूरी दी गई है। सरकार का मानना है कि <strong>सहकारी सभाओं (Cooperative Societies)</strong> की भागीदारी से यह योजना ज़्यादा प्रभावी और तेज़ी से लागू हो पाएगी।
<h3><strong>योजना की मुख्य बातें:</strong></h3>
<ol>
 	<li><strong><em>सहकारी सभाओं के लिए बड़ी सब्सिडी</em></strong></li>
</ol>
<ul>
 	<li><strong>प्राथमिक कृषि सहकारी सभाएं (PACS)</strong> और <strong>बहु-उद्देश्यीय सहकारी सभाएं (Multipurpose Cooperative Societies)</strong>
<ul>
 	<li>मशीनरी खरीदने पर <strong>80% </strong><strong>तक सब्सिडी</strong> मिलेगी।</li>
 	<li>अधिकतम सब्सिडी <strong>₹24 </strong><strong>लाख</strong> तक होगी।</li>
 	<li>इससे सहकारी सभाएं आसानी से आधुनिक उपकरण खरीद पाएंगी और किसानों को उपलब्ध करवा सकेंगी।</li>
</ul>
</li>
</ul>
<ol start="2">
 	<li><strong><em>किसानों के लिए सब्सिडी</em></strong></li>
</ol>
<ul>
 	<li>व्यक्तिगत किसान फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी खरीदने पर <strong>50% </strong><strong>सब्सिडी</strong> के पात्र होंगे।</li>
 	<li>बाकी <strong>25% </strong><strong>राशि किसान को खुद वहन करनी होगी</strong>, जबकि शेष राशि लोन के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी।</li>
</ul>
<ol start="3">
 	<li><strong><em>अग्रिम राशि (</em></strong><strong><em>Advance Payment) </em></strong><strong><em>की सुविधा</em></strong></li>
</ol>
<ul>
 	<li>मशीनरी खरीदने के लिए दी जाने वाली <strong>कुल लोन राशि का 10% </strong><strong>हिस्सा अग्रिम</strong> के रूप में तय किया गया है।</li>
 	<li>यह किसानों और सभाओं को मशीनरी खरीदने में आसानी देगा।</li>
</ul>
<h3><strong>पराली प्रबंधन से प्रदूषण में कमी</strong></h3>
हर साल अक्टूबर-नवंबर में पंजाब और हरियाणा में बड़े पैमाने पर <strong>पराली जलाने</strong> की वजह से
<ul>
 	<li>दिल्ली-NCR और उत्तर भारत के कई राज्यों में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है।</li>
 	<li>सांस की बीमारियां और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ जाती हैं।</li>
</ul>
पंजाब सरकार की इस योजना के तहत अब पराली को जलाने की बजाय <strong>बायो-एनर्जी प्लांट्स (Bio-Energy Plants)</strong> में भेजा जाएगा।
<ul>
 	<li>इससे पराली का उपयोग <strong>स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy)</strong> बनाने में होगा।</li>
 	<li>यह राज्य की <strong>हरित अर्थव्यवस्था (Green Economy)</strong> को भी मजबूत करेगा।</li>
 	<li>साथ ही, ग्रामीण युवाओं के लिए <strong>नए रोजगार</strong> पैदा होंगे।</li>
</ul>
<h3><strong>मुख्यमंत्री भगवंत मान का बयान</strong></h3>
मुख्यमंत्री <strong>भगवंत सिंह मान</strong> ने इस मौके पर कहा कि उनकी सरकार किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए हर संभव मदद कर रही है।

"हमारा लक्ष्य किसानों को आधुनिक मशीनरी और आर्थिक सहायता देकर पराली जलाने की मजबूरी खत्म करना है। यह योजना न केवल <strong>पर्यावरण को बचाएगी</strong>, बल्कि किसानों को <strong>आर्थिक रूप से मज़बूत</strong> करेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगी।"

उन्होंने कहा कि यह पहल <strong>पराली जलाने की समस्या</strong>, वायु प्रदूषण और <strong>जलवायु परिवर्तन (Climate Change)</strong> से जुड़ी चुनौतियों को हल करने में मदद करेगी।
<h3><strong>केंद्र सरकार से फंड को लेकर विवाद भी जारी</strong></h3>
पंजाब सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब राज्य और केंद्र सरकार के बीच <strong>एसडीआरएफ (State Disaster Response Fund)</strong> को लेकर विवाद चल रहा है।
<ul>
 	<li>हाल ही में भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया था कि पंजाब सरकार <strong>एसडीआरएफ फंड</strong> का सही इस्तेमाल नहीं कर रही और इसका हिसाब नहीं दे रही।</li>
 	<li>जवाब में पंजाब के कैबिनेट मंत्री <strong>हरपाल सिंह चीमा</strong> ने आधिकारिक आंकड़े जारी किए और भाजपा के आरोपों को झूठा बताया।</li>
</ul>
<strong><em>एसडीआरएफ के आंकड़े (</em></strong><strong><em>1 </em></strong><strong><em>अप्रैल </em></strong><strong><em>2022 </em></strong><strong><em>से </em></strong><strong><em>10 </em></strong><strong><em>सितंबर </em></strong><strong><em>2025 </em></strong><strong><em>तक):</em></strong>
<table>
<thead>
<tr>
<td><strong>वित्तीय वर्ष</strong></td>
<td><strong>केंद्र से प्राप्त राशि</strong></td>
<td><strong>खर्च की गई राशि</strong></td>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td><strong>2022-23</strong></td>
<td>₹208 करोड़</td>
<td>₹61 करोड़</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>2023-24</strong></td>
<td>₹645 करोड़</td>
<td>₹420 करोड़</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>2024-25</strong></td>
<td>₹488 करोड़</td>
<td>₹27 करोड़</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>2025-26</strong></td>
<td>₹241 करोड़</td>
<td>₹140 करोड़</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<strong>कुल:</strong>
<ul>
 	<li><strong>केंद्र से प्राप्त राशि:</strong> ₹1582 करोड़</li>
 	<li><strong>खर्च की गई राशि:</strong> ₹649 करोड़</li>
 	<li><strong>बाकी राशि:</strong> ₹933 करोड़ <em>(</em><em>चल रहे और आने वाले राहत कार्यों में इस्तेमाल हो रही है)</em></li>
</ul>
चीमा ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा सिर्फ राजनीति कर रही है और संकट की घड़ी में भी लोगों को गुमराह कर रही है। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि उसने पंजाब के हजारों करोड़ रुपये के वैध बकाये को रोके रखा है।
<h3><strong>इस योजना का महत्व</strong></h3>
<ul>
 	<li><strong>प्रदूषण में कमी:</strong> पराली जलाने की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी।</li>
 	<li><strong>किसानों की मदद:</strong> उन्हें आधुनिक मशीनरी और सब्सिडी मिलेगी जिससे खेती आसान और लागत कम होगी।</li>
 	<li><strong>रोजगार के अवसर:</strong> मशीनरी संचालन, मरम्मत और बायो-एनर्जी प्लांट्स में नए रोजगार पैदा होंगे।</li>
 	<li><strong>स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन:</strong> पराली का उपयोग कोयला जैसे प्रदूषक ऊर्जा स्रोतों की जगह स्वच्छ ऊर्जा के लिए किया जाएगा।</li>
</ul>
पंजाब सरकार की यह योजना किसानों और पर्यावरण दोनों के लिए <strong>डबल बेनिफिट</strong> वाली है।
<ul>
 	<li>इससे न केवल <strong>पराली जलाने की समस्या का समाधान</strong> होगा बल्कि</li>
 	<li><strong>वायु प्रदूषण कम होगा</strong>,</li>
 	<li>किसानों को आर्थिक मजबूती मिलेगी और</li>
 	<li>ग्रामीण इलाकों में नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।</li>
</ul>
अगर इस योजना को सही तरीके से लागू किया गया, तो यह <strong>पंजाब ही नहीं, </strong><strong>पूरे उत्तर भारत के लिए एक मिसाल</strong> बन सकती है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब में हर साल पराली जलाने (Stubble Burning) से बढ़ते वायु प्रदूषण और उससे होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को रोकने के लिए पंजाब सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री <strong>भगवंत सिंह मान</strong> के नेतृत्व में सरकार ने आज <strong>संशोधित फसल अवशेष प्रबंधन ऋण योजना</strong> (Crop Residue Management Loan Scheme) शुरू की। यह योजना किसानों और सहकारी सभाओं को आधुनिक मशीनरी उपलब्ध कराकर पराली प्रबंधन को आसान बनाएगी।

इस योजना का उद्देश्य किसानों को ऐसी सुविधाएं देना है जिससे वे पराली जलाने के बजाय उसका सही ढंग से प्रबंधन कर सकें। यह कदम न केवल <strong>वायु प्रदूषण</strong> को कम करेगा बल्कि <strong>सतत खेती (Sustainable Farming)</strong> को बढ़ावा देगा और ग्रामीण इलाकों में <strong>नए रोजगार के अवसर</strong> भी पैदा करेगा।
<h3><strong>योजना की शुरुआत और मंजूरी</strong></h3>
इस योजना को राज्य की सहकारी सभाओं के माध्यम से लागू किया जाएगा।
<ul>
 	<li><strong>सुमेर सिंह गुर्जर</strong>, वित्त आयुक्त (सहकारिता) और</li>
 	<li><strong>गिरीश दियालन</strong>, रजिस्ट्रार (सहकारी सभाएं)</li>
</ul>
इनकी अगुवाई में इस योजना को मंजूरी दी गई है। सरकार का मानना है कि <strong>सहकारी सभाओं (Cooperative Societies)</strong> की भागीदारी से यह योजना ज़्यादा प्रभावी और तेज़ी से लागू हो पाएगी।
<h3><strong>योजना की मुख्य बातें:</strong></h3>
<ol>
 	<li><strong><em>सहकारी सभाओं के लिए बड़ी सब्सिडी</em></strong></li>
</ol>
<ul>
 	<li><strong>प्राथमिक कृषि सहकारी सभाएं (PACS)</strong> और <strong>बहु-उद्देश्यीय सहकारी सभाएं (Multipurpose Cooperative Societies)</strong>
<ul>
 	<li>मशीनरी खरीदने पर <strong>80% </strong><strong>तक सब्सिडी</strong> मिलेगी।</li>
 	<li>अधिकतम सब्सिडी <strong>₹24 </strong><strong>लाख</strong> तक होगी।</li>
 	<li>इससे सहकारी सभाएं आसानी से आधुनिक उपकरण खरीद पाएंगी और किसानों को उपलब्ध करवा सकेंगी।</li>
</ul>
</li>
</ul>
<ol start="2">
 	<li><strong><em>किसानों के लिए सब्सिडी</em></strong></li>
</ol>
<ul>
 	<li>व्यक्तिगत किसान फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी खरीदने पर <strong>50% </strong><strong>सब्सिडी</strong> के पात्र होंगे।</li>
 	<li>बाकी <strong>25% </strong><strong>राशि किसान को खुद वहन करनी होगी</strong>, जबकि शेष राशि लोन के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी।</li>
</ul>
<ol start="3">
 	<li><strong><em>अग्रिम राशि (</em></strong><strong><em>Advance Payment) </em></strong><strong><em>की सुविधा</em></strong></li>
</ol>
<ul>
 	<li>मशीनरी खरीदने के लिए दी जाने वाली <strong>कुल लोन राशि का 10% </strong><strong>हिस्सा अग्रिम</strong> के रूप में तय किया गया है।</li>
 	<li>यह किसानों और सभाओं को मशीनरी खरीदने में आसानी देगा।</li>
</ul>
<h3><strong>पराली प्रबंधन से प्रदूषण में कमी</strong></h3>
हर साल अक्टूबर-नवंबर में पंजाब और हरियाणा में बड़े पैमाने पर <strong>पराली जलाने</strong> की वजह से
<ul>
 	<li>दिल्ली-NCR और उत्तर भारत के कई राज्यों में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है।</li>
 	<li>सांस की बीमारियां और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ जाती हैं।</li>
</ul>
पंजाब सरकार की इस योजना के तहत अब पराली को जलाने की बजाय <strong>बायो-एनर्जी प्लांट्स (Bio-Energy Plants)</strong> में भेजा जाएगा।
<ul>
 	<li>इससे पराली का उपयोग <strong>स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy)</strong> बनाने में होगा।</li>
 	<li>यह राज्य की <strong>हरित अर्थव्यवस्था (Green Economy)</strong> को भी मजबूत करेगा।</li>
 	<li>साथ ही, ग्रामीण युवाओं के लिए <strong>नए रोजगार</strong> पैदा होंगे।</li>
</ul>
<h3><strong>मुख्यमंत्री भगवंत मान का बयान</strong></h3>
मुख्यमंत्री <strong>भगवंत सिंह मान</strong> ने इस मौके पर कहा कि उनकी सरकार किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए हर संभव मदद कर रही है।

"हमारा लक्ष्य किसानों को आधुनिक मशीनरी और आर्थिक सहायता देकर पराली जलाने की मजबूरी खत्म करना है। यह योजना न केवल <strong>पर्यावरण को बचाएगी</strong>, बल्कि किसानों को <strong>आर्थिक रूप से मज़बूत</strong> करेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगी।"

उन्होंने कहा कि यह पहल <strong>पराली जलाने की समस्या</strong>, वायु प्रदूषण और <strong>जलवायु परिवर्तन (Climate Change)</strong> से जुड़ी चुनौतियों को हल करने में मदद करेगी।
<h3><strong>केंद्र सरकार से फंड को लेकर विवाद भी जारी</strong></h3>
पंजाब सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब राज्य और केंद्र सरकार के बीच <strong>एसडीआरएफ (State Disaster Response Fund)</strong> को लेकर विवाद चल रहा है।
<ul>
 	<li>हाल ही में भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया था कि पंजाब सरकार <strong>एसडीआरएफ फंड</strong> का सही इस्तेमाल नहीं कर रही और इसका हिसाब नहीं दे रही।</li>
 	<li>जवाब में पंजाब के कैबिनेट मंत्री <strong>हरपाल सिंह चीमा</strong> ने आधिकारिक आंकड़े जारी किए और भाजपा के आरोपों को झूठा बताया।</li>
</ul>
<strong><em>एसडीआरएफ के आंकड़े (</em></strong><strong><em>1 </em></strong><strong><em>अप्रैल </em></strong><strong><em>2022 </em></strong><strong><em>से </em></strong><strong><em>10 </em></strong><strong><em>सितंबर </em></strong><strong><em>2025 </em></strong><strong><em>तक):</em></strong>
<table>
<thead>
<tr>
<td><strong>वित्तीय वर्ष</strong></td>
<td><strong>केंद्र से प्राप्त राशि</strong></td>
<td><strong>खर्च की गई राशि</strong></td>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td><strong>2022-23</strong></td>
<td>₹208 करोड़</td>
<td>₹61 करोड़</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>2023-24</strong></td>
<td>₹645 करोड़</td>
<td>₹420 करोड़</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>2024-25</strong></td>
<td>₹488 करोड़</td>
<td>₹27 करोड़</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>2025-26</strong></td>
<td>₹241 करोड़</td>
<td>₹140 करोड़</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<strong>कुल:</strong>
<ul>
 	<li><strong>केंद्र से प्राप्त राशि:</strong> ₹1582 करोड़</li>
 	<li><strong>खर्च की गई राशि:</strong> ₹649 करोड़</li>
 	<li><strong>बाकी राशि:</strong> ₹933 करोड़ <em>(</em><em>चल रहे और आने वाले राहत कार्यों में इस्तेमाल हो रही है)</em></li>
</ul>
चीमा ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा सिर्फ राजनीति कर रही है और संकट की घड़ी में भी लोगों को गुमराह कर रही है। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि उसने पंजाब के हजारों करोड़ रुपये के वैध बकाये को रोके रखा है।
<h3><strong>इस योजना का महत्व</strong></h3>
<ul>
 	<li><strong>प्रदूषण में कमी:</strong> पराली जलाने की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी।</li>
 	<li><strong>किसानों की मदद:</strong> उन्हें आधुनिक मशीनरी और सब्सिडी मिलेगी जिससे खेती आसान और लागत कम होगी।</li>
 	<li><strong>रोजगार के अवसर:</strong> मशीनरी संचालन, मरम्मत और बायो-एनर्जी प्लांट्स में नए रोजगार पैदा होंगे।</li>
 	<li><strong>स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन:</strong> पराली का उपयोग कोयला जैसे प्रदूषक ऊर्जा स्रोतों की जगह स्वच्छ ऊर्जा के लिए किया जाएगा।</li>
</ul>
पंजाब सरकार की यह योजना किसानों और पर्यावरण दोनों के लिए <strong>डबल बेनिफिट</strong> वाली है।
<ul>
 	<li>इससे न केवल <strong>पराली जलाने की समस्या का समाधान</strong> होगा बल्कि</li>
 	<li><strong>वायु प्रदूषण कम होगा</strong>,</li>
 	<li>किसानों को आर्थिक मजबूती मिलेगी और</li>
 	<li>ग्रामीण इलाकों में नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।</li>
</ul>
अगर इस योजना को सही तरीके से लागू किया गया, तो यह <strong>पंजाब ही नहीं, </strong><strong>पूरे उत्तर भारत के लिए एक मिसाल</strong> बन सकती है।]]></content:encoded>
					
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