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	<title>ChildSafety &#8211; Trends Topic</title>
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	<title>ChildSafety &#8211; Trends Topic</title>
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	<item>
		<title>Mann सरकार की Punjab Police बच्चों को बना रही Digital Safety Warriors, ‘Cyber Jaago’ से लेकर ‘Saanjh’ तक— Schools में शुरू हुआ बड़ा बदलाव</title>
		<link>https://trendstopic.in/mann-governments-punjab-police-turning-children-into-digital-safety-warriors-from-cyber-jaago-to-saanjh-a-new-era-of-awareness-begins-in-schools/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 18 Nov 2025 03:53:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चंडीगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[AAPGovernment]]></category>
		<category><![CDATA[ChildSafety]]></category>
		<category><![CDATA[CommunityPolicing]]></category>
		<category><![CDATA[CyberCrime]]></category>
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		<category><![CDATA[SchoolAwareness]]></category>
		<category><![CDATA[ShaktiHelpdesk]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब के स्कूलों में एक ऐसा बदलाव शुरू हो चुका है जो आने वाले समय में बच्चों की पूरी डिजिटल लाइफ को सुरक्षित बनाएगा। यह बदलाव न तो सिर्फ किताबों में है, न ही सिर्फ क्लासरूम तक सीमित है। यह बदलाव सीधे बच्चों की सुरक्षा, उनकी समझ और उनके भविष्य से जुड़ा है।

मुख्यमंत्री <strong>भगवंत मान</strong> के नेतृत्व में पंजाब पुलिस ने <strong>‘</strong><strong>सांझ</strong><strong>’</strong> और <strong>‘</strong><strong>साइबर जागो</strong><strong>’</strong> जैसी पहलों के जरिए बच्चों को साइबर सुरक्षा का योद्धा बनाने का काम शुरू किया है। और खास बात—इसमें पुलिस अब सिर्फ वर्दी वाला अधिकारी नहीं, बल्कि बच्चों का साथी, गाइड और मेंटोर बनकर सामने आ रही है।

<strong>साइबर जागो: बच्चों को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित चलना सिखाने की पहल</strong>

पंजाब पुलिस के साइबर क्राइम डिवीजन ने <strong>‘</strong><strong>साइबर जागो</strong><strong>’</strong> नाम का कार्यक्रम शुरू किया है। इसका मकसद बच्चों को इंटरनेट पर होने वाले खतरों से बचाना है।

<strong>इसमें क्या किया जा रहा है</strong><strong>?</strong>
<ul>
 	<li>पहले चरण में <strong>75 </strong><strong>शिक्षकों को ट्रेनिंग</strong> दी गई</li>
 	<li>लक्ष्य: पंजाब के <strong>3,968 </strong><strong>सरकारी हाई स्कूलों</strong> तक पहुंच</li>
 	<li>बच्चों को समझाया जा रहा है कि
<ul>
 	<li>साइबर बुलिंग क्या होती है</li>
 	<li>बैंकिंग फ्रॉड और UPI स्कैम से कैसे बचें</li>
 	<li>AI से जुड़े नए खतरे क्या हैं</li>
 	<li>ऑनलाइन चाइल्ड एक्सप्लॉइटेशन कैसे पहचानें</li>
</ul>
</li>
</ul>
आज पंजाब का हर दूसरा बच्चा स्मार्टफोन इस्तेमाल करता है। <strong>14–16 </strong><strong>साल के </strong><strong>76% </strong><strong>बच्चे</strong> सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं। ऐसे में ये ट्रेनिंग उनकी सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।

<strong>सांझ: पुलिस और जनता को जोड़ने वाला सबसे बड़ा नेटवर्क</strong>

<strong>सांझ</strong> शब्द का मतलब है—साझेदारी। और पंजाब पुलिस इसे बिल्कुल उसी भावना के साथ चला रही है।

&nbsp;

<img class="alignnone  wp-image-26794" src="https://trendstopic.in/wp-content/uploads/2025/11/WhatsApp-Image-2025-11-17-at-4.26.10-PM-2-300x169.jpg" alt="" width="638" height="359" />

&nbsp;

<strong>सांझ के तहत बने बड़े नेटवर्क</strong>
<ul>
 	<li>ज़िला सामुदायिक पुलिस संसाधन केंद्र</li>
 	<li><strong>114</strong> उप-मंडल सामुदायिक पुलिसिंग सुविधा केंद्र</li>
 	<li><strong>363</strong> पुलिस स्टेशन आउटरीच केंद्र</li>
</ul>
यह नेटवर्क पुलिस को जनता के और खासकर बच्चों के और करीब लाता है। अब पुलिस स्कूलों में हर हफ्ते जाकर बच्चों से खुलकर बात करती है, उन्हें डर नहीं लगती बल्कि भरोसा होता है।

पुलिस अधिकारी यहां ‘थानेदार’ नहीं बल्कि <strong>बड़े भाई-बहन</strong><strong>, </strong><strong>गाइड और मेंटोर</strong> की तरह जाते हैं।

<strong>शक्ति हेल्पडेस्क: बच्चों को संवेदनशील मुद्दों पर जागरूक करना</strong>

शक्ति हेल्पडेस्क के जरिए पंजाब पुलिस स्कूलों में ऐसे सत्र करती है जहां बच्चों को बताया जाता है—
<ul>
 	<li>अच्छा स्पर्श – बुरा स्पर्श</li>
 	<li>बाल शोषण से बचाव</li>
 	<li>नशे का नुकसान</li>
 	<li>शिकायत कहां करें (हेल्पलाइन 112 और 1098)</li>
</ul>
यह पहल पंजाब के <strong>श्री मुक्तसर साहिब</strong> और <strong>SBS </strong><strong>नगर</strong> समेत कई जिलों में चल रही है।

<strong>PPsaanjh App: </strong><strong>पुलिस सेवाएँ अब मोबाइल पर</strong>

टेक्नोलॉजी के साथ पुलिसिंग को आधुनिक बनाने की दिशा में पंजाब पुलिस ने <strong>PPsaanjh </strong><strong>मोबाइल ऐप</strong> शुरू किया है। इसमें लोग—
<ul>
 	<li>FIR की कॉपी डाउनलोड</li>
 	<li>पुलिस वेरिफिकेशन</li>
 	<li>ऑनलाइन शिकायत
जैसी सुविधाओं का लाभ ले सकते हैं।</li>
</ul>
इससे पुलिस जनता से और खासकर युवाओं से और जुड़ गई है।

<strong>बच्चों के जीवन में आ रहा असली बदलाव</strong>

इन पहलों का असर अब घरों तक दिखाई देने लगा है।
<ul>
 	<li>जब 14 साल का बच्चा ऑनलाइन फ्रॉड सीखकर घर जाता है, वह अपने दादा-दादी को UPI स्कैम से बचा सकता है।</li>
 	<li>जब एक लड़की अपने डिजिटल अधिकार समझती है, तो वह अपनी दोस्तों की भी मदद करती है।</li>
 	<li>बच्चे अपने परिवार के लिए ‘डिजिटल गार्ड’ बन रहे हैं।</li>
</ul>
डीजीपी <strong>वी. नीरजा</strong> के मुताबिक, यह एक बार की मुहिम नहीं, बल्कि एक <em>लंबी रणनीति</em> है जिससे साइबर सुरक्षा को स्कूल की संस्कृति का हिस्सा बनाया जा रहा है।

<strong>मान सरकार की सोच: डर नहीं</strong><strong>, </strong><strong>जागरूकता</strong>

इस पूरी पहल की फिलॉसफी बहुत साफ है—
<ul>
 	<li>सुरक्षा <strong>डर</strong> से नहीं, <strong>जागरूकता</strong> से आती है</li>
 	<li>क्राइम को <strong>सजा</strong> से नहीं, <strong>रोकथाम</strong> से कम किया जा सकता है</li>
 	<li>पुलिस और जनता के बीच <strong>दूरी</strong> नहीं, <strong>साझेदारी</strong> होनी चाहिए</li>
</ul>
सांझ केंद्रों को इसलिए <strong>स्वायत्त सोसायटी</strong> बनाया गया है ताकि जनता की आवाज पुलिसिंग में शामिल हो सके। इससे पुलिस की इमेज ‘सख्त अधिकारी’ की जगह ‘सहायक दोस्त’ जैसी हुई है।

<strong>पंजाब का मॉडल पूरे देश के लिए मिसाल</strong>

आज पंजाब की सांझ और साइबर जागो पहल पूरे देश के लिए एक रोल मॉडल बन रही है। यहां 21वीं सदी की आधुनिक पुलिसिंग—AI, साइबर ट्रेनिंग, डिजिटल ऐप—गाँवों की मिट्टी और पंजाबी संस्कृति की साझेदारी की भावना से जुड़कर काम कर रही है।

सीएम मान के नेतृत्व में यह साबित हो रहा है कि
<strong>सबसे मजबूत सुरक्षा वही है जो जनता के साथ मिलकर बनाई जाए।</strong>

पंजाब अब एक ऐसा प्रदेश बन रहा है जहां हर बच्चा
<strong>जागरूक</strong><strong>, </strong><strong>डिजिटल रूप से सुरक्षित और आत्मविश्वासी</strong> होकर आगे बढ़ रहा है।

यही इस सरकार की बड़ी उपलब्धि और भविष्य की मजबूत नींव है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब के स्कूलों में एक ऐसा बदलाव शुरू हो चुका है जो आने वाले समय में बच्चों की पूरी डिजिटल लाइफ को सुरक्षित बनाएगा। यह बदलाव न तो सिर्फ किताबों में है, न ही सिर्फ क्लासरूम तक सीमित है। यह बदलाव सीधे बच्चों की सुरक्षा, उनकी समझ और उनके भविष्य से जुड़ा है।

मुख्यमंत्री <strong>भगवंत मान</strong> के नेतृत्व में पंजाब पुलिस ने <strong>‘</strong><strong>सांझ</strong><strong>’</strong> और <strong>‘</strong><strong>साइबर जागो</strong><strong>’</strong> जैसी पहलों के जरिए बच्चों को साइबर सुरक्षा का योद्धा बनाने का काम शुरू किया है। और खास बात—इसमें पुलिस अब सिर्फ वर्दी वाला अधिकारी नहीं, बल्कि बच्चों का साथी, गाइड और मेंटोर बनकर सामने आ रही है।

<strong>साइबर जागो: बच्चों को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित चलना सिखाने की पहल</strong>

पंजाब पुलिस के साइबर क्राइम डिवीजन ने <strong>‘</strong><strong>साइबर जागो</strong><strong>’</strong> नाम का कार्यक्रम शुरू किया है। इसका मकसद बच्चों को इंटरनेट पर होने वाले खतरों से बचाना है।

<strong>इसमें क्या किया जा रहा है</strong><strong>?</strong>
<ul>
 	<li>पहले चरण में <strong>75 </strong><strong>शिक्षकों को ट्रेनिंग</strong> दी गई</li>
 	<li>लक्ष्य: पंजाब के <strong>3,968 </strong><strong>सरकारी हाई स्कूलों</strong> तक पहुंच</li>
 	<li>बच्चों को समझाया जा रहा है कि
<ul>
 	<li>साइबर बुलिंग क्या होती है</li>
 	<li>बैंकिंग फ्रॉड और UPI स्कैम से कैसे बचें</li>
 	<li>AI से जुड़े नए खतरे क्या हैं</li>
 	<li>ऑनलाइन चाइल्ड एक्सप्लॉइटेशन कैसे पहचानें</li>
</ul>
</li>
</ul>
आज पंजाब का हर दूसरा बच्चा स्मार्टफोन इस्तेमाल करता है। <strong>14–16 </strong><strong>साल के </strong><strong>76% </strong><strong>बच्चे</strong> सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं। ऐसे में ये ट्रेनिंग उनकी सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।

<strong>सांझ: पुलिस और जनता को जोड़ने वाला सबसे बड़ा नेटवर्क</strong>

<strong>सांझ</strong> शब्द का मतलब है—साझेदारी। और पंजाब पुलिस इसे बिल्कुल उसी भावना के साथ चला रही है।

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&nbsp;

<strong>सांझ के तहत बने बड़े नेटवर्क</strong>
<ul>
 	<li>ज़िला सामुदायिक पुलिस संसाधन केंद्र</li>
 	<li><strong>114</strong> उप-मंडल सामुदायिक पुलिसिंग सुविधा केंद्र</li>
 	<li><strong>363</strong> पुलिस स्टेशन आउटरीच केंद्र</li>
</ul>
यह नेटवर्क पुलिस को जनता के और खासकर बच्चों के और करीब लाता है। अब पुलिस स्कूलों में हर हफ्ते जाकर बच्चों से खुलकर बात करती है, उन्हें डर नहीं लगती बल्कि भरोसा होता है।

पुलिस अधिकारी यहां ‘थानेदार’ नहीं बल्कि <strong>बड़े भाई-बहन</strong><strong>, </strong><strong>गाइड और मेंटोर</strong> की तरह जाते हैं।

<strong>शक्ति हेल्पडेस्क: बच्चों को संवेदनशील मुद्दों पर जागरूक करना</strong>

शक्ति हेल्पडेस्क के जरिए पंजाब पुलिस स्कूलों में ऐसे सत्र करती है जहां बच्चों को बताया जाता है—
<ul>
 	<li>अच्छा स्पर्श – बुरा स्पर्श</li>
 	<li>बाल शोषण से बचाव</li>
 	<li>नशे का नुकसान</li>
 	<li>शिकायत कहां करें (हेल्पलाइन 112 और 1098)</li>
</ul>
यह पहल पंजाब के <strong>श्री मुक्तसर साहिब</strong> और <strong>SBS </strong><strong>नगर</strong> समेत कई जिलों में चल रही है।

<strong>PPsaanjh App: </strong><strong>पुलिस सेवाएँ अब मोबाइल पर</strong>

टेक्नोलॉजी के साथ पुलिसिंग को आधुनिक बनाने की दिशा में पंजाब पुलिस ने <strong>PPsaanjh </strong><strong>मोबाइल ऐप</strong> शुरू किया है। इसमें लोग—
<ul>
 	<li>FIR की कॉपी डाउनलोड</li>
 	<li>पुलिस वेरिफिकेशन</li>
 	<li>ऑनलाइन शिकायत
जैसी सुविधाओं का लाभ ले सकते हैं।</li>
</ul>
इससे पुलिस जनता से और खासकर युवाओं से और जुड़ गई है।

<strong>बच्चों के जीवन में आ रहा असली बदलाव</strong>

इन पहलों का असर अब घरों तक दिखाई देने लगा है।
<ul>
 	<li>जब 14 साल का बच्चा ऑनलाइन फ्रॉड सीखकर घर जाता है, वह अपने दादा-दादी को UPI स्कैम से बचा सकता है।</li>
 	<li>जब एक लड़की अपने डिजिटल अधिकार समझती है, तो वह अपनी दोस्तों की भी मदद करती है।</li>
 	<li>बच्चे अपने परिवार के लिए ‘डिजिटल गार्ड’ बन रहे हैं।</li>
</ul>
डीजीपी <strong>वी. नीरजा</strong> के मुताबिक, यह एक बार की मुहिम नहीं, बल्कि एक <em>लंबी रणनीति</em> है जिससे साइबर सुरक्षा को स्कूल की संस्कृति का हिस्सा बनाया जा रहा है।

<strong>मान सरकार की सोच: डर नहीं</strong><strong>, </strong><strong>जागरूकता</strong>

इस पूरी पहल की फिलॉसफी बहुत साफ है—
<ul>
 	<li>सुरक्षा <strong>डर</strong> से नहीं, <strong>जागरूकता</strong> से आती है</li>
 	<li>क्राइम को <strong>सजा</strong> से नहीं, <strong>रोकथाम</strong> से कम किया जा सकता है</li>
 	<li>पुलिस और जनता के बीच <strong>दूरी</strong> नहीं, <strong>साझेदारी</strong> होनी चाहिए</li>
</ul>
सांझ केंद्रों को इसलिए <strong>स्वायत्त सोसायटी</strong> बनाया गया है ताकि जनता की आवाज पुलिसिंग में शामिल हो सके। इससे पुलिस की इमेज ‘सख्त अधिकारी’ की जगह ‘सहायक दोस्त’ जैसी हुई है।

<strong>पंजाब का मॉडल पूरे देश के लिए मिसाल</strong>

आज पंजाब की सांझ और साइबर जागो पहल पूरे देश के लिए एक रोल मॉडल बन रही है। यहां 21वीं सदी की आधुनिक पुलिसिंग—AI, साइबर ट्रेनिंग, डिजिटल ऐप—गाँवों की मिट्टी और पंजाबी संस्कृति की साझेदारी की भावना से जुड़कर काम कर रही है।

सीएम मान के नेतृत्व में यह साबित हो रहा है कि
<strong>सबसे मजबूत सुरक्षा वही है जो जनता के साथ मिलकर बनाई जाए।</strong>

पंजाब अब एक ऐसा प्रदेश बन रहा है जहां हर बच्चा
<strong>जागरूक</strong><strong>, </strong><strong>डिजिटल रूप से सुरक्षित और आत्मविश्वासी</strong> होकर आगे बढ़ रहा है।

यही इस सरकार की बड़ी उपलब्धि और भविष्य की मजबूत नींव है।]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>Punjab Government का सख्त कदम: अब भिखारियों के साथ मिले Children का होगा DNA Test, असली Relationship की होगी जांच</title>
		<link>https://trendstopic.in/punjab-governments-strict-move-dna-tests-to-be-conducted-on-children-found-begging-with-adults-to-verify-real-relationship/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 18 Jul 2025 08:05:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चंडीगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[BaljitKaur]]></category>
		<category><![CDATA[BeggingFreePunjab]]></category>
		<category><![CDATA[ChildBegging]]></category>
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		<category><![CDATA[ChildSafety]]></category>
		<category><![CDATA[DNA_Test]]></category>
		<category><![CDATA[HumanTrafficking]]></category>
		<category><![CDATA[PunjabGovernment]]></category>
		<category><![CDATA[PunjabNews]]></category>
		<category><![CDATA[SocialJustice]]></category>
		<category><![CDATA[StrictAction]]></category>
		<category><![CDATA[WelfareReform]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब सरकार ने एक बड़ा और जरूरी फैसला लिया है ताकि बच्चों के साथ होने वाले शोषण और मानव तस्करी (child trafficking) को रोका जा सके। अब अगर कोई बच्चा किसी बड़े व्यक्ति के साथ सड़कों पर भीख मांगता नजर आता है, तो सरकार उनकी <em>रिश्तेदारी की जांच</em> के लिए DNA टेस्ट कराएगी।

ये आदेश <em>सामाजिक सुरक्षा, </em><em>महिला एवं बाल विकास मंत्री बलजीत कौर</em> ने दिए हैं। उन्होंने कहा कि जब तक DNA रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक बच्चा चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशन (बाल देखभाल केंद्र) में रखा जाएगा और उसकी देखभाल <em>Child Welfare Committee</em> के ज़रिए की जाएगी।

अगर DNA टेस्ट से ये साबित हो जाता है कि वो बच्चा उस व्यक्ति का रिश्तेदार नहीं है, तो उस बड़े के खिलाफ <em>कड़ी कानूनी कार्रवाई</em> की जाएगी।

यह निर्देश सभी ज़िलों के डिप्टी कमिश्नरों (DC) को दिए गए हैं, जो ‘जीवनज्योत-2’ प्रोजेक्ट के तहत लागू होंगे। इस प्रोजेक्ट के तहत ज़िला स्तर पर चाइल्ड वेलफेयर कमेटी ऐसे मामलों की पहचान करेगी जहाँ बच्चा किसी ऐसे व्यक्ति के साथ भीख मांगता दिखे और उनका रिश्ता संदिग्ध लगे। फिर DC उस केस में DNA टेस्ट की सिफारिश करेंगे।

<strong>‘</strong><strong>भिखारी-मुक्त जिला</strong><strong>’ </strong><strong>बनाने की दिशा में कदम</strong>

बलजीत कौर ने पिछले महीने ही सभी ज़िलों को ‘<em>beggar-free district</em>’ बनाने के निर्देश दिए थे और कहा था कि सड़कों पर भीख मांग रहे बच्चों की पहचान करके उनके साथ हो रहे अत्याचार को रोका जाए। उन्होंने साफ कहा कि राज्य सरकार बच्चों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह गंभीर है और इस दिशा में <em>संवेदनशील लेकिन सख्त रवैया</em> अपनाया जाएगा।

<strong>सख्त कानून लाने की तैयारी</strong>

सरकार अब पंजाब बेगर एक्ट (1971) में भी बदलाव करने जा रही है। इसका मकसद है कि जो लोग बच्चों को जबरदस्ती भीख मंगवाते हैं – चाहे वो <em>माफिया, </em><em>गार्जियन या माता-पिता</em> ही क्यों ना हों – उन पर <em>भारी जुर्माना और सख्त सजा</em> दी जा सके। खासतौर पर जो लोग ट्रैफिक सिग्नल्स और सार्वजनिक जगहों पर बच्चों से भीख मंगवाते हैं, उनके खिलाफ अब सरकार एक्शन लेने वाली है।

<strong>इस फैसले से क्या होगा फायदा?</strong>
<ul>
 	<li>बच्चों की <em>तस्करी और शोषण</em> पर लगाम लगेगी।</li>
 	<li>बच्चों को <em>सुरक्षित वातावरण</em> मिलेगा।</li>
 	<li>नकली अभिभावकों और <em>भीख मंगवाने वाले गिरोह</em> पर शिकंजा कसेगा।</li>
 	<li>राज्य में <em>begging-free zones</em> बनाने में मदद मिलेगी।</li>
</ul>
पंजाब सरकार का यह कदम सराहनीय है, जो समाज के सबसे कमजोर वर्ग – बच्चों – की सुरक्षा और उनके भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब सरकार ने एक बड़ा और जरूरी फैसला लिया है ताकि बच्चों के साथ होने वाले शोषण और मानव तस्करी (child trafficking) को रोका जा सके। अब अगर कोई बच्चा किसी बड़े व्यक्ति के साथ सड़कों पर भीख मांगता नजर आता है, तो सरकार उनकी <em>रिश्तेदारी की जांच</em> के लिए DNA टेस्ट कराएगी।

ये आदेश <em>सामाजिक सुरक्षा, </em><em>महिला एवं बाल विकास मंत्री बलजीत कौर</em> ने दिए हैं। उन्होंने कहा कि जब तक DNA रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक बच्चा चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशन (बाल देखभाल केंद्र) में रखा जाएगा और उसकी देखभाल <em>Child Welfare Committee</em> के ज़रिए की जाएगी।

अगर DNA टेस्ट से ये साबित हो जाता है कि वो बच्चा उस व्यक्ति का रिश्तेदार नहीं है, तो उस बड़े के खिलाफ <em>कड़ी कानूनी कार्रवाई</em> की जाएगी।

यह निर्देश सभी ज़िलों के डिप्टी कमिश्नरों (DC) को दिए गए हैं, जो ‘जीवनज्योत-2’ प्रोजेक्ट के तहत लागू होंगे। इस प्रोजेक्ट के तहत ज़िला स्तर पर चाइल्ड वेलफेयर कमेटी ऐसे मामलों की पहचान करेगी जहाँ बच्चा किसी ऐसे व्यक्ति के साथ भीख मांगता दिखे और उनका रिश्ता संदिग्ध लगे। फिर DC उस केस में DNA टेस्ट की सिफारिश करेंगे।

<strong>‘</strong><strong>भिखारी-मुक्त जिला</strong><strong>’ </strong><strong>बनाने की दिशा में कदम</strong>

बलजीत कौर ने पिछले महीने ही सभी ज़िलों को ‘<em>beggar-free district</em>’ बनाने के निर्देश दिए थे और कहा था कि सड़कों पर भीख मांग रहे बच्चों की पहचान करके उनके साथ हो रहे अत्याचार को रोका जाए। उन्होंने साफ कहा कि राज्य सरकार बच्चों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह गंभीर है और इस दिशा में <em>संवेदनशील लेकिन सख्त रवैया</em> अपनाया जाएगा।

<strong>सख्त कानून लाने की तैयारी</strong>

सरकार अब पंजाब बेगर एक्ट (1971) में भी बदलाव करने जा रही है। इसका मकसद है कि जो लोग बच्चों को जबरदस्ती भीख मंगवाते हैं – चाहे वो <em>माफिया, </em><em>गार्जियन या माता-पिता</em> ही क्यों ना हों – उन पर <em>भारी जुर्माना और सख्त सजा</em> दी जा सके। खासतौर पर जो लोग ट्रैफिक सिग्नल्स और सार्वजनिक जगहों पर बच्चों से भीख मंगवाते हैं, उनके खिलाफ अब सरकार एक्शन लेने वाली है।

<strong>इस फैसले से क्या होगा फायदा?</strong>
<ul>
 	<li>बच्चों की <em>तस्करी और शोषण</em> पर लगाम लगेगी।</li>
 	<li>बच्चों को <em>सुरक्षित वातावरण</em> मिलेगा।</li>
 	<li>नकली अभिभावकों और <em>भीख मंगवाने वाले गिरोह</em> पर शिकंजा कसेगा।</li>
 	<li>राज्य में <em>begging-free zones</em> बनाने में मदद मिलेगी।</li>
</ul>
पंजाब सरकार का यह कदम सराहनीय है, जो समाज के सबसे कमजोर वर्ग – बच्चों – की सुरक्षा और उनके भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।]]></content:encoded>
					
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