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	<title>ChildProtection &#8211; Trends Topic</title>
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	<title>ChildProtection &#8211; Trends Topic</title>
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	<item>
		<title>Mann Government की &#8216;Jeevan Jyot&#8217; से बदला Punjab का भविष्य: बच्चों का बचपन सड़कों से स्कूल तक, देश के लिए बना &#8216;Anti-Begging&#8217; Model</title>
		<link>https://trendstopic.in/mann-governments-jeevan-jyot-transforms-punjabs-future-from-streets-to-schools-childrens-lives-rewritten-a-model-for-the-nation-to-end-child-be/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 20 Sep 2025 04:06:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चंडीगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[AntiBeggingModel]]></category>
		<category><![CDATA[BhagwantMann]]></category>
		<category><![CDATA[ChildBegging]]></category>
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		<category><![CDATA[PunjabGovernment]]></category>
		<category><![CDATA[Rehabilitation]]></category>
		<category><![CDATA[SocialWelfare]]></category>
		<category><![CDATA[StopChildBegging]]></category>
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					<description><![CDATA[कभी पंजाब की गलियों, चौक-चौराहों और ट्रैफिक सिग्नलों पर छोटे-छोटे बच्चे हाथ में कटोरा लिए भीख माँगते नज़र आते थे। ये मासूम बच्चे भूख, गरीबी और मजबूरी में अपना बचपन गँवा रहे थे। लेकिन आज तस्वीर बदल रही है। अब वही बच्चे किताबों के साथ स्कूल जा रहे हैं, नए सपने देख रहे हैं और सम्मान के साथ जी रहे हैं। यह बड़ा बदलाव संभव हुआ है मुख्यमंत्री <strong>भगवंत सिंह मान</strong> की सोच और पंजाब सरकार की महत्वाकांक्षी योजना <strong>"</strong><strong>प्रोजेक्ट जीवनज्योत"</strong> की वजह से।

<strong>'</strong><strong>प्रोजेक्ट जीवनज्योत</strong><strong>' </strong><strong>की शुरुआत</strong>

पंजाब सरकार ने जुलाई 2024 में इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी। इसका पहला चरण जून 2025 तक चला।
इस प्रोजेक्ट का मकसद था —
<ul>
 	<li>सड़कों पर भीख माँगते बच्चों को बचाना।</li>
 	<li>उन्हें सुरक्षित माहौल देना।</li>
 	<li>शिक्षा, पोषण और काउंसलिंग जैसी ज़रूरी सुविधाएँ उपलब्ध कराना।</li>
 	<li>परिवारों को रोज़गार और आत्मनिर्भरता से जोड़ना।</li>
</ul>
सीएम मान ने इसे "रंगला पंजाब" के सपने को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।

<strong>पहले चरण की उपलब्धियाँ (जुलाई </strong><strong>2024 – </strong><strong>जून </strong><strong>2025)</strong>

पहले चरण में सरकार ने कई सख्त और संवेदनशील कदम उठाए।
<ul>
 	<li><strong>कुल छापेमारी अभियान:</strong> 753</li>
 	<li><strong>बचाए गए बच्चे:</strong> 367
<ul>
 	<li>350 बच्चों को उनके <strong>माता-पिता</strong> के पास सुरक्षित लौटाया गया।</li>
 	<li>17 बच्चों को <strong>बाल देखभाल संस्थानों</strong> में भेजा गया।</li>
</ul>
</li>
</ul>
<strong>बचाव के बाद उठाए गए कदम:</strong>
<ul>
 	<li>183 बच्चों को <strong>स्कूलों में दाखिला</strong> दिलाया गया।</li>
 	<li>30 बच्चों को <strong>प्रायोजन योजना</strong> (Sponsor Scheme) से जोड़ा गया।</li>
 	<li>8 छोटे बच्चों को <strong>आंगनवाड़ी केंद्रों</strong> में भेजा गया।</li>
</ul>
यहाँ सिर्फ बच्चों को बचाने पर ही ध्यान नहीं दिया गया बल्कि उन्हें समाज की <strong>मुख्यधारा से जोड़ने</strong> के लिए ठोस प्रयास किए गए।

<strong>दूसरा चरण </strong><strong>– '</strong><strong>प्रोजेक्ट जीवनज्योत </strong><strong>2.0'</strong>

पहले चरण की सफलता के बाद, जुलाई 2025 में <strong>'</strong><strong>जीवनज्योत </strong><strong>2.0'</strong> की शुरुआत हुई।
सिर्फ <strong>एक महीने</strong> के अंदर यानी 25 अगस्त 2025 तक शानदार नतीजे देखने को मिले।
<ul>
 	<li><strong>छापेमारी अभियान:</strong> 523</li>
 	<li><strong>बचाए गए बच्चे:</strong> 279
<ul>
 	<li>137 बच्चों को उसी दिन <strong>परिवार के पास</strong> भेजा गया।</li>
 	<li>142 बच्चों को <strong>बाल देखभाल संस्थानों</strong> में रखा गया।</li>
</ul>
</li>
</ul>
इस बार सरकार ने <strong>नई तकनीक</strong> का इस्तेमाल भी किया।
<ul>
 	<li>15 बच्चों के <strong>डीएनए सैंपल</strong> लिए गए ताकि उनकी सही पहचान हो सके और उन्हें सुरक्षित वातावरण मिल सके।</li>
</ul>
<strong>सिर्फ बचाव नहीं</strong><strong>, </strong><strong>जड़ से समाधान</strong>

पंजाब सरकार ने यह समझा कि बच्चों के सड़क पर आने की असली वजह क्या है।
सबसे बड़ी वजहें हैं:
<ol>
 	<li><strong>गरीबी</strong></li>
 	<li><strong>नशे की समस्या</strong></li>
 	<li>दूसरे राज्यों से बच्चों को लाकर <strong>मजबूरी में भीख मंगवाना</strong></li>
</ol>
इन समस्याओं को खत्म करने के लिए सरकार ने परिवारों को कई योजनाओं से जोड़ा:
<ul>
 	<li><strong>रोज़गार योजनाएँ</strong> — ताकि परिवार खुद कमा सकें।</li>
 	<li><strong>पोषण कार्यक्रम</strong> — बच्चों को सही खाना मिले।</li>
 	<li><strong>शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाएँ</strong> — बच्चे सुरक्षित और शिक्षित बनें।</li>
</ul>
इस तरह यह सिर्फ बचाव नहीं बल्कि <strong>360-</strong><strong>डिग्री मॉडल</strong> है जिसमें <em>Rescue (</em><em>बचाव)</em><em>, Rehabilitation (</em><em>पुनर्वास)</em><em>, Education (</em><em>शिक्षा)</em><em>, Health (</em><em>स्वास्थ्य)</em><em>, </em><em>और </em><em>Empowerment (</em><em>आत्मनिर्भरता)</em> सब कुछ शामिल है।

<strong>त्योहारों और मेलों में खास इंतज़ाम</strong>

पंजाब सरकार अब त्योहारों और बड़े आयोजनों में भी सख्त कदम उठा रही है।
<ul>
 	<li><strong>कपूरथला जोड़ मेला</strong> जैसे आयोजनों में <strong>स्पेशल रेस्क्यू टीम</strong> तैनात की गई।</li>
 	<li>इन टीमों का काम है यह सुनिश्चित करना कि कोई बच्चा इन आयोजनों में भीख न माँगे।</li>
</ul>
सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री <strong>डॉ. बलजीत कौर</strong> ने कहा —

"बच्चों का बचपन सड़कों पर नहीं, स्कूलों में होना चाहिए। 'जीवनज्योत 2.0' हमारे सपनों के पंजाब की तरफ बढ़ता कदम है।"

<strong>पुनर्वास के ठोस नतीजे</strong>

अब तक <strong>311 </strong><strong>बच्चों</strong> को पूरी तरह से पुनर्वासित किया गया है।
इन बच्चों को दिया गया:
<ul>
 	<li>शिक्षा</li>
 	<li>पोषण</li>
 	<li>काउंसलिंग</li>
 	<li>और सामाजिक समर्थन</li>
</ul>
इन कदमों से बच्चे न सिर्फ भीख माँगने से दूर हुए बल्कि उनका <strong>भविष्य सुरक्षित</strong> हुआ।

<strong>जनता की भागीदारी भी अहम</strong>

इस मुहिम में आम लोग भी आगे आ रहे हैं।
<ul>
 	<li>लोग <strong>चाइल्ड हेल्पलाइन </strong><strong>1098</strong> पर भीख माँगते बच्चों की सूचना दे रहे हैं।</li>
 	<li>इस सहयोग से कई बच्चों को तुरंत बचाया गया।</li>
</ul>
<strong>नए कानून की तैयारी</strong>

पंजाब सरकार अब बच्चों को भीख मंगवाने वालों के खिलाफ <strong>सख्त कानूनी कदम</strong> उठाने जा रही है।
<ul>
 	<li>यह नया कानून बच्चों का शोषण करने वालों पर कड़ी सज़ा देगा।</li>
 	<li>हर बच्चे को <strong>शिक्षा</strong><strong>, </strong><strong>स्वास्थ्य और सम्मान</strong> का हक़ मिलेगा।</li>
 	<li>यह कानून पूरे देश के लिए <strong>एंटी-बेगिंग मॉडल</strong> का उदाहरण बनेगा।</li>
</ul>
<strong>अब तक की उपलब्धियाँ </strong><strong>— </strong><strong>एक नज़र में</strong>
<table>
<thead>
<tr>
<td><strong>चरण/विवरण</strong></td>
<td><strong>आँकड़े</strong></td>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td><strong>पहला चरण (जुलाई </strong><strong>2024 – </strong><strong>जून </strong><strong>2025)</strong></td>
<td></td>
</tr>
<tr>
<td>छापेमारी अभियान</td>
<td>753</td>
</tr>
<tr>
<td>बचाए गए बच्चे</td>
<td>367</td>
</tr>
<tr>
<td>माता-पिता को सौंपे गए बच्चे</td>
<td>350</td>
</tr>
<tr>
<td>संस्थानों में भेजे गए बच्चे</td>
<td>17</td>
</tr>
<tr>
<td>स्कूल में दाखिला</td>
<td>183</td>
</tr>
<tr>
<td>प्रायोजन योजना से जुड़े</td>
<td>30</td>
</tr>
<tr>
<td>आंगनवाड़ी भेजे गए बच्चे</td>
<td>8</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>दूसरा चरण (जुलाई </strong><strong>2025 – 25 </strong><strong>अगस्त </strong><strong>2025)</strong></td>
<td></td>
</tr>
<tr>
<td>छापेमारी अभियान</td>
<td>523</td>
</tr>
<tr>
<td>बचाए गए बच्चे</td>
<td>279</td>
</tr>
<tr>
<td>परिवार को सौंपे गए बच्चे</td>
<td>137</td>
</tr>
<tr>
<td>संस्थानों में भेजे गए बच्चे</td>
<td>142</td>
</tr>
<tr>
<td>डीएनए सैंपल लिए गए बच्चे</td>
<td>15</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>कुल पुनर्वासित बच्चे</strong></td>
<td>311</td>
</tr>
</tbody>
</table>
'प्रोजेक्ट जीवनज्योत' सिर्फ बच्चों को भीख माँगने से रोकने की योजना नहीं है, बल्कि यह समाज में <strong>स्थायी बदलाव</strong> लाने का मिशन है।
<ul>
 	<li>बच्चों का बचपन सड़कों से हटकर <strong>किताबों और सपनों</strong> में लौट रहा है।</li>
 	<li>परिवार गरीबी से निकलकर <strong>आत्मनिर्भरता</strong> की ओर बढ़ रहे हैं।</li>
 	<li>और पंजाब पूरे देश के लिए <strong>आदर्श एंटी-बेगिंग मॉडल</strong> बन रहा है।</li>
</ul>
यह पहल दिखाती है कि जब <strong>सरकार</strong><strong>, </strong><strong>जनता और नीति</strong> साथ आएँ, तो किसी भी बच्चे का भविष्य बदलना मुश्किल नहीं है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[कभी पंजाब की गलियों, चौक-चौराहों और ट्रैफिक सिग्नलों पर छोटे-छोटे बच्चे हाथ में कटोरा लिए भीख माँगते नज़र आते थे। ये मासूम बच्चे भूख, गरीबी और मजबूरी में अपना बचपन गँवा रहे थे। लेकिन आज तस्वीर बदल रही है। अब वही बच्चे किताबों के साथ स्कूल जा रहे हैं, नए सपने देख रहे हैं और सम्मान के साथ जी रहे हैं। यह बड़ा बदलाव संभव हुआ है मुख्यमंत्री <strong>भगवंत सिंह मान</strong> की सोच और पंजाब सरकार की महत्वाकांक्षी योजना <strong>"</strong><strong>प्रोजेक्ट जीवनज्योत"</strong> की वजह से।

<strong>'</strong><strong>प्रोजेक्ट जीवनज्योत</strong><strong>' </strong><strong>की शुरुआत</strong>

पंजाब सरकार ने जुलाई 2024 में इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी। इसका पहला चरण जून 2025 तक चला।
इस प्रोजेक्ट का मकसद था —
<ul>
 	<li>सड़कों पर भीख माँगते बच्चों को बचाना।</li>
 	<li>उन्हें सुरक्षित माहौल देना।</li>
 	<li>शिक्षा, पोषण और काउंसलिंग जैसी ज़रूरी सुविधाएँ उपलब्ध कराना।</li>
 	<li>परिवारों को रोज़गार और आत्मनिर्भरता से जोड़ना।</li>
</ul>
सीएम मान ने इसे "रंगला पंजाब" के सपने को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।

<strong>पहले चरण की उपलब्धियाँ (जुलाई </strong><strong>2024 – </strong><strong>जून </strong><strong>2025)</strong>

पहले चरण में सरकार ने कई सख्त और संवेदनशील कदम उठाए।
<ul>
 	<li><strong>कुल छापेमारी अभियान:</strong> 753</li>
 	<li><strong>बचाए गए बच्चे:</strong> 367
<ul>
 	<li>350 बच्चों को उनके <strong>माता-पिता</strong> के पास सुरक्षित लौटाया गया।</li>
 	<li>17 बच्चों को <strong>बाल देखभाल संस्थानों</strong> में भेजा गया।</li>
</ul>
</li>
</ul>
<strong>बचाव के बाद उठाए गए कदम:</strong>
<ul>
 	<li>183 बच्चों को <strong>स्कूलों में दाखिला</strong> दिलाया गया।</li>
 	<li>30 बच्चों को <strong>प्रायोजन योजना</strong> (Sponsor Scheme) से जोड़ा गया।</li>
 	<li>8 छोटे बच्चों को <strong>आंगनवाड़ी केंद्रों</strong> में भेजा गया।</li>
</ul>
यहाँ सिर्फ बच्चों को बचाने पर ही ध्यान नहीं दिया गया बल्कि उन्हें समाज की <strong>मुख्यधारा से जोड़ने</strong> के लिए ठोस प्रयास किए गए।

<strong>दूसरा चरण </strong><strong>– '</strong><strong>प्रोजेक्ट जीवनज्योत </strong><strong>2.0'</strong>

पहले चरण की सफलता के बाद, जुलाई 2025 में <strong>'</strong><strong>जीवनज्योत </strong><strong>2.0'</strong> की शुरुआत हुई।
सिर्फ <strong>एक महीने</strong> के अंदर यानी 25 अगस्त 2025 तक शानदार नतीजे देखने को मिले।
<ul>
 	<li><strong>छापेमारी अभियान:</strong> 523</li>
 	<li><strong>बचाए गए बच्चे:</strong> 279
<ul>
 	<li>137 बच्चों को उसी दिन <strong>परिवार के पास</strong> भेजा गया।</li>
 	<li>142 बच्चों को <strong>बाल देखभाल संस्थानों</strong> में रखा गया।</li>
</ul>
</li>
</ul>
इस बार सरकार ने <strong>नई तकनीक</strong> का इस्तेमाल भी किया।
<ul>
 	<li>15 बच्चों के <strong>डीएनए सैंपल</strong> लिए गए ताकि उनकी सही पहचान हो सके और उन्हें सुरक्षित वातावरण मिल सके।</li>
</ul>
<strong>सिर्फ बचाव नहीं</strong><strong>, </strong><strong>जड़ से समाधान</strong>

पंजाब सरकार ने यह समझा कि बच्चों के सड़क पर आने की असली वजह क्या है।
सबसे बड़ी वजहें हैं:
<ol>
 	<li><strong>गरीबी</strong></li>
 	<li><strong>नशे की समस्या</strong></li>
 	<li>दूसरे राज्यों से बच्चों को लाकर <strong>मजबूरी में भीख मंगवाना</strong></li>
</ol>
इन समस्याओं को खत्म करने के लिए सरकार ने परिवारों को कई योजनाओं से जोड़ा:
<ul>
 	<li><strong>रोज़गार योजनाएँ</strong> — ताकि परिवार खुद कमा सकें।</li>
 	<li><strong>पोषण कार्यक्रम</strong> — बच्चों को सही खाना मिले।</li>
 	<li><strong>शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाएँ</strong> — बच्चे सुरक्षित और शिक्षित बनें।</li>
</ul>
इस तरह यह सिर्फ बचाव नहीं बल्कि <strong>360-</strong><strong>डिग्री मॉडल</strong> है जिसमें <em>Rescue (</em><em>बचाव)</em><em>, Rehabilitation (</em><em>पुनर्वास)</em><em>, Education (</em><em>शिक्षा)</em><em>, Health (</em><em>स्वास्थ्य)</em><em>, </em><em>और </em><em>Empowerment (</em><em>आत्मनिर्भरता)</em> सब कुछ शामिल है।

<strong>त्योहारों और मेलों में खास इंतज़ाम</strong>

पंजाब सरकार अब त्योहारों और बड़े आयोजनों में भी सख्त कदम उठा रही है।
<ul>
 	<li><strong>कपूरथला जोड़ मेला</strong> जैसे आयोजनों में <strong>स्पेशल रेस्क्यू टीम</strong> तैनात की गई।</li>
 	<li>इन टीमों का काम है यह सुनिश्चित करना कि कोई बच्चा इन आयोजनों में भीख न माँगे।</li>
</ul>
सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री <strong>डॉ. बलजीत कौर</strong> ने कहा —

"बच्चों का बचपन सड़कों पर नहीं, स्कूलों में होना चाहिए। 'जीवनज्योत 2.0' हमारे सपनों के पंजाब की तरफ बढ़ता कदम है।"

<strong>पुनर्वास के ठोस नतीजे</strong>

अब तक <strong>311 </strong><strong>बच्चों</strong> को पूरी तरह से पुनर्वासित किया गया है।
इन बच्चों को दिया गया:
<ul>
 	<li>शिक्षा</li>
 	<li>पोषण</li>
 	<li>काउंसलिंग</li>
 	<li>और सामाजिक समर्थन</li>
</ul>
इन कदमों से बच्चे न सिर्फ भीख माँगने से दूर हुए बल्कि उनका <strong>भविष्य सुरक्षित</strong> हुआ।

<strong>जनता की भागीदारी भी अहम</strong>

इस मुहिम में आम लोग भी आगे आ रहे हैं।
<ul>
 	<li>लोग <strong>चाइल्ड हेल्पलाइन </strong><strong>1098</strong> पर भीख माँगते बच्चों की सूचना दे रहे हैं।</li>
 	<li>इस सहयोग से कई बच्चों को तुरंत बचाया गया।</li>
</ul>
<strong>नए कानून की तैयारी</strong>

पंजाब सरकार अब बच्चों को भीख मंगवाने वालों के खिलाफ <strong>सख्त कानूनी कदम</strong> उठाने जा रही है।
<ul>
 	<li>यह नया कानून बच्चों का शोषण करने वालों पर कड़ी सज़ा देगा।</li>
 	<li>हर बच्चे को <strong>शिक्षा</strong><strong>, </strong><strong>स्वास्थ्य और सम्मान</strong> का हक़ मिलेगा।</li>
 	<li>यह कानून पूरे देश के लिए <strong>एंटी-बेगिंग मॉडल</strong> का उदाहरण बनेगा।</li>
</ul>
<strong>अब तक की उपलब्धियाँ </strong><strong>— </strong><strong>एक नज़र में</strong>
<table>
<thead>
<tr>
<td><strong>चरण/विवरण</strong></td>
<td><strong>आँकड़े</strong></td>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td><strong>पहला चरण (जुलाई </strong><strong>2024 – </strong><strong>जून </strong><strong>2025)</strong></td>
<td></td>
</tr>
<tr>
<td>छापेमारी अभियान</td>
<td>753</td>
</tr>
<tr>
<td>बचाए गए बच्चे</td>
<td>367</td>
</tr>
<tr>
<td>माता-पिता को सौंपे गए बच्चे</td>
<td>350</td>
</tr>
<tr>
<td>संस्थानों में भेजे गए बच्चे</td>
<td>17</td>
</tr>
<tr>
<td>स्कूल में दाखिला</td>
<td>183</td>
</tr>
<tr>
<td>प्रायोजन योजना से जुड़े</td>
<td>30</td>
</tr>
<tr>
<td>आंगनवाड़ी भेजे गए बच्चे</td>
<td>8</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>दूसरा चरण (जुलाई </strong><strong>2025 – 25 </strong><strong>अगस्त </strong><strong>2025)</strong></td>
<td></td>
</tr>
<tr>
<td>छापेमारी अभियान</td>
<td>523</td>
</tr>
<tr>
<td>बचाए गए बच्चे</td>
<td>279</td>
</tr>
<tr>
<td>परिवार को सौंपे गए बच्चे</td>
<td>137</td>
</tr>
<tr>
<td>संस्थानों में भेजे गए बच्चे</td>
<td>142</td>
</tr>
<tr>
<td>डीएनए सैंपल लिए गए बच्चे</td>
<td>15</td>
</tr>
<tr>
<td><strong>कुल पुनर्वासित बच्चे</strong></td>
<td>311</td>
</tr>
</tbody>
</table>
'प्रोजेक्ट जीवनज्योत' सिर्फ बच्चों को भीख माँगने से रोकने की योजना नहीं है, बल्कि यह समाज में <strong>स्थायी बदलाव</strong> लाने का मिशन है।
<ul>
 	<li>बच्चों का बचपन सड़कों से हटकर <strong>किताबों और सपनों</strong> में लौट रहा है।</li>
 	<li>परिवार गरीबी से निकलकर <strong>आत्मनिर्भरता</strong> की ओर बढ़ रहे हैं।</li>
 	<li>और पंजाब पूरे देश के लिए <strong>आदर्श एंटी-बेगिंग मॉडल</strong> बन रहा है।</li>
</ul>
यह पहल दिखाती है कि जब <strong>सरकार</strong><strong>, </strong><strong>जनता और नीति</strong> साथ आएँ, तो किसी भी बच्चे का भविष्य बदलना मुश्किल नहीं है।]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>Karnataka High Court का बड़ा फैसला: महिला पर भी लग सकते हैं POCSO के तहत Serious Charges</title>
		<link>https://trendstopic.in/big-decision-by-karnataka-high-court-even-women-can-face-serious-charges-under-pocso-act/</link>
					<comments>https://trendstopic.in/big-decision-by-karnataka-high-court-even-women-can-face-serious-charges-under-pocso-act/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 20 Aug 2025 05:26:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[News]]></category>
		<category><![CDATA[जानकारी]]></category>
		<category><![CDATA[BreakingNews]]></category>
		<category><![CDATA[ChildProtection]]></category>
		<category><![CDATA[CourtDecision]]></category>
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		<category><![CDATA[KarnatakaHighCourt]]></category>
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		<category><![CDATA[POCSOAct]]></category>
		<category><![CDATA[SeriousCharges]]></category>
		<category><![CDATA[WomenAccused]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://trendstopic.in/?p=24941</guid>

					<description><![CDATA[बेंगलुरु से आई एक अहम खबर ने पूरे देश का ध्यान खींचा है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि <strong>POCSO </strong><strong>एक्ट (</strong><strong>Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012)</strong> पूरी तरह से <strong>gender-neutral</strong> है। यानी यौन शोषण (sexual assault) का आरोप केवल पुरुषों पर ही नहीं, बल्कि महिलाओं पर भी लग सकता है। अदालत ने 52 साल की एक महिला की अर्जी खारिज करते हुए कहा कि उसके खिलाफ दर्ज केस चलेगा।

<strong>मामला क्या है</strong><strong>?</strong>

यह केस बेंगलुरु का है। आरोप है कि 2020 में <strong>अर्चना (</strong><strong>Archana Patil)</strong> नाम की एक महिला, जो पेशे से आर्टिस्ट है और पीड़ित लड़के की पड़ोसी भी थी, ने करीब <strong>13 </strong><strong>साल </strong><strong>10 </strong><strong>महीने के एक नाबालिग लड़के</strong> के साथ दो बार जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए।

जानकारी के मुताबिक, अर्चना का लड़के की मां से परिचय था। उसने लड़के की मां से कहा कि वह उसके बेटे को अपने घर भेज दे ताकि वह उसकी पेंटिंग्स को Instagram पर अपलोड करने में मदद कर सके। इसी दौरान महिला ने लड़के को अपने जाल में फंसाया और यौन संबंध बनाए।

उस समय (मई से जून 2020) लड़के के माता-पिता विदेश (दुबई) में थे। जब कुछ समय बाद उन्हें बेटे के बर्ताव में बदलाव दिखा तो उसने पूरी सच्चाई बताई। इसके बाद भारत लौटकर परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने जांच कर महिला पर <strong>POCSO </strong><strong>एक्ट और </strong><strong>IPC </strong><strong>की धाराओं</strong> के तहत चार्जशीट दाखिल की।

<strong>महिला की दलीलें और हाईकोर्ट का जवाब</strong>

महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर केस रद्द करने की मांग की थी। उसका कहना था कि POCSO एक्ट केवल पुरुषों पर लागू होता है क्योंकि कानून में कई जगह “he” शब्द लिखा है।

लेकिन हाईकोर्ट ने यह दलील खारिज करते हुए कहा:
<ul>
 	<li><strong>POCSO </strong><strong>एक्ट पूरी तरह </strong><strong>gender-neutral </strong><strong>है।</strong> इसमें महिला या पुरुष का फर्क नहीं किया गया है।</li>
 	<li>“he” शब्द का मतलब केवल पुरुष नहीं बल्कि सभी लिंगों पर लागू समझा जाएगा।</li>
 	<li>कोर्ट ने कहा कि यह सोचना कि सेक्स में केवल पुरुष ही “active” होता है और महिला “passive”, एक <strong>पुरानी और बेकार सोच (</strong><strong>archaic thinking)</strong> है।</li>
</ul>
<strong>शिकायत में देरी पर भी टिप्पणी</strong>

महिला ने यह भी कहा कि शिकायत <strong>चार साल बाद</strong> दर्ज की गई, इसलिए उस पर विश्वास नहीं किया जा सकता।
लेकिन अदालत ने साफ कहा कि <strong>child sexual abuse</strong> के मामलों में देरी होना आम बात है। पीड़ित बच्चे या उसके परिवार को हिम्मत जुटाने में समय लगता है। इसलिए केवल देर से शिकायत दर्ज करने की वजह से केस खत्म नहीं किया जा सकता।

<strong>शारीरिक प्रतिक्रियाओं से जुड़े तर्क</strong>

महिला के वकीलों ने यह तर्क भी दिया कि लड़के के शरीर में “erection” जैसी प्रतिक्रिया होना साबित करता है कि वह शोषण नहीं बल्कि सहमति से था।
लेकिन हाईकोर्ट ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि <strong>शारीरिक प्रतिक्रिया (</strong><strong>physical reaction) </strong><strong>कई बार अनजाने और अनैच्छिक (</strong><strong>involuntary) </strong><strong>होती है</strong>, इसका मतलब यह नहीं कि पीड़ित ने सहमति दी।

<strong>अब आगे क्या होगा</strong><strong>?</strong>

हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि महिला पर लगे आरोप <strong>गंभीर हैं और </strong><strong>prima facie </strong><strong>साबित होते हैं</strong>। अब ट्रायल कोर्ट में मुकदमा चलेगा और वहां गवाहियों व सबूतों के आधार पर फैसला होगा।

यह फैसला बेहद अहम है क्योंकि इससे यह स्पष्ट हो गया है कि <strong>POCSO </strong><strong>एक्ट बच्चों की सुरक्षा के लिए है और इसमें आरोपी का लिंग मायने नहीं रखता</strong>। चाहे पुरुष हो या महिला, अगर कोई नाबालिग से यौन शोषण करता है तो उस पर एक समान सजा का प्रावधान लागू होगा।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[बेंगलुरु से आई एक अहम खबर ने पूरे देश का ध्यान खींचा है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि <strong>POCSO </strong><strong>एक्ट (</strong><strong>Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012)</strong> पूरी तरह से <strong>gender-neutral</strong> है। यानी यौन शोषण (sexual assault) का आरोप केवल पुरुषों पर ही नहीं, बल्कि महिलाओं पर भी लग सकता है। अदालत ने 52 साल की एक महिला की अर्जी खारिज करते हुए कहा कि उसके खिलाफ दर्ज केस चलेगा।

<strong>मामला क्या है</strong><strong>?</strong>

यह केस बेंगलुरु का है। आरोप है कि 2020 में <strong>अर्चना (</strong><strong>Archana Patil)</strong> नाम की एक महिला, जो पेशे से आर्टिस्ट है और पीड़ित लड़के की पड़ोसी भी थी, ने करीब <strong>13 </strong><strong>साल </strong><strong>10 </strong><strong>महीने के एक नाबालिग लड़के</strong> के साथ दो बार जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए।

जानकारी के मुताबिक, अर्चना का लड़के की मां से परिचय था। उसने लड़के की मां से कहा कि वह उसके बेटे को अपने घर भेज दे ताकि वह उसकी पेंटिंग्स को Instagram पर अपलोड करने में मदद कर सके। इसी दौरान महिला ने लड़के को अपने जाल में फंसाया और यौन संबंध बनाए।

उस समय (मई से जून 2020) लड़के के माता-पिता विदेश (दुबई) में थे। जब कुछ समय बाद उन्हें बेटे के बर्ताव में बदलाव दिखा तो उसने पूरी सच्चाई बताई। इसके बाद भारत लौटकर परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने जांच कर महिला पर <strong>POCSO </strong><strong>एक्ट और </strong><strong>IPC </strong><strong>की धाराओं</strong> के तहत चार्जशीट दाखिल की।

<strong>महिला की दलीलें और हाईकोर्ट का जवाब</strong>

महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर केस रद्द करने की मांग की थी। उसका कहना था कि POCSO एक्ट केवल पुरुषों पर लागू होता है क्योंकि कानून में कई जगह “he” शब्द लिखा है।

लेकिन हाईकोर्ट ने यह दलील खारिज करते हुए कहा:
<ul>
 	<li><strong>POCSO </strong><strong>एक्ट पूरी तरह </strong><strong>gender-neutral </strong><strong>है।</strong> इसमें महिला या पुरुष का फर्क नहीं किया गया है।</li>
 	<li>“he” शब्द का मतलब केवल पुरुष नहीं बल्कि सभी लिंगों पर लागू समझा जाएगा।</li>
 	<li>कोर्ट ने कहा कि यह सोचना कि सेक्स में केवल पुरुष ही “active” होता है और महिला “passive”, एक <strong>पुरानी और बेकार सोच (</strong><strong>archaic thinking)</strong> है।</li>
</ul>
<strong>शिकायत में देरी पर भी टिप्पणी</strong>

महिला ने यह भी कहा कि शिकायत <strong>चार साल बाद</strong> दर्ज की गई, इसलिए उस पर विश्वास नहीं किया जा सकता।
लेकिन अदालत ने साफ कहा कि <strong>child sexual abuse</strong> के मामलों में देरी होना आम बात है। पीड़ित बच्चे या उसके परिवार को हिम्मत जुटाने में समय लगता है। इसलिए केवल देर से शिकायत दर्ज करने की वजह से केस खत्म नहीं किया जा सकता।

<strong>शारीरिक प्रतिक्रियाओं से जुड़े तर्क</strong>

महिला के वकीलों ने यह तर्क भी दिया कि लड़के के शरीर में “erection” जैसी प्रतिक्रिया होना साबित करता है कि वह शोषण नहीं बल्कि सहमति से था।
लेकिन हाईकोर्ट ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि <strong>शारीरिक प्रतिक्रिया (</strong><strong>physical reaction) </strong><strong>कई बार अनजाने और अनैच्छिक (</strong><strong>involuntary) </strong><strong>होती है</strong>, इसका मतलब यह नहीं कि पीड़ित ने सहमति दी।

<strong>अब आगे क्या होगा</strong><strong>?</strong>

हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि महिला पर लगे आरोप <strong>गंभीर हैं और </strong><strong>prima facie </strong><strong>साबित होते हैं</strong>। अब ट्रायल कोर्ट में मुकदमा चलेगा और वहां गवाहियों व सबूतों के आधार पर फैसला होगा।

यह फैसला बेहद अहम है क्योंकि इससे यह स्पष्ट हो गया है कि <strong>POCSO </strong><strong>एक्ट बच्चों की सुरक्षा के लिए है और इसमें आरोपी का लिंग मायने नहीं रखता</strong>। चाहे पुरुष हो या महिला, अगर कोई नाबालिग से यौन शोषण करता है तो उस पर एक समान सजा का प्रावधान लागू होगा।]]></content:encoded>
					
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		<enclosure url="https://trendstopic.in/wp-content/uploads/2025/08/750x450_426148-karnataka-high-court-on-perjury-prosecution-pursuing-perjury-charges-when-a-prima-facie-deliberate-intention-is-disclosed-1.webp" length="178974" type="image/webp" />
	</item>
		<item>
		<title>Punjab में Launch हुआ &#8216;Project Jeevanjyot-2&#8217;: अब कोई बच्चा सड़कों पर भीख नहीं मांगेगा</title>
		<link>https://trendstopic.in/project-jeevanjyot-2-launched-in-punjab-no-child-will-beg-on-the-streets-anymore/</link>
					<comments>https://trendstopic.in/project-jeevanjyot-2-launched-in-punjab-no-child-will-beg-on-the-streets-anymore/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 18 Jul 2025 11:46:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[AAPGovernment]]></category>
		<category><![CDATA[BaljitKaur]]></category>
		<category><![CDATA[BhagwantMann]]></category>
		<category><![CDATA[ChildProtection]]></category>
		<category><![CDATA[ChildRights]]></category>
		<category><![CDATA[ChildWelfare]]></category>
		<category><![CDATA[HopeForChildren]]></category>
		<category><![CDATA[NoChildBegging]]></category>
		<category><![CDATA[ProjectJeevanjyot2]]></category>
		<category><![CDATA[punjab]]></category>
		<category><![CDATA[SocialReform]]></category>
		<category><![CDATA[StopChildAbuse]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://trendstopic.in/?p=24440</guid>

					<description><![CDATA[सरकार का सख्त फैसला, बच्चों से भीख मंगवाने वालों पर होगी कानूनी कार्रवाई, हो सकती है उम्रकैद तक की सज़ा

पंजाब सरकार ने राज्य में बच्चों से भीख मंगवाने की समस्या को खत्म करने के लिए एक बड़ी और सख्त पहल की है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुआई और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की सोच से प्रेरित होकर अब 'प्रोजेक्ट जीवनज्योत-2' की शुरुआत की गई है। इस योजना का मकसद है कि पंजाब की सड़कों पर कोई भी बच्चा भीख मांगते हुए नज़र न आए।

<strong>क्या है </strong><strong>‘</strong><strong>प्रोजेक्ट जीवनज्योत</strong><strong>’?</strong>
यह योजना सबसे पहले सितंबर 2024 में शुरू की गई थी। इसके पहले फेज़ में राज्य भर में बच्चों को भीख मांगने से रोकने और उन्हें सुरक्षित जगह पर पहुंचाने के लिए विशेष टीमें बनाई गईं। इन टीमों ने बीते 9 महीनों में 753 जगहों पर छापेमारी की और 367 बच्चों को बचाया। इनमें से 350 बच्चों को उनके परिवारों तक पहुंचाया गया, जबकि जिनके माता-पिता का कोई पता नहीं था, उन्हें बाल गृह (Child Care Homes) में रखा गया।

<strong>सरकार का फोकस सिर्फ रेस्क्यू पर नहीं</strong><strong>, </strong><strong>बच्चों का भविष्य भी सुरक्षित करना मकसद</strong>
सरकार ने न सिर्फ बच्चों को सड़कों से बचाया, बल्कि उन्हें स्कूलों में दाखिला भी दिलाया।
<ul>
 	<li><strong>183 </strong><strong>बच्चों को स्कूलों में भर्ती किया गया</strong></li>
 	<li><strong>13 </strong><strong>छोटे बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्रों में भेजा गया</strong></li>
 	<li><strong>30 </strong><strong>गरीब बच्चों को </strong><strong>₹4000 </strong><strong>प्रतिमाह की मदद दी जा रही है</strong></li>
 	<li><strong>16 </strong><strong>बच्चों को पेंशन योजना में जोड़ा गया</strong><strong>, </strong><strong>जिसमें </strong><strong>₹1500 </strong><strong>प्रतिमाह मिलते हैं</strong></li>
</ul>
महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि हर 3 महीने में इन बच्चों की स्थिति की दोबारा जांच की जाती है। लेकिन इस बीच एक बड़ा सवाल भी खड़ा हुआ — 57 बच्चे फिर से स्कूल या घर से गायब पाए गए। क्या वे फिर से किसी गिरोह के शिकार हो गए हैं?

<strong>यही सवाल बना </strong><strong>'</strong><strong>प्रोजेक्ट जीवनज्योत-</strong><strong>2' </strong><strong>की नींव</strong>
अब सरकार ने दूसरे फेज़ में और भी ज्यादा सख्ती और निगरानी के साथ काम शुरू किया है। केवल दो दिनों में 18 जगहों पर छापेमारी करके 41 बच्चों को बचाया गया है।

<strong>अब होगा </strong><strong>DNA </strong><strong>टेस्ट</strong>
जहां बच्चों के साथ आए बड़े लोगों की पहचान पर शक होता है, वहां <strong>DNA </strong><strong>टेस्ट</strong> करवाया जाएगा। यदि पता चला कि बच्चा उनके असली माता-पिता का नहीं है, तो <strong>बाल तस्करी</strong> और <strong>शोषण</strong> के केस में सख्त कार्रवाई की जाएगी।

<strong>भीख माफिया और शोषण करने वालों को होगी कड़ी सज़ा</strong>
<ul>
 	<li>बच्चों से भीख मंगवाने पर <strong>5 </strong><strong>साल से लेकर उम्रकैद तक की सज़ा</strong> हो सकती है</li>
 	<li><strong>शारीरिक हिंसा</strong> के केस में <strong>20 </strong><strong>साल तक की सज़ा</strong></li>
 	<li>अगर कोई <strong>माता-पिता बार-बार अपने बच्चे से भीख मंगवाते हैं</strong>, तो उन्हें <em>Unfit Parent</em> घोषित किया जाएगा और सरकार बच्चा अपने संरक्षण में ले लेगी</li>
</ul>
<strong>बठिंडा में दर्ज हुआ पहला केस</strong>
सरकार ने बताया कि बठिंडा में एक केस में 20 बच्चों को भीख मंगवाने से बचाया गया है और एफआईआर दर्ज की गई है।

<strong>दिव्यांग और शोषित बच्चों को मिलेगा फ्री इलाज</strong>
हाल में रेस्क्यू किए गए 17 बच्चे शारीरिक शोषण और दिव्यांगता का शिकार पाए गए। सरकार ने उन सभी को <strong>स्वास्थ्य बीमा</strong> के तहत कवर किया है ताकि उनका इलाज अच्छे से हो सके।

<strong>सरकार का साफ संदेश</strong>
मंत्री बलजीत कौर ने कहा, <em>“</em><em>पंजाब सरकार किसी भी बच्चे का शोषण बर्दाश्त नहीं करेगी। अगर कोई बच्चा भीख मांगते पाया गया</em><em>, </em><em>तो अब सिर्फ उसे बचाया नहीं जाएगा</em><em>, </em><em>बल्कि उसके पीछे मौजूद शोषण करने वालों को भी सज़ा दी जाएगी।</em><em>”</em>

'प्रोजेक्ट जीवनज्योत-2' सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में पंजाब सरकार का एक ठोस और ऐतिहासिक कदम है। अब हर बच्चा स्कूल जाएगा, सुरक्षित रहेगा और उसके सपनों में कोई रुकावट नहीं आएगी।

अगर आप इस योजना से जुड़ी किसी भी गतिविधि की जानकारी देना चाहते हैं, या किसी बच्चे को भीख मांगते हुए देखते हैं, तो नजदीकी बाल संरक्षण अधिकारी या चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर तुरंत संपर्क करें।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[सरकार का सख्त फैसला, बच्चों से भीख मंगवाने वालों पर होगी कानूनी कार्रवाई, हो सकती है उम्रकैद तक की सज़ा

पंजाब सरकार ने राज्य में बच्चों से भीख मंगवाने की समस्या को खत्म करने के लिए एक बड़ी और सख्त पहल की है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुआई और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की सोच से प्रेरित होकर अब 'प्रोजेक्ट जीवनज्योत-2' की शुरुआत की गई है। इस योजना का मकसद है कि पंजाब की सड़कों पर कोई भी बच्चा भीख मांगते हुए नज़र न आए।

<strong>क्या है </strong><strong>‘</strong><strong>प्रोजेक्ट जीवनज्योत</strong><strong>’?</strong>
यह योजना सबसे पहले सितंबर 2024 में शुरू की गई थी। इसके पहले फेज़ में राज्य भर में बच्चों को भीख मांगने से रोकने और उन्हें सुरक्षित जगह पर पहुंचाने के लिए विशेष टीमें बनाई गईं। इन टीमों ने बीते 9 महीनों में 753 जगहों पर छापेमारी की और 367 बच्चों को बचाया। इनमें से 350 बच्चों को उनके परिवारों तक पहुंचाया गया, जबकि जिनके माता-पिता का कोई पता नहीं था, उन्हें बाल गृह (Child Care Homes) में रखा गया।

<strong>सरकार का फोकस सिर्फ रेस्क्यू पर नहीं</strong><strong>, </strong><strong>बच्चों का भविष्य भी सुरक्षित करना मकसद</strong>
सरकार ने न सिर्फ बच्चों को सड़कों से बचाया, बल्कि उन्हें स्कूलों में दाखिला भी दिलाया।
<ul>
 	<li><strong>183 </strong><strong>बच्चों को स्कूलों में भर्ती किया गया</strong></li>
 	<li><strong>13 </strong><strong>छोटे बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्रों में भेजा गया</strong></li>
 	<li><strong>30 </strong><strong>गरीब बच्चों को </strong><strong>₹4000 </strong><strong>प्रतिमाह की मदद दी जा रही है</strong></li>
 	<li><strong>16 </strong><strong>बच्चों को पेंशन योजना में जोड़ा गया</strong><strong>, </strong><strong>जिसमें </strong><strong>₹1500 </strong><strong>प्रतिमाह मिलते हैं</strong></li>
</ul>
महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि हर 3 महीने में इन बच्चों की स्थिति की दोबारा जांच की जाती है। लेकिन इस बीच एक बड़ा सवाल भी खड़ा हुआ — 57 बच्चे फिर से स्कूल या घर से गायब पाए गए। क्या वे फिर से किसी गिरोह के शिकार हो गए हैं?

<strong>यही सवाल बना </strong><strong>'</strong><strong>प्रोजेक्ट जीवनज्योत-</strong><strong>2' </strong><strong>की नींव</strong>
अब सरकार ने दूसरे फेज़ में और भी ज्यादा सख्ती और निगरानी के साथ काम शुरू किया है। केवल दो दिनों में 18 जगहों पर छापेमारी करके 41 बच्चों को बचाया गया है।

<strong>अब होगा </strong><strong>DNA </strong><strong>टेस्ट</strong>
जहां बच्चों के साथ आए बड़े लोगों की पहचान पर शक होता है, वहां <strong>DNA </strong><strong>टेस्ट</strong> करवाया जाएगा। यदि पता चला कि बच्चा उनके असली माता-पिता का नहीं है, तो <strong>बाल तस्करी</strong> और <strong>शोषण</strong> के केस में सख्त कार्रवाई की जाएगी।

<strong>भीख माफिया और शोषण करने वालों को होगी कड़ी सज़ा</strong>
<ul>
 	<li>बच्चों से भीख मंगवाने पर <strong>5 </strong><strong>साल से लेकर उम्रकैद तक की सज़ा</strong> हो सकती है</li>
 	<li><strong>शारीरिक हिंसा</strong> के केस में <strong>20 </strong><strong>साल तक की सज़ा</strong></li>
 	<li>अगर कोई <strong>माता-पिता बार-बार अपने बच्चे से भीख मंगवाते हैं</strong>, तो उन्हें <em>Unfit Parent</em> घोषित किया जाएगा और सरकार बच्चा अपने संरक्षण में ले लेगी</li>
</ul>
<strong>बठिंडा में दर्ज हुआ पहला केस</strong>
सरकार ने बताया कि बठिंडा में एक केस में 20 बच्चों को भीख मंगवाने से बचाया गया है और एफआईआर दर्ज की गई है।

<strong>दिव्यांग और शोषित बच्चों को मिलेगा फ्री इलाज</strong>
हाल में रेस्क्यू किए गए 17 बच्चे शारीरिक शोषण और दिव्यांगता का शिकार पाए गए। सरकार ने उन सभी को <strong>स्वास्थ्य बीमा</strong> के तहत कवर किया है ताकि उनका इलाज अच्छे से हो सके।

<strong>सरकार का साफ संदेश</strong>
मंत्री बलजीत कौर ने कहा, <em>“</em><em>पंजाब सरकार किसी भी बच्चे का शोषण बर्दाश्त नहीं करेगी। अगर कोई बच्चा भीख मांगते पाया गया</em><em>, </em><em>तो अब सिर्फ उसे बचाया नहीं जाएगा</em><em>, </em><em>बल्कि उसके पीछे मौजूद शोषण करने वालों को भी सज़ा दी जाएगी।</em><em>”</em>

'प्रोजेक्ट जीवनज्योत-2' सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में पंजाब सरकार का एक ठोस और ऐतिहासिक कदम है। अब हर बच्चा स्कूल जाएगा, सुरक्षित रहेगा और उसके सपनों में कोई रुकावट नहीं आएगी।

अगर आप इस योजना से जुड़ी किसी भी गतिविधि की जानकारी देना चाहते हैं, या किसी बच्चे को भीख मांगते हुए देखते हैं, तो नजदीकी बाल संरक्षण अधिकारी या चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर तुरंत संपर्क करें।]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>Punjab Government का सख्त कदम: अब भिखारियों के साथ मिले Children का होगा DNA Test, असली Relationship की होगी जांच</title>
		<link>https://trendstopic.in/punjab-governments-strict-move-dna-tests-to-be-conducted-on-children-found-begging-with-adults-to-verify-real-relationship/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 18 Jul 2025 08:05:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चंडीगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[BaljitKaur]]></category>
		<category><![CDATA[BeggingFreePunjab]]></category>
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		<category><![CDATA[WelfareReform]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब सरकार ने एक बड़ा और जरूरी फैसला लिया है ताकि बच्चों के साथ होने वाले शोषण और मानव तस्करी (child trafficking) को रोका जा सके। अब अगर कोई बच्चा किसी बड़े व्यक्ति के साथ सड़कों पर भीख मांगता नजर आता है, तो सरकार उनकी <em>रिश्तेदारी की जांच</em> के लिए DNA टेस्ट कराएगी।

ये आदेश <em>सामाजिक सुरक्षा, </em><em>महिला एवं बाल विकास मंत्री बलजीत कौर</em> ने दिए हैं। उन्होंने कहा कि जब तक DNA रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक बच्चा चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशन (बाल देखभाल केंद्र) में रखा जाएगा और उसकी देखभाल <em>Child Welfare Committee</em> के ज़रिए की जाएगी।

अगर DNA टेस्ट से ये साबित हो जाता है कि वो बच्चा उस व्यक्ति का रिश्तेदार नहीं है, तो उस बड़े के खिलाफ <em>कड़ी कानूनी कार्रवाई</em> की जाएगी।

यह निर्देश सभी ज़िलों के डिप्टी कमिश्नरों (DC) को दिए गए हैं, जो ‘जीवनज्योत-2’ प्रोजेक्ट के तहत लागू होंगे। इस प्रोजेक्ट के तहत ज़िला स्तर पर चाइल्ड वेलफेयर कमेटी ऐसे मामलों की पहचान करेगी जहाँ बच्चा किसी ऐसे व्यक्ति के साथ भीख मांगता दिखे और उनका रिश्ता संदिग्ध लगे। फिर DC उस केस में DNA टेस्ट की सिफारिश करेंगे।

<strong>‘</strong><strong>भिखारी-मुक्त जिला</strong><strong>’ </strong><strong>बनाने की दिशा में कदम</strong>

बलजीत कौर ने पिछले महीने ही सभी ज़िलों को ‘<em>beggar-free district</em>’ बनाने के निर्देश दिए थे और कहा था कि सड़कों पर भीख मांग रहे बच्चों की पहचान करके उनके साथ हो रहे अत्याचार को रोका जाए। उन्होंने साफ कहा कि राज्य सरकार बच्चों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह गंभीर है और इस दिशा में <em>संवेदनशील लेकिन सख्त रवैया</em> अपनाया जाएगा।

<strong>सख्त कानून लाने की तैयारी</strong>

सरकार अब पंजाब बेगर एक्ट (1971) में भी बदलाव करने जा रही है। इसका मकसद है कि जो लोग बच्चों को जबरदस्ती भीख मंगवाते हैं – चाहे वो <em>माफिया, </em><em>गार्जियन या माता-पिता</em> ही क्यों ना हों – उन पर <em>भारी जुर्माना और सख्त सजा</em> दी जा सके। खासतौर पर जो लोग ट्रैफिक सिग्नल्स और सार्वजनिक जगहों पर बच्चों से भीख मंगवाते हैं, उनके खिलाफ अब सरकार एक्शन लेने वाली है।

<strong>इस फैसले से क्या होगा फायदा?</strong>
<ul>
 	<li>बच्चों की <em>तस्करी और शोषण</em> पर लगाम लगेगी।</li>
 	<li>बच्चों को <em>सुरक्षित वातावरण</em> मिलेगा।</li>
 	<li>नकली अभिभावकों और <em>भीख मंगवाने वाले गिरोह</em> पर शिकंजा कसेगा।</li>
 	<li>राज्य में <em>begging-free zones</em> बनाने में मदद मिलेगी।</li>
</ul>
पंजाब सरकार का यह कदम सराहनीय है, जो समाज के सबसे कमजोर वर्ग – बच्चों – की सुरक्षा और उनके भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब सरकार ने एक बड़ा और जरूरी फैसला लिया है ताकि बच्चों के साथ होने वाले शोषण और मानव तस्करी (child trafficking) को रोका जा सके। अब अगर कोई बच्चा किसी बड़े व्यक्ति के साथ सड़कों पर भीख मांगता नजर आता है, तो सरकार उनकी <em>रिश्तेदारी की जांच</em> के लिए DNA टेस्ट कराएगी।

ये आदेश <em>सामाजिक सुरक्षा, </em><em>महिला एवं बाल विकास मंत्री बलजीत कौर</em> ने दिए हैं। उन्होंने कहा कि जब तक DNA रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक बच्चा चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशन (बाल देखभाल केंद्र) में रखा जाएगा और उसकी देखभाल <em>Child Welfare Committee</em> के ज़रिए की जाएगी।

अगर DNA टेस्ट से ये साबित हो जाता है कि वो बच्चा उस व्यक्ति का रिश्तेदार नहीं है, तो उस बड़े के खिलाफ <em>कड़ी कानूनी कार्रवाई</em> की जाएगी।

यह निर्देश सभी ज़िलों के डिप्टी कमिश्नरों (DC) को दिए गए हैं, जो ‘जीवनज्योत-2’ प्रोजेक्ट के तहत लागू होंगे। इस प्रोजेक्ट के तहत ज़िला स्तर पर चाइल्ड वेलफेयर कमेटी ऐसे मामलों की पहचान करेगी जहाँ बच्चा किसी ऐसे व्यक्ति के साथ भीख मांगता दिखे और उनका रिश्ता संदिग्ध लगे। फिर DC उस केस में DNA टेस्ट की सिफारिश करेंगे।

<strong>‘</strong><strong>भिखारी-मुक्त जिला</strong><strong>’ </strong><strong>बनाने की दिशा में कदम</strong>

बलजीत कौर ने पिछले महीने ही सभी ज़िलों को ‘<em>beggar-free district</em>’ बनाने के निर्देश दिए थे और कहा था कि सड़कों पर भीख मांग रहे बच्चों की पहचान करके उनके साथ हो रहे अत्याचार को रोका जाए। उन्होंने साफ कहा कि राज्य सरकार बच्चों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह गंभीर है और इस दिशा में <em>संवेदनशील लेकिन सख्त रवैया</em> अपनाया जाएगा।

<strong>सख्त कानून लाने की तैयारी</strong>

सरकार अब पंजाब बेगर एक्ट (1971) में भी बदलाव करने जा रही है। इसका मकसद है कि जो लोग बच्चों को जबरदस्ती भीख मंगवाते हैं – चाहे वो <em>माफिया, </em><em>गार्जियन या माता-पिता</em> ही क्यों ना हों – उन पर <em>भारी जुर्माना और सख्त सजा</em> दी जा सके। खासतौर पर जो लोग ट्रैफिक सिग्नल्स और सार्वजनिक जगहों पर बच्चों से भीख मंगवाते हैं, उनके खिलाफ अब सरकार एक्शन लेने वाली है।

<strong>इस फैसले से क्या होगा फायदा?</strong>
<ul>
 	<li>बच्चों की <em>तस्करी और शोषण</em> पर लगाम लगेगी।</li>
 	<li>बच्चों को <em>सुरक्षित वातावरण</em> मिलेगा।</li>
 	<li>नकली अभिभावकों और <em>भीख मंगवाने वाले गिरोह</em> पर शिकंजा कसेगा।</li>
 	<li>राज्य में <em>begging-free zones</em> बनाने में मदद मिलेगी।</li>
</ul>
पंजाब सरकार का यह कदम सराहनीय है, जो समाज के सबसे कमजोर वर्ग – बच्चों – की सुरक्षा और उनके भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।]]></content:encoded>
					
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