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	<title>CentreVsState &#8211; Trends Topic</title>
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	<title>CentreVsState &#8211; Trends Topic</title>
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		<title>Punjab University Senate भंग पर सियासत: Mann सरकार जाएगी court, CM बोले – Centre को अधिकार नहीं, Haryana के ज़रिए एंट्री की कोशिश हुई</title>
		<link>https://trendstopic.in/politics-over-punjab-university-senate-dissolution-mann-government-to-move-court-cm-says-centre-has-no-authority-haryana-trying-to-enter-through-the-backdoor/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 02 Nov 2025 09:23:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[News]]></category>
		<category><![CDATA[चंडीगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[BhagwantMann]]></category>
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		<category><![CDATA[PunjabUniversity]]></category>
		<category><![CDATA[UniversitySenate]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब यूनिवर्सिटी की <strong>सीनेट (Senate)</strong> और <strong>सिंडिकेट (Syndicate)</strong> को केंद्र सरकार ने भंग कर दिया है। इसके बाद पंजाब सरकार और केंद्र सरकार के बीच बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।
<strong>मुख्यमंत्री भगवंत मान</strong> ने इस फैसले को “<strong>गैर-संवैधानिक और पंजाब विरोधी</strong>” बताया है और कहा है कि राज्य सरकार अब इस मामले में <strong>कानूनी लड़ाई</strong> लड़ेगी।
<h3><strong>केंद्र का फैसला और उसका समय</strong></h3>
31 अक्टूबर 2024 को पंजाब यूनिवर्सिटी की पुरानी सीनेट का कार्यकाल खत्म हो गया था।
नई सीनेट का चुनाव नहीं हुआ, और फिर <strong>1 </strong><strong>नवंबर 2025 (</strong><strong>पंजाब दिवस)</strong> के दिन केंद्र सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर सीनेट और सिंडिकेट दोनों को <strong>भंग (dissolve)</strong> कर दिया।
केंद्र ने कहा कि यूनिवर्सिटी का कामकाज सही तरह चलाने के लिए यह कदम उठाना ज़रूरी था।
<h3><strong>पंजाब सरकार का विरोध</strong></h3>
मुख्यमंत्री <strong>भगवंत मान</strong> ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि यह फैसला <strong>गैर-कानूनी</strong> है और <strong>केंद्र को ऐसा करने का अधिकार नहीं</strong> है।
उन्होंने कहा कि पंजाब यूनिवर्सिटी का मामला <strong>पंजाब पुनर्गठन एक्ट 1966</strong> और <strong>पंजाब यूनिवर्सिटी एक्ट 1947</strong> के तहत आता है, यानी इसका अधिकार <strong>पंजाब सरकार के पास</strong> है, न कि केंद्र के पास।
<h3><strong>सीएम भगवंत मान के 6 </strong><strong>मुख्य बयान</strong></h3>
<ol>
 	<li><strong>केंद्र को अधिकार नहीं:</strong> पंजाब यूनिवर्सिटी को भंग करने का अधिकार केंद्र को नहीं, बल्कि पंजाब सरकार को है।</li>
 	<li><strong>नोटिफिकेशन गैरकानूनी है:</strong> विधानसभा या संसद में संशोधन किए बिना सिर्फ नोटिफिकेशन जारी करना पूरी तरह असंवैधानिक है।</li>
 	<li><strong>हरियाणा की एंट्री की कोशिश:</strong> मान ने कहा कि पहले भी हरियाणा ने अपने कॉलेजों को पंजाब यूनिवर्सिटी से जोड़ने की कोशिश की थी, अब उसी बहाने से दोबारा एंट्री की जा रही है।</li>
 	<li><strong>सीनेट में हरियाणा के लोगों की एंट्री:</strong> उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार सीनेट में अपने लोगों को भेजने की योजना बना रही थी, जिसका हमें पहले से पता चल गया था।</li>
 	<li><strong>कानूनी लड़ाई का ऐलान:</strong> पंजाब सरकार अब इस फैसले के खिलाफ <strong>हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट</strong> जाएगी।</li>
 	<li><strong>धक्केशाही नहीं चलेगी:</strong> मान ने कहा कि “पहले बीबीएमबी और अब यूनिवर्सिटी – भाजपा लगातार पंजाब की प्रॉपर्टी और हकों पर कब्जा करने की कोशिश कर रही है, जो बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”</li>
</ol>
<h3><strong>पंजाब यूनिवर्सिटी का इतिहास और महत्व</strong></h3>
पंजाब यूनिवर्सिटी की शुरुआत <strong>लाहौर (अब पाकिस्तान)</strong> में हुई थी।
आजादी के बाद इसे पहले <strong>होशियारपुर</strong> और फिर <strong>चंडीगढ़</strong> स्थानांतरित किया गया।
पंजाब सरकार हर साल इस यूनिवर्सिटी को <strong>बजट से ग्रांट (financial grant)</strong> देती है।
इस वजह से पंजाब का दावा है कि यह <strong>राज्य की विरासत (heritage)</strong> और <strong>अधिकार (right)</strong> है।
<h3><strong>सीनेट क्या होती है?</strong></h3>
सीनेट यूनिवर्सिटी की सबसे ऊंची संस्था होती है, जो सभी बड़े फैसले लेती है।
इसका काम होता है –
<ul>
 	<li>यूनिवर्सिटी की <strong>policies </strong><strong>बनाना</strong>,</li>
 	<li><strong>administrative decisions </strong><strong>लेना</strong>,</li>
 	<li>और यूनिवर्सिटी का <strong>लोकतांत्रिक संचालन</strong> करना।</li>
</ul>
इसी सीनेट के चुनाव हर कुछ साल में होते हैं, लेकिन इस बार चुनाव न होने के कारण अब विवाद और गहरा हो गया है।
<h3><strong>हरियाणा से जुड़ा विवाद</strong></h3>
यह विवाद नया नहीं है।
हरियाणा लंबे समय से अपने कॉलेजों को पंजाब यूनिवर्सिटी के अधीन करने की मांग करता रहा है।
पंजाब का कहना है कि ऐसा करने से यूनिवर्सिटी की “<strong>पंजाबी पहचान और स्वायत्तता (autonomy)</strong>” खत्म हो जाएगी।
सीएम मान का आरोप है कि हरियाणा सरकार सीनेट में अपने प्रतिनिधियों को लाने की कोशिश कर रही थी, जिससे यूनिवर्सिटी के फैसलों पर उसका असर बढ़ जाए।
<h3><strong>केंद्र का पक्ष (संभावित तर्क)</strong></h3>
केंद्र का कहना है कि सीनेट का कार्यकाल खत्म हो चुका था और चुनाव न होने की वजह से यूनिवर्सिटी का प्रशासनिक काम रुक सकता था।
इसलिए अस्थायी तौर पर यह कदम उठाना पड़ा ताकि यूनिवर्सिटी का सिस्टम चलता रहे।
<h3><strong>अब आगे क्या होगा</strong></h3>
पंजाब सरकार ने साफ कर दिया है कि वह इस फैसले को <strong>कोर्ट में चुनौती</strong> देगी।
राज्य सरकार इसे पंजाब की “<strong>शैक्षणिक और सांस्कृतिक विरासत</strong>” से जुड़ा मामला बता रही है।
अब देखना होगा कि यह मामला <strong>राज्य बनाम केंद्र</strong> के अधिकार क्षेत्र की कानूनी लड़ाई में कैसे आगे बढ़ता है।

&nbsp;
<ul>
 	<li>केंद्र ने पंजाब यूनिवर्सिटी की सीनेट और सिंडिकेट भंग की।</li>
 	<li>पंजाब सरकार ने इसे “पंजाब विरोधी और गैर-कानूनी” बताया।</li>
 	<li>भगवंत मान बोले — “पंजाब यूनिवर्सिटी हमारी विरासत है, इसे किसी भी कीमत पर छीने नहीं देंगे।”</li>
 	<li>अब यह विवाद कोर्ट तक जाने वाला है।</li>
</ul>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब यूनिवर्सिटी की <strong>सीनेट (Senate)</strong> और <strong>सिंडिकेट (Syndicate)</strong> को केंद्र सरकार ने भंग कर दिया है। इसके बाद पंजाब सरकार और केंद्र सरकार के बीच बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।
<strong>मुख्यमंत्री भगवंत मान</strong> ने इस फैसले को “<strong>गैर-संवैधानिक और पंजाब विरोधी</strong>” बताया है और कहा है कि राज्य सरकार अब इस मामले में <strong>कानूनी लड़ाई</strong> लड़ेगी।
<h3><strong>केंद्र का फैसला और उसका समय</strong></h3>
31 अक्टूबर 2024 को पंजाब यूनिवर्सिटी की पुरानी सीनेट का कार्यकाल खत्म हो गया था।
नई सीनेट का चुनाव नहीं हुआ, और फिर <strong>1 </strong><strong>नवंबर 2025 (</strong><strong>पंजाब दिवस)</strong> के दिन केंद्र सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर सीनेट और सिंडिकेट दोनों को <strong>भंग (dissolve)</strong> कर दिया।
केंद्र ने कहा कि यूनिवर्सिटी का कामकाज सही तरह चलाने के लिए यह कदम उठाना ज़रूरी था।
<h3><strong>पंजाब सरकार का विरोध</strong></h3>
मुख्यमंत्री <strong>भगवंत मान</strong> ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि यह फैसला <strong>गैर-कानूनी</strong> है और <strong>केंद्र को ऐसा करने का अधिकार नहीं</strong> है।
उन्होंने कहा कि पंजाब यूनिवर्सिटी का मामला <strong>पंजाब पुनर्गठन एक्ट 1966</strong> और <strong>पंजाब यूनिवर्सिटी एक्ट 1947</strong> के तहत आता है, यानी इसका अधिकार <strong>पंजाब सरकार के पास</strong> है, न कि केंद्र के पास।
<h3><strong>सीएम भगवंत मान के 6 </strong><strong>मुख्य बयान</strong></h3>
<ol>
 	<li><strong>केंद्र को अधिकार नहीं:</strong> पंजाब यूनिवर्सिटी को भंग करने का अधिकार केंद्र को नहीं, बल्कि पंजाब सरकार को है।</li>
 	<li><strong>नोटिफिकेशन गैरकानूनी है:</strong> विधानसभा या संसद में संशोधन किए बिना सिर्फ नोटिफिकेशन जारी करना पूरी तरह असंवैधानिक है।</li>
 	<li><strong>हरियाणा की एंट्री की कोशिश:</strong> मान ने कहा कि पहले भी हरियाणा ने अपने कॉलेजों को पंजाब यूनिवर्सिटी से जोड़ने की कोशिश की थी, अब उसी बहाने से दोबारा एंट्री की जा रही है।</li>
 	<li><strong>सीनेट में हरियाणा के लोगों की एंट्री:</strong> उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार सीनेट में अपने लोगों को भेजने की योजना बना रही थी, जिसका हमें पहले से पता चल गया था।</li>
 	<li><strong>कानूनी लड़ाई का ऐलान:</strong> पंजाब सरकार अब इस फैसले के खिलाफ <strong>हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट</strong> जाएगी।</li>
 	<li><strong>धक्केशाही नहीं चलेगी:</strong> मान ने कहा कि “पहले बीबीएमबी और अब यूनिवर्सिटी – भाजपा लगातार पंजाब की प्रॉपर्टी और हकों पर कब्जा करने की कोशिश कर रही है, जो बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”</li>
</ol>
<h3><strong>पंजाब यूनिवर्सिटी का इतिहास और महत्व</strong></h3>
पंजाब यूनिवर्सिटी की शुरुआत <strong>लाहौर (अब पाकिस्तान)</strong> में हुई थी।
आजादी के बाद इसे पहले <strong>होशियारपुर</strong> और फिर <strong>चंडीगढ़</strong> स्थानांतरित किया गया।
पंजाब सरकार हर साल इस यूनिवर्सिटी को <strong>बजट से ग्रांट (financial grant)</strong> देती है।
इस वजह से पंजाब का दावा है कि यह <strong>राज्य की विरासत (heritage)</strong> और <strong>अधिकार (right)</strong> है।
<h3><strong>सीनेट क्या होती है?</strong></h3>
सीनेट यूनिवर्सिटी की सबसे ऊंची संस्था होती है, जो सभी बड़े फैसले लेती है।
इसका काम होता है –
<ul>
 	<li>यूनिवर्सिटी की <strong>policies </strong><strong>बनाना</strong>,</li>
 	<li><strong>administrative decisions </strong><strong>लेना</strong>,</li>
 	<li>और यूनिवर्सिटी का <strong>लोकतांत्रिक संचालन</strong> करना।</li>
</ul>
इसी सीनेट के चुनाव हर कुछ साल में होते हैं, लेकिन इस बार चुनाव न होने के कारण अब विवाद और गहरा हो गया है।
<h3><strong>हरियाणा से जुड़ा विवाद</strong></h3>
यह विवाद नया नहीं है।
हरियाणा लंबे समय से अपने कॉलेजों को पंजाब यूनिवर्सिटी के अधीन करने की मांग करता रहा है।
पंजाब का कहना है कि ऐसा करने से यूनिवर्सिटी की “<strong>पंजाबी पहचान और स्वायत्तता (autonomy)</strong>” खत्म हो जाएगी।
सीएम मान का आरोप है कि हरियाणा सरकार सीनेट में अपने प्रतिनिधियों को लाने की कोशिश कर रही थी, जिससे यूनिवर्सिटी के फैसलों पर उसका असर बढ़ जाए।
<h3><strong>केंद्र का पक्ष (संभावित तर्क)</strong></h3>
केंद्र का कहना है कि सीनेट का कार्यकाल खत्म हो चुका था और चुनाव न होने की वजह से यूनिवर्सिटी का प्रशासनिक काम रुक सकता था।
इसलिए अस्थायी तौर पर यह कदम उठाना पड़ा ताकि यूनिवर्सिटी का सिस्टम चलता रहे।
<h3><strong>अब आगे क्या होगा</strong></h3>
पंजाब सरकार ने साफ कर दिया है कि वह इस फैसले को <strong>कोर्ट में चुनौती</strong> देगी।
राज्य सरकार इसे पंजाब की “<strong>शैक्षणिक और सांस्कृतिक विरासत</strong>” से जुड़ा मामला बता रही है।
अब देखना होगा कि यह मामला <strong>राज्य बनाम केंद्र</strong> के अधिकार क्षेत्र की कानूनी लड़ाई में कैसे आगे बढ़ता है।

&nbsp;
<ul>
 	<li>केंद्र ने पंजाब यूनिवर्सिटी की सीनेट और सिंडिकेट भंग की।</li>
 	<li>पंजाब सरकार ने इसे “पंजाब विरोधी और गैर-कानूनी” बताया।</li>
 	<li>भगवंत मान बोले — “पंजाब यूनिवर्सिटी हमारी विरासत है, इसे किसी भी कीमत पर छीने नहीं देंगे।”</li>
 	<li>अब यह विवाद कोर्ट तक जाने वाला है।</li>
</ul>]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>&#8220;Vote चोरी के बाद अब Ration चोरी&#8221; – CM Bhagwant Mann का Centre पर बड़ा हमला</title>
		<link>https://trendstopic.in/after-vote-theft-now-ration-theft-cm-bhagwant-manns-big-attack-on-centre/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 Aug 2025 05:05:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[AAP]]></category>
		<category><![CDATA[BhagwantMann]]></category>
		<category><![CDATA[BJP]]></category>
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		<category><![CDATA[VoteTheft]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शनिवार को केंद्र सरकार पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि <strong>केंद्र ने राज्य को करीब </strong><strong>8,02,493 </strong><strong>राशन कार्ड काटने के निर्देश दिए हैं</strong>। मान के मुताबिक, अगर यह फैसला लागू होता है तो लगभग <strong>32 </strong><strong>लाख लोगों की थाली से निवाला छिन जाएगा</strong>, क्योंकि हर परिवार में औसतन चार सदस्य होते हैं।

मान ने कहा, <em>“</em><em>ये वही लोग हैं जो खुद को जनता का हितैषी बताते हैं और भारत को विश्वगुरु बनाने की बात करते हैं। लेकिन असल में ये </em><em>‘vote chor’ </em><em>ही नहीं बल्कि </em><em>‘ration chor’ </em><em>भी हैं। मेरे रहते पंजाब का एक भी राशन कार्ड रद्द नहीं होगा।</em><em>”</em>

<strong>केंद्र बनाम पंजाब: असली विवाद क्या है</strong><strong>?</strong>
<ul>
 	<li>केंद्र सरकार का कहना है कि पंजाब में बड़ी संख्या में ऐसे लोग राशन ले रहे हैं जो <strong>पात्रता मानदंड</strong> पूरे नहीं करते।</li>
 	<li>जिन आधारों पर कार्ड रद्द करने की बात की गई है, उनमें शामिल है:
<ul>
 	<li>परिवार के पास कार या जीप होना</li>
 	<li>किसी सदस्य की सरकारी नौकरी होना</li>
 	<li>सालाना 25 लाख रुपये तक का कारोबार होना</li>
 	<li>2.5 एकड़ से ज्यादा जमीन होना</li>
</ul>
</li>
 	<li>केंद्र का मानना है कि ऐसे लोगों को PDS (Public Distribution System) से मुफ्त राशन नहीं मिलना चाहिए।</li>
</ul>
<strong>CM </strong><strong>मान का पलटवार</strong>

CM मान ने सवाल उठाया कि <em>“</em><em>अगर एक परिवार में दो भाई हैं</em><em>, </em><em>जिनमें से एक सरकारी नौकरी करता है और राशन कार्ड उसी भाई के नाम है</em><em>, </em><em>तो क्या इसका मतलब है कि दूसरे भाई का परिवार भूखा रहे</em><em>? </em><em>क्या यह न्याय है</em><em>?”</em>

उन्होंने कहा कि पंजाब जैसे राज्य के लिए एक ही तरह के नियम लागू नहीं हो सकते, क्योंकि यहां की <strong>living standards</strong> बाकी राज्यों से अलग हैं।
<ul>
 	<li>उन्होंने उदाहरण दिया कि <em>“</em><em>प्रधानमंत्री आवास योजना</em><em>”</em> में भी पंजाब का कोई व्यक्ति पात्रता मानदंड में फिट नहीं बैठता।</li>
 	<li>केंद्र कहता है कि अगर घर में स्कूटर, गैस सिलिंडर या पक्का मकान है तो लाभ नहीं मिलेगा, जबकि हर घर में <strong>Ujjwala Yojana</strong> के तहत गैस सिलिंडर तो दिया ही गया है।</li>
</ul>
<strong>"</strong><strong>हम खुद करेंगे जांच"</strong>
<ul>
 	<li>मान ने कहा कि राज्य सरकार पहले ही <strong>1.29 </strong><strong>करोड़ राशन कार्डों की जांच कर चुकी है</strong>, जबकि पंजाब में कुल <strong>1.53 </strong><strong>करोड़ लाभार्थी</strong> हैं।</li>
 	<li>बाकी बचे कार्डों की जांच के लिए केंद्र से <strong>6 </strong><strong>महीने का समय मांगा गया है</strong>।</li>
 	<li>उन्होंने साफ कहा कि <em>“</em><em>जांच हम करेंगे</em><em>, </em><em>दिल्ली में बैठे लोग नहीं। उन्होंने </em><em>AI </em><em>से डेटा निकाला है। लेकिन असल हक़ीक़त हम ही पता करेंगे।</em><em>”</em></li>
</ul>
<strong>BJP </strong><strong>पर गंभीर आरोप</strong>

मान ने बीजेपी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि:
<ul>
 	<li>बीजेपी नेता पंजाब में <strong>कैम्प लगाकर लोगों का </strong><strong>personal data </strong><strong>जुटा रहे हैं</strong>, जिसमें यह तक पूछा जाता है कि <em>“</em><em>आपने पिछली बार किसे वोट दिया था।</em><em>”</em></li>
 	<li>इसे उन्होंने <strong>गोपनीयता का उल्लंघन और </strong><strong>‘vote chori’ </strong><strong>की साज़िश</strong> बताया।</li>
 	<li>उन्होंने आरोप लगाया कि <em>“</em><em>हरियाणा और महाराष्ट्र तक में वोट गिने जाने में गड़बड़ी पकड़ी गई है। ये अपने ही नेताओं को नहीं छोड़ते।</em><em>”</em></li>
</ul>
<strong>विपक्ष की प्रतिक्रिया</strong>
<ul>
 	<li>पंजाब बीजेपी अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने AAP पर पलटवार करते हुए कहा कि राशन कार्ड और वितरण पूरी तरह <strong>राज्य सरकार की जिम्मेदारी</strong> है।</li>
 	<li>जाखड़ ने आरोप लगाया कि <strong>AAP </strong><strong>सरकार ने </strong><strong>2023 </strong><strong>में खुद </strong><strong>10.5 </strong><strong>लाख राशन कार्ड रद्द किए थे</strong>, जिन्हें चुनाव आते ही वापस ले लिया गया।</li>
 	<li>उनके मुताबिक, AAP मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रही है और लोगों को गुमराह कर रही है।</li>
</ul>
<strong>बाढ़ और धान खरीद पर भी बोले मान</strong>

पत्रकारों से बातचीत में CM मान ने बाढ़ की स्थिति और धान खरीद की तैयारियों पर भी बात की।
<ul>
 	<li>उन्होंने कहा कि <strong>पोंग डैम का पानी छोड़े जाने से कुछ इलाकों में बाढ़ आई है</strong>, लेकिन स्थिति नियंत्रण में है और जानमाल का बड़ा नुकसान नहीं हुआ।</li>
 	<li>राज्य सरकार ने <strong>स्पेशल गिरदावरी</strong> के आदेश दिए हैं और प्रभावित लोगों को मुआवज़ा मिलेगा।</li>
 	<li>धान की खरीद को लेकर उन्होंने भरोसा दिलाया कि <strong>हर महीने </strong><strong>10 </strong><strong>लाख मीट्रिक टन अनाज बाहर भेजा जा रहा है</strong>, इसलिए स्टोरेज की कोई कमी नहीं होगी।</li>
</ul>
<strong>CM </strong><strong>मान का साफ संदेश</strong>

<em>“</em><em>पंजाब ने पूरे देश का पेट भरा है</em><em>, </em><em>अब दिल्ली की सरकार हमारे ही लोगों से निवाला छीनना चाहती है। जब तक पंजाब में </em><em>AAP </em><em>की सरकार है</em><em>, </em><em>कोई भी परिवार भूखा नहीं सोएगा।</em><em>”</em>

कुल मिलाकर, यह विवाद सिर्फ <strong>राशन कार्ड की पात्रता</strong> का नहीं, बल्कि <strong>केंद्र और राज्य के रिश्तों</strong>, राजनीति और लोगों की रोज़मर्रा की जरूरतों से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शनिवार को केंद्र सरकार पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि <strong>केंद्र ने राज्य को करीब </strong><strong>8,02,493 </strong><strong>राशन कार्ड काटने के निर्देश दिए हैं</strong>। मान के मुताबिक, अगर यह फैसला लागू होता है तो लगभग <strong>32 </strong><strong>लाख लोगों की थाली से निवाला छिन जाएगा</strong>, क्योंकि हर परिवार में औसतन चार सदस्य होते हैं।

मान ने कहा, <em>“</em><em>ये वही लोग हैं जो खुद को जनता का हितैषी बताते हैं और भारत को विश्वगुरु बनाने की बात करते हैं। लेकिन असल में ये </em><em>‘vote chor’ </em><em>ही नहीं बल्कि </em><em>‘ration chor’ </em><em>भी हैं। मेरे रहते पंजाब का एक भी राशन कार्ड रद्द नहीं होगा।</em><em>”</em>

<strong>केंद्र बनाम पंजाब: असली विवाद क्या है</strong><strong>?</strong>
<ul>
 	<li>केंद्र सरकार का कहना है कि पंजाब में बड़ी संख्या में ऐसे लोग राशन ले रहे हैं जो <strong>पात्रता मानदंड</strong> पूरे नहीं करते।</li>
 	<li>जिन आधारों पर कार्ड रद्द करने की बात की गई है, उनमें शामिल है:
<ul>
 	<li>परिवार के पास कार या जीप होना</li>
 	<li>किसी सदस्य की सरकारी नौकरी होना</li>
 	<li>सालाना 25 लाख रुपये तक का कारोबार होना</li>
 	<li>2.5 एकड़ से ज्यादा जमीन होना</li>
</ul>
</li>
 	<li>केंद्र का मानना है कि ऐसे लोगों को PDS (Public Distribution System) से मुफ्त राशन नहीं मिलना चाहिए।</li>
</ul>
<strong>CM </strong><strong>मान का पलटवार</strong>

CM मान ने सवाल उठाया कि <em>“</em><em>अगर एक परिवार में दो भाई हैं</em><em>, </em><em>जिनमें से एक सरकारी नौकरी करता है और राशन कार्ड उसी भाई के नाम है</em><em>, </em><em>तो क्या इसका मतलब है कि दूसरे भाई का परिवार भूखा रहे</em><em>? </em><em>क्या यह न्याय है</em><em>?”</em>

उन्होंने कहा कि पंजाब जैसे राज्य के लिए एक ही तरह के नियम लागू नहीं हो सकते, क्योंकि यहां की <strong>living standards</strong> बाकी राज्यों से अलग हैं।
<ul>
 	<li>उन्होंने उदाहरण दिया कि <em>“</em><em>प्रधानमंत्री आवास योजना</em><em>”</em> में भी पंजाब का कोई व्यक्ति पात्रता मानदंड में फिट नहीं बैठता।</li>
 	<li>केंद्र कहता है कि अगर घर में स्कूटर, गैस सिलिंडर या पक्का मकान है तो लाभ नहीं मिलेगा, जबकि हर घर में <strong>Ujjwala Yojana</strong> के तहत गैस सिलिंडर तो दिया ही गया है।</li>
</ul>
<strong>"</strong><strong>हम खुद करेंगे जांच"</strong>
<ul>
 	<li>मान ने कहा कि राज्य सरकार पहले ही <strong>1.29 </strong><strong>करोड़ राशन कार्डों की जांच कर चुकी है</strong>, जबकि पंजाब में कुल <strong>1.53 </strong><strong>करोड़ लाभार्थी</strong> हैं।</li>
 	<li>बाकी बचे कार्डों की जांच के लिए केंद्र से <strong>6 </strong><strong>महीने का समय मांगा गया है</strong>।</li>
 	<li>उन्होंने साफ कहा कि <em>“</em><em>जांच हम करेंगे</em><em>, </em><em>दिल्ली में बैठे लोग नहीं। उन्होंने </em><em>AI </em><em>से डेटा निकाला है। लेकिन असल हक़ीक़त हम ही पता करेंगे।</em><em>”</em></li>
</ul>
<strong>BJP </strong><strong>पर गंभीर आरोप</strong>

मान ने बीजेपी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि:
<ul>
 	<li>बीजेपी नेता पंजाब में <strong>कैम्प लगाकर लोगों का </strong><strong>personal data </strong><strong>जुटा रहे हैं</strong>, जिसमें यह तक पूछा जाता है कि <em>“</em><em>आपने पिछली बार किसे वोट दिया था।</em><em>”</em></li>
 	<li>इसे उन्होंने <strong>गोपनीयता का उल्लंघन और </strong><strong>‘vote chori’ </strong><strong>की साज़िश</strong> बताया।</li>
 	<li>उन्होंने आरोप लगाया कि <em>“</em><em>हरियाणा और महाराष्ट्र तक में वोट गिने जाने में गड़बड़ी पकड़ी गई है। ये अपने ही नेताओं को नहीं छोड़ते।</em><em>”</em></li>
</ul>
<strong>विपक्ष की प्रतिक्रिया</strong>
<ul>
 	<li>पंजाब बीजेपी अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने AAP पर पलटवार करते हुए कहा कि राशन कार्ड और वितरण पूरी तरह <strong>राज्य सरकार की जिम्मेदारी</strong> है।</li>
 	<li>जाखड़ ने आरोप लगाया कि <strong>AAP </strong><strong>सरकार ने </strong><strong>2023 </strong><strong>में खुद </strong><strong>10.5 </strong><strong>लाख राशन कार्ड रद्द किए थे</strong>, जिन्हें चुनाव आते ही वापस ले लिया गया।</li>
 	<li>उनके मुताबिक, AAP मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रही है और लोगों को गुमराह कर रही है।</li>
</ul>
<strong>बाढ़ और धान खरीद पर भी बोले मान</strong>

पत्रकारों से बातचीत में CM मान ने बाढ़ की स्थिति और धान खरीद की तैयारियों पर भी बात की।
<ul>
 	<li>उन्होंने कहा कि <strong>पोंग डैम का पानी छोड़े जाने से कुछ इलाकों में बाढ़ आई है</strong>, लेकिन स्थिति नियंत्रण में है और जानमाल का बड़ा नुकसान नहीं हुआ।</li>
 	<li>राज्य सरकार ने <strong>स्पेशल गिरदावरी</strong> के आदेश दिए हैं और प्रभावित लोगों को मुआवज़ा मिलेगा।</li>
 	<li>धान की खरीद को लेकर उन्होंने भरोसा दिलाया कि <strong>हर महीने </strong><strong>10 </strong><strong>लाख मीट्रिक टन अनाज बाहर भेजा जा रहा है</strong>, इसलिए स्टोरेज की कोई कमी नहीं होगी।</li>
</ul>
<strong>CM </strong><strong>मान का साफ संदेश</strong>

<em>“</em><em>पंजाब ने पूरे देश का पेट भरा है</em><em>, </em><em>अब दिल्ली की सरकार हमारे ही लोगों से निवाला छीनना चाहती है। जब तक पंजाब में </em><em>AAP </em><em>की सरकार है</em><em>, </em><em>कोई भी परिवार भूखा नहीं सोएगा।</em><em>”</em>

कुल मिलाकर, यह विवाद सिर्फ <strong>राशन कार्ड की पात्रता</strong> का नहीं, बल्कि <strong>केंद्र और राज्य के रिश्तों</strong>, राजनीति और लोगों की रोज़मर्रा की जरूरतों से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है।]]></content:encoded>
					
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