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	<title>AlFalahUniversity &#8211; Trends Topic</title>
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	<title>AlFalahUniversity &#8211; Trends Topic</title>
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		<title>Delhi Blast: Dr. Umar Nabi कैसे बना Suicide Bomber, कैसे चला रहा था Brainwash Network — पूरी कहानी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 19 Nov 2025 05:38:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[AlFalahUniversity]]></category>
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		<category><![CDATA[TerrorNetwork]]></category>
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					<description><![CDATA[दिल्ली के लाल किले के सामने <strong>10 </strong><strong>नवंबर</strong> को हुए I-20 कार ब्लास्ट ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। इस धमाके में <strong>15 </strong><strong>लोगों की मौत</strong> हो गई और <strong>20 </strong><strong>से ज्यादा लोग घायल</strong> हुए। बाद में पता चला कि यह धमाका किसी एक्सिडेंट की वजह से नहीं, बल्कि <strong>एक प्लान्ड सुसाइड अटैक</strong> था, जिसे अंजाम दिया था—<strong>डॉ. उमर नबी</strong> ने।

जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस हमले के पीछे छिपा <strong>एक बड़ा टेरर मॉड्यूल</strong> सामने आ रहा है। इस मॉड्यूल का कनेक्शन <strong>फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी</strong>, कई डॉक्टरों और देश के अलग-अलग राज्यों से जुड़े लोगों से मिल रहा है।

<strong>कैसे शुरू हुई जांच और क्या मिला</strong><strong>?</strong>

NIA और दूसरी एजेंसियों ने बताया कि <strong>डॉ. उमर सिर्फ खुद को उड़ाने नहीं आया था</strong>, वह अपने जैसे <strong>और भी सुसाइड बॉम्बर तैयार कर रहा था</strong>। इसके लिए वह लगातार <strong>वीडियो बनाकर अलग-अलग युवाओं को भेजता</strong> था।

जांच में गिरफ्तार हुए लोगों के मोबाइल से कुल:
<ul>
 	<li><strong>70 </strong><strong>से ज्यादा वीडियो</strong></li>
 	<li>जिनमें से <strong>12 </strong><strong>वीडियो उमर ने खुद शूट किए</strong></li>
</ul>
ये वीडियो <strong>11 </strong><strong>युवाओं को भेजे गए</strong> थे। इनमें:
<ul>
 	<li><strong>7 </strong><strong>कश्मीरी मूल</strong> के</li>
 	<li>सभी का लिंक <strong>अल-फलाह यूनिवर्सिटी</strong> से</li>
 	<li>बाकी <strong>4 </strong><strong>युवक</strong><strong>—UP, Kerala </strong><strong>और </strong><strong>Karnataka</strong> के रहने वाले मिले</li>
</ul>
उमर इन वीडियो में युवाओं को समझाता था कि यह कोई “<strong>Suicide Attack</strong>” नहीं है, बल्कि “<strong>Shahadat Operation</strong>” है—यानी अपनी जान देकर ‘धर्म’ के लिए लड़ाई।

<strong>आमिर रशीद ने दिलवाई कार</strong><strong>, </strong><strong>लेकिन खुद नहीं बनना चाहता था सुसाइड बॉम्बर</strong>

आमिर रशीद अली नाम के युवक ने उमर को <strong>I-20 </strong><strong>कार दिलवाई</strong>, लेकिन वह खुद हमला नहीं करना चाहता था।
जब उमर को यह बात पता चली तो उसने <strong>उसी को ब्रेनवॉश करने वाले वीडियो भेजने शुरू</strong> कर दिए।

एजेंसियों का शक है कि उमर <strong>एक पूरी फिदायीन (</strong><strong>Fidayeen) </strong><strong>टीम</strong> बना रहा था और उसका टारगेट अलग-अलग राज्यों के युवा थे।

<strong>पुलवामा में उमर की संदिग्ध हरकतें</strong>

धमाके से करीब <strong>दो हफ्ते पहले</strong> उमर अपने <strong>पुलवामा के कोइल गांव</strong> गया था।
वह अपने भाई <strong>जहूर इलाही</strong> को एक मोबाइल फोन देकर बोला:

“अगर मेरे बारे में कोई खबर आए… ये फोन पानी में फेंक देना।”

और हुआ भी यही।
9 नवंबर को उसके दोस्तों की गिरफ्तारी की खबर आई तो जहूर डर गया और उसने <strong>फोन तालाब में फेंक दिया</strong>।

बाद में यह फोन मिल गया—खराब था, लेकिन एजेंसियों ने इसमें से <strong>एक बड़ा वीडियो रिकवर कर लिया</strong>, जिसमें उमर खुद कह रहा था:

“यह suicide नहीं, martyrdom operation है।”

<strong>धमाके से पहले </strong><strong>10 </strong><strong>दिनों तक खुद को कमरे में बंद रखा</strong>

उमर ने नूंह की हिदायत कॉलोनी में <strong>10 </strong><strong>दिन खुद को एक कमरे में बंद रखा</strong>।
<ul>
 	<li>वह टॉयलेट के लिए भी बाहर नहीं निकला</li>
 	<li>न नहाया, न कपड़े बदले</li>
 	<li>कमरे में ही गंदगी फैल गई</li>
 	<li>सिर्फ रात में थोड़ी देर खाने के लिए बाहर निकलता था</li>
</ul>
जांच एजेंसियों के अनुसार यह दिखाता है कि उमर का <strong>ब्रेनवॉश </strong><strong>100% </strong><strong>हो चुका था</strong>, वह एक कट्टर सुसाइड मिशन के लिए खुद को पूरी तरह तैयार कर चुका था।

<strong>अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर </strong><strong>ED </strong><strong>का शिकंजा</strong>

इस केस में सबसे बड़ा नाम <strong>अल-फलाह यूनिवर्सिटी</strong><strong>, </strong><strong>फरीदाबाद</strong> का सामने आया है।

ED ने:
<ul>
 	<li>दिल्ली और हरियाणा में <strong>25 </strong><strong>ठिकानों पर छापेमारी</strong> की</li>
 	<li>करोड़ों रुपये की <strong>फंड हेराफेरी</strong><strong>, </strong><strong>फर्जी मान्यता (</strong><strong>fake accreditation)</strong> और</li>
 	<li><strong>9 </strong><strong>शैल कंपनियों</strong> का नेटवर्क पकड़ा</li>
</ul>
छापेमारी के बाद यूनिवर्सिटी के <strong>चेयरमैन जवाद सिद्दीकी</strong> को <strong>मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार</strong> किया गया।
उनके घर से <strong>48 </strong><strong>लाख रुपये कैश</strong> भी मिला।

गिरफ्तार लोगों में अब तक:
<ul>
 	<li><strong>8 </strong><strong>आरोपी</strong>, जिनमें</li>
 	<li><strong>5 Doctor </strong><strong>हैं</strong>
जो सीधे या इंडाइरेक्टली इस टेरर नेटवर्क से जुड़े पाए गए।</li>
</ul>
<strong>डॉ. शाहीन </strong><strong>— </strong><strong>मैडम सर्जन का रोल</strong>

एजेंसियों ने एक और बड़ा नाम पकड़ा—<strong>डॉ. शाहीन सईद</strong>, जिसे “<strong>Madam Surgeon</strong>” कहा जाता था।
उनके पास:
<ul>
 	<li><strong>7 </strong><strong>बैंक अकाउंट</strong></li>
 	<li><strong>3 </strong><strong>पासपोर्ट</strong></li>
 	<li>और हाल ही में एक नया पासपोर्ट अल-फलाह यूनिवर्सिटी के पते से बनाने की कोशिश</li>
</ul>
इनका रोल इस मॉड्यूल में फाइनेंशियल और लॉजिस्टिक सपोर्ट से जुड़ा माना जा रहा है।

<strong>जम्मू की भलवाल जेल में भी छापेमारी</strong>

दिल्ली ब्लास्ट के बाद जम्मू की <strong>हाई सिक्योरिटी कोट भलवाल जेल</strong> में भी छापा पड़ा।
शक है कि जेल के अंदर से भी कुछ कैदी <strong>आतंकी मॉड्यूल को निर्देश</strong> भेज रहे थे।
इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, पेपर और नंबरों का डाटा जुटाया जा रहा है।

<strong>क्या कश्मीर में सऊदी अरब वाला मॉडल चल सकता है</strong><strong>?</strong>

कई सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि कश्मीर में बढ़ती कट्टरपंथी सोच को रोकने के लिए <strong>सऊदी अरब का मॉडल</strong> लागू किया जा सकता है।
सऊदी ने 20 साल पहले:
<ul>
 	<li>सही इस्लामी शिक्षा</li>
 	<li>अच्छे धर्मगुरुओं की मदद</li>
 	<li>और awareness camps
के जरिए कट्टरपंथ को काफी हद तक खत्म किया था।</li>
</ul>
विशेषज्ञों का मानना है कि यही तरीका कश्मीर के युवाओं को ब्रेनवॉश से बचा सकता है।

<strong>निष्कर्ष: यह सिर्फ एक ब्लास्ट नहीं</strong><strong>, </strong><strong>एक पूरा नेटवर्क है</strong>

दिल्ली ब्लास्ट ने यह साफ कर दिया है कि:
<ul>
 	<li>यह हमला <strong>एक अकेले शख्स का काम नहीं था</strong></li>
 	<li>बल्कि <strong>White Collar Terror Network</strong> का हिस्सा था</li>
 	<li>जिसमें डॉक्टर, यूनिवर्सिटी, शैल कंपनियाँ और कई राज्यों के युवा जुड़े थे</li>
 	<li>उमर नबी सिर्फ पहला चेहरा था… वह <strong>कई और सुसाइड बॉम्बर तैयार</strong> कर रहा था</li>
</ul>
जांच जारी है और एजेंसियाँ हर दिन नई कड़ियाँ जोड़ रही हैं।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[दिल्ली के लाल किले के सामने <strong>10 </strong><strong>नवंबर</strong> को हुए I-20 कार ब्लास्ट ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। इस धमाके में <strong>15 </strong><strong>लोगों की मौत</strong> हो गई और <strong>20 </strong><strong>से ज्यादा लोग घायल</strong> हुए। बाद में पता चला कि यह धमाका किसी एक्सिडेंट की वजह से नहीं, बल्कि <strong>एक प्लान्ड सुसाइड अटैक</strong> था, जिसे अंजाम दिया था—<strong>डॉ. उमर नबी</strong> ने।

जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस हमले के पीछे छिपा <strong>एक बड़ा टेरर मॉड्यूल</strong> सामने आ रहा है। इस मॉड्यूल का कनेक्शन <strong>फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी</strong>, कई डॉक्टरों और देश के अलग-अलग राज्यों से जुड़े लोगों से मिल रहा है।

<strong>कैसे शुरू हुई जांच और क्या मिला</strong><strong>?</strong>

NIA और दूसरी एजेंसियों ने बताया कि <strong>डॉ. उमर सिर्फ खुद को उड़ाने नहीं आया था</strong>, वह अपने जैसे <strong>और भी सुसाइड बॉम्बर तैयार कर रहा था</strong>। इसके लिए वह लगातार <strong>वीडियो बनाकर अलग-अलग युवाओं को भेजता</strong> था।

जांच में गिरफ्तार हुए लोगों के मोबाइल से कुल:
<ul>
 	<li><strong>70 </strong><strong>से ज्यादा वीडियो</strong></li>
 	<li>जिनमें से <strong>12 </strong><strong>वीडियो उमर ने खुद शूट किए</strong></li>
</ul>
ये वीडियो <strong>11 </strong><strong>युवाओं को भेजे गए</strong> थे। इनमें:
<ul>
 	<li><strong>7 </strong><strong>कश्मीरी मूल</strong> के</li>
 	<li>सभी का लिंक <strong>अल-फलाह यूनिवर्सिटी</strong> से</li>
 	<li>बाकी <strong>4 </strong><strong>युवक</strong><strong>—UP, Kerala </strong><strong>और </strong><strong>Karnataka</strong> के रहने वाले मिले</li>
</ul>
उमर इन वीडियो में युवाओं को समझाता था कि यह कोई “<strong>Suicide Attack</strong>” नहीं है, बल्कि “<strong>Shahadat Operation</strong>” है—यानी अपनी जान देकर ‘धर्म’ के लिए लड़ाई।

<strong>आमिर रशीद ने दिलवाई कार</strong><strong>, </strong><strong>लेकिन खुद नहीं बनना चाहता था सुसाइड बॉम्बर</strong>

आमिर रशीद अली नाम के युवक ने उमर को <strong>I-20 </strong><strong>कार दिलवाई</strong>, लेकिन वह खुद हमला नहीं करना चाहता था।
जब उमर को यह बात पता चली तो उसने <strong>उसी को ब्रेनवॉश करने वाले वीडियो भेजने शुरू</strong> कर दिए।

एजेंसियों का शक है कि उमर <strong>एक पूरी फिदायीन (</strong><strong>Fidayeen) </strong><strong>टीम</strong> बना रहा था और उसका टारगेट अलग-अलग राज्यों के युवा थे।

<strong>पुलवामा में उमर की संदिग्ध हरकतें</strong>

धमाके से करीब <strong>दो हफ्ते पहले</strong> उमर अपने <strong>पुलवामा के कोइल गांव</strong> गया था।
वह अपने भाई <strong>जहूर इलाही</strong> को एक मोबाइल फोन देकर बोला:

“अगर मेरे बारे में कोई खबर आए… ये फोन पानी में फेंक देना।”

और हुआ भी यही।
9 नवंबर को उसके दोस्तों की गिरफ्तारी की खबर आई तो जहूर डर गया और उसने <strong>फोन तालाब में फेंक दिया</strong>।

बाद में यह फोन मिल गया—खराब था, लेकिन एजेंसियों ने इसमें से <strong>एक बड़ा वीडियो रिकवर कर लिया</strong>, जिसमें उमर खुद कह रहा था:

“यह suicide नहीं, martyrdom operation है।”

<strong>धमाके से पहले </strong><strong>10 </strong><strong>दिनों तक खुद को कमरे में बंद रखा</strong>

उमर ने नूंह की हिदायत कॉलोनी में <strong>10 </strong><strong>दिन खुद को एक कमरे में बंद रखा</strong>।
<ul>
 	<li>वह टॉयलेट के लिए भी बाहर नहीं निकला</li>
 	<li>न नहाया, न कपड़े बदले</li>
 	<li>कमरे में ही गंदगी फैल गई</li>
 	<li>सिर्फ रात में थोड़ी देर खाने के लिए बाहर निकलता था</li>
</ul>
जांच एजेंसियों के अनुसार यह दिखाता है कि उमर का <strong>ब्रेनवॉश </strong><strong>100% </strong><strong>हो चुका था</strong>, वह एक कट्टर सुसाइड मिशन के लिए खुद को पूरी तरह तैयार कर चुका था।

<strong>अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर </strong><strong>ED </strong><strong>का शिकंजा</strong>

इस केस में सबसे बड़ा नाम <strong>अल-फलाह यूनिवर्सिटी</strong><strong>, </strong><strong>फरीदाबाद</strong> का सामने आया है।

ED ने:
<ul>
 	<li>दिल्ली और हरियाणा में <strong>25 </strong><strong>ठिकानों पर छापेमारी</strong> की</li>
 	<li>करोड़ों रुपये की <strong>फंड हेराफेरी</strong><strong>, </strong><strong>फर्जी मान्यता (</strong><strong>fake accreditation)</strong> और</li>
 	<li><strong>9 </strong><strong>शैल कंपनियों</strong> का नेटवर्क पकड़ा</li>
</ul>
छापेमारी के बाद यूनिवर्सिटी के <strong>चेयरमैन जवाद सिद्दीकी</strong> को <strong>मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार</strong> किया गया।
उनके घर से <strong>48 </strong><strong>लाख रुपये कैश</strong> भी मिला।

गिरफ्तार लोगों में अब तक:
<ul>
 	<li><strong>8 </strong><strong>आरोपी</strong>, जिनमें</li>
 	<li><strong>5 Doctor </strong><strong>हैं</strong>
जो सीधे या इंडाइरेक्टली इस टेरर नेटवर्क से जुड़े पाए गए।</li>
</ul>
<strong>डॉ. शाहीन </strong><strong>— </strong><strong>मैडम सर्जन का रोल</strong>

एजेंसियों ने एक और बड़ा नाम पकड़ा—<strong>डॉ. शाहीन सईद</strong>, जिसे “<strong>Madam Surgeon</strong>” कहा जाता था।
उनके पास:
<ul>
 	<li><strong>7 </strong><strong>बैंक अकाउंट</strong></li>
 	<li><strong>3 </strong><strong>पासपोर्ट</strong></li>
 	<li>और हाल ही में एक नया पासपोर्ट अल-फलाह यूनिवर्सिटी के पते से बनाने की कोशिश</li>
</ul>
इनका रोल इस मॉड्यूल में फाइनेंशियल और लॉजिस्टिक सपोर्ट से जुड़ा माना जा रहा है।

<strong>जम्मू की भलवाल जेल में भी छापेमारी</strong>

दिल्ली ब्लास्ट के बाद जम्मू की <strong>हाई सिक्योरिटी कोट भलवाल जेल</strong> में भी छापा पड़ा।
शक है कि जेल के अंदर से भी कुछ कैदी <strong>आतंकी मॉड्यूल को निर्देश</strong> भेज रहे थे।
इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, पेपर और नंबरों का डाटा जुटाया जा रहा है।

<strong>क्या कश्मीर में सऊदी अरब वाला मॉडल चल सकता है</strong><strong>?</strong>

कई सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि कश्मीर में बढ़ती कट्टरपंथी सोच को रोकने के लिए <strong>सऊदी अरब का मॉडल</strong> लागू किया जा सकता है।
सऊदी ने 20 साल पहले:
<ul>
 	<li>सही इस्लामी शिक्षा</li>
 	<li>अच्छे धर्मगुरुओं की मदद</li>
 	<li>और awareness camps
के जरिए कट्टरपंथ को काफी हद तक खत्म किया था।</li>
</ul>
विशेषज्ञों का मानना है कि यही तरीका कश्मीर के युवाओं को ब्रेनवॉश से बचा सकता है।

<strong>निष्कर्ष: यह सिर्फ एक ब्लास्ट नहीं</strong><strong>, </strong><strong>एक पूरा नेटवर्क है</strong>

दिल्ली ब्लास्ट ने यह साफ कर दिया है कि:
<ul>
 	<li>यह हमला <strong>एक अकेले शख्स का काम नहीं था</strong></li>
 	<li>बल्कि <strong>White Collar Terror Network</strong> का हिस्सा था</li>
 	<li>जिसमें डॉक्टर, यूनिवर्सिटी, शैल कंपनियाँ और कई राज्यों के युवा जुड़े थे</li>
 	<li>उमर नबी सिर्फ पहला चेहरा था… वह <strong>कई और सुसाइड बॉम्बर तैयार</strong> कर रहा था</li>
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	</item>
		<item>
		<title>Al-Falah University से मिला एक और सुराग: Delhi Red Fort Blast Case में बड़ी कार्रवाई, 13 तक पहुँची मौतों की संख्या</title>
		<link>https://trendstopic.in/another-major-lead-from-al-falah-university-big-breakthrough-in-the-delhi-red-fort-blast-case-death-toll-rises-to-13/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 14 Nov 2025 04:18:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[AlFalahUniversity]]></category>
		<category><![CDATA[BreakingNews]]></category>
		<category><![CDATA[DelhiBlast]]></category>
		<category><![CDATA[FaridabadNews]]></category>
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		<category><![CDATA[TerrorAlert]]></category>
		<category><![CDATA[TerrorModule]]></category>
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					<description><![CDATA[दिल्ली के लाल क़िले के पास हुई कार ब्लास्ट की जांच हर रोज़ नए मोड़ ले रही है। अब इस केस में हरियाणा की <strong>Al-Falah University, Faridabad</strong> जांच एजेंसियों के रडार पर आ चुकी है। पुलिस और जांच एजेंसियों को यूनिवर्सिटी कैंपस से एक और <strong>संदिग्ध कार</strong> मिली है, जिससे मामला और गहरा गया है।

<strong>Al-Falah University की पार्किंग से मिली संदिग्ध कार</strong>

फरीदाबाद पुलिस और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त टीम ने काले रंग की <strong>Maruti Brezza</strong> बरामद की है, जो यूनिवर्सिटी की पार्किंग में बंद मिली।
शुरुआती जांच में यह कार <strong>दिल्ली ब्लास्ट मॉड्यूल</strong> से जुड़ी पाई जा रही है।

सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि इस यूनिवर्सिटी का इस्तेमाल ब्लास्ट की प्लानिंग और कई गतिविधियों को छुपाने के लिए किया गया हो।

<strong>ब्लास्ट के अगले ही दिन एक और कार बरामद</strong>

सोमवार को दिल्ली के लाल क़िले के पास <strong>Hyundai i20</strong> में हुए ब्लास्ट के बाद जांच टीम को अगले ही दिन फरीदाबाद के <strong>कंडावली गांव</strong> में एक और कार मिली, जो इस मॉड्यूल का हिस्सा बताई जा रही है।

कार को तुरंत सीज़ किया गया और बम स्क्वाड को बुलाया गया।
एक व्यक्ति जिसने यह कार गांव में खड़ी की थी, उसे गिरफ्तार कर लिया गया है और बाद में उसे दिल्ली पुलिस के हवाले कर दिया गया।

<strong>ब्लास्ट में अब तक </strong><strong>13 लोगों की मौत</strong>

इस हमले में घायल एक और व्यक्ति ने अस्पताल में दम तोड़ दिया।
इसके बाद मरने वालों की संख्या बढ़कर <strong>13</strong> हो चुकी है।

सरकार ने इसे <strong>आतंकी हमला</strong> घोषित कर दिया है।

<strong>आतंकी मॉड्यूल की बड़ी साज़िश </strong><strong>— 32 जगह ब्लास्ट की योजना</strong>

जांच एजेंसियों के सूत्र बताते हैं कि इस मॉड्यूल का प्लान सिर्फ एक ब्लास्ट तक सीमित नहीं था।
आरोपियों ने <strong>32 </strong><strong>और लोकेशंस पर धमाके करने की साज़िश</strong> बनाई हुई थी।

इससे यह साफ है कि यह एक <strong>वेल-ओर्गनाइज़्ड और हाई-फंडेड टेरर प्लान</strong> था।

<strong>‘व्हाइट-कॉलर टेरर मॉड्यूल’: डॉक्टरों की गिरफ्तारी</strong>

इस केस में अब तक दो डॉक्टरों को गिरफ्तार किया गया है—
<ul>
 	<li><strong> Umar Un Nabi</strong></li>
 	<li><strong> Shaheen Shahid</strong></li>
</ul>
ये दोनों डॉक्टर अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े थे।

जांच में सामने आया कि इन लोगों ने <strong>ब्लास्ट में इस्तेमाल होने वाले विस्फोटकों के लिए 26 </strong><strong>लाख रुपये</strong> एकत्र किए थे।
इस कारण मीडिया इस ग्रुप को “<strong>White-Collar Terror Module</strong>” बता रही है, क्योंकि ये पढ़े-लिखे प्रोफेशनल थे।

<strong>यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई </strong><strong>— AIU ने सदस्यता रद्द की</strong>

<strong>Association of Indian Universities (AIU)</strong> ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी की मेंबरशिप रद्द कर दी है।
यह कार्रवाई सीधे ब्लास्ट केस से जुड़े विवादों और जांच को देखते हुए की गई।

<strong>NAAC ने भी यूनिवर्सिटी को नोटिस भेजा</strong>

जांच में पता चला कि यूनिवर्सिटी अपनी वेबसाइट पर <strong>NAAC </strong><strong>ग्रेड A</strong> दिखा रही थी, जबकि यह ग्रेड पहले ही <em>expire</em> हो चुका था।
इस मामले में <strong>NAAC </strong><strong>ने show-cause notice </strong><strong>जारी</strong> किया है और स्पष्टीकरण माँगा है।

<strong>8 </strong><strong>प्रोफेसरों ने दिया इस्तीफ़ा </strong><strong>– </strong><strong>मैनेजमेंट ने स्वीकार नहीं किया</strong>

ब्लास्ट केस की जांच तेज़ होने के बाद अल-फलाह यूनिवर्सिटी में काम कर रहे लगभग <strong>8 </strong><strong>प्रोफेसरों ने अपने पदों से इस्तीफ़ा</strong> दे दिया।
सूत्रों के मुताबिक इन प्रोफेसरों पर भी संदेह है कि वे किसी तरह इस मॉड्यूल से जुड़े हो सकते हैं।

हालाँकि, यूनिवर्सिटी ने इन इस्तीफ़ों को <strong>स्वीकार नहीं किया</strong> है।

<strong>2,900 </strong><strong>किलो संदिग्ध सामग्री बरामद</strong>

जांच टीम को फरीदाबाद में एक किराये के घर से <strong>2,900 </strong><strong>किलो विस्फोटक बनाने वाली सामग्री</strong> मिली है।
यह अब तक की सबसे बड़ी रिकवरी में से एक है, जो साबित करती है कि मॉड्यूल बहुत बड़ा और ख़तरनाक था।

&nbsp;

<strong>निष्कर्ष: जांच जारी </strong><strong>— और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं</strong>

दिल्ली ब्लास्ट केस अब सिर्फ एक ब्लास्ट की जांच नहीं है।
यह एक बड़े, सुनियोजित आतंकी नेटवर्क की परतें खोल रहा है, जिसमें
<ul>
 	<li>डॉक्टर,</li>
 	<li>यूनिवर्सिटी कर्मचारी,</li>
 	<li>और कई अन्य लोग
शामिल पाए जा रहे हैं।</li>
</ul>
जांच एजेंसियाँ आने वाले दिनों में और गिरफ्तारी तथा खुलासे कर सकती हैं।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[दिल्ली के लाल क़िले के पास हुई कार ब्लास्ट की जांच हर रोज़ नए मोड़ ले रही है। अब इस केस में हरियाणा की <strong>Al-Falah University, Faridabad</strong> जांच एजेंसियों के रडार पर आ चुकी है। पुलिस और जांच एजेंसियों को यूनिवर्सिटी कैंपस से एक और <strong>संदिग्ध कार</strong> मिली है, जिससे मामला और गहरा गया है।

<strong>Al-Falah University की पार्किंग से मिली संदिग्ध कार</strong>

फरीदाबाद पुलिस और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त टीम ने काले रंग की <strong>Maruti Brezza</strong> बरामद की है, जो यूनिवर्सिटी की पार्किंग में बंद मिली।
शुरुआती जांच में यह कार <strong>दिल्ली ब्लास्ट मॉड्यूल</strong> से जुड़ी पाई जा रही है।

सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि इस यूनिवर्सिटी का इस्तेमाल ब्लास्ट की प्लानिंग और कई गतिविधियों को छुपाने के लिए किया गया हो।

<strong>ब्लास्ट के अगले ही दिन एक और कार बरामद</strong>

सोमवार को दिल्ली के लाल क़िले के पास <strong>Hyundai i20</strong> में हुए ब्लास्ट के बाद जांच टीम को अगले ही दिन फरीदाबाद के <strong>कंडावली गांव</strong> में एक और कार मिली, जो इस मॉड्यूल का हिस्सा बताई जा रही है।

कार को तुरंत सीज़ किया गया और बम स्क्वाड को बुलाया गया।
एक व्यक्ति जिसने यह कार गांव में खड़ी की थी, उसे गिरफ्तार कर लिया गया है और बाद में उसे दिल्ली पुलिस के हवाले कर दिया गया।

<strong>ब्लास्ट में अब तक </strong><strong>13 लोगों की मौत</strong>

इस हमले में घायल एक और व्यक्ति ने अस्पताल में दम तोड़ दिया।
इसके बाद मरने वालों की संख्या बढ़कर <strong>13</strong> हो चुकी है।

सरकार ने इसे <strong>आतंकी हमला</strong> घोषित कर दिया है।

<strong>आतंकी मॉड्यूल की बड़ी साज़िश </strong><strong>— 32 जगह ब्लास्ट की योजना</strong>

जांच एजेंसियों के सूत्र बताते हैं कि इस मॉड्यूल का प्लान सिर्फ एक ब्लास्ट तक सीमित नहीं था।
आरोपियों ने <strong>32 </strong><strong>और लोकेशंस पर धमाके करने की साज़िश</strong> बनाई हुई थी।

इससे यह साफ है कि यह एक <strong>वेल-ओर्गनाइज़्ड और हाई-फंडेड टेरर प्लान</strong> था।

<strong>‘व्हाइट-कॉलर टेरर मॉड्यूल’: डॉक्टरों की गिरफ्तारी</strong>

इस केस में अब तक दो डॉक्टरों को गिरफ्तार किया गया है—
<ul>
 	<li><strong> Umar Un Nabi</strong></li>
 	<li><strong> Shaheen Shahid</strong></li>
</ul>
ये दोनों डॉक्टर अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े थे।

जांच में सामने आया कि इन लोगों ने <strong>ब्लास्ट में इस्तेमाल होने वाले विस्फोटकों के लिए 26 </strong><strong>लाख रुपये</strong> एकत्र किए थे।
इस कारण मीडिया इस ग्रुप को “<strong>White-Collar Terror Module</strong>” बता रही है, क्योंकि ये पढ़े-लिखे प्रोफेशनल थे।

<strong>यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई </strong><strong>— AIU ने सदस्यता रद्द की</strong>

<strong>Association of Indian Universities (AIU)</strong> ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी की मेंबरशिप रद्द कर दी है।
यह कार्रवाई सीधे ब्लास्ट केस से जुड़े विवादों और जांच को देखते हुए की गई।

<strong>NAAC ने भी यूनिवर्सिटी को नोटिस भेजा</strong>

जांच में पता चला कि यूनिवर्सिटी अपनी वेबसाइट पर <strong>NAAC </strong><strong>ग्रेड A</strong> दिखा रही थी, जबकि यह ग्रेड पहले ही <em>expire</em> हो चुका था।
इस मामले में <strong>NAAC </strong><strong>ने show-cause notice </strong><strong>जारी</strong> किया है और स्पष्टीकरण माँगा है।

<strong>8 </strong><strong>प्रोफेसरों ने दिया इस्तीफ़ा </strong><strong>– </strong><strong>मैनेजमेंट ने स्वीकार नहीं किया</strong>

ब्लास्ट केस की जांच तेज़ होने के बाद अल-फलाह यूनिवर्सिटी में काम कर रहे लगभग <strong>8 </strong><strong>प्रोफेसरों ने अपने पदों से इस्तीफ़ा</strong> दे दिया।
सूत्रों के मुताबिक इन प्रोफेसरों पर भी संदेह है कि वे किसी तरह इस मॉड्यूल से जुड़े हो सकते हैं।

हालाँकि, यूनिवर्सिटी ने इन इस्तीफ़ों को <strong>स्वीकार नहीं किया</strong> है।

<strong>2,900 </strong><strong>किलो संदिग्ध सामग्री बरामद</strong>

जांच टीम को फरीदाबाद में एक किराये के घर से <strong>2,900 </strong><strong>किलो विस्फोटक बनाने वाली सामग्री</strong> मिली है।
यह अब तक की सबसे बड़ी रिकवरी में से एक है, जो साबित करती है कि मॉड्यूल बहुत बड़ा और ख़तरनाक था।

&nbsp;

<strong>निष्कर्ष: जांच जारी </strong><strong>— और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं</strong>

दिल्ली ब्लास्ट केस अब सिर्फ एक ब्लास्ट की जांच नहीं है।
यह एक बड़े, सुनियोजित आतंकी नेटवर्क की परतें खोल रहा है, जिसमें
<ul>
 	<li>डॉक्टर,</li>
 	<li>यूनिवर्सिटी कर्मचारी,</li>
 	<li>और कई अन्य लोग
शामिल पाए जा रहे हैं।</li>
</ul>
जांच एजेंसियाँ आने वाले दिनों में और गिरफ्तारी तथा खुलासे कर सकती हैं।]]></content:encoded>
					
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