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	<title>AkhileshYadav &#8211; Trends Topic</title>
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	<title>AkhileshYadav &#8211; Trends Topic</title>
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		<title>यूपी में 4 करोड़ वोटर्स लापता! CM योगी की बढ़ी टेंशन, अखिलेश ने ली चुटकी; SIR पर मचा घमासान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 18 Dec 2025 06:49:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[#UP]]></category>
		<category><![CDATA[AkhileshYadav]]></category>
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		<category><![CDATA[news]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
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					<description><![CDATA[<!-- wp:paragraph -->

यूपी में SIR की धीमी रफ्तार को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ टेंशन में हैं। उत्तर प्रदेश में करीब 4 करोड़ वोटरों का नाम वोटर लिस्ट से हट सकता है। दरअसल यूपी में अब तक करीब 12 करोड़ वोटरों के ही फॉर्म वापस आए हैं। अब सीएम योगी कह रहे हैं कि 25 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में कम से कम 16 करोड़ वोटर होने चाहिए। अब तक 12 करोड़ लोगों ने ही SIR ने फॉर्म भरे हैं, इसका मतलब 4 करोड़ वोटरों का पता नहीं चल रहा है। यूपी बीजेपी के नए अध्यक्ष पंकज चौधरी के स्वागत समारोह में सीएम योगी ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं को मेहनत करके इन लापता चार करोड़ मतदाताओं का पता लगाना चाहिए।

<!-- /wp:paragraph --> <!-- wp:heading {"level":3} -->
<h3 class="wp-block-heading"><strong>सीएम योगी ने वैरिफिकेशन करने को कहा</strong></h3>
<!-- /wp:heading --> <!-- wp:paragraph -->

&nbsp;

<!-- /wp:paragraph --> <!-- wp:paragraph -->

सीएम योगी ने आज बीजेपी के नेताओं से कहा कि वो घर घर जाएं, वोटर्स का वैरीफिकेशन करें, जो नाम वोटर लिस्ट से कट सकते हैं उन्हें खोजें, क्योंकि जिन चार करोड़ मतदाताओं का पता नहीं चल पा रहा है, उसमें 85 से 90 परसेंट लोग बीजेपी के वोटर हैं। वैसे 4 करोड़ वोटर्स का गायब होना वाकई चिंता की बात है। ये नंबर बहुत बड़ा है। यूपी के ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर दयाशंकर सिंह ने कहा कि शहरों में रहने वाले ज़्यादातर लोगों का गांव में भी वोटर कार्ड बना हुआ है, चूंकि अब एक ही जगह के वोटर हो सकते हैं, इसलिए शहरों में रहने वाले बहुत से प्रवासी लोगों ने अपना वोट गांव में रखा है। जिन लोगों ने ऐसा किया, उनका नाम मिसिंग में आया है।

<!-- /wp:paragraph --> <!-- wp:paragraph -->

गाज़ियाबाद, यूपी के उन जिलों में है, जहां SIR का काम सबसे धीमे हो रहा है। लेकिन गाज़ियाबाद से बीजेपी सांसद अतुल गर्ग इसे नया ही एंगल दे रहे हैं। अतुल गर्ग का कहना है कि विपक्ष के लोग बीजेपी पर वोट चोरी का आरोप लगाते हैं, लेकिन यहां तो बीजेपी सपोर्ट्स के ही वोट गायब हो रहे हैं। इसका मतलब ये है कि SIR का काम पूरी निष्पक्षता से हो रहा है।

<!-- /wp:paragraph --> <!-- wp:heading {"level":3} -->
<h3 class="wp-block-heading"><strong>अखिलेश यादव ने ली चुटकी</strong></h3>
<!-- /wp:heading --> <!-- wp:paragraph -->

&nbsp;

<!-- /wp:paragraph --> <!-- wp:paragraph -->

बीजेपी और योगी की इस टेंशन पर अखिलेश यादव ने चुटकी ली। अखिलेश यादव ने कहा कि बीजेपी के 85 से 90 परसेंट वोटर गायब होने का एक अर्थ ये भी है कि PDA प्रहरियों के चौकन्नेपन की वजह से SIR में भाजपाई अपने मनमाफिक जुगाड़ नहीं कर पाए। अखिलेश ने आरोप लगाया कि बीजेपी की मदद के लिए ही इलेक्शन कमीशन ने SIR की डेडलाइन दो हफ्ते के लिए बढ़ाई है, लेकिन PDA के प्रहरी सावधान हैं, कोई गड़बड़ नहीं होने देंगे।

<!-- /wp:paragraph --> <!-- wp:heading {"level":3} -->
<h3 class="wp-block-heading"><strong>माइग्रेशन हो सकती है वजह</strong></h3>
<!-- /wp:heading --> <!-- wp:paragraph -->

&nbsp;

<!-- /wp:paragraph --> <!-- wp:paragraph -->

बीजेपी और अखिलेश में तो मिसिंग वोटर्स को लेकर वार-पलटवार होते रहेगा, लेकिन इतनी बड़ी तादाद में मतदाताओं के गायब होने को लेकर इंडिया टीवी संवाददाता रुचि कुमार ने यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा से बात की। उन्होंने भी ये बात मानी कि राज्य में बड़े पैमाने पर माइग्रेशन हुआ है, यानी लोग एक जगह से दूसरी जगह गए हैं, इसलिए अब बाकी बचे हुए समय में फॉर्म-6 भरवाने पर ज़ोर दिया जा रहा है। यूपी में अगर चार करोड़ लोगों के वोट कटते हैं तो ये वाकई में हैरानी की बात है। अगर ये आंकड़ा सही है तो ये इस बात का सबूत है कि वोटर लिस्ट का रिवीजन क्यों जरूरी था।

<!-- /wp:paragraph -->]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<!-- wp:paragraph -->

यूपी में SIR की धीमी रफ्तार को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ टेंशन में हैं। उत्तर प्रदेश में करीब 4 करोड़ वोटरों का नाम वोटर लिस्ट से हट सकता है। दरअसल यूपी में अब तक करीब 12 करोड़ वोटरों के ही फॉर्म वापस आए हैं। अब सीएम योगी कह रहे हैं कि 25 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में कम से कम 16 करोड़ वोटर होने चाहिए। अब तक 12 करोड़ लोगों ने ही SIR ने फॉर्म भरे हैं, इसका मतलब 4 करोड़ वोटरों का पता नहीं चल रहा है। यूपी बीजेपी के नए अध्यक्ष पंकज चौधरी के स्वागत समारोह में सीएम योगी ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं को मेहनत करके इन लापता चार करोड़ मतदाताओं का पता लगाना चाहिए।

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<h3 class="wp-block-heading"><strong>सीएम योगी ने वैरिफिकेशन करने को कहा</strong></h3>
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&nbsp;

<!-- /wp:paragraph --> <!-- wp:paragraph -->

सीएम योगी ने आज बीजेपी के नेताओं से कहा कि वो घर घर जाएं, वोटर्स का वैरीफिकेशन करें, जो नाम वोटर लिस्ट से कट सकते हैं उन्हें खोजें, क्योंकि जिन चार करोड़ मतदाताओं का पता नहीं चल पा रहा है, उसमें 85 से 90 परसेंट लोग बीजेपी के वोटर हैं। वैसे 4 करोड़ वोटर्स का गायब होना वाकई चिंता की बात है। ये नंबर बहुत बड़ा है। यूपी के ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर दयाशंकर सिंह ने कहा कि शहरों में रहने वाले ज़्यादातर लोगों का गांव में भी वोटर कार्ड बना हुआ है, चूंकि अब एक ही जगह के वोटर हो सकते हैं, इसलिए शहरों में रहने वाले बहुत से प्रवासी लोगों ने अपना वोट गांव में रखा है। जिन लोगों ने ऐसा किया, उनका नाम मिसिंग में आया है।

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गाज़ियाबाद, यूपी के उन जिलों में है, जहां SIR का काम सबसे धीमे हो रहा है। लेकिन गाज़ियाबाद से बीजेपी सांसद अतुल गर्ग इसे नया ही एंगल दे रहे हैं। अतुल गर्ग का कहना है कि विपक्ष के लोग बीजेपी पर वोट चोरी का आरोप लगाते हैं, लेकिन यहां तो बीजेपी सपोर्ट्स के ही वोट गायब हो रहे हैं। इसका मतलब ये है कि SIR का काम पूरी निष्पक्षता से हो रहा है।

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<h3 class="wp-block-heading"><strong>अखिलेश यादव ने ली चुटकी</strong></h3>
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&nbsp;

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बीजेपी और योगी की इस टेंशन पर अखिलेश यादव ने चुटकी ली। अखिलेश यादव ने कहा कि बीजेपी के 85 से 90 परसेंट वोटर गायब होने का एक अर्थ ये भी है कि PDA प्रहरियों के चौकन्नेपन की वजह से SIR में भाजपाई अपने मनमाफिक जुगाड़ नहीं कर पाए। अखिलेश ने आरोप लगाया कि बीजेपी की मदद के लिए ही इलेक्शन कमीशन ने SIR की डेडलाइन दो हफ्ते के लिए बढ़ाई है, लेकिन PDA के प्रहरी सावधान हैं, कोई गड़बड़ नहीं होने देंगे।

<!-- /wp:paragraph --> <!-- wp:heading {"level":3} -->
<h3 class="wp-block-heading"><strong>माइग्रेशन हो सकती है वजह</strong></h3>
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&nbsp;

<!-- /wp:paragraph --> <!-- wp:paragraph -->

बीजेपी और अखिलेश में तो मिसिंग वोटर्स को लेकर वार-पलटवार होते रहेगा, लेकिन इतनी बड़ी तादाद में मतदाताओं के गायब होने को लेकर इंडिया टीवी संवाददाता रुचि कुमार ने यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा से बात की। उन्होंने भी ये बात मानी कि राज्य में बड़े पैमाने पर माइग्रेशन हुआ है, यानी लोग एक जगह से दूसरी जगह गए हैं, इसलिए अब बाकी बचे हुए समय में फॉर्म-6 भरवाने पर ज़ोर दिया जा रहा है। यूपी में अगर चार करोड़ लोगों के वोट कटते हैं तो ये वाकई में हैरानी की बात है। अगर ये आंकड़ा सही है तो ये इस बात का सबूत है कि वोटर लिस्ट का रिवीजन क्यों जरूरी था।

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		<title>Bihar Election के दिलचस्प आंकड़े &#8211; Yogi Bihar में भी Akhilesh पर भारी पड़े: 31 Seats में से 27 जीती</title>
		<link>https://trendstopic.in/interesting-numbers-from-the-bihar-election-yogi-outshines-akhilesh-wins-27-out-of-31-seats/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 15 Nov 2025 07:32:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[AkhileshYadav]]></category>
		<category><![CDATA[BiharElection]]></category>
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		<category><![CDATA[YogiAdityanath]]></category>
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					<description><![CDATA[बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे साफ हो चुके हैं और इस बार तस्वीर बिल्कुल अलग दिखी। खास बात यह रही कि बिहार के चुनावी मैदान में उत्तर प्रदेश के बड़े नेताओं की एंट्री भी हुई और उनके प्रदर्शन ने काफी चर्चा बटोरी। आइए जानते हैं, किस नेता का कितना असर दिखा और किसकी स्ट्रैटेजी फेल रही।

<strong>योगी आदित्यनाथ का दबदबा </strong><strong>– 31 </strong><strong>में से </strong><strong>27 </strong><strong>सीटें जीतीं</strong>

बिहार चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रही। उन्होंने कुल <strong>31 </strong><strong>सीटों पर रैलियां और सभाएं</strong> कीं।

इनमें से <strong>27 </strong><strong>सीटों पर एनडीए जीत</strong> हासिल करने में सफल रहा।
इस तरह योगी का <strong>Strike Rate 87% </strong><strong>से ज्यादा</strong> रहा, जो बेहद शानदार माना जा रहा है।

योगी की सभाओं में बड़ी भीड़ देखने को मिली। उन्होंने एनडीए के लिए आक्रामक तरीके से प्रचार किया और विपक्ष पर सीधा हमला बोला।

<strong>अखिलेश यादव की मेहनत बेअसर </strong><strong>– 22 </strong><strong>में से सिर्फ </strong><strong>2 </strong><strong>सीटें जीतीं</strong>

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव बिना चुनाव लड़े बिहार पहुंचे थे। उन्होंने <strong>22 </strong><strong>सीटों पर</strong> महागठबंधन के लिए प्रचार किया।
लेकिन नतीजे निराश करने वाले रहे—
इन 22 में से <strong>सिर्फ 2 </strong><strong>सीटों</strong> पर ही महागठबंधन जीत सका।

इस तरह उनका <strong>Strike Rate </strong><strong>सिर्फ 9%</strong> रहा, जो काफी कमजोर माना जा रहा है।

खास बात यह कि जहाँ उन्होंने भोजपुरी एक्टर <strong>खेसारी लाल यादव</strong> के लिए प्रचार किया, वहाँ भी खेसारी चुनाव हार गए।
हाँ, सीवान के बाहुबली शहाबुद्दीन के बेटे <strong>ओसामा</strong> की रघुनाथपुर सीट पर उन्हें सफलता मिली।

<strong>मायावती की एक ही रैली</strong><strong>, </strong><strong>लेकिन स्ट्राइक रेट अखिलेश से बेहतर</strong>

बीएसपी प्रमुख मायावती बिहार में सिर्फ <strong>एक दिन</strong> गई थीं और उन्होंने <strong>5 </strong><strong>सीटों</strong> पर एक साथ प्रचार किया।
इन पाँच में से <strong>रामगढ़ सीट</strong> बीएसपी के खाते में गई।

मायावती का <strong>Strike Rate 20%</strong> रहा, जो अखिलेश यादव से ज्यादा है।

बीएसपी ने पूरे बिहार में <strong>243 </strong><strong>सीटों</strong> पर उम्मीदवार उतारे थे और उन्हें 1.52% वोट मिले।

<strong>तीन सीटें जहाँ योगी और अखिलेश दोनों ने रैली की</strong>

बिहार में तीन सीटें ऐसी थीं जहाँ दोनों नेताओं का सीधा मुकाबला दिखा—
<ol>
 	<li>रघुनाथपुर (सीवान) – जीती <strong>राजद</strong></li>
 	<li>बिस्फी (मधुबनी) – जीती <strong>राजद</strong></li>
 	<li>मोतिहारी – जीती <strong>भाजपा</strong></li>
</ol>
इन तीन में से <strong>दो सीटों पर अखिलेश भारी</strong>, जबकि एक पर योगी आगे रहे।

<strong>योगी का </strong><strong>“</strong><strong>तीन बंदर</strong><strong>” </strong><strong>वाला बयान रहा हाइलाइट</strong>

चुनाव प्रचार में सबसे ज्यादा चर्चा योगी आदित्यनाथ के बयान की रही।
उन्होंने बिना नाम लिए राहुल गांधी, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव को
<strong>“</strong><strong>पप्पू, </strong><strong>टप्पू और अप्पू – </strong><strong>तीन बंदर”</strong> कहा।

यह बयान पूरे बिहार चुनाव में बड़ा मुद्दा बन गया।
कांग्रेस और सपा ने इसे <strong>भगवान हनुमान जी का अपमान</strong> बताया और लगातार इस पर प्रतिक्रिया देती रहीं।
वहीं अखिलेश यादव ने भी इस पर पलटवार करते हुए भाजपा पर कई तंज कसे।

इस विवाद का असर ये हुआ कि महागठबंधन अपने असली मुद्दों—
<strong>रोजगार, </strong><strong>योजनाएं, </strong><strong>नीतीश सरकार की नाकामियां</strong>
—इन सब पर फोकस हटाकर <strong>बंदर विवाद</strong> में उलझ गया।

मीडिया हेडलाइंस भी इसी मुद्दे पर घूमती रहीं।
इस तरह योगी का बयान चुनाव की दिशा बदलने में कामयाब रहा।

<strong>अन्य यूपी दल </strong><strong>– </strong><strong>सभी की जमानत जब्त</strong>

बिहार के चुनावी मैदान में यूपी के तीन अन्य दल भी उतरे थे—
<h3><strong>1. </strong><strong>चंद्रशेखर आज़ाद की </strong><strong>ASP</strong></h3>
<ul>
 	<li>25 सीटों पर लड़े</li>
 	<li><strong>एक भी सीट नहीं जीती</strong></li>
 	<li>सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त</li>
</ul>
<h3><strong>2. </strong><strong>स्वामी प्रसाद मौर्य की पार्टी</strong></h3>
<ul>
 	<li>4 सीटों पर चुनाव</li>
 	<li>खुद प्रचार भी नहीं किया</li>
 	<li><strong>जमानत जब्त</strong></li>
</ul>
<h3><strong>3. </strong><strong>ओमप्रकाश राजभर की सुभासपा</strong></h3>
<ul>
 	<li>एनडीए से अलग होकर <strong>64 </strong><strong>सीटों</strong> पर लड़ा</li>
 	<li>सभी उम्मीदवार <strong>हार गए</strong></li>
 	<li>किसी की जमानत नहीं बची</li>
</ul>
<strong>अब नजर यूपी </strong><strong>2027 </strong><strong>चुनाव पर</strong>

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि योगी आदित्यनाथ ने इस चुनाव में जिस तरह नैरेटिव सेट किया,
उसी तरह की रणनीति वे <strong>2027 </strong><strong>यूपी विधानसभा चुनाव</strong> में भी अपना सकते हैं।

सपा–कांग्रेस गठबंधन और एम–वाई (Muslim–Yadav) समीकरण को देखते हुए भाजपा पहले से ही नई स्ट्रैटेजी प्लान कर रही है।
बिहार मॉडल यूपी में भी दोहराया जा सकता है।

<strong>निष्कर्ष</strong>
<ul>
 	<li>बिहार चुनाव में <strong>योगी आदित्यनाथ का प्रदर्शन सबसे दमदार</strong> रहा।</li>
 	<li>अखिलेश यादव का प्रचार असरदार नहीं रहा।</li>
 	<li>मायावती ने सीमित प्रचार के बावजूद बेहतर स्ट्राइक रेट हासिल किया।</li>
 	<li>छोटे दल (ASP, सुभासपा, मौर्य की पार्टी) बिल्कुल असफल रहे।</li>
</ul>
बिहार के नतीजों से साफ है कि यूपी के नेताओं में सबसे ज्यादा पकड़ और प्रभाव <strong>योगी आदित्यनाथ</strong> का दिखा।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे साफ हो चुके हैं और इस बार तस्वीर बिल्कुल अलग दिखी। खास बात यह रही कि बिहार के चुनावी मैदान में उत्तर प्रदेश के बड़े नेताओं की एंट्री भी हुई और उनके प्रदर्शन ने काफी चर्चा बटोरी। आइए जानते हैं, किस नेता का कितना असर दिखा और किसकी स्ट्रैटेजी फेल रही।

<strong>योगी आदित्यनाथ का दबदबा </strong><strong>– 31 </strong><strong>में से </strong><strong>27 </strong><strong>सीटें जीतीं</strong>

बिहार चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रही। उन्होंने कुल <strong>31 </strong><strong>सीटों पर रैलियां और सभाएं</strong> कीं।

इनमें से <strong>27 </strong><strong>सीटों पर एनडीए जीत</strong> हासिल करने में सफल रहा।
इस तरह योगी का <strong>Strike Rate 87% </strong><strong>से ज्यादा</strong> रहा, जो बेहद शानदार माना जा रहा है।

योगी की सभाओं में बड़ी भीड़ देखने को मिली। उन्होंने एनडीए के लिए आक्रामक तरीके से प्रचार किया और विपक्ष पर सीधा हमला बोला।

<strong>अखिलेश यादव की मेहनत बेअसर </strong><strong>– 22 </strong><strong>में से सिर्फ </strong><strong>2 </strong><strong>सीटें जीतीं</strong>

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव बिना चुनाव लड़े बिहार पहुंचे थे। उन्होंने <strong>22 </strong><strong>सीटों पर</strong> महागठबंधन के लिए प्रचार किया।
लेकिन नतीजे निराश करने वाले रहे—
इन 22 में से <strong>सिर्फ 2 </strong><strong>सीटों</strong> पर ही महागठबंधन जीत सका।

इस तरह उनका <strong>Strike Rate </strong><strong>सिर्फ 9%</strong> रहा, जो काफी कमजोर माना जा रहा है।

खास बात यह कि जहाँ उन्होंने भोजपुरी एक्टर <strong>खेसारी लाल यादव</strong> के लिए प्रचार किया, वहाँ भी खेसारी चुनाव हार गए।
हाँ, सीवान के बाहुबली शहाबुद्दीन के बेटे <strong>ओसामा</strong> की रघुनाथपुर सीट पर उन्हें सफलता मिली।

<strong>मायावती की एक ही रैली</strong><strong>, </strong><strong>लेकिन स्ट्राइक रेट अखिलेश से बेहतर</strong>

बीएसपी प्रमुख मायावती बिहार में सिर्फ <strong>एक दिन</strong> गई थीं और उन्होंने <strong>5 </strong><strong>सीटों</strong> पर एक साथ प्रचार किया।
इन पाँच में से <strong>रामगढ़ सीट</strong> बीएसपी के खाते में गई।

मायावती का <strong>Strike Rate 20%</strong> रहा, जो अखिलेश यादव से ज्यादा है।

बीएसपी ने पूरे बिहार में <strong>243 </strong><strong>सीटों</strong> पर उम्मीदवार उतारे थे और उन्हें 1.52% वोट मिले।

<strong>तीन सीटें जहाँ योगी और अखिलेश दोनों ने रैली की</strong>

बिहार में तीन सीटें ऐसी थीं जहाँ दोनों नेताओं का सीधा मुकाबला दिखा—
<ol>
 	<li>रघुनाथपुर (सीवान) – जीती <strong>राजद</strong></li>
 	<li>बिस्फी (मधुबनी) – जीती <strong>राजद</strong></li>
 	<li>मोतिहारी – जीती <strong>भाजपा</strong></li>
</ol>
इन तीन में से <strong>दो सीटों पर अखिलेश भारी</strong>, जबकि एक पर योगी आगे रहे।

<strong>योगी का </strong><strong>“</strong><strong>तीन बंदर</strong><strong>” </strong><strong>वाला बयान रहा हाइलाइट</strong>

चुनाव प्रचार में सबसे ज्यादा चर्चा योगी आदित्यनाथ के बयान की रही।
उन्होंने बिना नाम लिए राहुल गांधी, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव को
<strong>“</strong><strong>पप्पू, </strong><strong>टप्पू और अप्पू – </strong><strong>तीन बंदर”</strong> कहा।

यह बयान पूरे बिहार चुनाव में बड़ा मुद्दा बन गया।
कांग्रेस और सपा ने इसे <strong>भगवान हनुमान जी का अपमान</strong> बताया और लगातार इस पर प्रतिक्रिया देती रहीं।
वहीं अखिलेश यादव ने भी इस पर पलटवार करते हुए भाजपा पर कई तंज कसे।

इस विवाद का असर ये हुआ कि महागठबंधन अपने असली मुद्दों—
<strong>रोजगार, </strong><strong>योजनाएं, </strong><strong>नीतीश सरकार की नाकामियां</strong>
—इन सब पर फोकस हटाकर <strong>बंदर विवाद</strong> में उलझ गया।

मीडिया हेडलाइंस भी इसी मुद्दे पर घूमती रहीं।
इस तरह योगी का बयान चुनाव की दिशा बदलने में कामयाब रहा।

<strong>अन्य यूपी दल </strong><strong>– </strong><strong>सभी की जमानत जब्त</strong>

बिहार के चुनावी मैदान में यूपी के तीन अन्य दल भी उतरे थे—
<h3><strong>1. </strong><strong>चंद्रशेखर आज़ाद की </strong><strong>ASP</strong></h3>
<ul>
 	<li>25 सीटों पर लड़े</li>
 	<li><strong>एक भी सीट नहीं जीती</strong></li>
 	<li>सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त</li>
</ul>
<h3><strong>2. </strong><strong>स्वामी प्रसाद मौर्य की पार्टी</strong></h3>
<ul>
 	<li>4 सीटों पर चुनाव</li>
 	<li>खुद प्रचार भी नहीं किया</li>
 	<li><strong>जमानत जब्त</strong></li>
</ul>
<h3><strong>3. </strong><strong>ओमप्रकाश राजभर की सुभासपा</strong></h3>
<ul>
 	<li>एनडीए से अलग होकर <strong>64 </strong><strong>सीटों</strong> पर लड़ा</li>
 	<li>सभी उम्मीदवार <strong>हार गए</strong></li>
 	<li>किसी की जमानत नहीं बची</li>
</ul>
<strong>अब नजर यूपी </strong><strong>2027 </strong><strong>चुनाव पर</strong>

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि योगी आदित्यनाथ ने इस चुनाव में जिस तरह नैरेटिव सेट किया,
उसी तरह की रणनीति वे <strong>2027 </strong><strong>यूपी विधानसभा चुनाव</strong> में भी अपना सकते हैं।

सपा–कांग्रेस गठबंधन और एम–वाई (Muslim–Yadav) समीकरण को देखते हुए भाजपा पहले से ही नई स्ट्रैटेजी प्लान कर रही है।
बिहार मॉडल यूपी में भी दोहराया जा सकता है।

<strong>निष्कर्ष</strong>
<ul>
 	<li>बिहार चुनाव में <strong>योगी आदित्यनाथ का प्रदर्शन सबसे दमदार</strong> रहा।</li>
 	<li>अखिलेश यादव का प्रचार असरदार नहीं रहा।</li>
 	<li>मायावती ने सीमित प्रचार के बावजूद बेहतर स्ट्राइक रेट हासिल किया।</li>
 	<li>छोटे दल (ASP, सुभासपा, मौर्य की पार्टी) बिल्कुल असफल रहे।</li>
</ul>
बिहार के नतीजों से साफ है कि यूपी के नेताओं में सबसे ज्यादा पकड़ और प्रभाव <strong>योगी आदित्यनाथ</strong> का दिखा।]]></content:encoded>
					
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