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	<title>AgricultureCrisis &#8211; Trends Topic</title>
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	<title>AgricultureCrisis &#8211; Trends Topic</title>
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	<item>
		<title>Modi Government का बड़ा Decision: कपास पर Import Duty हटाने से किसानों में गुस्सा, Kejriwal बोले- &#8220;किसानों के साथ बड़ा धोखा&#8221;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 13 Sep 2025 05:22:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[News]]></category>
		<category><![CDATA[AAP]]></category>
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		<category><![CDATA[Vidarbha]]></category>
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					<description><![CDATA[देश के किसानों के लिए आने वाले दिन मुश्किल भरे हो सकते हैं। केंद्र सरकार ने हाल ही में एक ऐसा बड़ा फैसला लिया है, जिसे लेकर राजनीति गरमा गई है। सरकार ने अमेरिका से आने वाली <strong>कपास (Cotton)</strong> पर लगने वाली <strong>11% </strong><strong>आयात शुल्क (Import Duty)</strong> को हटा दिया है। पहले अमेरिका से भारत आने वाली कपास पर यह टैक्स लागू था, लेकिन अब यह छूट <strong>19 </strong><strong>अगस्त से 30 </strong><strong>सितंबर 2025 </strong><strong>तक</strong> यानी <strong>40 </strong><strong>दिनों</strong> के लिए दी गई है। बाद में वित्त मंत्रालय ने इस छूट को <strong>31 </strong><strong>दिसंबर 2025 </strong><strong>तक बढ़ाने</strong> का ऐलान किया।

इस फैसले को लेकर किसानों में गुस्सा है और विपक्षी दलों ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री <strong>अरविंद केजरीवाल</strong> ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र पर सीधा हमला बोला है।

<strong>केजरीवाल का आरोप: किसानों की पीठ में छुरा घोंपा गया</strong>

गुरुवार (28 अगस्त) को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मोदी सरकार ने यह फैसला किसानों से बिना सलाह-मशविरा किए, <strong>चोरी-छिपे</strong>, अमेरिका के दबाव में लिया है।

उन्होंने कहा:

<em>"</em><em>अभी 90-95% </em><em>किसानों को इस फैसले की जानकारी ही नहीं है। जब उन्हें असलियत पता चलेगी, </em><em>तो कई किसान आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो जाएंगे।"</em>

केजरीवाल के मुताबिक, इस फैसले का सबसे बड़ा नुकसान यह होगा कि जब अक्टूबर में भारतीय किसानों की कपास मंडियों में आएगी, तब तक भारत की <strong>टेक्सटाइल इंडस्ट्री</strong> अमेरिका से सस्ती कपास खरीद चुकी होगी।

उन्होंने बताया कि अमेरिकी कपास <strong>भारतीय कपास से ₹15-20 </strong><strong>प्रति किलो सस्ती</strong> है। ऐसे में भारतीय किसानों की कपास <strong>कोई नहीं खरीदेगा</strong>, और उन्हें औने-पौने दामों पर अपनी फसल बेचनी पड़ेगी।

<strong>किसानों पर सबसे ज्यादा असर किन राज्यों में होगा</strong>

इस फैसले से खासकर इन राज्यों के किसान प्रभावित होंगे:
<ul>
 	<li><strong>गुजरात</strong></li>
 	<li><strong>पंजाब</strong></li>
 	<li><strong>महाराष्ट्र का विदर्भ क्षेत्र</strong></li>
 	<li><strong>तेलंगाना</strong></li>
</ul>
ये वो राज्य हैं जहां कपास की खेती बड़े पैमाने पर होती है। खास बात यह है कि विदर्भ और गुजरात जैसे इलाकों में पहले से ही किसान आत्महत्या के मामले काफी ज्यादा हैं।

केजरीवाल ने बताया कि <strong>जनवरी से मार्च 2025 </strong><strong>के बीच सिर्फ महाराष्ट्र में 767 </strong><strong>किसानों ने आत्महत्या की।</strong>

<em>"</em><em>मदद करने की बजाय मोदी सरकार ने उनकी पीठ में छुरा घोंपा है,"</em> उन्होंने कहा।

<strong>भारत-अमेरिका के बीच </strong><strong>Trade War</strong>

यह मामला सिर्फ कपास का ही नहीं है, बल्कि <strong>भारत और अमेरिका के बीच चल रही टैरिफ जंग (Tariff War)</strong> का भी हिस्सा है।
<ul>
 	<li>अमेरिका के राष्ट्रपति <strong>डोनाल्ड ट्रंप</strong> ने भारतीय सामान पर <strong>50% </strong><strong>टैरिफ</strong> लगा दिया, जो <strong>27 </strong><strong>अगस्त 2025 </strong><strong>से लागू</strong> हो गया।</li>
 	<li>केजरीवाल का कहना है कि जब अमेरिका ने यह किया, तब भारत को भी उसी तरह जवाब देना चाहिए था।</li>
 	<li>लेकिन मोदी सरकार ने उल्टा अमेरिकी सामान पर टैरिफ <strong>खत्म कर दिया</strong>, जिससे अमेरिका को फायदा और भारत को नुकसान हुआ।</li>
</ul>
<h3><strong>दूसरे देशों ने कैसे जवाब दिया:</strong></h3>
<ul>
 	<li><strong>यूरोपियन यूनियन (EU)</strong>: अमेरिका ने उनकी कारों पर 25% टैरिफ लगाया, तो EU ने मोटरसाइकिलों पर 50% टैरिफ लगाया।</li>
 	<li><strong>चीन</strong>: अमेरिका ने 145% टैरिफ लगाया, तो चीन ने 125% लगाया।</li>
 	<li><strong>कनाडा और मेक्सिको</strong>: दोनों ने भी अमेरिका को कड़ा जवाब दिया।</li>
</ul>
केजरीवाल ने कहा:

<em>"</em><em>ट्रंप एक कायर आदमी है। जो देश उसके खिलाफ खड़ा हुआ, </em><em>ट्रंप को उसके सामने झुकना पड़ा। लेकिन मोदी जी ट्रंप के सामने भीगी बिल्ली बने हुए हैं।"</em>

<strong>किसानों की बड़ी चिंता</strong>

केजरीवाल ने कहा कि जुलाई में किसानों ने कर्ज लेकर कपास की बुवाई की है।
<ul>
 	<li>अक्टूबर से उनकी कपास मंडियों में आने लगेगी।</li>
 	<li>लेकिन 30 सितंबर तक इंडस्ट्री अमेरिका से सस्ती कपास खरीद लेगी।</li>
 	<li>नतीजतन, भारतीय किसानों की फसल <strong>या तो बहुत कम दाम पर बिकेगी, </strong><strong>या बिकेगी ही नहीं।</strong></li>
</ul>
उन्होंने पिछले साल का उदाहरण देते हुए कहा कि:
<ul>
 	<li><strong>MSP (Minimum Support Price)</strong> ₹7,000 प्रति क्विंटल था,</li>
 	<li>लेकिन किसान को मंडियों में केवल <strong>₹6,000 </strong><strong>या उससे भी कम</strong> दाम मिला।</li>
 	<li>इस साल यह हालत और भी खराब होगी।</li>
</ul>
<strong>मोदी सरकार क्यों झुकी</strong><strong>? </strong><strong>केजरीवाल का सवाल</strong>

केजरीवाल ने सवाल उठाया कि आखिर मोदी सरकार अमेरिकी दबाव में क्यों झुकी?

<em>"</em><em>देश की आबादी 140 </em><em>करोड़ है। इतनी बड़ी मार्केट है कि कोई भी देश हमारी नाराजगी बर्दाश्त नहीं कर सकता। फिर मोदी जी क्यों झुके?"</em>

उन्होंने आरोप लगाया कि चर्चा है कि:
<ul>
 	<li>अमेरिका में <strong>अडानी ग्रुप</strong> से जुड़े मामलों की जांच चल रही है।</li>
 	<li>अडानी की गिरफ्तारी हो सकती है।</li>
 	<li>मोदी सरकार अडानी को बचाने के लिए देश के किसानों और उद्योगपतियों को दांव पर लगा रही है।</li>
</ul>
केजरीवाल ने कहा कि उन्हें इसकी पुष्टि नहीं है, लेकिन अगर यह सच हुआ तो यह <strong>देश के साथ बहुत बड़ा धोखा</strong> होगा।

<strong>AAP </strong><strong>की बड़ी रैली की घोषणा</strong>
<ul>
 	<li><strong>7 </strong><strong>सितंबर 2025</strong> को <strong>गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले के चोटीला</strong> में आम आदमी पार्टी एक <strong>बड़ी जनसभा</strong> करेगी।</li>
 	<li>यह इलाका गुजरात का सबसे बड़ा <strong>कपास उत्पादक क्षेत्र</strong> है।</li>
 	<li>इस रैली में किसानों को एकजुट कर सरकार के खिलाफ आवाज उठाई जाएगी।</li>
 	<li>केजरीवाल ने अन्य राजनीतिक दलों और किसान संगठनों से भी एकजुट होने की अपील की।</li>
</ul>
<strong>केजरीवाल की मुख्य मांगें</strong>
<ol>
 	<li><strong>कपास पर तुरंत 11% Import Duty </strong><strong>वापस लगाई जाए।</strong></li>
 	<li>अमेरिकी सामान पर भी <strong>रिटैलिएटरी टैरिफ</strong> (50% या उससे ज्यादा) लगाया जाए।</li>
 	<li>किसानों को उनकी फसल के <strong>उचित दाम</strong> दिए जाएं।</li>
</ol>
&nbsp;

<a href="https://youtu.be/ZR86qcGow-I?si=AyFb-u-gNDDwksEy">https://youtu.be/ZR86qcGow-I?si=AyFb-u-gNDDwksEy</a>

&nbsp;

<strong>वित्त मंत्रालय का बयान</strong>

वित्त मंत्रालय ने कहा है कि यह फैसला <strong>निर्यातकों को राहत</strong> देने के लिए लिया गया है।

<em>"</em><em>कपास (HS 5201) </em><em>पर आयात शुल्क छूट को 30 </em><em>सितंबर से बढ़ाकर 31 </em><em>दिसंबर 2025 </em><em>तक कर दिया गया है।"</em>

लेकिन सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि किसानों को इस फैसले से होने वाले नुकसान की भरपाई कैसे होगी।

मोदी सरकार के इस कदम ने किसानों के बीच चिंता बढ़ा दी है।
<ul>
 	<li>जहां एक तरफ अमेरिका को इससे बड़ा फायदा मिलेगा,</li>
 	<li>वहीं भारतीय किसान और उद्योगपति <strong>भारी नुकसान</strong> झेलेंगे।</li>
 	<li>अक्टूबर में मंडियों में आने वाली कपास की फसल की खरीद को लेकर <strong>भारी संकट</strong> खड़ा हो सकता है।</li>
</ul>
अरविंद केजरीवाल ने इसे <strong>किसानों के साथ धोखा</strong> करार देते हुए कहा कि अगर सरकार ने यह फैसला वापस नहीं लिया, तो यह <strong>कृषि क्षेत्र के लिए विनाशकारी साबित होगा।</strong>

&nbsp;
<div id="mvp-content-main" class="left relative">

<strong>NOTE: NEWS SOURCE AVP News Punjab</strong>

</div>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[देश के किसानों के लिए आने वाले दिन मुश्किल भरे हो सकते हैं। केंद्र सरकार ने हाल ही में एक ऐसा बड़ा फैसला लिया है, जिसे लेकर राजनीति गरमा गई है। सरकार ने अमेरिका से आने वाली <strong>कपास (Cotton)</strong> पर लगने वाली <strong>11% </strong><strong>आयात शुल्क (Import Duty)</strong> को हटा दिया है। पहले अमेरिका से भारत आने वाली कपास पर यह टैक्स लागू था, लेकिन अब यह छूट <strong>19 </strong><strong>अगस्त से 30 </strong><strong>सितंबर 2025 </strong><strong>तक</strong> यानी <strong>40 </strong><strong>दिनों</strong> के लिए दी गई है। बाद में वित्त मंत्रालय ने इस छूट को <strong>31 </strong><strong>दिसंबर 2025 </strong><strong>तक बढ़ाने</strong> का ऐलान किया।

इस फैसले को लेकर किसानों में गुस्सा है और विपक्षी दलों ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री <strong>अरविंद केजरीवाल</strong> ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र पर सीधा हमला बोला है।

<strong>केजरीवाल का आरोप: किसानों की पीठ में छुरा घोंपा गया</strong>

गुरुवार (28 अगस्त) को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मोदी सरकार ने यह फैसला किसानों से बिना सलाह-मशविरा किए, <strong>चोरी-छिपे</strong>, अमेरिका के दबाव में लिया है।

उन्होंने कहा:

<em>"</em><em>अभी 90-95% </em><em>किसानों को इस फैसले की जानकारी ही नहीं है। जब उन्हें असलियत पता चलेगी, </em><em>तो कई किसान आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो जाएंगे।"</em>

केजरीवाल के मुताबिक, इस फैसले का सबसे बड़ा नुकसान यह होगा कि जब अक्टूबर में भारतीय किसानों की कपास मंडियों में आएगी, तब तक भारत की <strong>टेक्सटाइल इंडस्ट्री</strong> अमेरिका से सस्ती कपास खरीद चुकी होगी।

उन्होंने बताया कि अमेरिकी कपास <strong>भारतीय कपास से ₹15-20 </strong><strong>प्रति किलो सस्ती</strong> है। ऐसे में भारतीय किसानों की कपास <strong>कोई नहीं खरीदेगा</strong>, और उन्हें औने-पौने दामों पर अपनी फसल बेचनी पड़ेगी।

<strong>किसानों पर सबसे ज्यादा असर किन राज्यों में होगा</strong>

इस फैसले से खासकर इन राज्यों के किसान प्रभावित होंगे:
<ul>
 	<li><strong>गुजरात</strong></li>
 	<li><strong>पंजाब</strong></li>
 	<li><strong>महाराष्ट्र का विदर्भ क्षेत्र</strong></li>
 	<li><strong>तेलंगाना</strong></li>
</ul>
ये वो राज्य हैं जहां कपास की खेती बड़े पैमाने पर होती है। खास बात यह है कि विदर्भ और गुजरात जैसे इलाकों में पहले से ही किसान आत्महत्या के मामले काफी ज्यादा हैं।

केजरीवाल ने बताया कि <strong>जनवरी से मार्च 2025 </strong><strong>के बीच सिर्फ महाराष्ट्र में 767 </strong><strong>किसानों ने आत्महत्या की।</strong>

<em>"</em><em>मदद करने की बजाय मोदी सरकार ने उनकी पीठ में छुरा घोंपा है,"</em> उन्होंने कहा।

<strong>भारत-अमेरिका के बीच </strong><strong>Trade War</strong>

यह मामला सिर्फ कपास का ही नहीं है, बल्कि <strong>भारत और अमेरिका के बीच चल रही टैरिफ जंग (Tariff War)</strong> का भी हिस्सा है।
<ul>
 	<li>अमेरिका के राष्ट्रपति <strong>डोनाल्ड ट्रंप</strong> ने भारतीय सामान पर <strong>50% </strong><strong>टैरिफ</strong> लगा दिया, जो <strong>27 </strong><strong>अगस्त 2025 </strong><strong>से लागू</strong> हो गया।</li>
 	<li>केजरीवाल का कहना है कि जब अमेरिका ने यह किया, तब भारत को भी उसी तरह जवाब देना चाहिए था।</li>
 	<li>लेकिन मोदी सरकार ने उल्टा अमेरिकी सामान पर टैरिफ <strong>खत्म कर दिया</strong>, जिससे अमेरिका को फायदा और भारत को नुकसान हुआ।</li>
</ul>
<h3><strong>दूसरे देशों ने कैसे जवाब दिया:</strong></h3>
<ul>
 	<li><strong>यूरोपियन यूनियन (EU)</strong>: अमेरिका ने उनकी कारों पर 25% टैरिफ लगाया, तो EU ने मोटरसाइकिलों पर 50% टैरिफ लगाया।</li>
 	<li><strong>चीन</strong>: अमेरिका ने 145% टैरिफ लगाया, तो चीन ने 125% लगाया।</li>
 	<li><strong>कनाडा और मेक्सिको</strong>: दोनों ने भी अमेरिका को कड़ा जवाब दिया।</li>
</ul>
केजरीवाल ने कहा:

<em>"</em><em>ट्रंप एक कायर आदमी है। जो देश उसके खिलाफ खड़ा हुआ, </em><em>ट्रंप को उसके सामने झुकना पड़ा। लेकिन मोदी जी ट्रंप के सामने भीगी बिल्ली बने हुए हैं।"</em>

<strong>किसानों की बड़ी चिंता</strong>

केजरीवाल ने कहा कि जुलाई में किसानों ने कर्ज लेकर कपास की बुवाई की है।
<ul>
 	<li>अक्टूबर से उनकी कपास मंडियों में आने लगेगी।</li>
 	<li>लेकिन 30 सितंबर तक इंडस्ट्री अमेरिका से सस्ती कपास खरीद लेगी।</li>
 	<li>नतीजतन, भारतीय किसानों की फसल <strong>या तो बहुत कम दाम पर बिकेगी, </strong><strong>या बिकेगी ही नहीं।</strong></li>
</ul>
उन्होंने पिछले साल का उदाहरण देते हुए कहा कि:
<ul>
 	<li><strong>MSP (Minimum Support Price)</strong> ₹7,000 प्रति क्विंटल था,</li>
 	<li>लेकिन किसान को मंडियों में केवल <strong>₹6,000 </strong><strong>या उससे भी कम</strong> दाम मिला।</li>
 	<li>इस साल यह हालत और भी खराब होगी।</li>
</ul>
<strong>मोदी सरकार क्यों झुकी</strong><strong>? </strong><strong>केजरीवाल का सवाल</strong>

केजरीवाल ने सवाल उठाया कि आखिर मोदी सरकार अमेरिकी दबाव में क्यों झुकी?

<em>"</em><em>देश की आबादी 140 </em><em>करोड़ है। इतनी बड़ी मार्केट है कि कोई भी देश हमारी नाराजगी बर्दाश्त नहीं कर सकता। फिर मोदी जी क्यों झुके?"</em>

उन्होंने आरोप लगाया कि चर्चा है कि:
<ul>
 	<li>अमेरिका में <strong>अडानी ग्रुप</strong> से जुड़े मामलों की जांच चल रही है।</li>
 	<li>अडानी की गिरफ्तारी हो सकती है।</li>
 	<li>मोदी सरकार अडानी को बचाने के लिए देश के किसानों और उद्योगपतियों को दांव पर लगा रही है।</li>
</ul>
केजरीवाल ने कहा कि उन्हें इसकी पुष्टि नहीं है, लेकिन अगर यह सच हुआ तो यह <strong>देश के साथ बहुत बड़ा धोखा</strong> होगा।

<strong>AAP </strong><strong>की बड़ी रैली की घोषणा</strong>
<ul>
 	<li><strong>7 </strong><strong>सितंबर 2025</strong> को <strong>गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले के चोटीला</strong> में आम आदमी पार्टी एक <strong>बड़ी जनसभा</strong> करेगी।</li>
 	<li>यह इलाका गुजरात का सबसे बड़ा <strong>कपास उत्पादक क्षेत्र</strong> है।</li>
 	<li>इस रैली में किसानों को एकजुट कर सरकार के खिलाफ आवाज उठाई जाएगी।</li>
 	<li>केजरीवाल ने अन्य राजनीतिक दलों और किसान संगठनों से भी एकजुट होने की अपील की।</li>
</ul>
<strong>केजरीवाल की मुख्य मांगें</strong>
<ol>
 	<li><strong>कपास पर तुरंत 11% Import Duty </strong><strong>वापस लगाई जाए।</strong></li>
 	<li>अमेरिकी सामान पर भी <strong>रिटैलिएटरी टैरिफ</strong> (50% या उससे ज्यादा) लगाया जाए।</li>
 	<li>किसानों को उनकी फसल के <strong>उचित दाम</strong> दिए जाएं।</li>
</ol>
&nbsp;

<a href="https://youtu.be/ZR86qcGow-I?si=AyFb-u-gNDDwksEy">https://youtu.be/ZR86qcGow-I?si=AyFb-u-gNDDwksEy</a>

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<strong>वित्त मंत्रालय का बयान</strong>

वित्त मंत्रालय ने कहा है कि यह फैसला <strong>निर्यातकों को राहत</strong> देने के लिए लिया गया है।

<em>"</em><em>कपास (HS 5201) </em><em>पर आयात शुल्क छूट को 30 </em><em>सितंबर से बढ़ाकर 31 </em><em>दिसंबर 2025 </em><em>तक कर दिया गया है।"</em>

लेकिन सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि किसानों को इस फैसले से होने वाले नुकसान की भरपाई कैसे होगी।

मोदी सरकार के इस कदम ने किसानों के बीच चिंता बढ़ा दी है।
<ul>
 	<li>जहां एक तरफ अमेरिका को इससे बड़ा फायदा मिलेगा,</li>
 	<li>वहीं भारतीय किसान और उद्योगपति <strong>भारी नुकसान</strong> झेलेंगे।</li>
 	<li>अक्टूबर में मंडियों में आने वाली कपास की फसल की खरीद को लेकर <strong>भारी संकट</strong> खड़ा हो सकता है।</li>
</ul>
अरविंद केजरीवाल ने इसे <strong>किसानों के साथ धोखा</strong> करार देते हुए कहा कि अगर सरकार ने यह फैसला वापस नहीं लिया, तो यह <strong>कृषि क्षेत्र के लिए विनाशकारी साबित होगा।</strong>

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<div id="mvp-content-main" class="left relative">

<strong>NOTE: NEWS SOURCE AVP News Punjab</strong>

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			</item>
		<item>
		<title>Punjab की Agriculture संकट में: बाढ़ से 4 Lakh Acres जमीन डूबी, Agriculture Minister ने Centre से Financial मदद की मांग</title>
		<link>https://trendstopic.in/punjabs-agriculture-in-crisis-4-lakh-acres-submerged-due-to-floods-agriculture-minister-seeks-financial-aid-from-centre/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Sep 2025 04:45:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[AgricultureCrisis]]></category>
		<category><![CDATA[AgricultureMinister]]></category>
		<category><![CDATA[FarmersRelief]]></category>
		<category><![CDATA[FarmersSupport]]></category>
		<category><![CDATA[FinancialAid]]></category>
		<category><![CDATA[FloodDamage]]></category>
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		<category><![CDATA[PunjabFloods]]></category>
		<category><![CDATA[PunjabNews]]></category>
		<category><![CDATA[punjabupdates]]></category>
		<category><![CDATA[ReliefPackage]]></category>
		<category><![CDATA[RuralEconomy]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://trendstopic.in/?p=25193</guid>

					<description><![CDATA[पंजाब इस समय एक बड़ी प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है। हाल ही में आई भीषण बाढ़ ने न सिर्फ किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है, बल्कि पूरे राज्य की अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया है। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, लगभग <strong>4 </strong><strong>लाख एकड़ कृषि भूमि</strong> पानी में डूब गई है। इस तबाही ने किसानों के साथ-साथ देश के <strong>अन्न भंडार</strong> को भी संकट में डाल दिया है।

राज्य के <strong>कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री स. गुरमीत सिंह खुड्डियां</strong> ने आज केंद्रीय कृषि मंत्री <strong>शिवराज सिंह चौहान</strong> से मुलाकात कर बाढ़ से निपटने के लिए <strong>तत्काल वित्तीय राहत</strong> और एक <strong>विशेष आर्थिक पैकेज</strong> की मांग की। साथ ही, उन्होंने बाढ़ प्रभावित किसानों को दिए जाने वाले <strong>मुआवजे</strong> को बढ़ाने की भी अपील की।

<strong>अमृतसर</strong><strong>, </strong><strong>गुरदासपुर और कपूरथला का दौरा</strong>

गुरमीत सिंह खुड्डियां ने केंद्रीय कृषि मंत्री के साथ मिलकर <strong>अमृतसर</strong><strong>, </strong><strong>गुरदासपुर और कपूरथला</strong> जिलों के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया। इस दौरान दोनों नेताओं ने प्रभावित किसानों से मुलाकात की और उनके हालात का जायजा लिया।
अमृतसर के <strong>श्री गुरु राम दास जी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे</strong> पर पहुंचने पर कृषि मंत्री ने शिवराज सिंह चौहान का स्वागत किया।

दौरे के दौरान खुड्डियां ने बाढ़ से हुई तबाही का विस्तार से ब्यौरा दिया और बताया कि फसल कटाई का सीजन आने ही वाला था, ऐसे में खासतौर पर <strong>धान की फसल</strong> को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है और राज्य की <strong>कृषि अर्थव्यवस्था</strong> गहरे संकट में चली गई है।

<strong>पशुधन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर</strong>

खड्डियां ने बताया कि बाढ़ ने सिर्फ खेतों को ही नहीं, बल्कि <strong>पशुधन</strong> को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। कई इलाकों में मवेशी बह गए या बीमार हो गए हैं। इसका सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ा है, जो पहले से ही कमजोर स्थिति में है।

उन्होंने कहा,

<em>"</em><em>पंजाब देश की खाद्य सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन इस बाढ़ ने न सिर्फ फसलों को तबाह किया है</em><em>, </em><em>बल्कि कृषि से जुड़ी बुनियादी ढांचे और ग्रामीण जीवन पर भी गहरा असर डाला है। ऐसे में राज्य को फिर से खड़ा करने के लिए केंद्र सरकार की मदद बेहद जरूरी है।"</em>

<strong>मुआवजे को </strong><strong>50,000 </strong><strong>रुपये प्रति एकड़ करने की मांग</strong>

वर्तमान में किसानों को फसलों के नुकसान पर <strong>6,800 </strong><strong>रुपये प्रति एकड़</strong> का मुआवजा दिया जा रहा है। लेकिन किसानों का कहना है कि यह राशि उनके असली नुकसान की तुलना में बेहद कम है।
इस पर खुड्डियां ने कहा कि यह मुआवजा <strong>कम से कम </strong><strong>50,000 </strong><strong>रुपये प्रति एकड़</strong> किया जाना चाहिए ताकि किसान अपने खेतों को फिर से संभाल सकें और अगली फसल की तैयारी कर सकें।

<strong>ग्रामीण विकास और मार्केट विकास फंड की मांग</strong>

गुरमीत सिंह खुड्डियां ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने पंजाब का <strong>ग्रामीण विकास फंड (</strong><strong>RDF)</strong> और <strong>मार्केट विकास फंड (</strong><strong>MDF)</strong> का लगभग <strong>8,000 </strong><strong>करोड़ रुपये</strong> रोक रखा है। उन्होंने मांग की कि इस राशि को तुरंत जारी किया जाए ताकि राज्य में राहत कार्य और पुनर्निर्माण का काम तेजी से हो सके।

<strong>पंजाब के लिए विशेष पैकेज की जरूरत</strong>

कृषि मंत्री ने कहा कि पंजाब की स्थिति बेहद गंभीर है और इसे सामान्य करने के लिए <strong>विशेष आर्थिक पैकेज</strong> की सख्त जरूरत है।
उन्होंने यह भी बताया कि यह पैकेज न केवल फसलों और किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए जरूरी है, बल्कि <strong>कृषि बुनियादी ढांचे</strong> को दोबारा खड़ा करने और <strong>ग्रामीण अर्थव्यवस्था</strong> को संभालने के लिए भी आवश्यक है।

<strong>देश का अन्न भंडार संकट में</strong>

पंजाब देश का प्रमुख <strong>अन्न उत्पादक राज्य</strong> है और केंद्र के <strong>फूड पूल</strong> में सबसे ज्यादा योगदान देता है। लेकिन बाढ़ के कारण धान और अन्य फसलों की बर्बादी से देश की <strong>खाद्य सुरक्षा</strong> पर भी असर पड़ सकता है।

खुड्डियां ने चेतावनी दी कि अगर स्थिति को जल्द नहीं संभाला गया तो पंजाब के किसान गहरे आर्थिक संकट में चले जाएंगे, जिससे पूरे देश की खाद्य आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
पंजाब में बाढ़ की तबाही से लाखों किसान बर्बाद हो चुके हैं। राज्य सरकार ने केंद्र से तत्काल मदद की मांग की है। अब यह देखना होगा कि केंद्र सरकार कितनी जल्दी और कितनी मदद देती है ताकि पंजाब के किसान फिर से अपने पैरों पर खड़े हो सकें।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[पंजाब इस समय एक बड़ी प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है। हाल ही में आई भीषण बाढ़ ने न सिर्फ किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है, बल्कि पूरे राज्य की अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया है। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, लगभग <strong>4 </strong><strong>लाख एकड़ कृषि भूमि</strong> पानी में डूब गई है। इस तबाही ने किसानों के साथ-साथ देश के <strong>अन्न भंडार</strong> को भी संकट में डाल दिया है।

राज्य के <strong>कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री स. गुरमीत सिंह खुड्डियां</strong> ने आज केंद्रीय कृषि मंत्री <strong>शिवराज सिंह चौहान</strong> से मुलाकात कर बाढ़ से निपटने के लिए <strong>तत्काल वित्तीय राहत</strong> और एक <strong>विशेष आर्थिक पैकेज</strong> की मांग की। साथ ही, उन्होंने बाढ़ प्रभावित किसानों को दिए जाने वाले <strong>मुआवजे</strong> को बढ़ाने की भी अपील की।

<strong>अमृतसर</strong><strong>, </strong><strong>गुरदासपुर और कपूरथला का दौरा</strong>

गुरमीत सिंह खुड्डियां ने केंद्रीय कृषि मंत्री के साथ मिलकर <strong>अमृतसर</strong><strong>, </strong><strong>गुरदासपुर और कपूरथला</strong> जिलों के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया। इस दौरान दोनों नेताओं ने प्रभावित किसानों से मुलाकात की और उनके हालात का जायजा लिया।
अमृतसर के <strong>श्री गुरु राम दास जी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे</strong> पर पहुंचने पर कृषि मंत्री ने शिवराज सिंह चौहान का स्वागत किया।

दौरे के दौरान खुड्डियां ने बाढ़ से हुई तबाही का विस्तार से ब्यौरा दिया और बताया कि फसल कटाई का सीजन आने ही वाला था, ऐसे में खासतौर पर <strong>धान की फसल</strong> को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है और राज्य की <strong>कृषि अर्थव्यवस्था</strong> गहरे संकट में चली गई है।

<strong>पशुधन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर</strong>

खड्डियां ने बताया कि बाढ़ ने सिर्फ खेतों को ही नहीं, बल्कि <strong>पशुधन</strong> को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। कई इलाकों में मवेशी बह गए या बीमार हो गए हैं। इसका सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ा है, जो पहले से ही कमजोर स्थिति में है।

उन्होंने कहा,

<em>"</em><em>पंजाब देश की खाद्य सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन इस बाढ़ ने न सिर्फ फसलों को तबाह किया है</em><em>, </em><em>बल्कि कृषि से जुड़ी बुनियादी ढांचे और ग्रामीण जीवन पर भी गहरा असर डाला है। ऐसे में राज्य को फिर से खड़ा करने के लिए केंद्र सरकार की मदद बेहद जरूरी है।"</em>

<strong>मुआवजे को </strong><strong>50,000 </strong><strong>रुपये प्रति एकड़ करने की मांग</strong>

वर्तमान में किसानों को फसलों के नुकसान पर <strong>6,800 </strong><strong>रुपये प्रति एकड़</strong> का मुआवजा दिया जा रहा है। लेकिन किसानों का कहना है कि यह राशि उनके असली नुकसान की तुलना में बेहद कम है।
इस पर खुड्डियां ने कहा कि यह मुआवजा <strong>कम से कम </strong><strong>50,000 </strong><strong>रुपये प्रति एकड़</strong> किया जाना चाहिए ताकि किसान अपने खेतों को फिर से संभाल सकें और अगली फसल की तैयारी कर सकें।

<strong>ग्रामीण विकास और मार्केट विकास फंड की मांग</strong>

गुरमीत सिंह खुड्डियां ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने पंजाब का <strong>ग्रामीण विकास फंड (</strong><strong>RDF)</strong> और <strong>मार्केट विकास फंड (</strong><strong>MDF)</strong> का लगभग <strong>8,000 </strong><strong>करोड़ रुपये</strong> रोक रखा है। उन्होंने मांग की कि इस राशि को तुरंत जारी किया जाए ताकि राज्य में राहत कार्य और पुनर्निर्माण का काम तेजी से हो सके।

<strong>पंजाब के लिए विशेष पैकेज की जरूरत</strong>

कृषि मंत्री ने कहा कि पंजाब की स्थिति बेहद गंभीर है और इसे सामान्य करने के लिए <strong>विशेष आर्थिक पैकेज</strong> की सख्त जरूरत है।
उन्होंने यह भी बताया कि यह पैकेज न केवल फसलों और किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए जरूरी है, बल्कि <strong>कृषि बुनियादी ढांचे</strong> को दोबारा खड़ा करने और <strong>ग्रामीण अर्थव्यवस्था</strong> को संभालने के लिए भी आवश्यक है।

<strong>देश का अन्न भंडार संकट में</strong>

पंजाब देश का प्रमुख <strong>अन्न उत्पादक राज्य</strong> है और केंद्र के <strong>फूड पूल</strong> में सबसे ज्यादा योगदान देता है। लेकिन बाढ़ के कारण धान और अन्य फसलों की बर्बादी से देश की <strong>खाद्य सुरक्षा</strong> पर भी असर पड़ सकता है।

खुड्डियां ने चेतावनी दी कि अगर स्थिति को जल्द नहीं संभाला गया तो पंजाब के किसान गहरे आर्थिक संकट में चले जाएंगे, जिससे पूरे देश की खाद्य आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
पंजाब में बाढ़ की तबाही से लाखों किसान बर्बाद हो चुके हैं। राज्य सरकार ने केंद्र से तत्काल मदद की मांग की है। अब यह देखना होगा कि केंद्र सरकार कितनी जल्दी और कितनी मदद देती है ताकि पंजाब के किसान फिर से अपने पैरों पर खड़े हो सकें।]]></content:encoded>
					
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