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	<title>53rdCJI &#8211; Trends Topic</title>
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	<title>53rdCJI &#8211; Trends Topic</title>
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	<item>
		<title>India के 53वें Chief Justice बने Justice Surya Kant, राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने दिलाई शपथ</title>
		<link>https://trendstopic.in/justice-surya-kant-becomes-the-53rd-chief-justice-of-india-sworn-in-by-president-droupadi-murmu/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 24 Nov 2025 08:43:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[53rdCJI]]></category>
		<category><![CDATA[ChiefJusticeOfIndia]]></category>
		<category><![CDATA[DroupadiMurmu]]></category>
		<category><![CDATA[IndiaNews]]></category>
		<category><![CDATA[Judiciary]]></category>
		<category><![CDATA[JusticeSuryaKant]]></category>
		<category><![CDATA[SupremeCourtOfIndia]]></category>
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					<description><![CDATA[जस्टिस <strong>सूर्या कांत</strong> ने आज (सोमवार) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साम्हणे राष्ट्रपति भवन में शपथ ली और भारत के <strong>53</strong><strong>वें मुख्य न्यायाधीश</strong> (CJI) के रूप में पद ग्रहण किया।

उनकी नियुक्ति उससे पहले ही 30 अक्टूबर को घोषणा की गई थी। वे वर्तमान CJI <strong>B. R. </strong><strong>गवई</strong> की जगह ले रहे हैं, जो 23 नवंबर, 2025 को सेवानिवृत्त हुए।

<strong>उनका प्रोफाइल </strong><strong>— </strong><strong>सरल भाषा में</strong>
<ul>
 	<li><strong>जन्म और शिक्षा</strong>: जस्टिस कांत का जन्म 10 फरवरी, 1962 को हरियाणा के हिसार जिले में हुआ था।</li>
 	<li><strong>कानूनी करियर</strong>: उन्होंने 1984 में लॉ की पढ़ाई पूरी की और उसी वर्ष हिसार जिला न्यायालय में वकील के रूप में काम करना शुरू किया। बाद में वह पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करने गए।</li>
 	<li><strong>उच्च न्यायालय अनुभव</strong>: उन्हें हरियाणा की वकालत में उल्लेखनीय अनुभव के बाद हरियाणा का एडवोकेट जनरल भी बनाया गया था। इसके बाद वे पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के जज बने और फिर हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) बने।</li>
 	<li><strong>शिक्षा आगे</strong>: उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से लॉ में मास्टर डिग्री भी ली और کلاس में टॉप किया (first class first)।</li>
 	<li><strong>उच्चतम अदालत</strong>: मई 2019 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया था।</li>
</ul>
<strong>सीजेआई के रूप में उनका कार्यकाल</strong>
<ul>
 	<li>उन्हें लगभग <strong>15 </strong><strong>महीने</strong> (लगभग डेढ़ साल) के लिए नियुक्त किया गया है।</li>
 	<li>वे <strong>9 </strong><strong>फरवरी</strong><strong>, 2027</strong> को रिटायर होंगे, क्योंकि उस दिन उनकी उम्र 65 साल पूरी हो जाएगी।</li>
</ul>
<strong>महत्वपूर्ण फैसले और उनका दृष्टिकोण</strong>

जस्टिस सूर्या कांत सुप्रीम कोर्ट में कई बड़े और संवेदनशील मामलों में सक्रिय रहे हैं। उनके जजमेंट्स ने लोगों के अधिकार, लोकतंत्र और संविधान की अहमियत को दर्शाया है। कुछ मुख्य मुद्दे ये हैं:
<ol>
 	<li><strong>Article 370</strong>: वे उस बेंच का हिस्सा रहे जिसने जम्मू-और-कश्मीर की स्पेशल स्टेटस (अनुच्छेद 370) के हटाने को संविधान के दायरे में माना।</li>
 	<li><strong>सेडिशन (राजद्रोह) कानून</strong>: वे उस बेंच में थे, जिसने ब्रिटिश जमाने के "सेडिशन लॉ" (IPC की धारा 124A) पर कहा कि नए FIR दर्ज न किए जाएं, जब तक कानून की समीक्षा न हो।</li>
 	<li><strong>पेगासस स्पाइवेयर केस</strong>: उन्होंने कहा कि “नए सुरक्षा नाम पर राज्य को पूरी छूट नहीं मिल सकती” — कोर्ट ने साइबर एक्सपर्ट्स की एक कमिटी बनाने का निर्देश दिया।</li>
 	<li><strong>मतदाता सूची (</strong><strong>Electoral Rolls)</strong>: उन्होंने चुनाव आयोग से कहा कि बिहार में ड्राफ्ट मतदाता सूची से 65 लाख वोटर्स को क्यों हटाया गया, इसकी जानकारी देनी चाहिए।</li>
 	<li><strong>जेंडर और समानता</strong>: उन्होंने एक महिला सरपंच को वापस पद पर लाने का फैसला दिया और कोर्ट बार एसोसिएशनों (SCBA समेत) में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने की मांग की।</li>
 	<li><strong>सेनानियों की पेंशन (</strong><strong>One Rank, One Pension)</strong>: उन्होंने इस स्कीम को संवैधानिक मान्यता दी।</li>
 	<li><strong>राजनैतिक शक्ति-संतुलन (</strong><strong>Governor </strong><strong>और राष्ट्रपति से जुड़ा)</strong>: वे उस संविधान बेंच में शामिल थे, जिसने गर्वनर और राष्ट्रपति के अधिकारों की सीमा पर विचार किया — यह फैसला पूरे देश में राज्यों और केंद्र के बीच संतुलन बनाए रखने के लिहाज से अहम हो सकता है।</li>
</ol>
<strong>शपथ ग्रहण समारोह और राजनीतिक महत्व</strong>
<ul>
 	<li>शपथ ग्रहण में <strong>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू</strong> ने उन्हें पद-शपथ दिलाई।</li>
 	<li>इस समारोह में कांग्रेस की बड़ी शख्सियतें भी मौजूद रहीं — जैसे प्रधानमंत्री <strong>नरेंद्र मोदी</strong>, उपराष्ट्रपति <strong>सी.पी. राधाकृष्णन</strong>, गृह मंत्री <strong>अमित शाह</strong>, रक्षा मंत्री <strong>राजनाथ सिंह</strong>, लोकसभा स्पीकर <strong>ओम बिड़ला</strong> आदि।</li>
 	<li>उनकी नियुक्ति “सीन्योरिटी” के नियमों का पालन करते हुए हुई है — यानि सुप्रीम कोर्ट का सबसे वरिष्ठ और योग्य जज उन्हें आगे लाया गया है।</li>
</ul>
<strong>उनका व्यक्तित्व और दर्शन</strong>
<ul>
 	<li>जस्टिस कांत को इंसानियत, ईमानदारी और संवैधानिक मूल्यों पर भरोसा करने वाला जज माना जाता है।</li>
 	<li>उन्होंने पहले कहा है कि वकीलों को “हमें हमेशा सीखते रहना चाहिए” — उनका मानना है कि कानून सिर्फ एक पेशा नहीं है, बल्कि कमजोरों की आवाज़ उठाने का ज़रिया है।</li>
 	<li>इसके अलावा, वे न्यायपालिका में सुधार चाहते हैं — जैसे डिजिटल प्रक्रिया, पारदर्शिता और बुनियादी स्तर पर अधिक सुगमता (जजिंग इनफ्रास्ट्रक्चर) लाना।</li>
</ul>
जस्टिस सूर्या कांत की नियुक्ति भारत के न्यायिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। उनके नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट को अगले डेढ़ सालों में संवैधानिक और सामाजिक मामलों में निर्णायक भूमिका निभानी पड़ सकती है। उनका अनुभव, संतुलित दृष्टिकोण और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता यह संकेत देती है कि वे न्यायपालिका को मजबूत और विश्वसनीय बनाए रखने की दिशा में काम करेंगे।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[जस्टिस <strong>सूर्या कांत</strong> ने आज (सोमवार) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साम्हणे राष्ट्रपति भवन में शपथ ली और भारत के <strong>53</strong><strong>वें मुख्य न्यायाधीश</strong> (CJI) के रूप में पद ग्रहण किया।

उनकी नियुक्ति उससे पहले ही 30 अक्टूबर को घोषणा की गई थी। वे वर्तमान CJI <strong>B. R. </strong><strong>गवई</strong> की जगह ले रहे हैं, जो 23 नवंबर, 2025 को सेवानिवृत्त हुए।

<strong>उनका प्रोफाइल </strong><strong>— </strong><strong>सरल भाषा में</strong>
<ul>
 	<li><strong>जन्म और शिक्षा</strong>: जस्टिस कांत का जन्म 10 फरवरी, 1962 को हरियाणा के हिसार जिले में हुआ था।</li>
 	<li><strong>कानूनी करियर</strong>: उन्होंने 1984 में लॉ की पढ़ाई पूरी की और उसी वर्ष हिसार जिला न्यायालय में वकील के रूप में काम करना शुरू किया। बाद में वह पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करने गए।</li>
 	<li><strong>उच्च न्यायालय अनुभव</strong>: उन्हें हरियाणा की वकालत में उल्लेखनीय अनुभव के बाद हरियाणा का एडवोकेट जनरल भी बनाया गया था। इसके बाद वे पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के जज बने और फिर हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) बने।</li>
 	<li><strong>शिक्षा आगे</strong>: उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से लॉ में मास्टर डिग्री भी ली और کلاس में टॉप किया (first class first)।</li>
 	<li><strong>उच्चतम अदालत</strong>: मई 2019 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया था।</li>
</ul>
<strong>सीजेआई के रूप में उनका कार्यकाल</strong>
<ul>
 	<li>उन्हें लगभग <strong>15 </strong><strong>महीने</strong> (लगभग डेढ़ साल) के लिए नियुक्त किया गया है।</li>
 	<li>वे <strong>9 </strong><strong>फरवरी</strong><strong>, 2027</strong> को रिटायर होंगे, क्योंकि उस दिन उनकी उम्र 65 साल पूरी हो जाएगी।</li>
</ul>
<strong>महत्वपूर्ण फैसले और उनका दृष्टिकोण</strong>

जस्टिस सूर्या कांत सुप्रीम कोर्ट में कई बड़े और संवेदनशील मामलों में सक्रिय रहे हैं। उनके जजमेंट्स ने लोगों के अधिकार, लोकतंत्र और संविधान की अहमियत को दर्शाया है। कुछ मुख्य मुद्दे ये हैं:
<ol>
 	<li><strong>Article 370</strong>: वे उस बेंच का हिस्सा रहे जिसने जम्मू-और-कश्मीर की स्पेशल स्टेटस (अनुच्छेद 370) के हटाने को संविधान के दायरे में माना।</li>
 	<li><strong>सेडिशन (राजद्रोह) कानून</strong>: वे उस बेंच में थे, जिसने ब्रिटिश जमाने के "सेडिशन लॉ" (IPC की धारा 124A) पर कहा कि नए FIR दर्ज न किए जाएं, जब तक कानून की समीक्षा न हो।</li>
 	<li><strong>पेगासस स्पाइवेयर केस</strong>: उन्होंने कहा कि “नए सुरक्षा नाम पर राज्य को पूरी छूट नहीं मिल सकती” — कोर्ट ने साइबर एक्सपर्ट्स की एक कमिटी बनाने का निर्देश दिया।</li>
 	<li><strong>मतदाता सूची (</strong><strong>Electoral Rolls)</strong>: उन्होंने चुनाव आयोग से कहा कि बिहार में ड्राफ्ट मतदाता सूची से 65 लाख वोटर्स को क्यों हटाया गया, इसकी जानकारी देनी चाहिए।</li>
 	<li><strong>जेंडर और समानता</strong>: उन्होंने एक महिला सरपंच को वापस पद पर लाने का फैसला दिया और कोर्ट बार एसोसिएशनों (SCBA समेत) में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने की मांग की।</li>
 	<li><strong>सेनानियों की पेंशन (</strong><strong>One Rank, One Pension)</strong>: उन्होंने इस स्कीम को संवैधानिक मान्यता दी।</li>
 	<li><strong>राजनैतिक शक्ति-संतुलन (</strong><strong>Governor </strong><strong>और राष्ट्रपति से जुड़ा)</strong>: वे उस संविधान बेंच में शामिल थे, जिसने गर्वनर और राष्ट्रपति के अधिकारों की सीमा पर विचार किया — यह फैसला पूरे देश में राज्यों और केंद्र के बीच संतुलन बनाए रखने के लिहाज से अहम हो सकता है।</li>
</ol>
<strong>शपथ ग्रहण समारोह और राजनीतिक महत्व</strong>
<ul>
 	<li>शपथ ग्रहण में <strong>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू</strong> ने उन्हें पद-शपथ दिलाई।</li>
 	<li>इस समारोह में कांग्रेस की बड़ी शख्सियतें भी मौजूद रहीं — जैसे प्रधानमंत्री <strong>नरेंद्र मोदी</strong>, उपराष्ट्रपति <strong>सी.पी. राधाकृष्णन</strong>, गृह मंत्री <strong>अमित शाह</strong>, रक्षा मंत्री <strong>राजनाथ सिंह</strong>, लोकसभा स्पीकर <strong>ओम बिड़ला</strong> आदि।</li>
 	<li>उनकी नियुक्ति “सीन्योरिटी” के नियमों का पालन करते हुए हुई है — यानि सुप्रीम कोर्ट का सबसे वरिष्ठ और योग्य जज उन्हें आगे लाया गया है।</li>
</ul>
<strong>उनका व्यक्तित्व और दर्शन</strong>
<ul>
 	<li>जस्टिस कांत को इंसानियत, ईमानदारी और संवैधानिक मूल्यों पर भरोसा करने वाला जज माना जाता है।</li>
 	<li>उन्होंने पहले कहा है कि वकीलों को “हमें हमेशा सीखते रहना चाहिए” — उनका मानना है कि कानून सिर्फ एक पेशा नहीं है, बल्कि कमजोरों की आवाज़ उठाने का ज़रिया है।</li>
 	<li>इसके अलावा, वे न्यायपालिका में सुधार चाहते हैं — जैसे डिजिटल प्रक्रिया, पारदर्शिता और बुनियादी स्तर पर अधिक सुगमता (जजिंग इनफ्रास्ट्रक्चर) लाना।</li>
</ul>
जस्टिस सूर्या कांत की नियुक्ति भारत के न्यायिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। उनके नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट को अगले डेढ़ सालों में संवैधानिक और सामाजिक मामलों में निर्णायक भूमिका निभानी पड़ सकती है। उनका अनुभव, संतुलित दृष्टिकोण और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता यह संकेत देती है कि वे न्यायपालिका को मजबूत और विश्वसनीय बनाए रखने की दिशा में काम करेंगे।]]></content:encoded>
					
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