भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ ‘AAP’ का पंजाब भर में जोरदार प्रदर्शन, केंद्र पर देश के हितों को बेचने का लगाया आरोप – Trends Topic

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ ‘AAP’ का पंजाब भर में जोरदार प्रदर्शन, केंद्र पर देश के हितों को बेचने का लगाया आरोप

आम आदमी पार्टी (आप) ने भारत और अमेरिका के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को भारतीय किसानों और व्यापारियों के लिए ‘घातक’ करार देते हुए वीरवार को पंजाब के विभिन्न जिलों में जोरदार प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के इस फैसले के खिलाफ ‘भारत बंद’ का पूर्ण समर्थन किया और सड़कों पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराया।

तख्तियां लेकर की नारेबाजी

प्रदर्शन के दौरान ‘आप’ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने समझौते के विरोध में लिखे नारे वाली तख्तियां हाथों में लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पार्टी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अमेरिका के दबाव में आकर देश के हितों से समझौता कर रही है। ‘आप’ ने इस व्यापारिक समझौते को तुरंत रद्द करने की मांग की।

“कृषि व्यवस्था की कमर तोड़ देगा समझौता” – मोहिंदर सिंह सिद्धू

किसान विंग के अध्यक्ष मोहिंदर सिंह सिद्धू ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि यह समझौता भारतीय कृषि व्यवस्था की कमर तोड़ देगा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस संधि के तहत अमेरिका को डेयरी और अन्य कृषि उत्पाद भारतीय बाजारों में बिना टैक्स के बेचने की अनुमति दी गई है।

उनका कहना था कि इससे अमेरिकी उत्पाद बेहद सस्ते दामों पर उपलब्ध होंगे, जिससे स्थानीय किसानों और डेयरी संचालकों का व्यापार प्रभावित होगा।

“अन्नदाता के पेट पर लात” – रणजीत पाल सिंह

आप नेता एवं ट्रेड विंग के महासचिव रणजीत पाल सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार का यह फैसला अन्नदाता के पेट पर लात मारने जैसा है। उन्होंने दावा किया कि जहां अमेरिकी उत्पादों पर कोई टैक्स नहीं लगेगा, वहीं भारतीय व्यापारियों को अमेरिका में 18% तक टैक्स देना पड़ेगा।

उन्होंने कहा, “यह मुकाबला बराबरी का नहीं है। जब तक यह समझौता वापस नहीं लिया जाता, हम इसका विरोध जारी रखेंगे।”

“आर्थिक गुलामी की ओर कदम” – सतवीर सिंह बख्शीवाला

महासचिव सतवीर सिंह बख्शीवाला ने इस समझौते को आर्थिक गुलामी की ओर एक कदम बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को विदेशी कंपनियों के हवाले कर दिया है।

उन्होंने कहा कि इससे न केवल किसान बल्कि आम नागरिकों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। पार्टी कार्यकर्ता जनता के बीच जाकर इस नीति के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाएंगे।

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