शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष Sukhbir Badal और 2015 की पंजाब कैबिनेट के अन्य पूर्व मंत्रियों को श्री अकाल तख्त साहिब ने धार्मिक अनुशासन का उल्लंघन करने के मामले में सजा सुनाई है। दिवंगत प्रकाश सिंह बादल से ‘फखर-ए-कौम’ (कौम का गर्व) उपाधि भी वापस ले ली गई है।
सजा का विवरण
श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने घोषणा की कि Sukhbir Badal और दोषी पूर्व मंत्रियों को बर्तन साफ करने, लंगर परोसने और बाथरूम की सफाई जैसे कार्य करने होंगे।
- 3 दिसंबर को दोपहर 12 से 1 बजे तक: बाथरूम की सफाई।
- सफाई के बाद: स्नान करके लंगर घर में सेवा और श्री सुखमनी साहिब का पाठ।
- भाले के साथ सेवा: श्री दरबार साहिब के बाहर भाला लेकर बैठना होगा, और गले में एक तख्ती भी पहननी होगी।
बैठक और माफी स्वीकारना
सोमवार को श्री अकाल तख्त साहिब पर पांच सिखों की बैठक में अकाली नेताओं के बयान दर्ज किए गए।
सुखबीर बादल ने स्वीकार की गलती: उन्होंने डेरा सिरसा प्रमुख राम रहीम को माफ करने के फैसले में अपनी गलती मानी।
अन्य नेताओं का पक्ष:
प्रेम सिंह चंदूमाजरा और अन्य नेताओं ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया।
बिक्रम मजीठिया ने कहा कि वह 2012 से 2017 के दौरान कैबिनेट का हिस्सा थे, लेकिन डेरा प्रमुख से माफी पर कभी चर्चा नहीं हुई। उन्होंने अपनी हिस्सेदारी स्वीकारते हुए माफी मांगी।
‘फखर-ए-कौम’ उपाधि वापस ली गई
दिवंगत प्रकाश सिंह बादल से ‘फखर-ए-कौम’ का खिताब वापस ले लिया गया है, जो पहले उनकी सेवा और योगदान के लिए दिया गया था।
घटनाक्रम की पृष्ठभूमि
शिरोमणि अकाली दल सरकार (2007-2017) के दौरान डेरा प्रमुख को माफी देने के मामले में इन नेताओं की भूमिका पर सवाल उठे थे। इस पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और मर्यादा का उल्लंघन करने का आरोप लगा था।
सुखबीर बादल की स्थिति
Sukhbir Badal व्हीलचेयर पर श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचे, क्योंकि उनके पैर में फ्रैक्चर है। अगस्त 2023 में सुखबीर बादल को वेतनभोगी घोषित किया गया था। इसके बाद से सजा का निर्णय लंबित था।
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