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	<title>देश &#8211; Trends Topic</title>
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	<title>देश &#8211; Trends Topic</title>
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		<title>West Indies series के लिए भारत की वनडे और T20 टीम का ऐलान, शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर संभालेंगे कप्तानी</title>
		<link>https://trendstopic.in/indias-odi-and-t20-squads-for-the-west-indies-series-announced-shubman-gill-and-shreyas-iyer-to-take-charge-as-captains/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Sep 2026 12:31:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p class="isSelectedEnd">भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने वेस्टइंडीज के खिलाफ होने वाली वनडे और टी-20 सीरीज के लिए भारतीय टीम का ऐलान कर दिया है। अजीत अगरकर की अगुवाई वाली चयन समिति ने तीन वनडे और पांच टी-20 मैचों के लिए खिलाड़ियों का चयन किया है। वनडे सीरीज की शुरुआत 27 सितंबर से तिरुवनंतपुरम में होगी, जबकि पांच मैचों की टी-20 सीरीज 6 अक्टूबर से लखनऊ में शुरू होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">वनडे टीम की कप्तानी एक बार फिर <strong>शुभमन गिल</strong> को सौंपी गई है। वहीं अनुभवी बल्लेबाज <strong>रोहित शर्मा और विराट कोहली</strong> भी वनडे टीम में शामिल हैं और लंबे समय बाद दोनों को एक साथ मैदान पर देखने का मौका मिलेगा। केएल राहुल को वनडे टीम का उप-कप्तान बनाया गया है और वह विकेटकीपर की जिम्मेदारी भी संभालेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">वनडे टीम में <strong>श्रेयस अय्यर</strong> को शामिल नहीं किया गया है। उनकी जगह रुतुराज गायकवाड़ को टीम में जगह मिली है। विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत को एक बार फिर सीमित ओवरों की टीम में जगह नहीं मिली। वहीं ध्रुव जुरेल को दूसरे विकेटकीपर के तौर पर चुना गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्टार ऑलराउंडर <strong>हार्दिक पंड्या</strong> भी इस सीरीज का हिस्सा नहीं हैं। हार्दिक ने IPL 2026 में लगी चोट के बाद अभी तक कोई प्रतिस्पर्धी मुकाबला नहीं खेला है। बताया जा रहा है कि उनकी फिटनेस का आकलन किया जाएगा और गेंदबाजी फिटनेस साबित करने के बाद ही आगे राष्ट्रीय टीम में उनकी वापसी पर फैसला हो सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">अनुभवी ऑलराउंडर <strong>रविंद्र जडेजा</strong> की वनडे टीम में वापसी हुई है। उन्होंने आखिरी बार जनवरी 2026 में भारत के लिए वनडे मुकाबला खेला था। वहीं यशस्वी जायसवाल को भी वनडे टीम में वापस बुलाया गया है। चयनकर्ताओं ने आकीब नबी और नमन धीर को भी वनडे टीम में जगह दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">अब बात करें टी-20 टीम की तो इसकी कप्तानी <strong>श्रेयस अय्यर</strong> को सौंपी गई है। टीम में अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन, संजू सैमसन, तिलक वर्मा, शिवम दुबे, अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर जैसे खिलाड़ी शामिल हैं। तिलक वर्मा को उप-कप्तान बनाया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">टी-20 टीम में स्पिनर <strong>कुलदीप यादव</strong> और तेज गेंदबाज <strong>मयंक यादव</strong> की भी वापसी हुई है। मयंक ने हाल में चोटों के कारण टीम से बाहर रहने के बाद वापसी की है। वहीं नितीश कुमार रेड्डी को भी टी-20 टीम में शामिल किया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">एशियन गेम्स से जुड़े चयन में भी बदलाव देखने को मिला है। वरुण चक्रवर्ती को साइड स्ट्रेन के कारण जापान में होने वाले एशियन गेम्स से बाहर किया गया है। उनकी जगह विप्राज निगम को शामिल किया गया है। वहीं मयंक यादव और प्रिंस यादव को भी टीम में जगह मिली है।</p>
वेस्टइंडीज के खिलाफ होने वाली इन दोनों सीरीज पर भारतीय क्रिकेट फैंस की नजरें रहेंगी। वनडे में रोहित शर्मा और विराट कोहली की मौजूदगी के साथ युवा खिलाड़ियों को भी मौका दिया गया है, जबकि टी-20 टीम में युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का मिश्रण देखने को मिलेगा।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p class="isSelectedEnd">भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने वेस्टइंडीज के खिलाफ होने वाली वनडे और टी-20 सीरीज के लिए भारतीय टीम का ऐलान कर दिया है। अजीत अगरकर की अगुवाई वाली चयन समिति ने तीन वनडे और पांच टी-20 मैचों के लिए खिलाड़ियों का चयन किया है। वनडे सीरीज की शुरुआत 27 सितंबर से तिरुवनंतपुरम में होगी, जबकि पांच मैचों की टी-20 सीरीज 6 अक्टूबर से लखनऊ में शुरू होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">वनडे टीम की कप्तानी एक बार फिर <strong>शुभमन गिल</strong> को सौंपी गई है। वहीं अनुभवी बल्लेबाज <strong>रोहित शर्मा और विराट कोहली</strong> भी वनडे टीम में शामिल हैं और लंबे समय बाद दोनों को एक साथ मैदान पर देखने का मौका मिलेगा। केएल राहुल को वनडे टीम का उप-कप्तान बनाया गया है और वह विकेटकीपर की जिम्मेदारी भी संभालेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">वनडे टीम में <strong>श्रेयस अय्यर</strong> को शामिल नहीं किया गया है। उनकी जगह रुतुराज गायकवाड़ को टीम में जगह मिली है। विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत को एक बार फिर सीमित ओवरों की टीम में जगह नहीं मिली। वहीं ध्रुव जुरेल को दूसरे विकेटकीपर के तौर पर चुना गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्टार ऑलराउंडर <strong>हार्दिक पंड्या</strong> भी इस सीरीज का हिस्सा नहीं हैं। हार्दिक ने IPL 2026 में लगी चोट के बाद अभी तक कोई प्रतिस्पर्धी मुकाबला नहीं खेला है। बताया जा रहा है कि उनकी फिटनेस का आकलन किया जाएगा और गेंदबाजी फिटनेस साबित करने के बाद ही आगे राष्ट्रीय टीम में उनकी वापसी पर फैसला हो सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">अनुभवी ऑलराउंडर <strong>रविंद्र जडेजा</strong> की वनडे टीम में वापसी हुई है। उन्होंने आखिरी बार जनवरी 2026 में भारत के लिए वनडे मुकाबला खेला था। वहीं यशस्वी जायसवाल को भी वनडे टीम में वापस बुलाया गया है। चयनकर्ताओं ने आकीब नबी और नमन धीर को भी वनडे टीम में जगह दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">अब बात करें टी-20 टीम की तो इसकी कप्तानी <strong>श्रेयस अय्यर</strong> को सौंपी गई है। टीम में अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन, संजू सैमसन, तिलक वर्मा, शिवम दुबे, अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर जैसे खिलाड़ी शामिल हैं। तिलक वर्मा को उप-कप्तान बनाया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">टी-20 टीम में स्पिनर <strong>कुलदीप यादव</strong> और तेज गेंदबाज <strong>मयंक यादव</strong> की भी वापसी हुई है। मयंक ने हाल में चोटों के कारण टीम से बाहर रहने के बाद वापसी की है। वहीं नितीश कुमार रेड्डी को भी टी-20 टीम में शामिल किया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">एशियन गेम्स से जुड़े चयन में भी बदलाव देखने को मिला है। वरुण चक्रवर्ती को साइड स्ट्रेन के कारण जापान में होने वाले एशियन गेम्स से बाहर किया गया है। उनकी जगह विप्राज निगम को शामिल किया गया है। वहीं मयंक यादव और प्रिंस यादव को भी टीम में जगह मिली है।</p>
वेस्टइंडीज के खिलाफ होने वाली इन दोनों सीरीज पर भारतीय क्रिकेट फैंस की नजरें रहेंगी। वनडे में रोहित शर्मा और विराट कोहली की मौजूदगी के साथ युवा खिलाड़ियों को भी मौका दिया गया है, जबकि टी-20 टीम में युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का मिश्रण देखने को मिलेगा।]]></content:encoded>
					
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		<title>&#8220;आप&#8221; की नवगठित PAC की बैठक में पंजाब, गोवा और गुजरात चुनाव जीतने पर हुआ मंथन &#8211; मनीष सिसोदिया</title>
		<link>https://trendstopic.in/deliberations-held-on-winning-the-punjab-goa-and-gujarat-elections-during-the-meeting-of-the-newly-constituted-pac-of-aap-manish-sisodia/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Sep 2026 12:05:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आम आदमी पार्टी की नवगठित पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी (पीएसी) की गुरुवार को पहली बैठक हुई। "आप" के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में उनके आवास पर हुई बैठक में पीएसी से जुड़े पंजाब के नए सदस्य सीएम भगवंत सिंह मान और मंत्री हरपाल सिंह चीमा भी शामिल हुए। वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने बताया कि बैठक में मुख्य रूप से पंजाब, गोवा और गुजरात में होने वाले चुनावों को जितने को लेकर गहन मंथन हुआ। उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता भगवंत सिंह मान के काम से बेहद खुश है और उन्हें दोबारा बतौर मुख्यमंत्री देखना चाहती है, जबकि गोवा और गुजरात की जनता भाजपा के कुशासन से त्रस्त हो चुकी है और अब बदलाव चाहती है।

पीएसी की बैठक में हुई चर्चा के बारे में “आप” के वरिष्ठ नेता व पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने बताया कि नई पीएसी की पहली मीटिंग में सबसे पहले राजस्थान के बारां में मिली अप्रत्याशित जीत पर चर्चा हुई। जिस तरह से बारां के लोगों ने भाजपा की नीतियों को नकारा है, उससे यह उम्मीद बनी है कि आज भाजपा के सामने अगर एक बेहतर विकल्प खड़ा हो, तो लोग उसे देख रहे हैं और ढूंढ रहे हैं। बहुत जल्द अरविंद केजरीवाल, भगवंत मान और मैं राजस्थान के बारां जाकर वहां रोड शो करेंगे।

मनीष सिसोदिया ने बताया कि दूसरी चर्चा पंजाब, गोवा और गुजरात के चुनावों और वहां की तैयारियों पर हुई। वहां संगठन बहुत अच्छा काम कर रहा है और पंजाब के लोग दोबारा सरकार चाह रहे हैं। गोवा और गुजरात में लोग बदलाव चाह रहे हैं और भाजपा से आहत होकर बदलाव ढूंढ रहे हैं। इस बात पर भी चर्चा हुई कि इसे जीत में कैसे बदला जाए।

मनीष सिसोदिया ने बताया कि पीएसी में तीसरी चर्चा यूपीआई को लेकर हुई। सरकार ने ट्रंप के दबाव में यूपीआई को लेकर जो फैसला लिया है, उससे पूरे देश के लोग ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। इस बात पर चर्चा हुई कि कैसे लोगों को अपना पैसा खर्च करने के लिए अब फीस चुकानी पड़ेगी। यह बड़ा अजीब है कि आज रिजर्व बैंक हमें एक नोट जारी करता है और जब हम उसे खर्च करते हैं, तो उस नोट को बनाने और देने का सारा खर्चा रिजर्व बैंक और सरकार उठाती है। अगर मेरी जेब में 100 रुपए का नोट है, तो रिजर्व बैंक मुझसे यह नहीं कहता कि मुझे 101 रुपए दो तब मैं 100 रुपए दूंगा, बल्कि उसकी वैल्यू मेरे लिए 100 रुपए ही होती है।

मनीष सिसोदिया ने आगे कहा कि लेकिन यूपीआई में, जिसमें कोई खर्चा नहीं हो रहा और कोई प्रिंटिंग नहीं हो रही, उसमें ट्रंप के दबाव में आम जनता के ऊपर बोझ डाला जा रहा है। इस पूरे स्कैम का 80 फीसद फायदा अमेरिकी कंपनियों को होगा। मोदी जी ने ट्रंप के दबाव में यह फैसला लिया है और पीएसी में इसकी जोर-शोर से चर्चा हुई। इस मुद्दे को पार्टी और संगठन की तरफ से उठाया जाएगा।

मनीष सिसोदिया ने कहा कि एक और महत्वपूर्ण चर्चा इस खुलासे पर हुई कि दिल्ली के पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कैसे फर्जी वोट का खेल खेला था। अभी एक मीडिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कैसे अरविंद केजरीवाल की नई दिल्ली विधानसभा में अचानक चुनाव से पहले फर्जी वोट बनाए जाते हैं। एक-एक घर में 50-50 और 100-100 वोट खड़े कर दिए जाते हैं और चुनाव आयोग शिद्दत से भाजपा की सेवा और उनकी चरण वंदना करते हुए उन वोटों को बना देता है।
भाजपा ने नई दिल्ली विधानसभा में कैसे फर्जी वोट बनवाए थे, मीडिया रिपोर्ट उसका भी खुलासा हो गया है -
मनीष सिसोदिया ने कहा कि अब जब एसआईआर हुई है, तो वे सारे के सारे वोट काट दिए गए हैं। चुनाव से ठीक पहले जितने भी वोट बने थे, वे सब के सब फर्जी थे और उनमें से 40 फीसद तो एसआईआर में भी फर्जी पाए गए हैं। अब देखना है कि चुनाव आयोग इस बात का कैसे संज्ञान लेगा।

पंजाब चुनाव की तैयारियों से जुड़े एक सवाल पर मनीष सिसोदिया ने कहा कि पंजाब के चुनाव को लेकर पूरी तैयारी है। भगवंत मान की सरकार के काम से लोग बहुत खुश हैं और “आप” सरकार को दोबारा लाना चाहते हैं तथा भगवंत मान को दोबारा मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं। पंजाब के लोग यह भी जानते हैं कि बाय चांस अगर भगवंत मान मुख्यमंत्री नहीं रहे, तो पुरानी पार्टियां फिर से नशे को फैलाएंगी, जनता के पैसे पर डकैती डालेंगी, रोजगार में बेईमानी करेंगी और व्यापारियों को लूटेंगी। पंजाब के लोग उस पुराने दौर को वापस लौटते हुए नहीं देखना चाहते हैं।

मनीष सिसोदिया ने बताया कि अभी थोड़े दिन पहले ही आम आदमी पार्टी की नेशनल काउंसिल की मीटिंग हुई थी, जिसके बाद नेशनल एग्जीक्यूटिव की मीटिंग ने नई पीएसी का गठन किया था, जिसमें अरविंद केजरीवाल को संयोजक बनाया गया और कुछ नए सदस्य भी उसमें जुड़े।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[आम आदमी पार्टी की नवगठित पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी (पीएसी) की गुरुवार को पहली बैठक हुई। "आप" के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में उनके आवास पर हुई बैठक में पीएसी से जुड़े पंजाब के नए सदस्य सीएम भगवंत सिंह मान और मंत्री हरपाल सिंह चीमा भी शामिल हुए। वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने बताया कि बैठक में मुख्य रूप से पंजाब, गोवा और गुजरात में होने वाले चुनावों को जितने को लेकर गहन मंथन हुआ। उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता भगवंत सिंह मान के काम से बेहद खुश है और उन्हें दोबारा बतौर मुख्यमंत्री देखना चाहती है, जबकि गोवा और गुजरात की जनता भाजपा के कुशासन से त्रस्त हो चुकी है और अब बदलाव चाहती है।

पीएसी की बैठक में हुई चर्चा के बारे में “आप” के वरिष्ठ नेता व पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने बताया कि नई पीएसी की पहली मीटिंग में सबसे पहले राजस्थान के बारां में मिली अप्रत्याशित जीत पर चर्चा हुई। जिस तरह से बारां के लोगों ने भाजपा की नीतियों को नकारा है, उससे यह उम्मीद बनी है कि आज भाजपा के सामने अगर एक बेहतर विकल्प खड़ा हो, तो लोग उसे देख रहे हैं और ढूंढ रहे हैं। बहुत जल्द अरविंद केजरीवाल, भगवंत मान और मैं राजस्थान के बारां जाकर वहां रोड शो करेंगे।

मनीष सिसोदिया ने बताया कि दूसरी चर्चा पंजाब, गोवा और गुजरात के चुनावों और वहां की तैयारियों पर हुई। वहां संगठन बहुत अच्छा काम कर रहा है और पंजाब के लोग दोबारा सरकार चाह रहे हैं। गोवा और गुजरात में लोग बदलाव चाह रहे हैं और भाजपा से आहत होकर बदलाव ढूंढ रहे हैं। इस बात पर भी चर्चा हुई कि इसे जीत में कैसे बदला जाए।

मनीष सिसोदिया ने बताया कि पीएसी में तीसरी चर्चा यूपीआई को लेकर हुई। सरकार ने ट्रंप के दबाव में यूपीआई को लेकर जो फैसला लिया है, उससे पूरे देश के लोग ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। इस बात पर चर्चा हुई कि कैसे लोगों को अपना पैसा खर्च करने के लिए अब फीस चुकानी पड़ेगी। यह बड़ा अजीब है कि आज रिजर्व बैंक हमें एक नोट जारी करता है और जब हम उसे खर्च करते हैं, तो उस नोट को बनाने और देने का सारा खर्चा रिजर्व बैंक और सरकार उठाती है। अगर मेरी जेब में 100 रुपए का नोट है, तो रिजर्व बैंक मुझसे यह नहीं कहता कि मुझे 101 रुपए दो तब मैं 100 रुपए दूंगा, बल्कि उसकी वैल्यू मेरे लिए 100 रुपए ही होती है।

मनीष सिसोदिया ने आगे कहा कि लेकिन यूपीआई में, जिसमें कोई खर्चा नहीं हो रहा और कोई प्रिंटिंग नहीं हो रही, उसमें ट्रंप के दबाव में आम जनता के ऊपर बोझ डाला जा रहा है। इस पूरे स्कैम का 80 फीसद फायदा अमेरिकी कंपनियों को होगा। मोदी जी ने ट्रंप के दबाव में यह फैसला लिया है और पीएसी में इसकी जोर-शोर से चर्चा हुई। इस मुद्दे को पार्टी और संगठन की तरफ से उठाया जाएगा।

मनीष सिसोदिया ने कहा कि एक और महत्वपूर्ण चर्चा इस खुलासे पर हुई कि दिल्ली के पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कैसे फर्जी वोट का खेल खेला था। अभी एक मीडिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कैसे अरविंद केजरीवाल की नई दिल्ली विधानसभा में अचानक चुनाव से पहले फर्जी वोट बनाए जाते हैं। एक-एक घर में 50-50 और 100-100 वोट खड़े कर दिए जाते हैं और चुनाव आयोग शिद्दत से भाजपा की सेवा और उनकी चरण वंदना करते हुए उन वोटों को बना देता है।
भाजपा ने नई दिल्ली विधानसभा में कैसे फर्जी वोट बनवाए थे, मीडिया रिपोर्ट उसका भी खुलासा हो गया है -
मनीष सिसोदिया ने कहा कि अब जब एसआईआर हुई है, तो वे सारे के सारे वोट काट दिए गए हैं। चुनाव से ठीक पहले जितने भी वोट बने थे, वे सब के सब फर्जी थे और उनमें से 40 फीसद तो एसआईआर में भी फर्जी पाए गए हैं। अब देखना है कि चुनाव आयोग इस बात का कैसे संज्ञान लेगा।

पंजाब चुनाव की तैयारियों से जुड़े एक सवाल पर मनीष सिसोदिया ने कहा कि पंजाब के चुनाव को लेकर पूरी तैयारी है। भगवंत मान की सरकार के काम से लोग बहुत खुश हैं और “आप” सरकार को दोबारा लाना चाहते हैं तथा भगवंत मान को दोबारा मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं। पंजाब के लोग यह भी जानते हैं कि बाय चांस अगर भगवंत मान मुख्यमंत्री नहीं रहे, तो पुरानी पार्टियां फिर से नशे को फैलाएंगी, जनता के पैसे पर डकैती डालेंगी, रोजगार में बेईमानी करेंगी और व्यापारियों को लूटेंगी। पंजाब के लोग उस पुराने दौर को वापस लौटते हुए नहीं देखना चाहते हैं।

मनीष सिसोदिया ने बताया कि अभी थोड़े दिन पहले ही आम आदमी पार्टी की नेशनल काउंसिल की मीटिंग हुई थी, जिसके बाद नेशनल एग्जीक्यूटिव की मीटिंग ने नई पीएसी का गठन किया था, जिसमें अरविंद केजरीवाल को संयोजक बनाया गया और कुछ नए सदस्य भी उसमें जुड़े।]]></content:encoded>
					
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		<title>प्याज-टमाटर के बाद अब लहसुन और अदरक महंगे, जानिए नए भाव</title>
		<link>https://trendstopic.in/after-onions-and-tomatoes-garlic-and-ginger-have-now-become-expensive-check-the-new-rates/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 15 Sep 2026 08:55:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p class="isSelectedEnd">देश के कई राज्यों में रोजमर्रा की जरूरत वाली खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ते नजर आ रहे हैं। प्याज और टमाटर के बाद अब लहसुन और अदरक की कीमतों में भी तेजी आई है। इसका सीधा असर आम लोगों की रसोई के बजट पर पड़ रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पिछले कुछ हफ्तों में <strong>लहसुन के दाम में बड़ा उछाल</strong> देखने को मिला है। कुछ दिन पहले तक जो लहसुन करीब 150 से 170 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, उसकी कीमत अब बढ़कर लगभग <strong>350 रुपये प्रति किलो</strong> तक पहुंच गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">वहीं, <strong>अदरक भी महंगा</strong> हो गया है। अगस्त में करीब 150 रुपये प्रति किलो मिलने वाला अदरक अब औसतन <strong>300 रुपये प्रति किलो</strong> के आसपास बिक रहा है। यानी कम समय में ही दोनों जरूरी चीजों की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">बताया जा रहा है कि कई इलाकों में हुई बारिश का असर लहसुन और अदरक की मंडियों में आवक पर पड़ा है। सप्लाई कम होने के साथ बारिश की वजह से कुछ माल की क्वालिटी भी प्रभावित हुई है। ऐसे में बाजार में उपलब्धता कम होने से कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">दूसरी तरफ, <strong>प्याज के दाम भी कई बाजारों में 70 रुपये प्रति किलो से ऊपर</strong> चल रहे हैं। वहीं टमाटर का औसत भाव करीब <strong>40 रुपये प्रति किलो</strong> बताया जा रहा है। सब्जियों और मसालों की बढ़ती कीमतों से आम लोगों के घरेलू बजट पर दबाव बढ़ रहा है।</p>
हालांकि, आने वाले समय में प्याज की कीमतों में कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। नई <strong>खरीफ प्याज की फसल</strong> मंडियों में आने के बाद सप्लाई बढ़ सकती है, जिससे दाम नीचे आ सकते हैं। आमतौर पर खरीफ प्याज की खुदाई का सीजन अक्टूबर से शुरू होता है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p class="isSelectedEnd">देश के कई राज्यों में रोजमर्रा की जरूरत वाली खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ते नजर आ रहे हैं। प्याज और टमाटर के बाद अब लहसुन और अदरक की कीमतों में भी तेजी आई है। इसका सीधा असर आम लोगों की रसोई के बजट पर पड़ रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पिछले कुछ हफ्तों में <strong>लहसुन के दाम में बड़ा उछाल</strong> देखने को मिला है। कुछ दिन पहले तक जो लहसुन करीब 150 से 170 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, उसकी कीमत अब बढ़कर लगभग <strong>350 रुपये प्रति किलो</strong> तक पहुंच गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">वहीं, <strong>अदरक भी महंगा</strong> हो गया है। अगस्त में करीब 150 रुपये प्रति किलो मिलने वाला अदरक अब औसतन <strong>300 रुपये प्रति किलो</strong> के आसपास बिक रहा है। यानी कम समय में ही दोनों जरूरी चीजों की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">बताया जा रहा है कि कई इलाकों में हुई बारिश का असर लहसुन और अदरक की मंडियों में आवक पर पड़ा है। सप्लाई कम होने के साथ बारिश की वजह से कुछ माल की क्वालिटी भी प्रभावित हुई है। ऐसे में बाजार में उपलब्धता कम होने से कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">दूसरी तरफ, <strong>प्याज के दाम भी कई बाजारों में 70 रुपये प्रति किलो से ऊपर</strong> चल रहे हैं। वहीं टमाटर का औसत भाव करीब <strong>40 रुपये प्रति किलो</strong> बताया जा रहा है। सब्जियों और मसालों की बढ़ती कीमतों से आम लोगों के घरेलू बजट पर दबाव बढ़ रहा है।</p>
हालांकि, आने वाले समय में प्याज की कीमतों में कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। नई <strong>खरीफ प्याज की फसल</strong> मंडियों में आने के बाद सप्लाई बढ़ सकती है, जिससे दाम नीचे आ सकते हैं। आमतौर पर खरीफ प्याज की खुदाई का सीजन अक्टूबर से शुरू होता है।]]></content:encoded>
					
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		<title>राजस्थान में भी ‘‘आप’’ के नेतृत्व में चलने लगी बदलाव की हवा- केजरीवाल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 15 Sep 2026 07:35:29 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[punjab]]></category>
		<category><![CDATA[PunjabNews]]></category>
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					<description><![CDATA[राजस्थान में हुए नगर निकाय चुनाव में आम आदमी पार्टी ने भाजपा और कांग्रेस के अरमानों पर झाड़ू फेर दिया है। सोमवार को आए नतीजों में राज्य के शिक्षा मंत्री के इलाके में सबसे बड़ी पार्टी बनने पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अपने सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को बधाई दी है। उन्होंने एक्स पर कहा कि राजस्थान में भी अब बदलाव की हवा चलने लगी है। शिक्षा मंत्री के इलाके बारां में झाड़ू चल गई है और आम आदमी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है।

&nbsp;

अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा कि पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर राजस्थान के खस्ताहाल सरकारी स्कूलों के वीडियो लगातार वायरल हो रहे थे। लोगों में बहुत गुस्सा है। कांग्रेस और भाजपा ने पूरे राज्य का बेड़ा गर्क कर दिया है। लोग भाजपा और कांग्रेस की जुगलबंदी से तंग आ चुके हैं। अब लोगों के पास ‘‘आप’’ के रूप में एक मजबूत विकल्प है।

&nbsp;

उधर, पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने कहा कि राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के गृह क्षेत्र बारां में आम आदमी पार्टी को नगर परिषद में पूर्ण बहुमत हासिल हुआ है। 60 में से 32 सीटों पर झाड़ू की जीत ने साफ़ कर दिया है कि अरविंद केजरीवाल की विचारधारा देश के कोने-कोने तक फैल रही है।

&nbsp;

आम आदमी पार्टी का कहना है कि अभी तक घोषित नतीजों के मुताबिक, बारां नगर परिषद चुनाव में 60 में से आम आदमी पार्टी के 32 प्रत्याशियों ने जीत हासिल की है। इसी तरह, पिडावा नगर पालिका और झालापाटन नगर पालिका में 5-5 प्रत्याशी जीते हैं, जबकि झालावाड़ नगर परिषद में एक प्रत्याशी ने जीत दर्ज की है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[राजस्थान में हुए नगर निकाय चुनाव में आम आदमी पार्टी ने भाजपा और कांग्रेस के अरमानों पर झाड़ू फेर दिया है। सोमवार को आए नतीजों में राज्य के शिक्षा मंत्री के इलाके में सबसे बड़ी पार्टी बनने पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अपने सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को बधाई दी है। उन्होंने एक्स पर कहा कि राजस्थान में भी अब बदलाव की हवा चलने लगी है। शिक्षा मंत्री के इलाके बारां में झाड़ू चल गई है और आम आदमी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है।

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अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा कि पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर राजस्थान के खस्ताहाल सरकारी स्कूलों के वीडियो लगातार वायरल हो रहे थे। लोगों में बहुत गुस्सा है। कांग्रेस और भाजपा ने पूरे राज्य का बेड़ा गर्क कर दिया है। लोग भाजपा और कांग्रेस की जुगलबंदी से तंग आ चुके हैं। अब लोगों के पास ‘‘आप’’ के रूप में एक मजबूत विकल्प है।

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उधर, पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने कहा कि राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के गृह क्षेत्र बारां में आम आदमी पार्टी को नगर परिषद में पूर्ण बहुमत हासिल हुआ है। 60 में से 32 सीटों पर झाड़ू की जीत ने साफ़ कर दिया है कि अरविंद केजरीवाल की विचारधारा देश के कोने-कोने तक फैल रही है।

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आम आदमी पार्टी का कहना है कि अभी तक घोषित नतीजों के मुताबिक, बारां नगर परिषद चुनाव में 60 में से आम आदमी पार्टी के 32 प्रत्याशियों ने जीत हासिल की है। इसी तरह, पिडावा नगर पालिका और झालापाटन नगर पालिका में 5-5 प्रत्याशी जीते हैं, जबकि झालावाड़ नगर परिषद में एक प्रत्याशी ने जीत दर्ज की है।]]></content:encoded>
					
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		<item>
		<title>मनीष सिसोदिया की सचिन पायलट को चुनौती: हम आपको पंजाब में 1,000 बेहतरीन स्कूल दिखा सकते हैं, क्या आप हमें हिमाचल प्रदेश में ऐसे 1,000 स्कूल दिखा सकते हैं?</title>
		<link>https://trendstopic.in/manish-sisodias-challenge-to-sachin-pilot-we-can-show-you-1000-excellent-schools-in-punjab-can-you-show-us-1000-such-schools-in-himachal-pradesh/</link>
					<comments>https://trendstopic.in/manish-sisodias-challenge-to-sachin-pilot-we-can-show-you-1000-excellent-schools-in-punjab-can-you-show-us-1000-such-schools-in-himachal-pradesh/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 12 Sep 2026 06:05:26 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
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					<description><![CDATA[आम आदमी पार्टी (आप) के पंजाब इंचार्ज मनीष सिसोदिया ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता सचिन पायलट को पंजाब और हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों का जॉइंट ऑडिट करने का चैलेंज दिया। आप के पंजाब इंचार्ज ने कहा कि आप आसानी से पंजाब में ऐसे 1,000 सरकारी स्कूल दिखा सकती है जिनमें बड़े बदलाव हुए हैं, वहीं सचिन पायलट को दिखाना चाहिए कि क्या हिमाचल प्रदेश उसी स्टैंडर्ड के 1,000 स्कूल दिखा सकता है।

सचिन पायलट को जवाब देते हुए आप के पंजाब इंचार्ज और दिल्ली के पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा, "सचिन जी, हम आपको पंजाब में 1,000 बेहतरीन स्कूल दिखा सकते हैं। क्या आप हिमाचल प्रदेश में ऐसे 1,000 स्कूल दिखा सकते हैं?" उन्होंने कहा, "चलो पंजाब और हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों का एक साथ ऑडिट करते हैं। मुझे बताएं, क्या आप चैलेंज स्वीकार करते हैं?"

गवंत मान सरकार के एजुकेशन मॉडल ने नेशनल रैंकिंग, बेहतर स्कूल और जेईई/नीट टॉपर दिए हैं

भगवंत मान सरकार के राज में, पंजाब के सरकारी स्कूलों ने परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआई) 2.0 में देश में पहला स्थान हासिल किया है, जबकि मई में जारी नीति आयोग की रिपोर्ट में राज्य को क्लासरूम लर्निंग में नंबर 1 रैंक मिला है। नेशनल सर्वे 2024 में भी पंजाब शिक्षा के क्षेत्र में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला राज्य बनकर उभरा है, जबकि शिक्षा मंत्रालय के प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड ने स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर और एजुकेशन आउटकम में राज्य के काम की बार-बार तारीफ की है।

यह बदलाव स्कूल स्तर पर भी साफ दिख रहा है। जिन सरकारी स्कूलों में पहले बेसिक सुविधाओं की कमी थी, उन्हें स्मार्ट इंटरैक्टिव पैनल, काम करने वाले टॉयलेट, सैनिटरी पैड इंसिनरेटर, साफ़ पीने का पानी और वाई-फाई कनेक्टिविटी के साथ अपग्रेड किया गया है। उदाहरण के लिए, फतेहगढ़ साहिब के जल्ला सरकारी स्कूल का 2018 का एक वीडियो इस तरह वायरल किया गया जैसे उसमें स्कूल की मौजूदा हालत दिखाई गई हो, जबकि अब स्कूल में दो स्मार्ट इंटरैक्टिव पैनल, लड़कियों के लिए दो टॉयलेट, एक चालू सैनिटरी पैड इंसिनरेटर, साफ़ पीने का पानी और वाई-फाई का सुविधा है।

पंजाब के सरकारी स्कूलों के स्टूडेंट नेशनल लेवल के कॉम्पिटिटिव एग्ज़ाम में भी अच्छा परफॉर्म कर रहे हैं। सरकारी स्कूलों के 882 स्टूडेंट ने यूजी-नीट 2026 पास किया है, जो राज्य के सरकारी एजुकेशन सिस्टम में हो रहे सुधारों और एकेडमिक मौकों को दिखाता है। यह प्रोग्रेस इंडिपेंडेंट असेसमेंट में भी दिखती है। पटियाला, जो पंजाब के ज़िलों में 23वें नंबर पर है, ने एजुकेशन से जुड़े असेसमेंट में गुरुग्राम से ज़्यादा स्कोर किया है, जो हरियाणा के ज़िलों में पहले नंबर पर है। यह तुलना सिर्फ़ कुछ चुनिंदा इंस्टीट्यूशन के परफॉर्मेंस के बजाय पूरे पंजाब के सरकारी स्कूल सिस्टम में सुधार के लेवल को दिखाती है।

भगवंत मान सरकार ने पूरे राज्य में बड़े पैमाने पर मॉनिटरिंग और सुधार का काम भी शुरू किया है। शिक्षा मंत्री ने खुद 2,000 से ज़्यादा सरकारी स्कूलों का इंस्पेक्शन किया है, और इन इंस्पेक्शन के दौरान मिली कमियों को दूर करने के लिए ज़रूरी कदम उठाए गए हैं।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[आम आदमी पार्टी (आप) के पंजाब इंचार्ज मनीष सिसोदिया ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता सचिन पायलट को पंजाब और हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों का जॉइंट ऑडिट करने का चैलेंज दिया। आप के पंजाब इंचार्ज ने कहा कि आप आसानी से पंजाब में ऐसे 1,000 सरकारी स्कूल दिखा सकती है जिनमें बड़े बदलाव हुए हैं, वहीं सचिन पायलट को दिखाना चाहिए कि क्या हिमाचल प्रदेश उसी स्टैंडर्ड के 1,000 स्कूल दिखा सकता है।

सचिन पायलट को जवाब देते हुए आप के पंजाब इंचार्ज और दिल्ली के पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा, "सचिन जी, हम आपको पंजाब में 1,000 बेहतरीन स्कूल दिखा सकते हैं। क्या आप हिमाचल प्रदेश में ऐसे 1,000 स्कूल दिखा सकते हैं?" उन्होंने कहा, "चलो पंजाब और हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों का एक साथ ऑडिट करते हैं। मुझे बताएं, क्या आप चैलेंज स्वीकार करते हैं?"

गवंत मान सरकार के एजुकेशन मॉडल ने नेशनल रैंकिंग, बेहतर स्कूल और जेईई/नीट टॉपर दिए हैं

भगवंत मान सरकार के राज में, पंजाब के सरकारी स्कूलों ने परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआई) 2.0 में देश में पहला स्थान हासिल किया है, जबकि मई में जारी नीति आयोग की रिपोर्ट में राज्य को क्लासरूम लर्निंग में नंबर 1 रैंक मिला है। नेशनल सर्वे 2024 में भी पंजाब शिक्षा के क्षेत्र में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला राज्य बनकर उभरा है, जबकि शिक्षा मंत्रालय के प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड ने स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर और एजुकेशन आउटकम में राज्य के काम की बार-बार तारीफ की है।

यह बदलाव स्कूल स्तर पर भी साफ दिख रहा है। जिन सरकारी स्कूलों में पहले बेसिक सुविधाओं की कमी थी, उन्हें स्मार्ट इंटरैक्टिव पैनल, काम करने वाले टॉयलेट, सैनिटरी पैड इंसिनरेटर, साफ़ पीने का पानी और वाई-फाई कनेक्टिविटी के साथ अपग्रेड किया गया है। उदाहरण के लिए, फतेहगढ़ साहिब के जल्ला सरकारी स्कूल का 2018 का एक वीडियो इस तरह वायरल किया गया जैसे उसमें स्कूल की मौजूदा हालत दिखाई गई हो, जबकि अब स्कूल में दो स्मार्ट इंटरैक्टिव पैनल, लड़कियों के लिए दो टॉयलेट, एक चालू सैनिटरी पैड इंसिनरेटर, साफ़ पीने का पानी और वाई-फाई का सुविधा है।

पंजाब के सरकारी स्कूलों के स्टूडेंट नेशनल लेवल के कॉम्पिटिटिव एग्ज़ाम में भी अच्छा परफॉर्म कर रहे हैं। सरकारी स्कूलों के 882 स्टूडेंट ने यूजी-नीट 2026 पास किया है, जो राज्य के सरकारी एजुकेशन सिस्टम में हो रहे सुधारों और एकेडमिक मौकों को दिखाता है। यह प्रोग्रेस इंडिपेंडेंट असेसमेंट में भी दिखती है। पटियाला, जो पंजाब के ज़िलों में 23वें नंबर पर है, ने एजुकेशन से जुड़े असेसमेंट में गुरुग्राम से ज़्यादा स्कोर किया है, जो हरियाणा के ज़िलों में पहले नंबर पर है। यह तुलना सिर्फ़ कुछ चुनिंदा इंस्टीट्यूशन के परफॉर्मेंस के बजाय पूरे पंजाब के सरकारी स्कूल सिस्टम में सुधार के लेवल को दिखाती है।

भगवंत मान सरकार ने पूरे राज्य में बड़े पैमाने पर मॉनिटरिंग और सुधार का काम भी शुरू किया है। शिक्षा मंत्री ने खुद 2,000 से ज़्यादा सरकारी स्कूलों का इंस्पेक्शन किया है, और इन इंस्पेक्शन के दौरान मिली कमियों को दूर करने के लिए ज़रूरी कदम उठाए गए हैं।]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>भाजपा ने अकाली-भाजपा गठबंधन बहाल करने बदले सुखबीर बादल को बेअदबी के मामलों में सुरक्षा का दिया भरोसा: आप</title>
		<link>https://trendstopic.in/bjp-assured-sukhbir-badal-of-protection-in-sacrilege-cases-in-exchange-for-restoring-sad-bjp-alliance-aap/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 12 Sep 2026 05:46:23 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Trending]]></category>
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					<description><![CDATA[आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब ने कहा है कि प्रस्तावित भाजपा-अकाली गठबंधन पंजाब के हितों की कीमत पर एक राजनीतिक अस्तित्व का सौदा है, जिसमें सुखबीर सिंह बादल तीन कृषि कानूनों को वापिस लाने के प्रयासों सहित भाजपा के राजनीतिक एजेंडे का समर्थन करने के बदले में बेअदबी और गोलीबारी के मामलों से भाजपा की सुरक्षा मांग रहे हैं। आप ने कहा कि यह राजनीतिक सौदेबाजी बहुत शर्मनाक है, क्योंकि 2015 में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की चोरी और बार-बार बेअदबी के बाद कोटकपूरा और बहबल कलां में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पुलिस गोलीकांड भाजपा-अकाली सरकार के दौरान हुई थी, जब सुखबीर सिंह बादल गृह मंत्री थे।

&nbsp;

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आप पंजाब के विधायक मनविंदर सिंह ग्यासपुरा ने कहा, “1 जून 2015 को अकाली-भाजपा सरकार के समय श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के स्वरूप चोरी हो गए थे, लेकिन सरकार ने इस घटना को गंभीरता से नहीं लिया। उस समय गृह मंत्री रहे सुखबीर सिंह बादल ने पूछताछ में एसआईटी को बताया है कि उन्हें चोरी के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। हालांकि, इंटेलिजेंस विंग ने एक रिपोर्ट भेजी थी और सुखबीर सिंह बादल के निजी सचिव ने भी एसआईटी को बताया था कि घटना के बारे में जानकारी मौजूद थी। गृह मंत्री अनजान कैसे रह सकते हैं जब उनके अपने ऑफिस को जानकारी मिल गई थी?”

&nbsp;

मनविंदर सिंह ग्यासपुरा ने कहा कि चोरी के बाद भी, सरकार तब कार्रवाई करने में नाकाम रही जब सितंबर 2015 में सिखों को उनके चोरी हुए गुरु को ढूंढने के लिए पोस्टर लगाए गए थे। उन्होंने कहा, “समय पर कार्रवाई न करने से अक्टूबर में बेअदबी के लिए जिम्मेदार लोगों का हौसला बढ़ा, जब श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के अंग गलियों पर बिखरे हुए मिले, जिससे दुनिया भर के सिखों का दिल टूट गया।”

&nbsp;

उन्होंने कहा कि कोटकपूरा में लोग शांति से इकट्ठा हुए थे, जहाँ अरदास और कीर्तन हो रहा था, लेकिन प्रदर्शनकारियों पर वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया गया। मनविंदर सिंह ग्यासपुरा ने कहा कि वह भी विरोध प्रदर्शन में मौजूद थे। उन्होंने कहा, “एसआईटी ने कोटकपूरा गोलीकांड केस में पहले ही चार्जशीट फाइल कर दी है, जिसमें सुखबीर सिंह बादल, चरणजीत शर्मा, परमराज सिंह उमरानंगल और सुमेध सिंह सैनी पर केस चल रहा है और वे अभी बेल पर बाहर हैं। एसआईटी के सामने मुख्य सवाल यह है कि गोलीकांड का ऑर्डर किसने दिया और शांति से प्रदर्शन कर रहे लोगों को हटाने के निर्देश किसने दिए।”

&nbsp;

मनविंदर सिंह ग्यासपुरा ने कहा कि 14 अक्टूबर को बहबल कलां में हुई घटनाएं और भी दुखद थीं, जब लोग शांति से विरोध कर रहे थे तब पुलिस गोलीबारी में दो नौजवान, कृष्ण भगवान सिंह और गुरजीत सिंह की मौत हो गई थी । सुखबीर सिंह बादल ने बार-बार दावा किया है कि वह उस समय पंजाब में नहीं थे। लेकिन उनकी ज़मानत से जुड़े कोर्ट के कागज़ात बताते हैं कि सुखबीर सिंह बादल पंजाब में मौजूद थे और एक फाइव-स्टार होटल में रुके हुए थे। वहीं से, चरणजीत शर्मा, परमराज सिंह उमरानंगल और सुमेध सिंह सैनी समेत बड़े पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए जा रहे थे। पंजाब के लोग जानना चाहते हैं कि गोली चलाने का आदेश किसने दिया और प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज करने के निर्देश किसने दिए। सुखबीर सिंह बादल ने खुद श्री अकाल तख्त साहिब के सामने इन घटनाओं में अपना रोल कबूल किया था।

&nbsp;

ज्ञानी रघबीर सिंह के एसआईटी को दिए गए बयान का ज़िक्र करते हुए, मनविंदर सिंह ग्यासपुरा ने कहा कि सुखबीर सिंह बादल के श्री अकाल तख्त साहिब के सामने गलत काम करने की बात मानने के तथ्य रिकॉर्ड का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा, “अगर ये कबूलनामे और दूसरे सबूत पहले से ही रिकॉर्ड का हिस्सा हैं, तो उन्हें कोर्ट और एसआईटी के सामने क्यों नहीं पेश किया जाना चाहिए? ज़िम्मेदार लोगों को कड़ी सज़ा क्यों नहीं मिलनी चाहिए? पंजाब को यह जानने का हक़ है कि किसने आदेश दिए और कृष्ण भगवान सिंह और गुरजीत सिंह की मौत के लिए कौन ज़िम्मेदार था।”

&nbsp;

आप पंजाब के प्रवक्ता रणबीर सिंह ढींडसा ने कहा कि सुखबीर सिंह बादल का बेअदबी, बहबल कलां और कोटकपूरा गोलीकांड मामलों में एसआईटी के सामने बार-बार पेश न होना दिखाता है कि अकाली दल बादल की लीडरशिप इन गंभीर मुद्दों को लेकर बिल्कुल भी सीरियस नहीं है। उन्होंने कहा कि अकाली दल-भाजपा गठबंधन अब एक्सपोज़ हो गया है, खासकर तब जब सुखबीर सिंह बादल ने पहले ही श्री अकाल तख्त साहिब के सामने अपनी ज़िम्मेदारी मान ली है। रणबीर सिंह ढींडसा ने कहा, “मैं पूछना चाहता हूं कि आपके लिए दुनियावी अदालतें ज़्यादा ज़रूरी हैं या हमारे सुप्रीम श्री अकाल तख्त साहिब? हमारे गुरु साहिब द्वारा स्थापित श्री अकाल तख्त साहिब दुनियावी अदालतों से कहीं ज़्यादा पवित्र और सुप्रीम है, और हर सिख और पंजाबी के मन में इसके प्रति बहुत श्रद्धा और सम्मान है।”

&nbsp;

रणबीर सिंह ढींढसा ने कहा कि जब सुखबीर सिंह बादल को श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ने बुलाया था, तो उन्होंने अरदास और गुरबाणी का जाप कर रही शांतमई संगत पर गोलीबारी की ज़िम्मेदारी मानी थी, और उनकी पूरी कैबिनेट को सिख रीति-रिवाजों के अनुसार धार्मिक सज़ा भी मिली थी। उन्होंने पूछा, “अगर आपने गुरु के सुप्रीम कोर्ट के सामने अपनी ज़िम्मेदारी मान ली थी, तो अब आप एसआईटी के सामने सच बताने से कैसे मना कर सकते हैं? गुरु के प्रति आपकी भक्ति और आपका पंथक स्टैंड अब कहाँ चला गया है?”

रणबीर सिंह ढींडसा ने कहा कि गृह मंत्री रहते हुए सुखबीर सिंह बादल ने दावा किया था कि गोलीकांड की घटना वाले दिन वह विदेश में थे, जबकि फरीदकोट कोर्ट के रिकॉर्ड और सुखबीर बादल की अपनी रिट पिटीशन से पता चलता है कि वह एक फाइव-स्टार होटल में बैठे थे और रात में सीनियर पुलिस अधिकारियों के लगातार सम्पर्क में थे। उन्होंने सवाल किया, "जब गृह मंत्री रहते हुए पूरी रात बातचीत होती रही, तो इसकी ज़िम्मेदारी किसकी है?"

उन्होंने कहा कि यह अकाली दल और भाजपा के बीच मिलीभगत थी और इससे उनकी पंजाब-विरोधी, पंथ-विरोधी और सिख-विरोधी राजनीति सामने आ गई है।

&nbsp;

रणबीर सिंह ढींडसा ने कहा कि सुखबीर सिंह बादल के एसआईटी के सामने पेश न होने की वजह दिल्ली में भाजपा लीडरशिप के साथ किया जा रहा राजनीतिक समझौता है। उन्होंने कहा कि सुखबीर सिंह बादल को भरोसा दिलाया जा रहा है कि उन्हें पेश होने की ज़रूरत नहीं है और बेअदबी के मामलों में उन्हें राजनीतिक सुरक्षा दी जाएगी। उन्होंने कहा, “इस सुरक्षा के बदले सुखबीर सिंह बादल ने पंजाब के हितों से समझौता किया है और काले कृषि कानूनों पर भाजपा का समर्थन करने के लिए सहमत हुए हैं।”

&nbsp;

रणबीर सिंह ढींडसा ने कहा कि 2020 में दिखावे के लिए तोड़ा गया गठबंधन असल में कभी टूटा ही नहीं था। उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा उम्मीदवार को अकाली दल के समर्थन और संसद में बिल के लिए उनके अकेले सांसद के वोट की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, “एमएसपी, कृषि कानूनों या सिख मुद्दों पर उनकी शर्तें आज कहां चली गईं? आज उनके लिए केवल यही मायने रखता है कि बेअदबी के मामलों में आरोपों और सजा से कैसे बचा जाए।”

आप ने कहा कि पंजाब किसान आंदोलन के दौरान दिए गए बलिदानों को नहीं भूल सकता और भाजपा-अकाली के फिर से गठबंधन के ज़रिए कृषि कानूनों को वापस लाने की कोई भी कोशिश एक बार फिर पंजाब के हितों से ऊपर राजनीतिक हितों को रखेगी।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब ने कहा है कि प्रस्तावित भाजपा-अकाली गठबंधन पंजाब के हितों की कीमत पर एक राजनीतिक अस्तित्व का सौदा है, जिसमें सुखबीर सिंह बादल तीन कृषि कानूनों को वापिस लाने के प्रयासों सहित भाजपा के राजनीतिक एजेंडे का समर्थन करने के बदले में बेअदबी और गोलीबारी के मामलों से भाजपा की सुरक्षा मांग रहे हैं। आप ने कहा कि यह राजनीतिक सौदेबाजी बहुत शर्मनाक है, क्योंकि 2015 में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की चोरी और बार-बार बेअदबी के बाद कोटकपूरा और बहबल कलां में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पुलिस गोलीकांड भाजपा-अकाली सरकार के दौरान हुई थी, जब सुखबीर सिंह बादल गृह मंत्री थे।

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एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आप पंजाब के विधायक मनविंदर सिंह ग्यासपुरा ने कहा, “1 जून 2015 को अकाली-भाजपा सरकार के समय श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के स्वरूप चोरी हो गए थे, लेकिन सरकार ने इस घटना को गंभीरता से नहीं लिया। उस समय गृह मंत्री रहे सुखबीर सिंह बादल ने पूछताछ में एसआईटी को बताया है कि उन्हें चोरी के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। हालांकि, इंटेलिजेंस विंग ने एक रिपोर्ट भेजी थी और सुखबीर सिंह बादल के निजी सचिव ने भी एसआईटी को बताया था कि घटना के बारे में जानकारी मौजूद थी। गृह मंत्री अनजान कैसे रह सकते हैं जब उनके अपने ऑफिस को जानकारी मिल गई थी?”

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मनविंदर सिंह ग्यासपुरा ने कहा कि चोरी के बाद भी, सरकार तब कार्रवाई करने में नाकाम रही जब सितंबर 2015 में सिखों को उनके चोरी हुए गुरु को ढूंढने के लिए पोस्टर लगाए गए थे। उन्होंने कहा, “समय पर कार्रवाई न करने से अक्टूबर में बेअदबी के लिए जिम्मेदार लोगों का हौसला बढ़ा, जब श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के अंग गलियों पर बिखरे हुए मिले, जिससे दुनिया भर के सिखों का दिल टूट गया।”

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उन्होंने कहा कि कोटकपूरा में लोग शांति से इकट्ठा हुए थे, जहाँ अरदास और कीर्तन हो रहा था, लेकिन प्रदर्शनकारियों पर वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया गया। मनविंदर सिंह ग्यासपुरा ने कहा कि वह भी विरोध प्रदर्शन में मौजूद थे। उन्होंने कहा, “एसआईटी ने कोटकपूरा गोलीकांड केस में पहले ही चार्जशीट फाइल कर दी है, जिसमें सुखबीर सिंह बादल, चरणजीत शर्मा, परमराज सिंह उमरानंगल और सुमेध सिंह सैनी पर केस चल रहा है और वे अभी बेल पर बाहर हैं। एसआईटी के सामने मुख्य सवाल यह है कि गोलीकांड का ऑर्डर किसने दिया और शांति से प्रदर्शन कर रहे लोगों को हटाने के निर्देश किसने दिए।”

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मनविंदर सिंह ग्यासपुरा ने कहा कि 14 अक्टूबर को बहबल कलां में हुई घटनाएं और भी दुखद थीं, जब लोग शांति से विरोध कर रहे थे तब पुलिस गोलीबारी में दो नौजवान, कृष्ण भगवान सिंह और गुरजीत सिंह की मौत हो गई थी । सुखबीर सिंह बादल ने बार-बार दावा किया है कि वह उस समय पंजाब में नहीं थे। लेकिन उनकी ज़मानत से जुड़े कोर्ट के कागज़ात बताते हैं कि सुखबीर सिंह बादल पंजाब में मौजूद थे और एक फाइव-स्टार होटल में रुके हुए थे। वहीं से, चरणजीत शर्मा, परमराज सिंह उमरानंगल और सुमेध सिंह सैनी समेत बड़े पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए जा रहे थे। पंजाब के लोग जानना चाहते हैं कि गोली चलाने का आदेश किसने दिया और प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज करने के निर्देश किसने दिए। सुखबीर सिंह बादल ने खुद श्री अकाल तख्त साहिब के सामने इन घटनाओं में अपना रोल कबूल किया था।

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ज्ञानी रघबीर सिंह के एसआईटी को दिए गए बयान का ज़िक्र करते हुए, मनविंदर सिंह ग्यासपुरा ने कहा कि सुखबीर सिंह बादल के श्री अकाल तख्त साहिब के सामने गलत काम करने की बात मानने के तथ्य रिकॉर्ड का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा, “अगर ये कबूलनामे और दूसरे सबूत पहले से ही रिकॉर्ड का हिस्सा हैं, तो उन्हें कोर्ट और एसआईटी के सामने क्यों नहीं पेश किया जाना चाहिए? ज़िम्मेदार लोगों को कड़ी सज़ा क्यों नहीं मिलनी चाहिए? पंजाब को यह जानने का हक़ है कि किसने आदेश दिए और कृष्ण भगवान सिंह और गुरजीत सिंह की मौत के लिए कौन ज़िम्मेदार था।”

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आप पंजाब के प्रवक्ता रणबीर सिंह ढींडसा ने कहा कि सुखबीर सिंह बादल का बेअदबी, बहबल कलां और कोटकपूरा गोलीकांड मामलों में एसआईटी के सामने बार-बार पेश न होना दिखाता है कि अकाली दल बादल की लीडरशिप इन गंभीर मुद्दों को लेकर बिल्कुल भी सीरियस नहीं है। उन्होंने कहा कि अकाली दल-भाजपा गठबंधन अब एक्सपोज़ हो गया है, खासकर तब जब सुखबीर सिंह बादल ने पहले ही श्री अकाल तख्त साहिब के सामने अपनी ज़िम्मेदारी मान ली है। रणबीर सिंह ढींडसा ने कहा, “मैं पूछना चाहता हूं कि आपके लिए दुनियावी अदालतें ज़्यादा ज़रूरी हैं या हमारे सुप्रीम श्री अकाल तख्त साहिब? हमारे गुरु साहिब द्वारा स्थापित श्री अकाल तख्त साहिब दुनियावी अदालतों से कहीं ज़्यादा पवित्र और सुप्रीम है, और हर सिख और पंजाबी के मन में इसके प्रति बहुत श्रद्धा और सम्मान है।”

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रणबीर सिंह ढींढसा ने कहा कि जब सुखबीर सिंह बादल को श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ने बुलाया था, तो उन्होंने अरदास और गुरबाणी का जाप कर रही शांतमई संगत पर गोलीबारी की ज़िम्मेदारी मानी थी, और उनकी पूरी कैबिनेट को सिख रीति-रिवाजों के अनुसार धार्मिक सज़ा भी मिली थी। उन्होंने पूछा, “अगर आपने गुरु के सुप्रीम कोर्ट के सामने अपनी ज़िम्मेदारी मान ली थी, तो अब आप एसआईटी के सामने सच बताने से कैसे मना कर सकते हैं? गुरु के प्रति आपकी भक्ति और आपका पंथक स्टैंड अब कहाँ चला गया है?”

रणबीर सिंह ढींडसा ने कहा कि गृह मंत्री रहते हुए सुखबीर सिंह बादल ने दावा किया था कि गोलीकांड की घटना वाले दिन वह विदेश में थे, जबकि फरीदकोट कोर्ट के रिकॉर्ड और सुखबीर बादल की अपनी रिट पिटीशन से पता चलता है कि वह एक फाइव-स्टार होटल में बैठे थे और रात में सीनियर पुलिस अधिकारियों के लगातार सम्पर्क में थे। उन्होंने सवाल किया, "जब गृह मंत्री रहते हुए पूरी रात बातचीत होती रही, तो इसकी ज़िम्मेदारी किसकी है?"

उन्होंने कहा कि यह अकाली दल और भाजपा के बीच मिलीभगत थी और इससे उनकी पंजाब-विरोधी, पंथ-विरोधी और सिख-विरोधी राजनीति सामने आ गई है।

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रणबीर सिंह ढींडसा ने कहा कि सुखबीर सिंह बादल के एसआईटी के सामने पेश न होने की वजह दिल्ली में भाजपा लीडरशिप के साथ किया जा रहा राजनीतिक समझौता है। उन्होंने कहा कि सुखबीर सिंह बादल को भरोसा दिलाया जा रहा है कि उन्हें पेश होने की ज़रूरत नहीं है और बेअदबी के मामलों में उन्हें राजनीतिक सुरक्षा दी जाएगी। उन्होंने कहा, “इस सुरक्षा के बदले सुखबीर सिंह बादल ने पंजाब के हितों से समझौता किया है और काले कृषि कानूनों पर भाजपा का समर्थन करने के लिए सहमत हुए हैं।”

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रणबीर सिंह ढींडसा ने कहा कि 2020 में दिखावे के लिए तोड़ा गया गठबंधन असल में कभी टूटा ही नहीं था। उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा उम्मीदवार को अकाली दल के समर्थन और संसद में बिल के लिए उनके अकेले सांसद के वोट की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, “एमएसपी, कृषि कानूनों या सिख मुद्दों पर उनकी शर्तें आज कहां चली गईं? आज उनके लिए केवल यही मायने रखता है कि बेअदबी के मामलों में आरोपों और सजा से कैसे बचा जाए।”

आप ने कहा कि पंजाब किसान आंदोलन के दौरान दिए गए बलिदानों को नहीं भूल सकता और भाजपा-अकाली के फिर से गठबंधन के ज़रिए कृषि कानूनों को वापस लाने की कोई भी कोशिश एक बार फिर पंजाब के हितों से ऊपर राजनीतिक हितों को रखेगी।]]></content:encoded>
					
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		<title>भारत की धमाकेदार जीत, बांग्लादेश को 40 रन से हराकर एशिया कप के फाइनल में एंट्री</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Sep 2026 07:46:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[News]]></category>
		<category><![CDATA[Trending]]></category>
		<category><![CDATA[खेल]]></category>
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					<description><![CDATA[<p class="isSelectedEnd">भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिला एशिया कप 2026 के फाइनल में जगह पक्की कर ली है। दुबई में खेले गए पहले सेमीफाइनल में भारत ने बांग्लादेश को <strong>40 रन से हराया</strong>। इस जीत के साथ भारतीय टीम लगातार <strong>10वीं बार एशिया कप के फाइनल</strong> में पहुंच गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में <strong>6 विकेट के नुकसान पर 149 रन</strong> बनाए। टीम की ओर से शेफाली वर्मा ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ 40 गेंदों पर 64 रन की तूफानी पारी खेली। उनकी पारी में 7 चौके और 3 छक्के शामिल रहे। शेफाली की इस पारी ने भारत को एक मजबूत स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।</p>
<p class="isSelectedEnd">शेफाली के अलावा कप्तान हरमनप्रीत कौर ने नाबाद 24 रन बनाए, जबकि ऋचा घोष ने 16 गेंदों पर 21 रन का योगदान दिया। भारत ने आखिरी ओवरों में तेजी से रन बनाकर बांग्लादेश के सामने 150 रन का लक्ष्य रखा।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसके जवाब में बांग्लादेश की टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने दबाव में नजर आई। पूरी टीम 20 ओवर में <strong>7 विकेट के नुकसान पर 109 रन</strong> ही बना सकी और भारत ने मुकाबला 40 रन से अपने नाम कर लिया। बांग्लादेश की ओर से शोर्ना अख्तर ने 22 रन और दिलारा अख्तर ने 21 रन बनाए, लेकिन टीम लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत की गेंदबाजी में <strong>दीप्ति शर्मा</strong> ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 4 ओवर में 26 रन देकर 3 महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए। वहीं नंदनी शर्मा ने 2 विकेट लेकर बांग्लादेश की रन गति पर लगाम लगाई। भारतीय स्पिन गेंदबाजों ने धीमी पिच का शानदार फायदा उठाया और बांग्लादेश को लगातार दबाव में रखा।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस जीत के साथ भारत ने महिला एशिया कप के फाइनल में अपनी लगातार 10वीं जगह पक्की की है। अब भारतीय टीम की नजर खिताब पर है। टूर्नामेंट में भारत का प्रदर्शन अब तक शानदार रहा है और टीम लगातार जीत दर्ज करते हुए फाइनल तक पहुंची है।</p>
<p class="isSelectedEnd">अब फाइनल में भारत का मुकाबला दूसरे सेमीफाइनल की विजेता टीम से होगा। दूसरा सेमीफाइनल <strong>11 सितंबर को श्रीलंका और पाकिस्तान</strong> के बीच खेला जाएगा। इसके बाद महिला एशिया कप 2026 का फाइनल <strong>13 सितंबर को दुबई में</strong> खेला जाएगा।</p>
भारत की नजर अब एशिया कप की ट्रॉफी पर है। शेफाली वर्मा की विस्फोटक बल्लेबाजी और दीप्ति शर्मा की शानदार गेंदबाजी ने सेमीफाइनल में टीम को बड़ी जीत दिलाई है। अब फाइनल में भारतीय टीम इसी लय को बरकरार रखते हुए खिताब अपने नाम करने के इरादे से उतरेगी।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p class="isSelectedEnd">भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिला एशिया कप 2026 के फाइनल में जगह पक्की कर ली है। दुबई में खेले गए पहले सेमीफाइनल में भारत ने बांग्लादेश को <strong>40 रन से हराया</strong>। इस जीत के साथ भारतीय टीम लगातार <strong>10वीं बार एशिया कप के फाइनल</strong> में पहुंच गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में <strong>6 विकेट के नुकसान पर 149 रन</strong> बनाए। टीम की ओर से शेफाली वर्मा ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ 40 गेंदों पर 64 रन की तूफानी पारी खेली। उनकी पारी में 7 चौके और 3 छक्के शामिल रहे। शेफाली की इस पारी ने भारत को एक मजबूत स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।</p>
<p class="isSelectedEnd">शेफाली के अलावा कप्तान हरमनप्रीत कौर ने नाबाद 24 रन बनाए, जबकि ऋचा घोष ने 16 गेंदों पर 21 रन का योगदान दिया। भारत ने आखिरी ओवरों में तेजी से रन बनाकर बांग्लादेश के सामने 150 रन का लक्ष्य रखा।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसके जवाब में बांग्लादेश की टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने दबाव में नजर आई। पूरी टीम 20 ओवर में <strong>7 विकेट के नुकसान पर 109 रन</strong> ही बना सकी और भारत ने मुकाबला 40 रन से अपने नाम कर लिया। बांग्लादेश की ओर से शोर्ना अख्तर ने 22 रन और दिलारा अख्तर ने 21 रन बनाए, लेकिन टीम लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत की गेंदबाजी में <strong>दीप्ति शर्मा</strong> ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 4 ओवर में 26 रन देकर 3 महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए। वहीं नंदनी शर्मा ने 2 विकेट लेकर बांग्लादेश की रन गति पर लगाम लगाई। भारतीय स्पिन गेंदबाजों ने धीमी पिच का शानदार फायदा उठाया और बांग्लादेश को लगातार दबाव में रखा।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस जीत के साथ भारत ने महिला एशिया कप के फाइनल में अपनी लगातार 10वीं जगह पक्की की है। अब भारतीय टीम की नजर खिताब पर है। टूर्नामेंट में भारत का प्रदर्शन अब तक शानदार रहा है और टीम लगातार जीत दर्ज करते हुए फाइनल तक पहुंची है।</p>
<p class="isSelectedEnd">अब फाइनल में भारत का मुकाबला दूसरे सेमीफाइनल की विजेता टीम से होगा। दूसरा सेमीफाइनल <strong>11 सितंबर को श्रीलंका और पाकिस्तान</strong> के बीच खेला जाएगा। इसके बाद महिला एशिया कप 2026 का फाइनल <strong>13 सितंबर को दुबई में</strong> खेला जाएगा।</p>
भारत की नजर अब एशिया कप की ट्रॉफी पर है। शेफाली वर्मा की विस्फोटक बल्लेबाजी और दीप्ति शर्मा की शानदार गेंदबाजी ने सेमीफाइनल में टीम को बड़ी जीत दिलाई है। अब फाइनल में भारतीय टीम इसी लय को बरकरार रखते हुए खिताब अपने नाम करने के इरादे से उतरेगी।]]></content:encoded>
					
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		<title>Packaged Foods की Labelling में हो सकता है बड़ा बदलाव, 10 सितंबर को Supreme Court में अहम सुनवाई</title>
		<link>https://trendstopic.in/packaged-food-labelling-may-see-major-changes-supreme-court-to-hear-the-matter-on-september-10/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 08 Sep 2026 09:06:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[FoodIndustry]]></category>
		<category><![CDATA[FoodLabelling]]></category>
		<category><![CDATA[FoodSafety]]></category>
		<category><![CDATA[FrontOfPackLabel]]></category>
		<category><![CDATA[FSSAI]]></category>
		<category><![CDATA[PackagedFood]]></category>
		<category><![CDATA[SupremeCourt]]></category>
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					<description><![CDATA[भारत में Packaged Foods की labelling को लेकर बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया गया है। FSSAI ने ज्यादा Sugar, Salt और Saturated Fat वाले products के लिए packet के सामने Warning Label लगाने का प्रस्ताव रखा है। इस मामले में <strong>10 </strong><strong>सितंबर को Supreme Court </strong><strong>में अहम सुनवाई</strong> होने वाली है।

दरअसल, Food Safety and Standards Authority of India यानी <strong>FSSAI</strong> ने Packaged Foods के लिए <strong>Front-of-Pack Warning Label (FoPWL)</strong> का proposal दिया है। इसका मकसद consumers को किसी food product के बारे में जरूरी health information आसानी से देना है। यानी packet के पीछे दिए गए लंबे Nutrition Chart को पढ़े बिना ही ग्राहक को सामने से पता चल सके कि किसी product में Sugar, Salt या Saturated Fat की मात्रा ज्यादा है।

प्रस्ताव के तहत ऐसे products की packaging के सामने <strong>Red Hexagonal </strong><strong>यानी छह कोने वाला Warning Symbol</strong> लगाने की बात कही गई है। इसका मकसद यह है कि product खरीदते समय consumer की नजर सबसे पहले इस warning पर पड़े और वह ज्यादा Sugar, Salt या Saturated Fat वाले food को लेकर informed decision ले सके।

हालांकि, इस proposal को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि <strong>किस product </strong><strong>पर Warning Label </strong><strong>लगाया जाएगा।</strong> FSSAI ने इसे phased manner यानी अलग-अलग चरणों में लागू करने का proposal रखा है।

शुरुआती यानी <strong>पहले phase</strong> में किसी product पर Warning Label तब लगाया जाएगा, जब उसमें तीन में से कम से कम <strong>दो nutrients</strong> तय limit से ज्यादा हों। इनमें <strong>Added Sugar, Salt/Sodium </strong><strong>और Saturated Fat</strong> शामिल हैं।

इसे एक आसान example से समझें। अगर किसी food या drink में Sugar की मात्रा बहुत ज्यादा है, लेकिन उसमें Salt और Saturated Fat तय limit के अंदर हैं, तो शुरुआती phase में उस product पर Warning Label लगना जरूरी नहीं होगा।

<strong>Health Activists </strong><strong>इसी व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।</strong> उनका कहना है कि अगर किसी product में सिर्फ एक nutrient की मात्रा ही बहुत ज्यादा है, तो भी consumer को इसकी clear warning मिलनी चाहिए। उदाहरण के तौर पर अगर किसी drink में Sugar काफी ज्यादा है, तो सिर्फ इसलिए उसे warning से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए क्योंकि उसमें Salt और Saturated Fat कम हैं।

Health Groups चाहते हैं कि <strong>एक भी nutrient </strong><strong>तय limit </strong><strong>से ज्यादा होने पर Warning Label </strong><strong>लगाया जाए</strong>, ताकि consumers को product की सही जानकारी मिल सके और वे खरीदने से पहले बेहतर फैसला ले सकें।

FSSAI के proposal में बाद के phase में rules को और strict करने की बात कही गई है। <strong>दूसरे phase </strong><strong>में अगर किसी product </strong><strong>में एक भी nutrient </strong><strong>तय limit </strong><strong>से ज्यादा होता है, </strong><strong>तो उस पर संबंधित Warning Label </strong><strong>लगाने का proposal </strong><strong>है।</strong> हालांकि, दूसरा phase कब शुरू होगा और इसकी exact timeline क्या होगी, इसे लेकर सवाल अभी बने हुए हैं।

इसके अलावा <strong>Warning Label </strong><strong>के size </strong><strong>और font</strong> को लेकर भी concerns सामने आए हैं। Health Activists का कहना है कि सिर्फ warning लगा देना काफी नहीं है। Warning इतनी बड़ी और clear होनी चाहिए कि दुकान या supermarket में product खरीदते समय consumer उसे आसानी से देख सके।

अगर Warning Label बहुत छोटा हुआ या packaging के design में दब गया, तो consumer का ध्यान उस पर नहीं जाएगा और इस पूरी व्यवस्था का मकसद कमजोर पड़ सकता है।

इस पूरे मामले में <strong>“Added Sugar”</strong> भी एक अहम मुद्दा है। Health Activists चाहते हैं कि consumers को आसानी से समझ आए कि किसी product में अलग से कितनी Sugar डाली गई है और उसकी मात्रा कितनी है। वहीं Food Industry के लिए अलग-अलग products और ingredients पर nutritional limits लागू करना एक बड़ी regulatory challenge हो सकती है।

इस proposal का असर भारत की बड़ी <strong>Packaged Food Industry</strong> पर भी पड़ सकता है। Health Groups इसे public health के लिए जरूरी कदम मान रहे हैं, जबकि Food Industry को चिंता है कि अगर products पर Warning Labels लगाए जाते हैं, तो इससे consumers की perception और कुछ products की sales पर असर पड़ सकता है।

हालांकि, कई बड़ी Food Companies ने संकेत दिया है कि अगर सरकार final rules लागू करती है, तो वे <strong>इन rules </strong><strong>को comply </strong><strong>करने के लिए तैयार हैं।</strong>

प्रस्तावित Warning Label system का असर <strong>Chips, Namkeen, Biscuits, Cookies, Instant Noodles, Packaged Snacks, Sweetened Beverages </strong><strong>और कुछ Breakfast Cereals</strong> जैसे products पर पड़ सकता है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि हर Packaged Food के packet पर Red Warning Label लग जाएगा। यह product में मौजूद nutrients की मात्रा और सरकार द्वारा तय nutritional limits पर depend करेगा।

इस मामले में <strong>10 </strong><strong>सितंबर की Supreme Court hearing</strong> काफी अहम मानी जा रही है। इससे पहले <strong>13 </strong><strong>अगस्त 2026 </strong><strong>को Supreme Court </strong><strong>ने Centre </strong><strong>और FSSAI </strong><strong>की ओर से इस मामले में हो रही देरी पर नाराजगी जताई थी।</strong> अब अगली सुनवाई में proposed Warning Label system को लेकर आगे की स्थिति साफ हो सकती है।

यहां यह भी साफ करना जरूरी है कि <strong>Red Warning Labels </strong><strong>अभी पूरे देश में लागू नहीं हुए हैं।</strong> फिलहाल FSSAI का यह एक proposed system है और इसे लेकर आगे की प्रक्रिया चल रही है।

अब 10 सितंबर को होने वाली सुनवाई में यह देखना अहम होगा कि Supreme Court इस मामले में क्या निर्देश देता है और क्या सरकार के proposed rules में कोई बदलाव किया जाता है। अगर यह system final होकर लागू होता है, तो आने वाले समय में Packaged Food खरीदते वक्त consumers को <strong>Brand </strong><strong>और Price </strong><strong>के साथ-साथ packet </strong><strong>पर लगी Health Warning </strong><strong>पर भी ध्यान देना होगा।</strong>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[भारत में Packaged Foods की labelling को लेकर बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया गया है। FSSAI ने ज्यादा Sugar, Salt और Saturated Fat वाले products के लिए packet के सामने Warning Label लगाने का प्रस्ताव रखा है। इस मामले में <strong>10 </strong><strong>सितंबर को Supreme Court </strong><strong>में अहम सुनवाई</strong> होने वाली है।

दरअसल, Food Safety and Standards Authority of India यानी <strong>FSSAI</strong> ने Packaged Foods के लिए <strong>Front-of-Pack Warning Label (FoPWL)</strong> का proposal दिया है। इसका मकसद consumers को किसी food product के बारे में जरूरी health information आसानी से देना है। यानी packet के पीछे दिए गए लंबे Nutrition Chart को पढ़े बिना ही ग्राहक को सामने से पता चल सके कि किसी product में Sugar, Salt या Saturated Fat की मात्रा ज्यादा है।

प्रस्ताव के तहत ऐसे products की packaging के सामने <strong>Red Hexagonal </strong><strong>यानी छह कोने वाला Warning Symbol</strong> लगाने की बात कही गई है। इसका मकसद यह है कि product खरीदते समय consumer की नजर सबसे पहले इस warning पर पड़े और वह ज्यादा Sugar, Salt या Saturated Fat वाले food को लेकर informed decision ले सके।

हालांकि, इस proposal को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि <strong>किस product </strong><strong>पर Warning Label </strong><strong>लगाया जाएगा।</strong> FSSAI ने इसे phased manner यानी अलग-अलग चरणों में लागू करने का proposal रखा है।

शुरुआती यानी <strong>पहले phase</strong> में किसी product पर Warning Label तब लगाया जाएगा, जब उसमें तीन में से कम से कम <strong>दो nutrients</strong> तय limit से ज्यादा हों। इनमें <strong>Added Sugar, Salt/Sodium </strong><strong>और Saturated Fat</strong> शामिल हैं।

इसे एक आसान example से समझें। अगर किसी food या drink में Sugar की मात्रा बहुत ज्यादा है, लेकिन उसमें Salt और Saturated Fat तय limit के अंदर हैं, तो शुरुआती phase में उस product पर Warning Label लगना जरूरी नहीं होगा।

<strong>Health Activists </strong><strong>इसी व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।</strong> उनका कहना है कि अगर किसी product में सिर्फ एक nutrient की मात्रा ही बहुत ज्यादा है, तो भी consumer को इसकी clear warning मिलनी चाहिए। उदाहरण के तौर पर अगर किसी drink में Sugar काफी ज्यादा है, तो सिर्फ इसलिए उसे warning से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए क्योंकि उसमें Salt और Saturated Fat कम हैं।

Health Groups चाहते हैं कि <strong>एक भी nutrient </strong><strong>तय limit </strong><strong>से ज्यादा होने पर Warning Label </strong><strong>लगाया जाए</strong>, ताकि consumers को product की सही जानकारी मिल सके और वे खरीदने से पहले बेहतर फैसला ले सकें।

FSSAI के proposal में बाद के phase में rules को और strict करने की बात कही गई है। <strong>दूसरे phase </strong><strong>में अगर किसी product </strong><strong>में एक भी nutrient </strong><strong>तय limit </strong><strong>से ज्यादा होता है, </strong><strong>तो उस पर संबंधित Warning Label </strong><strong>लगाने का proposal </strong><strong>है।</strong> हालांकि, दूसरा phase कब शुरू होगा और इसकी exact timeline क्या होगी, इसे लेकर सवाल अभी बने हुए हैं।

इसके अलावा <strong>Warning Label </strong><strong>के size </strong><strong>और font</strong> को लेकर भी concerns सामने आए हैं। Health Activists का कहना है कि सिर्फ warning लगा देना काफी नहीं है। Warning इतनी बड़ी और clear होनी चाहिए कि दुकान या supermarket में product खरीदते समय consumer उसे आसानी से देख सके।

अगर Warning Label बहुत छोटा हुआ या packaging के design में दब गया, तो consumer का ध्यान उस पर नहीं जाएगा और इस पूरी व्यवस्था का मकसद कमजोर पड़ सकता है।

इस पूरे मामले में <strong>“Added Sugar”</strong> भी एक अहम मुद्दा है। Health Activists चाहते हैं कि consumers को आसानी से समझ आए कि किसी product में अलग से कितनी Sugar डाली गई है और उसकी मात्रा कितनी है। वहीं Food Industry के लिए अलग-अलग products और ingredients पर nutritional limits लागू करना एक बड़ी regulatory challenge हो सकती है।

इस proposal का असर भारत की बड़ी <strong>Packaged Food Industry</strong> पर भी पड़ सकता है। Health Groups इसे public health के लिए जरूरी कदम मान रहे हैं, जबकि Food Industry को चिंता है कि अगर products पर Warning Labels लगाए जाते हैं, तो इससे consumers की perception और कुछ products की sales पर असर पड़ सकता है।

हालांकि, कई बड़ी Food Companies ने संकेत दिया है कि अगर सरकार final rules लागू करती है, तो वे <strong>इन rules </strong><strong>को comply </strong><strong>करने के लिए तैयार हैं।</strong>

प्रस्तावित Warning Label system का असर <strong>Chips, Namkeen, Biscuits, Cookies, Instant Noodles, Packaged Snacks, Sweetened Beverages </strong><strong>और कुछ Breakfast Cereals</strong> जैसे products पर पड़ सकता है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि हर Packaged Food के packet पर Red Warning Label लग जाएगा। यह product में मौजूद nutrients की मात्रा और सरकार द्वारा तय nutritional limits पर depend करेगा।

इस मामले में <strong>10 </strong><strong>सितंबर की Supreme Court hearing</strong> काफी अहम मानी जा रही है। इससे पहले <strong>13 </strong><strong>अगस्त 2026 </strong><strong>को Supreme Court </strong><strong>ने Centre </strong><strong>और FSSAI </strong><strong>की ओर से इस मामले में हो रही देरी पर नाराजगी जताई थी।</strong> अब अगली सुनवाई में proposed Warning Label system को लेकर आगे की स्थिति साफ हो सकती है।

यहां यह भी साफ करना जरूरी है कि <strong>Red Warning Labels </strong><strong>अभी पूरे देश में लागू नहीं हुए हैं।</strong> फिलहाल FSSAI का यह एक proposed system है और इसे लेकर आगे की प्रक्रिया चल रही है।

अब 10 सितंबर को होने वाली सुनवाई में यह देखना अहम होगा कि Supreme Court इस मामले में क्या निर्देश देता है और क्या सरकार के proposed rules में कोई बदलाव किया जाता है। अगर यह system final होकर लागू होता है, तो आने वाले समय में Packaged Food खरीदते वक्त consumers को <strong>Brand </strong><strong>और Price </strong><strong>के साथ-साथ packet </strong><strong>पर लगी Health Warning </strong><strong>पर भी ध्यान देना होगा।</strong>]]></content:encoded>
					
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		<title>बिहार में बड़ा रेल हादसा टला, महानंदा एक्सप्रेस के इंजन समेत 3 कोच पटरी से उतरे</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 06 Sep 2026 10:52:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[News]]></category>
		<category><![CDATA[Trending]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[BreakingNews]]></category>
		<category><![CDATA[news]]></category>
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					<description><![CDATA[<p class="isSelectedEnd">बिहार के भोजपुर जिले से रविवार सुबह बड़ी खबर सामने आई है, जहां एक बड़ा रेल हादसा होने से टल गया। अलीपुरद्वार से दिल्ली जा रही महानंदा एक्सप्रेस, ट्रेन नंबर 15484, आरा रेलवे स्टेशन से कुछ दूरी पर पटरी से उतर गई।</p>
<p class="isSelectedEnd">जानकारी के मुताबिक, ट्रेन आरा रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 2 से रवाना हुई थी। स्टेशन से कुछ दूरी पर पश्चिमी ओवरब्रिज के पास पहुंचते ही ट्रेन के इंजन, SLR बोगी और एक AC कोच के पहिए पटरी से उतर गए।</p>
<p class="isSelectedEnd">हादसे के समय ट्रेन में बड़ी संख्या में यात्री सवार थे और कई यात्री सो रहे थे। अचानक तेज आवाज और ट्रेन में जोरदार झटका लगने से यात्रियों में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि राहत की सबसे बड़ी बात यह रही कि हादसे में किसी भी यात्री के घायल होने की सूचना नहीं है। घटना की जानकारी मिलते ही रेलवे के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे और पटरी से उतरे ट्रेन के हिस्सों का जायजा लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">रेलवे की टीम ने सबसे पहले पटरी से उतरे इंजन और कोचों को बाकी ट्रेन से अलग किया। इसके बाद एक अन्य इंजन की मदद से ट्रेन को दोबारा रूट पर लाने की कार्रवाई की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस दौरान रेल यातायात पर भी कुछ समय के लिए असर पड़ा। रेलवे कर्मचारियों ने मौके पर जरूरी कार्रवाई करते हुए ट्रैक को साफ करने और रेल परिचालन को सामान्य करने का काम शुरू किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">फिलहाल महानंदा एक्सप्रेस के पटरी से उतरने की सही वजह सामने नहीं आई है। रेलवे की ओर से मामले की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि ट्रेन के इंजन, SLR बोगी और AC कोच के पहिए किन परिस्थितियों में पटरी से उतरे।</p>
फिलहाल हादसे में किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है। किसी यात्री के घायल नहीं होने से यात्रियों और उनके परिवारों ने राहत की सांस ली है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p class="isSelectedEnd">बिहार के भोजपुर जिले से रविवार सुबह बड़ी खबर सामने आई है, जहां एक बड़ा रेल हादसा होने से टल गया। अलीपुरद्वार से दिल्ली जा रही महानंदा एक्सप्रेस, ट्रेन नंबर 15484, आरा रेलवे स्टेशन से कुछ दूरी पर पटरी से उतर गई।</p>
<p class="isSelectedEnd">जानकारी के मुताबिक, ट्रेन आरा रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 2 से रवाना हुई थी। स्टेशन से कुछ दूरी पर पश्चिमी ओवरब्रिज के पास पहुंचते ही ट्रेन के इंजन, SLR बोगी और एक AC कोच के पहिए पटरी से उतर गए।</p>
<p class="isSelectedEnd">हादसे के समय ट्रेन में बड़ी संख्या में यात्री सवार थे और कई यात्री सो रहे थे। अचानक तेज आवाज और ट्रेन में जोरदार झटका लगने से यात्रियों में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि राहत की सबसे बड़ी बात यह रही कि हादसे में किसी भी यात्री के घायल होने की सूचना नहीं है। घटना की जानकारी मिलते ही रेलवे के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे और पटरी से उतरे ट्रेन के हिस्सों का जायजा लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">रेलवे की टीम ने सबसे पहले पटरी से उतरे इंजन और कोचों को बाकी ट्रेन से अलग किया। इसके बाद एक अन्य इंजन की मदद से ट्रेन को दोबारा रूट पर लाने की कार्रवाई की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस दौरान रेल यातायात पर भी कुछ समय के लिए असर पड़ा। रेलवे कर्मचारियों ने मौके पर जरूरी कार्रवाई करते हुए ट्रैक को साफ करने और रेल परिचालन को सामान्य करने का काम शुरू किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">फिलहाल महानंदा एक्सप्रेस के पटरी से उतरने की सही वजह सामने नहीं आई है। रेलवे की ओर से मामले की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि ट्रेन के इंजन, SLR बोगी और AC कोच के पहिए किन परिस्थितियों में पटरी से उतरे।</p>
फिलहाल हादसे में किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है। किसी यात्री के घायल नहीं होने से यात्रियों और उनके परिवारों ने राहत की सांस ली है।]]></content:encoded>
					
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		<title>हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, दूसरे विवाह के बाद नहीं बदलेगा बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र पर पिता का नाम</title>
		<link>https://trendstopic.in/major-high-court-ruling-fathers-name-on-childs-birth-certificate-will-not-be-changed-after-a-second-marriage/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 05 Sep 2026 08:44:51 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p class="isSelectedEnd">पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मां या पिता के दूसरे विवाह के आधार पर बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र में उसके जैविक पिता का नाम नहीं बदला जा सकता।</p>
<p class="isSelectedEnd">हाईकोर्ट ने कहा कि बच्चे के जन्म के समय जो जैविक तथ्य मौजूद थे, उन्हें बाद में हुए विवाह, तलाक या दोबारा विवाह के आधार पर बदला नहीं जा सकता। जन्म प्रमाणपत्र में बच्चे के जन्म के समय उसके माता-पिता से जुड़ी सही जानकारी दर्ज होती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">दरअसल, एक महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपने नाबालिग बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र पर पिता का नाम बदलने की मांग की थी। महिला का कहना था कि उसने दूसरा विवाह कर लिया है और अब उसके दूसरे पति का नाम बच्चे के पिता के तौर पर दर्ज किया जाए।</p>
<p class="isSelectedEnd">अदालत ने महिला की इस मांग को स्वीकार नहीं किया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि माता-पिता के वैवाहिक रिश्ते में बाद में होने वाला बदलाव बच्चे के जैविक पिता की पहचान को नहीं बदलता।</p>
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने महिला की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने जन्म प्रमाणपत्र से जैविक पिता का नाम हटाकर दूसरे पति का नाम दर्ज करने की मांग को भी अस्वीकार कर दिया। फैसले में यह साफ किया गया कि बाद में बदली पारिवारिक परिस्थितियों के आधार पर जन्म के समय दर्ज जैविक तथ्य को बदला नहीं जा सकता।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p class="isSelectedEnd">पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मां या पिता के दूसरे विवाह के आधार पर बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र में उसके जैविक पिता का नाम नहीं बदला जा सकता।</p>
<p class="isSelectedEnd">हाईकोर्ट ने कहा कि बच्चे के जन्म के समय जो जैविक तथ्य मौजूद थे, उन्हें बाद में हुए विवाह, तलाक या दोबारा विवाह के आधार पर बदला नहीं जा सकता। जन्म प्रमाणपत्र में बच्चे के जन्म के समय उसके माता-पिता से जुड़ी सही जानकारी दर्ज होती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">दरअसल, एक महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपने नाबालिग बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र पर पिता का नाम बदलने की मांग की थी। महिला का कहना था कि उसने दूसरा विवाह कर लिया है और अब उसके दूसरे पति का नाम बच्चे के पिता के तौर पर दर्ज किया जाए।</p>
<p class="isSelectedEnd">अदालत ने महिला की इस मांग को स्वीकार नहीं किया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि माता-पिता के वैवाहिक रिश्ते में बाद में होने वाला बदलाव बच्चे के जैविक पिता की पहचान को नहीं बदलता।</p>
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने महिला की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने जन्म प्रमाणपत्र से जैविक पिता का नाम हटाकर दूसरे पति का नाम दर्ज करने की मांग को भी अस्वीकार कर दिया। फैसले में यह साफ किया गया कि बाद में बदली पारिवारिक परिस्थितियों के आधार पर जन्म के समय दर्ज जैविक तथ्य को बदला नहीं जा सकता।]]></content:encoded>
					
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