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	<title>दिल्ली &#8211; Trends Topic</title>
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	<title>दिल्ली &#8211; Trends Topic</title>
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		<title>BRICS Summit: PM मोदी ने कहा- बढ़ रहा ग्लोबल तनाव, संकटों से निपटने के लिए पहले से तैयारी जरूरी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 13 Sep 2026 10:01:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[World]]></category>
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		<category><![CDATA[WorldPolitics]]></category>
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					<description><![CDATA[ब्रिक्स सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व स्तर पर बढ़ रहे तनाव और इसके आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि महामारी, जलवायु आपदाओं और सप्लाई चेन में आए व्यवधान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दुनिया के देश एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं।
<h3>एक जगह का संकट दूसरे देशों को भी कर सकता है प्रभावित</h3>
PM मोदी ने कहा कि मौजूदा दौर में किसी एक क्षेत्र में पैदा हुआ संकट दूसरे देशों को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए ब्रिक्स देशों के लिए ऐसी चुनौतियों से निपटने के लिए पहले से तैयार रहना जरूरी है।
<h3>विकास और पर्यावरण को साथ लेकर चलने की जरूरत</h3>
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में प्रकृति को मां के रूप में पूजा जाता है। उन्होंने जोर दिया कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ना समय की जरूरत है।

इसी दिशा में ब्रिक्स देशों की ओर से संक्रामक बीमारियों के फैलाव को रोकने और उनके प्रभावी प्रबंधन के लिए ‘ब्रिक्स एकीकृत अग्रिम चेतावनी प्रणाली’ स्थापित करने पर सहमति बनी है।

इसके अलावा, प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए अग्रिम चेतावनी से जुड़े डेटा को इकट्ठा करने और साझा करने के लिए दिशा-निर्देश भी तैयार किए गए हैं।
<h3>सामूहिक तस्वीर के साथ हुई सम्मेलन के दूसरे दिन की शुरुआत</h3>
सम्मेलन के दूसरे दिन की शुरुआत भारत मंडपम में सदस्य देशों के नेताओं की सामूहिक तस्वीर के साथ हुई। इस दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, प्रधानमंत्री मोदी के दोनों तरफ नजर आए।
<h3>PM मोदी करेंगे कई द्विपक्षीय बैठकें</h3>
आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल सात देशों के नेताओं के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। इससे पहले सम्मेलन के पहले दिन रात के खाने का भी आयोजन किया गया था।

इस दौरान चीनी राष्ट्रपति और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस के अलावा बाकी विश्व नेता डिनर में शामिल हुए। अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद सम्मेलन में शामिल होने के बाद अपने देश लौट गए। इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी सम्मेलन के बाद क्रमशः दिल्ली और भारत से रवाना हो चुके हैं।
<h3>ब्रिक्स में 11 देश शामिल</h3>
ब्रिक्स दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों का समूह है। मौजूदा समय में इसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और इंडोनेशिया शामिल हैं।

ब्रिक्स का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक सहयोग को मजबूत करना है। शुरुआत में इसमें ब्राजील, रूस, भारत और चीन शामिल थे और इसे ‘BRIC’ कहा जाता था। बाद में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद यह ‘BRICS’ बन गया।
<h3>‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज को मिल रही अहमियत</h3>
सम्मेलन के दौरान PM मोदी ने कहा कि ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों का ब्रिक्स में भरोसा बढ़ा है, क्योंकि इस मंच पर उनकी आवाज सुनी जाती है और उनके अनुभवों को अहमियत दी जाती है।

उन्होंने कहा कि ब्रिक्स की सबसे बड़ी ताकत इसके सदस्य देशों की विविधता और आपसी सहयोग में है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[ब्रिक्स सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व स्तर पर बढ़ रहे तनाव और इसके आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि महामारी, जलवायु आपदाओं और सप्लाई चेन में आए व्यवधान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दुनिया के देश एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं।
<h3>एक जगह का संकट दूसरे देशों को भी कर सकता है प्रभावित</h3>
PM मोदी ने कहा कि मौजूदा दौर में किसी एक क्षेत्र में पैदा हुआ संकट दूसरे देशों को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए ब्रिक्स देशों के लिए ऐसी चुनौतियों से निपटने के लिए पहले से तैयार रहना जरूरी है।
<h3>विकास और पर्यावरण को साथ लेकर चलने की जरूरत</h3>
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में प्रकृति को मां के रूप में पूजा जाता है। उन्होंने जोर दिया कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ना समय की जरूरत है।

इसी दिशा में ब्रिक्स देशों की ओर से संक्रामक बीमारियों के फैलाव को रोकने और उनके प्रभावी प्रबंधन के लिए ‘ब्रिक्स एकीकृत अग्रिम चेतावनी प्रणाली’ स्थापित करने पर सहमति बनी है।

इसके अलावा, प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए अग्रिम चेतावनी से जुड़े डेटा को इकट्ठा करने और साझा करने के लिए दिशा-निर्देश भी तैयार किए गए हैं।
<h3>सामूहिक तस्वीर के साथ हुई सम्मेलन के दूसरे दिन की शुरुआत</h3>
सम्मेलन के दूसरे दिन की शुरुआत भारत मंडपम में सदस्य देशों के नेताओं की सामूहिक तस्वीर के साथ हुई। इस दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, प्रधानमंत्री मोदी के दोनों तरफ नजर आए।
<h3>PM मोदी करेंगे कई द्विपक्षीय बैठकें</h3>
आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल सात देशों के नेताओं के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। इससे पहले सम्मेलन के पहले दिन रात के खाने का भी आयोजन किया गया था।

इस दौरान चीनी राष्ट्रपति और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस के अलावा बाकी विश्व नेता डिनर में शामिल हुए। अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद सम्मेलन में शामिल होने के बाद अपने देश लौट गए। इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी सम्मेलन के बाद क्रमशः दिल्ली और भारत से रवाना हो चुके हैं।
<h3>ब्रिक्स में 11 देश शामिल</h3>
ब्रिक्स दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों का समूह है। मौजूदा समय में इसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और इंडोनेशिया शामिल हैं।

ब्रिक्स का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक सहयोग को मजबूत करना है। शुरुआत में इसमें ब्राजील, रूस, भारत और चीन शामिल थे और इसे ‘BRIC’ कहा जाता था। बाद में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद यह ‘BRICS’ बन गया।
<h3>‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज को मिल रही अहमियत</h3>
सम्मेलन के दौरान PM मोदी ने कहा कि ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों का ब्रिक्स में भरोसा बढ़ा है, क्योंकि इस मंच पर उनकी आवाज सुनी जाती है और उनके अनुभवों को अहमियत दी जाती है।

उन्होंने कहा कि ब्रिक्स की सबसे बड़ी ताकत इसके सदस्य देशों की विविधता और आपसी सहयोग में है।]]></content:encoded>
					
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		<title>Packaged Foods की Labelling में हो सकता है बड़ा बदलाव, 10 सितंबर को Supreme Court में अहम सुनवाई</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 08 Sep 2026 09:06:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[FoodIndustry]]></category>
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		<category><![CDATA[FoodSafety]]></category>
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		<category><![CDATA[SupremeCourt]]></category>
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					<description><![CDATA[भारत में Packaged Foods की labelling को लेकर बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया गया है। FSSAI ने ज्यादा Sugar, Salt और Saturated Fat वाले products के लिए packet के सामने Warning Label लगाने का प्रस्ताव रखा है। इस मामले में <strong>10 </strong><strong>सितंबर को Supreme Court </strong><strong>में अहम सुनवाई</strong> होने वाली है।

दरअसल, Food Safety and Standards Authority of India यानी <strong>FSSAI</strong> ने Packaged Foods के लिए <strong>Front-of-Pack Warning Label (FoPWL)</strong> का proposal दिया है। इसका मकसद consumers को किसी food product के बारे में जरूरी health information आसानी से देना है। यानी packet के पीछे दिए गए लंबे Nutrition Chart को पढ़े बिना ही ग्राहक को सामने से पता चल सके कि किसी product में Sugar, Salt या Saturated Fat की मात्रा ज्यादा है।

प्रस्ताव के तहत ऐसे products की packaging के सामने <strong>Red Hexagonal </strong><strong>यानी छह कोने वाला Warning Symbol</strong> लगाने की बात कही गई है। इसका मकसद यह है कि product खरीदते समय consumer की नजर सबसे पहले इस warning पर पड़े और वह ज्यादा Sugar, Salt या Saturated Fat वाले food को लेकर informed decision ले सके।

हालांकि, इस proposal को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि <strong>किस product </strong><strong>पर Warning Label </strong><strong>लगाया जाएगा।</strong> FSSAI ने इसे phased manner यानी अलग-अलग चरणों में लागू करने का proposal रखा है।

शुरुआती यानी <strong>पहले phase</strong> में किसी product पर Warning Label तब लगाया जाएगा, जब उसमें तीन में से कम से कम <strong>दो nutrients</strong> तय limit से ज्यादा हों। इनमें <strong>Added Sugar, Salt/Sodium </strong><strong>और Saturated Fat</strong> शामिल हैं।

इसे एक आसान example से समझें। अगर किसी food या drink में Sugar की मात्रा बहुत ज्यादा है, लेकिन उसमें Salt और Saturated Fat तय limit के अंदर हैं, तो शुरुआती phase में उस product पर Warning Label लगना जरूरी नहीं होगा।

<strong>Health Activists </strong><strong>इसी व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।</strong> उनका कहना है कि अगर किसी product में सिर्फ एक nutrient की मात्रा ही बहुत ज्यादा है, तो भी consumer को इसकी clear warning मिलनी चाहिए। उदाहरण के तौर पर अगर किसी drink में Sugar काफी ज्यादा है, तो सिर्फ इसलिए उसे warning से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए क्योंकि उसमें Salt और Saturated Fat कम हैं।

Health Groups चाहते हैं कि <strong>एक भी nutrient </strong><strong>तय limit </strong><strong>से ज्यादा होने पर Warning Label </strong><strong>लगाया जाए</strong>, ताकि consumers को product की सही जानकारी मिल सके और वे खरीदने से पहले बेहतर फैसला ले सकें।

FSSAI के proposal में बाद के phase में rules को और strict करने की बात कही गई है। <strong>दूसरे phase </strong><strong>में अगर किसी product </strong><strong>में एक भी nutrient </strong><strong>तय limit </strong><strong>से ज्यादा होता है, </strong><strong>तो उस पर संबंधित Warning Label </strong><strong>लगाने का proposal </strong><strong>है।</strong> हालांकि, दूसरा phase कब शुरू होगा और इसकी exact timeline क्या होगी, इसे लेकर सवाल अभी बने हुए हैं।

इसके अलावा <strong>Warning Label </strong><strong>के size </strong><strong>और font</strong> को लेकर भी concerns सामने आए हैं। Health Activists का कहना है कि सिर्फ warning लगा देना काफी नहीं है। Warning इतनी बड़ी और clear होनी चाहिए कि दुकान या supermarket में product खरीदते समय consumer उसे आसानी से देख सके।

अगर Warning Label बहुत छोटा हुआ या packaging के design में दब गया, तो consumer का ध्यान उस पर नहीं जाएगा और इस पूरी व्यवस्था का मकसद कमजोर पड़ सकता है।

इस पूरे मामले में <strong>“Added Sugar”</strong> भी एक अहम मुद्दा है। Health Activists चाहते हैं कि consumers को आसानी से समझ आए कि किसी product में अलग से कितनी Sugar डाली गई है और उसकी मात्रा कितनी है। वहीं Food Industry के लिए अलग-अलग products और ingredients पर nutritional limits लागू करना एक बड़ी regulatory challenge हो सकती है।

इस proposal का असर भारत की बड़ी <strong>Packaged Food Industry</strong> पर भी पड़ सकता है। Health Groups इसे public health के लिए जरूरी कदम मान रहे हैं, जबकि Food Industry को चिंता है कि अगर products पर Warning Labels लगाए जाते हैं, तो इससे consumers की perception और कुछ products की sales पर असर पड़ सकता है।

हालांकि, कई बड़ी Food Companies ने संकेत दिया है कि अगर सरकार final rules लागू करती है, तो वे <strong>इन rules </strong><strong>को comply </strong><strong>करने के लिए तैयार हैं।</strong>

प्रस्तावित Warning Label system का असर <strong>Chips, Namkeen, Biscuits, Cookies, Instant Noodles, Packaged Snacks, Sweetened Beverages </strong><strong>और कुछ Breakfast Cereals</strong> जैसे products पर पड़ सकता है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि हर Packaged Food के packet पर Red Warning Label लग जाएगा। यह product में मौजूद nutrients की मात्रा और सरकार द्वारा तय nutritional limits पर depend करेगा।

इस मामले में <strong>10 </strong><strong>सितंबर की Supreme Court hearing</strong> काफी अहम मानी जा रही है। इससे पहले <strong>13 </strong><strong>अगस्त 2026 </strong><strong>को Supreme Court </strong><strong>ने Centre </strong><strong>और FSSAI </strong><strong>की ओर से इस मामले में हो रही देरी पर नाराजगी जताई थी।</strong> अब अगली सुनवाई में proposed Warning Label system को लेकर आगे की स्थिति साफ हो सकती है।

यहां यह भी साफ करना जरूरी है कि <strong>Red Warning Labels </strong><strong>अभी पूरे देश में लागू नहीं हुए हैं।</strong> फिलहाल FSSAI का यह एक proposed system है और इसे लेकर आगे की प्रक्रिया चल रही है।

अब 10 सितंबर को होने वाली सुनवाई में यह देखना अहम होगा कि Supreme Court इस मामले में क्या निर्देश देता है और क्या सरकार के proposed rules में कोई बदलाव किया जाता है। अगर यह system final होकर लागू होता है, तो आने वाले समय में Packaged Food खरीदते वक्त consumers को <strong>Brand </strong><strong>और Price </strong><strong>के साथ-साथ packet </strong><strong>पर लगी Health Warning </strong><strong>पर भी ध्यान देना होगा।</strong>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[भारत में Packaged Foods की labelling को लेकर बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया गया है। FSSAI ने ज्यादा Sugar, Salt और Saturated Fat वाले products के लिए packet के सामने Warning Label लगाने का प्रस्ताव रखा है। इस मामले में <strong>10 </strong><strong>सितंबर को Supreme Court </strong><strong>में अहम सुनवाई</strong> होने वाली है।

दरअसल, Food Safety and Standards Authority of India यानी <strong>FSSAI</strong> ने Packaged Foods के लिए <strong>Front-of-Pack Warning Label (FoPWL)</strong> का proposal दिया है। इसका मकसद consumers को किसी food product के बारे में जरूरी health information आसानी से देना है। यानी packet के पीछे दिए गए लंबे Nutrition Chart को पढ़े बिना ही ग्राहक को सामने से पता चल सके कि किसी product में Sugar, Salt या Saturated Fat की मात्रा ज्यादा है।

प्रस्ताव के तहत ऐसे products की packaging के सामने <strong>Red Hexagonal </strong><strong>यानी छह कोने वाला Warning Symbol</strong> लगाने की बात कही गई है। इसका मकसद यह है कि product खरीदते समय consumer की नजर सबसे पहले इस warning पर पड़े और वह ज्यादा Sugar, Salt या Saturated Fat वाले food को लेकर informed decision ले सके।

हालांकि, इस proposal को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि <strong>किस product </strong><strong>पर Warning Label </strong><strong>लगाया जाएगा।</strong> FSSAI ने इसे phased manner यानी अलग-अलग चरणों में लागू करने का proposal रखा है।

शुरुआती यानी <strong>पहले phase</strong> में किसी product पर Warning Label तब लगाया जाएगा, जब उसमें तीन में से कम से कम <strong>दो nutrients</strong> तय limit से ज्यादा हों। इनमें <strong>Added Sugar, Salt/Sodium </strong><strong>और Saturated Fat</strong> शामिल हैं।

इसे एक आसान example से समझें। अगर किसी food या drink में Sugar की मात्रा बहुत ज्यादा है, लेकिन उसमें Salt और Saturated Fat तय limit के अंदर हैं, तो शुरुआती phase में उस product पर Warning Label लगना जरूरी नहीं होगा।

<strong>Health Activists </strong><strong>इसी व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।</strong> उनका कहना है कि अगर किसी product में सिर्फ एक nutrient की मात्रा ही बहुत ज्यादा है, तो भी consumer को इसकी clear warning मिलनी चाहिए। उदाहरण के तौर पर अगर किसी drink में Sugar काफी ज्यादा है, तो सिर्फ इसलिए उसे warning से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए क्योंकि उसमें Salt और Saturated Fat कम हैं।

Health Groups चाहते हैं कि <strong>एक भी nutrient </strong><strong>तय limit </strong><strong>से ज्यादा होने पर Warning Label </strong><strong>लगाया जाए</strong>, ताकि consumers को product की सही जानकारी मिल सके और वे खरीदने से पहले बेहतर फैसला ले सकें।

FSSAI के proposal में बाद के phase में rules को और strict करने की बात कही गई है। <strong>दूसरे phase </strong><strong>में अगर किसी product </strong><strong>में एक भी nutrient </strong><strong>तय limit </strong><strong>से ज्यादा होता है, </strong><strong>तो उस पर संबंधित Warning Label </strong><strong>लगाने का proposal </strong><strong>है।</strong> हालांकि, दूसरा phase कब शुरू होगा और इसकी exact timeline क्या होगी, इसे लेकर सवाल अभी बने हुए हैं।

इसके अलावा <strong>Warning Label </strong><strong>के size </strong><strong>और font</strong> को लेकर भी concerns सामने आए हैं। Health Activists का कहना है कि सिर्फ warning लगा देना काफी नहीं है। Warning इतनी बड़ी और clear होनी चाहिए कि दुकान या supermarket में product खरीदते समय consumer उसे आसानी से देख सके।

अगर Warning Label बहुत छोटा हुआ या packaging के design में दब गया, तो consumer का ध्यान उस पर नहीं जाएगा और इस पूरी व्यवस्था का मकसद कमजोर पड़ सकता है।

इस पूरे मामले में <strong>“Added Sugar”</strong> भी एक अहम मुद्दा है। Health Activists चाहते हैं कि consumers को आसानी से समझ आए कि किसी product में अलग से कितनी Sugar डाली गई है और उसकी मात्रा कितनी है। वहीं Food Industry के लिए अलग-अलग products और ingredients पर nutritional limits लागू करना एक बड़ी regulatory challenge हो सकती है।

इस proposal का असर भारत की बड़ी <strong>Packaged Food Industry</strong> पर भी पड़ सकता है। Health Groups इसे public health के लिए जरूरी कदम मान रहे हैं, जबकि Food Industry को चिंता है कि अगर products पर Warning Labels लगाए जाते हैं, तो इससे consumers की perception और कुछ products की sales पर असर पड़ सकता है।

हालांकि, कई बड़ी Food Companies ने संकेत दिया है कि अगर सरकार final rules लागू करती है, तो वे <strong>इन rules </strong><strong>को comply </strong><strong>करने के लिए तैयार हैं।</strong>

प्रस्तावित Warning Label system का असर <strong>Chips, Namkeen, Biscuits, Cookies, Instant Noodles, Packaged Snacks, Sweetened Beverages </strong><strong>और कुछ Breakfast Cereals</strong> जैसे products पर पड़ सकता है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि हर Packaged Food के packet पर Red Warning Label लग जाएगा। यह product में मौजूद nutrients की मात्रा और सरकार द्वारा तय nutritional limits पर depend करेगा।

इस मामले में <strong>10 </strong><strong>सितंबर की Supreme Court hearing</strong> काफी अहम मानी जा रही है। इससे पहले <strong>13 </strong><strong>अगस्त 2026 </strong><strong>को Supreme Court </strong><strong>ने Centre </strong><strong>और FSSAI </strong><strong>की ओर से इस मामले में हो रही देरी पर नाराजगी जताई थी।</strong> अब अगली सुनवाई में proposed Warning Label system को लेकर आगे की स्थिति साफ हो सकती है।

यहां यह भी साफ करना जरूरी है कि <strong>Red Warning Labels </strong><strong>अभी पूरे देश में लागू नहीं हुए हैं।</strong> फिलहाल FSSAI का यह एक proposed system है और इसे लेकर आगे की प्रक्रिया चल रही है।

अब 10 सितंबर को होने वाली सुनवाई में यह देखना अहम होगा कि Supreme Court इस मामले में क्या निर्देश देता है और क्या सरकार के proposed rules में कोई बदलाव किया जाता है। अगर यह system final होकर लागू होता है, तो आने वाले समय में Packaged Food खरीदते वक्त consumers को <strong>Brand </strong><strong>और Price </strong><strong>के साथ-साथ packet </strong><strong>पर लगी Health Warning </strong><strong>पर भी ध्यान देना होगा।</strong>]]></content:encoded>
					
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		<title>दिल्ली में इमारत गिरने का मामला: मलबे में अभी भी कई लोगों के दबे होने की आशंका</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 07 Sep 2026 05:56:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[BreakingNews]]></category>
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		<category><![CDATA[NDRF]]></category>
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		<category><![CDATA[RescueTeam]]></category>
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					<description><![CDATA[दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर गिरी इमारत के मलबे को हटाने का काम अभी भी जारी है। इस हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 12 लोगों को रेस्क्यू किया गया है। हादसे में गंभीर रूप से घायल 5 लोगों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। मलबे के नीचे अभी भी कुछ लोगों के फंसे होने की आशंका है, जिसके कारण रेस्क्यू टीमों की ओर से लगातार तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। लोगों की तलाश के लिए रेस्क्यू डॉग्स और कैमरों की मदद ली जा रही है।

जानकारी के मुताबिक यह हादसा दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन में रविवार करीब 1:30 बजे हुआ। हादसे का शिकार हुई इमारत करीब 40 साल पुरानी बताई जा रही है। हालांकि दिल्ली नगर निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक इस इमारत को खतरनाक घोषित नहीं किया गया था।

स्थानीय लोगों के मुताबिक इमारत की बेसमेंट में पिछले करीब 7 दिनों से तोड़-फोड़ और निर्माण से जुड़ा काम चल रहा था। बेसमेंट पहले से ही कमजोर होने के साथ-साथ पानी से भरी हुई थी। बताया जा रहा है कि खुदाई के दौरान एक पिलर खिसकने के कारण इमारत का ढांचा गिर गया और हादसे के समय वहां काम कर रहे मजदूर भी मलबे के नीचे आ गए।

हादसे के बाद इमारत के साथ लगी दूसरी बिल्डिंग को भी खाली करवा लिया गया है। इस इमारत में भी दरारें सामने आई हैं। रेस्क्यू टीमों के मुताबिक मलबा हटाने के दौरान इस इमारत को भी नुकसान पहुंचने का खतरा है। सुरक्षा के मद्देनजर इसे सहारा देने के लिए स्पोर्टिंग पिलर लगाए जा रहे हैं।

वहीं पुलिस ने इमारत के मालिक के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या और लापरवाही समेत अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। दिल्ली की मेयर प्रवेश वाही ने कहा है कि चार मंजिल से अधिक ऊंची सभी गैर-कानूनी इमारतों को तुरंत सील किया जाएगा और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

इसके अलावा दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। वहीं 6 सितंबर को जारी किए गए MCD के आदेश के तहत सत्य निकेतन इलाके में कमजोर और खतरनाक इमारतों की पहचान करके उन्हें गिराने से संबंधित नोटिस जारी किए गए हैं।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर गिरी इमारत के मलबे को हटाने का काम अभी भी जारी है। इस हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 12 लोगों को रेस्क्यू किया गया है। हादसे में गंभीर रूप से घायल 5 लोगों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। मलबे के नीचे अभी भी कुछ लोगों के फंसे होने की आशंका है, जिसके कारण रेस्क्यू टीमों की ओर से लगातार तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। लोगों की तलाश के लिए रेस्क्यू डॉग्स और कैमरों की मदद ली जा रही है।

जानकारी के मुताबिक यह हादसा दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन में रविवार करीब 1:30 बजे हुआ। हादसे का शिकार हुई इमारत करीब 40 साल पुरानी बताई जा रही है। हालांकि दिल्ली नगर निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक इस इमारत को खतरनाक घोषित नहीं किया गया था।

स्थानीय लोगों के मुताबिक इमारत की बेसमेंट में पिछले करीब 7 दिनों से तोड़-फोड़ और निर्माण से जुड़ा काम चल रहा था। बेसमेंट पहले से ही कमजोर होने के साथ-साथ पानी से भरी हुई थी। बताया जा रहा है कि खुदाई के दौरान एक पिलर खिसकने के कारण इमारत का ढांचा गिर गया और हादसे के समय वहां काम कर रहे मजदूर भी मलबे के नीचे आ गए।

हादसे के बाद इमारत के साथ लगी दूसरी बिल्डिंग को भी खाली करवा लिया गया है। इस इमारत में भी दरारें सामने आई हैं। रेस्क्यू टीमों के मुताबिक मलबा हटाने के दौरान इस इमारत को भी नुकसान पहुंचने का खतरा है। सुरक्षा के मद्देनजर इसे सहारा देने के लिए स्पोर्टिंग पिलर लगाए जा रहे हैं।

वहीं पुलिस ने इमारत के मालिक के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या और लापरवाही समेत अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। दिल्ली की मेयर प्रवेश वाही ने कहा है कि चार मंजिल से अधिक ऊंची सभी गैर-कानूनी इमारतों को तुरंत सील किया जाएगा और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

इसके अलावा दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। वहीं 6 सितंबर को जारी किए गए MCD के आदेश के तहत सत्य निकेतन इलाके में कमजोर और खतरनाक इमारतों की पहचान करके उन्हें गिराने से संबंधित नोटिस जारी किए गए हैं।]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>Mahatma Gandhi की समाधि पर जाकर केजरीवाल और मनीष सिसोदिया हुए नतमस्तक, सत्याग्रह के मार्ग पर डटे रहने की मांगी शक्ति</title>
		<link>https://trendstopic.in/kejriwal-and-manish-sisodia-bowed-down-after-visiting-mahatma-gandhis-samadhi-sought-strength-to-remain-firm-on-the-path-of-satyagraha/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 05:35:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[news]]></category>
		<category><![CDATA[NewsUpdate]]></category>
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					<description><![CDATA[<span lang="HI">आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और वरिष्ठ नेता व पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया मंगलवार को राजघाट पहुंच कर महात्मा गांधी की समाधि पर नतमस्तक हुए। उनके साथ पार्टी के विधायक और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता भी मौजूद थे। उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ सत्याग्रह की राह दिखाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को नमन करते हुए सत्याग्रह के मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया। इस दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हम न्यायपालिका का बहुत सम्मान करते हैं</span>, <span lang="HI">लेकिन कुछ ऐसी परिस्थितियां पैदा हुई हैं कि हमें यह सत्याग्रह करना पड़ रहा है। मेरा अटूट विश्वास है कि बापू के आशीर्वाद से सत्याग्रह के इस कठिन पथ पर हम पूर्ण निष्ठा के साथ अडिग रहेंगे।</span>

&nbsp;

<span lang="HI">अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर कहा कि आज मनीष सिसोदिया और अन्य साथियों के साथ राजघाट पहुंच कर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को नमन किया। मेरी बापू से यही प्रार्थना है कि उनके दिखाए ‘सत्याग्रह’ के मार्ग पर चलने के हमारे संकल्प को वे सदैव शक्ति दें। मेरा अटूट विश्वास है कि बापू के आशीर्वाद से</span>, <span lang="HI">सत्याग्रह के इस कठिन पथ पर हम पूर्ण निष्ठा के साथ अडिग रहेंगे।</span>

&nbsp;

<span lang="HI">वहीं</span>, <span lang="HI">मीडिया से बातचीत के दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मामला अदालत का है। हम अदालत का बहुत सम्मान करते हैं। हम अपने देश की न्याय प्रणाली का बहुत सम्मान करते हैं</span>, <span lang="HI">क्योंकि इसी न्याय प्रणाली और न्यायपालिका ने हमें बेल दिलवाई और आरोप मुक्त किया है। आज हम लोग अगर आजाद घूम रहे हैं</span>, <span lang="HI">तो हमारी न्याय प्रणाली की वजह से ही घूम रहे हैं। लेकिन कुछ ऐसी परिस्थितियां पैदा हुई हैं</span>, <span lang="HI">जिनकी वजह से हमें यह सत्याग्रह करना पड़ रहा है। वे सभी हमने जज साहिबा को लिखी चिट्ठी में बयां कर दिए हैं।</span>

&nbsp;

<span lang="HI">उधर</span>, ‘‘<span lang="HI">आप’’ के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बापू समाधि पर नतमस्तक होने के बाद एक्स पर कहा कि मंगलवार को राजघाट जाकर पूज्य बापू की समाधि पर अरविंद केजरीवाल के साथ नतमस्तक हुआ। महात्मा गांधी जी ने हमें हमेशा सत्य के रास्ते पर अडिग रहने और सत्य के लिए आत्मबल के साथ सत्याग्रह करने की प्रेरणा दी है। आज उसी मार्ग पर चलने का संकल्प और मजबूत हुआ।</span>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<span lang="HI">आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और वरिष्ठ नेता व पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया मंगलवार को राजघाट पहुंच कर महात्मा गांधी की समाधि पर नतमस्तक हुए। उनके साथ पार्टी के विधायक और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता भी मौजूद थे। उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ सत्याग्रह की राह दिखाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को नमन करते हुए सत्याग्रह के मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया। इस दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हम न्यायपालिका का बहुत सम्मान करते हैं</span>, <span lang="HI">लेकिन कुछ ऐसी परिस्थितियां पैदा हुई हैं कि हमें यह सत्याग्रह करना पड़ रहा है। मेरा अटूट विश्वास है कि बापू के आशीर्वाद से सत्याग्रह के इस कठिन पथ पर हम पूर्ण निष्ठा के साथ अडिग रहेंगे।</span>

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<span lang="HI">अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर कहा कि आज मनीष सिसोदिया और अन्य साथियों के साथ राजघाट पहुंच कर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को नमन किया। मेरी बापू से यही प्रार्थना है कि उनके दिखाए ‘सत्याग्रह’ के मार्ग पर चलने के हमारे संकल्प को वे सदैव शक्ति दें। मेरा अटूट विश्वास है कि बापू के आशीर्वाद से</span>, <span lang="HI">सत्याग्रह के इस कठिन पथ पर हम पूर्ण निष्ठा के साथ अडिग रहेंगे।</span>

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<span lang="HI">वहीं</span>, <span lang="HI">मीडिया से बातचीत के दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मामला अदालत का है। हम अदालत का बहुत सम्मान करते हैं। हम अपने देश की न्याय प्रणाली का बहुत सम्मान करते हैं</span>, <span lang="HI">क्योंकि इसी न्याय प्रणाली और न्यायपालिका ने हमें बेल दिलवाई और आरोप मुक्त किया है। आज हम लोग अगर आजाद घूम रहे हैं</span>, <span lang="HI">तो हमारी न्याय प्रणाली की वजह से ही घूम रहे हैं। लेकिन कुछ ऐसी परिस्थितियां पैदा हुई हैं</span>, <span lang="HI">जिनकी वजह से हमें यह सत्याग्रह करना पड़ रहा है। वे सभी हमने जज साहिबा को लिखी चिट्ठी में बयां कर दिए हैं।</span>

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<span lang="HI">उधर</span>, ‘‘<span lang="HI">आप’’ के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बापू समाधि पर नतमस्तक होने के बाद एक्स पर कहा कि मंगलवार को राजघाट जाकर पूज्य बापू की समाधि पर अरविंद केजरीवाल के साथ नतमस्तक हुआ। महात्मा गांधी जी ने हमें हमेशा सत्य के रास्ते पर अडिग रहने और सत्य के लिए आत्मबल के साथ सत्याग्रह करने की प्रेरणा दी है। आज उसी मार्ग पर चलने का संकल्प और मजबूत हुआ।</span>]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>केजरीवाल की एफिडेविट में उठाए गए प्रमुख तथ्यों में से किसी पर भी CBI को आपत्ति नहीं: आप</title>
		<link>https://trendstopic.in/cbi-has-no-objection-to-any-of-the-key-facts-raised-in-kejriwals-affidavit-aap/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 06:00:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[AamAadmiParty]]></category>
		<category><![CDATA[arvind kejriwal]]></category>
		<category><![CDATA[news]]></category>
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					<description><![CDATA[<div>

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने तथाकथित शराब नीति मामले में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल द्वारा अपनी रिक्यूजल अर्जी के तहत दाखिल किए गए नए हलफनामे पर दिल्ली हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया है। अपने जवाब में, सीबीआई ने अरविंद केजरीवाल द्वारा रिकॉर्ड पर रखे गए किसी भी प्रमुख तथ्य का खंडन नहीं किया है, फिर भी उसका दावा है कि इसमें हितों का कोई टकराव नहीं है।

&nbsp;

अरविंद केजरीवाल ने इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट के समक्ष पेश होकर एक अतिरिक्त हलफनामा दायर किया था, जिसमें बताया गया था कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के दोनों बच्चे केंद्र सरकार के पैनल में शामिल हैं। हलफनामे में यह भी कहा गया था कि भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, जो इस मामले में सीबीआई की तरफ से पेश होते हैं, उन्हें ऐसे मामले सौंपते हैं जिनके लिए उन्हें फीस मिलती है। इसमें आगे कहा गया कि 2022 में पैनल में शामिल होने के बाद से बेटे को 5,500 से अधिक मामले आवंटित किए गए हैं, जो एक युवा वकील के लिए असाधारण रूप से बड़ी संख्या है और पैनल में शामिल होना और मामलों का यह आवंटन माननीय न्यायाधीश के हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में कार्यकाल के दौरान ही हुआ है। हलफनामे में कहा गया है कि ये तथ्य किसी भी वादी के मन में पक्षपात की उचित आशंका पैदा करते हैं।

&nbsp;

अपने जवाब में सीबीआई ने इस बात से इनकार नहीं किया है कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के दोनों बच्चे केंद्र सरकार के पैनल में शामिल हैं। उसने इस बात का भी खंडन नहीं किया है कि भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, जो इस मामले में सीबीआई के लिए पेश होते हैं, उन्हें फीस वाले मामले सौंपते हैं। सीबीआई ने आगे इस बात से भी इनकार नहीं किया है कि 2022 में पैनल में शामिल होने के बाद से बेटे को 5,500 से अधिक मामले आवंटित किए गए हैं, जो एक युवा वकील के लिए असाधारण रूप से बड़ी संख्या है। उसने इस बात का भी खंडन नहीं किया है कि पैनल में यह नियुक्ति और मुकदमों का यह आवंटन माननीय न्यायाधीश के हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में कार्यकाल के दौरान ही हुआ है। अगर यह हितों का टकराव नहीं है, तो फिर क्या है?

&nbsp;

सीबीआई का कहना है कि यह हितों का टकराव नहीं है। क्या देश में इसी तरह से काम होता है? ये कोई कोरी चिंताएं नहीं हैं। ये रिकॉर्ड पर मौजूद स्पष्ट तथ्य हैं जो निष्पक्षता और संस्थागत ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

&nbsp;

सीबीआई ने आगे यह तर्क दिया है कि इस लॉजिक को स्वीकार करने का मतलब यह होगा कि जिन जजों के रिश्तेदार सरकारों या पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (पीएसयू) के पैनल में शामिल हैं, उन्हें ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। यह ध्यान भटकाने की कोशिश है। मुद्दा पैनल में शामिल होना नहीं है। मुद्दा यह है कि मामले में पेश हो रहे वही सॉलिसिटर जनरल जज के निकटतम परिवार को हजारों फीस वाले मामले आवंटित कर रहे हैं।

&nbsp;

यह सभी जजों के बारे में नहीं है। यह विशिष्ट और निर्विवाद तथ्यों वाले एक मामले के बारे में है। जब केस में बहस करने वाले एक ही कानून अधिकारी द्वारा 5,500 से अधिक मामले आवंटित किए जाते हैं, तो यह कोई रूटीन काम नहीं है। इसे सामान्य कहना गंभीर सवाल खड़े करता है।

</div>
<img class="CToWUd" src="https://ci3.googleusercontent.com/meips/ADKq_NaVdpToljnG0q-qNHcNAKiaHTTkbB8jtCc4lmD8IVHTbZteJZLmsic53Cm3asiRWwjVmjRCcC4Fs-QkiN-6H2dX_b10rGN5myITqNqAQWf1VB1NXGiZGPkdXVE87Jdh7W1WWglWCKYdeAmYxmE=s0-d-e1-ft#https://mailer2.aamaadmiparty.org/sendy/t/lCxTmUlDgdfrYq5rVztOqg/Z7tAn7ESdEJ4J4wFG5p73w" alt="" data-bit="iit" />]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div>

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने तथाकथित शराब नीति मामले में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल द्वारा अपनी रिक्यूजल अर्जी के तहत दाखिल किए गए नए हलफनामे पर दिल्ली हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया है। अपने जवाब में, सीबीआई ने अरविंद केजरीवाल द्वारा रिकॉर्ड पर रखे गए किसी भी प्रमुख तथ्य का खंडन नहीं किया है, फिर भी उसका दावा है कि इसमें हितों का कोई टकराव नहीं है।

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अरविंद केजरीवाल ने इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट के समक्ष पेश होकर एक अतिरिक्त हलफनामा दायर किया था, जिसमें बताया गया था कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के दोनों बच्चे केंद्र सरकार के पैनल में शामिल हैं। हलफनामे में यह भी कहा गया था कि भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, जो इस मामले में सीबीआई की तरफ से पेश होते हैं, उन्हें ऐसे मामले सौंपते हैं जिनके लिए उन्हें फीस मिलती है। इसमें आगे कहा गया कि 2022 में पैनल में शामिल होने के बाद से बेटे को 5,500 से अधिक मामले आवंटित किए गए हैं, जो एक युवा वकील के लिए असाधारण रूप से बड़ी संख्या है और पैनल में शामिल होना और मामलों का यह आवंटन माननीय न्यायाधीश के हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में कार्यकाल के दौरान ही हुआ है। हलफनामे में कहा गया है कि ये तथ्य किसी भी वादी के मन में पक्षपात की उचित आशंका पैदा करते हैं।

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अपने जवाब में सीबीआई ने इस बात से इनकार नहीं किया है कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के दोनों बच्चे केंद्र सरकार के पैनल में शामिल हैं। उसने इस बात का भी खंडन नहीं किया है कि भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, जो इस मामले में सीबीआई के लिए पेश होते हैं, उन्हें फीस वाले मामले सौंपते हैं। सीबीआई ने आगे इस बात से भी इनकार नहीं किया है कि 2022 में पैनल में शामिल होने के बाद से बेटे को 5,500 से अधिक मामले आवंटित किए गए हैं, जो एक युवा वकील के लिए असाधारण रूप से बड़ी संख्या है। उसने इस बात का भी खंडन नहीं किया है कि पैनल में यह नियुक्ति और मुकदमों का यह आवंटन माननीय न्यायाधीश के हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में कार्यकाल के दौरान ही हुआ है। अगर यह हितों का टकराव नहीं है, तो फिर क्या है?

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सीबीआई का कहना है कि यह हितों का टकराव नहीं है। क्या देश में इसी तरह से काम होता है? ये कोई कोरी चिंताएं नहीं हैं। ये रिकॉर्ड पर मौजूद स्पष्ट तथ्य हैं जो निष्पक्षता और संस्थागत ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

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सीबीआई ने आगे यह तर्क दिया है कि इस लॉजिक को स्वीकार करने का मतलब यह होगा कि जिन जजों के रिश्तेदार सरकारों या पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (पीएसयू) के पैनल में शामिल हैं, उन्हें ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। यह ध्यान भटकाने की कोशिश है। मुद्दा पैनल में शामिल होना नहीं है। मुद्दा यह है कि मामले में पेश हो रहे वही सॉलिसिटर जनरल जज के निकटतम परिवार को हजारों फीस वाले मामले आवंटित कर रहे हैं।

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यह सभी जजों के बारे में नहीं है। यह विशिष्ट और निर्विवाद तथ्यों वाले एक मामले के बारे में है। जब केस में बहस करने वाले एक ही कानून अधिकारी द्वारा 5,500 से अधिक मामले आवंटित किए जाते हैं, तो यह कोई रूटीन काम नहीं है। इसे सामान्य कहना गंभीर सवाल खड़े करता है।

</div>
<img class="CToWUd" src="https://ci3.googleusercontent.com/meips/ADKq_NaVdpToljnG0q-qNHcNAKiaHTTkbB8jtCc4lmD8IVHTbZteJZLmsic53Cm3asiRWwjVmjRCcC4Fs-QkiN-6H2dX_b10rGN5myITqNqAQWf1VB1NXGiZGPkdXVE87Jdh7W1WWglWCKYdeAmYxmE=s0-d-e1-ft#https://mailer2.aamaadmiparty.org/sendy/t/lCxTmUlDgdfrYq5rVztOqg/Z7tAn7ESdEJ4J4wFG5p73w" alt="" data-bit="iit" />]]></content:encoded>
					
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	</item>
		<item>
		<title>पंजाब को नशा मुक्त बनाने के लिए विधायक पूरी ज़िम्मेदारी लें और हर गांव की रोज़ की जवाबदेही सुनिश्चित करें:  Manish Sisodia</title>
		<link>https://trendstopic.in/to-make-punjab-drug-free-mlas-should-take-full-responsibility-and-ensure-daily-accountability-of-every-village-manish-sisodia/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 21 Mar 2026 05:06:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[AamAadmiParty]]></category>
		<category><![CDATA[news]]></category>
		<category><![CDATA[punjab]]></category>
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					<description><![CDATA[<span lang="HI">आम आदमी पार्टी (आप) के पंजाब प्रभारी और दिल्ली के पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने अमृतसर में </span>'<span lang="HI">युद्ध नशेआं विरुद्ध</span>' <span lang="HI">मुहिम के तहत पार्टी नेताओं</span>, <span lang="HI">विधायकों</span>, <span lang="HI">ब्लॉक इंचार्ज और पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि पंजाब को नशा मुक्त बनाने के लिए विधायकों को पूरी जिम्मेदारी लेनी होगी और हर गांव की रोजाना जवाबदेही पक्की करनी होगी। उन्होंने पूरे पंजाब में नशे के खिलाफ एक मजबूत और मिशन-मोड लड़ाई की अपील की</span>, <span lang="HI">और इस बात पर जोर दिया कि </span>'<span lang="HI">आप</span>' <span lang="HI">की नींव संघर्ष और कुर्बानी में है</span>, <span lang="HI">न कि पावर या सुविधाओं में।</span>

&nbsp;

<span lang="HI">भारी सभा को संबोधित करते हुए</span>, <span lang="HI">आप के सीनियर नेता मनीष सिसोदिया ने कहा</span>, "<span lang="HI">आम आदमी पार्टी जंतर-मंतर पर अरविंद केजरीवाल जी</span>, <span lang="HI">हम सभी और आप में से कई लोगों के सहयोग से </span>14<span lang="HI"> दिन की भूख हड़ताल से निकली है। यह पार्टी सत्ता का आनंद लेने या विधायक मंत्री बनने के लिए ड्राइंग रूम में नहीं बनी। यह संघर्ष से पैदा हुई पार्टी है और हमने कभी हिम्मत नहीं हारी है।"</span>

&nbsp;

<span lang="HI">दिल्ली सरकार के सामने आई चुनौतियों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली में सरकार बनने के बाद पहला हमला केंद्र सरकार द्वारा किया। जब अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री बने</span>, <span lang="HI">तो हमने तहसीलदार से लेकर एसडीएम तक</span>, <span lang="HI">सभी लेवल पर भ्रष्टाचार के खिलाफ </span>'<span lang="HI">ज़ीरो टॉलरेंस</span>' <span lang="HI">की पॉलिसी अपनाई। केंद्र को खतरा महसूस हुआ और उसने दिल्ली सरकार से एंटी-करप्शन ब्रांच (एसीबी) छीन ली। बाद में आईएएस अधिकारियों से लेकर शिक्षकों और सेवादारों तक के ट्रांसफर की पावर भी छीन ली गई। सभी पावर छीन लेने के बावजूद</span>, <span lang="HI">हमने काम करना जारी रखा और नतीजे दिए।</span>

&nbsp;

<span lang="HI">उन्होंने आगे कहा कि सत्ता जाने के बाद भी</span>, <span lang="HI">हमने ऐसे स्कूल और अस्पताल बनाए जो भारत में पहले कभी नहीं देखे गए। हमने बिजली और पानी पर ऐसी नीतियां लागू कीं जो एक मिसाल बन गईं। अरविंद केजरीवाल कह सकते थे कि वह शक्तियों के बिना काम नहीं कर सकते</span>, <span lang="HI">लेकिन उन्होंने करके दिखाया। यही वजह है कि दिल्ली के लोगों ने उन्हें </span>2020<span lang="HI"> में </span>70<span lang="HI"> में से </span>62<span lang="HI"> सीटें दीं।"</span>

&nbsp;

<span lang="HI">आप नेताओं को राजनीति तौर पर निशाना बनाने के बारे में मनीष सिसोदिया ने कहा कि ईमानदारी की इस इमेज को तोड़ने के लिए नरेंद्र मोदी जी ने अरविंद केजरीवाल को भ्रष्ट साबित करने की कोशिश की। सत्येंद्र जैन को झूठे केस में गिरफ्तार किया गया। मुझ पर भी कथित शराब घोटाले का आरोप लगाया गया। पहले उन्होंने </span>10,000<span lang="HI"> करोड़ कहा</span>, <span lang="HI">फिर </span>1,000<span lang="HI"> करोड़</span>, <span lang="HI">फिर </span>100<span lang="HI"> करोड़ और कोर्ट में यह ज़ीरो हो गया। कोर्ट ने कहा कि कोई केस नहीं है।</span>

&nbsp;

<span lang="HI">हिम्मत बनाए रखने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि आपमें हिम्मत होनी चाहिए। यह एक दिन की लड़ाई नहीं है। यह एक लंबी लड़ाई है। आप गुरुओं और शहीदों की धरती पर पैदा हुए हैं। आपको वहीं से ताकत लेनी चाहिए। आज हम अपने लिए नहीं बल्कि अपने बच्चों के लिए लड़ रहे हैं। क्या आप गारंटी दे सकते हैं कि </span>10<span lang="HI"> साल बाद आपका बच्चा नशे में नहीं पड़ेगा</span>? <span lang="HI">गारंटी बस यही है कि हम सब मिलकर पंजाब को नशा मुक्त बनाएं।</span>

&nbsp;

<span lang="HI">विधायकों और लोकल लीडरशिप को सीधे संबोधित करते हुए पंजाब आप प्रभारी ने कहा कि अगर एक भी गांव या एक भी वार्ड में नशा बिक रहा है</span>, <span lang="HI">तो आपको नींद नहीं आनी चाहिए। कोई विधायक अपने ब्लॉक इंचार्ज को फोन करके क्यों नहीं पूछता कि क्या हो रहा है</span>? <span lang="HI">विधायक खुद गांव क्यों नहीं जाता</span>? <span lang="HI">ज़िम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता।</span>

&nbsp;

<span lang="HI">उन्होंने जवाबदेही और तालमेल की अहमियत पर जोर देते हुए कहा</span>, "24<span lang="HI"> मार्च से </span>31<span lang="HI"> मार्च तक सभी ब्लॉकों में मीटिंगें की जाएंगी। हर </span>VDC <span lang="HI">रिपोर्ट देगी कि उनका गांव नशा मुक्त है या नहीं और किस हद तक नशा अभी भी बाकी है। अगर नशा बिक रहा है तो जिम्मेदार व्यक्ति की पहचान होनी चाहिए। विधायक और हलका इंचार्ज ब्लॉक इंचार्जों का पूरा साथ दें।"</span>

&nbsp;

<span lang="HI">इस मुहिम के सामूहिक स्वरूप के बारे में उन्होंने कहा</span>, "<span lang="HI">पंजाब में पहली बार सरकार</span>, <span lang="HI">पुलिस और जनता </span>'<span lang="HI">नशों के खिलाफ जंग</span>' <span lang="HI">जैसी मुहिम में ईमानदारी से मिलकर काम कर रहे हैं। पहले ऐसा समय था जब मंत्री भी नशा तस्करी में शामिल होते थे और माफिया की बजाय ईमानदार अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जाती थी। आज अरविंद केजरीवाल जी और मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की स्पष्ट हिदायत है कि नशों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।"</span>

&nbsp;

<span lang="HI">उन्होंने </span>'<span lang="HI">आप</span>' <span lang="HI">की </span>'<span lang="HI">जीरो टॉलरेंस</span>' <span lang="HI">नीति को दोहराते हुए कहा</span>, "<span lang="HI">अगर </span>'<span lang="HI">आप</span>' <span lang="HI">का कोई दूर का कार्यकर्ता भी नशा तस्करी से जुड़ा पाया जाता है या नशा तस्करों से उसके संबंध पाए जाते हैं</span>, <span lang="HI">तो उसे जेल भेजा जाना चाहिए। पार्टी और शासन दोनों में जीरो टॉलरेंस लागू होनी चाहिए।"</span>

&nbsp;

<span lang="HI">मनीष सिसोदिया ने शिकायतों के लिए गोपनीय रिपोर्टिंग प्रणाली के बारे में बताते हुए कहा</span>, "<span lang="HI">शिकायतों के लिए तैयार की गई ऐप पूरी तरह गोपनीयता सुनिश्चित करती है। यहां तक कि मंत्री</span>, <span lang="HI">कमिश्नर या मुख्यमंत्री को भी यह पता नहीं चल सकता कि जानकारी किसने दी है। सिर्फ की गई कार्रवाई को ही ट्रैक किया जा सकता है। इसलिए लोग निडर होकर रिपोर्ट करें।"</span>

&nbsp;

<span lang="HI">भावुक अपील करते हुए उन्होंने कहा</span>, "<span lang="HI">अगर हम पंजाब के हर गांव और शहर को नशा मुक्त नहीं कर सकते</span>, <span lang="HI">तो हमारा राजनीति में होना बेमानी है। अरविंद केजरीवाल इस बारे में बहुत गंभीर हैं और कहते हैं कि अगर हम असफल रहे तो हमें शर्म महसूस करनी चाहिए।"</span>

&nbsp;

<span lang="HI">उन्होंने पंजाब की आध्यात्मिक और क्रांतिकारी विरासत का हवाला देते हुए कहा</span>, "<span lang="HI">यह गुरु साहिबान की</span>, <span lang="HI">सेवा और हिम्मत की धरती है। यह शहीद-ए-आजम भगत सिंह</span>, <span lang="HI">ऊधम सिंह</span>, <span lang="HI">करतार सिंह सराभा और मदन लाल ढींगरा की धरती है। उनसे प्रेरणा लो। अगर शहीद-ए-आजम भगत सिंह हिचकिचाते तो आज हम कहां होते</span>? <span lang="HI">अगर जरूरत पड़े तो नशा तस्करों को </span>40<span lang="HI"> बार जेल भेजो</span>, <span lang="HI">लेकिन रुको मत।"</span>

&nbsp;

<span lang="HI">पार्टी नेताओं को सख्त संदेश देते हुए उन्होंने कहा</span>, "<span lang="HI">अगर आपमें नशा माफिया से टक्कर लेने की हिम्मत नहीं है</span>, <span lang="HI">तो अरविंद केजरीवाल को शर्मिंदा मत करो। पार्टी छोड़ दो। यह पार्टी लड़ने के लिए बनी है।"</span>

&nbsp;

<span lang="HI">अपना निजी अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा</span>, "CBI <span lang="HI">ने मेरे घर छापा मारा</span>, <span lang="HI">अलमारियां खंगालीं</span>, <span lang="HI">यहां तक कि पैसों की तलाश में तकिए भी फाड़ दिए। मैंने तीन साल तक झूठे आरोपों का बोझ उठाया। मुझसे पार्टी छोड़ने और विधायकों को तोड़ने के लिए कहा गया। लेकिन अरविंद केजरीवाल को छोड़ने का मतलब है ईमानदारी और शिक्षा के जरिए राष्ट्र निर्माण के सपने को छोड़ना। मैंने नहीं छोड़ा और आपको भी नहीं छोड़ना चाहिए।"</span>

&nbsp;

<span lang="HI">भविष्य की रणनीति की बात करते हुए मनीष सिसोदिया ने कहा कि </span>31<span lang="HI"> मार्च के बाद वह गांव-गांव की प्रगति का जायजा लेने के लिए निजी तौर पर ब्लॉक इंचार्जों और विधायकों से मिलेंगे। हर हलके को यह डेटा पेश करना होगा कि कितने गांव नशा मुक्त हो गए हैं और नशों को पूरी तरह खत्म करने के लिए समय-सीमा तय करनी होगी। यह लड़ाई सिर्फ लड़नी ही नहीं</span>, <span lang="HI">बल्कि जीतनी भी है।</span>

&nbsp;

<span lang="HI">उन्होंने भरोसा जताया कि पूरी टीम नए इरादे के साथ लौटेगी और सामूहिक कोशिशों तथा दृढ़ संकल्प के साथ नशा मुक्त पंजाब का निर्माण करेगी।</span>

&nbsp;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<span lang="HI">आम आदमी पार्टी (आप) के पंजाब प्रभारी और दिल्ली के पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने अमृतसर में </span>'<span lang="HI">युद्ध नशेआं विरुद्ध</span>' <span lang="HI">मुहिम के तहत पार्टी नेताओं</span>, <span lang="HI">विधायकों</span>, <span lang="HI">ब्लॉक इंचार्ज और पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि पंजाब को नशा मुक्त बनाने के लिए विधायकों को पूरी जिम्मेदारी लेनी होगी और हर गांव की रोजाना जवाबदेही पक्की करनी होगी। उन्होंने पूरे पंजाब में नशे के खिलाफ एक मजबूत और मिशन-मोड लड़ाई की अपील की</span>, <span lang="HI">और इस बात पर जोर दिया कि </span>'<span lang="HI">आप</span>' <span lang="HI">की नींव संघर्ष और कुर्बानी में है</span>, <span lang="HI">न कि पावर या सुविधाओं में।</span>

&nbsp;

<span lang="HI">भारी सभा को संबोधित करते हुए</span>, <span lang="HI">आप के सीनियर नेता मनीष सिसोदिया ने कहा</span>, "<span lang="HI">आम आदमी पार्टी जंतर-मंतर पर अरविंद केजरीवाल जी</span>, <span lang="HI">हम सभी और आप में से कई लोगों के सहयोग से </span>14<span lang="HI"> दिन की भूख हड़ताल से निकली है। यह पार्टी सत्ता का आनंद लेने या विधायक मंत्री बनने के लिए ड्राइंग रूम में नहीं बनी। यह संघर्ष से पैदा हुई पार्टी है और हमने कभी हिम्मत नहीं हारी है।"</span>

&nbsp;

<span lang="HI">दिल्ली सरकार के सामने आई चुनौतियों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली में सरकार बनने के बाद पहला हमला केंद्र सरकार द्वारा किया। जब अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री बने</span>, <span lang="HI">तो हमने तहसीलदार से लेकर एसडीएम तक</span>, <span lang="HI">सभी लेवल पर भ्रष्टाचार के खिलाफ </span>'<span lang="HI">ज़ीरो टॉलरेंस</span>' <span lang="HI">की पॉलिसी अपनाई। केंद्र को खतरा महसूस हुआ और उसने दिल्ली सरकार से एंटी-करप्शन ब्रांच (एसीबी) छीन ली। बाद में आईएएस अधिकारियों से लेकर शिक्षकों और सेवादारों तक के ट्रांसफर की पावर भी छीन ली गई। सभी पावर छीन लेने के बावजूद</span>, <span lang="HI">हमने काम करना जारी रखा और नतीजे दिए।</span>

&nbsp;

<span lang="HI">उन्होंने आगे कहा कि सत्ता जाने के बाद भी</span>, <span lang="HI">हमने ऐसे स्कूल और अस्पताल बनाए जो भारत में पहले कभी नहीं देखे गए। हमने बिजली और पानी पर ऐसी नीतियां लागू कीं जो एक मिसाल बन गईं। अरविंद केजरीवाल कह सकते थे कि वह शक्तियों के बिना काम नहीं कर सकते</span>, <span lang="HI">लेकिन उन्होंने करके दिखाया। यही वजह है कि दिल्ली के लोगों ने उन्हें </span>2020<span lang="HI"> में </span>70<span lang="HI"> में से </span>62<span lang="HI"> सीटें दीं।"</span>

&nbsp;

<span lang="HI">आप नेताओं को राजनीति तौर पर निशाना बनाने के बारे में मनीष सिसोदिया ने कहा कि ईमानदारी की इस इमेज को तोड़ने के लिए नरेंद्र मोदी जी ने अरविंद केजरीवाल को भ्रष्ट साबित करने की कोशिश की। सत्येंद्र जैन को झूठे केस में गिरफ्तार किया गया। मुझ पर भी कथित शराब घोटाले का आरोप लगाया गया। पहले उन्होंने </span>10,000<span lang="HI"> करोड़ कहा</span>, <span lang="HI">फिर </span>1,000<span lang="HI"> करोड़</span>, <span lang="HI">फिर </span>100<span lang="HI"> करोड़ और कोर्ट में यह ज़ीरो हो गया। कोर्ट ने कहा कि कोई केस नहीं है।</span>

&nbsp;

<span lang="HI">हिम्मत बनाए रखने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि आपमें हिम्मत होनी चाहिए। यह एक दिन की लड़ाई नहीं है। यह एक लंबी लड़ाई है। आप गुरुओं और शहीदों की धरती पर पैदा हुए हैं। आपको वहीं से ताकत लेनी चाहिए। आज हम अपने लिए नहीं बल्कि अपने बच्चों के लिए लड़ रहे हैं। क्या आप गारंटी दे सकते हैं कि </span>10<span lang="HI"> साल बाद आपका बच्चा नशे में नहीं पड़ेगा</span>? <span lang="HI">गारंटी बस यही है कि हम सब मिलकर पंजाब को नशा मुक्त बनाएं।</span>

&nbsp;

<span lang="HI">विधायकों और लोकल लीडरशिप को सीधे संबोधित करते हुए पंजाब आप प्रभारी ने कहा कि अगर एक भी गांव या एक भी वार्ड में नशा बिक रहा है</span>, <span lang="HI">तो आपको नींद नहीं आनी चाहिए। कोई विधायक अपने ब्लॉक इंचार्ज को फोन करके क्यों नहीं पूछता कि क्या हो रहा है</span>? <span lang="HI">विधायक खुद गांव क्यों नहीं जाता</span>? <span lang="HI">ज़िम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता।</span>

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<span lang="HI">उन्होंने जवाबदेही और तालमेल की अहमियत पर जोर देते हुए कहा</span>, "24<span lang="HI"> मार्च से </span>31<span lang="HI"> मार्च तक सभी ब्लॉकों में मीटिंगें की जाएंगी। हर </span>VDC <span lang="HI">रिपोर्ट देगी कि उनका गांव नशा मुक्त है या नहीं और किस हद तक नशा अभी भी बाकी है। अगर नशा बिक रहा है तो जिम्मेदार व्यक्ति की पहचान होनी चाहिए। विधायक और हलका इंचार्ज ब्लॉक इंचार्जों का पूरा साथ दें।"</span>

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<span lang="HI">इस मुहिम के सामूहिक स्वरूप के बारे में उन्होंने कहा</span>, "<span lang="HI">पंजाब में पहली बार सरकार</span>, <span lang="HI">पुलिस और जनता </span>'<span lang="HI">नशों के खिलाफ जंग</span>' <span lang="HI">जैसी मुहिम में ईमानदारी से मिलकर काम कर रहे हैं। पहले ऐसा समय था जब मंत्री भी नशा तस्करी में शामिल होते थे और माफिया की बजाय ईमानदार अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जाती थी। आज अरविंद केजरीवाल जी और मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की स्पष्ट हिदायत है कि नशों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।"</span>

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<span lang="HI">उन्होंने </span>'<span lang="HI">आप</span>' <span lang="HI">की </span>'<span lang="HI">जीरो टॉलरेंस</span>' <span lang="HI">नीति को दोहराते हुए कहा</span>, "<span lang="HI">अगर </span>'<span lang="HI">आप</span>' <span lang="HI">का कोई दूर का कार्यकर्ता भी नशा तस्करी से जुड़ा पाया जाता है या नशा तस्करों से उसके संबंध पाए जाते हैं</span>, <span lang="HI">तो उसे जेल भेजा जाना चाहिए। पार्टी और शासन दोनों में जीरो टॉलरेंस लागू होनी चाहिए।"</span>

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<span lang="HI">मनीष सिसोदिया ने शिकायतों के लिए गोपनीय रिपोर्टिंग प्रणाली के बारे में बताते हुए कहा</span>, "<span lang="HI">शिकायतों के लिए तैयार की गई ऐप पूरी तरह गोपनीयता सुनिश्चित करती है। यहां तक कि मंत्री</span>, <span lang="HI">कमिश्नर या मुख्यमंत्री को भी यह पता नहीं चल सकता कि जानकारी किसने दी है। सिर्फ की गई कार्रवाई को ही ट्रैक किया जा सकता है। इसलिए लोग निडर होकर रिपोर्ट करें।"</span>

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<span lang="HI">भावुक अपील करते हुए उन्होंने कहा</span>, "<span lang="HI">अगर हम पंजाब के हर गांव और शहर को नशा मुक्त नहीं कर सकते</span>, <span lang="HI">तो हमारा राजनीति में होना बेमानी है। अरविंद केजरीवाल इस बारे में बहुत गंभीर हैं और कहते हैं कि अगर हम असफल रहे तो हमें शर्म महसूस करनी चाहिए।"</span>

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<span lang="HI">उन्होंने पंजाब की आध्यात्मिक और क्रांतिकारी विरासत का हवाला देते हुए कहा</span>, "<span lang="HI">यह गुरु साहिबान की</span>, <span lang="HI">सेवा और हिम्मत की धरती है। यह शहीद-ए-आजम भगत सिंह</span>, <span lang="HI">ऊधम सिंह</span>, <span lang="HI">करतार सिंह सराभा और मदन लाल ढींगरा की धरती है। उनसे प्रेरणा लो। अगर शहीद-ए-आजम भगत सिंह हिचकिचाते तो आज हम कहां होते</span>? <span lang="HI">अगर जरूरत पड़े तो नशा तस्करों को </span>40<span lang="HI"> बार जेल भेजो</span>, <span lang="HI">लेकिन रुको मत।"</span>

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<span lang="HI">पार्टी नेताओं को सख्त संदेश देते हुए उन्होंने कहा</span>, "<span lang="HI">अगर आपमें नशा माफिया से टक्कर लेने की हिम्मत नहीं है</span>, <span lang="HI">तो अरविंद केजरीवाल को शर्मिंदा मत करो। पार्टी छोड़ दो। यह पार्टी लड़ने के लिए बनी है।"</span>

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<span lang="HI">अपना निजी अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा</span>, "CBI <span lang="HI">ने मेरे घर छापा मारा</span>, <span lang="HI">अलमारियां खंगालीं</span>, <span lang="HI">यहां तक कि पैसों की तलाश में तकिए भी फाड़ दिए। मैंने तीन साल तक झूठे आरोपों का बोझ उठाया। मुझसे पार्टी छोड़ने और विधायकों को तोड़ने के लिए कहा गया। लेकिन अरविंद केजरीवाल को छोड़ने का मतलब है ईमानदारी और शिक्षा के जरिए राष्ट्र निर्माण के सपने को छोड़ना। मैंने नहीं छोड़ा और आपको भी नहीं छोड़ना चाहिए।"</span>

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<span lang="HI">भविष्य की रणनीति की बात करते हुए मनीष सिसोदिया ने कहा कि </span>31<span lang="HI"> मार्च के बाद वह गांव-गांव की प्रगति का जायजा लेने के लिए निजी तौर पर ब्लॉक इंचार्जों और विधायकों से मिलेंगे। हर हलके को यह डेटा पेश करना होगा कि कितने गांव नशा मुक्त हो गए हैं और नशों को पूरी तरह खत्म करने के लिए समय-सीमा तय करनी होगी। यह लड़ाई सिर्फ लड़नी ही नहीं</span>, <span lang="HI">बल्कि जीतनी भी है।</span>

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<span lang="HI">उन्होंने भरोसा जताया कि पूरी टीम नए इरादे के साथ लौटेगी और सामूहिक कोशिशों तथा दृढ़ संकल्प के साथ नशा मुक्त पंजाब का निर्माण करेगी।</span>

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	</item>
		<item>
		<title>क्या शादी से बचेगा आपका इनकम टैक्स? सांसद राघव चड्ढा ने संसद में पेश किया &#8216;Joint ITR&#8217; मॉडल</title>
		<link>https://trendstopic.in/will-marriage-save-you-income-tax-mp-raghav-chadha-presented-joint-itr-model-in-parliament/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 17 Mar 2026 06:16:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[AamAadmiParty]]></category>
		<category><![CDATA[news]]></category>
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					<description><![CDATA[<!-- wp:paragraph -->
<p>दिल्ली में राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने आयकर प्रणाली में एक बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा. एक मजाकिया टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा, "अगर आप टैक्स बचाना चाहते हैं, तो शादी कर लीजिए." वह 'संयुक्त आयकर रिटर्न' (ITR) फाइल करने की अवधारणा का जिक्र कर रहे थे. एक ऐसा तरीका जिससे शादीशुदा जोड़ों को टैक्स में राहत मिल सकती है. केंद्रीय बजट पर चर्चा के दौरान, चड्ढा ने सुझाव दिया कि सरकार को संयुक्त फाइलिंग की एक वैकल्पिक सुविधा शुरू करनी चाहिए, ताकि अलग-अलग आय स्तर वाले जोड़ों पर कोई अनावश्यक वित्तीय बोझ न पड़े.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>दुनिया भर के देश पति-पत्नी को संयुक्त फाइलिंग की देते हैं अनुमति</strong></p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>चड्ढा ने बताया कि भारत में आयकर व्यक्तिगत आधार पर लगाया जाता है. नतीजतन, शादीशुदा जोड़े अलग-अलग ITR फाइल करते हैं. हालांकि, उनके खर्च, निवेश, बच्चों की परवरिश का खर्च और घर की जरूरतें साझा होती हैं. दुनिया भर के कई देश पति और पत्नी को एक ही आर्थिक इकाई मानते हैं और उन्हें संयुक्त टैक्स रिटर्न फाइल करने की अनुमति देते हैं. भारत में भी ऐसी ही प्रणाली शुरू करने से मध्यम वर्ग को काफी फायदा होगा.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

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<p>&nbsp;</p>
<p><strong>सांसद राघव चड्ढा ने तीन उदाहरणों के साथ इनकम टैक्स फार्मूला को समझाया</strong> सांसद राघव चड्ढा ने तीन अलग-अलग उदाहरणों का उपयोग करके अपने इनकम टैक्स फार्मूला को स्पष्ट किया. पहला राहुल और ऋचा को लें, जिनमें से दोनों सालाना ₹10 लाख कमाते हैं (कुल ₹20 लाख), चूंकि प्रत्येक व्यक्ति की आय ₹12 लाख की सीमा से कम है, इसलिए वे टैक्स छूट के पात्र हैं और उन्हें कोई टैक्स देने की आवश्यकता नहीं है. दूसरा नमन का मामला लें, जो ₹20 लाख कमाता है, जबकि उसकी पत्नी, निशा ने अपने बच्चों और ससुराल वालों की देखभाल के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी है. हालांकि उनकी संयुक्त घरेलू आय ₹20 लाख ही रहती है, लेकिन टैक्स की देनदारी पूरी तरह से नमन पर आती है, जो लगभग ₹1.92 लाख है. तीसरा एक ऐसे जोड़े पर विचार करें जहां पति ₹18 लाख कमाता है और पत्नी ₹6 लाख कमाती है (कुल ₹24 लाख), पति पर लगभग ₹1.5 लाख टैक्स देने की देनदारी है, जबकि पत्नी की टैक्स देनदारी शून्य है. हालांकि, यदि संयुक्त फाइलिंग की अनुमति होती. जिससे छूट और कटौतियों को एक साथ जोड़ा जा सकता तो जोड़े की कुल टैक्स देनदारी संभावित रूप से घटकर शून्य हो सकती थी.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>सांसद राघव चड्ढा ने टैक्स में छूट का रखा प्रस्ताव</strong></p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>चड्ढा ने तर्क दिया कि मौजूदा व्यवस्था उन परिवारों पर अलग-अलग टैक्स का बोझ डालती है जिनकी कुल आय एक जैसी होती है. एक ऐसी स्थिति जिसे सांसद ने अन्यायपूर्ण माना. सांसद ने जोर देकर कहा कि जॉइंट फाइलिंग को एक वैकल्पिक सुविधा के तौर पर पेश किया जाना चाहिए, ताकि जोड़े अगर चाहें तो इसे अपना सकें. इससे शादीशुदा जोड़ों को टैक्स में काफी बचत होगी, खासकर उन मामलों में जहां एक साथी कम कमाता है या घर-बार संभालता है. सांसद राघव चड्ढा ने कुछ और उपाय भी सुझाए, जैसे कि विकलांग सैनिकों की पेंशन पर टैक्स में छूट को फिर से लागू करना और बैंकों द्वारा लगाए जाने वाले न्यूनतम बैलेंस शुल्क को माफ करना.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>क्या सरकार इस प्रस्ताव पर करेंगी विचार</strong> यह प्रस्ताव मध्यम वर्ग को राहत देने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है. सरकार अब इस मामले पर विचार कर सकती है. चड्ढा की टिप्पणियां सदन के भीतर हल्के-फुल्के मजाक और गंभीर चर्चा, दोनों का विषय बन गईं.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<!-- wp:paragraph -->
<p>दिल्ली में राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने आयकर प्रणाली में एक बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा. एक मजाकिया टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा, "अगर आप टैक्स बचाना चाहते हैं, तो शादी कर लीजिए." वह 'संयुक्त आयकर रिटर्न' (ITR) फाइल करने की अवधारणा का जिक्र कर रहे थे. एक ऐसा तरीका जिससे शादीशुदा जोड़ों को टैक्स में राहत मिल सकती है. केंद्रीय बजट पर चर्चा के दौरान, चड्ढा ने सुझाव दिया कि सरकार को संयुक्त फाइलिंग की एक वैकल्पिक सुविधा शुरू करनी चाहिए, ताकि अलग-अलग आय स्तर वाले जोड़ों पर कोई अनावश्यक वित्तीय बोझ न पड़े.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>दुनिया भर के देश पति-पत्नी को संयुक्त फाइलिंग की देते हैं अनुमति</strong></p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>चड्ढा ने बताया कि भारत में आयकर व्यक्तिगत आधार पर लगाया जाता है. नतीजतन, शादीशुदा जोड़े अलग-अलग ITR फाइल करते हैं. हालांकि, उनके खर्च, निवेश, बच्चों की परवरिश का खर्च और घर की जरूरतें साझा होती हैं. दुनिया भर के कई देश पति और पत्नी को एक ही आर्थिक इकाई मानते हैं और उन्हें संयुक्त टैक्स रिटर्न फाइल करने की अनुमति देते हैं. भारत में भी ऐसी ही प्रणाली शुरू करने से मध्यम वर्ग को काफी फायदा होगा.</p>
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<p>&nbsp;</p>
<p><strong>सांसद राघव चड्ढा ने तीन उदाहरणों के साथ इनकम टैक्स फार्मूला को समझाया</strong> सांसद राघव चड्ढा ने तीन अलग-अलग उदाहरणों का उपयोग करके अपने इनकम टैक्स फार्मूला को स्पष्ट किया. पहला राहुल और ऋचा को लें, जिनमें से दोनों सालाना ₹10 लाख कमाते हैं (कुल ₹20 लाख), चूंकि प्रत्येक व्यक्ति की आय ₹12 लाख की सीमा से कम है, इसलिए वे टैक्स छूट के पात्र हैं और उन्हें कोई टैक्स देने की आवश्यकता नहीं है. दूसरा नमन का मामला लें, जो ₹20 लाख कमाता है, जबकि उसकी पत्नी, निशा ने अपने बच्चों और ससुराल वालों की देखभाल के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी है. हालांकि उनकी संयुक्त घरेलू आय ₹20 लाख ही रहती है, लेकिन टैक्स की देनदारी पूरी तरह से नमन पर आती है, जो लगभग ₹1.92 लाख है. तीसरा एक ऐसे जोड़े पर विचार करें जहां पति ₹18 लाख कमाता है और पत्नी ₹6 लाख कमाती है (कुल ₹24 लाख), पति पर लगभग ₹1.5 लाख टैक्स देने की देनदारी है, जबकि पत्नी की टैक्स देनदारी शून्य है. हालांकि, यदि संयुक्त फाइलिंग की अनुमति होती. जिससे छूट और कटौतियों को एक साथ जोड़ा जा सकता तो जोड़े की कुल टैक्स देनदारी संभावित रूप से घटकर शून्य हो सकती थी.</p>
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<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>सांसद राघव चड्ढा ने टैक्स में छूट का रखा प्रस्ताव</strong></p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>चड्ढा ने तर्क दिया कि मौजूदा व्यवस्था उन परिवारों पर अलग-अलग टैक्स का बोझ डालती है जिनकी कुल आय एक जैसी होती है. एक ऐसी स्थिति जिसे सांसद ने अन्यायपूर्ण माना. सांसद ने जोर देकर कहा कि जॉइंट फाइलिंग को एक वैकल्पिक सुविधा के तौर पर पेश किया जाना चाहिए, ताकि जोड़े अगर चाहें तो इसे अपना सकें. इससे शादीशुदा जोड़ों को टैक्स में काफी बचत होगी, खासकर उन मामलों में जहां एक साथी कम कमाता है या घर-बार संभालता है. सांसद राघव चड्ढा ने कुछ और उपाय भी सुझाए, जैसे कि विकलांग सैनिकों की पेंशन पर टैक्स में छूट को फिर से लागू करना और बैंकों द्वारा लगाए जाने वाले न्यूनतम बैलेंस शुल्क को माफ करना.</p>
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<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>क्या सरकार इस प्रस्ताव पर करेंगी विचार</strong> यह प्रस्ताव मध्यम वर्ग को राहत देने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है. सरकार अब इस मामले पर विचार कर सकती है. चड्ढा की टिप्पणियां सदन के भीतर हल्के-फुल्के मजाक और गंभीर चर्चा, दोनों का विषय बन गईं.</p>
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		<title>अरविंद केजरीवाल-मनीष सिसोदिया ने HC के चीफ जस्टिस को लिखी चिट्ठी, कर दी ये बड़ी मांग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Mar 2026 05:16:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[AamAadmiParty]]></category>
		<category><![CDATA[arvind kejriwal]]></category>
		<category><![CDATA[news]]></category>
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					<description><![CDATA[<span lang="HI">आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल</span>, <span lang="HI">वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया और दिल्ली आबकारी नीति मामले के कई अन्य आरोपियों ने दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा है। उन्होंने इस मामले को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत से किसी अन्य बेंच में ट्रांसफर करने की मांग की है।</span>

&nbsp;

<span lang="HI">पत्र में उन्होंने तर्क दिया है कि निष्पक्षता सुनिश्चित करने और न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए मामले की सुनवाई एक निष्पक्ष बेंच द्वारा की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि इसी आबकारी मामले में जज द्वारा पारित कई आदेशों को सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया है।</span>

&nbsp;

<span lang="HI">अपने पत्र में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि यह अनुरोध एक गंभीर और वास्तविक चिंता के कारण किया गया है। उन्हें डर है कि इस मामले में पूरी तरह से निष्पक्ष सुनवाई नहीं हो पाएगी। उन्होंने मांग की है कि सीबीआई बनाम कुलदीप सिंह और अन्य मामले को किसी अन्य बेंच के सामने रखा जाए। इससे न्याय प्रणाली में निष्पक्षता और जनता का विश्वास बना रहेगा।</span>

&nbsp;

<span lang="HI">पत्र में बताया गया है कि </span>17<span lang="HI"> अगस्त </span>2022<span lang="HI"> को दर्ज सीबीआई एफआईआर में अरविंद केजरीवाल को आरोपी नंबर </span>18<span lang="HI"> बनाया गया था। उन्हें </span>26<span lang="HI"> जून </span>2024<span lang="HI"> को गिरफ्तार किया गया था। निचली अदालत ने </span>23<span lang="HI"> आरोपियों से जुड़ी पांच चार्जशीट पर लगभग दो महीने तक आरोपों पर बहस सुनी। इसके बाद </span>12<span lang="HI"> फरवरी </span>2026<span lang="HI"> को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। </span>27<span lang="HI"> फरवरी </span>2026<span lang="HI"> को विशेष सीबीआई अदालत ने एक विस्तृत आदेश पारित किया। इसमें सभी </span>23<span lang="HI"> आरोपियों को आरोप मुक्त कर दिया गया।</span>

&nbsp;

<span lang="HI">दिल्ली हाईकोर्ट की कार्यवाही का हवाला देते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सीबीआई ने आरोप मुक्त करने के आदेश को चुनौती देते हुए लगभग </span>50<span lang="HI"> पन्नों की एक रिवीजन याचिका दायर की है। हालांकि पत्र के अनुसार</span>, <span lang="HI">इस याचिका में निचली अदालत के निष्कर्षों या सबूतों में किसी भी विशिष्ट गलती को उजागर नहीं किया गया है। ऐसा कोई कारण नहीं बताया गया है</span>, <span lang="HI">जिससे आरोप मुक्त करने के आदेश को रद्द किया जा सके।</span>

&nbsp;

<span lang="HI">उन्होंने आगे कहा कि </span>9<span lang="HI"> मार्च </span>2026<span lang="HI"> को पहली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया। हाई कोर्ट ने आरोप मुक्त किए गए आरोपियों को सुने बिना ही प्रथम दृष्टया यह विचार दर्ज कर लिया कि निचली अदालत का विस्तृत आदेश गलत था। हाई कोर्ट ने जांच अधिकारी के खिलाफ निचली अदालत की टिप्पणियों और निर्देशों पर भी रोक लगा दी। इनमें संभावित विभागीय कार्रवाई से संबंधित निर्देश भी शामिल थे। जबकि सीबीआई ने केवल सीमित रोक की मांग की थी।</span>

&nbsp;

<span lang="HI">अरविंद केजरीवाल ने यह भी बताया कि हाई कोर्ट ने संबंधित प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) मामले की सुनवाई कर रही निचली अदालत को भी कार्यवाही स्थगित करने का निर्देश दिया। यह निर्देश तब तक के लिए है जब तक हाई कोर्ट सीबीआई की रिवीजन याचिका पर विचार नहीं कर लेता। पत्र में कहा गया है कि ईडी रिवीजन कार्यवाही में कोई पक्षकार नहीं था। सीबीआई ने भी ऐसी कोई राहत नहीं मांगी थी।</span>

&nbsp;

<span lang="HI">पत्र में तर्क दिया गया है कि आरोप मुक्त किए गए आरोपियों को सुने बिना शुरुआती चरण में ऐसे निर्देश जारी करना चिंता पैदा करता है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या रिवीजन याचिका की जांच आवश्यक न्यायिक तटस्थता के साथ की जाएगी। इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि इस मामले में कई चार्जशीट और </span>23<span lang="HI"> आरोपी शामिल हैं। इसके बावजूद जवाब दाखिल करने के लिए केवल एक सप्ताह का समय दिया गया। पत्र में इसे इतने बड़े मामले में असामान्य जल्दबाजी बताया गया है।</span>

&nbsp;

<span lang="HI">अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि इसी बेंच ने पहले आबकारी नीति मामले से जुड़े कई केसों पर फैसला सुनाया था। इनमें संजय सिंह</span>, <span lang="HI">अरविंद केजरीवाल</span>, <span lang="HI">अमनदीप सिंह ढल्ल</span>, <span lang="HI">के. कविता और मनीष सिसोदिया की जमानत याचिकाएं शामिल हैं। पत्र के अनुसार उन मामलों में अदालत ने अभियोजन पक्ष के आरोपों को स्वीकार करते हुए व्यापक प्रथम दृष्टया टिप्पणियां की थीं। इनमें सरकारी गवाहों के बयानों पर भरोसा करना</span>, <span lang="HI">कथित नीतिगत हेरफेर</span>, <span lang="HI">कथित रिश्वत और मनी ट्रेल की अनुपस्थिति से संबंधित मुद्दे शामिल थे।</span>

&nbsp;

<span lang="HI">पत्र में यह भी बताया गया है कि हालांकि इनमें से कुछ मामले ईडी की कार्यवाही से उत्पन्न हुए थे। लेकिन वे कार्यवाहियां उसी सीबीआई एफआईआर पर आधारित थीं। उनमें वही बुनियादी आरोप शामिल थे जो अब आरोप मुक्त करने के आदेश के खिलाफ सीबीआई की रिवीजन याचिका के केंद्र में हैं।</span>

&nbsp;

<span lang="HI">पत्र में आगे कहा गया है कि इनमें से कई फैसलों को बाद में सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों को राहत दी थी। पत्र के अनुसार</span>, <span lang="HI">इससे यह चिंता और मजबूत होती है कि इसी विवाद से जुड़े मामलों में अपनाया गया पिछला दृष्टिकोण पहले ही कानूनी रूप से कमजोर पाया जा चुका है।</span>

&nbsp;

<span lang="HI">पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने स्पष्ट किया कि ट्रांसफर का अनुरोध जज के खिलाफ किसी व्यक्तिगत आरोप पर आधारित नहीं है। यह इस कानूनी सिद्धांत पर आधारित है कि अदालतों को यह भी विचार करना चाहिए कि क्या परिस्थितियां किसी निष्पक्ष वादी को पक्षपात की संभावना महसूस करा सकती हैं।</span>

&nbsp;

<span lang="HI">पत्र में अरविंद केजरीवाल बनाम सीबीआई मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गई टिप्पणियों का भी जिक्र किया गया है। वहां कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी की टाइमिंग पर सवाल उठाया था। सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि सीबीआई को </span>22<span lang="HI"> महीने तक उन्हें गिरफ्तार करना जरूरी नहीं लगा था। जब ईडी मामले में उन्हें रिहा किया जाने वाला था</span>, <span lang="HI">तब अचानक उन्हें गिरफ्तार करने की जल्दबाजी काफी संदिग्ध लगती है।</span>

&nbsp;

<span lang="HI">सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा था कि सीबीआई को न केवल निष्पक्ष होना चाहिए बल्कि निष्पक्ष दिखना भी चाहिए। कानून के शासन वाले लोकतंत्र में जनता की धारणा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।</span>

&nbsp;

<span lang="HI">आवेदकों ने कहा कि ट्रांसफर के अनुरोध का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मामले की सुनवाई तटस्थता के साथ हो। न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास बनाए रखना भी इसका उद्देश्य है। उन्होंने यह भी कहा कि कार्य-सूची के प्रमुख के रूप में मुख्य न्यायाधीश के पास मामलों को आवंटित करने और उन्हें उचित बेंचों को सौंपने का अधिकार है।</span>

&nbsp;

<span lang="HI">अपनी प्रार्थना में अरविंद केजरीवाल ने न्याय के हित में सीबीआई बनाम कुलदीप सिंह और अन्य रिवीजन याचिका को ट्रांसफर करने का अनुरोध किया। उन्होंने न्याय प्रक्रिया की निष्पक्षता में विश्वास बनाए रखने के लिए मामले को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत से किसी अन्य उचित बेंच में ट्रांसफर करने की मांग की है।</span>

&nbsp;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<span lang="HI">आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल</span>, <span lang="HI">वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया और दिल्ली आबकारी नीति मामले के कई अन्य आरोपियों ने दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा है। उन्होंने इस मामले को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत से किसी अन्य बेंच में ट्रांसफर करने की मांग की है।</span>

&nbsp;

<span lang="HI">पत्र में उन्होंने तर्क दिया है कि निष्पक्षता सुनिश्चित करने और न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए मामले की सुनवाई एक निष्पक्ष बेंच द्वारा की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि इसी आबकारी मामले में जज द्वारा पारित कई आदेशों को सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया है।</span>

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<span lang="HI">अपने पत्र में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि यह अनुरोध एक गंभीर और वास्तविक चिंता के कारण किया गया है। उन्हें डर है कि इस मामले में पूरी तरह से निष्पक्ष सुनवाई नहीं हो पाएगी। उन्होंने मांग की है कि सीबीआई बनाम कुलदीप सिंह और अन्य मामले को किसी अन्य बेंच के सामने रखा जाए। इससे न्याय प्रणाली में निष्पक्षता और जनता का विश्वास बना रहेगा।</span>

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<span lang="HI">पत्र में बताया गया है कि </span>17<span lang="HI"> अगस्त </span>2022<span lang="HI"> को दर्ज सीबीआई एफआईआर में अरविंद केजरीवाल को आरोपी नंबर </span>18<span lang="HI"> बनाया गया था। उन्हें </span>26<span lang="HI"> जून </span>2024<span lang="HI"> को गिरफ्तार किया गया था। निचली अदालत ने </span>23<span lang="HI"> आरोपियों से जुड़ी पांच चार्जशीट पर लगभग दो महीने तक आरोपों पर बहस सुनी। इसके बाद </span>12<span lang="HI"> फरवरी </span>2026<span lang="HI"> को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। </span>27<span lang="HI"> फरवरी </span>2026<span lang="HI"> को विशेष सीबीआई अदालत ने एक विस्तृत आदेश पारित किया। इसमें सभी </span>23<span lang="HI"> आरोपियों को आरोप मुक्त कर दिया गया।</span>

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<span lang="HI">दिल्ली हाईकोर्ट की कार्यवाही का हवाला देते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सीबीआई ने आरोप मुक्त करने के आदेश को चुनौती देते हुए लगभग </span>50<span lang="HI"> पन्नों की एक रिवीजन याचिका दायर की है। हालांकि पत्र के अनुसार</span>, <span lang="HI">इस याचिका में निचली अदालत के निष्कर्षों या सबूतों में किसी भी विशिष्ट गलती को उजागर नहीं किया गया है। ऐसा कोई कारण नहीं बताया गया है</span>, <span lang="HI">जिससे आरोप मुक्त करने के आदेश को रद्द किया जा सके।</span>

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<span lang="HI">उन्होंने आगे कहा कि </span>9<span lang="HI"> मार्च </span>2026<span lang="HI"> को पहली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया। हाई कोर्ट ने आरोप मुक्त किए गए आरोपियों को सुने बिना ही प्रथम दृष्टया यह विचार दर्ज कर लिया कि निचली अदालत का विस्तृत आदेश गलत था। हाई कोर्ट ने जांच अधिकारी के खिलाफ निचली अदालत की टिप्पणियों और निर्देशों पर भी रोक लगा दी। इनमें संभावित विभागीय कार्रवाई से संबंधित निर्देश भी शामिल थे। जबकि सीबीआई ने केवल सीमित रोक की मांग की थी।</span>

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<span lang="HI">अरविंद केजरीवाल ने यह भी बताया कि हाई कोर्ट ने संबंधित प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) मामले की सुनवाई कर रही निचली अदालत को भी कार्यवाही स्थगित करने का निर्देश दिया। यह निर्देश तब तक के लिए है जब तक हाई कोर्ट सीबीआई की रिवीजन याचिका पर विचार नहीं कर लेता। पत्र में कहा गया है कि ईडी रिवीजन कार्यवाही में कोई पक्षकार नहीं था। सीबीआई ने भी ऐसी कोई राहत नहीं मांगी थी।</span>

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<span lang="HI">पत्र में तर्क दिया गया है कि आरोप मुक्त किए गए आरोपियों को सुने बिना शुरुआती चरण में ऐसे निर्देश जारी करना चिंता पैदा करता है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या रिवीजन याचिका की जांच आवश्यक न्यायिक तटस्थता के साथ की जाएगी। इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि इस मामले में कई चार्जशीट और </span>23<span lang="HI"> आरोपी शामिल हैं। इसके बावजूद जवाब दाखिल करने के लिए केवल एक सप्ताह का समय दिया गया। पत्र में इसे इतने बड़े मामले में असामान्य जल्दबाजी बताया गया है।</span>

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<span lang="HI">अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि इसी बेंच ने पहले आबकारी नीति मामले से जुड़े कई केसों पर फैसला सुनाया था। इनमें संजय सिंह</span>, <span lang="HI">अरविंद केजरीवाल</span>, <span lang="HI">अमनदीप सिंह ढल्ल</span>, <span lang="HI">के. कविता और मनीष सिसोदिया की जमानत याचिकाएं शामिल हैं। पत्र के अनुसार उन मामलों में अदालत ने अभियोजन पक्ष के आरोपों को स्वीकार करते हुए व्यापक प्रथम दृष्टया टिप्पणियां की थीं। इनमें सरकारी गवाहों के बयानों पर भरोसा करना</span>, <span lang="HI">कथित नीतिगत हेरफेर</span>, <span lang="HI">कथित रिश्वत और मनी ट्रेल की अनुपस्थिति से संबंधित मुद्दे शामिल थे।</span>

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<span lang="HI">पत्र में यह भी बताया गया है कि हालांकि इनमें से कुछ मामले ईडी की कार्यवाही से उत्पन्न हुए थे। लेकिन वे कार्यवाहियां उसी सीबीआई एफआईआर पर आधारित थीं। उनमें वही बुनियादी आरोप शामिल थे जो अब आरोप मुक्त करने के आदेश के खिलाफ सीबीआई की रिवीजन याचिका के केंद्र में हैं।</span>

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<span lang="HI">पत्र में आगे कहा गया है कि इनमें से कई फैसलों को बाद में सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों को राहत दी थी। पत्र के अनुसार</span>, <span lang="HI">इससे यह चिंता और मजबूत होती है कि इसी विवाद से जुड़े मामलों में अपनाया गया पिछला दृष्टिकोण पहले ही कानूनी रूप से कमजोर पाया जा चुका है।</span>

&nbsp;

<span lang="HI">पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने स्पष्ट किया कि ट्रांसफर का अनुरोध जज के खिलाफ किसी व्यक्तिगत आरोप पर आधारित नहीं है। यह इस कानूनी सिद्धांत पर आधारित है कि अदालतों को यह भी विचार करना चाहिए कि क्या परिस्थितियां किसी निष्पक्ष वादी को पक्षपात की संभावना महसूस करा सकती हैं।</span>

&nbsp;

<span lang="HI">पत्र में अरविंद केजरीवाल बनाम सीबीआई मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गई टिप्पणियों का भी जिक्र किया गया है। वहां कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी की टाइमिंग पर सवाल उठाया था। सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि सीबीआई को </span>22<span lang="HI"> महीने तक उन्हें गिरफ्तार करना जरूरी नहीं लगा था। जब ईडी मामले में उन्हें रिहा किया जाने वाला था</span>, <span lang="HI">तब अचानक उन्हें गिरफ्तार करने की जल्दबाजी काफी संदिग्ध लगती है।</span>

&nbsp;

<span lang="HI">सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा था कि सीबीआई को न केवल निष्पक्ष होना चाहिए बल्कि निष्पक्ष दिखना भी चाहिए। कानून के शासन वाले लोकतंत्र में जनता की धारणा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।</span>

&nbsp;

<span lang="HI">आवेदकों ने कहा कि ट्रांसफर के अनुरोध का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मामले की सुनवाई तटस्थता के साथ हो। न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास बनाए रखना भी इसका उद्देश्य है। उन्होंने यह भी कहा कि कार्य-सूची के प्रमुख के रूप में मुख्य न्यायाधीश के पास मामलों को आवंटित करने और उन्हें उचित बेंचों को सौंपने का अधिकार है।</span>

&nbsp;

<span lang="HI">अपनी प्रार्थना में अरविंद केजरीवाल ने न्याय के हित में सीबीआई बनाम कुलदीप सिंह और अन्य रिवीजन याचिका को ट्रांसफर करने का अनुरोध किया। उन्होंने न्याय प्रक्रिया की निष्पक्षता में विश्वास बनाए रखने के लिए मामले को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत से किसी अन्य उचित बेंच में ट्रांसफर करने की मांग की है।</span>

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		<item>
		<title>&#8216;तानाशाह सरकार को उखाड़ फेंकेंगे&#8217;, जंतर मंतर से Kejriwal की हुंकार, बोले-आज से शुरू हुई BJP की उल्टी गिनती</title>
		<link>https://trendstopic.in/the-dictator-will-overthrow-the-government-kejriwal-shouted-from-jantar-mantar-said-bjps-countdown-started-from-today/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 02 Mar 2026 05:39:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Trending]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[AamAadmiParty]]></category>
		<category><![CDATA[news]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
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					<description><![CDATA[<!-- wp:paragraph -->

दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने रविवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बड़ी रैली में देशवासियों को संबोधित किया. उन्होंने मोदी सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए कहा कि देश के 140 करोड़ लोग एकजुट होकर इस सरकार को उखाड़ फेंकेंगे. केजरीवाल ने कहा कि भाजपा वाले सत्ता की राजनीति करेंगे, लेकिन हम जनता के लिए काम करेंगे. आज से बदलाव की उल्टी गिनती शुरू हो गई है. उन्होंने खुद की ईमानदारी पर जोर देते हुए कहा कि मोदी जी दिल्लीवालों के 'बेटे' को भ्रष्ट बताते रहे, लेकिन अदालत ने साफ कर दिया कि केजरीवाल कट्टर ईमानदार था, है और रहेगा.

<!-- /wp:paragraph --> <!-- wp:paragraph -->

<strong>रैली में केजरीवाल ने मोदी सरकार पर लगाया भ्रष्टाचार का आरोप</strong>

<!-- /wp:paragraph --> <!-- wp:paragraph -->

रैली में दिल्ली, पंजाब, गुजरात, गोवा समेत कई राज्यों से आए आप नेता, कार्यकर्ता और हजारों आम लोग शामिल हुए. सभी ने 'पढ़ा-लिखा दमदार है, मेरा केजरीवाल कट्टर ईमानदार है' के नारे लगाए. केजरीवाल ने अपनी गिरफ्तारी को राजनीतिक साजिश बताते हुए कहा कि इससे संदेश दिया गया कि अगर कोई ईमानदारी से काम करेगा, तो उसका केजरीवाल जैसा हाल कर दिया जाएगा. उन्होंने मोदी सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर मोदी जी को सच में भ्रष्टाचार खत्म करना है, तो गुजरात में अवैध शराब, जमीन सौदों और गिरते पुलों पर कार्रवाई करके दिखाएं.

<!-- /wp:paragraph --> <!-- wp:paragraph -->

<strong>केजरीवाल ने दिल्ली में भाजपा सरकार के वादों को झूठा बताया</strong>

<!-- /wp:paragraph --> <!-- wp:paragraph -->

केजरीवाल ने कांग्रेस के भ्रष्टाचार से तंग आकर लोगों द्वारा मोदी को पूर्ण बहुमत देने की बात की. लेकिन आज देश का हर क्षेत्र बर्बाद हो चुका है. उन्होंने दिल्ली में भाजपा सरकार के वादों को झूठा बताया, जैसे महिलाओं को 2500 रुपये देने और बस मार्शलों को नियमित करने का. केजरीवाल ने कहा कि भाजपा ने नौकरियां देने की बजाय हजारों लोगों को नौकरी से निकाल दिया. एक साल में दिल्ली बर्बाद हो गई. सड़कें टूटी हैं, गंदा पानी आ रहा है, बिजली कटौती हो रही है.

<!-- /wp:paragraph --> <!-- wp:paragraph -->

<strong>केजरीवाल ने मोदी और अमित शाह पर दिल्लीवालों को परेशान करने का आरोप लगाया</strong>

<!-- /wp:paragraph --> <!-- wp:paragraph -->

उन्होंने कहा कि पिछले चार साल से मोदी और शाह ने साजिश रचकर दिल्ली के लोगों को दुखी किया. मुझे चोर, भ्रष्टाचारी और शराब घोटाले का आरोपी बताया गया है. मीडिया में दिनभर डिबेट चलते थे, लेकिन जज ने फैसला दिया कि मोदी जी झूठ बोल रहे हैं, केजरीवाल ईमानदार है. केस फर्जी है, कोई सबूत नहीं, यह फैसला मोदी, शाह और भाजपा के गाल पर तमाचा है. उन्होंने कहा कि सदियों बाद ऐसा फैसला आया. मोदी और शाह खुद केस मॉनिटर कर रहे थे कि मैं, मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन और संजय सिंह जेल से न छूटें.

<!-- /wp:paragraph --> <!-- wp:paragraph -->

<strong>केजरीवाल ने अपने जीवन की कहानी सुनाई</strong>
उन्होंने कहा कि मैं भारत मां से बहुत प्यार करता हूं। अपना पूरा जीवन देश की सेवा में समर्पित किया. आईआईटी में अच्छे नंबर आए, अमेरिका जा सकता था, लेकिन देश का हाल देखकर रुक गया. अगर सभी पढ़े-लिखे विदेश चले जाएंगे, तो देश को कौन संभालेगा? मैंने इनकम टैक्स विभाग में नौकरी की. एक सीए आया, रिश्वत देने की कोशिश की, लेकिन मैंने मना कर दिया. धीरे-धीरे विभाग में मेरी ईमानदारी की चर्चा हुई. लोग कसमें खाते थे कि केजरीवाल एक पैसा नहीं लेता. फिर किस्मत ने मुझे दिल्ली का मुख्यमंत्री बनाया. 10 साल रहा, मोदी जी ने जांच करवाई, लेकिन एक रुपये का भ्रष्टाचार नहीं मिला. मैंने हजारों फाइलों पर साइन किए, कोई ठेकेदार कह दे कि मैंने पैसे मांगे, तो राजनीति छोड़ दूंगा. मोदी जी मुझसे नफरत क्यों करते हैं? मैंने उनका क्या बिगाड़ा? मैं सिर्फ ईमानदारी से काम करता हूं. क्योंकि मैं देश से प्यार करता हूं. जब कोई देश से गद्दारी करता है, तो खून खौलता है.

<!-- /wp:paragraph --> <!-- wp:paragraph -->

<strong>केजरीवाल ने मोदी के 12 साल के शासन की आलोचना</strong>
कांग्रेस के घोटालों से तंग आकर लोगों ने मोदी को बहुमत दिया. उम्मीद थी कि देश बदलेगा. लेकिन 12 साल में कुछ नहीं हुआ. लोगों की जिंदगी नहीं सुधरी. सड़कें, पानी, सीवर, बिजली-कुछ नहीं. एयरलाइन, रेलवे, बैंक, स्कूल, अस्पताल सब बर्बाद, देश का बेड़ा गर्क कर दिया. उन्होंने एक बच्चे का उदाहरण दिया. मोदी जी परीक्षा पर चर्चा करते हैं, लेकिन पेपर लीक हो रहे हैं. बच्चों का भविष्य बर्बाद हो रहा है. मोदी जी को नौटंकी बंद करनी चाहिए. पूरे देश में पेपर लीक, लेकिन कार्रवाई नहीं.

<!-- /wp:paragraph --> <!-- wp:paragraph -->

<strong>केजरीवाल ने सड़कों की हालत पर की बात </strong>
दुबई, अमेरिका, टोक्यो, जर्मनी की सड़कें शानदार हैं, गाड़ियां तेज दौड़ती हैं. लेकिन गुजरात में 30 किमी/घंटा की रफ्तार, राजकोट से जूनागढ़ 104 किमी में 4 घंटे लगते हैं, गड्ढों से भरी सड़कें दुनिया चांद पर पहुंच गई, लेकिन मोदी जी से गड्ढे नहीं भरते, सीवर के ढक्कन नहीं लगते, लंदन, टोक्यो, पेरिस साफ-सुथरे हैं, श्रीलंका, भूटान जैसे गरीब देश भी साफ, लेकिन मोदी जी से 12 साल में सफाई नहीं हुई.

<!-- /wp:paragraph --> <!-- wp:paragraph -->

<strong>प्रदूषण पर केजरीवाल ने सरकार को धेरा</strong>
प्रदूषण पर केजरीवाल ने कहा कि 2014 तक बीजिंग में भारत से ज्यादा प्रदूषण था, लेकिन उन्होंने खत्म कर दिया. उत्तर भारत में सांस लेना मुश्किल, मोदी सरकार से प्रदूषण नहीं ठीक हुआ. विकसित भारत छोड़ो, रहने लायक भारत बना दो. लोग सांस तो ले सकें.

<!-- /wp:paragraph --> <!-- wp:paragraph -->

<strong>केजरीवाल ने मोदी को दी चुनौती </strong>
अगर भ्रष्टाचार खत्म करना है, तो कार्रवाई करके दिखाओ. गुजरात में 20 हजार करोड़ की कोकीन पकड़ी गई, कार्रवाई करो, हर साल 30 हजार करोड़ की नकली दारू बिकती है, बंद करो, दोस्त को एक हजार एकड़ जमीन एक रुपये में दी, एक्शन लो, पुल गिरते हैं, सड़कें टूटती हैं, कार्रवाई करो, पेपर लीक पर एक्शन लो, लेकिन मोदी जी नहीं करेंगे, क्योंकि खुद या उनके लोग शामिल हैं. केजरीवाल ने कहा कि भ्रष्टाचारी मैं नहीं, मोदी जी हैं. लेकिन वे सोनम वांगचुक, मेहराज मलिक, नरेश बाल्यान, केजरीवाल, सिसोदिया, संजय सिंह को जेल डालते हैं. सोनम वांगचुक वैज्ञानिक हैं, पद्मश्री मिलना चाहिए. लेकिन मोदी जी उन्हें जेल डालते हैं, क्योंकि डरते हैं. जब तानाशाह पढ़े-लिखों से डरने लगे, तो उसका अंत आ गया. मोदी जी महिलाओं से डरते हैं, संसद नहीं गए क्योंकि पीटने का डर. ट्रम्प से डरते हैं. डर-डर कर कितना जिएंगे?

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<strong>केजरीवाल ने गिरफ्तारी के संदेश बताए</strong>
केजरीवाल ने गिरफ्तारी के संदेश बताए. ईमानदारी से काम करोगे, तो केजरीवाल जैसा हाल होगा. आप ने आम लोगों को टिकट दिए, युवा राजनीति में आए. लेकिन मोदी जी ने संदेश दिया कि राजनीति में मत आओ, नहीं तो हाल बुरा होगा. केजरीवाल ने आप की उपलब्धियां बताईं. देश में उम्मीदें खत्म हो गई थीं. आप ने दिल्ली में स्कूल, अस्पताल, बिजली, पानी, सड़कें ठीक कीं. 140 करोड़ लोगों को उम्मीद दी कि देश सुधर सकता है. लेकिन मोदी जी ने केजरीवाल को गिरफ्तार कर उम्मीदों पर पानी फेरा.
<strong>केजरीवाल ने दिल्ली में भाजपा सरकार की आलोचना</strong>
केजरीवाल ने दिल्ली में भाजपा सरकार की आलोचना की. एक साल पहले बनी, विधानसभा अध्यक्ष बिजेंद्र गुप्ता ने ट्वीट किया कि 60 दिन में बस मार्शल नियमित होंगे. लेकिन एक साल हो गया, कुछ नहीं. प्रधानमंत्री ने कहा 8 मार्च 2025 से महिलाओं को 2500 रुपये मिलेंगे, लेकिन नहीं मिले. प्रधानमंत्री झूठे हैं, तो देश कैसे तरक्की करेगा? भाजपा ने 10 हजार बस मार्शल, डीटीसी कर्मचारी, मोहल्ला क्लीनिक स्टाफ, डिम्स कर्मचारी, डेटा एंट्री ऑपरेटर निकाल दिए. महंगाई में नौकरी छीनना पाप है. दिल्ली दुखी है. सड़कें टूटी, गंदगी, काला पानी, पावर कट, आप की सरकार में 24 घंटे बिजली थी. अब बर्बादी है, आज चुनाव हो, भाजपा 10 सीट न जीते.

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<strong>केजरीवाल ने कहा भाजपा की उल्टी गिनती शुरू</strong>

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केजरीवाल ने कहा कि मोदी जी को देश चलाना नहीं आता, रुचि नहीं. सिर्फ सत्ता की हवस, सुबह-शाम सत्ता कैसे हथियाएं, षड़यंत्र रचते हैं. ईवीएम, वोटर लिस्ट छेड़छाड़, पैसे बांटना, लोगों को मारना, देश भाड़ में जाए. मोदी जी सत्ता के लिए काम करो, केजरीवाल देश के लिए 4 अप्रैल 2011 को जंतर-मंतर से कांग्रेस का सफाया हुआ. आज 1 मार्च 2026 से भाजपा की उल्टी गिनती शुरू

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<strong>केजरीवाल के राजनीतिक संघर्ष की नई शुरुआत</strong>

<!-- /wp:paragraph --> <!-- wp:paragraph -->

यह रैली केजरीवाल के राजनीतिक संघर्ष की नई शुरुआत का प्रतीक बनी. उन्होंने देशवासियों से एकजुट होने की अपील की. ईमानदारी और जनसेवा पर जोर देते हुए कहा कि तानाशाही नहीं चलेगी. देश बदलेगा, जब लोग मिलकर लड़ेंगे. रैली में उत्साह था, लोग नारे लगा रहे थे. केजरीवाल ने कहा कि आप की लड़ाई जारी रहेगी. दिल्ली से शुरू होकर पूरे देश में फैलेगी. मोदी सरकार के खिलाफ जनता का गुस्सा साफ दिखा. उन्होंने गुजरात, दिल्ली और पूरे भारत की समस्याओं पर विस्तार से बात की. प्रदूषण, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, हर मुद्दे पर मोदी को घेरा.

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<strong>केजरीवाल ने अपनी आईआईटी पढ़ाई और नौकरी के दिनों को याद किया</strong>

<!-- /wp:paragraph --> <!-- wp:paragraph -->

केजरीवाल ने अपनी आईआईटी पढ़ाई और नौकरी के दिनों को याद किया. कहा कि अमेरिका जाने का मौका था, लेकिन देश के लिए रुके. इनकम टैक्स में ईमानदारी से काम किया. रिश्वत न लेने की वजह से मशहूर हुए. मुख्यमंत्री बनने के बाद भी ईमानदार रहे. मोदी की जांचों में कुछ न मिला. यह साबित करता है कि ईमानदारी जीतती है. उन्होंने युवाओं से अपील की कि राजनीति में आएं, देश बदलें, मोदी का डर न मानें.

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<strong>केजरीवाल ने पूछा 12 साल के शासन में मोदी ने क्या किया?</strong>

<!-- /wp:paragraph --> <!-- wp:paragraph -->

केजरीवाल ने पूछा, कांग्रेस के घोटाले से छुटकारा मिला, लेकिन मोदी ने नए घोटाले किए. पेपर लीक, ड्रग्स, जमीन सौदे, गुजरात मॉडल फेल, सड़कें खराब, पुल गिरते, विदेशी देशों से तुलना की. कहा कि गरीब देश भी बेहतर हैं. भारत क्यों पीछे? क्योंकि मोदी को रुचि नहीं. सिर्फ चुनाव जीतना. प्रदूषण पर चिंता जताई. कहा कि सांस लेना मुश्किल, बीजिंग ने सुधारा, हम क्यों नहीं? विकसित भारत का सपना झूठा, पहले रहने लायक बनाओ. भ्रष्टाचार पर चुनौती. गुजरात में ड्रग्स पकड़ी, कार्रवाई क्यों नहीं? नकली दारू बंद क्यों नहीं? दोस्तों को जमीन क्यों दी? पुल क्यों गिरते? पेपर लीक क्यों? क्योंकि मोदी शामिल है.

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<strong>केजरीवाल ने कहा की मुझे ईमानदारी की सजा मिली जेल</strong>
तानाशाही पर केजरीवाल ने कहा, "पढ़े-लिखे लोगों से डरो, सोनम वांगचुक जेल में है. औरतों से डरो, ट्रंप से डरो, अंत करीब है. गिरफ्तारी से संदेश, ईमानदार मत बनो, नौजवानों, राजनीति में मत आओ. लेकिन हम डरेंगे नहीं." AAP की दिल्ली सरकार की तारीफ. स्कूल और अस्पताल बेहतर किए, उम्मीद जगाई मोदी ने उसे तोड़ दिया. BJP दिल्ली में फेल हो गई, वादे झूठे थे, नौकरियां छीन ली गईं, दिल्ली बर्बाद हो गई, लोग केजरीवाल को याद करते हैं. BJP चुनाव हार जाएगी. मोदी की सत्ता की हवस, देश नहीं चला सकते, साजिश, 2011 की तरह, BJP आज खत्म हो जाएगी.

<!-- /wp:paragraph -->]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<!-- wp:paragraph -->

दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने रविवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बड़ी रैली में देशवासियों को संबोधित किया. उन्होंने मोदी सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए कहा कि देश के 140 करोड़ लोग एकजुट होकर इस सरकार को उखाड़ फेंकेंगे. केजरीवाल ने कहा कि भाजपा वाले सत्ता की राजनीति करेंगे, लेकिन हम जनता के लिए काम करेंगे. आज से बदलाव की उल्टी गिनती शुरू हो गई है. उन्होंने खुद की ईमानदारी पर जोर देते हुए कहा कि मोदी जी दिल्लीवालों के 'बेटे' को भ्रष्ट बताते रहे, लेकिन अदालत ने साफ कर दिया कि केजरीवाल कट्टर ईमानदार था, है और रहेगा.

<!-- /wp:paragraph --> <!-- wp:paragraph -->

<strong>रैली में केजरीवाल ने मोदी सरकार पर लगाया भ्रष्टाचार का आरोप</strong>

<!-- /wp:paragraph --> <!-- wp:paragraph -->

रैली में दिल्ली, पंजाब, गुजरात, गोवा समेत कई राज्यों से आए आप नेता, कार्यकर्ता और हजारों आम लोग शामिल हुए. सभी ने 'पढ़ा-लिखा दमदार है, मेरा केजरीवाल कट्टर ईमानदार है' के नारे लगाए. केजरीवाल ने अपनी गिरफ्तारी को राजनीतिक साजिश बताते हुए कहा कि इससे संदेश दिया गया कि अगर कोई ईमानदारी से काम करेगा, तो उसका केजरीवाल जैसा हाल कर दिया जाएगा. उन्होंने मोदी सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर मोदी जी को सच में भ्रष्टाचार खत्म करना है, तो गुजरात में अवैध शराब, जमीन सौदों और गिरते पुलों पर कार्रवाई करके दिखाएं.

<!-- /wp:paragraph --> <!-- wp:paragraph -->

<strong>केजरीवाल ने दिल्ली में भाजपा सरकार के वादों को झूठा बताया</strong>

<!-- /wp:paragraph --> <!-- wp:paragraph -->

केजरीवाल ने कांग्रेस के भ्रष्टाचार से तंग आकर लोगों द्वारा मोदी को पूर्ण बहुमत देने की बात की. लेकिन आज देश का हर क्षेत्र बर्बाद हो चुका है. उन्होंने दिल्ली में भाजपा सरकार के वादों को झूठा बताया, जैसे महिलाओं को 2500 रुपये देने और बस मार्शलों को नियमित करने का. केजरीवाल ने कहा कि भाजपा ने नौकरियां देने की बजाय हजारों लोगों को नौकरी से निकाल दिया. एक साल में दिल्ली बर्बाद हो गई. सड़कें टूटी हैं, गंदा पानी आ रहा है, बिजली कटौती हो रही है.

<!-- /wp:paragraph --> <!-- wp:paragraph -->

<strong>केजरीवाल ने मोदी और अमित शाह पर दिल्लीवालों को परेशान करने का आरोप लगाया</strong>

<!-- /wp:paragraph --> <!-- wp:paragraph -->

उन्होंने कहा कि पिछले चार साल से मोदी और शाह ने साजिश रचकर दिल्ली के लोगों को दुखी किया. मुझे चोर, भ्रष्टाचारी और शराब घोटाले का आरोपी बताया गया है. मीडिया में दिनभर डिबेट चलते थे, लेकिन जज ने फैसला दिया कि मोदी जी झूठ बोल रहे हैं, केजरीवाल ईमानदार है. केस फर्जी है, कोई सबूत नहीं, यह फैसला मोदी, शाह और भाजपा के गाल पर तमाचा है. उन्होंने कहा कि सदियों बाद ऐसा फैसला आया. मोदी और शाह खुद केस मॉनिटर कर रहे थे कि मैं, मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन और संजय सिंह जेल से न छूटें.

<!-- /wp:paragraph --> <!-- wp:paragraph -->

<strong>केजरीवाल ने अपने जीवन की कहानी सुनाई</strong>
उन्होंने कहा कि मैं भारत मां से बहुत प्यार करता हूं। अपना पूरा जीवन देश की सेवा में समर्पित किया. आईआईटी में अच्छे नंबर आए, अमेरिका जा सकता था, लेकिन देश का हाल देखकर रुक गया. अगर सभी पढ़े-लिखे विदेश चले जाएंगे, तो देश को कौन संभालेगा? मैंने इनकम टैक्स विभाग में नौकरी की. एक सीए आया, रिश्वत देने की कोशिश की, लेकिन मैंने मना कर दिया. धीरे-धीरे विभाग में मेरी ईमानदारी की चर्चा हुई. लोग कसमें खाते थे कि केजरीवाल एक पैसा नहीं लेता. फिर किस्मत ने मुझे दिल्ली का मुख्यमंत्री बनाया. 10 साल रहा, मोदी जी ने जांच करवाई, लेकिन एक रुपये का भ्रष्टाचार नहीं मिला. मैंने हजारों फाइलों पर साइन किए, कोई ठेकेदार कह दे कि मैंने पैसे मांगे, तो राजनीति छोड़ दूंगा. मोदी जी मुझसे नफरत क्यों करते हैं? मैंने उनका क्या बिगाड़ा? मैं सिर्फ ईमानदारी से काम करता हूं. क्योंकि मैं देश से प्यार करता हूं. जब कोई देश से गद्दारी करता है, तो खून खौलता है.

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<strong>केजरीवाल ने मोदी के 12 साल के शासन की आलोचना</strong>
कांग्रेस के घोटालों से तंग आकर लोगों ने मोदी को बहुमत दिया. उम्मीद थी कि देश बदलेगा. लेकिन 12 साल में कुछ नहीं हुआ. लोगों की जिंदगी नहीं सुधरी. सड़कें, पानी, सीवर, बिजली-कुछ नहीं. एयरलाइन, रेलवे, बैंक, स्कूल, अस्पताल सब बर्बाद, देश का बेड़ा गर्क कर दिया. उन्होंने एक बच्चे का उदाहरण दिया. मोदी जी परीक्षा पर चर्चा करते हैं, लेकिन पेपर लीक हो रहे हैं. बच्चों का भविष्य बर्बाद हो रहा है. मोदी जी को नौटंकी बंद करनी चाहिए. पूरे देश में पेपर लीक, लेकिन कार्रवाई नहीं.

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<strong>केजरीवाल ने सड़कों की हालत पर की बात </strong>
दुबई, अमेरिका, टोक्यो, जर्मनी की सड़कें शानदार हैं, गाड़ियां तेज दौड़ती हैं. लेकिन गुजरात में 30 किमी/घंटा की रफ्तार, राजकोट से जूनागढ़ 104 किमी में 4 घंटे लगते हैं, गड्ढों से भरी सड़कें दुनिया चांद पर पहुंच गई, लेकिन मोदी जी से गड्ढे नहीं भरते, सीवर के ढक्कन नहीं लगते, लंदन, टोक्यो, पेरिस साफ-सुथरे हैं, श्रीलंका, भूटान जैसे गरीब देश भी साफ, लेकिन मोदी जी से 12 साल में सफाई नहीं हुई.

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<strong>प्रदूषण पर केजरीवाल ने सरकार को धेरा</strong>
प्रदूषण पर केजरीवाल ने कहा कि 2014 तक बीजिंग में भारत से ज्यादा प्रदूषण था, लेकिन उन्होंने खत्म कर दिया. उत्तर भारत में सांस लेना मुश्किल, मोदी सरकार से प्रदूषण नहीं ठीक हुआ. विकसित भारत छोड़ो, रहने लायक भारत बना दो. लोग सांस तो ले सकें.

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<strong>केजरीवाल ने मोदी को दी चुनौती </strong>
अगर भ्रष्टाचार खत्म करना है, तो कार्रवाई करके दिखाओ. गुजरात में 20 हजार करोड़ की कोकीन पकड़ी गई, कार्रवाई करो, हर साल 30 हजार करोड़ की नकली दारू बिकती है, बंद करो, दोस्त को एक हजार एकड़ जमीन एक रुपये में दी, एक्शन लो, पुल गिरते हैं, सड़कें टूटती हैं, कार्रवाई करो, पेपर लीक पर एक्शन लो, लेकिन मोदी जी नहीं करेंगे, क्योंकि खुद या उनके लोग शामिल हैं. केजरीवाल ने कहा कि भ्रष्टाचारी मैं नहीं, मोदी जी हैं. लेकिन वे सोनम वांगचुक, मेहराज मलिक, नरेश बाल्यान, केजरीवाल, सिसोदिया, संजय सिंह को जेल डालते हैं. सोनम वांगचुक वैज्ञानिक हैं, पद्मश्री मिलना चाहिए. लेकिन मोदी जी उन्हें जेल डालते हैं, क्योंकि डरते हैं. जब तानाशाह पढ़े-लिखों से डरने लगे, तो उसका अंत आ गया. मोदी जी महिलाओं से डरते हैं, संसद नहीं गए क्योंकि पीटने का डर. ट्रम्प से डरते हैं. डर-डर कर कितना जिएंगे?

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<strong>केजरीवाल ने गिरफ्तारी के संदेश बताए</strong>
केजरीवाल ने गिरफ्तारी के संदेश बताए. ईमानदारी से काम करोगे, तो केजरीवाल जैसा हाल होगा. आप ने आम लोगों को टिकट दिए, युवा राजनीति में आए. लेकिन मोदी जी ने संदेश दिया कि राजनीति में मत आओ, नहीं तो हाल बुरा होगा. केजरीवाल ने आप की उपलब्धियां बताईं. देश में उम्मीदें खत्म हो गई थीं. आप ने दिल्ली में स्कूल, अस्पताल, बिजली, पानी, सड़कें ठीक कीं. 140 करोड़ लोगों को उम्मीद दी कि देश सुधर सकता है. लेकिन मोदी जी ने केजरीवाल को गिरफ्तार कर उम्मीदों पर पानी फेरा.
<strong>केजरीवाल ने दिल्ली में भाजपा सरकार की आलोचना</strong>
केजरीवाल ने दिल्ली में भाजपा सरकार की आलोचना की. एक साल पहले बनी, विधानसभा अध्यक्ष बिजेंद्र गुप्ता ने ट्वीट किया कि 60 दिन में बस मार्शल नियमित होंगे. लेकिन एक साल हो गया, कुछ नहीं. प्रधानमंत्री ने कहा 8 मार्च 2025 से महिलाओं को 2500 रुपये मिलेंगे, लेकिन नहीं मिले. प्रधानमंत्री झूठे हैं, तो देश कैसे तरक्की करेगा? भाजपा ने 10 हजार बस मार्शल, डीटीसी कर्मचारी, मोहल्ला क्लीनिक स्टाफ, डिम्स कर्मचारी, डेटा एंट्री ऑपरेटर निकाल दिए. महंगाई में नौकरी छीनना पाप है. दिल्ली दुखी है. सड़कें टूटी, गंदगी, काला पानी, पावर कट, आप की सरकार में 24 घंटे बिजली थी. अब बर्बादी है, आज चुनाव हो, भाजपा 10 सीट न जीते.

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<strong>केजरीवाल ने कहा भाजपा की उल्टी गिनती शुरू</strong>

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केजरीवाल ने कहा कि मोदी जी को देश चलाना नहीं आता, रुचि नहीं. सिर्फ सत्ता की हवस, सुबह-शाम सत्ता कैसे हथियाएं, षड़यंत्र रचते हैं. ईवीएम, वोटर लिस्ट छेड़छाड़, पैसे बांटना, लोगों को मारना, देश भाड़ में जाए. मोदी जी सत्ता के लिए काम करो, केजरीवाल देश के लिए 4 अप्रैल 2011 को जंतर-मंतर से कांग्रेस का सफाया हुआ. आज 1 मार्च 2026 से भाजपा की उल्टी गिनती शुरू

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<strong>केजरीवाल के राजनीतिक संघर्ष की नई शुरुआत</strong>

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यह रैली केजरीवाल के राजनीतिक संघर्ष की नई शुरुआत का प्रतीक बनी. उन्होंने देशवासियों से एकजुट होने की अपील की. ईमानदारी और जनसेवा पर जोर देते हुए कहा कि तानाशाही नहीं चलेगी. देश बदलेगा, जब लोग मिलकर लड़ेंगे. रैली में उत्साह था, लोग नारे लगा रहे थे. केजरीवाल ने कहा कि आप की लड़ाई जारी रहेगी. दिल्ली से शुरू होकर पूरे देश में फैलेगी. मोदी सरकार के खिलाफ जनता का गुस्सा साफ दिखा. उन्होंने गुजरात, दिल्ली और पूरे भारत की समस्याओं पर विस्तार से बात की. प्रदूषण, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, हर मुद्दे पर मोदी को घेरा.

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<strong>केजरीवाल ने अपनी आईआईटी पढ़ाई और नौकरी के दिनों को याद किया</strong>

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केजरीवाल ने अपनी आईआईटी पढ़ाई और नौकरी के दिनों को याद किया. कहा कि अमेरिका जाने का मौका था, लेकिन देश के लिए रुके. इनकम टैक्स में ईमानदारी से काम किया. रिश्वत न लेने की वजह से मशहूर हुए. मुख्यमंत्री बनने के बाद भी ईमानदार रहे. मोदी की जांचों में कुछ न मिला. यह साबित करता है कि ईमानदारी जीतती है. उन्होंने युवाओं से अपील की कि राजनीति में आएं, देश बदलें, मोदी का डर न मानें.

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<strong>केजरीवाल ने पूछा 12 साल के शासन में मोदी ने क्या किया?</strong>

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केजरीवाल ने पूछा, कांग्रेस के घोटाले से छुटकारा मिला, लेकिन मोदी ने नए घोटाले किए. पेपर लीक, ड्रग्स, जमीन सौदे, गुजरात मॉडल फेल, सड़कें खराब, पुल गिरते, विदेशी देशों से तुलना की. कहा कि गरीब देश भी बेहतर हैं. भारत क्यों पीछे? क्योंकि मोदी को रुचि नहीं. सिर्फ चुनाव जीतना. प्रदूषण पर चिंता जताई. कहा कि सांस लेना मुश्किल, बीजिंग ने सुधारा, हम क्यों नहीं? विकसित भारत का सपना झूठा, पहले रहने लायक बनाओ. भ्रष्टाचार पर चुनौती. गुजरात में ड्रग्स पकड़ी, कार्रवाई क्यों नहीं? नकली दारू बंद क्यों नहीं? दोस्तों को जमीन क्यों दी? पुल क्यों गिरते? पेपर लीक क्यों? क्योंकि मोदी शामिल है.

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<strong>केजरीवाल ने कहा की मुझे ईमानदारी की सजा मिली जेल</strong>
तानाशाही पर केजरीवाल ने कहा, "पढ़े-लिखे लोगों से डरो, सोनम वांगचुक जेल में है. औरतों से डरो, ट्रंप से डरो, अंत करीब है. गिरफ्तारी से संदेश, ईमानदार मत बनो, नौजवानों, राजनीति में मत आओ. लेकिन हम डरेंगे नहीं." AAP की दिल्ली सरकार की तारीफ. स्कूल और अस्पताल बेहतर किए, उम्मीद जगाई मोदी ने उसे तोड़ दिया. BJP दिल्ली में फेल हो गई, वादे झूठे थे, नौकरियां छीन ली गईं, दिल्ली बर्बाद हो गई, लोग केजरीवाल को याद करते हैं. BJP चुनाव हार जाएगी. मोदी की सत्ता की हवस, देश नहीं चला सकते, साजिश, 2011 की तरह, BJP आज खत्म हो जाएगी.

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		<title>भारत में तानाशाही राजनीति बदलने में पंजाब साथ, 2027 मे़ं &#8216;आप&#8217; को देगा 100 सीटों का तोहफा- भगवंत सिंह मान</title>
		<link>https://trendstopic.in/punjab-will-join-us-in-changing-dictatorial-politics-in-india-will-gift-100-seats-to-aap-in-2027-bhagwant-singh-mann/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Editor News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 02 Mar 2026 05:21:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[AamAadmiParty]]></category>
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		<category><![CDATA[Politics]]></category>
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					<description><![CDATA[<!-- wp:paragraph -->

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में जंतर मंतर पर आयोजित रैली में पंजाब के सीएम भगवंत सिंह मान ने भाजपा और मोदी सरकार को आइना दिखाया। उन्होंने कहा कि भारत में तानाशाही राजनीति को बदलने में पंजाब आम आदमी पार्टी के साथ खड़ा है। 2027 मे़ं पंजाब की जनता ‘‘आप’’ को 100 सीटों का तोहफा देगी। अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत पूरी आम आदमी पार्टी चट्टान की तरह डटकर देश की लड़ाई लड़ रही है। भाजपा ने एक साजिश के तहत ‘‘आप’’ को खत्म करने की कोशिश की, लेकिन अब वह साजिश देश के सामने बेनकाब हो चुकी है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार पंजाब विरोधी है। इसलिए आरडीएफ, जीएसटी समेत पंजाबियों के हक का करोड़ों रुपए रोककर बैठी है। हम देश से नफ़रत और झूठ की राजनीति को ख़त्म करने आए हैं और उस तरफ सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहे हैं।

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अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत पूरी आम आदमी पार्टी चट्टान की तरह डटकर देश की लड़ाई लड़ रही- भगवंत सिंह मान

<!-- /wp:paragraph --> <!-- wp:paragraph -->

जंतर मंतर पर अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आयोजित रैली को वर्चुअली संबोधित करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि जब भी आम आदमी पार्टी पर कोई मुसीबत आती है, तो वह दोगुनी-चौगुनी ताकत से उभरती है। भगवान हमें हमेशा उसी नीम के पेड़ के नीचे, इसी जंतर-मंतर पर ले आते हैं, जो आम आदमी पार्टी का जन्म स्थान है। यह कार्यक्रम पहले से ही तय था, लेकिन हमें यह नहीं पता था कि जज साहब का यह ऐतिहासिक फैसला इतनी जल्दी आ जाएगा। आज पूरे देश को यह बताने का मौका मिला है कि सच हमेशा सच ही होता है।

<!-- /wp:paragraph --> <!-- wp:paragraph -->

भगवंत मान ने कहा कि सच बोलने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि उसे एक बार बोलकर दोबारा याद नहीं रखना पड़ता, जबकि झूठ बोलने वालों को हमेशा याद रखना पड़ता है कि पिछली बार क्या कहा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले जीएसटी का विरोध करते थे, लेकिन बाद में उन्हें ही इसे लागू करना पड़ा। पहले वे तेल की बढ़ती कीमतों पर बोलते थे, लेकिन अब जब कीमतें उससे भी ज्यादा बढ़ गई हैं, तो वे इसे मास्टर स्ट्रोक कहते हैं। आम आदमी पार्टी देश की राजनीति को बदलने और उसमें ईमानदारी भरने आई है। अरविंद केजरीवाल ने दूसरी राजनीतिक पार्टियों को मजबूर कर दिया है कि वे नफरत और धर्म की बातों के बजाय अपने घोषणापत्र में स्कूलों, अस्पतालों, बिजली, रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर की बात लिखें।

<!-- /wp:paragraph --> <!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading">भाजपा ने साजिश के तहत ‘‘आप’’ को खत्म करने की कोशिश की, अब वह देश के सामने बेनकाब हो चुकी है- भगवंत सिंह मान</h2>
<!-- /wp:heading --> <!-- wp:paragraph -->

भगवंत मान ने बताया कि कैसे निजी अस्पताल वालों ने प्रधानमंत्री से शिकायत की होगी कि दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में मुफ्त और अच्छा इलाज होने के कारण उनका धंधा ठप हो गया है, जिसके बाद प्रधानमंत्री ने सत्येंद्र जैन को जेल में डाल दिया। इसी तरह, निजी स्कूल वालों ने शिकायत की होगी कि बच्चे सरकारी स्कूलों में जा रहे हैं और वे अब पार्टी को चंदा नहीं दे पाएंगे, तो प्रधानमंत्री ने मनीष सिसोदिया को जेल में डाल दिया। जब देखा गया कि मुफ्त बिजली, मुफ्त दवाइयां, बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर, बजट 30 करोड़ से बढ़कर 60 हजार करोड़ हो गया और इस कारण चुनाव में जीतना मुश्किल हो जाएगा, तो कोई झूठा मामला ढूंढकर अरविंद केजरीवाल और उनकी पूरी टीम को ही अंदर कर दिया गया। उन्होंने कहा कि हमारे देश में सजा शायद उतनी कड़ी नहीं होती, लेकिन अदालतों के चक्कर काटना ही असल सजा होती है।

<!-- /wp:paragraph --> <!-- wp:paragraph -->

भगवंत मान ने उस मुश्किल दौर को याद करते हुए बताया कि जब पार्टी के शीर्ष पांच नेता और पूरा थिंक टैंक जेल में था, तब जालंधर का उपचुनाव आ गया था। फैसला लेने वाली कोई अथॉरिटी बाहर नहीं थी। ऐसे में हमने अपनी बैकअप टीम के साथ मिलकर काम चलाया। जेल में अरविंद केजरीवाल से मुलाकात के दौरान मिले मार्गदर्शन का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि अरविंद केजरीवाल ने हमें हिम्मत दी थी कि भगवान साथ देगा, लोगों के दरवाजे खटखटाओ। इसके बाद हमने जालंधर उपचुनाव और दूसरी सांसद सीट भी बड़े अंतर से जीती, जिससे हमारा हौसला और बढ़ा।

<!-- /wp:paragraph --> <!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading">मोदी सरकार पंजाब विरोधी है, आरडीएफ, जीएसटी समेत पंजाबियों के हक का करोड़ों रुपए रोककर बैठी है- भगवंत सिंह मान</h2>
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भगवंत मान ने बताया कि जब मैं जेल में अरविंद केजरीवाल से मुलाकात के लिए जाता था, तब भी अरविंद केजरीवाल केवल पंजाब और वहां के लोगों का हाल पूछते थे। वे पूछते थे कि लोगों को मुफ्त बिजली मिल रही है या नहीं, खेतों के लिए पानी का काम चल रहा है या नहीं और क्या कोई दिक्कत तो नहीं है? वे हमेशा यही निर्देश देते थे कि जो भी भ्रष्टाचार करे, जिसकी भी रिपोर्ट आए, उसे अंदर कर दो, क्योंकि हमें देश को सुधारना है।

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भगवंत मान ने आगे कहा कि क्रांतिकारियों के लिए जेल घी की तरह काम करती है। उन्होंने शहीद भगत सिंह का उदाहरण देते हुए बताया कि जब असेंबली में बम फेंकने की योजना बनी थी, तब सूची में उनका नाम नहीं था। भगत सिंह ने अपना नाम खुद सूची में जोड़ा था। इस पर चंद्रशेखर आजाद (नौजवान भारत सभा के प्रमुख) ने उन्हें चेतावनी दी थी कि सांडर्स की हत्या के मामले में उन्हें लाहौर ले जाकर फांसी दे दी जाएगी। लेकिन भगत सिंह ने तर्क दिया कि पार्टी की लहर थोड़ी धीमी पड़ गई है और उसे उभारने की जरूरत है। भगत सिंह ने कहा था कि बम फेंकने वालों में केवल वे ही अंग्रेजी बोल सकते हैं, इसलिए वे अपना मुकदमा खुद लड़ेंगे और अदालत में मीडिया को बुलाएंगे, जिससे उनकी बात पूरे देश में जाएगी और पार्टी को ताकत मिलेगी। भगवंत मान ने कहा कि ठीक वैसा ही हुआ और पूरे देश में भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के नाम की धूम मच गई।

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भगवंत मान ने इस ऐतिहासिक प्रसंग को वर्तमान से जोड़ते हुए कहा कि आज इतिहास खुद को दोहरा रहा है। अरविंद केजरीवाल ने भी जेल से यही संदेश दिया था कि झुकना नहीं है। आम आदमी पार्टी अब और बड़ी होकर निकलेगी। आम आदमी पार्टी एक राष्ट्रीय पार्टी बनकर उभरी है। उन्होंने बताया कि जब अदालत का फैसला आया, तो लोग मुझे बधाई देते हुए कह रहे हैं कि अब आम आदमी पार्टी को कोई नहीं रोक सकता, जैसे दरिया अपना रास्ता खुद बनाता है, उस पर कोई रोक नहीं लगा सकता।
भगवंत मान ने आगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को संदेश दिया कि वे देश की गद्दी पर बैठे किरायेदार हैं, यह देश उनका निजी मकान नहीं है। इस देश की मिट्टी में भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, करतार सिंह सराभा और अशफाक उल्ला खान जैसों का खून शामिल है, यह किसी के बाप का हिंदुस्तान नहीं है।

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भगवंत मान ने पंजाब के साथ केंद्र सरकार के सौतेले व्यवहार का मुद्दा उठाते हुए कहा कि देश की आजादी में 90 फीसदी कुर्बानियां पंजाबियों ने दीं, लेकिन आज केंद्र सरकार पंजाब का 8000 करोड़ रुपए का आरडीएफ रोक लेती है और जीएसटी का पैसा नहीं देती। पंजाब में आई ऐतिहासिक बाढ़ के लिए मात्र 1600 करोड़ रुपए की घोषणा की गई, लेकिन उसमें से कुछ भी नहीं दिए गए।
भगवंत मान ने कहा कि भाजपा पंजाब विरोधी और आम आदमी पार्टी विरोधी हो चुकी है। उन्हें मनोवैज्ञानिक रूप से इतना डर लगने लगा है कि सपने में भी आम आदमी पार्टी और झाड़ू नजर आता होगा। उन्होंने कटाक्ष किया कि अगर केंद्र सरकार का बस चले तो वे राष्ट्रगान से भी पंजाब शब्द निकाल कर उसे ‘यूपी सिंध गुजरात मराठा’ कर दें।

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<h2 class="wp-block-heading">हम देश से नफ़रत और झूठ की राजनीति को ख़त्म करने आए हैं और उस तरफ सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहे- भगवंत सिंह मान</h2>
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सीमाओं की सुरक्षा और देश के लिए पंजाब के योगदान को याद करते हुए भगवंत मान ने कहा कि जब भी दुश्मन की पहली गोली आती है, तो सरहदों पर पंजाबियों के सीने ही तने होते हैं। जब देश में अनाज की कमी हुई, तो पंजाबियों ने अपनी मिट्टी से सोना (हरित क्रांति) उगाकर देश के भंडार भर दिए। जब देश को आजादी की जरूरत थी, तब भी पंजाबियों ने 90 फीसदी कुर्बानियां दीं। भगवंत मान ने याद दिलाया कि जब आम आदमी पार्टी का पौधा लगा था, तब भी सबसे पहले चार हरे पत्ते (सांसद) पंजाबियों ने ही दिए थे। उन्होंने आश्वस्त किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में भी पंजाब भारी बहुमत (सेंचुरी) के साथ आम आदमी पार्टी की सरकार बनाकर हमें तोहफा देगा।

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विरोधी दलों पर कटाक्ष करते हुए भगवंत मान ने एक शेर सुनाया, ष्झूठों ने झूठों से कहा कि सच बोलो, घर के अंदर झूठों की मंडी है, दरवाजे पर लिखा है सच बोलो। गंगा मैया, डूबने वाले सभी अपने थे, यह कश्ती में छेद किसने किया है? सच बोलो।ष् उन्होंने कहा कि सच बोलने की कीमत चुकानी पड़ती है, लेकिन सच का सूरज कभी छुपता नहीं है।

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भगवंत मान ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और पूरी टीम को विश्वास दिलाते हुए कहा कि पंजाब हमेशा एक चट्टान की तरह उनके साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में कहीं भी आफत आए, चाहे तुर्की में भूकंप हो, श्रीलंका में सुनामी या नेपाल में बाढ़, रेड क्रॉस की टीम पहुंचे न पहुंचे, लेकिन पंजाबियों और गुरु नानक देव जी का लंगर सबसे पहले शुरू हो जाता है। पंजाबी सरबत दा भला (सबका भला) मांगने और कुर्बानियां देने वाले लोग हैं। उन्होंने कश्मीरी पंडितों और हिंदू धर्म की रक्षा के लिए गुरु तेग बहादुर जी की शहादत को भी याद किया और सच के साथ खड़े रहने का प्रण लिया।

<!-- /wp:paragraph -->]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<!-- wp:paragraph -->

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में जंतर मंतर पर आयोजित रैली में पंजाब के सीएम भगवंत सिंह मान ने भाजपा और मोदी सरकार को आइना दिखाया। उन्होंने कहा कि भारत में तानाशाही राजनीति को बदलने में पंजाब आम आदमी पार्टी के साथ खड़ा है। 2027 मे़ं पंजाब की जनता ‘‘आप’’ को 100 सीटों का तोहफा देगी। अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत पूरी आम आदमी पार्टी चट्टान की तरह डटकर देश की लड़ाई लड़ रही है। भाजपा ने एक साजिश के तहत ‘‘आप’’ को खत्म करने की कोशिश की, लेकिन अब वह साजिश देश के सामने बेनकाब हो चुकी है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार पंजाब विरोधी है। इसलिए आरडीएफ, जीएसटी समेत पंजाबियों के हक का करोड़ों रुपए रोककर बैठी है। हम देश से नफ़रत और झूठ की राजनीति को ख़त्म करने आए हैं और उस तरफ सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहे हैं।

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अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत पूरी आम आदमी पार्टी चट्टान की तरह डटकर देश की लड़ाई लड़ रही- भगवंत सिंह मान

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जंतर मंतर पर अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आयोजित रैली को वर्चुअली संबोधित करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि जब भी आम आदमी पार्टी पर कोई मुसीबत आती है, तो वह दोगुनी-चौगुनी ताकत से उभरती है। भगवान हमें हमेशा उसी नीम के पेड़ के नीचे, इसी जंतर-मंतर पर ले आते हैं, जो आम आदमी पार्टी का जन्म स्थान है। यह कार्यक्रम पहले से ही तय था, लेकिन हमें यह नहीं पता था कि जज साहब का यह ऐतिहासिक फैसला इतनी जल्दी आ जाएगा। आज पूरे देश को यह बताने का मौका मिला है कि सच हमेशा सच ही होता है।

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भगवंत मान ने कहा कि सच बोलने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि उसे एक बार बोलकर दोबारा याद नहीं रखना पड़ता, जबकि झूठ बोलने वालों को हमेशा याद रखना पड़ता है कि पिछली बार क्या कहा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले जीएसटी का विरोध करते थे, लेकिन बाद में उन्हें ही इसे लागू करना पड़ा। पहले वे तेल की बढ़ती कीमतों पर बोलते थे, लेकिन अब जब कीमतें उससे भी ज्यादा बढ़ गई हैं, तो वे इसे मास्टर स्ट्रोक कहते हैं। आम आदमी पार्टी देश की राजनीति को बदलने और उसमें ईमानदारी भरने आई है। अरविंद केजरीवाल ने दूसरी राजनीतिक पार्टियों को मजबूर कर दिया है कि वे नफरत और धर्म की बातों के बजाय अपने घोषणापत्र में स्कूलों, अस्पतालों, बिजली, रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर की बात लिखें।

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<h2 class="wp-block-heading">भाजपा ने साजिश के तहत ‘‘आप’’ को खत्म करने की कोशिश की, अब वह देश के सामने बेनकाब हो चुकी है- भगवंत सिंह मान</h2>
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भगवंत मान ने बताया कि कैसे निजी अस्पताल वालों ने प्रधानमंत्री से शिकायत की होगी कि दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में मुफ्त और अच्छा इलाज होने के कारण उनका धंधा ठप हो गया है, जिसके बाद प्रधानमंत्री ने सत्येंद्र जैन को जेल में डाल दिया। इसी तरह, निजी स्कूल वालों ने शिकायत की होगी कि बच्चे सरकारी स्कूलों में जा रहे हैं और वे अब पार्टी को चंदा नहीं दे पाएंगे, तो प्रधानमंत्री ने मनीष सिसोदिया को जेल में डाल दिया। जब देखा गया कि मुफ्त बिजली, मुफ्त दवाइयां, बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर, बजट 30 करोड़ से बढ़कर 60 हजार करोड़ हो गया और इस कारण चुनाव में जीतना मुश्किल हो जाएगा, तो कोई झूठा मामला ढूंढकर अरविंद केजरीवाल और उनकी पूरी टीम को ही अंदर कर दिया गया। उन्होंने कहा कि हमारे देश में सजा शायद उतनी कड़ी नहीं होती, लेकिन अदालतों के चक्कर काटना ही असल सजा होती है।

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भगवंत मान ने उस मुश्किल दौर को याद करते हुए बताया कि जब पार्टी के शीर्ष पांच नेता और पूरा थिंक टैंक जेल में था, तब जालंधर का उपचुनाव आ गया था। फैसला लेने वाली कोई अथॉरिटी बाहर नहीं थी। ऐसे में हमने अपनी बैकअप टीम के साथ मिलकर काम चलाया। जेल में अरविंद केजरीवाल से मुलाकात के दौरान मिले मार्गदर्शन का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि अरविंद केजरीवाल ने हमें हिम्मत दी थी कि भगवान साथ देगा, लोगों के दरवाजे खटखटाओ। इसके बाद हमने जालंधर उपचुनाव और दूसरी सांसद सीट भी बड़े अंतर से जीती, जिससे हमारा हौसला और बढ़ा।

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<h2 class="wp-block-heading">मोदी सरकार पंजाब विरोधी है, आरडीएफ, जीएसटी समेत पंजाबियों के हक का करोड़ों रुपए रोककर बैठी है- भगवंत सिंह मान</h2>
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भगवंत मान ने बताया कि जब मैं जेल में अरविंद केजरीवाल से मुलाकात के लिए जाता था, तब भी अरविंद केजरीवाल केवल पंजाब और वहां के लोगों का हाल पूछते थे। वे पूछते थे कि लोगों को मुफ्त बिजली मिल रही है या नहीं, खेतों के लिए पानी का काम चल रहा है या नहीं और क्या कोई दिक्कत तो नहीं है? वे हमेशा यही निर्देश देते थे कि जो भी भ्रष्टाचार करे, जिसकी भी रिपोर्ट आए, उसे अंदर कर दो, क्योंकि हमें देश को सुधारना है।

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भगवंत मान ने आगे कहा कि क्रांतिकारियों के लिए जेल घी की तरह काम करती है। उन्होंने शहीद भगत सिंह का उदाहरण देते हुए बताया कि जब असेंबली में बम फेंकने की योजना बनी थी, तब सूची में उनका नाम नहीं था। भगत सिंह ने अपना नाम खुद सूची में जोड़ा था। इस पर चंद्रशेखर आजाद (नौजवान भारत सभा के प्रमुख) ने उन्हें चेतावनी दी थी कि सांडर्स की हत्या के मामले में उन्हें लाहौर ले जाकर फांसी दे दी जाएगी। लेकिन भगत सिंह ने तर्क दिया कि पार्टी की लहर थोड़ी धीमी पड़ गई है और उसे उभारने की जरूरत है। भगत सिंह ने कहा था कि बम फेंकने वालों में केवल वे ही अंग्रेजी बोल सकते हैं, इसलिए वे अपना मुकदमा खुद लड़ेंगे और अदालत में मीडिया को बुलाएंगे, जिससे उनकी बात पूरे देश में जाएगी और पार्टी को ताकत मिलेगी। भगवंत मान ने कहा कि ठीक वैसा ही हुआ और पूरे देश में भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के नाम की धूम मच गई।

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भगवंत मान ने इस ऐतिहासिक प्रसंग को वर्तमान से जोड़ते हुए कहा कि आज इतिहास खुद को दोहरा रहा है। अरविंद केजरीवाल ने भी जेल से यही संदेश दिया था कि झुकना नहीं है। आम आदमी पार्टी अब और बड़ी होकर निकलेगी। आम आदमी पार्टी एक राष्ट्रीय पार्टी बनकर उभरी है। उन्होंने बताया कि जब अदालत का फैसला आया, तो लोग मुझे बधाई देते हुए कह रहे हैं कि अब आम आदमी पार्टी को कोई नहीं रोक सकता, जैसे दरिया अपना रास्ता खुद बनाता है, उस पर कोई रोक नहीं लगा सकता।
भगवंत मान ने आगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को संदेश दिया कि वे देश की गद्दी पर बैठे किरायेदार हैं, यह देश उनका निजी मकान नहीं है। इस देश की मिट्टी में भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, करतार सिंह सराभा और अशफाक उल्ला खान जैसों का खून शामिल है, यह किसी के बाप का हिंदुस्तान नहीं है।

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भगवंत मान ने पंजाब के साथ केंद्र सरकार के सौतेले व्यवहार का मुद्दा उठाते हुए कहा कि देश की आजादी में 90 फीसदी कुर्बानियां पंजाबियों ने दीं, लेकिन आज केंद्र सरकार पंजाब का 8000 करोड़ रुपए का आरडीएफ रोक लेती है और जीएसटी का पैसा नहीं देती। पंजाब में आई ऐतिहासिक बाढ़ के लिए मात्र 1600 करोड़ रुपए की घोषणा की गई, लेकिन उसमें से कुछ भी नहीं दिए गए।
भगवंत मान ने कहा कि भाजपा पंजाब विरोधी और आम आदमी पार्टी विरोधी हो चुकी है। उन्हें मनोवैज्ञानिक रूप से इतना डर लगने लगा है कि सपने में भी आम आदमी पार्टी और झाड़ू नजर आता होगा। उन्होंने कटाक्ष किया कि अगर केंद्र सरकार का बस चले तो वे राष्ट्रगान से भी पंजाब शब्द निकाल कर उसे ‘यूपी सिंध गुजरात मराठा’ कर दें।

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<h2 class="wp-block-heading">हम देश से नफ़रत और झूठ की राजनीति को ख़त्म करने आए हैं और उस तरफ सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहे- भगवंत सिंह मान</h2>
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सीमाओं की सुरक्षा और देश के लिए पंजाब के योगदान को याद करते हुए भगवंत मान ने कहा कि जब भी दुश्मन की पहली गोली आती है, तो सरहदों पर पंजाबियों के सीने ही तने होते हैं। जब देश में अनाज की कमी हुई, तो पंजाबियों ने अपनी मिट्टी से सोना (हरित क्रांति) उगाकर देश के भंडार भर दिए। जब देश को आजादी की जरूरत थी, तब भी पंजाबियों ने 90 फीसदी कुर्बानियां दीं। भगवंत मान ने याद दिलाया कि जब आम आदमी पार्टी का पौधा लगा था, तब भी सबसे पहले चार हरे पत्ते (सांसद) पंजाबियों ने ही दिए थे। उन्होंने आश्वस्त किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में भी पंजाब भारी बहुमत (सेंचुरी) के साथ आम आदमी पार्टी की सरकार बनाकर हमें तोहफा देगा।

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विरोधी दलों पर कटाक्ष करते हुए भगवंत मान ने एक शेर सुनाया, ष्झूठों ने झूठों से कहा कि सच बोलो, घर के अंदर झूठों की मंडी है, दरवाजे पर लिखा है सच बोलो। गंगा मैया, डूबने वाले सभी अपने थे, यह कश्ती में छेद किसने किया है? सच बोलो।ष् उन्होंने कहा कि सच बोलने की कीमत चुकानी पड़ती है, लेकिन सच का सूरज कभी छुपता नहीं है।

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भगवंत मान ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और पूरी टीम को विश्वास दिलाते हुए कहा कि पंजाब हमेशा एक चट्टान की तरह उनके साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में कहीं भी आफत आए, चाहे तुर्की में भूकंप हो, श्रीलंका में सुनामी या नेपाल में बाढ़, रेड क्रॉस की टीम पहुंचे न पहुंचे, लेकिन पंजाबियों और गुरु नानक देव जी का लंगर सबसे पहले शुरू हो जाता है। पंजाबी सरबत दा भला (सबका भला) मांगने और कुर्बानियां देने वाले लोग हैं। उन्होंने कश्मीरी पंडितों और हिंदू धर्म की रक्षा के लिए गुरु तेग बहादुर जी की शहादत को भी याद किया और सच के साथ खड़े रहने का प्रण लिया।

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