पंजाब में बड़ा सियासी हलचल देखा जा रहा है. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके बेटे रणिंदर सिंह को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) उल्लंघन के एक पुराने मामले में पूछताछ के लिए समन जारी किया है. यह मामला 2016 का है. इसमें पिता-पुत्र पर विदेशी संपत्तियों के लाभार्थी होने का आरोप है. इसमें स्विस बैंक में खाते होने की बात शामिल है. ईडी ने अमरिंदर सिंह को 12 फरवरी को जालंधर कार्यालय में पेश होने के लिए कहा है, जबकि रणिंदर सिंह को 13 फरवरी को बुलाया गया है. हालांकि, 83 वर्षीय अमरिंदर सिंह इस समन पर पेश होने की संभावना कम है क्योंकि उन्होंने 10 या 11 फरवरी को मोहाली के एक निजी अस्पताल (फोर्टिस) में घुटने की रिप्लेसमेंट सर्जरी कराई है. सर्जरी के बाद उन्हें आईसीयू में शिफ्ट किया गया था, जहां उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है.
ईडी उन्हें नई तारीख दे सकता है. रणिंदर सिंह ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि कानून का पालन करने वाले नागरिकों के रूप में, हम हर जांच एजेंसी के साथ पूर्ण सहयोग करेंगे. हमें कानून के शासन में पूर्ण विश्वास है और हम आश्वस्त हैं कि सत्य और न्याय की जीत होगी.
क्या है मामला
यह मामला 2016 में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा दायर चार्जशीट से शुरू हुआ, जब अमरिंदर सिंह कांग्रेस में थे. आईटी विभाग ने लुधियाना की चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट में शिकायत दर्ज की, जिसमें रणिंदर सिंह को विदेशी संपत्तियों का लाभार्थी बताया गया. आरोप है कि रणिंदर सिंह ने HSBC प्राइवेट बैंक (सुइस), जेनेवा, स्विट्जरलैंड में बैंक खाते बनाए रखे और नियंत्रित किए. जांच में पता चला कि रणिंदर सिंह जुलाई 2005 में ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में ‘जैकरैंडा ट्रस्ट’ के ‘सेटलर’ थे, जिसमें HSBC ट्रस्ट कंपनी लिमिटेड ट्रस्टी के रूप में शामिल थी.
आई-टी विभाग ने दावा किया कि रणिंदर ने एजेंसी को गुमराह किया और कहा कि उनके पास परिवार की विदेशी आय और ट्रस्ट से संबंधित दस्तावेज नहीं हैं. फ्रांस सरकार से मिली क्रेडिबल जानकारी (मास्टर शीट्स) के आधार पर यह पता चला कि सिंह परिवार विदेशी बिजनेस एंटिटी के माध्यम से संपत्तियां नियंत्रित कर रहा था, जिसमें दुबई में संपत्ति भी शामिल है.
पिता-पुत्र ने लुधियाना कोर्ट के आदेश के खिलाफ पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में अपील की, जिसमें दावा किया गया कि आई-टी रिकॉर्ड में फ्रांस गणराज्य से मिली ‘गुप्त’ जानकारी है और डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट (DTAA) के तहत इसे किसी तीसरे व्यक्ति को नहीं दिया जा सकता. लेकिन सितंबर 2025 में हाईकोर्ट ने एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज के आदेश को बरकरार रखा और कहा कि यह वेल-रीजनड है तथा कानून में कोई त्रुटि नहीं है. इस आदेश के बाद ED ने जांच आगे बढ़ाई और समन जारी किए.
राजनीतिक और कानूनी संदर्भ
यह मामला अमरिंदर सिंह के राजनीतिक करियर में पुराना है. 2020 में भी रणिंदर सिंह को ED ने जालंधर में समन किया था. ED की जांच FEMA के तहत है, जबकि आई-टी विभाग ने टैक्स चोरी और अघोषित संपत्तियों का आरोप लगाया था. विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट के 2025 के फैसले ने ED को दस्तावेजों की जांच की अनुमति दी, जिससे यह मामला फिर सक्रिय हुआ. अमरिंदर सिंह दो बार पंजाब के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और वर्तमान में भाजपा में हैं. उन्होंने हमेशा इन आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध बताया है. परिवार ने सहयोग का वादा किया है, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से अमरिंदर सिंह की पेशी टल सकती है.
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