हरियाणा में सरकारी पैसों से जुड़े करीब ₹504 करोड़ के alleged bank scam में CBI ने बड़ा कदम उठाया है। जांच एजेंसी ने इस मामले में 6 IAS अधिकारियों समेत कुल 19 लोगों के खिलाफ तीसरी chargesheet दाखिल की है। मामला IDFC First Bank और AU Small Finance Bank में सरकारी पैसों को कथित तौर पर गलत तरीके से जमा कराने, निकालने और दूसरी जगह transfer करने से जुड़ा है।
CBI की जांच के मुताबिक, हरियाणा के अलग-अलग सरकारी departments और institutions का पैसा IDFC First Bank की Chandigarh Sector-32 branch में मौजूद accounts में जमा कराया गया। आरोप है कि कई मामलों में सरकारी पैसे को एक bank में रखने की तय limit का भी पालन नहीं किया गया।
जांच में सामने आया है कि सरकारी पैसों को बाद में कथित तौर पर fraudulent transactions, fake या non-existent Fixed Deposits और दूसरे documents के जरिए दूसरी entities या accounts में transfer किया गया।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये सभी CBI के आरोप हैं। अभी अदालत में इन आरोपों का साबित होना बाकी है।
₹50 करोड़ की limit आखिर क्यों बनी बड़ा सवाल?
इस पूरे मामले में ₹50 करोड़ की limit सबसे अहम points में से एक है।
हरियाणा सरकार के Finance Department के rules के मुताबिक, किसी एक bank में सरकारी funds रखने की एक तय सीमा थी। यह limit ₹50 करोड़ बताई गई है।
CBI का आरोप है कि इसके बावजूद कुछ सरकारी departments और institutions ने IDFC First Bank में इससे ज्यादा रकम जमा कराई।
यानी सवाल यह है कि जब government rules में limit तय थी, तो उसके बावजूद करोड़ों रुपये एक ही bank में क्यों जमा कराए गए?
इसके बाद इन पैसों के साथ कथित तौर पर जो transactions हुए, वही अब CBI की जांच का बड़ा हिस्सा हैं।
Chargesheet में 6 IAS अधिकारियों के नाम
CBI की 2 सितंबर 2026 को दाखिल तीसरी chargesheet में 6 IAS अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है।
इनमें Mohd. Shayin, Dr. Saket Kumar, Vineet Garg, retired IAS officer Pradeep Kumar, Ram Kumar Singh और Pankaj Agarwal के नाम शामिल हैं।
इनके अलावा IDFC First Bank के 3 officials, AU Small Finance Bank के एक official और हरियाणा सरकार के 9 अन्य अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है।
इस तरह तीसरी chargesheet में कुल 19 आरोपी हैं।
Vineet Garg और Pradeep Kumar पर क्या आरोप?
CBI के मुताबिक, Vineet Garg और retired IAS officer Pradeep Kumar की कथित भूमिका Haryana State Pollution Control Board यानी HSPCB से जुड़े मामले में रही।
आरोप है कि HSPCB के IDFC First Bank में accounts खुलवाए गए और Finance Department की ₹50 करोड़ की limit के बावजूद उनमें government funds जमा किए जाते रहे।
CBI के अनुसार, HSPCB के दो accounts से करीब ₹169.69 करोड़ का alleged loss हुआ।
जांच में इन accounts में 49 fraudulent debit transactions और 6 fraudulent credit entries मिलने की बात कही गई है।
मनीष जिंदल पर भी गंभीर आरोप
इसी मामले में CBI ने मनीष जिंदल की भूमिका को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।
जांच एजेंसी का कहना है कि मनीष जिंदल ने Vineet Garg के साथ अपने पुराने professional connections का इस्तेमाल करते हुए HSPCB का पैसा IDFC First Bank में park करवाने में मदद की।
CBI papers के मुताबिक, इसके बदले उसे कथित तौर पर ₹25 लाख cash, दो iPhone Pro 17 और 75 ग्राम gold मिला।
हालांकि, ये सभी बातें फिलहाल जांच एजेंसी के आरोप हैं और अदालत में अभी साबित नहीं हुई हैं।
Mohd. Shayin का नाम HPGCL मामले से जुड़ा
IAS अधिकारी Mohd. Shayin का नाम Haryana Power Generation Corporation Limited यानी HPGCL से जुड़े मामले में सामने आया है।
CBI के अनुसार, जब वह HPGCL के Managing Director थे, उस दौरान IDFC First Bank में account खुलवाने और उसमें ₹50 करोड़ जमा कराने में उनकी कथित भूमिका रही।
अब जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह account किस process के तहत खोला गया, government funds इसमें क्यों जमा किए गए और बाद में इस रकम के साथ क्या हुआ।
Ram Kumar Singh पर ₹79.46 करोड़ के alleged loss का मामला
इस पूरे केस में IAS अधिकारी Ram Kumar Singh की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है।
Ram Kumar Singh Panchkula Municipal Corporation के Commissioner रह चुके हैं। CBI ने उन्हें 18 जून 2026 को गिरफ्तार किया था।
CBI का आरोप है कि Panchkula Municipal Corporation के IDFC First Bank account से करीब ₹79.46 करोड़ का alleged loss हुआ।
जांच के मुताबिक, government money को Fixed Deposit यानी FD में रखने के नाम पर कई signed cheques दिए गए थे। लेकिन CBI का आरोप है कि ये FDs वास्तव में बनाए ही नहीं गए।
इसके बजाय रकम को कथित तौर पर दूसरी entities और accounts में transfer कर दिया गया।
जांच में इस account में करीब 22 fraudulent debit entries सामने आने की बात कही गई है।
Ram Kumar Singh इस मामले में गिरफ्तार किए गए पहले Haryana-cadre IAS officer बताए गए हैं।
Pankaj Agarwal पर भी CBI का शिकंजा
IAS अधिकारी Pankaj Agarwal को भी जून 2026 में CBI ने गिरफ्तार किया था।
उनका नाम मुख्य रूप से दो सरकारी institutions से जुड़े मामले में सामने आया है—
- Haryana School Shiksha Pariyojana Parishad यानी HSSPP
- Haryana State Agriculture Marketing Board यानी HSAMB
CBI के मुताबिक, इन institutions से जुड़े IDFC First Bank accounts में हुए fraudulent transactions से करीब ₹60.54 करोड़ का alleged loss हुआ।
जांच एजेंसी का आरोप है कि इन accounts में government rules के मुताबिक तय limit से ज्यादा पैसा transfer किया गया और बाद में fraudulent transactions के जरिए रकम बाहर निकाली गई।
Dr. Saket Kumar पर क्या आरोप है?
IAS अधिकारी Dr. Saket Kumar का नाम Haryana के Development and Panchayat Department से जुड़े account के मामले में सामने आया है।
CBI के अनुसार, इस account से हुए fraudulent transactions के चलते करीब ₹48.90 करोड़ का alleged loss हुआ।
जांच एजेंसी अब यह देख रही है कि इस सरकारी department का account IDFC First Bank में किस process के तहत खोला गया और इसमें government funds जमा कराने का फैसला कैसे लिया गया।
इसके बाद इस रकम से जुड़े transactions भी जांच के दायरे में हैं।
क्या अब 3 IAS अधिकारियों की गिरफ्तारी होगी?
यही इस मामले का सबसे बड़ा सवाल है।
फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि Dr. Saket Kumar, Vineet Garg और Mohd. Shayin की गिरफ्तारी तय है।
CBI ने इनके खिलाफ chargesheet जरूर दाखिल की है, लेकिन chargesheet और arrest दो अलग-अलग legal processes हैं।
Chargesheet का मतलब यह है कि जांच एजेंसी ने अपनी जांच के आधार पर आरोप अदालत के सामने रख दिए हैं। इसके बाद court आगे की legal proceedings तय करती है।
कुछ मामलों में सरकारी अधिकारियों के खिलाफ court proceedings आगे बढ़ाने के लिए prosecution sanction जैसी कानूनी मंजूरी भी जरूरी होती है।
इसलिए सिर्फ chargesheet दाखिल होने के आधार पर तुरंत गिरफ्तारी का दावा करना सही नहीं होगा।
₹504 करोड़ से ₹657 करोड़ तक कैसे पहुंचा मामला?
यहां एक और important बात समझना जरूरी है।
हरियाणा के अलग-अलग सरकारी departments और institutions से जुड़े मामलों में alleged amount करीब ₹504 करोड़ बताया गया है।
वहीं, Chandigarh Administration से जुड़े मामलों को भी जोड़ने पर इस broader investigation का आंकड़ा करीब ₹657 करोड़ तक पहुंचता है।
यानी यह सिर्फ एक department या एक bank account का मामला नहीं है, बल्कि कई सरकारी institutions और accounts से जुड़ी बड़ी जांच है।
Bank officials भी जांच के घेरे में
इस मामले में सिर्फ IAS officers पर ही आरोप नहीं हैं।
CBI ने कुछ bank officials को भी आरोपी बनाया है।
जांच के मुताबिक, IDFC First Bank के Shamim Ahmed Dar, Sudha Goyal और Kuldeep Singh और AU Small Finance Bank के Charanjeet Singh Randhawa का नाम भी chargesheet में शामिल है।
CBI का आरोप है कि कुछ सरकारी officials और bank officials ने मिलकर transactions को execute करने में भूमिका निभाई।
आखिर सरकारी पैसा बाहर कैसे गया?
अगर पूरे मामले को आसान भाषा में समझें, तो CBI की जांच में सामने आया alleged pattern कुछ इस तरह बताया गया है—
Government Department का पैसा
⬇️
IDFC First Bank में account
⬇️
₹50 करोड़ की तय limit से ज्यादा funds जमा
⬇️
FD बनाने या दूसरे transactions का इस्तेमाल
⬇️
कथित fraudulent entries और documents
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पैसा दूसरी entities/accounts में transfer
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Government funds का alleged diversion
यानी जांच का मुख्य सवाल यही है कि सरकारी पैसा किसकी मंजूरी से bank में पहुंचा और बाद में वह पैसा कहां गया।
कब-कब क्या हुआ?
इस मामले में अब तक की बड़ी घटनाओं को timeline से समझें।
फरवरी 2026:
मामला सामने आने के बाद हरियाणा सरकार ने IDFC First Bank और AU Small Finance Bank को government business के लिए de-empanel किया और सरकारी departments को accounts बंद करने तथा balance दूसरी जगह transfer करने के निर्देश दिए।
अप्रैल 2026:
CBI ने Haryana State Vigilance and Anti-Corruption Bureau से जांच अपने हाथ में ली।
मई 2026:
CBI ने मामले में पहली chargesheet दाखिल की।
18 जून 2026:
IAS officer Ram Kumar Singh को गिरफ्तार किया गया।
जून 2026:
IAS officer Pankaj Agarwal को भी CBI ने गिरफ्तार किया।
2 सितंबर 2026:
CBI ने तीसरी chargesheet दाखिल की, जिसमें 6 IAS officers समेत 19 लोगों को आरोपी बनाया गया।
फिलहाल मामला कहां खड़ा है?
फिलहाल इस पूरे मामले में CBI की जांच और court proceedings जारी हैं।
सबसे बड़ा अपडेट यह है कि ₹504 करोड़ के alleged Haryana government fund diversion case में अब 6 IAS officers समेत 19 लोगों के खिलाफ chargesheet दाखिल हो चुकी है।
लेकिन यह याद रखना जरूरी है कि chargesheet में नाम आना दोष साबित होना नहीं है। अंतिम फैसला अदालत की सुनवाई और उपलब्ध सबूतों के आधार पर होगा।
अब आगे court में इस मामले की सुनवाई के दौरान यह तय होगा कि CBI के आरोपों के समर्थन में कितने मजबूत सबूत हैं और सरकारी पैसों के इस पूरे alleged diversion के लिए कौन जिम्मेदार है।
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