पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर मान को लेकर इन दिनों पंजाब की सियासत में बड़ा विवाद चल रहा है। एक रेप केस को दबाने के बदले 5 करोड़ रुपये मांगने के आरोपों के बाद अब डॉ. गुरप्रीत कौर ने पहली बार खुलकर इन आरोपों पर जवाब दिया है। उन्होंने आरोपों को बेबुनियाद, मनगढ़ंत और राजनीतिक साजिश बताया है और आरोप लगाने वालों को इन्हें साबित करने की चुनौती दी है।
आखिर पूरा मामला क्या है?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस रंजीत सिंह की ओर से डॉ. गुरप्रीत कौर पर गंभीर आरोप लगाए गए। शिकायत में दावा किया गया कि एक रेप केस को दबाने या मामले में मदद करने के बदले 5 करोड़ रुपये की मांग की गई।
रिटायर्ड जस्टिस रंजीत सिंह के आरोपों के मुताबिक, एक कारोबारी के खिलाफ दर्ज मामले को खत्म करवाने में मदद करने की बात कही गई थी। उनका दावा है कि डॉ. गुरप्रीत कौर की ओर से कथित तौर पर एक करीबी रिश्तेदार के जरिए पैसे की मांग की गई। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक कोई अदालत में पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें फिलहाल आरोप के तौर पर ही देखा जा रहा है।
रंजीत सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि डॉ. गुरप्रीत कौर का एक करीबी रिश्तेदार संबंधित व्यक्ति के संपर्क में था और उस पर पैसे देने का दबाव बनाया जा रहा था। दूसरी तरफ, डॉ. गुरप्रीत कौर ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
मामला NHRC तक कैसे पहुंचा?
आरोपों के सामने आने के बाद मामला National Human Rights Commission यानी NHRC तक पहुंच गया। NHRC ने इस शिकायत का संज्ञान लेते हुए पंजाब के Chief Secretary और DGP को मामले की जांच करने के निर्देश दिए हैं।
NHRC ने दोनों अधिकारियों से दो हफ्तों के अंदर Action Taken Report यानी ATR मांगी है। आयोग ने मामले को केंद्रीय गृह मंत्रालय की Women Safety Division को भी भेजा है।
यानी फिलहाल NHRC ने किसी को दोषी नहीं ठहराया है, बल्कि सामने आए आरोपों की जांच कर रिपोर्ट मांगी है।
डॉ. गुरप्रीत कौर ने क्या कहा?
अब इस पूरे विवाद पर डॉ. गुरप्रीत कौर पहली बार कैमरे के सामने आईं। पटियाला में आयोजित राज्य स्तरीय Teej समारोह के दौरान मीडिया से बात करते हुए उन्होंने आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया।
उन्होंने कहा कि किसी के खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगाना आसान है, लेकिन वह इन आरोपों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह न पहले डरी थीं और न अब डर रही हैं।
उन्होंने आरोप लगाने वालों को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सही हैं तो उन्हें साबित किया जाए, वरना कानूनी कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहें।
Legal Notice भी भेजा गया
आरोपों के बाद डॉ. गुरप्रीत कौर की ओर से रिटायर्ड जस्टिस रंजीत सिंह को Legal Notice भी भेजा गया है।
नोटिस में कथित तौर पर उनसे अपने आरोप वापस लेने और सार्वजनिक तौर पर माफी मांगने को कहा गया है। उन्हें जवाब देने के लिए 24 घंटे का समय दिया गया और चेतावनी दी गई कि ऐसा नहीं करने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसमें Defamation यानी मानहानि से जुड़ी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।
हालांकि, इस मामले में एक और बात सामने आई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक रिटायर्ड जस्टिस रंजीत सिंह ने कहा कि उन्हें रविवार शाम तक यह Legal Notice प्राप्त नहीं हुआ था। यानी नोटिस मिलने या उसकी service को लेकर दोनों पक्षों के दावों में अंतर सामने आया है।
राजनीतिक विवाद भी बढ़ा
इस पूरे मामले ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। विपक्षी दलों ने आरोपों को गंभीर बताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
BJP, Congress और Shiromani Akali Dal से जुड़े नेताओं ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से जवाब मांगा है। BJP और कुछ अन्य विपक्षी नेताओं की ओर से मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठी है। कुछ नेताओं ने मामले में CBI जांच की मांग की है।
वहीं, AAP ने आरोपों को बेबुनियाद और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। पार्टी का कहना है कि विपक्ष के पास सरकार के कामकाज को लेकर कोई ठोस मुद्दा नहीं है, इसलिए व्यक्तिगत आरोपों के जरिए मुख्यमंत्री और उनके परिवार को निशाना बनाया जा रहा है।
AAP की ओर से यह भी कहा गया है कि डॉ. गुरप्रीत कौर ने Legal Notice भेजकर अपना पक्ष साफ कर दिया है।
अभी तक क्या साफ है?
फिलहाल इस पूरे मामले में दो अलग-अलग दावे सामने हैं। एक तरफ रिटायर्ड जस्टिस रंजीत सिंह ने 5 करोड़ रुपये मांगने और रेप केस में मदद करने के आरोप लगाए हैं। दूसरी तरफ डॉ. गुरप्रीत कौर इन आरोपों को पूरी तरह गलत बता रही हैं और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दे रही हैं।
सबसे अहम बात यह है कि 5 करोड़ रुपये मांगने का आरोप अभी साबित नहीं हुआ है। NHRC ने भी केवल मामले का संज्ञान लेते हुए पंजाब के Chief Secretary और DGP से जांच की रिपोर्ट मांगी है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि NHRC की जांच में क्या सामने आता है, रिटायर्ड जस्टिस रंजीत सिंह Legal Notice का क्या जवाब देते हैं और क्या यह मामला आगे अदालत तक पहुंचता है।
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