अमृतसर छात्रा आत्महत्या मामले के बाद एक्शन में मान सरकार, निजी स्कूल सालाना सिर्फ 5% ही बढ़ा सकेंगे फीस – Trends Topic

अमृतसर छात्रा आत्महत्या मामले के बाद एक्शन में मान सरकार, निजी स्कूल सालाना सिर्फ 5% ही बढ़ा सकेंगे फीस

अमृतसर में एक छात्रा की आत्महत्या के मामले के बाद पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी पर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने घोषणा की है कि अब राज्य के निजी स्कूल एक साल में अधिकतम 5 प्रतिशत तक ही फीस बढ़ा सकेंगे। इसके लिए आगामी विधानसभा सत्र में नया कानून लाया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अमृतसर की एक होनहार छात्रा कथित तौर पर स्कूल प्रशासन के दबाव और फीस संबंधी परेशानियों का शिकार हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा के नाम पर किसी भी तरह की मनमानी बर्दाश्त नहीं करेगी और छात्रों व अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

सीएम मान ने बताया कि जिन स्कूलों ने पहले ही 12 से 15 प्रतिशत तक फीस बढ़ा दी है, उन्हें नया कानून लागू होने के बाद अतिरिक्त वसूली गई राशि अभिभावकों को वापस करनी पड़ सकती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 24 घंटों के दौरान उन्हें कई अभिभावकों और विद्यार्थियों के फोन आए हैं। शिकायतों में बताया गया कि बकाया फीस के नाम पर छात्रों को परेशान किया जाता है, रोल नंबर जारी नहीं किए जाते और डिग्री रोकने जैसी धमकियां दी जाती हैं। सरकार ऐसे मामलों को गंभीरता से ले रही है।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने पूर्व सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वर्ष 2019 में निजी स्कूलों को फीस बढ़ाने में अधिक छूट दी गई थी। उन्होंने कहा कि पहले फीस वृद्धि की सीमा 8 प्रतिशत थी, लेकिन बाद में नियमों में बदलाव होने से कई स्कूलों ने मनमाने ढंग से फीस बढ़ाना शुरू कर दिया।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नई व्यवस्था के तहत फीस वृद्धि की अधिकतम सीमा 5 प्रतिशत तय की जाएगी। साथ ही निजी स्कूलों का हर साल ऑडिट भी कराया जाएगा, ताकि फीस संरचना और वित्तीय गतिविधियों में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

सरकार पंजाब गैर-सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थान शुल्क विनियमन अधिनियम-2026 में संशोधन करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों से भी सुझाव लिए जा रहे हैं, ताकि विद्यार्थियों और अभिभावकों के हितों की बेहतर सुरक्षा की जा सके।

सरकार का कहना है कि नए कानून का उद्देश्य शिक्षा को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और अभिभावकों के लिए आर्थिक रूप से सुलभ बनाना है।

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